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सफेद मौत अमेरिका में फैल रही, 23 करोड़ लोग प्रभावित, सिर्फ 10 मिनट बाहर रहना खतरनाक

वॉशिंगटन  अमेरिका में इस वक्त मौसम वैज्ञानिकों के हाथ-पांव फूल हुए हैं. हाल ही में कुदरत के कहर की चेतावनी जारी की गई है. जिसमें 23 करोड़ से ज्यादा लोगों के सिर पर ‘सफेद मौत’ का साया मंडरा रहा है. ये वॉर्निंग विंटर स्टॉर्म फर्न को लेकर की गई है, जो कई राज्यों में तबाही मचाने वाला है. दावा किया जा रहा है कि इस बार पिछले साल तक के सारे रिकॉर्ड टूटने वाले हैं. इस तूफान की वजह से इंसानों का बाहर निकलना मुश्किल हो जाएगा. बताया जा रहा है कि इस सफेद तूफान का सामना करने वाले का शरीर 10 मिनट में फ्रॉस्टबाइट की चपेट में आ जाएगा. कितने राज्यों में ‘स्टेट ऑफ इमरजेंसी’ यह कोई मामूली बर्फबारी नहीं है बल्कि यह बर्फ, जमा देने वाली बारिश और ‘आर्कटिक कोल्ड’ का वो जानलेवा मिश्रण है जो पूरे अमेरिका को ठप कर देगा. बताया जा रहा है कि ये भयानक तूफान 2,300 मील लंबा मौत का रास्ता तय करने वाला है. यानी इसकी चपेट में टेक्सास से लेकर न्यूयॉर्क तक, करीब 15 राज्य आने वाले हैं. आने वाला खतरा देखते हुए यहां की सरकारों ने ‘स्टेट ऑफ इमरजेंसी’ घोषित कर दी है. टूट जाएंगे Winter Storm के सारे रिकॉर्ड न्यूयॉर्क सिटी और फिलाडेल्फिया जैसे शहरों में पिछले 4 साल की सबसे बड़ी बर्फबारी होने की आशंका है. रविवार का दिन इन शहरों के लिए सबसे खतरनाक होगा, जब बर्फीले तूफान की रफ्तार और तीव्रता अपने चरम पर होगी. सोमवार तक चलने वाला यह तूफान अपने पीछे 1 फुट से ज्यादा बर्फ और जानलेवा पाला यानी जमी हुई बर्फ छोड़ जाएगा. इस खतरे को देखते हुए शनिवार के लिए 1,400 से ज्यादा उड़ानें पहले ही रद्द की जा चुकी हैं. डलास और फोर्ट वर्थ जैसे बड़े एयरपोर्ट्स पर सन्नाटा पसरने वाला है. इसके अलावा भारी बर्फ की वजह से बिजली की लाइनें टूटने का खतरा है. दक्षिण के राज्यों में 2 इंच तक की बर्फ की परत जम सकती है. इसकी वजह से हजारों घर अंधेरे में डूब सकते हैं. 10 मिनट बाहर रहे तो… इस तूफान के साथ ‘पोलर वोर्टेक्स’ (Polar Vortex) की ठंडी हवाएं भी मिक्स हो जाएंगी यानी दोगुनी तबाही का अंदेशा है. शिकागो और मिडवेस्ट के इलाकों में तापमान -30 से -46 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है. इतनी ठंड में सिर्फ 10 मिनट बाहर रहने पर ‘फ्रॉस्टबाइट’ का खतरा है. यानी इंसान का शरीर सुन्न पड़ जाएगा. फ्रॉस्टबाइट की चपेट में आए शरीर के अंग काले पड़ जाते हैं. कंडीशन ज्यादा सीरियस होने पर फ्रॉस्टबाइट अंगों को गला सकती है.

भारत की आर्थिक प्रगति: अगले 5 साल में प्रति व्यक्ति आय 4000 डॉलर, चीन से बराबरी करेगा देश

