samacharsecretary.com

भोजशाला: 2034 तक मंदिर निर्माण और सरस्वती मूर्ति की लंदन से वापसी का ऐलान

धार  वसंत पंचमी के मौके पर राजा भोज वसंतोत्सव समिति ने शुक्रवार को यहां एक धर्मसभा का आयोजन किया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 2034 में भोजशाला के निर्माण को एक हजार साल पूरे हो रहे हैं। इस बीच भोजशाला का मुकदमा हमें जीतना है और यहां मां सरस्वती के भव्य मंदिर का निर्माण करना है। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि लंदन के एक म्यूजियम में मां सरस्वती की मूर्ति है। उसे देश में वापस लाना है। भोजशाला मामले में जो याचिका लगी है उसका मुकदमा जीतना है।  मथुरा, काशी और धार में बने भव्य मंदिर : आलोक कुमार आलोक कुमार ने कहा कि भोजशाला में 992 साल पहले मंदिर बना था। 2034 में जब इसके एक हजार साल जब पूरे होंगे तब इसका निर्माण भी राम मंदिर की तर्ज पर होना चाहिए। यहां मां सरस्वती की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा होनी चाहिए। अब समय आ गया है कि मथुरा काशी और धार में भव्य मंदिर बने। देश के केंद्र में स्थित धार को ज्ञान का केंद्र बनाना है। सभी ये संकल्प लें।  मौलाना कमाल की मौत अहमदाबाद में हुई विहिप प्रमुख ने कहा कि मुगलकाल में इस मंदिर को तोड़ा गया। हिंदुओं को अपमानित किया गया। देश की तीन हजार कब्रों में कुछ नहीं है। वे खाली हैं। धार में भी ऐसा ही है। मौलाना कमाल की मौत अहमदाबाद में हुई। उनकी मौत के 200 साल बाद भोजशाला में उनकी कब्र होने की बात कही गई। इस भोजशाला की लड़ाई हिंदू समाज की है। इसे सभी को मिलकर लड़ना है। आलोक कुमार ने कहा कि जो भी इस देश में रहते हैं, उन्हें देश का सम्मान करना चाहिए। कुछ लोगों को वंदे मातरम बोलने में हिचकिचाहट होती है। देश के लिए कई क्रांतिकारियों ने वंदे मातरम बोलकर फांसी के फंदे को चूमा। हिंदू धर्म सभी धर्मों का सम्मान करता है। शांति में विश्वास रखता है। यह हमारी ताकत है, कमजोरी नहीं। जिन्हें भोजशाला से ज्यादा प्रेम वो हिंदू धर्म अपना लें : अवधेशानंद गिरि स्वामी अवधेशानंद गिरि ने कहा कि भोजशाला की पावन भूमि हिंदुओं की भूमि है। यहां का मंदिर और परिसर भी हमारा है। यहां पर कोई कब्जा नहीं कर सकता। राजा भोज ने यहां भोजशाला का निर्माण कराया था, ये कभी भी मुगलों की भूमि नहीं हो सकती। जिसे भोजशाला से ज्यादा प्रेम है तो वे हिंदू धर्म अपना लें और हर मंगलवार पूजा करने आ जाएं। देश के मुस्लिम कोई अरब से नहीं आए हैं, उनके पूर्वजों का धर्मांतरण किया गया है। वे भी हमारे भाई हैं। उन्होंने कहा कि 2014 को देश सही मायने में आजाद हुआ है। उसने पहले हिंदुओं को दबाया जाता रहा है। जो सनातन की बात करेगा, वही अब देश पर राज करेगा। हमने जो हिंदू राष्ट्र का सपना देखा है वो पूरा होने जा रहा है। 

उज्जैन में तनाव चरम पर, हिंसा जारी; पुलिस ने जताई चिंता

उज्जैन मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी। गुरुवार शाम तोड़फोड़ और आगजनी के बाद लगातार दूसरे दिन शुक्रवार की दोपहर भी स्थिति बिगड़ गई। उपद्रवियों ने पथराव और आगजनी करके दोबारा माहौल बिगाड़ने की कोशिश की। हालांकि, पुलिस ने तेजी से स्थिति को नियंत्रण में लिया और आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है।   तराना तहसील में पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब राम मंदिर के पास सुखला गली में एक हिंदूवादी नेता सोहेल ठाकुर पर कुछ लोगों ने हमला कर दिया। इसके बाद यहां हंगामा बढ़ने लगा और शाम को कुछ लोगों ने पथराव और आगजनी कर दी। पुलिस ने किसी तरह स्थिति को काबू करते हुए बीएनएस की धारा 163 लागू कर दी थी। शुक्रवार को बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव किया और वहां हनुमान चालीसा का पाठ किया। एक फरार आरोपी की गिरफ्तारी और उसके मकान पर बुलडोजर ऐक्शन की मांग को लेकर वे धरने पर बैठे थे। पुलिस ने उन्हें समझा-बुझाकर शांत किया। स्थानीय विधायक महेश परमार भी थाने पहुंचे और पुलिस से उचित कार्रवाई की मांग की। दोपहर में फिर बवाल दोपहर में एक बार फिर माहौल बिगड़ गया। अज्ञात लोगों ने बस स्टैंड के पास गुरुवार शाम तोड़फोड़ का शिकार हुई एक बस को आग के हवाले कर दिया। नई बाखल ताकिया कलीम इलाके में पथराव किया गया। एक मोटरसाइकिल को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। कुछ घरों के शीशे टूटे हैं। महिलाओं ने गाली-गलौच और बदसलूकी के आरोप लगाए। लोग बोले- अचानक आई भीड़ और पथराव करके भागी स्थानीय लोगों का कहना है कि 25-30 लोगों की भीड़ अचानक मोहल्ले में घुसी और तोड़फोड़ करते हुए निकल गई। सूचना पाते ही पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं और स्थिति को नियंत्रण में लिया। पुलिस ने आरोपियों की पहचान शुरू कर दी है। इससे पहले पुलिस ने 5 लोगों को गिरफ्तार किया था। मुख्य आरोपी की पहचान कर ली गई है, लेकिन वह फरार है।  

