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दावोस में भारत की नई पहचान: अब विकासशील देश नहीं, एक शक्तिशाली राष्ट्र

नई दिल्ली 1.2 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति का प्रबंधन करने वाली कंपनी ब्लैकस्टोन के प्रमुख स्टीफन श्वार्जमैन ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बदलती भूमिका पर मुहर लगा दी है। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि भारत उभर चुका है और यह बात उन अधिकांश देशों के लिए नहीं कही जा सकती जिन्हें आप आमतौर पर 'इमर्जिंग मार्केट्स' की श्रेणी में रखते हैं। हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजारों से विदेशी निवेशकों की निकासी पर श्वार्जमैन ने एक अलग नजरिया पेश किया। उन्होंने कहा कि शेयर बाजार अक्सर बेहद भावुक और अप्रत्याशित होते हैं। उनके अनुसार, पिछले पांच वर्षों में भारतीय बाजार का प्रदर्शन शानदार रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी खास समय पर भारत का 'कम फैशनेबल' होना या शेयरों का गिरना एक अल्पकालिक घटना है, जबकि लंबी अवधि में भारत का शेयर बाजार एक 'बुल मार्केट' बना रहेगा। विकास की अपार संभावनाएं श्वार्जमैन ने भारत के विकास पथ को आंकड़ों के जरिए समझाया। उन्होंने तुलना करते हुए बताया कि भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी लगभग 3,000 डॉलर है। चीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी लगभग 13,000 डॉलर है वहीं, अमेरिका की प्रति व्यक्ति जीडीपी 70,000 से अधिक है। उन्होंने कहा, "भारत के पास विकास का एक बहुत लंबा रास्ता है। यहां एक स्थिर सरकार है, पूंजी की आवश्यकता है और आबादी के जीवन स्तर में सुधार की गुंजाइश है। यहां के लोग काफी बुद्धिमान और मेहनती हैं। यही भारत के उज्ज्वल भविष्य का फॉर्मूला है।" 10 साल में बदल जाएगी दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर चर्चा करते हुए 78 वर्षीय श्वार्जमैन ने इसे बिजली के विकास और स्टीम इंजन के आविष्कार के समान क्रांतिकारी बताया। उन्होंने कहा कि जहां पिछली क्रांतियों को दुनिया बदलने में 50 साल लगे, वहीं AI यह काम महज 10 साल में कर देगा। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि वर्तमान में AI को लेकर कुछ अतिशयोक्ति है और कुछ कम पूंजी वाली कंपनियों का मूल्यांकन बहुत ज्यादा हो गया है, लेकिन उन्होंने 1999 या 2007 जैसी किसी बड़ी मार्केट उन्माद की संभावना से इनकार किया। भारत में ब्लैकस्टोन का विस्तार ब्लैकस्टोन वर्तमान में भारत में रियल एस्टेट और प्राइवेट इक्विटी में सबसे बड़ा विदेशी प्रत्यक्ष निवेशक है। श्वार्जमैन ने संकेत दिए कि कंपनी अब भारत में इन्फ्रास्ट्रक्चर और प्राइवेट क्रेडिट के क्षेत्र में भी अपना विस्तार करने की योजना बना रही है। इंटरव्यू के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब श्वार्जमैन ने अपनी पत्नी का फोन सुनने के लिए थोड़ा ब्रेक लिया। फोन पर उन्हें खबर मिली कि उनके बेटे और फिल्म निर्माता टेडी श्वार्जमैन की फिल्म 'ट्रेन ड्रीम्स' को 98वें एकेडमी अवार्ड्स (ऑस्कर) के लिए नामांकित किया गया है। यह खबर सुनते ही उन्होंने खुशी में हवा में मुक्का मारते हुए अपनी जीत का जश्न मनाया।

रायपुर में IND-NZ टी-20 मैच, भीड़ से बचने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने रूट और पार्किंग तय किए

