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अलख पांडेय, डॉ. हरिओम पंवार, सुश्री रश्मि आर्य और डॉ. सुधांशु सिंह को भी मिलेगा यूपी गौरव सम्मान-2026

यूपी दिवस-2026 पर प्रदेश की 5 विभूतियों को मिलेगा गौरव सम्मान, अंतरिक्षयात्री शुभांशु शुक्ला होंगे सम्मानित अलख पांडेय, डॉ. हरिओम पंवार, सुश्री रश्मि आर्य और डॉ. सुधांशु सिंह को भी मिलेगा यूपी गौरव सम्मान-2026 शिक्षा, साहित्य, कृषि, महिला सशक्तिकरण व अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में यूपी का नाम रोशन करने वाली 5 विभूतियों को मिलेगा गौरव सम्मान लखनऊ  उत्तर प्रदेश दिवस-2026 के मुख्य समारोह का आयोजन इस वर्ष राजधानी लखनऊ के नवनिर्मित राष्ट्र प्रेरणा स्थल पर किया जा रहा है। तीन दिवसीय इस भव्य समारोह का उद्घाटन शनिवार को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह करेंगे। इस अवसर पर प्रदेश सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करने वाली पांच विशिष्ट विभूतियों को ‘उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान 2025-26’ से सम्मानित किया जाएगा। इस वर्ष जिन विभूतियों को गौरव सम्मान प्रदान किया जाएगा, उनमें अंतरिक्ष विज्ञान, शिक्षा, साहित्य, महिला सशक्तिकरण और कृषि जैसे विविध क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्व शामिल हैं। अंतरिक्ष विज्ञान में ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए शुभांशु शुक्ला सम्मानित गौरव सम्मान 2025-26 से सम्मानित होने वाली विभूतियों में राजधानी लखनऊ निवासी अंतरिक्षयात्री एवं भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर शुभांशु शुक्ला शामिल हैं। शुभांशु शुक्ला ने 26 जून 2025 को नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के ड्रैगन अंतरिक्ष यान द्वारा प्रक्षेपण के बाद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) पर पहुंचकर इतिहास रचा। वे आईएसएस पर कदम रखने वाले पहले भारतीय अंतरिक्षयात्री बने। हालांकि, अंतरिक्ष में जाने वाले भारतीयों में वे राकेश शर्मा के बाद दूसरे भारतीय हैं। उनकी यह उपलब्धि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के साथ-साथ उत्तर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाली है। शिक्षा में क्रांति लाने वाले अलख पांडेय को गौरव सम्मान शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाले प्रयागराज निवासी अलख पांडेय को यूपी गौरव सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। अलख पांडेय ने वर्ष 2016 में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए ‘फिजिक्स वाला’ यूट्यूब चैनल की शुरुआत की। वर्ष 2020 में लॉन्च किए गए इसी नाम के ऐप ने किफायती और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराकर करोड़ों छात्रों को लाभान्वित किया। वर्ष 2022 में उनकी कंपनी भारत की छठी एडटेक यूनिकॉर्न बनी। 10 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर वाले इस प्लेटफॉर्म ने शिक्षा को अधिक समावेशी और लोकतांत्रिक बनाया है। उन्हें शिक्षा उत्कृष्टता पुरस्कार, टाइम्स 40 अंडर 40 और एडटेक सीईओ ऑफ द ईयर जैसे कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। साहित्य और शिक्षा में योगदान के लिए डॉ. हरिओम पंवार होंगे सम्मानित साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले बुलंदशहर के बुटना गांव में जन्मे डॉ. हरिओम पंवार इस वर्ष यूपी गौरव सम्मान प्राप्त करने वाली तीसरी विभूति हैं। मेरठ महाविद्यालय में विधि के प्रोफेसर रहे डॉ. पंवार की कविताएं ‘काला धन’, ‘घाटी के दिल की धड़कन’, ‘मैं मरते लोकतंत्र का बयान हूं’ और ‘बागी हैं हम, इंकलाब के गीत सुनाते जाएंगे’ समाज को जाग्रत करने वाली रचनाएं हैं। उन्हें निराला पुरस्कार, भारतीय साहित्य संगम पुरस्कार, रश्मि पुरस्कार सहित अनेक सम्मानों से नवाजा जा चुका है। उनकी साहित्यिक कृतियों से होने वाली आय का उपयोग गरीब बच्चों की शिक्षा और वंचित वर्ग के कल्याण में किया जाता है। महिला सशक्तिकरण के लिए रश्मि आर्य को सम्मान महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मेरठ के नारंगपुर में 22 अक्टूबर 2007 को श्रीमद् दयानंद आर्य कन्या गुरुकुल की स्थापना करने वाली रश्मि आर्य को गौरव सम्मान प्रदान किया जाएगा। उनका गुरुकुल वैदिक संस्कृति और आधुनिक शिक्षा का सुंदर समन्वय है। यहां संस्कृत, वैदिक शिक्षा, हवन, संगीत के साथ-साथ इंग्लिश स्पीकिंग और कंप्यूटर शिक्षा भी दी जाती है। गुरुकुल की छात्राओं ने बोर्ड परीक्षाओं, गीता-अष्टाध्यायी प्रतियोगिताओं, योग, धनुर्विद्या और जंप रोप में राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल की हैं। वर्तमान में यहां 600 से अधिक जरूरतमंद बच्चियों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है। कृषि विज्ञान में वैश्विक पहचान के लिए डॉ. सुधांशु सिंह होंगे सम्मानित कृषि क्षेत्र में विशिष्ट उपलब्धियों के लिए वाराणसी निवासी डॉ. सुधांशु सिंह को यूपी गौरव सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या से स्वर्ण पदक के साथ कृषि में स्नातक किया तथा फिलीपींस के आईआरआरआई से पीएचडी की डिग्री प्राप्त की। फ्लड-टॉलरेंट सब-1 चावल पर उनके शोध ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। वर्तमान में वे आईएसएआरसी, वाराणसी के निदेशक हैं और बीएमजीएफ, वर्ल्ड बैंक तथा यूएसएआईडी जैसे अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व कर चुके हैं। 29 वर्षों के अनुभव में उन्होंने सस्टेनेबल एग्रीकल्चर को नई दिशा दी है। प्रदेश की प्रतिभा और प्रेरणा का प्रतीक है यूपी गौरव सम्मान उत्तर प्रदेश गौरव सम्मान संस्कृति विभाग द्वारा उन विभूतियों को प्रदान किया जाता है, जिन्होंने कला, कृषि, विज्ञान, साहित्य, शिक्षा, उद्यमिता, खेल और समाज सेवा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देकर प्रदेश का मान बढ़ाया है। ये पांचों सम्मानित व्यक्तित्व उत्तर प्रदेश की बहुआयामी प्रतिभा के प्रतीक हैं और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। यूपी दिवस-2026 के अवसर पर इनकी उपलब्धियां पूरे प्रदेश में गर्व, प्रेरणा और उत्साह का संचार करेंगी।

