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इंदौर में न्यूनतम 8°C, भोपाल 9.8°C, MP में घना कोहरा और पचमढ़ी में पारा 4°C से नीचे

भोपाल  उत्तर भारत में हो रही बर्फबारी का असर मध्यप्रदेश में दिखने लगा है। प्रदेश में ठंड लगातार बढ़ रही है और बुधवार रात से सर्दी और तीखी होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, न्यूनतम तापमान में अगले 24 घंटे में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक और गिरावट दर्ज की जा सकती है। फिलहाल पचमढ़ी और शहडोल का कल्याणपुर ऐसे इलाके हैं, जहां रात का तापमान 5 डिग्री सेल्सियस से नीचे बना हुआ है। इधर, प्रदेश के उत्तरी हिस्से घने कोहरे की चपेट में हैं। ग्वालियर, रीवा और सतना में दृश्यता 50 से 200 मीटर तक सिमट गई है, जिससे हालात जीरो विजन जैसे हो गए हैं। दमोह, खजुराहो, नौगांव, मुरैना, सीधी, दतिया, इंदौर, भोपाल, राजगढ़, उज्जैन, शाजापुर, सीहोर और देवास में भी सुबह 6 से 8 बजे के बीच घना कोहरा छाया रहा। बुधवार सुबह भी कई जिलों में यही स्थिति देखने को मिली। कम विजिबिलिटी के कारण कई जगह सड़कों पर वाहन चलाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। जानिए आपके शहर में मौसम की स्थिति क्या है और आने वाले तीन दिनों में ठंड-कुहासे का क्या असर रहेगा।  आज का मौसम कैसा रहा? बुधवार सुबह ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मैहर, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली और शहडोल में घना कोहरा छाया रहा। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, देवास, राजगढ़, रायसेन और विदिशा में मध्यम स्तर का कोहरा देखा गया।मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के मुताबिक, अगले दो दिनों में कोहरे का असर थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन ठंड और तेज होगी। न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री तक की और गिरावट संभव है। अगले पांच दिनों तक प्रदेश में मौसम शुष्क बना रहेगा और बारिश की कोई संभावना नहीं है। न्यूनतम तापमान के मामले में नौगांव (छतरपुर) प्रदेश का दूसरा सबसे ठंडा शहर रहा, जहां रात का तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा राजगढ़ में 7.4, मलाजखंड में 7.6, रीवा में 8.2 और उमरिया में 8.3 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। कई शहरों में कोहरे का असर बुधवार सुबह कुछ शहरों में कोहरे से राहत जरूर मिली, लेकिन इंदौर, खजुराहो, रीवा, सतना, दतिया, गुना, ग्वालियर, रतलाम, उज्जैन, मंडला, नरसिंहपुर और नौगांव में घने कोहरे का असर साफ दिखाई दिया। कई जगह विजिबिलिटी 2 से 4 किलोमीटर तक सीमित रही। मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर भारत से आ रही ठंडी हवाओं और साफ आसमान के कारण रात के तापमान में और गिरावट आ सकती है। ऐसे में लोगों को ठंड से बचाव के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।   पचमढ़ी में इस सीजन की सबसे ठंडी रात प्रदेश के एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी में इस सीजन पहली बार न्यूनतम तापमान 4 डिग्री से नीचे पहुंच गया। मंगलवार रात यहां तापमान 3.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में ठंड और बढ़ सकती है, जिससे न्यू ईयर सेलिब्रेशन पर भी असर पड़ सकता है। एमपी में सबसे ठंडा पचमढ़ी शहर रात का तापमान पचमढ़ी (नर्मदापुरम) 3.8 राजगढ़ 7.4 नौगांव (छतरपुर) 7.0 मलाजखंड (बालाघाट) 7.6 रीवा 8.2 उमरिया 8.3 रायसेन 9.0 छिंदवाड़ा 9.0 मंडला 9.0 खजुराहो (छतरपुर) 9.2 टीकमगढ़ 9.8 बैतूल 10.0 खंडवा 10.0 खरगोन 10.2 सतना 10.2 नरसिंहपुर 10.4 रतलाम 10.5 दमोह 10.6 धार 10.9 दतिया 11.1 गुना 11.4 सिवनी 11.4 सीधी 11.4 श्योपुर 12.0 सागर 12.4 नर्मदापुरम 13.5 कई शहरों में घना कोहरा बुधवार सुबह कुछ जगहों पर कोहरे से हल्की राहत मिली, लेकिन इंदौर, खजुराहो, रीवा, सतना, दतिया, गुना, ग्वालियर, रतलाम, उज्जैन, मंडला, नरसिंहपुर और नौगांव में घना कोहरा छाया रहा। कई इलाकों में विजिबिलिटी 2 से 4 किलोमीटर तक सीमित रही। आज कैसा है मौसम? घना कोहरा: ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना, रीवा, मैहर, मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल मध्यम कोहरा: भोपाल, इंदौर, उज्जैन, शाजापुर, देवास, राजगढ़, रायसेन, विदिशा अगले कुछ दिनों का मौसम अपडेट मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार, अगले 2 दिन कोहरे का असर कुछ कम रहेगा, लेकिन ठंड और तेज होगी। न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री तक गिरावट आ सकती है। अगले 5 दिनों तक मौसम साफ रहेगा और बारिश की कोई संभावना नहीं है। नवंबर-दिसंबर में टूटा ठंड का रिकॉर्ड इस बार नवंबर और दिसंबर में ठंड ने कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। भोपाल में नवंबर महीने में 15 दिन तक शीतलहर चली, जो 1931 के बाद सबसे ज्यादा है। 17 नवंबर की रात भोपाल में तापमान 5.2 डिग्री तक पहुंच गया, जो अब तक का रिकॉर्ड है। इंदौर में भी 25 साल का रिकॉर्ड टूटा इंदौर में भी इस बार ठंड ने रिकॉर्ड बनाया। यहां तापमान 6.4 डिग्री तक गिर गया, जो पिछले 25 सालों में सबसे कम है। दिसंबर में भोपाल और इंदौर दोनों जगह पारा 5 डिग्री से नीचे जा चुका है। दिसंबर-जनवरी क्यों होते हैं सबसे ठंडे? मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह जुलाई-अगस्त में सबसे ज्यादा बारिश होती है, उसी तरह दिसंबर और जनवरी में सबसे ज्यादा ठंड पड़ती है। इन महीनों में उत्तर भारत से ठंडी हवाएं आती हैं और वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय रहते हैं, जिससे ठंड और बढ़ जाती है। इन जिलों में सबसे ज्यादा सर्दी ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग: बर्फीली हवाओं और घने कोहरे का असर सागर और रीवा संभाग: तेज ठंड और शीतलहर भोपाल संभाग: सीहोर, रायसेन, राजगढ़, विदिशा में ठंड का जोर सागर संभाग: निवाड़ी, छतरपुर, टीकमगढ़, पन्ना रीवा संभाग: मऊगंज, सीधी, सिंगरौली जबलपुर संभाग: मंडला, डिंडौरी इंदौर संभाग: इंदौर, धार, झाबुआ एक दर्जन से अधिक ट्रेनें 5 से 8 घंटे तक लेट घने कोहरे के कारण दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली एक दर्जन से अधिक ट्रेनें 5 से 8 घंटे तक देरी से चल रही हैं। मालवा एक्सप्रेस रोजाना 4 से 5 घंटे लेट हो रही है, जबकि शताब्दी और सचखंड एक्सप्रेस भी प्रभावित हैं। तापमान की बात करें तो प्रदेश के बड़े शहरों में भोपाल का न्यूनतम तापमान 7.4 डिग्री, इंदौर का 6.4 डिग्री, ग्वालियर का 8.5 डिग्री, उज्जैन का 9.8 डिग्री और जबलपुर का 8.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन पचमढ़ी सबसे ठंडा रहा, जहां रात का पारा 4.2 डिग्री पर पहुंच गया। शहडोल के कल्याणपुर में 4.6 डिग्री, मंदसौर में 5.7 डिग्री, … Read more

