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पंजाब कांग्रेस में बड़ा बदलाव, परगट सिंह को मिली प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी

चंडीगढ़  पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के इस्तीफे के बाद उनकी जगह जालंधर कैंट से विधायक और पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान परगट सिंह लेंगे। नेतृत्व में यह बदलाव 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले और वडिंग के इस्तीफे के बाद हुआ है। पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष परगट सिंह पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष पद से अमरिंदर सिंह राजा वडिंग के इस्तीफे के बाद उनकी जगह जालंधर कैंट से विधायक और पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान परगट सिंह लेंगे। नेतृत्व में यह बदलाव 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले और वडिंग के इस्तीफे के बाद हुआ है। पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान और जालंधर कैंट से विधायक परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस का नया अध्यक्ष बनाया है। वह अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की जगह लेंगे, जिन्होंने शुक्रवार को प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। ओलंपिक में भारतीय हॉकी टीम की कप्तानी कर चुके परगट सिंह पंजाब पुलिस में एसपी भी रहे हैं और चरणजीत सिंह चन्नी सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। कांग्रेस पंजाब में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है और इसी बीच नेतृत्व में यह बदलाव में हुआ है। राजा वडिंग ने पद छोड़ने के बाद पंजाब के कांग्रेस प्रभारी सचिन पायलट पर अपनी विदाई के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया था। इसके कुछ ही घंटों बाद परगट सिंह को नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया गया। 62 वर्षीय परगट सिंह राजनीति में आने से पहले भारतीय हॉकी के प्रमुख खिलाड़ियों में शामिल रहे हैं। वह तीन ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं और दो ओलंपिक में भारतीय टीम की कप्तानी भी की। खेल के मैदान के बाद उन्होंने पंजाब पुलिस, हॉकी प्रशासन और राजनीति में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाई हैं। पंजाब की सियासत में बड़ा फेरबदल इसके साथ ही करीब तीन महीने से प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल और प्रदेश अध्यक्ष को हटाने की मांग कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी व सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा गुट की दोनों ही मांगें अब पूरी हो गई हैं। हाईकमान ने पहले बघेल को हटाकर सचिन पायलट को प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी सौंपी और अब प्रदेश प्रधान की जिम्मेदारी परगट सिंह को सौंप दी है। वे पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी गुट के करीबी माने जाते हैं। उन्हें एक गंभीर राजनीतिज्ञ भी माना जाता है। परगट की नियुक्ति के साथ ही कांग्रेस की ओर से स्पष्ट किया गया है कि 1 जुलाई को घोषित विभिन्न चुनाव संबंधी समितियों में कोई बदलाव नहीं होगा। परगट के लिए चुनौती पद्मश्री, अर्जुन पुरस्कार विजेता व पूर्व पुलिस अधिकारी परगट सिंह के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती पार्टी के विभिन्न धड़ों को एकजुट कर 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों को गति देना होगी। गुटबाजी के कारण ही वड़िंग को एक जुलाई को हाईकमान की ओर से उन्हें प्रदेश प्रधान बनाए रखने के बावजूद पद से इस्तीफा देना पड़ा है। कौन हैं परगट सिंह? परगट सिंह का जन्म जालंधर के मिठापुर गांव में हुआ था। यह गांव हॉकी खिलाड़ियों के लिए जाना जाता है। परगट सिंह भारतीय हॉकी टीम में फुल-बैक यानी डिफेंडर की भूमिका निभाते थे। अपने दौर में उन्हें भारत के प्रमुख रक्षात्मक खिलाड़ियों में गिना जाता था। उन्होंने 1988 के सियोल, 1992 के बार्सिलोना और 1996 के अटलांटा ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। बार्सिलोना और अटलांटा ओलंपिक में वह भारतीय टीम के कप्तान थे। अटलांटा ओलंपिक 1996 के उद्घाटन समारोह में उन्हें भारत का ध्वजवाहक बनने का सम्मान भी मिला था। खेल में उनकी उपलब्धियाँ     1986 एशियाई खेल: सियोल में भारतीय हॉकी टीम के साथ कांस्य पदक।     1990 एशियाई खेल: बीजिंग में भारतीय टीम के साथ रजत पदक।     1989: खेल के क्षेत्र में योगदान के लिए अर्जुन पुरस्कार।     1998: पद्मश्री से सम्मानित। खिलाड़ी के रूप में करियर समाप्त होने के बाद परगट सिंह ने भारतीय पुरुष हॉकी टीम के कोच के रूप में भी काम किया। इसके अलावा वह पंजाब में हॉकी प्रशासन से जुड़े रहे। 2017 में वह हॉकी पंजाब के महासचिव भी बने। 2012 में राजनीति में आए राजनीति में आने से पहले परगट सिंह पंजाब पुलिस में अधिकारी थे। उन्होंने पुलिस सेवा में रहते हुए पुलिस अधीक्षक यानी एसपी का पद हासिल किया। बाद में उन्होंने सरकारी सेवा छोड़कर चुनावी राजनीति में कदम रखा। वर्ष 2012 में उन्होंने शिरोमणि अकाली दल के टिकट पर जालंधर कैंट विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार जगबीर सिंह बराड़ को हराया और पहली बार विधायक बने थे। पाठकों की पसन्द हालांकि, अकाली दल में उनका राजनीतिक सफर ज्यादा लंबा नहीं चला। जुलाई 2016 में पार्टी ने उन्हें निलंबित कर दिया। इसके बाद उन्होंने अकाली दल छोड़ दिया। परगट सिंह ने उस समय अकाली दल के नेता सुखबीर सिंह बादल पर मतदाताओं के भरोसे को तोड़ने का आरोप लगाया था। नवजोत सिंह सिद्धू के साथ बनाया था मोर्चा अकाली दल छोड़ने के बाद परगट सिंह नवजोत सिंह सिद्धू और बैंस बंधुओं के साथ ‘आवाज-ए-पंजाब’ नाम के राजनीतिक मोर्चे से जुड़े। इस मोर्चे ने खुद को उन ताकतों के विरोध में खड़ा बताया था, जिन्हें उसके नेता पंजाब के हितों के लिए नुकसानदेह मानते थे। यह राजनीतिक मोर्चा ज्यादा समय तक सक्रिय नहीं रहा। इसके बाद परगट सिंह कांग्रेस में शामिल हो गए। 2017 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जालंधर कैंट सीट से फिर जीत हासिल की। इस तरह वह लगातार दूसरी बार इस सीट से विधायक बने, हालांकि इस बार पार्टी बदल चुकी थी। चन्नी सरकार में शिक्षा और खेल मंत्री रहे पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी के मुख्यमंत्री बनने के बाद परगट सिंह को कैबिनेट में जगह मिली। उन्होंने 26 सितंबर 2021 से 11 मार्च 2022 तक मंत्री के रूप में काम किया। चन्नी सरकार में उनके पास स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा, खेल एवं युवा मामले और प्रवासी भारतीय मामलों जैसे विभाग थे। इस जिम्मेदारी के दौरान परगट सिंह को शिक्षा और खेल से जुड़े मुद्दों पर काम करने का अवसर मिला। हॉकी खिलाड़ी और कोच के रूप में उनकी पृष्ठभूमि के कारण खेल विभाग की जिम्मेदारी उनके राजनीतिक करियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रही। AAP … Read more

स्वामित्व योजना में फ्री रजिस्ट्री पर पेंच, पटवारियों के विरोध के बीच सरकार का सख्त रुख