जबलपुर को मिलेगा मेट्रोपॉलिटन दर्जा, CM मोहन यादव ने दी सौगात

जबलपुर  स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से लौटे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर को इसी वर्ष मेट्रोपॉलिटन सिटी (Jabalpur Metropolitan City) बनाने का बड़ा ऐलान किया। होटल कल्चुरी में उद्योगपतियों और व्यापारियों से संवाद कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि इंदौर और भोपाल में मेट्रोपॉलिटन सिटी की शुरुआत हो चुकी है और प्रदेश के चार बड़े महानगरों में शामिल जबलपुर को इससे अलग नहीं रखा जा सकता। जबलपुर के विकास का मास्टर प्लान तैयार- सीएम मुख्यमंत्री ने बताया कि जबलपुर के समग्र विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा, जिसमें शहर से 50 किलोमीटर के दायरे में आने वाले सभी नगरों को शामिल किया जाएगा। इससे औद्योगिक, व्यावसायिक और आधारभूत ढांचे का समन्वित विकास संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि जबलपुर तेजी से विकसित हो रहा शहर है और यहां फूड सेक्टर व गारमेंट उद्योग को जल्द बड़ी सौगात नदी दी जाएगी। पर्यटन, स्वास्थ्य और कृषि क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं है, जिन पर योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने जबलपुर के विकास को लेकर अपने विचार रखे। इससे पहले महाकौशल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष रवि गुप्ता सहित व्यापारिक संगठनों ने मुख्यमंत्री का सम्मान किया। इस अवसर पर महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, सांसद आशीष दुबे, विधायक अशोक रोहाणी, डॉ. अभिलाष पांडे सहित बड़ी संख्या में व्यापारी व उद्योगपति मौजूद रहे। मध्यप्रदेश में सबसे सस्ती बिजली मुख्यमंत्री ने बताया कि दावोस में 200 से अधिक देशों ने भाग लिया, जिसमें फोकस भारतीय प्रतिनिधिमंडल पर रहा। भारत सरकार के साथ 10 राज्यों ने सहभागिता की, जिसमें मध्यप्रदेश विशेष रूप से उभरकर सामने आया। नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश ने वैश्विक निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया है। पवन और सोलर ऊर्जा के माध्यम से प्रदेश में 2.10 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। यह सबसे सस्ती है। 118 हिन्दू व 3 मुस्लिम जोड़ों का विवाह-निकाह सदर गैरीसन ग्राउंड में आयोजित मुख्यमंत्री कन्या विवाह और निकाह योजना के अंतर्गत 121 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न हुआ। इनमें 118 हिन्दू और 3 मुस्लिम जोड़े शामिल रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवदंपतियों और उनके परिजन पर फूल बरसाकर आशीर्वाद दिया तथा एक जोड़े को 51 हजार रुपए का सांकेतिक चेक प्रदान किया। इस मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी नवविवाहित जोड़ों को शुभकामनाएं दीं। मंत्री राकेश सिंह ने सभी जोड़ों को एक-एक फ्रिज भेंट किया। आयोजन में नगर निगम का भी सहयोग रहा। कार्यक्रम में सांसद आशीष दुबे, राज्यसभा सांसद सुमित्रा बाल्मीकि, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, विधायक अभिलाष पांडे, अशोक रोहाणी, नीरज सिंह, संतोष बरकड़े, अश्विनी परांजपे, स्वामी राघवदेवाचार्य, साध्वी ज्ञानेश्वरी दीदी सहित अनेक जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। गौरीघाट तक किया रोड-शो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (CM Mohan Yadav) और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा (Union Minister JP Nadda) ने झंडा चौक से गौरीघाट तक रोड-शो किया। इस दौरन लोगों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। रोड-शो में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह, महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू, सांसद आशीष दुबे और विधायक और भाजपा पदाधिकारी शामिल हुए। शहर प्रवास के दौरान नड्डा एवं मुख्यमंत्री उजारपुरवा स्थित जल मंदिर (बावड़ी) देखने गए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव  सरस्वती घाट पर आयोजित दादा गुरु के प्रकटोत्सव पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने सनातन संस्कृति, मां नर्मदा की महिमा और विज्ञान व अध्यात्म पर विचार रखे। इस मौके पर प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, विधायक अशोक रोहाणी मौजूद थे।

रतलाम मौसम अपडेट: दिन का तापमान गिरी, रात बढ़ी, बारिश से फिर लौटेगी सर्दी

भोपाल  भोपाल में वसंत ऋतु ने अपने रंग दिखाने शुरू कर दिए है। ठंड के तेवर अब नरम पड़ते नजर आ रहे है और रातें कुछ गर्म होने लगी है। शुक्रवार को राजधानी का न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो गुरुवार की तुलना में 6.2 डिग्री अधिक है। इससे पहले गुरुवार को न्यूनतम तापमान 11.2 डिग्री था। वहीं दिन का अधिकतम तापमान 27.4 डिग्री तक पहुंच गया, जिससे दिन में हल्की गर्माहट महसूस की गई। शुक्रवार सुबह से ही राजधानी में पतझड़ी मौसम का एहसास हुआ। आसमान साफ रहा और दिनभर हवाएं चलती रहीं, लेकिन इनमें पहले जैसी ठंडक नहीं थी। प्रदेश में हवाओं की रफ्तार करीब 14 किलोमीटर प्रति घंटे दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिक वहीद खान के अनुसार हवा की दिशा उत्तर से बदलकर दक्षिण-पश्चिम हो गई है। इसी बदलाव के कारण रात के तापमान में अचानक उछाल देखने को मिला है।  इसलिए बदला मौसम मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर पाकिस्तान के ऊपर सक्रिय निम्न दाब क्षेत्र और उससे जुड़ी ट्रफ के चलते प्रदेश के मौसम में यह उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इसी सिस्टम का असर शुक्रवार को ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना और सतना में बादलों के रूप में दिखा। कुछ इलाकों में हल्की बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। राजधानी भोपाल में दोपहर बाद बादल छाने से दिन के तापमान में 2 से 3 डिग्री तक गिरावट आ गई। शनिवार को बारिश का कोई अलर्ट नहीं है, लेकिन सुबह के वक्त ग्वालियर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में हल्का से मध्यम कोहरा छाया रहा। भोपाल, इंदौर और उज्जैन में भी हल्के कोहरे ने सुबह की रफ्तार धीमी कर दी। 26 जनवरी के बाद फिर बदलेगा मौसम, बारिश के आसार सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन के मुताबिक 26 जनवरी से उत्तर-पश्चिम भारत पर एक और स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टरबेंस असर डाल सकता है। इसके प्रभाव से मध्यप्रदेश के कई जिलों में हल्की बारिश की संभावना है। ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, अशोकनगर, गुना, राजगढ़, आगर-मालवा, नीमच और मंदसौर में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। दो दिन नहीं पड़ेगी तेज ठंड, कोहरा रहेगा मेहमान मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिन तक प्रदेश में तेज ठंड के हालात नहीं बनेंगे, हालांकि सुबह के समय हल्का से मध्यम कोहरा बना रह सकता है। शुक्रवार को भी सतना, नौगांव, दतिया, गुना, ग्वालियर, नर्मदापुरम, इंदौर, राजगढ़, रतलाम, उज्जैन, श्योपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, खजुराहो और मलाजखंड समेत कई शहरों में कोहरा दर्ज किया गया। भोपाल-इंदौर में पारा 17 पार, कल्याणपुर में कंपकंपी गुरुवार-शुक्रवार की रात न्यूनतम तापमान में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। भोपाल और इंदौर में इस सीजन जनवरी में पहली बार न्यूनतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंचा। भोपाइसल में 17.4, इंदौर में 17.3, ग्वालियर में 13.5, उज्जैन में 15 और जबलपुर में 14.8 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। वहीं, शहडोल का कल्याणपुर प्रदेश में सबसे ठंडा रहा, जहां न्यूनतम तापमान 5.3 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। शिवपुरी में 8, चित्रकूट में 8.4, कटनी के करौंदी में 8.6, रीवा में 8.4, खजुराहो में 9.4 और मंडला में 9.7 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ। क्या होता है वेस्टर्न डिस्टरबेंस मौसम विभाग के अनुसार, वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिम से आने वाली हवा और बादलों का एक सिस्टम होता है। इसके एक्टिव होने से पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी, मैदानी क्षेत्रों में बारिश होगी। सिस्टम आगे गुजर जाने के बाद उत्तर से आने वाली हवा ठंडी रहती है। जिससे दिन-रात ठंड का असर रहता है। हल्की बारिश के आसार मौसम का यह मिजाज स्थायी नहीं रहेगा। मौसम विभाग के मुताबिक 26 जनवरी से एक और वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हो रहा है। इसके प्रभाव से 27 और 28 जनवरी को राजधानी सहित प्रदेश के अधिकांश जिलों में हल्की बारिश होने की संभावना है।

