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त्रिपुंड और रुद्राक्ष पहने जफर पर हमला, युवती के साथ मंदिर दर्शन के दौरान हुई पिटाई

उज्जैन  उज्जैन में बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने धोती-कुर्ता, माथे पर त्रिपुंड और गले में रुद्राक्ष की माला पहने मुस्लिम युवक की पिटाई कर दी। वह एक युवती के साथ मोहाली से उज्जैन आया था। नानाखेड़ा क्षेत्र में सोमवार रात को बजरंग दल कार्यकर्ताओं ने पकड़कर उससे पूछताछ की और बाद में मारपीट की। इसका वीडियो भी मंगलवार को सामने आया है, जिसमें युवक अपना नाम जफर खान और खुद को शिव भक्त बता रहा है। बजरंग दल को सूचना मिली थी कि अलग-अलग राज्यों से आए युवक-युवती एक होटल में ठहरे हुए हैं। करीब एक घंटे इंतजार के बाद होटल के बाहर धोती-कुर्ता पहने जफर खान नाम के युवक को कार्यकर्ताओं ने पकड़ लिया। पूछताछ में उसने पहले हिंदू नाम बताया, लेकिन सख्ती करने पर अपना नाम जफर खान स्वीकार किया। जफर ने कहा कि वह शिव भक्त है और युवती उसे भगवान शिव के दर्शन कराने उज्जैन लाई थी। दोनों ने महाकाल मंदिर, हरसिद्धि मंदिर और काल भैरव मंदिर के दर्शन किए थे। मुस्लिम नाम सुनते ही की पिटाई जफर खान को पकड़ने के बाद कार्यकर्ताओं ने उसके साथ मारपीट की। करीब एक दर्जन से अधिक लोगों ने उसे घेरकर पहले पूछताछ की और असली नाम सामने आने के बाद पिटाई शुरू कर दी। इस दौरान युवक के सिर से खून भी बहने लगा। सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। होटल में ठहरने पर भी विवाद बजरंग दल के जिला संयोजक ऋषभ कुशवाह ने बताया कि युवक-युवती को कई होटलों में कमरा नहीं मिला था। बाद में वे नानाखेड़ा क्षेत्र के एक होटल में रुके। युवक ने होटल में हिंदू नाम बताया था और पंडित की वेशभूषा में था। बाद में पूछताछ में उसने अपना नाम जफर खान बताया। उसे पुलिस के हवाले कर दिया गया है। युवक-युवती अलग-अलग समुदाय से नानाखेड़ा थाना प्रभारी नरेंद्र यादव ने बताया कि युवक और युवती मोहाली के रहने वाले हैं। युवती की उम्र 32 साल है और दोनों अलग-अलग समुदाय से हैं। युवती को युवक के दूसरे धर्म का होने की जानकारी थी। दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे। पुलिस ने आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। शिकायत मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

नौ सूत्रीय मांगों को लेकर आउटसोर्स कर्मचारी करेंगे हड़ताल, काली पट्टी में जताया विरोध

