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दुबई एयरपोर्ट पर खतरे की घंटी: ईरान के हमले के बीच सायरन से दहशत

दुबई पश्चिम एशिया में तनाव एक खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। हाल ही में इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में ईरान ने जवाबी कार्रवाई की, जिसकी लपटें अब दुबई तक पहुंच गई हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में दुबई के आसमान में मिसाइलें और एयरपोर्ट से धुआं उठता देखा गया। इस अप्रत्याशित घटनाक्रम ने न केवल खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और पर्यटन के प्रमुख केंद्र दुबई में भी डर का माहौल पैदा कर दिया है। दुबई एयरपोर्ट पर हमले का असर ईरान की जवाबी कार्रवाई के दौरान दुबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट (DXB) को निशाना बनाया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, एयरपोर्ट के कॉनकोर्स एरिया में मिसाइल या ड्रोन के गिरने से मामूली क्षति हुई है। घटना के तुरंत बाद वहां धुआं उठते देखा गया, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, दुबई मीडिया ऑफिस ने स्पष्ट किया है कि स्थिति को तुरंत काबू में कर लिया गया। इस हमले में चार लोग घायल हुए हैं, जिनका इलाज जारी है और सुरक्षा एजेंसियां स्थिति पर नजर रखे हुए हैं।  बुर्ज अल अरब के पास दुर्घटना दुबई के आसमान में सक्रिय डिफेंस सिस्टम ने एक संदिग्ध ड्रोन को समय रहते इंटरसेप्ट कर लिया। हालांकि, नष्ट किए गए ड्रोन का जलता हुआ मलबा विश्व प्रसिद्ध 'बुर्ज अल अरब' होटल की बाहरी दीवार पर जा गिरा। इससे होटल के एक हिस्से में हल्की आग लग गई, जिसे दमकल विभाग ने तुरंत बुझा दिया। गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई बड़ा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन शहर के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इलाकों में मलबे का गिरना सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा गया है। सुरक्षा एजेंसियां और हाई अलर्ट इस हमले के बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह हाई अलर्ट पर हैं। पूरे शहर और संवेदनशील ठिकानों के आसपास निगरानी बढ़ा दी गई है। एयरपोर्ट संचालन को जल्द से जल्द सामान्य करने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर इसका ज्यादा असर न पड़े। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें। फिलहाल, सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच हर गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।

MP सरकार फिर लेगी 5800 करोड़ का कर्ज

भोपाल. वित्तीय वर्ष के अंतिम दौर में मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर तीन किस्तों में 5,800 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। यह भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से लिया जाएगा। होली के पहले सरकार ने 6,300 करोड़़ रुपये का कर्ज लिया था। इस प्रकार देखा जाए तो प्रदेश के ऊपर 5,66,000 करोड़ रुपए के करीब कर्ज हो जाएगा। वित्त विभाग के अधिकारियों के अनुसार 10 मार्च यानी मंगलवार को तीन किस्तों में 1,900, 1,700 और 2,200 करोड़ रुपए का कर्ज लिया जाएगा। यह राशि विकास परियोजना और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए ली जा रही है। इसका उपयोग पूंजीगत कार्यों यानी अधोसंरचना विकास के कामों में ही किया जाएगा। इसके पहले 6300 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था। नए कर्ज को मिला लिया जाए तो वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल मिलाकर कर्ज की राशि 85,000 करोड़ रुपये हो जाएगी। जीतू पटवारी ने लगाया प्रदेश को कर्ज में डुबोने का आरोप प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर प्रदेश को कर्ज में डुबोने के आरोप लगाए हैं। वहीं, सरकार स्पष्ट कर चुकी है कि जो कर्ज लिया जा रहा है वह राजकोषीय उत्तरदायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम के प्रविधान के अनुसार है।