MP में मतदाता सूची की सफाई: 22 साल बाद विशेष गहन पुनरीक्षण, 42.74 लाख नाम हटाए गए

भोपाल  मध्य प्रदेश में मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए 22 साल बाद हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दूसरे चरण में मंगलवार को सभी 71,930 मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची के प्रारूप का प्रकाशन किया गया। अलग-अलग श्रेणियों में 42,74,160 मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। इनमें अधिकतर शहरी क्षेत्रों के हैं। इनमें 22,78,393 वे मतदाता सर्वाधिक शामिल है, जो स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके हैं। अब प्रदेश में 23 दिसंबर 2025 की स्थिति में 5,31,31,983 मतदाता रह गए हैं। इनमें 8,65,832 वे मतदाता भी शामिल हैं, जिन्होंने गणना पत्रक अधूरे जमा किए हैं। उन्हें पत्रक में सुधार का मौका दिया गया है।  राज्य में कुल 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार 143 निर्वाचकों में से 5 करोड़ 31 लाख 31 हजार 983 मतदाताओं ने अपने गणना प्रपत्र जमा किए हैं। इसमें 8 लाख 65 हजार ‘नो-मैपिंग’ वाले मतदाता भी शामिल हैं। निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं को पांच श्रेणियों (कैटेगरी) में विभाजित कर आंकड़े जारी किए हैं। इनमें नो-मैपिंग कैटेगरी में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर चारों महानगर शीर्ष पर हैं। इंदौर में हटाए गए 4 लाख से ज्यादा नाम इंदौर जिले की मतदाता सूची में एसआईआर के बाद मतदाता संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज हुई है। पहले जिले में कुल 28 लाख 67 हजार 268 मतदाता थे। सत्यापन के बाद मतदाताओं की संख्या घटकर 24 लाख 16 हजार रह गई। 4 लाख 51 हजार 218 मतदाताओं का सत्यापन नहीं हो पाया। इन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटने की स्थिति में है। तारीख दो बार बढ़ने से 75 हजार 467 मतदाताओं को राहत मिली है। दोबारा सत्यापन के बाद ये मतदाता सूची में बने रह सके। विभागीय रिपोर्ट के अनुसार, 84.26 फीसद सत्यापन पूरा हो चुका है, शेष 15.74 फीसद मतदाताओं के नाम हटना तय माना जा रहा है। गोविंदपुरा में 97 हजार और नरेला में 81 हजार वोटरों के नाम सूची से हटाए भोपाल की अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में वोटर कटने के आंकड़े असमान रहे हैं. सबसे ज्यादा असर गोविंदपुरा और नरेला विधानसभा क्षेत्र में देखा गया है. गोविंदपुरा में जहां 97 हजार से ज्यादा वोटरों के नाम सूची से हटाए गए हैं, वहीं नरेला में 81 हजार से अधिक मतदाता कम हुए हैं. इसके अलावा भोपाल मध्य, उत्तर, दक्षिण-पश्चिम, हुजूर और बैरसिया विधानसभा क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में वोटरों के नाम कटे हैं. खंडवा में 86193 मतदाताओं के नाम कटे खंडवा जिले में में एसईआर के पहले चरण का काम पूरा हो गया है। 27 अक्टूबर 2025 को यहां की चारों विधानसभाओं में 10 लाख 29 हजार 806 मतदाता थे। लेकिन, अब सर्वे के बाद 9 लाख 43 हजार 613 मतदाता शेष हैं। यानी 86 हजार 193 मतदाता कम दर्ज हुए। सबसे ज्यादा परमानेंट शिफ्टेड 50 हजार 784 मतदाता है। 18 हजार 956 मतदाता मृत पाए गए। 8 हजार 782 मतदाता डबल वोटर कार्ड वाले और 7548 मतदाताओं का कोई पता नहीं चल पाया है। खंडवा कलेक्ट्रेट में राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को मतदाता सूचियों के ड्रॉफ्ट पब्लिकेशन को सीडी और अंतरिम प्रकाशन की विधानसभा वार सूचियां दी गई हैं। वहीं, इंदौर ऐसा एकमात्र जिला है जो सभी पांचों कैटेगरी में शामिल है। मध्य प्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी संजीव झा ने बताया कि यह पूरी प्रक्रिया राज्य के सभी 55 जिला निर्वाचन अधिकारियों, 230 निर्वाचन रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO), 532 सहायक ERO (AERO) तथा 65,014 मतदान केंद्रों पर तैनात बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) के समन्वित प्रयासों से पूरी की गई। इस अभियान में स्वयंसेवकों और छह राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की भी सक्रिय भागीदारी रही, जिन्होंने 1.35 लाख से अधिक बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त किए। 42.74 लाख मतदाता नहीं मिले आयोग के अनुसार अब्सेंट, शिफ्टेड, मृत और डुप्लीकेट कैटेगरी में प्रदेश में कुल 42 लाख 74 हजार 160 मतदाता नहीं मिले। अब इनके नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। हालांकि, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इनमें कुछ मतदाता ऐसे भी हो सकते हैं जिन्होंने समय सीमा में गणना प्रपत्र जमा नहीं किया या स्वयं पंजीकरण में रुचि नहीं ली। आंकड़ों के अनुसार: 8.46 लाख मतदाता (1.47%) मृत पाए गए 31.51 लाख मतदाता (5.49%) अन्य राज्यों में पंजीकृत पाए गए या तीन बार घर जाने पर अनुपस्थित मिले 2.77 लाख मतदाता (0.48%) के नाम दो स्थानों पर दर्ज पाए गए, जिनमें से अब केवल एक स्थान पर नाम रखा जाएगा नो-मैपिंग कैटेगरी में इंदौर टॉप पर नो-मैपिंग कैटेगरी में कुल 8 लाख 65 हजार मतदाता पाए गए, जो 5.31 करोड़ गणना प्रपत्र जमा करने वाले मतदाताओं में शामिल हैं।  जिलावार स्थिति इस प्रकार है: इंदौर – 1,33,696 भोपाल – 1,16,925 जबलपुर – 69,394 ग्वालियर – 68,540 उज्जैन – लगभग 48,000 क्या है ‘नो-मैपिंग’? चुनाव आयोग द्वारा सभी मतदाताओं को गणना प्रपत्र दिए गए थे, जिसमें उन्हें 2003 की मतदाता सूची के अनुसार अपना वोटर आईडी नंबर या किसी रक्त संबंधी (ब्लड रिलेशन) रिश्तेदार का वोटर आईडी नंबर दर्ज करना था। जिन मतदाताओं की यह जानकारी मेल नहीं खा सकी, उन्हें नो-मैपिंग श्रेणी में रखा गया है। ऐसे मतदाताओं को अब आयोग की ओर से नोटिस जारी किया जाएगा, जिसमें उन्हें 7 दिनों के भीतर आयोग द्वारा मान्य 13 पहचान पत्रों में से किसी एक के माध्यम से अपनी पात्रता सिद्ध करनी होगी। ऐसा न करने पर उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा। दो जगह नाम वाले मतदाता: बुरहानपुर सबसे आगे डुप्लीकेट वोटर आईडी मामलों में: बुरहानपुर – 23,544 (पहला स्थान) इंदौर – 22,808 (दूसरा) धार – 14,198 (तीसरा) सबसे कम डुप्लीकेट मतदाता: उमरिया – 968 आगर मालवा – 985 नीमच – 1,036 भोपाल – 14,171 मृत मतदाताओं में जबलपुर टॉप पर मृत पाए गए मतदाताओं की संख्या में: जबलपुर – 51,357 (पहला स्थान) इंदौर – 43,743 (दूसरा) सागर – 36,466  (तीसरा) सबसे कम मृत मतदाता: पांढुर्ना – 4,981 हरदा – 5,303 निवाड़ी – 5,539 अब्सेंट मतदाता में इंदौर टॉप पर – बता दें अब्सेंट मतदाता यानी जिनके पते पर तीन बार जाने के बावजूद वह नहीं मिले।  अब्सेंट पाए गये मतदाताओं की संख्या में: इंदौर- 1, 75, 425 (पहला स्थान) भोपाल-1,01,503  (दूसरा) जबलपुर- 66,678 (तीसरा) सबसे कम अब्सेंट मतदाता:  अलीराजपुर- 672 पाढूंर्ना- 1372 आगर मालवा- 1734  शिफ्टेड मतदाता में भोपाल … Read more

