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श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

अयोध्या के शौर्य, वैभव व पराक्रम के आगे नहीं टिक पाया कोई दुश्मनः योगी  श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  कुछ लोगों ने स्वार्थ, मजहबी जुनून व सत्ता के तुष्टिकरण की निकृष्टता में पड़कर अयोध्या को भी बना दिया था उपद्रव और संघर्ष का अड्डा श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में राजनाथ सिंह जी की रही प्रत्यक्ष भूमिकाः सीएम  पांच साल में 45 करोड़ श्रद्धालु आए अयोध्याः मुख्यमंत्री   पहले मिलती थीं लाठी और गोली, अब देश में हर जगह बोल सकते जयश्रीराम और राम-रामः गोरक्षपीठाधीश्वर सीएम योगी ने अंग्रेजी नववर्ष 2026 की दी शुभकामना, सभी के लिए मंगलकारी हो यह वर्ष अयोध्या श्रीरामजन्मभूमि मंदिर में श्रीरामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की दूसरी वर्षगांठ ‘प्रतिष्ठा द्वादशी’ बुधवार को श्रद्धापूर्वक मनाई गई। समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी शामिल हुए। सीएम योगी ने अंग्रेजी नववर्ष 2026 की शुभकामना देते हुए प्रार्थना की कि यह वर्ष सभी के लिए मंगलकारी हो। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अयोध्या ने स्वतंत्र भारत में रामजन्मभूमि आंदोलन के अनेक पड़ाव देखे हैं। अयोध्या के नाम से ही अहसास होता है कि यहां कभी युद्ध नहीं हुआ। कोई भी दुश्मन यहां के शौर्य, वैभव व पराक्रम के आगे टिक नहीं पाया, लेकिन कुछ लोगों ने अपने स्वार्थ, मजहबी जुनून व सत्ता के तुष्टिकरण की निकृष्टता में पड़कर अयोध्या को भी उपद्रव और संघर्ष का अड्डा बना दिया था।  पिछली सरकारों के शासन में होते थे आतंकी हमले सीएम योगी ने पिछली सरकार को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जिस अयोध्या में कभी संघर्ष नहीं होता था, उस अयोध्या में पिछली सरकारों के शासन में आतंकी हमले होते थे। अयोध्या को लहुलूहान करने का प्रयास हुआ था, लेकिन जहां प्रभु की कृपा बरसती हो और जहां हनुमानगढ़ी में स्वयं हनुमान जी महाराज विराजमान हैं, वहां कोई आतंकी कैसे घुस जाता। 2005 में जैसे ही आतंकियों ने दुस्साहस किया, तैसे ही पीएसी के जवानों ने ठक-ठक करके उन्हें मार गिराया। कभी विस्मृत नहीं हो सकती तीन तिथियां  सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 11 वर्ष के अंदर तीन महत्वपूर्ण घटनाओं को अयोध्या कभी विस्मृत नहीं कर सकती। स्वतंत्र भारत में पहली बार 5 अगस्त 2020 को किसी प्रधानमंत्री का अयोध्या में आगमन हुआ। उन्होंने उस दिन यहां श्रीराम मंदिर का भूमि पूजन किया। 22 जनवरी 2024 (पौष शुक्ल द्वादशी) को फिर अयोध्या धाम आकर प्रधानमंत्री ने रामलला की भव्य मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम को संपन्न किया। 25 नवंबर 2025 को विवाह पंचमी पर प्रधानमंत्री जी ने अयोध्या में राम मंदिर के मुख्य शिखर पर सनातन धर्म की भगवा ध्वजा को प्रतिष्ठित किया और संदेश दिया कि सनातन से ऊपर कोई नहीं। सनातन का पताका हमेशा ऐसी ही दिखाई देगी।    श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में राजनाथ सिंह जी की रही प्रत्यक्ष भूमिका  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यूपी के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए और संगठन के विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए राजनाथ सिंह जी की श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में प्रत्यक्ष भूमिका रही है। 500 वर्ष के बाद श्रीराम जन्मभूमि पर प्रभु रामलला के विराजमान होने और मंदिर के इस भव्य स्वरूप को देखकर वे आनंद-गौरव की अनुभूति कर रहे हैं। आंदोलन में सक्रिय भूमिका का निर्वहन करने वाले रक्षा मंत्री जी प्रतिष्ठा द्वादशी पर जब मां अन्नपूर्णा के मंदिर पर सनातन धर्म की ध्वजा का आरोहण कर रहे थे तो मैंने उन्हें भावुक होते देखा है।  पांच साल में 45 करोड़ श्रद्धालु आए अयोध्या   सीएम योगी ने कहा कि 2017 के पहले बिजली, पानी, स्वच्छता, सड़क, कनेक्टिविटी, सुरक्षा भी नहीं थी। जयश्रीराम बोलने पर लाठी और गिरफ्तारी होती थी, लेकिन अयोध्या के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए देश-दुनिया का हर सनातन धर्मावलंबी अब यहां दर्शन करके अभिभूत होता है। पहले कुछ लाख लोग यहां आते थे, लेकिन पिछले पांच साल में 45 करोड़ से अधिक श्रदधालु अयोध्या आए। सूर्य वंश की राजधानी अयोध्या देश की पहली सोलर सिटी के रूप में हो गई है। अयोध्या धाम में अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट है, अयोध्या रेलवे की डबल लाइन के साथ जुड़ गया है। हर ओर से यहां कनेक्टिविटी बेहतर हुई। जिस अयोध्या में सिंगल लेन की सड़कें थीं, आज फोरलेन की सड़कें हैं।  देश में अब हर जगह बोल सकते जयश्रीराम और राम-राम गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री महंत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश में अब हर जगह जयश्रीराम और राम-राम बोल सकते हैं। अब भारत सरकार की योजना भी ‘जी राम जी’ के नाम पर आ गई है। यह रोजगार की सबसे बड़ी स्कीम बनने जा रही है। कोई भी बेरोजगार कहेगा कि मुझे अपनी ग्राम पंचायत में रोजगार चाहिए तो उसे साल में 125 दिन रोजगार की गारंटी गांव में ही मिल जाएगी।  रामभक्तों ने नहीं की लाठी और गोली की परवाह सीएम योगी ने कहा कि हमारी पीढ़ी सौभाग्यशाली है। पांच सौ वर्ष के इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 1528 से लेकर 1992 और इसके उपरांत भी अयोध्या में हर 20-25 वर्ष में राम मंदिर को वापस लेने के लिए राम भक्त लगातार संघर्ष करता रहा। वह रूका, झुका और बैठा नहीं। उसने सत्ता, दमन, लाठी व गोली की परवाह नहीं की बल्कि वह लड़ता रहा। यह आंदोलन सफलता की नई ऊंचाइयों तक तब पहुंचा, जब आरएसएस ने नेतृत्व दिया। पूज्यों संतों को एक मंच पर लाने में अशोक सिंहल ने सफलता हासिल की। गुलामी का कलंक मिटा और भव्य राम मंदिर का मार्ग प्रशस्त हुआ।  यह यात्रा का विराम नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है सीएम योगी ने कहा कि आज प्राण-प्रतिष्ठा के दो वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में समारोह आयोजित हुआ। अयोध्या की भव्यता, दिव्यता को अनंत काल तक बनाए रखने के लिए हर सनातन धर्मावलंबी को आगे बढ़ना होगा। यह यात्रा का विराम नहीं, बल्कि नई यात्रा की शुरुआत है। विरासत पर गौरव की अनुभूति करते हुए विकास के नित नए प्रतिमान को स्थापित करना है। पीएम मोदी ने हर भारतवासी को विकसित भारत की संकल्पना दी है। देश जब आजादी के 100 वर्ष पूरा करेगा तो हर भारतवासी का संकल्प होना चाहिए कि विरासत का संरक्षण करते हुए अपने क्षेत्र में उत्कृष्टतम कार्य करके दिखाना है। देश … Read more