ट्रंप बदल सकते हैं फैसला! भारत से 25% टैरिफ हटाने के मिल रहे संकेत

 नई दिल्ली अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने भारत पर लगाए गए 25% टैरिफ को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत पर लगाया गया यह टैरिफ अमेरिका के लिए "काफी सफल" रहा है. बेसेंट के मुताबिक, इस टैरिफ के बाद भारत द्वारा रूस से तेल की खरीद में भारी गिरावट आई है. फिलहाल यह टैरिफ लागू है, लेकिन अमेरिका इसे स्थायी नहीं मानता. स्कॉट बेसेंट ने संकेत दिया कि आने वाले समय में भारत पर लगाया गया 25% टैरिफ हटाया भी जा सकता है. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि अब इसे हटाने का एक रास्ता बन सकता है." यानी अगर हालात अनुकूल रहे और बातचीत आगे बढ़ी, तो अमेरिका भारत को टैरिफ में राहत दे सकता है. यह बयान ऐसे समय आया है, जब वैश्विक स्तर पर तेल व्यापार और रूस से जुड़े प्रतिबंधों को लेकर लगातार चर्चा चल रही है. भारत पर अमेरिका ने कितना टैरिफ लगाया है? अमेरिका ने भारत से आने वाले कई सामानों पर फिलहाल कुल मिलाकर 50% तक का टैरिफ लगा रखा है. इसमें से करीब 25% सामान्य टैरिफ है, जो भारत के लगभग 55% निर्यात पर लागू होता है. इसके अलावा अगस्त 2025 से एक अतिरिक्त 25% "ऑयल से जुड़ा पेनल्टी टैरिफ" लगाया गया, जो रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर दबाव बनाने के लिए है. अमेरिका, G7 और यूरोपीय देशों का रूसी तेल पर प्राइस कैप रूस के तेल को लेकर अमेरिका, G7 और यूरोपीय देशों ने एक प्राइस कैप सिस्टम भी लागू किया है. जनवरी 2026 तक यह कैप लगभग 47.60 डॉलर प्रति बैरल है, जिसे 1 फरवरी 2026 से घटाकर 44.10 डॉलर किया जाएगा. नियम यह है कि अगर रूसी तेल तय कीमत से ऊपर बेचा गया, तो उस पर बीमा, शिपिंग और फाइनेंस जैसी सेवाएं नहीं दी जाएंगी. अमेरिका का 500% टैरिफ का बिल अमेरिका का दावा है कि इस दबाव के बाद भारत ने रूसी तेल की खरीद कम कर दी है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिलायंस जैसी बड़ी भारतीय रिफाइनरियों ने जनवरी 2026 में रूसी तेल लेना रोक दिया. वहीं भारत का कहना है कि वह अपनी ऊर्जा जरूरतें राष्ट्रीय हित और किफायती दामों के आधार पर तय करता है, लेकिन 500% टैरिफ वाले नए अमेरिकी बिल पर वह नजर बनाए हुए है.

