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देसी फाइटर जेट तेजस एमके-1ए: लाइट वेट और किफायती, भारत का 200 जेट खरीदने का फैसला

 नई दिल्ली  दुनिया में अमेरिकी 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट एफ-35 की तूती बोलती है. इस फाइटर जेट की क्षमता को आज की तारीख में कोई भी देश चुनौती नहीं दे सकता है. इसके बाद राफेल, सुखोई-57, चीनी जे-35, यूरो फाइटर जैसे फाइटर जेट्स आते हैं. ये सभी ए+ या ए श्रेणी के जेट्स हैं. लेकिन, इन फाइटर जेट्स को खरीदने से ज्यादा बड़ी टेंशन इनको उड़ाने में होती है. इन विमानों को उड़ाना हर किसी के बस की बात नहीं हैं. यानी ये सफेद हाथी हैं जिनको खरीदने से ज्यादा टेंशन पालने की होती है. आज दुनिया बदल रही है. युद्ध के तरीके बदल रहे हैं. जमीनी की जगह हवाई जंग का महत्व बढ़ गया है. हर देश अब अपनी एयरफोर्स को मजबूत करने में जुटी है. ऐसे में भारत भी पूरी शिद्दत से अपनी एयरफोर्स को मजबूत करने में जुटा है. इस वक्त भारतीय एयरफोर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती फाइटर जेट्स की कमी को पूरा करना है. एयरफोर्स को फाइटर जेट्स के 42 स्क्वड्रन की जरूरत है, लेकिन उसके पास ऑपरेशनल केवल 30 स्क्वाड्रन हैं. एक स्क्वाड्रन में 18 विमान होते हैं. इसके अलावा आने वाले समय में कई स्क्वाड्रन रिटायर होने वाले हैं. ऐसे में यह अंतर और बढ़ने वाला है. भारत ने देसी फाइटर जेट्स पर क्यों जताया भरोसा? ऐसे में इस कमी को पूरा करने के लिए भारत ने देसी फाइटर जेट्स तेजस पर भरोसा जताया है. सरकार ने अब तक तेजस एमके-1 फाइटर जेट के 180 यूनिट का आर्डर दे दिया है. इसके अलावा कुछ ट्रेनर विमान भी हैं. अब इन विमानों की सप्लाई भी शुरू होने वाली है. इस विमान को एचएएल ने बनाया है. अनुमान है कि चीजें पटरी पर आने के बाद एचएएल हर साल इसकी 24 यूनिट की आपूर्ति कर सकता है. मार्केट में राफेल, एफ-35 जैसे विमान तो तेजस को तरजीह क्यों? तेजस एमके-1 के ऑर्डर बुक देखने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठता है जब चीन और पाकिस्तान जैसे हमारे दुश्मन पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स की ओर बढ़ रहे हैं तो हमने तेजस की इतनी तरजीह क्यों दी है. तेजस एमके-1 एक 4+ का लाइट वेट फाइटर जेट है. हमारे मन में यही सवाल है कि क्या बदलने समय के अनुसार इसकी सार्थकता है. हम आगे इसी सवाल पर जबाव खोजेंगे.     तेजस क्यों है एयरफोर्स की पसंद?     तेजस एमके-1 का ऑपरेशन कॉस्ट काफी कम है. एक शॉर्टी यानी 45 मिनट के एक उड़ान पर इसमें 1200-1400 किलो फ्यूल खर्च होता है. इस पर प्रति फ्लाइट ऑवर 4 से 8 हजार डॉलर का कुल खर्च आता है. दूसरी ओर राफेल पर 16 से 31 हजार डॉलर प्रति घंटे का खर्च आता है. वहीं एफ-35 की बात करें तो यह खर्च 35 से 42 हजार डॉलर प्रति घंटे तक पहुंच जाता है. इस तरह इस बात को समझना आसान हो जाता है कि ऑपरेशन लागत ही वह सबसे बड़ा कारण है जिससे एयरफोर्स ने तेजस एमके-1 को तरजीह दी है. तेजस फाइटर वर्ल्ड का ऑल्टो क्यों दुनिया के तमाम एक्सपर्ट्स के मुताबिक एक एफ-35 फाइटर जेट पर उसके पूरे लाइफ साइकिल में 20 से 45 करोड़ डॉलर का खर्च आता है. यह खर्च हथियारों की लोडिंग, उसकी उड़ान के घंटे, मेंटेनेशन सहित कई अन्य चीजों पर निर्भर करता है. ऐसे में अगर इन सभी लागत का औसत लिया जाए तो समझ में आ जाता है कि भारत ने बेहद समझादी का परिचय दिया है. एक राफेल या एफ-35 पर होने वाले खर्च से करीब छह से आठ गुना कम खर्च तेजस एमके-1 पर होता है. अब आप समझ गए होंगे कि हमने इस तेजस को फाइटर जेट की दुनिया का ऑल्टो क्यों कह रहे हैं. कार की दुनिया में ऑल्टो केवल एक मॉडल का नाम नहीं है बल्कि यह किफायत का पर्याववाची भी है. तो क्या तेजस एमके-1 से भारत की जरूरतें पूरी होगी? यह बहुत अच्छा सवाल है. आमतौर पर सस्ती चीजों को लेकर हमारे मन में एक ही सवाल उठता है कि यह कितना टिकाऊ है. आपका चिंतित होना लाजिमी भी है. क्योंकि देश चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मनों से घिरा हुआ है. इस सवाल का जवाब ढूंढ़ने से पहले हमें भारत और पाकिस्तान के साथ लगने वाली सीमा को लेकर थोड़ी बात करनी होगी. दरअसल, पाकिस्तान 1947 से पहले भारत का हिस्सा था. वह कोई चांद से उतरा देश नहीं है. सरहद के उस पार की स्थिति-परिस्थिति के बारे में हमें बखुबी पता है. भारत की सीमा से 100-200 मील के दायरे में अधिकतर पाकिस्तान सिमट जाता है. उसका सबसे प्रमुख शहर लाहौर, रावलपिंडी, राजधानी इस्लामाबाद तो भारत की सीमा के बहुत करीब हैं. ऐसे में इनको बड़े आसानी से तेजस एमके-1 जैसे फाइटर जेट से कवर किया जा सकता है. इस बात को आप इससे और अच्छी तरह समझ सकते हैं कि अगर आपको शहरी इलाके में 50-100 किमी की दूरी तय करनी है तो आपको बहुत महंगी बड़ी करोड़ों रुपये की गाड़ी नहीं खरीदनी चाहिए. बशर्ते आप गाड़ी जरूरत को ध्यान में रखकर खरीद रहे हैं न कि शौकिया तौर पर. इससे आपकी जेब पर पेट्रोल का खर्च कम पड़ता है और आप कार की भी सवारी करते हैं. ऐसे में भारत ने पाकिस्तान और उसके साथ लगने वाली सीमाई इलाकों की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए ही तेजस-एमके-1 की खरीद की है. इस इलाके में तेजस भी करीब-करीब वही काम करेगा जो काम राफेल या फिर एफ-35 जैसे विमान करेंगे, लेकिन दोनों के ऑपरेशन कॉस्ट में जमीन आसमान का अंतर है. इससे भारत एक बड़ी धनराशि की बचत कर उसे अन्य चीजों पर खर्च कर सकता है. अब बात करते हैं चीन सीमा की चीन एक विशाल देश है. उसके साथ लगने वाली सीमा भी बेहद दुर्गम है. ऐसे में हमें इस बात की स्वीकार करने में कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए कि तेजस एमके-1 उसके खिलाफ बहुत प्रभावी साबित नहीं होगी. इसी कारण भारत ने इसके लिए अलग रणनीति अपनाई है. वह देसी तेजसे-एमके-2 और एम्का प्रोग्राम पर काम कर रहा है. इसके साथ ही राफेल, सुखोई-30 जैसे फाइटर जेट्स हैं. ये मीडियम से हाई रेंज के एयरक्राफ्ट हैं. भारत इस कैटगरी में और फाइटर … Read more

