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मन की बात में पीएम मोदी ने कहा, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज माह के आखिरी रविवार को मन की बात कर रहे हैं. यह संस्करण इस साल का पहला है. इस दौरान उन्होंने कहा, 'यह साल 2026 की पहली 'मन की बात' है. कल, 26 जनवरी को हम अपना गणतंत्र दिवस मनाएंगे. हमारा संविधान इसी दिन लागू हुआ था. यह दिन, 26 जनवरी, हमें हमारे संविधान बनाने वालों को श्रद्धांजलि देने का मौका देता है.' पीएम मोदी ने कहा, 'जैसे हम जन्मदिन मनाते हैं और विश करते हैं, वैसे ही जब भी कोई नौजवान पहली बार वोटर बने, तो पूरे मोहल्ले, गांव या शहर को एक साथ आकर उन्हें बधाई देनी चाहिए और मिठाई बांटनी चाहिए. इससे वोटिंग के बारे में अवेयरनेस बढ़ेगी और यह एहसास और मजबूत होगा कि वोटर होना कितना जरूरी है.' स्टार्ट-अप से जुड़े युवाओं को पीएम मोदी का सलाम उन्होंने आगे कहा, 'एआई, स्पेस, न्यूक्लियर एनर्जी, सेमीकंडक्टर, मोबिलिटी, ग्रीन हाइड्रोजन, बायोटेक्नोलॉजी, आप नाम लीजिए, और आपको उस सेक्टर में कोई न कोई इंडियन स्टार्ट-अप काम करता हुआ मिल जाएगा. मैं अपने उन सभी युवा दोस्तों को सलाम करता हूं जो किसी न किसी स्टार्ट-अप से जुड़े हैं, या अपना खुद का स्टार्ट-अप शुरू करना चाहते हैं. आइए हम जो कुछ भी बनाते हैं उसकी क्वालिटी को बेहतर बनाने का संकल्प लें. चाहे वह हमारा टेक्सटाइल हो, टेक्नोलॉजी हो, इलेक्ट्रॉनिक्स हो, या पैकेजिंग हो, इंडियन प्रोडक्ट का मतलब 'टॉप क्वालिटी' होना चाहिए. आइए हम एक्सीलेंस को अपना बेंचमार्क बनाएं.' भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बना मन की बात के 130वें एपिसोड में पीएम मोदी ने कहा, 'आजकल मैं सोशल मीडिया पर एक दिलचस्प ट्रेंड देख रहा हूँ. लोग साल 2016 की अपनी यादें ताजा कर रहे हैं. इसी भावना के साथ, आज मैं भी अपनी एक याद आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ. दस साल पहले, जनवरी 2016 में, हमने एक बड़ा सफर शुरू किया था. हमें तब एहसास हुआ था कि भले ही यह छोटा हो, लेकिन यह देश के भविष्य और युवा पीढ़ी के लिए बहुत जरूरी है. आज, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बन गया है. ये स्टार्ट-अप लीक से हटकर है. वे ऐसे सेक्टर में काम कर रहे हैं जिनके बारे में 10 साल पहले सोचा भी नहीं जा सकता था.' कोशिशों से फिर से जीवित हुई नदी पीएम मोदी ने प्रदूषण का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा,'तमसा नदी, जो अयोध्या से होकर गंगा में मिलती है, कभी इस इलाके के लोगों के लिए जीवन की धुरी थी लेकिन, प्रदूषण की वजह से इसका बिना रुकावट वाला बहाव रुक गया था. यहां के लोगों ने इसे नया जीवन देने के लिए एक कैंपेन शुरू किया और सभी की कोशिशों से नदी फिर से जिंदा हो गई.' आंध्र में जिंदा हुए 10 से अधिक तालाब प्रधानमंत्री ने आगे कहा, 'आंध्र प्रदेश का अनंतपुर एक ऐसा इलाका है जो बहुत ज्यादा सूखे से जूझ रहा है. यहां की मिट्टी लाल और रेतीली है, जिसकी वजह से लोगों को पानी की कमी का सामना करना पड़ता है. यहां (अनंतपुर) कई इलाकों में लंबे समय तक बारिश नहीं होती है. इस समस्या को दूर करने के लिए, स्थानीय लोगों ने तालाबों को साफ करने का फैसला किया. प्रशासन की मदद से, 'अनंत नीरू संरक्षणम प्रोजेक्ट' शुरू किया गया. 10 से ज्यादा तालाबों को फिर से जिंदा किया गया है. साथ ही, 7000 से ज़्यादा पेड़ लगाए गए हैं.' जेन जी में 'भजन क्लबिंग' पॉपुलर पीएम मोदी ने कहा, 'भजन और कीर्तन सदियों से हमारी संस्कृति की आत्मा रहे हैं. आज के युवाओं ने भक्ति की भावना को अपने अनुभवों और लाइफस्टाइल में शामिल कर लिया है. देश भर के अलग-अलग शहरों में बड़ी संख्या में युवा इकट्ठा हो रहे हैं. स्टेज सजा हुआ है. पूरी धूमधाम है, और माहौल किसी कॉन्सर्ट से कम नहीं है लेकिन वहां जो गाया जा रहा है वह भजन है. इस ट्रेंड को आजकल 'भजन क्लबिंग' कहा जा रहा है, और यह खासकर Gen Z के बीच तेजी से पॉपुलर हो रहा है.' मलेशिया में भारतीय पर जोर मोदी ने कहा, 'भारतीय त्योहार दुनिया के हर कोने में बड़े जोश और खुशी के साथ मनाए जाते हैं. भारतीय मूल के हमारे भाई-बहन, हर तरह की सांस्कृतिक चमक बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं. मलेशिया में हमारी भारतीय कम्युनिटी भी इस मामले में बहुत अच्छा काम कर रही है. मलेशिया में 500 से अधिक तमिल स्कूल हैं. तमिल भाषा पढ़ाने के अलावा, दूसरे सब्जेक्ट भी तमिल में पढ़ाए जाते हैं. इसके अलावा, तेलुगु और पंजाबी के साथ-साथ दूसरी भारतीय भाषाओं पर भी बहुत ध्यान दिया जाता है. भारत और मलेशिया के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने में एक सोसाइटी का बड़ा रोल है. इसका नाम है 'मलेशिया इंडिया हेरिटेज सोसाइटी'. पिछले महीने, मलेशिया में 'लाल पाद साड़ी' आइकॉनिक वॉक ऑर्गनाइज की गई थी. इस साड़ी का हमारे बंगाल के कल्चर से एक खास कनेक्शन रहा है. इस इवेंट ने सबसे ज्यादा लोगों द्वारा यह साड़ी पहनने का रिकॉर्ड बनाया, जिसे मलेशियन बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया.' चांदनकी गांव की अनोखी कम्युनिटी किचन पीएम मोदी ने कहा, 'गुजरात के बेहराजी में चांदनकी गांव की परंपरा अनोखी है. यहां के लोग, खासकर बुजुर्ग, अपने घरों में खाना नहीं बनाते हैं. इसकी वजह गांव का शानदार कम्युनिटी किचन है. पूरे गांव के लिए खाना इसी कम्युनिटी किचन में बनता है, और लोग एक साथ बैठकर खाते हैं. यह परंपरा पिछले 15 सालों से चली आ रही है. यह पहल न सिर्फ लोगों को जोड़ती है, बल्कि परिवार की भावना भी बढ़ाती है.'