नए साल पर युवाओं में धार्मिक पर्यटन का बढ़ा रुझान, काशी, मथुरा, अयोध्या में लाखों की संख्या में पहुंच रहे युवा

योगी सरकार के प्रयास से सनातन का लौटा वैभव, युवाओं में बढ़ा काशी, मथुरा और अयोध्या का क्रेज नए साल पर युवाओं में धार्मिक पर्यटन का बढ़ा रुझान, काशी, मथुरा, अयोध्या में लाखों की संख्या में पहुंच रहे युवा सोशल मीडिया पर छाया काशी, अयोध्या, मथुरा में नए साल का जश्न मनाने का ट्रेंड सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी से बढ़ी पर्यटकों की संख्या लखनऊ  नए साल का जश्न मनाने के लिए  जहां युवा पहले पाश्चात्य संस्कृति से प्रेरित होकर डिस्को, होटल, रेस्टोरेंट और हिल स्टेशनों का रुख करता था, इस साल इसमें एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शासन के पौने नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में जिस तरह से  धार्मिक और पर्यटन स्थलों का विकास हुआ है, उसका ही परिणाम है कि युवा लाखों की संख्या में काशी, मथुरा-वृंदावन और अयोध्या में नए साल की शुरूआत अपने इष्ट का दर्शन-पूजन से कर रहे हैं। यह उत्तर प्रदेश से उठी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की वो लहर है, जिसमें न केवल प्रदेश बल्कि देशभर के युवा, लड़के-लड़कियां नए जोश और उत्साह के साथ सम्मिलित हो रहे हैं।  काशी, मथुरा, अयोध्या में लाखों की संख्या में पहुंच रहे युवा पर्यटन विभाग के अनुसार, इस वर्ष नए साल से कई दिन पहले से ही प्रदेश के प्रमुख तीर्थ स्थलों काशी, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन और प्रयागराज में लाखों की संख्या में युवा पर्यटक पहुंच रहे हैं। इस क्रम में 29-30 दिसंबर को ही अयोध्या में भगवान श्रीराम का दर्शन करने 5 लाख से अधिक पर्यटक पहुंच चुके हैं, जबकि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर में पिछले तीन दिनों में 10 लाख और मथुरा में 3 लाख से अधिक पर्यटकों ने दर्शन पूजन किया। इनमें युवा पर्यटकों की संख्या सर्वाधिक है। 31 दिसंबर और 01 जनवरी को और अधिक संख्या में श्रद्धालुओं के आने का अनुमान लगाया जा रहा है जिसे ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने विशेष सुरक्षा प्रबंध किए हैं, साथ ही सुविधा के लिए गाइडलाइन भी जारी की है।  सोशल मीडिया पर भी छाया हैशटैग न्यू ईयर 2026 इन अयोध्या नए साल का जश्न धर्म स्थलों में मनाने का युवाओं का यह रुझान सोशल मीडिया पर भी दिखाई दे रहा है। जहां न्यू ईयर 2026 इन अयोध्या, न्यू ईयर 2026 इन काशी या स्पिरिचुअल न्यू ईयर जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। युवा नए साल के जश्न में इन धर्म स्थलों पर दर्शन पूजन कर, दोस्तों और परिवारजनों के साथ सेल्फी अपलोड कर रहे हैं। यही रुझान पिछले वर्ष प्रयागराज में आयोजित हुए दिव्य-भव्य महाकुंभ में भी देखने को मिला था, जिसमें न केवल देश बल्कि विश्व के कोने-कोने से श्रद्धालु और पर्यटकों ने आकर विश्व रिकॉर्ड कायम किया था। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जिस तरह से प्रदेश में धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार और सांस्कृतिक पुनरुत्थान हुआ है, उसने युवाओं के मन में आध्यात्मिक उत्साह और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की अलख जगाई है। इस संबंध में काशी विश्वनाथ मंदिर वाराणसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी, विश्व भूषण मिश्र का कहना है- सनातन संस्कृति उत्सव, उत्साह एवं उल्लास की आश्रयस्थली है। विश्व के समस्त उत्सव सनातन मान्यता में उत्कर्ष प्राप्त करते हैं। लोक उत्सव प्रायः तात्कालिक सत्ता के आचरण को प्रतिबिंबित करता है। अतः स्वाभाविक ही है कि वर्तमान काल में प्रत्येक पर्व पर चाहे वह भारतीय हो अथवा पश्चिम का पर्व, सनातन आस्था के केंद्रों पर श्रद्धालुओं का प्रवाह अभूतपूर्व है। मंदिरों और तीर्थस्थलों के पुनरुद्धार से बढ़ा पर्यटन  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से जिस तरह से अयोध्या में भव्य राम मंदिर का उद्घाटन हुआ, वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर का निर्माण और मथुरा-वृंदावन, तीर्थराज प्रयागराज, विंध्याचल, नैमिषारण्य, संभल, मुजफ्फरनगर में शुक्रतीर्थ (शुक्रताल) के साथ प्रदेश के पुरातन मंदिरों का जीर्णोद्धार हुआ है, इससे विशेष तौर पर युवाओं में सनातन संस्कृति और अपनी परंपराओं के प्रति नई को ऊर्जा का संचार हुआ। यह स्थान पहले की सरकारों में उपेक्षा का शिकार थे। प्रमुख तीर्थों और धार्मिक स्थलों तक सड़क, रेल और हवाई कनेक्टिविटी के साथ वहां रुकने ठहरने, होटल और रेस्टोरेंट गतिविधियों का विकास हुआ है। यही नहीं जिस तरह से समय-समय पर प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति विभाग की ओर से दिव्य-भव्य उत्सवों का आयोजन किया जाता है, उसने प्रदेश के युवाओं में सनातन संस्कृति के तीर्थों और धर्म स्थलों के प्रति आकर्षण बढ़ाया है। सीएम योगी आदित्यनाथ के इन प्रयासों ने न केवल प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा दिया है, बल्कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर भी मिला है।

अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत में रोल्स-रॉयस का तीसरा घर, लग्ज़री ब्रांड करेगा मेगा इन्वेस्टमेंट

 नई दिल्ली भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है. अब भारत 2030 तक जर्मनी को भी पछाड़कर दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक महाशक्ति बनने की राह पर है. इंडिया अब केवल एक उभरता हुआ बाजार नहीं, बल्कि ग्लेाबल डिफेंस और एडवांस इंजीनियरिंग का अगला बड़ा हब भी बनता जा रहा है. इसी बदलते भारत को देखते हुए ब्रिटेन की दिग्गज एयरो-इंजन निर्माता कंपनी रोल्स-रॉयस (Rolls Royce) ने एक बड़ा संकेत दिया है. कंपनी भारत को ब्रिटेन के बाहर अपना तीसरा “होम मार्केट” बनाने की दिशा में गंभीरता से आगे बढ़ रही है, जो देश की तकनीकी और सामरिक ताकत के लिए एक अहम मोड़ साबित हो सकता है. अब तक अपने लग्ज़री कारों से भारतीयों का दिल जीतने वाली रोल्स रॉयस अब डिफेंस और एयरोस्पेस में भी बड़ी योजनाओं के साथ उतर रही है.  रोल्स-रॉयस का तीसरा घर रोल्स-रॉयस ने हाल ही में कहा कि, वह भारत को ब्रिटेन के बाहर अपना तीसरा “होम मार्केट” बनाने की संभावनाओं पर काम कर रही है. कंपनी का मानना है कि भारत में जेट इंजन, नेवल प्रोपल्शन, लैंड सिस्टम्स और एडवांस इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं मौजूद हैं, जिन्हें पूरी तरह खोलने का समय अब आ गया है. पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में रोल्स-रॉयस इंडिया के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट शशि मुकुंदन ने कहा कि, "कंपनी भारत में बड़े निवेश की योजना बना रही है. उन्होंने साफ किया कि एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी एएमसीए प्रोग्राम के तहत बनने वाले लड़ाकू विमानों के लिए नेक्स्ट जेनरेशन एयरो इंजन का डेवलपमेंट भारत में करना कंपनी की प्राथमिकता है." अमेरिका और जर्मनी के बाद भारत पर फोकस फिलहाल रोल्स-रॉयस ब्रिटेन के अलावा अमेरिका और जर्मनी को अपना “होम मार्केट” मानती है, जहां कंपनी की मजबूत मौजूदगी और मैन्युफैक्चरिंग फेसिलिटी है. अब भारत को भी उसी स्तर पर लाने की तैयारी इस बात का संकेत है कि कंपनी भारत में लांग टर्म प्लांस के साथ आगे बढ़ने की तैयारी में है.  शशि मुकुंदन ने यह भी बताया कि, "रोल्स-रॉयस भारतीय नौसेना की युद्धक क्षमताओं को मजबूत करने के लिए इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन टेक्नोलॉजी में अहम भूमिका निभा सकती है. यह तकनीक भविष्य की नौसैनिक जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है." एयरो इंजन से नेवल इंजन तक का रास्ता उन्होंने बताया कि, "अगर एएमसीए के लिए जेट इंजन का डेवलपमेंट रोल्स-रॉयस के साथ होता है, तो इससे भारत को नेवल प्रोपल्शन इंजन बनाने में भी मदद मिल सकती है." बताते चलें कि, रोल्स-रॉयस दुनिया की उन गिनी-चुनी कंपनियों में शामिल है, जिनके पास एयरो इंजन को “मैरिनाइज” करने की क्षमता है. भारत में बड़े निवेश की तैयारी मुकुंदन ने निवेश के आंकड़े साझा किए बिना कहा कि कंपनी भारत में अपने एक्सपेंशन के लिए बड़ा निवेश करने पर विचार कर रही है. भारत में स्केल, नीतिगत स्पष्टता और रक्षा व इंडस्ट्रियल इकोसिस्टम को लेकर मजबूत पॉलिटिकल विलपॉवर है, जो तेजी से परिपक्व हो रही है." हालांकि उन्होंने इस बात की जानकारी नहीं दी है कि, रोल्स रॉयस अपने इस प्रोजेक्ट को लेकर कितना निवेश करने पर सोच रही है. उन्होंने कहा कि, "अगर सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो यह निवेश इतना बड़ा होगा कि लोग इसे जरूर महसूस करेंगे. असली मायने निवेश की राशि से ज्यादा उसके प्रभाव के हैं, जो उन सभी क्षेत्रों में वैल्यू चेन और इकोसिस्टम के डेवलपमेंट को गति देगा, जहां रोल्स-रॉयस काम करती है." रोल्स-रॉयस भारत में दो डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग के साथ MoU को अंतिम रूप देने जा रही है. इनमें से एक समझौता अर्जुन टैंक के लिए इंजन निर्माण से जुड़ा होगा, जबकि दूसरा भविष्य के रेडी कॉम्बैट व्हीकल्स के इंजनों से संबंधित होगा. गौरतलब है कि अक्टूबर में रोल्स-रॉयस के सीईओ तुफ़ान एर्गिनबिलगिक ने एक बिजनेस राउंडटेबल के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कहा था कि आने वाले समय में भारत रोल्स-रॉयस के लिए बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला है. यह बयान अब कंपनी की रणनीति में साफ झलकता नजर आ रहा है. हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब और रोजगार की संभावनाएं Rolls-Royce अब भारत को केवल एक बाजार नहीं, बल्कि डिजाइन, मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग, रिसर्च और सप्लाई चेन का अहम केंद्र बनाने जा रहा है. इससे न सिर्फ एयरोस्पेस, डिफेंस और पावर सिस्टम्स सेक्टर में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ को भी नई गति मिलेगी. साथ ही, मॉडर्न जेट इंजन और एडवांस टेक्नोलॉजी का भारत में विकास देश को ग्लोबल एविएशन और डिफेंस इकोसिस्टम में और मजबूत स्थिति दिलाएगा, जिससे भारत भविष्य की हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभरता नजर आएगा. रोल्स-रॉयस का इतिहास रोल्स-रॉयस का इतिहास इंजीनियरिंग, इनोवशन और विश्वसनीयता का प्रतीक रहा है. इसकी स्थापना 1906 में चार्ल्स रोल्स और हेनरी रॉयस ने की थी. इन्हीं दोनों के सरनेम से कंपनी का नाम 'रोल्स-रॉयस' पड़ा है. चार्ल्स और हेनरी ने पहले लग्ज़री कारों के जरिए कंपनी को पहचान दिलाई, लेकिन जल्द ही रोल्स-रॉयस ने एयरोस्पेस क्षेत्र में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई.  प्रथम विश्व युद्ध के दौरान विमान इंजनों के निर्माण से शुरुआत करते हुए कंपनी ने जेट इंजन टेक्नोलॉजी में क्रांति ला दी. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद रोल्स-रॉयस ने जेट इंजन डेवलप किए, जिनका इस्तेमाल सैन्य और कमर्शियल विमानों में हुआ और जिसने आधुनिक एविएशन की दिशा बदल दी. आज रोल्स-रॉयस दुनिया की लीडिंग एयरो-इंजन निर्माता कंपनियों में शामिल है और इसके जेट इंजन हाई परफॉर्मेंस, एडवांस टेक्नोलॉजी के लिए जाने जाते हैं.

