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2026 में मोदी सरकार ने बड़े हाईवे प्रोजेक्ट्स को दी हरी झंडी, नासिक से सोलापुर तक अब होगा सुपरफास्ट सफर

नई दिल्ली  देश में इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार को और तेज करते हुए केंद्र की मोदी सरकार ने साल के अंत में महाराष्ट्र और ओडिशा को बड़ी सौगात दी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के दो बड़े प्रस्तावों पर मुहर लगा दी गई. इन फैसलों के तहत 20,668 करोड़ रुपये की लागत से दो अहम हाईवे प्रोजेक्‍ट को मंजूरी मिली है. सरकार के इस फैसले से जहां महाराष्ट्र में कनेक्टिविटी को नए पंख लगेंगे, वहीं ओडिशा के पिछड़े और नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास की नई इबारत लिखी जाएगी. 1. महाराष्ट्र: 6 लेन का ग्रीनफील्ड नासिक-सोलापुर कॉरिडोर कैबिनेट के फैसले में सबसे बड़ा हिस्सा महाराष्ट्र के नाम रहा है. सरकार ने नासिक और सोलापुर के बीच एक बिल्कुल नए (ग्रीनफील्ड) 6-लेन कॉरिडोर को मंजूरी दी है. कुल लागत: 19,142 करोड़ रुपये कुल लंबाई: 374 किलोमीटर रूट: नासिक फाटा से खेड़ तक (पुणे और अहमदनगर होते हुए) क्यों खास है यह प्रोजेक्ट? अभी नासिक से सोलापुर जाने में लोगों को भारी ट्रैफिक और संकरे रास्तों का सामना करना पड़ता है. यह नया कॉरिडोर एक ‘ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट’ है, जिसका मतलब है कि इसके लिए नई जमीन का अधिग्रहण कर बिल्कुल नया रास्ता बनाया जाएगा. यह मौजूदा सड़कों पर दबाव कम करेगा और शहरों के बीच से गुजरने के बजाय बाईपास के जरिए कनेक्टिविटी देगा. आर्थिक और धार्मिक महत्व यह कॉरिडोर महाराष्ट्र के दो प्रमुख आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्रों को जोड़ेगा. नासिक, जो कि अंगूर की खेती और धार्मिक पर्यटन (त्र्यंबकेश्वर, शिरडी के पास) के लिए प्रसिद्ध है, अब सोलापुर जैसे टेक्सटाइल हब से सीधे जुड़ जाएगा. इससे अहमदनगर और बीड जैसे जिलों को भी बड़ा फायदा होगा. माल ढुलाई (लॉजिस्टिक्स) की लागत कम होगी और सब्जियों व फलों को मंडियों तक पहुंचाना आसान हो जाएगा. यह प्रोजेक्ट सूरत-चेन्नई इकोनॉमिक कॉरिडोर का भी एक अहम हिस्सा बनेगा. 2. ओडिशा: NH-326 का चौड़ीकरण और मजबूती सरकार ने पूर्वी भारत पर भी विशेष ध्यान दिया है. ओडिशा में राष्ट्रीय राजमार्ग-326 (NH-326) के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण को मंजूरी दी गई है. कुल लागत: 1,526 करोड़ रुपये कुल लंबाई: 206 किलोमीटर इलाका: मलकानगिरी से कोरापुट तक कनेक्टिविटी में क्रांतिकारी बदलाव यह प्रोजेक्ट सिर्फ सड़क बनाना नहीं है, बल्कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है. यह हाईवे ओडिशा के मलकानगिरी और कोरापुट जिलों से गुजरता है, जो वामपंथी उग्रवाद (LWE) या नक्सलवाद से प्रभावित माने जाते रहे हैं. अच्छी सड़कें यहां सुरक्षा बलों की पहुंच आसान बनाएंगी और स्थानीय लोगों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ेंगी. यह हाईवे ओडिशा को दो पड़ोसी राज्यों आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है. इसके चौड़ीकरण से इन तीनों राज्यों के बीच व्यापारिक और सामाजिक आवाजाही सुगम होगी.