प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री योगी का निरंतर संवाद बन रहा प्रदेश की प्रगति का माध्यम

उत्तर प्रदेश दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री योगी में हुआ भावपूर्ण पत्रों का आदान-प्रदान    पत्रों के आदान-प्रदान में दिखा भरोसे व सम्मान को दर्शाने का भाव प्रधानमंत्री मोदी व मुख्यमंत्री योगी का निरंतर संवाद बन रहा प्रदेश की प्रगति का माध्यम  डबल इंजन सरकार में सुशासन, विकास व आत्मनिर्भरता पर केंद्र व राज्य की है एकीकृत कार्यशैली विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में निर्णायक है उत्तर प्रदेश की भूमिका   लखनऊ  उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच हुए आत्मीय व भावपूर्ण पत्राचार ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि डबल इंजन की सरकार में केंद्र और राज्य एकीकृत कार्यशैली में काम कर रहे हैं। प्रदेश में डबल इंजन की सरकार सुशासन, विकास और आत्मनिर्भरता को अपनी प्रमुख वरीयता में रखते हुए उत्तर प्रदेश को विकसित प्रदेश बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। उल्लेखनीय है कि स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कई अवसरों पर विकसित भारत में विकसित उत्तर प्रदेश की भूमिका का उल्लेख कर चुके हैं। ऐसे में, इस लक्ष्य की प्राप्ति में उत्तर प्रदेश की निर्णायक भूमिका को समन्वय के जरिए सुनिश्चित किया जा रहा है। इस दिशा में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजा गया आत्मीय संदेश और उसके उत्तर में मुख्यमंत्री का विस्तृत व भावपूर्ण पत्र, दोनों ही इस बात के सशक्त प्रमाण हैं कि उत्तर प्रदेश में विकास की यात्रा साझा सोच, साझा लक्ष्य और साझा प्रयासों के साथ आगे बढ़ रही है। यह संवाद केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि उस भरोसे और तालमेल का प्रतिबिंब है, जिसके सहारे उत्तर प्रदेश देश का ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहा है। विश्वास और सम्मान से भरा संवाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संदेश में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, ऐतिहासिक भूमिका और विकास यात्रा की विस्तार से सराहना की। उन्होंने प्रदेश को आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजबूत स्तंभ बताया और कानून व्यवस्था, बुनियादी ढांचे, पर्यटन तथा औद्योगिक विकास में हो रही प्रगति को रेखांकित किया। उनके शब्दों में उत्तर प्रदेश केवल जनसंख्या का बड़ा राज्य नहीं, बल्कि सामूहिक शक्ति से देश के विकास को नई गति देने वाला राज्य है। साझा प्रतिबद्धता का प्रमाण है मुख्यमंत्री का उत्तर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी के संदेश को न केवल शनिवार को राष्ट्र प्रेरणा स्थल में आयोजित उत्तर प्रदेश दिवस-2026 के शुभारंभ समारोह के कार्यक्रम में सुनाया, बल्कि संदेश के प्रति प्रदेश की 25 करोड़ जनता की ओर से कृतज्ञता व्यक्त की। अपने पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश सुशासन, गरीब कल्याण, अंत्योदय और आत्मनिर्भरता के संकल्प को धरातल पर उतार रहा है। मुख्यमंत्री योगी ने यह भी रेखांकित किया कि बीते वर्षों में प्रदेश की छवि में आया बदलाव केंद्र और राज्य सरकार के बीच विश्वासपूर्ण सहयोग का परिणाम है। डबल इंजन सरकार की कार्य संस्कृति पत्र में मुख्यमंत्री ने डबल इंजन सरकार की कार्यसंस्कृति का उल्लेख करते हुए बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि और सौभाग्य योजना जैसी पहलों में उत्तर प्रदेश देश में अग्रणी प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य केवल योजनाएं लागू करना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को गरिमापूर्ण जीवन देना है। यह दृष्टिकोण केंद्र और राज्य, दोनों की साझा प्राथमिकता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री मोदी के संदेश और मुख्यमंत्री योगी के पत्र में उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का भी विशेष उल्लेख है। अयोध्या, काशी, मथुरा, प्रयागराज और बौद्ध स्थलों के विकास के साथ पर्यटन को नई दिशा मिली है। यह संतुलन दिखाता है कि विकास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना के संरक्षण के साथ आगे बढ़ रहा है। दोनों नेताओं के शब्दों में न केवल आपसी सम्मान झलकता है, बल्कि यह भी स्पष्ट होता है कि नीतियों से लेकर क्रियान्वयन तक, तालमेल पूरी मजबूती के साथ कायम है। विकसित भारत में उत्तर प्रदेश की भूमिका प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री योगी, दोनों ही इस बात पर एकमत हैं कि विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति में उत्तर प्रदेश की भूमिका निर्णायक होगी। निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर, रोजगार, सामाजिक सुरक्षा और नवाचार के क्षेत्रों में प्रदेश की प्रगति इस साझा दृष्टि का परिणाम है। उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर हुआ यह संवाद केवल शुभकामनाओं का आदान-प्रदान नहीं, बल्कि उस साझा संकल्प की घोषणा है, जिसमें केंद्र और राज्य एक साथ कदमताल करते हुए आगे बढ़ रहे हैं। संदेश स्पष्ट है कि डबल इंजन सरकार लगातार समन्वय के साथ उत्तर प्रदेश को नई ऊंचाइयों की ओर ले जाने के लिए न केवल कृत संकल्पित है बल्कि लगातार इस दिशा में वृहद स्तर पर कार्य कर रही है।

बड़ी खबर: 14.9 करोड़ पासवर्ड लीक, क्या आपका नाम इस लिस्ट में है?

