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मध्यप्रदेश पुलिस के डायल-112 की त्वरित और प्रभावी प्रतिक्रिया

मध्यप्रदेश पुलिस की डायल-112 की संवेदनशील एवं त्वरित कार्यवाही तीन अलग-अलग घटनाओं के दौरान आत्महत्या का प्रयास कर रहे व्यक्तियों को समय रहते बचाया भोपाल  मध्यप्रदेश में डायल-112 की त्वरित प्रतिक्रिया प्रणाली लगातार आम जन की सुरक्षा और जीवन रक्षा में प्रभावी भूमिका निभा रही है। बीते दिनों रायसेन, देवास और छिंदवाड़ा जिलों में तीन अलग-अलग घटनाओं के दौरान आत्महत्या का प्रयास कर रहे व्यक्तियों को समय रहते बचाने में डायल-112 के पुलिसकर्मियों ने तत्परता, संवेदनशीलता और मानवीयता का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया। रायसेन जिले के थाना कोतवाली क्षेत्र में मखनी गाँव में एक 35 वर्षीय व्यक्ति द्वारा स्वयं को कमरे में बंद कर आत्महत्या के उद्देश्‍य से फाँसी लगाने का प्रयास कर रहा था। जिसकी सूचना राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम, डायल-112 भोपाल में प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही डायल-112 वाहन घटना स्थल के लिए रवाना हुआ। आरक्षक संजय श्रीवास्तव एवं पायलेट रोहित कुमार ने मौके पर पहुँचकर स्थानीय लोगों की मदद से गेट तोड़ कर पीड़ित व्यक्ति को तत्काल फंदे से उतारा। डायल 112 जवानों ने पीड़ित व्यक्ति को एफआरव्ही वाहन से लेकर तत्काल जिला शासकीय चिकित्सालय रायसेन में भर्ती करवाया। दूसरी घटना देवास जिले के थाना भौंरासा क्षेत्र की है, जहाँ एक 21 वर्षीय महिला ने पारिवारिक विवाद के चलते आत्महत्या का प्रयास किया। यह सूचना प्राप्त होते ही आरक्षक अरुण रावत और पायलट अनुराग चौधरी मौके पर पहुँचे। उन्होंने समझाइश, संवाद और संवेदनशील व्यवहार के माध्यम से महिला को आत्मघाती कदम उठाने से रोका और उसे सुरक्षित थाना भौंरासा लाया गया। तीसरी घटना छिंदवाड़ा जिले के थाना अमरवाड़ा क्षेत्र में हुई, जहाँ 24 वर्षीय युवक ने अज्ञात कारणों से जहरीले पदार्थ का सेवन कर लिया था। सूचना प्राप्त होते ही सैनिक गेंदालाल यादव एवं पायलट उमेश पुरी गोस्वामी ने युवक को तुरंत सिविल अस्पताल अमरवाड़ा पहुँचाकर उपचार शुरू कराया। युवक का इलाज जारी है। डायल-112 की इन लगातार त्वरित और प्रभावी कार्रवाइयों ने यह सिद्ध किया है कि मध्यप्रदेश पुलिस की यह सेवा आपात पुलिस सहायता के साधन के साथ मानव जीवन की रक्षा करने वाली ‘जीवन-रेखा’ बनती जा रही है। मध्यप्रदेश पुलिस सभी नागरिकों से अपील करती है कि किसी भी प्रकार के मानसिक तनाव, अवसाद या संकट की स्थिति में स्वयं को नुकसान पहुँचाने के बजाय सहायता के लिए पुलिस या अपने निकटवर्ती लोगों से संपर्क करें।  

धैलाधार रन चाहिए: निर्णायक मुकाबले में रोहित–कोहली पर फैंस की निगाह, जायसवाल और गेंदबाजों पर भी भरोसा