नई दिल्ली भारत के पड़ोसी चीन की जीडीपी भले ही अभी भारत से अधिक हो, लेकिन कई आर्थिक संकेतकों में भारत अब उसके बराबर पहुंचने या उससे तेजी से नजदीक आने की स्थिति में है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस दशक के अंत तक भारत ‘अपर-मिडिल इनकम’ श्रेणी में शामिल हो जाएगा और प्रति व्यक्ति आय के मामले में चीन और इंडोनेशिया की बराबरी कर लेगा. यह रिपोर्ट भारत की आय संरचना में एक बड़े और ऐतिहासिक बदलाव की ओर इशारा करती है. इनकम में चीन की बराबरी करेगा भारत   एसबीआई के अनुसार, अगले चार वर्षों में यानी 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर तक पहुंच सकती है. भारत की आय में यह बढ़ोतरी लंबी और क्रमिक प्रक्रिया का नतीजा है. आजादी के बाद भारत को लो-इनकम से लोअर-मिडिल इनकम इकोनॉमी बनने में करीब 60 साल लग गए और यह मुकाम 2007 में हासिल हुआ. इस दौरान प्रति व्यक्ति औसत आय 1962 में जहां मात्र 90 डॉलर थी, वहीं 2007 तक यह बढ़कर 910 डॉलर हो गई, यानी सालाना औसतन 5.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. इसके बाद भारत की आर्थिक रफ्तार में तेजी आई. आजादी के बाद देश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने में लगभग छह दशक लगे, लेकिन 2014 तक भारत दो ट्रिलियन डॉलर, 2021 तक तीन ट्रिलियन डॉलर और फिर सिर्फ चार वर्षों में 2025 तक ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए चार ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन गया. इसके साथ ही भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनकर उभरा. मौजूदा अनुमानों के अनुसार, 2027 तक भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को भी छू सकती है. 5 ट्रिलियन डॉलर की ओर भारत SBI की रिपोर्ट के अनुसार, अगर मौजूदा ग्रोथ ट्रेंड जारी रहा तो भारत अगले दो साल में 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बन सकता है. भारत को 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनने में करीब छह दशक लगे, लेकिन इसके बाद रफ्तार तेज हो गई.     दूसरा ट्रिलियन सिर्फ 7 साल में जुड़ा     तीसरा ट्रिलियन 2021 तक     चौथा ट्रिलियन 2025 तक हासिल होने का अनुमान     2027 के आसपास 5 ट्रिलियन डॉलर का लक्ष्य संभव प्रति व्यक्ति आय में तेज उछाल SBI के मुताबिक, भारत को लो-इनकम देश से लोअर-मिडिल इनकम देश बनने में करीब 60 साल लगे.     1962 में प्रति व्यक्ति आय: 90 डॉलर     2007 में: 910 डॉलर     2009 में: 1,000 डॉलर     2019 में: 2,000 डॉलर     2026 तक अनुमान: 3,000 डॉलर 2030 तक अपर-मिडिल इनकम देश रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 4,000 डॉलर (करीब 3.64 लाख रुपये) तक पहुंच सकती है. इसके साथ ही भारत अपर-मिडिल इनकम देशों की श्रेणी में आ जाएगा, जहां फिलहाल चीन और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं. यह बदलाव सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं होगा, बल्कि करोड़ों भारतीयों के जीवन स्तर में सुधार का संकेत देगा. 2047 का बड़ा लक्ष्य सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक भारत एक हाई-इनकम देश बने. इसके लिए प्रति व्यक्ति आय को करीब 13,936 डॉलर तक ले जाना होगा. SBI का मानना है कि अगर भारत 7.5% की औसत वार्षिक आर्थिक वृद्धि बनाए रखता है, तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है. हालांकि, अगर हाई-इनकम की सीमा बढ़कर 18,000 डॉलर हो जाती है, तो देश को और तेज रफ्तार से विकास करना होगा. इसके लिए शिक्षा, रोजगार, उद्योग, निर्यात और संरचनात्मक सुधारों पर विशेष जोर देना जरूरी होगा. वैश्विक स्तर पर मजबूत स्थिति पिछले एक दशक में भारत की आर्थिक वृद्धि दर वैश्विक औसत से बेहतर रही है. ग्लोबल ग्रोथ रैंकिंग में भारत 95वें परसेंटाइल में पहुंच चुका है, यानी दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते देशों में शामिल है. वर्ल्ड बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 1990 में जहां केवल 39 देश हाई-इनकम थे, वहीं 2024 तक इनकी संख्या बढ़कर 87 हो गई है. भारत भी अब तेजी से उसी दिशा में आगे बढ़ता नजर आ रहा है. साल दर साल आय में इजाफा प्रति व्यक्ति आय के मोर्चे पर भी यही रुझान देखने को मिला है. साल 2009 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय 1,000 डॉलर तक पहुंची और अगले दस वर्षों में, यानी 2019 तक, यह दोगुनी होकर 2,000 डॉलर हो गई. अनुमान है कि 2026 तक यह बढ़कर 3,000 डॉलर तक पहुंच जाएगी, जिससे देश की खपत क्षमता और मध्यम वर्ग का आकार और मजबूत होगा. इसी पृष्ठभूमि में रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भी चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है. मूडीज का मानना है कि मजबूत आर्थिक विस्तार से औसत घरेलू आय को समर्थन मिलेगा, जिसका सीधा असर बीमा जैसे क्षेत्रों की मांग पर पड़ेगा. एजेंसी के अनुसार, तेज ग्रोथ, बढ़ता डिजिटलीकरण, कर सुधार और सरकारी स्वामित्व वाली बीमा कंपनियों में प्रस्तावित बदलाव बीमा प्रीमियम में निरंतर वृद्धि को बढ़ावा देंगे, जिससे उद्योग की लाभप्रदता में भी सुधार आने की संभावना है.