एक ओर भारत में विदा हुआ 2025, दूसरी ओर दुनिया में नए साल 2026 का आगाज़

नई दिल्ली  भारत के कई राज्यों में 2025 का आखिरी सूर्यास्त हो चुका है। भगवान जगन्नाथ के शहर पुरी और पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में 2025 में लोगों ने आखिरी बार आज सूर्यास्त देखा। अब नए साल 2026 के दस्तक की तैयारी है। इस बीच न्यूजीलैंड में रात्रि 12 बजे का वक्त हो गया है और नए साल की शुरुआत हो चुकी है। न्यूजीलैंड दुनिया का वह देश है, जहां टाइमजोन के हिसाब से सबसे पहले किसी दिन की शुरुआत होती है। वहीं अमेरिका के हाउलैंड आइलैंड और बेकर आइलैंड में सबसे आखिर में दिन शुरू होता है। ऑकलैंड ने 2026 का स्वागत न्यूजीलैंड की सबसे ऊंची इमारत, स्काई टॉवर से लॉन्च की गई आतिशबाजी के साथ किया। ऑकलैंड में न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में मशहूर बॉल ड्रॉप होने से 18 घंटे पहले आधी रात होती है। पांच मिनट के इस शो में 787 फुट ऊंचे स्काई टॉवर की अलग-अलग मंजिलों से 3,500 आतिशबाजी की गई। इससे पहले पैसिफिक आइलैंड देश किरिबाती दुनिया का पहला देश बन गया जिसने 2026 का स्वागत किया। लाइन आइलैंड्स द्वीप में 12 बजते ही दुनिया भर में नए साल के जश्न की आधिकारिक शुरुआत हुई थी। वहीं अगले कुछ घंटों में कई देश नए साल का स्वागत करेंगे। इसकी शुरुआत ओशिनिया के कुछ हिस्सों से होगी। उसके बाद पूर्वी एशिया, दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया, मध्य पूर्व, यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका में नए साल का जश्न मनाया जाएगा। जश्न के अलग-अलग रूप भारत समेत कई देशों में जश्न की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। अलग-अलग देशों में नए साल को मनाने का अलग-अलग तरीका भी है। जहां स्पेन के लोग अच्छी किस्मत के लिए आधी रात को 12 अंगूर खाकर नए साल का स्वागत करते हैं, वहीं जापान में नए साल के स्वागत में मंदिरों में 108 बार घंटियां बजाई जाती हैं। इसी तरह ब्राजील के लोग नए साल पर सफेद कपड़े पहनते हैं वहीं समुद्र को फूल अर्पित करते हैं। वहीं स्कॉटलैंड में नए साल का जश्न ‘हॉगमने’ के नाम से मनाया जाता है, जिसमें सड़कों पर दावत उड़ाई जाती हैं।  

अयोध्या को संघर्ष का अड्डा बनाने वालों पर CM योगी का बड़ा हमला

अयोध्या  श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ बुधवार को श्रद्धापूर्वक मनाई गई। समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हुए। सीएम योगी ने अंग्रेजी नववर्ष 2026 की शुभकामनाएं देते हुए प्रार्थना की कि यह वर्ष सभी के लिए मंगलकारी हो। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि अयोध्या ने स्वतंत्र भारत में रामजन्मभूमि आंदोलन के अनेक पड़ाव देखे हैं। अयोध्या के नाम से ही अहसास होता है कि यहां कभी युद्ध नहीं हुआ। कोई भी दुश्मन यहां के शौर्य, वैभव व पराक्रम के आगे टिक नहीं पाया, लेकिन कुछ लोगों ने अपने स्वार्थ, मजहबी जुनून व सत्ता के तुष्टिकरण की निकृष्टता में पड़कर अयोध्या को भी उपद्रव और संघर्ष का अड्डा बना दिया था। सीएम योगी ने पिछली सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जिस अयोध्या में कभी संघर्ष नहीं होता था, उस अयोध्या में पिछली सरकारों के शासन में आतंकी हमले होते थे। अयोध्या को लहुलूहान करने का प्रयास हुआ था, लेकिन जहां प्रभु की कृपा बरसती हो और जहां हनुमानगढ़ी में स्वयं हनुमान जी महाराज विराजमान हैं, वहां कोई आतंकी कैसे घुस जाता? 2005 में जैसे ही आतंकियों ने दुस्साहस किया, वैसे ही पीएसी के जवानों ने ठक-ठक करके उन्हें मार गिराया। सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 11 वर्ष के अंदर तीन महत्वपूर्ण घटनाओं को अयोध्या कभी विस्मृत नहीं कर सकती। स्वतंत्र भारत में पहली बार 5 अगस्त 2020 को किसी प्रधानमंत्री का अयोध्या में आगमन हुआ। उन्होंने उस दिन यहां श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन किया। 22 जनवरी 2024 (पौष शुक्ल द्वादशी) को फिर अयोध्या धाम आकर प्रधानमंत्री ने रामलला की भव्य मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को संपन्न किया। 25 नवंबर 2025 को विवाह पंचमी पर प्रधानमंत्री ने अयोध्या में राम मंदिर के मुख्य शिखर पर सनातन धर्म की भगवा ध्वजा को प्रतिष्ठित किया और संदेश दिया कि सनातन से ऊपर कोई नहीं। सनातन का पताका हमेशा ऐसी ही दिखाई देगी। उन्होंने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य और संगठन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए राजनाथ सिंह की श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में प्रत्यक्ष भूमिका रही है। 500 वर्ष के बाद श्रीराम जन्मभूमि पर प्रभु रामलला के विराजमान होने और मंदिर के इस भव्य स्वरूप को देखकर वे आनंद-गौरव की अनुभूति कर रहे हैं। आंदोलन में सक्रिय भूमिका का निर्वहन करने वाले रक्षा मंत्री प्रतिष्ठा द्वादशी पर मां अन्नपूर्णा के मंदिर पर सनातन धर्म की ध्वजा का आरोहण कर रहे थे तो मैंने उन्हें भावुक होते देखा है। सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले बिजली, पानी, स्वच्छता, सड़क, कनेक्टिविटी और सुरक्षा भी नहीं थी। 'जय श्री राम' बोलने पर लाठी और गिरफ्तारी होती थी, लेकिन अयोध्या के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए देश-दुनिया का हर सनातन धर्मावलंबी अब यहां दर्शन करके अभिभूत होता है। पहले कुछ लाख लोग यहां आते थे, लेकिन पिछले पांच साल में 45 करोड़ से अधिक श्रद्धालु अयोध्या आए। सूर्य वंश की राजधानी अयोध्या देश की पहली सोलर सिटी के रूप में हो गई है। अयोध्या धाम में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है और अयोध्या रेलवे की डबल लाइन के साथ जुड़ गया है। हर ओर से यहां कनेक्टिविटी बेहतर हुई। जिस अयोध्या में सिंगल लेन की सड़कें थीं, आज फोर लेन की सड़कें हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश में अब हर जगह ‘जय श्री राम’ और 'राम-राम' बोल सकते हैं। अब भारत सरकार की योजना भी ‘जी राम जी’ के नाम पर आ गई है। यह रोजगार की सबसे बड़ी स्कीम बनने जा रही है। कोई भी बेरोजगार कहेगा कि मुझे अपनी ग्राम पंचायत में रोजगार चाहिए तो उसे साल में 125 दिन रोजगार की गारंटी गांव में ही मिल जाएगी। हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है। पांच सौ वर्ष के इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 1528 से लेकर 1992 और इसके उपरांत भी अयोध्या में हर 20-25 वर्ष में राम मंदिर को वापस लेने के लिए राम भक्त लगातार संघर्ष कर रहे थे। वह रुका, झुका और बैठा नहीं। उसने सत्ता, दमन, लाठी व गोली की परवाह नहीं की, बल्कि वह लड़ता रहा। यह आंदोलन सफलता की नई ऊंचाइयों तक तब पहुंचा, जब आरएसएस ने नेतृत्व दिया। पूज्यों संतों को एक मंच पर लाने में अशोक सिंहल ने सफलता हासिल की। गुलामी का कलंक मिटा और भव्य राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ। सीएम योगी ने कहा कि आज प्राण-प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में समारोह आयोजित हुआ। अयोध्या की भव्यता, दिव्यता को अनंत काल तक बनाए रखने के लिए हर सनातन धर्मावलंबी को आगे बढ़ना होगा। यह यात्रा का विराम नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। विरासत पर गौरव की अनुभूति करते हुए विकास के नित नए प्रतिमान को स्थापित करना है।

