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Tejas vs F-35: ऑपरेशन सिंदूर में तेजस की शक्ति, PL-15 मिसाइल का क्षण भर में निष्क्रिय होना

नई दिल्ली बीते साल ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पाकिस्तान को एक से बढ़कर एक गहरे जख्म दिए थे. लेकिन, 72 घंटे तक चली इस जंग में भारत को भी काफी कुछ सीखने को मिला था. भारत को अपनी कमी को परखने का मौका मिला था. इस जंग में पाकिस्तान ने जिस तरह से भारत के खिलाफ चीनी हथियारों का इस्तेमाल किया, उससे चिंता बढ़नी लाजिमी है. उसने चीनी हथियारों से भारत के सैन्य ठिकानों पर हमले की कोशिश की. हालांकि भारत के बेहद मजबूत सुरक्षा घेरे ने इन तमाम हथियारों को आसमान में ही तबाह कर दिया था. इस जंग से भारत ने बड़ी सीख ली. सबसे बड़ी सीख यह थी कि भविष्य में पाकिस्तान और चीन को अलग-अलग कर नहीं देखा जाना चाहिए. इस वक्त पाकिस्तान चीन का पूरी तरह पिछलग्गू देश बन चुका है. चीन के लिए भी पाकिस्तान एक बड़ा बाजार बनकर उभरा है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ने भारतीय इलाके पर चीनी बीवीआर मिसाइलें पीएल-15 का इस्तेमाल किया था. भारतीय क्षेत्र में इस मिसाइल के मलबे मिले थे. पीएल-15 बेहद आधुनिक बीवीआर मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज करीब 250 किमी है. इन मिसाइलों को फाइटर जेट्स से दागा जाता है और ये नजर आने से पहले ही लक्ष्य को भेद देती है. सैन्य एक्सपर्ट मानते हैं कि पाकिस्तान ने चीनी के 4.5 जेन के फाइटर जेट जे-17 से इनको फायर किया होगा. भारत की बीवीआर मिसाइलें खैर, अब इस बात को नहीं विराम देते हैं. दरअसल, आज की कहानी इसी पीएल-15 मिसाइलों से जुड़ी हैं. भारत के पास पीएल-15 के मुकाबले के लिए देसी अस्त्र मार्क-1 मिसाइलें हैं. ये बीवीआर श्रेणी की शानदार मिसाइलें हैं लेकिन, मौजूदा वक्त में इनकी रेंज थोड़ी कम है. अस्त्र मार्क-1 की रेंज करीब 160 किमी है. इसके साथ ही डीआरडीओ इसको एईएसए रडार और डूअल पल्स मोटर टेक्नोलॉजी से लैस कर रहा है. साथ ही भारत अस्त्र मार्क-2 पर भी काम कर रहा है. इसके अलावा अस्त्र मार्क-3 पर भी काम चल रहा है. लेकिन, पीएम-15 के मुकाबले अभी भी ये तकनीकी रूप से थोड़ा पीछे हैं. भारत फ्रांस से खरीदे गए राफेल विमानों में मेटियोर मिसाइलों का इस्तेमाल करता है. ये भी बीवीआर मिसाइलें हैं. इनमें रैमजेट इंजल लगे होते हैं, जिससे ये मिसाइले बेहद हाईस्पीड से वार करती हैं. बावजूद इसके चीन के पीएल-15 और उसके भविष्य के और एडवांस वैरिएंट को तकनीकी रूप से थोड़ी बढ़त हासिल है. ऐसे में भारत अपने पुराने और भरोसेमंद दोस्त रूस के साथ भी आर-37एम बीवीआर मिसाइलों को लेकर बातचीत कर रहा है. ये मिसाइलें 300 किमी तक मार कर सकती हैं. ये वार-टेस्टेड मिसाइलें हैं और ये हर एक मामले में चीनी पीएल-15 और उसके एडवांस वर्जन पीएल-17 को टक्कर देने में सक्षम हैं. तेजस भारत द्वारा निर्मित एक बेहद हल्का 4.5 जेन फाइटर जेट है. इजरायली स्काई स्टिंग मिसाइलें लेकिन, इतना सब होने के बावजूद भारत किसी एक पर निर्भर नहीं रहना चाहता. भारत के पास अपना देसी बीवीआर अस्त्र सीरीज की मिसाइलें हैं. उसके पास राफेल के लिए मेटियोर मिसाइलें है. रूसी आर-37एम को लेकर बातचीत चल रही है. लेकिन, वह एक और सिस्टम की तलाश में है जो और भी एडवांस हो. यह तलाश इजरायली बीवीआर मिसाइल के साथ पूरी होती है. इजरायल के ये बीवीआर मिसाइलें एआई इनेबल्ड हैं. यह 6th जेन की मिसाइलें हैं. यानी दुनिया में अभी इसके टक्कर की बीवीआर मिसाइलें नहीं हैं. ये बेहद हल्क और लंबी दूरी तक वार करने में सक्षम हैं. भारत इन मिसाइलों को अपने देसी हल्के तेजस फाइटर जेट्स में लगाना चाहता है. इसका नाम स्काई स्टिंग है. इसको इजरायल की सरकारी कंपनी राफेल एडवांस डिफेंस सिस्टम्स (Rafael Advanced Defense Systems) डेवलप कर रही है. अगर यह यह डील हो जाती है तो भारत के हल्के तेजस विमान भी बेहद घातक बन जाएंगे. राफेल एडवांस सिस्टम ने इस स्काई स्टिंग को कुछ इस तरह से डिजाइन किया है जिससे कि वह किसी भी पश्चिमी फाइटर जेट्स के साथ आसानी से लिंक किया जा सके. इसमें अमेरिका की सबसे एडवांस फिफ्थ जेन फाइटर जेट एफ-35 भी शामिल है. हालांकि एफ-35 में इस मिसाइल को इंटीग्रेट करने के लिए जेट की निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन से अनुमति लेनी होगी. फिलहाल के लिए इसको भारतीय फाइटर जेट तेजस और सुखोई के साथ इंटीग्रेट करने की बाचतीच चल रही है.

