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योगी सरकार के विजन से आत्मनिर्भर बनी रमा रानी वर्मा, मुख्यमंत्री योजना से मिला 3.5 लाख का ऋण

योगी सरकार के विजन से आत्मनिर्भर बनी संत कबीर नगर की रमा रानी वर्मा मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान से मिला 3.5 लाख का ऋण बी-टेक के बाद नौकरी नहीं, स्वरोजगार को चुना लखनऊ   मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का विजन केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन योजनाओं को धरातल पर उतार आमजन के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने का है। इसी विजन का सशक्त उदाहरण संत कबीर नगर जिले की रमा रानी वर्मा हैं, जिन्होंने “मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान” के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। वह नैना कॉस्मेटिक्स एंड आर्टिफिशियल ज्वेलरी मेकिंग नाम से एक  इकाई का संचालन कर रही हैं। इनका कहना है कि “योगी आदित्यनाथ सरकार के विज़न और नीति से आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाने का अवसर प्राप्त हुआ है”।  औद्योगिक नगर, मुखलिसपुर रोड, खलीलाबाद की रहने वाली रमा रानी वर्मा ने बी-टेक (कंप्यूटर साइंस) किया है। पढ़ाई के बाद उनके सामने भी वही विकल्प थे जो आज अधिकतर युवाओं के सामने होते हैं, यानी नौकरी की तलाश। लेकिन उन्होंने पारंपरिक रास्ते पर चलने के बजाय खुद का रास्ता बनाने का निर्णय लिया। उनका मानना था कि यदि सरकार का सहयोग मिले तो युवा स्वयं का रोजगार कर न केवल अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी अवसर पैदा कर सकते हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नेतृत्व वाली सरकार की ओर से शुरू किए गए मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान ने उनके इस सपने को साकार करने में निर्णायक भूमिका निभाई है। इस अभियान के अंतर्गत रमा रानी वर्मा को 3.5 लाख रुपये का ऋण मिला। यह राशि उनके लिए केवल आर्थिक सहायता नहीं थी, बल्कि आत्मविश्वास और भरोसे की पूंजी थी, जिसने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।  सरकार से मिले इस सहयोग से उन्होंने संत कबीर नगर जिले के खलीलाबाद में कास्मेटिक और आर्टिफिशियल ज्वेलरी के निर्माण के साथ-साथ अपने दुकान के मध्य से उनकी बिक्री शुरू की है। विशेष बात यह है कि उनका यह पूरा कार्य स्थानीय स्तर पर और परिवार के सहयोग से किया जा रहा है। घर से शुरू हुआ यह उद्यम धीरे-धीरे व्यवस्थित स्वरूप लेता जा रहा है। इससे उनकी आय में वृद्धि होने के साथ-साथ परिवार की आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हुई है। रमा रानी वर्मा की यह यात्रा योगी सरकार के लोकल से ग्लोबल विजन को भी दर्शाती है। स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर स्थानीय स्तर पर उत्पादन और रोजगार सृजन ही इस मॉडल की सबसे बड़ी ताकत है। यह वही सोच है जिसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार आगे बढ़ा रहे हैं ताकि प्रदेश का हर जिला आत्मनिर्भर बने। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि जब प्रदेश का युवा सशक्त होगा तभी उत्तर प्रदेश देश की अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभा सकेगा। इसी उद्देश्य से सरकार ने स्वरोजगार को प्रोत्साहन देने के लिए सरल और पारदर्शी योजनाएं लागू की हैं। मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान इसी दिशा में एक प्रभावी कदम है। रमा रानी वर्मा बताती हैं कि योजना की प्रक्रिया सरल रही और उन्हें समय पर ऋण प्राप्त हुआ। किसी प्रकार की अनावश्यक दिक्कत या भटकाव का सामना नहीं करना पड़ा। यह सुशासन और पारदर्शिता योगी सरकार की पहचान बन चुकी है जहां लाभार्थी तक लाभ सीधे और प्रभावी ढंग से पहुंच रहा है। आज रमा रानी वर्मा न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं, बल्कि अन्य युवाओं खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गई हैं। रमा रानी वर्मा की सफलता यह प्रमाणित करती है कि यदि मजबूत नेतृत्व वाली सरकार हो और नीतियां स्पष्ट हों तो आम परिवार की बेटी भी उद्यमिता की ऊंचाइयों तक पहुंच सकती है।

चिकित्सा शिक्षा और आयुष क्षेत्र में मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक सुधार, CM मोहन यादव के प्रयासों की गाथा