अंधेरे में उम्मीद का दीया: पीएम मोदी के इस यादगार कथन ने देश को दिया नया संदेश

नई दिल्ली साल 2025 के समापन पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के 'मोदी आर्काइव' अकाउंट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उन प्रेरक भाषणों को शेयर किया है, जिनमें उन्होंने देश के भविष्य, आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण को लेकर कहा है। 'मोदी आर्काइव' ने पीएम मोदी के कुछ बयानों का ऑडियो शेयर करते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "जैसे ही 2025 खत्म हो रहा है, हम नरेंद्र मोदी के दशकों पहले कहे गए उम्मीद और दृढ़ संकल्प पर उनके यादगार शब्दों को फिर से याद करते हैं।" 'मोदी आर्काइव' की ओर से जारी 2.15 मिनट की वीडियो क्लिप में पीएम मोदी ने शुरुआत में कहा, "मित्रों, जीवन में आशावादी होना चाहिए, निराशा कभी जीवन में आनी नहीं चाहिए और यह तब होता है जब जीवन में सकारात्मक सोच हो।  सकारात्मक सोच की शक्ति पूरे संसार को बदल सकती है। हम सारी दुनिया को नहीं बदल सकते हैं। अगर तूफान आ जाए तो हम समुद्र की लहरों को नहीं मोड़ सकते हैं, लेकिन जिस नाव में बैठे हैं, उस नाव की दिशा को हम बदल सकते हैं और इसे बदलना हम जानते हैं।" एक अन्य भाषण में पीएम मोदी ने कहा, "अगर आपका दिल साफ है, अगर आपके विचारों में स्पष्टता है, अगर आपको कुछ करने का पक्का इरादा है और आपमें सामना करने की हिम्मत है तो मुझे यकीन है कि कुछ भी हासिल कर सकते हैं।" 'मोदी आर्काइव' ने पीएम मोदी के उस भाषण को भी क्लिप में शामिल किया है, जिसमें प्रधानमंत्री ने कहा था, "जैसे मौसम बदलता रहता है, वैसे ही जिंदगी के उतार-चढ़ाव आते-जाते हैं। बादल कभी आते हैं, कभी चले जाते हैं। कभी-कभी चांद साफ चमकता है तो कभी सूरज साफ नजर आता है। जिंदगी में यह सब कुछ आता है, लेकिन तुम अपने लक्ष्य को पार करते हुए चले चलो, कभी न कभी यश प्राप्त होगा।" इसके अलावा, पीएम मोदी ने अपने संदेश में कहा था, "तमन्ना अच्छे काम करने की होनी चाहिए। पाने की तमन्ना से कुछ करने की तमन्ना शायद अच्छा परिणाम देती है।" देशवासियों के लिए एक नई राह दिखाते हुए पीएम मोदी ने एक भाषण में कहा, "कल कैसी थी, उसके आधार पर आने वाली कल तय नहीं होती है। आने वाली कल के लिए हमारी सोच क्या है, उसके आधार पर आने वाली कल का निर्माण होता है। जो बीती हुई कल पर रोते रहते हैं, वह आने वाली कल को कभी सजा नहीं सकते हैं। हमें तो सकारात्मक रुख लेकर आगे चलना है, कोशिश करनी है, कभी न कभी सफलता मिलेगी और यह मेरा विश्वास है।" 'मोदी आर्काइव' ने पीएम मोदी के एक शायराना अंदाज को भी उनके बयानों की सीरीज का हिस्सा बनाया है। इसमें पीएम मोदी कहते हैं, "दोस्तों, माना रात अंधेरी है, अंधेरा घना है, लेकिन यारो दीया जलाना कहां मना है। आओ दोस्तो दिया जलाएं, जिस घर में रोशनी नहीं है, वहां घर में रोशनी पहुंचाएं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने की कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता, मंत्रालय में अहम निर्णय