डंके की चोट पर भारत ने दिया ईरान का साथ, UN में पलट गया पूरा समीकरण

नई दिल्ली ईरान और भारत की दोस्ती से दुनिया वाकिफ है. मुश्किल घड़ी में अक्सर भारत अपने दोस्तों का साथ देता है. इस बार भी कुछ ऐसा ही हुआ है. पश्चिम देशों ने शुक्रवार को ईरान को यूएन में फंसााया. ऐसे में भारत से देखा नहीं गया. भारत ने डंके की चोट पर ईरान का साथ दिया. दरअसल, हुआ कुछ यूं कि यूएनएचआरसी यानी संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) में ईरान की मानवाधिकार उल्लंघनों पर एक बड़ा विवाद हुआ. शुक्रवार को यूएनएचआरसी ने ईरान की निंदा की और हाल के विरोध प्रदर्शनों पर क्रूर कार्रवाई की जांच का आदेश दिया. यह जांच हजारों लोगों की मौतों से जुड़ी है. ईरान इस मुद्दे पर बुरी तरह फंस गया था. पश्चिमी देश और नाटो सदस्य जैसे अमेरिका, फ्रांस और दक्षिण कोरिया ईरान के खिलाफ थे. वे सख्त कार्रवाई चाहते थे. लेकिन भारत ने डंके की चोट पर ईरान का साथ दिया. जी हां, भारत ने प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया. इससे पश्चिमी देश भौंचक्के रह गए. वे सोच भी नहीं पाए कि भारत जैसे बड़ा लोकतांत्रिक देश ईरान के पक्ष में खड़ा होगा. भारत का यह कदम ईरान के लिए मजबूत समर्थन था. भारत ने साफ कर दिया कि वह ईरान के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ है. इससे भारत की विदेश नीति की ताकत दिखी, जो संतुलित और स्वतंत्र है. पश्चिमी देशों को लगा कि वे आसानी से ईरान को अलग-थलग कर लेंगे, लेकिन भारत के वोट ने उनके प्लान पर पानी फेर दिया. भारत की तरह ही चीन ने भी ईरान का साथ दिया है. आखिर हुआ क्या? दरअसल, यह पूरी घटना जेनेवा में UNHRC की इमरजेंसी मीटिंग में हुई. यूएन की इस बॉडी ने ईरान के खिलाफ एक प्रस्ताव पास किया. यह 2022 में शुरू हुई जांच को बढ़ाने का था. अब UN जांचकर्ता हाल के दंगों की भी जांच करेंगे. यह जांच भविष्य में कानूनी कार्रवाई के लिए दस्तावेज तैयार करेगी. अधिकार समूहों का कहना है कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद यह सबसे बड़ा क्रैकडाउन था. इसमें आम नागरिक भी मारे गए. हालांकि, तेहरान सरकार ने इसे आतंकवादियों और दंगाइयों का काम बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल जैसे विदेशी दुश्मन इसके पीछे हैं. ईरान के यूएन मिशन ने इस प्रस्ताव की निंदा की. ईरान ने कहा कि वह बाहरी हस्तक्षेप नहीं सहन करेगा. बैठक में क्या हुआ? चीन, पाकिस्तान, क्यूबा और इथियोपिया जैसे देशों ने बैठक की उपयोगिता पर सवाल उठाया. चीन के राजदूत जिया गाइड ने कहा कि ईरान का दंगा आंतरिक मामला है. जांच के खर्च पर भी सवाल है. यूए में फंडिंग संकट है, जिससे अन्य जांचें रुकी हैं. यह स्पष्ट नहीं कि इस जांच का पैसा कौन देगा. इसके बाद बात अब वोटिंग की थी. इसमें कुल 46 देशों ने वोट किया. प्रस्ताव ईरान के खिलाफ था, यानी जांच बढ़ाने के पक्ष में. ईरान के खिलाफ प्रस्ताव के पक्ष में 25 वोट पड़े और विपक्ष में 7. 14 देशों ने वोटिंग से दूर रहने का फैसला किया.     ईरान के खिलाफ प्रस्ताव के पक्ष में कौन-कौन देश: फ्रांस, मैक्सिको, दक्षिण कोरिया, अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन, जापान, नीदरलैंड्स, स्पेन, इटली, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, स्वीडन, नॉर्वे, डेनमार्क, फिनलैंड, आयरलैंड, बेल्जियम, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया, पोलैंड, चेक गणराज्य, लिथुआनिया, लातविया, एस्टोनिया. ये सभी पश्चिमी और नाटो देश हैं.     प्रस्ताव के खिलाफ में कौन-कौन: भारत, चीन, पाकिस्तान, क्यूबा, इथियोपिया, वेनेजुएला, बोलीविया. ये देश ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के खिलाफ हैं.     वोटिंग से दूर कौन-कौन रहे: ब्राजील, अर्जेंटीना, इंडोनेशिया, मलेशिया, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, तुर्की, मिस्र, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, बांग्लादेश, थाईलैंड, फिलीपींस. ये देश तटस्थ रहे, न पक्ष में न विरोध में. भारत का साथ क्यों अहम? ईरान पर यह वोटिंग दिखाती है कि दुनिया कितनी बंटी हुई है. पश्चिमी देश ईरान पर दबाव बनाना चाहते हैं. लेकिन भारत और चीन जैसे बड़े देशों ने ईरान का साथ दिया. भारत का वोट अहम था क्योंकि भारत ईरान से तेल आयात करता है और दोनों के बीच पुराने संबंध हैं. इससे भारत की नीति साफ हुई कि वह मानवाधिकार के नाम पर राजनीति नहीं होने देगा. ईरान में विरोध प्रदर्शन महिला अधिकारों से शुरू हुए थे. एक महिला महसा अमीनी की पुलिस हिरासत में मौत से भड़के. अब यह पूरे देश में फैल गया. हजारों गिरफ्तार हुए. महिलाएं हिजाब उतारकर विरोध कर रही हैं. सरकार ने इंटरनेट बंद किया और बल प्रयोग किया. अधिकार समूहों का कहना है कि मौतों की संख्या और बढ़ सकती है. बहरहाल, UN की जांच से सच्चाई सामने आएगी, लेकिन ईरान इसे मानने से इनकार कर रहा है.