रायपुर  भारत और न्यूजीलैंड के बीच टी-20 सीरीज का दूसरा मैच आज 23 जनवरी को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम में खेला जाएगा। मैच को लेकर क्रिकेट प्रेमियों में जबरदस्त उत्साह है। राज्य के अलग-अलग जिलों से बड़ी संख्या में दर्शक रायपुर पहुंच रहे हैं। इसी को देखते हुए ट्रैफिक पुलिस ने दर्शकों और खिलाड़ियों की सुविधा के लिए विशेष यातायात और पार्किंग व्यवस्था लागू की है। विजय अभियान जारी रखने उतरेगा भारत न्यूजीलैंड के विरुद्ध नागपुर में पहला टी-20 इंटरनेशनल मुकाबला 48 रन से जीतकर भारतीय टीम आत्मविश्वास से लबरेज है। अब शुक्रवार को रायपुर के शहीद वीर नारायण सिंह अंतरराष्ट्रीय स्टेडियम में होने वाला दूसरा मुकाबला सीरीज के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। कप्तान सूर्यकुमार यादव की नजरें इस मुकाबले को जीतकर सीरीज में 2-0 की बढ़त लेने पर होंगी, ताकि आगे के मैचों में टीम को मनोवैज्ञानिक बढ़त मिल सके। वहीं, न्यूजीलैंड की टीम इस मैच को हर हाल में जीतकर सीरीज में बराबरी करना चाहेगी। पहले मैच में अभिषेक शर्मा और रिंकू सिंह की तूफानी बल्लेबाजी की बदौलत भारत ने 238 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया था। इसके बाद भारतीय गेंदबाजों ने कीवी टीम को 200 रन के भीतर रोक दिया। अभिषेक-संजू से विस्फोट पारी की उम्मीद पहले टी-20 में संजू सैमसन भले ही बड़ी पारी नहीं खेल सके, लेकिन अभिषेक शर्मा ने 35 गेंदों पर 84 रन की विस्फोटक पारी खेलकर मैच का रुख भारत की ओर मोड़ दिया था। रायपुर में भी टीम मैनेजमेंट बाएं-दाएं के इस काम्बिनेशन को बरकरार रख सकता है। वहीं, नागपुर में इशान किशन और संजू सैमसन की बल्लेबाजी उम्मीद के मुताबिक नहीं रही थी। ऐसे में दूसरे टी-20 में श्रेयस अय्यर को मौका दिए जाने की संभावना जताई जा रही है। तिलक वर्मा के चोटिल होने के बाद टीम में लौटे अय्यर को टी-20 विश्व कप से पहले आजमाना टीम मैनेजमेंट की प्राथमिकता हो सकती है। स्पिन ट्रैक पर भारत की रणनीति रायपुर की पिच आमतौर पर स्पिनरों को मदद देती है। ऐसे में भारत अपनी अंतिम एकादश में बदलाव कर सकता है। शिवम दुबे की जगह कुलदीप यादव या रवि बिश्नोई को मौका मिल सकता है। स्पिन विभाग की कमान उप-कप्तान अक्षर पटेल और वरुण चक्रवर्ती संभालेंगे। हालांकि, अक्षर पटेल की फिटनेस पर नजर रहेगी, क्योंकि वह पिछले मैच में चोटिल हो गए थे। तेज गेंदबाजी में जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह की जोड़ी शानदार लय में है। न्यूजीलैंड करना चाहेगा वापसी पहले मुकाबले में हार के बाद न्यूजीलैंड की टीम रायपुर में नई रणनीति के साथ उतर सकती है। कप्तान मिशेल सेंटनर टाप आर्डर को अधिक आक्रामक बनाने और अतिरिक्त स्पिनर को शामिल करने पर विचार कर सकते हैं। डेवोन कान्वे, ग्लेन फिलिप्स और डेरिल मिचेल से बड़ी पारियों की उम्मीद होगी। भारत : सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन, इशान किशन, श्रेयस अय्यर, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, रिंकू सिंह, अर्शदीप सिंह, रवि बिश्नोई, हर्षित राणा। न्यूजीलैंड : मिशेल सैंटनर (कप्तान), डेवोन कान्वे, बेवोन जैकब्स, डेरिल मिशेल, ग्लेन फिलिप्स, टिम राबिंसन, जिमी नीशम, ईश सोढी, जैक फाल्क्स, मार्क चैपमैन, माइकल ब्रेसवेल, रचिन रवींद्र, काइल जेमीसन, मैट हेनरी, जैकब डफी, क्रिस्टियन क्लार्क। शहर से स्टेडियम जाने वाले दर्शक रायपुर शहर से आने वाले दर्शक तेलीबांधा थाना तिराहा होते हुए नेशनल हाईवे-53 से सेरीखेड़ी ओवरब्रिज पार कर नया रायपुर मार्ग से स्टेडियम तिराहा पहुंचेंगे। यहां से साईं अस्पताल रोड होते हुए साईं अस्पताल और सेंध तालाब पार्किंग में वाहन खड़े कर पैदल स्टेडियम जाना होगा। बिलासपुर, बलौदाबाजार और महासमुंद से आने वाले दर्शक बिलासपुर, बलौदाबाजार, खरोरा और महासमुंद की ओर से आने वाले दर्शकों को नेशनल हाईवे-53 के रास्ते मंदिर हसौद और नवागांव होकर स्टेडियम टर्निंग पहुंचना होगा। वाहन परसदा और कोसा पार्किंग में खड़े कर पैदल स्टेडियम जाना होगा। धमतरी-जगदलपुर मार्ग से आने वाले दर्शक इस दिशा से आने वाले दर्शक अभनपुर, केन्द्री, उपरवारा और मंत्रालय चौक होते हुए सेंध तालाब और साईं अस्पताल पार्किंग में वाहन खड़े कर सकेंगे। दुर्ग-भिलाई से आने वाले दर्शक दुर्ग-भिलाई की ओर से आने वालों को टाटीबंध, रिंग रोड और तेलीबांधा तिराहा होकर नेशनल हाईवे-53 से नया रायपुर मार्ग अपनाना होगा। पासधारी वाहनों के लिए अलग व्यवस्था जिन वाहनों को A से G तक के पार्किंग पास जारी किए गए हैं, वे सेरीखेड़ी ओवरब्रिज होकर नया रायपुर प्रवेश मार्ग से सीधे स्टेडियम के निर्धारित पार्किंग जोन में वाहन पार्क कर सकेंगे। ट्रैफिक पुलिस ने दर्शकों से अपील की है कि तय मार्गों और पार्किंग व्यवस्था का पालन करें, ताकि मैच के दौरान किसी तरह की असुविधा न हो और सभी सुरक्षित व समय पर स्टेडियम पहुंच सकें।  13 गेट पर लोहे की रेलिंग लगाई गई CSCS छत्तीसगढ़ क्रिकेट संघ ने साफ किया है कि, फर्स्ट इनिंग खत्म होने के बाद किसी भी दर्शक को स्टेडियम में एंट्री नहीं दी जाएगी। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 350 से ज्यादा प्राइवेट बाउंसर्स भी तैनात किए जा रहे हैं। इस दौरान क्रिकेट संघ के 45 अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था के लिए मौजूद रहेंगे। 13 गेट पर लोहे की रेलिंग लगा दी गई है। 800 रुपए से 25 हजार रुपए तक की टिकट इस बार मैच के जनरल टिकट के दाम पिछले वनडे मुकाबले के लगभग समान रखे गए हैं। टिकट 800 रुपए से शुरू होकर 25 हजार रुपए तक बिके हैं। टिकट विंडो ओपन होने के शुरुआती तीन दिनों तक मैच की टिकट नहीं बिक पाई थी। लेकिन चौथे दिन सारी 35,000 टिकट बिक गईं। एंट्री गेट्स पर तिहरी निगरानी स्टेडियम के सभी एंट्री गेट्स पर पुलिस, प्राइवेट गार्ड्स और क्रिकेट संघ के कर्मचारियों की संयुक्त ड्यूटी लगाई जाएगी। जिससे किसी तरह का विवाद या अव्यवस्था न हो। पिछले ODI में 2 दर्शक रेलिंग जंप करते हुए मैदान के बीच खिलाड़ियों तक पहुंच गए थे। इस बार बाउंसर्स को बाउंड्री पर तैनात किया जाएगा, ताकि दर्शक दीर्घा से कोई जंप कर खिलाड़ियों तक न पहुंच पाएं।

मध्यप्रदेश के 8 जिलों में बारिश की चेतावनी, ग्वालियर-चंबल में मावठा, फिर होगी सर्दी की लहर