संकल्प से सिद्धि: स्वास्थ्य हब बनता मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव के नेतृत्व में  चिकित्सा शिक्षा और आयुष क्षेत्र में ऐतिहासिक कायाकल्प की गाथा भोपाल  मध्य प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाएँ अब केवल चुनावी वादों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह दीर्घकालिक सेवा और सुदृढ़ नीति का प्रमाण बन चुकी हैं। 2003 से पहले जहाँ प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की स्थिति स्थिर थी, वहीं आज डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सरकार ने इसे 'जन-आंदोलन' का रूप दे दिया है। एलोपैथी के आक्रामक विस्तार से लेकर आयुष के पुनरुत्थान तक—मध्य प्रदेश अब "बेसिक मेडिकल शिक्षा" से आगे बढ़कर "एडवांस्ड हेल्थ केयर" की ओर कदम बढ़ा चुका है।  चिकित्सा शिक्षा – विस्तार, गुणवत्ता और भविष्य (2003-2028) 1. ठहराव से रफ़्तार तक का सफ़र (ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य) आंकड़े गवाह हैं कि प्रदेश ने पिछले दो दशकों में कैसे लंबी छलांग लगाई है: सीमित अतीत (1946-2003): 1970 के पूर्व और उसके बाद कई दशकों तक मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगभग स्थिर रही। 1946 से 2003 के बीच ग्वालियर, इंदौर, भोपाल, जबलपुर और रीवा जैसे चुनिंदा शहरों तक ही चिकित्सा शिक्षा सीमित थी। 2003 तक प्रदेश में शासकीय मेडिकल कॉलेज मात्र 5 थे और कुल कॉलेज केवल 6 थे । बदलाव का दौर (2004-2023): सागर (2009) जैसे नए शासकीय कॉलेज खुले और निजी क्षेत्र को भी अवसर मिला। 2018-19 के बाद विदिशा, दतिया, शहडोल, खंडवा, शिवपुरी और छिंदवाड़ा जैसे जिलों में मेडिकल कॉलेज शुरू हुए, जिससे चिकित्सा शिक्षा संभाग से निकलकर जिले की दहलीज़ तक पहुँची । 2. डॉ. मोहन यादव सरकार का 'आक्रामक विस्तार' (2023 के बाद) वर्तमान सरकार ने मेडिकल शिक्षा के विस्तार को नई दिशा दी है: रिकॉर्ड उपलब्धि: 2003 से पहले जितने मेडिकल कॉलेज खुले थे, डॉ. मोहन यादव की सरकार ने लगभग उतने ही कॉलेज केवल दो वर्षों में खोल दिए हैं । हर लोकसभा तक पहुँच: सिवनी, नीमच, मंदसौर, श्योपुर और सिंगरौली जैसे सुदूर जिलों में नए मेडिकल कॉलेज शुरू हुए हैं। आज प्रदेश का हर लोकसभा क्षेत्र मेडिकल कॉलेज से जुड़ने की दहलीज़ पर खड़ा है । वर्तमान स्थिति (2025): आज शासकीय मेडिकल कॉलेजों की संख्या 14 से बढ़कर 19 और निजी कॉलेजों की संख्या 12 से बढ़कर 14 हो चुकी है। यानी कुल 33 मेडिकल कॉलेज संचालित हैं । 3. सीटों में अभूतपूर्व वृद्धि (MBBS, PG और सुपर स्पेशलिटी) डॉक्टरों की कमी के पुराने तर्क को ध्वस्त करते हुए सीटों में भारी इजाफा किया गया है: MBBS सीटें: 2003 में मात्र 1,250 सीटें थीं। 2023-24 में यह 4,875 हुईं और 2025-26 के सत्र में यह बढ़कर 5,550 (शासकीय: 2850, निजी: 2700) हो गई हैं। यह वृद्धि जनसंख्या वृद्धि की तुलना में कहीं अधिक है । PG और सुपर स्पेशलिटी (एडवांस्ड केयर): सरकार का फोकस केवल MBBS तक सीमित नहीं है। PG सीटें: कुल PG (MD/MS) सीटें बढ़कर 2,862 हो गई हैं । सुपर स्पेशलिटी: शासकीय क्षेत्र में सीटें 47 से बढ़कर 64 हो गई हैं और कुल सीटें 93 हैं। यह संकेत है कि मप्र अब एडवांस्ड हेल्थ केयर की ओर बढ़ रहा है । 4. अभिनव पहल: पीपीपी (PPP) मॉडल और भविष्य का रोडमैप (2026-28) सरकार निजी निवेश और सार्वजनिक लक्ष्यों के समन्वय से बड़े लक्ष्य साध रही है: PPP मॉडल पर प्रगति : 4 मेडिकल कॉलेजों—कटनी, धार, पन्ना, और बैतूल—के लिए MoU हस्ताक्षरित हो चुके हैं । निविदा प्रक्रिया जारी : 9 जिलों—अशोकनगर, मुरैना, सीधी, गुना, बालाघाट, भिंड, टीकमगढ़, खरगोन और शाजापुर—में पीपीपी मोड पर कॉलेज खोलने की प्रक्रिया प्रगतिरत है । 2026-28 का विजन : दमोह, बुधनी, छतरपुर, राजगढ़, मंडला और उज्जैन में कुल 6 नवीन कॉलेज प्रस्तावित हैं । महायोग (Grand Total) : योजनानुसार, 2028 तक प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या 52 हो जाएगी और MBBS सीटें 7,450 तक पहुँचने का अनुमान है । 5. सुधरते सामाजिक मानक (Impact Metrics) डॉक्टर-जनसंख्या अनुपात : प्रति 10 लाख जनसंख्या पर MBBS सीटों की उपलब्धता 2003 में 20.8 थी, जो 2025 में 63 तक पहुँच चुकी है। 2028 तक यह राष्ट्रीय औसत के करीब होगी । विधानसभा स्तर पर सुधार : प्रति विधानसभा सीट MBBS औसत 2003 में 5 था, जो अब बढ़कर 24 हो गया है। आयुष विभाग – गौरवशाली परंपरा, आधुनिक उपलब्धियाँ एलोपैथी के साथ-साथ 'निरोगी काया' के संकल्प को पूरा करने के लिए आयुष विभाग ने भी महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ हासिल की हैं: 1. अधोसंरचना और मानव संसाधन का सुदृढ़ीकरण नए पदों का सृजन : 05 नए आयुर्वेद महाविद्यालयों के लिए 1570 पद, 50/30 बिस्तरीय आयुष चिकित्सालयों हेतु 1179 पद और 58 जिला आयुष विंगों में 213 पद सृजित किए गए हैं। फैकल्टी की कमी दूर: शासकीय महाविद्यालयों में सीनियर फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए 543 आयुर्वेद, 35 होम्योपैथी, 14 यूनानी चिकित्सा अधिकारियों की नियुक्ति और 74 को उच्च पद का प्रभार दिया गया है। 8 नवीन महाविद्यालय: नर्मदापुरम, मुरैना, शहडोल, बालाघाट, सागर, झाबुआ, शुजालपुर और डिंडोरी में 8 नए आयुर्वेद महाविद्यालयों की स्वीकृति प्रदान की गई है। 2. चिकित्सालयों का विस्तार और उन्नयन वेलनेस टूरिज्म: प्रदेश में 12 'वेलनेस टूरिज्म केंद्र' स्थापित किए गए हैं, जो स्वास्थ्य पर्यटन को बढ़ावा दे रहे हैं। आयुष्मान आरोग्य मंदिर: 238 औषधालयों को अपग्रेड कर 'आयुष्मान आरोग्य मंदिर' (Health & Wellness Centres) में परिवर्तित किया गया है और 108 नए औषधालयों का निर्माण किया गया है। नए 50-बिस्तरीय और 30-बिस्तरीय चिकित्सालयों का निर्माण एवं संचालन निरंतर जारी है। 3. आगामी 3 वर्षों की कार्य-योजना (भविष्य की झलक) आयुष विभाग ने अगले तीन वर्षों के लिए एक ठोस रोडमैप तैयार किया है: नए संस्थान: 8 नए आयुर्वेद महाविद्यालय, 1 होम्योपैथी महाविद्यालय और 13 नए आयुष चिकित्सालयों (12 पचास-बिस्तरीय, 1 तीस-बिस्तरीय) का संचालन शुरू होगा। छात्र सुविधाएँ: सभी आयुष महाविद्यालयों में 100-सीटर छात्रावास और स्वयं की फार्मेसी स्थापित की जाएगी। एकीकृत स्वास्थ्य (Integrated Health): सभी जिला एलोपैथी चिकित्सालयों में 'आयुष विंग' और 'पंचकर्म यूनिट' स्थापित की जाएगी। सिकल सेल और जनजातीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों का विस्तार होगा। डिजिटल क्रांति : 'E-औषधि' और 'E-Hospital' प्रणाली लागू कर ऑनलाइन औषधि आपूर्ति और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाएगी। अनुसंधान : प्रमुख पर्यटन स्थलों पर आयुष वेलनेस सेंटर और अत्याधुनिक अनुसंधान लैब का आधुनिकीकरण किया जाएगा। मेडिकल कॉलेजों की संख्या 6 से 52 तक ले जाने का लक्ष्य और आयुष को जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प। यह केवल … Read more