देश में गैस संकट: LPG की कमी के बीच सरकार ने लगाया एस्मा, प्राथमिकता सूची जारी

 नई दिल्ली देश में एलपीजी सिलेंडरों की सप्लाई में कमी आ गई है। ईरान में चल रही जंग के चलते ऐसी स्थिति पैदा हुई है। इससे निपटने के लिए मंगलवार को सरकार ने एस्मा लागू कर दिया। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि घरेलू गैस सिलेंडरों की कमी ना रहे। इसके अलावा रिफाइनरीज को केंद्र सरकार ने आदेश दिया है कि वे एलपीजी का उत्पादन बढ़ा दें। इसके अलावा कॉर्मशियल सिलेंडरों की बजाय घरेलू गैस सिलेंडरों की सप्लाई में इजाफा किया जाए। सरकार ने अपने आदेश में बताया है कि किन सेक्टरों को 100 फीसदी सप्लाई जारी रहेगी और उसमें किसी तरह की कमी नहीं आने दी जाएगी। आदेश के अनुसार सरकार ने कुछ सेक्टरों को प्राथमिकता में रखने को कहा है। इन्हें 100 फीसदी सप्लाई जारी रहेगी और किसी भी तरह की कटौती नहीं की जाएगी। इन सेक्टरों में पीएनजी, सीएनजी, एलपीजी और अन्य पाइपलाइन सेवाएं शामिल हैं। आदेश में कहा गया है कि फर्टिलाइजर प्लांट्स को उनको होती रही सप्लाई का 70 फीसदी हिस्सा दिया जाए। इसके अलावा चाय उद्योग, मैन्युफैक्चरिंग और अन्य औद्योगिक संस्थानों को भी उनके कोटे की 80 फीसदी तक सप्लाई जारी रखने का आदेश दिया गया है। गैस डिस्ट्रिब्यूशन करने वाली कंपनियों से कहा गया है कि वे कॉमर्शियल और इंडस्ट्रियल जरूरतों के लिए 80 फीसदी तक गैस सप्लाई जारी रखें। इसके अलावा आदेश दिया गया है कि रिफाइनिंग कंपनियां उत्पादन में तेजी लाएं। इसके अलावा एलपीजी की सप्लाई घरेलू सिलेंडरों के इस्तेमाल के लिए पहले की तरह जारी रखने को कहा गया है। सरकार का कहना है कि इस आदेश को सख्ती से लागू किया जाए। उत्पादन से लेकर ट्रांसपोर्ट तक में किसी तरह की कमी नहीं आनी चाहिए। घरेलू गैस सिलेंडरों की बुकिंग पर रहेगा 25 दिन वाला नियम यही नहीं गैस सिलेंडरों की बुकिंग के लिए सरकार ने 25 दिन की तय सीमा भी लागू कर दी है। इसके तहत यदि आपने एक सिलेंडर ले लिया है तो अगले की बुकिंग 25 दिन के बाद ही कर पाएंगे। कुछ अरसे से ऐसी सीमा खत्म हो गई थी, लेकिन इसे लागू कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि कुछ लोग जमाखोरी ना करने लगें। यदि लोगों को ऐसा करने दिया गया तो कालाबाजारी बढ़ सकती है। इसके अलावा अफवाह फैलने के चलते लोग परेशान हो सकते हैं। गौरतलब है कि ईरान में जारी जंग के चलते सप्लाई की कमी देखी जा रही है। हालांकि अमेरिका का कहना है कि अब ईरान में जंग आखिरी चरण में है। ऐसी स्थिति में माना जा रहा है कि जल्दी ही सप्लाई चेन पहले वाली स्थिति में आ सकती है।  

वैक्सीन साइड इफेक्ट्स पर पीड़ितों को मिले मुआवजा, सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को दिया निर्देश