इंदौर में दूषित जल आपूर्ति पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव सख्त, उप यंत्री बर्खास्त, चार अधिकारी निलंबित

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इन्दौर में दूषित जल आपूर्ति से संक्रमण को लिया गंभीरता से प्रभारी उप यंत्री को सेवा से किया बर्खास्त जोनल अधिकारी, सहायक यंत्री और प्रभारी सहायक यंत्री निलंबित जांच के लिए समिति गठित इंदौर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनसामान्य का स्वास्थ्य, राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि इंदौर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित जल आपूर्ति से नागरिकों के संक्रमित होने की घटना को अत्यंत गंभीरता से लिया गया है। घटना में लापरवाही पाये जाने पर जोन क्रमांक–4 के जोनल अधिकारी, सहायक यंत्री एवं प्रभारी सहायक यंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। प्रभारी उपयंत्री लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। मामले की गहन जांच के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की समिति भी गठित कर दी गई है। डायरिया के बढ़ रहे थे मामले बताया जा रहा है कि पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में उल्टी, दस्त और बुखार के मरीज लगातार सामने आ रहे थे। 26 दिसंबर को गोमती रावत की मौत इस पूरे घटनाक्रम की पहली कड़ी थी। इसके बाद धीरे-धीरे बीमार लोगों की संख्या बढ़ती गई और पांच दिनों के भीतर मौतों का आंकड़ा आठ तक पहुंच गया। इसके बावजूद शुरुआती दौर में स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया गया। पहली मौत को पुरानी बीमारी बताकर मामला दबाने की कोशिश भी की गई, लेकिन जब हालात बिगड़ते चले गए तो प्रशासन हरकत में आया। 150 से अधिक लोग हुए बीमार इस पूरे मामले का खुलासा उस समय हुआ जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अचानक दिल्ली से इंदौर पहुंचे और वर्मा हॉस्पिटल का निरीक्षण किया। इसके बाद सामने आया कि 150 से अधिक लोग बीमार हो चुके हैं और कई अस्पतालों में मरीज भर्ती हैं। वर्तमान में विभिन्न अस्पतालों में 125 से ज्यादा मरीजों का इलाज चल रहा है। इनमें वर्मा हॉस्पिटल में 30, ईएसआईसी हॉस्पिटल में 11, एमवाय हॉस्पिटल में 5, त्रिवेणी हॉस्पिटल में 7 और अरविंदो हॉस्पिटल में 2 मरीज शामिल हैं। अन्य निजी अस्पतालों में भी मरीज भर्ती हैं, जिनमें से कुछ की हालत में सुधार होने पर उन्हें छुट्टी दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग ने शुरू किया अभियान स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन ने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सर्वे और उपचार अभियान शुरू किया है। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी के अनुसार अब तक 2703 घरों का सर्वे किया जा चुका है और करीब 12 हजार लोगों की जांच की गई है। इनमें से 1146 मरीजों को मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया जबकि 125 से अधिक मरीज को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। 18 मरीज उपचार के बाद स्वस्थ होकर घर लौट चुके हैं। भागीरथपुरा की 15 गलियों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीमें घर-घर जाकर लोगों की जांच कर रही हैं। गंभीर मरीजों को एम्बुलेंस के जरिए अस्पताल पहुंचाया जा रहा है। आशा कार्यकर्ताओं द्वारा क्लोरीन टैबलेट, जिंक और ओआरएस का वितरण भी किया जा रहा है। शौचालय के नीचे से गुजर रही पाइप लाइन जांच के दौरान यह बात सामने आई है कि भागीरथपुरा में पुलिस चौकी से लगे शौचालय के नीचे से गुजर रही मुख्य जल आपूर्ति लाइन में लीकेज था। आशंका जताई जा रही है कि इसी लीकेज के कारण गंदा पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे यह भयावह स्थिति पैदा हुई। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वे पिछले 15 दिनों से बदबूदार और दूषित पानी आने की शिकायत कर रहे थे लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने कोई ध्यान नहीं दिया। इन पर हुई कार्रवाई मामले में लापरवाही बरतने पर नगर निगम और पीएचई विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई भी की गई है। जोनल अधिकारी शालिग्राम शितोले को निलंबित किया गया है, प्रभारी सहायक अभियंता योगेश जोशी को सस्पेंड किया गया है, जबकि प्रभारी डिप्टी इंजीनियर शुभम श्रीवास्तव की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इसके अलावा तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है जिसकी अध्यक्षता आईएएस नवजीवन पंवार कर रहे हैं। दो-दो लाख मुआवजे की घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले का संज्ञान लेते हुए मृतकों के परिजन को 2-2 लाख रुपए की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि 70 से अधिक पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं और सभी मरीजों का इलाज पूरी तरह सरकारी खर्च पर किया जाएगा। जिन लोगों ने इलाज के लिए निजी अस्पतालों में पैसे जमा किए हैं, उन्हें भी राशि वापस दिलाई जाएगी। फिलहाल क्षेत्र में 50 टैंकरों के माध्यम से पानी की आपूर्ति की जा रही है और लोगों को उबला हुआ पानी पीने, बाहर का खाना न खाने और किसी भी तरह के लक्षण दिखने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने की सलाह दी जा रही है।  

नए साल के स्वागत से एक दिन पहले बागेश्वर धाम में भक्तों की भारी उपस्थिति, प्रशासन और पुलिस तैनात