दिग्विजय सिंह का बयान: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले भारत में अल्पसंख्यक मामलों से जुड़े

भोपाल बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर सियासत तेज हो गई है. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमले, भारत में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही कार्रवाइयों का “रिएक्शन” हैं. अल्पसंख्यकों पर कार्रवाई का असर पड़ोसी देश तक दिग्विजय सिंह ने कहा कि भारत में कट्टरपंथी ताकतें अल्पसंख्यकों पर लगातार कार्रवाई कर रही हैं. उनका दावा है कि इसी का असर पड़ोसी देश बांग्लादेश में देखने को मिल रहा है, जहां हिंदू समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है. हिंदुओं पर अत्याचार की घोर निंदा पूर्व मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हो रहे अत्याचार की वे घोर निंदा करते हैं. उन्होंने कहा कि किसी भी देश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव स्वीकार्य नहीं है और इस तरह की घटनाएं मानवता पर धब्बा हैं. राजनीतिक बयान से बढ़ी बहस दिग्विजय सिंह के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में बहस और तेज हो गई है. जहां एक तरफ उनके समर्थक इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बता रहे हैं, वहीं विरोधी दल इस बयान को लेकर सवाल उठा रहे हैं. दिग्विजय सिंह ने जोर देकर कहा कि यह मुद्दा सिर्फ राजनीति का नहीं, बल्कि मानवाधिकारों से जुड़ा हुआ है. उन्होंने केंद्र सरकार से भी अपील की कि वह इस मामले को गंभीरता से ले और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा का मुद्दा उठाए. भाजपा का पलटवार: ‘भूल से 10 साल मुख्यमंत्री रहे’ दिग्विजय सिंह के इस बयान पर भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह “भूल से 10 साल तक मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे” और आज वे यह तय नहीं कर पा रहे कि वे हिंदुस्तान के नागरिक हैं या पाकिस्तान के एजेंट. आतंकवाद से जोड़ते हुए लगाए गंभीर आरोप रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय आतंकियों ने दिग्विजय सिंह को “सुपारी” दे रखी है और उन्हें अपना प्रवक्ता बना रखा है. उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह का बयान देशविरोधी ताकतों को बल देता है और अंतरराष्ट्रीय इस्लामी आतंकवाद को नैरेटिव मजबूत करने में मदद करता है. आतंकियों का साथ दिया’ का आरोप रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह ने अपने राजनीतिक जीवन में आतंकियों का समर्थन किया और जब मौका मिला, उन्हें सम्मानित भी किया. उन्होंने चेतावनी दी कि आतंकवाद का समर्थन करने वालों को यह याद रखना चाहिए कि हिंदुस्तान की जनता सब जानती है और समय आने पर जवाब भी देती है. मानवाधिकार बनाम देशहित की बहस इस पूरे घटनाक्रम ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर बहस को दो ध्रुवों में बांट दिया है. कांग्रेस इसे मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया से जोड़ रही है, जबकि भाजपा इसे देशविरोधी सोच और आतंकवाद को परोक्ष समर्थन बताकर हमलावर है.