नई दिल्ली जीमेल, फेसबुक, नेटफ्लिक्स, इंस्टाग्राम आदि का यूज करते हैं तो आपके लिए एक जरूरी खबर है. दरअसल, हाल ही में 14.9 करोड़ यूनिक आईडी लॉगइन और पासवर्ड लीक होने का मामला सामना आया है. ये डेटा बिना किसी सिक्योरिटी और पासवर्ड के अवेलेबल है, जिसकी जानकारी WIRED ने अपनी रिपोर्ट में दी है.  जाने-माने सिक्योरिटी एनालिस्ट Jeremiah Fowler ने इस डेटाबेस का पता लगाया है. फाउलर के मुताबिक, ये लीक हुए रिकॉर्ड लगभग हर बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ा है.  इन ऐप्स का डेटा हुआ लीक  लीक पासवर्ड से प्रभावित हुए ऐप की लिस्ट में फेसबकु, इंस्टाग्राम, टिकटॉक, X (पहले Twitter) और कुछ डेटिंग ऐप्स का नाम शामिल है. इस लीक में स्ट्रीमिंग ऐप्स और एंटरटेनमेंट ऐप्स के नाम भी शामिल है, जिसमें  Netflix, HBO Max, Disney Plus, and Roblox के नाम शामिल हैं.      ईमेल अकाउ्टस : फाउलर के मुताबिक, करीब 4.8 करोड़ जीमेल अकाउंटस, 40 लाख याहू अकाउंट्स, और 15 लाख आउटलुक अकाउंट का डेटा लीक हुआ है.       सोशल मीडिया : 1.7 करोड़ फेसबुक अकाउंट्स, 65 लाख इंस्टाग्राम अकाउंट और 780 हजार टिकटॉक अकाउंट की डिटेल्स लीक हुई है.      एंटरटेनमेंटः इस सेगमेंटमें करीब 34 लाख Netflix अकाउंट के लॉगइन और पासवर्ड लीक हुए हैं. इसमें डिज्नी प्लस समेत की और नाम शामिल है.      फाइनेंशियल और सरकारी अकाउंट्स की लिस्ट में 420 हजार लॉगइन डिटेल्स और पासवर्ड के नाम शामिल हैं.  ये डेटा कैसे लीक हुआ ? फाउलर ने कहा है कि यह डेटाबेस इन्फोस्टेलर नाम के मैलवेयर ने क्रिएट किया है, जो एक तरह का खतरनाक सॉफ्टवेयर है. इसको ऐसे डिजाइन किया गया है, जिससे यह चुपचाप तरीके से डिवाइस को नुकसान पहुंचाते हैं और लॉगइन व डिटेल्स को चोरी करते हैं.  फाउलर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जब भी डेटा कलेक्ट या चोरी किया जाता है तो उसको कहीं स्टोर करना होता है. ऐसे क्लाउड पर डेटा स्टोर करना सबसे बेस्ट माना जाता है. इस खोज से पता चलता है कि साइबर हैकर्स का भी डेटा चोरी हो जाता है.   डेटा और लीक नुकसान कैसे बचाएं?  डेटा या पासवर्ड लीक होने पर अपने अकाउंट को कैसे बचाएं. इसके लिए कुछ खास ट्रिक्स का यूज किया जा सकता है. अलग-अलग पासवर्ड रखें  अलग-अलग प्लेटफॉर्म के लिए अलग-अलग पासवर्ड का यूज करें. पासवर्ड बनाते समय कम से कम 12-16 कैरेक्टर का यूज करें.  2 स्टेप वेरिफिकेशन्स यूज करें लगभग सभी प्लेटफॉर्म पर टू स्टेप वेरिफिकेशन्स की सुविधा मिलती है. टू स्टेप वेरिफिकेशन्स में मोबाइल नंबर पर OTP या फिर जीमेल पर OTP आता है.  

लोकधुनों, रंगों और स्वाद में रचा-बसा ‘उत्तर प्रदेश दिवस-2026’ का जनोत्सव

राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर दिखी उत्तर प्रदेश के उत्सव की सतरंगी छटा लोकधुनों, रंगों और स्वाद में रचा-बसा 'उत्तर प्रदेश दिवस-2026' का जनोत्सव लखनऊ  सुबह की हल्की धूप के बीच  राष्ट्र प्रेरणा स्थल का पूरा परिसर ही उत्तर प्रदेश के रंग में रंगा नजर आया। ढोलक की थाप, शहनाई की मधुर स्वर लहरियां और लोकगीतों की मिठास के बीच उत्तर प्रदेश दिवस-2026 का जनोत्सव केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य की आत्मा को महसूस कराने वाला उत्सव बनकर सामने आया। परिसर में कदम रखते ही चारों ओर सजी लोकचित्रों की प्रदर्शनी और रंग बिरंगे परिधानों में सजे कलाकार ध्यान खींचते रहे। हर दृश्य उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विविधता की कहानी कह रहा था। कहीं ब्रज की होली की झलक दिखी, तो कहीं पूर्वांचल की लोकनृत्य शैली ने दर्शकों को थिरकने पर मजबूर कर दिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, हर चेहरे पर उत्साह और अपने प्रदेश को लेकर गर्व साफ झलक रहा था। एक जनपद एक व्यंजन योजना के स्टॉल पर सर्वाधिक भीड़ कार्यक्रम स्थल पर सबसे अधिक भीड़ एक जनपद एक व्यंजन योजना के स्टॉल पर दिखाई दी। आगरा के पेठे की मिठास, मथुरा के पेड़ों की खुशबू, बनारस की ठंडाई और पान की पारंपरिक महक, चंदौली के काले चावल से बने व्यंजन, इन सभी ने यूपी की सांस्कृतिक पहचान को एक ही थाली में सजा दिया। लोग न केवल इन व्यंजनों का स्वाद ले रहे थे, बल्कि अपने अपने जनपद से जुड़ी स्मृतियों और पहचान को भी साझा कर रहे थे। प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को बनाए रखा जीवंत लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को जीवंत बनाए रखा। कठपुतली नृत्य में लोककथाएं जैसे सजीव हो उठीं। रामायण के पात्रों के स्वांग ने श्रद्धा और मनोरंजन को एक साथ जोड़ दिया। हर प्रस्तुति के बाद तालियों की गूंज यह बताती रही कि यह उत्सव केवल देखने का नहीं, महसूस करने का अनुभव है। वहीं दूसरी ओर, विभिन्न विभागों की प्रदर्शनियों के माध्यम से उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा भी साफ नजर आई। यह परंपरा और प्रगति का ऐसा संगम था, जहां एक ओर विरासत को संजोया जा रहा था, तो दूसरी ओर भविष्य की दिशा भी स्पष्ट दिखाई दे रही थी। केवल राजधानी तक सीमित नहीं आयोजन तीन दिनों तक चलने वाला यह आयोजन राजधानी तक सीमित नहीं है। प्रदेश के हर जिले में इसी भाव और उत्साह के साथ यूपी दिवस मनाया जा रहा है। यूपी दिवस-2026 ने यह साफ संदेश दिया है कि उत्तर प्रदेश केवल आंकड़ों और योजनाओं को धरातल पर उतारने वाला राज्य ही नहीं, बल्कि संस्कृति, संवेदना और सामूहिक गर्व से जुड़ा हुआ जनप्रदेश है, जहां उत्सव भी नीति बन जाता है और परंपरा भी विकास का हिस्सा बनकर आगे बढ़ती है।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने राहगीरी आनंद उत्सव का उद्घाटन किया, मंच से लहराई गदा