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंत्रालय, महानदी भवन में कैबिनेट की बैठक रायपुर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित कैबिनेट की बैठक में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए – 1.    मंत्रिपरिषद की बैठक में तेंदूपत्ता संग्राहक परिवारों से 5500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर से तेंदूपत्ता खरीदने के लिए वर्ष 2026 हेतु ऋण लेने के लिए राज्य शासन की गारंटी देने की अनुमति दी गई। 2.    मंत्रिपरिषद ने कोदो, कुटकी और रागी की खरीद, प्रसंस्करण और बिक्री के लिए छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ को कार्यशील पूंजी प्रदाय किये जाने की अनुमति दी गई। 3.    मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ को अराष्ट्रीयकृत लघु वनोपज के क्रय, भंडारण, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और विपणन के लिए एक बार के लिए 30 करोड़ रुपये का ब्याज मुक्त ऋण देने का निर्णय लिया है। 4.    मंत्रिपरिषद ने छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी सहकारी वित्त एवं विकास निगम द्वारा राज्य शासन की प्रत्याभूति (गारंटी) पर लिए गए ऋणों के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इसके अंतर्गत राज्य शासन द्वारा 55.69 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान कर पांच राष्ट्रीय निगमों से लिए गए ऋणों की पूर्ण राशि वापस करने का अनुमोदन किया गया। ये राष्ट्रीय निगम हैं- राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त एवं विकास निगम, पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम, अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम और दिव्यांग वित्त एवं विकास निगम। वर्तमान में इन ऋणों पर राज्य शासन द्वारा प्रतिवर्ष लगभग 2.40 करोड़ रुपये ब्याज का भुगतान किया जा रहा है। ऋण की पूरी अदायगी होने पर यह ब्याज व्यय पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। साथ ही राष्ट्रीय निगमों से एनओसी (अदेय प्रमाण पत्र) प्राप्त होने पर शासन की ओर से दी गई 229.91 करोड़ रुपये की लंबित गारंटी देनदारी भी समाप्त हो जाएगी। इस निर्णय से राज्य शासन पर वित्तीय बोझ कम होगा और भविष्य में होने वाले अनावश्यक व्यय से बचत सुनिश्चित होगी। 5.    मंत्रिपरिषद ने निर्णय लिया है कि –      उसना मिलिंग पर प्रोत्साहन राशि 20 रू. प्रति क्विंटल से बढ़ाकर की गई 40 रू. प्रति क्विंटल     सभी मिलरों के लिए प्रोत्साहन राशि की पात्रता हेतु अब न्यूनतम 03 माह की जगह न्यूनतम 02 माह की मिलिंग करनी होगी     6.    मंत्रिपरिषद ने औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में संशोधन का निर्णय लिया। इससे नीति के सफल क्रियान्वयन के लिए प्रचार-प्रसार, विशेषज्ञों की नियुक्ति और सेवा गतिविधि प्रमाणपत्र जारी करने के संबंध में विसंगतियां दूर होंगी। इन संशोधनों से राज्य में निवेश की गुणवत्ता बढ़ेगी, स्थायी रोजगार सृजन होगा और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। 7.    मंत्रिपरिषद ने राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज ग्राउंड में 20 जनवरी से 5 फरवरी तक आयोजित 9वें ऑटो एक्सपो के दौरान बिकने वाले वाहनों पर लाइफ टाइम रोड टैक्स में 50 प्रतिशत छूट प्रदान करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।  यह छूट एक्सपो में वाहन बिक्री के बाद पंजीकरण के समय लागू होगी, जिससे मोटरयान कर में एकमुश्त 50 प्रतिशत की राहत मिलेगी। पूरे प्रदेश के वाहन विक्रेताओं को इसका लाभ मिलेगा, इस संबंध में निर्देशित किया गया है। 8.    मंत्रिपरिषद द्वारा प्रदेश में कस्टम मिलिंग के लिए धान उपार्जन एवं परिवहन से संबंधित गतिविधियों के लिए राइस मिलर्स द्वारा दी जाने वाली बैंक गारंटी पर देय स्टाम्प शुल्क को 0.25 से घटाकर 0.05 प्रतिशत करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।  9.    मंत्रिपरिषद द्वारा पुलिस मुख्यालय छत्तीसगढ़ नवा रायपुर अटल नगर में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का एक नवीन पद वेतन मेट्रिक्स लेवल-14 एक वर्ष की अवधि के लिए स्थायी रूप से निर्मित किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। 10.    मंत्रिपरिषद द्वारा रायपुर महानगरीय पुलिस जिला में पुलिस आयुक्त प्रणाली को 23 जनवरी से लागू किए जाने के संबंध में निर्णय लिया गया है।

