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भोपाल प्रशासन का कड़ा कदम: चाइनीज मांझा पर पूर्ण प्रतिबंध, कानून तोड़ने वालों के लिए सजा

भोपाल पतंगबाजी के नाम पर हो रही मौतों और गंभीर हादसों को देखते हुए भोपाल पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है। पुलिस आयुक्त नगरीय पुलिस भोपाल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 163 के तहत सख्त आदेश जारी करते हुए भोपाल नगर सीमा में चाइनीज मांझे के इस्तेमाल, बिक्री और भंडारण पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। मांझा पक्षियों के लिए जानलेवा पुलिस के अनुसार, चाइनीज मांझा पक्षियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। कई बार पतंग उड़ाने के दौरान पक्षी इसमें उलझकर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं और कई मामलों में उनकी मौके पर ही मौत हो जाती है। इतना ही नहीं, सड़क पर चलने वाले राहगीर और दोपहिया वाहन चालक भी चाइनीज मांझे की चपेट में आकर गंभीर रूप से घायल हो चुके हैं। मांझे की अत्यधिक मजबूती और उस पर चिपका कांच इन हादसों की बड़ी वजह है। तुरंत प्रभाव से लागू हुआ चाइनीज मांझे के इस्तेमाल पर बैन  रिपोर्ट के मुताबिक बुधवार को भोपालपुलिस कमिश्नर हरिनारायण चारी मिश्र ने चाइनीज मांझे के इस्तेमाल, बिक्री और खरीद के खिलाफ एक आदेश किया है और यह आदेश तुरंत प्रभाव से राजधानी में लागू हो गया है. प्रतिबंध का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 163 (2) के तहत jकार्रवाई होगी. राजधानी भोपाल में पूरी तरह से बैन हो गया चाइनीज मांझा गौरतलब है चाइनीज मांझे के इस्तेमाल, बिक्री और खरीद पर लागू हुआ प्रतिबंध राजधानी भोपाल की सीमा में लागू है. पुलिस कमिश्नर द्वारा जारी किए गए आदेश में राजधानी भोपाल में पतंगबाजी में चाइनीज मांझे के उपयोग, बिक्री और भण्डारण को पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया गया है और इस्तेमाल करते पाए गए आरोपी के खिलाफ कार्रवाई होगी. इसलिए लगाई गई रोक आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आने वाले त्योहारों के दौरान पतंगबाजी की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। ऐसे में आमजन की सुरक्षा, पशु-पक्षियों के जीवन और सार्वजनिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए यह कठोर कदम उठाया गया है। प्रतिबंध के तहत अब भोपाल में न तो चाइनीज मांझे का उपयोग किया जा सकेगा, न उसकी बिक्री होगी और न ही किसी तरह का भंडारण किया जा सकेगा। आदेश दो माह तक प्रभावी यह आदेश दो माह तक प्रभावी रहेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें सजा और जुर्माने दोनों का प्रावधान है। पुलिस ने साफ कर दिया है कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी। भोपाल पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे परंपरागत और सुरक्षित सूती मांझे का ही उपयोग करें। चाइनीज मांझे से दूरी बनाकर न सिर्फ कानून का पालन करें, बल्कि इंसान, पशु-पक्षियों और खुद की जान की सुरक्षा भी सुनिश्चित करें।  आम नागरिकों से सुरक्षित मांझा उपयोग करने की गई अपील उल्लेखनीय है हर साल चाइनीज़ मांझे के इस्तेमाल से लोग गंभीर हादसे के शिकार होते हैं. चाइनीज मांझे से कई लोगों को जानलेवा चोटें भी आ चुकी हैं. प्रशासन ने दुकानदारों और आम नागरिकों से अपील की है कि वो सुरक्षित मांझे का ही उपयोग करें, और चाइनीज़ मांझे की बिक्री, इस्तेमाल और भंडारण करने वालों की सूचना तुरंत पुलिस को दें. पतंगबाजी में चाइनीज मांझा इस्तेमाल करना अपराध अब भोपाल में पतंग उड़ाने के लिए चाइनीज मांझे का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है। जो भी व्यक्ति चाइनीज मांझे के साथ पकड़ा जाएगा, उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। चाइनीज मांझे का बेचना, खरीदना, भंडारण करना तीनों ही कानूनन अपराध होंगे। दुकानदारों को भी सख्त चेतावनी दी गई है। सुरक्षा के लिए लिया गया फैसला भोपाल पुलिस ने यह फैसला पक्षियों, राहगीरों और दोपहिया वाहन चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया है। हर साल चाइनीज मांझे से कई गंभीर हादसे होते हैं। पहले भी हो चुके हैं गंभीर हादसे चाइनीज मांझे से पहले कई लोगों को जानलेवा चोटें लग चुकी हैं। कुछ मामलों में लोगों की जान भी जा चुकी है, वहीं कई पक्षी भी घायल या मृत पाए गए हैं। पुलिस और प्रशासन की अपील प्रशासन ने दुकानदारों, आम नागरिकों से अपील की है कि सिर्फ सुरक्षित मांझे का ही इस्तेमाल करें। अगर कहीं चाइनीज मांझा बिकता या इस्तेमाल होता दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें।