25 दिसंबर को ग्वालियर में अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह होंगे मुख्य अतिथि

अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट 25 दिसंबर को ग्वालियर में, केंद्रीय गृह मंत्री शाह होंगे शामिल निवेश से रोजगार का अटल संकल्प, विकास की नई दिशा ग्वालियर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की सहभागिता और मुख्यमंत्री की उपस्थिति में 25 दिसंबर 2025 को ग्वालियर के मेला ग्राउंड में ‘अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट’ का राज्य स्तरीय आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की जयंती के अवसर पर उनके विकासवादी विचारों, सुशासन की अवधारणा और राष्ट्रनिर्माण के संकल्प को समर्पित रहेगा। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी की दूरदर्शी विकास दृष्टि से प्रेरित यह समिट ‘निवेश से रोजगार – अटल संकल्प, उज्ज्वल मध्यप्रदेश’ की थीम पर आधारित है। कार्यक्रम का उद्देश्य प्रदेश में बीते दो वर्षों के दौरान हुए औद्योगिक विस्तार, निवेश उपलब्धियों और रोजगार सृजन के ठोस एवं धरातलीय परिणामों से नागरिकों को अवगत कराना तथा भविष्य की औद्योगिक प्राथमिकताओं और विकास के स्पष्ट रोडमैप को साझा करना है। इस राज्य स्तरीय आयोजन में लगभग एक लाख लाभार्थियों की सहभागिता अपेक्षित है। समिट के दौरान ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट एवं विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय निवेश आयोजनों के माध्यम से प्राप्त दो लाख करोड़ रु. से अधिक के निवेश प्रस्तावों से जुड़ी परियोजनाओं का भूमि-पूजन, दस हजार करोड़ रु. से अधिक की पूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण, औद्योगिक इकाइयों को भूमि आवंटन तथा आशय-पत्रों का वितरण किया जाएगा। साथ ही निवेश प्रस्तावों से जुड़े लाभार्थियों का सम्मान तथा रोजगार-केंद्रित पहलों का प्रस्तुतीकरण भी किया जाएगा। कार्यक्रम में औद्योगिक इकाइयों के माध्यम से रोजगार प्राप्त युवाओं, सफल लाभार्थियों और महिला उद्यमियों द्वारा संचालित इकाइयों को विशेष रूप से प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे महिला सशक्तिकरण और समावेशी विकास का स्पष्ट संदेश सामने आए। औद्योगिक सुधार और नवाचार के अंतर्गत विशेष औद्योगिक क्षेत्र का शुभारंभ, एक क्लिक प्रोत्साहन वितरण प्रणाली की शुरुआत, नए औद्योगिक क्लस्टरों तथा प्लग-एंड-प्ले इकाइयों का उद्घाटन किया जाएगा। विभिन्न क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण औद्योगिक परियोजनाओं का लोकार्पण भी कार्यक्रम का हिस्सा रहेगा। प्रदेश सरकार की पिछले दो वर्षों की उपलब्धियों पर आधारित एक विस्तृत प्रदर्शनी का आयोजन भी किया जाएगा, जिसमें औद्योगिक सुधारों, नीतिगत नवाचारों, निवेश प्रोत्साहन, अधोसंरचना विकास और रोजगार सृजन से जुड़े प्रयासों को प्रभावी एवं दृश्यात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। जिला स्तर पर औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन की उपलब्धियों को भी इस मंच पर प्रदर्शित किया जाएगा। स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर एक विशेष स्मृति प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा, जिसमें उनके दूरदर्शी नेतृत्व, आधारभूत संरचना विकास, औद्योगिक दृष्टि और सुशासन से जुड़े ऐतिहासिक योगदान को प्रदर्शित किया जाएगा। यह प्रदर्शनी अटल जी के विचारों से प्रेरित वर्तमान मध्यप्रदेश की औद्योगिक यात्रा को रेखांकित करेगी। समिट में प्रदेश की औद्योगिक क्षमता, निवेश-अनुकूल नीतियाँ, सिंगल विंडो प्रणाली, भूमि एवं अधोसंरचना उपलब्धता तथा MSME, स्टार्ट-अप, महिला उद्यमिता, युवा कौशल विकास और क्षेत्रीय औद्योगिक संभावनाओं से जुड़े अवसरों को दर्शाने वाली थीमेटिक प्रदर्शनी भी आयोजित की जाएगी। इस आयोजन में उद्योग जगत के प्रमुख निवेशक, औद्योगिक संघों के प्रतिनिधि, महिला एवं युवा उद्यमी, लाभार्थी समूह तथा विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी सहभागिता करेंगे। अटल जयंती के अवसर पर आयोजित यह राज्य स्तरीय आयोजन आत्मनिर्भर, समृद्ध और रोजगार-समृद्ध मध्यप्रदेश की दिशा में प्रदेश के विकास संकल्प को नई ऊर्जा प्रदान करेगा।  

हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड की राख पर अस्थाई रोक हटाई, समीक्षा आवेदन के बाद निर्णय

