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MP में 2 मार्च से निजी बस ऑपरेटरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 1.5 लाख यात्रियों को होगा असर

भोपाल  मध्य प्रदेश में नई परिवहन नीति के खिलाफ निजी बस संचालकों ने मोर्चा खोल दिया है। बस ऑपरेटरों ने 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। यह हड़ताल होली के त्यौहार से ठीक दो दिन पहले शुरू होने वाली है, जिससे प्रदेशभर में यात्रियों की मुसीबतें बढ़ सकती हैं। बस एसोसिएशन का विरोध सरकार की नई परिवहन नीति को लेकर है। उन्होंने परमिट प्रक्रिया पर सवाल उठाए है। बस ऑपरेटरों का कहना है कि रूट आवंटन और रिन्यूअल की प्रक्रिया को जटिल और महंगा बनाया गया है।  डीजल की बढ़ती कीमतों के बावजूद किराए में संशोधन का कोई लचीला प्रावधान नहीं है। परमिट नियमों के उल्लंघन पर भारी आर्थिक दंड और परमिट निरस्त करने के सख्त नियम बनाए गए है। ऑपरेटरों का आरोप है कि सरकारी और नगर परिवहन को प्राथमिकता देकर निजी बसों के रूट सीमित किए जा रहे हैं।  बता दें प्रदेश में वर्तमान में लगभग 28,000 बसें संचालित होती हैं, जिनमें ऑल इंडिया परमिट और स्टेज कैरिज बसें शामिल हैं। यदि यह हड़ताल होती है, तो इसके गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। रोजाना सफर करने वाले करीब 1.5 लाख यात्रियों का आवागमन बाधित होगा। इससे ड्राइवरों, कंडक्टरों, मैकेनिकों और बुकिंग एजेंटों सहित हजारों लोगों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। होली के कारण ट्रेनों में पहले से ही भारी वेटिंग है। ऐसे में बसों का बंद होना यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बन सकता है। फिलहाल, परिवहन विभाग की ओर से इस चेतावनी पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। बस संचालकों ने भोपाल, इंदौर और ग्वालियर सहित कई जिलों में आरटीओ को ज्ञापन सौंपना शुरू कर दिया है।  सरकार प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है सम्मेलन में बस संचालकों ने एकमत होकर कहा कि जब सरकार की अपनी बसें ही नहीं है तो यह सेवा सरकारी कैसे हुई? सरकार प्रदेश की जनता को गुमराह कर रही है। पहले ही जनता का पैसा सरकार सूत्र सेवा बसों के रूप में बर्बाद कर चुकी है। अब फिर से द्वेष और दुर्भावना से जनता और ऑपरेटरों को धोखे में रख निजी कंपनियों को फायदा देने के मकसद से बसों से स्थायी परमिटों पर संचालन कर रहे। बस ऑपरेटर के परमिट सरकार छीनना चाहती है और बस ऑपरेटरों को बेरोजगार करना चाहती है। आंदोलन की चेतावनी हड़ताल की रणनीति तय करने के लिए सागर में संगठन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें रायसेन समेत कई जिलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में सरकार से नीति पर पुनर्विचार की मांग की गई और चेतावनी दी गई कि जब तक मांगें नहीं मानी जातीं, आंदोलन जारी रहेगा। यदि हड़ताल लंबी खिंचती है तो प्रदेश में दैनिक यात्रियों, छात्रों और व्यापारिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ सकता है। कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे, 2 मार्च से करेंगे हड़ताल सरकार का अड़ियल रवैया देख बस ऑपरेटरों में गहरा रोष है। जिसको लेकर बस ऑपरेटरों ने निर्णय लिया है कि वे अगले एक से दो दिनों में प्रदेश के सभी जिलों में कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखेंगे। मांगें नहीं मानी गई तो 2 मार्च से प्रदेश के सभी बस ऑपरेटर्स अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। इसके लिए शासन जिम्मेदार होगा। बैठक में प्रदेश की सभी यूनियनों ने हड़ताल का समर्थन किया है। क्या है 'मुख्यमंत्री सुगम लोक परिवहन सेवा योजना'? सरकार अप्रैल 2026 से इस योजना को शुरू करने का लक्ष्य रख रही है। इसके तहत लगभग दो दशक बाद परिवहन सेवा को फिर से सरकारी नियंत्रण में लाने की तैयारी है। सरकार का दावा है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच किफायती, सुरक्षित और समयबद्ध परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी। खासकर उन ग्रामीण रूटों पर जहां अभी निजी बसों की कमी है या कनेक्टिविटी खराब है। सरकार खुद बसें नहीं खरीदेगी, बल्कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर काम करेगी। बसों की निगरानी सरकार करेगी, ट्रैकिंग के लिए बनेगा ऐप योजना के तहत बसें निजी ऑपरेटर्स की होंगी, लेकिन उनका नियंत्रण और निगरानी सरकार के पास होगी। बसों की ट्रैकिंग, ई-टिकटिंग और टाइम-टेबल के लिए एक मोबाइल एप और डैशबोर्ड बनाया जाएगा। इस सम्मेलन के दौरान मप्र बस ऑनर्स एसोसिएशन के महामंत्री जय कुमार जैन, बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष संतोष पांडेय, खंडवा जिले से प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य सुनील आर्य, जिला अध्यक्ष राजीव शर्मा, सिमरन चावला, रूपल आजमानी और सुरेश राउत समेत प्रदेश के अलग-अलग जिलों के बस ऑपरेटर मौजूद थे। अनुबंध व्यवस्था लागू न की जाए बस ऑपरेटर एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष कुशल मिश्रा ने प्रदेश सरकार द्वारा जो नई नीति लाई गई है, जिसके तहत प्राइवेट बस वालों से अनुबंध कराया जाएगा. उसी विषय पर आज हमारी पत्रकार वार्ता थी. हमारी 22 तारीख को सागर जिले में यूनियन की बैठक हुई थी, जिसमें यह निर्णय लिया गया है कि आगामी 2 मार्च से प्रदेश में बसों की हड़ताल होगी, क्योंकि कोई भी प्राइवेट बस संचालक अनुबंध नहीं करना चाहता है. हमारी मांग यही है कि यह अनुबंध व्यवस्था लागू न की जाए. यदि सरकार को गाड़ियां चलानी हैं, तो वह अपनी खुद की गाड़ियां चलाए, अपने मार्ग स्वयं तय करे और कंप्यूटर प्रणाली से संचालन करे. इसमें प्राइवेट बस संचालकों को क्यों शामिल किया जा रहा है.