नई दिल्ली मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया था कि कोविड 19 वैक्सीन के बाद हुए कथित दुष्प्रभावों के चलते मृतकों के परिवार को मुआवजा दिया जाए। Covid 19 वैक्सीन के दुष्परिणामों के कारण कथित मौतों के मामले में याचिका सुनवाई हुई। याचिका के जरिए मृतकों के लिए मुआवजे की मांग की गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने टीकाकरण के बाद दुष्प्रभावों की जांच के लिए एक्सपर्ट पैनल के गठन से इनकार कर दिया है। साथ ही शीर्ष न्यायालय ने सरकार को मुआवजा नीति बनाने और टीकाकरण के दुष्प्रभावों से जुड़े आंकड़े समय-समय पर सार्वजनिक करने के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया था कि कोविड 19 वैक्सीन के बाद हुए कथित दुष्प्रभावों के चलते मृतकों के परिवार को मुआवजा दिया जाए। अब अदालत ने इन याचिकाओं का निपटारा किया और कहा है कि टीकाकरण के बाद होने वाले दुष्प्रभावों की निगरानी के लिए मौजूद व्यवस्था जारी रहेगी। कोर्ट का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था को देखते हुए टीकाकरण के बाद दुष्प्रभावों की जांच के लिए कोर्ट की तरफ से अलग समिति बनाने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने यह भी साफ किया है कि इस फैसले का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति कानून का सहारा नहीं ले सकता है। कोर्ट ने कहा कि मुआवजा नीति बनाने का मतलब यह नहीं माना जाएगा कि भारत सरकार या किसी अन्य अथॉरिटी ने अपनी गलती या कानूनी जिम्मेदारी स्वीकार कर ली है। सरकार को दिए निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि कोविड 19 वैक्सीन लगवाने के बाद गंभीर दुष्परिणामों के लिए मुआवजा नीति बनाई जाए। साथ ही कहा कि दुष्परिणामों के मामलों को देखने के लिए मौजूदा व्यवस्था ही जारी रहेगी। साथ ही समय समय पर इससे जुड़ा जरूरी डेटा सार्वजनिक किया जा सकता है। याचिका दरअसल, यह याचिका कोविड वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स के चलते जान गंवाने वाली दो लड़कियों के पैरेंट्स की तरफ से दाखिल की थी। याचिका में कहा गया था कि मौतों के मामलों की स्वतंत्र जांच के लिए एक स्वतंत्र समिति का गठन किया जाए। साथ ही ऑटोप्सी और जांच की रिपोर्ट्स को जारी किया जाए। याचिका में कहा गया था कि बच्चियों के माता-पिता को आर्थिक मुआवजा दिया जाए।  

धार भोजशाला विवाद में 2189 पेज की रिपोर्ट MP हाईकोर्ट में दाखिल

धार. धार की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने 98 दिनों तक चले वैज्ञानिक सर्वे के बाद 2189 पेज की विस्तृत रिपोर्ट मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ में प्रस्तुत कर दी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद दोनों पक्षों में हलचल तेज हो गई है और अब 16 मार्च को होने वाली सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। भोजशाला परिसर में एएसआई की ओर से लगभग तीन महीने तक वैज्ञानिक पद्धति से सर्वेक्षण किया गया। इस दौरान परिसर के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद संरचनात्मक अवशेषों, पत्थरों पर उकेरी गई आकृतियों, स्तंभों और स्थापत्य शैली का विस्तृत अध्ययन किया गया। सर्वे के दौरान मिले अवशेषों का वैज्ञानिक परीक्षण कर उन्हें दस्तावेजी रूप से रिपोर्ट में शामिल किया गया। अदालत ने अध्ययन के लिए दिया समय मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने दोनों पक्षों को रिपोर्ट का अध्ययन करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। अब निर्धारित तिथि 16 मार्च को होने वाली सुनवाई में दोनों पक्ष अदालत के सामने अपने-अपने तर्क और आपत्तियां पेश करेंगे। इस कारण भोजशाला विवाद से जुड़े इस मामले की अगली सुनवाई को लेकर धार सहित पूरे प्रदेश में विशेष रुचि बनी हुई है। रिपोर्ट में स्थापत्य अवशेषों का उल्लेख सूत्रों के अनुसार एएसआई की रिपोर्ट में परिसर के भीतर मंदिर से जुड़े स्थापत्य अवशेषों और संरचनात्मक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है। सर्वे के दौरान पत्थरों पर उत्कीर्ण आकृतियां, प्राचीन स्तंभ, नक्काशीदार हिस्से और अन्य अवशेषों का वैज्ञानिक परीक्षण किया गया। इन सभी तथ्यों को एएसआई ने विस्तृत रूप से दस्तावेजी रूप में अदालत के सामने प्रस्तुत किया है। दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया रिपोर्ट सामने आने के बाद मंदिर पक्ष में उत्साह का माहौल देखा जा रहा है। मंदिर पक्ष के याचिकाकर्ता आशीष गोयल का कहना है कि सर्वे रिपोर्ट में मिले साक्ष्य स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि भोजशाला परिसर में पहले मंदिर था और बाद में उसे तोड़कर मस्जिद का निर्माण किया गया। उनके अनुसार एएसआई की रिपोर्ट से मंदिर पक्ष के दावों को मजबूती मिली है। वहीं दूसरी ओर कमाल मौलाना वेलफेयर सोसायटी के सदर अब्दुल समद ने कहा कि वे एएसआई की रिपोर्ट का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 16 मार्च को होने वाली सुनवाई में रिपोर्ट के विभिन्न पहलुओं पर अपनी आपत्तियां और तर्क अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे।