धार भोजशाला परिसर में दरगाह निर्माण पर बहस, मंदिर के हिस्सों के उपयोग की चर्चा तेज

धार  भोजशाला को लेकर एएसआई ने कोर्ट में दो हजार पेज की रिपोर्ट पेश की है। इस रिपोर्ट में खुदाई के दौरान मिली मूर्तियों, सिक्कों और अन्य अवशेषों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार परमारकालीन भवन की नींव के पत्थरों पर बाद में निर्माण किया गया। सर्वे में पाए गए स्तंभों और उनकी वास्तुकला के आधार पर कहा गया है कि ये स्तंभ मूल रूप से मंदिर का हिस्सा थे, जिन्हें बाद में मस्जिद निर्माण के दौरान फिर से उपयोग में लिया गया। रिपोर्ट के अनुसार चारों दिशाओं में खड़े 106 तथा आड़े 82, इस प्रकार कुल 188 स्तंभ मिले हैं। इन सभी की वास्तुकला से यह संकेत मिलता है कि वे मूल रूप से मंदिरों का हिस्सा थे। स्तंभों पर उकेरी गई देवताओं और मनुष्यों की आकृतियों को औजारों से खंडित किया गया है। याचिकाकर्ता आशीष गोयल का कहना है कि रिपोर्ट में कई ऐसे तथ्य हैं जो दर्शाते हैं कि मंदिर के हिस्सों का उपयोग दरगाह निर्माण में किया गया।  भोजशाला की दीवारों पर देवताओं की आकृतियां भी मिली हैं। सर्वे में पूर्व में परिसर से निकालकर मांडू के संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई मूर्तियों को भी शामिल किया गया है। इन्हें संरक्षण की दृष्टि से वहां रखा गया था। खुदाई में प्राप्त कलाकृतियां संगमरमर, नरम पत्थर, बलुआ पत्थर और चूना पत्थर से निर्मित हैं।   इन कलाकृतियों में गणेश, नृसिंह, भैरव, अन्य देवी-देवताओं तथा पशु आकृतियों के चिह्न पाए गए हैं। सर्वे में दो ऐसे स्तंभ भी मिले हैं जिन पर ‘ऊँ सरस्वतै नमः’ अंकित है। रिपोर्ट के पृष्ठ संख्या 148 पर उल्लेख है कि भोजशाला में मौजूद स्तंभों की वास्तुकला यह दर्शाती है कि वे पहले मंदिर का हिस्सा थे और मस्जिद निर्माण के दौरान उन्हें बेसाल्ट के ऊंचे चबूतरों पर फिर से स्थापित किया गया। इस हिस्से में एक स्तंभ पर देवी-देवता की छवि भी है।   सर्वे रिपोर्ट के अनुसार पूर्वी भाग में स्तंभों की कतार में लगे एक बड़े शिलालेख में प्राकृत भाषा में दो कविताएं अंकित हैं, जिनमें प्रत्येक में 109 छंद हैं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पश्चिम दिशा में स्थित मेहराब की दीवारें बेसाल्ट से बने चबूतरे से सटी हुई हैं, जिसके नीचे नक्काशी मौजूद है। चबूतरे और मेहराब की दीवारों की निर्माण शैली अलग-अलग बताई गई है। यह पहली बार नहीं है जब भोजशाला का सर्वे हुआ है। अंग्रेज शासन काल में भी इसका सर्वे किया गया था। इसके अतिरिक्त वर्ष 1987 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा किए गए उत्खनन में भोजशाला से हिंदू धर्म से संबंधित 32 मूर्तियां प्राप्त हुई थीं। रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया है कि कमाल मौलाना दरगाह के निर्माण में पहले से मौजूद मंदिर के हिस्सों का उपयोग किया गया था। 