MotoGP India: यूपी सरकार ने मोटोजीपी रेसिंग के लिए किया करार, फिर होगी रफ्तार की रोमांचक जंग

नई दिल्ली    उत्तर प्रदेश में मोटरसाइकिल रेसिंग और मोटरस्पोर्ट के शौकीनों के लिए बड़ी ख़बर है. राज्य में अब एक बार फिर से इंटरनेशनल लेवल की रेसिंग देखने को मिल सकती है. ख़बर है कि, प्रीमियम ऑटोमोटिव और मोटरस्पोर्ट कंसल्टेंसी कंपनी AVW Global ने  स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के साथ एक अहम MoU साइन किया है. इस समझौते का मकसद उत्तर प्रदेश में ग्लोबल लेवल मोटरसाइकिल रेसिंग इकोसिस्टम तैयार करना है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस रणनीतिक समझौते के तहत एबीडब्ल्यू ग्लोबल उत्तर प्रदेश सरकार के साथ मिलकर बड़े अंतरराष्ट्रीय रेसिंग टूर्नामेंट आयोजित कराने में सहयोग करेगी. इनमें दुनिया की मशहूर चैम्पियनशिप मोटोजीपी, एशिया रोड रेसिंग चैंपियनशिप जैसी प्रतियोगिताएं शामिल हैं. इसका मतलब एक बार फिर से नोएडा के बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट पर पावरफुल मोटरसाइकिलों की रेस आयोजित हो सकती है. स्टेट ट्रांसफॉर्मेशन कमीशन के सीईओ मनोज कुमार सिंह ने कहा कि एवीडब्ल्यू ग्लोबल की मदद से उत्तर प्रदेश मोटरसाइकिल रेसिंग को प्रोफेशनल तरीके से फिर से भारत में लाने की तैयारी कर रहा है. उन्होंने कहा कि राज्य और देश के लाखों फैंस दोबारा ट्रैक पर इन शानदार बाइक्स को दौड़ते देखना चाहते हैं. उत्तर प्रदेश सरकार मोटरस्पोर्ट और युवाओं के लिए बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करना चाहती है. उन्होंने भरोसा जताया कि हाई स्पीड रेसिंग बहुत जल्द राज्य में शुरू होगी. उन्होंने यह भी कहा कि ग्रेटर नोएडा स्थित बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट (BIC) जैसी ग्लोबल रेसिंग फेसिलिटी का पूरा उपयोग किया जाएगा. इसके अलावा इस सर्किट के आसपास एक बेहतर और सस्टेनेबल इकोसिस्टम भी तैयार किया जाएगा. ताकि भविष्य में भी इस तरह के बड़े मोटरस्पोर्ट इवेंट का आयोजन आसानी से किया जा सके. टू व्हील्स मोटर रेसिंग के प्रमोशंस डायरेक्टर रॉन हॉग ने कहा कि भारत जैसे बड़े बाजार में एवीडब्ल्यू ग्लोबल के जरिए प्रतिनिधित्व करना खुशी की बात है. उन्होंने उम्मीद जताई कि जुलाई-अगस्त 2026 तक भारत में रेसिंग आयोजित की जा सकती है. वहीं एवीडब्ल्यू ग्लोबल के फाउंडर Karel Abraham ने कहा कि उन्होंने खुद MotoGP में रेसिंग की है और ग्लोबल लेवल की सर्किट चलाने का अनुभव भी उनके पास है.  उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा मोटरसाइकिल बाजार है और यहां वर्ल्ड लेवल रेसिंग होनी चाहिए. उनकी कंपनी पूरे प्रोफेशनल तरीके से फैंस को ध्यान में रखते हुए इस टार्गेट को पूरा करेगी. बयान में कहा गया है कि यह साझेदारी उत्तर प्रदेश सरकार और अंतरराष्ट्रीय मोटरस्पोर्ट एक्सपर्ट के बीच एक साझा प्रयास है. इसका मकसद राज्य में स्पोर्ट को बेहतर ढंग से तैयार करना है.   भारत में MotoGP का इतिहास भारत में MotoGP की एंट्री बड़े जोरशोर के साथ हुई थी. इसके कमर्शियल राइट्स होल्डर डोर्ना स्पोर्ट्स ने शुरुआत में नोएडा की कंपनी फेयरस्ट्रीट स्पोर्ट के साथ 7 साल का समझौता किया था. मकसद साफ था, भारत को रेसिंग की दुनिया में एक बड़ी पहचान दिलाना. साल 2023 में पहली रेस हुई, दुनिया भर से आए मोटोजीपी रेसर्स ने इस भव्य आयोजन में हिस्सा लिया. लेकिन आयोजन के दौरान कई ऑपरेशनल दिक्कतें सामने आईं. तेज गर्मी ने भी रेस को प्रभावित किया. हालांकि ग्रेटर नोएडा का बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट  राइडर्स को काफी पसंद आया. कई राइडर्स ने ट्रैक की तारीफ की और इसे इंटरनेशनल लेवल का बताया. साल 2024 का इंडियन ग्रां प्री बाद में रद्द कर दिया गया और इसे 2025 तक के लिए टाल दिया गया. आधिकारिक वजह “वेदर कंडिशन” बताई गई. लेकिन उस समय आई खबरों में कहा गया कि प्रमोटर फेयरस्ट्रीट स्पोर्ट्स ने डोर्ना स्पोर्ट्स को पूरी होस्टिंग फीस समय पर नहीं दी थी. हालांकि फेयरस्ट्रीट स्पोर्ट्स  ने इन दावों को खारिज किया. कंपनी का कहना था कि डोर्ना स्पोर्ट्स को पहले से जानकारी थी कि आम चुनाव की वजह से पेमेंट में देरी हो सकती है. सरकार की सीधी एंट्री इसके कुछ ही हफ्तों बाद डोर्ना स्पोर्ट्स ने सीधे उत्तर प्रदेश सरकार के साथ 3 साल का नया समझौता कर लिया. इस फैसले के बाद फेयरस्ट्रीट स्पोर्ट्स इस पूरी व्यवस्था से बाहर हो गई. अगस्त 2024 में राज्य सरकार ने नए रेस प्रमोटर की तलाश के लिए टेंडर जारी किया. लेकिन बाद में इसे वापस ले लिया गया और सितंबर 2024 में दोबारा जारी किया गया. अब सबकी नजर इस बात पर है कि नए अरेंजमेंट के साथ भारत में मोटोजीपी कितनी मजबूती से वापसी करता है.

