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भारतीय-अमेरिकी टेक लीडर श्रीराम कृष्णन व्हाइट हाउस से अलग होंगे

 नई दिल्ली  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के प्रशासन में सबसे चर्चित भारतीय-अमेरिकी टेक्नोलॉजी सलाहकार श्रीराम कृष्णन इस महीने के आखिर में व्हाइट हाउस में अपना पद छोड़ देंगे। उन्होंने पिछले 18 महीनों में प्रशासन की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) रणनीति को आकार देने में अहम भूमिका निभाई है। सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में कृष्णन ने कहा कि अमेरिका के सामने एआई से जुड़ी बड़ी चुनौतियों पर काम करने के लिए लौटने से पहले वे कुछ समय का ब्रेक लेंगे। उन्होंने लिखा कि मैं इस महीने के आखिर में व्हाइट हाउस में अपना पद छोड़ दूंगा। ब्रेक के बाद, मैं एआई के मामले में अमेरिका के सामने मौजूद कुछ बड़ी चुनौतियों से निपटने में मदद करने के लिए काम करूंगा। कृष्णन ने अपनी सरकारी सेवा को जीवन भर का सौभाग्य बताया और कहा कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप के नेतृत्व में काम करना सम्मान की बात थी। उन्होंने कहा, "उनकी लीडरशिप के बिना, हम एआई की दौड़ में इतने आगे नहीं होते। उन्होंने व्हाइट हाउस के एआई और क्रिप्टो सलाहकार डेविड सैक्स का भी धन्यवाद करते हुए कहा कि एआई के क्षेत्र में अमेरिका की जीत के लिए उनकी लगातार वकालत बहुत अहम रही है और आगे भी रहेगी।" ट्रंप प्रशासन में निभाई अहम भूमिका कृष्णन ने उन कई पहलों का भी जिक्र किया जिन्हें विकसित करने में उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान मदद की। इनमें प्रशासन के अमेरिकन एआई एक्शन प्लान का खाका तैयार करना और उसे जारी करना, वैश्विक स्तर पर अमेरिकी एआई इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए एआई एक्सेलरेशन साझेदारियों को आगे बढ़ाना, और नेशनल एआई पॉलिसी फ्रेमवर्क से जुड़े एग्जीक्यूटिव ऑर्डर में योगदान देना शामिल है। उन्होंने एआई समिट और कूटनीतिक मुलाकातों के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी एआई हितों को बढ़ावा देने में अपनी भूमिका का भी जिक्र किया। उन्होंने लिखा कि दुनिया भर में अपने सहयोगियों के साथ अमेरिकी एआई स्टैक की वकालत करना, जैसे फ्रांस और भारत में एआई समिट, यूनाईटेड किंगडम, मध्य पूर्व और अन्य जगहों की राजकीय यात्राएं हो। भविष्य को देखते हुए, कृष्णन ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का तेजी से विकास नीति और बुनियादी ढांचे से जुड़ी बड़ी चुनौतियां पेश करता है। उन्होंने कहा, "पिछले 18 महीनों में मुझे अमेरिका और हमारे सहयोगियों के सामने मौजूद एआई से जुड़े इस अहम मोड़ को बहुत करीब से देखने का मौका मिला है। चाहे वह ऊर्जा हो, डेटा सेंटर हों या अमेरिकियों के लिए एआई के फायदों का अनुभव करने का स्पष्ट रास्ता हो, कई मुश्किल मुद्दे हैं जिनसे हमें मिलकर निपटना होगा।" उन्होंने बताया कि वे अब ऐसे संस्थान बनाने पर ध्यान केंद्रित करने की योजना बना रहे हैं जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए उन चुनौतियों से निपटने में मदद करें। डेविड सैक्स ने की कृष्णन के काम की तारीफ इस घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए, डेविड सैक्स ने प्रशासन के एआई एजेंडा में कृष्णन के योगदान की तारीफ़ की और संकेत दिया कि यह भारतीय-अमेरिकी टेक्नोलॉजी लीडर सरकार के बाहर से भी सलाह देना जारी रखेंगे। सैक्स ने लिखा, "प्रशासन में मेरे कार्यकाल के दौरान पिछले 18 महीनों में आपके साथ इतनी करीब से काम करना मेरे लिए बहुत बड़े सम्मान की बात रही है। एआई में गहरी तकनीकी समझ, नीतिगत मामलों की सटीक परख, बेहतरीन रणनीतिक सोच और सच्चे कूटनीतिक कौशल का दुर्लभ मेल आपकी क्षमताएं सचमुच अनोखी हैं।" सैक्स ने आगे कहा कि कृष्णन ने प्रशासन के एआई एक्शन प्लान को मिलकर तैयार किया, एआई को तेज़ी से आगे बढ़ाने वाली साझेदारियों को बढ़ावा देने में मदद की, नेशनल एआई पॉलिसी फ्रेमवर्क में योगदान दिया और अंतरराष्ट्रीय एआई समिट और राजकीय यात्राओं में अमेरिकी हितों का प्रतिनिधित्व किया। सैक्स ने कहा, "यह प्रशासन के लिए एक बड़ा नुकसान होगा, लेकिन मुझे खुशी है कि हम आपके साथ बाहरी सलाहकार के तौर पर काम करना जारी रखेंगे।" सिलिकॉन वैली और वाशिंगटन के बीच अहम कड़ी यह विदाई कृष्णन के लिए एक अहम अध्याय का अंत है, जो ट्रंप के व्हाइट हाउस के भीतर एआई नीति पर सबसे प्रभावशाली आवाजों में से एक बनकर उभरे और सिलिकॉन वैली तथा वाशिंगटन के टेक्नोलॉजी एजेंडा के बीच एक अहम कड़ी बने। एक भारतीय-अमेरिकी उद्यमी और टेक्नोलॉजी एग्जीक्यूटिव के तौर पर, कृष्णन ने पहले माइक्रोसॉफ्ट, एक्स, मेटा और स्नैप जैसी बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों में सीनियर प्रोडक्ट और लीडरशिप भूमिकाएं निभाई हैं। वे उभरती हुई टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक जाने-माने इन्वेस्टर और कमेंटेटर भी रहे हैं। एआई ट्रंप प्रशासन की टेक्नोलॉजी और आर्थिक रणनीति का एक मुख्य आधार बन गया है। अधिकारियों का तर्क है कि एआई के क्षेत्र में अमेरिका की लीडरशिप बनाए रखना राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक प्रतिस्पर्धा और तकनीकी इनोवेशन के लिए बहुत जरूरी है। कृष्णन का काम उन्हें इन कोशिशों के केंद्र में ले आया था, क्योंकि वाशिंगटन ग्लोबल एआई पॉलिसी और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को आकार देने की कोशिश कर रहा था।