अतिथि शिक्षकों पर सरकार का यू-टर्न, खत्म हुआ सेवा समाप्ति का फैसला

भोपाल प्रदेश के करीब 70 हजार अतिथि शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। सात दिन तक लगातार अनुपस्थित रहने पर उनकी सेवाएं एजुकेशन पोर्टल 3.0 से हटाने संबंधी आदेश को स्कूल शिक्षा विभाग ने निरस्त कर दिया है। अतिथि शिक्षकों के विरोध के बाद लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने 20 फरवरी को जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से वापस ले लिया है। डीपीआई संचालक ने जारी किए नए निर्देश डीपीआई के संचालक केके द्विवेदी द्वारा गुरुवार को जारी निर्देश में सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, हायर सेकेंडरी एवं हाई स्कूलों के संकुल प्राचार्यों और शाला प्रभारियों को स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में जारी आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है। साथ ही बताया गया है कि एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर आवश्यक तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध कराने के बाद इस संबंध में अलग से नए निर्देश जारी किए जाएंगे। अव्यवहारिक आदेश का हुआ था विरोध बता दें कि 20 फरवरी को जारी आदेश में यह निर्देशित किया गया था कि यदि कोई अतिथि शिक्षक सात दिन तक लगातार अनुपस्थित रहता है तो उसकी सेवाएं पोर्टल से हटा दी जाएंगी। इस निर्णय का प्रदेशभर के अतिथि शिक्षकों ने विरोध किया था और इसे अव्यवहारिक बताया था। मंत्री का बयान और समिति की प्रतिक्रिया स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने बीते बुधवार को विधानसभा में मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि अतिथि शिक्षकों के अवकाश के लिए निर्धारित नियम और शर्तें तय हैं। यदि कोई शिक्षक तय अवधि से अधिक समय तक अनुपस्थित रहता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, इस आदेश के बाद फिलहाल अतिथि शिक्षकों पर लटकी कार्रवाई की तलवार हट गई है।  

आधार सेवा हुई स्मार्ट: गूगल मैप पर एक क्लिक में खोजें नजदीकी सेंटर

नई दिल्ली आधार कार्ड में किसी अपडेट के लिए या फिर नया बनवाने के लिए अकसर लोगों को सेंटर खोजने पड़ते हैं। इसमें उनका काफी वक्त खराब होता है और कई बार तो वे ऐसे पुराने आधार केंद्रों पर पहुंच जाते हैं, जहां पहले कभी काम हुआ करता था, लेकिन अब बंद हो गया है। ऐसी स्थिति से लोगों को बचाने के लिए अब UIDAI ने गूगल के साथ हाथ मिला लिया है। यह पाठक के तौर पर आपके लिए जरूरी और काम की खबर है। इसके चलते अब यदि आपको आधार कार्ड से जुड़ा कोई काम कराना हो तो आसानी से सेंटर पहुंच सकते हैं। इसके लिए आपको बस गूगल मैप पर सर्च करना होगा। यहां आपको आपके नजदीकी आधार केंद्र दिखेंगे। आईटी मिनिस्ट्री की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार अगले कुछ महीनों में गूगल मैप में यह फीचर आ जाएगा। यही नहीं गूगल मैप पर आधार सेंटर सर्च करने पर यह भी पता चलेगा कि किस केंद्र पर वयस्कों का नामांकन होता है। कहां बच्चों का आधार कार्ड बन सकता है और कहां सिर्फ आधार कार्ड में पता या मोबाइल नंबर ही अपडेट हो पाएगा। आईटी मंत्रालय का कहना है कि लोगों को यह भी जानकारी मिल पाएगी कि आधार सेंटर दिव्यांग फ्रेंडली है, वहां पार्किंग की सुविधा है या नहीं। सेंटर कब से तक खुलता है और किन दिनों में छुट्टी रहती है। ऐसी समस्त जानकारियां लोगों को सेंटर सर्च के दौरान ही मिल जाएंगी। े UIDAI का कहना है कि देश भर में 60 हजार आधार सेवा केंद्र हैं। इन तक पहुंचने में लोगों को अकसर परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार गलत जानकारी होने के चलते लोग भटकते रहते हैं। ऐसे में सभी केंद्रों की पूरी जानकारी हो और कहां क्या सेवा प्रदान की जाती है। इसके बारे में पता हो तो लोगों को सुविधा रहेगी। अहम बात यह है कि गूगल मैप पर सिर्फ आधिकारिक आधार सेंटर ही दिखाएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि लोगों को आधार कार्ड के नाम पर किसी तरह की अवैध वसूली अथवा ठगी से बचाया जा सके। कई बार आधार से जुड़ी सर्विसेज देने के नाम पर रकम वसूलने के मामले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे में लोगों को सुविधाजनक और पारदर्शी व्यवस्था देने के लिए यह फैसला लिया गया है। UIDAI के सीईओ ने बताया, 'हमारा फोकस इस बात पर रहा है कि कैसे आधार नंबर होल्डर्स के लिए प्रक्रिया आसान की जाए। अब इस कोलैबरेशन से लोगों को आसानी से आधार केंद्र पहुंचने में मदद मिलेगी।' गूगल इंडिया के स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप कंट्री हेड रोली अग्रवाल ने कहा कि इससे लाखों लोगों को फायदा मिलेगा। जनता और जरूरी सरकारी संस्थानों के बीच गैप खत्म होगा। आधार कार्ड बनवाना है तो आपके काम की हैं ये बातें… – अब आप आसानी से आधार कार्ड पहुंच सकेंगे। इसके लिए आपको गूगल मैप पर बस यह सर्च करना होगा कि आपके आसपास कौन सा आधार सेवा केंद्र है। आप सही स्थान पर पहुंचेंगे और समय बचेगा। – इसके अलावा UIDAI के वैध केंद्र पर जाने से आप ठगे जाने से भी बच सकेंगे। यही नहीं मैप में ही आपको यह जानकारी भी मिल सकेगी कि किस सेंटर में क्या-क्या सुविधा मिलती है। पार्किंग आदि की सुविधा है या नहीं।  

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में बड़ा सड़क हादसा, पिकअप पलटने से चार की मौत