केंद्र सरकार की मंजूरी से MP और CG में बनेंगे 2.88 लाख नए घर, महिलाओं को मिलेगा अहम हिस्सा

भोपाल /रायपुर  केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 (PMAY-U 2.0) के तहत शहरी गरीबों के लिए आवास की सुविधा को विस्तार देते हुए सोमवार को लगभग 2.88 लाख और घरों के निर्माण के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा दी गई इस नवीनतम स्वीकृति के तहत कुल 2,87,618 घरों का निर्माण किया जाएगा। इस नए निर्णय के साथ ही पीएमएवाई-यू 2.0 के तहत स्वीकृत घरों की कुल संख्या अब 13.61 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। महिलाओं और वंचित वर्गों को प्राथमिकता मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इस परियोजना में सामाजिक न्याय और समावेशिता का विशेष ध्यान रखा गया है। स्वीकृत घरों में से 1.60 लाख से अधिक घर महिलाओं को आवंटित किए गए हैं। इसके अलावा, 22,581 घर वरिष्ठ नागरिकों के लिए और 8 घर ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए स्वीकृत किए गए हैं। श्रेणीवार विवरण देखें तो इसमें ओबीसी वर्ग के लिए 82,190 घर, एससी (SC) लाभार्थियों के लिए 35,525 और एसटी (ST) वर्ग के लिए 9,773 घर आरक्षित किए गए हैं। 16 राज्यों में अलग-अलग श्रेणियों के तहत होगा निर्माण यह महत्वपूर्ण निर्णय मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कटिकीथला की अध्यक्षता में आयोजित 'केंद्रीय स्वीकृति और निगरानी समिति' की बैठक में लिया गया। योजना के तहत नए घर 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बनाए जाएंगे, जिनमें मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, गुजरात, आंध्र प्रदेश और बंगाल जैसे प्रमुख राज्य शामिल हैं। निर्माण की श्रेणियों को तीन हिस्सों में बांटा गया है।     लाभार्थी आधारित निर्माण: 1.66 लाख घर।     भागीदारी में किफायती आवास: 1.09 लाख घर।     किफायती किराये के आवास: 12,846 घर। 'डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स' को हरी झंडी परियोजना में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय ने छत्तीसगढ़, पुडुचेरी और राजस्थान में तीन 'डेमोंस्ट्रेशन हाउसिंग प्रोजेक्ट्स' (डीएचपी) को भी मंजूरी दी है। इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य आधुनिक और लागत-कुशल निर्माण तकनीकों का प्रदर्शन करना है। प्रत्येक डीएचपी परियोजना में 40 आवास इकाइयां शामिल होंगी, जो भविष्य के शहरी आवास निर्माण के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करेंगी।  

भारत में राफेल बनाने के बाद सरकार बेचेगी, समझें डील की शर्तें

बेंगलुरु  भारत में राफेल बनाने की तैयारी तेज हो गई है. फ्रांस के राष्ट्रपति के दौरे के बाद डील को आगे बढ़ाने की कवायद शुरू हो चुकी है. सवाल अब यह उठ रहा है कि अगर राफेल भारत में बनेंगे, तो क्या सरकार इन्हें दूसरे देशों को बेच भी सकेगी? या ये विमान सिर्फ भारतीय वायुसेना के लिए ही होंगे? डील की शर्तें क्या कहती हैं चलिए समझते हैं. राफेल डील में आई तेजी इमैनुएल मैक्रों के भारत दौरे के बाद राफेल डील को लेकर हलचल तेज हुई है. रक्षा मंत्रालय जल्द ही प्रस्ताव को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी के पास भेजने की तैयारी में है. ऐसे में उम्मीद है कि अगले 4 से 6 महीने में समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, रक्षा खरीद प्रक्रिया की टाइमलाइन छोटी करने की कोशिश की जा रही है ताकि लड़ाकू विमान और अन्य हथियार जल्द मिल सकें. अभी विदेशी हथियार खरीदने की प्रक्रिया लंबी और जटिल मानी जाती है.  114 राफेल को भारत में बनाने की मंजूरी मैक्रों के दौरे से पहले रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल विमान देश में बनाने की मंजूरी दी थी. राफेल विमान फ्रांस की कंपनी दासो एविएशन बनाती है. प्रस्ताव है कि दासो किसी भारतीय कंपनी के साथ साझेदारी कर भारत में उत्पादन प्लांट स्थापित करे. इससे तकनीक हस्तांतरण, स्थानीय रोजगार और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा.  क्या भारत इन राफेल को बेच सकेगा? यहीं सबसे अहम सवाल आता है. साफ तौर पर कहा गया है कि ये 114 राफेल भारतीय वायुसेना की जरूरतों के लिए बनाए जा रहे हैं. यानी इनका उद्देश्य निर्यात नहीं, बल्कि देश की रक्षा क्षमता बढ़ाना है. डील की शर्तों के मुताबिक, विमान का उत्पादन लाइसेंस और तकनीकी समझौते के तहत होगा. ऐसे में बिना फ्रांसीसी कंपनी और सरकार की अनुमति के भारत इन विमानों को तीसरे देश को नहीं बेच सकता है.  रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भविष्य में निर्यात का विकल्प खुलता भी है, तो वह अलग समझौते और संयुक्त अनुमति के तहत ही संभव होगा. 