योगी सरकार ने 2000 करोड़ के ड्रग रैकेट को तोड़ा, अवैध संपत्तियों पर होगा बुलडोजर एक्शन

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने अब तक की सबसे कड़ी और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। 'जीरो टॉलरेंस' नीति के तहत चलाए जा रहे इस विशेष अभियान में कोडीनयुक्त कफ सीरप के जरिए युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह की कमर तोड़ दी गई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सख्त रुख ने साफ कर दिया है कि अब इस काले धंधे से जुड़े लोगों को किसी भी तरह की कानूनी राहत नहीं मिलेगी। हाईकोर्ट से सरकार को बड़ी मजबूती इलाहाबाद हाईकोर्ट में चार दिनों तक चली गहन सुनवाई के बाद कोर्ट ने 22 आरोपियों की गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया। यह फैसला न केवल जांच एजेंसियों के लिए बड़ी राहत है, बल्कि यह भी संकेत है कि न्यायपालिका इस अपराध को केवल नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि समाज के खिलाफ गंभीर हमला मान रही है। अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी की दलीलों से सहमत होते हुए कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कफ सिरप का अवैध भंडारण और तस्करी सीधे तौर पर NDPS एक्ट के अंतर्गत आता है। आरोपियों के उस तर्क को खारिज कर दिया गया, जिसमें इसे केवल लाइसेंस से जुड़ा तकनीकी मामला बताया जा रहा था। संगठित अपराध, जिसका निशाना पूरी पीढ़ी सरकार ने कोर्ट के सामने यह मजबूती से रखा कि यह मामला साधारण तस्करी का नहीं, बल्कि युवाओं को नशे की गिरफ्त में झोंकने वाले संगठित अपराध का है। शुभम जायसवाल, भोला प्रसाद और विभोर राणा जैसे प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तारी से किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी गई। अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ यह विशेष अभियान अब देश में नशीली दवाओं के खिलाफ सबसे बड़े अभियानों में गिना जा रहा है। STF, FSDA और राज्य पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में नेपाल से लेकर बांग्लादेश तक फैले लगभग 2000 करोड़ रुपये के ड्रग सिंडीकेट की परत-दर-परत पोल खुल चुकी है। फर्जी कंपनियों से मनी लॉन्ड्रिंग का जाल जांच में सामने आया है कि सीए विष्णु अग्रवाल और बर्खास्त सिपाही आलोक प्रताप सिंह जैसे लोगों ने 140 से अधिक फर्जी कंपनियों के माध्यम से अवैध कमाई को वैध दिखाने का बड़ा तंत्र खड़ा किया था। झारखंड, हिमाचल प्रदेश और हरियाणा तक फैले इस नेटवर्क से जुड़े अहम सबूतों को मिटाने की कोशिशें भी जांच एजेंसियों ने समय रहते नाकाम कर दीं। आर्थिक रीढ़ तोड़ने की तैयारी पूरी योगी सरकार अब इस नेटवर्क की आर्थिक ताकत पर सीधा प्रहार कर रही है। केवल गिरफ्तारी तक सीमित न रहकर अपराधियों को पूरी तरह आर्थिक रूप से निष्क्रिय करने की रणनीति पर काम हो रहा है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 107 के तहत संपत्तियों की कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अब तक 30 से अधिक बैंक खातों को फ्रीज किया जा चुका है, जिनमें करोड़ों रुपये के लेन-देन के प्रमाण मिले हैं। अवैध निर्माणों पर बुलडोजर की तैयारी वाराणसी, कानपुर, लखनऊ और सहारनपुर में नशे की कमाई से खड़ी की गई अवैध संपत्तियों की पहचान कर ली गई है। प्रशासन ने संकेत दे दिए हैं कि जल्द ही इन निर्माणों पर बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी। यह पूरा अभियान साफ संदेश देता है कि उत्तर प्रदेश में युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों के लिए न तो जमीन सुरक्षित है, न पैसा और न ही कानून से बचने का कोई रास्ता।  