रायगढ़  सगाई कार्यक्रम से लौटने के दौरान ग्रामीणों से भरी पिकअप वाहन के खाई में गिरने से चार लोगों की मौत हो गई वहीं 10 से अधिक लोग गंभीर हो गए। गंभीर रुप से घायल लोगों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है। खरसिया विकासखंड के छाल थाना क्षेत्र के बंगुरसुता गांव से बड़ी संख्या में राठिया परिवार के लोग बुधवार की रात एक पिकअप में सवार होकर कापू थाना क्षेत्र के गोसाईपोड़ी निवासी रणविजय सिंह राठिया के घर आयोजित सगाई कार्यक्रम में गए थे। यहां सगाई समारोह के बाद परिवारिक के 40 लोग व रिश्तदार पिकअप वाहन क्रमांक सीजी 12 एपी 7405 में लौट रहे थे। रात लगभग दस बजे के करीब धरमजयगढ़ कापू मार्ग पर मड़वाताल घाट में पिकअप दुर्घटनाग्रस्त हो गई। चालक के वाहन से नियंत्रण खो देने के कारण वाहन खाई में गिरकर पलट गई। इससे लोगों में चीख पुकार मच गई और अफरा-तफरी का माहौल निर्मित हो गया। हादसे की सूचना घायलों ने पुलिस-प्रशासन तथा डायल 112 को दी। पुलिस के मौके पर पहुंचने तक दो लोगों की मौत हो गई थी। आनन- फानन में पुलिस टीम ने ग्रामीणों की मदद से घायलों को धरमजयगढ़ अस्पताल पहुंचाया। यहां नीरज राठिया, देवेंद्र, बालसिंह, रामकुमार, गाढ़ाराम राठिया, विपल राम राठिया, राशीराम राठिया, सुमेंद्र राठिया, विजय राठिया सहित 20 अन्य घायलों का उपचार किया जा रहा है। गंभीर रूप से घायल सुरेन्द्र तथा देवेंद्र को पहले रायगढ़ मेडिकल कालेज फिर रायपुर रिफर किया गया। हादसे में मृत कलाराम राठिया पिता वृज राम (60), छतरसिंह राठिया पिता सिदार सिंह (60) का धरमजयगढ़ में पोस्टमार्टम कराया गया। इजबल सिंह राठिया पिता उदय बैगा (45) नीरज सिंह राठिया पिता प्रभन सिंह (65) की रायगढ़ में इलाज के दौरान मौत हो गई।  

टेक्नोलॉजी में साझेदारी बढ़ा रहे भारत और इजरायल, बोले नेतन्याहू—भविष्य इसी का

यरूशलम भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने इजरायली समकक्ष बेंजामिन नेतन्याहू के साथ दो दिवसीय दौरे के आखिरी दिन द्विपक्षीय बैठक की और कई समझौतों पर मुहर लगाई। पीएम नेतन्याहू ने बाद में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य नई तकनीक का है। नई तकनीक को लेकर नेतन्याहू ने कहा कि आज शिक्षा के क्षेत्र में नई तकनीक और एआई की मदद से हर छात्र तक आसानी से पहुंचा जा सकता है और उसे उसकी पूरी क्षमता तक आगे बढ़ने का मौका दिया जा सकता है। पहले जो परेशानियां और सीमाएं थीं, अब वे नहीं रहीं।  उन्होंने आगे कहा कि भविष्य उन्हीं देशों का है जो नई सोच और नए कार्य करने में सक्षम हैं। इजरायल और भारत दोनों ही नए विचार और तकनीक पर जोर दे रहे हैं। दोनों देश बहुत पुरानी और महान सभ्यताएं हैं, जिन्हें अपने इतिहास पर गर्व है, लेकिन वे भविष्य को बेहतर बनाने के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं। उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल मिलकर यह काम और बेहतर तरीके से कर सकते हैं। अपने संबोधन की शुरुआत इजरायली बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी के दिल छूने वाले अंदाज को बयां कर की। उन्होंने कहा, "यह एक शानदार दौरा है, एक शानदार विजिट का शानदार अंत। यह छोटी लेकिन बहुत ज्यादा फलदायी और दिल को छूने वाली मुलाकात थी। मुझे लगता है कि कल नेसेट में आपके दिल को छूने वाले बयान के बाद इजरायल में सभी भावुक होंगे। मैं आपको बता सकता हूं कि तब से हमें न केवल अपने दिलों में गहराई से देखने का मौका मिला है, बल्कि हमारे दोनों देशों में मौजूद शानदार दिमागों को देखने का भी मौका मिला है।" इसके साथ ही नेतन्याहू ने अपने मित्र पीएम मोदी के काम को भी काबिल-ए-तारिफ करार दिया। बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि आपकी सरकार बेहद कुशल है। आप एक मंत्री और एक राजदूत के साथ जो काम कर सकते हैं, वह काबिल-ए-तारीफ है। दोनों देशों के बीच जो सोच और दिलों का जुड़ाव यहां देखने को मिला है, वह आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह सरकार-से-सरकार सहयोग, जिसका लंबे समय से इंतजार था, अब नई गति पकड़ेगा और इससे दोनों देशों को एक-दूसरे से पहुंचने वाले फायदों में इजाफा होगा। इजरायली प्रधानमंत्री के बाद भारत के पीएम ने कहा कि भारत जल्द ही इजरायल के साथ पारस्परिक लाभ वाले फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देगा। इजरायल में भी अब भारत का यूपीआई पेमेंट सिस्टम चलेगा, इसे लेकर द्विपक्षीय बैठक में समझौता हुआ है।