PM स्वनिधि क्रेडिट कार्ड स्कीम की शुरुआत, मोदी ने केरल में किया शुभारंभ

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को केरल में विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन व शिलान्यास किया और नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। उन्होंने यहां सीएसआईआर-एनआईआईएसटी नवोन्मेष, प्रौद्योगिकी और उद्यम केंद्र (Innovation, Technology and Entrepreneurship Center) की आधारशिला रखी और ‘पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड’ की शुरुआत की, जो यूपीआई से जुड़ी ब्याज मुक्त रिवॉल्विंग क्रेडिट सुविधा है। मोदी ने पीएम स्वनिधि योजना के तहत कई लाभार्थियों को ऋण राशि और क्रेडिट कार्ड भी वितरित किए। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य केरल और पूरे देश के गरीबों का कल्याण करना है। यह पहल उन विक्रेताओं को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई है, जिन्होंने योजना के तहत पहली दो किस्तों के लोन पूरी तरह चुका दिए हैं। क्रेडिट अनुशासन का पालन करके, विक्रेता 20 से 50 दिनों की ब्याज-मुक्त क्रेडिट अवधि का लाभ उठा सकते हैं, जिससे उनकी नकदी प्रवाह बेहतर होगी और वित्तीय योजना मजबूत होगी। योजना के कार्यान्वयन और निगरानी की जिम्मेदारी आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) और वित्तीय सेवा विभाग (DFS) की संयुक्त जिम्मेदारी होगी। DFS का काम बैंकों/वित्तीय संस्थानों और उनके जमीनी कर्मचारियों के माध्यम से लोन/क्रेडिट कार्ड तक पहुंच को आसान बनाना होगा। मोदी ने तीन अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेन और एक त्रिशूर-गुरुवायूर यात्री ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिससे केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के बीच क्षेत्रीय रेल संपर्क को मजबूत करने में मदद मिलेगी। क्या हैं पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड की विशेषताएं क्रेडिट सीमा: पीएम स्वनिधि क्रेडिट कार्ड की कुल क्रेडिट सीमा ₹30,000 (तीस हज़ार रुपये) होगी। हालाँकि, शुरुआत में कार्यशील सीमा ₹10,000 तय की जाएगी, जिसे संतोषजनक कार्ड इस्तेमाल देखने के बाद धीरे-धीरे बढ़ाकर ₹30,000 कर दी जाएगी। कार्ड की वैधता: कार्ड जारी होने की तारीख से पांच साल की अवधि के लिए वैध होगा। ब्याज-मुक्त अवधि: जारीकर्ता (बैंक/संस्था) अपनी मौजूदा नीति के अनुसार 20-50 दिनों की ब्याज-मुक्त क्रेडिट अवधि देंगे। यूपीआई लिंकेज: क्रेडिट कार्ड को लाभार्थी के यूपीआई आईडी से जोड़ने की सुविधा होगी। इससे विक्रेता अपनी क्रेडिट कार्ड सीमा का इस्तेमाल यूपीआई के जरिए भुगतान करने में कर सकेंगे। ईसीएस/एनएसीएच/ऑटो पे सुविधा: जारीकर्ता "पूरी देय राशि" के भुगतान के लिए कार्डधारकों को इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग सर्विस (ईसीएस)/एनएसीएच/ऑटो पे की सुविधा देंगे। यह सुविधा नियत तारीख पर ग्राहक के बैंक खाते से सीधे क्रेडिट कार्ड बिल का भुगतान करने में मदद करेगी। अंतर्राष्ट्रीय और विदेशी मुद्रा लेनदेन नहीं: इस कार्ड पर अंतर्राष्ट्रीय और विदेशी मुद्रा (फॉरेक्स) के लेनदेन की अनुमति नहीं होगी। नकद निकासी नहीं: इस कार्ड से एटीएम या किसी भी प्वाइंट ऑफ सेल (POS) मशीन के जरिए नकद निकासी की अनुमति नहीं होगी। एमसीसी प्रतिबंध: कार्ड पर कुछ विशेष व्यापार श्रेणी कोड (एमसीसी) पर प्रतिबंध होंगे (जैसे शराब, जुआ, विदेशी एयरलाइंस, कार किराए पर देने की सेवा, अंतर्राष्ट्रीय होटल चेन, कुछ प्रत्यक्ष विपणन व्यवसाय आदि), जैसा कि मंत्रालय/कार्ड जारीकर्ताओं द्वारा तय किया जाएगा। अन्य सभी प्रकार के व्यापारियों पर इसके इस्तेमाल की अनुमति होगी। प्रतिबंधित एमसीसी की एक उदाहरण सूची अनुबंध 1 में दी गई है। चक्रीय (रिवॉल्विंग) सुविधा: यह कार्ड एक चक्रीय लोन सुविधा की तरह काम करेगा। इससे उधारकर्ता स्वीकृत सीमा तक धनराशि का उपयोग कर सकते हैं, नियमों के अनुसार चुका सकते हैं, और ज़रूरत पड़ने पर स्वीकृत सीमा के भीतर उपलब्ध क्रेडिट का दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं। ईएमआई सुविधा: जारीकर्ता अपने विवेक से, कार्डधारकों को एक बिलिंग चक्र से न्यूनतम ₹2,500 की बिल राशि को ईएमआई में बदलने की अनुमति दे सकते हैं, बशर्ते कि अनुरोध भुगतान की नियत तारीख से पहले किया गया हो। इस सुविधा पर अधिकतम ब्याज दर प्रति माह 1.5% तक होगी और इसमें बिना किसी जुर्माने या अतिरिक्त शुल्क के पूर्व भुगतान (प्रीपेमेंट) का विकल्प भी शामिल होगा। अन्य विशेषताएँ: · यह कार्ड एक खुदरा (रिटेल) क्रेडिट कार्ड होगा, व्यापार या बिजनेस कार्ड नहीं। · संबंधित कार्ड जारीकर्ता की नीति के अनुसार इनाम अंक (रिवार्ड पॉइंट) दिए जाएंगे। · बिल जनरेशन और भुगतान की नियत तारीख संबंधित कार्ड जारीकर्ता की नीति के अनुसार होगी। · रुपे क्रेडिट कार्ड – क्लासिक वेरिएंट पर लागू होने वाली सभी अतिरिक्त विशेषताएँ, जैसी कि संबंधित कार्ड जारीकर्ता द्वारा पेश की जाती हैं, कार्डधारकों को उपलब्ध होंगी। कौन है पात्र सभी स्ट्रीट वेंडर जिन्होंने अपना दूसरा किस्त का लोन सफलतापूर्वक चुका दिया है और पीएम स्वनिधि योजना के तहत तीसरे किस्त के लोन के लिए पात्र हैं। वे स्ट्रीट वेंडर जिन्होंने पहले ही तीसरे किस्त का लोन ले रखा है – चाहे वह लोन वर्तमान में चालू हो या पूरी तरह चुका दिया गया हो – वे भी इस क्रेडिट कार्ड सुविधा के लिए पात्र हैं। आवेदक की उम्र आवेदन के समय 21 से 65 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यह क्रेडिट कार्ड सुविधा तीसरे किस्त के लोन के अतिरिक्त प्रदान की जाएगी। स्ट्रीट वेंडर अपनी पात्रता और पसंद के अनुसार तीसरा किस्त का लोन, क्रेडिट कार्ड सुविधा, या दोनों ले सकते हैं।