उज्जैन  मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को उज्जैन प्रवास के दौरान राहगीरी आनंद उत्सव में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने लोगों को योगा, सुबह-सुबह भ्रमण और व्यायाम करने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दीप प्रज्ज्वलन कर आनंद उत्सव राहगीरी कार्यक्रम का शुभारंभ किया।  राहगीरी में पारंपरिक खेल, योग, नृत्य, संगीत और मनोरंजन का संगम देखने को मिला। यहां लोग अपने परिवार के साथ बड़ी संख्या में पहुंचे। जश्न के बीच सफाई पर भी पूरा ध्यान रखा गया। नगर निगम के कर्मचारी लगातार कार्यक्रम स्थल की सफाई में लगे रहे। इस मौके पर शहर के विकास पर बनी डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी दिखाई गई। उज्जैन के परंपरागत लाठी खेल संघ ने दमदार करतब दिखाए। इस दौरान महापौर मुकेश टटवाल और बीजेपी जिला अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने भी लाठी घुमाई। युवा बीच सड़क पर गरबा और डांस करते भी दिखाई दिए। उज्जैन कोठी रोड पर आयोजित आनंद उत्सव राहगीरी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को देखकर लोगों में उत्साह रहा। बच्चे, बुजुर्ग, युवा और महिलाएं सभी मुख्यमंत्री के साथ फोटो खिंचवाने के लिए उत्साहित दिखे। लोगों ने मुख्यमंत्री का जोरदार स्वागत किया। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि यदि आपका स्वास्थ्य अच्छा है और परिवार के सभी सदस्य स्वस्थ हैं तो इससे बड़ा कोई सुख नहीं है। हमें अपने स्वास्थ्य के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए। मुख्यमंत्री ने मंच से जनता से आह्वान किया कि बच्चे और परिवार के युवा साथी इस राहगीरी में भाग लें और इसका प्रतिदिन अनुसरण करें। जीवन में अच्छा स्वास्थ्य और निरोगी काया सबसे बड़ा सुख है। मुख्यमंत्री ने उज्जैन में इस आनंद उत्सव को बनाए रखने के लिए जनता का धन्यवाद दिया। इस अवसर पर उन्होंने बैलगाड़ी की सवारी की और जनता का अभिवादन भी स्वीकार किया। मुख्यमंत्री यादव ने 100 से अधिक मंचों पर जाकर लोगों का अभिनंदन किया। संस्थाओं द्वारा मुख्यमंत्री को साफा पहनाकर और मालाएं पहनाकर स्वागत किया गया। इस दौरान प्रेस क्लब उज्जैन द्वारा राहगीरी आनंदोत्सव में दूध-जलेबी का निशुल्क काउंटर भी लगाया।  राहगीरी में देशी खेल का आयोजन भी हुआ कार्यक्रम में अंटी (कंचे), रस्सीकूद, बोरा दौड़ और सितोलिया जैसे पुराने खेल भी आयोजित किए गए। इसके अलावा गरबा, मालवी और हरियाणवी नृत्य, योग, एरोबिक, मलखंभ और अखाड़ा प्रदर्शन भी किए गए। कार्यक्रम स्थल पर खाने-पीने के कई स्टॉल लगाए गए। कृषि विभाग की ओर से मोटे अनाज से बने हलवा, लड्डू और खिचड़ी मुफ्त में बांटी गई। इसके अलावा पोहा, जूस, फल, अंकुरित आहार और सूप के स्टॉल भी रहे। प्रेस क्लब उज्जैन की ओर से दूध-जलेबी का निःशुल्क वितरण किया गया। मुख्यमंत्री के दिनभर के कार्यक्रम     राहगीरी कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री ‘उड़ान’ कार्यक्रम में मानसिक रूप से कमजोर और दृष्टिबाधित बच्चों से मुलाकात करेंगे। वे बच्चों के बनाए उत्पाद देखेंगे और उनका हौसला बढ़ाएंगे।     इसके बाद मुख्यमंत्री अटल परिसर, फाजलपुरा में बने नए स्पोर्ट्स और एंटरटेनमेंट कॉम्प्लेक्स का लोकार्पण करेंगे। यह परिसर करीब 28 करोड़ 31 लाख रुपए की लागत से बनाया गया है।     मुख्यमंत्री आरडी गार्गी मेडिकल कॉलेज के नए ऑडिटोरियम और कन्वेंशन सेंटर का भी उद्घाटन करेंगे और कॉलेज के रजत जयंती कार्यक्रम में शामिल होंगे।     शहर में यातायात सुधार के लिए मुख्यमंत्री हरि फाटक पुल को दो लेन से छह लेन करने के काम का भूमिपूजन करेंगे।     इसके अलावा रत्नाखेड़ी में पाटीदार समाज के कार्यालय का भूमिपूजन, ग्राम डेंडिया में महालोक होटल और रिसॉर्ट का शुभारंभ और विद्या भारती भवन में निःशुल्क हृदय रोग जांच शिविर की शुरुआत भी की जाएगी।

