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बिहटा में तेज रफ्तार ट्रक की टक्कर से ऑटो सवार 6 की मौत

पटना. बिहार में सुबह-सुबह बड़ा सड़क हादसा हुआ है। यहां एक तेज रफ्तार ट्रक ने यात्रियों से भरी ऑटो में जोरदार टक्कर मार दी। इस हादसे में 6 लोगों की मौत हो गई है। 2 लोग घायल भी हैं। हादसे के बाद पुलिस इसकी जांच-पड़ताल में जुट गई है। सभी लोग मनेर में उर्स मेले से लौट रहे थे। इधर, मौसम विभाग ने बताया है कि बिहार में मौसम करवट ले सकता है। आज मुजफ्फरपुर, वैशाली, पश्चिमी चंपारण और पूर्वी चंपारण समेत कई जिलो में कोहरे का येलो अलर्ट है। इसके अलावा अगले 48 घंटे में कहीं-कहीं बूंदाबांदी का दौर भी रह सकता है। जहानाबाद की रहने वाली नीट छात्रा की पटना में हुई संदिग्ध मौत की जांच को लेकर अब एसआईटी का चैप्टर क्लोज हो चुका है। एसआईटी मामले की जांच कर रही थी लेकिन अब सीबीआई पूरे केस की जांच करेगी। इस केस में अब तक मुख्य आरोपी का कुछ पता नहीं चल सका है। कई सवाल अब भी अनसुलझे हैं। इधर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार आज अपना बजट पेश करेगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पिटारे में बिहार के लिए क्या-क्या है, इसपर भी सबकी निगाहें होंगी।

महंगाई पर वार! इलेक्ट्रॉनिक सामान की कीमतों में भारी कटौती की राह साफ, घर-घर पहुंचेगा फायदा

नई दिल्ली बजट 2026 में अनाउंट किए गए Semiconductor Mission 2.0 का असली फायदा यही है कि भारत की टेक्नोलॉजी विदेशी सप्लाई पर निर्भरता कम होगी। इसका सीधा मतलब है कि देश में गैजेट्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सस्ते हो सकते हैं। सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से ये सब होगा सस्ता वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को बजट 2026 पेश किया और इसमें स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देते हुए India Semiconductor Mission 2.0 को 40,000 करोड़ रुपये का समर्थन मिला है। इसका सीधा मतलब है कि इलेक्ट्रॉनिक्स में लगने वाले सेमीकंडक्टर चिप अब भारत में बनाए जाएंगे। सीधा मतलब है कि फोन से लेकर होम अप्लायंसेज तक अगले कुछ साल में सस्ते होने वाले हैं और इनकी कीमतें गिरेंगी। आप नीचे देख सकते हैं कि किन चीजों की कीमत में गिरावट देखने को मिल सकती है।   इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और कारें आज की कारों और खासकर EV में दर्जनों नहीं, बल्कि सैकड़ों चिप्स इस्तेमाल होती हैं। पिछले कुछ सालों में चिप की कमी के कारण गाड़ियां महंगी हुईं और वेटिंग बढ़ी है। देश में ऑटोमोटिव-ग्रेड चिप्स बनने से सप्लाई स्टेबल होगी और लागत घटेगी। लंबे समय में इससे EV की कीमत और मेंटिनेंस कॉस्ट कम हो सकती है।   इलेक्ट्रॉनिक्स और होम अप्लायंसेज टीवी, फ्रिज, AC, वॉशिंग मशीन, आज हर अप्लायंस 'स्मार्ट' हो चुका है और इन स्मार्ट फीचर्स के लिए माइक्रोचिप्स जरूरी हैं। लोकल सेमीकंडक्टर सप्लाई मिलने पर कंपनियों का खर्च घटेगा, जिसका असर स्मार्ट टीवी, इन्वर्टर AC और एनर्जी-एफिशिएंट अप्लायंसेज की कीमतों पर दिख सकता है।   स्मार्टफोन और टैबलेट स्मार्टफोन में प्रोसेसर, कैमरा, नेटवर्क और बैटरी मैनेजमेंट, सब कुछ चिप्स पर निर्भर करता है। अभी ये चिप्स ज्यादातर बाहर से मंगाई जाती हैं, जिससे लागत बढ़ जाती है। ये चिप्स भारत में बनने लगती हैं, तो मैन्युफैक्चरिंग कॉस्ट घटेगी। इसका फायदा सबसे पहले बजट और मिड-रेंज स्मार्टफोन में दिख सकता है। लैपटॉप, राउटर और स्मार्ट गैजेट्स लैपटॉप, Wi-Fi राउटर, स्मार्टवॉच और IoT डिवाइस कई तरह की चिप्स के साथ काम करते हैं। अभी इन्हें इंपोर्ट करना पड़ता है, जिससे कीमतें बढ़ती हैं। Semiconductor Mission 2.0 में चिप पैकेजिंग और टेस्टिंग पर भी जोर है, जिससे इन गैजेट्स की लागत कम हो सकती है। ऐसे में पहले एंट्री-लेवल लैपटॉप और नेटवर्किंग डिवाइसेज को फायदा मिलेगा। मेडिकल और हेल्थकेयर डिवाइसेज BP मशीन, ECG, ऑक्सीमीटर और कई डायग्नोस्टिक टूल्स भी चिप्स पर चलते हैं। देश में चिप्स बनने से मेडिकल डिवाइस का प्रोडक्शन सस्ता होगा और इलाज से जुड़े टूल्स अफऑर्डेबल बन सकते हैं। पावर, सोलर और चार्जिंग सिस्टम स्मार्ट मीटर, सोलर इन्वर्टर, EV चार्जर और पावर कंट्रोल सिस्टम में सेमीकंडक्टर बड़ी भूमिका निभाते हैं। Mission 2.0 के साथ पावर-चिप्स को बढ़ावा मिलने से ऊर्जा और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की लागत कम हो सकती है, जिसका सीधा फायदा आम लोगों को मिलेगा।

