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इंदौर के एम.वाय. हॉस्पिटल का 773 करोड़ रुपए की लागत से होगा नवनिर्माण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने गुना जिले के म्याना रेलवे स्टेशन को ऊर्जा संरक्षण के लिए किया सम्मानित इंदौर के एम.वाय. हॉस्पिटल का 773 करोड़ रुपए की लागत से होगा नवनिर्माण : मुख्यमंत्री डॉ. यादव राजधानी भोपाल के प्रमुख मार्गों पर बनने वाले द्वार, विरासत से विकास के संकल्प की करेंगे सिद्धी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंत्रि परिषद की बैठक से पहले मंत्रीगण को किया संबोधित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण दिवस के अवसर पर गुना जिले के म्याना रेलवे स्टेशन को सम्मानित किया है। म्याना स्टेशन को 9687 यूनिट विद्युत ऊर्जा की बचत के लिए राष्ट्रीय ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि म्याना रेलवे स्टेशन का बेस्ट परफॉर्मिंग यूनिट के रूप में सम्मानित होना, प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने बैतूल जिले के शिल्पकार श्री बलदेव वाघमारे को राष्ट्रीय शिल्प पुरस्कार से सम्मानित किया है। उन्होंने बताया कि भरेवा धातु शिल्प को जी.आई. टैग प्राप्त हुआ है। गोंड जनजाति की एक उपजाति धातु ढलाई का यह कौशल, पीढ़ी दर पीढ़ी हस्तांतरित करती है। यह शिल्पकार प्रतीकात्मक देवी-देवताओं की मूर्ति, परंपरागत आभूषण, गोंड अनुष्ठान में प्रयुक्त धार्मिक सामान के साथ ही मोर लैंप, बैलगाड़ी, घंटियां, पायल, दर्पण के फ्रेम जैसी सजावटी वस्तुएं का निर्माण करते हैं। इस सामग्री की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहुत लोकप्रियता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने श्री वाघमारे को बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि 773 करोड रुपए लागत से इंदौर में एम.वाय. हॉस्पिटल का नवनिर्माण किया जाएगा। नए 1450 बिस्तरीय एम.वाय हॉस्पिटल के निर्माण से पुरानी बिल्डिंग की कठिनाईयों से मुक्ति मिलेगी। अस्पताल के साथ ही नर्सिंग हॉस्टल, ऑडिटोरियम आदि का भी निर्माण होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया की विमेन टी-20 क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 (ब्लाइंड) का फाइनल मैच जीतने वाली भारतीय टीम में शामिल मध्यप्रदेश की तीन दृष्टि बाधित महिला क्रिकेट खिलाड़ियों सुश्री सुनीता सराठे, सुश्री सुषमा पटेल और सुश्री दुर्गा येवले को 25-25 लाख रुपए की राशि पुरस्कार स्वरूप प्रदान की जा रही है। प्रत्येक खिलाड़ी के लिए 10-10 लाख रुपए नगद और 15-15 लाख रुपए की एफडी की व्यवस्था है। टीम के तीनों कोच सर्वश्री सोनू गोलकर, ओमप्रकाश पाल और दीपक पहाड़े को एक-एक लाख रुपये प्रोत्साहन स्वरूप प्रदान किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि नई दिल्ली में 12, 13 ,14 दिसंबर को मध्यप्रदेश उत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें हस्तशिल्प, एक जिला-एक उत्पाद, माटी कला परिषद, पर्यटन आदि के स्टाल लगाए गए और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विधायक श्री मधु वर्मा ने अपने पुत्र का विवाह, आगर मालवा में हुए सामूहिक विवाह समारोह में कर, अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विधायक श्री वर्मा द्वारा सामाजिक समरसता और शादियों में अपव्यय को रोकने के लिए की गई इस पहल की सराहना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राजधानी भोपाल को प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक समृद्धता से जोड़ने के संकल्प के अंतर्गत राजधानी भोपाल के प्रमुख मार्गों पर महापुरुषों को समर्पित द्वार बनाने का निर्णय लिया गया था। गत वर्ष भोपाल-नर्मदापुरम मार्ग पर राजा भोज द्वार के निर्माण की प्रक्रिया आरंभ हुई, इसी क्रम में भोपाल-इंदौर मार्ग पर हाल ही में विक्रमादित्य द्वार निर्माण के लिए भूमि-पूजन किया गया। वास्तु शिल्प के अद्भुत उदाहरण इन द्वारों से राजधानी भोपाल का गौरव बढ़ेगा। यह द्वार, विरासत से विकास के संकल्प की सिद्धी की दिशा में प्रभावी कदम सिद्ध होंगे।  