UN मंच पर भारत का पलटवार: IMF लोन से ज्यादा J&K पर खर्च, पाकिस्तान को आईना

संयुक्त राष्ट्र भारतीय डिप्लोमैट अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में जोरदार लताड़ लगाई। उन्होंने तंज भरे लहजे में कहा कि पाकिस्तान सपनों की दुनिया में है। हमारे जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए बजट पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष बेलआउट से भी बड़ा है। ऐसा पहली बार नहीं है जब वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर को लेकर अपने राग अलाप रहा हो। अक्सर पाकिस्तान एक ही मुद्दे को लेकर भारत पर निशाना साधने की कोशिश करता है। ताजा मामले में जब पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का राग अलापा, तो यूएन के मंच पर भारतीय राजनयिक अनुपमा सिंह ने जमकर क्लास लगाई। पाकिस्तान को जवाब देते हुए अनुपमा सिंह ने कहा, "भारत, पाकिस्तान और ओआईसी की हाई-लेवल मीटिंग में भारत के बारे में कही गई बातों के जवाब में अपने जवाब देने के अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर है। हम इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हैं। ओआईसी, पाकिस्तान के प्रोपेगेंडा को दोहराकर, सिर्फ यह दिखाता है कि उसने खुद को एक सदस्य के कब्जे में कितना गहराई से आने दिया है और खुद को एक देश की राजनीतिक मजबूरियों के लिए एक ईगो चैंबर बना लिया है। पाकिस्तान के लगातार प्रोपेगेंडा से अब जलन की बू आ रही है।" भारतीय अधिकारी ने पाकिस्तान को आईना दिखाते हुए कहा, "शायद पाकिस्तान को यह यकीन नहीं हो रहा कि जम्मू-कश्मीर का विकास बजट आईएमएफ से मांगे गए हालिया बेलआउट पैकेज से दोगुने से भी ज्यादा है। आखिर में, पाकिस्तान की लगातार स्टेट-स्पॉन्सर्ड टेररिज्म के जरिए इलाके को अस्थिर करने की कोशिशों के बावजूद, जम्मू-कश्मीर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक तौर पर आगे बढ़ रहा है। पाकिस्तान के लिए अच्छा होगा कि वह ऐसे प्लेटफॉर्म पर दिखावा करने के बजाय अपने बढ़ते अंदरूनी संकट को ठीक करने पर ध्यान दे। दुनिया जरूर उसके दिखावे को समझ सकती है।" पाकिस्तान को मुहतोड़ जवाब देते हुए अनुपमा सिंह ने कहा, "हम ऐसे प्रोपेगेंडा को बढ़ावा नहीं देना चाहते, लेकिन हम इसे फैक्ट्स के साथ खत्म करने के लिए कुछ बातें जरूर कहेंगे। जम्मू और कश्मीर भारत का एक जरूरी और अटूट हिस्सा था, है और हमेशा रहेगा। पाकिस्तान की कोई भी मनगढ़ंत बातें या प्रोपेगेंडा इस पक्की बात को नहीं बदल सकता कि जम्मू-कश्मीर का भारत में शामिल होना पूरी तरह से वैध और पक्का था और यह भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 और अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक था।" पीओके को लेकर पाकिस्तान पर पलटवार करते हुए भारतीय अधिकारी ने कहा, "इस इलाके से जुड़ा एकमात्र विवाद पाकिस्तान का भारतीय इलाकों पर गैर-कानूनी कब्जा है। हम पाकिस्तान से इन इलाकों को खाली करने की अपील करते हैं, जिन पर उसने जबरदस्ती कब्जा किया हुआ है। ऐसे देश से लोकतंत्र पर भाषण सुनना वाकई मुश्किल है, जहां की सरकारें शायद ही कभी अपना कार्यकाल पूरा करती हैं।" उन्होंने कहा, "ये बातें खोखली लगती हैं। जम्मू-कश्मीर में आम चुनाव और विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड वोटिंग इस बात का सबूत है कि जम्मू-कश्मीर के लोगों ने पाकिस्तान की फैलाई आतंकवाद और हिंसा की सोच को नकार दिया है और विकास और लोकतंत्र के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं। पिछले साल जम्मू-कश्मीर में दुनिया के सबसे ऊंचे पुल चिनाब रेल ब्रिज की शुरुआत हुई है। यह दिखाता है कि पाकिस्तान जरूर भ्रम में है।"

Sahara Refund: सहारा निवेशकों के लिए खुशखबरी: 45 दिन में 10 लाख तक का रिफंड पाने का तरीका