स्वास्थ्य से रोजगार तक: दवाइयों में कटौती, टेक्सटाइल पार्क और महात्मा गांधी हैंडलूम योजना—वित्त मंत्री के बड़े फैसले

नई दिल्ली.  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में बजट 2026-27 पेश कर रही है। उनके भाषण पर पूरे भारत की नजर टिकी है। बजट से आम नागरिक, व्यवसायी, हेल्थ सेक्टर, शेयर मार्केट को उम्मीदें है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भाषण की शुरुआत में कहा, इस बजट में ग्लोबल अनिश्चितताओं के बावजूद मजबूत बजट पर फोकस है। इसके अलावा इस साल के बजट में युवा शक्ति पर फोकस है। वित्त मंत्री ने कहा, "सरकार के कदमों से 7 प्रतिशत का विकास और गरीबी कम करने में मदद मिली है। भारत को वैश्विक बाजारों से एकीकृत होना होगा।" वित्त मंत्री ने कहा, "आर्थिक विकास को सतत और तेज बनाए रखना सरकार का पहला कर्तव्य है।" बजट में किन बातों को विशेष महत्व? मैन्युफैक्चरिंग में तेजी चैंपियन एमएसएमई का निर्माण इन्फ्रास्ट्रक्चर दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा स्वास्थ्य सेवा के लिए रणनीति क्या है मुख्य घोषणाएं? 2025 में रेअर परमानेंट मैग्नेट स्कीम शुरू की गई थी। इसमें आगे बढ़ते हुए खनिज संपन्न राज्यों की मदद की जाएगी। पांच राज्यों में रेयर अर्थ मिनरल के डेडिकेटेड कॉरिडोर बनेगा। इसके अलावा EMS PLI स्कीम का आवंटन 20 हजार से बढ़ाकर 40 हजार करोड़ किया जाएगा इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन – उपकरण और सामग्री उत्पादन, सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए आईएसएम 2.0 शुरू किया जाएगा। 5 साल में बायोफार्मा में 10 हजार करोड़ रुपए का निवेश होगा दुर्लभ खनिज के लिए कॉरिडोर बनेगा     आंध्र, केरल, तमिलनाडु और ओडिशा में कॉरिडोर बनेगा     कैंसर, डायबिटीज की दवाइयां सस्ती होगी     टेक्सटाइल पार्क की स्थापना का एलान     महात्मा गांधी हैंडलूम योजना शुरू करेंगे     वस्त्र उद्योग सेक्टर में भी रिफॉर्म करेंगे     इससे बुनकरों को फायदा होगा डिफेंस के लिए क्या घोषणा?  रक्षा सामग्री (जैसे हथियार) खरीद के लिए 219306.47 करोड़ रुपये। पिछले बजट (2025-26) में 180000 करोड़ का प्रावधान किया गया था, जिसे संशोधित कर 186454.20 करोड़ किया गया है। सर्विस सेक्टर के लिए हाई‑पावर्ड स्थायी समिति की घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा, 'मैं ‘Education to Employment and Enterprise’ नाम की एक हाई‑पावर्ड स्टैंडिंग कमेटी बनाने का प्रस्ताव रखती हूं, जो सर्विस सेक्टर को ‘विकसित भारत’ का मुख्य ड्राइवर बनाने के लिए जरूरी उपायों की सिफारिश करेगी। सरकार का टारगेट है कि 2047 तक भारत का सर्विस सेक्टर में वैश्विक हिस्सा 10% तक पहुंचे। इनकम टैक्स कानूनों, टैक्स कलेक्शन को लिए कई घोषणाएं नया इनकम टैक्स एक्ट 1 अप्रैल 2026 से लागू होगा। FY27 के लिए अनुमानित Non‑debt receipts 36.5 लाख करोड़ रुपये होगा। वहीं Net tax receipts 28.7 लाख करोड़ रुपये होगा। वित्त मंत्री ने कहा है कि शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए TCS रेट घटाया गया. यह 5% से घटाकर 2% किया जाएगा। रिटर्न संशोधन (Revised Returns) का समय बढ़ाया गया. नाममात्र फीस देकर रिवाइज रिटर्न फाइल करने के लिए अतिरिक्त समय मिलेगा।  