पंजाब के लोगों को मुख्यमंत्री सेहत योजना से मिलेगा 10 लाख तक का मुफ्त इलाज

चंडीगढ़. मुख्यमंत्री सेहत योजना के पंजीकरण का काम शुरू हो गया है। राज्य में तीन करोड़ लोगों को इसका लाभ मिलेगा। इसमें पंजीकरण करवाने के लिए परिवार के कम से कम दो सदस्यों एक साथ जाना पड़ेगा। बाद में बाकी सदस्य अपना नाम जुड़वा सकते हैं। पंजीकरण से पहले अप्वाइंटमेंट पर्ची का होना अनिवार्य है। इसके लिए यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी के साथ अनुबंध किया गया है। इस महत्वाकांक्षी योजना को लेकर लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। तो आइए जानें इन सवालों का जवाब… सेहत योजना के तहत कौन-कौन कवर होगा? पंजाब का कोई भी निवासी और उसके परिवार के सदस्य इस योजना के पात्र होंगे। योजना में पंजीकरण के लिए आधार कार्ड और निवास प्रमाण के रूप में वोटर आइडी कार्ड होना चाहिए। 18 वर्ष से कम आयु के लाभार्थियों के लिए स्वयं का आधार कार्ड तथा माता-पिता में से किसी एक का वोटर आइडी कार्ड या अभिभावक का वोटर आइडी कार्ड पर्याप्त होगा। केंद्र और राज्य प्रायोजित आयुष्मान भारत योजना के तहत पंजीकृत लाभार्थियों को इस योजना में अतिरिक्त पांच लाख का टॉप अप मिलेगा। इस योजना के तहत पंजीकरण कैसे करें? सरकार ने लाभार्थियों के पंजीकरण के लिए यूथ क्लब और आम पार्टी के यूथ विंग को कमान सौंपी है। वार्ड और गांव स्तर पर यूथ लोगों के घर-घर जाकर अप्वाइंटमेंट की पर्चियां बांटेंगे। इसके बाद लाभार्थी कामन सर्विस सेंटर पर जाकर अपना पंजीकरण करवा सकता है। पंजीकरण के लिए कामन सर्विस सेंटर पर परिवार के कम से कम दो सदस्य जरूर पहुंचे। शेष बचे सदस्यों का नाम बाद में भी दर्ज हो सकता है। इसके बाद लाभार्थियों को कार्ड जारी किए जाएंगे। लगभग 16.60 लाख परिवार, जिनका फंड केंद्र से आता है और जो आयुष्मान भारत योजना के तहत पंजीकृत हैं, उन्हें राष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसी के दिशा निर्देश के अनुसार कार्ड जारी किए जाएंगे। योजना के तहत परिवार की परिभाषा क्या है? परिवार में मुखिया पति/पत्नी, या तलाकशुदा व्यक्ति और उनके नाबालिग बच्चे तथा विधवा बहू और उसके नाबालिग बच्चे शामिल होंगे। पंजीकृत परिवार के आकार की कोई सीमा नहीं होगी। सभी इसके पात्र होंगे। इसके लिए परिवार के मुखिया को पंजीकरण के समय घोषणा पत्र देना होगा। कोई भी व्यक्ति एक से अधिक परिवारों में पंजीकृत नहीं हो सकता। सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारी कवर होंगे? पंजाब सरकार के सभी विभागों, संगठनों, सोसायटियों, निगमों और ट्रस्टों में आउटसोर्सिंग, ठेका कर्मचारी सभी योजाना के पात्र होंगे। इसके अलावा पंजाब सरकार के पेशनभोगी और नियमित कर्मचारी भी योजना के अंतर्गत आएंगे। हईएसआइसी, सीजीएचएस या अन्य केंद्रीय, राज्य सरकारी बीमा के तहत कदर लाभार्थी किसी एक योजना का ही लाभ ले सकेंगे। पांच लाख रुपये वाली पिछली योजना से यह कैसे अलग है? स्वास्थ्य मंत्री डॉ. बलबीर सिंह के अनुसार यह योजना आयुष्मान भारत योजना के लिए हेल्थ बेनिफिट पैकेज (एचबीपी 2.2) को अपनाती है। पिछली योजना में 1,669 बीमारियों का इलाज फ्री था। वहीं मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना में 2,300 से अधिक उपचार पैकेज शामिल हैं। इनमें ऑर्थोपेडिक्स, जनरल मेडिसिन, कार्डियोलाजी, न्यूरोलाजी, नेफ्रोलाजी, न्यूरोलाजी और आन्कोलाजी जैसी चिकित्सा विशेषज्ञताओं के अंतर्गत सेकेंडरी और टर्शियरी स्तर की सेवाएं शामिल हैं। हृदय शल्य चिकित्सा, कैंसर उपचार, किडनी डायलिसिस एवं ट्रांसप्लांट, मस्तिष्क और रीढ़ की सर्जरी, घुटना एवं कूल्हा प्रत्यारोपण, मोतियाबिंद सर्जरी, प्रसूति एवं नवजात देखभाल, दुर्घटना एवं आपातकालीन सेवाएं, आइसीयू देखभाल तथा अस्पताल में भर्ती से पहले और बाद की सेवाएं शामिल हैं। लाभार्थी 824 से अधिक इम्पैनल्ड अस्पतालों में इसका लाभ उठा सकेंगे। इनमें 212 सार्वजनिक अस्पताल, पीजीआइ चंडीगढ़ सहित भारत सरकार के आठ अस्पताल और 600 से अधिक निजी अस्पताल शामिल हैं। आवश्यकता पड़ने पर राज्य से बाहर इलाज की सुविधा भी उपलब्ध होगी। योजना के वितीय निहितार्थ क्या हैं? यह योजना हाइब्रिड मॉडल में लागू की गई है, जिसमें चयनित बीमा कंपनी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस सरकारी और निजी दोनों अस्पतालों में एक लाख रुपये तक के दावों का निपटारा करेगी। एक लाख से अधिक के दावों में बीमा कंपनी दावों के प्रमाणीकरण और प्रोसेसिंग की जिम्मेदारी निभाएगी, जबकि एक लाख से अधिक की देनदारी राज्य स्वास्थ्य एजेंसी वहन करेगी।

अंतरिक्ष में भारत की बड़ी छलांग! ISRO ने किया ड्रीम प्रोजेक्ट का आगाज़

बेंगलुरु  भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए अपने स्‍वदेशी स्थायी स्पेस स्टेशन के निर्माण की दिशा में काम शुरू कर दिया है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो-ISRO) ने भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station – BAS) की आधारशिला रखने की प्रक्रिया तेज कर दी है. योजना के अनुसार, इसका पहला मॉड्यूल वर्ष 2028 तक अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, जबकि 2035 तक इसे पूरी तरह से वर्किंग स्‍पेस स्‍टेशन के रूप में विकसित किया जाएगा. इसरो के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) ने हाल ही में भारतीय कंपनियों से ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EoI) जारी कर BAS-01 नामक पहले मॉड्यूल के निर्माण में भागीदारी के लिए आमंत्रित किया है. यह पहली बार है जब भारत ने अपने स्थायी मानवयुक्त अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण की दिशा में औपचारिक और ठोस कदम उठाया है. यह स्टेशन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की तर्ज पर विकसित किया जाएगा, लेकिन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक और संसाधनों के बल पर. ISRO के अधिकारियों के अनुसार, भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के बाद अगला कदम है. गगनयान के जरिए भारत अपने अंतरिक्ष यात्रियों को पृथ्वी की कक्षा तक भेजने की तैयारी कर रहा है, जबकि BAS के माध्यम से लक्ष्य अंतरिक्ष में लंबे समय तक इंसानी उपस्थिति स्थापित करना है. सरल शब्दों में कहें तो भारत अब केवल अंतरिक्ष में जाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वहां रहकर वैज्ञानिक शोध और तकनीकी प्रयोग भी करेगा. क्‍या है BAS-01 मॉड्यूल? BAS-01 मॉड्यूल का स्‍ट्रक्‍चर अल्‍ट्रा मॉडर्न होगा. प्रत्येक मॉड्यूल का व्यास लगभग 3.8 मीटर और ऊंचाई करीब 8 मीटर होगी. इन्हें हाई-पावर्ड एल्यूमिनियम एलॉय (AA-2219) से तैयार किया जाएगा, जो ह्यूमन मिशनों के लिए मान्यता प्राप्त सामग्री है. ISRO ने स्पष्ट किया है कि इन मॉड्यूल्स को वही सुरक्षा और गुणवत्ता मानक पूरे करने होंगे, जो गगनयान मिशन के लिए अनिवार्य हैं, क्योंकि भविष्य में अंतरिक्ष यात्री इन्हीं मॉड्यूल्स के भीतर रहकर काम करेंगे. क्‍या है ISRO की योजना? ISRO ने दो पूर्ण सेट मॉड्यूल धरती पर तैयार करने की योजना बनाई है, ताकि परीक्षण और गुणवत्ता मूल्यांकन के बाद सर्वश्रेष्ठ हार्डवेयर को अंतरिक्ष में भेजा जा सके. यह कार्य सामान्य निर्माण प्रक्रिया से कहीं अधिक जटिल है. कंपनियों को विशेष वेल्डिंग तकनीकों का विकास करना होगा और हाई स्‍टैंडर्ड का पालन करना होगा. आधे मिलीमीटर की भी त्रुटि स्वीकार्य नहीं होगी. इसके अलावा प्रेशर टेस्ट, लीक टेस्ट और नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्टिंग जैसी कठोर प्रक्रियाओं से गुजरना अनिवार्य होगा. पूरी तरह से स्‍वदेशी इस परियोजना की एक खास बात यह है कि यह पूरी तरह भारतीय प्रयास होगा. सरकार की ओर से उत्पादन सुविधाएं स्थापित करने के लिए कोई वित्तीय सहायता नहीं दी जाएगी और न ही किसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया को आउटसोर्स करने की अनुमति होगी. इसरो कंपनियों को कच्चा माल, तकनीकी ड्रॉइंग और थ्री-डी मॉडल उपलब्ध कराएगा, लेकिन हाई क्‍वालिटी वाला हार्डवेयर समय पर तैयार करने की पूरी जिम्मेदारी सेलेक्‍टेड कंपनियों की होगी. स्‍पेस स्‍टेशन क्‍यों जरूरी? ISRO का मानना है कि भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन देश के वैज्ञानिक और तकनीकी भविष्य में अहम भूमिका निभाएगा. यहां माइक्रोग्रैविटी में दीर्घकालिक प्रयोग किए जा सकेंगे (मानव शरीर पर अंतरिक्ष वातावरण के प्रभावों का अध्ययन होगा और नई तकनीकों का परीक्षण किया जाएगा) जो भविष्य के गहरे अंतरिक्ष अभियानों के लिए आवश्यक होंगी. यदि तय समयसीमा के अनुसार काम आगे बढ़ता है, तो 2028 तक भारत का पहला स्पेस स्टेशन मॉड्यूल पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित हो सकता है. यह उपलब्धि भारत को उन चुनिंदा देशों की श्रेणी में ला खड़ा करेगी, जिन्होंने न केवल अंतरिक्ष में मानव भेजा है, बल्कि वहां स्थायी मानव उपस्थिति स्थापित करने की क्षमता भी हासिल की है. यह भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में एक नया अध्याय होगा और आने वाले दशकों में देश की वैज्ञानिक क्षमताओं को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक बनेगा.