ग्वालियर मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर राज्य के 30 हजार से अधिक आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी काली पट्टी बांधकर काम कर रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन नौ सूत्रीय मांगों को लेकर किया जा रहा है। संघ ने बताया कि कर्मचारी 17 और 18 फरवरी को भी काली पट्टी बांधकर काम करेंगे और 23 एवं 24 फरवरी को सामूहिक हड़ताल पर रहेंगे। इस आंदोलन में शासकीय मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सिविल अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी स्वास्थ्य केंद्र, संजीवनी क्लिनिक और पोषण पुनर्वास केंद्रों में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारी शामिल हैं। ज्ञापन सौंपकर आंदोलन की रूपरेखा तय, काली पट्टी बांधकर जताएंगे विरोध जिला अध्यक्ष चित्रवीर पटेल के नेतृत्व में कर्मचारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष शर्मा से मुलाकात की। उन्होंने लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव के नाम ज्ञापन सौंपते हुए आंदोलन की रूपरेखा स्पष्ट की। तृतीय चरण (16-18 फरवरी) में प्रदेश के सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर कार्यरत आउटसोर्स कर्मी काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे। अंतिम चरण (23-24 फरवरी) में कर्मचारी काम बंद कर सामूहिक अवकाश पर रहेंगे और भोपाल की सड़कों पर उतरकर "हल्ला बोल" प्रदर्शन करेंगे।  भोपाल में करेंगे हल्ला बोल प्रदर्शन मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ के आह्वान पर  17 और 18 फरवरी को कर्मचारी कार्यस्थल पर काली पट्टी बांधकर विरोध करेंगे। इसके बाद 23 और 24 फरवरी को प्रदेशभर के आउटसोर्स कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे और राजधानी भोपाल में हल्ला बोल प्रदर्शन करेंगे।  स्थायी समाधान निकालने पर जोर संघ के प्रदेश अध्यक्ष कोमल सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्षों से सेवाएं दे रहे आउटसोर्स कर्मचारियों को बिना किसी शर्त के विभाग में तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए। वैकल्पिक रूप से, उन्हें बिना शर्त संविदा में मर्ज किया जाए। कर्मचारियों की मांग है कि उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार की तर्ज पर एक ठोस नीति बनाकर उनके लिए स्थायी समाधान निकाला जाए। इसके अतिरिक्त, निजी आउटसोर्स एजेंसियों द्वारा वेतन भुगतान में हो रही अनियमितताओं को रोकने के लिए सभी जिलों में इन एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर विभाग द्वारा सीधे कर्मचारियों के खातों में वेतन भुगतान की व्यवस्था लागू की जाए। चतुर्थ श्रेणी पदों पर नहीं होगी नियुक्ति जानकारी के लिए बता दें कि मध्यप्रदेश के किसी भी विभाग में अब चतुर्थ श्रेणी के पदों पर कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होगी। सरकार ने इन पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्ति करने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया है। इसके पहले ही सरकार चतुर्थ श्रेणी के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया बंद कर चुकी है।  वित्त विभाग द्वारा 31 मार्च 2023 को विभागों में चतुर्थ श्रेणी पदों पर आउटसोर्स के माध्यम से कर्मचारी रखने को लेकर निर्देश जारी किए थे। इसमें रिक्त पदों पर तात्कालिक आवश्यकता के आधार पर पद पूर्ति जरूरी होने पर आउटसोर्स कर्मियों की सेवाएं लेने की छूट थी, लेकिन बजट के अभाव में नियुक्तियां नहीं की जा सकती थीं। दो साल पहले 2023 में वित्त विभाग ने नियमित भर्तियां पूरी होने तक आउटसोर्स सेवाएं लेने के निर्देश जारी किए थे। इसमें बजटीय प्रावधान के अनुसार विभाग प्रमुख आउटसोर्स एजेंसी चयनित कर सेवाएं ले सकते थे। अब इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया है। नौ सूत्रीय मांगों पर अड़े कर्मचारी, वेतन बढ़ाने की मांग आउटसोर्स कर्मचारियों ने सरकार के सामने नौ सूत्रीय मांगें रखी हैं, जिनमें मुख्य रूप से विभाग में समायोजन की मांग शामिल है। एनएचएम के अंतर्गत सेवाएं दे चुके कर्मियों को रिक्त पदों पर समायोजित कर नियमित किया जाए या संविदा में मर्ज किया जाए। आउटसोर्स कर्मियों का न्यूनतम वेतन 21,000 रुपये निर्धारित हो और अप्रैल 2024 से रुकी हुई 11 माह के एरियर राशि का तत्काल भुगतान किया जाए। रेगुलर कर्मचारियों की तरह छुट्टियां, स्वास्थ्य बीमा और ग्रेच्युटी का लाभ दिया जाए। नियमित भर्तियों में आउटसोर्स कर्मियों को 50 प्रतिशत आरक्षण मिले। निजी आउटसोर्स एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर विभाग सीधे कर्मचारियों के खातों में भुगतान करे। स्वास्थ्य सेवाएं ठप होने की आशंका: मरीजों की बढ़ेगी परेशानी हॉस्पिटल मैनेजमेंट के लिए बड़ी चुनौती राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के जिला अस्पतालों, पीएचसी और सीएचसी में वार्ड बॉय, कंप्यूटर ऑपरेटर, सफाई कर्मी और अन्य तकनीकी पदों पर बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारी तैनात हैं। इनके दो दिवसीय अवकाश पर जाने से ओपीडी रजिस्ट्रेशन, लैब टेस्टिंग और वार्डों की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप होने की आशंका है। इनका कहना है कि हम लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर गुहार लगा रहे हैं, लेकिन केवल आश्वासन मिल रहा है। उत्तर प्रदेश और हरियाणा की तर्ज पर हमारे लिए भी ठोस नीति बनाई जाए, अन्यथा हमें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। – चित्रवीर पटेल, जिला अध्यक्ष, म.प्र. संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ।

F-5 वाला राफेल और भारत-फ्रांस डील: मैक्रों के दौरे के पीछे की वजह क्या है?