विकसित भारत का कृषि मॉडल: गौ-आधारित प्राकृतिक खेती से स्वस्थ जीवन की ओर

विशेष लेख विकसित भारत का कृषि मॉडल: गौ-आधारित प्राकृतिक खेती और स्वस्थ जीवन राजेन्द्र शुक्ल भोपाल प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत आज विकास के उस मार्ग पर अग्रसर है, जहाँ आर्थिक प्रगति के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य और सांस्कृतिक मूल्यों को समान महत्व दिया जा रहा है। इसी समग्र दृष्टि के अंतर्गत भारतीय कृषि को भी एक नए युग की ओर ले जाया जा रहा है। कृषि सदियों से हमारी सभ्यता की रीढ़ रही है। आधुनिक युग में रासायनिक उर्वरकों और सिंथेटिक कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भरता ने खेती की लागत बढ़ाने के साथ-साथ मिट्टी की उर्वरता, उसकी जलधारण क्षमता और दीर्घकालिक स्थिरता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। परिणामस्वरूप, हमारे भोजन की गुणवत्ता और नागरिकों के स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी जी ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया है कि भारत की समस्याओं का समाधान हमारी अपनी परंपराओं और ज्ञान प्रणाली में निहित है। इसी विचार से प्राकृतिक खेती को राष्ट्रीय स्तर पर प्रोत्साहन मिल रहा है, जो भारतीय कृषि की मूल आत्मा से जुड़ी हुई है। आज आवश्यकता इस बात की है कि कृषि को केवल उत्पादन के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, स्थिरता और आत्मनिर्भरता के व्यापक संदर्भ में देखा जाए। भारत की पारंपरिक कृषि व्यवस्था सह-अस्तित्व और संतुलन पर आधारित रही है, जिसमें गौमाता की भूमिका केंद्रीय रही है। गौ केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि उत्पादकता और पोषण सुरक्षा का आधार रही हैं। हमारे पूर्वज जानते थे कि गौवंश का संरक्षण सीधे मिट्टी के स्वास्थ्य से जुड़ा है। गोबर और गोमूत्र से भूमि को पोषण मिलता है, सूक्ष्म जीव सक्रिय होते हैं और मिट्टी पुनः जीवंत होती है। स्वस्थ मिट्टी से प्राप्त अन्न अधिक पौष्टिक, सुरक्षित और मानव शरीर के अनुकूल होता है। प्राकृतिक खेती कृषि तकनीक नहीं, बल्कि जीवन जीने की पद्धति प्रधानमंत्री मोदी जी की दृष्टि में प्राकृतिक खेती केवल एक कृषि तकनीक नहीं, बल्कि जीवन जीने की भारतीय पद्धति है। वे इसे किसानों की लागत घटाने, आय बढ़ाने और उन्हें बाहरी निर्भरता से मुक्त करने का सशक्त माध्यम मानते हैं। साथ ही, यह देशवासियों को रसायन-मुक्त, विषरहित भोजन उपलब्ध कराने का मार्ग है। यही कारण है कि प्राकृतिक खेती को आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ा गया है। प्राकृतिक खेती की कार्यप्रणाली सरल, स्वदेशी और प्रभावशाली है। इसमें गौशालाओं को केवल संरक्षण केंद्र नहीं, बल्कि कृषि आदानों के उत्पादन के आर्थिक केंद्र के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। गोबर और गोमूत्र से तैयार जीवामृत, बीजामृत और पंचगव्य जैसे प्राकृतिक इनपुट मिट्टी के सूक्ष्म जीवों को सक्रिय करते हैं और भूमि की उर्वरता को दीर्घकालिक रूप से बढ़ाते हैं। पलवार (मल्चिंग) जैसी तकनीकें मिट्टी की नमी बनाए रखती हैं, जल संरक्षण में सहायक होती हैं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से फसलों की रक्षा करती हैं। इन उपायों से खेती की लागत में उल्लेखनीय कमी आती है, जिससे शून्य बजट प्राकृतिक खेती का लक्ष्य व्यवहारिक रूप से संभव होता है। सहकारिता से समृद्धि और संस्थागत शक्ति प्राकृतिक खेती को जन-आंदोलन बनाने में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह जी का मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनके विजन 'सहकारिता से समृद्धि' के तहत, प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों को संगठित किया जा रहा है एवं किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सशक्त बनाया जा रहा है ताकि छोटे किसानों को न केवल सस्ती दरों पर प्राकृतिक खाद-बीज मिल सकें, बल्कि उनके विषमुक्त उत्पादों को उचित बाजार और लाभकारी मूल्य भी प्राप्त हो सके। गौ-आधारित प्राकृतिक खेती और सहकारिता का मेल ही ग्रामीण समृद्धि का नया मार्ग है। प्राकृतिक खेती का महत्व केवल खेत तक सीमित नहीं है; इसका सीधा संबंध मानव स्वास्थ्य और जीवनशैली से है। आज जीवनशैली से जुड़ी बीमारियाँ तेजी से बढ़ रही हैं, जिनका एक बड़ा कारण रासायनिक अवशेषों से युक्त भोजन है। प्राकृतिक खेती से प्राप्त शुद्ध और विषमुक्त अन्न पाचन तंत्र को सुदृढ़ करता है, रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और दीर्घकालिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।प्रधानमंत्री मोदी जी द्वारा योग और आयुष को वैश्विक पहचान दिलाना इसी समग्र स्वास्थ्य दृष्टि का हिस्सा है। योग, प्राणायाम और संतुलित दिनचर्या तभी पूर्ण लाभ देती है जब भोजन भी शुद्ध और प्राकृतिक हो। प्राकृतिक खेती, स्वस्थ भोजन और योग—तीनों मिलकर स्वस्थ भारत की परिकल्पना को साकार करते हैं। प्राकृतिक खेती को अपनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी का व्यावहारिक मंत्र—‘एक एकड़, एक मौसम’—किसानों के लिए प्रेरणास्रोत है। छोटे स्तर पर प्रयोग कर किसान बिना जोखिम उठाए परिणाम देख सकता है और फिर धीरे-धीरे विस्तार कर सकता है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, आदानों की उपलब्धता और बाजार से जोड़ने के लिए मजबूत संस्थागत समर्थन दिया जा रहा है। किसान उत्पादक संगठन (FPOs) इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं, जिससे छोटे और सीमांत किसानों को सामूहिक शक्ति प्राप्त हो रही है। यह भी उल्लेखनीय है कि महिला किसान इस परिवर्तन में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। इस संपूर्ण प्रयास में गौ-सेवा का स्थान केंद्रीय है। गौवंश का संरक्षण और संवर्धन केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण रोजगार और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी जी की दृष्टि में गौ-आधारित प्राकृतिक खेती ग्रामीण भारत को सशक्त बनाने और सतत विकास सुनिश्चित करने का एक प्रभावी माध्यम है। मध्यप्रदेश सरकार प्रधानमंत्री मोदी की इस दूरदर्शी सोच को धरातल पर उतारने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। राज्य में प्राकृतिक खेती, गौ-संवर्धन और किसान कल्याण को समन्वित रूप से आगे बढ़ाया जा रहा है। हमारा लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि मिट्टी, किसान और उपभोक्ता—तीनों के स्वास्थ्य की रक्षा करना है। गौ-आधारित प्राकृतिक खेती, भारतीय जीवनदृष्टि का पुनर्जागरण गौ-आधारित प्राकृतिक खेती केवल कृषि सुधार की पहल नहीं, बल्कि भारतीय जीवनदृष्टि का पुनर्जागरण है। गौमाता और मिट्टी की रक्षा के अपने सांस्कृतिक दायित्व को निभाते हुए, हम आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ भोजन, संतुलित जीवनशैली और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित कर सकते हैं। यही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के विकसित, आत्मनिर्भर और स्वस्थ भारत के स्वप्न को साकार करने का सशक्त मार्ग है।  