SIR मीटिंग में अभिषेक बनर्जी का हंगामा, CEC से हुई तीखी बहस

नई दिल्ली तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग (ECI) के साथ करीब ढाई घंटे चली बैठक के बाद केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए. बनर्जी ने आरोप लगाया कि देश में अब EVM के बजाय 'सॉफ्टवेयर और एल्गोरिदम' के जरिए वोटर लिस्ट (Electoral Rolls) में हेरफेर कर वोट चोरी की जा रही है.  अभिषेक बनर्जी ने कहा कि TMC के 10 सांसदों और पश्चिम बंगाल सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार से करीब ढाई घंटे तक मुलाकात की, लेकिन आयोग उनके उठाए गए सवालों का कोई ठोस जवाब नहीं दे सका. उन्होंने आरोप लगाया कि 28 नवंबर को भी आयोग से सवाल पूछे गए थे, लेकिन न तब जवाब मिला और न अब. उल्टा, चयनित लीक मीडिया को दिए गए. 'हम निर्वाचित हैं, आप मनोनीत' बैठक के दौरान हुए घटनाक्रम का जिक्र करते हुए अभिषेक बनर्जी ने दावा किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उनसे उंगली उठाकर बात करने की कोशिश की. लेकिन मैंने उनसे साफ कहा कि उंगली नीचे करके बात करो. आप मनोनीत (Nominated) हैं, जबकि हम निर्वाचित (Elected) प्रतिनिधि हैं. हम किसी के दास या गुलाम नहीं हैं. उन्होंने CEC को चुनौती दी कि यदि उनमें हिम्मत है, तो वे बैठक की CCTV फुटेज सार्वजनिक करें और मीडिया के सवालों का सामना करें. वोटर लिस्ट में ‘सॉफ्टवेयर खेल’ TMC नेता का दावा है कि SIR के तहत 1.36 करोड़ मामलों में ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ बताई जा रही है, लेकिन आयोग ने अब तक इसकी सूची सार्वजनिक नहीं की. उन्होंने आरोप लगाया कि ECI ऐप में गड़बड़ी है, जहां दस्तावेज जमा होने के बावजूद नोटिस जारी नहीं हो रहे और नाम सॉफ्टवेयर के ज़रिए हटाए जा रहे हैं, वह भी AERO की जानकारी के बिना. उन्होंने कहा कि 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों, दिव्यांगों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को घंटों फिजिकल वेरिफिकेशन के लिए बैठाया जा रहा है, जो अमानवीय है. बंगाल को बदनाम करने की कोशिश? अभिषेक बनर्जी ने सवाल उठाया कि रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों के नाम पर बंगाल को बदनाम किया जा रहा है. उन्होंने कहा, “अगर 58 लाख लोगों की सूची बनाई गई है, तो साफ बताया जाए कि उनमें कितने अवैध प्रवासी हैं. अगर कोई अवैध है तो हम भी उन्हें बाहर करने के पक्ष में हैं, लेकिन झूठा प्रचार बर्दाश्त नहीं करेंगे.” उन्होंने यह भी कहा कि अन्य 11 राज्यों में SIR चल रहा है, लेकिन बंगाल में सबसे कम डिलीशन होने के बावजूद यहां सबसे ज्यादा सख्ती की जा रही है. विपक्ष को दिया संदेश अभिषेक बनर्जी ने कांग्रेस, AAP और RJD सहित विपक्षी दलों से अपील की कि वे समझें कि वोट चोरी ईवीएम से नहीं, वोटर लिस्ट और सॉफ्टवेयर के जरिए हो रही है. उन्होंने दावा किया कि बीजेपी महाराष्ट्र, हरियाणा, दिल्ली और बिहार में इसी तरीके से जीत हासिल कर रही है. अंत में उन्होंने कहा, “पहले मतदाता तय करते थे कि सरकार कौन बनाएगा, अब सरकार तय कर रही है कि वोट डालने कौन जाएगा. लेकिन याद रखिए बीजेपी हमेशा सत्ता में नहीं रहेगी, संविधान रहेगा. 2026 में बंगाल की जनता फिर बीजेपी को हराएगी.”    

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दी जशपुर के ग्रामीणों को बड़ी सौगात, 10 सड़कों के लिए 31.91 करोड़ रुपये स्वीकृत

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की एक और बड़ी सौगात जशपुर जिले की 10 सड़कों के लिए 31 करोड़ 91 लाख रुपये की स्वीकृति, ग्रामीणों की बहुप्रतीक्षित मांग हुई पूरी रायपुर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की एक और बड़ी सौगातनववर्ष से ठीक पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जशपुर जिले को विकास की बड़ी सौगात दी है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग द्वारा जिले के ग्रामीण एवं दूरस्थ अंचलों में आवागमन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 10 महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन के लिए कुल 31 करोड़ 91 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। वर्षों से लंबित इन सड़कों की मांग पूरी होने से क्षेत्रवासियों में हर्ष का माहौल है। स्वीकृत कार्यों में एनएच-43 रोड (मुड़ापारा) से चर्चपारा होते हुए सुकबासुपारा तक सड़क निर्माण के लिए 2 करोड़ 47 लाख 97 हजार रुपये, ग्राम पंचायत कछार से सरपंच बस्ती चौक पक्की सड़क से तिरसोठ तक के लिए 3 करोड़ 41 लाख रुपये, कांसाबेल के डांडपानी से खूटेरा पहुंच मार्ग हेतु 4 करोड़ 52 लाख रुपये तथा पाले पखना से जुनवाईंन पहुंच मार्ग के लिए 4 करोड़ 68 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसी क्रम में कांसाबेल के सेमरकछार भट्टीटोली से लपई पहुंच मार्ग के लिए 2 करोड़ 69 लाख रुपये, ग्राम पंचायत कर्रबेवरा से पखनापारा माड़ो गुफा तक पहुंच मार्ग हेतु 1 करोड़ 88 लाख रुपये, ग्राम पंचायत घरजियाबथान के ठाकुरमुड़ा से रघुनाथपुर जोड़ा तालाब मार्ग के लिए 2 करोड़ 61 लाख रुपये, ग्राम पंचायत पाकरगांव से तुरवाआमा होते हुए चौराआमा पहुंच मार्ग के लिए 2 करोड़ 61 लाख रुपये, ग्राम पंचायत भगरपुर से भगोरा पहुंच मार्ग के लिए 4 करोड़ 60 लाख रुपये तथा अटल चौक से पंडरीपानी होते हुए तिलंगा पहुंच मार्ग के लिए 2 करोड़ 43 लाख रुपये की मंजूरी दी गई है। इन सड़कों के निर्माण एवं उन्नयन से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन सुगम होगा। इससे किसानों को कृषि उपज के परिवहन में सुविधा मिलेगी, विद्यार्थियों की शिक्षा तक पहुंच आसान होगी और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ ही स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य आवश्यक सेवाओं तक लोगों की पहुंच और अधिक सुलभ होगी। ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नए वर्ष से पूर्व जिले को यह महत्वपूर्ण विकास सौगात देकर वर्षों पुरानी मांग पूरी की है। उन्होंने इसके लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह निर्णय जशपुर जिले के समग्र विकास को नई गति प्रदान करेगा।