भोपाल  मध्य प्रदेश (MP Weather Today) में पहाड़ी राज्यों के कारण ठंड फिर लौट आई है. प्रदेश में शुक्रवार (23 जनवरी) को ग्वालियर संग 8 से ज्यादा जिलों में बारिश का अलर्ट दिया गया है. जिसके बाद इन जिलों में हल्की बारिश का भी अनुमान देखा जा रहा है. इसी बीच प्रदेश में मावठा भी गिरने का अनुमान है और 8 जिलों में मौसम विभाग ने कोहरा पड़ने का अलर्ट भी जारी किया है. इस रिपोर्ट में जाने, कैसा रहेगा आज का मौसम. एमपी के इन जिलों में बारिश का अलर्ट मौसम विभाग के अनुसार, राज्य के 8 जिलों में बारिश का अलर्ट है, जिसमें ग्वालियर, श्योपुर, भिंड, मुरैना, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ जिले शामिल हैं. इसके साथ ही भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में बादल छाए रहने का अनुमान है. यहां छाए रहेंगे बादल इधर भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में भी बादल छाए रहेंगे, जिससे मौसम सुहावना लेकिन नम रहेगा। हालांकि, तेज ठंड या शीतलहर का अलर्ट नहीं है, लेकिन सुबह-शाम ठंडी हवाएं और कोहरा लोगों को ठिठुरा सकता है। 2 से 3 डिग्री गिरेगा तापमान पिछले 24 घंटों में कटनी का करोंदी इलाका सबसे ठंडा रहा, जहां पारा 5 डिग्री से भी नीचे दर्ज किया गया। उत्तरी भारत में हो रही बर्फबारी का असर एमपी में भी दिखाई दे रहा है, जिससे तापमान में अचानक बदलाव आया है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि, 25 जनवरी से न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री की और गिरावट हो सकती है, जिससे ठंड फिर से तेज हो जाएगी। देश के पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी होने के बाद बारिश और ओलावृष्टि की चेतावनी है। वहीं, वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) भी असर दिखा रहा है। इस वजह से एमपी में भी मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। गुरुवार को भोपाल, नर्मदापुरम, सीहोर, रायसेन, विदिशा समेत कई जिलों में बादल छा गए। वहीं, सर्द हवा चलने लगी। शुक्रवार को भोपाल में बारिश होने का अलर्ट नहीं है, लेकिन बादल जरूर छाए रहेंगे। यदि बारिश होती है तो इस सीजन में पहली बार मावठा गिरेगा। मानसूनी सीजन खत्म होने के बाद नवंबर-दिसंबर में प्रदेश के किसी भी हिस्से में बारिश नहीं हुई, लेकिन जनवरी में मावठा गिरने के आसार हैं। कटनी का करौंदी सबसे ठंडा मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड के बीच आज कटनी का करौंदी और शहडोल का कल्याणपुर प्रदेश में सबसे ठंडा स्थान रिकॉर्ड किया गया है. यहां का तापमान 4.9 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. वहीं नौगांव में 6.5 डिग्री सेल्सियस, उमरिया में 6.9 डिग्री और रीवा में 7.0 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ है. इसके साथ ही खजुराहो में तापमान 7.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ है. एक और सिस्टम कराएगा बारिश सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया, गुरुवार से ही मौसम में बदलाव देखने को मिला है। शुक्रवार के लिए उत्तरी हिस्से में कहीं-कहीं बारिश हो सकती है। उत्तर-पश्चिम भारत को 26 जनवरी से एक और वेस्टर्न डिस्टरबेंस प्रभावित कर सकता है। फिलहाल यह सिस्टम स्ट्रॉन्ग दिखाई दे रहा है। जिससे एमपी में भी बारिश होने का अनुमान है। दो दिन तेज ठंड का अनुमान नहीं मौसम विभाग ने अगले दो दिन तक तेज ठंड पड़ने का अनुमान नहीं जताया है। वहीं, सुबह के समय हल्के से मध्यम कोहरा छाया रह सकता है। गुरुवार को ग्वालियर, सतना, रीवा, गुना, इंदौर, राजगढ़, रतलाम, उज्जैन, खजुराहो, मंडला, नरसिंहपुर, नौगांव, सिवनी में कोहरे की स्थिति देखने को मिली थी। कटनी का करौंदी सबसे ठंडा, पारा 5 डिग्री से नीचे मौसम विभाग के अनुसार, बुधवार-गुरुवार की रात में कटनी का करौंदी प्रदेश में सबसे ठंडा रहा। यहां न्यूनतम तापमान 4.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, छतरपुर के नौगांव में 6.5 डिग्री, उमरिया में 6.9 डिग्री, रीवा में 7 डिग्री, खजुराहो में 7.4 डिग्री, दतिया में 7.6 डिग्री, दमोह-सतना में 8.8 डिग्री, मंडला में 9 डिग्री, राजगढ़-सीधी में तापमान 9.2 डिग्री सेल्सियस रहा। प्रदेश के 5 बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर में 9 डिग्री, जबलपुर में 10.9 डिग्री, भोपाल में 11.2 डिग्री, इंदौर में 13.6 डिग्री और उज्जैन में तापमान 13.8 डिग्री दर्ज किया गया। क्या होता है वेस्टर्न डिस्टरबेंस मौसम विभाग के अनुसार, वेस्टर्न डिस्टरबेंस पश्चिम से आने वाली हवा और बादलों का एक सिस्टम होता है। इसके एक्टिव होने से पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी, मैदानी क्षेत्रों में बारिश होगी। सिस्टम आगे गुजर जाने के बाद उत्तर से आने वाली हवा ठंडी रहती है। जिससे दिन-रात ठंड का असर रहता है। ठंड के लिए इसलिए खास है जनवरी मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त अहम रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं, इसलिए टेम्परेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से जनवरी में मावठा भी गिरता है। पिछले साल कई जिलों में बारिश हुई थी। इस बार साल के पहले ही दिन बादल भी छाए रहे। वहीं, आखिरी सप्ताह में भी बारिश-बादल वाला मौसम शुरू हो गया है।

रायपुर के पहले पुलिस कमिश्नर बने संजीव शुक्ला, श्वेता बनीं ग्रामीण SP, 15 IPS अफसरों का ट्रांसफर