विकास का मेगा प्लान: सड़क-रेल-मेट्रो पर ₹12.20 लाख करोड़ का कैपेक्स, कैसे बदलेगी टियर-2 और टियर-3 शहरों की तस्वीर

नई दिल्ली. यूनियन बजट 2026 (Union Budget 2026) में सरकार ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि देश की ग्रोथ की रफ्तार इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर ही तेज की जाएगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐलान किया है कि वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ कर दिया गया है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। कैपेक्स (Capex) यानी सरकार द्वारा किया जाने वाला वह खर्च, जो सड़क, रेलवे, मेट्रो, एयरपोर्ट, हाउसिंग और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसी लंबे समय की विकास परियोजनाओं पर होता है। इसका मतलब है कि जितना ज्यादा कैपेक्स (Capex) होगा, उतना ज्यादा रोजगार, निवेश और आर्थिक गतिविधियां भी बढेंगी। वित्त मंत्री ने बताया कि पिछले एक दशक में पब्लिक कैपिटल एक्सपेंडिचर में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है। 2014-15 में यह 2 लाख करोड़ था, जो 2025-26 (BE): में बढ़कर 11.2 लाख करोड़ हुआ और 2026-27 (प्रस्तावित) में इसको बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ तक कर दिया गया है, यानी 10 साल में सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च कई गुना बढ़ चुका है। सरकार का खास जोर उन शहरों पर रहेगा जिनकी आबादी 5 लाख से ज्यादा है। ये शहर अब सिर्फ छोटे कस्बे नहीं, बल्कि नए ग्रोथ सेंटर्स बन चुके हैं। सरकार का लक्ष्य है कि Tier-2 और Tier-3 शहरों में बेहतर सड़कें हों। इसके साथ ही मजबूत पब्लिक ट्रांसपोर्ट, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, रियल एस्टेट और इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट हो। वित्त मंत्री ने बताया कि सरकार ने इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश ट्रस्ट (इन्विट) (Infrastructure Investment Trust -InvIT), रियल एस्टेट इंवेस्टमेंट ट्रस्ट (Real Estate Investment Trust -REIT) जैसे नए फाइनेंसिंग टूल्स को भी बढ़ावा दिया है, जिससे प्राइवेट निवेश को आकर्षित किया जा सके। इस बढ़े हुए Capex का सीधा असर रोजगार के नए अवसर, रियल एस्टेट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर पड़ेगा। छोटे शहरों में बेहतर सुविधाएं होंगी। इसके साथ ही बिजनेस और इंडस्ट्री के लिए आसान कनेक्टिविटी होगी। 