नई दिल्ली  भारत के कुछ युवा खिलाड़ी अभी तक अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं और ऐसे में उन पर दबाव होगा। दक्षिण अफ्रीका टेस्ट श्रृंखला जीतने के बाद अब वनडे श्रृंखला जीतने में भी कसर नहीं छोड़ेगा और ऐसे में भारतीय टीम को अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने की जरूरत है। भारत अगर इस मैच में जीत हासिल करता है तो पिछले कुछ समय से टीम को लेकर चल रही अटकलें पर भी विराम लग जाएगा। इसके लिए कोहली और रोहित को फिर से अपना महत्वपूर्ण योगदान देना होगा। इसमें कोई संदेह नहीं कि इन दोनों का वनडे क्रिकेट में कोई सानी नहीं है और उन्हें इस तरह के दबाव वाले मैच में खेलने का अच्छा अनुभव है। इसलिए भारत की जीत में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होगी। रोहित और कोहली अपनी करियर के अवसान पर हैं और वह इसमें एक और गौरवशाली अध्याय जोड़ने की कोशिश करेंगे। कोहली ने अपनी पिछली तीन पारियों में दो शतक और एक अर्धशतक लगाया है, जबकि रोहित ने अपनी पिछली चार पारियों में एक शतक और दो अर्धशतक लगाए हैं। उन्हें कुछ युवा बल्लेबाजों का अच्छा सहयोग मिल रहा है जैसा कि पिछले मैच में रुतुराज गायकवाड़ ने अपना योगदान दिया था। उन्होंने अपना पहला वनडे शतक लगाया था। लेकिन यशस्वी जायसवाल को अभी भी इस श्रृंखला में सलामी बल्लेबाज के रूप में अपनी क्षमता का भरपूर प्रदर्शन करना बाकी है। यह प्रतिभाशाली युवा खिलाड़ी अच्छी शुरुआत को बड़े स्कोर में बदलने के लिए उत्सुक होगा। जायसवाल को बाएं हाथ के तेज गेंदबाजों के खिलाफ जूझना पड़ रहा है फिर चाहे वह वेस्टइंडीज के जेडन सील्स हों या इस श्रृंखला में मार्को यानसन और नांद्रे बर्गर। वह अपने करियर में 30 बार बाएं हाथ के गेंदबाजों का शिकार बने हैं। जायसवाल और टीम प्रबंधन इससे अनजान नहीं रह सकते और इसमें सुधार करने का काम शायद पहले ही शुरू हो चुका है। लेकिन अगर वह सुधार नहीं कर पाए तो टीम को अन्य विकल्पों पर विचार करने के लिए बाध्य होना पड़ सकता है। टीम के पास गायकवाड़ के रूप में एक अदद सलामी बल्लेबाज मौजूद है। एसीए-वीडीसीए स्टेडियम की पिच अक्सर बल्लेबाजों के अनुकूल होती है और भारत का यहां शानदार रिकॉर्ड रहा है। उसने यहां 2005 से 10 एकदिवसीय मैचों में से सात में जीत हासिल की है लेकिन यहां खेले गए पिछले मैच में उसे ऑस्ट्रेलिया से हार का सामना करना पड़ा था। भारत वॉशिंगटन सुंदर को विश्राम देकर उनकी जगह तिलक वर्मा को मध्यक्रम की बल्लेबाजी को मजबूत करने के लिए अंतिम एकादश में शामिल करने पर भी गंभीरता से विचार करेगा। ऋषभ पंत भी एक विकल्प हो सकते हैं लेकिन तिलक स्पिन गेंदबाजी भी कर लेते हैं और वह बेहतरीन क्षेत्ररक्षक के भी हैं। कप्तान केएल राहुल ने अभी तक अच्छा प्रदर्शन किया है लेकिन इस श्रृंखला में ओस के कारण टॉस की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो गई है। भारत वनडे में पिछले 20 मैच से टॉस नहीं जीत पाया है जिसका खामियाजा उसे रायपुर में दूसरे वनडे में भुगतना पड़ा। भारतीय गेंदबाज भी अभी तक अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पा रहे हैं। अब भारत को उम्मीद होगी कि उनके युवा तेज गेंदबाज प्रसिद्ध कृष्णा और हर्षित राणा अच्छा प्रदर्शन करेंगे और प्रभावशाली अर्शदीप सिंह का पूरा साथ देंगे। दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीका श्रृंखला जीतने के लिए प्रतिबद्ध है। लेकिन वह तेज गेंदबाज बर्गर और बल्लेबाज टोनी डी जॉर्जी की फिटनेस को लेकर चिंतित है। यह देखना होगा कि ये दोनों खिलाड़ी इस मैच के लिए पूरी तरह फिट हो पाते हैं या नहीं। टीम इस प्रकार हैं: भारत: केएल राहुल (कप्तान/विकेट कीपर), रोहित शर्मा, यशस्वी जायसवाल, विराट कोहली, तिलक वर्मा, ऋषभ पंत (विकेट कीपर), वाशिंगटन सुंदर, रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव, नीतीश कुमार रेड्डी, हर्षित राणा, रुतुराज गायकवाड़, प्रसिद्ध कृष्णा, अर्शदीप सिंह, ध्रुव जुरेल। दक्षिण अफ्रीका: तेम्बा बावुमा (कप्तान), ओटनील बार्टमैन, कॉर्बिन बॉश, मैथ्यू ब्रीट्ज़के, डेवाल्ड ब्रेविस, नांद्रे बर्गर, क्विंटन डी कॉक, टोनी डी जॉर्जी, रुबिन हरमन, केशव महाराज, मार्को यानसन, एडेन मार्क्रम, लुंगी एनगिडी, रयान रिकेलटन, प्रेनेलन सुब्रायन। समय: मैच दोपहर 1.30 बजे शुरू होगा।  

