samacharsecretary.com

इटली के डिप्टी पीएम तजानी ने पीएम मोदी से मुलाकात को बताया सकारात्मक, जॉर्जिया मेलोनी ने दिया 2026 का निमंत्रण

नई दिल्ली इटली के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी इस समय भारत के तीन दिवसीय दौरे पर हैं. बुधवार शाम उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात हुई, जिसे तजानी ने बहुत पॉजिटिव और उपयोगी बताया.  इस मुलाकात के दौरान तजानी ने पीएम मोदी को इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की ओर से 2026 में इटली आने का निमंत्रण भी दिया. तजानी ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी के इटली के दौरे को लेकर 'हां' में तो जवाब मिला है. लेकिन, अभी समय तय नहीं किया गया है. विदेश मंत्री तजानी ने कहा कि भारत–इटली रिश्ते नए दौर में प्रवेश कर रहे हैं और आने वाले सालों में दोनों देशों के सहयोग में और तेजी आएगी. भारत और इटली एक दूसरे के लिए बेहद महत्वपूर्ण साझेदार हैं और आने वाला समय दोनों देशों के लिए बेहतर संभावनाएं लेकर आएगा.  इटली की पीएम मेलोनी के भारत दौरे पर क्या बोले तजानी? जब पत्रकारों ने उनसे पूछा कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी भारत कब आएंगी? इस पर प्रतिक्रिया देते हुए विदेश मंत्री तजानी ने कहा कि हम लोगों ने यह अभी तया नहीं किया है कि वह 2026 में कब भारत आएंगी. इटली के प्रतिनिधित्व और प्रधानमंत्री मोदी के बीच क्या बातचीत हुई? मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने इंडस्ट्रियल कॉरपोरेशन, सांस्कृतिक जुड़ाव, व्यापार, तकनीक और कूटनीतिक साझेदारी पर विस्तार से बात की. तजानी ने खास तौर पर कहा कि भारत रूस और यूक्रेन के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने में बेहद अहम भूमिका निभा सकता है. उनके अनुसार भारत का वैश्विक स्तर पर बढ़ता प्रभाव इस दिशा में मदद कर सकता है. कब-कब हुई जॉर्जिया मेलोनी और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाक़ात? नवंबर 2022 – बाली, इंडोनेशिया (G20 शिखर सम्मेलन): प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद मेलोनी की मोदी से पहली मुलाकात बाली में हुई. यह भारत–इटली संबंधों के नए अध्याय की शुरुआत मानी गई. 2–3 मार्च 2023 – नई दिल्ली: मेलोनी की पहली आधिकारिक भारत यात्रा में दोनों देशों ने रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की, जो द्विपक्षीय संबंधों में सबसे बड़ा कदम माना जाता है. सितंबर 2023 – नई दिल्ली (G20 शिखर सम्मेलन): इस मुलाकात में नेताओं की सहजता और तालमेल ने सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोरीं.  14 जून 2024 – पुगलिया, इटली (G7 शिखर सम्मेलन): मेजबान के तौर पर मेलोनी ने मोदी का स्वागत किया और उन्हें तीसरे कार्यकाल के लिए बधाई दी. बैठक में व्यापक वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई. 18 नवंबर 2024 – रियो डी जनेरियो, ब्राजील (G20 शिखर सम्मेलन): दोनों नेताओं ने इस दौरान “इंडिया–इटली ज्वाइंट स्ट्रैटेजिक एक्शन प्लान 2025–2029” की घोषणा की. जून 2025 – कनानास्किस, कनाडा (G7 शिखर सम्मेलन): यहां हुई अनौपचारिक बातचीत के बाद सोशल मीडिया पर #Melodi हैशटैग ट्रेंड करता रहा. 23 नवंबर 2025 – जोहान्सबर्ग, दक्षिण अफ्रीका (G20 शिखर सम्मेलन): मुलाकात में आतंकवाद के वित्तपोषण के खिलाफ “इंडिया–इटली ज्वाइंट इनिशिएटिव” की घोषणा की गई.