जबलपुर  हाईकोर्ट ने यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण से निकली राख की लैंडफिलिंग पर लगी रोक को अस्थाई रूप से वापस ले लिया है. लैंडफिलिंग पर लगाई गई रोक के आदेश पर समीक्षा करने सरकार की ओर से आवेदन दायर किया था. हाईकोर्ट जस्टिस विवेक कुमार सिंह व जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की युगलपीठ ने आवेदन की सुनवाई करते हुए पूर्व में पारित आदेश के अनुसार आगे कार्यवाही करने के निर्देश जारी किए हैं. हाईकोर्ट ने लगाई थी लैंडफिलिंग पर रोक इस याचिका की सुनवाई 2004 में आलोक प्रताप सिंह द्वारा लगाई गई याचिका के साथ संयुक्त रूप से हो रही थी. 2004 में यूनियन कार्बाइड के जहरीले कचरे के विनष्टीकरण की मांग करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद हाईकोर्ट मामले की सुनवाई संज्ञान याचिका के रूप में कर रहा था. वहीं, सोमवार से पहले हुई कई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से कचरे की विनष्टीकरण की रिपोर्ट पेश करने को कहा था. इसके बाद रिपोर्ट देखकर हाईकोर्ट ने राख को घनी आबादी के पास लैंडफिल किए जाने पर रोक लगा दी थी. यूनियन कार्बाइड की राख पर हाईकोर्ट ने जताई थी चिंता 8 अक्टूबर 2025 को हाईकोर्ट ने कहा था कि जहरीले राख की लैंडफिलिंग के आदेश के बावजूद सरकार ने दूसरे स्थान के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी. सरकार द्वारा इंसानों की आबादी से सिर्फ 500 मीटर दूर लैंड फिलिंग का स्थान निर्धारित किया गया है. राख अभी भी जहरीली है और अगर इसे ठीक से नहीं रोका गया तो भूकंप जैसी किसी प्राकृतिक आपदा के कारण उसे रोकने वाला स्ट्रक्चर गिरने पर एक और आपदा हो सकती है. ऐसे में राज्य सरकार को राख ऐसी जगहों पर ले जाने की संभावना पर विचार करना चाहिए जो इंसानी बस्तियों, पेड़-पौधों और पानी के सोर्स से बहुत दूर हों. कंटेनमेंट सिस्टम टूट भी जाए, तो भी इसके बुरे असर बहुत कम हों. हालांकि, अगली सुनवाई में इसे लेकर सरकार ने अपनी ओर से तर्क रखे. दो महीने के अंदर पूरी करें विनष्टीकरण की प्रक्रिया : हाईकोर्ट सरकार की ओर से इस मामले में फिर दलील दी गई कि जहरीली राख को रोकने के लिए जो स्ट्रक्चर बनाया है, उसे सबसे मॉडर्न सुरक्षा तकनीक से बनाया गया है. शुरुआत में कोर्ट राज्य सरकार की ओर से दिए गए इस तर्क से सहमत नहीं था. हालांकि, सोमवार को राज्य सरकार द्वारा आदेश पर समीक्षा करने के आवेदन पर युगलपीठ ने राहत दे दी. हाईकोर्ट ने आदेश देते हुए कहा कि पूर्व में पारित आदेश को देखने व मामले के तथ्यातक पहलुओं पर विचार करने के बाद हम इस निष्कर्ष पर पहुंचे है कि 8 अक्टूबर 2025 के आदेश को अस्थाई रूप से स्थगित रखा जाए. राज्य सरकार को न्यायालय के द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति की राय के अधीन दो माह की अवधि के अंदर पूर्व में पारित आदेशानुसार विनष्टीकरण की प्रक्रिया पूर्ण करनी होगी.

सीएम के मार्गदर्शन में ‘सड़क सुरक्षा मित्र’ और ‘राहवीर’ योजनाएं प्रदेश में सड़क सुरक्षा को दे रही नया आयाम