LVM3 रॉकेट से ISRO ने लॉन्च किया दुनिया का सबसे भारी सेटेलाइट, ब्लूबर्ड ब्लॉक-3

श्रीहरिकोटा भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) बुधवार सुबह 8.55 बजे अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट LVM3 से अमेरिकी कंपनी AST स्पेसमोबाइल की ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 संचार सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया. यह इस रॉकेट की छठी ऑपरेशनल उड़ान (LVM3-M6) है. ये मिशन है न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) और AST स्पेसमोबाइल के बीच हुए समझौते के तहत किया जा रहा है. इस मिशन से लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में दुनिया का सबसे बड़ा कॉमर्शियल संचार सैटेलाइट तैनात होगा, जो सामान्य स्मार्टफोन को सीधे स्पेस से हाई-स्पीड इंटरनेट प्रदान करेगा. ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 सैटेलाइट की विशेषताएं ब्लूबर्ड ब्लॉक-2 AST स्पेसमोबाइल की अगली पीढ़ी की संचार सैटेलाइट्स सीरीज का हिस्सा है. यह सैटेलाइट दुनिया भर में उन इलाकों में मोबाइल कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए डिजाइन की गई है जहां ग्राउंड नेटवर्क नहीं पहुंच पाता. मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं…     वजन: लगभग 6100 से 6500 किलोग्राम (यह LVM3 द्वारा भारतीय मिट्टी से लॉन्च किया गया अब तक का सबसे भारी पेलोड है).     आकार: इसमें 223 वर्ग मीटर (लगभग 2,400 स्क्वायर फीट) का फेज्ड ऐरे एंटीना लगा है, जो इसे लो अर्थ ऑर्बिट में तैनात होने वाला सबसे बड़ा कॉमर्शियल संचार सैटेलाइट बनाता है.     क्षमता: यह 4G और 5G नेटवर्क सपोर्ट करता है. सामान्य स्मार्टफोन को सीधे स्पेस से हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड प्रदान करेगा.     स्पीड: प्रति कवरेज सेल में 120 Mbps तक की पीक डेटा स्पीड, जो वॉइस कॉल, वीडियो कॉल, टेक्स्ट, स्ट्रीमिंग और डेटा सर्विसेज को सपोर्ट करेगी.     उद्देश्य: यह सैटेलाइट AST स्पेसमोबाइल की ग्लोबल कांस्टेलेशन का हिस्सा है, जो दुनिया भर में 24/7 कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगी. इससे दूरदराज के इलाकों, समुद्रों और पहाड़ों में भी मोबाइल नेटवर्क पहुंचेगा.     पिछली सैटेलाइट्स: कंपनी ने सितंबर 2024 में ब्लूबर्ड 1-5 सैटेलाइट्स लॉन्च की थीं, जो अमेरिका और कुछ अन्य देशों में कंटीन्यूअस इंटरनेट कवरेज प्रदान कर रही हैं. ब्लॉक-2 इससे 10 गुना ज्यादा बैंडविड्थ कैपेसिटी वाली है. यह सैटेलाइट लगभग 600 किलोमीटर की ऊंचाई वाली लो अर्थ ऑर्बिट में तैनात की जाएगी. LVM3 रॉकेट की विशेषताएं LVM3 (लॉन्च व्हीकल मार्क-3), जिसे पहले GSLV Mk-III कहा जाता था, इसरो का सबसे शक्तिशाली रॉकेट है. इसे इसरो ने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है. मुख्य स्पेसिफिकेशंस…     ऊंचाई: 43.5 मीटर     लिफ्ट-ऑफ वजन: 640 टन     स्टेज: तीन स्टेज वाला रॉकेट     दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन बूस्टर्स (S200)     लिक्विड कोर स्टेज (L110)     क्रायोजेनिक अपर स्टेज (C25)     पेलोड क्षमता: जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट (GTO) में: 4,200 किलोग्राम तक. लो अर्थ ऑर्बिट (LEO) में: 8,000 किलोग्राम तक.     पिछले सफल मिशन: LVM3 ने चंद्रयान-2, चंद्रयान-3 और दो वनवेब मिशनों (कुल 72 सैटेलाइट्स) को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है. इसका पिछला मिशन LVM3-M5/CMS-03 था, जो 2 नवंबर 2025 को सफल रहा. यह रॉकेट भारत की अंतरिक्ष क्षमता का प्रतीक है और भविष्य में गगनयान मानव मिशन के लिए भी इस्तेमाल होगा. यह मिशन इसरो के कॉमर्शियल लॉन्चेस में एक नया कीर्तिमान स्थापित करेगा. AST स्पेसमोबाइल दुनिया की पहली स्पेस-बेस्ड सेल्युलर ब्रॉडबैंड नेटवर्क बना रही है, जो स्टारलिंक जैसी सेवाओं से कॉम्पीट करेगी. भारत से लॉन्च होने से इसरो की ग्लोबल लॉन्च सर्विसेज में मजबूती आएगी.

राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा, रोजगार और खेल सहित हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

रायपुर : युवा ही प्रदेश और देश का भविष्य हैं: मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय राज्य सरकार युवाओं को शिक्षा, रोजगार और खेल सहित हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध: मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय बिलासपुर में तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ राज्य युवा महोत्सव का भव्य शुभारंभ खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़-2026 के शुभंकर ‘मोर वीर’, थीम सॉन्ग और खेलो इंडिया टॉर्च का अनावरण मलखंब खिलाड़ियों को एक लाख रुपये प्रोत्साहन राशि सहित कई महत्वपूर्ण घोषणाएं रायपुर छत्तीसगढ़ के युवाओं की प्रतिभा, ऊर्जा और रचनात्मक क्षमता को राष्ट्रीय पहचान दिलाने के उद्देश्य से आयोजित राज्य स्तरीय युवा महोत्सव का आज बिलासपुर के बहतराई स्टेडियम में भव्य शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने तीन दिवसीय इस महोत्सव का उद्घाटन करते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स छत्तीसगढ़ 2026 के शुभंकर ‘मोर वीर’, थीम सॉन्ग एवं खेलो इंडिया टॉर्च का रिमोट बटन दबाकर अनावरण किया। मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया। उद्घाटन समारोह में अबूझमाड़ क्षेत्र के खिलाड़ियों द्वारा मलखंब की उत्कृष्ट प्रस्तुति दी गई। महिला कबड्डी खिलाड़ी संजू देवी एवं एथलेटिक्स खिलाड़ी श्री अमित कुमार द्वारा खेलो इंडिया टॉर्च का अनावरण किया गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा ही देश और प्रदेश का भविष्य हैं। राज्य सरकार शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और खेल सहित हर क्षेत्र में युवाओं को आगे बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। यह युवा महोत्सव न केवल युवाओं की प्रतिभाओं को पहचान देने का मंच है, बल्कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम भी है। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर खेलो इंडिया में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को प्रोत्साहन राशि देने, मलखंब खिलाड़ियों को एक लाख रुपये की विशेष प्रोत्साहन राशि प्रदान करने तथा अमेरिका गॉट टैलेंट में चयनित मलखंब खिलाड़ी अनतई पोटाई के अमेरिका आने-जाने का सम्पूर्ण व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किए जाने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि इस युवा महोत्सव में प्रदेशभर से 3,000 से अधिक युवा भाग ले रहे हैं, जो 14 सांस्कृतिक एवं साहित्यिक विधाओंकृ8 दलीय एवं 6 एकलकृमें अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। लोकनृत्य, लोकगीत, वाद-विवाद, चित्रकला और कविता लेखन की विजेता प्रतिभाएँ वर्ष 2026 में नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय युवा उत्सव में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर ओलंपिक में 1 लाख 65 हजार से अधिक युवाओं की सहभागिता यह प्रमाण है कि छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्त होकर शांति, विकास और सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। जनजातीय अंचलों में खेलों की अपार संभावनाएँ हैं और सरकार इन क्षेत्रों की प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें आगे बढ़ा रही है। केंद्रीय राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने कहा कि युवाओं की सृजनशील सोच से ही देश आगे बढ़ता है और केंद्र व राज्य सरकारें मिलकर युवाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर  प्रयासरत हैं। उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने घोषणा की कि आने वाले समय में सरगुजा अंचल में भी ओलंपिक-स्तरीय खेल आयोजनों का आयोजन किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर बदल रहा है और आज जनजातीय क्षेत्रों के युवा राष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रहे हैं। इस अवसर पर संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री राजेश अग्रवाल, विधायकगण श्री अमर अग्रवाल, श्री धर्मजीत सिंह, श्री धरमलाल कौशिक, श्री सुशांत शुक्ला, महापौर श्रीमती पूजा विधानी, क्रेडा अध्यक्ष श्री भूपेंद्र सवन्नी, छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम अध्यक्ष श्री राजा पांडे सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, खिलाड़ी और युवा उपस्थित थे।

