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एमपी हाईकोर्ट अपडेट: जजों के खाली पदों की वजह से लंबित 4.8 लाख से ज्यादा केस, निपटान में लगेगा चार दशक

 जबलपुर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर और खंडपीठ इंदौर व ग्वालियर में यदि न्यायाधीशों की मौजूदा संख्या 42 से बढ़कर 75 या 85 नहीं होती है, तो साढ़े चार लाख 80 हजार से अधिक लंबित प्रकरणों का बैकलाग खत्म करने में पांच या दस साल नहीं, बल्कि चार दशक से अधिक समय लग सकता है। एरियर कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण इस संबंध में एरियर कमेटी की रिपोर्ट महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में देरी लंबित मामलों के बढ़ने का प्रमुख कारण है। ऐसे में हाई कोर्ट में लंबित मामलों की स्थिति और उनके समाधान पर गंभीरता से ध्यान देना आवश्यक हो गया है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 39-ए के तहत राज्य का यह दायित्व है कि प्रत्येक नागरिक को न्याय तक समान और प्रभावी पहुंच सुनिश्चित की जाए। लेकिन यदि न्याय मिलने में दशकों का समय लगे, तो यह संवैधानिक प्रावधान केवल औपचारिकता बनकर रह जाता है। वर्तमान स्थिति इसी ओर संकेत करती है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में 11 जजों की कमी, बढ़ते मामलों से बढ़ेगी मुश्किल मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की बात करें तो यहां 53 स्वीकृत पदों के मुकाबले फिलहाल केवल 42 न्यायाधीश कार्यरत हैं। यानी 11 पद रिक्त, जो कुल स्वीकृत संख्या का करीब 20.75 प्रतिशत है। यह आंकड़ा इसलिए और चिंताजनक हो जाता है, क्योंकि मध्य प्रदेश पहले से ही लंबित मामलों के मामले में देश के बड़े राज्यों में शामिल है। हाईकोर्ट में जजों की यह कमी न केवल मामलों की सुनवाई को धीमा करती है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में आम लोगों के भरोसे को भी कमजोर करती है। वकीलों और सामाजिक संगठनों का लंबे समय से कहना रहा है कि जजों की कमी के कारण नियमित सुनवाई संभव नहीं हो पाती और तारीख पर तारीख न्याय व्यवस्था की पहचान बनती जा रही है। केंद्र सरकार ने संसद को यह भी बताया कि जिला और अधीनस्थ न्यायपालिका में नियुक्ति और पदों का निर्धारण संबंधित राज्य सरकार और हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में आता है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में कुल 1639 न्यायिक अधिकारी कार्यरत हैं। इनमें से 803 जज अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से आते हैं, जो कुल कार्यरत संख्या का 48.99 प्रतिशत है। वहीं, करीब 51 प्रतिशत न्यायिक अधिकारी अन्य वर्गों से हैं। हालांकि, सरकार ने संसद में जिला-वार रिक्त पदों का कोई अलग-अलग ब्योरा पेश नहीं किया। इससे यह साफ हो जाता है कि मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्य में निचली अदालतों पर बढ़ते बोझ के बावजूद, जजों की वास्तविक कमी का जिला स्तर पर कोई सार्वजनिक और पारदर्शी आकलन सामने नहीं आया है। जानकारों का मानना है कि अगर जिला-वार आंकड़े सामने आएं, तो स्थिति और भी गंभीर नजर आ सकती है। देशभर की स्थिति: कई हाईकोर्ट में हालात बेहद गंभीर अगर देशभर की तस्वीर पर नजर डालें, तो हालात केवल मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट में 94 स्वीकृत पदों में से 14 पद खाली हैं, यानी करीब 14.9 प्रतिशत। दिल्ली हाईकोर्ट में 60 में से 16 पद (26.6 प्रतिशत) और मद्रास हाईकोर्ट में 75 में से 22 पद (29.3 प्रतिशत) रिक्त हैं। सुप्रीम कोर्ट में भी 34 स्वीकृत पदों में से एक पद खाली है, जो भले ही प्रतिशत में कम लगे, लेकिन शीर्ष अदालत में हर एक जज की भूमिका बेहद अहम होती है। इलाहाबाद, कलकत्ता और जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में सबसे ज्यादा संकट आंकड़ों के मुताबिक, इलाहाबाद हाईकोर्ट में जजों की कमी सबसे ज्यादा है। यहां 160 स्वीकृत पदों के मुकाबले 50 पद खाली हैं, यानी 31.25 प्रतिशत। कलकत्ता हाईकोर्ट की स्थिति और भी गंभीर है, जहां 72 में से 29 पद रिक्त हैं, जो 40.3 प्रतिशत बैठता है। वहीं जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख और झारखंड हाईकोर्ट में हालात बेहद चिंताजनक बताए गए हैं, जहां 44 प्रतिशत से अधिक पद खाली हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि देश के कई हिस्सों में न्यायपालिका संसाधनों की भारी कमी से जूझ रही है। मध्य प्रदेश की निचली अदालतों में वर्गवार प्रतिनिधित्व मध्य प्रदेश में जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में कार्यरत न्यायिक अधिकारियों का वर्गवार विवरण भी संसद में पेश किया गया। इसके अनुसार:     अनुसूचित जाति (SC): 263 जज – लगभग 16.05%     अनुसूचित जनजाति (ST): 232 जज – लगभग 14.15%     अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 308 जज – लगभग 18.79%     अन्य वर्ग: 836 जज – लगभग 51.01% कुल मिलाकर 1639 कार्यरत न्यायिक अधिकारियों में से लगभग आधे SC, ST और OBC वर्ग से हैं। हालांकि, सवाल यह भी उठ रहा है कि जब पद ही पर्याप्त नहीं हैं, तो प्रतिनिधित्व के ये आंकड़े न्यायिक बोझ को कितना कम कर पा रहे हैं। भोपाल के एडवोकेट सुनील आदिवासी ने द मूकनायक से बातचीत में न्यायपालिका की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि अदालतों में जजों की कमी तो पहले से ही एक बड़ी समस्या है, लेकिन इससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि दलित और आदिवासी वर्ग से आने वाले जज केवल नाम मात्र के बराबर रह गए हैं। उनका कहना है कि सामाजिक न्याय की जिस अवधारणा की बात संविधान करता है, वह तब तक अधूरी रहेगी, जब तक न्याय देने वाली व्यवस्था में ही वंचित तबकों की पर्याप्त भागीदारी सुनिश्चित नहीं की जाती। एडवोकेट सुनील आदिवासी ने आगे कहा कि जब न्यायपालिका में दलित-आदिवासी समुदाय का प्रतिनिधित्व बेहद सीमित होता है, तो इसका असर फैसलों की संवेदनशीलता और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच पर भी पड़ता है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि संवैधानिक मूल्यों के लिए भी एक गंभीर चेतावनी है। यदि समय रहते जजों की नियुक्ति में सामाजिक विविधता और प्रतिनिधित्व पर ध्यान नहीं दिया गया, तो न्यायपालिका से आम जनता का भरोसा कमजोर होना तय है। न्याय में देरी और न्याय से वंचित? विशेषज्ञों का मानना है कि जजों की कमी सीधे-सीधे न्याय में देरी से जुड़ी हुई है। जब एक-एक जज पर हजारों मामलों का बोझ हो, तो त्वरित और प्रभावी न्याय की कल्पना करना मुश्किल हो जाता है। सुप्रीम कोर्ट से लेकर जिला अदालतों तक रिक्त पदों को भरने में हो रही देरी पर … Read more