छतरपुर   बागेश्वर धाम में नए साल का स्वागत करने के लिए एक दिन पहले ही बड़ी संख्या में भक्त धाम पहुंच गए. इसके साथ ही भक्तों ने छतरपुर और खजुराहो के होटलों व धर्मशालाओं में डेरा डाल लिया है. ये भक्त नए साल की शुरुआत बागेश्वर धाम में हनुमानजी महाराज के दर्शन करके करेंगे. बागेश्वर धाम में भक्तों की भीड़ को देखते हुए व्यापक इंतजाम किए गए हैं. नए साल का स्वागत सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ के साथ नए साल के अंतिम दिन भक्तों को संबोधित करते हुए बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा "जानकारी मिली है कि लाखों भक्त खजुराहो व छतरपुर के अलावा बागेश्वर धाम में पहुंच गए हैं. बागेश्वर धाम में सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ करके नए साल का स्वागत करेंगे. युवाओं में ये बड़ा बदलाव देखा जा रहा है कि लोग नए साल का शुभारंभ धार्मिक कार्यक्रमों के साथ कर रहे हैं." सनातन धर्म के प्रति जागरूक हुए युवा धीरेंद्र शास्त्री ने कहा "एक समय था जब युवा नए साल का स्वागत करने के लिए पबों, बारों और महंगे होटलों में जश्न मनाने पहुंचते थे. लेकिन अब युवा अयोध्या में रामलला के दर्शन करके, वाराणसी जाकर और बागेश्वर धाम आकर नए साल का आगाज कर रहे हैं. ये बताता है कि युवा भी सनातन धर्म के प्रति कितने जागरूक हो गए हैं. युवा पीढ़ी में आया ये बदलाव देश और समाज के हित में है." बागेश्वर धाम की रसोई में खास इंतजाम बागेश्वर धाम में नए साल का स्वागत करने के लिए भक्तों का तांता लगा हुआ है. निःशुक्ल रसोई में विशेष इंतजाम किए गए हैं. इसके साथ ही पुलिस और प्रशासन ने भी यहां खास इंतजाम किए हैं. यहां पिछले एक साल में करीब 50 लाख लोगों ने भोजन प्रसाद पाया है. रसोई अनवरत चालू रहती है. इसके अलावा एक वर्ष में धाम की गौशाला में 5 हजार पौधे रोपे गए हैं. शिवरात्रि के पावन पर्व पर 108 आदिवासी बेटियों सहित 251 बेटियों को परिणय सूत्र में बांधा गया. कैंसर अस्पताल का निर्माण कार्य शुरू कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का इलाज दिलाने के लिए बागेश्वर सरकार के मन में प्रेरणा हुई, जिससे दीन दुखियों की मदद के लिए उन्होंने कैंसर अस्पताल बनाने की घोषणा की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 फरवरी 2025 को कन्या विवाह महा महोत्सव के अवसर पर आकर कैंसर अस्पताल की आधारशिला रखी. मुंबई के भिवंडी में बालाजी सनातन मठ की स्थापना कराई गई है. बागेश्वर महाराज ने इस वर्ष ऑस्ट्रेलिया, फिजी, ओमान, लंदन, दुबई, न्यूजीलैंड जैसे देशों की यात्रा करते हुए यहां कथा के माध्यम से लोगों में सनातन के प्रति जुड़ाव पैदा किया. बागेश्वर के सेवादार कमल अवस्थी कहते हैं "भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ रही है. पूरे साल धाम पर धार्मिक आयोजन चलते रहते हैं. सनातन की अलख जगाने के लिए महाराज बागेश्वर लगातार लगे हैं."

राज्यपाल पटेल ने प्रदेशवासियों को दी नववर्ष की शुभकामनाएँ, सकारात्मक शुरुआत का आह्वान

नया वर्ष नए संकल्पों, नई ऊर्जा और नए अवसरों का प्रतीक : राज्यपाल पटेल राज्यपाल ने प्रदेशवासियों को दी नव वर्ष की शुभकामनाएँ भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने नववर्ष 2026 के शुभ अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएँ दी है। उन्होंने कहा है कि नया वर्ष नए संकल्पों, नई ऊर्जा और नए अवसरों का प्रतीक है। यह समय है कि हम बीते अनुभवों से सीख लेते हुए मध्यप्रदेश को प्रगति की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का संकल्प लें। राज्यपाल पटेल ने अपने शुभकामना संदेश में कहा है कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनकल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए कार्य कर रही है। किसान, युवा, महिलाएँ और वंचित वर्गों का कल्याण सरकार की नीतियों के केंद्र में हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, आधारभूत ढाँचे और निवेश के क्षेत्र में संतुलित विकास की दिशा में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। कृषि को लाभकारी बनाना, युवाओं को रोजगार व स्वरोजगार से जोड़ना और मातृशक्ति को सशक्त करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत, प्राकृतिक संसाधन और पर्यटन संभावनाएँ हमारे गौरव का आधार हैं।  हमें सदैव स्मरण रखना होगा कि पर्यावरण संरक्षण और सतत् विकास के बिना समृद्धि संभव नहीं है। राज्यपाल पटेल ने प्रदेशवासियों का आह्वान  किया है कि सामाजिक सद्भाव, स्वच्छता, जल संरक्षण और संवैधानिक मूल्यों को अपनाते हुए विकास की इस यात्रा में सहभागी बने। नववर्ष 2026 में एक आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प लें।  