एमपी में ठंड की वापसी, कई जिलों में कोहरा; 27-28 जनवरी में बारिश का अनुमान

भोपाल मध्य प्रदेश में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। सर्दी और कोहरे के बीच गुजर रहे दिनों के बाद अब प्रदेश के कई हिस्सों में बादल, बारिश और गरज-चमक देखने को मिल सकती है। मौसम विभाग ने 27 और 28 जनवरी को राज्य के लगभग आधे हिस्से के लिए बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। इसकी वजह उत्तर-पश्चिम भारत में सक्रिय हुआ मजबूत पश्चिमी विक्षोभ बताया जा रहा है, जिसका असर अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गया है। रविवार को कई जिलों में सुबह से ही घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे ठंड का असर बढ़ गया है। मैदानी इलाकों में दिख रहा नए सिस्टम का असर पश्चिमी विक्षोभ के चलते जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी हुई है, जबकि दिल्ली-एनसीआर, पंजाब और हरियाणा में बारिश के बाद ठंडी हवाओं ने सर्दी को और तीखा कर दिया। यही मौसम प्रणाली अब मध्य प्रदेश में भी असर दिखा रही है। मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण और निम्न दबाव क्षेत्र की वजह से प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाए हुए हैं और बीते 24 घंटों में ग्वालियर-चंबल अंचल के कुछ जिलों में बारिश भी दर्ज की गई है। सुबह कोहरा, दिन में बादल बढ़ाएंगे परेशानी प्रदेश के कई जिलों में सुबह के समय घना और मध्यम कोहरा लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, रीवा और बुंदेलखंड के इलाकों में दृश्यता काफी कम रही, जिससे सड़क पर चलना चुनौती भरा हो गया। भोपाल समेत आसपास के जिलों में भी हल्का कोहरा छाया रहा। शनिवार को भी कई जगहों पर तेज हवाएं चलीं और दिनभर बादल बने रहे, जिससे ठंडक का एहसास बना रहा। रायसेन में तापमान गिरा, फिर लौटी कड़ाके की ठंड हिमाचल प्रदेश से उत्तराखंड तक हुई बर्फबारी के असर से रायसेन जिले में एक बार फिर ठंड बढ़ गई है। शनिवार दोपहर से मौसम में अचानक बदलाव आया, जिसके कारण दिन और रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई। बर्फीली हवाओं ने लोगों को फिर से सर्दी का एहसास कराया। मौसम में इस बदलाव के बाद दिन के अधिकतम तापमान में 4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई। शनिवार को यह 27 डिग्री से घटकर 24 डिग्री दर्ज किया गया। इसी तरह, रात के न्यूनतम तापमान में 5 डिग्री सेल्सियस की कमी आई, जो 14 डिग्री से गिरकर 9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। कोहरे के कारण लोग घरों से नहीं निकले रविवार सुबह जिले में बर्फीली हवाओं के साथ कोहरा छाया रहा, लोगों देर तक घरों में कैद रहे। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, आगामी कुछ दिनों तक ठंडी हवाओं का प्रभाव बना रह सकता है, जिससे तापमान में और गिरावट या उतार-चढ़ाव की संभावना है। प्रशासन ने नागरिकों को सुबह-शाम ठंड से बचाव के लिए आवश्यक सावधानी बरतने की सलाह दी है। महीने के अंत में फिर ठंड की दस्तक मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों तक तेज ठंड से राहत मिलेगी, लेकिन जनवरी के आखिरी दिनों में सर्दी का एक और दौर देखने को मिल सकता है। शनिवार शाम नरसिंहपुर के सालीचौका इलाके में अचानक हुई तेज बारिश ने लोगों को चौंका दिया, जिससे सड़कों पर फिसलन बढ़ गई। कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश में आने वाले दिन मौसम के लिहाज से उतार-चढ़ाव भरे रहने वाले हैं और लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। सुबह कोहरा, दिन में बादल बढ़ाएंगे परेशानी प्रदेश के कई जिलों में आज सुबह के समय घना और मध्यम कोहरा लोगों की मुश्किलें बढ़ा रहा है। ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, रीवा और बुंदेलखंड क्षेत्र में दृश्यता काफी कम रही, जिससे सड़क पर चलना चुनौतीपूर्ण हो गया। भोपाल और आसपास के इलाकों में भी हल्का कोहरा छाया रहा। शनिवार को कई स्थानों पर तेज हवाएं चलीं और दिनभर बादल बने रहे, जिससे ठंडक बनी रही। नर्मदापुरम, इंदौर, जबलपुर, रीवा, सीधी, रायसेन, उज्जैन, दमोह, सतना, उमरिया, राजगढ़, ग्वालियर, गुना, छिंदवाड़ा, खजुराहो, मंडला, नौगांव, सागर, मलाजखंड में भी कोहरा छाया हुआ है। दूसरी ओर, कई शहरों में रात के तापमान में गिरावट देखने को मिली है। मौसम विभाग के अनुसार, शनिवार-रविवार की रात में राजगढ़ सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री पहुंच गया। दतिया में 7.4 डिग्री, गुना में 7.7 डिग्री, पचमढ़ी-श्योपुर में 8.4 डिग्री, नौगांव में 9 डिग्री और रतलाम-रीवा में तापमान 9.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश के 5 बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे ठंडा रहा। यहां तापमान 8.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। भोपाल में 11.9 डिग्री, इंदौर में 13.2 डिग्री, उज्जैन में 11.5 डिग्री और जबलपुर में तापमान 15 डिग्री रहा। दो दिन गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट प्रदेश के आधे हिस्से में 27 और 28 जनवरी को बारिश और गरज-चमक का अलर्ट है। मौसम विभाग के अनुसार, 26 जनवरी को उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने वाला वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) स्ट्रॉन्ग है। यह एमपी में भी असर दिखाएगा। इससे पहले ग्वालियर-चंबल में बादल-बारिश और कोहरे वाला मौसम है। IMD (मौसम केंद्र), भोपाल के अनुसार, उत्तर भारत में दो साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) सक्रिय है। वहीं, एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) और ट्रफ की भी एक्टिविटी देखने को मिली। इस वजह से पिछले 24 घंटे के अंदर ग्वालियर-चंबल के जिलों में बारिश हुई। एक दिन पहले भी छाए रहे बादल एक दिन पहले शनिवार को कई जिलों में बादल छाए रहे। छतरपुर, रतलाम समेत 10 से ज्यादा जिलों में तेज हवाएं चली। भोपाल में दिन में बादल भी छाए रहे। शनिवार को नरसिंहपुर जिले के सालीचौका क्षेत्र में देर शाम 20 से 25 मिनट तक तेज बारिश हुई। अचानक हुई बारिश के कारण सड़कों पर फिसलन बढ़ गई, जिससे दोपहिया वाहन चालकों और पैदल राहगीरों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ा। ग्वालियर-चंबल के जिलों में हुई बारिश  मौसम विभाग के मुताबिक, 26 जनवरी से उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करने वाला स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस अब एमपी में असर दिखाएगा। इसका सबसे पहला असर ग्वालियर-चंबल संभाग में दिख रहा है, जहां बादल, हल्की बारिश और घना कोहरा बना हुआ है। वहीं उत्तर भारत में दो साइक्लोनिक सकुर्लेशन (चक्रवात) सक्रिय है। इस वजह से पिछले 24 घंटे के अंदर नरसिंहपुर एवं ग्वालियर-चंबल के जिलों में बारिश … Read more