नई दिल्ली  फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भारत दौरे पर आ चुके हैं. इमैनुएल मैक्रों आज यानी मंगलवार को मुंबई पहुंचे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ आज उनकी मुलाकात और बैठक होगी. इमैनुएल मैक्रों और मोदी की मुलाकात से रक्षा और तकनीक की दुनिया में हलचल मचने वाली है. इमैनुएल मैक्रों चार दिवसीय भारत यात्रा पर हैं. इसका मुख्य मकसद भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना है. मगर उनकी यात्रा सबसे बड़ा फोकस है 3.25 लाख करोड़ रुपये की महाडील. जी हां, भारत और फ्रांस के बीच 3.25 लाख करोड़ रुपए की राफेल वाली मेगा डिफेंस डील होने वाली है. यह डील भारतीय वायुसेना को 114 आधुनिक राफेल लड़ाकू विमानों से लैस करेगी. इमैनुएल मैक्रों की यह यात्रा न केवल डिप्लोमेसी का प्रतीक है, बल्कि भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ मुहिम को गति देने वाली सौगात भी है. अब सवाल है कि आखिर यह डील इतनी बड़ी क्यों है, और ‘F-5 वाला राफेल’ क्या बला है? इमैनुएल मैक्रों की यात्रा का बैकग्राउंड देखें तो भारत और फ्रांस के रिश्ते पहले से ही मजबूत हैं. 2016 में 36 राफेल जेट्स की पहली डील के बाद दोनों देशों ने कई प्रोजेक्ट्स पर हाथ मिलाया. मसलन स्कॉर्पीन पनडुब्बियां. अब 2026 में यह यात्रा इसलिए अहम है क्योंकि चीन की बढ़ती आक्रामकता और पाकिस्तान की हरकतों के बीच भारत अपनी हवाई ताकत को दोगुना करना चाहता है. इमैनुएल मैक्रों भी मानते हैं कि भारत फ्रांस का सबसे बड़ा साझेदार है. ऑपरेशन सिंदूर में भारत राफेल की ताकत का सबूत देख चुका है. यही कारण है कि इमैनुएल मैक्रों की यात्रा का मुख्य फोकस राफेल डील ही है. यह डील न सिर्फ रक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि भारत-फ्रांस साझेदारी की गारंटी भी बनेगी. भारत-फ्रांस के बीच बड़ी डील यह भारत की आजादी के बाद की सबसे बड़ी हथियार खरीद है. रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने हाल ही में राफेल डील को हरी झंडी दी. डील के तहत फ्रांस की दसॉल्ट एविएशन कंपनी से 114 राफेल मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) खरीदे जाएंगे. इनमें से 18 विमान सीधे फ्रांस से ‘ऑफ-द-शेल्फ’ खरीदे जाएंगे यानी तैयार माल की तरह. बाकी 96 विमान भारत में ही बनाए जाएंगे. इसकी कुल लागत करीब 30 अरब यूरो (लगभग 3.25 लाख करोड़ रुपये) है. इसमें विमानों के अलावा रखरखाव, ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स और मिसाइल सिस्टम जैसे स्कैल्प भी शामिल हैं. यह डील भारतीय वायुसेना की ताकत को 50 फीसदी तक बढ़ा देगी, क्योंकि वर्तमान में 36 राफेल ही हैं. राफेल डील में क्या अहम? इस डील में एक चीज सबसे अहम है, वह है राफेल का एफ-5 वर्जन. जी हां, राफेल एक फ्रेंच लड़ाकू विमान है. यह ‘मल्टी-रोल’ वाला विमान है. जल, थल और नभ तीनों जगह कारगर. राफेल के अलग-अलग वर्जन हैं. जैसे F3, F4. अब नई डील में F4 और F5 वेरिएंट्स आ रहे हैं. भारत-फ्रांस के बीच राफेल डील की सबसे खास बात ये है कि इनमें से 24 विमान ‘सुपर राफेल’ होंगे. इन एडवांस्ड जेट को ही F-5 वर्जन कहा जा रहा है. अभी भारत के पास जो राफेल हैं, वे F-3 वेरिएंट के हैं. ये राफेल 4.5 जेनरेशन फाइटर माने जाते हैं. अभी जो डील होने जा रही है, इनमें ज्यादातर राफेल F-4 वर्जन के होंगे. यह अधिक एडवांस सिस्टम और अपग्रेड टेक्नोलॉजी के साथ आएंगे. जबकि F-5 राफेल एक ‘सुपर अपग्रेड वर्जन’ है. यह छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों जैसा होगा. क्या है एफ-5 वाला राफेल? इसमें एडवांस्ड सेंसर, स्टील्थ फीचर्स (जो रडार से छिप जाएं), AI-बेस्ड ऑटोनॉमी (खुद फैसले लेना) और ‘किल-वेब’ तकनीक है, जो कई विमानों को एक साथ जोड़कर दुश्मन को निशाना बनाती है. F5 में नए इंजन, बेहतर मिसाइलें और ड्रोन इंटीग्रेशन होगा. भारत को 24 ‘सुपर राफेल’ भी मिलेंगे, जो F5 के प्रोटोटाइप हैं. फ्रांस इसे 2030 तक डिलीवर करेगा. यह डील सिर्फ हथियारों की नहीं, बल्कि स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप की है. भारत को राफेल डील के तहत टेक्नोलॉजी ट्रांसफर मिलेगा, जिससे हम खुद राफेल जैसे विमान बना सकेंगे. आज क्या-क्या होगा?     भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी 17 फरवरी 2026 को मुंबई जा रहे हैं. यहां वे फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मिलेंगे. पीएम मोदी के निमंत्रण पर राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 17-19 फरवरी 2026 तक भारत के ऑफिशियल दौरे पर हैं. वे भारत में हो रहे एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे और मुंबई में प्रधानमंत्री के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे. यह राष्ट्रपति मैक्रों का भारत का चौथा और मुंबई का पहला दौरा होगा.     17 फरवरी को दोपहर करीब 3:15 बजे दोनों नेता मुंबई के लोक भवन में द्विपक्षीय मीटिंग करेंगे. इस मीटिंग के दौरान, वे भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी में हुए विकास की समीक्षा करेंगे. उनकी बातचीत रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने और इसे नए और उभरते क्षेत्र में और डाइवर्सिफाई करने पर फोकस होगी. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों क्षेत्रीय और वैश्विक इंपॉर्टेंस के मुद्दों पर भी विचारों का लेन-देन करेंगे.     शाम करीब 5:15 बजे, दोनों नेता भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन 2026 का उद्घाटन करेंगे और दोनों देशों के बिजनेस लीडर्स, स्टार्ट-अप्स, रिसर्चर्स और दूसरे इनोवेटर्स की एक मीटिंग को संबोधित करेंगे. मैक्रों के दौरे पर क्या-क्या होगा? इस दौरे के दौरान दोनों नेता हॉरिजोन 2047 रोडमैप में बताए गए कई क्षेत्रों में आपसी सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा करेंगे. इसके अलावा, आपसी फायदे के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा करेंगे, जिसमें इंडो-पैसिफिक में सहयोग भी शामिल है. दोनों नेता भारत-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन का उद्घाटन करने के लिए मुंबई में उपस्थित होंगे. इस इवेंट को दोनों देशों में पूरे साल 2026 तक मनाया जाएगा. राष्ट्रपति मैक्रों 19 फरवरी को नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट में हिस्सा लेंगे. और क्या-क्या होने की संभावना?     मोदी और मैक्रो की द्विपक्षीय बैठक के बाद करीब एक दर्जन समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना     रक्षा, व्यापार, कौशल विकास, स्वास्थ्य और सप्लाई चेन जैसे क्षेत्र में होगा समझौता     मुंबई में दोनों नेता भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष का संयुक्त उद्घाटन करेंगे, जो 2026 तक दोनों देशों में मनाया जाएगा.     भारत और फ्रांस के बीच रक्षा, टेक्नोलॉजी और व्यापार संबंधों को मिलेगा बढ़ावा     भारत सरकार ने हाल ही में फ्रांस से … Read more