10 साल में एमपी के 32,000 से अधिक स्कूल हुए बंद, शिक्षकों व छात्रों की संख्या घटी; CBI जांच की मांग तेज

भोपाल  प्रदेश में वर्ष 2013-14 की तुलना में 2025-26 तक शासकीय प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने सरदारपुर विधायक प्रताप ग्रेवाल के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 2013-14 में सरकारी स्कूलों की संख्या 1,14,972 थी, जो घटकर 82,128 रह गई। यानी 32,844 विद्यालय कम हुए। इसी अवधि में शिक्षकों की संख्या 2,91,992 से घटकर 2,33,817 रह गई, जो कुल 61,175 की कमी है। क्या कहा मंत्री ने मंत्री ने बताया कि 2025-26 में 21,193 शासकीय माध्यमिक विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें 20 से कम विद्यार्थी हैं। वहीं 29,486 स्कूलों में छात्रों की संख्या 40 से कम है। प्रदेश के 8,533 स्कूल केवल एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं, जबकि 28,716 स्कूलों में सिर्फ दो शिक्षक हैं। बढ़ा बजट वर्ष 2010-11 में स्कूल शिक्षा विभाग का बजट 6,374.25 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 36,581.64 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं शासकीय विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक विद्यार्थियों की संख्या 2010-11 में 133.66 लाख थी, जो घटकर 2025-26 में 79.39 लाख रह गई। यानी कुल 54.27 लाख विद्यार्थियों की कमी हुई है। मंत्री ने बजट बढ़ने के कारण के रूप में सातवें वेतनमान और महंगाई भत्ते को वजह बताया। जबकि विद्यालय और शिक्षक संख्या में कमी के पीछे शालाओं के मर्ज होने और शिक्षकों की सेवानिवृत्ति को कारण बताया गया। हालांकि, विद्यार्थियों की संख्या में भारी कमी को लेकर कोई कारण नहीं बताया गया। वहीं मीडिया से बातचीत में विधायक प्रताप ग्रेवाल ने कहा कि वर्ष 2014-15 में 82 लाख विद्यार्थियों को विभिन्न प्रकार की छात्रवृत्ति दी गई थी, जो 2025-26 में घटकर 58 लाख रह गई। वर्ष 2013-14 में 93.7 लाख बच्चों को निश्शुल्क पाठ्यपुस्तकें और गणवेश वितरित किए गए थे, जबकि 2025-26 में यह संख्या घटकर 56.82 लाख रह गई। मध्यान्ह भोजन के लाभार्थी 75.75 लाख से घटकर 37.23 लाख और निश्शुल्क साइकिल योजना के लाभार्थी 3.29 लाख से घटकर 1.63 लाख रह गए। सीबीआई जांच की मांग ग्रेवाल ने सवाल उठाया कि स्कूल, शिक्षक, छात्र और सभी योजनाओं के लाभार्थी कम हो रहे हैं, फिर भी बजट कई गुना कैसे बढ़ गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार सरकारी स्कूलों को बंद कर निजी स्कूलों को संरक्षण दे रही है और शिक्षा व्यवस्था शिक्षा माफिया के हाथों में जाती दिख रही है। उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।