 नई दिल्ली अगर आपने सहारा इंडिया (Sahara India) की किसी स्कीम में पैसा लगाया था और अभी तक आपको रिफंड नहीं मिला है, तो आपके लिए बड़ी राहत की खबर है. अब आप क्लेम कर 10 लाख रुपये तक रिफंड पा सकते हैं.  केंद्र सरकार ने सहारा रिफंड पोर्टल (Sahara Refund Portal) पर फिर से आवेदन करने का मौका दिया है. दरअसल, जिन लोगों ने पहले से ही क्लेम किया हुआ है, लेकिन किसी गलती या दस्तावेज की कमी की वजह से रिफंड नहीं मिला है, वे अब उसे सुधारकर दोबारा जमा कर सकते हैं. इस बीच अब क्लेम की राशि बढ़ाकर 10 लाख रुपये तक कर दी गई है. पहले ये राशि अधिकतम 50 हजार रुपये थी. आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक 19 नवंबर 2025 से 10 लाख रुपये तक रिफंड की सुविधा शुरू की गई है.  सहारा रिफंड को लेकर बिग अपडेट यानी अब सहारा इंडिया निवेशक 10 लाख रुपये तक के दावों के लिए दोबारा अप्लाई कर सकते हैं. केवल ये ध्यान रखना है कि अगर आपने पहले से क्लेम कर रखा है, तो 45 दिन के बाद री-क्लेम कर सकते हैं. पहले अगर आपके दावे में कोई जानकारी गलत थी, दस्तावेज साफ नहीं थे या बैंक डिटेल में गड़बड़ी थी, तो आप उसे सही करके दोबारा आवेदन कर सकते हैं. यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी और इसके लिए आपको CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल पर जाना होगा.  सरकार का कहना है कि सही तरीके से दोबारा जमा किए गए दावों को 45 वर्किंग डे के भीतर जांचकर निपटाया जाएगा. इससे पहले कई लोगों को 50,000 रुपये तक की रकम वापस भी मिल चुकी है. लेकिन जिनके आवेदन में कमी पाई गई थी, उन्हें सुधार करने का मौका दिया जा रहा है. अप्लाई का फुल प्रोसेस आवेदन करते समय ध्यान रखें कि सभी जानकारी सही भरें. आधार नंबर, मोबाइल नंबर और बैंक खाता विवरण बिल्कुल सही होना चाहिए. गलत जानकारी देने पर क्लेम फिर से अटक सकता है. वहीं अगर आपने 50 हजार रुपये तक के लिए क्लेम कर चुके हैं तो 45 दिन के बाद स्टेट्स चेक करें.   रीसबमिशन के लिए पोर्टल (https://mocresubmit.crcs.gov.in/resubmission/#/home) पर जाएं. अगर आपको रीसबमिशन प्रक्रिया में कोई तकनीकी कठिनाई या मदद चाहिए, तो आप पोर्टल के हेल्पडेस्क से सहायता ले सकते हैं. इसके लिए पोर्टल हेल्पलाइन नंबर 011-20909044 और 011-20909045 पर संपर्क कर सकते हैं.  सरकारी अनुमान के मुताबिक सहारा-SEBI खाते में करीब 26,000 करोड़ रुपये जमा है, जिसमें से 5,000 करोड़ रुपये रिफंड के लिए अलग किए गए थे. केंद्र सरकार ने साल 2022 में बताया था कि सहारा इंडिया ग्रुप की कंपनियों में कुल निवेशकों का संख्या करीब 13 करोड़ है, और इन निवेशकों के 1.12 लाख करोड़ रुपये से अधिक फंसे हुए हैं.  रीसबमिशन से जुड़ी मुख्य बातें फिलहाल,10 लाख रुपये तक के दावों को दोबारा प्रस्तुत करने की प्रक्रिया जारी है। एक बार जब आप अपना क्लेम सही तरीके से दोबारा जमा कर देते हैं, तो इसे 45 वर्किंग डेज के भीतर प्रोसेस कर दिया जाएगा। यह पूरा प्रोसेस डिजिटल और पारदर्शी तरीके से की जा रही है। अब तक 50000 रुपये तक क्लेम प्रोसेस्ड CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल में जमा किए गए एप्लीकेशन प्रोसेस हो गए हैं और हर एप्लीकेशन पर 50,000 रुपये या उससे कम का पेमेंट उन एलिजिबल डिपॉजिटर्स को किया गया है, जिनके क्लेम वेरिफाई हो सके। जिन डिपॉजिटर्स के क्लेम में कमियों की वजह से वेरिफाई नहीं हो सके, उन्हें “CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल” के जरिए कमी के मैसेज भेजे गए हैं। यह CRCS-सहारा रिफंड पोर्टल (रीसबमिशन) कमियों को ठीक करने के बाद क्लेम को फिर से जमा करने के लिए शुरू किया गया है। ये डिपॉजिटर्स अपने हर कमी वाले क्लेम की कमियों को ठीक कर सकते हैं और रीसबमिशन पोर्टल के जरिए आगे की प्रोसेसिंग के लिए अपने क्लेम को फिर से जमा कर सकते हैं, जिसे पोर्टल पर लोड को मैनेज करने के लिए धीरे-धीरे कमियों वाले डिपॉजिटर्स के लिए खोला गया है। पोर्टल ऑनलाइन क्लेम दोबारा जमा करने के 45 वर्किंग डेज के अंदर दोबारा जमा किए गए क्लेम को प्रोसेस करेगा। डिपॉजिटर्स से रिक्वेस्ट है कि वे रीसबमिशन एप्लीकेशन फ़ॉर्म में चारों सोसाइटियों से जुड़ी कमियों वाले सभी क्लेम दोबारा जमा करें। केवल पोर्टल के जरिए ऑनलाइन दोबारा जमा किए गए क्लेम ही माने जाएंगे। इसके लिए आप सीधे इस लिंक पर जा सकते हैं: https://mocresubmit.crcs.gov.in/resubmission/#/home कहां करें संपर्क? अगर आपको किसी तकनीकी सहायता या जानकारी की आवश्यकता हो, तो आप पोर्टल हेल्पडेस्क नंबर 01120909044 और 01120909045 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, समितियों के नंबर 0522 6937100, 0522 3108400, 0522 6931000 और 08069208210 पर भी फोन किया जा सकता है। संपर्क करने का समय सुबह 9:30 बजे से शाम 6:00 बजे तक, सोमवार से शुक्रवार (केंद्र सरकार की छुट्टियों को छोड़कर) है।