राज्यपाल के अभिभाषण पर जोरदार चर्चा, इंदौर हादसों पर सत्र में हंगामा, मप्र में विधानसभा की कार्यवाही शुरू

भोपाल  मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आज दूसरा दिन है। आज सदन के हंगामेदार होने के आसार है। सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी। इससे पहले वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेंगे। यह प्रावधान वित्तीय वर्ष के शेष महीनों के खर्चों की पूर्ति के लिए लाया जा रहा है। 18 फरवरी को वर्ष 2026-27 का मुख्य बजट पेश किया जाएगा। सत्र के आज भी हंगामेदार रहने के आसार हैं। पहले दिन राज्यपाल मंगूभाई पटेल के अभिभाषण के दौरान विपक्ष ने हंगामा किया था।  कांग्रेस ने इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौत का मुद्दा उठाया था, आज फिर विपक्ष सरकार को घेर सकता है। मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 6 मार्च तक चलेगा। इस दौरान कुल 12 बैठकें प्रस्तावित हैं। 18 फरवरी को उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे।  नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के मामले को लेकर विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन कांग्रेस ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष के नेतृत्व में कांग्रेस विधायक गंदा पानी लेकर विधानसभा परिसर के बाहर पहुंचे और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। मप्र विधानसभा सत्र की कार्यवाही शुरू, इंदौर में हुई मौतों पर कांग्रेस का प्रदर्शन मध्य प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का आज दूसरा दिन है। आज सदन के हंगामेदार होने के आसार है। सदन में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी। इससे पहले वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा अनुपूरक बजट प्रस्तुत करेंगे। यह प्रावधान वित्तीय वर्ष के शेष महीनों के खर्चों की पूर्ति के लिए लाया जा रहा है।  तिलहन संघ कर्मचारियों के वेतनमान का मुद्दा भी सदन में उठा विधानसभा में विधायक केशव देसाई ने न्यायालय के आदेश के बाद भी तिलहन संघ के कर्मचारियों को पांचवें वेतनमान का लाभ नहीं दिए जाने का मामला उठाया। इस सवाल का जवाब सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग की बजाय नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दिया। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे कोर्ट के आदेश जारी हो रहे हैं, वैसे-वैसे सरकार कार्रवाई कर रही है। शासन के विभिन्न विभागों में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ तिलहन संघ के कर्मचारियों के वेतनमान निर्धारण के संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग और वित्त विभाग द्वारा निर्देश जारी किए गए हैं। कर्मचारियों को छठा वेतनमान दिए जाने के संबंध में उन्होंने कहा कि यह मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। अपील और अवमानना के प्रकरण लंबित हैं, इसलिए कोर्ट का फैसला आने के बाद ही इस मामले में आगे कुछ कहा जा सकेगा। भाजपा को शर्म आनी चाहिए- कांग्रेस विधायक उज्जैन के तराना से कांग्रेस विधायक महेश परमार ने कहा कि इंदौर प्रशासन और भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने पूरे विश्व में शर्मसार किया है। दूषित पानी पीने से लगभग 35 से 40 लोगों की मौत हो गई। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें पदोन्नति देकर ऊपर भेज दिया गया। इन मासूम लोगों की मौत के लिए जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए और पीड़ित परिवारों को न्याय मिलना चाहिए। बीजेपी को शर्म आना चाहिए। आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर ध्यानाकर्षण कांग्रेस विधायक आतिफ अकील भोपाल में आवारा कुत्तों की लगातार बढ़ती संख्या और नियंत्रण में कमी को लेकर नगरीय विकास एवं आवास मंत्री का ध्यान आकर्षित करेंगे। वहीं वरिष्ठ भाजपा विधायक जयंत मलैया दमोह जिले के अंतर्गत सीतानगर सिंचाई परियोजना की मूल डीपीआर में किए गए परिवर्तन की जांच को लेकर जल संसाधन मंत्री का ध्यानाकर्षण करेंगे। भाजपा विधायक दल की बैठक आज शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के आवास पर भाजपा विधायक दल की बैठक प्रस्तावित है। बैठक में मंत्रियों और विधायकों के साथ आगामी रणनीति पर चर्चा होगी। विपक्ष के सवालों का प्रभावी जवाब देने और मुख्य बजट को लेकर तैयारी पर विशेष जोर रहेगा। दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की अध्यक्षता में कांग्रेस पहले ही अपनी रणनीति तय कर चुकी है। ऐसे में आज सदन में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिल सकती है।   