बजट 2026 में बायो-फार्मा से सेमीकंडक्टर तक ‘औद्योगिक संप्रभुता’ का बड़ा दांव

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सरकार का पूरा जोर भारत को औद्योगिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने पर है। लगभग ₹54.1 लाख करोड़ के संभावित बजट आकार के बीच, सरकार ने आर्थिक सुधारों को गति देने के लिए 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' का ब्लूप्रिंट पेश किया है। यह पहल प्रधानमंत्री द्वारा 2025 के स्वतंत्रता दिवस पर की गई घोषणाओं और उसके बाद गठित उच्च स्तरीय समितियों के सुझावों पर आधारित है। केंद्र सरकार अब राज्य सरकारों के साथ मिलकर इन सुधारों को जमीनी स्तर पर उतारने की तैयारी में है। इस 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' के तहत 6 प्रमुख कर्तव्यों और 7 फोकस सेक्टर्स की पहचान की गई है, जिनका उद्देश्य भारत की 'इंडस्ट्रियल सॉवरेन्टी'  यानी औद्योगिक संप्रभुता को सुनिश्चित करना है। 1. बायो-फार्मा शक्ति: ₹10,000 करोड़ का बूस्टर फार्मास्यूटिकल सेक्टर में भारत को वैश्विक हब बनाने के लिए सरकार ने 'बायो-फार्मा शक्ति' की घोषणा की है। इस योजना के तहत अगले पांच वर्षों में 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। • उद्देश्य: ज्ञान, टेक्नोलॉजी और नवाचार  के जरिए विकास करना और किफायती दवाएं उपलब्ध कराना। • इंफ्रास्ट्रक्चर: देश में बायो-फार्मा के 3 नए राष्ट्रीय संस्थान बनाए जाएंगे और 7 मौजूदा संस्थानों को अपग्रेड किया जाएगा। • रेगुलेशन: दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए 'सेंट्रल ड्रग कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन' (CDSCO) का भी आधुनिकीकरण किया जाएगा। 2. सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स: ₹40,000 करोड़ का प्रस्ताव टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के लिए 'सेमीकंडक्टर मिशन' को विस्तार दिया गया है। इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरिंग स्कीम के तहत तय लक्ष्य से दोगुना हासिल करने के बाद सरकार का उत्साह बढ़ा है। • नया निवेश: इस सेक्टर में 40,000 करोड़ रुपये के खर्च का प्रस्ताव रखा गया है। • फोकस: मुख्य जोर उद्योग आधारित प्रशिक्षण केंद्रों पर होगा, ताकि इस सेक्टर के लिए स्किल्ड वर्कफोर्स तैयार की जा सके। 3. रेयर अर्थ मिशन: आयात निर्भरता घटाने की तैयारी महत्वपूर्ण खनिजों के लिए चीन या अन्य देशों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने एक रणनीतिक कदम उठाया है। 'रेयर अर्थ' तत्वों के खनन और शोध के लिए देश के चार राज्यों में विशेष कॉरिडोर बनाए जाएंगे। • राज्य: ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु। • लक्ष्य: इन कॉरिडोर्स का मुख्य उद्देश्य आयात निर्भरता  को घटाना और घरेलू स्तर पर इन स्ट्रैटेजिक मिनरल्स की सप्लाई चेन बनाना है। 4. एमएसएमई और शहरी विकास 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' के तहत छोटे उद्योगों यानी एमएसएमई को 'चैम्पियन' बनाने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके अलावा, शहरी क्षेत्रों में आर्थिक ढांचे  को मजबूत करने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं, ताकि शहर विकास के इंजन बन सकें। भविष्य की ओर बढ़ती 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' कुल मिलाकर, ₹54.1 लाख करोड़ के बजट में 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' सरकार की दीर्घकालिक दृष्टि को दर्शाती है। बायो-फार्मा और सेमीकंडक्टर जैसे उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में भारी निवेश और रेयर अर्थ जैसे रणनीतिक क्षेत्र में घरेलू क्षमता का निर्माण यह बताता है कि सरकार अब केवल 'असेंबली' नहीं, बल्कि 'मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन' पर फोकस कर रही है।

बजट से पहले 50 रुपये महंगा हुआ एलपीजी सिलेंडर

नई दिल्ली. आज बजट से पहले ही LPG सिलेंडर के उपभोक्ताओं को झटका लगा है। कॉमर्शियल एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) सिलेंडर और घरेलू सिलेंडर के रेट आज 1 फरवरी 2026 अपडेट हुए हैं। कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं को दिल्ली से पटना तक करीब 50 रुपये का तेज झटका लगा है। जबकि, घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। दिल्ली में 19 किलो वाला एलपीजी सिलेंडर आज से 1691.50 रुपये की जगह 1740.50 में मिलेगा। कोलकाता में पहले 1795 रुपये का था और अब 1844.50 रुपये का हो गया है। मुंबई में कॉमर्शियल सिलेंडर अब 1642.50 की जगह 1692 रुपये में मिलेगा। चेन्नई में अब आज से कॉमर्शियल सिलेंडर 1899.50 रुपये में मिलेगा पहले यह 1849.50 रुपये का था। घरेलू एलपीजी के रेट भारत में इंडियन ऑयल के डेटा के आधार पर एलपीजी (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की कीमतों की बात करें तो आज 14.2 किग्रा वाला घरेलू सिलेंडर दिल्ली में ₹853 में मिल रहा है। जबकि, पटना में इसकी कीमत ₹951 है। मुंबई में ₹852.50 और लखनऊ में ₹890.50 में मिल रहा है। कारगिल में ₹985.5, पुलवामा में ₹969, बागेश्वर में ₹890.5 का है। बजट डे पर कैसे रहा है ट्रेंड इंडियन ऑयल की वेबसाइट पर दिए गए आंकड़ों के मुताबिक पिछले 5 साल में बजट के दिन घरेलू एलपीजी सिलेंडर के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ। जबकि, कॉमर्शियल सिलेंडर के दाम बढ़े और घटे भी हैं। 2022 में बजट डे के दिन 1 फरवरी को कॉमर्शियल सिलेंडर के उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली थी। इस दिन दिल्ली में 19 किलो वाला नीला सिलेंडर 91.50 रुपये, कोलकाता में 89 रुपये, मुंबई में 91.50 रुपये और चेन्नई में 91 रुपये सस्ता हुआ था। 2023 में न तो घरेलू एलपीजी सिलेंडर के रेट बदले और न ही कॉमर्शियल के। 2024 में बजट डे के दिन घरेलू एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं की जेब पर तो कोई असर नहीं पड़ा, लेकिन कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के उपभोक्ताओं को 18 रुपये तक झटका लगा था। 2025 में बजट डे के दिन कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर उपभोक्ताओं को ऊंट के मुंह में जीरा जितनी राहत मिली। सिलेंडर के दाम महज 6.50 रुपये कम हुए।