जनजातीय अधिकार, स्वाभिमान और स्वशासन को सशक्त करता है पेसा कानून: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

जनजातीय भाई-बहनों के अधिकार, स्वाभिमान और स्वशासन को सशक्त करने वाला है पेसा कानून: मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पेसा कानून स्थापना दिवस पर विचार व्यक्त किए विशाखापट्टनम में हो रहा है राष्ट्रीय पेसा महोत्सव भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पेसा कानून के स्थापना दिवस के अवसर पर, विशाखापट्टनम में आयोजित हो रहे राष्ट्रीय पेसा महोत्सव के आयोजन के लिए राज्य सरकार की ओर से जनजातीय भाई-बहनों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन जनजातीय स्वशासन, सम्मान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सार्थक कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत की पावन भूमि पर आदिकाल से निवास करने वाले जनजातीय समुदाय हमारे राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा हैं। उनके अधिकार, स्वाभिमान और स्वशासन को सशक्त करने वाला पेसा कानून सहभागी लोकतंत्र की मजबूत आधारशिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश ने पेसा अधिनियम को संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प के साथ लागू किया है। हमने ग्राम सभाओं के गठन से जनजातीय समाज को सशक्त बनाया है। मध्यप्रदेश का जनजातीय समाज अब, अपने जल-जंगल-जमीन, सामाजिक व्यवस्थाओं और विकास की प्राथमिकताओं पर स्वयं निर्णय लेकर स्वशासी समुदाय के रूप में आगे बढ़ रहा है। यह पेसा कानून की भावना और संविधान की आत्मा का सजीव उदाहरण है। मध्यप्रदेश सरकार जनजातीय भाइयों-बहनों के हितों, संस्कृति और परम्पराओं के संरक्षण के लिए सदैव कृत संकल्पित है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विशाखापट्टनम में जारी पेसा महोत्सव के लिए उपरोक्त वीडियो संदेश में अपने विचार व्यक्त किए।  