पोड़ी में मुख्यमंत्री विष्णु देव ने ₹126 करोड़ के कार्यों का किया लोकार्पण

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज मनेंद्रगढ़–चिरमिरी–भरतपुर जिले के पोड़ी में आयोजित विकास कार्यों के लोकार्पण एवं भूमिपूजन कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस अवसर पर उन्होंने क्षेत्रवासियों को बड़ी सौगात देते हुए ₹88 करोड़ से अधिक की लागत के 59 विकास कार्यों का भूमिपूजन तथा ₹38 करोड़ से अधिक की लागत के 82 विकास कार्यों का लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि इन विकास परियोजनाओं के माध्यम से क्षेत्र में अधोसंरचना सुदृढ़ होगी और जनसुविधाओं का विस्तार होगा, जिससे स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक परिवर्तन आएगा। उन्होंने कहा कि सड़क, भवन, सामुदायिक सुविधाओं और अन्य आवश्यक अधोसंरचना से जुड़े ये कार्य क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति प्रदान करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य केवल योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि उन्हें तेज गति, पारदर्शिता और गुणवत्ता के साथ धरातल पर उतारना है। हमारी सरकार  परिणामोन्मुखी कार्य संस्कृति के साथ प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में संतुलित और समावेशी विकास सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश के दूरस्थ अंचलों तक विकास की पहुँच सुनिश्चित करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी सोच के साथ अधोसंरचना, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सड़क और जनसुविधाओं के क्षेत्र में लगातार कार्य किए जा रहे हैं, ताकि आम नागरिकों को सीधे लाभ मिल सके।

CM साय ने बोर्ड परीक्षा के लिए विद्यार्थियों का बढ़ाया आत्मविश्वास

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय (CM Vishnu Deo Sai) ने प्रदेश के छात्र-छात्राओं को परीक्षाओं के अवसर पर शुभकामनाएं देते हुए उन्हें आत्मविश्वास और हौसले के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया है. उन्होंने विद्यार्थियों के नाम अपने आत्मीय संदेश में कहा कि परीक्षाओं का समय जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव होता है, जिसमें उत्साह के साथ थोड़ा तनाव भी स्वाभाविक है, लेकिन घबराने की आवश्यकता नहीं है. मुख्यमंत्री ने बच्चों से कहा कि परीक्षाओं का समय आ गया है. मैं जानता हूं कि इन दिनों आपके मन में उत्साह भी है और थोड़ा सा तनाव भी. लेकिन सबसे पहले यह जान लीजिए — आप अकेले नहीं हैं, हम सब आपके साथ हैं. उन्होंने कहा कि परीक्षाओं का समय कभी-कभी मन में घबराहट भी लेकर आता है. यह स्वाभाविक है. यदि आपको डर लग रहा है तो इसका अर्थ है कि आप अपनी पढ़ाई और अपने भविष्य को गंभीरता से लेते हैं.     मेरे प्यारे बच्चों,     परीक्षाओं का समय आ गया है। मैं जानता हूँ कि इन दिनों आपके मन में उत्साह भी है और थोड़ा सा तनाव भी। लेकिन सबसे पहले यह जान लीजिए-आप अकेले नहीं हैं। हम सब आपके साथ हैं।     परीक्षाओं का समय कभी-कभी मन में घबराहट भी लेकर आता है। यह स्वाभाविक है। यदि आपको डर लग रहा…     — Vishnu Deo Sai (@vishnudsai) February 17, 2026 उन्होंने कहा कि सबसे पहले यह समझ लीजिए — डर कमजोरी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का संकेत है. लेकिन इस डर को अपने आत्मविश्वास पर हावी न होने दें. आपने पूरे वर्ष मेहनत की है. हर दिन का प्रयास, हर अभ्यास, हर दोहराव — सब आपकी ताकत बनकर आपके साथ खड़े हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि आप सभी नियमित पढ़ाई करें, कठिन विषयों को दोहराएं, समय का संतुलन बनाए रखें. पर्याप्त नींद लें, पौष्टिक भोजन करें और कुछ समय के लिए मोबाइल से दूरी बनाकर अपने लक्ष्य पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित करें. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि छत्तीसगढ़ के सभी विद्यार्थी इस बार भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगे और अपने परिवार तथा प्रदेश का नाम रोशन करेंगे.