Budget 2026 में हो सकता है होम लोन पर बड़ा बदलाव, NAREDCO ने 5 लाख की ब्याज छूट की मांग की

नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026-27 से पहले रियल एस्टेट सेक्टर की शीर्ष संस्था नेशनल रियल एस्टेट डेवलपमेंट काउंसिल (NAREDCO) ने सरकार के सामने कई अहम मांगें रखी हैं. संगठन ने होम लोन पर मिलने वाली ब्याज कटौती की सीमा बढ़ाने, किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव करने और रियल एस्टेट क्षेत्र को उद्योग का दर्जा देने की आवश्यकता पर जोर दिया है. NAREDCO का कहना है कि मौजूदा आर्थिक और शहरी परिस्थितियों को देखते हुए आवास क्षेत्र को अतिरिक्त समर्थन की जरूरत है, ताकि ‘सभी के लिए आवास’ के लक्ष्य को हासिल किया जा सके. होम लोन पर ब्याज छूट बढ़ाने की मांग NAREDCO के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा कि होम लोन पर चुकाए गए ब्याज पर आयकर अधिनियम के तहत मिलने वाली दो लाख रुपये की छूट सीमा को बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि यह सीमा करीब 12 वर्ष पहले तय की गई थी, जबकि इस दौरान प्रॉपर्टी की कीमतों और निर्माण लागत में काफी वृद्धि हो चुकी है. जैन के अनुसार, ब्याज छूट की सीमा बढ़ाने से मध्यम वर्ग और पहली बार घर खरीदने वालों को राहत मिलेगी, जिससे आवासीय मांग को बढ़ावा मिलेगा. उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बजट 2026 में इस प्रस्ताव को शामिल किया जाए. किफायती आवास की परिभाषा में बदलाव जरूरी NAREDCO ने किफायती आवास की मौजूदा परिभाषा को भी अव्यावहारिक बताते हुए इसमें संशोधन की मांग की है. संगठन का कहना है कि वर्तमान में 45 लाख रुपये तक के घरों को किफायती आवास माना जाता है, लेकिन बढ़ती भूमि कीमतों और निर्माण लागत के कारण यह सीमा अब अप्रासंगिक हो गई है. संस्था ने सुझाव दिया कि 90 लाख रुपये तक की कीमत वाले घरों को किफायती आवास की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए. इससे अधिक संख्या में परियोजनाएं इस श्रेणी में आ सकेंगी और खरीदारों को एक प्रतिशत जीएसटी जैसी कर राहत का लाभ मिलेगा. रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा देने पर जोर NAREDCO के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि रियल एस्टेट क्षेत्र देश की जीडीपी, रोजगार सृजन और शहरी विकास में महत्वपूर्ण योगदान देता है. इसके बावजूद अब तक इसे उद्योग का दर्जा नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि यदि रियल एस्टेट को उद्योग का दर्जा मिलता है, तो डेवलपर्स को सस्ते ऋण, बेहतर वित्तीय संसाधन और निर्माण से जुड़े कच्चे माल की आसान उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी. इससे परियोजनाओं की लागत कम होगी और आवास की आपूर्ति बढ़ेगी. किराये के आवास को बढ़ावा देने की जरूरत NAREDCO ने किराये के आवास को प्रोत्साहन देने की भी मांग की है. प्रवीण जैन ने बताया कि मौजूदा समय में किराये से मिलने वाला रिटर्न मात्र एक से तीन प्रतिशत के बीच है, जिससे रियल एस्टेट कंपनियों के लिए इस क्षेत्र में निवेश करना आकर्षक नहीं रह गया है. उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार कर छूट, वित्तीय प्रोत्साहन और नीतिगत समर्थन के जरिए किराये के आवास को बढ़ावा दे सकती है, जिससे शहरी क्षेत्रों में बढ़ती आवासीय जरूरतों को पूरा किया जा सके. सरकारी जमीन और PPP मॉडल का प्रस्ताव निरंजन हीरानंदानी ने यह भी सुझाव दिया कि सरकार अपने पास उपलब्ध खाली पड़ी जमीन का उपयोग किफायती और मध्यम आय वर्ग के आवास निर्माण के लिए करे. इसके लिए सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को अपनाया जा सकता है, जिससे तेजी से आवासीय परियोजनाओं का विकास संभव होगा. 2030 तक 1000 अरब डॉलर का सेक्टर NAREDCO का अनुमान है कि भारतीय रियल एस्टेट उद्योग 2030 तक 1,000 अरब डॉलर के आकार तक पहुंच सकता है. संगठन का मानना है कि यदि बजट में आवास ऋण, कर ढांचे और नीति सुधारों पर ध्यान दिया गया, तो यह क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि को और गति देगा.