ग्वालियर में अमित शाह का दौरा, व्यापार मेला का उद्घाटन और सुरक्षा के सख्त इंतजाम

 ग्वालियर  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 24 दिसंबर को ग्वालियर आ जाएंगे। आधिकारिक कार्यक्रम के मुताबिक रात करीब नौ बजे वह ग्वालियर विमानतल पर उतरेंगे। इसके बाद होटल ताज ऊषा किरण पैलेस के लिए रवाना होंगे। अगले दिन सुबह 11:50 बजे होटल से कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना होंगे। फिर मेला ग्राउंड से सभा संपन्न होने के बाद दोपहर करीब दो बजे विमानतल के लिए रवाना हो जाएंगे। कई बार सड़कों पर वीवीआइपी मूवमेंट रहेगा केंद्रीय गृह मंत्री के ग्वालियर आगमन से पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित अन्य केंद्रीय, राज्यमंत्री ग्वालियर पहुंच जाएंगे। बुधवार शाम करीब सात बजे से लेकर 25 दिसंबर को कार्यक्रम संपन्न होने तक कई बार शहर की सड़कों पर वीवीआइपी मूवमेंट रहेगा। पुलिस ने एडवायजरी जारी की विमानतल से लेकर मेला ग्राउंड और होटल तक कई बार, कई रास्तों पर ट्रैफिक रोका जाएगा। इसके लिए पुलिस ने एडवायजरी भी जारी कर दी है। वहीं पुलिस ने सुरक्षा प्लान भी तैयार कर लिया है। सुरक्षा में करीब 4500 जवान रहेंगे। ऊंची इमारतों पर स्नाइपर तैनात होंगे। कार्यक्रम स्थल से लेकर होटल तक कड़ी सुरक्षा रहेगी। अमित शाह करेंगे ग्वालियर व्यापार मेला का शुभारंभ शहर की शान और मध्य भारत के सबसे बड़े 'ग्वालियर व्यापार मेले' का काउंटडाउन खत्म होने को है। 25 दिसंबर से शुरू हो रहे इस ऐतिहासिक मेले का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह करेंगे। प्रशासन और मेला प्राधिकरण ने तैयारियों को अंतिम रूप दे दिया है और अब बस उस पल का इंतजार है जब ग्वालियर की यह विरासत गुलजार होगी। मेले का आगाज बेहद खास होने जा रहा इस वर्ष मेले का आगाज बेहद खास होने जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति ने व्यापारियों और सैलानियों के उत्साह को दोगुना कर दिया है। प्राधिकरण को इस संबंध में सूचना मिल चुकी है, जिसके बाद सुरक्षा और स्वागत की भव्य तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। ऑटोमोबाइल सेक्टर में शोरूम तैयार करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। आरटीओ छूट की उम्मीद में बड़ी संख्या में लोग वाहन खरीदी की योजना बना रहे हैं। इलेक्ट्रोनिक्स सेक्टर में आधुनिक गैजेट्स और घरेलू उपकरणों के साथ विभिन्न जगह से आए व्यापारी अपने स्टॉल को अंतिम रूप दे रहे हैं। झूला सेक्टर और फूड जोन रोमांच युवाओं के लिए आधुनिक हाई-टेक झूले फिटनेस टेस्ट पास कर तैयार हैं। फूड जोन में प्रसिद्ध व्यंजनों के साथ-साथ राजस्थानी, पंजाबी और दक्षिण भारतीय स्वाद का तड़का भी लगेगा। मेला केवल व्यापार का नहीं, बल्कि कला और शक्ति का भी केंद्र बनेगा। एक जनवरी से कला के विविध रंगों के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत होगी। पहलवानी का दम जनवरी का महीना दंगल के नाम रहेगा। 19 से 20 जनवरी तक जिला स्तरीय और 23 से 25 जनवरी तक राज्य स्तरीय पुरुष व महिला कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित होगी, जो खेल प्रेमियों के लिए बड़ा आकर्षण होगी। व्यापारियों में नया उत्साह दुकान आवंटन की पारदर्शी प्रक्रिया के कारण इस साल उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली से बड़ी संख्या में व्यापारी पहुंचे हैं। हस्तशिल्प और फर्नीचर सेक्टर में इस बार ऐसी कलाकृतियां देखने को मिलेंगी जो पहले कभी नहीं आईं। सभी प्रकार के भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित सभी प्रकार के भारी वाहनों का प्रवेश शहर में प्रतिबंधित रहेगा। भिंड, मालनपुर की तरफ जाने वाले सभी वाहन लक्ष्मणगढ़ पुल होते हुए निरावली, अटल गेट, जलालपुर चौराहा से सागरताल होते हुए जाएंगे। भिंड, मालनपुर से आने वाले वाहन बेहटा चौकी, बड़ागांव पुल से एमएच तिराहा, हुरावली तिराहा, सचिन तेंदुलकर मार्ग होते हुए शहर में प्रवेश करेंगे। इन रूटों पर ट्रैफिक रहेगा डायवर्ट     गोला का मंदिर चौराहा से एमआइटीएस, दूध डेयरी तिराहे से इंद्रमणि नगर मार्ग, दुल्लपुर रोड से सूर्य नमस्कार तिराहा तक मार्ग पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा।  मुरैना से आने वाले वाहन निरावली से प्रवेश करेंगे। मुरार से मुरैना की तरफ जाने वाले वाहन छह नंबर चौराहा, आर्मी एरिया, बड़ागांव हाईवे होते हुए जा सकेंगे।     मुरैना से दतिया, झांसी, शिवपुरी की तरफ जाने वाले वाहन निरावली से प्रवेश कर रायरू, अटल द्वार से मोतीझील, बहोड़ापुर, बेला की बावड़ी होते हुए जा सकेंगे।     मांढ़रे की माता से बहोड़ापुर जाने वाले वाहन इंदरगंज से डायवर्ट होकर पाटनकर बाजार, नई सड़क, हनुमान चौराहा, जीवाजीगंज, कटी घाटी होते हुए जा सकेंगे।     बहोड़ापुर से शिंदे की छावनी होते हुए मांढ़रे की माता चौराहे की तरफ जाने वाले वाहन बहोड़ापुर से कटीघाटी, जीवाजीगंज से हनुमान चौराहा, नई सड़क, पाटनकर चौराहा, इंदरगंज चौराहा, अचलेश्वर मंदिर होते हुए जा सकेंगे।     कोटेश्वर मंदिर से कंपू जाने वाले वाहन बहोड़ापुर से कटीघाटी, हनुमान चौराहा, पाटनकर चौराहा, इंदरगंज होते हुए जा सकेंगे।     कंपू से पड़ाव जाने वाले वाहन अचलेश्वर चौराहा, चेतकपुरी होते हुए जा सकेंगे। कोटेश्वर मंदिर से शिंदे की छावनी जाने वाले दोपहिया वाहनों को छोड़कर सभी वाहन प्रतिबंधित रहेंगे।     चिरवाई नाका से विक्की फैक्ट्री, बेला की बावड़ी, गोल पहाड़िया, हुरावली, मोहनपुर, बड़ागांव, लक्ष्मणगढ़ पुल, सुसैरा कोठी से शहर में आने वाले वाहन पूर्णत: प्रतिबंधित रहेंगे। अभ्युदय एमपी ग्रोथ समिट का शुभारंभ करेंगे शाह अमित शाह अटलजी के जन्मदिन पर गुरुवार को मेला मैदान पर राज्यस्तरीय आयोजन अभ्युदय एमपी ग्रोथ समिट में दो लाख करोड़ के उद्योगों का शुभारंभ-भूमि पूजन करेंगे। इस दौरान उद्योगपतियों से मुलाकात कराने की व्यवस्था भी की गई है। समिट का आयोजन सुबह 11 बजे से होगा जिसमें दो घंटे शाह मौजूद रहेंगे। उसके बाद यहां से रीवा जाएंगे। मेला मैदान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव, केंद्रीय मंत्री सिंधिया सहित प्रदेश के मंत्रीगण-विधायक भी मंच पर रहेंगे। एमपी ग्रोथ समिट में प्रदेश में उद्योग-निवेश के लिए हुए प्रयासों को एक ही मंच से लोकार्पित व शिलान्यास किया जाएगा। इसमें 10 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव,आशय पत्र व आवंटन पत्र भी दिए जाएंगे। एक लाख लोगों की मौजूदगी का दावा है, जिसमें ग्वालियर-चंबल अंचल के सभी जिलों से लोगों को लाया जा रहा है।  

एपस्टीन फाइल्स में राष्ट्रपति ट्रंप पर गंभीर आरोप, अमेरिकी DOJ ने दावों को बताया निराधार