सिल्वर मार्केट में भूचाल: ₹1.80 लाख की भारी गिरावट, सोने का भी हाल बेहाल

नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों क्रैश (Gold-Silver Price Crash) जारी है और हर रोज ये कीमती धातुएं सस्ती हो रही हैं. सोमवार को बड़ी गिरावट के बाद मंगलवार को चांदी का भाव फिसला है. मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर खुलने के साथ ही Silver Price 4600 रुपये से ज्यादा कम हो गया. वहीं दूसरी कीमती धातु सोना भी फिसल गया. अपने हाई लेवल से अब चांदी 1.80 लाख रुपये से ज्यादा सस्ती (Silver Crash From High) मिल रही है, जबकि सोना 38,000 रुपये से अधिक सस्ता (Gold Cheaper) हो गया है.  क्या फूट गया है चांदी का बुलबुला?  सबसे पहले बात करते हैं चांदी की कीमत में लगातार जारी गिरावट के बारे में, तो महज कुछ ही दिनों में चांदी का बुलबुला फूटा (Silver Bubble Burst) हुआ नजर आ रहा है. इसके इस हिसाब से भी समझ सकते हैं कि बीते 29 जनवरी को सिल्वर प्राइस पहली बार 4 लाख रुपये प्रति किलो के पार निकला था और 4,20,048 रुपये के लाइफ टाइम हाई लेवल पर पहुंच गया था. इस हाई लेवल से अब तक चांदी 1,80,157 रुपये प्रति किलोग्राम सस्ती हो चुकी है.   मंगलवार को खुलते ही धड़ाम Silver सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को भी चांदी का भाव एमसीएक्स पर खुलने के साथ ही धड़ाम नजर आया. सोमवार को 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी 2,39,891 रुपये प्रति किलो पर क्लोज हुआ थी और इसके मुकाबले ये ओपन होते ही गिरकर 2,35,206 रुपये पर आ गई. इस हिसाब से देखें, तो झटके में 1 Kg Silver Price 4,685 रुपये तक कम हो गया है.  Gold का भी सिल्वर जैसा हाल  चांदी की कीमत के बाद बात करें, सोने के भाव के बारे में, तो ये कीमती धातु भी लगातार गिरावट देख रही है. हालांकि, बीच-बीच में इसकी कीमत में उछाल भी देखने को मिला है. बहरहाल, मंगलवार को 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाले गोल्ड का वायदा भाव अपने पिछले बंद 1,54,760 रुपये से गिरकर 1,53,550 रुपये प्रति 10 ग्राम के लेवल पर आ गया. यानी MCX Gold Rate 1,210 रुपये कम हो गया.  अपने हाई से कितना सस्ता सोना?  Gold Rate ने भी बीते 29 जनवरी को ही चांदी के कदम से कदम मिलाकर चलते हुए अपना लाइफ टाइम हाई लेवल छुआ था. रॉकेट की रफ्तार से भागते हुए 10 Gram 24 Karat Gold Rate 1,93,096 रुपये के हाई पर पहुंच गया था. इस स्तर पर पहुंचने के बाद क्रैश का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ, जिसका असर अब तक देखने को मिल रहा है. सोना अपने हाई से अब तक 38,336 रुपये प्रति 10 ग्राम तक सस्ता हो चुका है. 

नई आबकारी नीति लागू, रायपुर एयरपोर्ट के होटल-रेस्टोरेंट संचालकों को मिली बड़ी राहत, बार खुलने की अनुमति