AIIMS दिल्ली की बड़ी पहल: स्ट्रोक से जूझ रहे मरीज अब घर पर ही कर सकेंगे रिकवरी

नई दिल्ली भारत में आज स्ट्रोक एक गंभीर और तेजी से बढ़ती हुई स्वास्थ्य समस्या बन चुका है. बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता स्ट्रेस, गलत खान-पान और फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण स्ट्रोक के मामले हर साल लगातार बढ़ रहे हैं. हालात इतने गंभीर हैं कि हर साल लाखों भारतीय स्ट्रोक का शिकार होते हैं, जिनमें से कई लोगों की जान चली जाती है. जेरोधा के को-फाउंडर नितिन कामथ और एक्टर मिथुन चक्रवर्ती, हाल के कुछ सालों में कई जानी-मानी हस्तियां स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारी का सामना कर चुकी हैं. इससे साफ है कि यह बीमारी अब सिर्फ बुजुर्गों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कम उम्र के लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं. स्ट्रोक के बाद कई मरीजों में शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या लकवा, बोलने-समझने में परेशानी, चलने-फिरने में दिक्कत और रोजमर्रा के कामों में दूसरों पर निर्भरता बढ़ जाती है.  AIIMS की नई स्टडी से नई उम्मीद ऐसे में AIIMS दिल्ली की एक नई स्टडी स्ट्रोक के मरीजों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है. इस स्टडी के अनुसार, रोजाना सिर्फ 30 मिनट धूप में समय बिताना स्ट्रोक से उबर रहे मरीजों की रिकवरी, नींद और मूड में सुधार कर सकता है. वो भी बिना किसी अधिक खर्च के… एम्स की यह स्टडी नवंबर 2023 से अप्रैल 2025 के बीच की गई और इसे संस्थान के पांचवें रिसर्च डे पर पेश किया गया. इसमें पाया गया कि जिन स्ट्रोक मरीजों को नियमित इलाज और फिजियोथेरेपी के साथ सनलाइट थेरेपी दी गई, उनकी जिंदगी की गुणवत्ता उन मरीजों की तुलना में काफी बेहतर रही जिन्हें केवल सामान्य इलाज दिया गया.  कैसे की गई स्टडी? इस स्टडी में 18 से 80 वर्ष के उन मरीजों को शामिल किया गया, जिन्हें पिछले एक महीने के अंदर मिडियम लेवल का स्ट्रोक हुआ था.     200 से ज्यादा मरीजों की स्क्रीनिंग के बाद 40 मरीजों को चुना गया और फिर उन्हें दो ग्रुप में बांटा गया.      पहला ग्रुप सिर्फ स्टैंडर्ड मेडिकल ट्रीटमेंट और रिहैबिलिटेशन और दूसरा ग्रुप स्टैंडर्ड ट्रीटमेंट और करीब दो हफ्तों तक हर दूसरे दिन 30 मिनट धूप में बैठना.      धूप की तीव्रता 10,000 से 25,000 लक्स के बीच रखी गई, जो हल्की आउटडोर डे-लाइट के बराबर होती है. सुरक्षा के लिए लक्स मीटर से लगातार निगरानी की गई.     तीन महीने तक मरीजों की शारीरिक क्षमता, मूड, नींद, रोजाना के काम करने की शक्ति और ओवरऑल वेल-बीइंग को देखा गया. स्टडी का नतीजा क्या हुआ? डॉक्टरों के मुताबिक, सनलाइट थेरेपी लेने वाले मरीजों में नींद की क्वालिटी  बेहतर हुई. नींद के साथ मूड और मानसिक स्थिति में सुधार देखा गया और खुद रोजाना के काम में आत्मनिर्भरता बढ़ी. एक्सपर्ट्स का मानना है कि धूप शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक को ठीक करती है, विटामिन D बढ़ाने में मदद करती है और सूजन को कम कर सकती है, जो स्ट्रोक रिकवरी में अहम रोल निभाते हैं.  भारतीयों के लिए क्यों है खास? भारत में स्ट्रोक रिकवरी एक लंबा और महंगा प्रोसेस माना जाता है, जिसकी वजह से कई बार लोग इसको अफोर्ड नहीं कर पाते हैं. कई मरीजों को लंबे समय तक फिजियोथेरेपी और देखभाल की जरूरत होती है, जो हर किसी के लिए पॉसिबल नहीं. ऐसे में 30 मिनट की धूप जैसी फ्री, सुरक्षित और आसानी से मौजूद थेरेपी खासतौर पर गांव के इलाकों और घर पर रिकवरी कर रहे मरीजों के लिए बेहद  उपयोगी हो सकती है. हालांकि स्टडी का सैंपल साइज छोटा था और यह एक ही सेंटर पर की गई, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि अगर आगे बड़े लेवल पर इस पर रिसर्च होती है, तो सनलाइट थेरेपी पोस्ट-स्ट्रोक केयर का अहम हिस्सा बन सकती है. स्ट्रोक पर क्या कहते हैं ICMR के आंकड़े ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज के आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 में भारत में करीब 12 लाख नए स्ट्रोक के मामले सामने आए. इतना ही नहीं, लगभग 94 लाख लोग ऐसे थे जो स्ट्रोक के बाद इसके लंबे समय तक रहने वाले असर जैसे कमजोरी, बोलने में दिक्कत या याददाश्त की समस्या से जूझ रहे थे. ICMR के 2021 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में स्ट्रोक आज मौत का तीसरा सबसे बड़ा कारण बन चुका है. यह डिसेबिलिटी की छठी सबसे बड़ी वजह भी है, यानी बड़ी संख्या में लोग स्ट्रोक के बाद नॉर्मल जिंदगी नहीं जी पाते हैं. 2023 में लैंसेट जर्नल में पब्लिश एक स्टडी, जो भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के साथ की गई थी. उस रिपोर्ट के मुताबिक, अगर हालात नहीं सुधरे तो साल 2050 तक कम और मिडियम इनकम वाले देशों में करीब 1 करोड़ लोगों की मौत स्ट्रोक की वजह से हो सकती है, और इस खतरे से भारत भी बाहर नहीं है.