मध्य प्रदेश में MSME से लेकर स्टार्टअप्स तक, निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में बनी सुविचारित नीतियों से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। रोजगार सृजन को भी गति मिली है। वर्तमान में 4.26 लाख से अधिक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स सक्रिय हैं। इससे औद्योगिक आत्मनिर्भरता के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल रही है। आत्मनिर्भरता को मिला आधार राज्य सरकार द्वारा किए गए निवेश प्रोत्साहन उपायों का सीधा असर नई इकाइयों की स्थापना के रूप में सामने आया है। वर्ष 2022-23 में 67,332 मैन्युफैक्चरिंग MSMEs के पंजीकरण से बढ़कर 2024-25 में यह संख्या 1,13,696 तक पहुँच गई  है। नीतिगत सुधारों का सीधा असर उद्योगों के सामने आने वाली प्रक्रियागत बाधाओं को दूर करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके साथ ही ‘जनविश्वास (संशोधन) विधेयक 2024’ के माध्यम से उद्योगों पर लगाए गए दंडात्मक प्रावधानों को युक्तिसंगत बनाया गया है। इंडस्ट्रियल लैंड अलॉटमेंट सिस्टम और सिंगल विंडो पोर्टल के माध्यम से भूमि आवंटन और स्वीकृति प्रक्रियाएँ पारदर्शी और समयबद्ध हुई हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है। एमएसएमई सेक्टर से एक करोड़ से अधिक को रोज़गार प्रदेश की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई सेक्टर एक मजबूत आधार के रूप में उभरा है। वर्तमान में 20.43 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयाँ हैं, जो मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस और ट्रेड जैसे विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय हैं। यह सेक्टर राज्य के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 30 प्रतिशत का योगदान दे रहा है और एक करोड़ से अधिक लोगों को रोज़गार उपलब्ध करा रहा है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार से न केवल स्थानीय युवाओं को रोजगार मिला है, बल्कि छोटे व्यापार, सेवाओं और सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिला है। इससे प्रदेश के औद्योगिक विकास में क्षेत्रीय संतुलन मजबूत हुआ है। लॉजिस्टिक्स से उद्योगों को मिला रास्ता औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ लॉजिस्टिक्स और कनेक्टिविटी को मजबूत करना आवश्यक था। इसी दृष्टि से राज्य में मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क, इनलैंड कंटेनर डिपो और औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर सड़क और रेल नेटवर्क से जोड़ने पर लगातार काम किया जा रहा है। पीएम गति शक्ति नेशनल मास्टर प्लान से जुड़े प्रोजेक्ट्स ने प्रदेश के उद्योगों को देश के प्रमुख बाजारों और निर्यात केंद्रों से जोड़ने में सहायता की है। इससे माल परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी आई है और उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ी है।  स्टार्टअप से भविष्य की अर्थव्यवस्था की तैयारी औद्योगिक विकास को दीर्घकालिक बनाने के लिए नवाचार और कौशल विकास को समान रूप से महत्व दिया गया है। राज्य में 6000 से अधिक स्टार्टअप्स सक्रिय हैं और 100 से अधिक इनक्यूबेशन सेंटर्स नवाचार को सहयोग दे रहे हैं। महिला उद्यमियों की बढ़ती भागीदारी ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बनाया है। स्टार्टअप पॉलिसी 2025 के तहत सीड फंडिंग, कैपिटल फंड और एन्ट्रेप्रेन्योर इन रेजिडेंस प्रोग्राम जैसे प्रयास युवाओं को रोजगार सृजन से जोड़ने का काम कर रहे हैं। आने वाले समय में प्रत्येक जिले में प्लग एण्ड प्ले मॉडल पर आधारित इनक्यूबेशन सेंटर्स स्थापित किए जाने से स्थानीय नवाचार और उद्यमिता को नई दिशा मिलेगी।

2500 करोड़ में तैयार होगा मिनी ब्रह्मोस, DRDO के पिनाका Mk3 से दो मोर्चों पर हमला संभव