तेजस MK-2 बनेगा भारत का ‘मिनी राफेल’… बंकर फाड़ने वाली मिसाइलों से दुश्मनों में खौफ

नई दिल्ली भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को पानी पिलाने वाले राफेल लड़ाकू विमान जैसा ही तेजस MK-2 को बनाने का प्लान किया है। भारत के स्वदेशी और अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान तेजस एमके-2 को हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) बना रहा है, जिसने तेजस एमके-2 को और उन्नत ओर ताकतवर बनाने का फैसला किया है। इसमें SCALP‑EG और Crystal Maze जैसी मिसाइलें लगाई जाएंगी। HAL के तेजस फैमिली के सबसे ताकतवर एडवांस संस्करण के रूप में डिजाइन किया गया यह विमान आने वाले दशक में भारतीय वायु सेना की रीढ़ बनने की उम्मीद है। दुश्मन के भीतरी इलाकों तक सटीक मार करेगा तेजस एमके-2     मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जैसे-जैसे भारत अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता का विस्तार कर रहा है, तेजस एमके2 को एडवांस स्टैंडऑफ मिसाइलों को एकीकृत करने के लिए पहले से ही लैस किया जा रहा है।     इसका मकसद यह है कि भारी सुरक्षा वाले हवाई क्षेत्र से बाहर रहते हुए दुश्मन के क्षेत्र में गहराई तक स्थित रणनीतिक लक्ष्यों को भेदने में तेजस एमके-2 सक्षम होगा। इससे वायुसेना की सटीक मारक क्षमता भी बढ़ेगी। तेजस MK-2 वायुसेना के MK-1 से ज्यादा ताकतवर     रिपोर्टों के अनुसार, तेजस एमके-2 को एक मध्यम-वजन बहु-भूमिका लड़ाकू विमान के रूप में परिकल्पित किया गया है, जो वर्तमान में सेवा में मौजूद एचएएल तेजस एमके-1 संस्करणों की तुलना में बड़ा और कहीं अधिक ताकतवर है।     इस विमान का विकास वैमानिकी विकास एजेंसी द्वारा किया जा रहा है और इसका निर्माण हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा किया जा रहा है। तेजस MK-2 की ये हैं खूबियां, जो बनाती हैं मारक     तेजस MK-2 का बड़ा एयरफ्रेम होगा।     तेजस MK-2 में अधिक पेलोड क्षमता होगी।     बेहतर एवियोनिक्स और सेंसर से लैस होगा।     इसकी दुश्मन के इलाके में अधिक युद्धक रेंज होगी।     GE F414-GE-INS6 टर्बोफैन इंजन से शक्ति मिलेगी।     Mk1 सीरीज में इस्तेमाल इंजन की तुलना में अधिक थ्रस्ट देता है।     लंबी दूरी के मिशनों के दौरान भारी हथियार भी ले जा सकेगा। लंबी दूरी की मारक मिसाइलों से लैस होगा तेजस एमके-2     तेजस Mk2 के लिए नियोजित सबसे महत्वपूर्ण अपग्रेड में से एक लंबी दूरी की सटीक मारक हथियारों का एकीकरण है। इसमें सबसे पहले SCALP-EG क्रूज मिसाइल और इजरायली मूल की क्रिस्टल मेज मिसाइलें लगाई जाएंगी।     ये दोनों हथियार पहले से ही भारतीय वायु सेना के हथियार भंडार का हिस्सा हैं और वर्तमान में डसॉल्ट राफेल और उन्नत डसॉल्ट मिराज 2000 लड़ाकू विमानों जैसे विमानों पर तैनात हैं। SCALP-EG क्रूज मिसाइल की खूबी जान लीजिए     SCALP-EG एक लंबी दूरी की वायु-प्रवेशित क्रूज मिसाइल है जिसे अत्यधिक सुरक्षित लक्ष्यों पर सटीक हमले करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह बंकरों और सैन्य ठिकानों पर तेजी से वार करती है।     यह रडार से बचते हुए कम ऊंचाई पर चुपके से उड़ान भरने में सक्षम है। ऊंचाई वाले लक्ष्यों के लिए सटीक मार्गदर्शन प्रणाली से लैस होगी। सैकड़ों किलोमीटर दूर के लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता है। यह दुश्मन की सीमा में जाए बिना ही टारगेट्स तबाह कर सकती है। क्रिस्टल मेज से कोई बच नहीं सकता है क्रिस्टल मेज मिसाइल वायु से सतह तक सटीक मारक हथियार के रूप में भी जाना जाता है। यह दुश्मन के रडार स्टेशनों, कमांड केंद्रों और वायु रक्षा प्रतिष्ठानों जैसे ज्यादा अहम टारगेट्स पर हमला करने के लिए डिजाइन की गई है। इसकी मारक क्षमता करीब 250 किमी तक है। इन चीजों से भी लैस होंगे तेजस विमान एस्ट्रा एमके-1 बियॉन्ड-विजुअल-रेंज मिसाइल, एस्ट्रा एमके-2 एक्सटेंडेड-रेंज बीवीआर मिसाइल और एस्ट्रा एमके-3 का भविष्य में एकीकरण। निकटवर्ती हवाई लड़ाइयों के लिए लड़ाकू विमान इन्फ्रारेड-गाइडेड एएसराम मिसाइल ले जाएगा, जिसका उपयोग भारतीय वायु सेना पहले से ही तेजस एमके1ए सहित कई प्लेटफार्मों पर कर रही है।