ईरान को ट्रंप की धमकी, US ने भेजी बड़ी सेना, शिया देश ने किया कड़ा जवाब

तेहरान: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ईरान को धमकी दी है. उन्होंने घोषणा की है कि अमेरिका का नौसैनिक ‘आर्माडा’ ईरान की ओर बढ़ रहा है, वहीं ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि उनकी उंगली भी ट्रिगर पर है. दोनों तरफ से यह बयान तब आया जब बड़े पैमाने पर ईरान में विरोध प्रदर्शन हुए हैं. ट्रंप ने जोर देते हुए कहा कि वह नहीं चाहते कि बल प्रयोग करना पड़े, लेकिन यह तैनाती ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए है, क्योंकि देश के अंदर की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित कर रही हैं. ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, ‘हमारे पास एक विशाल सैन्य बेड़ा है जो ईरान की ओर बढ़ रहा है. देखते हैं आगे क्या होता है. हम उन पर बहुत करीब से नजर रख रहे हैं.’ एक अन्य मौके पर उन्होंने कहा, ‘हमारे पास एक आर्माडा है, जो उस दिशा में जा रहा है, और शायद हमें इसका इस्तेमाल न करना पड़े.’ न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन और कई गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर्स आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट पहुंच सकता है. अपने एयरबेस को बचाने के लिए क्या करेगा अमेरिका? एक अधिकारी ने कहा कि मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों पर संभावित ईरानी हमले से बचाव के लिए अतिरिक्त एयर-डिफेंस सिस्टम पर भी विचार किया जा रहा है. एशिया-प्रशांत क्षेत्र से पिछले हफ्ते शुरू हुई ये गतिविधियां US को अमेरिकी बलों की रक्षा और किसी भी तनाव की स्थिति का जवाब देने के लिए विकल्प देती हैं. ट्रंप ने ईरान को प्रदर्शनकारियों की हत्या या परमाणु कार्यक्रम फिर से शुरू करने के खिलाफ चेतावनी दोहराई, उन्होंने कहा कि अगर ईरान ने अमेरिकी हमलों के बाद अपने परमाणु क्षमता को फिर से बनाने की कोशिश की तो अमेरिका कार्रवाई करेगा. उन्होंने कहा, ‘अगर वे फिर से ऐसा करने की कोशिश करते हैं, तो हम वहां भी उतनी ही आसानी से हमला करेंगे.’ 'वैध लक्ष्य' वाली चेतावनी बता दें कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और अमेरिका सहित कई देशों ने एक आतंकवादी संगठन के रूप में चिन्हित किया है और इस पर प्रतिबंधित भी लगाए गए हैं। ईरान में जारी हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान भी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स द्वारा क्रूरता की खबरें सामने आई हैं। इस बीच एक अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, जनरल अली अब्दुल्लाही अलीबादी, जो ईरानी संयुक्त कमान मुख्यालय का नेतृत्व करते हैं, ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया, तो अमेरिका के सभी ठिकाने ईरान के सशस्त्र बलों के लिए वैध लक्ष्य होंगे। बहुत बड़ी सेना ईरान की ओर इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कहकर हलचल मचा दी है कि एक बहुत बड़ी सेना ईरान की ओर बढ़ रही है। दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम से लौटते समय, ट्रंप ने एयर फॉर्स वन पर पत्रकारों से कहा कि अमेरिका सिर्फ एहतियात के तौर पर ईरान की ओर एक विशाल बेड़ा भेज रहा है। उन्होंने कहा, "मैं नहीं चाहता कि कुछ भी हो लेकिन हम उन पर बहुत करीब से नजर रख रहे हैं।” धमकियों का दौर जारी इससे पहले दोनों देशों के बीच धमकियों का दौर जारी है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की धमकी के बाद बीते मंगलवार को कहा है कि अगर ईरान ने उनकी हत्या कराई तो अमेरिका ईरान का नामोनिशान मिटा देगा। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘‘मेरे बहुत सख्त निर्देश हैं कि अगर कुछ होता है तो वे उन्हें नक्शे से मिटा देंगे।’’ इससे पहले ईरान ने ट्रंप को देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ किसी प्रकार की कार्रवाई करने पर चेतावनी दी थी। ईरान के सशस्त्र बलों के प्रवक्ता जनरल अबुलफजल शेकारची ने कहा, ‘‘ट्रंप जानते हैं कि अगर हमारे नेता की ओर हाथ भी बढ़ाया गया तो हम न केवल उस हाथ को काट देंगे बल्कि उनकी दुनिया में आग लगा देंगे।’’ ईरान में प्रदर्शन के बाद सैन्य तैनाती ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी धमकियों के चलते ईरान ने प्रदर्शनकारियों की फांसी रोक दी, उन्होंने कहा कि अधिकारियों ने करीब 840 फांसी रद्द कर दीं. रॉयटर्स के मुताबिक ट्रंप ने कहा, ‘मैंने कहा, अगर आप उन लोगों को फांसी देंगे, तो आपको पहले से भी ज्यादा जोरदार झटका लगेगा. यह आपके परमाणु कार्यक्रम पर किए गए हमारे हमले के मुकाबले कुछ भी नहीं होगा.’ अमेरिका की यह सैन्य तैनाती ईरान में उस अशांति के बीच हो रही है, जो दिसंबर के अंत में शुरू हुई थी और देशभर में फैल गई थी, हालांकि सख्त कार्रवाई के बाद यह कम होती दिख रही है. अमेरिका स्थित ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक कम से कम 5,002 लोगों की मौत हुई है, जबकि ईरान सरकार ने 3,117 मौतों की पुष्टि की है.