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए पुलिस विभाग में एक बड़ा फेरबदल किया है। गृह विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार, भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के 15 अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इस फेरबदल की सबसे खास बात राजधानी रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली के तहत पहली नियुक्ति और कई जिलों में नए कप्तानों की तैनाती है। रायपुर को मिला पहला पुलिस कमिश्नर राजधानी रायपुर की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए संजीव शुक्ला (2004 बैच) को रायपुर का पहला पुलिस आयुक्त (Police Commissioner) नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे बिलासपुर में आईजी (IG) के पद पर तैनात थे। रायपुर में अब पुलिसिंग का स्वरूप पूरी तरह प्रोफेशनल और हाई-टेक होने की उम्मीद है। राज्य के तीन प्रमुख रेंजों में भी नए आईजी की तैनाती की गई है:     रामगोपाल गर्ग (2007 बैच): बिलासपुर रेंज के नए आईजी।     अभिषेक शांडिल्य (2007 बैच): दुर्ग रेंज की कमान संभालेंगे।     बालाजी राव सोमावार (2007 बैच): राजनांदगांव रेंज के नए आईजी बनाए गए हैं। जिलों के नए कप्तान (SP) कुछ महत्वपूर्ण जिलों में भी अनुभवी अधिकारियों को जिम्मेदारी दी गई है:     लाल उमेद सिंह: जशपुर के नए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP)।     शशि मोहन सिंह: रायगढ़ जिले की सुरक्षा व्यवस्था संभालेंगे।     दिव्यांग पटेल: सेनानी, 14वीं वाहिनी, बालोद।     उमेश प्रसाद गुप्ता: पुलिस अधीक्षक (रेल), रायपुर। रायपुर नगरीय पुलिस का नया ढांचा शहर की बढ़ती आबादी और क्राइम कंट्रोल के लिए रायपुर नगरीय पुलिस में विशेषज्ञों की टीम तैनात की गई है:     अमित तुकाराम काम्बले: अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, रायपुर।     संदीप पटेल: पुलिस उपायुक्त (मध्य)।     मयंक गुर्जर: पुलिस उपायुक्त (उत्तर)।     विकास कुमार: पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक एवं प्रोटोकॉल)।     राजनाला स्मृतिक: पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर)।     श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा: सहायक पुलिस आयुक्त (आजाद चौक)। अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर और ग्रामीण एसपी की नियुक्ति 2009 बैच के आईपीएस अमित तुकाराम कांबले को रायपुर का अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर बनाया गया है। वहीं रेल एसपी श्वेता श्रीवास्तव सिन्हा को रायपुर ग्रामीण एसपी के पद पर पदस्थ किया गया है। एसएसपी स्तर पर तबादले रायपुर के एसएसपी लाल उम्मेद सिंह का तबादला मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृहक्षेत्र जशपुर किया गया है। जशपुर के एसएसपी शशिमोहन सिंह को रायगढ़ भेजा गया है। आईजी और एसपी स्तर पर बड़ा फेरबदल आदेश के अनुसार दुर्ग रेंज के आईजी रामगोपाल गर्ग को बिलासपुर रेंज भेजा गया है। अभिषेक शांडिल्य को राजनांदगांव से दुर्ग रेंज, बालाजी राव सोमावार को पुलिस मुख्यालय से राजनांदगांव रेंज और रायगढ़ एसपी दिव्यांग पटेल को रेल एसपी बनाया गया है। रायपुर में रह चुके हैं संजीव शुक्ला संजीव शुक्ला पूर्व में रायपुर के एसपी रह चुके हैं और स्थानीय अनुभव व मजबूत प्रशासनिक नेटवर्क के लिए जाने जाते हैं। हालांकि वे जनवरी 2027 में सेवानिवृत्त होंगे, जिससे उन्हें करीब 11 माह का कार्यकाल मिलेगा। क्यों खास है यह फेरबदल? यह आदेश राज्यपाल के नाम से गृह सचिव हितेश शिखर गुप्ता द्वारा जारी किया गया है। इन नियुक्तियों के पीछे मुख्य उद्देश्य वीआईपी मूवमेंट, बढ़ते साइबर अपराध और शहरी यातायात को बेहतर ढंग से मैनेज करना है। संजीव शुक्ला जैसे अनुभवी अधिकारी का रायपुर कमिश्नर बनना शहर की सुरक्षा के लिहाज से एक नया अध्याय माना जा रहा है। SP के रूप में संभाला चुके हैं दुर्ग की कमान  संजीव शुक्ला ने दुर्ग जिले में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया. इससे पहले उन्होंने इसी जिले में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक का पद भी संभाला था. दुर्ग में उनका काम करने का तरीका सख्त, अनुशासित और अपराध नियंत्रण में प्रभावी माना जाता था. बाद में उन्हें बिलासपुर रेंज का पुलिस महानिरीक्षक नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने कानून-व्यवस्था बनाए रखने, नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में समस्याओं को सुलझाने और रेंज स्तर पर संगठित अपराध से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. दो बार प्रेसिडेंट पुलिस मेडल से नवाजे जा चुके हैं संजीव शुक्ला बता दें कि संजीव शुक्ला CID के हेड के तौर पर भी काम कर चुके हैं. उन्हें उनके बेहतरीन काम के लिए प्रेसिडेंट मेडल से सम्मानित किया गया है, जिससे उनका सर्विस रिकॉर्ड और भी मजबूत हुआ है. उन्हें 2010 और 2022 में दो अलग-अलग कैटेगरी में दो बार प्रेसिडेंट पुलिस मेडल मिला. संजीव शुक्ला कांकेर में डीआईजी के पद पर तैनात थे. उन्हें छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस अकादमी, चंदखुरी (रायपुर) में उप निदेशक के रूप में काम करने का भी अनुभव है.   रायपुर कमिश्नरी में DCP की नियुक्ति रायपुर में कमिश्नरी व्यवस्था लागू होने के बाद नगरीय पुलिस ढांचे को मजबूत करते हुए पुलिस उपायुक्त (DCP) स्तर पर अहम नियुक्तियां की गई हैं। इसके तहत वर्ष 2020 बैच के आईपीएस अधिकारी उमेश प्रसाद गुप्ता को पुलिस उपायुक्त (मध्य) रायपुर, संदीप पटेल को पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) रायपुर और मयंक गुर्जर को पुलिस उपायुक्त (उत्तर) रायपुर नगरीय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा विकास कुमार (IPS-2020) को पुलिस उपायुक्त (ट्रैफिक एवं प्रोटोकॉल) और राजनाला स्मृतिक (IPS-2020) को पुलिस उपायुक्त (क्राइम और साइबर) रायपुर नगरीय नियुक्त किया गया है। वहीं ईशु अग्रवाल (IPS-2022), जो अब तक नगर पुलिस अधीक्षक, आजाद चौक रायपुर थे, उन्हें पुलिस सहायक आयुक्त, आजाद चौक, रायपुर नगरीय पदस्थ किया गया है। आधे जिले में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू रायपुर के आधे जिले में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम आज यानी 23 जनवरी 2026 से प्रभावी हो गई है। रायपुर के 21 थाने कमिश्नर और 12 थाने SP संभालेंगे। गृह विभाग ने इसे लेकर बुधवार शाम नोटिफिकेशन जारी किया गया था। रायपुर में कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने के लिए शहर की पुलिस फोर्स को 2 हिस्सों में बांटा गया।