छत्तीसगढ़ में स्वरोजगार का नया क्षितिज – सशक्त होता ग्रामीण-शहरी आर्थिक तंत्र

रायपुर : विशेष लेख : सरकार का संकल्प – आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का निर्माण छत्तीसगढ़ में स्वरोजगार का नया क्षितिज – सशक्त होता ग्रामीण-शहरी आर्थिक तंत्र रायपुर सरकार का संकल्प – आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ का निर्माण छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आत्मनिर्भरता और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख रूप से कुटीर उद्योगों को केंद्रीकृत किया गया है। ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में युवाओं, महिलाओं तथा बेरोजगार लोगों को रोजगार एवं स्वरोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए राज्य के 28 जिलों में विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है, जिनसे स्थानीय स्तर पर उद्यम स्थापित होंगे और आर्थिक गतिविधियाँ मजबूत होंगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की जनकल्याणकारी सोच और खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव के प्रयासों से यह क्षेत्र नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय – विकास को जन-जन तक पहुँचाने वाले नेतृत्वकर्ता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपनी सरलता, सहजता, दृढ़ता और ग्रामीण विकास के प्रति संवेदनशीलता के लिए जाने जाते हैं। उनका यह स्पष्ट मानना है कि छत्तीसगढ़ का वास्तविक सामर्थ्य गाँवों में निहित है, जहाँ परंपरा, कौशल और संसाधन प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। वे मानते हैं कि स्व-रोजगार ही आर्थिक सशक्तिकरण का सबसे मजबूत माध्यम है। उनके नेतृत्व में सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि स्व-रोजगार योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचे और कुटीर, सूक्ष्म एवं लघु उद्योगों को बढ़ावा देकर राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जाए। खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव -ग्रामोद्योग के पुनर्जागरण के निर्माता गजेंद्र यादव अपने ऊर्जा से भरे कार्यशैली, जमीनी समझ और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों के लिए पहचाने जाते हैं। वे लगातार यह प्रयास कर रहे हैं कि परंपरागत कौशलों को आधुनिक बाजार से जोड़ा जाए, जिससे स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को अधिक अवसर मिल सकें। उनकी पहल से कुटीर उद्योगों में नई संभावनाएँ विकसित हुई हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता का वातावरण मजबूत हुआ है। उनके नेतृत्व में खादी एवं ग्रामोद्योग विभाग ने कई अभिनव कदम उठाए हैं, जिससे हजारों लोगों को आजीविका के नए साधन प्राप्त हुए हैं। कुटीर उद्योगों को नई ऊर्जा देने वाली दो प्रमुख योजनाएँ मुख्यमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (CMEGP) यह राज्य शासन की अत्यंत महत्वपूर्ण योजना है जो मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के अजा, अजजा एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करती है। इस योजना का उद्देश्य उन लोगों को छोटे उद्योग स्थापित करने हेतु प्रेरित करना है, जो अपने कौशल के आधार पर सेवा या विनिर्माण क्षेत्रों में कारोबार शुरू करना चाहते हैं। सेवा क्षेत्र जैसे साइकिल और मोबाइल रिपेयरिंग, इलेक्ट्रॉनिक/इलेक्ट्रिक मरम्मत, ब्यूटी पार्लर, फोटोकॉपी, वीडियोग्राफी, टेंट हाउस, च्वाइस सेंटर और होटल जैसी गतिविधियों में उद्यम स्थापित करने हेतु ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिसकी अधिकतम सीमा एक लाख रूपए निर्धारित है। वहीं विनिर्माण क्षेत्र जैसे दोना-पत्तल निर्माण, फेब्रिकेशन, डेयरी उत्पाद, साबुन, मसाला, दलिया, पशुचारा, फ्लाई ऐश ब्रिक्स और नूडल्स निर्माण जैसे उद्योगों को बढ़ावा देने हेतु 3 लाख रूपए तक का ऋण प्रदान किया जाता है। इन दोनों ही श्रेणियों में 35 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है, ताकि प्रारंभिक आर्थिक बोझ कम हो सके। योजना के अंतर्गत हितग्राही को केवल 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान करना होता है। यह योजना विशेषकर ग्रामीण युवाओं को उद्यम स्थापना के लिए प्रेरित करती है। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) यह केंद्र शासन की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ में प्रभावी रूप से किया जा रहा है। योजना का उद्देश्य विभिन्न वर्गों-अजा, अजजा, ओबीसी तथा सामान्य वर्ग को उद्यमिता के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराना है। इस योजना में सेवा क्षेत्र के लिए 20 लाख रूपए तक और विनिर्माण क्षेत्र के लिए 50 लाख रूपए तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे मध्यम स्तर के उद्यम भी आसानी से शुरू किए जा सकें। अनुदान की दृष्टि से यह योजना अत्यंत सहायक है। ग्रामीण क्षेत्रों के हितग्राहियों को 35 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 25 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है। सामान्य वर्ग के हितग्राहियों को ग्रामीण क्षेत्र में 25 प्रतिशत तथा शहरी क्षेत्र में 15 प्रतिशत का अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। आवेदन प्रक्रिया पूर्णतः ऑनलाइन है, जिसे च्डम्ळच् पोर्टल के माध्यम से सरलता से भरा जा सकता है। यह योजना विशेष रूप से उन युवाओं के लिए है जो बड़े पैमाने पर उद्यम शुरू करने की क्षमता रखते हैं लेकिन आर्थिक संसाधनों की कमी से जूझते हैं। आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज आवेदन करने वाले आवेदकों को कुछ आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होते हैं जिनमें पासपोर्ट साइज फोटो, आधार कार्ड, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र, ग्राम पंचायत से प्राप्त अनापत्ति प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, प्रोजेक्ट रिपोर्ट, बैंक पासबुक की छायाप्रति और पैन कार्ड शामिल हैं। इसके अलावा आवश्यकता पड़ने पर अन्य दस्तावेज भी जमा करने पड़ते हैं। ये दस्तावेज आवेदक की पात्रता और परियोजना की विश्वसनीयता सुनिश्चित करते हैं। आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की ओर मजबूत कदम छत्तीसगढ़ में CMEGP और PMEGP जैसी योजनाएँ स्वरोजगार को एक संगठित और सशक्त दिशा प्रदान कर रही हैं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और खादी एवं ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव की दूरदर्शिता, समर्पण और सतत प्रयासों के कारण आज हजारों युवाओं के सपने साकार हो रहे हैं। राज्य सरकार की ये पहल न केवल रोजगार बढ़ा रही हैं, बल्कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आर्थिक संरचना को मजबूती प्रदान कर रही हैं। कोईे भी व्यक्ति अपना उद्योग शुरू करना चाहता है, उसके लिए यह अत्यंत उपयुक्त समय है। अधिक जानकारी एवं आवेदन हेतु खादी एवं ग्रामोद्योग शाखा, कार्यालय रायपुर से संपर्क किया जा सकता है।                                                                                                                                    • लक्ष्मीकांत कोसरिया, उप संचालक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का नया दौर