शिवराज सिंह चौहान बोले—किसानों के हित सर्वोपरि, समझौता किसी कीमत पर नहीं

नई दिल्ली केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र में केंद्र सरकार की ओर से किए गए कार्यों की तारीफ की। उन्होंने कहा कि आज की तारीख में कृषि क्षेत्र में हालात सुधरे हैं। वहीं शेष विसंगतियों को दूर करने की दिशा में काम किया जा रहा है। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि इस दिशा में किसी भी प्रकार की कोताही ना बरती जाए। उन्होंने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली का ही नतीजा है कि आज हम चावल के उत्पादन में शीर्ष स्थान पर आ चुके हैं। गेहूं के उत्पादन की मात्रा में भी इजाफा देखने को मिला है। खाद्यान्न का 33 फीसद हिस्सा बढ़ा है और हमें पूरा विश्वास है कि आगामी दिनों में हम इसी दिशा में काम करते रहेंगे। हमने इस संबंध में पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। हम उसी के अनुरूप अभी काम कर रहे हैं।  केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हम इस चीज को लेकर भी चिंतित हैं कि भारत पूरी दुनिया का फूड बास्केट बन जाए। हम इस पर भी काम कर रहे हैं कि उच्च गुणवत्ता वाले फल और सब्जियों का उत्पादन कैसे कर सकते हैं। हम इस पूरी प्रक्रिया के सरलीकरण की दिशा में भी काम कर रहे हैं। हमारी सरकार की यही कोशिश है कि किसानों को किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़े। हमारी सरकार की हमेशा से यही कोशिश रही है कि किसानों के हितों पर किसी भी प्रकार का कुठाराघात न हो। किसान हमारे देश की धुरी हैं। ऐसे में हम उनके हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं कर सकते हैं। इसके अलावा, उन्होंने भारत विस्तार प्लेटफॉर्म के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भारत विस्तार एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जिसका संबंध किसानों के लिए सरकार द्वारा दी गईं सुविधाओं से है। अब किसानों को कहीं पर भी जाना नहीं होगा। इस प्लेटफॉर्म पर किसानों की समस्याओं से संबंधित हर प्रकार का समाधान मौजूद है। इस प्लेटफॉर्म के जरिए हम यही कोशिश कर रहे हैं कि किसानों के हितों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाए। केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि भारत विस्तार प्लेटफॉर्म का यूज करने के लिए आपके पास किसी भी प्रकार का आईटी जैसा ज्ञान होने की आवश्यकता नहीं है। आप इस प्लेटफॉर्म पर कृषि से संबंधित किसी भी प्रकार का सवाल करेंगे, तो आपको उसका जवाब मिल जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में हम भारत विस्तार प्लेटफॉर्म को विभिन्न भाषाओं में लॉन्च करेंगे। इस प्लेटफॉर्म के जरिए किसानों को उन्हें हर प्रकार की समस्याओं का समाधान विभिन्न प्रकार की भाषाओं में प्राप्त हो जाएगा। इस दिशा में उन्हें किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना नहीं करना होगा। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि विज्ञान मेले को लेकर भी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस मेले के जरिए हम किसानों को विभिन्न प्रकार की जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। इस मेले में कई लोग शामिल होंगे। ऐसे में यह मेला हमारे लिए काफी अहम हो जाता है। हमारी कोशिश है कि इस मेले के आयोजन में किसी भी प्रकार की समस्या का सामना नहीं करना पड़े। उन्होंने कहा कि इस मेले के जरिए हम कृषि क्षेत्र में होने वाले परिवर्तनों के बारे में किसानों को विस्तार से बता रहे हैं। हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जब किसानों को इस बारे में पूरी जानकारी दी जाए, तो उन्हें कल को खेतीबाड़ी करते समय किसी भी प्रकार की समस्याओं का सामना नहीं करना पड़े।

इस्राइल के साथ खड़ा भारत: संसद में पीएम मोदी ने कहा—हमास हमले के बाद आपका दर्द हमारा भी है