स्वास्थ्य सेवाओं के साथ युवाओं को मिलेगा रोजगार: नवा रायपुर बनेगा सेंट्रल इंडिया का हेल्थकेयर हब – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर : मेडिसिटी विकास की दिशा में बड़ी उपलब्धि: चार माह में जमीन लीज और रजिस्ट्री पूरी, ₹680 करोड़ की लागत से बनेगा 300 बिस्तरों का बॉम्बे हॉस्पिटल स्वास्थ्य सेवाओं के साथ युवाओं को मिलेगा रोजगार: नवा रायपुर बनेगा सेंट्रल इंडिया का हेल्थकेयर हब – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय रायपुर नवा रायपुर को देश के प्रमुख हेल्थकेयर हब के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में नवा रायपुर स्थित मंत्रालय महानदी भवन में देश के प्रतिष्ठित बॉम्बे हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर और नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के मध्य 15 एकड़ भूमि के लीज एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता नवा रायपुर में प्रस्तावित मेडिसिटी के विकास को नई गति देगा। यह परियोजना न केवल राज्य के हेल्थकेयर इंफ्रास्ट्रक्चर को सुदृढ़ करेगी, बल्कि निवेश के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की तेज़ और भरोसेमंद प्रशासनिक कार्यप्रणाली का भी उदाहरण बनेगी। राज्य सरकार द्वारा 24 सितंबर 2025 को निवेश आमंत्रण जारी किए जाने के बाद मात्र चार माह के भीतर भूमि चिन्हांकन, आवश्यक स्वीकृतियां और रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी कर ली गई, जो अपने आप में एक नया बेंचमार्क है। नवा रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा आबंटित 15 एकड़ भूमि पर बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट द्वारा लगभग ₹680 करोड़ की लागत से 300 बिस्तरों का अत्याधुनिक मल्टी सुपर-स्पेशलिटी हॉस्पिटल स्थापित किया जाएगा। यह अस्पताल ट्रस्ट का देश में चौथा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल होगा। इससे पूर्व मुंबई, इंदौर और जयपुर में ट्रस्ट के सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। बॉम्बे हॉस्पिटल के माध्यम से कार्डियक साइंसेज, कैंसर उपचार, न्यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, क्रिटिकल केयर, ऑर्गन ट्रांसप्लांट सहित कई उन्नत चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होंगी। इसके प्रारंभ होने से छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मुंबई या दिल्ली जैसे महानगरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। इस परियोजना से 500 से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है, जिनमें डॉक्टर, सर्जन, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ और मेडिकल टेक्नीशियन शामिल होंगे। इसके साथ ही हेल्थकेयर सप्लाई चेन, सेवाओं और सहयोगी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर अप्रत्यक्ष रोजगार भी उत्पन्न होंगे, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को उल्लेखनीय प्रोत्साहन मिलेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि बॉम्बे हॉस्पिटल की स्थापना से नवा रायपुर में मेडिसिटी का सपना साकार होने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया गया है। उन्होंने कहा कि इससे प्रदेश के नागरिकों को अपने ही राज्य में विश्वस्तरीय सुपर स्पेशलिटी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी और युवाओं को गुणवत्तापूर्ण रोजगार के अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं के निरंतर विस्तार के लिए प्रतिबद्ध है। बॉम्बे हॉस्पिटल जैसे प्रतिष्ठित संस्थान का नवा रायपुर में निवेश करना राज्य की नीतिगत स्थिरता, तेज़ निर्णय क्षमता और निवेशक-अनुकूल वातावरण पर विश्वास का प्रमाण है। यह परियोजना छत्तीसगढ़ औद्योगिक विकास नीति 2024–30 के अंतर्गत स्वास्थ्य जैसे रणनीतिक क्षेत्रों को दिए जा रहे विशेष प्रोत्साहनों और समयबद्ध क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष परिणाम है। इससे नवा रायपुर को सेंट्रल इंडिया के प्रमुख हेल्थकेयर डेस्टिनेशन के रूप में स्थापित करने में सहायता मिलेगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध सिंह, उद्योग विभाग के सचिव रजत कुमार, आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद, नवा रायपुर विकास प्राधिकरण के सीईओ चंदन कुमार, बॉम्बे हॉस्पिटल ट्रस्ट के ट्रस्टी एवं चेयरमैन भरत तापड़िया, सचिव श्याम जी सहित ट्रस्ट एवं शासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा – किसानों की प्रगति के लिए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना अनिवार्य

रायपुर : किसानों की समृद्धि के लिए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना आवश्यक : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय लंबे समय से अधूरे सिंचाई परियोजनाओं को पूर्ण करने को लेकर मुख्यमंत्री सख्त मुख्यमंत्री ने जल संसाधन विभाग के कामकाज की उच्च स्तरीय समीक्षा की रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में जल संसाधन विभाग के अधिकारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में विभागीय कार्यों, संचालित परियोजनाओं तथा प्रस्तावित सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों के हित में लगातार बड़े निर्णय ले रही है और किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य की दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार अत्यंत आवश्यक है। मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि लंबे समय से लंबित परियोजनाओं को अटल सिंचाई योजना में शामिल किया गया है, इन्हें समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण किया जाए। उन्होंने दो टूक कहा कि निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने आगामी तीन वर्षों में पूर्ण की जाने वाली परियोजनाओं की जानकारी लेते हुए कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में किसानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। खेती के बढ़ते रकबे और किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सिंचाई परियोजनाओं का सुदृढ़ होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए बजट की कोई कमी नहीं है और इसके लिए पृथक बजटीय प्रावधान किया गया है। इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से प्रदेश में सिंचित रकबा बढ़ेगा और किसानों की उपज में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। मुख्यमंत्री साय ने जशपुर जिले के किसानों के मध्यप्रदेश अध्ययन भ्रमण का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से सिंचाई को प्रभावी ढंग से संचालित होते देखकर किसान काफी उत्साहित हुए हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन राज्यों में सिंचाई क्षेत्र में बेहतर नवाचार किए जा रहे हैं, वहां छत्तीसगढ़ के किसानों का भी अध्ययन भ्रमण कराया जाए, ताकि वे नई तकनीकों और कार्यप्रणालियों से अवगत हो सकें। बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि आगामी तीन वर्षों में लगभग 10 हजार करोड़ रुपये की लागत से 14 सिंचाई परियोजनाओं को चरणबद्ध रूप से पूर्ण करने की योजना है, जिससे लगभग 70 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी। इनमें 4,800 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली चार प्रमुख परियोजनाओं का मार्च और मई माह में भूमिपूजन प्रस्तावित है। इन परियोजनाओं में बस्तर जिले की देउरगांव बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, मटनार बैराज सह उद्वहन सिंचाई परियोजना, रायपुर जिले के आरंग विकासखंड में महानदी पर मोहमेला–सिरपुर बैराज योजना तथा गरियाबंद जिले की सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय लिंक परियोजना शामिल हैं। इसी प्रकार अटल सिंचाई योजना के अंतर्गत 115 लंबित परियोजनाओं के लिए 346 करोड़ रुपये का बजट आबंटित किया गया है, जिनके माध्यम से लगभग 11 हजार हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचाई क्षमता का विकास किया जाएगा। बैठक में अंतराज्यीय जल विवादों के समाधान पर भी चर्चा की गई। आगामी तीन वर्षों में महानदी जल विवाद, पोलावरम बांध के डुबान क्षेत्र तथा समक्का बैराज से संबंधित मामलों के निपटारे के लिए ठोस प्रयास किए जाने पर सहमति बनी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव मुकेश बंसल, जल संसाधन विभाग के सचिव राजेश सुकुमार टोप्पो सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