कुशीनगर विधायक के घर 50 ब्राह्मण विधायकों का जुटान, यूपी की राजनीति में हलचल

 लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा का शीतकालीन सत्र चल रहा है और सभी दलों के विधायक राजधानी लखनऊ में हैं. सूबे की सत्ता पर काबिज भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक भी लखनऊ में हैं और अब ब्राह्मण विधायकों की गोलबंदी ने सर्दी के मौसम में भी सियासी तापमान बढ़ा दिया है. लखनऊ में मंगलवार की शाम बीजेपी और अन्य दलों के 52 ब्राह्मण विधायक और विधान परिषद सदस्य एक जगह जुटे और बंद कमरे में बैठे. बीजेपी विधायकों के साथ ही इस आयोजन में अन्य दलों के विधायक भी पहुंचे. ब्राह्मण विधायकों और एमएलसी का जुटान कुशीनगर के विधायक पंचानंद पाठक (पीएन पाठक) के आवास पर हुआ. इसे सहभोज नाम दिया गया था, जिसमें खासतौर पर पूर्वांचल और बुंदेलखंड के विधायक पहुंचे थे. विधायकों का कहना है कि यह सहभोज था, कोई बैठक नहीं थी. इसे लेकर मिर्जापुर नगर विधानसभा सीट से विधायक रत्नाकर मिश्रा का बयान आया है. मिर्जापुर नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा ने कहा है कि कुशीनगर के विधायक पंचानंद पाठक ने यह आयोजन किया था. इसमें लगभग चार दर्जन ब्राह्मण विधायक शामिल थे. उन्होंने दावा किया कि इस दौरान कोई राजनीतिक चर्चा नहीं हुई थी. हम सब लोग बस बैठते हैं, भोजन का आयोजन था. मिर्जापुर नगर विधायक रत्नाकर मिश्रा ने यह भी कहा है कि हम सभी ने बस खाना खाया और इसके बाद वहां से सभी चले गए. उन्होंने कहा कि कुछ भी खास नहीं था. जैसे सब बैठते थे, वैसे हम लोग भी बैठे और खाना खाया. इस सहभोज में मिर्जापुर नगर विधानसभा से विधायक रत्नाकर मिश्रा के साथ ही शलभमणि त्रिपाठी, एमएलसी उमेश द्विवेदी भी मौजूद रहे. ये सभी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी करीबी माने जाते हैं. गौरतलब है कि यूपी विधानसभा के पिछले मॉनसून सत्र के दौरान भी ऐसा ही एक आयोजन चर्चा का केंद्र रहा था. यूपी विधानसभा के मॉनसून सत्र के दौरान ठाकुर विधायकों का जुटान हुआ था, जिसे कुटुंब नाम दिया गया था. तब बीजेपी के साथ ही अन्य दलों के ठाकुर विधायक भी उस जुटान में पहुंचे थे. विधायकों ने उस आयोजन को पारिवारिक मिलन बताया था. यह बैठक उसी आयोजन का जवाब मानी जा रही है.

निवेश से रोजगार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हो रहा प्रदेश का औद्योगिक विकास

अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में दिखेगी प्रदेश के आर्थिक विकास की समग्र तस्वीर निवेश से रोजगार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में हो रहा प्रदेश का औद्योगिक विकास केन्द्रीय गृह मंत्री शाह 25 दिसम्बर को ग्वालियर में अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट में होंगे शामिल भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल करने जा रहा है। इसी उद्देश्य से 25 दिसंबर को ग्वालियर के मेला ग्राउंड में “अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट – निवेश से रोजगार” का आयोजन किया जाएगा। यह ग्रोथ समिट प्रदेश की औद्योगिक नीति, निवेश प्रोत्साहन और रोजगार आधारित विकास की समग्र तस्वीर को प्रदर्शित करने वाला सबसे प्रभावी मंच साबित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के विजन के अनुरूप इस समिट में औद्योगिक निवेश के साथ उत्पादन और रोजगार के सृजन पर भी फोकस किया जायेगा। कार्यक्रम में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह उपस्थित रहेंगे। उनकी सहभागिता यह संदेश देगी कि मध्यप्रदेश का औद्योगिक विकास मॉडल केंद्र की प्राथमिकताओं के अनुरूप है और प्रदेश में निवेश सुरक्षित, पारदर्शी और लाभकारी तरीके से लागू किया जाएगा। निवेश को जमीन पर उतारने का मंच ग्रोथ समिट के दौरान 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्तावों पर आधारित भूमि आवंटन और