भारतीय वायुसेना अपडेट: सुपरजेट डील डन, Su-57 फाइटर जेट भारत में आ सकता है

नई दिल्ली हाल ही में HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड) और रूस की UAC (यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन) के बीच SJ-100 (सुखोई सुपरजेट 100) विमानों के भारत में उत्पादन को लेकर हुए समझौते ने रक्षा गलियारों में हलचल तेज कर दी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नागरिक विमानों के बाद अब 'खतरनाक' सुखोई Su-57 लड़ाकू विमान भारतीय वायु सेना (IAF) के बेड़े का हिस्सा बनेंगे? SJ-100 समझौता: एक नया मोड़ भारत और रूस के बीच नागरिक विमानन के क्षेत्र में हुआ यह समझौता 'मेक इन इंडिया' की दिशा में एक बड़ा कदम है। SJ-100 एक क्षेत्रीय जेट है, और इसके स्थानीय उत्पादन से भारत में एयरोस्पेस ईकोसिस्टम मजबूत होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भविष्य के सैन्य समझौतों के लिए एक 'टेस्ट केस' साबित हो सकती है। क्या बोले रूसी अधिकारी? खुद रूसी एरोस्पेस कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने यह दावा किया कि भारत और रूस पांचवीं पीढ़ी के सुखोई एसयू-57ई लड़ाकू विमान के भारत में संयुक्त उत्पादन की संभावना तलाशने के लिए तकनीकी पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि, भारत की ओर से अधिकारी के दावे पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। रूस के यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (यूएसी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वादिम बदेखा ने हैदराबाद के बेगमपेट हवाई अड्डे पर विंग्स इंडिया एयर शो से इतर रूसी संवाददाताओं से कहा- हम इस कॉन्ट्रैक्ट पर तकनीकी बातचीत के उन्नत चरण में हैं। हमारे अनुभव को देखते हुए, ऐसे कॉन्ट्रैक्ट होने वाले हैं जो कई दशकों तक हमारे सहयोग की दिशा तय करेंगे हैं।’ रूस ने इस प्रदर्शनी के दौरान अपने नवीनतम क्षेत्रीय परिवहन विमान – इल्यूशिन आईएल-114-300 और सुखोई एसजे-100 – को प्रदर्शित किया था। बदेखा ने दावा किया कि दोनों पक्ष वर्तमान में भारत में एसयू-30 विमानों के उत्पादन के लिए उपयोग की जाने वाली सुविधाओं में एसयू-57 लड़ाकू विमानों के लाइसेंस प्राप्त उत्पादन और इसके लिए भारतीय उद्योग और भारतीय प्रणालियों के अधिकतम उपयोग पर भी चर्चा कर रहे हैं। Su-57 'Felon': रूस का सबसे घातक योद्धा Su-57 रूस का पहला 5वीं पीढ़ी का सटील्थ लड़ाकू विमान है। इसकी कुछ प्रमुख विशेषताएं इसे खास बनाती हैं। जैसे- स्टेल्थ तकनीक: यह रडार की नजरों से बचने में सक्षम है। सुपरक्रूज: बिना आफ्टरबर्नर के ध्वनि की गति से तेज उड़ने की क्षमता। हथियार: इसके इंटरनल वेपन बे में आधुनिक मिसाइलें छिपी होती हैं, जो इसके स्टेल्थ को बरकरार रखती हैं। भारत और Su-57 का इतिहास (FGFA प्रोग्राम) आपको याद होगा कि भारत पहले रूस के साथ FGFA (Fifth Generation Fighter Aircraft) प्रोग्राम का हिस्सा था, जो Su-57 पर ही आधारित था। लेकिन 2018 में भारत इस प्रोजेक्ट से पीछे हट गया था। इसके मुख्य कारण थे:     इंजन की तकनीक में कमी।     स्टेल्थ फीचर्स पर असंतोष।     लागत और तकनीक हस्तांतरण (ToT) के मुद्दे। क्या अब पासा पलट रहा है? SJ-100 समझौते के बाद Su-57 की चर्चा फिर से शुरू होने के तीन मुख्य कारण हैं-     नया इंजन (AL-51F1)- रूस ने अब Su-57 के लिए नया 'स्टेज 2' इंजन विकसित कर लिया है, जो भारत की पुरानी शिकायतों को दूर कर सकता है।     युद्ध का अनुभव- यूक्रेन युद्ध में रूस ने Su-57 का सीमित उपयोग किया है, जिससे इसकी परिचालन क्षमता के वास्तविक आंकड़े सामने आए हैं।     चीन की चुनौती- चीन के पास J-20 जैसे 5वीं पीढ़ी के विमानों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भारतीय वायुसेना को जल्द ही एक सटील्थ फाइटर की जरूरत है। चुनौतियां और 'आत्मनिर्भर भारत' भले ही रूस भारत को Su-57 ऑफर कर रहा हो, लेकिन भारत के सामने कुछ कठिन विकल्प हैं। दरअसल भारत अपना स्वदेशी 5वीं पीढ़ी का विमान AMCA विकसित कर रहा है। Su-57 खरीदने से इस स्वदेशी प्रोजेक्ट के बजट और प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, रूस से बड़े रक्षा सौदे करने पर अमेरिका के CAATSA प्रतिबंधों का खतरा हमेशा बना रहता है। भारत अब केवल 'खरीदने' में नहीं, बल्कि 'भारत में बनाने' और 'पूर्ण तकनीक' प्राप्त करने में रुचि रखता है। रूस की सरकारी समाचार एजेंसी आरआईए नोवोस्ती के मुताबिक इससे पहले, सरकारी हथियार निर्यातक कंपनी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट के सीईओ अलेक्जेंडर मिखीव ने घोषणा की थी कि कंपनी नई दिल्ली को नवीनतम पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57ई लड़ाकू विमानों की आपूर्ति के साथ-साथ भारत में उनके उत्पादन और स्वदेशी एएमसीए स्टील्थ लड़ाकू विमान के विकास में सहायता की पेशकश कर रही है। कुल मिलाकर SJ-100 समझौता यह दर्शाता है कि भारत और रूस के बीच औद्योगिक संबंध अभी भी गहरे हैं। यदि रूस Su-57 के लिए पूर्ण तकनीक हस्तांतरण (ToT) और स्वदेशी AMCA में सहयोग का प्रस्ताव देता है, तो 'Felon' भारत के आकाश की सुरक्षा करते हुए दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, अभी वायु सेना का मुख्य ध्यान राफेल के अगले बैच और स्वदेशी विमानों पर है।