नई डिफेंस तकनीक: राफेल से बड़ा ब्रह्मास्त्र, दुश्मन को छुपा और पानी में तबाही

नई दिल्ली भारत और जर्मनी के बीच करीब 8 अरब डॉलर (लगभग 70,000 से 72,000 करोड़ रुपये) के प्रोजेक्ट-75(I) पनडुब्बी निर्माण समझौते पर मार्च के अंत तक हस्ताक्षर होने की संभावना है. यह सबमरीन डील अब तक का भारत का सबसे बड़ा रक्षा सौदा बन सकता है और दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा. बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और सूत्रों के मुताबिक इसे हाल ही में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की जनवरी में भारत यात्रा के दौरान निर्णायक गति मिली. प्रोजेक्ट-75 इंडिया (P-75I) का उद्देश्य इंडियन नेवी के पुराने हो चुके पारंपरिक पनडुब्बी बेड़े को आधुनिक बनाना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा एवं डेटरेंस कैपेबिलिटी (प्रतिरोध की क्षमता) को मजबूत करना है. ऐसे समय में जब चीन और पाकिस्तान हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा रहे हैं, भारत के लिए अल्‍ट्रा मॉडर्न सबमरीन की तैनाती रणनीतिक रूप से बेहद अहम मानी जा रही है. P-75I प्रोजेक्‍ट के तहत छह उन्नत पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक अटैक सबमरीन का निर्माण किया जाएगा. शॉर्टलिस्‍ट किए गए टाइप-214 नेक्स्ट जेनरेशन सबमरीन फ्यूल सेल आधारित एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस होंगी, जिससे वे कई हफ्तों तक बिना सतह पर आए समुद्र के भीतर रह सकती हैं. इससे उनकी पहचान और ट्रैकिंग का जोखिम काफी कम हो जाता है और नौसेना की सीक्रेट ऑपरेशन क्षमता में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होती है. चीन और पाकिस्‍तान ने खासतौर पर अरब सागर के साथ ही हिन्‍द महासागर क्षेत्र में अपनी गतिविधियों को काफी बढ़ावा दिया है. इससे भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए नई चुनौतियां पेश होने लगी हैं. यही वजह है कि भारत सबमरीन फ्लीट को अपग्रेड करने के साथ ही उसे बढ़ा भी रहा है. क्‍या है सबमरीन डील? oइस परियोजना में जर्मनी की थाइसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के साथ साझेदारी में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) देश में ही इन पनडुब्बियों का निर्माण करेगी. ‘टाइम्‍स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के अनुसार, रणनीतिक साझेदारी मॉडल के तहत 45 से 60 प्रतिशत तक स्वदेशीकरण का लक्ष्य रखा गया है, जिससे ‘मेक इन इंडिया’ पहल को मजबूती मिलेगी. प्रस्तावित समझौते में पनडुब्बी निर्माण से जुड़ी अहम टेक्‍नोलॉजिकल ट्रांसफर का भी प्रावधान होने की संभावना है, जो भारत की लॉन्‍ग टर्म रक्षा आत्मनिर्भरता के लिए अहम माना जा रहा है. भारतीय नौसेना के पास फिलहाल करीब एक दर्जन रूसी मूल की पनडुब्बियां और छह फ्रांसीसी निर्मित स्कॉर्पीन श्रेणी की आधुनिक पनडुब्बियां हैं. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बदलते सामरिक हालात और क्षेत्रीय चुनौतियों के मद्देनजर भारत को अपनी पनडुब्बी क्षमता में और विस्तार की जरूरत है. इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अक्टूबर 2014 में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने प्रोजेक्ट-75(I) के तहत 6 नई पनडुब्बियों की खरीद को मंजूरी दी थी, जबकि जुलाई 2021 में औपचारिक अनुरोध प्रस्ताव (RFP) जारी किया गया. राफेल फाइटर जेट से भी बड़ी डील यह प्रोजेक्‍ट केवल नेवी की युद्ध क्षमता को ही नहीं बढ़ाएगी, बल्कि देश के जहाज निर्माण और रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी बड़ा प्रोत्साहन देगी. इससे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए नए अवसर पैदा होंगे और पनडुब्बी प्रणालियों, स्पेयर पार्ट्स तथा उपकरणों के निर्माण से जुड़ा एक व्यापक औद्योगिक इकोसिस्टम विकसित होगा. जर्मनी के साथ सबमरीन करार भारत के लिए अभी तक की सबसे बड़ी डिफेंस डील साबित होगी. यह साल 2016 में की गई राफेल फाइटर जेट खरीद समझौते से भी बड़ा है. भारत ने फ्रांस से 36 राफेल फाइटर जेट ₹58000 में खरीदा था, जबकि जर्मनी के साथ सबमरीन डील ₹72000 करोड़ की है. नेवी के लिए 51 वॉरशिप सरकार हाल के वर्षों में भारतीय नौसेना के स्वदेशीकरण रोडमैप 2015–2030 को तेजी से लागू कर रही है. इसके तहत देश में 51 बड़े युद्धपोतों का निर्माण जारी है, जिनकी कुल लागत करीब 90,000 करोड़ रुपये है. वर्ष 2014 से अब तक भारतीय शिपयार्ड्स नौसेना को 40 से अधिक स्वदेशी युद्धपोत और पनडुब्बियां सौंप चुके हैं, और बीते एक वर्ष में औसतन हर 40 दिन में एक नया पोत नौसेना में शामिल हुआ है. विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत-जर्मनी के बीच होने वाला यह पनडुब्बी सौदा न केवल रक्षा क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा, बल्कि भारत को क्षेत्रीय समुद्री शक्ति संतुलन में और अधिक सशक्त भूमिका निभाने में मदद करेगा.

भारत में कर्ज़ का भार: ये 10 राज्य सबसे ज्यादा ऋणग्रस्त, पंजाब और पश्चिम बंगाल शामिल