अनुमोदन संबंधी निर्णय लिये जायेंगे। इसके साथ ही 10,000 करोड़ रुपये से अधिक की औद्योगिक परियोजनाओं का लोकार्पण किया जाएगा। नए औद्योगिक क्षेत्र, क्लस्टर और प्लग-एंड-प्ले इकाइयों के शुभारंभ से प्रदेश में उत्पादन और उद्योग गतिविधियों को गति मिलेगी। इससे स्थानीय रोजगार के अवसर भी व्यापक रूप से विकसित होंगे और युवाओं के लिए नई संभावनाएँ उत्पन्न होंगी। कार्यक्रम में निवेशकों को सिंगल-क्लिक प्रणाली के माध्यम से प्रोत्साहन सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। इस डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली से निवेशक परियोजनाएँ तेजी से शुरू कर पाएंगे और औद्योगिक इकाइयों को समय पर समर्थन मिलेगा। रोजगार और युवाओं का सशक्तिकरण ग्रोथ समिट का उद्देश्य केवल निवेश नहीं, बल्कि रोजगार सृजन को भी प्राथमिकता देना है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में नए उद्योगों के साथ-साथ रोजगार प्राप्त करने वाले युवाओं को सम्मानित किया जाएगा। यह पहल यह संदेश देगी कि मध्यप्रदेश में उद्योग और रोजगार एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। रोजगार पाने वाले युवाओं को मंच से प्रोत्साहन देने से उनके आत्मविश्वास और उत्पादनशीलता में वृद्धि होगी। एमएसएमई, कौशल विकास और स्टार्टअप पर विशेष ध्यान समिट में एमएसएमई, स्टार्टअप्स, आईटी-आईटीईएस, फूड प्रोसेसिंग, ड्रोन, डिफेंस और फार्मा जैसे क्षेत्रीय और निर्यात आधारित उद्योगों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, कौशल विकास, तकनीकी शिक्षा और रोजगार सृजन पर केंद्रित सत्र यह दिखाएंगे कि प्रदेश सरकार कुशल मानव संसाधन तैयार करने और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप रोजगार अवसर प्रदान करने पर समान रूप से ध्यान दे रही है। औद्योगिक प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की ताकत कार्यक्रम स्थल पर औद्योगिक परियोजनाओं, अधोसंरचना और निवेश से जुड़े विभागीय कार्यों की प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। प्रदर्शनी में प्रदेश के औद्योगिक अवसर, निवेश के प्रस्ताव, अधोसंरचना विकास और औद्योगिक नीतियों की जानकारी निवेशकों और आमजन को दी जाएगी। इससे निवेशकों को प्रदेश में निवेश के लिए भरोसा मिलेगा और औद्योगिक गतिविधियों में तेजी आएगी। सतत औद्योगिक और आर्थिक विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में यह ग्रोथ समिट यह सुनिश्चित करेगा कि निवेश केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहे। निवेश को उद्योग स्थापना, उत्पादन, रोजगार सृजन और आर्थिक सशक्तिकरण में बदला जाएगा। यह समिट मध्यप्रदेश के औद्योगिक विकास और आर्थिक प्रगति की दिशा को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करेगा। प्रदेश में औद्योगिक निवेश, रोजगार और कौशल विकास एक साथ बढ़ें। समिट के माध्यम से यह संदेश दिया जाएगा कि मध्यप्रदेश में निवेशकों के लिए सुविधाजनक माहौल है, उद्योगों को गति मिलेगी और युवाओं को स्थायी रोजगार अवसर उपलब्ध होंगे। समग्र प्रभाव और राष्ट्रीय महत्व ग्रोथ समिट न केवल प्रदेश के निवेश और उद्योग जगत के लिए महत्वपूर्ण होगा, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर मध्यप्रदेश की औद्योगिक संभावनाओं और नीति स्थिरता को प्रदर्शित करेगा। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री की सहभागिता इसे राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों के लिए भी आकर्षक बनाएगी। अभ्युदय मध्यप्रदेश ग्रोथ समिट – निवेश से रोजगार प्रदेश की औद्योगिक नीति और रोजगार सृजन दृष्टि का सबसे बड़ा और प्रभावी मंच साबित होगा। यह आयोजन निवेशकों को भरोसा, उद्योगों को गति और युवाओं को रोजगार के अवसर प्रदान करके मध्यप्रदेश को आर्थिक रूप से सशक्त, रोजगारोन्मुख और निवेश-फ्रेण्डली राज्य के रूप में स्थापित करेगा।  