स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए अहम खबर: कल से शुरू होगी ट्रांसफर आवेदन प्रक्रिया, 3 साल की सेवा की शर्त

भोपाल. स्वास्थ्य विभाग के अफसर-कर्मचारियों की अब ट्रांसफर में मनमानी नहीं चलेगी। मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SAP) जारी की है। जिसके तहत अब एक स्थान पर तीन साल की सर्विस को जरूरी कर दिया है। तीन साल की सर्विस पूरी कर चुके अफसर-कर्मचारियों का ट्रांसफर किया जा सकेगा। इसमें भी अफसर-कर्मचारी मनपसंद जिले या गृह क्षेत्र के आसपास तबादला नहीं करा पाएंगे। इनका स्वेच्छा से किया जाएगा तबादला स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि करंट पोस्टिंग के दौरान सिर्फ गंभीर बीमारी, दिव्यांग, उनके आश्रित की देखभाल, विधावा, परित्यक्ता महिला, सिंगल मदर या फादर बच्चों की परवरिश या एक स्थान पर पति-पत्नी तबादला चाहते हैं तो उनका ट्रांसफर किया जाएगा।  8 से 12 जून तक ऑनलाइन लिए जाएंगे आवेदन स्वास्थ्य विभाग ने अफसर-कर्मचारियों से पांच दिन में आवेदन मांगे हैं। इसके लिए 8 से 12 जून तक की तारीख जारी है। इस बीच अफसर-कर्मचारी ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे।  ई-एचआरएमआईएस पोर्टल पर होगी पूरी प्रोसेस ट्रांसफर की पूरी प्रोसेस ई-एचआरएमआईएस पोर्टल के जरिए की जाएगी। किसी भी पद के लिए ऑफलाइन आवेदन मान्य नहीं किया जाएगा।

24 अरब डॉलर की संपत्ति पर अटका अमेरिका-ईरान शांति समझौता, बढ़ा क्षेत्रीय तनाव

नई दिल्ली  अमेरिकी प्रशासन ईरान द्वारा कुवैत और बहरीन पर किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों से हुए नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण के लिए ईरानी संपत्तियों को खाड़ी देशों की ओर मोड़ने का प्रयास कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने अमेरिका के खाड़ी सहयोगियों को हुए नुकसान की लागत का आकलन करने के लिए टीम को निर्देश दिया है। इसके साथ ही वाशिंगटन भविष्य में इस संघर्ष से होने वाले किसी भी विनाश की मरम्मत के लिए भी ईरानी संपत्तियों के उपयोग पर विचार कर रहा है। $24 बिलियन की रिहाई पर अटका शांति समझौता यह घोषणा ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई के सैन्य सलाहकार मोहसिन रेजई के उस बयान के एक दिन बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच संभावित शांति समझौता अमेरिका द्वारा फ्रीज की गई 24 बिलियन डॉलर की ईरानी संपत्ति की रिहाई पर निर्भर करता है। शुक्रवार को सीएनएन से बात करते हुए रेजई ने इस राशि की रिहाई को विश्वास की अहम परीक्षा और किसी भी व्यापक समझौते की दिशा में एक जरूरी कदम बताया था। इस नए घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच पहले से ही नाजुक संघर्ष विराम प्रयासों के और उलझने का खतरा पैदा कर दिया है। एक अंतरिम समझौते को सुरक्षित करने के चल रहे कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद वीकेंड में फिर से लड़ाई भड़क उठी है। सैन्य तनाव में वृद्धि और ईरानी ठिकानों पर हमला इस बीच पूरे क्षेत्र में सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, समुद्री यातायात के लिए खतरा बने ड्रोनों को इंटरसेप्ट करने के बाद अमेरिकी बलों ने शनिवार तड़के होर्मुज में गोरुक और केशम द्वीप पर ईरानी तटीय रडार प्रतिष्ठानों पर हमला किया। अमेरिकी सेना ने रणनीतिक जलमार्ग के पास दो और ईरानी हमलावर ड्रोनों को मार गिराने का भी दावा किया है। इसके जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें दागीं। कुवैती अधिकारियों ने बताया कि सात बैलिस्टिक मिसाइलें रिहायशी इलाकों के ऊपर से गुजरीं, जिससे संपत्ति का नुकसान हुआ लेकिन कोई जनहानि नहीं हुई। वहीं बहरीन में सायरन बजने के बाद निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने की सलाह दी गई। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि मिसाइलों ने दोनों देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जबकि अमेरिकी सेना ने कहा कि छह मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर लिया गया और सातवीं अपने लक्ष्य तक पहुंचने में विफल रही। क्या है ईरान की मांगें? अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है ताकि एक ऐसा अंतरिम समझौता हो सके जो शत्रुता को रोक दे और परमाणु कार्यक्रम जैसे विवादित मुद्दों पर भविष्य की बातचीत का रास्ता खोले। हालांकि, अब तक कोई खास प्रगति नहीं हुई है। तेहरान अपनी तेल आय के अरबों डॉलर तक पहुंच, कच्चे तेल के निर्यात पर प्रतिबंधों से राहत, बंदरगाहों पर लगी पाबंदियां हटाने और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अधिक नियंत्रण की मांग कर रहा है। इसी बीच मध्यस्थता के प्रयासों के तहत, पाकिस्तान के आंतरिक मामलों के मंत्री मोहसिन नकवी शनिवार को तेहरान पहुंचे। ईरानी मीडिया के अनुसार, वे पाकिस्तान के सेना प्रमुख और प्रधानमंत्री का अयातुल्ला खामेनेई के लिए एक 'विशेष पत्र' लेकर गए हैं। नकवी की ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची सहित कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत करने की उम्मीद है। ईरान की क्षमता पर राष्ट्रपति ट्रंप का बयान यह संघर्ष अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप पर भी दबाव बढ़ा रहा है, जिन्हें ईंधन की बढ़ती कीमतों और युद्ध के कारण होने वाले व्यापक आर्थिक व्यवधानों पर घरेलू आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। एनबीसी न्यूज के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी ऑपरेशनों ने ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं को काफी हद तक कम कर दिया है, लेकिन उन्होंने माना कि तेहरान के पास अभी भी एक बड़ा शस्त्रागार मौजूद है। ट्रंप ने कहा, "उनके पास कुछ मिसाइलें और ड्रोन बचे हैं। प्रतिशत के हिसाब से मैं कहूंगा कि शायद उनकी मिसाइलों का 21% से 22% हिस्सा। यह बहुत सारी मिसाइलें हैं, लेकिन जब हमने पहली बार हमला किया था, तब के मुकाबले यह बहुत कम है।" लेबनान में तनाव दक्षिणी लेबनान में एक सैन्य वाहन पर हुए इजरायली हमले में दो सैन्य अधिकारियों और एक सैनिक की मौत हो गई। इजरायली सेना इस घटना की जांच कर रही है। ईरान ने वाशिंगटन के साथ किसी भी व्यापक समझौते को लेबनान में इजरायल और ईरान समर्थित हिजबुल्लाह आंदोलन के बीच संघर्ष विराम से जोड़ दिया है। हालांकि, इजरायल ने साफ किया है कि उसका सैन्य अभियान जारी रहेगा। यह जटिल क्षेत्रीय विवाद शांति प्रयासों को और उलझा रहा है। बातचीत रुकी हुई है और युद्ध को तीन महीने पूरे हो चुके हैं, ऐसे में किसी स्थायी समझौते की उम्मीदें फिलहाल अनिश्चित बनी हुई हैं।