सरकार ने शुरू किया पायलट प्रोजेक्ट, किसानों को डिजिटल पहचान से सुविधा

नई दिल्ली  केंद्र सरकार खाद की बिक्री को अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए एग्री स्टैक (Agri Stack) का सहारा लेने वाली है। इसके तहत, यूरिया की बिक्री को धीरे-धीरे डिजिटल फार्मर आईडी से जोड़ा जाएगा। यह वही आईडी है जिसका उपयोग वर्तमान में पीएम-किसान योजना (PM Kisan Yojana) के पंजीकरण के लिए किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी वाली खाद केवल वास्तविक भू-स्वामियों या अधिकृत बटाईदारों तक ही पहुंचे। यूरिया की रिकॉर्ड खपत और सब्सिडी का गणित सरकार के इस कदम के पीछे सबसे बड़ा कारण फर्टिलाइजर सब्सिडी का बढ़ता हुआ खर्च है।     बजट अनुमान: सरकार ने चालू वित्त वर्ष (FY26) के लिए ₹1.68 ट्रिलियन की सब्सिडी का अनुमान लगाया था।     संशोधित अनुमान: यूरिया की रिकॉर्ड मांग के कारण यह खर्च ₹1.91 ट्रिलियन को पार कर सकता है।     खपत में वृद्धि: अप्रैल से दिसंबर 2025 के बीच यूरिया की खपत 31.15 मिलियन टन पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4% अधिक है। सात जिलों से शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट कृषि मंत्रालय ने राज्य सरकारों के साथ मिलकर एक कार्ययोजना तैयार की है। पहले चरण में देश के सात चुनिंदा जिलों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया जाएगा। इन जिलों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि यहाँ पहले से ही बड़ी संख्या में किसानों की डिजिटल आईडी बन चुकी है। इस ट्रायल के दौरान यह देखा जाएगा कि क्या आईडी के जरिए खाद बेचने से कालाबाजारी रुकती है और सब्सिडी का सही उपयोग होता है। एग्री स्टैक और फार्मर आईडी     एग्री स्टैक एक डिजिटल फाउंडेशन है जो किसानों, डेटा और डिजिटल सेवाओं को एक मंच पर लाता है। इसका लक्ष्य डेटा के आधार पर किसानों को बेहतर निर्णय लेने और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने में मदद करना है।     4 दिसंबर, 2025 तक देश में लगभग 7.67 करोड़ डिजिटल फार्मर आईडी बनाई जा चुकी हैं।     यह आईडी किसान की डेमोग्राफिक प्रोफाइल, जमीन की जानकारी और खेती के तरीकों को सुरक्षित रखती है। किसान अपनी डिजिटल आईडी कैसे बनवाएं? सरकार डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत तेजी से आईडी बनाने पर काम कर रही है। किसान भाई इसे दो तरीकों से बनवा सकते हैं: ऑनलाइन प्रक्रिया     राज्य के एग्री स्टैक पोर्टल या फार्मर रजिस्ट्री ऐप पर जाएं।     अपना आधार नंबर दें और eKYC की प्रक्रिया पूरी करें।     जमीन का सर्वे नंबर और खेत की अन्य डिटेल्स दर्ज करें।     डेटा उपयोग के लिए सहमति (Consent) दें और ई-साइन करें।     वेरिफिकेशन के बाद आपकी यूनिक डिजिटल आईडी जेनरेट हो जाएगी। ऑफलाइन प्रक्रिया किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर भी अपनी आईडी बनवा सकते हैं। इस कदम से किसे होगा फायदा? अधिकारियों के अनुसार, इस एकीकरण से खाद की उस चोरी को रोका जा सकेगा जो अक्सर औद्योगिक इकाइयों की ओर डाइवर्ट कर दी जाती है। इससे केवल वही व्यक्ति खाद खरीद पाएगा जो वास्तव में खेती कर रहा है या जिसके पास जमीन का अधिकार है।  

सिक्सलेन और फोरलेन ब्रिज का विस्तार, राजधानी में यात्रा की सुविधा बढ़ेगी

भोपाल  भोपाल में कोलार सिक्सलेन से केरवा डैम के बीच अब केरवा नदी बाधा नहीं बनेगी। पीडब्ल्यूडी कोलार रोड पर इनायतपुर के पास केरवा नदी पर चार लेन नया ब्रिज (New fourlane Bridge) बना रहा है। इसके लिए फरवरी में एजेंसी तय कर दी जाएगी। अगले डेढ़ माह में काम शुरू होगा। डेढ़ से दो साल में लोगों को इसका लाभ मिलना शुरू हो जाएगा। पीडब्ल्यूडी ब्रिज ईई एआर मोरे ने कहा कि हम केरवा का नया ब्रिज तैयार कर रहे हैं। इसके लिए प्रक्रियाएं इसी माह पूरी कर देंगे। अगले डेढ़ साल में ये तैयार हो जाएगा।  सीहोर, सलकनपुर और नसरुल्लागंज तक बेहतर राह अभी गोलजोड़ व इससे कुछ आगे तक सिक्सलेन है। इसके बाद जर्जर पुल है, जिससे गुजरने में आशंका रहती है। बड़े वाहन मंडीदीप के रास्ते आगे बढ़ते हैं। अब उच्चस्तरीय पुल बनने से मंडीदीप की बजाय सीधे केा पुल, कोलार डेम से होते हुए आगे बढ़ जाएंगे। नसरूल्लागंज और रातापानी तक की एप्रोच आसान होगी। ये नया ब्रिज रातापानी के झिरी एंट्री तक निकाल देगा। कोलार रोड से जुड़े 25 गांवों को इससे सीधे लाभ होगा। चार लेन का ब्रिज खत्म करेगा दुर्घटना की स्थिति केरवा नदी पर कोलार डैम के बीच चार लेन का ब्रिज नदी पर दुर्घटना की स्थिति खत्म करेगा। अभी केरवा नदी (Kerwa Dam) को पार करने जिस रास्ते कमा उपयोग किया जाता है वह करीब 30 साल पुराना है। भारी वाहन के दबाव से टूटने की स्थिति है। अब नया मजबूत उच्चस्तरीय ब्रिज के बनने से भारी वाहन भी सरपट आगे बढ़ जाएंगे। गौरतलब है कि हाल में जर्जर पुलिया के पास कार वबाइक दुर्घटनाग्रस्त हुए थे। इसमें वाहन चालकों की जान भी चली गई थी। 15 किमी का सिक्सलेन, अब 50 किमी तक लाभ देगा अभी कोलार तिराहा से नहर तिराहा होते हुए गोलजोड व आगे तक 15 किमी में सीसी सिक्सलेन किया गया है। इसमें कलियासोत ब्रिज को पहले ही सिक्सलेन कर दिया गया है। इसमें अब केरवा नदी का ब्रिज बचा था, जिसके लिए अब प्रक्रिया की जा रही है। इस ब्रिज के बनने से पब्लिक ट्रांसपोर्ट के तहत बस का भी आगे के लिए रास्ता खुल जाएगा। बैरागढ़ चीचली से आगे का क्षेत्र विकसित हो जाएगा।