मिडिल ईस्ट में रणनीति का कमाल: नेटन्याहू के आने से पहले जयशंकर ने बुलाए अरब देश

नई दिल्ली इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अगले हफ्ते भारत दौरे पर आ रहे हैं. इससे पहले भारत के EAM एस जयशंकर ने मिडिल ईस्ट को टारगेट करते हुए डबल मास्टरस्ट्रोक चला है. उन्होंने नेतन्याहू के दौरे से पहले अरब देशों को पहले ही दिल्ली बुलाकर एक बड़ा मैसेज दिया है. जयशंकर की गजब की कूटनीति का नतीजा है कि अरब देशों ने भारत को फिलिस्तीन का ‘मसीहा’ मानना शुरू कर दिया है. आगे जानें जयशंकर के बेहतरीन बैलेंसिंग एक्ट की वजह से जियो पॉलिटिक्स में भारत का कद किस तरह बढ़ रहा है? भारत ने आज यानी 31 जनवरी 2026 को नई दिल्ली में ‘दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्री बैठक’ (IAFMM) की मेजबानी की है. यह बैठक पूरे 10 साल के लंबे इंतजार के बाद हुई है. इसमें अरब लीग के सभी 22 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए. दिलचस्प बात यह है कि यह बैठक जयशंकर की दिसंबर 2025 की इजरायल यात्रा और प्रधानमंत्री नेतन्याहू की प्रस्तावित भारत यात्रा के ठीक बीच में हो रही है. इस बैठक के दौरान भारतीय EAM का एक ऐसा बेहतरीन बैलेंसिंग एक्ट देखने को मिला, जिसकी वजह से जियो पॉलिटिक्स में भारत का कद और भी बढ़ गया है. फिलिस्तीन का ‘मसीहा’ भारत दिल्ली पहुंची फिलिस्तीनी विदेश मंत्री वारसेन अगाबेकियन शाहीन ने सीधा और भावनात्मक कार्ड खेला है. उन्होंने जयशंकर से मुलाकात के बाद सार्वजनिक तौर पर अपील करते हुए कहा है कि ‘भारत ही वह महान देश है जो इजरायल-फिलिस्तीन जंग को रुकवा सकता है. पीएम मोदी की इजरायल से दोस्ती और अरब देशों से रिश्ते उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा ‘मध्यस्थ’ बनाते हैं’. फिलिस्तीन ने भारत से गाजा के पुनर्निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने की मांग की है. इजरायल का जिगरी दोस्त दिसंबर 2025 में जब जयशंकर इजरायल में थे, तो वहां सिडनी (ऑस्ट्रेलिया) के एक हमले में यहूदियों की मौत पर उन्होंने गहरी संवेदना जताई थी. भारत और इजरायल ने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति को फिर से दोहराया है. भारत और इजरायल के बीच ड्रोन तकनीक और मिसाइल डिफेंस को लेकर एक गुप्त समझौता भी परवान चढ़ रहा है. जयशंकर का बैलेंसिंग एक्ट एक तरफ भारत इजरायल के साथ अत्याधुनिक हथियारों का सौदा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ 22 अरब देशों को एक साथ मेज पर बिठाकर अपनी ऊर्जा जरूरतों (Energy Security) को सुरक्षित कर रहा है. जयशंकर ने साबित कर दिया है कि भारत अब दुनिया के उन चंद देशों में से है, जो युद्ध के दो धुर विरोधियों से एक साथ हाथ मिला सकते हैं. ‘मिडिल ईस्ट’ का नया पावर सेंटर: भारत     अरब देशों के साथ बैठक की सह-अध्यक्षता UAE कर रहा है. जयशंकर ने साफ कर दिया है कि भारत जियो पॉलिटिक्स का एक बड़ा और अहम प्लेयर है.     भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है. जयशंकर इसे ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज बना रहे हैं, जहाँ अरब देशों का समर्थन भारत के लिए बहुत जरूरी है.     सिल्क रूट को टक्कर: ‘भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे’ (IMEC) को फिर से जिंदा करने के लिए अरब देशों का साथ लेना इस बैठक का गुप्त एजेंडा है.  