वाशिंगटन अमेरिका के न्याय विभाग द्वारा जारी जेफरी एपस्टीन जांच से जुड़े नए दस्तावेजों में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर एक गंभीर लेकिन अप्रमाणित आरोप सामने आया है. इन दस्तावेजों में दावा किया गया है कि दशकों पहले ट्रंप पर एक महिला ने बलात्कार का आरोप लगाया था. हालांकि न्याय विभाग ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इन्हें "असत्य और सनसनीखेज" करार दिया है.  सार्वजनिक किए गए ये रिकॉर्ड एप्सटीन फाइल्स ट्रांसपेरेंसी एक्ट के तहत जारी किए गए हैं, जिसके तहत एपस्टीन से जुड़े संघीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करना अनिवार्य है. न्याय विभाग ने साफ किया कि इन फाइल्स में दर्ज आरोपों की कोई पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें तथ्यात्मक सत्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. न्याय विभाग ने असामान्य रूप से सार्वजनिक बयान जारी करते हुए कहा कि इनमें से कुछ आरोप 2020 के राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले एफबीआई को भेजे गए थे और उनमें कोई विश्वसनीय आधार नहीं था. विभाग ने कहा, "स्पष्ट कर देना जरूरी है कि ये दावे झूठे और निराधार हैं. अगर इनमें जरा भी सच्चाई होती, तो इन्हें पहले ही राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ इस्तेमाल किया जा चुका होता." ड्राइवर ने सुनी थी लड़की के "शोषण" की बात जारी दस्तावेजों में जांच एजेंसियों को भेजी गई कच्ची जानकारियां शामिल हैं. इनमें एक कथित पीड़िता का आरोप, जिसमें उसने ट्रंप और एपस्टीन दोनों पर बलात्कार का दावा किया, और एक लिमोजिन ड्राइवर का बयान भी शामिल है, जिसने कथित तौर पर ट्रंप को एपस्टीन द्वारा एक लड़की के "शोषण" की बात करते सुना था. हालांकि दस्तावेजों से यह स्पष्ट नहीं होता कि एफबीआई ने इन जानकारियों पर आगे कोई कार्रवाई की या नहीं. बताया गया है कि आरोप लगाने वाली महिला की बाद में सिर में गोली लगने से मौत हो गई थी. न्याय विभाग ने जोर देकर कहा कि फाइल्स में कहीं भी यह संकेत नहीं है कि ट्रंप को किसी आपराधिक मामले में संदिग्ध माना गया हो या उनके खिलाफ औपचारिक जांच की गई हो. यह जरूर माना गया कि ट्रंप और एपस्टीन के बीच 2000 के दशक के मध्य तक सामाजिक संपर्क रहे थे, लेकिन किसी अपराध से उनका सीधा संबंध नहीं बताया गया. अब तक 30 हजार दस्तावेज जारी किए गए इन दस्तावेज़ों में शामिल एक 2020 के ईमेल में यह जिक्र है कि ट्रंप ने एपस्टीन के निजी विमान में पहले बताई गई संख्या से अधिक बार यात्रा की थी. हालांकि न्याय विभाग ने दोहराया कि केवल आरोप का दस्तावेजों में होना, उसके सच होने का प्रमाण नहीं है. करीब 30,000 दस्तावेज इस चरण में जारी किए गए हैं, जिनमें भारी कटौती की गई है ताकि पीड़ितों की पहचान सुरक्षित रखी जा सके. आने वाले हफ्तों में और दस्तावेज जारी होने की संभावना है. न्याय विभाग का कहना है कि पारदर्शिता का मतलब यह नहीं कि हर आरोप को सत्य मान लिया जाए.

योगी सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को केवल श्रम शक्ति का नहीं बल्कि उद्यम शक्ति का केंद्र बनाना है

निधि योजना : उत्तर प्रदेश में महिला उद्यमिता को मिला रहा मजबूत आधार योगी सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को केवल श्रम शक्ति का नहीं बल्कि उद्यम शक्ति का केंद्र बनाना है टियर 2 और टियर 3 शहरों में उद्यमिता का हो रहा है विस्तार निधि योजना के अंतर्गत देश में कुल 714, उत्तर प्रदेश में 25 महिला स्टार्टअप्स को सीधी सहायता लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने साढ़े आठ वर्षों में प्रदेश के विकास को नई दिशा और गति दी है। कानून-व्यवस्था के साथ-साथ सरकार का फोकस नवाचार उद्यमिता और आत्मनिर्भरता पर है। इसी सोच के अनुरूप केंद्र सरकार की निधि योजना का प्रभाव उत्तर प्रदेश में स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी आधारित स्टार्टअप्स खासकर महिला नेतृत्व वाले उद्यमों के लिए प्रदेश में एक सकारात्मक और भरोसेमंद वातावरण तैयार हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार का लक्ष्य उत्तर प्रदेश को केवल श्रम शक्ति का नहीं बल्कि उद्यम शक्ति का केंद्र बनाना है। निधि कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2016 में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा की गई थी। इस योजना का उद्देश्य प्रारंभिक चरण के विज्ञान एवं तकनीक आधारित स्टार्टअप्स को वित्तीय और संस्थागत सहायता देना है। योजना के अंतर्गत देश में कुल 714 महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स सहायता दी जा चुकी है। वर्ष 2017-18 में 23  महिला स्टार्टअप्स को सहायता मिली, वर्ष 2023-24 में 152,  2024-25 में 140 और वर्ष 2025-26 में 84  महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को समर्थन दिया गया।  महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स में उत्तर प्रदेश की मजबूत भागीदारी निधि कार्यक्रम के अंतर्गत देश भर में महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को शुरुआती स्तर पर सहायता दी जा रही है। इस राष्ट्रीय पहल में उत्तर प्रदेश ने भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। प्रदेश में 25  महिला नेतृत्व वाले स्टार्टअप्स को निधि योजना के तहत वित्तीय और तकनीकी सहयोग प्राप्त हुआ है। यह इस बात का संकेत है कि प्रदेश की महिलाएं अब केवल रोजगार की तलाश में नहीं हैं बल्कि रोजगार देने वाली उद्यमी बनने की दिशा में आगे कदम बढ़ा रही है। योगी सरकार की स्टार्टअप नीति और महिला सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं ने इस बदलाव को गति दी है। टीबीआई और आईटीबीआई से प्रदेश में नवाचार को मिला संबल उत्तर प्रदेश में निधि प्रौद्योगिकी व्यापार इनक्यूबेटर (टीबीआई) और समावेशी प्रौद्योगिकी व्यापार इनक्यूबेटर (आईटीबीआई) की स्थापना योगी सरकार के विकास मॉडल की बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। प्रदेश में 7 टीबीआई और आईटीबीआई स्थापित किए गए हैं, जो महिला स्टार्टअप्स के लिए मार्गदर्शन का केंद्र बन रहे हैं। इन इनक्यूबेटरों के माध्यम से महिलाओं को तकनीकी सलाह, व्यवसायिक रणनीति, बौद्धिक संपदा अधिकार, कानूनी और नियामक सहयोग प्रदान किया जा रहा है। इसका लाभ यह हुआ है कि छोटे शहरों और कस्बों की महिलाएं भी अब नवाचार आधारित उद्यम शुरू करने का साहस कर पा रही हैं, यह योगी आदित्यनाथ सरकार के विज़न से ही संभव हो पा रहा है।  टियर वन और टियर टू शहरों में हो रहा है उद्यमिता का विस्तार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि विकास केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे। इसी सोच के अंतर्गत टियर वन और टियर टू स्तर के शहरों में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के कई ऐसे जिले जो पहले उद्यमिता के मानचित्र पर नहीं थे, अब धीरे-धीरे स्टार्टअप गतिविधियों के केंद्र बन रहे हैं। निधि योजना से जुड़े इनक्यूबेटर इन क्षेत्रों में स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध करा रहे हैं। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है।