अंडा और कैंसर कनेक्शन पर FSSAI ने दी सफाई, सुरक्षित है सभी बिकने वाले अंडे

नई दिल्ली कुछ दिन से सोशल मीडिया पर अंडों को लेकर तमाम खबरें चल रही हैं. इनमें दावा किया जा रहा है कि कुछ ब्रांड के अंडों में नाइट्रोफ्यूरान नाम का बैन एंटीबायोटिक के ट्रेस होते हैं, जिससे कैंसर होने का खतरा रहता है. अब इस मामले में FSSAI ने बड़ा खुलासा किया है. आइए आपको इसके बारे में बताते हैं.  एफएसएसएआई ने किया यह खुलासा FSSAI ने बताया कि देश में बिकने वाले अंडे पूरी तरह सुरक्षित हैं. अंडे खाने से कैंसर का कोई खतरा नहीं है. ये दावे भ्रामक और वैज्ञानिक आधार से रहित हैं. FSSAI के मुताबिक, नाइट्रोफ्यूरान का इस्तेमाल पोल्ट्री और अंडा उत्पादन में पूरी तरह प्रतिबंधित है. अगर कहीं ट्रेस मिले भी तो वह अलग-थलग मामला है, सभी अंडों पर लागू नहीं होता है. वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार, इतनी कम मात्रा से कैंसर या कोई स्वास्थ्य समस्या नहीं होती है.  अंडे क्यों हैं पौष्टिक और सुरक्षित? अंडा प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स का खजाना है. इनमें विटामिन A, B12, D, E, आयरन, जिंक और कोलीन जैसे पोषक तत्व होते हैं, जो मांसपेशियां मजबूत बनाते हैं. आंखों की रोशनी अच्छी रखते हैं, हड्डियां मजबूत करते हैं और इम्युनिटी बढ़ाते हैं. रोजाना 1-2 अंडे खाना ज्यादातर लोगों के लिए फायदेमंद होता है.  क्या कहते हैं डॉक्टर? दिल्ली स्थित अपोलो हॉस्पिटल में सीनियर डायटीशियन डॉ. रमेश कुमार ने बताया कि अंडा संपूर्ण प्रोटीन का बेहतरीन सोर्स है. यह मसल्स बनाने, ब्रेन हेल्थ और आंखों के लिए अच्छा है. FSSAI की रिपोर्ट से साफ है कि अफवाहें गलत हैं. रोजाना अंडा खाने से किसी भी तरह का कैंसर नहीं होता है. उन्होंने कहा कि अंडे में कोलीन होता है, जो ब्रेन और लिवर के लिए जरूरी है. यह महिलाओं और बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद होता है. कैंसर की अफवाहों से घबराने की जरूरत नहीं है. कैसे खाने चाहिए अंडे?     उबले या पोच्ड सबसे अच्छे.     फ्राइड कम खाएं.     सब्जियों के साथ मिलाकर.     अच्छे ब्रांड या फार्म फ्रेश अंडे चुनें.  

मेडिकल एजुकेशन में नई क्रांति: धार में बना देश का पहला PPP मॉडल मेडिकल कॉलेज

धार देश के पहले पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) माडल के मेडिकल कालेज का भूमि पूजन मंगलवार को धार में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव एवं केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने किया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री नड्डा ने कहा कि धार का यह मेडिकल कालेज देश में अपनी तरह का पहला संस्थान है, जो निजी जन-भागीदारी से बनाया जा रहा है। यह केवल एक भवन नहीं होगा, बल्कि यहां से तैयार होकर एमबीबीएस डॉक्टर गांव-गांव तक सेवाएं देंगे। चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंता चिकित्सा विशेषज्ञों की चिंता यही है कि अधिक से अधिक मेडिकल कालेज खोलने के चक्कर में मेडिकल कालेजों की स्थिति भी इंजीनियरिंग और नर्सिंग कॉलेजों जैसी न हो जाए। गुणवत्ता के लिए सबसे जरूरी फैकल्टी (प्राध्यापक, सह प्राध्यापक और सहायक प्राध्यापक) हैं, पर इस वर्ष प्रारंभ हुए श्योपुर और सिंगरौली मेडिकल कालेज मात्र 10 प्रतिशत फैकल्टी के सहारे चल रहे हैं।   116 पदों में से 12 ही पदस्थ फैकल्टी की कमी से नुकसान मात्र विद्यार्थियों का ही नहीं बल्कि मरीजों को भी उठाना पड़ रहा है। मेडिकल कालेज के नाम पर आसपास के जिला अस्पतालों से रोगियों को मेडिकल कालेज रेफर किया जाता है, पर सुविधाओं के अभाव में उन्हें उचित उपचार नहीं मिल पाता है। फैकल्टी की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिंगरौली में फैकल्टी के 116 पदों में से 12 यानी 10 प्रतिशत ही पदस्थ हैं।

मंत्री श्रीमती उइके ने कहा- हर घर नल से जल पहुंचने पर ग्रामीण महिलाओं के जीवन में आया निर्णायक बदलाव