विजय के रास्ते पर भारत! 2nd T20I में नजरें इन स्टार्स पर

रायपुर पहले मैच में बड़ी जीत से उत्साह से भरी भारतीय टीम न्यूजीलैंड के खिलाफ शुक्रवार को यहां होने वाले दूसरे टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में अपनी जीत की लय बरकरार रखने के लिए मैदान पर उतरेगी जिसमें शीर्ष क्रम में संजू सैमसन और ईशान किशन की भूमिका पर निगाह टिकी रहेगी। वनडे श्रृंखला में हारने के बाद भारत ने नागपुर में खेले गए पहले टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में 48 रन से शानदार जीत हासिल की थी लेकिन उस मैच में सैमसन और किशन बल्ले से कोई कमाल नहीं दिखा पाए थे। सैमसन हाल में अंतिम एकादश से अंदर बाहर होते रहे हैं लेकिन अब अगले महीने होने वाले टी20 विश्व कप से पहले उन्हें निश्चित रूप से लंबा मौका मिलेगा। श्रृंखला के पहले मैच में आसानी से अपना विकेट गंवाने वाले सैमसन अपने विभिन्न तरह के शॉट का शानदार नमूना पेश करने के लिए प्रतिबद्ध होंगे जिनके दम पर उन्होंने सबसे छोटे प्रारूप में तीन शतक बनाए हैं। एक और बल्लेबाज जिसे टीम प्रबंधन के भरोसे को सही साबित करने की जरूरत है, वह है किशन, जिन्हें विश्व कप के लिए टीम में शामिल किया गया है और नागपुर में पहले मैच में श्रेयस अय्यर पर उन्हें प्राथमिकता दी गई थी। कवर पर कैच आउट होने से पहले बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने अपनी संक्षिप्त पारी में अच्छा प्रदर्शन किया। भारत के अधिकतर खिलाड़ी शुरू में ही हर गेंद को बाउंड्री के पार पहुंचाने की कोशिश में पूरी ताकत से बल्लेबाजी करते हैं। किशन भी इसी निडर रवैये को जारी रखेंगे और उम्मीद कर सकते हैं कि इसका उन्हें फायदा मिले। आईसीसी टूर्नामेंट से पहले कप्तान सूर्यकुमार यादव के फॉर्म पर सबकी नजरें टिकी हुई थीं और भले ही वह कोई बड़ा योगदान नहीं दे सके, लेकिन 22 गेंदों में बनाए गए 32 रन ने उनके आत्मविश्वास को कुछ हद तक जरूर बढ़ाया होगा। पहले टी20 में मिली शानदार जीत से व्यक्तिगत तौर पर सुधार के कई क्षेत्र सामने आए, इसके बावजूद टीम के प्रदर्शन ने विश्व कप से पहले अपने प्रतिद्वंद्वियों को खतरनाक संकेत दिए हैं, जहां भारत मौजूदा चैंपियन के रूप में उतर रहा है। अगर भारत को टी20 विश्व कप खिताब का बचाव करने वाली पहली टीम बनना है तो अभिषेक शर्मा को बुधवार रात की तरह ही शीर्ष क्रम में आक्रामक बल्लेबाजी जारी रखनी होगी। यह बाएं हाथ का बल्लेबाज अपने करियर के सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में नजर आ रहा है और उन्होंने लगभग हर गेंद को मैदान से बाहर पहुंचाने की शानदार क्षमता दिखाई है। निचले क्रम में रिंकू सिंह की टीम में वापसी और आते ही शानदार प्रदर्शन करना भारत के लिए एक और बड़ा सकारात्मक पहलू है। कुलदीप यादव की अनुपस्थिति में भी गेंदबाजी विभाग काफी संतुलित नजर आता है। अगर अर्शदीप सिंह और हार्दिक पंड्या पावरप्ले में विकेट लेते रहते हैं तो जसप्रीत बुमराह को पावरप्ले के बाद तीन ओवरों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे टीम को बीच के ओवरों के लिए एक अतिरिक्त विकल्प मिल जाएगा। भारत ने नागपुर में बड़ा स्कोर बनाया था जिससे वह ओस का प्रभाव कम करने में सफल रहा। यहां भी ओस पड़ने की संभावना है और कोई भी स्कोर सुरक्षित नहीं होगा, जैसा कि दक्षिण अफ्रीका ने पिछले महीने दिखाया था, जब उन्होंने एक वनडे मैच में भारत के खिलाफ 359 रन का पीछा काफी आसानी से कर लिया था। न्यूजीलैंड जानता है कि गेंदबाजी के मोर्चे पर उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं था लेकिन उसकी टीम जल्द ही संभल जाती है और इसलिए वह वापसी करने के लिए बेताब होगी। डेवोन कॉनवे के हाल में आउट होने के तरीके को लेकर वे थोड़ा चिंतित होंगे, जिसमें वे बाहर जाती हुई गेंदों पर स्लिप कॉर्डन में कैच आउट हो जाते हैं। टीम इस प्रकार हैं : भारत : सूर्यकुमार यादव (कप्तान), अभिषेक शर्मा, संजू सैमसन (विकेटकीपर), इशान किशन, श्रेयस अय्यर, हार्दिक पंड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, कुलदीप यादव, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, रिंकू सिंह, अर्शदीप सिंह, रवि बिश्नोई, हर्षित राणा। न्यूजीलैंड : मिचेल सैंटनर (कप्तान), डेवोन कॉनवे, बेवन जैकब्स, डैरिल मिचेल, ग्लेन फिलिप्स, टिम रॉबिन्सन, जिमी नीशम, ईश सोढ़ी, जैक फाउल्स, मार्क चैपमैन, माइकल ब्रैसवेल, रचिन रविंद्र, काइल जैमीसन, मैट हेनरी, जैकब डफी। समय : शाम 7 बजे।  