अब राजस्व रिकॉर्ड के लिए नहीं लगाने होंगे चक्कर, CM साय शुरू करेंगे नई हेल्पलाइन सेवा

रायपुर. सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री विष्णु देव साय शनिवार को गरियाबंद दौरे पर रहे। इस दौरान उन्होंने कहा कि ई-डिस्ट्रिक्ट सेवा को और बढ़ा रहे हैं। जब डॉ. रमन सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे, तब इसकी शुरुआत हुई थी, लेकिन अब 400 से अधिक सेवाओं को इसमें शामिल किया गया है। जनता अपने मोबाइल में ऐप के माध्यम से प्रमाण-पत्र और राजस्व रिकॉर्ड घर बैठे प्राप्त कर सकेगी। सीएम साय ने कहा, इसी महीने हम लोग मुख्यमंत्री हेल्पलाइन प्रारंभ करने जा रहे हैं। एक टोल-फ्री नंबर जनता के पास होगा, जिसके लिए हमारा कार्यालय तैयार है और 100 से अधिक कर्मचारी प्रशिक्षित होकर कार्य के लिए तैयार हो चुके हैं। सीएम ने कहा, आज इस देश का सौभाग्य है कि हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 12 वर्ष पूर्ण हो रहे हैं।पहले यूपीए की सरकार लगातार 10 वर्षों तक रही और उस समय के प्रधानमंत्री एक बड़े अर्थशास्त्री माने जाते थे। इसके बावजूद देश की अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर लंबे समय तक लगभग 10वें स्थान के आसपास बनी रही, लेकिन जब नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने तो अपने अथक परिश्रम, दूरदर्शी नेतृत्व और प्रभावी नीतियों के बल पर उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाते हुए विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में स्थापित कर दिया है। मुख्यमंत्री साय ने कहा, 13 जून को हमारी सरकार के ढाई साल पूरे होने वाले हैं। इन ढाई वर्षों में कहीं भी कोई अपराध हुआ है तो उसकी सख्ती से जांच की गई है और आवश्यक कार्रवाई की गई है। कोई भी दोषी है तो उसे बख्शा नहीं जाएगा।

होर्मुज संकट का असर, गैस सिलेंडर की सप्लाई लागत बढ़ी, सरकार पर बढ़ा बोझ

नई दिल्ली 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलिंडर की सप्लाई की लागत बढ़कर 1,600 रुपये से ज्यादा हो गई है। इससे हर सिलेंडर पर लगभग 700 रुपये का नुकसान (अंडर-रिकवरी) हो रहा है, जिसे सरकार और पब्लिक सेक्टर की मार्केटिंग कंपनियां उठाती हैं। कीमतों में यह बढ़ोतरी इंटरनेशनल बेंचमार्क में हुई तेज वृद्धि के कारण हुई है। होर्मुज स्ट्रेट में रुकावट की वजह से फरवरी से सऊदी अरामको की एलपीजी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस में लगभग 46% की बढ़ोतरी हुई है। होर्मुज में सख्ती के बाद बढ़ी कीमत पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार, रुकावट से पहले फरवरी में प्रोपेन-ब्यूटेन के 50:50 मिक्स के लिए ब्लेंडेड सऊदी CP 542.50 अमेरिकी डॉलर प्रति टन था। होर्मुज में मिडिल ईस्ट गल्फ से होने वाले एक्सपोर्ट पर सख्ती के बाद अप्रैल का कॉन्ट्रैक्ट बढ़कर 775 अमेरिकी डॉलर प्रति टन हो गया और जून में यह और बढ़कर 790 अमेरिकी डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया। इसी दौरान प्रोपेन CP में 39 प्रतिशत और ब्यूटेन में 52 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। इसके साथ ही इम्पोर्ट किए गए मॉलिक्यूल की लैंडेड कॉस्ट भी बढ़ गई, जिससे घरेलू सिलेंडर की इम्पोर्ट-लिंक्ड सप्लाई कॉस्ट 1,600 रुपये से ज्यादा हो गई। दुनिया भर से समसे कम कीमत भारत में कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद, भारतीय घरों में खाना पकाने वाली गैस की कीमतें दुनिया भर में सबसे कम हैं। दिल्ली में आम ग्राहक प्रति सिलिंडर 942 रुपये चुकाते हैं, जो बाजार से जुड़ी कीमत से लगभग 700 रुपये कम है। PMUY उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को हर साल पहले चार रिफिल पर 300 रुपये प्रति सिलिंडर का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर मिलता है, जिससे उन्हें असल में 642 रुपये चुकाने पड़ते हैं। यह उज्ज्वला योजना वाले परिवार की सालाना औसत खपत के बराबर है। 942 रुपये की कीमत पर भी वे अंतरराष्ट्रीय कीमत से लगभग 45% कम भुगतान करते हैं, जबकि उज्ज्वला योजना के तहत 642 रुपये की प्रभावी कीमत अंतरराष्ट्रीय कीमत से लगभग 60% कम है। एक बार फिर बढ़ीं कीमतें वेस्ट एशिया संकट की वजह से लागत बढ़ने के कारण, रविवार से घरेलू एलपीजी सिलिंडर की कीमतों में 29 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। मंत्रालय ने बताया कि घरेलू LPG पर कुल अंडर-रिकवरी (लागत और बिक्री मूल्य के बीच का अंतर) वित्त वर्ष 2025-26 के आखिर तक 60,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई, जो पिछले साल 41,338 करोड़ रुपये थी। केंद्रीय कैबिनेट ने इस मद में मार्केटिंग कंपनियों को 30,000 करोड़ रुपये का मुआवजा देने को मंजूरी दी है। मंत्रालय ने कहा कि उज्ज्वला ग्राहकों के लिए 300 रुपये प्रति सिलेंडर की सब्सिडी इस अंडर-रिकवरी के अलावा है और यह 10.58 करोड़ से ज्यादा कनेक्शन तक पहुंचती है। होर्मुज में रुकावट के बावजूद सप्लाई सुरक्षित बनी रही। भारत उन कुछ देशों में से एक था जिन्होंने एनर्जी कार्गो की सप्लाई जारी रखी। इम्पोर्ट में कमी की भरपाई के लिए घरेलू LPG प्रोडक्शन को 60% से ज्यादा बढ़ाकर 52 TMT कर दिया गया। सप्लाई के लिए अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे नए देशों को भी शामिल किया गया। साथ ही, सब्सिडी वाली घरेलू LPG की कमर्शियल मार्केट में लीकेज को रोकने के लिए OTP-आधारित डिलीवरी वेरिफिकेशन और डायवर्जन-रोधी उपायों को लगभग 90% तक बढ़ाया गया। अन्य देशों में गैस सिलिंडर के दाम नतीजतन, भारत में सिलेंडर की कीमतें पड़ोसी देशों और विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में काफी कम हैं। पाकिस्तान 1,046 रुपये, नेपाल 1,207 रुपये, बांग्लादेश 1,225 रुपये, श्रीलंका 1,241 रुपये, अमेरिका 1,755 रुपये, ऑस्ट्रेलिया 1,765 रुपये, कनाडा 2,411 रुपये। मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से सब्सिडी वाले इस संसाधन को बचाने के लिए खाना पकाने के ऐसे तरीकों को अपनाने का आग्रह किया जो ऊर्जा की बचत करते हों।  