मतदाता संख्या में राज्यवार बदलाव: बिहार-बंगाल में कमी, असम में उछाल

नई दिल्ली बिहार, बंगाल, राजस्‍थान से मध्‍य प्रदेश तक… जहां जहां भी वोटर ल‍िस्‍ट का स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर हुआ, वहां 6% से 14% तक वोटर घट गए.लेकिन असम ने इस ट्रेंड को पूरी तरह पलट दिया है. असम में वोटर ल‍िस्‍ट की सफाई के दौरान मतदाताओं की संख्या में 1.35% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. असम चुनाव आयोग द्वारा जारी ताजा ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल के आंकड़ों ने सियासी पंडितों को भी चौंका दिया है. आखिर असम में ऐसा क्या अलग हुआ? क्या यह घुसपैठ का असर है या फिर इसके पीछे कोई तकनीकी और कानूनी पेंच है? यह बाकी राज्यों के SIR से कैसे अलग है? मंगलवार को असम के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ड्राफ्ट वोटर ल‍िस्‍ट जारी की. जनवरी 2025 की सूची के मुकाबले इस बार मतदाताओं की संख्या में 1.35% की वृद्धि देखी गई. आंकड़ों पर गौर करें तो असम की तस्वीर काफी दिलचस्प है. यहां 1.25 करोड़ पुरुष और 1.26 करोड़ मह‍िला मतदाता हैं. यानी महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक हो गई है, जो राज्य की बदलती डेमोग्राफी का एक चेहरा है. एक बात और यहां एसआईआर नहीं हुआ था, यहां सिर्फ वोटर ल‍िस्‍ट की जांच की गई थी और फर्जी या मृत वोटर हटाए गए थे. बाकी देश में SIR, तो असम में क्यों नहीं? असम में वोटर क्यों बढ़े, इसके पीछे तकनीकी वजह है. पश्चिम बंगाल, बिहार समेत 12 राज्‍यों में जहां एसआईआर के दौरान घर-घर जाकर वेर‍िफ‍िकेशन क‍िया गया. संदिग्ध, मृत या शिफ्ट हो चुके वोटरों के नाम सख्ती से काटे गए. लेकिन असम में SIR नहीं बल्कि स्‍पेशल र‍िवीजन हुआ. असम को छूट क्यों? इसके पीछे का कारण है NRC यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन्स. असम में नागरिकता का मुद्दा बेहद संवेदनशील है और एनआरसी अपडेट की प्रक्रिया अभी भी सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही है और अधूरी है. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने स्पष्ट किया था कि नागरिकता अधिनियम के तहत असम के लिए अलग प्रावधान हैं और सुप्रीम कोर्ट की देखरेख के कारण यहां प्रक्रिया अलग है. यही वजह है कि जहां अन्य राज्यों में SIR के तहत बड़े पैमाने पर नाम काटे जा रहे हैं, असम में ‘स्पेशल रिवीजन’ के तहत प्रक्रिया थोड़ी अलग है, जिसके परिणामस्वरूप वोटर लिस्ट में वो गिरावट नहीं दिखी जो अन्य जगह दिख रही है. जुड़ने वाले ज्यादा, कटने वाले कम क्‍यों ?     असम में वोटर बढ़ने का दूसरा कारण यह है कि नए जुड़ने वाले लोगों की संख्या, लिस्ट से हटाए गए लोगों से लगभग दोगुनी है. चुनाव आयोग के बयान के मुताबिक, 6 जनवरी से 27 दिसंबर के बीच 7.86 लाख नए नाम जुड़े. लेकिन 4.47 नाम हटाए गए. यानी सीधे तौर पर लगभग 3.4 लाख वोटरों की बढ़ोतरी हो गई.     भले ही 4.47 लाख नाम हटा दिए गए हों, लेकिन असली कहानी उन नामों की है जो चिन्हित तो हुए हैं, लेकिन अभी तक हटाए नहीं गए हैं. ब्लॉक लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर वेर‍िफ‍िकेशन क‍िया, जिसमें चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं.     4.79 लाख वोटर ऐसे म‍िले ज‍िनकी मौत हो चुकी है. 5.24 लाख कहीं और श‍िफ्ट हो चुके हैं. 53,619 नाम ऐसे हैं जो संदिग्ध या डुप्लीकेट हैं. ये सब मौजूदा वोटर ल‍िस्‍ट का लगभग 4% हिस्सा हैं. इनका नाम अभी तक नहीं हटाया गया है. तो ये नाम कटे क्यों नहीं? यही असम की स्‍पेशल र‍िवीजन और बाकी राज्यों की SIR प्रक्रिया का अंतर है. अधिकारियों ने साफ किया है कि इन नामों को अभी तक जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के तहत हटाया नहीं गया है. इन्हें हटाने के लिए औपचारिक आवेदन (फॉर्म 7) मिलने का इंतजार किया जाएगा. इसका मतलब यह है कि लगभग 10 लाख ऐसे नाम (मृत या शिफ्टेड) अभी भी ड्राफ्ट रोल में मौजूद हो सकते हैं, जब तक कि उनके खिलाफ फॉर्म 7 भरकर प्रक्रिया पूरी नहीं की जाती. यही कारण है कि असम का आंकड़ा बढ़ा हुआ दिख रहा है, जबकि SIR वाले राज्यों में ऐसे नामों को आयोग खुद सख्ती से हटा रहा है.

एमपी में 21 साल बाद सरकारी बसें, 15 लाख कर्मचारियों को आयुष्मान का तोहफा, पेंशन नियम होंगे नए