AI की दुनिया में भारत सबसे आगे, जानें टॉप पर पहुंचने के कारण

नई दिल्ली भारत ने 'वर्ल्ड एआई एडवांटेज' स्कोर में 53 अंकों के साथ पहला स्थान हासिल किया है। यह स्कोर दुनिया के औसत 34 अंकों से काफी ज्यादा है। यह स्कोर दिखाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से काम करने वाले लोगों को कितना समय बच रहा है। यह जानकारी ईवाई कंपनी की 2025 वर्क रीइमेजिंड सर्वे से आई है। इस सर्वे में पता चला है कि भारत में एआई का असली फायदा काम की जगह पर साफ दिख रहा है। हाल ही स्टैनफोर्ड की ओर से जारी हुए AI इंडेक्स में भारत ने तीसरी रैंक हासिल की थी। AI से काम आसान और अच्छा होता है रिपोर्ट बताती है कि भारत जेनरेटिव एआई को अपनाने में सबसे तेज देशों में शामिल है। यहां के कई कर्मचारी कहते हैं कि इस तकनीक से उनका काम ज्यादा अच्छा और जल्दी हो जाता है। करीब 62 प्रतिशत भारतीय कर्मचारी काम पर नियमित रूप से इस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। बॉस और कर्मचारी दोनों मानते हैं कि एआई से फैसले लेना आसान होता है और काम की क्वालिटी भी अच्छी है। टैलेंट हेल्थ स्कोर रहा सबसे अच्छा भारत का टैलेंट हेल्थ स्कोर 82 अंक है, जो सर्वे में शामिल सभी देशों में सबसे ज्यादा है। यह स्कोर देखता है कि कर्मचारी अपनी कंपनी के कल्चर, मिलने वाले इनाम और सीखने के मौकों के बारे में कैसा महसूस करते हैं। दुनिया का औसत स्कोर सिर्फ 65 है। भारत में ज्यादातर कर्मचारी कहते हैं कि उनके मैनेजर उन्हें भरोसा देते हैं और ज्यादा अधिकार देते हैं। इससे वे खुद को मजबूत महसूस करते हैं। तेजी से अपनाया गया है AI ईवाई इंडिया के पार्टनर अनुराग मलिक ने कहा कि भारत ने AI अपनाने में बड़ी प्रगति की है। कंपनियां अब सोच-समझकर प्रोडक्शन, कर्मचारियों की स्किल्स और उनके अनुभव को बैलेंस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि असली फायदा तब मिलता है जब कंपनियां तकनीक का इस्तेमाल कर्मचारियों की सेहत और काम करने की ताकत बढ़ाने के लिए करती हैं। कंपनियां एआई सिखाने के काम पर ध्यान दे रही हैं रिपोर्ट के अनुसार, रिवॉर्ड टैलेंट हेल्थ स्कोर में करीब 32 प्रतिशत हिस्सा देते हैं। भारत में कर्मचारी बोनस (40 प्रतिशत), फ्लेक्सिबल वर्क के समय (33 प्रतिशत), रहन-सहन के हिसाब से वेतन (32 प्रतिशत) और हेल्थ बेनेफिट्स (31 प्रतिशत) को सबसे जरूरी मानते हैं। लेकिन कंपनियां बोनस के साथ-साथ एआई स्किल्स सिखाने पर भी बराबर ध्यान दे रही हैं (34 प्रतिशत)। इससे कर्मचारी ज्यादा खुश रहते हैं।