ऑनलाइन बुकिंग के बिना नहीं मिलेगा गैस सिलेंडर

फरीदकोट. मध्य पूर्व में बढ़ रहे ईरान–इजराइल तनाव का असर अब भारत में एलपीजी गैस सप्लाई पर भी दिखाई देने लगा है। भारत सरकार द्वारा जारी नई हिदायतों के अनुसार. अब उपभोक्ताओं को एलपीजी गैस सिलेंडर केवल ऑनलाइन बुकिंग के बाद ही मिलेगा। उल्लेखनीय है कि नई प्रक्रिया के मुताबिक,अब सिलेंडर की डिलीवरी बुकिंग के बाद मिलने वाले डीएसी कोड के आधार पर ही की जाएगी। इसका उद्देश्य सप्लाई प्रणाली को पारदर्शी बनाना और गलत इस्तेमाल को रोकना बताया जा रहा है। दूसरी ओर कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई को लेकर भी दिक्कतें आने की संभावना जताई जा रही है। कमर्शिल सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित गैस एजेंसी संचालकों के अनुसार फिलहाल 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई प्रभावित हो रही है। फरीदकोट की गैस एजेंसियों के संचालकों ने बताया कि सरकार के निर्देशों के अनुसार अब हर उपभोक्ता को सिलेंडर लेने के लिए पहले ऑनलाइन बुकिंग करनी होगी और डिलीवरी के समय मिलने वाला डीएसी कोड दिखाना जरूरी होगा। गैस एजेंसी संचालक संजीव जैन ने बताया कि पिछले दो-तीन दिनों से 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि जब सप्लाई फिर से शुरू होगी तभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे अपनी ई-केवाइसी जल्द से जल्द करवा लें, ताकि भविष्य में सिलेंडर लेने के समय किसी तरह की परेशानी न हो। फिलहाल घरेलू गैस सिलेंडरों की कोई बड़ी कमी नहीं है और बुकिंग के बाद एक से दो दिनों के भीतर सप्लाई दी जा रही है। हालांकि आने वाले दिनों में सरकार सप्लाई को लेकर कोई कोटा भी तय कर सकती है।