शादी के 21 दिन बाद सीएम मोहन यादव के बेटे-बहू नर्मदा परिक्रमा पर, यात्रा ओंकारेश्वर से शुरू

 खंडवा  मध्य प्रदेश के खंडवा के ओंकारेश्वर से सीएम डॉ. मोहन यादव के बेटे और बहू ने नर्मदा परिक्रमा शुरू की हैं। तीर्थनगरी ओंकारेश्वर के ब्रह्मपुरी घाट पर नवविवाहित डॉ. अभिमन्यु यादव और उनकी पत्नी डॉ. इशिता ने मां नर्मदा की परिक्रमा का संकल्प लिया। परिक्रमा आरंभ करने से पूर्व दोनों ने संत विवेक गुरु से आशीर्वाद प्राप्त किया। परिजन के साथ भगवान के दर्शन कर विधिवत पूजा-अर्चना की।  उज्जैन में हुआ था विवाह पिछले महीने 30 नवंबर को उज्जैन में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में डॉ. अभिमन्यु का विवाह खरगोन जिले की डॉ. इशिता से हुआ था। नवविवाहित जोड़ा अब सीधे आध्यात्मिक यात्रा पर निकल पड़ा है। पूरा परिवार साथ नर्मदा परिक्रमा में अभिमन्यु-इशिता के साथ उनकी बड़ी बहन डॉ. आकांक्षा यादव, जीजा जी और बड़े भाई वैभव यादव अपनी पत्नी के साथ शामिल हैं। पूरा परिवार मिलकर मां नर्मदा की परिक्रमा कर रहा है। 15 दिन में पूरी होगी यात्रा – जानिए पूरा रूट ओंकारेश्वर से शुरू हुई यह नर्मदा परिक्रमा महेश्वर, बड़वानी, राजपीपला-गरुड़ेश्वर (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी क्षेत्र), भरूच होते हुए नर्मदा सागर संगम यानी खंभात की खाड़ी तक जाएगी। करीब 15 दिन में यात्रा पूरी होने की उम्मीद है। हाल ही में आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में प्रदेश के मुखिया डॉ मोहन यादव के पुत्र अभिमन्यु यादव का विवाह संपन्न हुआ था। विवाह के बाद धार्मिक परंपराओं के निर्वहन के क्रम में अभिमन्यु यादव और डॉ. इशिता यादव ने मां नर्मदा की परिक्रमा प्रारंभ करने का संकल्प लिया। जिसे पूरा करने के लिए नवदंपति रवाना हुए। यह यात्रा 15 दिन में पूरी होगी। इस दौरान मुख्यमंत्री के बड़े बेटे-बहू और बेटी-दामाद भी साथ में मौजूद हैं। विवाह की कुछ खास बातें पिछले महीने 30 नवंबर को उज्जैन के सांवराखेड़ी में डॉ मोहन यादव के बेटे अभिमन्यु और इशिता की शादी की रस्में सामूहिक सम्मेलन में संपन्न हुईं थीं। वरमाला के दौरान बाबा रामदेव ने मंत्र पढ़कर वरमाला की रस्म कराई थी। सामूहिक विवाह समारोह में अभिमन्यु इशिता के साथ 22 जोड़ों ने फेरे लिए थे सामूहिक सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया राज्यपाल मंगुभाई पटेलए मंत्री तुलसी सिलावट कथावाचक पंडित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री और अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी सहित कई हस्तियां पहुंची थीं। 

सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय की 100 मीटर अरावली परिभाषा ठुकराई, बताया कि इससे अरावली की पहचान खतरे में