जीएडी के अधिकारियों ने चेक किए उपस्थिति रजिस्टर, CM के आदेश पर भोपाल के सरकारी भवनों में हाजिरी की कड़ी निगरानी

भोपाल मुख्यमंत्री ने सरकारी कार्यालयों में समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने वल्लभ भवन सहित प्रमुख मंत्रालयीन परिसरों में छापामार कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। आदेश के तहत अधिकारियों और कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति, कार्यालय में आने-जाने का समय तथा अनधिकृत अनुपस्थिति की विस्तृत जानकारी एकत्र की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य शासकीय कार्यप्रणाली में अनुशासन और जवाबदेही को मजबूत करना है। सुबह 10 से शाम 6 बजे तक होगी विशेष निगरानी निर्देशों के अनुसार आज सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक वल्लभ भवन, विंध्याचल और सतपुड़ा—तीनों कार्यालय परिसरों में विशेष मॉनिटरिंग की जाएगी। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव भले ही भोपाल से बाहर दौरे पर रहेंगे, लेकिन मुख्यमंत्री सचिवालय और सामान्य प्रशासन विभाग को स्पष्ट रूप से कहा गया है कि निर्धारित समयावधि में उपस्थिति से जुड़ी हर जानकारी संकलित की जाए। कर्मचारियों की हाजिरी, देरी से आने या समय से पहले जाने जैसी गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग की टीमें तैनात सामान्य प्रशासन विभाग ने इस अभियान के लिए अलग-अलग टीमें गठित कर दी हैं, जिन्हें तीनों भवनों में तैनात किया गया है। ये टीमें मौके पर जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करेंगी और अपनी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को सौंपेंगी। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों को भी इस संबंध में पूर्व सूचना दे दी गई है, ताकि निरीक्षण प्रक्रिया पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संपन्न हो सके। अनुशासन और जवाबदेही पर सरकार का फोकस सरकार का मानना है कि समयपालन और नियमित उपस्थिति से प्रशासनिक कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार होगा। इस कार्रवाई के जरिए स्पष्ट संदेश दिया गया है कि लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले समय में भी ऐसे औचक निरीक्षण जारी रह सकते हैं, जिससे शासकीय तंत्र में कार्यसंस्कृति को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। सीएम और मुख्य सचिव दौरे पर, फिर भी सख्ती बताया गया है कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव और मुख्य सचिव अनुराग जैन वर्तमान में भोपाल से बाहर दौरे पर हैं। इसके बावजूद मुख्यमंत्री के निर्देश पर मुख्यमंत्री सचिवालय और सामान्य प्रशासन विभाग को सभी संबंधित दफ्तरों में अधिकारी-कर्मचारियों की उपस्थिति, आने-जाने का समय और अनाधिकृत अनुपस्थिति की जानकारी एकत्र करने के आदेश दिए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग की टीमें तीनों भवनों में तैनात होकर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। समय पालन पर मुख्यमंत्री का सख्त संदेश मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा है कि जनकल्याणकारी योजनाओं और आम जनता से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सुबह 10 बजे से शाम 6 बजे तक सभी अधिकारी और कर्मचारियों की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने संदेश दिया है कि यदि समय पालन में कोताही पाई गई तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी। पारदर्शी प्रशासन पर जोर राज्य सरकार का कहना है कि जनता की सुविधा और पारदर्शी प्रशासन सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसलिए सभी शासकीय अधिकारी-कर्मचारियों को पूर्ण जिम्मेदारी और समयबद्धता के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन करना होगा। टार्गेट क्या है? इस विशेष अभियान का मुख्य उद्देश्य केवल हाजिरी लगाना नहीं, बल्कि अधिकारियों और कर्मचारियों के आने-जाने का सटीक समय नोट करना और अनधिकृत रूप से अनुपस्थित रहने वालों की जानकारी संकलित करना है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए खास टीमों का गठन किया है, जो पूरे दिन इन दफ्तरों में उपस्थिति और काम की निगरानी करेंगी। पहले भी सीएम ने दी है वार्निंग यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को समय की पाबंदी को लेकर हिदायत दी है। इससे पहले भी वे सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि राज्य में हफ्ते में पांच दिन ही दफ्तर खुलने के बावजूद, कई अधिकारी निर्धारित समय पर दफ्तर नहीं पहुंचते हैं। सीएम का मानना है कि अधिकारियों की देरी से आने की आदत प्रशासनिक काम में बड़ी परेशानी पैदा करते हैं और आम जनता के काम रोकते हैं।

जापान में हाई-स्पीड ट्रेन पर CM योगी का रोमांचक अनुभव, 600 किमी/घंटा की रफ्तार में मुस्कुराहट बनी यादगार