लाडली बहनों को फिर सौगात: जल्द खातों में ट्रांसफर होंगे 1500 रुपए

ग्वालियर  मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी लाडली बहना योजना की पात्र महिलाओं के लिए बड़ी खबर है। लाडली बहना योजना की 34वीं किस्त जल्द ही जारी होने वाली है। इस बार प्रदेश की करीब 1.28 करोड़ महिलाओं के खातों में सीधे 1500-1500 रुपए की राशि भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री Mohan Yadav सिंगल क्लिक के माध्यम से यह राशि पात्र महिलाओं के खातों में ट्रांसफर करेंगे। 1.28 करोड़ को मिलेगा योजना का लाभ वर्तमान में 1.28 करोड़़ लाडली बहनें इस योजना (Ladli Behna Yojana) का लाभ ले रही हैं। इन महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1500-1500 रुपए की राशि ट्रांसफर की जाती है। इस सरकारी आंकड़े के मुताबिक मार्च महीने में आने वाली लाडली बहना योजना की 34वीं किस्त के कुल 1920 रुपए मोहन सरकार पात्र महिलाओं के खातों में ट्रांसफर करेगी। यह पैसा सीधे DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से महिलाओं के बैंक में पहुंचाया जाएगा। प्रदेश की बीजेपी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बता दें कि लाडली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) प्रदेश की बीजेपी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। जो प्रदेश की राजनीति में एक बड़ी गेम चेंजर योजना साबित हुई है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर करना है। शुरुआत में इस योजना की पात्र महिलाओं को 1000 रुपए की राशि दी जाती थी। जिसे बढ़ाकर पहले 1250 रुपए किया गया और अब यह राशि 1500 तक बढ़ाई जा चुकी है। सरकार का दावा, महिलाएं हुईं आत्मनिर्भर, मिला सम्मान मध्य प्रदेश की मोहन सरकार का दावा है कि इस योजना का शुरू होने से प्रदेश की करोड़ों महिलाओं को बड़ा सहारा मिला है। वे न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनी हैं, परिवार में उनके आर्थिक योगदान से उनका सम्मान बढ़ा है और वे अब निर्णायक भूमिका में आ गई हैं। घर खर्च के साथ ही वे बच्चों की पढ़ाई और अपनी छोटी-मोटी जरूरतें खुद पूरी कर रही हैं।

नया नोएडा बनेगा मेट्रोपॉलिस: उद्योग और आबादी की बड़ी योजना का खुलासा

नोएडा उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर और बुलंदशहर के बीच बसने वाला 'नया नोएडा' (Naya Noida Master Plan 2041) (दादरी-नोएडा-गाजियाबाद विशेष निवेश क्षेत्र – DNGIR) भविष्य का सबसे आधुनिक औद्योगिक शहर बनने जा रहा है। इसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। औद्योगिक हब… 3 हजार फैक्ट्रियां और 21 हजार हेक्टेयर क्षेत्र नया नोएडा करीब 21,000 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में फैला होगा। मास्टर प्लान 2041 के अनुसार, इसका सबसे बड़ा हिस्सा यानी 8,811 हेक्टेयर क्षेत्र केवल उद्योगों के लिए आरक्षित किया गया है। यहां लगभग 3,000 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां लगाई जाएंगी, जिससे यह क्षेत्र निवेश का ग्लोबल हब बनेगा।  इस नए शहर की अनुमानित आबादी करीब 6 लाख होगी। खास बात यह है कि इसमें से 3.5 लाख लोग माइग्रेंट (प्रवासी) होंगे, जो यहाँ के उद्योगों में काम करने के लिए आएंगे। आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए 2,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन का उपयोग किया जाएगा। ईडब्ल्यूएस से लेकर एचआईजी फ्लैट्स तक यहां हर आय वर्ग के लिए घर उपलब्ध होंगे। मास्टर प्लान में चार कैटेगरी और तीन टाइप के मकानों का प्रस्ताव है…     EWS (आर्थिक रूप से कमजोर): 18.1 हेक्टेयर क्षेत्र।     LIG (निम्न आय वर्ग): 40.8 हेक्टेयर क्षेत्र।     MIG (मध्यम आय वर्ग): 29.9 हेक्टेयर क्षेत्र।     HIG (उच्च आय वर्ग): 1.8 हेक्टेयर क्षेत्र। पानी और पर्यावरण: गंगाजल और झीलों का संगम शहर की प्यास बुझाने के लिए 300 MLD पानी की व्यवस्था की जाएगी, जिसमें गंगाजल और भूजल का मिश्रण होगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए मास्टर प्लान में खास प्रावधान हैं…     झीलों और नहरों का निर्माण: 58.96 हेक्टेयर में लेक और 91.75 हेक्टेयर में कैनाल बनाई जाएंगी।     जल संचयन: गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए वेटलैंड विकसित किए जाएंगे।     वाटर सप्लाई: कुल पानी में से 212 MLD उद्योगों को और 85 MLD घरेलू उपयोग के लिए दिया जाएगा। 80 गांवों की जमीन पर 'लैंड पूल' मॉडल नया नोएडा को बुलंदशहर और दादरी के 80 गांवों की जमीन पर बसाया जा रहा है। यहां जमीन का अधिग्रहण 'लैंड पूलिंग' नीति के जरिए किया जाएगा, जिससे किसानों को भी शहर के विकास में भागीदार बनाया जा सके।