भोपाल  मध्यप्रदेश के 50 लाख आवासीय भूखंडों की नि:शुल्क रजिस्ट्री को लेकर शासन-पटवारियों में विवाद गहरा गया है। स्वामित्व अभियान के 17 दिन बाद भी पटवारी रजिस्ट्री में विक्रेता बनने को तैयार नहीं हैं। इधर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल ने एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कलेक्टरों को इनकार करने वालों को बर्खास्त करने के लिए फ्री हैंड दे दिया। अब पटवारी संघ ने भी स्पष्ट कर दिया है कि यदि पटवारियों को बर्खास्त किया गया तो वे सामान्य कामकाज भी बंद कर देंगे। वहीं, जमीनी मामलों के विशेषज्ञ व पूर्व अधिकारी ओपी भट्ट ने पूरे अभियान की उपयोगिता पर ही सवाल उठाए हैं। कहा, बैंकों से कर्ज लेने के लिए आवासीय भूखंड की रजिस्ट्री अनिवार्य नहीं है। इसके लिए जमीन से संबंधित दस्तावेज पर्याप्त होते हैं, जो स्वामित्व योजना में दिए जा चुके हैं। कोई बैंक इन दस्तावेजों पर कर्ज नहीं देता तो शासन को बैंकों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करने चाहिए थे। विवादों में इसलिए नि:शुल्क रजिस्ट्री 68 लाख में से 50 लाख दस्तावेजों की रजिस्ट्री करने का लक्ष्य तय है। 17 अक्टूबर तक यह लक्ष्य पूरा करना है, इसलिए रजिस्ट्री के अधिकार तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक, पंचायत समन्वयक व अन्य को दिए गए। इस प्रक्रिया में पटवारियों को उक्त भूखंडों का विक्रेता बनाया गया, क्योंकि रजिस्ट्री की प्रक्रिया क्रेता व विक्रेता के बीच संपन्न होती है। पटवारियों ने कहा- अक्सर जमीनी मामलों में पारिवारिक या अन्य विवाद सामने आते हैं। 50 लाख प्रकरणों में ऐसे विवाद आना स्वाभाविक है। ऐसे मामलों में पीडि़त पक्ष पटवारी को भी विक्रेता के रूप में पक्षकार बना सकता है, जिससे वे अनावश्यक न्यायालयीन मामलों में उलझेंगे। सरकार का दावा- बैंकों से कर्ज लेने में होगी आसानी सरकार का दावा है कि रजिस्ट्री होने से संबंधित हितग्राहियों को बैंकों से कर्ज लेने में आसानी होगी और उन्हें अन्य लाभ भी मिलेंगे। जिन दस्तावेजों की नि:शुल्क रजिस्ट्री की जा रही है, वे दस्तावेज स्वामित्व योजना के तहत 2021 से अब तक 68 लाख लोगों को दिए जा चुके हैं। इनमें नक्शा, खसरा, खतौनी और बही की प्रति शामिल है। जमीनी मामलों के जानकारों के अनुसार जब शासन किसी व्यक्ति को जमीन के ये दस्तावेज उपलब्ध कराकर उसका मालिकाना हक दे चुका है तो अलग से रजिस्ट्री की जरूरत नहीं रह जाती। 5 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट भी बेकार नि:शुल्क रजिस्ट्री शुरू करने से पहले राजस्व विभाग ने आगर मालवा, हरदा, बड़वानी, अशोकनगर और रायसेन में पायलट प्रोजेक्ट चलाया था। इसी दौरान पटवारियों की आपत्तियां सामने आ गई थीं। इसके बावजूद अधिकारियों ने इनको गंभीरता से नहीं लिया। सूत्र बताते हैं, पायलट प्रोजेक्ट में कलेक्टरों से मिले फीडबैक को भी उपेक्षित करते हुए प्रदेशभर में अभियान शुरू कर दिया गया। मप्र पटवारी संघ के प्रांताध्यक्ष उपेन्द्र सिंह बघेल ने बताया कि स्वामित्व योजना के सभी कामों से पटवारी संघ अलग रहेगा। रजिस्ट्री भी नहीं करेंगे। बीते दिनों संघ की बैठक में इसका निर्णय लिया गया है। योजना से संबंधित कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कार्य आगामी निर्देश तक नहीं किया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी अभियान चलाएंगे। विशेषज्ञों ने अभियान पर उठाए ये सवाल     जब स्वामित्व योजना के तहत संबंधित हितग्राही के नाम पर भूखंड के जमीनी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए गए थे तो रजिस्ट्री की जरूरत क्यों थी?     यदि ऐसे भूखंडों पर लोन लेने के लिए कोई बैंक रजिस्ट्री की प्रति मांग रहे थे या लोन देने से इंकार कर रहे थे तो शासन से सार्वजनिक आदेश जारी क्यों नहीं कराया गया?     जब भी रजिस्ट्री होती है तो शासन को राजस्व मिलता है। नि:शुल्क रजिस्ट्री में करीब 4000 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान होगा। ऐसी स्थिति के बावजूद शासन को घाटे में डालने वाला अभियान क्यों बनाया गया?     अभियान डिजाइन करने से पहले जमीनी वास्तविकताओं की पड़ताल क्यों नहीं की गई?