महिलाओं का समय बचा, बढ़ा स्वरोजगार और सशक्त हुई नई पीढ़ी पीएम गति शक्ति पोर्टल पर मध्यप्रदेश ने द्वितीय स्थान किया हासिल भोपाल  प्रदेश सरकार के सफल दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री श्रीमती संपतिया उइके ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने पेयजल को नागरिकों का मूल अधिकार मानते हुए जल जीवन मिशन के अंतर्गत हर घर तक सुरक्षित, सतत और गुणवत्तापूर्ण जल पहुंचाने की दिशा में ठोस और प्रभावी कार्य किया है। बीते दो वर्षों में विभाग ने न केवल भौतिक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं, बल्कि ग्रामीण समाज के सामाजिक और आर्थिक ढांचे में भी सकारात्मक बदलाव लाया है। मंत्री श्रीमती उइके ने बताया कि वर्तमान में प्रदेश के 81 लाख 21 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन के माध्यम से प्रतिदिन शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जा रहा है, जो कुल लक्षित परिवारों का लगभग 73 प्रतिशत है। प्रदेश के 10 हजार 440 ग्रामों को हर घर जल घोषित किया जा चुका है और भारत सरकार द्वारा बुरहानपुर जिले को देश का पहला प्रमाणित हर घर जल जिला घोषित किया जाना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि विगत दो वर्षों में 13 लाख 69 हजार से अधिक ग्रामीण परिवारों को नए नल कनेक्शन प्रदान किए गए हैं। पायलट आधार पर 64 ग्रामों में 24×7 जल प्रदाय की व्यवस्था लागू की गई है। इसके साथ ही प्रदेश में 15 हजार 238 नवीन हैंडपंप और नलकूप स्थापित किए गए हैं। उज्जैन संभाग के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों में एकल नल जल योजनाओं का कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण किया जा चुका है, जिससे सात लाख से अधिक परिवारों को नल से जल उपलब्ध कराया गया है। नल से जल आया तो महिलाओं का समय बचा, बढ़ा स्वरोजगार मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि हर घर नल जल योजना ने ग्रामीण महिलाओं के जीवन में निर्णायक बदलाव लाया है। पहले महिलाओं को दूर-दूर से पानी लाने में दिन का बड़ा हिस्सा व्यर्थ हो जाता था, जिसके बाद घर या आजीविका से जुड़े अन्य कार्य कर पाना संभव नहीं होता था। अब घर में नल से जल उपलब्ध होने के कारण समय की बचत हो रही है और महिलाएं उस समय का उपयोग आयवर्धक गतिविधियों में कर पा रही हैं। उन्होंने बताया कि समय की बचत से महिलाएं पार्लर, सिलाई-कढ़ाई केंद्र, किराना दुकान जैसे छोटे स्वरोजगार से जुड़ रही हैं। इससे उनके लिए आजीविका के नए साधन बने हैं और वे अपने परिवार की आर्थिक आवश्यकताओं में सहयोग कर पा रही हैं। इससे महिलाओं की आर्थिक, सामाजिक और पारिवारिक स्थिति सशक्त हुई है। ग्रामीण जन के स्वास्थ्य स्तर में हुआ सुधार मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि घर-घर शुद्ध पेयजल उपलब्ध होने से ग्रामीण क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों के प्रकरणों में उल्लेखनीय कमी आई है। इससे उपचार पर होने वाला अनावश्यक खर्च घटा है और परिवारों का आर्थिक पक्ष मजबूत हुआ है। बेहतर स्वास्थ्य के कारण कार्यक्षमता में वृद्धि हुई है, बच्चों की नियमित स्कूल उपस्थिति सुनिश्चित हुई है और महिलाओं को भी घरेलू एवं आजीविका से जुड़े कार्यों के लिए अधिक समय और ऊर्जा मिल रही है। शुद्ध पेयजल की सतत उपलब्धता ने स्वास्थ्य, शिक्षा और आर्थिक स्थिरता तीनों स्तरों पर ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता में सकारात्मक सुधार किया है। बालिकाओं को पढ़ाई का अवसर, शिक्षा स्तर में सुधार मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि घर में पानी उपलब्ध होने से बालिकाओं को पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय मिल रहा है। विद्यालय उपस्थिति में वृद्धि हुई है और शिक्षा के स्तर में भी सुधार देखा जा रहा है। जल जीवन मिशन केवल जल आपूर्ति की योजना नहीं, बल्कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण, बालिकाओं की शिक्षा और ग्रामीण समाज की समग्र प्रगति का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। गुणवत्ता, निगरानी और पारदर्शिता पर विशेष फोकस मंत्री श्रीमती उइके ने बताया कि जल गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राज्य की समस्त प्रयोगशालाओं का शत-प्रतिशत एनएबीएल प्रमाणीकरण कराया गया है, जिससे मध्यप्रदेश इस क्षेत्र में देश में अग्रणी बना है। प्रदेश में 10 लाख से अधिक जल नमूनों का परीक्षण किया गया है और महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रशिक्षित किया गया है। योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता के लिए जल रेखा मोबाइल एप, जलदर्पण पोर्टल, शत-प्रतिशत जियो टैगिंग, इन्वेंटरी मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर, ट्यूबवेल मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर और ई-प्रबंधन प्रणाली लागू की गई है। सी.एम. हेल्पलाइन में शिकायतों के निराकरण में विभाग लगातार ग्रेड ‘ए’ में रहा है। पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर योजनाओं और पाइपलाइन नेटवर्क को रेखांकित करने में प्रदेश को देश में द्वितीय स्थान प्राप्त हुआ है। नवाचार और भविष्य की स्पष्ट कार्ययोजना मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि समूह जल प्रदाय योजनाओं में बिजली की आवश्यकता की पूर्ति के लिए नवकरणीय ऊर्जा आधारित प्लांट स्थापित कर 60 मेगावॉट पवन ऊर्जा परियोजना की कार्ययोजना तैयार की गई है। आगामी तीन वर्षों में समस्त ग्रामीण परिवारों को नल कनेक्शन के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के अंतर्गत जनजातीय परिवारों को क्रियाशील नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाएंगे। मंत्री श्रीमती उइके ने कहा कि प्रदेश सरकार जल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। विभाग द्वारा किए जा रहे नवाचार और योजनाएँ मध्यप्रदेश को जल सुरक्षा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में स्थापित कर रही हैं। 

न्यूजीलैंड से कीवी की सस्ती आपूर्ति, भारत में 50 रुपये में मिलेगा अब स्वादिष्ट फल