कॉलेज में नई भाषा सीखने का अवसर, परिवार और दोस्तों को भी मिलेगा शामिल होने का मौका, माइक्रो-प्रमाणपत्र होगा प्रदान

ग्वालियर  देश के उच्च शिक्षण संस्थानों के छात्रों के लिए राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एक रोचक पहल शुरू की जा रही है। भारतीय भाषा समिति ने 'एक और भारतीय भाषा सीखें' पहल के विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिसमें सभी छात्र अब कम से कम तीन भाषाओं का ज्ञान लेंगे। यानि छात्रों को अपनी मातृभाषा के अलावा कम से कम एक स्थानीय और एक अतिरिक्त भारतीय भाषा सिखाना है। यह आदेश यूजीसी के द्वारा जारी किया गया है, इसमें खास बात यह है कि इसमें सिर्फ छात्र के लिए नहीं बल्कि उनके मित्र और स्वजन भी शामिल हो सकेंगे। इसके लिए शिक्षार्थियों को नामांकन करवाना होगा। पढ़ाई माध्यम ऑनलाइन भी होगा, साथ ही इसमें प्रवेश और निकास दोनों ही सुलभ होंगे। बता दें कि कोर्स पूरा करने वालों को माइक्रो प्रमाणपत्र और डिजिटल बैज भी दिया जाएगा। पाठ्यक्रम में खास     उच्च शिक्षण संस्थान कम से कम तीन भारतीय भाषाओं (एक स्थानीय भाषा और दो अन्य 22 अनुसूचित भाषाओं में से) में योग्यता संवर्धन पाठ्यक्रम (एईसी), क्रेडिट पाठ्यक्रम, या ऑडिट पाठ्यक्रम प्रदान करेंगे।     पाठ्यक्रम को बेसिक, इंटरमीडिएट और एडवांस जैसे तीन स्तरों में विभाजित किया जाएगा, जिसमें आसान प्रवेश और निकास की सुविधा होगी। आप अपनी सुविधानुसार किसी भी स्तर पर प्रवेश कर सकते हैं और बाहर निकल सकते हैं।     इन स्तरों को नए क्रेडिट ढांचे के तहत तीन माइनर के रूप में पेश किया जा सकता है, जिससे आपकी प्रतिलिपि (ट्रांस्क्रिप्ट) पर ये क्रेडिट दर्ज होंगे और क्रेडिट पोर्टेबिलिटी की अनुमति मिलेगी।     इन पाठ्यक्रमों का मुख्य फोकस बोलने, पढ़ने और लिखने में प्रभावी संचार कौशल विकसित करना होगा। दोस्त, परिवार, रिश्तेदार भी होंगे शामिल इस प्रक्रिया में सभी स्नातक, स्नातकोत्तर और डाक्टरेट छात्र इस पहल के मुख्य लाभार्थी होंगे। इसके अलावा छात्रों को विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे अपने मित्रों, अभिभावकों और रिश्तेदारों को भी इन भाषा पाठ्यक्रमों में शामिल होने के लिए आमंत्रित करें। स्थानीय समुदाय के इच्छुक व्यक्ति भी इन पाठ्यक्रमों में नामांकन करा सकते हैं। बता दें कि यदि पाठ्यक्रम ऑनलाइन पेश किए जाते हैं, तो ये दुनियाभर के शिक्षार्थियों के लिए खुले होंगे। माइक्रो प्रमाण-पत्र मिलेंगे इस प्रक्रिया में पाठ्यक्रम पूरा करने वाले शिक्षार्थियों (छात्र और उनके स्वजन व मित्र) को माइक्रो-प्रमाणपत्र मिलेंगे। जो लोग नई भारतीय भाषाएं सीखते हैं, उन्हें भाषा बंधु, भाषा मित्र, लिपि गौरव, भाषादूत जैसी मानद उपाधियां प्रदान की जा सकती हैं। नई भाषा सीखने वालों को उस राज्य की सांस्कृतिक और शैक्षिक 'सम्मान यात्रा' कराई जाएगी, जहां वह भाषा बोली जाती है। इसके अलावा अतिरिक्त भाषा सीखने वाले छात्रों को अंतर-राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय दौरों में प्राथमिकता दी जाएगी। बता दें कि हर साल 11 दिसंबर को ऐसे योग्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और कर्मचारियों को भारतीय भाषा उत्सव के अवसर पर सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा छात्रों को 'प्रमाणित भाषा दूत-2025' जैसे डिजिटल बैज जारी किए जाएंगे, जिन्हें वे अपने डिजिटल प्रोफाइल और सोशल मीडिया पर प्रदर्शित कर सकते हैं।