नई दिल्ली भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की रफ्तार तेज है और ये दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इकोनॉमी में बना हुआ है. वर्ल्ड बैंक से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तक ने इसका लोहा माना है. लेकिन तेजी से बढ़ते देश में, क्या आप जानते हैं कि कौन से राज्य सबसे ज्यादा कर्ज में डूबे हुए हैं? तो भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों पर नजर डाल लें, जिनसे पता चलता है कि कई बड़े राज्यों को कर्ज के बोझ तले दबकर अपने रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा इनके ब्याज के भुगतान में खर्च करना पड़ता है.  भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के FY2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि कई बड़े राज्यों में कर्ज के ब्याज का भुगतान उसके अपने टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू का 42% तक हिस्सा ले लेता है. इस तगड़े ब्याज भुगतान की वजह से इन राज्यों के पास सड़क, स्कूल, हेल्थ सर्विसेज और नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च करने के लिए पैसों की कमी हो जाती है. कर्ज की मार झेल रहे भारत के 10 टॉप राज्यों के बारे में बात करें, तो… पश्चिम बंगाल वित्त वर्ष 2025 में पश्चिम बंगाल पर ब्याज भुगतान का बोझ अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा था. राज्य को टैक्स और नॉन टैक्स रेवेन्यू से 1.09 लाख करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन सिर्फ ब्याज भुगतान पर 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए. इसका मतलब हुआ कि उसके राजस्व का 42% हिस्सा तो ब्याज चुकाने में ही चला गया.  पंजाब-बिहार दूसरे पायदान पर पंजाब रहा, जिसने अर्जित रेवेन्यू का 34% हिस्सा ब्याज भुगतान करने में खर्च कर दिया. Punjab का राजस्व कलेक्शन 70,000 करोड़ रुपये था और इसने कर्ज के ब्याज भुगतान पर करीब 24,000 करोड़ रुपये खर्च किए. इसके बाद तीसरे नंबर पर Bihar का नाम आता है, जिसने 62,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू में से लगभग 21 हजार करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान किया और ये इसका 33% रहा.  केरल-तमिलनाडु केरल द्वारा FY2025 में 1.03 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू कलेक्शन किया गया था और इसका 28% या करीब 29,000 करोड़ रुपये तो ब्याज के पेमेंट में ही चला गया. पांचवे नंबर पर तमिलनाडु रहा, जिसने अपने कलेक्शन में से 62,000 करोड़ रुपये या 28% का ब्याज पेमेंट किया था. इसके टैक्स रेवेन्यू सबसे अधिक रहा, लेकिन कर्ज की मार से ये राज्य भी बेहाल रहा.  हरियाण-राजस्थान और आंध्र प्रदेश Top-10 कर्ज के तले दबे राज्यों में अगला नंबर हरियाणा का है और इसने 94,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने के बाद इसमें से 27% या करीब 25,000 करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान किया. सातवें पायदान पर राजस्थान था और राज्य ने 1.48 लाख करोड़ रुपये के राजस्व में से 38,000 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाया. इसके अलावा आंध्र प्रदेश ने 1.2 लाख करोड़ रुपये के राजस्व पर 29 हजार करोड़ रुपये ब्याज भरा था.  MP-कर्नाटक लिस्ट में नौवें स्थान पर मध्य प्रदेश शामिल हैं और इसका वित्त वर्ष 2025 में टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू 1.23 लाख करोड़ रुपये रहा था, जिसमें से ब्याज के भुगतान पर 27,000 करोड़ रुपये या कुल कलेक्शन का करीब 22% खर्च हुआ. बात दसवें पायदान की करें, तो यहां पर कर्नाटक है, जिसका कलेक्शन 2.03 लाख करोड़ रुपये का था और ब्याज भुगतान 19% यानी 39,000 करोड़ रुपये रहा. 

ट्रंप का नया मिशन: ईरान की ओर बढ़ते जंगी जहाज, वेनेजुएला ऑपरेशन से बड़ा प्लान सामने

तेहरान  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि एक 'मैसिव अर्माडा' (बड़ा नौसैनिक बेड़ा) ईरान की ओर जा रहा है, जो वेनेजुएला ऑपरेशन से भी बड़ा है. ट्रंप चाहते हैं कि ईरान न्यूक्लियर डील पर बात करे, वरना हमला हो सकता है. ईरान ने कहा कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अपनी शर्तों पर. अगर हमला हुआ तो बचाव करेगा. अरब देशों ने संयम बरतने की अपील की है, क्योंकि इससे बड़ा युद्ध फैल सकता है. ट्रंप ने क्या कहा? 28 जनवरी 2026 को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि 'एक मैसिव अर्माडा ईरान की ओर जा रहा है.' उन्होंने ईरान से कहा कि न्यूक्लियर डील कर लो, वरना समय खत्म हो रहा है. हमला 'स्पीड और वायलेंस' से होगा. ट्रंप ने इसे वेनेजुएला ऑपरेशन से बड़ा बताया. उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु संवर्धन बंद करना होगा. बैलिस्टिक मिसाइलें सीमित करनी होंगी. हमास, हिजबुल्लाह, हूती जैसे ग्रुप्स को सपोर्ट बंद करना होगा. ट्रंप ने पिछले साल जून 2025 में ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले का जिक्र किया और कहा कि अगला हमला और बुरा होगा. क्या है यह 'मैसिव अर्माडा'? यह अमेरिकी नौसेना का बड़ा बेड़ा है, जिसमें USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर, कई गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर्स, बॉम्बर्स और फाइटर जेट्स शामिल हैं. यह अरब सागर में तैनात है. ट्रंप ने कहा कि यह 'रेडी, विलिंग और एबल' है. हाल ही में USS Delbert D. Black इजरायल के ईलात बंदरगाह पर पहुंचा है। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में 35,000+ अमेरिकी सैनिक और कई जहाज तैनात हैं.  वेनेजुएला ऑपरेशन क्या था? तुलना क्यों? वेनेजुएला ऑपरेशन को 'ऑपरेशन सदर्न स्पियर' कहा जाता है. यह 2025 में शुरू हुआ, जब अमेरिका ने कैरिबियन सागर में बड़ा नौसेना बिल्डअप किया. इसमें USS Gerald R. Ford कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, USS Iwo Jima एम्फीबियस रेडी ग्रुप और अन्य जहाज शामिल थे. कुल 15-20 हजार सैनिक और 150+ एयरक्राफ्ट थे. इसका उद्देश्य ड्रग ट्रैफिकिंग रोकना था, लेकिन यह वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के लिए था. 3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. ट्रंप ने ईरान के लिए इससे बड़ा आर्मडा भेजा है, जो दिखाता है कि कितना बड़ा खतरा है. ईरान की प्रतिक्रिया क्या है? ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन धमकी के तहत नहीं. ईरान खुद को बचाएगा अगर हमला हुआ. तेहरान में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं. ईरान ने अपना ड्रोन कैरियर शहीद बघेरी बंदर अब्बास से 6 किमी दूर रखा है.स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लाइव-फायर एक्सरसाइज कर रहा है. ईरान ने अपने न्यूक्लियर साइट्स को और गहराई में छिपाया है. क्यों बढ़ रहा है तनाव?       न्यूक्लियर प्रोग्राम: 2018 में ट्रंप ने JCPOA डील तोड़ी. जून 2025 में अमेरिका-इजरायल ने फोर्डो, नटांज, इस्फाहान पर हमला किया. IAEA कहता है कि ईरान फिर से संवर्धन बढ़ा रहा है.       प्रदर्शन: जनवरी 2026 में ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन, 100+ मौतें. ट्रंप इसे रेजीम चेंज का मौका मानते हैं.       रीजनल वॉर: ईरान हूती, हिजबुल्लाह को सपोर्ट करता है, जो अमेरिकी सहयोगियों पर हमला करते हैं. अरब और रीजनल देशों की अपील सऊदी अरब, UAE, जॉर्डन जैसे देश युद्ध से डर रहे हैं. तुर्की ने अमेरिका से संयम बरतने को कहा है. वे चाहते हैं कि बातचीत से हल निकले, क्योंकि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर सकता है. इससे तेल की कीमतें बढ़ेंगी और ग्लोबल इकोनॉमी प्रभावित होगी. यूके, फ्रांस और इजरायल अमेरिका के साथ हैं, लेकिन सऊदी, कतर, ओमान, मिस्र ने हमला न करने की अपील की.  अगर हमला हुआ तो रीजनल युद्ध फैल सकता है. ईरान अमेरिकी बेस या इजरायल पर हमला कर सकता है. ट्रंप की 'मैक्सिमम प्रेशर' पॉलिसी जारी है, लेकिन डिप्लोमेसी की उम्मीद भी है. स्थिति नाजुक है – अभी हमला नहीं हुआ, लेकिन धमकियां बढ़ रही हैं.