बेंगलुरु  भारतीय सेना की आर्टिलरी ताकत में एक नया अध्याय जुड़ने वाला है. डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के नए वर्जन पर काम शुरू दिया है. रक्षा विभाग ने 120 किमी रेंज वाली पिनाका रॉकेट्स को भारतीय सेना में शामिल करने का प्रस्ताव पेश किया है. इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 2500 करोड़ रुपये है. मौजूदा पिनाका की रेंज 75-90 किमी तक है, लेकिन यह नया वर्जन पिनाका Mk3 120 किलोमीटर तक मार करेगा, जो पाकिस्तान और चीन जैसे पड़ोसियों के लिए बड़ा खतरा साबित होगा. यह प्रोजेक्ट ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के सबक से प्रेरित है, जहां पिनाका ने पाकिस्तानी ड्रोन्स, जेट्स और फॉरवर्ड पोस्ट्स को नेस्तनाबूद किया था. अब भारतीय सेना ने डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) के सामने 2500 करोड़ का प्रस्ताव रखा है, जिसमें इन एक्सटेंडेड रेंज गाइडेड रॉकेट्स की खरीद शामिल है. इसे नए पिनाका को भारत का ‘मिनी ब्रह्मोस’ भी कहा जा रहा है, क्योंकि यह सुपरसॉनिक स्पीड से दुश्मन के गहरे इलाकों में घुसकर सटीक वार करने में सक्षम होगी. DRDO के आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE) ने इन रॉकेट्स को डिजाइन किया है, और म्यूनिशंस इंडिया लिमिटेड (MIL) टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत इन्हें बनाएगी. इसके ट्रायल्स अगले कुछ महीनों में शुरू होने वाले हैं और ये मौजूदा पिनाका लॉन्चर्स से ही फायर किए जा सकेंगे… यानी इसके लिए कोई नया इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं चाहिए. क्यों कह रहे हैं ‘मिनी ब्रह्मोस’? ब्रह्मोस सुपरसॉनिक क्रूज मिसाइल की स्पीड Mach 3 तक है, और यह दुश्मन के घर में घुसकर सटीक हमला करती है. पिनाका की यह नई रॉकेट Mach 4.5 की स्पीड से उड़ान भरती है, 40 किमी की ऊंचाई तक जाती है और Mach 1.8 पर टारगेट हिट करती है. 250 किलो वॉरहेड के साथ GPS-गाइडेड यह रॉकेट 10 मीटर की सटीकता से हमला करेगी. पिनाका मिसाइल की मुख्य खूबियां पिनाका भारतीय सेना की स्वदेशी रॉकेट सिस्टम है, जो दुश्मन पर भारी तबाही मचा सकती है. यहां इसकी खास बातें…     मार करने की दूरी: अभी यह रॉकेट 75-90 किलोमीटर तक मार करती है, नया वर्जन 120 किलोमीटर तक जा सकेगा. आगे 300 किलोमीटर वाला भी आएगा.     स्पीड: हवा से 4.7 गुना तेज उड़ती है, 40 किलोमीटर ऊंचाई तक जाती है और टारगेट पर ध्वनि की स्पीड से ज्यादा तेज हमला करती है.     निशाना: जीपीएस और भारतीय नेविक सिस्टम से चलती है, सिर्फ 10 मीटर के दायरे में सटीक गिरती है, बिल्कुल पिन की तरह.     विस्फोटक ताकत: 250 किलो तक का बारूद ले जा सकती है, बड़े इलाके को एक साथ तबाह करने के लिए कई तरह के वॉरहेड हैं.     एक साथ फायरिंग: एक लॉन्चर से 12 रॉकेट 44 सेकंड में छोड़ सकता है. पूरी बैटरी से 72 रॉकेट एक साथ 1 वर्ग किलोमीटर को मिनटों में बर्बाद कर सकता है.     लाना-ले जाना आसान: बड़े ट्रक पर लगा होता है, गोली चलाकर तुरंत जगह बदल सकता है, जिससे दुश्मन का जवाबी हमला बेकार.     पुराने सिस्टम से काम चलेगा: नई रॉकेट्स पुराने लॉन्चर से ही चलेंगी, कोई नया सामान खरीदने की जरूरत नहीं.     किसी भी मौसम में काम: बारिश, ठंड या पहाड़ – हर जगह चलती है. कारगिल युद्ध और ऑपरेशन सिंदूर में इसका कमाल दिख चुका है.     पूरी तरह भारतीय: डीआरडीओ ने बनाई, भारतीय कंपनियां बनाती हैं. आर्मेनिया जैसे देशों को बेची भी जा रही है. ब्रह्मोस की तरह यह भी डीप स्ट्राइक करने में माहिर है… पाकिस्तान के सियालकोट, नारोवाल, कसूर या मुजफ्फराबाद जैसे इलाकों को भारतीय बॉर्डर से 100-120 किमी दूर से टारगेट कर सकती है. इसकी एक बैटरी 44 सेकंड में 72 रॉकेट्स फायर कर 1 वर्ग किमी एरिया को तबाह कर देगी. जहां एक ब्रह्मोस मिसाइल की कीमत 25-35 करोड़ है, वहीं पिनाका रॉकेट्स सस्ती और बड़ी संख्या में उपलब्ध हैं. यही इसे ‘मिनी ब्रह्मोस’ बनाता है. पाकिस्तान पर कितना असर? पठानकोट, उधमपुर, देहरादून, अंबाला और जोधपुर जैसे नॉर्दर्न बेस से ये रॉकेट्स पाकिस्तान के स्टेजिंग एरिया, लॉजिस्टिक्स नोड्स, अम्यूनिशन डिपो और टेरर लॉन्चपैड्स को आसानी से टारगेट कर सकेंगी. सीमा के मैदानी इलाकों में पाकिस्तान के पास कवर कम है, इसलिए यह भारतीय सेना को डिटरेंस थ्रू डोमिनेंस देगी. एक रेजिमेंट (18 लॉन्चर्स) में 216 रॉकेट्स एक मिनट से कम में फायर हो सकते हैं. पांच बेस पर एक-एक रेजिमेंट तैनात करने से करीब 1100 रॉकेट्स हेयर-ट्रिगर अलर्ट पर रहेंगे. पाकिस्तान की एयर डिफेंस इसे रोकने में नाकाम रहेगी, क्योंकि लॉन्चर्स 50-70 किमी पीछे छिपे रहेंगे. चीन के खिलाफ कैसे बनेगा गेम चेंजर? भारतीय सेना की दो फ्रंट वॉर की तैयारी में ये रॉकेट्स अक्साई चिन या ईस्टर्न लद्दाख में चीनी सैनिकों को रोकेंगी. ब्रह्मोस के साथ टैग-टीम बनाकर यह हॉटन एयरपोर्ट या तियानशुईहाई के हेलीपैड्स को टारगेट कर सकती हैं. सेना चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी अपनी सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लंबी रेंज वाली पिनाका तैयार होते ही अन्य लॉन्ग-रेंज वेपन्स की प्लानिंग ड्रॉप की जा सकती है. भविष्य में 300 किमी रेंज वाला वर्जन भी आएगा, जो ‘वेरी डीप’ टारगेट्स जैसे एयरबेस और इंडस्ट्रियल प्लांट्स को हिट करेगा. यह प्रोजेक्ट ‘मेक इन इंडिया’ का बेहतरीन उदाहरण है. पिनाका पहले ही आर्मेनिया जैसे देशों को एक्सपोर्ट हो चुकी है, और अब यूरोपीय देश भी इंटरेस्ट दिखा रहे हैं. 2500 करोड़ का यह निवेश न सिर्फ सेना को मजबूत बनाएगा, बल्कि हजारों जॉब्स क्रिएट करेगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अगुवाई में देसी MBRL को प्राथमिकता दी जा रही है. दुश्मन अब भारत के खिलाफ कोई भी कदम उठाने से पहले दस बार सोचेगा, क्योंकि यह ‘मिनी ब्रह्मोस’ उनके घर में घुसकर वार करने वाली है. भारतीय सेना की यह धुरंधर मिसाइल सीमाओं की रक्षा को नई ऊंचाई देगी.