यूपी में सड़क सुरक्षा को मजबूत करने की नई पहल, 'सड़क सुरक्षा मित्र' और 'राहवीर' योजनाओं का विस्तार सीएम के मार्गदर्शन में 'सड़क सुरक्षा मित्र' और 'राहवीर' योजनाएं प्रदेश में सड़क सुरक्षा को दे रही नया आयाम सड़क सुरक्षा मित्र कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 28 जनपदों के लिए 14 लाख का बजट आवंटित गोल्डन आवर में दुर्घटना पीड़ित को अस्पताल पहुंचाने वाले राहवीर को मिलता है 25,000 का इनाम, यूपी में 5 राहवीर का चयन लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से 'सड़क सुरक्षा मित्र' कार्यक्रम और 'राहवीर' योजना को बढ़ावा दिया जा रहा है। सीएम के निर्देश के बाद इन दोनों योजनाओं के तहत प्रदेश के सभी जनपदों में सक्रियता बढ़ाई गई है। इन योजनाओं का उद्देश्य युवाओं में सड़क सुरक्षा जागरूकता फैलाना और दुर्घटना पीड़ितों की त्वरित सहायता और चिकित्सकीय सुविधा सुनिश्चित करना है। जिससे एक ओर तो रोड एक्सीडेंट के मामलों में प्रभावी कमी लाई जा सके, दूसरी ओर दुर्घटना की स्थिति में मौत की संख्या को कम करना है। राज्य सरकार ने इनकी निगरानी के लिए जिला सड़क सुरक्षा समितियों को जिम्मेदारी सौंपी है, जिसके माध्यम से सड़क सुरक्षा को जन-आंदोलन का रूप दिया जा रहा है। प्रदेश के 28 जनपदों में सक्रिय है सड़क सुरक्षा मित्र कार्यक्रम केंद्र सरकार का 'सड़क सुरक्षा मित्र' कार्यक्रम वर्तमान में प्रदेश के 28 जनपदों में सक्रिय है, यह योजना युवाओं को सड़क सुरक्षा अभियानों में सक्रिय भागीदार बनाने पर केंद्रित है। कार्यक्रम के तहत यूपी में अब तक 423 युवा स्वयंसेवकों ने 'माय भारत' पोर्टल पर पंजीकरण कराया है और प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं। इसके तहत राज्य लोक सेवा फाउंडेशन ने गौतम बुद्ध नगर, नोएडा में पहला प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया था। जिसमें स्वयंसेवकों को सड़क सुरक्षा नियमों, दुर्घटना प्रबंधन और जागरूकता अभियानों की ट्रेनिंग दी गई। इस कार्यक्रम के लिए 14 लाख रुपये का बजट अनुमोदित किया गया है, जिसमें सभी 28 जनपदों के लिए 50,000 रुपये का प्रावधान है। यह धनराशि सड़क सुरक्षा प्रशिक्षण, जागरूकता और क्षेत्रीय गतिविधियों के लिए उपयोग की जाएगी। सड़क सुरक्षा मित्र कार्यक्रम के सफल संचालन से प्रदेश में न केवल दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि युवाओं में जागरूकता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना का भी विकास होगा। बस्ती, कौशांबी, सीतापुर, अलीगढ़ और कासगंज से चुने जा चुके हैं 5 राहवीर 'राहवीर' योजना सड़क दुर्घटनाओं के गोल्डन आवर, दुर्घटना के पहले एक घंटे में त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर फोकस करती है। सड़क एवं परिवहन मंत्रालय द्वारा शुरू की गई यह योजना आम नागरिकों को प्रेरित करती है कि वे दुर्घटना पीड़ितों की तत्काल सहायता प्रदान करें। योजना के तहत, जो राहवीर पीड़ित को गोल्डन आवर में अस्पताल पहुंचाता है, उसे 25,000 रुपये का पुरस्कार दिया जाता है। इसका उद्देश्य रोड एक्सीडेंट के मामलों में मौत की संख्या में कमी लाना है। प्रत्येक जनपद में सहायक क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी को इस योजना का नोडल अधिकारी बनाया गया है। यूपी में इस योजना के तहत अब तक पांच 'राहवीर' चुने जा चुके हैं जो जनपद बस्ती, कौशांबी, सीतापुर, अलीगढ़ और कासगंज से संबंधित हैं। ये योजनाएं उत्तर प्रदेश जैसे सबसे ज्यादा हाईवे और विशाल रोड नेटवर्क वाले राज्य में सड़क सुरक्षा को नया आयाम दे रही हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में राज्य परिवहन विभाग ने आगामी महीनों में और अधिक प्रशिक्षण शिविरों की योजना तैयार की है। साथ ही नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं से अपील है कि वे इन योजनाओं में सक्रिय रूप से भागीदारी करें और प्रदेश की सड़कों को सुरक्षित बनाने में योगदान दें।

3000 युवा दिखाएंगे प्रतिभा, छत्तीसगढ़ का युवा महोत्सव 2025 शुरू

रायपुर  राज्य शासन के खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा 23 दिसम्बर से 25 दिसम्बर तक बिलासपुर के राज्य खेल प्रशिक्षण केंद्र बहतराई में राज्य युवा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय 23 दिसम्बर को इसका शुभारंभ करेंगे। महोत्सव में 14 सांस्कृतिक और साहित्यिक विधाओं में प्रदेश के 3000 युवा अपनी प्रतिभा दिखाएंगे। शुभारंभ समारोह में छत्तीसगढ़ की मेजबानी में होने वाले पहले 'खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स' की लॉन्चिंग भी की जाएगी। उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री अरुण साव शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता करेंगे। केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू, छत्तीसगढ़ विधानसभा के अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह और उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा अति विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल होंगे। राज्यपाल श्री रमेन डेका 25 दिसम्बर को समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे।  छत्तीसगढ़ के युवाओं को सांस्कृतिक गतिविधियों से जोड़ने, उनकी प्रतिभा को निखारने तथा राष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रतिभा के प्रदर्शन के लिए मंच प्रदान करने राष्ट्रीय युवा महोत्सव-2026 के तारतम्य में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा राज्य स्तरीय युवा महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। इसमें 14 विधाओं में प्रतियोगिताएं होंगी, जिनमें आठ दलीय विधाएं औ छह 6 एकल विधाएं शामिल हैं। दलीय विधाओं में लोकनृत्य, पंथी नृत्य, राउत नाचा, सुआ नृत्य, करमा नृत्य, लोकगीत, रॉक बैंड और एकांकी की प्रतियोगिताएं होंगी। वहीं एकल विधाओं में वाद-विवाद, कहानी लेखन, चित्रकला, कविता लेखन, नवाचार (साइंस मेला) और पारंपरिक वेशभूषा शामिल हैं। सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं की पांच विधाओं लोकनृत्य, लोकगीत, वाद-विवाद, चित्रकला और कविता लेखन के विजेता प्रतिभागी नई दिल्ली में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय युवा उत्सव-2026 में छत्तीसगढ़ की ओर से भागीदारी करेंगे।   राज्य युवा महोत्सव में दलीय विधाओं में प्रथम स्थान हासिल करने वाले प्रतिभागियों को 20 हजार रुपए, द्वितीय स्थान प्राप्त करने वालों को 15 हजार रुपए एवं तृतीय स्थान पर रहने वाले प्रतिभागियों को 10 हजार रुपए की पुरस्कार राशि दी जाएगी। एकल विधाओं में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को क्रमशः 5 हजार रुपए, 3 हजार रुपए एवं 2 हजार रुपए प्रदान किए जाएंगे। महोत्सव में भाग लेने वाले हर प्रतिभागी को एक-एक हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।  राज्य युवा महोत्सव के दौरान प्रसिद्ध कलाकारों के गायन, बैण्ड परफॉर्मेंस, कवि सम्मेलन जैसे विविध आयोजन भी होंगे। 23 दिसम्बर को उद्घाटन समारोह के दिन राज्य खेल प्रशिक्षण केन्द्र बहतराई में शाम 5 बजे से रात्रि 8 बजे तक आरूग बैण्ड ( अनुज शर्मा) की प्रस्तुति तथा नारायणपुर के प्रसिद्ध मल्लखंब का प्रदर्शन किया जाएगा। 23 दिसम्बर को ही बिलासपुर पुलिस ग्राउंण्ड में रात साढ़े 8 बजे से कवि सम्मेलन होगा, जिसमें प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास एवं अन्य कवि कविता पाठ करेंगे। राज्य युवा महोत्सव के दूसरे दिन 24 दिसम्बर को राज्य खेल प्रशिक्षण केन्द्र बहतराई में शाम 6 बजे से काफिला बैण्ड एवं स्वप्निल लाइव बैण्ड की प्रस्तुति होगी। अंतिम दिन 25 दिसम्बर को शाम 6 बजे से सुश्री आरू साहू तथा दायरा (बस्तर) बैण्ड की प्रस्तुति होगी। समापन समारोह में विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरित किए जाएंगे।

चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती पर आयोजित ‘किसान सम्मान दिवस’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी ने किसानों, एफपीओ, कृषि वैज्ञानिकों को किया सम्मानित  चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती पर आयोजित ‘किसान सम्मान दिवस’ में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीएम ने पांच किसानों को दी ट्रैक्टर की चाबी, झंडी दिखाकर 25 ट्रैक्टरों को किया रवाना  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को पूर्व प्रधानमंत्री, भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की 123वीं जयंती पर आयोजित ‘किसान सम्मान दिवस’ में शामिल हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच किसानों को ट्रैक्टर की चाबी भी दी। साथ ही 25 ट्रैक्टरों को झंडी दिखाकर रवाना किया।  सीएम योगी के हाथों इन किसानों को मिली ट्रैक्टर की चाबी  सीएम योगी आदित्यनाथ ने जालौन की प्रवेशिका, शाहजहांपुर से उधम सिंह, फतेहपुर से मुकेश, मुजफ्फरनगर से श्रीपाल, लखीमपुर खीरी से जमाइफ खान को ट्रैक्टर की चाबी प्रदान की।  सीएम ने इन्हें भी किया सम्मानित  👉 कमलनाथ- धान उत्पादन (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र) 👉 बिजेंद्र कुमार सिंह- गेहूं उत्पादन (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र) 👉 आशीष तिवारी- चना उत्पादन (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र) 👉 रामकिशुन- मटर उत्पादन (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र) 👉 हीरालाल- सरसो उत्पादन (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र) 👉 रणधीर सिंह- अरहर उत्पादन (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र) 👉 अमरेश कुमार- ज्वार उत्पादन (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र) 👉विशिष्ट महिला किसान का पुरस्कार- संध्या सिंह (75 हजार रुपये, अंगवस्त्र व प्रशस्ति पत्र)  👉 एफपीओ- विकास कुमार सिंह- जया सीड्स कंपनी लिमिटेड वाराणसी (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र)  👉 कुलदीप मिश्र (गोंडा)- बीज विकास निगम में सर्वाधिक बीज सप्लाई करने वाले एफपीओ  👉 औद्यानिक खेती- विकास कुमार सिंह (एक लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व अंगवस्त्र)  👉 कृषि वैज्ञानिक- डॉ. धीरज कुमार तिवारी (कृषि विज्ञान केंद्र, उन्नाव)

उदित राज का मोहन भागवत पर कटाक्ष: जुबान पर कुछ और, दिल में कुछ और

नई दिल्ली हिंदू राष्ट्र वाले बयान को लेकर कांग्रेस नेता उदित राज ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि कोई हिंदू राष्ट्र नहीं है और भागवत में दम है, तो ऐसा करके दिखाएं। उन्होंने संघ प्रमुख के बयान को संविधान विरोधी बताया है। साथ ही पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद की नींव रखने वाले हुमायूं कबीर को भारतीय जनता पार्टी की बी टीम होने का दावा किया है। बातचीत में उन्होंने कहा, 'कोई हिंदू राष्ट्र नहीं है, गलत बात है। और मोहन भागवत की हिम्मत है तो कर दिखाएं। मालूम है कि इनके दिल में कुछ और है जुबान पर कुछ और है। अंत में जुबान पर बात ही गई। अभी तक अगल बगल से कहलवाते रहे…। अब खुद मोहन भागवत जी कह दिए हैं। यह बहुत आपत्तिजनक है, गलत बात है, संविधान विरोधी बात है, राष्ट्र विरोधी बात है।' हुमायूं कबीर पर भागवत की टिप्पणी को लेकर राज ने कहा, 'हुमायूं कबीर और बीजेपी मिली हुई है, मोहन भागवत जी मिले हुए हैं। इसलिए मिले हुए हैं क्योंकि दोनों की विन विन सिच्युएशन होगी। इनको पैसा मिल जाएगा, शोहरत मिल जाएगी और ये हिंदू मुसलमान कर चुनाव जीत जाएंगे। तमाम सारी बी टीम पैदा कर दी हैं। इनकी ही बी टीम है। क्या जरूरत है चर्चा करने की। हुमायूं कबीर क्या है पता ही नहीं लगेगा। हमारे देश की मीडिया क्यों इसे तरजीह दे रही है…।' भागवत का बयान रविवार को एक कार्यक्रम में भागवत ने कहा था, 'सूर्य का पूर्व से उदय होता है। हम नहीं जानते कि ऐसा कब से हो रहा है। तो क्या हमें उसके लिए भी संविधान की मंजूरी लेनी पड़ेगी। हिंदुस्तान हिंदू राष्ट्र है। जो भी भारत को अपनी मां मानता है, वो भारतीय संस्कृति की तारीफ करता है, जब तक हिन्दुस्तान की धरती पर एक भी व्यक्ति जिंदा है जो पूर्वजों को गौरव को मानता है और उसका सम्मान करता है, तब तक भारत हिंदू राष्ट्र है। यह संघ की विचारधारा है।' उन्होंने कहा, 'अगर संसद कभी संविधान संशोधन का फैसला करती है और शब्द को जोड़ती है। अगर ऐसा होता है या नहीं होता है, तो भी ठीक है। हम शब्द की चिंता नहीं करते, क्योंकि हम हिंदू हैं और हमारा देश हिंदू राष्ट्र है। यह सच है जन्म पर आधारित जाति व्यवस्था हिंदुत्व की पहचान नहीं है।'