सीएम योगी बोले, युद्ध, आपदा, दुर्घटना और बड़े आयोजनों में समाज ने स्वीकार किया नागरिक सुरक्षा संगठन का अहम योगदान

मॉक ड्रिल प्रदेश को हर तरह की परिस्थितियों के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम: सीएम योगी  – सीएम योगी पुलिस लाइन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती पर आपातकालीन स्थिति में बचाव एवं जागरूकता के लिए आयोजित ब्लैकआउट मॉक ड्रिल में हुए शामिल – बोले, युद्ध, आपदा, दुर्घटना और बड़े आयोजनों में समाज ने स्वीकार किया नागरिक सुरक्षा संगठन का अहम योगदान  – हर कार्य के लिए सरकार पर निर्भर रहना उचित नहीं, स्वयंसेवकों की भागीदारी से बढ़ेगी कार्यक्षमता – वर्तमान में 45 हजार होमगार्ड भर्ती प्रक्रिया चल रही, आवश्यक होने पर आपदा मित्र के रूप में किया जाएगा प्रशिक्षित  लखनऊ, देशभर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से आज भारत माता के महान सपूत और स्वाधीनता आंदोलन के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पावन जयंती ‘पराक्रम दिवस’ के रूप में मनाई जा रही है। इसी अवसर पर नेताजी के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए उत्तर प्रदेश नागरिक सुरक्षा संगठन की ओर से मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। यह शानदार मॉक ड्रिल प्रदेश को हर तरह की परिस्थितियों के लिए तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को पुलिस लाइन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की जयंती पर आपातकालीन स्थिति में बचाव एवं जागरूकता के लिए आयोजित ब्लैकआउट मॉक ड्रिल के दौरान कही।  हर स्थिति में ‘फर्स्ट रिस्पांडर’ के रूप में नागरिक सुरक्षा संगठन की भूमिका को समाज ने स्वीकार किया  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘नेशन फर्स्ट’ का भाव नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आज़ादी के आंदोलन के दौरान देश को दिया था। उसी भावना के अनुरूप उन्होंने भारत की स्वाधीनता के लिए आज़ाद हिंद फौज का गठन किया। भारत की नारी शक्ति की सामर्थ्य को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के लिए उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई ब्रिगेड का गठन कर देश को उस समय ही महिला शक्ति की ताकत से अवगत कराया था। भारत के अंदर हो या विदेश में, जहां-जहां नेताजी रहे, उन्होंने भारत की आज़ादी के लिए जो योगदान दिया, हर भारतवासी उसके प्रति कृतज्ञ है और एक राष्ट्रनायक के रूप में उन्हें सम्मान देता है। सीएम ने कहा कि आज का यह मॉक ड्रिल हम सभी को सम और विषम परिस्थितियों के प्रति हमेशा तैयार रहने की प्रेरणा देता है। युद्धकाल हो या शांति काल, आपदा हो या आकस्मिक दुर्घटना हर स्थिति में ‘फर्स्ट रिस्पांडर’ के रूप में नागरिक सुरक्षा संगठन की भूमिका को समाज ने निर्विवाद रूप से स्वीकार किया है। इसी महत्व को देखते हुए उत्तर प्रदेश में सभी 75 जनपदों में नागरिक सुरक्षा संगठन का गठन किया गया। सरकार पर निर्भर रहना किसी स्वावलंबी समाज का गुण नहीं हो सकता मुख्यमंत्री ने नागरिक सुरक्षा संगठन को धन्यवाद देते हुए कहा कि अब सभी 75 जिलों में भर्ती की प्रक्रिया पूर्णता की ओर बढ़ रही है। साइरन लग चुके हैं और इस तरह के मॉक ड्रिल कार्यक्रम प्रदेश के सभी 75 जनपदों में आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वास्तव में हर काम के लिए सरकार पर निर्भर रहना किसी स्वावलंबी समाज का गुण नहीं हो सकता। स्वावलंबन की पहली शर्त यही है कि हम अपने देश और समाज के प्रति भी सोचें और सरकार के साथ मिलकर ऐसे प्रयासों को आगे बढ़ाएं, जिससे कार्यों की गति कई गुना बढ़ सके। इसी सोच के साथ नागरिक सुरक्षा संगठन से जुड़े स्वयंसेवकों के माध्यम से यह अभियान आगे बढ़ाया जा रहा है और आज 75 जिलों में मॉक ड्रिल हो रहे हैं। सीएम ने कहा कि अब नागरिक सुरक्षा संगठन केवल शांति काल में पर्व और त्योहारों तक सीमित नहीं है। पर्व-त्योहार, बाढ़ या अन्य आपदा, कोई घटना-दुर्घटना, बड़े आयोजन में ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करना या फिर यदि देश पर दुश्मन द्वारा युद्ध थोपा गया हो तो युद्धकाल में समाज की व्यवस्था संभालने, हर परिस्थिति में नागरिक सुरक्षा संगठन की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस मॉक ड्रिल के माध्यम से यह क्षमता आज प्रस्तुत की गई है। वर्तमान में 45 हजार होमगार्ड की भर्ती प्रक्रिया चल रही मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक अच्छा प्रयास है और इसे निरंतर हमारी प्रैक्टिस का हिस्सा बनना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें युद्ध के साथ-साथ आपदा प्रबंधन के लिए, दुर्घटनाओं को रोकने के लिए और यदि दुर्घटना हो जाए तो पीड़ित को समय पर उपचार दिलाने के लिए निरंतर अभ्यास करना होगा। पीड़ित का जीवन अमूल्य है और ‘गोल्डन आवर’ की व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी को मिलकर प्रयास आगे बढ़ाना होगा। प्रदेश में एसडीआरएफ के माध्यम से ‘आपदा मित्रों’ की भर्ती की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है। आपदा मित्र के रूप में जो स्वयंसेवक कार्य करेंगे, उन्हें उत्तर प्रदेश में होमगार्ड भर्ती में प्राथमिकता दी जाएगी। वर्तमान में 45 हजार होमगार्ड की भर्ती प्रक्रिया चल रही है और आवश्यक होने पर उन्हें आपदा मित्र के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि फर्स्ट रिस्पांडर के रूप में होमगार्ड स्वयंसेवक मौके पर राहत कार्यों में बड़ा सहयोग कर सकता है और हम सबको इनके महत्व के प्रति जागरूक रहना चाहिए। आज के समय में विकास तीव्र गति से बढ़ रहा है, टूरिज्म तेजी से बढ़ा है और इंफ्रास्ट्रक्चर अत्याधुनिक हुआ है। ऐसे में हाईराइज बिल्डिंग में यदि कहीं अग्निकांड जैसी घटना हो जाए, तो नागरिक सुरक्षा संगठन या आपदा मित्र फर्स्ट रिस्पांडर के रूप में कैसे योगदान दे सकते हैं, इसके लिए नियमित मॉक ड्रिल जरूरी है। केवल संकट पर तैयार रहना पर्याप्त नहीं, सामान्य जीवन में भी हमेशा तैयार रहना होगा मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कहीं बाढ़ जैसी स्थिति बन जाती है तो एनडीआरएफ और एसडीआरएफ के पहुंचने से पहले नागरिक सुरक्षा संगठन प्रशासन की मदद के लिए खड़ा हो जाए, तो समाज के सहयोग से जनहानि और धनहानि को न्यूनतम किया जा सकता है। इसे नियमित अभ्यास का हिस्सा बनाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल संकट आने पर तैयार रहना पर्याप्त नहीं, बल्कि सामान्य जीवन में भी हमेशा इसके लिए तैयार रहना होगा, तभी सफलता मिलेगी।    इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार में होमगार्ड और नागरिक सुरक्षा विभाग के मंत्री धर्मवीर प्रजापति, विधायक डॉ. नीरज बोरा, डॉ. लाल जी प्रसाद निर्मल, … Read more