खेती के साथ कमाई का मजबूत विकल्प बना डेयरी व्यवसाय, विभाग दे रहा हर संभव सहयोग

रायपुर. प्रदेश के ग्रामीण किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कृषि के साथ ही अन्य व्यवसायों से जोड़ा जा रहा है। इसी कड़ी में महासमुंद जिले में कृषि के साथ-साथ पशुपालन से ग्रामीणों की आजीविका से जोड़ा गया है। जिले में करीब 1,78,533 गौवंशीय एवं 12,776 भैंसवंशीय सहित कुल 1,91,309 पशुधन उपलब्ध है। जिले में वर्तमान में दुग्ध उत्पादन एवं दुग्ध व्यवसाय लगातार प्रगति पर है तथा प्रतिदिन बड़ी मात्रा में दूध का क्रय-विक्रय किया जा रहा है। पशुधन विकास विभाग क जानकारी के अनुसार देवभोग दुग्ध महासंघ द्वारा जिले से प्रतिदिन लगभग 17 हजार 200 लीटर दूध क्रय किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त निजी डेयरियों द्वारा भी किसानों से बेहतर दर एवं समय पर भुगतान कर बड़ी मात्रा में दूध खरीदा जा रहा है। निजी डेयरियों में हर्षन डेयरी सरायपाली द्वारा प्रतिदिन 6000 लीटर, शारदा डेयरी सरायपाली द्वारा 4000 लीटर, प्रगति डेयरी सरायपाली द्वारा 2000 लीटर, शारदा डेयरी पिथौरा द्वारा 4000 लीटर तथा गाया डेयरी महासमुंद द्वारा प्रतिदिन 1000 लीटर दूध क्रय किया जा रहा है। इस प्रकार निजी डेयरियों द्वारा प्रतिदिन लगभग 17 हजार लीटर दूध खरीदा जा रहा है। देवभोग दुग्ध महासंघ एवं निजी डेयरियों को मिलाकर जिले से प्रतिदिन लगभग 34 हजार लीटर दूध का विक्रय दुग्ध समितियों के माध्यम से किया जा रहा है, जो विगत वर्ष की तुलना में अधिक है। यहां जिले में किसानों को दुग्ध विपणन का कार्य में दुग्ध सहकारी समितियों से जोड़ा गया है। पहले 131 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित है, वहीं शासन की सहकारिता से समृद्धि की मंशानुरूप 25 नई दुग्ध सहकारी समितियों का गठन किया गया है। वर्तमान में जिले में कुल 156 सक्रिय दुग्ध समितियां संचालित हैं तथा 30 नई समितियां प्रारंभ करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से पशुपालक किसानों को उन्नत हरा चारा उत्पादन एवं साईलेज निर्माण हेतु लगातार प्रेरित किया जा रहा है। हरा चारा एवं साईलेज पशुओं के लिए संतुलित एवं पौष्टिक आहार का प्रमुख स्रोत है, जिससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर रहता है तथा दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि होती है। वर्षभर हरे चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु साईलेज निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है। अब तक 32 पशुपालकों को टाँक डेयरी फार्म, सेमरिया जिला रायपुर का भ्रमण कराकर साईलेज निर्माण की तकनीकी जानकारी प्रदान की गई है तथा 16 हितग्राहियों को चारा उत्पादन एवं साईलेज निर्माण हेतु अनुदान उपलब्ध कराया गया है। साथ ही पशुपालकों को नेपियर, बरसीम, अजोला आदि हरे चारे के उपयोग हेतु कृषक संगोष्ठियों के माध्यम से लगातार प्रेरित किया जा रहा है। जिले में उन्नत नस्ल के पशुओं की संख्या बढ़ाने हेतु कृत्रिम गर्भाधान कार्य निरंतर किया जा रहा है। इस तकनीक से अधिक संख्या में मादा बछियों का उत्पादन संभव हो रहा है, जिससे भविष्य में दुग्ध उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा पशुपालकों को उन्नत नस्ल की दुधारू गायें प्राप्त होंगी। जिले में महिला स्व-सहायता समूहों एवं ग्रामीण परिवारों को भी डेयरी व्यवसाय से जोड़ने हेतु विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। महिला हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान पर 2-2 गायों का वितरण किया जा रहा है, जिसके अंतर्गत अब तक 94 पशुपालकों को लाभान्वित किया जा चुका है। इससे महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है तथा उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा गया है। इसी प्रकार राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (छक्क्ठ) द्वारा महासमुंद जिले के 50 आदिवासी परिवारों के लिए गाय वितरण योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के माध्यम से आदिवासी परिवारों को दुग्ध व्यवसाय से जोड़कर उनकी आय में वृद्धि एवं आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिले में दुग्ध उत्पादन एवं विपणन की स्थिति लगातार मजबूत एवं प्रगतिशील बनी हुई है।