एपस्टीन फाइल्स अपडेट: न्यूयॉर्क मेयर ममदानी की मां मीरा नायर का नाम सामने आया, वजह क्या?

न्यूयॉर्क हाल ही में अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा जारी किए गए एपस्टीन फाइल्स के नए दस्तावेजों ने एक बड़ा राजनीतिक और सामाजिक विवाद खड़ा कर दिया है। इन दस्तावेजों में न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की मां और प्रसिद्ध भारतीय-अमेरिकी फिल्म निर्देशक मीरा नायर का नाम भी सामने आया है। नए दस्तावेजों का खुलासा अमेरिकी न्याय विभाग ने शुक्रवार को दोषी यौन अपराधी जेफरी एपस्टीन से संबंधित लगभग 30 लाख पन्नों के दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं। इनमें न केवल टेक्स्ट फाइलें शामिल हैं, बल्कि 2000 वीडियो और 1.8 लाख तस्वीरें भी मौजूद हैं। इन फाइल्स ने कई प्रभावशाली हस्तियों के एपस्टीन और उसकी सहयोगी गिलेन मैक्सवेल के साथ संबंधों की परतें खोल दी हैं। मीरा नायर और 'अमेलिया' फिल्म की आफ्टरपार्टी दस्तावेजों में शामिल 21 अक्टूबर 2009 का एक ईमेल विशेष रूप से चर्चा में है। यह ईमेल पब्लिसिस्ट पेगी सीगल द्वारा जेफरी एपस्टीन को भेजा गया था। इसमें बताया गया है कि मीरा नायर की फिल्म 'अमेलिया' की रिलीज के बाद एक आफ्टरपार्टी का आयोजन गिलेन मैक्सवेल के टाउनहाउस पर किया गया था। ईमेल में सीगल ने लिखा- 'अभी-अभी गिलेन के टाउनहाउस से निकली हूं… फिल्म की आफ्टरपार्टी थी। वहां बिल क्लिंटन और जेफ बेजोस भी मौजूद थे… साथ ही निर्देशक मीरा नायर भी थीं।' ईमेल में यह भी जिक्र किया गया कि फिल्म को लेकर मेहमानों की प्रतिक्रिया बहुत उत्साहजनक नहीं थी, हालांकि महिलाओं को यह फिल्म काफी पसंद आई थी। हाई-प्रोफाइल हस्तियों की मौजूदगी इस खुलासे ने फिर से उन कड़ियों को जोड़ दिया है जो दिग्गज राजनेताओं और व्यापारियों को एपस्टीन के दायरे से जोड़ती हैं। पार्टी में शामिल होने वाले प्रमुख नामों में शामिल हैं- बिल क्लिंटन: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति। जेफ बेजोस: अमेजन के पूर्व सीईओ। हिलेरी स्वैंक: फिल्म की मुख्य अभिनेत्री, जो ब्लूमिगडेल्स में आयोजित एक अन्य 'अजीब' कार्यक्रम में मौजूद थीं। एलन मस्क और एपस्टीन के बीच संवाद दस्तावेजों में टेस्ला के सीईओ एलन मस्क और एपस्टीन के बीच 2012 के ईमेल संवाद का भी जिक्र है। नवंबर 2012 में एपस्टीन ने मस्क से पूछा था कि हेलीकॉप्टर से द्वीप (आइलैंड) पर जाने के लिए उनके साथ कितने लोग होंगे। एलन मस्क ने इसके जवाब में लिखा- शायद सिर्फ टालुला (उनकी तत्कालीन पत्नी) और मैं। तुम्हारे द्वीप पर सबसे 'वाइल्ड' पार्टी किस दिन/रात होगी? 30 लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेज Fox News की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी न्याय विभाग ने कुख्यात यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामलों में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा करने की घोषणा की है. इस संबंध में अमेरिका की उप अटॉर्नी जनरल ब्लैंच ने जानकारी देते हुए कहा कि विभाग 30 लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेज़ सार्वजनिक करने जा रहा है. इन फाइलों में बड़ी संख्या में वीडियो और तस्वीरें भी शामिल हैं. ब्लैंच के अनुसार, न्याय विभाग की ओर से पेश किए जा रहे इस रिकॉर्ड में 2,000 से अधिक वीडियो और लगभग 1,80,000 तस्वीरें शामिल होंगी. अमेरिकी न्याय विभाग ने लाखों दस्तावेज किए सार्वजनिक अमेरिकी न्याय विभाग ने जेफ्री एपस्टीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से बड़ी संख्या में रिकॉर्ड सार्वजनिक किए हैं. इनमें 30 लाख से अधिक पन्नों के दस्तावेज़, करीब दो हजार वीडियो और लगभग एक लाख अस्सी हजार तस्वीरें शामिल हैं. इन फाइलों में ईमेल संवाद, गवाहियों के अंश और आंतरिक संचार से जुड़ी जानकारियां शामिल हैं. विभाग का कहना है कि इन दस्तावेजों में दर्ज अधिकांश बातें संदर्भ और आरोपों के रूप में हैं न कि किसी अदालत की तरफ से साबित किया गया फैक्ट. 2009 की आफ्टर पार्टी का खुलासा ईमेल से दस्तावेज़ों में 21 अक्टूबर 2009 का एक ईमेल भी शामिल है, जिसे प्रसिद्ध हॉलीवुड पब्लिसिस्ट पेगी सीगल ने जेफ्री एपस्टीन को भेजा था. यह ईमेल उसी रात भेजा गया था, जब वह गिस्लेन मैक्सवेल के न्यूयॉर्क स्थित टाउनहाउस में आयोजित एक आफ्टर पार्टी से लौटी थीं. ईमेल में पेगी सीगल ने लिखा कि वह अभी-अभी गिस्लेन के घर से निकली हैं, जहां एक फिल्म की आफ्टर पार्टी आयोजित की गई थी. उन्होंने ईमेल में बताया कि उस पार्टी में बिल क्लिंटन, जेफ बेजोस, जीन पिगोनी और निर्देशक मीरा नायर समेत कई जानी-मानी हस्तियां मौजूद थीं. फिल्म Amelia की आफ्टर पार्टी थी आयोजन दस्तावेजों के अनुसार, यह आफ्टर पार्टी मीरा नायर की फिल्म “Amelia” के लिए आयोजित की गई थी, जो वर्ष 2009 में रिलीज़ हुई थी. ईमेल में फिल्म को लेकर मेहमानों की प्रतिक्रिया का भी जिक्र किया गया है. पेगी सीगल ने अपने निजी ईमेल में लिखा कि फिल्म को कुल मिलाकर ठंडी प्रतिक्रिया मिली, हालांकि महिलाओं को यह फिल्म अधिक पसंद आई. ईमेल में कुछ अन्य सामाजिक आयोजनों को भी अजीब बताया गया है. यह पूरा संवाद अनौपचारिक और निजी भाषा में लिखा गया था, जिसे दस्तावेजों में ज्यों का त्यों शामिल किया गया है. पार्टी में शामिल अन्य चर्चित नाम ईमेल के अनुसार, उस आफ्टर पार्टी में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और अमेज़न के संस्थापक जेफ बेजोस भी मौजूद थे. इसके अलावा फैशन, कला और सिनेमा जगत से जुड़े कई अन्य प्रभावशाली लोगों की मौजूदगी का जिक्र है. दस्तावेज यह स्पष्ट करते हैं कि इन नामों का उल्लेख केवल एक सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने के संदर्भ में है और इन फाइलों के आधार पर किसी पर भी आपराधिक गतिविधियों का आरोप नहीं लगाया गया है. एलन मस्क से जुड़े ईमेल भी फाइलों में शामिल नई एपस्टीन फाइल्स में टेस्ला और स्पेसएक्स के प्रमुख एलन मस्क से जुड़े ईमेल्स का भी उल्लेख किया गया है. दस्तावेज़ों के अनुसार, नवंबर 2012 में जेफ्री एपस्टीन ने एलन मस्क को एक ईमेल भेजा था, जिसमें उनसे द्वीप पर आने वाले लोगों की संख्या को लेकर सवाल किया गया था. इसके जवाब में मस्क ने लिखा कि शायद वह और उनकी साथी तालुलाह ही होंगे और उन्होंने यह भी पूछा कि द्वीप पर सबसे बड़ी पार्टी किस दिन या रात को होती है. इन ईमेल्स को भी केवल संवाद और संदर्भ के रूप में पेश किया गया है, न कि किसी अपराध के प्रमाण के रूप में. एपस्टीन नेटवर्क को लेकर फिर तेज हुई बहस इन नए दस्तावेजों के सामने आने के बाद अमेरिकी राजनीति, हॉलीवुड और वैश्विक कारोबारी जगत … Read more

यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र में इंटरनेशनल फिल्म सिटी से बदलेगी उत्तर प्रदेश की आर्थिक व सांस्कृतिक तस्वीर

लखनऊ  यमुना एक्सप्रेस-वे के किनारे सेक्टर-21 में विकसित की जा रही इंटरनेशनल फिल्म सिटी, उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में शामिल है। एक हजार एकड़ में विकसित होने वाली इस परियोजना को जून, 2028 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार इस फिल्म सिटी को प्रदेश की आर्थिक और सांस्कृतिक दिशा बदलने वाली परियोजना के रूप में देख रही है। इस फिल्म सिटी के बन जाने से उत्तर प्रदेश फिल्म निर्माण और मनोरंजन उद्योग के बड़े केंद्र के रूप में उभरेगा। फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि योगी सरकार की इस परियोजना के पूरा होने के बाद एंटरटेनमेंट की दुनिया में बड़ा बदलाव आएगा।   यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) द्वारा परियोजना की निगरानी के लिए इंजीनियरिंग एजेंसी और चार्टर्ड अकाउंटेंट फर्मों के चयन हेतु निविदाएं आमंत्रित की हैं, जिसे परियोजना के निर्माण चरण में प्रवेश का संकेत माना जा रहा है। इंटरनेशनल फिल्म सिटी को मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर के एक समग्र केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। यहां अत्याधुनिक फिल्म स्टूडियो, शूटिंग फ्लोर, पोस्ट प्रोडक्शन यूनिट और फिल्म यूनिवर्सिटी की स्थापना की जाएगी। उद्देश्य यह है कि फिल्म निर्माण से जुड़ी पूरी प्रक्रिया एक ही स्थान पर संपन्न हो और अन्य राज्यों पर निर्भर न रहना पड़े। ख़ास है फिल्म सिटी की लोकेशन  फिल्म सिटी की लोकेशन को इस परियोजना की सबसे बड़ी ताकत माना जा रही है। यमुना एक्सप्रेस-वे से सीधी कनेक्टिविटी और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से निकटता की वजह से देश-विदेश के फिल्म निर्माताओं के लिए यहां पहुंचना आसान होगा। बेहतर कनेक्टिविटी के कारण बड़े प्रोडक्शन हाउस उत्तर प्रदेश में शूटिंग के प्रति आकर्षित होंगे। फिल्मों व वेब सीरीज की शूटिंग के लिए यह आदर्श स्थान होगा।  रोजगार सृजन में भी होगी बड़ी भूमिका  योगी सरकार इस परियोजना को रोजगार सृजन से भी जोड़कर देख रही है। फिल्म सिटी के निर्माण और संचालन से हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। अभिनय, तकनीकी कार्य, कैमरा संचालन, संपादन, सेट डिजाइन और कॉस्ट्यूम डिजाइन जैसे क्षेत्रों में प्रदेश के युवाओं को काम मिलेगा। सरकार का फोकस है कि स्थानीय प्रतिभाओं को प्रदेश में ही बेहतर अवसर उपलब्ध कराये जाएं। पर्यटन क्षेत्र को मिलेगी गति फिल्म सिटी के विकास से पर्यटन क्षेत्र को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। सरकार की योजना है कि फिल्म सिटी के आसपास होटल, कन्वेंशन सेंटर और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियों को विकसित किया जाए। इससे फिल्म पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी। इसका सीधा लाभ स्थानीय व्यापार, होटल उद्योग और सेवा क्षेत्र को मिलेगा। मजबूत होगी प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान  इंटरनेशनल फिल्म सिटी उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान को भी मजबूत करेगी। प्रदेश की लोक कला, संस्कृति और पारंपरिक विरासत को फिल्मों और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से राष्ट्रीय और वैश्विक पहचान मिलेगी। इससे उत्तर प्रदेश एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र के रूप में भी स्थापित होगा।