गोल्फ में भारत का ऐतिहासिक गोल्ड, प्रणवी उर्स ने रचा नया कीर्तिमान

आइची-नागोया  प्रणवी शरथ उर्स एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला गोल्फर बन गईं, जिन्होंने आखिरी दौर में एक स्ट्रोक की बढ़त बरकरार रखकर यह ऐतिहासिक उपलब्धि अर्जित की और टीम को भी रजत दिलाया । मैसूर की 23 वर्ष की प्रणवी ने तीसरे होल में ट्रिपल बोगी करने के बाद तीन बर्डी लगाये। आखिरी दौर में उन्होंने इवन पार 70 स्कोर किया और चार दिन में कुल स्कोर 15 अंडर 265 रहा। प्रणवी, अदिति अशोक (आखिरी दौर में 67) और दीक्षा डागर (आखिरी दौर में 77) की टीम ने रजत पदक जीता। भारत ने 14 अंडर 546 स्कोर किया। चीन ने 22 अंडर 538 के स्कोर के साथ स्वर्ण पदक जीता। भारत के लिये शिव कपूर ने 2002 बुसान खेलों में पुरुष गोल्फ का स्वर्ण पदक जीता था।  प्रणवी ने ऐतिहासिक स्वर्ण पर कहा, ‘मुझे किसी भी चीज में प्रथम होना पसंद है। बाद में और भी लोग आएंगे, लेकिन जो सबसे पहले करता है, वह हमेशा सबसे पहला ही रहता है।’ प्रणवी के शानदार प्रदर्शन में फाइनल राउंड के छठे, 10वें और 13वें होल पर बर्डीज शामिल थीं। इससे उन्होंने भारत को टीम सिल्वर मेडल दिलाने में अहम भूमिका निभाई। गोल्फ में प्रणवी उर्स, अदिति अशोक, दीक्षा डागर ने सिल्वर जीता भारत ने टीम इवेंट में 14 अंडर पार पर फिनिश किया, जो विनर चीन से पीछे था, जिसने 22 अंडर पार पर फिनिश किया। बेशक, प्रणवी पहले स्थान पर रहीं, अदिति 14वें और दीक्षा 23वें स्थान पर रहीं। तीरंदाजी: कुमकुम मोहोद ने गोल्ड जीता 17 साल की इस खिलाड़ी ने महिलाओं के इंडिविजुअल रिकर्व फाइनल में 5-5 से टाई रहने के बाद शूट ऑफ में साउथ कोरिया की ओह येजिन को 10-8 से हराकर गोल्ड जीता। टीम के अन्य सदस्यों में अदिति अशोक (फाइनल राउंड में 67) और दीक्षा डागर (फाइनल राउंड में 77) शामिल थीं। ओलंपियन अदिति ने पिछले गेम्स में व्यक्तिगत सिल्वर मेडल जीता था। उन्होंने इस हफ्ते का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। उन्होंने एक डबल बोगी और एक बोगी के मुकाबले लगातार पांच बर्डीज लगाईं और कुल 282 (दो-ओवर) के स्कोर के साथ व्यक्तिगत रूप से संयुक्त रूप से 14वें स्थान पर रहीं। दीक्षा कुल 12-ओवर के स्कोर के साथ व्यक्तिगत लीडरबोर्ड पर संयुक्त रूप से 23वें स्थान पर रहीं। कौन हैं प्रणवी उर्स सिर्फ 23 साल की उम्र में, प्रणवी ने गोल्फ की दुनिया में कई शानदार उपलब्धियां हासिल की हैं. हालांकि, एशियाई खेलों का पदक निश्चित रूप से उनकी सबसे बड़ी सफलता है. 15 अप्रैल 2003 को कर्नाटक के मैसूर शहर में जन्मी प्रणवी ने अपने पिता और भाई से प्रेरित होकर छह साल की उम्र में गोल्फ खेलना शुरू किया।  प्रणवी ने जूनियर और एमेच्योर गोल्फ सर्किट में आगे बढ़ते हुए कई जीत हासिल कीं, जिनमें खास तौर पर थाईलैंड में 2018 सिंघा वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप और ऑल इंडिया जूनियर गर्ल्स चैंपियनशिप शामिल हैं. वह 2020 में प्रोफेशनल बनीं।  2023 में हांग्जो एशियाई खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए, वह महिला टीम इवेंट में चौथे स्थान पर रहीं और बहुत कम अंतर से पदक जीतने से चूक गईं।  इसके बाद प्रणवी ने इंटरनेशनल सर्किट में अपनी पहचान बनाई और लेडीज़ यूरोपियन टूर (LET) जैसे टूर्नामेंटों में हिस्सा लिया. 2024 में अंडालूसिया कोस्टा डेल सोल ओपन डी एस्पाना में तीसरे स्थान पर रहकर उन्होंने न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर में उभरती हुई महिला गोल्फरों में से एक के तौर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई।  अब तक उनकी सबसे शानदार उपलब्धि 2025 IGPL इनविटेशनल मुंबई जीतना रही है, जिससे वह पुरुष गोल्फरों के खिलाफ प्रोफेशनल ओपन-फील्ड टूर्नामेंट जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं थीं।  प्रणवी को 2023 में भारत सरकार द्वारा प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था, और उन्हें जनवरी 2022 में ओलंपिक की तैयारी के लिए खास मदद देने के मकसद से 'टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम' (TOPS) के कोर ग्रुप में भी शामिल किया गया था।  एशियन गेम्स के आखिरी दो दिन में भारतीय एथलीट्स का मेडल जीतने का धमाकेदार अभियान जारी है। शनिवार का दिन भारत के लिए बेहद व्यस्त और अहम रहने वाला है, जिसमें गोल्फ के फाइनल राउंड के बाद कुश्ती, तीरंदाजी, ताइक्वांडो, सेलिंग, रग्बी सेवन्स और वॉलीबॉल जैसे मुकाबलों में भारत अपनी दावेदारी पेश करेगा। कुश्ती पर सबकी खास नजरें होंगी, जहां अमन सहरावत, दीपक पूनिया और अंतिम पंघाल समेत कई पहलवान पदक की दौड़ में उतरेंगे। इसके अलावा, दो सबसे बड़े महामुकाबलों पर पूरे देश की निगाहें टिकी हैं। सुबह 10 बजे क्रिकेट के गोल्ड मेडल मैच में भारत का सामना चिर-प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से होगा, वहीं दोपहर 3:30 बजे हॉकी टीम मलेशिया के खिलाफ मेडल राउंड का मुकाबला खेलने उतरेगी। 4 अक्टूबर को होने वाले समापन समारोह से पहले भारत के पास अपनी पदक तालिका को और मजबूत करने का यह बेहतरीन मौका है।  पंघाल क्वार्टर फाइनल में, दीपक पूनिया और मनीषा ने सेमीफाइनल में बनाई जगह एशियन गेम्स 2026 में कुश्ती के अखाड़े से भारत के लिए लगातार अच्छी खबरें आ रही हैं। भारत की स्टार महिला पहलवान अंतिम पंघाल ने अपना दबदबा कायम रखते हुए महिलाओं की फ्रीस्टाइल 53 किग्रा स्पर्धा के क्वार्टर फाइनल में जगह बना ली है। प्री-क्वार्टर फाइनल मुकाबले में अंतिम ने कजाकिस्तान की शुगिला ओमिरबेक को 9-0 से एकतरफा अंदाज में करारी शिकस्त दी। कुमकुम ने जीता गोल्ड एशियन गेम्स 2026 में भारत की 17 वर्षीया सनसनी कुमकुम मोहद ने इतिहास रच दिया है। महिला व्यक्तिगत रिकर्व तीरंदाजी के रोमांचक फाइनल मुकाबले में कुमकुम ने दक्षिण कोरिया की ओह येजिन को शूट-ऑफ में पछाड़कर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया है। बेहद तनावपूर्ण मोड़ पर कोरियाई तीरंदाज ने केवल 8 का स्कोर किया, जबकि कुमकुम ने दबाव के बीच सटीकता की मिसाल पेश करते हुए परफेक्ट 10 पर निशाना साधा और भारत की झोली में ऐतिहासिक गोल्ड डाल दिया। एशियाई खेलों के मौजूदा संस्करण में कुमकुम का यह दूसरा स्वर्ण पदक है, जबकि महिला व्यक्तिगत रिकर्व स्पर्धा के इतिहास में भारत को मिला यह पहला गोल्ड मेडल है।  कुमकुम मोहद का ऐतिहासिक प्रदर्शन, एक और मेडल पक्का एशियन गेम्स 2026 से तीरंदाजी के मैदान से भारत के लिए बहुत बड़ी और खुशखबरी सामने आई है। भारत की 17 वर्षीय युवा तीरंदाज कुमकुम … Read more