बच्चों की असामयिक मौतों ने मचाई चिंता, छतरपुर में NHM जांच में जुटा

 छतरपुर मध्यप्रदेश का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर देशभर में सुर्खियां बटोर रहा है। इस बार चर्चा का मुख्य कारण बच्चों की मौत से जुड़ा है। वहीं मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने आनन-फानन में राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अफसरों से रिपोर्ट तलब की है। दरअसल, मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के जिला अस्पताल से एक विचलित कर देने वाली घटना उजागर हुई है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 8 महीनों में जिले में 409 बच्चों की मौत हो गई। इस भारी संख्या में हुई मौतों के बाद नेशनल हेल्थ मिशन  विभाग ने स्वास्थ्य प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।  छतरपुर जिले के जिला अस्पताल से एक विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले 8 महीनों में जिले में 409 बच्चों की मौत हो गई. इस भारी संख्या में हुई मौतों के बाद नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) विभाग ने स्वास्थ्य प्रबंधन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. आरपी गुप्ता ने इस गंभीर स्थिति की पुष्टि की और बताया, ''अप्रैल से अब तक अस्पताल में 409 बच्चों की मौत हो चुकी है और हमें सीनियर अधिकारियों से इन मौतों की जांच करने का नोटिस मिला है. मैंने इसके लिए एक टीम बनाई है. हमने जांच लगभग पूरी कर ली है.'' कर्मचारियों से हो रही पूछताछ सीएमएचओ ने कहा- एसएनसीयू और लेबर रूम के स्टाफ से पूछताछ की जा रही है। हाल ही में लापरवाही बरतने वाले कुछ कर्मचारियों को सिविल सर्जन ने हटा दिया है। हमारी टीम मृत बच्चों की वर्बल आटोप्सी कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि मौतें किस स्तर पर हुईं। उन्होंने यह भी दावा है कि मॉनिटरिंग बढ़ाने के बाद डेथ परसेंटेज में कमी आई है और यह अब 6 फीसदी से नीचे आ गया है। जरूरतमंद को नहीं मिल रही एंबुलेंस इधर, प्रशासन ने बच्चों की मौतों के लिए कई तकनीकी और सामाजिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाने में देरी होना, पेरी-फेरी (बाहरी स्वास्थ्य केंद्रों) से समय पर रेफर न होना या एंबुलेंस की कमी, कुछ बच्चों में जन्म से ही शारीरिक समस्याएं भी मौतों का कारण बन जाती हैं। दावा- अब घट गया मौत का प्रतिशत वहीं, अस्पताल पहुंचने के बाद आपरेशन या सामान्य प्रसव की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का विलंब भी वजह है। सीएमएचओ ने कहा कि हम इन मौतों को न्यूनतम स्तर पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। अभी परिणाम हमारे यहां देखने में मिल भी रहे हैं कि पहले बच्चों की मौतों का प्रतिशत ज्यादा था, अब वो घटकर छह प्रतिशत से कम पर आ गया है। CMHO के अनुसार, "SNCU और लेबर रूम के स्टाफ से पूछताछ की जा रही है. हाल ही में लापरवाही बरतने वाले कुछ कर्मचारियों को सिविल सर्जन ने हटा दिया है. हमारी टीम मृत बच्चों की 'वर्बल ऑटोप्सी' कर रही है ताकि यह समझा जा सके कि मौतें किस स्तर पर हुईं.'' विभाग का दावा है कि मॉनिटरिंग बढ़ाने के बाद डेथ परसेंटेज में कमी आई है और यह अब 6% से नीचे आ गया है. प्रशासन ने बच्चों की मौतों के लिए कई तकनीकी और सामाजिक कारणों को जिम्मेदार ठहराया है. उनका कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल लाने में देरी होना, पेरी-फेरी (बाहरी स्वास्थ्य केंद्रों) से समय पर रेफर न होना या एंबुलेंस की कमी, कुछ बच्चों में जन्म से ही शारीरिक समस्याएं भी मौतों का कारण बन जाती हैं. वहीं, अस्पताल पहुंचने के बाद ऑपरेशन या सामान्य प्रसव की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का विलंब भी वजह है. स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा कि हम इन मौतों को न्यूनतम स्तर पर लाने की कोशिश कर रहे हैं. और अभी परिणाम हमारे यहां देखने में मिल भी रहे हैं कि पहले बच्चों की मौतों का प्रतिशत ज्यादा था, अब वो घटकर छह प्रतिशत से कम पर आ गया है.