राज्यपाल ने खेलो एमपी यूथ गेम्स के प्रतिभागियों को किया पुरस्कृत

भोपाल. राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने कहा कि खेल, संकल्प सिखाता है। खेलों से हम प्रयास करना सिखते हैं। निरंतर अभ्यास हमे उत्कृष्टता का दृष्टिकोण प्रदान करता है। खेल ही हमे हार-जीत को स्वीकार करना सिखाते हैं। हमारे जीवन मूल्य विकसित करते हैं। सर्वांगीण व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं। खेल भावना हर व्यक्ति को परस्पर जोड़ती है। खेल ही हम सबमें राष्ट्र प्रेम और देशभक्ति का भाव जगाते हैं। राज्यपाल  पटेल शनिवार को खेलो एमपी यूथ गेम्स के राज्य स्तरीय समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने संभागवार विजेता प्रतिभागियों को पुरूस्कृत किया और बधाई दी। कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित समारोह में खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग भी मौजूद थे। प्रदेश देश का 'स्पोर्ट्स पावरहाउस' बनकर उभरा राज्यपाल  पटेल ने कहा कि खेल का मैदान, केवल हार-जीत का स्थान नहीं होता, वह चरित्र निर्माण की कार्यशाला भी होता है। खेल हमें सिखाते हैं कि मैदान पर कोई जाति नहीं होती, कोई धर्म नहीं होता, कोई ऊंच-नीच नहीं होती। वहां केवल एक खिलाड़ी होता है और उसका तय लक्ष्य होता है। उन्होंने कहा कि पहले मध्यप्रदेश को खेलों के मामले में शांत राज्य माना जाता था, लेकिन आज हमारा प्रदेश देश का 'स्पोर्ट्स पावरहाउस' बनकर उभरा है। 'खेलो एमपी यूथ गेम्स' के आयोजनों ने प्रतिभाओं को गांव की गलियों से खोजकर राष्ट्रीय मंच पर लाया है। राज्यपाल  पटेल ने पारम्परिक खेलों और प्रदेशभर की प्रतिभाओं को मंच प्रदान करने के प्रदेश सरकार के प्रयासों की सराहना की। मध्यप्रदेश की धरती ने खेलों में दिलाई अंतर्राष्ट्रीय पहचान राज्यपाल  पटेल ने कहा कि यह अत्यंत गर्व की बात है कि मध्यप्रदेश की खेल अकादमियों से निकले खिलाड़ी आज केवल भोपाल या इंदौर का नाम नहीं, बल्कि पेरिस से लेकर लॉस एंजिल्स तक भारत का तिरंगा फहराने की क्षमता रखते हैं। हमारी शूटिंग रेंज हो, वाटर स्पोर्ट्स अकादमी हो या घुड़सवारी का मैदान, आज दुनिया की सर्वश्रेष्ठ सुविधाएं प्रदेश के युवाओं के पास उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि पारंपरिक खेल ‘मलखम्ब’ हमारी सांस्कृतिक और खेल विरासत का शानदान उदाहरण है। मध्यप्रदेश की धरती ने इस खेल को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। सरकार की प्राथमिकता “खेल-खिलाड़ी और खेल का मैदान” : मंत्री  सारंग खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने कहा कि प्रदेश में खेलों के प्रोत्साहन के लिए सरकार की प्राथमिकता “खेल-खिलाड़ी और खेल का मैदान” है। प्रदेश सरकार इसी प्राथमिकता के आधार पर कार्य भी कर रही है। उन्होंने बताया कि 'खेलो एमपी यूथ गेम्स' में 13 से 20 जनवरी तक विकासखंड एवं जिला स्तर तक और 21 से 25 जनवरी तक संभाग स्तर पर प्रतियोगिताएं हुईं। इसमें एक लाख से अधिक खिलाडियों की सहभागिता रही। भोपाल, ग्वालियर, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, नर्मदापुरम, शिवपुरी, रीवा एवं सागर में 27 से 31 जनवरी तक राज्य स्तरीय प्रतियोगिताएं हुईं, जिसमें 15 हजार खिलाड़ियों ने भाग लिया। राज्य स्तर पर 723 स्वर्ण, 723 रजत और 895 कास्य पदक विजेताओं को 31 हजार, 21 हजार, 11 हजार रूपये पुरस्कार राशि दी जा रही है। कुल 2341 पदक विजेताओं को लगभग 4 करोड़ की राशि वितरित की गई। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल का समारोह में मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र से स्वागत एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया। राज्यपाल  पटेल ने खेलो एमपी यूथ गेम्स के संभागवार विजेताओं को ट्रॉफी प्रदान की। उन्होंने इंदौर संभाग को प्रथम, भोपाल संभाग को द्वितीय और जबलपुर संभाग को तृतीय पुरूस्कार प्रदान किया। आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने वाले खेल विभाग के सभी अधिकारी-कर्मचारी और स्वयंसेवकों को साधुवाद दिया। कार्यक्रम में खेल एवं युवा कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव  मनीष सिंह, संचालक  राकेश गुप्ता और वरिष्ठ अधिकारी, अंतर्राष्ट्रीय हॉकी खिलाड़ी और ओलंपियन  विवेक प्रसाद सागर, निर्णायक गण एवं प्रतिभागी उपस्थित थे।