63 लाख राशन कार्डधारकों पर लटकी तलवार, SIR में नाम कटते ही शुरू हुई बड़ी जांच

कोलकत्ता  पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य के खजाने पर बढ़ रहे अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कम करने और सरकारी योजनाओं में हो रही धांधली को रोकने के लिए एक बड़ा अभियान शुरू किया है। सरकार ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की खाद्य साथी योजना के तहत मुफ्त और सस्ते अनाज का लाभ ले रहे अपात्र और फर्जी लाभार्थियों को बाहर निकालने का फैसला किया है। गुरुवार को खाद्य एवं आपूर्ति विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक आदेश के मुताबिक, विशेष गहन समीक्षा 2026 (SIR) के नतीजों के आधार पर उन सभी राशन कार्डों को चिह्नित कर डिलीट किया जाएगा जो नियमों के तहत अयोग्य पाए गए हैं। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से जिन 63 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं, उनकी पहचान की जाएगी और उनके राशन कार्ड तुरंत रद्द कर दिए जाएंगे। हालांकि, सरकार ने इसमें एक मानवीय और कानूनी पहलू को भी शामिल किया है। आदेश में कहा गया है कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से कटे हैं, लेकिन उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत नागरिकता के लिए आवेदन किया है या ट्रिब्यूनल के समक्ष अपील की है उनके राशन कार्ड तब तक एक्टिव रहेंगे जब तक कि उनकी याचिकाओं पर अंतिम फैसला नहीं आ जाता। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा कुछ दिनों पहले शुरू की गई अन्नपूर्णा योजना के लिए सरकार ने एक नया आवेदन फॉर्म भी पेश किया है। सरकार को संदेह है कि पिछली सरकार की लक्ष्मी भंडार योजना के तहत लगभग 30 लाख से अधिक अपात्र महिलाएं वित्तीय सहायता ले रही थीं। नई अन्नपूर्णा योजना के तहत राज्य सरकार लगभग दो करोड़ महिलाओं को 3,000 रुपये प्रति माह की आर्थिक सहायता देगी। इस योजना पर राज्य सरकार को हर साल करीब 72,000 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे। इसके विपरीत, पिछली तृणमूल कांग्रेस की सरकार लक्ष्मी भंडार योजना को चलाने के लिए सालाना लगभग 30,000 करोड़ रुपये खर्च करती थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "राज्य का खजाना इस वक्त बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है और राजस्व को तुरंत बढ़ाना मुमकिन नहीं है। इस अतिरिक्त वित्तीय बोझ को संभालने के लिए फंड के दुरुपयोग और लीकेज को रोकना बेहद जरूरी है।" 15,000 करोड़ की लीकेज रोकने की तैयारी अधिकारियों के मुताबिक, खाद्य साथी योजना के तहत सालाना करीब 15,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं, जिसके जरिए करीब दो करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज दिया जाता है और किसानों से सीधे धान की खरीद की जाती है। सरकार को अंदेशा है कि टीएमसी (TMC) शासन के दौरान इन योजनाओं में बड़े पैमाने पर धन का दुरुपयोग हुआ है, इसलिए सभी राशन कार्ड धारकों का भौतिक सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। कैसे होगा सत्यापन? पश्चिम बंगाल के सभी एसडीओ और बीडीओ अपने-अपने क्षेत्रों से हटाए गए मतदाताओं की सूची खाद्य विभाग के स्थानीय निरीक्षकों को सौंपेंगे। खाद्य विभाग के अधिकारी उन सभी लोगों के घरों पर जाकर जांच करेंगे जिनके नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं। सत्यापन पूरा होने के बाद अपात्रों के राशन कार्ड बंद कर दिए जाएंगे। सरकार के शीर्ष नेतृत्व ने इस पूरी प्रक्रिया को 15 जून 2026 तक पूरा करने का निर्देश दिया है। टीएमसी राज में हुए धान घोटाले की भी होगी जांच भाजपा सरकार केवल राशन कार्डों की ही जांच नहीं करेगी, बल्कि टीएमसी शासन के दौरान हुई धान खरीद प्रक्रिया की भी गहराई से जांच करेगी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, "कागजों पर राज्य ने पिछले कुछ वर्षों में औसतन 55 लाख टन से अधिक धान की खरीद दिखाई है। लेकिन शुरुआती जांच से संकेत मिलते हैं कि धान से चावल निकालने के लिए राइस मिलों में भेजा गया एक बड़ा हिस्सा कभी राज्य के पास वापस ही नहीं आया। अब इसकी जांच की जाएगी कि क्या कागजों पर दिखाया गया धान वास्तव में खरीदा भी गया था या यह सिर्फ एक कागजी घोटाला था।" आपको बता दें कि वर्तमान में केंद्र सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत बंगाल में 6.01 करोड़ लोगों को सस्ता अनाज देती है। इसके अलावा, राज्य सरकार अपनी तरफ से अतिरिक्त दो करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देती है। नई सरकार अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन दो करोड़ अतिरिक्त लाभार्थियों में से कितने वास्तव में वास्तविक और जरूरतमंद हैं। धान खरीद घोटाले की आधिकारिक जांच भी जल्द ही शुरू होने की उम्मीद है।

RBI रिपोर्ट ने खोली पोल, बाजार में पैसा भरपूर लेकिन ATM में नहीं मिल रहा कैश; इंडस्ट्री परेशान