‘यूरोप ने भारत पर टैरिफ नहीं लगाया, ट्रंप के करीबी सहयोगी ने किया बड़ा दावा’

दावोस  अमेरिकी वित्त मंत्री स्‍कॉट बेसेंट ने यूरोपीय यूनियन को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्‍होंने दावोस में दिए एक इंटरव्‍यू में कहा कि यूरोपीय सहयोगियों ने रूसी तेल के आयात पर भारत के खिलाफ संयुक्त टैरिफ लगाने से इनकार कर दिया था, क्‍योंकि वे भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को अंतिम रूप देना चाहते थे.  स्‍कॉट बेसेंट का यूरोप पर किया गया यह व्‍यंग ऐसे वक्‍त में आया है, जब यूरोपीय यूनियन की अध्‍यक्ष उर्सला वॉन डेर लेयेन  की भारत यात्रा शनिवार से शुरू हो रही है. जिसका मकसद भारत के साथ सबसे बड़ी डील करना है. ट्रंप के खास ने पॉलिटिको को दिए एक इंटरव्‍यू में कहा कि 2025 से तीसरे देशों के खरीदारों पर 25 प्रतिशत जुर्माना लागू करने के अमेरिकी प्रयास 'सफल' रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि मैं यह भी बताना चाहूंगा कि हमारे दिखावटी यूरोपीय सहयोगियों ने ऐसा करने से इनकार कर दिया था, क्योंकि वे भारत के साथ यह बड़ा व्यापार समझौता करना चाहते थे.  युद्ध को फंडिंग करने का आरोप  इस इंटरव्‍यू के दौरान स्‍कॉट बेसेंट ने यूरोप पर भारतीय रिफाइनरियों से रूसी तेल उत्‍पाद खरीदकर 'खुद के खिलाफ युद्ध को फंडिंग करने' का भी आरोप लगाया. वह यह कहने का प्रयास कर रहे थे कि एक तरफ यूरोप युक्रेन की तरफ है और दूसरी ओर वह रूसी तेल के खिलाफ टैरिफ न लगाकर रूस को फंड भी कर रहा है. बेसेन्ट ने आगे कहा कि विडंबना और मूर्खता की पराकाष्ठा यह है कि अनुमान लगाइए कि रिफाइन‍िंग उत्‍पाद कौन खरीद रहा था? यूरोपीय लोग…  भारत पर 25 फीसदी टैरिफ?  इस इंटरव्‍यू के दौरान स्‍कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि भारत पर लगा 25 फीसदी टैरिफ का जुर्माना हटाया जा सकता है. उन्‍होंने कहा कि हमाना 25 फीसदी टैरिफ बहुत सफल रहा है. रूस से भारत द्वारा तेल की खरीद ठप हो गई है. टैरिफ अभी भी लागू है, मुझे लगता है कि अब इन्‍हें हटाने का समय आ चुका है.  गौरतलब है कि अमेरिका ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है , जिसमें रूस से तेल खरीद पर 25 प्रतिशत का जुर्माना भी शामिल है. नई दिल्ली ने अमेरिकी कार्रवाई को बार-बार 'अनुचित, अन्यायपूर्ण और तर्कहीन' बताया है और साथ ही यह भी कहा है कि उसकी एनर्जी खरीद राष्‍ट्रीय हित के लिए है, ना कि किसी को फंडिंग के लिए.  500 फीसदी टैरिफ प्रस्‍ताव पर क्‍या बोले बेसेंट  रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने रूसी तेल की द्वितीयक खरीद और फिर रिसेल पर 500 प्रतिशत टैरिफ लगाने के लिए एक विधेयक प्रस्तावित किया है. इस बिल पर बोलते हुए बेसेंट ने फॉक्‍स न्‍यूज को बताया कि प्रस्‍ताव सीटने के सामने है और हम देखेंगे कि यह पारित होता है या नहीं. हमारा मानना है कि ट्रंप को उस अधिकार की आवश्‍यकता न हीं है, वह इसे IEEPA के तहत कर सकते हैं, लेकिन सीनेट उन्‍हें वह अधिकार देना चाहती है. बता दें इस साल दिसंबर में, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों द्वारा मॉस्को से कच्चे तेल के आयात में भारी कटौती  के बाद, भारत रूसी ईंधन के खरीदारों में तीसरे स्थान पर आ गया है. 

पुतिन के दिल में जगह बनाने वाली महिला, क्या रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म कर सकती हैं?