भोपाल  मध्य प्रदेश में नए साल की शुरुआत कई बड़े बदलाव और सुविधाओं के साथ होने जा रही है। 21 साल बाद सरकारी बस सेवा फिर से शुरू होगी, 15 लाख कर्मचारियों को आयुष्मान जैसी स्वास्थ्य योजना का लाभ मिलेगा और पेंशन नियमों में बदलाव होगा। इसके अलावा, सरकारी नौकरी में दो बच्चों की शर्त खत्म होने जा रही है। अब सिलसिलेवार जानिए इन बदलाव के बारे में 1.मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना में कैश लैस इलाज     क्या है मौजूदा सिस्टम: वर्तमान में, राज्य के कर्मचारियों और पेंशनर्स को इलाज का खर्च पहले खुद उठाना पड़ता है, जिसका भुगतान सरकार बाद में केंद्रीय स्वास्थ्य योजना (CGHS) की दरों के अनुसार करती है। इस प्रणाली में अक्सर इलाज का पूरा खर्च कवर नहीं होता। उदाहरण के लिए, लिवर ट्रांसप्लांट पर लगभग 20 लाख रुपए का खर्च आता है। सरकार केवल 4 लाख रुपए की प्रतिपूर्ति करती है, वह भी कर्मचारी द्वारा बिल जमा करने के बाद।     प्रस्तावित योजना: 'मुख्यमंत्री आयुष्मान स्वास्थ्य बीमा योजना' के तहत प्रदेश के 15 लाख कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों को कैश लेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इस मॉडल में कर्मचारियों के वेतन से 3,000 से 12,000 रुपए तक का वार्षिक अंशदान लिया जाएगा, जबकि शेष राशि सरकार वहन करेगी। अंशदान की अंतिम राशि अभी तय होनी है। इस योजना में सामान्य बीमारियों के लिए 5 लाख और गंभीर बीमारियों के लिए 10 लाख रुपए तक के कैश लेस इलाज का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त, कर्मचारी इलाज के बाद अपने विभाग से चिकित्सा रिफंड के लिए भी आवेदन कर सकेगा। 2. इक्कीस साल बाद अप्रैल से चलेंगी सरकारी बसें मध्य प्रदेश की सड़कों पर 21 साल बाद एक बार फिर सरकारी बसें चलने वाली है। सरकार ने इसे 'जनबस' नाम दिया है। राज्य परिवहन निगम की जगह सरकार ने यात्री परिवहन एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड कंपनी बनाई है जो 25 जिलों में बसों का संचालन करेगी। 18 नवंबर को कंपनी के संचालक मंडल की बैठक में 6 हजार से ज्यादा रूट को मंजूरी दी गई है। इन रूट पर 10 हजार 879 बसें दौड़ेंगी। इस सेंट्रलाइज्ड सिस्टम की शुरुआत अप्रैल 2026 से आर्थिक राजधानी इंदौर से की जाएगी। इसके बाद सिलसिलेवार तरीके से बाकी जिलों में भी बसें चलना शुरू होंगी। अप्रैल 2027 तक सभी संभाग और जिलों में यह नई व्यवस्था लागू होगी। ये व्यवस्था न केवल शहरी क्षेत्रों तक सीमित रहेगी, बल्कि इसका मुख्य फोकस ग्रामीण, दूर दराज के इलाके और आदिवासी एरिया को जिला मुख्यालयों और बड़े शहरों से जोड़ना है। सरकार पूरी व्यवस्था की मॉनिटरिंग करेगी और निजी ऑपरेशन बसों का संचालन करेंगे। ई-बसों का संचालन भी कंपनियां करेंगी इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा ई-बसों का संचालन है। केंद्र सरकार की नेशनल ई-बस स्कीम के तहत देश के 88 शहरों में साढ़े छह हजार से ज्यादा ई-बसें चलाई जानी हैं, जिनमें से 582 बसें मध्य प्रदेश को मिली हैं। इन बसों का संचालन भी इन्हीं क्षेत्रीय कंपनियों के अधीन होगा। इंदौर, भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन और सागर में 472 मिडी ई-बस (26 सीटर) और 110 मिनी ई-बस (21 सीटर) चलाई जाएंगी। ई-बसों का किराया मौजूदा सिटी बसों से काफी कम होगा, जिससे आम आदमी की जेब पर बोझ घटेगा। 3.केंद्र के समान पेंशन नियम, बेटियों को मिलेगा फायदा मध्य प्रदेश सरकार पेंशन नियमों को केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक बना रही है। नए नियम के तहत, 25 साल से ज्यादा उम्र की अविवाहित, विधवा या परित्यक्ता बेटी भी परिवार पेंशन की पात्र होगी। वर्तमान में यह फायदा केवल 25 वर्ष तक की अविवाहित बेटी को ही मिलता है। यह प्रस्ताव केंद्र सरकार द्वारा 2011 में लागू की गई व्यवस्था पर आधारित है। कर्मचारी आयोग भी पहले इसकी अनुशंसा कर चुका है। सेवानिवृत्त आईएएस जीपी सिंघल की अध्यक्षता वाले आयोग की रिपोर्ट पर वित्त विभाग सैद्धांतिक सहमति दे चुका है और अब यह प्रस्ताव अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया में है। 4. 48 साल बाद बदल रहे कर्मचारियों के छुट्टी नियम मध्य प्रदेश के 6.5 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों के लिए 1 जनवरी 2026 से छुट्टियों का पूरा कैलेंडर बदलने जा रहा है। 48 साल पुराने मध्यप्रदेश अवकाश नियम 1977 की जगह अब मध्यप्रदेश सिविल सेवा (अवकाश) नियम 2025 लागू होंगे। नए नियम केंद्र सरकार की छुट्टियों के नियमों के लगभग समान हैं और इन्हें मौजूदा सामाजिक और प्रशासनिक जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है। नए नियमों के मुताबिक अब बीमारी और मातृत्व अवकाश लेना ज्यादा सुविधाजनक होगा, वहीं इनके दुरुपयोग पर भी लगाम लगेगी। अधिकारी छुट्टी देने में मनमानी न कर सकें, इसके लिए रोस्टर बनाना अनिवार्य होगा। नए नियमों को ज्यादा जेंडर न्यूट्रल बनाया गया है, जिसमें सरोगेसी और सिंगल फादर जैसी नई परिस्थितियों के लिए भी प्रावधान जोड़े गए हैं। साल की शुरुआत में ही खाते में आ जाएगी अर्निंग लीव अभी तक अर्जित अवकाश (EL) साल भर की नौकरी पूरी होने के बाद कर्मचारी के खाते में दर्ज होता था। अब ऐसा नहीं होगा। 1 जनवरी को 15 दिन की EL खाते में क्रेडिट हो जाएगी। इसके बाद साल के मध्य में 1 जुलाई को फिर 15 दिन की EL जुड़ जाएगी। इसका फायदा नए कर्मचारियों को भी मिलेगा। ई एल की तर्ज पर अब HPL भी साल में दो बार 1 जनवरी और 1 जुलाई को 10–10 दिन के हिसाब से कर्मचारी के खाते में अग्रिम जमा हो जाएगी। इससे कर्मचारियों को छुट्‌टी जमा होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। साल की शुरुआत में उन्हें अवकाश की सुविधा मिल जाएगी और यह भी पता चल जाएगा कि साल भर की कुल कितनी छुटि्टयां उन्हें मिलेंगी। साथ ही शिक्षकों और प्रोफेसरों को भी 10 दिन की EL मिलेगी। 5.सरकारी नौकरी में दो बच्चों की शर्त खत्म होगी सरकार लगभग 24 साल पुराने उस नियम को खत्म करने की तैयारी में है, जिसके तहत दो से अधिक संतान वाले व्यक्ति सरकारी नौकरी के लिए अपात्र माने जाते हैं। इस संशोधन के बाद तीन संतान वाले उम्मीदवार भी नियुक्ति के पात्र होंगे। 26 जनवरी 2001 से लागू इस नियम में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट में पेश किया जाएगा। मध्य प्रदेश से पहले छत्तीसगढ़ और राजस्थान भी यह शर्त हटा चुके हैं। शर्त समाप्त होने … Read more

योगी मंत्रिमंडल में जल्द हो सकते बदलाव, संगठन में भी हो सकती बड़ी छंटनी

लखनऊ नए साल पर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कुछ फेरबदल देखने को मिल सकते हैं। मंगलवार को मुख्यमंत्री के आवास पर ही एक मीटिंग हुई, जिसमें कई सीनियर नेता मौजूद रहे। इसके अलावा नए बने प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी मीटिंग में शामिल थे। इस बैठक में संगठन से लेकर सरकार तक में कुछ बदलाव किए जाने पर चर्चा होने की खबरें हैं। कहा जा रहा है कि पहले कैबिनेट का विस्तार होगा और फिर संगठन में भी बड़े पैमाने पर फेरबदल होंगे। पंकज चौधरी नए प्रदेश अध्यक्ष बने हैं और वह अपने स्तर पर संगठन में कुछ बदलाव करेंगे और नई टीम तैयार करेंगे। कुछ नेताओं का समायोजन संगठन में हो सकता है तो वहीं कुछ लोगों को सरकार में हिस्सेदारी मिल सकती है। इन दोनों ही फेरबदल में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का भी पार्टी ख्याल रखना चाहेगी क्योंकि फिलहाल सीएम और प्रदेश अध्यक्ष दोनों ही पूर्वांचल से हो गए हैं। ऐसी स्थिति में वेस्ट यूपी, अवध और बुंदेलखंड क्षेत्र को अच्छा प्रतिनिधित्व मिल सकता है। इस मीटिंग में संगठन महामंत्री धर्मपाल भी मौजूद थे। योगी सरकार के कैबिनेट विस्तार को लेकर आखिरी फैसला दिल्ली में होना है और जनवरी के पहले सप्ताह में ही इस संबंध में ऐलान हो सकता है। हालांकि शपथ समारोह मकर संक्रांति के बाद ही होगा। फिलहाल इस बात पर चर्चा हुई कि किन नामों को दिल्ली भेजा जाए। इस मीटिंग में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी मौजूद रहे। संघ से भी इस संबंध में राय ली गई है। पूरे दिन योगी आदित्यनाथ लखनऊ में ही रहे और इस मीटिंग के बाद उन्होंने अलग-अलग भी कई नेताओं से बात की। बता दें कि अब तक यूपी अध्यक्ष रहे भूपेंद्र चौधरी को भी कैबिनेट में जगह दी जा सकती है। वह जाट समुदाय से आने वाले नेता हैं और पश्चिम यूपी में इस समाज का मजबूत प्रतिनिधित्व है। ऐसी स्थिति में जाट बिरादरी के एक नेता को कैबिनेट में लेकर संदेश देने की कोशिश होगी। इसके अलावा कैबिनेट विस्तार में समाजवादी पार्टी के पीडीए वाले नैरेटिव को भी काउंटर करने की तैयारी होगी।