भारत का ₹26,000 करोड़ का गेमचेंजर प्लान: न ब्रह्मोस, न राफेल, फिर भी चीन-पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ेंगी

बेंगलुरु  भारत ग्‍लोबल सिक्‍योरिटी कंडीशंस को देखते हुए अपने डिफेंस सिस्‍टम को मजबूत करने के साथ ही उसे कटिंग एज टेक्‍नोलॉजी की मदद से अपडेट करने में जुटा है. खासकर एरियल थ्रेट से निपटने के लिए हजारों-लाखों करोड रुपये का निवेश किया जा रहा है. एक तरफ जहां ब्रह्मोस और 5th जेनरेशन फाइटर जेट पर फोकस किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ एयर डिफेंस सिस्‍टम पर भी गंभीरता से ध्‍यान दिया जा रहा है. अब भारत एक और सेगमेंट में काम कर रहा है. दुश्‍मनों की हर गतिविधि पर बाज से पैनी नजर रखने के लिए स्‍पेस में स्‍पाई सैटेलाइट स्‍थापित करने की योजना पर काम किया जा रहा है. भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को अंतरिक्ष के मोर्चे पर नई ऊंचाइयों तक ले जाने की तैयारी में है. सरकार ने ₹26,000 करोड़ की लागत से 52 अत्याधुनिक सैन्य निगरानी सैटेलाइट का विशाल बेड़ा तैनात करने की योजना बनाई है, जिसे ‘स्पेस-बेस्ड सर्विलांस फेज-III’ प्रोग्राम के तहत 2029 तक पूरा किया जाएगा. यह अब तक का भारत का सबसे बड़ा सैन्य अंतरिक्ष निवेश माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य देश की सीमाओं और समुद्री क्षेत्रों की चौबीसों घंटे निगरानी को मजबूत करना है. इस सैटेलाइट ग्रुप की सबसे बड़ी विशेषता इसकी नाइट-विजन और ऑल-वेदर निगरानी क्षमता है. इनमें लगे अत्याधुनिक इंफ्रारेड सेंसर रात के अंधेरे, बादलों और खराब मौसम के बावजूद जमीन पर गतिविधियों की स्पष्ट तस्वीर देने में सक्षम होंगे. इससे भारत को पहली बार ऐसी निर्बाध निगरानी मिलेगी, जो दिन-रात और हर मौसम में लगातार जारी रह सकेगी. यह तकनीक खास तौर पर सीमावर्ती इलाकों और समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था को नई धार देगी. ‘इंडियन डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इन सैटेलाइट्स में इंफ्रारेड सेंसर के साथ-साथ इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कैमरे और सिंथेटिक एपर्चर रडार (SAR) भी लगाए जाएंगे. यह मल्टी-सेंसर व्यवस्था अलग-अलग परिस्थितियों में हाई क्‍वालिटी की इमेजरी और डेटा उपलब्ध कराएगी. इससे किसी क्षेत्र पर बार-बार नजर रखने का समय अंतराल घटेगा और सेना को ज्यादा तेजी से खुफिया जानकारी मिल सकेगी. सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि कम री-विजिट टाइम का मतलब है कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तत्काल प्रतिक्रिया संभव हो सकेगी. कब लॉन्‍च होगी पहली सैटेलाइट? योजना के अनुसार, इस बेड़े का पहला उपग्रह अप्रैल 2026 तक लॉन्च किया जाएगा और अगले तीन वर्षों में पूरी प्रणाली तैनात कर दी जाएगी. ये उपग्रह अलग-अलग कक्षाओं में काम करेंगे – लो-अर्थ ऑर्बिट से लेकर जियोस्टेशनरी ऑर्बिट तक. लो-अर्थ ऑर्बिट उपग्रह हाई रेजोल्यूशन और लगातार पास देने में मदद करेंगे, जबकि जियोस्टेशनरी सैटेलाइट संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार नजर बनाए रखेंगे. इस मल्‍टी-लेयर्ड तैनाती से सीमाओं और समुद्री क्षेत्रों में किसी भी तरह के ब्लाइंड स्पॉट की संभावना बेहद कम हो जाएगी. इस महत्वाकांक्षी परियोजना में इसरो 21 उपग्रह विकसित करेगा, जबकि शेष 31 उपग्रह निजी क्षेत्र की कंपनियां बनाएंगी. यह किसी भी भारतीय सैन्य अंतरिक्ष कार्यक्रम में निजी क्षेत्र की अब तक की सबसे बड़ी भागीदारी होगी. इससे रक्षा और अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ देश के निजी उद्योगों को अत्याधुनिक तकनीक विकसित करने का अवसर मिलेगा. सरकार इसे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों के अनुरूप अहम कदम मान रही है. हर कदम पर पैनी नजर एक बार प्रणाली पूरी तरह चालू होने के बाद इसका संचालन और नियंत्रण रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (Defence Space Agency) के पास होगा. इससे सभी उपग्रहों से मिलने वाले डेटा को एकीकृत कर सैन्य अभियानों में तेजी और सटीकता लाई जा सकेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे जमीनी बलों, वायुसेना और नौसेना के बीच समन्वय और बेहतर होगा, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनेगी. इस परियोजना की जरूरत हालिया सैन्य अभियानों से सामने आई सीख से जुड़ी है. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि आधुनिक युद्ध में उपग्रह आधारित खुफिया जानकारी कितनी निर्णायक भूमिका निभाती है. रियल-टाइम डेटा से दुश्मन की गतिविधियों, सैनिक जमावड़े और हथियारों की तैनाती पर सटीक नजर रखना संभव हुआ. नई उपग्रह प्रणाली इस क्षमता को और मजबूत करेगी. ये सैटेलाइट जमीन पर माइक्रो चेंज की पहचान करने में सक्षम होंगे. जैसे सीमावर्ती इलाकों में नई संरचनाओं का निर्माण, सैनिकों की तैनाती या समुद्र में जहाजों और पनडुब्बियों की आवाजाही. कम समय में मिलने वाले अपडेट्स से कमांडरों को स्थिति की स्पष्ट तस्वीर मिलेगी और वे तेजी से रणनीतिक फैसले ले सकेंगे. इससे भारत की प्रतिरोधक क्षमता (डेटरेंस) भी मजबूत होगी.