 नई दिल्‍ली ऑनलाइन पेमेंट आने के बाद और यूपीआई का चलन बढ़ने के बाद से ही पिछले कुछ सालों में कैश को लेकर परेशानी बढ़ गई है. भारतीय रिजर्व बैंक के नए आंकड़ों ने कई बड़े खुलासे किए हैं, जिसके अनुसार 29 मई 2026 तक चलन में कैश 42.56 लाख करोड़ रुपये से अधिक थी. यह पिछले साल की तुलना में 12 फीसदी की बढ़ोतरी है. इसके बावजूद कुछ एटीएम मशीनों में कैश की कमी होती दिख रही है. लोगों को कैश निकालने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है।    एटीएम ऑपरेटरों का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था, एटीएम उद्योग परिसंघ (CATMi) ने भारतीय बैंक संघ (IBA) को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि एटीएम में कैश भरने के लिए उपलब्ध कैश  में कमी आ रही है. लेटर में कहा गया है कि नवंबर 2025 में कैश आपूति 80 प्रतिशत थी. इसका मतलब है कि 20 फीसदी की कमी थी।  यह कमी लगातार बढ़ रही है, जो मार्च 2026 में 36 फीसदी और अप्रैल में 43 फीसदी थी. आसान शब्‍दों में कहें तो ATM ऑपरेटरों को अप्रैल में अपनी कैश जरूरतों का सिर्फ 57 फीसदी ही मिला. लेटर में कहा गया है कि दिसंबर 225 के अंत से, हमारे सदस्‍यों को कई राज्‍यों में बैंक ब्रांचेज और करेंसी चेस्‍ट से ATM में कैश डालने में लगातार परेशानियां छेलनी पड़ रही है।    क्‍यों घट रहा एटीएम में कैश?  एटीएम से निकासी में गिरावट आई है. CATMi के अनुसार, मासिक एटीएम निकासी जनवरी 2023 में लगभग 57 करोड़ से घटकर सितंबर 2025 तक लगभग 44 करोड़ हो गई है. डिजिटल भुगतान, खासकर यूपीआई की बढ़ती संख्‍या इस गिरावट का मुख्‍य कारण बताया जा रहा है।    CATMi ने कहा कि वर्तमान एटीएम कॉन्‍ट्रैक्‍ट्स 2.5 प्रतिशत से 3.0 प्रतिशत प्रति साल की मामूली गिरावट पर आधारित थे, जिसे सीपीआई से जुड़ी वृद्धि द्वारा समायोजित किया जाना था. वास्तविक स्थिति इससे बिल्कुल अलग है. इसने यह भी बताया कि कस्‍टमर द्वारा फ्री लिमिट से अधिक एटीएम उपयोग के लिए भुगतान किया जाने वाला शुल्क बढ़ गया है, इसने अधिक लोगों को डिजिटल की ओर धकेल दिया है, जिससे गिरावट तेज हो गई है और ऑपरेटरों के राजस्व में कमी आ रही है।     एटीएम ऑपरेट करने की कॉस्‍ट बढ़ी  उद्योग के जानकारों का यह भी कहना है कि बढ़ती लागत ऑपरेटरों पर दबाव बढ़ा रही है. इसमें परिवहन की कुल लागत, ईंधन, साथ ही सुरक्षा गार्डों और अन्य कर्मचारियों को दिए जाने वाले वेतन शामिल हैं. विनिमय लागत (यह वह राशि है जो एक बैंक दूसरे बैंक को तब देता है जब कोई ग्राहक एक बैंक के डेबिट कार्ड का उपयोग दूसरे बैंक के एटीएम में करता है) से परिचालन लागत के कुछ हिस्से की भरपाई होने की उम्मीद थी, लेकिन उनका कहना है कि 19 रुपये से 21 रुपये तक की 2 रुपये की वृद्धि बढ़ती लागतों की भरपाई के लिए पर्याप्त नहीं रही है।    आरबीआई गवर्नर ने क्‍या कहा?  कैश संकट के बारे में पूछे जाने पर, भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने शुक्रवार को कहा कि वे हर साल करेंसी की आवश्यकता का एक प्लान बनाते हैं और आवश्यकतानुसार बैंकों को उपलब्ध कराते हैं. उन्होंने कहा कि अगर कहीं भी नकदी की कमी होती है, तो वे यह सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे कि नकदी शीघ्रता से उपलब्ध कराई जाए।    मॉनिटरी पॉलिसी की घोषणा के बाद हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि हम यह सुनिश्चित करेंगे कि नकदी की कमी होने पर हमारे पास एटीएम और बैंक शाखाओं को भरने और फिर से भरने के लिए पर्याप्त पैस हो. डिजिटल भुगतान आम होने के कारण, विशेषकर बड़े शहरों में रहने वाले लोग एटीएम में नकदी खत्म होने की स्थिति में शायद ज्यादा चिंतित न हों।  हालांकि, सरकार से डायरेक्‍ट बेनिफिट मिलने वाले लोगों को नकदी की कमी का असर महसूस हो सकता है क्योंकि उनके शहर के एटीएम में पर्याप्त नकदी न हो. कई वरिष्ठ नागरिक अभी भी अपनी दैनिक जरूरतों के लिए नकदी निकालते हैं. छोटे व्यापारी भी आमतौर पर नकदी लेनदेन पर निर्भर रहते हैं. CATMi ने सदस्य बैंकों से एटीएम में नकदी की विश्वसनीय बनाए रखने और बैंकों से इस मुद्दे को जल्द से जल्द सुलझाने के लिए कहा है। 

सुपरफास्ट ग्रोथ के मिशन पर भारत, प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक विशेषज्ञों के साथ किया मंथन