तेल अवीव पीएम मोदी ने इजरायल को फादर लैंड और  इंडिया को मदरलैंड बताया और कहा कि हमें इस पर गर्व है. उन्होंने कहा कि विश्व युद्ध के दौरान हजारों भारतीयों ने इस इलाके में अपनी जान कुर्बान की थी. उन्होंने मेजर ठाकुर दलपत सिंह को हीरो ऑफ हाइफा बताया. भारत इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा हैः पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि भारत इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा है.  उन्होंने कहा कि कोई भी चीज आतंकवाद को जस्टिफाई नहीं कर सकती. भारत भी आतंकवाद का लंबे समय से पीड़ित रहा है. मुंबई हमलों को याद करते हुए कहा कि इस हमले में इजरायली नागरिक समेत बहुत से लोग मारे गए थे.  इसी के बाद हमने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है. इजरायल की मान्यता और मेरे जन्मदिन का अनोखा नाताः पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि इजरायली संसद नेसेट को भारतीय रंगों में रंगा गया है, ये हमारे बीच गहरे संबंधों का प्रतीक है. पिछली बार जब मैं आया था, तब ऐसा करने वाला भारत का पहला प्रधानमंत्री बना था. अब मैं दूसरी बार आया हूं. उन्होंने बताया कि मेरा जन्म उसी दिन हुआ, जिस दिन भारत ने इजरायल को मान्यता दी थी.   इजरायली संसद में आना मेरे लिए सम्मान की बातः पीएम मोदी पीएम मोदी ने नमस्ते से शुरूआत करते हुए कहा कि यह मेरे लिए सम्मान की बात है कि मैं इस प्रतिष्ठित सदन में खड़ा हूं. भारत के प्रधानमंत्री के रूप में, दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यता के प्रतिनिधि के रूप में, मैं 1.4 अरब लोगों की शुभकामनाएं और संदेश लेकर यहां आया हूं. मोदी-मोदी के नारों के बीच पीएम मोदी का संबोधन शुरू इजरायली संसद को मोदी-मोदी के नारों के बीच पीएम मोदी ने अपना संबोधन शुरू किया. पीएम मोदी और मैंने कई चमत्कार किए हैं, बोले नेतन्याहू इजरायली पीएम नेतन्याहू ने भूमध्यसागर के तट पर पीएम मोदी के साथ पिछली यात्रा को याद करते हुए कहा कि भारत और इजरायल ने मिलकर कई चमत्कार जरूर किए हैं. 'भारतीय सैनिकों ने इजरायल के लिए अपनी जान दी, नहीं भूलेंगे ' इजरायली पीएम नेतन्याहू ने कहा कि भारतीय सैनिकों ने इजरायल के लिए अपनी जान दी है. इसे हम कभी नहीं भूलेंगे.   नेतन्याहू ने कहा, मोदी का गले लगाना दुनिया में मशहूर नेतन्याहू ने कहा कि पीएम मोदी के गले लगाने की परंपरा का जिक्र करते हुए कहा कि 'मोदी हग' की वजह ने भारत और इजरायल के बीच संबंधों को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है. नेतन्याहू ने कहा कि हम दोनों के बीच व्यक्तिगत दोस्ती है. दोनों देशों और हमारे लोगों के बीच भी शानदार दोस्ती रही है. आज सुबह मेरी पत्नी सारा और मैंने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया. जैसे ही आप सीढ़ियों से नीचे आए, हमने एक-दूसरे को गले लगा लिया. प्रधानमंत्री मोदी का गले लगना कुछ खास है. इसे मोदी हग कहा जाता है. यह दुनिया भर में मशहूर है, और जब आप किसी को करीब से सच में गले लगाते हैं, तो आप जानते हैं कि यह कोई दिखावा नहीं है, यह असल है. नेतन्याहू ने पीएम मोदी को बताया अपना भाई नेतन्याहू ने पीएम मोदी के लिए कहा कि वह मेरे लिए मित्र से बढ़कर हैं, मेरे भाई की तरह हैं. नेतन्याहू ने पीएम मोदी को कहा- माई डियर फ्रेंड इजरायली पीएम नेतन्याहू ने अपने संबोधन में पीएम मोदी को माई डियर फ्रेंड कहकर संबोधित किया.  उन्होंने पीएम को ग्रेट लीडर कहकर संबोधित किया. पीएम मोदी को इजरायली संसद में मिला स्टैंडिंग ओवेशन इजरायली संसद में पीएम मोदी का सभी ने खड़े होकर स्वागत किया. मोदी-मोदी के नारों के बीच जय हिंद भी गूंजा. मोदी-मोदी के नारों के बीच इजरायली संसद में गूंजा- जय हिंद इजरायल की संसद में मोदी-मोदी के नारों के बीच प्रधानमंत्री का स्वागत किया गया. इजरायली स्पीकर ने कहा कि पीएम मोदी लोगों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं. उन्होंने कहा कि उन्होंने डिजिटल इनोवेशन की नींव रखी और लाखों लोगों की जिंदगी की नई दिशा. जय हिंद और भारत जिंदाबाद के नारों के बीच कहा कि पीएम मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं, जो इजरायली संसद नेसेट को संबोधन करने वाले हैं. तेल अवीव के होटल में प्रधानमंत्री का भव्य स्वागत पीएम मोदी का तेल अवीव के होटल पहुंचने पर रंगारंग स्वागत किया गया. इजरायली और भारतवंशी कलाकारों ने देसी अंदाज में नृत्य-संगीत से समां बांध दिया. भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों ने उनका जोरदार स्वागत किया.

प्रदेश की दीदियों के बनाए उत्पाद अब अमेजन सहेली, इंडिया पोस्ट और अन्य ई-प्लेटफार्म पर होंगे उपलब्ध