रेलवे कर्मचारियों के लिए 8वें वेतन आयोग से पहले सैलरी बढ़ोतरी का रास्ता साफ, जानिए क्या है नई योजना

नईदिल्ली  8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के लागू होने से पहले ही भारतीय रेलवे ने कर्मचारियों की सैलरी बढ़ोतरी से जुड़ी तैयारियां तेज कर दी हैं। वेतन और पेंशन पर भविष्य में पड़ने वाले भारी वित्तीय बोझ को देखते हुए रेलवे अभी से खर्च घटाने, बचत बढ़ाने और आय के नए स्रोत मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रहा है। संकेत साफ हैं कि 8वें वेतन आयोग के लागू होते ही रेलवे कर्मचारियों की सैलरी में बड़ा इजाफा देखने को मिल सकता है। कब तक आएगी 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट? 8वें वेतन आयोग का गठन जनवरी 2025 में हुआ था और 28 अक्टूबर 2025 को इसके टर्म ऑफ रेफरेंस (ToR) जारी किए गए। आयोग को अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। ऐसे में जनवरी 2026 से पहले रिपोर्ट आने की उम्मीद जताई जा रही है। इसी सीमित समय को देखते हुए रेलवे ने अपनी वित्तीय स्थिति मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। 7वें वेतन आयोग का अनुभव रेलवे को 7वें वेतन आयोग का असर अब भी याद है। साल 2016 में आयोग लागू होने के बाद कर्मचारियों की सैलरी में 14% से 26% तक की बढ़ोतरी हुई थी, जिससे रेलवे के वेतन और पेंशन खर्च में सालाना करीब 22,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा था। अब आंतरिक आकलन के मुताबिक, 8वें वेतन आयोग के बाद यह बोझ बढ़कर 30,000 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। बढ़ते खर्च से निपटने की रणनीति रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इस चुनौती से निपटने के लिए पहले से ही ठोस योजना बनाई जा रही है।     ऑपरेशनल एफिशिएंसी बढ़ाने पर जोर     फ्रेट यानी माल ढुलाई से होने वाली आय बढ़ाने की रणनीति     आंतरिक संसाधनों का बेहतर और प्रभावी उपयोग रेलवे की मौजूदा वित्तीय स्थिति वित्त वर्ष 2024-25 में रेलवे का ऑपरेटिंग रेश्यो 98.90% रहा, जबकि इस दौरान शुद्ध आय 1,341.31 करोड़ रुपये दर्ज की गई। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ऑपरेटिंग रेश्यो को घटाकर 98.43% करने का लक्ष्य रखा गया है और नेट रेवेन्यू 3,041.31 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। बिजली और कर्ज से होगी बड़ी बचत पूरे रेल नेटवर्क के इलेक्ट्रिफिकेशन से हर साल लगभग 5,000 करोड़ रुपये की बचत होने की उम्मीद है। इसके अलावा, 2027-28 से रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) को किए जाने वाले भुगतान में भी कमी आने की संभावना है, क्योंकि हाल के वर्षों में पूंजीगत खर्च का बड़ा हिस्सा बजटीय सहायता से पूरा किया गया है। फिटमेंट फैक्टर बना अहम मुद्दा कर्मचारी संगठनों की मांगें भी रेलवे के लिए बड़ी चुनौती हैं। 7वें वेतन आयोग में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर लागू किया गया था, जबकि अब यूनियनें 2.86 फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रही हैं। अगर यह मांग मान ली जाती है, तो वेतन खर्च में 22% से ज्यादा की बढ़ोतरी हो सकती है। बजट बढ़ोतरी से मिला भरोसा इन तमाम चुनौतियों के बावजूद रेलवे आश्वस्त नजर आ रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 में कर्मचारियों के वेतन के लिए बजट बढ़ाकर 1.28 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले साल 1.17 लाख करोड़ रुपये था। पेंशन मद में भी अधिक फंड आवंटित किया गया है। रेलवे का मानना है कि सही योजना, बढ़ती आय और बेहतर प्रबंधन के जरिए 8वें वेतन आयोग के असर को संतुलित किया जा सकेगा, जिसका सीधा लाभ 12.5 लाख से ज्यादा रेलवे कर्मचारियों को मिलेगा।  

श्रमिक कल्याण को नई रफ्तार: मुख्यमंत्री ने संबल के तहत 160 करोड़ रुपये किए सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर

भोपाल मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल 2.0) योजना के तहत प्रदेश के 55 जिलों के 7227 संबल हितग्राहियों के बैंक खाते में सिंगल क्लिक से 160 करोड़ रुपये की अनुग्रह सहायता राशि अंतरित की। इस योजना के प्रारंभ वर्ष 2018 से लेकर अब तक 7.76 लाख प्रकरणों में 7383 करोड़ रुपये की सहायता राशि जरूरतमंद हितग्राहियों को दी जा चुकी है।   इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि संबल योजना सिर्फ़ आर्थिक सहायता का जरिया ही नहीं, यह सरकार और श्रमिकों के बीच आपसी भरोसे का रिश्ता भी है। राज्य सरकार हर उस जरूरतमंद तक योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है, जो इसके वास्तविक हकदार हैं। हमारी सरकार गरीब, लाचार, श्रमिक, निराश्रित और जरूरतमंद नागरिकों को स्नेह, अपनत्व, स्वावलंबन और आर्थिक सहायता का संबल देती रहेगी।   प्रदेश की जनता के सुख-दुख में सरकार हमेशा साथ खड़ी है। प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल कार्यक्रम में अमरकंटक से वर्चुअल शामिल होकर कहा कि राज्य सरकार ने पूर्व की सरकार का बैकलाग भी खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब श्रम विभाग इस स्थिति में आ चुका है कि किसी भी संबल प्रकरण में हम मात्र 60 दिन के अंदर हितग्राही को भुगतान कर सकते हैं। यही हमारी दो साल की बड़ी उपलब्धि है।   मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल 2.0) योजना से भुगतान पाने वाले हितग्राही संचालित योजनाएं– सहायता राशि प्रति प्रकरण– हितग्राहियों की संख्या अनुग्रह सहायता (सामान्य मृत्यु पर)– 2 लाख — 6390 अनुग्रह सहायता (दुर्घटना मृत्यु पर)– 4 लाख — 790 अनुग्रह सहायता (आंशिक स्थायी अपंगता)– 1 लाख– 34 अनुग्रह सहायता (स्थायी अपंगता होने पर)– 2 लाख — 13 कुल –7,227  

डिप्लोमेसी में अपनापन: इथियोपिया पहुंचे पीएम मोदी, PM अली ने एयरपोर्ट से होटल तक खुद कार चलाकर किया स्वागत

इथियोपिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन देशों की चार दिवसीय यात्रा के दूसरे चरण के तहत मंगलवार को इथियोपिया पहुंचे। इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली ने अदीस अबाबा हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गले लगाकर स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को होटल तक अपनी गाड़ी से पहुंचाया। रास्ते में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को विज्ञान संग्रहालय और मैत्री पार्क भी दिखाया। गौरतलब है कि पीएम मोदी का यह पहला इथियोपिया दौरा है।   बता दें कि इथियोपिया की अपनी पहली यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करेंगे। इस दौरान वह 'लोकतंत्र की जननी' के रूप में भारत की यात्रा और 'ग्लोबल साउथ' के लिए भारत-इथियोपिया साझेदारी क्या मायने रखती है विषय पर अपने विचार साझा करेंगे। पीएम मोदी इथियोपिया के प्रधानमंत्री डॉ. अबी अहमद अली के साथ द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर व्यापक चर्चा भी करेंगे। प्रधानमंत्री की इथियोपिया यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, यह यात्रा ‘ग्लोबल साउथ’ में साझेदार के रूप में भारत और इथियोपिया के बीच गहरी दोस्ती और द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने की दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि होगी। गौरतलब है कि मोदी इथियोपिया की दो दिवसीय यात्रा के दौरान प्रवासी भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी मुलाकात करेंगे।

मंत्री वर्मा ने कहा- जिले के विकास में जनप्रतिनिधियों, प्रशासन एवं समाज के विशिष्टजनों के अनुभव अहम

केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का किया जाएगा प्रभावी क्रियान्वयन मुरैना में जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक हुई भोपाल  राजस्व मंत्री एवं मुरैना जिले के प्रभारी मंत्री श्री करण सिंह वर्मा ने कहा है कि जिले के विकास में जनप्रतिनिधियों, प्रशासन एवं समाज के विशिष्टजनों के अनुभव अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इन अनुभवों पर भी विचार किया जाएगा, जिससे केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन हो सके।पिछले दो वर्षों में मुरैना जिले ने कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की मंशा है कि मुरैना जिला निरंतर विकास की गति प्राप्त करे, जिसमें सभी का सहयोग अपेक्षित है। मंत्री श्री वर्मा मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार, मुरैना में आयोजित जिला विकास सलाहकार समिति की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में महापौर श्रीमती शारदा सोलंकी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती आरती गुर्जर, कलेक्टर श्री लोकेश कुमार जांगिड़, पुलिस अधीक्षक श्री समीर सौरभ, प्रभारी वनमंडलाधिकारी श्री अंकित, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री कमलेश कुमार भार्गव सहित समिति के सदस्य उपस्थित थे। मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि विगत दो वर्षों में विभिन्न नवाचारों के माध्यम से विकास की एक नई गाथा लिखी गई है। जिले के विकास को लेकर विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों से उनके-अपने क्षेत्र के बेहतर विकास के लिये सुझाव प्राप्त किए गए हैं। समिति में किसान, वकील, चिकित्सक, शिक्षाविद्, कानून विशेषज्ञ सहित 20 विभिन्न क्षेत्रों के सदस्य सम्मिलित हैं। राज्य सरकार द्वारा इस वर्ष उद्योगों में क्रांति लाने के उद्देश्य से ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया गया तथा वर्ष 2025 को उद्योग वर्ष घोषित किया गया है। इस समिट के माध्यम से निवेशकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और सरकार को लगभग 30 लाख 77 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों के फलस्वरूप युवाओं के लिए अनेक रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं। मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बहनों के लिए, किसानों के लिए किसान कल्याण योजनाएँ, शिक्षा एवं उद्योग क्षेत्र में व्यापक सुधार, विदेश नीति को सशक्त बनाते हुए विश्व पटल पर भारत की पहचान को सुदृढ़ किया गया है। राजस्व महाअभियान चलाकर करोड़ों प्रकरणों का निराकरण किया गया। नामांतरण की प्रक्रिया को सरल बनाते हुए व्हाट्सएप पर प्रतिलिपि उपलब्ध कराई जा रही है। जल उपलब्धता के लिये नदी जोड़ो अभियान, फसल राहत, खाद की उपलब्धता, भावांतर योजना एवं प्रधानमंत्री आवास जैसी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया गया है। हमारे राज्य का सतत विकास हो रहा है और जिले के विकास के लिए हम सभी मिलकर निरंतर प्रयास करेंगे। मंत्री श्री वर्मा ने कहा कि मुरैना विकास कार्यो में प्रथम स्थान पर आए एवं मुरैना में कोई नामान्तरण, बटवारा का कोई प्रकरण लंबित न रहे, इस प्रकार के प्रयास किए जाएँ। उन्होंने कहा कि सभी जनों को न्याय मिले एवं योजनाओं का लाभ उन तक पहुंचे, इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार कराना आवश्यक है। बैठक में मुरैना के विकास कार्यों के संबंध में भी विस्तार से चर्चा हुई।  