मॉस्को  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने रफ-टफ अंदाज के लिए पहचाने जाते हैं. उनसे यूरोप-अमेरिका सब जरा डरकर चलते हैं. हालांकि, वो कई बार पुतिन का सॉफ्ट साइड भी दुनिया को हैरान कर देता है. ऐसी है एक नजारा तब देखने को मिला था जब पुतिन से एक दिन अचानक उनके बचपन की टीचर टकरा गई थीं. पुतिन ने उन्हें देखते ही गले लगा लिया और रूसी राष्ट्रपति के चेहरे पर वो स्माइल देखने को मिली जो बेहद रेयर है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि ये टीचर एकलौती महिला हैं, जो पुतिन को जंग रोकने के लिए राजी कर सकती हैं. कौन है पुतिन की जिंदगी की ये अहम महिला? पुतिन की इन टीचर का नाम वेरा दिमित्रीवना गुरेविच है, जिन्होंने पुतिन को बचपन के बुरे दौर से रूस का राष्ट्रपति बनते हुए देखा है और उन्हें यहां तक पहुंचने में मदद भी की है. अपनी आत्मकथा ‘व्लादिमीर पुतिन: माता-पिता: दोस्त: शिक्षक’ में वेरा ने बताया कि पुतिन स्कूल में कुछ शरारती बच्चों की संगत में आ गए थे, जिनका बुरा प्रभाव पड़ा था. पुतिन बचपन में बेहद फुर्तीले, बेचैन और ऊर्जा से भरे थे. वो एक जगह स्थिर होकर नहीं बैठते थे. पुतिन लगातार अपने क्लासमेट की नोटबुक में इधर-उधर देखते रहते थे और बार-बार उनका पेन-पेंसिल डेस्क के नीचे गिरती रहती थी. वेरा ने बताया बचपन में कैसे थे पुतिन? वेरा बताती हैं कि ‘पुतिन आसानी से झगड़ों में पड़ जाते थे और अपराधी पर झपट पड़ते, अपना पूरा वजन उस पर डालकर उसे पकड़ लेते, जैसे कोई बुलडॉग लड़ता हो’. वेरा सितंबर 1964 में, गुरविच पुतिन के घर गई थीं, जहां उन्होंने देखा कि एक 11 साल का बच्चा चूहों और कीड़े-मकोड़ों से भरे घर में जिंदगी बिता रहा है. पुतिन इस घर में दिन भर अकेले रहते थे और शाम 5 बजे तक उन्हें देखने वाला कोई नहीं होता था. कैसे बदली थी पुतिन की जिंदगी गुरविच ने उस बच्चे से कहा था ‘बस करो, अब और आवारागर्दी मत करो, पढ़ाई में लग जाओ’. ये सुनकर पुतिन ने पुतिन ने जवाब दिया कि ‘अगर वो चाहें तो अपना सारा होमवर्क एक घंटे में कर सकते हैं’. वेरा गुरविच समझ गईं कि इस पुतिन को मोटीवेशन की जरूरत है. उन्होंने पुतिन के गार्जियन की भूमिका निभाई और बदले में, पुतिन ने गुरविच की बेटियों की देखभाल करके अपना आभार व्यक्त किया. पुतिन कई बार अपनी टीचर के घर पर ही रुक जाते थे और खूब पढ़ाई करते थे. यही वजह है कि आगे जाकर उन्होंने कानून की डिग्री लेने का फैसला किया. रोक सकती है रूस-यूक्रेन जंग पुतिन आज भी अपनी इस टीचर को हर रिश्ते से बढ़कर सम्मान और प्यार देते हैं. कहा जाता है कि वो आज भी जिंदगी के हर बड़े फैसले के बारे में अपनी 88 वर्षीय टीचर वेरा से जरूर बात करते हैं. ऐसे में कई लोगों का मानना है कि सिर्फ यही महिला है जो पुतिन को जंग रोकने के लिए मना सकती है.