विकसित उत्तर प्रदेश 2047: उत्तर प्रदेश की स्टार्टअप क्रांति को गति देते सेंटर ऑफ एक्सीलेंस मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था का नया दौर लैब सुविधा, मेंटरशिप, टेस्टिंग और नेटवर्किंग से युवाओं को वैश्विक स्तर की तकनीक का अवसर लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश तेजी से उस दिशा में अग्रसर है जहां नवाचार, अनुसंधान और अत्याधुनिक तकनीक, विकास के आधार स्तंभ बनेंगे। प्रदेश में 07 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भारत की तकनीकी अर्थव्यवस्था में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। यह स्टार्टअप क्रांति को गति देने का काम कर रहे है। सरकार का यह कदम स्टार्टअप इकोसिस्टम को सशक्त बना रहा है। साथ ही उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर इनोवेशन हब के रूप में स्थापित करने की ओर कदम बढ़ा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विज़न है कि नया उत्तर प्रदेश ज्ञान, प्रौद्योगिकी और उद्यमिता के आधार पर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बने। उत्तर प्रदेश सरकार ने थीम आधारित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को स्वीकृति दी है। ये केंद्र आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस,  ब्लॉकचेन, मेडटेक, टेलीकॉम, ड्रोन, एडिटिव, मैन्युफैक्चरिंग और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। प्रदेश सरकार का मानना है कि इन अत्याधुनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षित युवा विश्व स्तरीय स्टार्टअप खड़े कर सकेंगे और प्रदेश को नए रोजगार अवसरों का बड़ा केंद्र बनाएंगे। सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस  में चयनित प्रोडक्ट आधारित स्टार्टअप को जो सुविधाएं प्रदान की जा रही है उनमें उच्च स्तरीय लैब, को-वर्किंग स्पेस, रिसर्च सपोर्ट, प्रोडक्ट टेस्टिंग और विशेषज्ञ मेंटरशिप शामिल हैं। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी प्रतिभाशाली युवा को संसाधनों के अभाव में पीछे हटना पड़े।  सरकार की ओर से इन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए वित्तीय सहायता का भी मजबूत ढांचा तैयार किया है। इसमें पूंजीगत और इनके संचालन पर व्यय के लिए  अनुदान उपलब्ध कराया है। सरकार का मॉडल यह है कि पहले पांच वर्षों तक इन्हें सहायता देकर इनकी नींव को सुदृढ़ किया जाए, बाद में यह स्वयं के नवाचार और साझेदारियों के द्वारा भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। आईटी एवं स्टार्टअप सेक्टर के कंसलटेंट सुनील गुप्ता का कहना है कि सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस का प्रभाव केवल तकनीकी क्षेत्र तक सीमित नहीं है,  बल्कि स्वास्थ्य कृषि, शिक्षा और स्वच्छता जैसे सामाजिक क्षेत्रों में भी तकनीक आधारित समाधान इनके द्वारा विकसित किए जा रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न शहरों में स्थापित 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस क्षेत्रीय विकास को भी गति दे रहे हैं।  जिससे छोटे शहरों के युवाओं को भी विश्व स्तरीय सुविधाएं अपने ही प्रदेश में ही उपलब्ध हो रही है। क्या है सेंटर आफ एक्सीलेंस… सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आधुनिक अर्थव्यवस्था का इंजन कहा जाता है । यह ऐसे विशेषीकृत संस्थान होते हैं जो किसी एक उन्नत तकनीक या क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण, उत्पाद, विकास और उद्योग सहयोग के केंद्र के रूप में काम करते हैं। यहां पर स्टार्टअप और युवा उद्यमियों को उच्च स्तरीय लैब  सुविधाएं,  प्रोडक्ट परीक्षण, विशेषज्ञ मार्गदर्शन और उद्योग जगत से नेटवर्किंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं।  उत्तर प्रदेश के सात सेंटर ऑफ़ एक्सिलेंस…    – गौतमबुद्ध नगर में सीओई ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी – लखनऊ में मेडटेक सीओई – कानपुर नगर में सीओई टेलिकॉम (5जी/6जी)   – गौतमबुद्ध नगर में सीओई-आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड इनोवेशन ड्रिवेन एंटरप्रेन्योरशिप (एआईआईडीई) – सहारनपुर में सीओई टेलिकॉम (5जी/6जी)  – कानपुर नगरमें सीओई अनमैन्ड एरियल व्हीकल (यूएवी)/ ड्रोन टेक्नोलॉजी – गाज़ियाबाद में सीओई एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग

महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों के साथ बैठक की गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने

एमपीएसपी के शताब्दी वर्ष तक हो सौ संस्थाओं का संचालन : योगी आदित्यनाथ महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों के साथ बैठक की गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने परिषद के शताब्दी वर्ष 2032 को लेकर तय किए लक्ष्य, दिए दिशानिर्देश शताब्दी वर्ष में सालभर होगा विविध कार्यक्रमों का आयोजन, अभी से तैयारियों में जुटने के निर्देश गोरखपुर गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद (एमपीएसपी) के लिए इसके शताब्दी वर्ष 2032 तक सौ संस्थाओं के संचालन और इनमें एक लाख विद्यार्थियों को शिक्षा और कौशल से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने शताब्दी वर्ष में पूरे एक साल विविध कार्यक्रमों का आयोजन करने के लिए अभी से रूपरेखा बनाकर तैयारियों में जुट जाने के भी निर्देश दिए हैं। बुधवार को महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद का 93वां संस्थापक सप्ताह भव्यता से मनाया गया था। दिन में हुए मुख्य महोत्सव के बाद गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री ने देर शाम परिषद की सभी संस्थाओं के प्रमुखों के साथ महत्वपूर्ण बैठक कर शताब्दी वर्ष 2032 तक संस्थापक युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज और राष्ट्रसंत लीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज के सपनों और इच्छाओं को पूर्ण करने के निर्देश दिए। बैठक में श्री योगी ने कहा कि सभी संस्थाओं को अभी से शिक्षा परिषद के शताब्दी महोत्सव की तैयारियों में जुटना होगा। शताब्दी वर्ष 10 दिसंबर 2031 से 10 दिसंबर 2032 तक, पूरे एक साल मनाया जाएगा। सालभर में क्या क्या आयोजन होंगे, इसकी रुपरेखा अभी से तैयार करनी शुरू कर दी जाए। शताब्दी महोत्सव का पूरा साल यादगार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष तक शिक्षा, चिकित्सा, योग, सेवा और अन्य प्रकल्पों को मिलाकर परिषद के अंतर्गत सौ संस्थाओं का संचालन करने का लक्ष्य तय कर उस दिशा में तेजी से आगे बढ़ना होगा। शताब्दी वर्ष तक सौ बस्तियों को ‘मॉडल बस्ती’ बनाएं संस्थाएं गोरक्षपीठाधीश्वर ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं के प्रमुखों को निर्देशित किया कि वे शताब्दी वर्ष तक सौ बस्तियों को ‘मॉडल बस्ती’ बनाने का कार्य करें। इसके लिए बस्तियों को गोद लेकर वहां शिक्षा, चिकित्सा, स्वच्छता, सेवा, जागरूकता, रोजगार एवं स्वरोजगार आदि के कार्य किए जाएं। सभी तक जनकल्याण की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में सहयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि थारू और वनटांगिया बस्तियों में परिषद की संस्थाएं पहले से कार्य करती रही हैं। इन बस्तियों के उत्थान के मानक संतृप्ति के स्तर पर होने चाहिए। वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जुड़ें, हर संस्था किसी विशिष्टता से जानी जाए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की संस्थाओं को वैश्विक स्तर की प्रतिस्पर्धा से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय इस दिशा में काफी बेहतर कर कर सकता है। उन्होंने कहा कि शताब्दी वर्ष तक परिषद की सभी संस्थाओं की पहचान उनकी किसी न किसी विशिष्टता से बने, इसके लिए उन्हें किसी विशिष्ट कार्य से जुड़कर आगे बढ़ना होगा। शताब्दी वर्ष तक हों एक लाख विद्यार्थी, सबके पास हो स्किल गोरक्षपीठाधीश्वर ने महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के शताब्दी वर्ष तक संस्थाओं में एक लाख विद्यार्थियों के अध्ययनरत होने का भी लक्ष्य दिया। साथ ही कहा कि उस समय तक हर विद्यार्थी को किसी न किसी एक स्किल से जोड़ा जाए। हर संस्था एक-एक विद्यार्थी को अपने स्तर से स्वरोजगार से जोड़ने का प्रयास करे। खुद मानक बनें संस्थाओं के प्रमुख बैठक में श्री योगी ने कहा कि महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के सभी शिक्षक और कर्मचारी परिश्रम और ईमानदारी के मानक बनें। इसके लिए संस्थाओं के प्रमुखों को खुद मानक बनकर शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए रोल मॉडल बनना होगा। आधुनिकता, प्राचीनता, परंपरा व प्रगति की संस्कृति दिखे परिसर में गोरक्षपीठाधीश्वर ने कहा कि अनुशासित परिसर संस्कृति शिक्षा परिषद की संस्थाओं की पहचान है। संस्थाओं में आधुनिक युगानुकूल विचारों के साथ पारंपरिक राष्ट्रीय और सांस्कृतिक मूल्यों का भी संरक्षण होता रहेगा। इन संस्थाओं ने भारत की परंपरा और प्रगति को दर्शाने के साथ लोक कल्याण का भी मॉडल दिया है। उन्होंने कहा कि संस्थाओं के परिसर में आधुनिकता, प्राचीनता, परंपरा व प्रगति की संस्कृति दिखनी चाहिए। संस्थाओं की कार्यपद्धति में आध्यात्मिकता का पुट होना चाहिए। नशा मुक्त परिसर बनाना सुनिश्चित करें मुख्यमंत्री ने सभी संस्थाओं के प्रमुखों को निर्देशित किया कि वे अपनी अपनी संस्थाओं के परिसर को हर प्रकार के नशा से मुक्त परिसर बनाना सुनिश्चित करें। नशा चाहे ड्रग का हो या फिर स्मार्टफोन के अत्यधिक प्रभाव का, ये कुप्रवृत्तियां हैं और विद्यार्थियों को इनसे बचाना ही होगा। विकसित भारत के लक्ष्य से खुद को जोड़ें संस्थाएं गोरक्षपीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा वे खुद और विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य से जोड़ें। प्रदेश सरकार भी इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। केंद्र और राज्य सरकार के लक्ष्यों के अनुरूप संस्थाएं भी अपने स्तर पर लक्ष्य तय करें जिससे 2047 तक विकसित उत्तर प्रदेश और विकसित भारत की संकल्पना को साकार किया जा सके। उन्होंने कहा कि तकनीकी, मेडिकल, पैरामेडिकल, फार्मेसी, कृषि के विद्यार्थियों का ‘विकसित भारत 2047’ में क्या योगदान होगा, इस पर कार्ययोजना बनाकर काम किया जाए। लोक कल्याण और सामाजिक उत्तरदायित्व पर हो फोकस श्री योगी ने कहा कि शिक्षा परिषद की संस्थाओं का फोकस लोक कल्याण पर भी हो। संस्थाओं को अपना सामाजिक उत्तरदायित्व भी निभाना होगा। सांस्कृतिक पुर्नजागरण के साथ देश को विश्वगुरु बनाने में अपना योगदान देना होगा। समाज के एक-एक पैसे का हो सदुपयोग बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि सभी संस्थाओं को वित्तीय अनुशासन, ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ आगे बढ़ते रहना है। शताब्दी वर्ष के लक्ष्यों की प्राप्ति के साथ हमें समाज के एक-एक पैसे का सदुपयोग सुनिश्चित करना होगा। बैठक में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद के सभी पदाधिकारी, सदस्य और परिषद की सभी संस्थाओं के प्रमुख उपस्थित रहे।