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में नई आबकारी नीति 2026-27 को हरी झंडी दे दी गई है। इस नीति का मुख्य केंद्र बिंदु राजस्व में वृद्धि और व्यापार करने की सुगमता (Ease of Doing Business) है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में नई शराब दुकानें नहीं खोली जाएंगी, लेकिन मौजूदा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और लाभप्रद बनाया जाएगा। नए नियमों के अनुसार, अब शराब की आपूर्ति से पहले ही टैक्स का भुगतान अनिवार्य होगा, जिससे सरकारी खजाने में समय पर राजस्व सुनिश्चित हो सकेगा। रायपुर एयरपोर्ट पर बार और लाइसेंस फीस में राहत पर्यटन को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने के लिए सरकार ने रायपुर एयरपोर्ट पर ‘विमानपत्तन रेस्टोरेंट बार’ (FL-3 घ) शुरू करने का रास्ता साफ कर दिया है। इसके साथ ही, होटल, क्लब और रेस्टोरेंट संचालकों के लिए लाइसेंस फीस में उल्लेखनीय कटौती की गई है। इस रियायत का उद्देश्य (CG New Excise Policy) राज्य में निवेश आकर्षित करना और आतिथ्य सत्कार क्षेत्र को मजबूती देना है। हालांकि, बार संचालन के समय में कोई बदलाव नहीं किया गया है; यह पहले की तरह सुबह 11 बजे से रात 11 बजे तक ही संचालित होंगे। प्लास्टिक बोतलों में मिलेगी शराब पर्यावरण और सुरक्षा के दृष्टिकोण से एक बड़ा बदलाव पैकेजिंग में किया गया है। अब छत्तीसगढ़ में देसी और विदेशी शराब कांच की बोतलों के बजाय प्लास्टिक की बोतलों में बेची जाएगी। विभाग का तर्क है कि कांच की बोतलों के टूटने से हर साल करोड़ों का नुकसान होता है और इससे कर्मचारियों के घायल होने का खतरा भी बना रहता है। प्लास्टिक पैकेजिंग से परिवहन आसान होगा और स्टोरेज की लागत में कमी आएगी। यह नियम 1 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में अनिवार्य रूप से लागू हो जाएगा। महंगी होगी शराब: नया टैक्स स्लैब लागू शराब प्रेमियों के लिए खबर थोड़ी कड़वी हो सकती है क्योंकि नई नीति में आबकारी ड्यूटी बढ़ा दी गई है। विशेष रूप से विदेशी और प्रीमियम ब्रांड्स (CG New Excise Policy) पर अब ‘रिटेल सेल प्राइस’ (RSP) के आधार पर टैक्स लगेगा। जितनी महंगी बोतल होगी, उस पर उतना ही अधिक ड्यूटी टैक्स देना होगा। बीयर और रेडी-टू-ड्रिंक (RTD) पेय पदार्थों पर भी नई दरें लागू की गई हैं। सरकार का मानना है कि उच्च श्रेणी के ब्रांड्स पर टैक्स बढ़ाने से राजस्व में बड़ी बढ़ोतरी होगी, जबकि सेना और अर्धसैनिक बलों के लिए ड्यूटी की न्यूनतम दरें बरकरार रखी गई हैं। प्रशासनिक सुधार और निगरानी नई नीति के तहत प्रशासनिक शक्तियों में भी बदलाव किया गया है। अब कंपोजिट लाइसेंस जारी करने का अधिकार सीधे आबकारी आयुक्त के पास होगा, जिससे प्रक्रिया में तेजी आएगी। साथ ही, अवैध शराब की तस्करी और ब्लैक मार्केटिंग रोकने के लिए डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा।

ताजपोशी के दिन सवाल तय: तारिक रहमान की संपत्ति कितनी है — पत्नी जुबैदा की आमदनी से तुलना

ढाका  तारिक रहमान की ताजपोशी होने वाली है. दुनियाभर से करीब 1200 मेहमान शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचने वाले हैं. दरअसल, तारिक रहमान बांग्लादेशी के अगले प्रधानमंत्री बनने वाले हैं. ये पूर्व राष्ट्रपति जिया उर रहमान और पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं, और 17 साल के निर्वासन के बाद 2025 में लंदन से बांग्लादेश लौटकर आए हैं.  बंपर जीत के बाद तारिक रहमान की खूब चर्चा हो रही है. लोग जानना चाहते हैं कि बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी प्रमुख तारिक रहमान की कुल संपत्ति कितनी है, उनकी कमाई का जरिया क्या है?  पति से ज्यादा पत्नी अमीर चुनावी हलफनामे के मुताबिक तारिक रहमान की कुल नेटवर्थ करीब 1.97 करोड़ बांग्लादेशी टका है, जो भारतीय करेंसी में करीब 1.48 करोड़ रुपये के बराबर है. उनकी यह नेटवर्थ मुख्य रूप से बैंक बैलेंस, फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर और अचल संपत्ति मिलाकर है. चुनाव आयोग के सामने जमा किए गए हलफनामे में यह विवरण साफ दर्ज किया गया है.  बता दें, तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगुरा-6 दोनों सीटों से भारी मतों से जीत हासिल की है. Election Affidavit के अनुसार तारिक रहमान की सालाना आय करीब 6.76 लाख टका (लगभग 5 लाख रुपये) है, जो उन्होंने शेयर, बॉन्ड और बैंक जमा पर अर्जित किया है.  उनके बैंक खातों में कुल जमा लगभग 1.23 करोड़ टका (यानी करीब 92.25 लाख रुपये) हैं, जिनमें से लगभग 31.6 लाख टका नकद या चालू बचत में रखे हुए हैं. Fixed Deposits में कुछ उनके बेटी के नाम पर भी हैं, तारिक रहमान द्वारा घोषित चल संपत्ति (movable assets) में फर्नीचर लगभग 2 लाख टका का है. इसके अलावा उनके पास बोगुरा में 2 एकड़ से अधिक जमीन है.  तारिक रहमान की पत्नी डॉक्टर तारिक की पत्नी डॉ. जुबैदा रहमान ने अपने हलफनामे में काफी अधिक आय और संपत्ति घोषित की है. वे एक डॉक्टर हैं और उनकी वर्षीय आय लगभग 35.6 लाख टका (लगभग 26.7 लाख रुपये) है, यह उनकी पति की आय से लगभग 5 गुना अधिक है. उनके बैंक जमा लगभग 1 करोड़ बांग्लादेशी टका हैं, जिसमें से 66.5 लाख टका बचत खाते में हैं, वे 111.25 डिसिटल भूमि और 800-स्क्वायर-फुट के डुप्लेक्स घर की भी मालकिन हैं. टैक्स रिकॉर्ड्स से पता चलता है कि तारिक ने पिछले साल करीब 1 लाख टका टैक्स दिया, हलफनामे के अनुसार, उनके पास कोई भी कर्ज या सरकारी बकाया नहीं है. जबकि उनकी पत्नी ने लगभग 5.6 लाख टका टैक्स दिया. शेयरों में भी दोनों का मिलकर कुछ निवेश है, जिसमें लगभग 5 लाख रुपये से अधिक का शेयर और अन्य कंपनियों में 18.5 लाख रुपये का निवेश शामिल है. हलफनामे में यह भी उल्लेख है कि 2004 से अब तक दर्ज 77 कानूनी मामलों में उन्हें पूरी तरह से बरी कर दिया गया है.