मध्य प्रदेश में मातृत्व सुरक्षा की सफलता: संस्थानों में डिलीवरी दर हुई 88%

भोपाल। कभी प्रसव के लिए दाईयों और घर के पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने वाला मध्य प्रदेश अब संस्थागत प्रसव (अस्पतालों में प्रसव) के मामले में देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-पांच की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में अब 88.5 प्रतिशत प्रसव अस्पतालों में हो रहे हैं। साल 2005-06 में यहां संस्थागत प्रसव का स्तर महज 26.2 प्रतिशत था। यानी अधिकांश प्रसव घरों के असुरक्षित वातावरण में होते थे, जिससे मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और शिशु मृत्यु दर (आइएमआर) का जोखिम बना रहता था। पिछले दो दशकों में सरकार की सजगता और आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं की मेहनत ने इस तस्वीर को बदल दिया है। योजनाओं ने दिया संबल, 16 हजार रुपये तक की मदद रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 में संस्थागत प्रसव का आंकड़ा 80 प्रतिशत था, जो अब 90 प्रतिशत के लक्ष्य को छूने के करीब है। हालांकि, इस मामले में प्रदेश अभी देश में 17वें स्थान पर आता है। सफलता के पीछे जननी सुरक्षा योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को अस्पताल में प्रसव पर मिलने वाली 1,400 रुपये की नकद राशि है। वहीं, मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना भी गरीब और श्रमिक परिवारों के लिए वरदान साबित हुई। इसमें प्रसूता को पोषण और देखरेख के लिए 16,000 रुपये की बड़ी आर्थिक सहायता दी जाती है। जननी एक्सप्रेस बनी जीवनरेखा दुर्गम इलाकों से गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने में जननी एक्सप्रेस (108/102) ने अहम भूमिका निभाई है। निश्शुल्क एंबुलेंस सेवा के कारण देरी की वजह से होने वाली घटनाएं काफी कम हो गई हैं। प्रदेश के आदिवासी बहुल झाबुआ, अलीराजपुर और बड़वानी जिलो में भी महिलाएं प्रसव के लिए अस्पताल पहुंच रही हैं। पहले जीवित बच्चे के जन्म पर गर्भवती महिलाओं को तीन किस्तों में 5,000 रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। आधुनिक सुविधाओं का हुआ विस्तार प्रदेश के सरकारी अस्पतालों के लेबर रूम को लक्ष्य कार्यक्रम के तहत हाईटेक बनाया गया है। नर्सिंग स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। परिणामस्वरूप, रतलाम और उज्जैन जिलों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) ने शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव के लक्ष्य को हासिल कर लिया। वहीं इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में संस्थागत प्रसव का दर 95% से अधिक रहा। जबकि झाबुआ, धार और बड़वानी जिलों में घर पर प्रसव की दर में 40% तक की कमी आई है। देश में संस्थागत प्रसव में शीर्ष राज्य – केरल – 99.8% – तमिलनाडु – 99.7% – गोवा – 99.5% – तेलंगाना – 97.0% – आंध्र प्रदेश – 96.3% मध्य प्रदेश के शीर्ष पांच जिले – इंदौर – 98.2% – भोपाल – 97.6% – ग्वालियर – 96.4% – जबलपुर – 95.8% – रतलाम – 94.5% वर्तमान चुनौतियां – कठिन भौगोलिक क्षेत्र – डिंडोरी, मंडला और झाबुआ जैसे आदिवासी अंचलों में सुदूर वनांचल होने के कारण एंबुलेंस का पहुंचना चुनौतीपूर्ण होता है। – सामाजिक मान्यताएं – कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पारंपरिक दाइयों से घर पर प्रसव कराने का चलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जागरूकता का अभाव हालांकि, सरकार 16,000 रुपये तक की सहायता दे रही है, लेकिन शिक्षा की कमी के कारण अभी भी लगभग 11% प्रसव अस्पतालों से बाहर हो रहे हैं। इनका कहना है कि जननी सुरक्षा और प्रसूति सहायता जैसी सरकारी योजनाओं ने महिलाओं में अस्पताल के प्रति विश्वास जगाया है। हम ग्रामीण और शहरी, दोनों क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से निरंतर मानिटरिंग कर रहे हैं, ताकि कोई भी गर्भवती महिला स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित न रहे। आधुनिक लेबर रूम और बेहतर एंबुलेंस सेवा के समन्वय से हम मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए संकल्पित हैं – डॉ. मनीष शर्मा, सीएमएचओ, भोपाल