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: मध्य प्रदेश समेत छह राज्यों में बढ़ी SIR की समयसीमा

भोपाल /नई दिल्ली  चुनाव आयोग ने मध्य प्रदेश  6 राज्यों में मतदाता सूची में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिविजन की समय सीमा को बढ़ा दिया है। चुनाव आयोग ने जिन राज्यों में एसआईआर की समय सीमा बढ़ाई है उनमें MP के अलावा गुजरात,उत्तर प्रदेश , छत्तीसगढ़, तमिलनाडु और अंडमान शामिल हैं। चुनाव आयोग के अनुसार छह राज्यों/UT के चीफ इलेक्टोरल ऑफिसर (CEOs) से मिली रिक्वेस्ट के आधार पर, इलेक्शन कमीशन ऑफ इंडिया ने इन 6 राज्यों/UT में इलेक्टोरल रोल के चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के शेड्यूल में बदलाव किया है। किस राज्य में क्या है नई तारीख इसमें 01.01.2026 को क्वालिफाइंग तारीख माना गया है। तमिलनाडु और गुजरात में ड्राफ्ट रोल के प्रकाशित होने की संशोधित तारीख 19 दिसंबर है। ये पहले 14 दिसंबर थी। वहीं, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान निकोबार ड्राफ्ट रोल के प्रकाशित होने की तारीख को 18 दिसंबर से बढ़ाकर 23 दिसंबर किया गया है। यूपी में ड्राफ्ट रोल के प्रकाशित होने की नई तारीख 26 दिसंबर की बजाय 31 दिसंबर होगी। केरल में पहले ही बढ़ाई थी तारीख केरल में राज्य चुनाव आयोग ने पहले ही एसआईआर के लिए एक्सटेंशन दे दिया है। राज्य की और समय की रिक्वेस्ट के बाद अब डेडलाइन 11 दिसंबर से बढ़ाकर 18 दिसंबर कर दी गई है। केरल में सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस, TMC, CPI(M) और SP ने आरोप लगाया कि कमीशन ने जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया और बिना वजह जल्दबाजी में रिवीजन टाइमलाइन के साथ आगे बढ़ा। आयोग के अनुसार, तमिलनाडु और गुजरात में SIR जमा करने की नई अंतिम तिथि अब 14 दिसंबर 2025 (रविवार) होगी, जबकि इससे पहले यह 19 दिसंबर 2025 (शुक्रवार) थी. मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ एवं अंडमान और निकोबार के लिए अंतिम तिथि 18 दिसंबर 2025 (गुरुवार) से बढ़ाकर 23 दिसंबर 2025 (मंगलवार) कर दी गई है. वहीं, यूपी में SIR की अंतिम तिथि 26 से बढ़कर 31 दिसंबर 2025 (बुधवार) कर दी गई है. चुनाव आयोग (EC) ने छह राज्यों आर केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की समय सीमा को आगे बढ़ा दिया है. यह कदम मतदाता सूची को शुद्ध करने के लिए उठाया गया है. उत्तर प्रदेश में फॉर्म जमा करने की अवधि 15 दिनों के लिए बढ़ाई गई है. तमिलनाडु और गुजरात में यह अवधि 3 दिनों के लिए बढ़ाई गई है. वहीं, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अंडमान निकोबार में 7 दिनों की अतिरिक्त मोहलत दी गई है. इस वृद्धि के साथ ही ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने की अवधि भी बढ़ा दी गई है. आयोग ने यह फैसला सुनिश्चित करने के लिए लिया है कि सभी पात्र नागरिकों के नाम सूची में शामिल हों.  

मोहन यादव ने कांग्रेस पर साधा निशाना, नक्सलवाद मुक्त जिलों और मेडिकल कॉलेज विस्तार का किया खुलासा

इंदौर  मुख्यमंत्री मोहन यादव गुरुवार को इंदौर आए और विधायक गोलू शुक्ला के निवास पर पहुंचकर वर-वधू को आशीर्वाद दिया।मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने हर क्षेत्र में काम किया है, चाहे सिंचाई का रकबा बढ़ाना हो या युवाओं को रोजगार देना। हमने  मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुनी की है। नक्सलवाद के मुद्दे पर उन्होंने कांग्रेस को घेरा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय नक्सलवाद बड़ी समस्या थी, जिसे उन्होंने खत्म करने के लिए कुछ नहीं किया। हमारी सरकार ने नक्सलवाद के खात्मे में बड़ी भूमिका निभाई है, जिससे कई जिले नक्सलवाद मुक्त हो चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस पर केवल आरोप लगाकर समस्या को जिंदा रखने की कोशिश करने का आरोप लगाया, जबकि उनकी सरकार समाधान में विश्वास रखती है। उन्होंने बताया कि सरकार के कार्यकाल के दो साल पूरे होने जा रहे हैं और रोजगार के लिए इंडस्ट्री ग्रोथ रेट राष्ट्रीय औसत से आगे चल रही है।विमानतल पर भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा, जिलाध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा और प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे ने उनका स्वागत किया। विमानतल से वे बाणगंगा स्थित विधायक शुक्ला के निवास पर गए। कुछ देर बाद वे फिर विमानतल पहुंचे और बेंगलुरु के लिए रवाना हो गए। वे रात को फिर इंदौर लौटेंगे और निजी विमान से भोपाल के लिए प्रस्थान करेंगे।  