टोल टैक्स नियमों में बदलाव, सरकार ने 70% तक की बंपर छूट का ऐलान, देखें कहां मिलेगा लाभ

नई दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। सरकार ने टोल टैक्स के नियम बदले हैं। इसके तहत अब 70 प्रतिशत तक की छूट मिलेगी। एनएचआई के नए नियम के मुताबिक, दो लेन के राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण के दौरान टोल टैक्स में 70 फीसदी की छूट देने का निर्णय लिया है। सड़क यात्री टोल टैक्स का सिर्फ 30 प्रतिशत भुगतान करेंगे। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 में महत्वपूर्ण संशोधन किया गया है। इस नए नियम के तहत दो-लेन (पेव्ड शोल्डर सहित) वाले राष्ट्रीय राजमार्ग को चार-लेन या उससे अधिक चौड़ा करने के दौरान वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों से पूरा टोल टैक्स नहीं लिया जाएगा। इसमें 70 फीसदी की बड़ी कटौती की गई है। संशोधित नियमों के अनुसार, निर्माण कार्य शुरू होने की तारीख से लेकर परियोजना पूरा होने तक सड़क यात्रियों को तय टोल का केवल 30 प्रतिशत ही भुगतान करना होगा। यानी निर्माण के दौरान यात्रियों को टोल दरों में 70 प्रतिशत की सीधी छूट मिलेगी। मालूम हो कि एनएचएआई हर साल टोल दरों में सात से 10 फीसदी की वृद्धि करता है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यह संशोधन नए साल से लागू कर दिया गया है। सरकार ने इस बाबत अधिसूचना जारी कर दी है। नया नियम उन सभी वर्तमान और नई राजमार्ग परियोजनाओं पर लागू होगा, जहां दो-लेन राजमार्ग को चार-लेन या उससे अधिक में अपग्रेड किया जा रहा है। चार लेन के हाईवे पर 25 फीसदी की छूट नए नियम के अनुसार, राजमार्ग के चार-लेन से छह या आठ-लेन बनने पर टोल टैक्स में 25 फीसदी की छूट दी जाएगी। यानी टोल टैक्स की तय दर का 75 फीसदी भुगतान करना होगा। इसके अलावा, टोल रोड की लागत पूरी होने पर टैक्स सिर्फ 40 प्रतिशत लेने का नियम पहले से है। 25-30 हजार किमी पर चल रहा काम सरकार के आंकड़ों के अनुसार, देशभर में लगभग 25 से 30 हजार किलोमीटर के दो-लेन राजमार्गों को चार-लेन में अपग्रेड किया जाना है। इसके लिए करीब 10 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है। अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर माल ढुलाई का हिस्सा 40 फीसदी है, जिसे बढ़ाकर 80 फीसदी करने का लक्ष्य है। चार-लेन कॉरिडोर बनने से व्यावसायिक वाहनों की औसत रफ्तार 30-35 से बढ़कर 50 किमी प्रतिघंटा से अधिक हो जाएगी।

मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तृतीय चरण का सीएम साय ने वर्चुअल किया शुभारंभ

बीजापुर. मुख्यमंत्री छत्तीसगढ़ शासन विष्णु देव साय ने मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा के तृतीय चरण का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ करते हुए बीजापुर जिले को दो नई बस सेवाओं की सौगात दी। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण एवं सुदूर अंचलों में आवागमन को सुगम बनाते हुए परिवहन सुविधाओं का विस्तार करना है। शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने बीजापुर जिलेवासियों एवं दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को बस सेवा प्रारंभ होने पर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि यह सेवा ग्रामीण अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं रोजगार तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। तृतीय चरण के अंतर्गत बीजापुर जिले में जिन बस मार्गों पर संचालन प्रारंभ किया गया, उनमें कचलारम से जगदलपुर (तोयनार-धनोरा मार्ग होते हुए), कोतापाल-बीजापुर-नैमेड, भैरमगढ़-गीदम (एक फेरा वापसी) प्रतिदिन कुल 190 किलोमीटर, तथा पामेड़ से बीजापुर (कोण्डापल्ली-तर्रेम-बासागुड़ा-आवापल्ली मार्ग होते हुए) कुल 104 किलोमीटर शामिल हैं। वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान सीईओ जिला पंचायत नम्रता चौबे ने बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारीगण एवं जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे। ग्रामीण बस सेवा के प्रारंभ होने से बीजापुर जिले के सुदूर एवं आदिवासी क्षेत्रों के नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ एवं नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी।