 नई दिल्ली अरावली पर्वतमाला की परिभाषा को लेकर केंद्र सरकार, सुप्रीम कोर्ट और उसके द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति के बीच गंभीर मतभेद सामने आए हैं। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित 100 मीटर ऊंचाई आधारित अरावली परिभाषा को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया, जबकि अदालत की अपनी ही संस्था सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC)ने इस परिभाषा का समर्थन नहीं किया था। 13 अक्टूबर को मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अरावली की नई परिभाषा पेश की थी। इसके ठीक अगले दिन, 14 अक्टूबर को सीईसी ने पीठ की सहायता कर रहे एमिकस क्यूरी के परमेश्वर को पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि इस परिभाषा की न तो जांच की गई है और न ही इसे सीईसी की मंजूरी प्राप्त है। इसके बावजूद, 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने मंत्रालय की 100 मीटर परिभाषा को स्वीकार कर लिया। CEC को सुप्रीम कोर्ट ने 2002 में पर्यावरण और वन संबंधी आदेशों के अनुपालन की निगरानी के लिए गठित किया था। इसने साफ तौर पर कहा कि फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया (FSI) द्वारा तैयार की गई परिभाषा को ही अपनाया जाना चाहिए, ताकि अरावली की पारिस्थितिकी और भौगोलिक अखंडता की रक्षा हो सके। FSI ने वर्ष 2010 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर अरावली का विस्तृत सर्वे किया था। इसमें राजस्थान के 15 जिलों में 40,481 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अरावली के रूप में चिह्नित किया गया था। इस परिभाषा में कम से कम 3 डिग्री ढलान और न्यूनतम ऊंचाई वाले क्षेत्रों को शामिल किया गया था, जिससे छोटी और निचली पहाड़ियां भी संरक्षित रहतीं। 100 मीटर परिभाषा पर गंभीर आपत्तियां एमिकस क्यूरी के परमेश्वर ने अदालत में प्रस्तुत एक पावरपॉइंट प्रेज़ेंटेशन में मंत्रालय की 100 मीटर परिभाषा को अस्पष्ट और खतरनाक बताया। उन्होंने कहा कि इस परिभाषा से अरावली की भौगोलिक पहचान टूट जाएगी। कई छोटी पहाड़ियां अरावली के दायरे से बाहर हो जाएंगी। इन क्षेत्रों को खनन के लिए खोला जा सकेगा। इसका सीधा असर पारिस्थितिकी पर पड़ेगा और थार मरुस्थल का विस्तार पूर्व की ओर हो सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 100 मीटर की सीमा लागू होने पर अरावली की निरंतरता समाप्त हो जाएगी और इसे संरक्षित भौगोलिक इकाई के रूप में नहीं बचाया जा सकेगा। CEC ने मंत्रालय के दावे को बताया भ्रामक CEC अध्यक्ष और पूर्व महानिदेशक (वन) सिद्धांत दास ने 14 अक्टूबर के पत्र में कहा कि मंत्रालय द्वारा दायर हलफनामे में जिन विचारों को CEC का बताया गया है वे वास्तव में CEC सदस्य डॉ. जे.आर. भट्ट के व्यक्तिगत विचार हैं, न कि समिति के। पत्र में यह भी कहा गया कि समिति की बैठक (3 अक्टूबर) के मसौदा कार्यवृत्त CEC को कभी सौंपे ही नहीं गए। मंत्रालय की रिपोर्ट पर CEC ने कोई औपचारिक समीक्षा नहीं की। मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट हस्ताक्षरित भी नहीं थी। CEC ने दोहराया कि उसकी स्पष्ट राय है कि FSI की परिभाषा को ही अपनाया जाना चाहिए। FSI का आंतरिक आकलन और विरोधाभास FSI ने एक ट्वीट में मीडिया रिपोर्ट्स का खंडन किया कि 90% अरावली पहाड़ियां असुरक्षित हो जाएंगी, लेकिन एक आंतरिक आकलन के अनुसार, 20 मीटर या उससे ऊंची 12,081 अरावली पहाड़ियों में से 91.3% और कुल 1,18,575 पहाड़ियों में से 99% से अधिक 100 मीटर की परिभाषा में शामिल ही नहीं होंगी। 20 मीटर ऊंचाई की पहाड़ियां भी प्राकृतिक विंड बैरियर के रूप में अहम भूमिका निभाती हैं। मंत्री का दावा और सवाल पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि अरावली क्षेत्र के केवल 0.19% हिस्से (278 वर्ग किमी) में ही खनन की अनुमति है। लेकिन मंत्रालय के अपने आंकड़े बताते हैं कि यह क्षेत्र पहले से ही राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में खनन के अंतर्गत है। अब तक मंत्रालय यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि 100 मीटर परिभाषा लागू होने के बाद निचले अरावली क्षेत्रों में भविष्य में खनन और विकास को कैसे रोका जाएगा। इसके अलावा, जमीन पर सीमांकन अभी हुआ भी नहीं है, ऐसे में यह भी सवाल बना हुआ है कि मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट को कैसे आश्वस्त किया कि 100 मीटर परिभाषा से अधिक क्षेत्र अरावली में आएगा, जबकि FSI की 3 डिग्री ढलान वाली परिभाषा पहले से ही व्यापक थी।

विजय हजारे ट्रॉफी: ईशान किशन की 33-बॉल की सेंचुरी, भारतीय लिस्ट-ए क्रिकेट में रिकॉर्ड दर्ज