रायपुर :राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने अवैध रेत खनन और परिवहन के मामलों में सख्ती दिखाई

रायपुर  जिले में लंबे समय से चल रहे अवैध रेत खनन और परिवहन के मामलों को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी के निर्देश पर खनन माफिया पर कार्रवाई नहीं करने वाले अफसरों पर अब शिकंजा कसा गया है। मामले की उच्चस्तरीय जांच के लिए जिला मजिस्ट्रेट और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के प्रतिनिधि संयुक्त रूप से जांच करेंगे और 42 दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। जिला खनिज विभाग ने बीते एक वर्ष में रेत, मुरुम, गिट्टी और फर्शी पत्थर के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण के मामलों में कार्रवाई करते हुए 1,132 वाहनों को पकड़ा। साथ ही पोकलेन और चेन माउंटेन सहित करीब 40 मशीनें जब्त की गईं। इन प्रकरणों में कुल तीन करोड़ 85 लाख रुपये का अर्थदंड वसूला गया। इसके बावजूद किसी भी गंभीर मामले में कठोर कार्रवाई नहीं की गई। अधिकांश मामलों में मौके पर जुर्माना वसूल कर प्रकरण समाप्त कर दिया गया और एनजीटी को भेजा ही नहीं गया। एनजीटी के स्पष्ट निर्देश एनजीटी ने कहा है कि अवैध रेत खनन केवल राजस्व की चोरी नहीं, बल्कि गंभीर पर्यावरणीय खतरा है। ऐसे मामलों में सिर्फ वाहन जब्ती या जुर्माना पर्याप्त नहीं है। दोषियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई के साथ पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति भी अनिवार्य है। इसी आधार पर एनजीटी ने सीईसीबी के सदस्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि अवैध रेत खनन में संलिप्त व्यक्तियों और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाए और 42 दिनों के भीतर रिपोर्ट एनजीटी की केंद्रीय पीठ, भोपाल में प्रस्तुत की जाए। मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल 2026 को तय की गई है। वाहन जब्त, माफिया पर असर नहीं एनजीटी के न्यायिक सदस्य श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. ए. सेंथिल वेल की पीठ ने टिप्पणी की कि खनिज विभाग ने अवैध परिवहन में लगे कई वाहन जब्त किए, लेकिन वास्तविक अपराधियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। कुछ मामलों को आधिकारिक फाइलों से हटाने की बात भी सामने आई है। इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। जिम्मेदारों की अनदेखी एनजीटी ने पाया कि जिला खनिज विभाग के संज्ञान में मामला आने के बाद भी संबंधित अधिकारियों ने कार्रवाई के बजाय अनदेखी की। इसी कारण सीईसीबी के सदस्य सचिव, खनिज विभाग के उप निदेशक छत्तीसगढ़ और जिला खनन अधिकारी रायपुर को प्रतिवादी बनाया गया है। नियमों की अवहेलना नियमों के अनुसार स्वीकृत क्षेत्र से बाहर खनन, भारी मशीनों का उपयोग, नदी प्रवाह से छेड़छाड़ और पर्यावरण क्षति जैसे मामलों में एफआइआर दर्ज करना अनिवार्य है। अवैध खनन गंभीर अपराध है, जिसमें दो से पांच साल की सजा और पांच लाख रुपये या उससे अधिक का जुर्माना हो सकता है। इसके अतिरिक्त एनजीटी द्वारा पर्यावरणीय क्षति के लिए अलग से भारी मुआवजा भी लगाया जाता है, इसके बावजूद जिला स्तर पर मामलों को एनजीटी तक नहीं भेजा गया। हरदीडीह एनीकट का मामला हरदीडीह एनीकट का गेट बार-बार खोलकर खनन करने का खुलासा नईदुनिया ने किया था। यहां रेत खदान में प्रदेश हाईवा परिवहन संघ के अध्यक्ष विनोद अग्रवाल द्वारा खनन का मामला सामने आया। खबर के अगले ही दिन नदी में चेन माउंटेन उतारकर फिर से अवैध खनन शुरू हो गया। न एफआइआर दर्ज हुई और न ही मशीनें पूरी तरह जब्त की गईं। खनिज विभाग ने प्रकरण बनाया, लेकिन तीन चेन माउंटेन और एक पनडुब्बी मशीन मौजूद होने के बावजूद कार्रवाई केवल एक चेन माउंटेन और पनडुब्बी मशीन तक सीमित रही। उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश के दतिया में इसी तरह के मामले में एनजीटी ने 17 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।