MP के दतिया में कलेक्टर ने लगाया प्रतिबंध, प्रतिमाओं के सामने पोस्टर और विज्ञापन लगाने पर सख्त एक्शन होगा

दतिया  देश के विभिन्न प्रदेशों की तरह ही मध्य प्रदेश में भी चौराहों, तिराहों पर महापुरुषों, संतों आदि की मूर्तियाँ स्थापित हैं, इनकी स्थापना के समय बहुत ही सम्मान के साथ इनका यशगान किया जाता हैं लेकिन कुछ समय बाद ही इन प्रतिमाओं को विज्ञापनों, बैनरों, पोस्टरों आदि से पाट दिया जाता है लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा, दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने उनके जिले में ये प्रतिबंधित कर दिया है। दतिया कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट स्वप्निल वानखड़े ने शहर की सुंदरता और महापुरुषों के सम्मान को बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण और सख्त आदेश जारी किया है। अब जिले में संतों और महापुरुषों की प्रतिमाओं के सामने किसी भी प्रकार के होर्डिंग, फ्लैक्स या बैनर लगाने पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह सार्वजनिक मर्यादा और प्रशासनिक आदर्शों के विपरीत” आदेश में कलेक्टर ने लिखा, जिला प्रशासन के संज्ञान में आया था कि शहर और जिले के विभिन्न स्थानों पर स्थापित प्रतिमाओं के आगे निजी और संस्थागत प्रचार सामग्री लगा दी जाती है। इससे न केवल प्रतिमाएं स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देतीं, बल्कि यह सार्वजनिक मर्यादा और प्रशासनिक आदर्शों के भी विपरीत है। कलेक्टर ने कहा कि महापुरुषों की प्रतिमाएं प्रेरणा और सम्मान का प्रतीक हैं, इसलिए उनके सामने अनधिकृत विज्ञापन लगाना अनुचित है। आदेश में दतिया शहर के प्रमुख 15 स्थानों का जिक्र   आदेश में दतिया शहर की 15 प्रमुख जगहों और प्रतिमाओं का विशेष उल्लेख किया गया है, जहाँ अक्सर यह समस्या देखी जाती है। जिनमें स्वामी विवेकानंद पटवा तिराहा, महात्मा गांधी गांधी पार्क किला चौक, डॉ. भीमराव अम्बेडकर, किला चौक, महाराज भवानी सिंह किला चौक भवानी पार्क, महाराज गोविन्द सिंह किला चौक गोविन्द पार्क, मैथिलीशरण गुप्त राजगढ़ चौराहा पीताम्बरा मंदिर के पास, महाराज अग्रसेन बम-बम महादेव बस स्टैण्ड़ के पास, रामचेरे प्रजापति समाज बस स्टैण्ड के पास, अवंतिका बाई लोधी, भाण्ड़ेर रोड़ देहात थाना के पास, देवी अहिल्या बाई पुलिस कंट्रोल रूम के पास सिविल लाईन, सरदार वल्लभ भाई पटेल मेडीकल कॉलेज के पास एनएच-44, बाल्मीकि समाज पार्क गहोई वाटिका के सामने, संत गाडगे बाबा गहोई वाटिका के सामने, डॉ. भीम राव अम्बेडकर अम्बेडकर पार्क एनएच-44 के नाम शामिल है। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर एक्शन के निर्देश  कलेक्टर ने स्थानीय निकाय, पुलिस प्रशासन और राजस्व अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वर्तमान में प्रतिमाओं के सामने लगी किसी भी प्रकार की प्रचार सामग्री को तत्काल हटाया जाए। साथ ही भविष्य में प्रतिमाओं के समक्ष होर्डिंग/बैनर लगाने की अनुमति न दी जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए। यह आदेश दतिया शहर सहित सम्पूर्ण जिले की राजस्व सीमा में स्थापित सभी प्रतिमाओं पर लागू होगा।