इंडिगो एयरलाइंस का बड़ा कदम: 10 हजार रुपये मुआवजा, साथ ही 10 हजार का ट्रैवल वाउचर

नई दिल्ली इंडिगो की फ्लाइट्स कैंसिल होने की वजह से यात्रियों को भारी दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं. दिसंबर के पहले हफ्ते में सबसे ज्यादा यात्रियों को परेशानी हुईं, क्योंकि इस दौरान सैकड़ों इंडिगो की फ्लाइट्स रद्द कर दी गईं. जिससे यात्रियों को आर्थिक तौर पर भी भारी नुकसान हुआ.  जिसके बाद एयरलाइन के खिलाफ DGCA ने सख्त कदम उठाया है. अब इंडिगो ने 3, 4 और 5 दिसंबर को बड़ी संख्या में उड़ानें रद्द होने की वजह से यात्रियों को राहत देने की घोषणा की है. कंपनी ने कहा है कि प्रभावित यात्रियों को सरकार के नियमों के अनुसार 5,000 रुपये से 10,000 रुपये तक का मुआवजा दिया जाएगा.  ट्रैवल वाउचर को लेकर ये नियम इसके साथ ही एयरलाइन ने सबसे ज्यादा प्रभावित यात्रियों के लिए 10,000 रुपये तक के अतिरिक्त ट्रैवल वाउचर जारी करने की भी घोषणा की है. यह फैसला उन यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है, जिनकी यात्रा योजनाएं अचानक बदल गईं और जिन्हें भारी असुविधा का सामना करना पड़ा.  इस ट्रैवल वाउचर की खास बात यह है कि इसे अगले 12 महीनों तक कभी भी इस्तेमाल किया जा सकता है. यात्री भारत में इंडिगो की किसी भी घरेलू उड़ान या फिर अंतरराष्ट्रीय रूट के लिए इन वाउचर का उपयोग कर सकते हैं. यात्री ईमेल चेक करें इंडिगो ने बताया कि 10 हजार रुपये का ट्रैवल वाउचर उन यात्रियों दी जाएंगी, जिनकी यात्राएं एक से ज्यादा बार बदलनी पड़ीं, यानी जिनकी उड़ानें बार-बार रीशेड्यूल हुईं, या जिन्हें एयरपोर्ट पर लंबा इंतजार करना पड़ा. यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपने रजिस्टर्ड ईमेल और मोबाइल नंबर पर भेजे गए मैसेज को चेक करें, ताकि उन्हें मुआवजा और वाउचर क्लेम करने की प्रक्रिया में आसानी हो. इंडिगो ने यात्रियों से मांगी माफी  कंपनी के अनुसार, मुआवजा राशि DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के तहत दी जाएगी. जिन यात्रियों की उड़ानें एयरलाइन की वजह से रद्द हुईं, वे नियमों के मुताबिक इस मुआवजे के हकदार हैं. इंडिगो ने स्पष्ट किया कि मुआवजा राशि फ्लाइट की दूरी, टिकट श्रेणी और यात्री को हुई असुविधा के आधार पर दी जाएगी. इसका उद्देश्य यात्रियों को हुए आर्थिक नुकसान और अनावश्यक परेशानी को कम करना है.  इंडिगो ने बयान जारी कर कहा कि रद्द उड़ानों के कारण जिन यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ी, उनके लिए कंपनी खेद व्यक्त करती है और यह सुनिश्चित कर रही है कि भविष्य में ऐसे हालात दोबारा न हो.      