 नई दिल्‍ली अमेर‍िका ने जबसे टैरिफ को लेकर भारत से ट्रेड डील पर पेंच फंसाया, तबसे भारत की रणनीति बदली हुई नजर आ रही है. भारत एक के बाद एक देशों के साथ लगातार डील कर रहा है, वह भी फ्री ट्रेड डील (FTA). ताकि भारतीय प्रोडक्‍ट्स की डिमांड अमेरिका के अलावा अन्‍य देशों में भी बढ़े और अमेरिका के टैरिफ का भी खास असर न हो.  FTA  डील को लेकर सरकार का मकसद भारतीय एक्‍सपोर्ट को नई ऊंचाई पर ले जाना है. हाल ही में भारत ने यूके, ओमान और अब न्‍यूजीलैंड के साथ फ्री ट्रेड डील की है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत आने वाले विदेशों से समान सस्‍ते होंगे और यहां से जाने वाले प्रोडक्ट के रेट कम होंगे, जिससे दोनों देशों को संतुलित व्‍यापार अवसर मिलेगा.  भारत और न्‍यूजीलैंड के बीच डील से कीवी फल को लेकर खूब चर्चा हो रही है कि इसका आयात भारत में बढ़ सकता है, क्‍योंकि एफटीए डील के बाद इसके रेट कम हो सकते हैं. अभी भारत में एक कीवी का एवरेज प्राइस 50 रुपये या उससे ज्‍यादा है. इसके दाम पर कितना असर पड़ेगा? ये जानने से पहले कीवी के भारत में इम्‍पोर्ट और उसपर ड्यूटी के गणित को समझना जरूरी है.  न्‍यूजीलैंड से कितना कीवी भारत आता है?  न्यूजीलैंड कीवी का बड़ा उत्पादक देश है, लेकिन भारत सिर्फ 5 फीसदी ही कीवी न्‍यूजलैंड से आयात करता है. 2023 में भारत ने कुल लगभग 55,000 टन कीवी आयात किया था. इसमें न्‍यूजीलैंड से करीब 2,700 टन कीवी न्यूजीलैंड से आया था. हालांकि अब न्‍यूजीलैंड से एफटीए होने के कारण इसपर लगने वाला टैक्‍स कम हो जाएगा. भारत भी बड़े मात्रा में न्‍यूजीलैंड से कीवी आयात कर सकता है, क्‍योंकि इम्‍पोर्ट टैक्‍स हटने से न्‍यूजीलैंड से कीवी अन्‍य देशों की तुलना में सस्‍ते दरों पर मिलेंगे.  न्‍यूजीलैंड की कीवी पर कितना टैक्‍स?  भारत न्‍यूजीलैंड से बहुत सी चीजें आयात करता है, जिसमें फल (कीवी), ऊन, लकड़ी, ड्राई फ्रूट और अन्य कृषि प्रोडक्‍ट्स शामिल हैं. अब एफटीए डील के बाद इन चीजों में से ज्‍यादातर प्रोडक्‍ट्स पर टैक्‍स घटकर 0 कर दिया जाएगा. कीवी पर अभी 33 फीसदी इम्‍पोर्ट टैक्‍स लगता है, लेकिन एफटीए डील के बाद यह 0% हो जाएगा.   कितने कम हो जाएंगे न्‍यूजीलैंड वाले कीवी?  FTA के तहत पहले 6,250 टन कीवी पर ड्यूटी फ्री रखा गया है. अगले कुछ सालों में यह कोटा बढ़ाकर 15,000 टन तक करना है, लेकिन अगर कोटा से भी बाहर आयात हुआ तो थोड़ा टैक्‍स ही लगेगा यानी पहले से कम टैक्‍स लगेगा.  इसका मतलब है कि इम्‍पोर्ट टैक्‍स कम होने कीवी की थोक कीमत घट जाएगी. जिस कारण रिटेल प्राइस में भी कमी आएगी.  कीमत में ठीक भाव लगाना मुश्किल है, लेकिन कीमत में कितनी कमी आएगी यह कई चीजों पर निर्भर करेगा. इसमें पहला तो यह देखना होगा कि न्‍यूजीलैंड से कितना कीवी आता है, फिर लॉजिस्टिक कॉस्‍ट और फ्रेट कॉस्‍ट कितनी पड़ती है. इसके बाद स्‍थानीय मंडी भाव और इम्‍पोर्ट डिमांड जैसी चीजें इसके दाम को तय करेंगे. लेकिन कुछ इकोनॉमिस्‍ट के हिसाब से टैक्‍स के बराबर कटौती आ सकती है यानी न्‍यूजीलैंड वाले कीवी पर रेट 20 से 30 फीसदी तक कम हो सकती है. 

सोना और चांदी के प्राइस रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं, जानें अमेरिका से जुड़ी तीन वजहें