यूपी कांग्रेस की नई कमान मोना के हाथ, 2027 चुनाव से पहले पार्टी ने बदली रणनीति

 लखनऊ कांग्रेस ने अगले साल उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले प्रदेश की रामपुर खास सीट से तीसरी बार विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को पार्टी का प्रदेश अध्यक्ष बनाया है। इसके साथ ही कांग्रेस अपने पारंपरिक वोटबैंक की तरफ लौटती दिख रही है। शुक्रवार देर शाम यूपी कांग्रेस संगठन में की गईं तैनातियों में कांग्रेस अपने पुराने वोटबैंक की तरफ बढ़ती दिख रही है। प्रभारी दलित हैं, जबकि प्रदेश अध्यक्ष ब्राह्मण और कार्यकारी अध्यक्ष मुस्लिम हैं। यही तीनों 80 के दशक तक कांग्रेस के बेस वोटर थे। अब लाख टके का सवाल ये है क्या 2027 के रण में इस बेस वोटर को कांग्रेस की ओर लौटाने का कमाल सचमुच हो पाएगा? बीते लोकसभा चुनाव में कांग्रेस 17 सीटों पर लड़कर छह सीटें जीतने में कामयाब रही थी। वहीं, सपा के साथ मिलकर इंडिया गठबंधन को यूपी में कुल 43 सीटें मिली थीं। माना गया कि ‘संविधान बचाओ’ के नाम पर दलित वर्ग का एक बड़ा हिस्सा कांग्रेस में आया और कांग्रेस के नाम पर ही उसने गठबंधन उम्मीदवार को वोट किया था। लोकसभा चुनाव के नतीजों से उत्साहित कांग्रेस अब अगले साल प्रस्तावित विधान सभा चुनाव के पहले अपना पुराना वोटबैंक सहेजती दिख रही है। यही वजह है कि लोकसभा चुनाव के वक्त यूपी कांग्रेस के प्रभारी रहे अविनाश पांडे को हटाकर पहले उसने दलित वर्ग से आने वाले राजेंद्र पाल गौतम को नया प्रभारी बनाया। अब शुक्रवार देर शाम जारी किए गए बदलाव के आदेशों में वह उससे और आगे बढ़कर ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम मतदाताओं में सकारात्मक संदेश देती दिखाई दे रही है। पार्टी ने ओबीसी समुदाय को भी लुभाने के लिए कांग्रेस विधानमंडल दल का नेता ओबीसी समुदाय से आने वाले वीरेंद्र चौधरी को सौंप दिया है। इसके अलावा वरिष्ठ उपाध्यक्ष के पद पर भी पार्टी ने देवेंद्र निषाद को शामिल करके निषाद समुदाय में भी एक बड़ा संदेश दिया है। कुल मिलाकर पार्टी ने चुनाव के पहले यूपी में सांगठनिक फेरबदल के माध्यम से जातियों का बड़ा गुलदस्ता सजाया है। इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर दिया ये संदेश कांग्रेस ने सहारनपुर से सांसद इमरान मसूद को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया है। इससे कांग्रेस पश्चिम यूपी में दलित-मुस्लिम गठजोड़ का संदेश देना चाहती है। पश्चिम में वोटरों के लिहाज से देखें तो हिंदू मतदाताओं में सबसे बड़ा हिस्सा दलितों का है। दलितों में जाटवों की हिस्सेदारी बड़ी है। राजेंद्र पाल गौतम जाटव बिरादरी से आते हैं। पार्टी ने इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर पश्चिम यूपी के मुस्लिम मतदाताओं में सकारात्मक संदेश दिया है। सपा-कांग्रेस गठबंधन के लिए पश्चिम अभी भी बड़ी चुनौती है, ऐसे में यह गठजोड़ नई राजनीतिक संभावनाएं खड़ी कर सकता है। वरिष्ठ नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं आराधना मिश्रा आराधना मिश्रा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी की बेटी हैं। वह उस राजनीतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करती हैं। ऐसे में आराधना मिश्रा के बहाने सपा से समन्वय ज्यादा आसान होगा। उनके संबंध प्रियंका गांधी से भी बेहद अच्छे हैं और राहुल कैंप में भी वह फिट हैं। ऐसे में पार्टी नेतृत्व को उनपर ज्यादा भरोसा है। वह, ब्राह्मण समुदाय से आती हैं तो एक समय तक पार्टी का पारंपरिक वोटर रहे ब्राह्मणों में भी संदेश है। पार्टी आधी आबादी में भी सकारात्मक संदेश देना चाहती है। अजय राय के योगदान को कांग्रेस ने सराहा कांग्रेस ने अजय राय के पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर दिए गए योगदान की प्रशंसा की है। अजय राय ने भी कहा कि मुझ जैसे सामान्य कार्यकर्ता यूपी कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के लिए मैं उनका आजीवन आभारी रहूंगा। राय ने नई प्रदेश अध्यक्ष और अन्य पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दी हैं। अगस्त 2023 में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के पद पर तैनात किए गए अजय राय ने तीन वर्ष से अधिक के कार्यकाल में यूपी कांग्रेस में नई जान फूंकने का प्रयास किया। वह इस दरमियान कांग्रेस की मुखर आवाज के तौर पर सत्ता को चुनौती देते रहे। उन्होंने जिस तरह से कांग्रेस के तत्कालीन यूपी प्रभारी अविनाश पांडे के साथ मिलकर 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ हुए गठबंधन में मजबूत 'केमेस्ट्री' का संदेश दिया, वह इससे पहले पार्टी ने किसी भी गठबंधन में नहीं देखा गया था। इसी का असर रहा था कि 2019 में महज एक सीट पर सिमट गई कांग्रेस दोबारा 2024 के लोकसभा चुनाव में छह सीट जीतने में कामयाब रही। यह बात दीगर है कि अजय राय को तीन साल में पार्टी ने उनकी नई टीम नहीं दी। बावजूद इसके वह लगातार पार्टी को सक्रिय बनाए रहे। उनकी बेबाकी और सत्ता के प्रति तल्ख तेवर ने पार्टी कार्यकर्ताओं में नया उत्साह भरा था। अराधना मिश्रा ने जताया आभार आराधना मिश्रा ने प्रदेश अध्यक्ष बनाए जाने पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने हिन्दुस्तान से बातचीत में कहा कि मैं अपनी चौथी पीढ़ी का प्रतिनिधित्व कर रही हूं, जो कांग्रेस के साथ है। पार्टी नेतृत्व का बहुत आभार कि उसने मुझे यह जिम्मेदारी दी है। मैं, पार्टी के हर कार्यकर्ता, पूर्व और वरिष्ठों को साथ लेकर चलूंगी। 2027 में कांग्रेस की सरकार बनेगी। अब वक्त कम है, लिहाजा ज्यादा ऊर्जा के साथ काम करेंगे।

PF ट्रांसफर की टेंशन खत्म, EPFO ने शुरू की ऑटोमैटिक सुविधा; आवेदन की जरूरत नहीं

नई दिल्ली नौकरी बदलने पर पुरानी कंपनी के प्रोविडेंट फंड (PF) का पैसा नए खाते में ट्रांसफर कराने के लिए अब आपको अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने आधार से जुड़े यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) वाले पात्र सदस्यों के लिए पीएफ बैलेंस अपने आप ट्रांसफर करने की सुविधा शुरू की है. यानी नई कंपनी में नौकरी शुरू होने और जरूरी जानकारी दर्ज होने के बाद पुराने पीएफ खाते का पैसा अपने आप नए खाते में ट्रांसफर हो सकेगा।  इस बदलाव का सीधा फायदा उन कर्मचारियों को मिलेगा, जो समय-समय पर नौकरी बदलते रहते हैं. पहले पीएफ ट्रांसफर कराने के लिए अलग से रिक्वेस्ट डालनी पड़ती थी और कई बार प्रक्रिया पूरी होने में समय लगता था. अब EPFO का मकसद इस काम को आसान बनाना और कर्मचारियों की रिटायरमेंट बचत को एक जगह बनाए रखना है. आइए, समझते हैं कि नया नियम कैसे काम करेगा और आपको क्या करना होगा।  पहले नौकरी बदलने पर क्या होता था? पुरानी व्यवस्था में नौकरी बदलने के बाद कर्मचारी को अपनी नई कंपनी में UAN की जानकारी देनी पड़ती थी. इसके बाद नए पीएफ खाते को पुराने खाते से जोड़ने और पैसा ट्रांसफर कराने के लिए अलग से रिक्वेस्ट डालनी पड़ती थी. यह ट्रांसफर रिक्वेस्ट EPFO के पोर्टल के जरिए ऑनलाइन की जा सकती थी. कुछ मामलों में ऑफलाइन प्रोसेस का विकल्प भी उपलब्ध था।  इसके बाद नियोक्ता (Employer) और EPFO की ओर से जरूरी जांच पूरी की जाती थी. प्रक्रिया पूरी होने पर पुराने खाते का पैसा नए खाते में ट्रांसफर होता था. इस दौरान जानकारी में गड़बड़ी या दूसरी वजहों से देरी भी हो सकती थी. बार-बार नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों के लिए अलग-अलग पीएफ खातों का रिकॉर्ड संभालना भी मुश्किल हो जाता था।  नए सिस्टम में कैसे होगा PF ट्रांसफर? EPFO ने अपने सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सर्विसेज (CITES) प्लेटफॉर्म के जरिए पीएफ ट्रांसफर की प्रक्रिया को आसान बनाया है. इसके तहत आधार से जुड़े UAN वाले पात्र सदस्यों का पीएफ बैलेंस अपने आप ट्रांसफर किया जा सकेगा. इसे तीन चरणों में समझिए… स्टेप 1: नई कंपनी में जॉइनिंग के समय अपना मौजूदा UAN दें. नौकरी बदलने पर नया UAN बनवाने के बजाय उसी UAN का इस्तेमाल करना जरूरी है. स्टेप 2: नई कंपनी की ओर से आपकी जॉइनिंग और पीएफ से जुड़ी जरूरी जानकारी EPFO के रिकॉर्ड में दर्ज की जाएगी. स्टेप 3: पात्रता की शर्तें पूरी होने पर पुराने पीएफ खाते का बैलेंस नए खाते में अपने आप ट्रांसफर हो सकेगा. इसके लिए अलग से ऑनलाइन या ऑफलाइन ट्रांसफर रिक्वेस्ट डालने की जरूरत नहीं होगी. ध्यान रखें कि यह सुविधा आधार से जुड़े UAN और संबंधित पात्रता शर्तों पर लागू होती है. इसलिए यह सुनिश्चित कर लें कि आपका UAN आधार से जुड़ा है और आपकी जानकारी सही है. एक UAN रखने से क्या फायदा होगा? नौकरी बदलने पर कर्मचारी का UAN वही रहेगा, जबकि नई कंपनी के साथ नया पीएफ खाता जुड़ सकता है. ऑटोमैटिक ट्रांसफर की सुविधा से पुराने खाते में जमा रकम को नए खाते में लाना आसान होगा. इससे कर्मचारियों को कई फायदे मिल सकते हैं. कम कागजी कार्रवाई: पीएफ ट्रांसफर के लिए बार-बार अलग आवेदन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. बचत का बेहतर हिसाब: पुरानी नौकरी में जमा पीएफ की रकम नए खाते में आने से कुल बचत को समझना आसान होगा. सर्विस रिकॉर्ड बनाए रखने में मदद: अलग-अलग नौकरियों का रोजगार रिकॉर्ड एक ही UAN के तहत देखा जा सकेगा. समय की बचत: ट्रांसफर के लिए अलग से अनुरोध करने और उसकी स्थिति का इंतजार करने की जरूरत कम होगी. हालांकि, पीएफ ट्रांसफर और अंतिम निकासी यानी फाइनल सेटलमेंट अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं. ऑटोमैटिक ट्रांसफर की सुविधा का मतलब यह नहीं है कि हर तरह का क्लेम भी अपने आप मंजूर हो जाएगा. अपना PF और सर्विस रिकॉर्ड कैसे चेक करें? अगर आपने हाल में नौकरी बदली है, तो यह देखना जरूरी है कि आपकी नई नौकरी और पीएफ खाते की जानकारी EPFO के रिकॉर्ड में सही दर्ज है या नहीं. इसके लिए इन चरणों का पालन करें…     EPFO के यूनिफाइड मेंबर पोर्टल पर जाएं.     अपने UAN और पासवर्ड की मदद से लॉग इन करें.     जरूरत पड़ने पर OTP के जरिए सत्यापन पूरा करें.     पोर्टल पर उपलब्ध सर्विस हिस्ट्री सेक्शन में जाएं.     यहां अपनी पिछली और मौजूदा नौकरी से जुड़ा रिकॉर्ड जांचें. अगर नई कंपनी की जानकारी दिखाई नहीं दे रही है या रिकॉर्ड में कोई गलती है, तो पहले अपनी कंपनी के ह्यूमन रिसोर्स डिपार्टमेंट (HRD) से संपर्क करें. UAN, आधार और दूसरी जरूरी जानकारी में अंतर होने पर उसे ठीक करवाएं. EPFO के डिजिटल सिस्टम में कई बदलाव EPFO अपने मेंबर सर्विस प्लेटफॉर्म को आसान बनाने के लिए कई बदलाव कर रहा है. इनमें पीएफ क्लेम की प्रक्रिया को तेज करना, भुगतान व्यवस्था में सुधार और अलग-अलग कार्यालयों पर निर्भरता कम करने जैसे प्रयास शामिल हैं. ऑटोमैटिक पीएफ ट्रांसफर भी इसी दिशा में एक कदम है. अगर आप नई कंपनी में शामिल हुए हैं, तो सबसे पहले अपना पुराना UAN इस्तेमाल करें और आधार लिंक होने के साथ अपनी जानकारी भी जांच लें. इससे पीएफ ट्रांसफर की प्रक्रिया आसान बनाने वाली इस सुविधा का लाभ लेने में मदद मिलेगी। 