शेयर बाजार को उड़ान, Union Budget 2026 में 3 बड़े ऐलान जरूरी, नितिन कामथ का दबाव

 नई दिल्‍ली देश का आगामी केंद्रीय बजट (Union Budget 2026) रविवार, 1 फरवरी को पेश होने जा रहा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण अपना नौंवा बजट पेश करेंगी. इस बार के बजट से मिडिल क्‍लास से लेकर किसानों तक बजट से खास उम्‍मीद लगाए बैठे हैं. वहीं स्‍टॉक मार्केट निवेशक भी इस बार के बजट से कुछ खास उम्‍मीद लगा रहे हैं.  शेयर बाजार एक्‍सपर्ट्स भी यही चाहते हैं कि सरकार ये ऐलान करे, ताकि स्‍टॉक मार्केट निवेशकों को बड़ी राहत मिल सके. एक्‍सपर्ट्स यह भी कह रहे हैं कि सरकार की तरफ से अगर ये ऐलान कर दिए गए तो शेयर बाजार में शानदार तेजी देखने को मिल सकती है. अरबपति नितिन कामथ भी इसकी मांग कर चुके हैं.  क्‍या है ये मांग?      भारत के डीप डिस्काउंट ब्रोकर SAS ऑनलाइन के संस्थापक और CEO श्रेय जैन का मानना ​​है कि अधिक निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए, लॉन्‍गटर्म कैप‍िटल गेन (LTCG) पर अधिक टैक्‍स छूट देने की आवश्‍यकता है. जैन ने आगे कहा कि अभी हर वित्तीय वर्ष 1.25 लाख रुपये तक की कमाई पर कोई LTCG टैक्‍स नहीं देना पड़ता है, जबकि 1 लाख रुपये से अधिक के एलटीसीजी पर 12.5% टैक्‍स लगता है. इस कर-मुक्त सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की आवश्यकता है.      इसी तरह, शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) टैक्‍स को भी कम करने की मांग की जा रही है. इसके तहत छूट की लिमिट भी बढ़ाए जाने की मांग हो रही है. निवेशक चाहते हैं कि शॉर्ट टर्म में बेचे गए शेयरों पर 1.5 लाख रुपये तक कोई टैक्‍स ना लगे. साथ ही STCG को 20 फीसदी से कम करके 10 फीसदी कर दिया जाए.      एक और मांग STT को खत्‍म करने की है. सिक्‍योरिटी ट्रांजेक्‍शन टैक्‍स (STT)  शेयरों की खरीद और बिक्री पर लगाया जाता है. किसी भी शेयर के खरीदने या बेचने पर यह 0.1 फीसदी का टैक्‍स लगता है. वहीं डेरेवेटिव मार्केट में 0.01% का टैक्‍स लगाया जाता है, जबकि इंट्राडे में ट्रेडिंग पर 0.025%  का टैक्‍स वसूलता है. एक्‍सर्ट्स का कहना है कि यह देखने में भले ही बहुत कम दिखाई देता है, लेकिन बड़े अमांउट बेखने या खरीदने पर ज्‍यादा चार्ज होता है. ऐसे में इसमें भी कटौती या इसे समाप्‍त करने की मांग की जा रही है, जबकि इसमें कई बार बढ़ोतरी की गई है.  क्‍या होता है LTCG और STCG टैक्‍स?  लॉन्‍गटर्म कैप‍िटल गेन (LTCG) का मतलब है कि अगर कोई शेयर बाजार से जुड़ा असेट 12 महीने के बाद बेचता है तो उसपर लॉन्‍गटर्म कैपिटल गेन टैक्‍स लगाया जाएगा. वहीं शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) टैक्‍स का मतलब है कि अगर कोई असेट 12 महीने से पहले बेचा जाता है तो उसपर STCG टैक्‍स लगता है, जो  20 फीसदी होता है.  नितिन कामथ ने भी की मांग  केंद्रीय बजट 2026 से पहले जेरोधा के CEO नितिन कामथ ने इक्विटी ट्रांजैक्‍शन टैक्‍स (STT) में लगातार हो रही बढ़ोतरी पर चिंता जताई है. उनका तर्क है कि बढ़े हुए लेनदेन टैक्‍स से बाजार की गतिविधियों और यहां तक ​​कि सरकारी राजस्व पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. मैं हमेशा उम्‍मीद करता हूं कि यह कम होगा, लेकिन यह बढ़ता ही जा रहा है.  दोहरे टैक्‍स की मार नितिन कामथ ने बताया कि STT को तब लागू किया गया था, जब शेयरों पर दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ (LTCG) टैक्‍स शून्‍य था. उन्होंने कहा कि उस समय यह सरकार के लिए मार्केट से राजस्व जुटाने का एक आसान तरीका था. हालांकि, अब जब LTCG टैक्‍स फिर से लागू हो गया है, तो उन्होंने एसटीटी को वापस लेने के बजाय बार-बार बढ़ाने के तर्क पर सवाल उठाया. उन्होंने आगे कहा कि वास्तव में देखा जाए तो निवेशकों पर दो बार टैक्‍स लगाया जा रहा है, एक बार हर ट्रांजैक्‍शन पर STT के माध्यम से और दूसरी बार LTCG या STCG के जरिए. इसे वापस लेना चाहिए. 

शिवराज का बीकानेर से संदेश: पत्नी की तारीफ के लिए चाहिए साहस, किताब लिखने का मन भी है

भोपाल/बीकानेर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने बेबाक और मजाकिया अंदाज के लिए जाने जाते हैं। राजस्थान के बीकानेर में आयोजित एक सामूहिक विवाह सम्मेलन के दौरान उन्होंने एक ऐसी घोषणा की, जिसने महफिल लूट ली। शिवराज ने कहा कि वे जल्द ही अपनी 'पत्नी पर एक किताब' लिखेंगे। दरअसल राजस्थान में शिवराज सिंह चौहान मंच से मेघवाल की किताब से मिली प्रेरणा पर यह बात कर रहे थे। यह दिलचस्प वाकया तब हुआ जब शिवराज सिंह चौहान केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। मेघवाल ने अपनी पत्नी को समर्पित एक किताब ‘एक सफर हमसफर के साथ’ लिखी है। इसी का जिक्र करते हुए शिवराज ने उनकी जमकर तारीफ की। किसी में इतनी हिम्मत नहीं होती, पत्नी की खुलकर तारीफ कर दे शिवराज ने मजाकिया लहजे में कहा, 'भाभी जी पर आपने जो किताब लिखी है, उसे मैं एक अद्भुत घटना मानता हूं। किसी में इतनी हिम्मत नहीं होती कि वह पत्नी की खुलकर तारीफ कर दे, वरना लोग कहने लगते हैं कि ये तो जोरू का गुलाम है।' अब तो मैं भी एक किताब लिख ही दूंगा उन्होंने आगे कहा कि मेघवाल के साहस को देख अब वे भी प्रेरित महसूस कर रहे हैं। उन्होंने मंच से मुस्कुराते हुए कहा, 'अब तो मैं भी एक किताब लिख ही दूंगा। सच में, जीवन में धर्मपत्नी का बहुत बड़ा योगदान होता है।' कैलाश खेर ने मंच से लोगों को सुनाई खरी-खोटी गायक कैलाश खेर जब भी मध्य प्रदेश आते हैं, तो अपने गानों के साथ-साथ लोगों को खरी-खोटी सुनाने से भी नहीं चूकते। हाल ही में उन्होंने सतना में एक कॉन्सर्ट किया था, जिसका एक वीडियो अब सामने आया है। वीडियो में कैलाश खेर यह कहते नजर आ रहे हैं कि, ‘बहुत कम ऐसे कॉन्सर्ट होते हैं, जहां खाना भी चल रहा हो और गाना भी चल रहा हो। म्यूजिक को इज्जत तब मिलती है, जब खाना-वाना पहले डकार लिया जाए या फिर बाद में ठूंस लिया जाए।’ उन्होंने आगे मजाकिया लहजे में कहा- वैसे भी अपनों से ये कहने का बड़ा मन करता है कि बहुत खाते हो भाई। यह पहला मौका नहीं है जब कैलाश खेर के बयान चर्चा में आए हों। इससे पहले मंदसौर में वे एक भाजपा विधायक के नाम को लेकर मजाक कर चुके हैं और वहां की जनता को गरीब भी कह दिया था।