रायपुर में रिकॉर्ड्स की बरसात: सूर्या की आंधी और ईशान किशन का बल्ले से कहर

रायपुर भारतीय टीम ने न्यूजीलैंड के खिलाफ रायपुर टी20 मुकाबले में 7 विकेट से जीत हासिल की. 23 जनवरी (शुक्रवार) को हुए इस मुकाबले में भारत के सामने जीत के लिए 209 रनों का टारगेट सेट किया गया था, जिसे उसने 15.2 ओवरों में ही हासिल कर लिया. कप्तान सूर्यकुमार यादव और ईशान किशन भारतीय टीम की जीत के स्टार रहे. सूर्यकु्मार ने फॉर्म में वापसी करते हुए 37 गेंदों पर नाबाद 82 रन बनाए, जिसमें 9 चौके और चार छक्के शामिल रहे. वहीं ईशान ने 11 चौके और छक्के की मदद से 32 गेदों पर 76 रनों का योगदान दिया. भारत ने इस मुकाबले को जीत कर ऐतिहासिक उपलब्धि अपने नाम कर ली. टीम इंडिया ने 2 विकेट पर 6 रनों की नाजुक स्थिति से उबरते हुए 209 रनों का लक्ष्य सफलतापूर्वक हासिल किया. यह किसी फुल मेम्बर (FM) टीम की तरफ से 6 या उससे कम रनों पर 2 विकेट गिरने के बाद किया गया सबसे बड़ा सफल रनचेज रहा. इससे पहले यह रिकॉर्ड न्यूजीलैंड के नाम था, जिसने पाकिस्तान के खिलाफ साल 2023 में रावलपिंडी में 4 रन पर 2 विकेट गिरने के बावजूद 194 रनों का लक्ष्य हासिल किया था. टी20 इंटरनेशनल में भारतीय टीम का ये संयुक्त रूप से सबसे बड़ा सफल रनचेज रहा. इससे पहले भारत ने साल 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विशाखापत्तन में 209 रनों का टारगेट चेज कर लिया था. भारतीय टीम ने टी20 इंटनेशनल में छठी बार 200 या उससे ज्यादा के टारगेट का सफलतापूर्वक पीछा किया है. ईशान किशन ने तूफानी पारी खेलकर लगाई रिकॉर्ड्स की झड़ी भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी20 सीरीज के दूसरे मुकाबले में ईशान किशन का जलवा देखने को मिला. रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह इंटरनेशनल स्टेडियम में हुए इस मैच में ईशान ने ताबड़तोड़ पारी खेली. ईशान ने 11 चौके और चार छक्के की मदद से 32 गेंदों पर 76 रनों का योगदान दिया. ईशान के टी20 इंटरनेशनल करियर की यह सातवीं फिफ्टी रही. ईशान को ईश सोढ़ी ने मैट हेनरी के हाथों कैच आउट कराया. ईशान के अलावा कप्तान सूर्यकुमार यादव ने भी नाबाद 82 रन बनाए. ईशान-सूर्या की धांसू पारियों के दम पर भारत ने इस मैच में सात विकेट से जीत हासिल की. देखा जाए तो ईशान किशन ने पावरप्ले में ही 21 गेंदों पर अपना अर्धशतक पूरा कर लिया. कुल मिलाकर ईशान ने पावरप्ले में 23 गेंदों का सामना करते हुए 58 रन बनाए. पावरप्ले में किसी भारतीय बल्लेबाज की ओर से बनाया गया दूसरा सबसे बड़ा स्कोर रहा. इस मामले में अभिषेक शर्मा पहले नंबर पर हैं. अभिषेक ने साल 2025 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में इंग्लैंड के खिलाफ पावरप्ले में 21 बॉल पर 58 रन बनाए थे. देखा जाए तो ईशान किशन ऐसे पहले भारतीय बल्लेबाज हैं, जिन्होंने टी20 इंटरनेशनल तीसरे या उससे निचले क्रम पर बैटिंग करते हुए पावरप्ले में अर्धशतक लगाया. साथ ही ईशान किशन फुल मेम्बर टीम्स की ओर से पावरप्ले में अर्धशतक बनाने वाले तीसरे गैर ओपनर बैटर भी बन गए हैं. पावरप्ले में 50+ स्कोर बनाने वाले गैर ओपन बैटर (एफएम टीम्स): 60(27) डियोन मायर्स बनाम रवांडा नैरोबी 2024, 56(23) ईशान किशन बनाम न्यूजीलैंड रायपुर 2026 51(29) जोश इंग्लिस बनाम वेस्टइंडीज बासेटेरे 2025, भारतीय टीम ने इस मैच के दौरान पावरप्ले में 2 विकेट पर 75 रन बनाए. यह न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 इंटरनेशनल में भारत का दूसरा सबसे बड़ा पावरप्ले स्कोर. टी20 वर्ल्ड कप 2007 के दौरान भारतीय टीम ने जोहानिसबर्ग के मैदान पर इस टीम के खिलाफ पावरप्ले में 76/1 का स्कोर बनाया था. वो रिकॉर्ड अब भी बरकरार है. भारत के लिए सबसे सफल रनचेज (टी20I): 209 बनाम न्यूजीलैंड, रायपुर, 2026 209 बनाम ऑस्ट्रेलिया, विशाखापत्तनम, 2023 208 वेस्टइंडीज, हैदराबाद, 2019 207  बनाम श्रीलंका, मोहाली, 2009 204 बनाम न्यूजीलैंड, ऑकलैंड, 2020 202 बनाम ऑस्ट्रेलिया, राजकोट, 2013 200+ टारगेट का सर्वाधिक बार सफलतापूर्वक पीछा 7 (ऑस्ट्रेलिया) 6 (भारत) 5 (साउथ अफ्रीका) 4 (पाकिस्तान) 3 (इंग्लैंड) भारत ने इस मुकाबले में 28 गेंदें बाकी रहते टारगेट हासिल किया. यह फुल मेम्बर टीम की ओर से 200 या उससे अधिक रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए सबसे ज्यादा गेंदें बाकी रहते हुए हासिल की गई जीत रही. 200+ चेज में सबसे अधिक गेंदें बाकी रहते जीत (FM टीम्स): 28 गेंदें (भारत बनाम न्यूजीलैंड, रायपुर 2026) (लक्ष्य: 209) 24 गेंदें पाकिस्तान बनाम न्यूजीलैंड, ऑकलैंड 2025) (लक्ष्य: 205) 23 गेंदें ऑस्ट्रेलिया बनाम वेस्ट इंडीज, बासेटेरे 2025) (लक्ष्य: 215) 14 गेंदें (साउथ अफ्रीका बनाम वेस्ट इंडीज, जोहानिसबर्ग 2007) (लक्ष्य:206) इस मैच में न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाज जकारी फाउकेस ने काफी महंगी गेंदबाजी की. फाउलकेस ने अपने 3 ओवरों में 67 रन खर्च कर दिए, जो कि T20 इंटरनेशनल में किसी भी न्यूजीलैंड गेंदबाज द्वारा दिए गए सबसे ज्यादा रन हैं. उन्होंने इस मामले में बेन व्हीलर का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 2018 में ऑकलैंड में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3.1 ओवर में 64 रन लुटाए थे.