पुल की चोरी: कोरबा में 11 बजे तक था सही, सुबह अचानक 60 फीट लंबा लोहे का पुल गायब

 कोरबा     छत्तीसगढ़ के कोरबा में एक अजब गजब मामले की पुलिस रिपोर्ट दर्ज हुई है. सिविल लाइन थाना की सीएसईबी पुलिस चौकी में 60 फीट लंबे पुल के चोरी हो जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई गई है. कलेक्टर कोरबा कुणाल दुदावत और एसपी सिद्धार्थ तिवारी से शिकायत किए जाने के बाद यह रिपोर्ट दर्ज हुई है और इस मामले को लेकर प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप बचा हुआ है. पुलिस ने चोरी के पुल की तलाश में एक विशेष जांच दल गठित कर अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. छत्तीसगढ़ के कोरबा में शहर के मध्य भाग से होकर गुजरने वाले हसदेव बायीं तट नहर में वर्षों पहले बनाया गया पुल रातो-रात चोरी हो गया. नगर निगम के वार्ड नंबर 17 के नागरिकों के शहर आवागमन के लिए यह पुल करीब 40 साल पहले बनाया गया था. रात 11 बजे तक था, सुबह हुआ लापता पुल की लंबाई लगभग 60 फीट और चौड़ाई 5 फीट थी. यह पुल रात 11 बजे तक सही सलामत था. वार्ड 17 के लोग इस समय तक पुल से होकर घर लौटे थे. लेकिन सुबह उन्होंने देखा कि पुल अपनी जगह से गायब है. पुल के चोरी चले जाने की सूचना तुरन्त वार्ड पार्षद लक्ष्मण श्रीवास को दी गई. वे भी भागते दौड़ते मौके पर पहुंचे, तो देख की पुल वास्तव में चोरी हो गया था. वार्ड पार्षद लक्ष्मण श्रीवास ने तुरंत आवेदन पत्र तैयार किया और एसपी सिद्धार्थ तिवारी के पास पहुंच कर शिकायत दर्ज कराई. वे यहीं नहीं रुके. उन्होंने पुल चोरी की लिखित शिकायत कलेक्टर कुणाल दुदावत से भी की और पुल के चोरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर से शिकायत के बाद पुलिस विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया. पुलिस ने एक विशेष जांच दल का गठन कर मामले की तेज गति से जांच शुरू कर दी है. दरअसल, जिस पुल की चोरी हुई है, वह मजबूत लोहे का बना हुआ था. मोटे मोटे लोहे के गर्डर यानी रेल पटरियों जैसी संरचना से यह 60 फीट लंबा पुल शहरी क्षेत्र में नहर निर्माण के बाद नागरिकों के आवागमन के लिए बनाया गया था.  गर्डर के ऊपर लोहे की मोटी-मोटी प्लेट लगाई गई थी. यह पुल इतना मजबूत था कि बीते 40 सालों में इसे कोई क्षति नहीं पहुंची थी. इसी पुल की रातो रात चोरी हो गई है. मौके पर पुल को गैस कटर से काटने के निशान थे. नहर के दोनों सिरों पर पुल के जमीन में लगे टुकड़ों में गैस कटर से पुल काटने के निशान दिखाई दे रहे थे. 30 टन लोहा और करीब 15 लाख कीमत स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह चोरी शहर में सक्रिय स्क्रैप माफिया ने कराई है. चोरी गए पुल के लोगों का वजन अनुमानित 25 से 30 टन है और उसका बाजार मूल्य करीब 15 लाख रुपए होता है.  टल गया बड़ा जल संकट चोरों ने कोरबा शहर में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए नगर निगम की ओर से बिछाई गई पानी की पाइप लाइन की सुरक्षा के लिए उसके तीन दिशाओं में लगाए गए लोहे के मोटे सुरक्षा कवच को भी काटकर चोरी कर ली है. गनीमत है कि पानी का पाइप लाइन सुरक्षित है, वरना कोरबा की ढाई लाख से अधिक की आबादी बूंद बूंद पानी के लिए तरस जाती और शहर में हाहाकार मच जाता. प्रशासन में हड़कंप, SIT का गठन कोरबा जिला पुलिस जिले में स्क्रैप कारोबार यानी कबाड़ का व्यवसाय  बंद होने का दावा करती है. लेकिन पिछले कुछ माह से जगह जगह संचालित स्क्रैप के दुकान इस दावे को साफ साफ नकारते हैं. नगर के वार्ड नंबर 17 में पुल चोरी की घटना से सिद्ध हो जाता है कि जिले में संगठित रूप से माफिया की तर्ज पर स्क्रैप के कारोबार का संचालन किया जा रहा है. पुलिस ने शहर के दो कबाड़ियों के ठिकानों पर छापामार कार्रवाई भी की, लेकिन उसे वांछित सफलता नहीं मिली.

धार में आज विशेष आयोजन: भोजशाला में बसंत पंचमी और जुमे की नमाज, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

 धार  मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला परिसर में इस बार बसंत पंचमी और शुक्रवार (जुमे की नमाज) एक ही दिन पड़ने से असमंजस जैसी स्थिति बन गई थी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने समय और स्थान के बंटवारे का एक विशेष फॉर्मूला तय कर शांतिपूर्ण समाधान निकाल लिया है. आज मौके पर बसंत पंचती की पूजा और नमाज दोनों हो रही है. मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित 11वीं सदी के विवादित भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर में शुक्रवार को बसंत पंचमी की पूजा भारी सुरक्षा के बीच शुरू हो गई है. सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम फैसला सुनाते हुए पूजा और नमाज के लिए समय निर्धारित किया है. चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने आदेश दिया कि हिंदू समुदाय को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा करने की अनुमति होगी, जबकि मुस्लिम समुदाय के लोग दोपहर 1:00 बजे से 3:00 बजे के बीच नमाज अदा कर सकेंगे.  प्रशासन ने मौके पर सुरक्षा के लिए पुलिस, आरएएफ और सीआरपीएफ सहित करीब 8,000 जवानों को तैनात किया है. पूरे परिसर की निगरानी 200 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों और 10 ड्रोनों के जरिए की जा रही है. शांति बनाए रखने के लिए नमाजियों की लिस्ट पहले ही प्रशासन को सौंप दी गई है. एजेंसी के मुताबिक, कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने बताया कि दोनों समुदायों के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास द्वार बनाए गए हैं और वे इस व्यवस्था पर सहमत हैं. अब तक साइट को कैसे मैनेज किया गया है? पिछले 23 सालों से एक एडमिनिस्ट्रेटिव व्यवस्था लागू है, जिसके तहत हिंदुओं को मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने की इजाज़त है. मुसलमानों को साइट पर शुक्रवार की नमाज़ पढ़ने की इजाज़त है. इस सिस्टम ने काफी हद तक रोज़ाना के झगड़ों को रोका है, लेकिन जब बड़े हिंदू त्योहार शुक्रवार को पड़ते हैं, तो परेशानियां सामने आती हैं. भोजशाला-कमल मौला मस्जिद विवाद क्या है? भोजशाला ASI द्वारा संरक्षित एक स्मारक है, जिसके बारे में माना जाता है कि यह परमार राजा भोज के वक्त से है. इस जगह पर हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय अपना दावा करते हैं. मुस्लिम मान्यता: मुस्लिम समुदाय इस संरचना को सूफी संत कमालुद्दीन के नाम पर कमल मौला मस्जिद मानता है और दावा करता है कि वहां सदियों से लगातार नमाज़ पढ़ी जा रही है और इस दावे का खंडन करता है कि यह मूल रूप से एक हिंदू मंदिर था. हिंदू मान्यता: हिंदू भोजशाला को देवी वाग्देवी (सरस्वती) को समर्पित मंदिर मानते हैं, जिसके लिए वे संस्कृत शिलालेखों, मंदिर जैसी मूर्तियों और वास्तुकला की विशेषताओं का हवाला देते हैं और दावा करते हैं कि यहां बहुत पहले से मंदिर थी. यह विवाद सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि ऐतिहासिक भी है, जिसमें विरासत, पुरातत्व और पूजा की निरंतरता की अलग-अलग व्याख्याएं शामिल हैं. दो दशक से हो रही है नमाज और पूजा पिछले 23 साल से चले आ रहे एक इंतज़ाम के तहत, ASI हिंदुओं को मंगलवार को भोजशाला में पूजा करने की इजाज़त देता है, जबकि मुसलमानों को शुक्रवार को नमाज़ पढ़ने की इजाज़त है. साल 2016 में भी ऐसी ही स्थिति बनी थी, जब बसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी थी, जिससे विवादित जगह पर नमाज़ के वक्त को लेकर धार में विरोध प्रदर्शन और झड़पें हुई थीं. दोनों पक्षों ने कोर्ट में रखी थी मांग भोज उत्सव समिति ने 23 जनवरी को पूरे दिन सरस्वती पूजा करने के लिए अधिकारियों से इजाज़त मांगी थी, जबकि मुस्लिम समुदाय ने दिन के महत्व का हवाला देते हुए दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज़ पढ़ने की मंज़ूरी के लिए एक ज्ञापन सौंपा था.    सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दोनों पक्षों ने क्या कहा? भोजशाला मुक्ति यज्ञ समिति ने कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वे सूर्योदय से सूर्यास्त तक निरंतर पूजा जारी रखेंगे. वहीं, कमल मौला नमाज इंतजामिया कमेटी के जल्फिकार पठान ने भी शांति बनाए रखने की अपील करते हुए फैसले को सर्वसम्मति से स्वीकार किया है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस संतुलित फैसले का स्वागत किया है. एएसआई की 2003 की व्यवस्था के मुताबिक, यहां मंगलवार को हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज अदा करते आए हैं.   सुरक्षा के कड़े इंतजाम और ड्रोन से निगरानी एसपी मनीष अवस्थी ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए 8,000 सुरक्षाकर्मी तैनात हैं, जिनमें महिला पुलिस इकाइयां भी शामिल हैं. भोजशाला की ओर जाने वाली सड़कों पर बैरिकेडिंग की गई है और हर वाहन की बारीकी से जांच हो रही है. सोशल मीडिया पर भी चौबीसों घंटे निगरानी रखी जा रही है, जिससे कोई अफवाह न फैले. परिसर के अंदर सरस्वती पूजा के लिए भगवा झंडों और रंगोली से सजावट की गई है.  