योगी सरकार के विजन के अनुरूप उद्योग–शिक्षा सहभागिता से बनेगा सशक्त स्किल इकोसिस्टम

यूपी में कौशल क्रांति को मिलेगी नई रफ्तार एनएईसी-एससीवीटी के बीच एमओयू, एक लाख युवाओं को मिलेगा रोजगारपरक प्रशिक्षण योगी सरकार के विजन के अनुरूप उद्योग–शिक्षा सहभागिता से बनेगा सशक्त स्किल इकोसिस्टम पश्चिमी यूपी के युवाओं को मिलेगा उद्योग-आधारित प्रशिक्षण महिला सशक्तिकरण को मिलेगा बढ़ावा, प्रशिक्षणार्थियों में आधी भागीदारी महिलाओं की लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए निरंतर ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में जनपद गौतम बुद्ध नगर स्थित नोएडा अपैरल एक्सपोर्ट क्लस्टर (एनएईसी) और राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद (एससीवीटी) के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। यह एमओयू प्रदेश में कौशल विकास, व्यावसायिक शिक्षा और उद्यमशीलता को नई दिशा देने वाला साबित होगा। इस एमओयू के तहत एनएईसी द्वारा पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 18 जनपदों के 128 विकास खंडों और 10,323 ग्रामों से जुड़े एक लाख अभ्यर्थियों को आगामी पांच वर्षों में 28 सेक्टरों में अल्पकालीन कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। इनमें से 70,000 अभ्यर्थियों को औद्योगिक इकाइयों में प्रशिक्षण के बाद रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। खास बात यह है कि कुल प्रशिक्षणार्थियों में 50 प्रतिशत महिलाएं होंगी, जिससे महिला सशक्तिकरण को भी बल मिलेगा। एनएईसी बनेगा स्किल ट्रेनिंग का केंद्र देश के प्रमुख अपैरल निर्यात क्लस्टर के रूप में एनएईसी की सबसे बड़ी विशेषता गारमेंट उद्योग की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण उपलब्ध कराना होगा। प्रशिक्षण से लेकर प्लेसमेंट तक की पूरी प्रक्रिया एनएईसी द्वारा अपने डिजिटल पोर्टल “कौशल गंगा” के माध्यम से प्रबंधित की जाएगी। इसके साथ ही “कौशल आजीविका” और “कौशल बाजार” पोर्टल भी प्रशिक्षणार्थियों को आजीविका और बाजार से जोड़ने में सहायक होंगे। एससीवीटी करेगा मूल्यांकन और प्रमाणन इस सहभागिता में राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद की अहम भूमिका होगी। एससीवीटी, जो भारत सरकार की राष्ट्रीय व्यावसायिक शिक्षा एवं प्रशिक्षण परिषद की मान्यता प्राप्त अवार्डिंग बॉडी है, सभी प्रशिक्षणार्थियों के मूल्यांकन और प्रमाणन का कार्य करेगी। एनएईसी द्वारा एससीवीटी को प्रत्येक प्रशिक्षणार्थी के लिए प्रमाणन शुल्क के रूप में ₹1200 दिए जाएंगे। एससीवीटी अपने स्तर से भी पाठ्यक्रम तैयार कर उन्हें राष्ट्रीय परिषद से अनुमोदित कराएगी। कौशल से आत्मनिर्भरता प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि योगी सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का हर युवा हुनरमंद बने और उसे रोजगार के लिए भटकना न पड़े। एनएईसी व एससीवीटी के बीच हुआ यह एमओयू उद्योग व शिक्षा के बीच मजबूत सेतु का कार्य करेगा। इससे न केवल युवाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि उत्तर प्रदेश देश का स्किल हब बनकर उभरेगा।  एमओयू हस्ताक्षरित किए जाने के अवसर पर प्रमुख सचिव व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता डॉ. हरिओम तथा विशेष सचिव एवं निदेशक एससीवीटी अभिषेक सिंह भी उपस्थित रहे। उन्होंने इस पहल को प्रदेश की कौशल नीति के लिए मील का पत्थर बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा, नेताजी का उद्घोष “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” स्वतंत्रता आंदोलन का मंत्र बन गया था