नई दिल्ली सोना-चांदी की कीमतों (Gold-Silver Rates) ने इस साल की शुरुआत से ही हैरान किया है और हर रोज अपने रिकॉर्ड तोड़ते नजर आए. हालांकि, बीते कुछ समय में सोना तेजी से फिसला भी, लेकिन अब साल 2025 खत्म होने से पहले ये फिर से गदर मचा रहा है. सप्ताह के दूसरे कारोबारी दिन मंगलवार को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज यानी MCX पर Gold Rate खुलते ही करीब 1500 रुपये चढ़कर 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार निकल गया. अचानक सोने के भाव में फिर से लौटी इस तेजी के पीछे की वजह के बारे में बात करें, तो इसके 3 बड़े कारण सामने आ रहे हैं और इन तीनों का ही कनेक्शन अमेरिका (US Connection Of Gold Price Hike) से है. मंगलवार को सोना रॉकेट की तरह भागा सबसे पहले बात करते हैं मंगलवार को Gold Rate Update के बारे में, तो एमसीएक्स पर लगातार दूसरे कारोबारी दिन सोने के भाव में तूफानी तेजी आई है. कारोबार के दौरान 5 फरवरी की एक्सपायरी वाले 24 Karat Gold का रेट 1519 रुपये या 1.11% की उछाल के साथ 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के पार चल रहा था. वहीं घरेलू बाजार में सोने की कीमत को देखें, तो इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट IBJA.Com के मुताबिक, बीते कारोबारी दिन सोमवार को 24 कैरेट सोना 1,33,970 रुपये पर क्लोज हुआ था और मंगलवार को खुलने के साथ ही ये 2163 रुपये रुपये महंगा होकर 1,36,133 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया.  एशियाई बाजारों में हाजिर सोने का भाव 4,445.69 डॉलर प्रति औंस के लाइफ टाइम हाई लेवल पर पहुंच गया. चांदी तो MCX पर खुलते ही 3000 रुपये से ज्यादा की उछाल के साथ 2,16,596 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई. वहीं अंतरराष्ट्री बाजार में Silver Price भी इसी रफ्तार से भागा. इसकी हाजिर कीमत 0.19% की उछाल के साथ 69.15 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई अचानक क्यों लौटी सोने में तेजी?  दिसंबर महीने की शुरुआत में Gold Price में गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन महीने के आखिरी दिनों में ये फिर से रॉकेट बना नजर आने लगा है. 2025 में अब तक इसमें 70% की जोरदार वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि इस महीने टूटने के बाद फिर खड़ा हुआ सोना लगभग 10% उछल चुका है. बात करें, अचानक गोल्ड रेट में लौटी इस तेजी के पीछे के कारणों के बारे में तो निवेशकों का फिर से सुरक्षित निवेश ठिकानों की ओर रुख करना है और इसका सीधा कनेक्शन अमेरिका से है.  पहला कारण:  भू-राजनीतिक टेंशन Gold Rate के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचने के पीछे पहला बड़ा कारण फिर से बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है. यह तेजी तब आई है, जब अमेरिका ने वेनेजुएला (US Vs Venezuela) के तेल ले जा रहे टैंकरों को जब्त करने के प्रयास तेज कर दिए. अमेरिका के इस एक्शन के चलते एनर्जी सप्लाई में रुकावट और भू-राजनीतिक हालातों को लेकर चिंता बढ़ गई है. इसके साथ ही निवेशक फिर से सुरक्षित ठिकाना माने जाने वाले Gold की तरफ भागे हैं.  दूसरा कारण: US को सेंट्रल बैंकों का झटका सोने की बढ़ती कीमतों के पीछे दूसरा बड़ा कारण दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों द्वारा की जा रही Gold Buying को भी माना जा रहा है. इससे जहां Gold Rate Rise हो रहा है, तो अमेरिका को बड़ा झटका लगा है. बीते दिनों आई एक रिपोर्ट की मानें, तो 1996 के बाद करीब तीन दशक में पहली बार वैश्विक केंद्रीय बैंक रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी अमेरिकी ट्रेजरी से ज्यादा हुई है. इसमें बताया गया था कि साल 2022 से ही केंद्रीय बैंकों ने हर साल करीब 1000 टन सोने की खरीद की है. ग्लोबल इकोनॉमिक स्थितियां बदली हैं और Trump Tariff नीतियों ने सोने में जोरदार तेजी ला दी है.  तीसरा कारण: FED Rate Cut के संकेत Gold Price Rise के पीछे तीसरा बड़ा कारण भी अमेरिका से ही जुड़ा हुआ है. दरअसल, हाल ही में US FED ने पॉलिसी रेट में कटौती की थी. वहीं बाजार अब अगले साल 2026 में भी अमेरिकी ब्याज दरों में गिरावट की उम्मीद कर रहे हैं. व्यापारी अगले वर्ष अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा दो Rate Cut की संभावना जता रहे हैं. इसके अलावा फेड गवर्नर क्रिस्टोफर वालर ने भी ऐसे संकेत दिए हैं जिसने सोना जैसी गैर-लाभकारी संपत्तियों को समर्थन दिया है.

बांग्लादेश में पुलिस की चुप्पी पर सवाल, अधिकारी बोले- हस्तक्षेप से हो सकती थी गोलीबारी

ढाका  बांग्लादेश में भीड़तंत्र काम कर रहा है जहां पुलिस स्थिति को संभालने में नाकाम दिख रही है. इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद बांग्लादेश में भड़की हिंसा से भारी नुकसान हुआ है. बीते गुरुवार को दंगाइयों ने बांग्लादेश के दो प्रमुख अखबारों के ऑफिस को आग के हवाले कर दिया. पुलिस वहां खड़ी देखती रही लेकिन दंगाइयों को रोकने की कोशिश नहीं की. अब ढाका महानगर पुलिस (DMP) के एडिशनल पुलिस कमिश्नर (क्राइम एंड ऑपरेशन्स) एसएन एमडी नजरुल इस्लाम ने कहा है कि भीड़ हिंसा के खिलाफ पुलिस ने सख्ती से कार्रवाई इसलिए नहीं की, क्योंकि पुलिसकर्मियों के निशाना बनने का डर था. उन्होंने बताया कि करवान बाजार में 'प्रथम आलो' और 'द डेली स्टार' के दफ्तरों पर हुए हमलों, तोड़फोड़ और आगजनी के दौरान अगर पुलिस हस्तक्षेप करती तो गोलीबारी हो सकती थी, जिससे दो से चार लोगों की मौत भी हो सकती थी. एडिशनल पुलिस कमिश्नर ने क्या कहा? जब उनसे पूछा गया कि क्या DMP प्रथम आलो, द डेली स्टार और उदिची पर हुए हमलों को रोकने में सक्षम थी, तो नजरुल इस्लाम ने कहा, 'हम सक्षम हैं. यह नहीं कि हम हर घटना को रोक सकते हैं. पिछले अनुभवों के आधार पर, जब जनभावना भड़क जाती है तो राज्य अधिकतम संसाधनों का इस्तेमाल करता है. करवान बाजार की घटना वाले दिन अगर हम हस्तक्षेप करते, तो गोलीबारी हो सकती थी और संभवतः दो से चार लोगों की जान जा सकती थी, इसके बाद पुलिस पर भी हमले होते.' उन्होंने आगे कहा, 'उस दिन दो-चार पुलिसवाले मारे जाते… आप जानते हैं कि पुलिस बल एक साल पहले ही एक बड़े आघात से गुजरा है और हम फिर से खड़ा होने की कोशिश कर रहे हैं. चुनाव आने वाले हैं. अगर पुलिस बल में फिर कोई हताहत होता, तो मैं इस बल के साथ आगे नहीं बढ़ पाता. इसी कारण हम वहां कार्रवाई में नहीं जा सके. किसी भी मानव जीवन की हानि नहीं हुई. इतनी बड़ी घटना में भी जान-माल का नुकसान न होना, मैं इसे हमारी उपलब्धि मानता हूं.'   