नेशनल हाईवे के किनारे बनेगा महिला मार्केट प्लेस, गो-उत्पादों की होगी सीधी बिक्री

  गो सेवा, नवाचार और रोजगार का संगम जो गोशालाएं पहले की सरकारों में बोझ मानी जाती थीं, वे अब आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर इकाइयां बन रही हैं गोबर से ‘गो-कास्ट’ और वर्मी कम्पोस्ट, महिलाओं की आय बढ़ाने की पहल स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को मिलेगा रोजगार, हर माह होगी कमाई लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी गो-कल्याण योजना अब केवल संरक्षण तक सीमित नहीं रही, बल्कि नवाचार और महिला सशक्तिकरण का मजबूत मॉडल बनकर उभर रही है। एटा जनपद की मलावन गोशाला में शुरू हुई यह पहल प्रदेश में आत्मनिर्भर गोशालाओं की नई तस्वीर पेश कर रही है। जो गोशालाएं पहले की सरकारों में बोझ मानी जाती थीं, वे अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर इकाइयां बन रही हैं। यहां गो माता को ठंड से बचाने के लिए फूस और टाट की बोरी से तैयार विशेष प्रकार के ‘इको-थर्मल कंबल’ बनाए जा रहे हैं। ये कंबल न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि कम लागत में तैयार होकर गो संरक्षण को भी मजबूती दे रहे हैं। इसके साथ ही गोशाला में बर्मी कम्पोस्ट और गोबर से ‘गो-कास्ट’ जैसे नवाचारी उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं, जिसकी बाजार में जबरदस्त डिमांड है। गोबर से अगरबत्ती, धूपबत्ती, मोमेंटो और गमले बनाने के लिए 30 सखी दीदियां तैयार एटा के मुख्य विकास अधिकारी डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र ने इस मॉडल को गो-कल्याण, पुनर्चक्रण और ग्रामीण आजीविका का उत्कृष्ट संयोजन बताया। उन्होंने बताया कि जिलाधिकारी प्रेमरंजन सिंह के नेतृत्व में गोशाला को आय का बेहतर श्रोत बनाया जा रहा है। जो गोशालाएं पहले बोझ मानी जाती थीं, वे अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर इकाइयां बन रही हैं। सीडीओ डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि कार्ययोजना के तहत प्रशिक्षण देकर 30 सखी दीदियों को तैयार किया जा रहा है, जो गोबर से अगरबत्ती, धूपबत्ती, मोमेंटो और गमले जैसे उत्पाद बनाएंगी। इसके अलावा मलावन राष्ट्रीय राजमार्ग के पास एक स्थायी मार्केट प्लेस विकसित किया जाएगा, जहां गो आधारित उत्पादों की सीधी बिक्री होगी। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं हर माह निश्चित आय अर्जित कर सकेंगी इस पहल का सबसे प्रभावशाली पक्ष यह है कि इससे स्वयं सहायता समूह की महिलाएं हर माह निश्चित आय अर्जित कर सकेंगी। महिलाओं ने बताया कि वे आगे भी गोशाला संचालन, स्वच्छता, पोषण प्रबंधन और उत्पाद निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाते हुए इसे आत्मनिर्भर गोशाला मॉडल के रूप में विकसित करती रहेंगी। योगी सरकार की योजना से साफ है कि गोसेवा और रोजगार साथ-साथ चल सकते हैं। नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण के जरिए प्रदेश की गोशालाएं अब बोझ नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी बनती जा रही हैं।

मध्यप्रदेश को गढ़ने वाले सच्चे सेवक हैं श्रमिक, विकास की बुनियाद उनकी मेहनत: सीएम डॉ. यादव