मध्य प्रदेश अधिवक्ता परिषद चुनाव: 12 मई को मतदान, 16 जून से गिनती; 87 हजार वकील तय करेंगे नई टीम

इंदौर राज्य अधिवक्ता परिषद के पांच साल में एक बार होने वाले चुनाव के लिए अधिसूचना जारी कर दी गई है। इसके अनुसार पूरे प्रदेश में 12 मई 2026 को एक साथ मतदान कराया जाएगा, जबकि मतगणना 16 जून 2026 से शुरू होगी। कार्यकारिणी सदस्य के कुल 25 पदों में से इस बार सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें से पांच पदों पर चुनाव होगा, जबकि दो पदों पर मनोनयन किया जाएगा। इस चुनाव में प्रदेशभर के लगभग 87 हजार वकील हिस्सा लेंगे। राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव के लिए प्रारंभिक मतदाता सूची 16 मार्च 2026 को जारी की जाएगी। इस सूची को लेकर 24 मार्च 2026 तक दावे और आपत्तियां प्रस्तुत की जा सकेंगी। इसके बाद एक अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी होगी। मतदान का अधिकार केवल उन्हीं वकीलों को मिलेगा, जिन्होंने निर्धारित प्रावधानों के अनुसार अपना सत्यापन करा लिया है।   नामांकन के लिए तीन दिन का समय प्रत्याशियों को नामांकन फार्म जमा करने के लिए तीन दिन का समय मिलेगा। आठ, नौ और दस अप्रैल को नामांकन फार्म जमा किए जा सकेंगे। 15 और 16 अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच की जाएगी। वहीं 20 से 22 अप्रैल शाम चार बजे तक नाम वापस लिया जा सकेगा। 22 अप्रैल 2026 को शाम पांच बजे प्रत्याशियों की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। दो महीने से अधिक चलती है मतगणना मतदान के बाद सभी मतपेटियों को सीलबंद कर जबलपुर भेजा जाएगा। वहां 16 जून 2026 से मतगणना शुरू होगी। आमतौर पर राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव की मतगणना लगभग दो महीने तक चलती है। महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ेगी इस बार राज्य अधिवक्ता परिषद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ना तय है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 25 में से सात पद महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए हैं। पिछली कार्यकारिणी में 25 सदस्यों में से केवल एक महिला थी, लेकिन इस बार यह संख्या सात तक पहुंच जाएगी। प्रत्याशियों के लिए चुनौतीपूर्ण होगा चुनाव पिछले चुनाव की तुलना में इस बार चुनाव अधिक चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। इसका कारण यह है कि पुरुष प्रत्याशियों के लिए 25 के बजाय सिर्फ 18 पद ही उपलब्ध होंगे। अनुमान के अनुसार प्रथम वरीयता के लगभग 2500 मत पाने वाले प्रत्याशी खुद को सुरक्षित स्थिति में मान सकते हैं। इंदौर से 30 से ज्यादा संभावित प्रत्याशी नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से पहले ही संभावित प्रत्याशियों ने प्रचार शुरू कर दिया है। इंटरनेट मीडिया के साथ-साथ प्रत्यक्ष संपर्क के माध्यम से भी प्रचार किया जा रहा है। प्रत्याशी वकीलों के कार्यालयों और घरों तक पहुंचकर प्रथम वरीयता का मत देने की अपील कर रहे हैं। इस बार राज्य अधिवक्ता परिषद के चुनाव में अकेले इंदौर से 30 से अधिक प्रत्याशियों के मैदान में उतरने की तैयारी है, जिनमें वर्तमान कार्यकारिणी के पांच सदस्य भी शामिल हैं।