नेताजी सुभाष चंद्र बोस आज भी देशविरोधी तत्वों के सामने न झुकने की प्रेरणा प्रदान करते हैं- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने कहा, नेताजी का उद्घोष “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” स्वतंत्रता आंदोलन का मंत्र बन गया था सुभाष चंद्र बोस का नाम लेते ही सच्चे भारतीय के मन में देशप्रेम की भावना उत्पन्न हो जाती है – मुख्यमंत्री  भारत माता के सच्चे सपूत और स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक थे नेताजी – मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर पर राजधानी में आयोजित कार्यक्रम में सम्मिलित हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  लखनऊ “नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भारत की आजादी का एक ऐसा नाम है, जो प्रत्येक भारतीय के मन में सर्वोच्च सम्मान के साथ-साथ किसी भी विपरीत परिस्थिति में देशद्रोही व देशविरोधी तत्वों के सामने न झुकने के दृढ़ संकल्प की प्रेरणा प्रदान करता है। भारत माता के सच्चे सपूत नेताजी का नाम लेते ही हर भारतीय के मन में श्रद्धा व सम्मान के साथ राष्ट्रप्रेम की भावना स्वतः उत्पन्न हो जाती है।” मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ये उद्गार नेताजी सुभाष चंद्र बोस की पावन जयंती के अवसर पर नेताजी सुभाष चौक, हजरतगंज, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। मुख्यमंत्री ने नेताजी को स्वतंत्रता आंदोलन के महानायक की संज्ञा देते हुए आजादी की लड़ाई में उनके अमूल्य योगदान के लिए कृतज्ञता व्यक्त की और उनके चित्र पर प्रदेशवासियों की ओर से श्रद्धासुमन अर्पित किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि नेताजी का “तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा” का आह्वान भारत की आजादी का मंत्र बन गया था। उनका एक-एक शब्द स्वतंत्रता आंदोलन का मंत्र बन जाता था। उनका “दिल्ली चलो” का उद्घोष हर भारतीय को प्रेरित करता है। उनका “कदम कदम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा…” गीत आज भी भारतीय सेना के दीक्षांत समारोह में बड़ी शान से गाया जाता है। ऐसा कौन भारतीय होगा, जिसके मन में नेताजी के प्रति श्रद्धा-सम्मान का भाव न हो। नेताजी ने महात्मा गांधी के नेतृत्व में चल रहे स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई दिशा प्रदान की थी। उन्होंने क्रांतिकारियों के सिरमौर के रूप में आजादी की लड़ाई का नेतृत्व किया। भारत के अंदर रहकर या भारत के बाहर, उन्होंने आजादी के लिए जो योगदान दिया, वह अविस्मरणीय है। जिस प्रकार उन्होंने जर्मनी, जापान तथा दुनिया के तमाम देशों में जाकर देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया, हम सबके लिए प्रेरणा की गाथा है। अपने संबोधन में नेताजी सुभाष चंद्र बोस के जीवन पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि नेताजी का जन्म 1897 में कटक में एक प्रतिष्ठित अधिवक्ता परिवार में हुआ था। बचपन में ही उन्हें उच्च शिक्षा के लिए ब्रिटेन भेज दिया गया। आईसीएस की परीक्षा में सर्वोच्च स्थान प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने अंग्रेजों की चाकरी करने से इनकार कर दिया और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। नेताजी का विराट व्यक्तित्व और देश के प्रति अमूल्य योगदान आज भी हम सबको प्रेरणा प्रदान करता है,  मैं नेताजी सुभाष चंद्र बोस के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं और उनके श्रीचरणों में प्रदेशवासियों की ओर से नमन करता हूं।  इस अवसर पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल और कार्यक्रम के आयोजक विधान परिषद के सदस्य अवनीश कुमार सिंह, पूर्व मंत्री डॉक्टर महेंद्र सिंह,  अंगद सिंह व पवन सिंह चौहान समेत अन्य गण्यमान्य लोग भी उपस्थित थे।

अमृत भारत एक्सप्रेस का विस्तार: पीएम मोदी ने शुरू कीं 3 नई ट्रेनें, किन शहरों को मिलेगा फायदा? पूरी डिटेल

तिरुवनंतपुरम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम से 4 नई ट्रेन सेवाओं को हरी झंडी दिखाई, जिसमें 3 अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें और एक पैसेंजर ट्रेन शामिल हैं। इनमें नागरकोइल-मंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस, तिरुवनंतपुरम-तांबरम अमृत भारत एक्सप्रेस, तिरुवनंतपुरम-चारलपल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस और त्रिशूर-गुरुवायुर पैसेंजर ट्रेन शामिल हैं। यह कार्यक्रम पुथरिकंदम मैदान में आयोजित हुआ, जहां पीएम मोदी ने इन ट्रेनों को वर्चुअल या सीधे फ्लैग ऑफ किया। अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें किफायती किराए पर बेहतर सुविधाएं, सुरक्षा और आराम प्रदान करती हैं, जो सामान्य मेल/एक्सप्रेस और प्रीमियम ट्रेनों के बीच की खाई को भरती हैं। नई ट्रेन सुविधाओं से दक्षिण भारत में रेल कनेक्टिविटी मजबूत होगी, खासकर केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच यात्रा आसान बनेगी। इन नई ट्रेनों से पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा। तिरुवनंतपुरम-तांबरम अमृत भारत एक्सप्रेस तमिलनाडु और केरल के बीच तेज और सुविधाजनक सफर सुनिश्चित करेगी। नागरकोइल-मंगलुरु ट्रेन कर्नाटक तक कनेक्शन बढ़ाएगी। तिरुवनंतपुरम-चारलपल्ली ट्रेन तेलंगाना से केरल को जोड़ेगी। त्रिशूर-गुरुवायुर पैसेंजर ट्रेन भक्तों और यात्रियों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी, क्योंकि गुरुवायुर मंदिर एक प्रमुख तीर्थस्थल है। पर्यटन क्षेत्र को होगा फायदा, बोले पीएम मोदी पीएम मोदी ने कहा कि ये पहल केरल के समग्र विकास को गति देंगी और पर्यटन क्षेत्र को फायदा पहुंचाएंगी। उन्होंने कहा, 'आज देश के दूसरे हिस्सों से केरल की रेल कनेक्टिविटी और सशक्त हुई है। थोड़ी देर पहले जिन अमृत भारत एक्सप्रेस रेल को हरी झंडी दिखाई गई है इससे केरल में ईज ऑफ ट्रेवल को बल मिलेगा। इस टूरिज्म सेक्टर को बहुत फायदा होगा।' यह कदम भारतीय रेलवे की अमृत भारत योजना का हिस्सा है, जो आधुनिक सुविधाओं वाली किफायती ट्रेनें शुरू कर यात्रियों को बेहतर अनुभव दे रही है। इससे लाखों यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा सस्ती और आरामदायक मिलेगी। यह दक्षिण भारत में रेल नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में अहम प्रयास है।  

BCCI से टकराव अब नहीं रुकेगा! बांग्लादेश को ‘NO’ का क्या असर पड़ेगा?