उत्तर प्रदेश में आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू में स्थापित होंगे दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस

योगी सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना को दी मंजूरी उत्तर प्रदेश में आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू में स्थापित होंगे दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस प्रदेश में ग्रीन हाइड्रोजन अनुसंधान, तकनीकी विकास, मानव संसाधन सशक्तिकरण एवं औद्योगिक उपयोग को मिलेगा प्रोत्साहन लखनऊ  हरित परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन अनुसंधान, तकनीकी विकास, मानव संसाधन सशक्तिकरण एवं औद्योगिक उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए दो सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE)  स्थापित करने को मंजूरी दी गई है। पहला सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आईआईटी कानपुर द्वारा हरकोर्ट बटलर तकनीकी विश्वविद्यालय (HBTU), कानपुर के सहयोग से स्थापित किया जाएगा। वहीं दूसरा सेंटर आईआईटी-बीएचयू द्वारा मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (MMMUT), गोरखपुर के साथ संयुक्त रूप से स्थापित किया जाएगा। दोनों सेंटर साझेदार संस्थानों के परिसरों से संचालित होंगे। हब-एंड-स्पोक मॉडल पर कार्य करेगा सेंटर   यूपी नेडा के एमडी एंड डायरेक्टर इंद्रजीत सिंह ने बताया कि इन सेंटरों में चलने वाली परियोजनाओं में दोनों संस्थान बारी-बारी से नेतृत्व करेंगे। यह सेंटर हब-एंड-स्पोक मॉडल पर कार्य करेगा, जिसके तहत प्रदेश के अन्य इंजीनियरिंग और तकनीकी संस्थानों को इससे जोड़ा जाएगा। सेंटर में बायोमास आधारित एवं इलेक्ट्रोलाइज़र आधारित ग्रीन हाइड्रोजन पर अनुसंधान और तकनीकी विकास किया जाएगा। इन्क्यूबेशन सेंटर भी होगा स्थापित ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2024 के तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में एक इन्क्यूबेशन सेंटर भी स्थापित किया जाएगा। इसके माध्यम से हर वर्ष 10 स्टार्टअप्स को और 5 वर्षों में कम से कम 50 स्टार्टअप्स को सहयोग और मार्गदर्शन दिया जाएगा। इसके लिए ₹25 लाख प्रतिवर्ष (5 वर्षों तक) की सहायता का प्रावधान किया गया है। सेंटर प्रदेश के इंजीनियरिंग कॉलेजों और पॉलीटेक्निक संस्थानों के लिए पाठ्यक्रम निर्माण, मेंटरिंग, तकनीकी प्रदर्शनियों और कॉन्फ्रेंसों के आयोजन में भी सहयोग करेगा। साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण, परिवहन और उपयोग से जुड़े विषयों पर राज्य सरकार को नीतिगत सुझाव भी देगा। ग्रीन हाइड्रोजन ट्रेन तथा बसें चलाने के भी होंगे प्रयास सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में कम से कम 50 प्रतिशत औद्योगिक भागीदारी उत्तर प्रदेश से होगी, जिससे राज्य को ग्रीन हाइड्रोजन के औद्योगिक और व्यावसायिक उपयोग में अधिक लाभ मिल सके। हरित परिवहन को बढ़ावा देने के लिए रेल मंत्रालय के सहयोग से ग्रीन हाइड्रोजन आधारित ट्रेनों तथा उत्तर प्रदेश स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (UPSRTC) के माध्यम से कानपुर–लखनऊ, वाराणसी और गोरखपुर रूट पर ग्रीन हाइड्रोजन बसें चलाने के प्रयास भी किए जाएंगे। ग्रीन हाइड्रोजन के लिए इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में एक प्रमुख नवाचार और औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अनुसंधान, स्टार्टअप्स और उद्योगों के सहयोग से यह पहल स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, कार्बन उत्सर्जन कम करने, निवेश आकर्षित करने और राज्य में रोजगार के नए अवसर सृजित करने में सहायक होगी।

मध्यप्रदेश स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचारी सोच के साथ देश का नेतृत्व कर रहा है : केन्द्रीय मंत्री नड्डा