नई दिल्‍ली  पूरी दुनिया मंदी, युद्ध की आहट और आर्थिक अनिश्चितता के चक्रव्यूह में फंसी है. वैश्विक बाजारों में हाहाकार मचा है, सप्लाई चेन टूट रही है और कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने को बेताब हैं. दुनिया की इस महा-उथल-पुथल के बीच दिल्ली के पावर कॉरिडोर में भारत को आर्थिक सुपरपावर बनाए रखने की एक बेहद महत्वपूर्ण बिसात बिछाई जा रही थी. जून की इस तपती दोपहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के सबसे बड़े आर्थिक धुरंधरों (PM-EAC) के साथ बंद कमरे में मेज पर जुटे. मकसद साफ था दुनिया भले ही मंदी की गर्त में जाए लेकिन भारत की विकास दर सुपरफास्ट रफ्तार से दौड़ती रहनी चाहिए. इस हाई-प्रोफाइल बैठक में न सिर्फ भारत की अभेद्य आर्थिक किलेबंदी का ब्लूप्रिंट तैयार हुआ बल्कि पश्चिम एशिया के बारूद की आंच से घरेलू बाजार को बचाने का फुलप्रूफ प्लान भी सामने आया।  पीएम नरेंद्र मोदी की बैठक की 5 मुख्य बातें • आर्थिक किलेबंदी की रणनीति: वैश्विक मंदी और तनाव के बीच भारत की 7.7% की रफ्तार को बरकरार रखने और इसे आगे बढ़ाने के लिए नए आर्थिक सुधारों पर गहन मंथन हुआ।  • पश्चिम एशिया संकट पर पैनी नजर: लाल सागर और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण भारत के व्यापार, MSMEs और कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ने वाले असर का बारीकी से आकलन किया गया।  • नीति आयोग की खुफिया रिपोर्ट: नीति आयोग द्वारा पीएमओ (PMO) को सौंपी गई इम्पैक्ट एसेसमेंट रिपोर्ट के आधार पर भविष्य के बड़े झटकों से निपटने की रणनीति बनाई गई।  • ईज ऑफ लिविंग पर सबसे बड़ा दांव: आम आदमी के जीवन को आसान बनाने और व्यापारिक बाधाओं को खत्म करने के लिए नियमों को और अधिक सरल बनाने पर सहमति बनी।  • घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग पर जोर: विदेशी झटकों से बेअसर रहने के लिए देश के भीतर मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ाने और घरेलू उपभोग को मजबूत करने का संकल्प लिया गया।  वैश्विक तूफान, पीएम मोदी की ढाल वैश्विक अर्थव्यवस्था इस समय एक बड़े संक्रमण काल से गुजर रही है. एक तरफ पश्चिम एशिया का संकट अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों को असुरक्षित बना रहा है तो दूसरी तरफ दुनिया के केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में की जा रही सख्ती ने निवेश पर ब्रेक लगा दिया है. ऐसे में भारत के लिए अपनी ग्रोथ को कायम रखना किसी चुनौती से कम नहीं है।  इस बैठक का सबसे बड़ा आर्थिक संदेश यह है कि भारत अब रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक नीति पर चल रहा है. वित्त वर्ष 2026 में 7.7% की जीडीपी ग्रोथ हासिल करके भारत ने अपनी आंतरिक मजबूती साबित की है. नीति आयोग की रिपोर्ट और PM-EAC की सलाह का कोर-पॉइंट यह है कि अगर वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो भारत अपनी घरेलू मांग और इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड सरकारी खर्च के जरिए उसकी भरपाई करेगा. सरकार का यह कदम भारतीय बाजार को एक इंसुलेटेड शील्ड यानी सुरक्षा कवच प्रदान करेगा, जिससे दुनिया की मंदी का असर भारत के युवाओं के रोजगार और उद्योगों पर न पड़े।  सवाल-जवाब PM-EAC की इस आपात बैठक का मुख्य एजेंडा क्या था? इस बैठक का मुख्य एजेंडा वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत की विकास दर को ‘सुपरफास्ट’ बनाए रखना, घरेलू उद्योगों को सुरक्षित करना और आर्थिक सुधारों को गति देना था।  पश्चिम एशिया के तनाव से भारतीय अर्थव्यवस्था को क्या खतरा है? भारत अपनी ऊर्जा (क्रूड ऑयल) जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है. पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं और माल ढुलाई (शिपिंग रूट) महंगी हो सकती है, जिससे भारत के निर्यात और MSMEs पर असर पड़ सकता है।  नीति आयोग की ‘इम्पैक्ट एसेसमेंट रिपोर्ट’ में क्या खास है? इस रिपोर्ट में युद्ध के लंबे खिंचने की स्थिति में भारतीय व्यापार, किसानों, कृषि क्षेत्र और प्रमुख औद्योगिक सेक्टरों पर पड़ने वाले तात्कालिक और मध्यम अवधि के प्रभावों का पूरा खाका और उससे निपटने के उपाय सुझाए गए हैं।  सरकार ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘ईज ऑफ लिविंग’ पर इतना जोर क्यों दे रही है? वैश्विक उथल-पुथल के समय अगर देश के भीतर व्यापार करना और आम नागरिक का जीवन आसान होगा, तो घरेलू निवेश बढ़ेगा. इससे नए रोजगार पैदा होंगे और विदेशी निवेशकों के लिए भारत सबसे सुरक्षित और पसंदीदा ठिकाना बना रहेगा। 

2030 तक AI बनेगा सबसे बड़ा संसाधन उपभोक्ता? UN रिपोर्ट में पानी-बिजली को लेकर बड़ा खुलासा