 नई दिल्ली ईशान किशन की कहानी अब सिर्फ एक कमबैक नहीं रही, यह एक ऐलान बन चुकी है और वह भी ऐसा, जो स्कोरबोर्ड पर नहीं, रिकॉर्ड बुक में दर्ज होता है. विजय हजारे ट्रॉफी में उतरते ही ईशान किशन ने धमाका कर दिया. मजबूत प्रतिद्वंद्वी कर्नाटक के खिलाफ अहमदाबाद में उन्होंने जमकर रन बरसाए. झारखंड की पारी 50 ओवरों में 412 रन तक कैसे पहुंची, इसका जवाब सिर्फ आंकड़ों में नहीं, ईशान किशन की 39 गेंदों में 125 रनों की तूफानी पारी में छुपा है. कप्तान और विकेटकीपर के रूप में नंबर-6 पर उतरकर ईशान ने जो किया, वह लिस्ट-ए क्रिकेट की परिभाषा ही बदल देता है. महज 33 गेंदों में शतक, 7 चौके, 14 छक्के और 320 से ऊपर का स्ट्राइक रेट…  यह भारत की दूसरी सबसे तेज लिस्ट-ए सेंचुरी है. उनसे तेज सिर्फ बिहार के सकिबुल गनी रहे, जिन्होंने उनकी पारी से कुछ ही मिनट पहले 32 गेंदों में शतक ठोक दिया था. … लेकिन ईशान किशन की इस पारी का असली वजन सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, संदेश था. हाशिए से हेडलाइन तक दिसंबर 2023… निजी कारण, ब्रेक, फिर अचानक सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर. कभी टीम इंडिया के ‘फर्स्ट चॉइस’ विकेटकीपर-बल्लेबाज रहे ईशान किशन कुछ ही हफ्तों में सिस्टम के बाहर खड़े नजर आने लगे. वही ईशान, जिसने बांग्लादेश के खिलाफ वनडे इतिहास का सबसे तेज दोहरा शतक जड़ा था. वही, जिसने ऋषभ पंत की गैरमौजूदगी में भारत की सफेद गेंद की टीम को संभाला था. क्रिकेट में वापसी आसान नहीं होती- खासतौर पर तब, जब सवाल आपकी काबिलियत पर नहीं, आपकी ‘कमिटमेंट’ पर उठने लगें. गुस्सा, भूख… और खोल दिया बल्ले का मुंह  सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में ईशान किशन ने सफाई देने की बजाय स्कोरबोर्ड को बोलने दिया. 197.32 का स्ट्राइक रेट, टूर्नामेंट में सबसे ज्यादा रन, सबसे ज्यादा छक्के और झारखंड को पहला खिताब- यह सिर्फ फॉर्म नहीं थी, यह भीतर जमा गुस्से और निराशा का जवाब था. कप्तान के तौर पर उनके फैसले उतने ही आक्रामक थे, जितनी उनकी बल्लेबाजी. विजय हजारे में विस्फोट- किशन इफेक्ट अब विजय हजारे ट्रॉफी… और पहले ही मैच में ईशान किशन ने बता दिया कि टी20 वर्ल्ड कप स्क्वॉड में उनकी एंट्री कोई एहसान नहीं, जरूरत है. नंबर-6 पर उतरकर 39 गेंदों में 125 रन ठोकना बताता है कि यह बल्लेबाज सिर्फ ओपनर नहीं, मैच-फिनिशर और गेम-चेंजर भी है. झारखंड का स्कोर 412-9 तक पहुंचना संयोग नहीं, किशन इफेक्ट है. किशन ने अपनी इस रोमांचक पारी के दौरान 50 रन (5 x 4, 4 x 6) सिर्फ 20 गेंदों में पूरे कर लिए थे.  वर्ल्ड कप से पहले साफ संदेश शनिवार को चुनी गई 15 सदस्यीय टी20 वर्ल्ड कप स्क्वॉड में ईशान किशन का नाम अब सिर्फ चयन नहीं, न्याय लगता है. यह कहानी सिखाती है कि क्रिकेट में रास्ते भले बदलें, लेकिन क्लास, भूख और आत्मविश्वास वापस लौटना जानते हैं. ईशान किशन ने बल्ले से साफ कह दिया है-  'मैं लौटा नहीं हूं, मैं रुका ही नहीं था.'

भोपाल में रोड विस्तार के लिए 7 हजार से अधिक पेड़ों की कटाई, NHAI के दावे पर उठे सवाल

भोपाल देश में विकास बनाम पर्यावरण की बहस अभी थमी भी नहीं थी कि अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक और चिंता बढ़ाने वाली तस्वीर सामने आ रही है. झीलों और हरियाली के लिए पहचाने जाने वाले भोपाल में अब विकास के नाम पर हज़ारों पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलने वाली है. मामला शहर के बीचोबीच स्थित अयोध्या बायपास का है, जहां सड़क चौड़ीकरण की आड़ में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई शुरू हो चुकी है. जिस विकास की बात की जा रही है, उसकी कीमत भोपाल की हरियाली को चुकानी पड़ रही है. अयोध्या बायपास, जो भोपाल के सबसे व्यस्त और अहम मार्गों में से एक है, अब फोर लेन से सिक्स लेन बनने जा रहा है. इसके साथ ही दोनों ओर दो-दो लेन की सर्विस रोड भी तैयार की जाएगीए जिसके बाद यह सड़क 10 लेन की हो जाएगी. इस परियोजना के तहत हजारों पेड़ों की कटाई होनी है. जैसे ही यह जानकारी सामने आई, पर्यावरणविदों, प्रकृति प्रेमियों और सामाजिक संगठनों में नाराजगी फैल गई. सवाल उठने लगे कि क्या ट्रैफिक समाधान का यही एकमात्र रास्ता है, और क्या हर बार विकास की कीमत पेड़ों को चुकानी पड़ेगी? इस पूरे प्रोजेक्ट की ज़िम्मेदारी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी NHAI के पास है. एनएचएआई के प्रोजेक्ट मैनेजर देवांश नुवल का तर्क है कि आने वाले वर्षों में ट्रैफिक का दबाव लगातार बढ़ेगा और सड़क चौड़ीकरण से जाम की समस्या से राहत मिलेगी.  मामला NGT तक पहुंचा और NGT के निर्देश पर एक विशेष समिति का गठन किया गया, जिसने पूरे प्रोजेक्ट और पेड़ों की स्थिति की जांच की. जांच के बाद समिति ने 10 हजार की बजाय 7,871 पेड़ों की कटाई को सशर्त मंजूरी दी. इन शर्तों के मुताबिक, काटे जाने वाले हर एक पेड़ के बदले 10 नए पौधे लगाए जाएंगे. यानी लगभग 80 हज़ार पौधरोपण का दावा किया गया है. NHAI का कहना है कि पौधरोपण सिर्फ कागज़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उसकी निगरानी भी की जाएगी और पौधों के जीवित रहने की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी लेकिन पर्यावरण विशेषज्ञ इन दावों पर सवाल उठा रहे हैं. उनका कहना है कि वर्षों पुराने, बड़े और छायादार पेड़ों की भरपाई केवल पौधे लगाकर नहीं की जा सकती. एक पेड़ बनने में दशकों लगते हैं और उसका पर्यावरणीय योगदान किसी नए पौधे से तुरंत पूरा नहीं हो सकता. भोपाल के रहने वाने नितिन सक्सेना ने इन पेड़ों की कटाई को लेकर एनजीटी में याचिका भी लगाई लेकिन पेड़ों की कटाई को रोक नहीं पाए विकास की रफ्तार तेज है, लेकिन उसकी कीमत भी कम नहीं. आज सड़कें चौड़ी होंगी, ट्रैफिक सुगम होगा, लेकिन क्या कल शहर सांस ले पाएगा? कागजों पर दस गुना पौधरोपण के वादे हैं, मगर जमीन पर गिरते पुराने पेड़ उस भरोसे को सवालों के घेरे में खड़ा कर रहे हैं. भोपाल, जो कभी हरियाली की पहचान था, अब एक अहम मोड़ पर खड़ा है जहां फैसला सिर्फ सड़क का नहीं, आने वाली पीढ़ियों की सांसों का भी है