डोनाल्ड ट्रंप की पत्नी पर बनने वाली फिल्म, रिलीज डेट और कहानी के बारे में जानें

वाशिंगटन अमेरिका की फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप व्हाइट हाउस में एक नई फिल्म की स्क्रीनिंग की मेजबानी करेंगी। फिल्म को 'मेलानिया' नाम दिया गया है। यह उनके जीवन के उन 20 दिनों की डॉक्यूमेंट्री है, जो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के उद्घाटन से ठीक पहले के हैं। उनकी सलाहकार और एजेंट मार्क बेकमैन ने बताया कि यह स्क्रीनिंग राष्ट्रपति, उनके परिवार और करीबी दोस्तों के लिए होगी, जहां वे पहली बार पूरी फिल्म देखेंगे। फिल्म में मेलानिया ट्रंप की निजी जिंदगी, फैशन चॉइस, कूटनीतिक गतिविधियां और सीक्रेट सर्विस की सुरक्षा व्यवस्था जैसी दुर्लभ झलकियां दिखाई गई हैं। ट्रेलर में उद्घाटन दिवस पर मेलानिया की नेवी रंग की चौड़ी टोपी पहनने की तस्वीर और राष्ट्रपति को उनके उद्घाटन भाषण में शांतिदूत वाली सलाह देने का क्षण भी शामिल है। फिल्म का ग्लोबल रिलीज 30 जनवरी को होगा। यह अमेजन की एमजीएम स्टूडियोज के साथ 40 मिलियन डॉलर के सौदे के तहत बनी है। बेकमैन ने कहा कि यह कोई राजनीतिक फिल्म नहीं है, बल्कि मेलानिया ट्रंप ने खुद इसके क्रिएटिव डायरेक्शन का नेतृत्व किया है। फिल्म में राष्ट्रपति ट्रंप के हास्य पलों को भी जगह दी गई है। फॉलो-अप डॉक्यूमेंट्री सीरीज भी आएगी इसके अलावा, अगले साल एक फॉलो-अप डॉक्यूमेंट्री सीरीज रिलीज होगी। इसे मेलानिया ट्रंप की प्राथमिकताओं जैसे फोस्टर केयर में बच्चों पर केंद्रित रखा जाएगा। व्हाइट हाउस स्क्रीनिंग के बाद, राष्ट्रपति और पहली महिला जॉन एफ. केनेडी सेंटर फॉर द परफॉर्मिंग आर्ट्स में प्रीमियर में शामिल होंगे। फिल्म को प्रमोट करने के लिए मेलानिया ट्रंप न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज की ओपनिंग बेल बजाएंगी। यह फिल्म उनके दूसरे कार्यकाल में कम सार्वजनिक उपस्थिति वाली पहली महिला की छवि को नई दिशा देती है। इसमें मेलानिया न केवल फैशन और कूटनीति में सक्रिय दिखती हैं, बल्कि राष्ट्रपति के सलाहकार के रूप में भी काम करती हैं।

बिहार में गुड़ उत्पादन यूनिट लगाने के लिए 1 करोड़ तक सब्सिडी

पटना. सरकार से अनुदान लेकर गुड़ उत्पादन इकाई लगाने के लिए गन्ना उद्योग विभाग में ऑनलाइन आवेदन 25 जनवरी तक जमा कर सकते हैं। रविवार अंतिम दिन है। विदित हो कि राज्य में गन्ना की खेती करने के साथ ही चीनी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार की कई योजनाएं चल रही हैं। जिसमें गन्ना की खेती करने के लिए किसानों को अनुदान दिए जा रहे हैं। इसी प्रकार सरकार ने गुड़ उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बिहार राज्य गुड़ उद्योग प्रोत्साहन कार्यक्रम संचालित है। इसमें गुड़ उत्पादन इकाइयों को स्थापित करने लिए गन्ना किसानों एवं निवेशकों को छह लाख से लेकर एक करोड़ रुपये तक का अनुदान दिया जा रहा है। इसके लिए गन्ना उद्योग विभाग ने सातवें चरण में 25 दिसंबर-2025 तक ही ऑनलाइन आवेदन करने की तिथि निर्धारित किया था। इसके उपरांत तिथि को 25 जनवरी तक बढ़ा दिया गया है। दारोगा के 78 पदों के लिए 27 फरवरी तक आवेदन बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (बीपीएसएससी) मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग में अवर निरीक्षक मद्य निषेध के 78 पदों पर नियुक्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन मंगलवार से स्वीकार करेगा। आवेदन के लिए लिंक 27 फरवरी तक आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध होगा। अभ्यर्थी एक से अधिक आवेदन करते हैं, तो परीक्षा में शामिल होने से वंचित भी हो सकते हैं। एक अगस्त, 2025 तक किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक या समकक्ष परीक्षा में उत्तीर्ण अभ्यर्थी आवेदन कर सकते हैं। उम्र की गणना एक अगस्त, 2025 से की जाएगी। विस्तृत जानकारी आयोग की वेबसाइट https://bpssc.bihar.gov.in/ पर अपलोड है। जेईई-मेन में अब तक 7.70 लाख परीक्षार्थी हुए हैं शामिल नेशनल टेस्टिंग एजेंसी द्वारा आयोजित देश की सबसे बड़ी इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई-मेन के जनवरी सेशन की परीक्षा 21 जनवरी से जारी है। बीई-बीटेक के लिए रोजाना दो पालियों में परीक्षा हो रही है। तीसरे दिन एनटीए की ओर से जारी की गई जानकारी के अनुसार 23 जनवरी फर्स्ट शिफ्ट तक पांच पालियों में आठ लाख एक हजार 326 विद्यार्थियों की परीक्षा शिड्यूल जारी की गई थी। इसमें सात लाख 70 हजार 441 विद्यार्थी शामिल हुए। ऐसे में उपस्थिति 96.15 प्रतिशत रही। बड़ी बात है कि परीक्षा देने वाले विद्यार्थियों में आधार कार्ड वैरिफाइड विद्यार्थियों की संख्या सात लाख 40 हजार 412 थी, जो 96.10 प्रतिशत है। इसके साथ ही पीडब्ल्यूडी 2,563 उम्मीदवारों ने परीक्षा दी। अभी बीई-बीटेक के लिए परीक्षा के पांच और शिफ्ट आयोजित की जानी है और एक शिफ्ट बीआर्क के लिए होनी है।