नोट से गांधी हटाने की तैयारी? केरल सांसद ने किया बड़ा खुलासा

नई दिल्ली बीते दिनों संसद के शीत सत्र में केंद्र सरकार ने वीबी-जी राम जी बिल पास करवा लिया. इस बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी भी मिल गई है. यह बिल देश में रोजगार गारंटी स्कीम मनरेगा की जगह लेगा. सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह से नया बिल है. वहीं विपक्ष का कहना है कि सरकार ने मनरेगा स्कीम से महात्मा गांधी का नाम हटाने के लिए यह कानून बनाया है. इसको लेकर जारी विवाद के बीच केरल से माकपा के सांसद जॉन ब्रिटास ने एक बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा कि सरकार मनरेगा के बाद अब नोट से भी महात्मा गांधी की तस्वीर हटाने की योजना बना रही है. इसके लिए एक हाई लेवल मीटिंग भी हो चुकी है. माकपा के राज्यसभा सांसद ब्रिटास ने दावा किया है कि भले ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया इस बात को खारिज करे लेकिन भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार महात्मा गांधी की तस्वीर को भारतीय मुद्रा नोटों से हटाने की योजना बना रही है. ब्रिटास ने सोमवार को दिल्ली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इस मुद्दे पर हाई-लेवल बैठक पहले ही हो चुकी है, जिससे सरकार की सोच में बदलाव का संकेत मिलता है. हाई लेवल मीटिंग होने का दावा ब्रिटास ने कहा कि आधिकारिक इनकारों के बावजूद इस मुद्दे पर पहली दौर की उच्च स्तरीय चर्चा हो चुकी है. यह अब मेरा अनुमान नहीं है. गांधी को हमारी मुद्रा से हटाना राष्ट्र के प्रतीकों को फिर से लिखने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र गांधी की तस्वीर को भारत की संस्कृति को बेहतर प्रतिबिंबित करने वाले किसी अन्य प्रतीक से बदलने पर विचार कर रहा है, जिसमें भारत माता भी एक विकल्प है. हालांकि सरकार के सूत्रों ने स्पष्ट किया कि मुद्रा नोटों के डिजाइन पर निर्णय आरबीआई लेता है, जो केंद्र के साथ परामर्श में होता है. महात्मा गांधी की तस्वीर 1996 में सभी नोटों पर स्थायी रूप से आ गई थी, जब महात्मा गांधी सीरीज के नोट लॉन्च किए गए थे. 2022 में आरबीआई ने स्पष्ट रूप से खबरों को खारिज किया था, जिसमें दावा किया गया था कि गांधी की तस्वीर को रवींद्रनाथ टैगोर या एपीजे अब्दुल कलाम जैसे अन्य हस्तियों की तस्वीर से बदलने का प्रस्ताव है. क्या है विवाद यह मुद्दा फिर से सामने आया है, जब विपक्षी दलों ने सरकार द्वारा विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (VB-G RAM G) बिल, 2025 पेश करने के बाद आपत्ति जताई. इस बिल में गांधी का नाम हटा दिया गया और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए. विपक्षी दलों ने सरकार पर राम के नाम का उपयोग कर योजना को राजनीतिक रंग देने और गांधी की विरासत मिटाने का प्रयास करने का आरोप लगाया है. उन्होंने यह भी चिंता व्यक्त की कि नया कानून मनरेगा के मुकाबले काफी है. मनरेगा दुनिया का सबसे बड़ा ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम है.

1 जनवरी से रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली, सरकार की तैयारियां अपराध नियंत्रण के लिए तैयार

रायपुर  रायपुर में 1 जनवरी से पुलिसिंग का चेहरा पूरी तरह बदलने वाला है। छत्तीसगढ़ की राजधानी में नए साल की शुरुआत के साथ ही पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू कर दी जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर इसकी सभी जरूरी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस नई व्यवस्था के प्रभावी होते ही छत्तीसगढ़ देश का 18वां ऐसा राज्य बन जाएगा जहां पुलिस कमिश्नर सिस्टम काम करेगा। जानकारों का कहना है कि इस बदलाव के लिए मध्य प्रदेश के मॉडल का अध्ययन किया गया है लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार रायपुर की परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस को कुछ अतिरिक्त अधिकार देने की तैयारी में है। कानून-व्यवस्था और कर्फ्यू जैसे फैसलों पर होगा सीधा नियंत्रण पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने के बाद राजधानी की सुरक्षा और शांति व्यवस्था की जिम्मेदारी पूरी तरह कमिश्नर के कंधों पर होगी। अब तक शहर में तनाव या आपात स्थिति के दौरान कर्फ्यू लगाने जैसे बड़े फैसलों के लिए जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति लेनी पड़ती थी। नई व्यवस्था में पुलिस कमिश्नर खुद हालात का जायजा लेकर धारा 144 लागू करने या कर्फ्यू जैसे कड़े कदम उठाने का निर्णय ले सकेंगे। इससे किसी भी गंभीर स्थिति में कागजी कार्रवाई में होने वाली देरी कम होगी और पुलिस तुरंत कार्रवाई कर पाएगी। फुलप्रूफ व्यवस्था बनाने में जुटे अफसर अब एक बार फिर से रायपुर में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने की तैयारी शुरू हो गई है. इसके साथ ही गृह विभाग लगातार समीक्षा में जुटा है, ताकि नए सिस्टम में किसी तरह की कमी न रह जाए.  विभागीय सूत्र के अनुसार, मौजूदा SP–CSP पैटर्न पर जिले का स्टाफ पहले से ही भारी दबाव में है. इसलिए नई व्यवस्था में बड़े रैंक के अधिकारियों की तैनाती बेहद आवश्यक मानी जा रही है. अक्टूबर में सौंपी गई रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया था कि रायपुर में कमिश्नरेट सिस्टम प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए 500 से अधिक नए स्टाफ की नियुक्ति अनिवार्य होगी. इसके साथ ही कई विभागीय संरचनाओं में बदलाव, नई शाखाओं का गठन और ट्रैफिक व्यवस्था को पुनर्गठित करना भी जरूरी बताया गया है. अब जुलूस और धरना-प्रदर्शन की अनुमति भी मिलेगी पुलिस से प्रशासन ने तय किया है कि शहर में होने वाले राजनीतिक कार्यक्रमों, रैलियों और धरना-प्रदर्शनों की अनुमति देने का अधिकार अब कलेक्टर के बजाय पुलिस कमिश्नर के पास होगा। अक्सर देखा जाता है कि प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर पुलिस और प्रशासन के बीच तालमेल में समय लग जाता है। अब कमिश्नर ही यह तय करेंगे कि किस मार्ग पर जुलूस निकलेगा और कहां प्रदर्शन की अनुमति दी जाएगी। इससे शहर के यातायात प्रबंधन और आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखकर फैसले लेना आसान होगा। अपराधियों को जिला बदर करने और लाइसेंस जारी करने की नई शक्ति अपराध नियंत्रण को लेकर पुलिस कमिश्नर को मजिस्ट्रेट स्तर की शक्तियां प्राप्त होंगी। अब पुलिस के पास आदतन अपराधियों को जिला बदर करने और असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए सीधे अधिकार होंगे। इसके अलावा शस्त्र अधिनियम के तहत हथियारों के लाइसेंस जारी करने या किसी उल्लंघन की स्थिति में उन्हें रद्द करने का काम भी पुलिस मुख्यालय से संचालित होगा। इन कड़े अधिकारों के जरिए राजधानी में बढ़ते संगठित अपराध और अवैध गतिविधियों पर लगाम लगाने की योजना तैयार की गई है। दंगों पर नियंत्रण और बल प्रयोग के लिए मिलेगी पूरी छूट आपातकाल या दंगों जैसी संवेदनशील परिस्थितियों में बल प्रयोग से जुड़े फैसलों को लेकर पुलिस अब अधिक स्वतंत्र होगी। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज या अन्य सुरक्षात्मक कार्रवाई के लिए पुलिस को मौके पर ही फैसला लेने की छूट मिलेगी। प्रशासन का तर्क है कि रायपुर में बढ़ती आबादी और तेजी से होते शहरीकरण के कारण अपराधों का ग्राफ भी बदला है। पुलिस कमिश्नर सिस्टम आने से निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी और अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ बढ़ेगा जिससे राजधानी अधिक सुरक्षित महसूस करेगी।