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि आजीविका मिशन से जुड़ी दीदियाँ एकता की शक्ति का सजीव उदाहरण है। बहनों द्वारा एकजुटता से किए जा रहे प्रयास 'बंद मुट्ठी लाख की' के भाव को चरितार्थ करते हुए देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। बहनें आज ट्रैक्टर से लेकर ड्रोन तक चलाने के साथ गैस और पेट्रोल रिफिलिंग जैसे कार्य भी कर रही हैं। कैफे संचालन से लेकर मार्केट का टारगेट पूरा करने में अव्वल बहनें अचार, पापड़ निर्माण सहित कई छोटे उद्योगों से बेहतर कमाई कर रही हैं। भारतीय संस्कृति में मातृ सत्ता का विशेष महत्व है। राज्य सरकार के प्रयासों से प्रदेश की बहनें सशक्त हो रही हैं। प्रदेश के 5 लाख स्व-सहायता समूहों से 65 लाख से अधिक दीदियां जुड़कर सशक्त हुई हैं। इनमें से 12 लाख से अधिक दीदियां लखपति दीदी बन चुकी हैं। राज्य सरकार प्रदेश की बहनों के सशक्तिकरण के लिए संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व-सहायता समूहों ने एक वर्ष में विभिन्न कंपनी और मेलों के माध्यम से 310 करोड़ रुपए का व्यापार किया है। मध्यप्रदेश, देश का सर्वाधिक प्राकृतिक खेती वाला राज्य है। हमारे स्व-सहायता समूहों की 50 हजार बहनें प्राकृतिक खेती में जुटी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में महिला बाल विकास विभाग में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। साथ ही बजट का कुल 34 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण विकास पर खर्च किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में स्वसहायता समूहों की आजीविका मिशन क्षमतावर्धन कार्यशाला का शुभारंभ कर कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यशाला में पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल, कौशल विकास मंत्री  गौतम टेटवाल और पंचायत और ग्रामीण विकास राज्यमंत्री मती राधा सिंह उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभिन्न जिलों के स्व सहायता समूहों की दीदियों द्वारा लगाए गए विभिन्न उत्पादों के स्टालों का अवलोकन कर दीदियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदर्शनी स्थल पर ग्राम छावनी पठार के मिलेट्स कैफे पर स्वादिष्ट व्यंजनों का लुत्फ लिया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना के 7 वाहनों को झंडी दिखाकर रवाना किया। मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन की दीदीयों द्वारा तैयार स्पेशल होली हैम्पर को लाँच किया गया। इसमें प्राकृतिक रंग, देशी घी, मिष्ठान, गोकाष्ठ, पूजन सामग्री और टीशर्ट जैसे 10 उत्पाद शामिल हैं। उज्जैन, सागर, कटनी, सीहोर, रीवा जिले की दीदीयों द्वारा तैयार होली हैम्पर पर केंद्रित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने समुदाय प्रबंधित प्रशिक्षण केंद्र (सीएमटीसी) का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में प्रशिक्षण केन्द्र पर लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आजीविका मार्ट ग्वालियर, जबलपुर एयरपोर्ट पर स्व-सहायता समूहों के रिटेल आउटलेट और संभागीय एवं जिला स्तर पर होली मेलों का वर्चुअली शुभारंभ किया। कार्यशाला में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षण मॉड्यूल का विमोचन भी किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में मध्यप्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के साथ (एमपीएसआरएलएम) इंडिया पोस्ट, अमेजन सहेली, एक्सेस डेवलपमेंट सर्विस, बुद्धा इंस्टीट्यूट, टीआरआईएफ और साइटसेवर संस्थान के साथ एमओयू का आदान-प्रदान हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उत्कृष्ट कार्य करने वालीं स्व-सहायता समूहों की 5 दीदियों को सम्मानित किया। कार्यशाला में विपणन क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली गुना जिले की मती मीनाक्षी फरागते ने अपनी सफलता की कहानी सभी के साथ साझा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महिला उद्यमिता के इतिहास का आज स्वर्णिम दिन है। पारिवारिक स्तर पर मां-बेटियों-बहनों के हाथों से बने व्यंजन पूरे परिवार में आनंद का संचार करते हैं और यह व्यंजन ही त्यौहार की प्रसन्नता का आधार बनते हैं। आजीविका मिशन द्वारा हमारी बहनों के हाथों से बनी सामग्री को वैश्विक बाजार से जोड़ने की पहल सराहनीय है। भारतीय संस्कृति में ऋतुओं से व्यंजनों तथा अन्य उपयोगी सामग्री बनाने का विशेष संबंध है। क्षमतावर्धन की आज की कार्यशाला हमारी बहनों के हुनर और कर्मठता को नई दिशा प्रदान करेगी। घर से निकलकर बैंकों और शासन के सहयोग से स्वयं को व्यापारिक गतिविधियों में सफलतापूर्वक स्थापित करने की बहनों की पहल ने ग्राम स्तर पर विकास को नई गति दी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार बहनों को प्रशिक्षण के साथ आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध करा रही है। बहनें अपने समूह की शक्ति को बढ़ाएं और नई मंजिलें प्राप्त करें, राज्य सरकार सदैव उनके साथ है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  पटेल ने कहा कि स्वसहायता समूहों की दीदियों ने सफलता का मुकाम हासिल किया है। हमारी मातृ शक्ति अपनी क्षमता के बल पर आगे बढ़ रही है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी ने देश के विकास में दीदियों की महत्वपूर्ण भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने में बहनों का महत्वपूर्ण योगदान होगा। मंत्री  पटेल ने कहा कि स्वावलंबन की दिशा में अग्रसर महिलाओं की सफलता केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके प्रमाण आँकड़ों और जमीनी स्तर पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने बहनों से बदलती तकनीक के साथ स्वयं को अपडेट रखते हुए आगे बढ़ने का आव्हान किया। मंत्री  पटेल ने कहा कि मध्यप्रदेश भौगोलिक रूप से देश के बीच में स्थित है, देश का अधिकांश आवागमन मध्यप्रदेश से होता है, इस स्थिति का लाभ उठाते हुए हमें अपने व्यापार-व्यवसाय को बढ़ाने के हरसंभव प्रयास करना चाहिए। उन्होंने आजीविका मिशन के डाक विभाग के साथ हुए एमओयू के संबंध में कहा कि इससे समूहों के उत्पादकों की सप्लाई चेन मजबूत होगी। मंत्री  पटेल होली के अवसर पर नशा और अकर्मण्यता की बुराई को जलाने का सभी से आहवान किया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी मध्यप्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन मती हर्षिका सिंह ने कहा कि यह कार्यशाला विभिन्न जिलों के स्व-सहायता समूहों की दीदियों को उत्पादन और मार्केटिंग में सहायता व मार्गदर्शन प्रदान करेगी। इस कार्यशाला से प्रदेश के विभिन्न जिलों से समूहों को अपने उत्पाद राजधानी भोपाल में प्रदर्शित करने का अवसर प्राप्त हुआ है। आजीविका ग्रामीण एक्सप्रेस योजना में प्रदेश के 6 जिले- बैतूल, विदिशा, राजगढ़, कटनी, ग्वालियर एवं भोपाल से 7 एजीईवाय गाड़ियों को हरी झंडी दिखाई गई … Read more