सोने के दाम में उतार-चढ़ाव: बजट 2026 से हो सकती है कीमतों में कमी, जानें एक्सपर्ट्स की राय

नई दिल्ली 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लोकसभा में यूनियन बजट पेश करेंगी. इस दिन पर सोने की कीमतों पर सबसे ज्यादा नजर रहने वाली है, क्योंकि लोग उम्मीद कर रहे हैं कि बजट में सोने से जुड़ी कोई बड़ी घोषणा हो सकती है. अभी सोने की कीमत एमसीएक्स पर 10 ग्राम 24 कैरेट के लिए करीब 1.49 लाख रुपये के आसपास है. चांदी 2.91 लाख रुपये प्रति किलो है. पिछले बजट से सोना 100 फीसदी और चांदी 250 फीसदी तक महंगा हो चुका है. फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बजट में सोने पर कस्टम ड्यूटी या इंपोर्ट ड्यूटी में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने की उम्मीद है. पिछले साल बजट में सोने पर कुल कस्टम ड्यूटी 15 फीसदी से घटाकर 6 फीसदी कर दी गई थी. अब एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सरकार इसे और कम नहीं करेगी क्योंकि आयात बहुत ज्यादा हो रहा है. सोना और चांदी के आयात में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है. अगर ड्यूटी बढ़ाई गई तो कीमतें और ऊपर जा सकती हैं लेकिन ऐसा होने की कम संभावना है. बजट में क्या गोल्ड पर आ सकता है बड़ा फैसला? एक्सपर्ट्स की राय है कि इनकम टैक्स रिटर्न में सोने के गहनों या ज्वेलरी की ज्यादा जानकारी देने के नए नियम आ सकते हैं. शेड्यूल एएल में ज्यादा डिटेल मांगी जा सकती है. सेल्फ रिपोर्टिंग का तरीका शुरू हो सकता है, ताकि सोने की होल्डिंग ट्रैक की जा सके. सोने की बिक्री पर टैक्स नियमों में कुछ राहत मिल सकती है. जीएसटी में भी छोटे बदलाव जैसे मेकिंग चार्जेस पर 5 फीसदी जीएसटी या 3 फीसदी जीएसटी में एडजस्टमेंट की बात हो सकती है. लेकिन घर में रखे सोने पर कोई हार्ड लिमिट नहीं लगेगी. पुराना गोल्ड कंट्रोल एक्ट 1990 में खत्म हो चुका है और अब वैध सोर्स से सोना रखने पर कोई सीमा नहीं है. शादीशुदा महिलाओं के लिए 500 ग्राम, अविवाहित के लिए 250 ग्राम और पुरुषों के लिए 100 ग्राम तक डिस्क्रेशनरी तरीके से कोई जब्ती नहीं होती. एक्सपर्ट्स जैसे दीपाश्री शेट्टी और सोनम चंदवानी कहते हैं कि रिपोर्टिंग और डिस्क्लोजर पर फोकस रहेगा न कि घरेलू होल्डिंग पर सख्त नियम. अगर हार्ड लिमिट लगाई गई तो लोगों में डर फैलेगा और ब्लैक मार्केट बढ़ सकता है. इसलिए सरकार सावधानी बरतेगी. क्या बजट पर गिरेगा सोने का भाव? बजट 2026 के दिन पर सोने की कीमत क्या होगी, इसकी भविष्यवाणी मुश्किल है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि बजट में अगर कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ तो कीमतें स्थिर रह सकती हैं या छोटी गिरावट आ सकती है. लेकिन अगर ड्यूटी में कटौती की उम्मीद से लोग खरीदारी बढ़ा दें तो रिबाउंड हो सकता है. कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अगर ड्यूटी 3-5 फीसदी कम हुई तो 10 ग्राम पर 2000 से 4000 रुपये तक गिरावट आ सकती है. लेकिन ऐसा होने की कम संभावना है. बाजार में पहले से ही कीमतें हाई हैं और बजट के बाद सोमवार को ट्रेडिंग में तेज मूवमेंट देखने को मिल सकता है. बजट सोने के लिए ज्यादा बड़ा सरप्राइज नहीं देगा. फोकस रिपोर्टिंग और टैक्स राहत पर रहेगा. सोने की कीमतें ग्लोबल फैक्टर्स जैसे इन्फ्लेशन, जियोपॉलिटिकल टेंशन और सेंट्रल बैंक की खरीदारी से ज्यादा प्रभावित होंगी. भारतीय परिवारों के लिए सोना संपत्ति बनाने का जरिया है इसलिए सरकार बैलेंस बनाए रखेगी. बजट के बाद सोने में इंटरमिटेंट करेक्शन के बाद रिकवरी हो सकती है.