बांग्लादेश ने बदला रुख! टी20 वर्ल्ड कप को लेकर ICC से आखिरी अपील, BCB ने रखी शर्त

नई दिल्ली बांग्लादेश को टी20 वर्ल्ड कप 2026 के बहिष्कार का फैसला लेना भारी पड़ेगा, ये बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) भी जानता है और इसलिए तो उन्होंने टूर्नामेंट में खेलने की एक और कोशिश में आईसीसी को एक और पत्र लिखा है. बीसीबी ने अपने मैच श्रीलंका में शिफ्ट करने की आखिरी कोशिश में आईसीसी की इंडिपेंडेंट डिस्प्यूट रेजोल्यूशन कमेटी (DRC) से दखल देने की मांग की है. बीसीबी ने ये कदम तब उठाया जब बांग्लादेश ने टी20 वर्ल्ड कप भारत में खेलने से साफ मना कर दिया. इससे पहले बोर्ड ने आईसीसी से अपने मैच श्रीलंका में शिफ्ट करने की मांग की थी. आईसीसी ने सुरक्षा पुख्ता होने और टूर्नामेंट पर लॉजिस्टिकल के असर का हवाला देते हुए बीसीबी की मांग को खारिज कर दिया था. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पीछे हटने के बजाय, बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने आईसीसी के कानूनी ढांचे के जरिए इस फैसले को चुनौती दी है. डिस्प्यूट रेजोल्यूशन कमेटी क्या है? आईसीसी की डिस्प्यूट रेजोल्यूशन कमेटी कानूनी विशेषज्ञों से बनी इंडिपेंडेंट आर्बिट्रेशन बॉडी है. ये आईसीसी के फैसलों, नियमों और कॉन्ट्रैक्ट की जिम्मेदारियों से जुड़े विवादों पर फैसला करती है. लंदन में स्थित यह कमेटी अपील कोर्ट की तरह काम नहीं करती है, बल्कि यह जांच करती है कि आईसीसी ने फैसले लेते समय अपने गवर्नेंस फ्रेमवर्क का पालन किया है या नहीं. इसके फैसले अंतिम और बाध्यकारी होते हैं, जिसमें अपील की गुंजाइश लगभग न के बराबर होती है. बांग्लादेश ये सवाल उठा रहा है कि आईसीसी ने अपना फैसला बिना गहराई से सोचे समझे लिया है. हालांकि बीसीबी पहले ही कह चुका है कि आईसीसी ने हमारे साथ न्याय नहीं किया है. बांग्लादेश को टी20 वर्ल्ड कप के बहिष्कार से करीब 240 करोड़ रुपये का नुकसान होगा, लेकिन फिर भी बीसीबी अपनी बात पर अड़ा हुआ है. इसमें उन्हें पाकिस्तान का समर्थन मिल रहा है, लेकिन पाकिस्तान साफ कर चुका है कि वो टूर्नामेंट में खेलेगा. बांग्लादेश क्रिकेट टीम को टी20 वर्ल्ड कप 2026 में अपने शुरूआती 3 मैच कोलकाता के ईडन गार्डन्स में खेलने हैं. ग्रुप स्टेज का आखिरी मैच बांग्लादेश मुंबई के वानखेड़े में खेलेगी. अगर डीआरसी बीसीबी के पक्ष में अपना फैसला नहीं सुनाती है और टीम टूर्नामेंट से हटती है तो स्कॉटलैंड को उनकी जगह टीम में शामिल किया जाएगा.