‘अब नहीं होंगे हिडन चार्जेज…’ RBI ने बैकों को दिए आदेश, ऐप से हटाएं धोखाधड़ी वाली ट्रिक्स

नई दिल्ली आपके साथ भी ऐसा होता होगा कि आप अपने बैंक का ऐप खोलते हैं और उसमें अतिरिक्त सेवाओं को खरीदने के लिए बार-बार मैसेज या नोटिफिकेशन आने लगते हैं. इनमें से कई मिडलीडिंग भी होते हैं. या फिर चेकआउट के समय आपको हिडन शुल्क दिखाई दिए हों, तो आप अकेले ऐसे यूजर नहीं हैं. अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ऐसे मामलों में सख्त नजर आ रहा है और डिजिटल बैंकिंग को अधिक पारदर्शी बनाने के क्रम में बैंकों को कड़ा आदेश दिया है.  आरबीआई ने कहा- 'हटा लें ये सब…' केंद्रीय बैंक ने अब 'Responsible Business Conduct Amendment Directions, 2026', के ड्राफ्ट में बैंकों को सख्त निर्देश दिया है. आरबीआई ने कहा है कि बैंक जुलाई 2026 तक अपनी वेबसाइटों और मोबाइल ऐप से सभी डार्क पैटर्न (Dark Patterns) हटा दें, जो कि ग्राहकों को गुमराह करने या उन पर दबाव डालने के लिए डिजाइन की गई ट्रिक्स हैं. इसमें बैंकों द्वारा वित्तीय उत्पादों और किसी भी सेवा की पेशकश से पहले ग्राहक की स्पष्ट सहमति अनिवार्य रूप से लें. RBI के इस कदम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों को उचित जानकारी के बिना उत्पाद खरीदने या शुल्क चुकाने के लिए गुमराह कतई न किया जाए. बैंकों को ग्राहक की स्पष्ट अनुमति के बिना वित्तीय उत्पादों को एक साथ बेचने पर भी रोक लगा दी जाएगी. RBI क्यों डार्क पैटर्न पर सख्त?  डार्क पैटर्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस्तेमाल की जाने वाली ऐसी डिजाइन तकनीकें हैं, जिनका उद्देश्य यूजर के व्यवहार को प्रभावित करना होता है, जिसे वे आसानी से पूरी तरह समझ न सकें. इनमें हिडन चार्ज, भ्रमित करने या प्रलोभन देने वाले विकल्प या फिर ग्राहकों को अतिरिक्त सेवाएं स्वीकार करने के लिए बार-बार प्रेरित करने वाले संकेत शामिल हो सकते हैं. बैंकों को इन ट्रिक्स पर रोक के संबंध में आरबीआई द्वारा दिए गए निर्देश, ये सुनिश्चित करने के लिए हैं, कि ग्राहकों को ठीक से पता हो कि वे किस चीज के लिए साइन-अप कर रहे हैं. यानी वे गुमराह न हों.  सर्वे में हुआ ये बड़ा खुलासा  इंडिया टुडे पर छपी रिपोर्ट के मुताबिक, लोकलसर्कल्स द्वारा किए गए एक सर्वे से पता चलता है कि इस तरह की ट्रिक्स का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है. RBI का यह कदम इस सर्वे के परिणामों के बाद आया है. इसमें 388 जिलों के 1,61,000 से अधिक लोगों से प्रतिक्रियाओं को शामिल किया गया. निष्कर्षों से पता चला है कि इस तरह की गुमराह करने वालीं डार्क पैटर्न ट्रिक्स कई ऑनलाइन बैंकिंग प्लेटफार्मों पर आम बात हैं. सर्वे में शामिल यूजर्स ने बताया कि हिडन चार्ज के बारे में खुलासा शुरुआत में स्पष्ट रूप से नहीं किया जाता है और किसी भी प्रक्रिया के अंत में इन छिपे हुए शुल्कों का सामना ग्राहक को करना पड़ता है. इसके अलावा ग्राहकों को अतिरिक्त सेवाओं को एक्टिव करने के लिए बार-बार नोटिफिकेशन परेशान करने वाले होते हैं.  जुलाई तक हटाने होंगे डार्क पैटर्न बैंकों को जुलाई 2026 तक डार्क पैटर्न को पूरी तरह से हटाने और नए नियमों का पालन करने का समय दिया गया है. RBI द्वारा मोबाइल बैंकिंग (Mobile Banking) पर लोगों की बढ़ती निर्भरता को देखते हुए ये कदम उठाया गया है, जो डिजिटल वित्तीय सेवाओं को आसान, निष्पक्ष और अधिक भरोसेमंद बनाने के लिए है. 