इंदौर में मंदिरों में बड़े पैमाने पर सुधार, रोज दो लाख से अधिक भक्तों की सुविधा पर खर्च करोड़ों रुपए

इंदौर   सिंहस्थ 2028 के दौरान इंदौर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए शहर के प्रमुख मंदिरों में व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू हो गई हैं। इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर और रणजीत हनुमान मंदिर में बुनियादी ढांचे और दर्शन व्यवस्था में बड़े बदलाव किए जाने वाले हैं। जिला कलेक्टर शिवम वर्मा स्वयं इन विकास कार्यों की निगरानी कर रहे हैं और मंदिर समितियों के साथ मिलकर रूपरेखा तैयार कर चुके हैं। खजराना में प्रति घंटे 20,000 से अधिक भक्तों के दर्शन की व्यवस्था बनेगी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए खजराना गणेश मंदिर के गर्भगृह का चांदी का द्वार दोनों तरफ से 3-3 फीट चौड़ा किया जाएगा। इसके साथ ही सभा मंडप की ऊंचाई को 3 फीट कम किया जाएगा ताकि पीछे खड़े भक्तों को भी भगवान के स्पष्ट दर्शन हो सकें। मंदिर प्रशासन के अनुसार पीछे के मंगल हॉल को स्थायी रूप से पक्का किया जा रहा है जिससे भक्त एक साथ चार लाइनों में लग सकेंगे। इन बदलावों के बाद कितनी भी भीड़ हो, भक्तों को अधिकतम आधे घंटे में दर्शन प्राप्त हो सकेंगे। मंदिर के मुख्य पुजारी पं. अशोक भट्ट ने बताया कलेक्टर और प्रबंध समिति अध्यक्ष शिवम वर्मा, प्रशासक दिलीप यादव व पुजारी, भक्तों की उपस्थिति में चर्चा कर इन बदलावों पर निर्णय हुआ है। अधिकारी मौका मुआयना करने वाले हैं, इसके बाद काम शुरू हो जाएगा। मंदिर समिति का लक्ष्य है कि पीक ऑवर्स के दौरान भी प्रति घंटे 20,000 से अधिक भक्तों को सुचारू रूप से दर्शन कराए जा सकें। रणजीत हनुमान मंदिर बनेगा भव्य रणजीत लोक शहर का ऐतिहासिक रणजीत हनुमान मंदिर अब महाकाल लोक की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। लगभग 6 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले इस रणजीत लोक का काम इंदौर स्मार्ट सिटी को सौंपा गया है। विकास कार्यों के तहत मुख्य मंदिर परिसर को सामने की ओर 40 फीट आगे बढ़ाया जाएगा। मंदिर की छत पर विशेष कशीदाकारी (नक्काशीदार पत्थर) का काम होगा। बाउंड्रीवॉल पर 'सुंदरकांड' के प्रसंगों को चित्रों और कलाकृतियों के माध्यम से उकेरा जाएगा। मंदिर परिसर में एक अत्याधुनिक पुलिस चौकी, बेबी फीडिंग रूम (शिशु आहार कक्ष) और बुजुर्गों के लिए रैंप व विशेष जूता स्टैंड बनाए जाएंगे। पूरे परिसर में 'डायनेमिक फसाड लाइटिंग' का उपयोग होगा, जो विशेष त्योहारों पर रंग बदल सकेगी। मंदिर के पुजारी पं. दीपेश व्यास ने बताया कि रणजीत हनुमान मंदिर 135 साल से भी ज्यादा पुराना है। यहां इंदौर ही नहीं, आस-पास के जिलों से भी श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि लंका विजय के बाद भगवान राम ने स्वयं हनुमान जी को रणजीत नाम दिया था।  सिंहस्थ-2028 में हर दिन 2 लाख से अधिक श्रद्धालु इंदौर आएंगे कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान उज्जैन जाने वाले श्रद्धालु अनिवार्य रूप से इंदौर भी आते हैं, इसीलिए मंदिर प्रबंध समितियों की बैठकों में इन स्थायी व्यवस्थाओं को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन का अनुमान है कि सिंहस्थ के दौरान इंदौर में प्रतिदिन 2 से 5 लाख अतिरिक्त श्रद्धालु रुकेंगे। इंदौर में हो रहे ये सभी निर्माण कार्य केवल सिंहस्थ के लिए नहीं, बल्कि स्थायी संपत्ति के रूप में किए जा रहे हैं।