योगी सरकार की बड़ी डिजिटल पहल, 2026 में होगा अत्याधुनिक सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम का शुभारंभ

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को नई रफ्तार देगा ‘निवेश मित्र 3.0’ योगी सरकार की बड़ी डिजिटल पहल, 2026 में होगा अत्याधुनिक सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम का शुभारंभ निवेश मित्र 3.0 से निवेशकों को मिलेगा वन-स्टॉप समाधान आईजीआरएस और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से निवेश प्रक्रियाओं पर रखी जा सकेगी सीधी निगरानी एआई आधारित स्मार्ट डैशबोर्ड से रीयल-टाइम ट्रैकिंग और त्वरित निर्णय होगा संभव व्हाट्सएप, ईमेल और एसएमएस से निवेशकों को मिलेगी हर अपडेट की जानकारी डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में योगी सरकार का एक और बड़ा कदम राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम से जुड़कर यूपी बनेगा निवेशकों की पहली पसंद लखनऊ  उत्तर प्रदेश को देश का सर्वश्रेष्ठ निवेश गंतव्य बनाने की दिशा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (व्यवसाय सुगमता) को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी व निवेशक-अनुकूल बनाने के उद्देश्य से प्रमुख ऑनलाइन सिंगल विंडो क्लियरेंस सिस्टम ‘निवेश मित्र 3.0’ विकसित किया जा रहा है। यह नया संस्करण वर्ष 2026 में लॉन्च किया जा सकता है, जो निवेशकों को एक सहज, एकीकृत और इंटेलिजेंट डिजिटल अनुभव प्रदान करेगा। राज्य की निवेश नोडल विंग इन्वेस्ट यूपी इसके विकास को अंतिम रूप दे रही है और इसे बेहतर बनाने के लिए निवेशकों के साथ ही विशेषज्ञों की राय को भी इसमें समाहित किया जा रहा है।  राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम से होगा पूर्ण एकीकरण ‘निवेश मित्र 3.0’ को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यह राष्ट्रीय सिंगल विंडो सिस्टम (NSWS) से पूरी तरह एकीकृत हो। इससे केंद्र और राज्य स्तर की सभी आवश्यक अनुमतियां, स्वीकृतियां और सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होंगी। यह प्रणाली निवेशकों को बार-बार अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने से मुक्ति दिलाएगी और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की गति को तेज करेगी। आईजीआरएस और मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से बढ़ेगी जवाबदेही योगी सरकार की पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन प्रणाली को और मजबूत करने के लिए ‘निवेश मित्र 3.0’ का IGRS (इंटीग्रेटेड ग्रीवेंस रिड्रेसल सिस्टम), मुख्यमंत्री डैशबोर्ड (दर्पण), निवेश सारथी, OIMS और इंडिया इंडस्ट्रियल लैंड बैंक (IILB) से समग्र एकीकरण किया जाएगा। इससे निवेशकों की शिकायतें सीधे IGRS के माध्यम से दर्ज होंगी और उनका रीयल-टाइम मॉनिटरिंग मुख्यमंत्री कार्यालय स्तर तक संभव हो सकेगा। यही नहीं, मुख्यमंत्री डैशबोर्ड पर विभागवार प्रगति, लंबित मामलों और निर्णयों की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखाई देगी, जिससे अधिकारियों की उत्तरदायित्व तय करने की व्यवस्था और मजबूत होगी। AI आधारित स्मार्ट डैशबोर्ड होगा खास आकर्षण ‘निवेश मित्र 3.0’ की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित स्मार्ट डैशबोर्ड होगा। इसके माध्यम से रीयल-टाइम डेटा एनालिसिस, निवेश प्रस्तावों की प्रगति की लाइव ट्रैकिंग, विभागीय प्रदर्शन का आंकलन सुनिश्चित होगा, जिससे संभावित अड़चनों की पूर्व पहचान संभव हो सकेगी। यह तकनीक नीति निर्माण से लेकर जमीनी क्रियान्वयन तक डाटा आधारित निर्णय को बढ़ावा देगी। व्हाट्सएप, ईमेल और एसएमएस से मिलेगी हर अपडेट निवेशकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस पोर्टल में मल्टी-चैनल कम्युनिकेशन सिस्टम विकसित किया जा रहा है। निवेशक अपने आवेदन की स्थिति, स्वीकृति, आपत्ति या शिकायत निवारण की जानकारी व्हाट्सएप, ईमेल और एसएमएस के माध्यम से सीधे प्राप्त कर सकेंगे। इससे संवाद प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और भरोसेमंद बनेगी। योगी सरकार की निवेश नीति को मिलेगा मजबूत आधार योगी सरकार पहले ही ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट, नीतिगत सुधारों, सरलीकृत प्रक्रियाओं और डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से उत्तर प्रदेश को निवेश के मानचित्र पर अग्रणी राज्य बना चुकी है। ‘निवेश मित्र 3.0’ इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो न केवल निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा, बल्कि विभागीय दक्षता और प्रशासनिक पारदर्शिता को भी नई ऊंचाई देगा। आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश की दिशा में बड़ा कदम विशेषज्ञों का मानना है कि ‘निवेश मित्र 3.0’ के माध्यम से उत्तर प्रदेश में उद्योग स्थापना की प्रक्रिया सरल, समयबद्ध और भ्रष्टाचार मुक्त होगी। यह पहल राज्य को आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ाएगी और रोजगार सृजन, औद्योगिक विकास व आर्थिक सशक्तिकरण को नई गति देगी।