अरुणाचल में खाई में गिरा मजदूरों से भरा ट्रक, 17 की मौत की संभावना

अंजाव अरुणाचल प्रदेश में गुरुवार को बड़ा हादसा हो गया। इसकी खबर आज सामने आई है। वहां एक ट्रक खाई में गिर गया। हादसे में 17  लोगों की मौत की खबर है। ये सारे असम के मजदूर थे। बताया जा रहा है कि इस हादसे में सिर्फ एक मजदूर की जान बची है। उसी की सूचना के आधार पर खबर सामने आई है।हादसा भारत-चीन बॉर्डर के पास हयुलियांग–चगलागम रोड पर हुआ। अंजाव जिले के डिप्टी कमिश्नर मिलो कोजिन ने हादसे की पुष्टि की है। अभी तक 13 बॉडीज रिकवर की जा चुकी है।  डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि हादसा बेहद खतरनाक पहाड़ी मोड़ पर हुआ। सड़क बहुत संकरी है और कई हिस्सों में ढलान काफी तेज है। मजदूर इस इलाके में चल रहे बॉर्डर रोड निर्माण कार्य के लिए जा रहे थे। कैसे हुआ हादसा ? अंजाव जिले के डिप्टी कमिश्नर मिलो कोजिन ने पुष्टि की कि हादसा बेहद खतरनाक पहाड़ी मोड़ पर हुआ. उन्होंने बताया कि सड़क बहुत संकरी है और कई हिस्सों में ढलान काफी तेज है. मजदूर इस इलाके में चल रहे बॉर्डर रोड निर्माण कार्य के लिए जा रहे थे. हादसे के बाद आसपास के ग्रामीणों ने सबसे पहले मौके पर पहुंचकर मदद शुरू की. बाद में पुलिस, जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन और सेना की टीमों ने रेस्क्यू शुरू किया. खाई बहुत गहरी होने के कारण बचाव मुश्किल हो रहा है. कई मजदूरों को खाई में नीचे फंसे देखा गया है जिन तक पहुंचने में समय लग रहा है. स्थानीय अधिकारियों ने बताया कि ट्रक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और कई मजदूरों के शरीर खाई में अलग-अलग हिस्सों में मिले हैं. इंडो-चीन बॉर्डर से जुड़े सड़क पर हुआ हादसा यह इलाका अपनी मुश्किल भौगोलिक परिस्थितियों के लिए जाना जाता है. इंडो-चीन बॉर्डर से जुड़े सड़क प्रोजेक्ट पर काम करने वाले मजदूरों को रोजाना बेहद खतरनाक रास्तों से गुजरना पड़ता है. कई बार खराब मौसम, भूस्खलन और संकरी सड़कें हादसों की वजह बनती हैं. अधिकारियों ने कहा कि घटना की जांच की जाएगी ताकि यह पता चले कि ट्रक तेज रफ्तार में था या सड़क की हालत वजह बनी. प्रशासन ने परिवारों से संपर्क भी शुरू कर दिया है और उन्हें पूरी मदद देने का भरोसा दिया है. पहाड़ी इलाके में हादसा यह हादसा समुद्र तल से करीब 10 हजार फीट की ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाके में हुआ। यहां सड़क बहुत संकरी और खतरनाक बताई जा रही है। मजदूर अरुणाचल से असम के तिनसुकिया जिले के छाट (पोरा घर) की ओर जा रहे थे, तभी वाहन फिसलकर ढलान से नीचे जा गिरा। शवों को निकालने में दिक्कत आ रही NDRF की टीम अभी भी मौके पर तैनात है, लेकिन खाई बहुत गहरी होने और सीमित संसाधनों की वजह से शवों को निकालने में मशक्कत करनी पड़ रही है। खराब मौसम और अत्यधिक ऊंचाई की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन काफी धीमी गति से चल रहा है। अरुणाचल और असम पुलिस की जॉइंट टीम हादसे की जांच और रेस्क्यू में लगी है। 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सभी प्रयास करने की अपील की

प्रदेश में अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा के लिये करें सभी प्रयास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव टास्क फोर्स का गठन शीघ्र एरिजोना, पर्ड्यू एवं एशिया यूनिवर्सिटी से मध्यप्रदेश में अध्ययन केन्द्र खोलने के लिये संवाद तेज भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रदेश के विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय शिक्षा मध्यप्रदेश में ही उपलब्ध कराई जाए, जिससे उच्च शिक्षा के इच्छुक विद्यार्थियों को विदेश जाकर अध्ययन करने की आवश्यकता कम पड़े और स्थानीय स्तर पर ही अंतर्राष्ट्रीय शिक्षा गुणवत्ता का अकादमिक वातावरण मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गत बुधवार को 'सुशासन भवन' में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार मध्यप्रदेश को वैश्विक शिक्षा मानचित्र पर नई पहचान दिलाने की दिशा में अब निर्णायक कदम बढ़ा रही है। राज्य सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के अध्ययन केन्द्रों की स्थापना के लिए विशेष टास्क फोर्स गठित करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में आदेश शीघ्र ही जारी किए जाएंगे। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि इस सिलसिले में तेजी से प्रगति हो रही है। संयुक्त राज्य अमेरिका के दो विश्व विख्यात विश्वविद्यालयों Arizona State University (ASU) और Purdue University के साथ ताईवान की प्रतिष्ठित Asia University से मध्यप्रदेश में अपने अध्ययन केन्द्र स्थापित करने के लिए सक्रियता से संवाद चल रहा है। इन वर्ल्ड क्लास संस्थानों को उच्च स्तरीय शिक्षा, शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक पहचान प्राप्त है। शासन स्तर पर इन विश्वविद्यालयों के शीर्ष प्रबंधन से लगातार बातचीत हो रही है, जिससे संभावनाओं को बेहतर तरीके से मूर्त रूप देने में और तेजी लाई जा सके। राज्य सरकार की मंशा है कि प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के अध्ययन केन्द्र खुलने से प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और बेहतर होगी। इंजीनियरिंग, एआई, डेटा साइंस, हेल्थ केयर साईंस, मैनेजमेंट और नये-नये उभरते तकनीकी क्षेत्रों में विद्यार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय पाठ्यक्रम उपलब्ध होंगे। साथ ही स्थानीय उद्योगों, स्टार्टअप्स और इनोवेशन इकोसिस्टम को भी उच्च स्तरीय विशेषज्ञता और संयुक्त शोध कार्यक्रमों (ज्वाइंट रिसर्च प्रोग्राम्स) का भी लाभ मिलेगा। राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में गठित की जा रही टास्क फोर्स में प्रो. संतोष विश्वकर्मा को अध्यक्ष नामांकित किया जा रहा है। यह टास्क फोर्स अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के अध्ययन केन्द्रों की स्थापना से जुड़े सभी तकनीकी, शैक्षणिक और कानूनी पहलुओं का अध्ययन करेगी। साथ ही इन विश्वविद्यालयों के साथ होने वाले करार (समझौते) की प्रक्रिया को गति देगी। अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों से वार्ताएं सफल रहने पर भविष्य में मध्यप्रदेश उच्च शिक्षा के क्षेत्र में देश का सबसे आकर्षक एवं आइडियल डेस्टिनेशन बनेगा, जहां वैश्विक विश्वविद्यालयों का व्यापक शैक्षिक-तंत्र प्रदेश की प्रतिभाओं को नव विकसित परिदृश्य में नए अवसर और नई दिशाएं देगा। अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान द्वारा वर्तमान में फ्यूचर हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस, सेमीकंडक्टर्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एग्री-टेक तथा अन्य नवोन्मेषी क्षेत्रों में राज्य के तीव्र विकास के लिये आवश्यक विविध रणनीतिक पहलों पर काम किया जा रहा है। इन क्षेत्रों की उच्च विशेषज्ञता एवं निरंतर विकसित होती प्रकृति की पूर्ति को दृष्टिगत रखते हुए राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रख्यात विशेषज्ञों की आवश्यकता की पूर्ति की जा रही है, जो संस्थान को विषय-विशेष मार्गदर्शन, उच्च-स्तरीय वैज्ञानिक परामर्श और रणनीतिक दिशा प्रदान करेंगे। ऐसे विशेषज्ञों के जुड़ने से संस्थान की क्षमता संवर्धन के साथ यह नवाचार इन प्राथमिक क्षेत्रों में संस्थान के रूपांक, क्रियान्वयन और अनुश्रवण को भी मजबूत करेगा। बैठक में अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव दीक्षित, प्रमुख सचिव एवं संस्थान के चीफ एक्जीक्यूटिव ऑफिसर  गुलशन बामरा एवं डायरेक्टर  ऋषि गर्ग सहित अन्य पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