राम मंदिर शिखर का धर्म ध्वज सात महाद्वीपों तक पहुंचेगा, ऐतिहासिक संकल्प लिया गया

अयोध्या   धर्म नगरी अयोध्या से सनातन संस्कृति और प्रभु श्रीराम की भक्ति को वैश्विक मंच तक पहुंचाने की एक ऐतिहासिक और प्रेरणादायी पहल शुरू हो चुकी है. राम मंदिर के शिखर पर स्थापित होने वाला पवित्र धर्म ध्वज अब केवल अयोध्या तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे दुनिया के सातों महाद्वीपों तक ले जाकर फहराने का संकल्प लिया गया है. इस विशेष अभियान की विधिवत शुरुआत अयोध्या में पूजा अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों के साथ की गई, जिसने इसे आध्यात्मिक के साथ साथ सांस्कृतिक आंदोलन का स्वरूप दे दिया है. अयोध्या में विधिविधान से हुआ अभियान का शुभारंभ राम जन्मभूमि अयोध्या में हुए इस आयोजन के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा अर्चना के साथ धर्म ध्वज यात्रा का शुभारंभ किया गया. यह वही ध्वज है जो राम मंदिर के शिखर पर स्थापित होगा और अब उससे पूर्व पूरी दुनिया में सनातन धर्म की पहचान का संदेश लेकर निकलेगा. आयोजन में संत समाज और श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने इस पहल को और भी पवित्र और ऐतिहासिक बना दिया. नरेंद्र कुमार कर रहे हैं नेतृत्व इस वैश्विक अभियान का नेतृत्व हरियाणा के हिसार निवासी और प्रसिद्ध पर्वतारोही नरेंद्र कुमार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि यह धर्म ध्वज केवल एक कपड़ा या प्रतीक नहीं, बल्कि सनातन धर्म, प्रभु श्रीराम और भारतीय संस्कृति के मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है. उनका लक्ष्य है कि वर्ष 2026 के अंत तक इस पवित्र ध्वज को विश्व के सभी सात महाद्वीपों पर फहराया जाए, ताकि राम और सनातन संस्कृति का संदेश हर कोने तक पहुंचे. नेपाल से शुरू हुआ पहला चरण नरेंद्र कुमार के अनुसार इस यात्रा का पहला चरण नेपाल से शुरू किया गया. 21 दिसंबर को यात्रा की शुरुआत हुई और 29 दिसंबर को नेपाल में संबंधित महाद्वीप पर धर्म ध्वज फहराया गया. इसके बाद अब चरणबद्ध तरीके से अन्य महाद्वीपों की यात्रा की जाएगी. यह पूरी पहल अयोध्या से शिखर तक निकाली जा रही धर्म ध्वज यात्रा के रूप में आयोजित की जा रही है, जो अपने आप में एक अनूठा धार्मिक अभियान है. धार्मिक के साथ सामाजिक उद्देश्य भी राम मंदिर के शिखर पर लगने वाला यह धर्म ध्वज अब पूरी दुनिया में सनातन धर्म की पहचान बनेगा. इस अभियान का उद्देश्य केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक भी है. नरेंद्र कुमार का मानना है कि आज का युवा वर्ग भौतिकवाद की दौड़ में अपनी सांस्कृतिक जड़ों से दूर होता जा रहा है. इस यात्रा के माध्यम से युवाओं को धर्म, संस्कार और भारतीय मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. श्रीराम के आदर्शों का वैश्विक संदेश इस यात्रा का मूल उद्देश्य प्रभु श्रीराम के जीवन चरित्र और आदर्शों को वैश्विक स्तर पर पहुंचाना है. नरेंद्र कुमार का कहना है कि मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम का जीवन आज भी समाज को त्याग, कर्तव्य, मर्यादा और सत्य का मार्ग दिखा सकता है. अयोध्या में संपन्न हुई पूजा अर्चना के बाद यह धर्म ध्वज यात्रा अब अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुकी है. आने वाले समय में जब यह ध्वज सातों महाद्वीपों पर फहराएगा, तब पूरी दुनिया में राम मंदिर और सनातन संस्कृति की भक्ति का संदेश गूंजेगा.

ट्रैफिक जाम से हर साल 130 घंटे की बर्बादी, बेंगलुरु-दिल्ली समेत 10 शहरों में वाहनों की रेंगती भीड़