600 मजदूर रोज काट रहे 565 पेड़, फिर भी डिंडौरी में कटाई की रफ्तार धीमी

डिंडौरी डिंडौरी जिले के 30 हजार हेक्टेयर में फैले साल के जंगल पर साल बोरर कीट का खतरा बढ़ गया है। इससे प्रभावित करीब 1.50 लाख पेड़ों को 31 दिसंबर तक काटने की तैयारी है। इसके लिए जंगल को 113 सेक्टर में बांटा गया है। हालांकि, विभाग के बताए आंकड़ों और मौके पर काम की रफ्तार को देखें तो तय समय में डेढ़ लाख पेड़ों की कटाई पूरी करना चुनौतीपूर्ण नजर आता है। विभाग के मुताबिक दो मजदूर एक पेड़ काटने में करीब डेढ़ से ढाई घंटे लेते हैं। वहीं, 60 सेक्टर में रोजाना औसतन करीब 565 पेड़ ही काटे जा रहे हैं। इस रफ्तार से पूरी कटाई में लंबा समय लग सकता है। डिंडौरी से करीब 85 किमी दूर मौके पर पहुंची  टीम टीम डिंडौरी से करीब 85 किमी दूर पश्चिम करंजिया वन परिक्षेत्र के चौरा दादर और खारी डीह के बीच स्थित जंगल में पहुंची। यहां करीब डेढ़ किमी पहाड़ी और कीचड़ भरे रास्ते से तरवर टोला के जंगल तक पहुंचना पड़ा। बारिश के कारण कुछ देर काम बंद रहा। बारिश थमने के बाद जंगल में फिर कुल्हाड़ी और आरी चलने लगी 60 सेक्टर में करीब 600 मजदूर लगाने का दावा वन विभाग के मुताबिक 60 सेक्टर में करीब 10-10 मजदूर लगाए गए हैं, यानी करीब 600 मजदूर कटाई में लगे हैं। विभाग का कहना है कि जरूरत पड़ने पर छत्तीसगढ़ सीमा से लगे गांवों से भी मजदूर बुलाए जाएंगे। मौके पर मिले मजदूर गोपाल नेताम ने बताया कि उस दिन उसके साथ करीब 13 लोग काम कर रहे थे। मोटे पेड़ों को आरी से और बाकी को कुल्हाड़ी से काटा जा रहा था। पेड़ गिराने के बाद सिर्फ तना काटना ही काम नहीं है। मजदूरों को टहनियां काटने और छाल उतारने का काम भी करना पड़ता है। घने जंगल में जंगली घास और वनस्पति के कारण काम जोखिम भरा है। मजदूरों के मुताबिक, यहां अकसर सांप भी दिखाई देते हैं। हेलमेट-जूते तो दूर, प्राथमिक इलाज की भी परेशानी मजदूर फूल सिंह ने बताया कि उन्हें हेलमेट, दस्ताने और सुरक्षा जूते उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। उनके मुताबिक पेड़ काटते समय चोट लगने पर मौके पर प्राथमिक इलाज की भी पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। फूल सिंह ने बताया कि बारिश के मौसम में काम के दूसरे विकल्प कम होने के कारण मजदूर यह काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि जंगल में पीने के पानी की व्यवस्था नहीं है। प्यास लगने पर मजदूर करीब 200-250 मीटर दूर स्थित झिर से पानी लेते हैं। बारिश के दौरान इसमें भी मटमैला पानी आने की बात उन्होंने कही। 80 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में साल के जंगल डिंडौरी जिले में कुल 80,263 हेक्टेयर क्षेत्र में साल के जंगल हैं। इनमें करीब 76,230 हेक्टेयर सघन और 4,032 हेक्टेयर विरल वन क्षेत्र है। वन विभाग के मुताबिक, दो साल में साल बोरर से प्रभावित पेड़ों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पिछले साल 5-6 हजार पेड़ों पर निशान लगाए गए थे, जबकि इस बार यह संख्या करीब डेढ़ लाख तक पहुंच गई है। विशेषज्ञों के अनुसार, साल बोरर का प्राकृतिक चक्र करीब 30 साल का होता है। डिंडौरी में 1997-98 में भी इसका बड़ा प्रकोप सामने आया था। 30 साल पहले 22.15 लाख पेड़ काटने पड़े थे वन विभाग के अनुसार, 1997-98 में साल बोरर के प्रकोप के कारण 1.42 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में 22.15 लाख पेड़ काटने पड़े थे। उस दौरान 1.39 करोड़ कीट नष्ट किए गए थे। इस बार प्रभावित पेड़ों की कटाई के बाद छोटे पौधों को सुरक्षित रखने की बात कही जा रही है। हालांकि, कटे हुए जंगल को दोबारा विकसित होने में 20 से 30 साल लग सकते हैं। विभाग के अनुमान के मुताबिक कटाई के बाद करीब 46,390 घनमीटर इमारती लकड़ी और 43,940 घनमीटर जलाऊ लकड़ी मिलेगी। कटाई और परिवहन पर करीब 8 से 10 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। लकड़ी की नीलामी ई-ऑक्शन के जरिए की जाएगी। डिंडौरी में जलाए गए 19.50 लाख 'साल बोरर' कीड़े मध्यप्रदेश के डिंडौरी में वन विभाग ने आठ संग्रहण केंद्रों पर करीब 19 लाख 50 हजार साल बोरर कीड़े जलाए। गुरुवार दोपहर करीब 12 बजे कीड़ों से बनी मालाओं को लकड़ियों के बीच रखकर आग लगाई गई। अकेले करंजिया संग्रहण केंद्र पर 3 लाख 50 हजार कीड़े जलाए गए। साल बोरर क्या है ? साल बोरर एक बीटल होता है. ये पेड़ के अंदर रहता है और पेड़ को अंदर से खोखला करता है. इसके बाद ये पेड़ किसी काम का नहीं बचता है. फिर उस एक पेड़ को पूरी तरह से बर्बाद करने के बाद ये कीट दूसरे पेड़ में चला जाता है. इसकी पहचान करने का सबसे आसान तरीका ये है कि पेड़ के सबसे नीचे वाले भाग में थोड़ा बुरादा टाइप होता है या फिर पत्तियों की बात करें तो पत्तियां पीली पड़ने लगेंगी. ये सिंप्टम्स होते हैं, अगर बाहर से पहचानना चाहें तो।  पेड़ों को काटना क्यों है जरूरी साल बोरर कीट लगातार पकड़ा भी जा रहा है. इसके अलावा इस कीट से प्रभावित पेड़ को काटना जरूरी इसलिए भी होता है, क्योंकि अगर संक्रमित पेड़ को काटेंगे नहीं, तो एक पेड़ से दूसरे पेड़ में संक्रमित हो जाएगा. लार्वा थ्रेडिंग के जरिये ये फैलता है. पहले एक पेड़ को खोखला कर फिर दूसरे पेड़ में जाता है, ऑब्जर्वेशन में पाया गया है कि जब तक की एक पेड़ को ये खत्म नहीं कर देते पूरी तरह से, तब तक दूसरे पेड़ में नहीं जाते हैं. अनूपपुर में लगभग 35% साल के पेड़ हैं, अगर साल बोरर कीट से प्रभावित पेड़ों को काटेंगे नहीं तो और संक्रमित होंगे जिससे और ज्यादा नुकसान होगा।  अमरकंटक में साल बोरर का कितना प्रकोप अमरकंटक का जंगल करीब 8525 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला है. यहां लगभग 40 लाख साल के पेड़ हैं. क्षेत्र के 10 बीट में से आठ में साल बोरर का संक्रमण भी पाया गया है. इनमें अमरकंटक, सोनमुड़ा, कपिलधारा, उमरगोहान, भूड़ाकोना, दमगढ़, पौड़ी, ताली बीट शामिल है। 