ताइवान सीमा पर तनाव, ड्रैगन ने रॉकेटों से किया सैन्य प्रदर्शन

बीजिंग  ताइवान के समुद्री किनारों पर चीन की सेनाओं की कारगुजारियां युद्ध जैसी ही हैं. चीन की आर्मी ताइवान को चारों ओर से घेर रही है. लंबी दूरी के लाइव रॉकेट फायर कर रही है और जंगी जहाजों को तैनाती असली जंग को ध्यान में रखकर की गई है.  चीन ने ताइवान के आस-पास दो दिन की मिलिट्री ड्रिल में 10 घंटे की लाइव फायरिंग ड्रिल की है. इस दौरान चीनी सेना ने ताइवान को घेरने और उसके मुख्य बंदरगाहों को ब्लॉक करने का अभ्यास किया. इन अभ्यासों में ताइवान और उसके मुख्य बंदरगाहों, कीलुंग और काओशुंग की नाकेबंदी का भी अभ्यास किया गया. चीन की सेना ने शक्ति प्रदर्शन के साथ-साथ ताइवान के खिलाफ इन्फॉर्मेशन वॉर भी तेज कर दिया है. एक विदेशी चीनी मिलिट्री कमेंटेटर ने कहा कि इस कैंपेन का मकसद विदेशी लोगों को यह यकीन दिलाना है कि ताइवान की सेना और उपकरण PLA के हमले का सामना नहीं कर पाएंगे.  उकसावे की इतनी कार्रवाई के बाद भी चीन ताइवान को माहौल बिगाड़ने का दोषी ठहरा रहा है.  चीन के विदेश मंत्री  वांग यी ने कहा कि, "ताइवान का मुद्दा चीन का अंदरूनी मामला है और यह चीन के मुख्य हितों का केंद्र है. ताइवान की आजादी की ताकतों की लगातार उकसावे वाली हरकतों और अमेरिका द्वारा ताइवान को बड़े पैमाने पर हथियार बेचने के जवाब में, हम निश्चित रूप से उनका कड़ा विरोध करेंगे और जवाबी कार्रवाई करेंगे." चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने कहा कि, 'कानून के अनुसार ताइवान का पूरी तरह से एकीकरण हासिल करना और हमारी राष्ट्रीय संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करना हमारा ऐतिहासिक मिशन है जिसे हमें पूरा करना ही है.' सोमवार को PLA के ईस्टर्न थिएटर कमांड ने ताइवान के आस-पास के पानी और एयरस्पेस में नौसेना के जहाजों और विमानों के साथ मिलकर जॉइंट ड्रिल की. इन अभ्यासों में समुद्र और जमीन पर मौजूद टारगेट पर नकली हमले, एयर-कंट्रोल ऑपरेशन और एंटी-सबमरीन मिशन पर फोकस किया गया. इन ड्रिल्स का मकसद चीन की वायु सेना और नौसेना के बीच बेहतर तालमेल दिखाना था. मंगलवार को ताइवान के आस-पास के पानी में लंबी दूरी के लाइव-फायर अभ्यासों के साथ ये और तेज हो गए. बता दें कि चीन की ओर से उकसावे वाली ये हरकतें वाशिंगटन द्वारा 18 दिसंबर को ताइवान को नए हथियारों की बिक्री की घोषणा के बाद शुरू हुईं है. अमेरिका ने ताइवान को 11 बिलियन डॉलर की हथियारों की बिक्री की घोषणा की है. ये डील ताइवान के लिए सबसे बड़ी डील है.  इस डील में रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम, लंबी दूरी की मिसाइलें, सेल्फ-प्रोपेल्ड हॉवित्जर, मानवरहित निगरानी प्लेटफॉर्म और संबंधित मिलिट्री सॉफ्टवेयर शामिल हैं. ताइवान के कोस्टगार्ड ने बताया कि मुख्य द्वीप के आसपास दो ड्रिल ज़ोन में सात रॉकेट दागे गए.  अलजजीरा ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसने सोमवार सुबह 6 बजे से मंगलवार सुबह 6 बजे के बीच चीनी विमानों की 130 हवाई उड़ान, 14 नौसैनिक जहाजों और आठ "आधिकारिक जहाजों" को ट्रैक किया है.  इन 24 घंटों के दौरान, 90 हवाई उड़ानें ताइवान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन ज़ोन (ADIZ) में घुस गईं, जो ताइपे द्वारा मॉनिटर किया जाने वाला जमीन और समुद्र का एक इलाका है. ताइवान ने कहा कि यह 2022 के बाद इस तरह की दूसरी सबसे बड़ी घुसपैठ है. चीन के ड्रिल को देखते हुए ताइवान ने मंगलवार को 80 से ज़्यादा घरेलू उड़ानें रद्द कर दीं और चेतावनी दी कि लाइव-फायर ड्रिल के दौरान फ्लाइट रूट बदलने की वजह से 300 से ज़्यादा इंटरनेशनल फ्लाइट्स में देरी हो सकती है.  ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि कोस्टगार्ड ने बाहरी द्वीपों के पास अभ्यासों पर नजर रखी और यह भी बताया कि नौसेना के कुछ जहाज भी पास में तैनात किए गए थे, जिनकी संख्या नहीं बताई गई है. ताइपे ने अपने ADIZ में होने वाली सभी घुसपैठ पर भी नज़र रखी, जिसमें ताइवान जलडमरूमध्य, तटीय चीन के कुछ हिस्से और ताइवान के आसपास का पानी शामिल है.