नई दिल्ली आप जब ऑफिस, स्कूल या अन्य किसी काम से जाने के लिए घर से बाहर निकलते हैं तो मंजिल पर पहुंचने से पहले जाम में फंसना, उसे झेलना आपकी दिनचर्या में शुमार हो गया है. ये भारत के किसी एक शहर या व्यक्ति की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे देश और उसकी 1.46 अरब आबादी की है. इसी जाम की बदौलत आपका करीब 130 घंटा हर साल बर्बाद हो रहा है. ये हम नहीं बल्कि दुनिया के 492 शहरों के ट्रैफिक का अध्ययन करने वाली नीदरलैंड की कंपनी टॉमटॉम की एक रिपोर्ट कह रही है. बोस्ट ग्रुप की रिपोर्ट में देश को करीब 1.47 लाख करोड़ रुपए की हानि का भी उल्लेख किया गया है. टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स में भारत के 10 शहरों की यातायात व्यवस्था के बारे में बताया गया है. जिसमें बेंगलुरु दुनिया में दूसरे नंबर पर है. यानी दुनिया का दूसरा सबसे धीमा शहर. जहां औसत यात्रा समय 3.37 मिनट प्रति किमी है. ETV Bharat Explainer में जानते हैं अन्य शहरों में क्या स्थिति है, जाम के क्या कारण हैं और निपटने के साधन क्या हैं? खराब ट्रैफिक की टॉप-5 लिस्ट में भारत के 2 शहर: टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स 2025 के अनुसार, बेंगलुरु दुनिया के सबसे खराब ट्रैफिक जाम वाले शहरों में दूसरे नंबर पर है. मतलब कि बेंगलुरु गंभीर ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहा है. इंडेक्स में सबसे ऊपर मेक्सिको सिटी है, आयरलैंड का डबलिन तीसरे स्थान पर है, जबकि पोलैंड का लॉड्ज चौथे स्थान पर है. पांचवें नंबर पर भारत का ही पुणे है. टॉप-5 में भारत के 2 शहरों का शामिल होना यह दर्शाता है कि शहरी विकास और निजी वाहनों पर निर्भरता ने गंभीर चुनौतियां खड़ी कर दी हैं. ट्रैफिक मैनेजमेंट पहले से कठिन हुआ: टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स के अनुसार जैसे-जैसे शहर बढ़ते हैं और लोगों की ट्रैवलिंग बढ़ती है, नगर निगमों, नगर योजनाकारों और परिवहन अधिकारियों के सामने सड़क नेटवर्क के प्रबंधन की चुनौती बढ़ती जाती है. कंपनी ने माना है कि ट्रैफिक को ठीक से मैनेज करना पहले से कहीं अधिक कठिन हो गया है. अमेरिका-जापान समेत कई देशों में यात्रा का समय बढ़ा: टॉमटॉम ट्रैफिक इंडेक्स के अनुसार लंदन (इंग्लैंड), बेंगलुरु (भारत), डबलिन (आयरलैंड), मेक्सिको सिटी (मेक्सिको), बार्सिलोना (स्पेन), एथेंस (ग्रीस), मिलान (इटली), रोसारियो (अर्जेंटीना), हिरोशिमा (जापान), सैन फ्रांसिस्को (संयुक्त राज्य अमेरिका) समेत कई अन्य प्रमुख शहरों में यात्रा का समय बढ़ गया. 2023 में बेंगलुरु छठा और 2024 में तीसरा सबसे अधिक भीड़भाड़ वाला शहर था. एशिया का सबसे धीमा शहर बेंगलुरु: ट्रैफिक इंडेक्स के अनुसार एशिया में बेंगलुरु एक बार फिर सबसे धीमा शहर बन गया है. यहां औसत यात्रा समय 3 मिनट 37 सेकंड प्रति किलोमीटर है. हालांकि, सामान्य यातायात की स्थिति में यात्रा समय घटकर 2 मिनट 4 सेकंड रह जाता है. भीड़भाड़ के स्तर के मामले में बेंगलुरु दुनिया का दूसरा सबसे भीड़भाड़ वाला शहर है, जिसका स्कोर 74.4 है, जो एक साल पहले 72.7 था. आयरलैंड का ऐतिहासिक शहर डबलिन 72.9 स्कोर के साथ तीसरे स्थान पर है. जो दुनिया का छठा सबसे धीमा शहर भी है, जहां प्रति किमी यात्रा का समय 3.27 मिनट है. दक्षिण भारत के राज्यों में ट्रैफिक की स्थिति सबसे खराब: ट्रैफिक इंडेक्स ने भारत के 10 शहरों का सर्वे किया, जिसमें बेंगलुरु, पुणे, मुंबई, नई दिल्ली, कोलकाता, जयपुर, चेन्नई, हैदराबाद, एर्नाकुलम, अहमदाबाद शामिल हैं. इनमें 7 शहर भारत के दक्षिण से आते हैं. इस हिसाब से कहा जा सकता है कि दक्षिण के शहरों में ट्रैफिक व्यवस्था सबसे ज्यादा खराब है.  छोटे शहरों में भी बढ़ी जाम की समस्या: मुंबई, नई दिल्ली और कोलकाता यह दिखाते हैं कि महानगर भी लगातार ट्रैफिक की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं. जयपुर, चेन्नई और हैदराबाद जैसे उभरते शहरों में भी ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ती जा रही है. यही नहीं एर्नाकुलम और अहमदाबाद जैसे छोटे शहर भी रैंकिंग में शामिल हैं, जो दर्शाता है कि ट्रैफिक की समस्या केवल महानगरों तक ही सीमित नहीं हैं. बेंगलुरु में 10 किमी की दूरी 36 मिनट में हो रही पूरी: बेंगलुरु में ट्रैफिक की स्थिति ऐसी है कि लोग 15 मिनट में केवल 4.2 किलोमीटर की दूरी ही तय कर पाते हैं. यानी 10 किलोमीटर की दूरी तय करने में 36.09 मिनट का समय लग रहा है. जो 2024 की तुलना में 2 मिनट से अधिक है. व्यस्त समय में औसत गति घटकर 13.9 किमी/घंटा रह गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में पूरे 1 किमी/घंटा धीमी है. ये आंकड़े बेंगलुरु के सड़क नेटवर्क पर पड़ने वाले गंभीर दबाव को दर्शाते हैं. जहां व्यस्त समय में लगने वाला ट्रैफिक न केवल समय बर्बाद करता है, बल्कि ईंधन की खपत में कमी, प्रदूषण और यात्रियों के तनाव को भी बढ़ाता है. ये आंकड़े दुनिया के सबसे भीड़भाड़ वाले शहरों में मेट्रो विस्तार, कॉर्पोरेट कम्यूट, स्थायी परिवहन समाधानों की आवश्यकता पर जोर देते हैं. ट्रैफिक जाम के कारण     निजी वाहनों की बढ़ती संख्या: शहरी परिवारों में आमदनी बढ़ने से जीवन स्तर में सुधार हुआ है. आर्थिक समृद्धि ने लोगों को निजी वाहनों का मालिक बनने में सक्षम बनाया है, जिससे सड़क पर भीड़ बढ़ गई है.     सड़कों का डिजाइन बढ़ा रहा जाम: सड़कों के रेडियल डिजाइन के कारण शहरों के केंद्रीय व्यावसायिक जिलों (सीबीडी) में और उसके आसपास ट्रैफिक जाम की समस्या ज्यादा हो गई है. लोगों को अक्सर सीबीडी से होकर गुजरना पड़ता है, जिसके चलते इन क्षेत्रों में भारी जाम लग जाता है.     पार्किंग की समस्या: सड़क पर सीमित जगह होने के कारण किनारे पार्किंग बढ़ जाती है. अधिकांश शहरों में सड़क से अलग पार्किंग सुविधाएं, बहुमंजिला पार्किंग स्थल या विशेष पार्किंग क्षेत्र अपर्याप्त हैं. इससे व्यावसायिक क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम की समस्या और भी गंभीर हो जाती है.     ट्रैफिक नियामों की जानकारी का न होना: यातायात नियमों की जानकारी न होने के कारण भी सड़कों पर जाम की स्थिति बन जाती है. ट्रैफिक जाम से निपटने के उपाय     सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना: जब लोग सार्वजनिक बसों, ट्रेनों और मेट्रो का उपयोग करते हैं, तो सड़कों से निजी कारों की संख्या कम होती है. बेहतर सार्वजनिक परिवहन प्रणालियां मिलने पर लोग अपनी गाड़ियों के बजाय इन साधनों … Read more