लखनऊ / टोक्यो   सीएम योगी आदित्यनाथ ने अपनी जापान यात्रा के आखिरी दिन यामानाशी में हाई स्पीड मैग्लेव ट्रेन का सफर किया. हाइड्रोजन ग्रीन एनर्जी प्लांट के बाद 600 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हाई स्पीड मैगलेव ट्रेन का अनुभव योगी आदित्यनाथ के लिए रोमांच भरा रहा. लीनियर मैग्लेव ट्रेन 500 किमी की स्पीड से चलती है. अभी जापान की बुलेट ट्रेन 300 किमी की स्पीड से दौड़ती है. लीनियर मोटर कार 500 की स्पीड से चलती है. अभी की जो जापान की बुलेट ट्रेन है, उसकी स्पीड 300 किलोमीटर प्रतिघंटा है. वहीं यह लीनियर मैग्लेव ट्रेन चुंबकीय बल से चलती है या कहें हवा में 500 की स्पीड में उड़ती है. सीएम योगी आदित्यनाथ के साथ इस रोमांचक ट्रेन पर सफर तय किया.  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जापान यात्रा के दूसरे दिन यामानाशी प्रांत में ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट का दौरा किया. इस दौरान योगी ने पानी से हाइड्रोजन और बिजली बनाने की तकनीक को समझा. टोक्यो से यामनाशी जाते हुए तुलसी नाम की एक साध्वी तुलसी अपने साथियों से योगी से मिलीं. साध्वी तुलसी ने बताया कि वे जापान में हिंदू और जैन धर्म का प्रचार कर रही हैं. उनके साथ मौजूद एक छोटे बच्चे ने योगी आदित्यनाथ के चरण स्पर्श करके संस्कृत में मंत्र भी सुनाया. योगी को यह दृश्य देखकर प्रसन्नता हुई और उन्होंने जापानी भक्तों को प्रसाद रूप में चॉकलेट दी. सीएम योगी आदित्यनाथ यामानाशी प्रांत पहुंचे तो वहां बड़ी संख्या में स्कूल के बच्चों ने उनका स्वागत किया. हाथों में भारत-जापान का झंडा पकड़े बच्चों के साथ योगी ने कुछ समय बिताया. इसके अलावा यामानाशी में रहने वाले स्थानीय लोगों ने योगी को एक खास पेंटिंग भी भेंट की. यामानाशी जापान में आधुनिक खेती और तकनीक के लिए जाना जाता है. यहां हाइड्रोजन एनर्जी, रोबोटिक सेंटर और हाई स्पीड ट्रेन का सेंटर है. इसके साथ ही विश्व प्रसिद्ध माउंट फ्यूजी पहाड़ भी आकर्षण का केंद्र है. मैग्लेव ट्रेन का सफर न सिर्फ रोमांचक रहा, बल्कि भविष्य की परिवहन तकनीक की झलक भी लेकर आया. जापान की अत्याधुनिक मैग्लेव ट्रेन चुंबकीय शक्ति पर आधारित है, जो इसे पारंपरिक ट्रेनों से बिल्कुल अलग बनाती है. यह ट्रेन पटरियों से ऊपर उठकर चलती है, यानी घर्षण लगभग खत्म हो जाता है और यही वजह है कि इसकी रफ्तार 500 से 600 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच जाती है. यामानाशी टेस्ट ट्रैक पर इस ट्रेन ने अपनी उच्चतम क्षमता का प्रदर्शन किया, जिसे देखकर मुख्यमंत्री भी प्रभावित नजर आए. वर्तमान में जापान की बुलेट ट्रेन लगभग 300 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलती है, लेकिन मैग्लेव तकनीक इस गति को दोगुना करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. शिंकानसेन पहले ही दुनिया में तेज और सुरक्षित यात्रा का प्रतीक बन चुकी है, और अब मैग्लेव इसे और आगे ले जाने की तैयारी में है. इस दौरान मुख्यमंत्री ने हाइड्रोजन आधारित ग्रीन एनर्जी प्लांट का भी अवलोकन किया.  मैग्लेव ट्रेन का सफर पूरी तरह से स्मूद और झटकों से मुक्त होता है. ट्रेन के अंदर बैठकर ऐसा महसूस होता है जैसे कोई विमान जमीन के बेहद करीब उड़ रहा हो. इस अनुभव को साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने इसे भविष्य की यात्रा बताया. 9 साल के कार्यकाल में सीएम योगी का दूसरा विदेश दौरा जिस हाई-स्पीड मैग्लेव ट्रेन में योगी आदित्यनाथ ने सफर किया, वह पारंपरिक ट्रेनों से बिल्कुल अलग है. यह ट्रेन पटरी को छूती नहीं, बल्कि चुंबकीय तकनीक के सहारे ट्रैक से ऊपर हवा में तैरते हुए तेज रफ्तार से दौड़ती है. बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 22 फरवरी से सिंगापुर और जापान के दौरे पर हैं, जो उनके नौ साल के कार्यकाल की दूसरी विदेश यात्रा है. इससे पहले 2017 में उन्होंने म्यांमार का सीमित दौरा किया था. लंबे अंतराल के बाद यह विदेश दौरा खास माना जा रहा है, क्योंकि इसका उद्देश्य प्रदेश में निवेश आकर्षित करना और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नई गति देना है.