ICC ने बांग्लादेश को किया बाहर, T20 वर्ल्ड कप में इस टीम ने की जगह बनाई

नई दिल्ली     टी20 वर्ल्ड कप 2026 से बांग्लादेश की आधिकारिक तौर पर विदाई हो गई है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टूर्नामेंट में शामिल करने की पुष्टि कर दी है. आईसीसी ने एक लेटर लिखकर बांग्लादेश को इसके बारे में जानकारी दे दी है.  बांग्लादेश के बाहर होने के बाद स्कॉटलैंड को आईसीसी पुरुष टी20 विश्व कप 2026 में जगह दी गई है. स्कॉटलैंड को ग्रुप C में शामिल किया गया है, जहां उसका सामना इंग्लैंड, वेस्टइंडीज, नेपाल और इटली जैसी टीमों से होगा.   आईसीसी की वोटिंग में बांग्लादेश को मिली थी हार बता दें कि बांग्लादेश और आईसीसी के बीच करीब तीन हफ्ते से खींचतान जारी है. बांग्लादेश इस मांग पर अड़ा था कि वह भारत में वर्ल्ड कप के मैच नहीं खेलेगा और उसके मैच श्रीलंका शिफ्ट किए जाएं. लेकिन आईसीसी ने स्पष्ट किया था कि उसे भारत में ही मैच खेलने होंगे. आखिरकार आईसीसी बोर्ड की वोटिंग में 14-2 के बहुमत से भारत में बांग्लादेश के मैच कराने को मंजूरी दी गई. एक स्वतंत्र सुरक्षा आकलन में खतरे का स्तर 'कम से मध्यम' बताया गया था.  इस पूरे विवाद की शुरुआत आईपीएल नीलामी के बाद हुई. जब कोलकाता नाइट राइडर्स ने अपनी टीम में बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को 9.20 करोड़ की मोटी रकम में शामिल किया. लेकिन भारत में इसका विरोध हुआ. क्योंकि बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की खबरें आ रही थीं. इसके बाद बीसीसीआई ने रहमान को आईपीएल से रिलीज कर दिया. बोर्ड के सभी सदस्यों को भेजे गए पत्र में गुप्ता ने कथित तौर पर कहा है कि बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) आईसीसी बोर्ड के फैसले का पालन नहीं कर रहा है और इस महत्वपूर्ण आयोजन के लिए बांग्लादेश की जगह किसी अन्य देश, इस मामले में स्कॉटलैंड, को आमंत्रित करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है. स्वाभाविक रूप से, इस पत्र की एक प्रति आईसीसी बोर्ड के सदस्य बीसीबी अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम को भी भेजी गई है. स्कॉटलैंड को आईसीसी विश्व कप में उनके पिछले प्रदर्शनों और मौजूदा रैंकिंग (जो कि 14वीं है) के आधार पर जगह मिली है. 2024 में हुए पिछले विश्व कप में, वे ग्रुप बी में तीसरे स्थान पर रहे थे, इंग्लैंड के बराबर अंक थे, लेकिन नेट रन रेट (NRR) के कारण क्वालीफाई नहीं कर पाए थे. 2022 में, उन्होंने ग्रुप स्टेज में वेस्ट इंडीज को हराया था, लेकिन तीसरे स्थान पर रहे और सुपर 12 के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाए.  2021 में, उन्होंने ग्रुप स्टेज में बांग्लादेश को हराया था, संयोग से उसी टीम को जिसकी जगह वे अब ले रहे हैं, और अपने ग्रुप में शीर्ष स्थान हासिल किया था. हालांकि, वे सुपर 12 राउंड में एक भी मैच नहीं जीत पाए. स्कॉटलैंड ने टी20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश को रिप्लेस किया इस बदलाव के बाद स्कॉटलैंड को प्रतियोगिता के प्रारंभिक चरण में ग्रुप सी में रखा जाएगा और वे कोलकाता में वेस्ट इंडीज (7 फरवरी), इटली (9 फरवरी) और इंग्लैंड (14 फरवरी) के खिलाफ खेलेंगे, जिसके बाद वे पश्चिम की ओर मुंबई में नेपाल से भिड़ने के लिए जाएंगे. बीसीसीआई के इस फैसले से बांग्लादेश बोर्ड भड़क गया और उसने वर्ल्ड कप के बहिष्कार की बात कही. बीसीबी ने आईसीसी को एक लेटर लिखा और कहा की वह भारत में अपने मैच नहीं खेलेगा. उसने अपने मैच श्रीलंका या पाकिस्तान में शिफ्ट कराने की मांग रखी. बांग्लादेश ने तर्क दिया की भारत में उसके खिलाड़ियों की सुरक्षा में खतरा हो सकता है. लेकिन आईसीसी ने अपनी सुरक्षा रिपोर्ट में किसी संभावित खतरे से इनकार किया. आखिरकार आईसीसी ने साफ कर दिया की बांग्लादेश को भारत में मैच खेलने ही होंगे. अगर ऐसा नहीं हुआ तो उसे हटा दिया जाएगा. जब बांग्लादेश अपनी जिद से नहीं हटा तो आईसीसी ने वोटिंग कराई और उसमें भी बांग्लादेश को हार मिली. और अब बांग्लादेश को स्कॉटलैंड से रिप्लेस कर दिया गया है.