वोडा-आइडिया को कैबिनेट की बड़ी राहत, AGR बकाया पर ‘फ्रीज’ लगाने का निर्णय, 2032 से शुरू होगा भुगतान

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने कर्ज के बोझ से दबी टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन आइडिया को एक बड़ी राहत दी है। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को एक विशेष राहत पैकेज को मंजूरी दी, इसके तहत कंपनी के एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) बकाये को 87,695 करोड़ रुपये पर फ्रीज कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले का टेलीकॉम सेक्टर में प्रतिस्पर्धा बनाए रखना और वोडाफोन आइडिया में सरकार की 49% हिस्सेदारी के मूल्य की रक्षा करना है। भुगतान का नया शेड्यूल किया गया जारी कैबिनेट द्वारा मंजूर किए गए इस पैकेज के अनुसार, वोडाफोन आइडिया को इस फ्रीज किए गए बकाये का भुगतान तत्काल नहीं करना होगा। सूत्रों ने जानकारी दी है कि ₹87,695 करोड़ के इस बकाये का भुगतान वित्त वर्ष 2031-32 (FY32) से वित्त वर्ष 2040-41 (FY41) के बीच किया जाना है। AGR बकाया राशि को 31 दिसंबर, 2025 की स्थिति के अनुसार फ्रीज किया गया है। दूरसंचार विभाग (DoT) इस बकाये की राशि का फिर से आकलन करेगा ताकि सटीकता सुनिश्चित की जा सके। राहत के बावजूद, कंपनी को कुछ भुगतानों के लिए मौजूदा समयसीमा का पालन करना होगा। सूत्रों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2017-18 और 2018-19 से संबंधित AGR बकाये के भुगतान की शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यह राशि वोडाफोन आइडिया को वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 के बीच पूर्व-निर्धारित किस्तों में चुकानी होगी। सरकार की हिस्सेदारी और बाजार में प्रतिस्पर्धा बचाए रखने की कवायद सरकार फिलहाल वोडाफोन आइडिया में सबसे बड़ी शेयरधारक है, जिसकी हिस्सेदारी लगभग 49% है। सूत्रों का कहना है कि कैबिनेट के इन कदमों का उद्देश्य न केवल सरकारी निवेश को सुरक्षित करना है, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि देश का टेलीकॉम बाजार 'डुओपॉली' (केवल दो कंपनियों का वर्चस्व) बनने से बचा रहे। राहत पैकेज से कंपनी को अपनी सेवाओं के विस्तार, विशेषकर 5G रोलआउट और नेटवर्क अपग्रेडेशन के लिए जरूरी पूंजी जुटाने में मदद मिलने की उम्मीद है। कैबिनेट का यह फैसला ऐसे समय पर सामने आया है जब वोडाफोन- आइडिया लंबे समय से वित्तीय संकट और ग्राहकों की घटती संख्या से जूझ रही है। अक्तूबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट की ओर से एजीआर बकाये के पुनर्मूल्यांकन को सरकार के नीतिगत दायरे में बताया गया था। उसके बाद से ही सरकार की ओर से राहत देने की खबर सामने आने की उम्मीद थी। विशेषज्ञों का मानना है कि बकाये के भुगतान में पांच साल से अधिक की अतिरिक्त मोहलत मिलने से कंपनी के कैश फ्लो में सुधार होगा। हालांकि, कंपनी की लंबी अवधि की स्थिरता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वह आने वाले महीनों में नए निवेशकों से कितनी जल्दी फंड जुटा पाती है और अपने औसत प्रति ग्राहक राजस्व यानी एआरपीयू में कितना इजाफा कर पाती है। कैबिनेट ने ₹20,668 करोड़ के सड़क परियोजनाओं को दी मंजूरी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से दो प्रमुख सड़क परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है। इन परियोजनाओं पर कुल 20,668 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा, जिससे महाराष्ट्र और ओडिशा में कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी। कैबिनेट का सबसे बड़ा फैसला महाराष्ट्र के लिए रहा, जहां 374 किलोमीटर लंबे नासिक-सोलापुर ग्रीनफील्ड कॉरिडोर के निर्माण को मंजूरी दी गई है। इस 6-लेन कॉरिडोर के निर्माण पर 19,142 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह कॉरिडोर न केवल यात्रा के समय को कम करेगा, बल्कि नासिक और सोलापुर जैसे औद्योगिक और कृषि केंद्रों के बीच लॉजिस्टिक्स दक्षता को भी बढ़ाएगा। ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट होने के कारण यह पूरी तरह से नए एलाइनमेंट पर विकसित किया जाएगा, जिससे घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यातायात का दबाव कम होगा। इसके अलावे, कैबिनेट ने ओडिशा में सड़क नेटवर्क को अपग्रेड करने के लिए 1,526 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी है। राष्ट्रीय राजमार्ग-326 (NH-326) के 206 किलोमीटर लंबे हिस्से का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। यह परियोजना राज्य के आंतरिक क्षेत्रों में माल ढुलाई को सुगम बनाएगी और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बेहतर करेगी।