 नई दिल्ली बांग्लादेश क्रिकेट आज ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां से वापसी आसान नहीं. टी20 वर्ल्ड कप सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, यह वो मंच है, जहां टीमें अपनी पहचान, क्षमता और भविष्य गढ़ती हैं… और बांग्लादेश? वह आज वर्ल्ड क्रिकेट की मुख्यधारा से कटने की कगार पर है. सवाल सिर्फ इतना नहीं कि बांग्लादेश T20 वर्ल्ड कप खेलेगा या नहीं.असली सवाल यह है- खेलेगा तो कैसे? और न खेले तो फिर बचेगा क्या? सरकार की ‘ना’, BCB की मजबूरी और खिलाड़ियों के सपनों की बलि ढाका की काबिना ने सुरक्षा के नाम पर टीम को भारत भेजने से मना कर दिया है. BCB हाथ बांधे खड़ा है और खिलाड़ी? वे सिर्फ तमाशा देख रहे हैं- क्योंकि फैसला उनके हाथ में है ही नहीं. मेहदी हसन का बयान कि 'सरकार और BCB ही हमारे अभिभावक हैं. 'साफ समझाता है कि खिलाड़ियों के सपने किसी और की राजनीति में कुर्बान हो रहे हैं. 2000 में टेस्ट दर्जा पाया, अब क्या फिर हाशिए पर चला जाएगा? बांग्लादेश अभी तक कोई ICC खिताब नहीं जीत पाया. ऐसे में वर्ल्ड कप से बाहर होना सिर्फ एक टूर्नामेंट गंवाना नहीं-यह उनकी क्रिकेट इकोसिस्टम पर खुली चोट है. यह चोट सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहेगी-  – स्पॉन्सर हटेंगे – रैंकिंग गिरेगी – भविष्य के टूर्नामेंट खतरे में पड़ेंगे – 2031 में भारत के साथ संयुक्त मेजबानी का सपना भी धराशायी (इस विवाद की आंच 2031 ODI World Cup तक पहुंच सकती है, जिसे भारत और बांग्लादेश संयुक्त रूप से होस्ट करने वाले हैं.) ये चेतावनी कोई आम आलोचक नहीं- क्रिकेट इंडस्ट्री के अंदर बैठे लोग दे रहे हैं, जो जानते हैं कि वर्ल्ड कप जैसे मंच का ‘बैक-अप’ नहीं होता. ICC से टकराव, वैश्विक अलगाव का जोखिम…और समय निकलता जा रहा अगर बांग्लादेश मैदान में नहीं उतरा तो सबसे बड़ा सवाल उठेगा- आगे कैसे क्वालिफाई करेगा? निचली रैंकिंग वाले बोर्डों का हश्र सब जानते हैं. क्वालिफायर की कठिन राह, ICC से संबंधों में तनाव और वैश्विक क्रिकेट मंच पर कम होती मौजूदगी- ये दोनों खतरे बांग्लादेश के सामने खड़े हैं. खिलाड़ी सबसे बड़े शिकार- सपने टूट रहे, करियर डूब रहे सबसे ज्यादा नुकसान किसका? सरकार का? ICC का? नहीं, खिलाड़ियों का. परवेज इमोन, सैफ हसन- जिन्होंने कभी वर्ल्ड कप नहीं खेला… उनका सपना किसी और की लड़ाई में राख हो रहा है. और यह बात सच है- बांग्लादेशी खिलाड़ियों के पास IPL, BBL या काउंटी जैसी वैकल्पिक लीग नहीं. वर्ल्ड कप = एक्सपोजर + अनुभव + अस्तित्व…और वह छिन रहा है. क्या राजनीति ने क्रिकेट को निगल लिया? जवाब है- हां यह भ्रम छोड़ दीजिए कि खेल और राजनीति अलग हैं.यहाँ राजनीति ने क्रिकेट को सीधा जमीन पर पटक दिया है. सब कुछ तब शुरू हुआ जब KKR ने मुस्ताफिजुर रहमान को सुरक्षा के नाम पर IPL से बाहर किया. सरकार ने इसे राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का सवाल बना दिया और अब पूरा बोर्ड उसी रास्ते पर खड़ा है. उधर, ढाका-नई दिल्ली रिश्तों में दरार अब क्रिकेट में भी छलक रही है— – भारत का पुरुषों का दौरा रद्द – महिला टीम का दौरा रद्द – अब वर्ल्ड कप पर ताला! पश्चिमी देशों के दोहरे मानदंड भी आग में घी BCB अंदर से कहां तर्क ले रहा है? वही जगह जहां पश्चिमी क्रिकेट बोर्डों की पाखंड राजनीति है-  – ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, न्यूजीलैंड ने पाकिस्तान दौरे बार-बार रद्द किए – ICC ने सिर हिलाया – सबने सुरक्षा को प्राथमिकता माना तो फिर बांग्लादेश सुरक्षा बोले तो अपराध क्यों? यही बांग्लादेश का सबसे बड़ा सवाल और शायद सबसे आक्रामक हथियार भी. क्रिकेट को आगे करना होगा- वरना देश क्रिकेट से पीछे छूट जाएगा. बांग्लादेश क्रिकेट हमेशा विवादों में रहा है, लेकिन मैदान पर कभी-कभार चमक भी दिखाई है गवर्नेंस हालांकि अस्थिर रही है. नजमुल हसन पापोन के 12 साल के कार्यकाल में बांग्लादेश ने वनडे विश्व कप के क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई, चैम्पियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल तक पहुंचा और टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया तथा इंग्लैंड जैसी शीर्ष टीमों को हराने वाली उपलब्धियां दर्ज कीं.' लेकिन पिछले डेढ़ साल में प्रगति रुक गई. आज हालत यह है कि BCB, सरकार और ICC की तीन दिशाओं में खींचतान ने टीम को रस्साकशी की रस्सी बना दिया है.  यह सिर्फ बॉयकॉट नहीं, क्रिकेट का आत्मघात है विश्व क्रिकेट में अपनी जगह बनाना कठिन है, खोना बेहद आसान. बांग्लादेश इस समय उसी किनारे खड़ा है. अगर बांग्लादेश वर्ल्ड कप छोड़ता है, तो दुनिया कहेगी- 'खेल से नहीं, राजनीति से हार गए.'