OPS की मांग के बीच NPS का नया विकल्प, 8वें वेतन आयोग को लेकर भी चर्चा तेज

नई दिल्ली एक ओर जहां कई कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने OPS को बहाल करने की डिमांड की है तो दूसरी ओर पेंशन फंड रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) ने एनपीएस में 2-3 करोड़ नए सब्सक्राइबर जुड़ने की उम्मीद लगा रखी है।PFRDA की चेयरपर्सन एस रमन ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि अगले दो साल में NPS से करीब 2-3 करोड़ नए सब्सक्राइबर जुड़ेंगे। रमन ने एनपीएस दिवस के मौके पर PTI से बातचीत में कहा कि इस बढ़ोतरी की वजह हाल ही में शुरू की गई ‘NPS तत्काल’ सुविधा हो सकती है। इसका मकसद NPS अकाउंट खोलने के प्रोसेस को तेज और आसान बनाना है। बता दें सरकार ने 1 जनवरी 2004 को ओल्ड पेंशन स्कीम की जगह NPS शुरू किया था। इस नई स्कीम के तहत लोग अपने कामकाजी सालों में पैसा जमा करते हैं और यह रकम बाजार से जुड़े फंडो में लगाई जाती है। 8वें वेतन आयोग से गारंटीड पेंशन की मांग सर्वे ऑफ इंडिया की MSA ने 8वें वेतन आयोग से OPS बहाल करने की मांग की है। संगठन ने अंतिम वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर गारंटीड पेंशन की मांग भी रखी है। वहीं फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल आर्गेनाइजेशन ने NPS और UPS के तहत आने वाले कर्मचारियों को भी पेंशन व्यवस्था में लाने की मांग की है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए NPS जरूरी रिटायरमेंट के समय जमा हुई रकम से पेंशन जैसी सुविधाएं मिलती हैं, जिनमें एन्युइटी आधारित आय भी शामिल है। केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए NPS जरूरी है, जबकि प्राइवेट सेक्टर के लोग इसमें स्वेच्छा से जुड़ सकते हैं। NPS तत्काल से छोटे शहरों में बढ़ेगा पेंशन कवरेज NPS तत्काल सुविधा से टियर-2 और टियर-3 शहरों में रहने वाले लोगों में भी पेंशन कवरेज बढ़ने की उम्मीद है। रमन ने कहा कि यह सुविधा इन्फॉर्मल सेक्टर के और लोगों को भी पेंशन सिस्टम से जोड़ सकती है। इससे NPS का दायरा सिर्फ सैलरीड और फॉर्मल सेक्टर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। NPS तत्काल स्कीम क्या है? अब तक ग्राहक BHIM ऐप या अपने बैंक के UPI ऐप से सीधे NPS में एनरोल या नया NPS अकाउंट नहीं खोल सकते थे। हालांकि, इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल आगे पैसा जमा करने के लिए किया जा सकता था। NPS में औपचारिक रूप से जुड़ने के लिए पहले ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन करना पड़ता था, जिससे परमानेंट रिटायरमेंट अकाउंट नंबर (PRAN) मिलता था। ‘NPS तत्काल’ स्कीम के जरिए PFRDA, UPI से नए NPS सब्सक्राइबर जोड़ेगा। इसकी शुरुआत NPCI के BHIM UPI ऐप से होगी। इसके लिए KYC-वेरिफाइड बैंक अकाउंट चाहिए और ऑनलाइन पेमेंट ऑप्शन से पैसा जमा किया जा सकता है। BHIM ऐप पर NPS अकाउंट कैसे खोलें? NPS तत्काल स्कीम से लोग BHIM ऐप डाउनलोड करने के बाद महज कुछ आसान स्टेप्स में पेंशन अकाउंट खोल सकते हैं। स्टेप्स ये हैं… 1. BHIM ऐप खोलें, होमस्क्रीन पर रिचार्ज और बिल पेमेंट सेक्शन में ‘view all’ पर क्लिक करें, फिर NPS टैब पर जाएं। 2. अपना डेट ऑफ बर्थ जैसी बेसिक जानकारी दें। 3. प्रोसेस के दौरान दिख रहे अपने बैंक अकाउंट को चुनें। 4. UPI से कम से कम ₹250 का पहला कंट्रीब्यूशन ऑथराइज करें। इससे आपका PRAN बनेगा और अकाउंट एक्टिव हो जाएगा। किन बैंकों के ग्राहक आवेदन कर सकते हैं? रमन ने यह भी दोहराया कि फिलहाल स्टेट बैंक, ICICI बैंक, HDFC बैंक, एक्सिस बैंक और IDFC फर्स्ट बैंक के ग्राहक BHIM ऐप से NPS अकाउंट खोलने की इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए कागजी काम की जरूरत नहीं है, पूरा प्रोसेस डिजिटल है और KYC तुरंत पूरी हो जाती है। तत्काल रूट का मकसद NPS अकाउंट खोलने के प्रोसेस को आसान और तेज बनाना है।