धार में पीपीपी मोड पर आकार लेगा देश का पहला मेडिकल कॉलेज : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मध्यप्रदेश स्वास्थ्य के क्षेत्र में नवाचारी सोच के साथ देश का नेतृत्व कर रहा है : केन्द्रीय मंत्री नड्डा मुख्यमंत्री डॉ. यादव और केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने किया धार मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास स्वामी विवेकानंद शिक्षा धाम फाउंडेशन के साथ अनुबंध के तहत 25 एकड़ भूमि पर 260 करोड़ रूपए की लागत से तैयार होगा धार का मेडिकल कॉलेज पीपीपी मोड में समाज और सरकार मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, हर व्यक्ति को मिलेगा बेहतर इलाज शीघ्र ही कटनी और पन्ना मेडिकल कॉलेज का भी होगा शिलान्यास भिण्ड, मुरैना, खरगोन, अशोकनगर, गुना, बालाघाट, टीकमगढ़, सीधी और शाजापुर में भी मेडिकल कॉलेज आरंभ करने की तैयारी धार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में मध्यप्रदेश आज एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल कर रहा है। प्रदेश के दो जनजातीय बाहुल्य जिलों में आज मेडिकल कॉलेजों का भूमि पूजन हो रहा है। प्रदेश के अंतिम पंक्ति में बैठे अंतिम व्यक्ति तक सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगतप्रकाश नड्डा का प्रदेशवासियों की ओर से विशेष आभार है। यह पीपीपी मोड (जन-निजी भागीदारी) पर बनने वाला देश का पहला मेडिकल कॉलेज होगा। इस पहल की शुरुआत मध्यप्रदेश की धरती से हो रही है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने कहा कि धार में मेडिकल कॉलेज का भूमि-पूजन देश के लिए ऐतिहासिक अवसर है। मध्यप्रदेश ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में देश को एक नेतृत्व दिया है। राज्य में नवाचारी सोच और जन सहभागिता के साथ देश में पीपीपी मोड के आधार पर पहला मेडिकल कॉलेज शुरू किया जा रहा है। मध्यप्रदेश ने इस मामले में देश का नेतृत्व किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृ्त्व में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव आया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीपीपी मॉडल में समाज और सरकार मिलकर स्वास्थ्य सेवाओं का सुदृढ़ीकरण कर, हर व्यक्ति तक बेहतर इलाज पहुंचाने की दिशा में कार्य करेंगे। सेवा और विकास हमारी सरकार का मूल मंत्र है, विगत दो वर्ष जनकल्याण और विकास की दृष्टि से अद्वितीय रहे हैं। मध्यप्रदेश देश का एकमात्र राज्य है, जिसके दो बड़े शहरों- भोपाल और इंदौर में सालभर के अंदर मेट्रो ट्रेन का शुभारंभ हुआ। इसके साथ ही प्रदेश में हवाई सेवाओं का भी विस्तार हो रहा है। अब रीवा से इंदौर और नई दिल्ली के लिए हवाई सेवा उपलब्ध है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव धार में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज के शिलान्यास के लिए पीजी कॉलेज मैदान धार में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, रसायन और उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तथा केन्द्रीय मंत्री नड्डा ने रिमोट का बटन दबाकर मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास और धार जिले के विकास कार्यों का भूमिपूजन व लोकार्पण किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इसी वर्ष अगस्त माह में पीपीपी मॉडल पर बैतूल, कटनी, धार और पन्ना में चार नए चिकित्सा महाविद्यालय स्थापित करने के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर हुए थे। आज धार और बैतूल का शिलान्यास हो रहा है। शीघ्र ही कटनी और पन्ना में भी मेडिकल कॉलेजों का शिलान्यास किया जाएगा। इन जिलों के बाद भिण्ड, मुरैना, खरगोन, अशोकनगर, गुना, बालाघाट, टीकमगढ़, सीधी और शाजापुर में भी इसी तरह मेडिकल कॉलेज स्थापित करने की तैयारी है। धार जिले में 260 करोड़ रूपए की लागत से 25 एकड़ भूमि पर मेडिकल कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है। इस मेडिकल कॉलेज के लिए स्वामी विवेकानंद शिक्षा धाम फाउंडेशन ने सरकार के साथ हाथ मिलाया है। फाउंडेशन को 25 एकड़ जमीन 1 रूपए की लीज पर देकर राज्य सरकार ने स्वास्थ्य और चिकित्सा शिक्षा को मजबूत करने का रास्ता खोला है। अब धार के लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों में नहीं जाना पड़ेगा। स्थानीय जनजातीय बच्चों को डॉक्टर बनने का अवसर भी मिलेगा। यहां नर्सिंग एवं पैरामेडिकल के कोर्स भी संचालित किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य में वर्ष 2002-03 तक मात्र 5 मेडिकल कॉलेज थे। अब प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 33 हो चुकी है। राज्य में पिछले दो सालों में 6 शासकीय मेडिकल कॉलेज शुरू किए गए। इनमें आदिवासी अंचल सिंगरौली और श्योपुर के मेडिकल कॉलेज भी शामिल हैं। राज्य सरकार ने सीनियर रेजिडेंट्स डॉक्टरों के 354 पदों को स्वीकृति दी है। प्रदेश में सिकल सेल एनीमिया अभियान को आगे बढ़ाते हुए 1 करोड़ 25 लाख से अधिक लोगों की जांच की जा चुकी है। धार में 15 लाख से अधिक लोगों की सिकल सेल कार्यक्रम के तहत जांच की गई। प्रदेश के टीकमगढ़, नीमच, सिंगरौली, श्योपुर, डिंडौरी के अस्पतालों में 800 बेड का उन्नयन और डॉक्टरों के 810 नए पदों की स्वीकृति प्रदान की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि धार को ऋषि दाधीच और मां नर्मदा का आशीर्वाद प्राप्त है। यह जनसंघ के आदिपुरुष एवं पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कुशाभाऊ ठाकरे की जन्मस्थली भी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में धार जिले को पिछले 4 महीने में अनेक विकास कार्यों की सौगात मिली हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने 75वें जन्मदिवस पर धार में देश के पहले पीएम मित्र पार्क का भूमिपूजन किया। टेक्सटाइल आधारित इस इंडस्ट्रियल पार्क के माध्यम से क्षेत्र के कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिलेगा और 3 लाख के अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में पीएमएयर एम्बुलेंस सेवा दूरस्थ क्षेत्रों के लिए वरदान बनी है। अब आयुष्मान कार्ड के माध्यम से जरूरतमंदों को नि:शुल्क इलाज और एयर एम्बुलेंस की सुविधा मिल रही है। परिजन के मृत्यु के बाद परिवारों की सुविधा के लिए प्रदेश के सभी जिला और सिविल अस्पतालों में शव वाहन उपलब्ध कराए गए हैं। राज्य सरकार ने सड़क हादसों में घायलों की मदद के लिए राहवीर योजना की शुरुआत की है। यह राज्य सरकार का मानवीय संवेदनाओं वाला पक्ष है। घायलों को समय पर अस्पताल पहुंचाने वाले राहवीरों को राज्य सरकार प्रोत्साहन स्वरूप 25 हजार की राशि प्रदान कर रही है। साथ ही प्रदेश में अंगदान को प्रोत्साहन देने के लिए … Read more