नई दिल्ली  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर अक्सर एक तर्क दिया जाता है. लोग कहते हैं कि फ्यूचर में तकनीक सुधरेगी तो एआई मॉडल्स कम एनर्जी और रिसोर्सेज का इस्तेमाल करेंगे. यूनाइटेड नेशन्स की एक नई रिपोर्ट ने इस सोच को पूरी तरह गलत साबित कर दिया है. यूएन की इस रिपोर्ट में एआई के कारण पर्यावरण को होने वाले भारी नुकसान का डेटा दिया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक साल 2030 तक एआई की बिजली खपत दोगुनी हो सकती है. तब यह पूरी दुनिया की कुल बिजली का 3 प्रतिशत हिस्सा अकेले खा जाएगा. इतना ही नहीं, एआई से होने वाला कार्बन उत्सर्जन ब्रिटेन जैसे देश के बराबर पहुंच जाएगा।  सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि एआई डेटा सेंटर्स को ठंडा रखने के लिए इतना पानी लगेगा, जितना पूरी दुनिया की आबादी सालभर में भी नहीं पीती है. यह स्थिति पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है।  जेवंस पैराडॉक्स का वह जाल क्या है जिसमें फंसकर एआई बढ़ा रहा है पर्यावरण की मुसीबत? यूएन की रिपोर्ट में एक बेहद जरूरी आर्थिक सिद्धांत का जिक्र किया गया है. इसे ‘जेवंस पैराडॉक्स’ कहा जाता है. यह सिद्धांत बताता है कि जब कोई नई टेक्नोलॉजी किसी रिसोर्स के इस्तेमाल को ज्यादा एफिशिएंट बनाती है, तो कुल खपत घटती नहीं है. इसके उलट उस रिसोर्स का कुल कंजम्पशन और ज्यादा बढ़ जाता है।  इस सिद्धांत का नाम मशहूर इकोनॉमिस्ट विलियम स्टेनली जेवंस के नाम पर रखा गया था. उन्होंने 19वीं सदी के इंग्लैंड में कोयले के इस्तेमाल के दौरान इस पैटर्न को देखा था. तब कोयले के इंजन ज्यादा एफिशिएंट हो गए थे. इसके बाद भी कोयले की कुल खपत कम नहीं हुई थी  असल में एफिशिएंसी बढ़ने से कोयले की लागत कम हो गई थी. कम लागत के कारण लोगों ने इसका इस्तेमाल बहुत ज्यादा बढ़ा दिया था. इससे कुल डिमांड में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई थी. एआई के मामले में भी बिल्कुल ऐसा ही होने की आशंका है।  जैसे-जैसे एआई मॉडल्स ज्यादा सस्ते और बेहतर होते जाएंगे, वैसे-वैसे इनका इस्तेमाल तेजी से बढ़ेगा. लोग नए-नए कामों के लिए एआई का उपयोग शुरू कर देंगे. इससे एफिशिएंसी से होने वाली कोई भी बचत पूरी तरह खत्म हो जाएगी।  डेटा सेंटर्स दुनिया की कितनी बिजली और पानी सोख रहे हैं और इसके पीछे का सच क्या है?     इस संकट के बड़े पैमाने को समझने के लिए डेटा सेंटर्स की मौजूदा स्थिति को देखना होगा. पिछले साल दुनिया के डेटा सेंटर्स ने मिलकर उतनी ही बिजली खर्च की, जितनी सऊदी अरब जैसा देश करता है. सऊदी अरब दुनिया का 11वां सबसे बड़ा बिजली कंज्यूमर देश है।      अगर साल 2030 तक एआई की बिजली डिमांड दोगुनी हो जाती है, तो इससे पर्यावरण पर भारी असर पड़ेगा. इस बढ़े हुए कार्बन फुटप्रिंट की भरपाई करने के लिए इंसान को बहुत बड़े कदम उठाने होंगे. इसके लिए करीब 10 सालों तक 6.7 बिलियन पेड़ उगाने होंगे।      इतना ही नहीं, साल 2030 तक इन डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए 9.3 ट्रिलियन लीटर पानी की जरूरत होगी. यह पानी डेटा सेंटर्स के भारी-भरकम सर्वर्स को ठंडा रखने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा. इसके साथ ही इन सेंटर्स के लिए मेक्सिको सिटी के साइज से दस गुना ज्यादा जमीन की जरूरत पड़ेगी।  ग्लोबल लेवल पर एआई की ताकत का बंटवारा कैसे पर्यावरण के लिए नई असमानता पैदा कर रहा है? यूएन की रिपोर्ट केवल रिसोर्स के इस्तेमाल तक सीमित नहीं है. यह एआई बूम के पीछे छिपी गहरी असमानता को भी सामने लाती है. दुनिया में केवल 32 देश ऐसे हैं, जिनके पास एआई के लिए जरूरी क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।  हैरानी की बात यह है कि इस पूरी क्षमता का 90 प्रतिशत हिस्सा केवल अमेरिका और चीन के पास है. रिपोर्ट चेतावनी देती है कि इससे दुनिया में एक बड़ा डिजिटल डिवाइड पैदा हो रहा है. एक तरफ वे देश हैं जो एआई सिस्टम को पूरी तरह कंट्रोल करते हैं।  दूसरी तरफ वे देश हैं जो केवल इन सिस्टम्स का इस्तेमाल करते हैं. इन कमजोर देशों को पर्यावरण का बहुत बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है. एआई के लिए जरूरी मिनरल्स का एक्सट्रैक्शन और खतरनाक ई-वेस्ट का बोझ अक्सर इन्हीं गरीब देशों पर पड़ता है।  एआई मॉडल्स के अलग-अलग टास्क पर्यावरण पर कितना और किस तरह का असर डालते हैं?     एआई के काम करने के तरीके को दो मुख्य ताकतें तय करती हैं. पहला यह कि हम इसका कितना इस्तेमाल करते हैं. दूसरा यह कि हम इसका इस्तेमाल किस तरह करते हैं. एआई कई तरह के टास्क पूरे करता है।  .     इसमें टेक्स्ट लिखना, कोड जेनरेट करना, इमेज बनाना और वीडियो बनाना शामिल है. इन सभी कामों को पूरा करने के लिए अलग-अलग कंप्यूटर पावर की जरूरत होती है. इमेज और वीडियो बनाने में टेक्स्ट के मुकाबले कहीं ज्यादा एनर्जी खर्च होती है।      सही मॉडल का चुनाव करना भी बेहद जरूरी है. हर एआई सिस्टम के काम करने की एनर्जी कॉस्ट अलग होती है. इसलिए रिस्पॉन्सिबल एआई के लिए पूरी वैल्यू चेन को संभालना होगा. इसमें मिनरल्स की माइनिंग से लेकर रीसाइक्लिंग और ई-वेस्ट का सही डिस्पोजल शामिल होना चाहिए।  दुनिया के बड़े देश इस संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं और कहां चूक हो रही है? आजकल दुनिया भर की सरकारें अपने पब्लिक सेक्टर में एआई को तेजी से अपना रही हैं. उदाहरण के लिए न्यूजीलैंड की सरकार ने एक नेशनल एआई स्ट्रेटजी तैयार की है. उन्होंने एक पब्लिक सर्विस एआई फ्रेमवर्क भी बनाया है।  यह फ्रेमवर्क सस्टेनेबल डेवलपमेंट की बात तो करता है, लेकिन इसमें एनवायरमेंटल डिस्क्लोजर की कोई शर्त नहीं है. वहां कोई भी रेगुलेटर एआई की बिजली खपत या एमिशन का डेटा इकट्ठा नहीं कर रहा है. ऑस्ट्रेलिया का भी ऐसा ही हाल है।  ऑस्ट्रेलिया के नेशनल फिल्म एंड साउंड आर्काइव ने ‘बॉवरबर्ड’ नाम का एक टूल बनाया है. यह टूल ऑडियो और वीडियो को ट्रांसक्राइब करने का काम करता है. वहीं वहां का वेटरन्स अफेयर्स डिपार्टमेंट दावों के निपटारे को तेज करने के लिए एआई का इस्तेमाल कर रहा है।  ये दोनों देश एआई रेगुलेशन के मामले में बहुत हल्का रुख अपना … Read more