जनजातीय, गरीब परिवार को शासन की योजनाओं का लाभ दिलाना सर्वोच्च प्राथमिकता

भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि शिक्षा से ही जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त होता है। शिक्षा जीवन में प्रगति का आधार है। प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने जनजातीय और वंचितों को शासन की योजनाओं का प्राथमिकता से लाभ दिलाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से समाज के अंतिम व्यक्ति का सशक्तिकरण संभव होगा। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल मऊगंज जिले के हनुमना जनपद अंतर्गत दूरस्थ जनजातीय धरती आबा ग्राम सलैया खास में आयोजित कार्यक्रम में बुधवार को शामिल हुए। राज्यपाल  पटेल ने कहा कि बिरसा मुंडा के त्याग से प्रेरणा लेकर जनजातीय समाज के उत्थान के लिए कार्य करना चाहिए। उन्होंने बताया कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत 18 विभागों की योजनाओं का लाभ जनजातीय परिवारों को मिलेगा। उन्होंने जनजातीय युवाओं का शिक्षित होकर समाज को जागरूक करने और मुख्यधारा में शामिल करने के प्रयासों में सहयोग करने का आह्वान किया। उन्होंने महिला सशक्तिकरण में स्वसहायता समूहों के योगदान की सराहना की। सिकल सेल उन्मूलन के लिए संवेदनशील प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी द्वारा 15 हजार करोंड़ रूपये के प्रवाधान की जानकारी दी। प्रधानमंत्री के प्रति आभार प्रदर्शन किया। उन्होंने निक्षय मित्र योजना, उज्ज्वला योजना सहित अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए अधिकारियों को प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित किया। राज्यपाल  पटेल के सिकल सेल उन्मूलन प्रयासों की सराहना सांसद  जनार्दन मिश्र ने की। उन्होंने सलैया मार्ग निर्माण के लिये सांसद निधि से राशि उपलब्ध कराने की जानकारी दी। विधायक  प्रदीप पटेल ने कहा कि हनुमना क्षेत्र के 144 ग्रामों को धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना से जोड़कर जनजातीय विकास और मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम में राज्यपाल  पटेल का जनजातीय पारंपरिक नृत्य शैला एवं कर्मा से स्वागत हुआ। भगवान बिरसा मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ शुभारंभ हुआ। राज्यपाल ने हितलाभ वितरण एवं प्रदर्शनी का किया अवलोकन राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों को हितलाभ का वितरण किया। इस अवसर पर राज्यपाल द्वारा जनजातीय नायकों मोतीलाल बैगा, सुदर्शन सिंह गोड़ तथा जगन्नाथ कोल का शॉल और फल से सम्मान किया। कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली। राज्यपाल ने हितग्राहियों को योजनाओं का अधिकतम लाभ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। राज्यपाल ने ग्रामीण चौपाल में किया जनसंवाद राज्यपाल  पटेल ने मऊगंज जिले के ग्राम सलैया खास में प्रथम प्रवास के दौरान ग्रामीण चौपाल में जनसंवाद किया। उन्होंने ग्रामीणों और अधिकारियों से आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य एवं पोषण सेवाओं की जानकारी ली। जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और अंतिम व्यक्ति तक विकास को पहुंचाने पर जोर दिया।  

मध्य प्रदेश में गौशालाओं की देखरेख करेंगे ऑस्ट्रेलिया और दुबई की संस्थाएं, 3 माह में सड़कों पर गायें नहीं दिखेंगी

भोपाल मध्य प्रदेश में सड़कों पर घूम रहे गौवंश को स्थायी आसरा देने का वर्किंग प्लान और उसकी समय सीमा तय हो गई है. प्रदेश की मोहन सरकार में पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने विधानसभा में इसकी जानकारी दी है. विधानसभा में कांग्रेस नेता अजय सिंह और कैलाश कुशवाहा द्वारा प्रदेश में निराश्रित पशुओं का मुद्दा ध्यानाकर्षण में उठाया था. चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार को सुझाव दिया कि गौपालकों को प्रति गौवंश 40 रुपए के हिसाब से राशि दी जानी चाहिए. मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि मध्य प्रदेश में गौशालाओं के संचालन के लिए दुबई और ऑस्ट्रेलिया की संस्थाएं भी आगे आई हैं. कामधेनु निवास के लिए 7 स्थानों पर जमीन चिन्हित पशुपालन मंत्री लखन पटेल ने कहा कि "सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित गौवंश के लिए प्रदेश में स्वावलंबी गौशालाओं कामधेनु निवास के लिए प्रदेश में 29 स्थान चयनित कर लिए गए हैं. उधर 7 स्थानों पर राजस्व विभाग द्वारा पशुपालन विभाग को जमीन आवंटित कर दी गई है. इसके तहत जबलपुर में 461 एकड़, रायसेन में 320 एकड़, सागर में 411 एकड़, अशोकनगर में 293 एकड, खरगौन में 133 और रीवा में 135 एकड़ भूमि आवंटन सहित 7 स्थान पर काम चल रहा है." उन्होंने कहा कि "अगले 10 दिनों में गौशाला बनाने के लिए अनुबंध की प्रक्रिया भी पूरी कर ली जाएगी. जल्द ही इनका भूमि पूजन किया जाएगा. मंत्री ने दावा किया कि देश में यह पहली योजना है, जिसमें निराश्रित गौवंश को रखा जाएगा. मंत्री ने कहा कि इनमें कई गौशालाएं ऐसी होंगी, जिसमें 20 हजार गौवंश को एक स्थान पर रखा जाएगा." दुबई, ऑस्ट्रेलिया की संस्था ने भी डाला टेंडर मंत्री लखन पटेल ने कहा कि "स्वावलंबी गौशालाओं के संचालन के लिए टेंडर प्रक्रिया चल रही है. टेंडर प्रकिया में ऑस्ट्रेलिया और दुबई की भी 2 संस्थाओं द्वारा हिस्सा लिया जा रहा है. टेंडर प्रक्रिया अगले एक माह में पूरी कर ली जाएगी. गौशालाओं को पूरी तरह से तैयार होने में 2 साल का वक्त लेगा. इसके बाद एक भी गौवंश सड़क पर दिखाई नहीं देगा." मंत्री ने सफाई दी कि "गौशालाओं को पूरी तरह से बनने के पहले ही गौवंशों को इनमें पहुंचाना शुरू कर दिया जाएगा. बरसात के पहले सभी गौवंशों को इनमें पहुंचा दिया जाएगा. इसके लिए जरूरी सुविधाएं जल्द से जल्द की जाएंगी."     मंत्री को नेता प्रतिपक्ष का सुझाव आया पसंद ध्यानाकर्षण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि "आमतौर पर दूध देना बंद कर देने के बाद किसान ही गौवंश को छोड़ देता है. जब सरकार गौशालाओं को प्रति गाय के हिसाब से 40 रुपए प्रतिदिन की राशि दे रही है, तो सीधी किसानों को यह राशि क्यों नहीं दी जाती. एआई के दौर में ऐसे पशुपालकों की निगरानी भी की जा सकती है." जवाब में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सुझाव की तारीफ करते हुए कहा कि इस पर सरकार विचार करेगी.