बिहार में बनेगा पहला शिव कॉरिडोर, गंगा की धारा मोड़ने की योजना, उज्जैन-वाराणसी मॉडल पर आधारित

भागलपुर.  सुल्तानगंज में बिहार का पहला शिव कॉरिडोर बनने का मार्ग अब पूरी तरह से साफ हो गया है. लंबे समय से अटकी यह योजना अब भूमि समस्याओं से मुक्त होने के बाद आगे बढ़ने वाली है. भूमि विवाद के कारण लंबे समय से अटकी शिव कॉरिडोर योजना को प्रशासन और रेलवे के बीच जमीन एक्सचेंज के फैसले ने नई गति दी है. गंगा तट पर प्रस्तावित कॉरिडोर, धर्मशाला और श्रद्धालु सुविधाओं के लिए जरूरी जमीन रेलवे की थी. अब जिला प्रशासन ने बदले में रेलवे को तीन अलग-अलग स्थानों पर जमीन देने का निर्णय लिया है, जिससे निर्माण का रास्ता पूरी तरह खुल गया है. जानकार कहते हैं कि श्रावणी मेले में कांवरियों को बेहतर सुविधा, सुरक्षा और सुव्यवस्था मिलेगी. यह परियोजना सुल्तानगंज की पहचान को नई ऊंचाई देने वाली साबित हो सकती है. पुराने विवाद का ऐसे हुआ समाधान प्रशासन और रेलवे के बीच भूमि आदान-प्रदान का निर्णय होने से अब कॉरिडोर निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने वाली है. गंगा किनारे सुल्तानगंज के प्रसिद्ध अजगैवीनाथ मंदिर के पास बनना प्रस्तावित शिव कॉरिडोर, धर्मशाला और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए चिन्हित जमीन रेलवे की थी. इसी वजह से प्रशासन लंबे समय से कॉरिडोर निर्माण के लिए आगे नहीं बढ़ पा रहा था. अब जिला प्रशासन ने भूमि एक्सचेंज नीति के तहत रेलवे को उनकी जमीन के बदले अन्य जगह की जमीन देने का निर्णय लिया है, जिससे भूमि प्राप्ति की बाधा दूर हो जाएगी. प्रशासन की योजना है कि यह जमीन देने का प्रस्ताव जल्द ही राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेज दिया जाए और विभागीय मंजूरी के बाद औपचारिक भूमिस्थानांतरण (लैंड एक्सचेंज) शुरू किया जाएगा. रेलवे को कौन-सी जमीन मिलेगी? भारतीय रेलवे की लगभग 17 एकड़ 47.625 डिसमिल जमीन के बदले में प्रशासन तीन अलग-अलग स्थानों पर जमीन देने वाला है. जगदीशपुर हॉल्ट के पास 18.98 एकड़, बरारी के निकट 0.6 डिसमिल और सुल्तानगंज में एनएच के आईबी के पास 0.7 एकड़. इन तीन स्थानों की जमीन देकर रेलवे से मूल जगह की जमीन खाली करवाई जाएगी, ताकि कॉरिडोर और उसके आसपास की सुविधाओं का निर्माण संभव हो सके. विभागीय मंजूरी के बाद निर्माण शुरू शिव कॉरिडोर के निर्माण को औपचारिक रूप से शुरू करने के लिए जिला समाहर्ता ने राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रधान सचिव को नि:शुल्क भू-स्थानांतरण का पत्र भेज दिया है. इसके बाद विभाग की मंजूरी मिलेगी और फिर भूमि एक्सचेंज की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. प्रक्रिया पूरी होने के बाद, सुल्तानगंज में भी उज्जैन और वाराणसी की तरह शिव कॉरिडोर का निर्माण संभव हो जाएगा, जिसका लंबे समय से स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं को इंतजार था. गंगा की धारा मोड़ने का काम भी जारी शिव कॉरिडोर के साथ-साथ सुल्तानगंज में गंगा नदी की पुरानी धारा को पुरानी सीढ़ी घाट की ओर मोड़ने की योजना पर भी काम चल रहा है. जल संसाधन विभाग बड़ी परियोजना के तहत अरबों रुपये की लागत से इस कार्य को आगे बढ़ा रहा है. इस योजना के पूरा होने पर गंगा नदी का बहाव पुराने रास्ते की ओर हो जाएगा और श्रावणी मेला के दौरान कांवरियों को उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान का सुरक्षित स्थान सीधे पुरानी सीढ़ी घाट के पास मिलेगा. यह बदलाव श्रद्धालुओं के लिए राहत की बात माना जा रहा है. सुल्तानगंज की बदलती पहचान जानकारों का मानना है कि शिव कॉरिडोर सिर्फ एक धार्मिक स्थल का विस्तार नहीं होगा, बल्कि यह सुल्तानगंज की पहचान को बदलने वाली परियोजना साबित होगी. उज्जैन और वाराणसी की तर्ज पर विकसित यह कॉरिडोर यहां के धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देगा. इससे न सिर्फ श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. कॉरिडोर के बनने से श्रद्धालुओं को और सुविधाएं, बेहतर प्रबंध और सुरक्षा मिलेगी जिससे सुल्तानगंज धार्मिक मानचित्र पर एक नई ऊंचाई हासिल कर सकता है. क्या आगे का काम होगा? अब सिर्फ विभागीय मंजूरी और भूमि एक्सचेंज की प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है. मंजूरी मिलते ही भूमि की अदला-बदली और कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठेंगे. स्थानीय प्रशासन और योजना प्राधिकरण के अनुसार यह परियोजना सुल्तानगंज को धार्मिक पर्यटन और संस्कृति के केंद्र के रूप में एक नया चेहरा देगा. शिव कॉरिडोर के निर्माण और गंगा की धारा मोड़ने की योजना के पूरा होने से सुल्तानगंज सिर्फ एक धार्मिक नगर नहीं, बल्कि बड़ा आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र बनेगा.