श्रमिक मध्यप्रदेश को गढ़ने वाले सच्चे सेवक, इनकी मेहनत ही विकास की है बुनियाद : मुख्यमंत्री डॉ. यादव सरकार हर परिस्थिति में श्रमिकों के साथ प्रदेश के 7227 श्रमिक हितग्राहियों को दिया 160 करोड़ रुपए का संबल मुख्यमंत्री ने अनुग्रह सहायता राशि श्रमिकों के बैंक खाते में की अंतरित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राज्य सरकार हर उस जरूरतमंद तक योजनाओं का लाभ पहुंचा रही है, जो इसके वास्तविक हकदार हैं। हमारी सरकार गरीब, लाचार, श्रमिक, निराश्रित और जरूरतमंद नागरिकों को स्नेह, अपनत्व, स्वावलंबन और आर्थिक सहायता का संबल देती रहेगी। प्रदेश की जनता के सुख-दुख में सरकार हमेशा साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को मंत्रालय में मुख्यमंत्री जनकल्याण (सम्बल 2.0) योजना के तहत सहायता राशि वितरण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के 55 जिलों के 7227 सम्बल हितग्राहियों के बैंक खाते में 160 करोड़ रुपए की अनुग्रह सहायता राशि अंतरित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस योजना के प्रारंभ वर्ष 2018 से लेकर अब तक 7.76 लाख प्रकरणों में 7383 करोड़ रुपए की सहायता राशि जरूरतमंद हितग्राहियों को दी जा चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संबल योजना श्रमिकों के कठिन समय की सच्ची साथी है। सरकार हर परिस्थिति में श्रमिकों के साथ खड़ी है। संबल योजना सिर्फ़ आर्थिक सहायता का जरिया ही नहीं, यह सरकार और श्रमिकों के बीच आपसी भरोसे का रिश्ता भी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि समय के साथ श्रम के स्वरूप भी बदले हैं। हमारी सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को असंगठित श्रमिक का दर्जा दिया है। एक मार्च 2024 से इन्हें भी संबल योजना के दायरे में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि अब तक 1400 से अधिक गिग वर्कर्स पंजीकृत किए गए हैं। गरीबों और श्रमिकों के स्वास्थ्य की चिंता करते हुए हमने संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत योजना से भी जोड़ दिया है। इससे उन्हें भी 5 लाख रुपये तक का निःशुल्क इलाज मिल रहा है। साथ ही 25 लाख से अधिक नए ई-श्रमिक परिवारों को राशन पात्रता देकर उन्हें भी निःशुल्क राशन का लाभ दिया गया है। गर्भवती बहनों के लिए भी सरकार बेहद संवेदनशील है। गर्भावस्था के दौरान उन्हें काम पर न जाना पड़े और उन्हें पोषण की कमी न हो, इसी उद्देश्य से ऐसी बहनों को 16 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि अब पत्थर तोड़ने वाले, ईंट बनाने वाले, पापड़ अचार बनाने वाले, खाना बनाने वाले, घरों में काम करने वाले मजदूर या तेंदूपत्ता बीनने वाले सभी श्रमिक और उनके परिवार इस योजना से जुड़कर आर्थिक मदद पा रहे हैं। साथ ही प्रदेश की कुशल श्रम शक्ति को सहकारिता के माध्यम से आगे बढ़ाने के लिए हमने "श्रमणा" जैसी योजनाएं भी शुरू की हैं, जिससे श्रमिक वर्ग आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार हर गरीब और श्रमिक वर्ग के साथ हर कदम पर खड़ी है। कोई भी श्रमिक परिवार खुद को असहाय न समझे। श्रमिक भाई सरकार की सभी सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का भरपूर लाभ उठायें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन में कठिनाई कभी बताकर नहीं आती। ऐसी स्थिति में जमा-पूंजी (पैसा) ही हमें संबल देता है। राज्य सरकार सभी श्रमिक परिवारों के हर मुश्किल वक्त में साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि संबल योजना सभी को एक माला की तरह साथ जोड़कर रखती है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल कार्यक्रम में अमरकंटक से वर्चुअल शामिल होकर कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में आज संबल योजना के अंतर्गत 7वीं बार हितग्राही परिवारों को राशि अंतरित की जा रही है। संबल योजना के अंतर्गत अब तक 1.83 करोड़ से अधिक श्रमिकों ने पंजीयन कराया है, जबकि संबल 2.0 में 43 लाख लोगों ने पंजीयन किया है। राज्य सरकार ने पूर्व की सरकार का बैकलॉग भी खत्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि अब श्रम विभाग इस स्थिति में आ चुका है कि किसी भी संबल प्रकरण में हम मात्र 60 दिन के अंदर हितग्राही को भुगतान कर सकते हैं। यही हमारी दो साल की बड़ी उपलब्धि है। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, सचिव मुख्यमंत्री आलोक सिंह, सचिव श्रम रघुराज एम.आर., सचिव म.प्र. असंगठित शहरी एवं ग्रामीण कर्मकार कल्याण मंडल बंसत कुर्रे सहित अधिकारी उपस्थित थे। जिलों से जनप्रतिनिधि एवं संबल हितग्रहियों ने वीसी के माध्यम से कार्यक्रम में शिरकत की। उल्लेखनीय है कि सम्बल योजना श्रमिक एवं जरूरतमंद परिवारों के लिए एक सुरक्षा कवच के रूप में उभरी है। योजना के तहत महिला श्रमिकों को प्रसूति सहायता के रूप में 16 हजार रुपए दिए जाते हैं, वहीं श्रमिकों के बच्चों की उच्च शिक्षा का पूरा शिक्षण शुल्क भी राज्य सरकार वहन करती है। सामाजिक सुरक्षा को मजबूती देने वाली इस योजना ने लाखों परिवारों की जिंदगी में भरोसे की रोशनी जगाई है। संबल योजना के सभी पंजीकृत हितग्राही 5 लाख रुपए तक का निःशुल्क इलाज भी प्राप्त कर रहे हैं। यह योजना आज आर्थिक सहायता का माध्यम होने के साथ श्रमिक परिवारों के लिए सम्मान, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता का भरोसा भी बन चुकी है। मुख्यमंत्री जनकल्याण (संबल 2.0) योजना से भुगतान पाने वाले हितग्राही क्रं संचालित योजनाएं दी जाने वाली सहायता राशि (प्रति प्रकरण रूपए में) हितग्राहियों की संख्या 1. अनुग्रह सहायता (सामान्य मृत्यु पर) दो लाख 6390 2. अनुग्रह सहायता (दुर्घटना मृत्यु पर) 4 लाख 790 3. अनुग्रह सहायता (आंशिक स्थायी अपंगता) एक लाख 34 4. अनुग्रह सहायता (स्थायी अपंगता होने पर) दो लाख 13 महायोग 7,227    