रूस की रणनीति से सोने की कीमतें धड़ाम, 1 लाख रुपये से नीचे जाने की आशंका

इंदौर   भारत में सोने की कीमतों ने वर्ष 2025 में शानदार रिटर्न दिया था. 2026 की शुरुआत में भी तेजी का सिलसिला जारी रहा और मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना ₹1,80,779 प्रति 10 ग्राम के शिखर तक पहुंच गया. हालांकि, हाल के सत्रों में इसमें तेज करेक्शन भी देखने को मिला है. पिछले सप्ताह के अंत में MCX पर सोना लगभग ₹1,56,200 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ, जो अपने उच्चतम स्तर से करीब 13 प्रतिशत नीचे है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी यही रुझान दिखा. COMEX पर सोना अपने रिकॉर्ड स्तर से लगभग 10 प्रतिशत नीचे कारोबार करता नजर आया. अब बाजार में यह चर्चा तेज है कि अगर भू राजनीतिक समीकरण बदलते हैं तो सोना 3,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल सकता है. दरअसल, बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोने की तेजी को अब नई चुनौतियां मिल रही हैं. रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस अमेरिका के साथ डॉलर आधारित व्यापार समझौते की संभावनाएं तलाश रहा है. यदि ऐसा होता है तो यह BRICS देशों की ‘डीडॉलराइजेशन' रणनीति के लिए बड़ा झटका हो सकता है. रूस-अमेरिका गठजोड़  अब तक BRICS देशों द्वारा व्यापार में डॉलर पर निर्भरता कम करने और सोने का भंडार बढ़ाने की कोशिशें की जा रही थीं. इसी कारण वैश्विक स्तर पर सोने की मांग मजबूत बनी हुई थी. लेकिन रूस के संभावित रुख में बदलाव से यह धारणा कमजोर पड़ सकती है, जिसका सीधा असर सोने की कीमतों पर दिख सकता है. अमेरिकी आर्थिक संकेतक भी बने कारण दरअसल, सोने की कीमतें केवल भू राजनीतिक घटनाओं पर ही निर्भर नहीं करतीं, बल्कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. हाल में अमेरिका में महंगाई के आंकड़े मजबूत आए हैं, जिससे ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कम हुई हैं. ऐसे में अगर फेड दरों में कटौती टालता है, तो डॉलर मजबूत रह सकता है. मजबूत डॉलर आमतौर पर सोने के लिए नकारात्मक माना जाता है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना महंगा हो जाता है और मांग घटती है. निवेशकों के लिए क्या है संकेत? मौजूदा परिस्थितियों में कीमती धातुओं के बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है. विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में लंबी अवधि के निवेशक घबराएं नहीं, लेकिन अल्पकालिक निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए. यदि रूस-अमेरिका व्यापार में डॉलर की वापसी की खबरें पुख्ता होती हैं और फेड दरों में कटौती नहीं करता, तो सोना ₹1 लाख प्रति 10 ग्राम के नीचे भी आ सकता है. हालांकि अंतिम दिशा वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगी. सोना परंपरागत रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है. लेकिन जब वैश्विक जोखिम कम होते हैं और डॉलर मजबूत होता है, तो इसमें मुनाफावसूली बढ़ जाती है. फिलहाल, बाजार इसी दोराहे पर खड़ा है. आने वाले हफ्तों में रूस की आधिकारिक प्रतिक्रिया, अमेरिकी आर्थिक डेटा और वैश्विक बाजार का रुख तय करेगा कि सोना फिर से चमकेगा या कीमतों में और गिरावट देखने को मिलेगी.