कुबरेश्वर धाम के पास डर्टी वीडियो मामले में प्रदीप मिश्रा का बयान, ‘धाम आएं, होटल में न रुकें

सीहोर  मध्य प्रदेश  के प्रसिद्ध कुबरेश्वर धाम के पास बने एक होटल में वायरल हुए डर्टी वीडियो मामले ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। इस घटना पर अब कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में कथा के दौरान उन्होंने कहा –  “कुबरेश्वर धाम आए हैं, तो किसी होटल में मत जाइए। बाबा कांबेश्वर भंडारी का द्वार खुला है। यहां पार्किंग फ्री, सोने की जगह फ्री, ओढ़ने-बिछाने को सब मिलेगा, खाना भी फ्री मिलेगा। जैसे बेटियां मायके जाती हैं, वैसे ही धाम आएं—बस होटल में न रुकें। राजस्थान से आए कपल का वीडियो बनाकर वायरल किया गया मिली जानकारी के अनुसार राजस्थान से आए एक कपल ने कुबरेश्वर धाम क्षेत्र के होटल डमरू वाला के कमरे में ठहराव किया था। तभी पास के होटल उपासना पैलेस के एक कर्मचारी ने सामने की खिड़की से कपल का अश्लील वीडियो बना लिया। बताया जा रहा है कि वीडियो बनाने के बाद उसने इसे अपने दोस्तों को भेज दिया, जिसके बाद यह तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गया। मैनेजर की शिकायत पर दर्ज हुआ केस जब होटल डमरू वाला के मैनेजर को यह वीडियो मिला तो उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने: चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है आरोपी कर्मचारी वीडियो बनाने वाला बताया जा रहा है पुलिस अब पूरे मामले की तकनीकी जांच कर रही है स्थानीय स्तर पर बढ़ी सुरक्षा चर्चा इस घटना के बाद कुबरेश्वर धाम क्षेत्र में होटल सुरक्षा, प्राइवेसी और निगरानी पर भी सवाल उठने लगे हैं। श्रद्धालुओं में भी इस मामले को लेकर नाराजगी देखी जा रही है। निजता भंग करने का मामला दर्ज मीडिया में मामला उछलने के बाद पुलिस अब सक्रिय हुई है। मंडी थाना पुलिस ने होटल उपासना पैलेस के संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ निजता भंग करने, अश्लील सामग्री प्रसारित करने और आईटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। कुबेरेश्वर धाम जैसे भीड़भाड़ वाले धार्मिक क्षेत्र में इस तरह की घटना ने पर्यटन और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। होटल में रुकते समय इन बातों का ध्यान रखें      कमरे की खिड़कियां और दरवाजे हमेशा बंद रखें।     अजनबियों से सावधान रहें, खासकर होटल कर्मचारियों से।     अपने सामान और निजी वस्त्रों को सुरक्षित जगह पर रखें।     अगर कोई संदिग्ध गतिविधि देखी जाए तो तुरंत होटल प्रबंधन या पुलिस से संपर्क करें।     अपने कमरे में कैमरे या अन्य सुरक्षा उपकरणों का ध्यान रखें। यह घटना धार्मिक स्थल की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाती है? इस तरह की घटना ने सिर्फ धार्मिक स्थल की इज्जत को नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि सुरक्षा और पर्यटन पर भी सवाल उठा दिए हैं। कुबेरेश्वर धाम, जो एक बहुत ही प्रमुख धार्मिक जगह है। वहां इस तरह की घटना के बाद अब पर्यटकों और श्रद्धालुओं के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। लोग सोचने लगे हैं कि अगर यहां ऐसा हो सकता है, तो कहीं और क्या होगा? दोस्तों से शेयर किया दंपती का वीडियो सुमित पैरवाल ने वीडियो बनाकर उसे वाट्सएप के जरिए अपने दोस्तों के साथ शेयर किया था। इस वीडियो के प्रसार के बाद होटल प्रबंधक कृष्णपाल ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने सुमित पैरवाल के साथ-साथ अंकित जाटव और विनोद मालवीय के खिलाफ शिकायत दर्ज की। इन तीनों को हिरासत में लिया गया है। आरोपितों के खिलाफ अश्लीलता फैलाने, निजता भंग करने और सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत मामला दर्ज किया गया। इस मामले में एक और आरोपित कमलेश उर्फ कनक कौशल की तलाश जारी है।