इंदौर-मुंबई हाईवे होगा 6 लेन, चार जिलों के गांवों में जमीन अधिग्रहण की तैयारी

इंदौर  आगरा-मुंबई हाईवे पर इंदौर से पलासनेर के बीच हादसों को रोकने के लिए यहां रोड 6 लेन का किया जा रहा है। 154 किमी के इस हिस्से में रोड चौड़ा किया जाना है। इसी रोड पर सबसे ज्यादा करीब 15 ब्लैक स्पॉट चिह्नित किए गए थे। जहां 25 से ज्यादा हादसों में कई लोगों ने अपनी जान गवाई और कई घायल हो गए थे। आगरा-मुंबई रोड (एनएच-52) के इंदौर से खलघाट होते हुए पलासनेर(महाराष्ट्र) तक के हिस्से को सिक्स लेन करने का काम शुरू हो गया है। एनएच-52 के 154.77 किमी हिस्से में मौजूदा 4 लेन सड़क का विस्तार होगा। यह कवायद इसलिए है क्योंकि इस साल जनवरी से जुलाई के बीच एनएच-52 पर 15 ब्लैक स्पॉट्स पर 27 सड़क हादसे हुए, जिनमें 27 लोगों को जान गंवानी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित कमेटी के चेयरमैन जस्टिस एएम सप्रे ने एनएचएआई के अधिकारियों से पूछा कि हादसों को रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। अधिकारियों ने कहा था कि इंदौर-खलघाट हाईवे को सिक्स लेन किया जा रहा है। प्रोजेक्ट के लिए मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुल 178 गांवों से जमीन अधिग्रहित की जानी है। सबसे ज्यादा महू के 41 गांवों से जमीनों का अधिग्रहण होगा। अभी डीपीआर पर भी काम जारी है। NH-52:15 ब्लैक स्पॉट्स पर 27 जानें गईं धार के 16, धरमपुरी के 30 गांव नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने जो प्लान संभागायुक्त भास्कर लक्षकार को दिखाया है, उसके मुताबिक परियोजना का बड़ा असर इंदौर जिले की महू तहसील में होगा। यहां 41 गांव इसके दायरे में हैं। धार तहसील में 16 गांव हैं। धरमपुरी तहसील में 30 गांव हैं। बड़वानी जिले की राजपुर तहसील में 22 गांव प्रोजेक्ट के दायरे में हैं। सेंधवा में 15 गांव हैं। निवाली में 9 गांव हैं। वरला में 2 गांव हैं। खरगोन जिले की महेश्वर तहसील के 6 गांव शामिल हैं। कसरावद के 28 गांव भी इसमें शामिल हैं। महाराष्ट्र की ओर के 9 गांव भी इस हाइवे विस्तार में शामिल हैं। इस तरह मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के कुल 178 गांव प्रोजेक्ट के दायरे में आ रहे हैं। नियुक्त होंगे भू-अर्जन अधिकारी : प्रोजेक्ट के लिए जमीन का भू-अर्जन प्रस्तावित है। इसमें निजी, सरकारी और वनभूमि शामिल है। सड़क किनारे की सुविधाओं और जंक्शन के लिए जरूरी जमीन भी शामिल है। सभी संबंधित जिलों की तहसीलों में सक्षम प्राधिकारी भू-अर्जन (कम्पिटेंट अथॉरिटी फॉर लैंड एक्विजिशन-CALA) की नियुक्ति की जानी है। इसके लिए धारा 3(ए) का प्रकाशन किया जाना है। अभी तक यहां फोरलेन सड़क इंदौर से महाराष्ट्र के पलासनेर के बीच अभी तक फोरलेन सड़क है। कुछ दिनों पहले सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति ने एनएचएआई से इस रास्ते पर हादसे रोकने को लेकर उठाए जा रहे कदम पर सवाल पूछा था। इस पर अधिकारियों ने कमेटी को बताया था कि सड़क को फोरलेन से सिक्स लेन किए जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए मधय प्रदेश और महाराष्ट्र के 170 से ज्यादा गांवों से जमीन अधिग्रहण किया जाना है। मध्य प्रदेश इन जिलों के गांवों से लेंगे जमीन मध्य प्रदेश के इंदौर, धार, बड़वानी, खरगोन जिलों के गांवों से हाईवे को चौड़ा करने के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। इस प्रोजेक्ट के लिए भू-अर्जन अधिकारी नियुक्ति भी की जाएगी। महाराष्ट्र की ओर से भी करीब 9 गांवों से यह सड़क गुजरती है। इसे चौड़ा करने के लिए वहां भी जमीन का अधिग्रहण किया जाएगा। आर्थिक और औद्योगिक केन्द्रों को मिलेगा फायदा यह मार्ग आगरा-मुंबई कॉरिडोर का हिस्सा है, जो उत्तर भारत को पश्चिमी एवं दक्षिणी भारत से जोड़ता है. इंदौर एवं मुंबई जैसे प्रमुख आर्थिक व औद्योगिक केंद्रों को जोड़ने वाले इस कॉरिडोर पर लगातार यातायात का दबाव बढ़ रहा है. इस रूट पर प्रतिदिन लगभग 40 हजार वाहनों का आवागमन हो रहा है. इस रूट के 6-लेन का किए जाने से देश के लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को मजबूती मिलेगी और माल परिवहन की दक्षता में बढ़ोत्तरी होगी।  इस परियोजना के तहत भेरू घाट, बाकानेर घाट एवं बिजासन घाट जैसे चुनौतीपूर्ण घाट खंडों को 6-लेन में बदला जाएगा. इस दौरान इस रूट पर पड़ने वाले ब्लैक स्पॉट को भी खत्म किया जाएगा. इस रूट पर कई स्थानों पर ढलाने हैं, इनका संतुलन किया जाएगा. कैरिजवे का चौड़ीकरण किया जाएगा. ढलान को कम तीखा और मोड़ों को अधिक सुरखित बनाया जाएगा. इस नई सड़क पर सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित किया जाएगा।  इसको सेफ्टी फर्स्ट के सिद्धांत पर तैयार किया जाएगा. इसमें क्रैश बैरियर्स, उच्च गुणवत्ता की रोड मार्किंग, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव साइनज, इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम एवं आधुनिक स्लोप स्टेबिलाइजेशन तकनीकों का उपयोग किया जाएगा. इन उपायों के माध्यम से घाट खंडों को उच्च क्षमता, अधिक सुरक्षित एवं निर्बाध यातायात के अनुरूप अत्याधुनिक 6-लेन कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाएगा।  बनेंगे फ्लाई ओवर, अंडरपास परियोजना के अंतर्गत खलघाट क्षेत्र में नर्मदा नदी पर एक नए समानांतर पुल का निर्माण भी किया जाएगा. इससे मौजूदा पुल पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा. इसके अलावा आसपास के छोटे बड़े शहरों में होने वाले जाम को कम करने के लिए बायपास, सर्विस रोड, फ्लाई ओवर और अंडरपास का भी निर्माण किया जाएगा. इससे हाईवे और स्थानीय यातायात व्यवस्था को अलग-अलग व्यवस्थित किया जा सकेगा. यह व्यवस्था न केवल जाम की समस्या को कम करेगी, बल्कि लोगों की सुरक्षा, सुविधा एवं यात्रा अनुभव को भी बेहतर बनाएगी।  पीथमपुर क्षेत्र को मिलेगा फायदा यह परियोजना एनएच-47 व प्रस्तावित इंदौर वेस्टर्न बायपास के साथ मिलकर स्थानीय लॉजिस्टिक्स नेटर्व को और मजबूत करेगी. खासतौर से पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र को इससे फायदा मिलेगा. इससे सप्लाई चेन और बेहतर होगी. एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर प्रवीण यादव के मुताबिक "इस सिक्स लेन हाईवे के निर्माण से इंदौर से महाराष्ट्र और मुंबई तक की यात्रा कम समय में पूरी होगी. इसके अलावा लॉजिस्टिक नेटवर्क में भी मजबूती आएगी. इसकी डीपीआर दिसंबर के अंत तक पूरी होने की संभावना है। 

केंद्रीय सहकारिता मंत्री 3 अक्टूबर को करेंगे डेयरी प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन

केन्द्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री शाह उज्जैन को देंगे 255 करोड़ रूपये के अत्याधुनिक डेयरी प्लांट की सौगात केंद्रीय सहकारिता मंत्री 3 अक्टूबर को करेंगे डेयरी प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन प्लांट की शुरूआत 3 लाख लीटर प्रतिदिन की क्षमता से होगी, भविष्य में 5 लाख लीटर तक होगा विस्तार उज्जैन  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में लगातार प्रयास किया जा रहा है। उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध प्रसंस्करण क्षमता के विस्तार और डेयरी क्षेत्र को सुदृढ़ करने की दिशा में मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ द्वारा 255 करोड़ रुपये की लागत से आधुनिक डेयरी प्लांट स्थापित किया जा रहा है। केंद्रीय सहकारिता एवं गृह मंत्री अमित शाह 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल से इस प्लांट का डिजिटल भूमि-पूजन करेंगे। उज्जैन में स्थापित होने वाला यह अत्याधुनिक डेयरी प्लांट क्षेत्र में दुग्ध प्रसंस्करण, मूल्यवर्धन और विभिन्न डेयरी उत्पादों के उत्पादन को नई गति देगा। परियोजना की कुल लागत में से 170 करोड़ रुपये राज्य शासन द्वारा अनुदान के रूप में प्रदान किए जाएंगे, जबकि शेष 85 करोड़ रुपये दुग्ध संघ द्वारा ऋण के माध्यम से जुटाए जाएंगे।परियोजना को अगले दो वर्ष में पूर्ण करने का लक्ष्य है। प्रस्तावित प्लांट की शुरुआत 3 लाख लीटर प्रतिदिन दूध प्रसंस्करण क्षमता के साथ होगी। भविष्य में इसकी क्षमता को बढ़ाकर 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक किया जा सकेगा। इससे उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में बढ़ती दुग्ध उपलब्धता के साथ प्रसंस्करण क्षमता का विस्तार भी संभव होगा। पैक्ड मिल्क से लेकर घी तक का होगा उत्पादन प्लांट में आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के साथ विभिन्न प्रकार के डेयरी उत्पादों का उत्पादन किया जाएगा। इसमें 1.50 लाख लीटर प्रतिदिन पैक्ड मिल्क, 25 हजार लीटर प्रतिदिन दही तथा 10 हजार लीटर प्रतिदिन लस्सी/छाछ के उत्पादन की क्षमता होगी। इसके अलावा 10 मीट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता का घी प्लांट भी स्थापित किया जाएगा। मध्यप्रदेश राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ के प्रबंध संचालक जयदेव बिस्वास ने कहा, “उज्जैन में आधुनिक डेयरी प्लांट की स्थापना मध्यप्रदेश के डेयरी क्षेत्र के विस्तार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री शाह द्वारा भोपाल से इस परियोजना का डिजिटल भूमि-पूजन किया जाएगा। इस परियोजना से दुग्ध उत्पादकों से प्राप्त दूध का बेहतर प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन सुनिश्चित होगा तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण डेयरी उत्पाद उपलब्ध कराने की क्षमता बढ़ेगी।” उन्होंने कहा, “प्लांट को भविष्य में 5 लाख लीटर प्रतिदिन तक विस्तारित करने का प्रबंध किया गया है। इससे उज्जैन एवं आसपास के क्षेत्रों में दुग्ध उत्पादन, संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी श्रृंखला को मजबूती मिलेगी तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।” यह परियोजना आधुनिक प्रसंस्करण सुविधाओं के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों से प्राप्त दूध के बेहतर उपयोग और मूल्यवर्धन को बढ़ावा देगी। साथ ही क्षेत्र में डेयरी गतिविधियों के विस्तार से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने तथा उपभोक्ताओं तक उच्च गुणवत्ता वाले डेयरी उत्पाद पहुंचाने की दिशा में भी यह महत्वपूर्ण पहल साबित होगी।  

मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई शुरू, दिन में बढ़ेगा तापमान और रात में रहेगी ठंडक

भोपाल  मध्यप्रदेश में मानसून अब विदाई की ओर बढ़ रहा है और 10 अक्टूबर तक प्रदेश से इसके लौटने की संभावना है। अगले तीन दिनों तक कई इलाकों में तेज धूप रहने के आसार हैं, जिससे दिन का तापमान बढ़ सकता है, जबकि रात में हल्की ठंडक महसूस होगी। 5 अक्टूबर को 9 जिलों में बारिश की संभावना जताई गई है। प्रदेश में अब तक करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई है, जो सामान्य से लगभग 4% कम है। पूर्वी मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब 4% ज्यादा, जबकि पश्चिमी मध्यप्रदेश में लगभग 12% कम बारिश दर्ज की गई है।  ग्वालियर-चंबल और उज्जैन से हो सकती है मानसून की वापसी मध्य प्रदेश में मानसून का आधिकारिक सीजन 30 सितंबर को समाप्त हो चुका है, लेकिन अभी तक प्रदेश के किसी भी जिले से मानसून की औपचारिक विदाई नहीं हुई है। वर्तमान में मानसून की वापसी रेखा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के कुछ हिस्सों से होकर गुजर रही है। इसका असर मध्य प्रदेश के ग्वालियर-चंबल और उज्जैन संभाग के आसपास भी देखा जा रहा है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, मानसून की वापसी की शुरुआत इन्हीं क्षेत्रों से हो सकती है। इसके बाद धीरे-धीरे इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग से मानसून विदा हो सकता है। इसकी शुरुआत शुक्रवार या शनिवार से होने की संभावना जताई जा रही है। अक्टूबर में दिन गर्म, रातें रहेंगी ठंडी अक्टूबर को मौसम के बदलाव का महीना माना जाता है। मानसून की विदाई के साथ आसमान साफ होने लगता है, जिससे दिन में धूप का असर बढ़ता है, जबकि रात के तापमान में गिरावट आने लगती है। यही वजह है कि अक्टूबर की शुरुआत में ही प्रदेश के कई शहरों में रात के तापमान में कमी दर्ज की गई है। मौसम विशेषज्ञ के अनुसार, अक्टूबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। हालांकि, कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश भी हो सकती है। 5 अक्टूबर को इन जिलों में बारिश के आसार 5 अक्टूबर को पूर्वी मध्य प्रदेश के पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश होने का अनुमान है। 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा प्रदेश के 25 जिलों में इस मानसून सीजन में बारिश का निर्धारित कोटा पूरा हो चुका है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर शामिल हैं। ऐसे में संभावना है कि यहीं से मानसून वापसी करेगा। इसके बाद इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग से इसकी विदाई होगी। शुक्रवार-शनिवार को इसकी शुरुआत हो सकती है। अक्टूबर में दिन गर्म और रातें ठंडी होंगी मौसम विभाग के अनुसार, प्रदेश में अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का ट्रेंड रहा है। इस बार भी ऐसा ही होने का अनुमान है। दूसरी ओर, अक्टूबर का महीना चेंज ओवर पीरियड रहता है। इस महीने मानसून विदाई पर रहता है। इससे आसमान साफ हो जाता है। इस कारण दिन में गर्मी और रात में ठंड पड़ती है। यही वजह है कि अक्टूबर के पहले ही दिन कई शहरों में रात के तापमान में गिरावट देखने को मिली है। कम बारिश, लेकिन गर्मी का अहसास बढ़ सकता है मौसम विशेषज्ञ नायक ने बताया कि अक्टूबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्से में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। कहीं-कहीं हल्की बारिश होने का अनुमान भी है। 5 अक्टूबर को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश हो सकती है। इस बार प्रदेश में 35.8 इंच बारिश रिकॉर्ड दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच (95.9 प्रतिशत) बारिश हुई है। यह सामान्य बारिश 37.3 इंच (949.5 मिमी) की तुलना में 1.5 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 4 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% बारिश कम हुई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा चार प्रतिशत ज्यादा है। अधिकांश जिलों में कोटे से ज्यादा पानी गिर चुका है लेकिन बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 21% तक कम बारिश हुई है। प्रदेश के पश्चिमी हिस्से आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% कम पानी गिरा है। इन 25 जिलों में कोटा फुल भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है।