आज से लागू Rule Change! पान-मसाला और सिगरेट के शौकीनों को झटका, कीमतें बढ़ीं

नई दिल्ली जनवरी का महीना खत्म होने वाला है और कल से नए फरवरी महीने की शुरुआत हो जाएगा. हर महीने की तरह ये महीना भी कई बड़े बदलावों (Rule Change From 1st February) के साथ शुरू होने जा रहा है. इनमें एलपीजी सिलेंडर की कीमतों (LPG Cylinder Price) से लेकर टोल टैक्स पर फास्टैग से जुड़े नियम (FASTag Rule Change) तक शामिल हैं. वहीं सबसे बड़ा शॉक पान-मसाला और सिगरेट के शौकीनों को लगने वाला है. जी हां, 1 फरवरी 2026 से इन तंबाकू प्रोडक्ट्स की कीमतें बढ़ (Pan-Masala Cigarette Price Hike) सकती हैं, क्योंकि सरकार इन पर लागू टैक्स में इजाफा करने वाली है.  साल की शुरुआत में की थी तैयारी इस साल की शुरुआत में ही सरकार की ओर से GST क्षतिपूर्ति उपकर के स्थान पर एक नया उत्पाद शुल्क और उपकर अधिसूचित किया गया था. पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इसके तहत देश में 1 फरवरी 2026 से तंबाकू उत्पादों और पान मसाला पर अधिक टैक्स का प्रावधान किया गया है. अधिसूचना को देखें, तो तंबाकू और पान मसाला पर नए शुल्क लागू जीएसटी दरों के अतिरिक्त लगाए जाएंगे. जनवरी की शुरुआत में वित्त मंत्रालय ने चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण और शुल्क संग्रह) नियम, 2026 को भी अधिसूचित किया. ये नियम चबाने वाले तंबाकू प्रोडक्ट्स के निर्माताओं से उत्पादन क्षमता का आकलन करने और शुल्क वसूलने की प्रक्रिया निर्धारित करते हैं. रिपोर्ट की मानें, तो केंद्र सरकार का यह कदम दिसंबर 2025 में संसद द्वारा दो विधेयकों को मंजूरी दिए जाने के बाद आया, जो पान मसाला निर्माण पर नए स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर और तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने की अनुमति देते हैं.   कीमतों पर दिखेगा टैक्स इफेक्ट  सरकार द्वारा संशोधित टैक्स स्ट्रक्चर के तहत 1 फरवरी से सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लगाने से लंबी, प्रीमियम सिगरेट पर सबसे अधिक वृद्धि देखने को मिलेगी. बदलाव के तहत सिगरेट की लंबाई के आधार पर प्रति 1,000 स्टिक पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक का उत्पाद शुल्क लगाया जाएगा, जो फरवरी  पहली तारीख से प्रभावी होगा. ध्यान रहे कि यह शुल्क 40% जीएसटी से अलग होगा.  टैक्स की मार के चलते इन तंबाकू प्रोडक्ट्स को बनाने वाली कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन प्रभावित होगा और ऐसे में कंपनियां इसकी भरपाई के लिए ग्राहकों पर बोझ बढ़ा सकती हैं. सीधे शब्दों में कहें तो सिगरेट, पान-मसाला, गुटखा महंगे हो जाएंगे और इनके शौकीनों को अब ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ेगी.  Crisil ने इसे लेकर क्या कहा?  क्रिसिल की एक रिपोर्ट को देखें, तो सिगरेट उद्योग को शुल्क में बढ़ोतरी से बिक्री में गिरावट का सामना भी करना पड़ सकता है. वर्तमान में, सिगरेट पर 28 प्रतिशत वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के क्षतिपूर्ति उपकर भी लगते हैं, लेकिन 1 फरवरी से ये क्षतिपूर्ति उपकर हटा दिया जाएगा और सिगरेट की लंबाई के आधार पर एक अतिरिक्त उत्पाद शुल्क लागू होगा. क्रिसिल ने Tax Hike से घरेलू सिगरेट उद्योग में अगले वित्तीय वर्ष में 6-8 फीसदी की गिरावट का अनुमान जताया है.