मुकेश अंबानी की कमाई सबसे अधिक, अडानी तीसरे स्थान पर, दूसरे नंबर पर कौन?

मुंबई  साल 2025 में दलाल स्ट्रीट पर देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस के शेयर (Reliance Share) ने कमाल किया है. इस शेयर की वैल्यू में अब तक 27 फीसदी का जोरदार उछाल आ चुका है और इसका सीधा असर रिलायंस चेयरमैन मुकेश अंबानी की संपत्ति (Mukesh Ambani Networth) पर दिखा है. RIL Stock में तेजी की वजह से इसमें 15 अरब डॉलर से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है और अंबानी 100 अरब डॉलर क्लब में बने हुए हैं. इस साल कमाई के मामले में जहां मुकेश अंबानी नंबर-1 पायदान पर काबिज हैं, तो वहीं Gautam Adani नंबर तीन पर खिसक गए हैं. आइए जानते हैं कमाई करने में दूसरे पायदान पर कौन से भारतीय अरबपति हैं. RIL छठा बेस्ट परफॉर्मिंग स्टॉक   Reliance Share में इस साल जोरदार तेजी आई है और मुकेश अंबानी का ये शेयर इस साल अब तक बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) पर छठा सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला शेयर बनकर उभरा है. रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह वैल्यू अनलॉकिंग को लेकर बना पॉजिटिव सेंटीमेंट है. 2026 में रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ की उम्मीदें और एनालिस्ट की सकारात्मक टिप्पणियां शेयर फ्यूचर को लगातार समर्थन दे रही हैं.  मुकेश अंबानी की दौलत में इतना इजाफा देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस के शेयर में इस साल अब तक आई 27 फीसदी की धुआंधार तेजी के चलते मुकेश अंबानी की संपत्ति में सीधे 15.3 अरब डॉलर (करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये) का उछाल दर्ज किया गया है. इसके साथ ही वे 2025 में भारतीय अरबपतियों में सबसे ज्यादा लाभ कमाने वाले व्यक्ति और ब्लूमबर्ग बिलियनेयर्स इंडेक्स में एकमात्र भारतीय सेंटिबिलियनेयर बनकर उभरे हैं.  Bloomberg Billionaires Index के मुताबिक, मुकेश अंबानी की नेटवर्थ बढ़कर अब 106 बिलियन डॉलर हो गई है. संपत्ति के इस आंकड़े के साथ दुनिया के टॉप अरबपतियों की लिस्ट में मुकेश अंबानी अब 18वें पायदान पर हैं. हालांकि, बीते 24 घंटे की बात करें, तो उन्हें 431 मिलियन डॉलर का नुकसान हुआ है.  कमाई में अडानी नहीं, ये हैं नंबर-2 इस साल अरबपतियों के कमाई के आंकड़े पर नजर डालें, देश के दूसरे सबसे अमीर व्यक्ति अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी हैं, लेकिन कमाई के मामले में 2025 में मुकेश अंबानी के बाद नंबर-2 पर वे नहीं हैं. दरअसल, ब्लूमबर्ग के मुताबिक दूसरे सबसे बड़े भारतीय लाभार्थी लक्ष्मी मित्तल (Lakshmi Mittal) हैं, जो लक्ज़मबर्ग स्थित ग्लोबल स्टील एंड माइनिंग कंपनी आर्सेलरमित्तल के मालिक हैं. मित्तल की संपत्ति में 11.7 अरब डॉलर की वृद्धि हुई और अब यह बढ़कर 31.40 अरब डॉलर हो गई है. बात Gautam Adani Networth की करें, तो कमाई के मामले में गौतम अडानी तीसरे स्थान पर रहे. उनकी संपत्ति इस कैलेंडर ईयर में 6.52 अरब डॉलर बढ़कर 85.2 अरब डॉलर हो गई. अडानी पावर लिमिटेड, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड और अडानी पोर्ट्स लिमिटेड जैसी अडानी कंपनियों के शेयरों में 2025 में अब तक 23-36 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि एसीसी लिमिटेड, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस , अडानी टोटल गैस लिमिटेड और एनडीटीवी के शेयरों में 13-35 फीसदी की गिरावट आई.