राजस्थान हाई कोर्ट का बड़ा आदेश, शादी से पहले लिव इन में रह सकते हैं युवाओं

 जयपुर राजस्थान हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि दो व्यस्क आपसी सहमति से तब भी लिव इन में रह सकते हैं जब उनकी उम्र शादी के लायक नहीं हुई है। देश में शादी के लिए लड़की की आयु कम से कम 18 और लड़के की न्यूनतम 21 निर्धारित है, जबकि व्यस्क होने की उम्र 18 है। जस्टिस अनूप कुमार ढांड ने ऐसे ही दो व्यस्क की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह अहम आदेश पारित किया। राजस्थान के कोटा की रहने वाली 18 साल की लड़की और 19 साल के लड़के ने संरक्षण की मांग की थी। लड़की की उम्र शादी के लायक हो चुकी है, लेकिन लड़के की उम्र में अभी दो साल की कमी है। फैसले की कॉपी गुरुवार को अपलोड की गई। इसके मुताबिक, दोनों ने पुलिस सुरक्षा की मांग करते हुए कहा था कि वे आपसी सहमति से लिव इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं। कपल ने 27 अक्टूबर 2025 को लिव इन अग्रीमेंट बनाया था। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक लड़की का परिवार इस रिश्ते के खिलाफ है और उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने कहा कि पुलिस के सामने लिखित अपील के बाद भी कोई ऐक्शन नहीं लिया गया। राज्य की ओर से पेश हुए लोक अभियोजक विवेक चौधरी ने दलील दी कि चूंकि लड़के की उम्र 21 नहीं हुई है इसलिए वह कानूनी रूप से शादी नहीं कर सकता है। इसलिए उन्हें लिव इन पार्टनरशिप में रहने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। हालांकि, हाई कोर्ट ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि संविधान का आर्टिकल 21 'जीवन जीने का अधिकार और व्यक्तिगत स्वतंत्रता'की गारंटी प्रदान करता है और कोई धमकी संवैधानिक उल्लंघन है। अदालत ने जोर देकर कहा कि राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि हर नागरिक से जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा हो। जज ने कहा, 'सिर्फ इसलिए कि याचिकाकर्ताओं की उम्र शादी के लिए लायक नहीं हुई है, उन्हें मौलिक अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता है।' अदालत ने यह भी कहा कि भारतीय कानूनों के तहत लिव इन ना तो अवैध ही और ना ही अपराध। अदालत ने भीलवाड़ा और जोधपुर रूरल के एसपी को धमकी के आरोपों की जांच करने और कपल को जरूरत पड़ने पर सुरक्षा देने का आदेश दिया।

जनवरी से शुरू होगा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का काम, किसानों को पैसा मिलते ही तेज़ होगी प्रक्रिया—ग्वालियर से आगरा डेढ़ घंटे में

मुरैना  ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे का काम जनवरी से शुरू करने का गणित बनाया जा रहा है। अभी तक अधिग्रहित जमीन का पैसा 65 फीसदी किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया जा चुका है। चूंकि निर्माण एजेंसी 90 फीसदी जमीन यानि 475 हेक्टेयर जमीन मिलने के बाद काम शुरू कराएगी, इसलिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण शेष भूमि से जुड़े किसानों से जमीन लेने के प्रयास कर रहा है। एनएचएआई की मानें तो प्रोजेक्ट वर्क शुरू होने के ढाई साल की समयावधि में अनुबंधित निर्माण एजेंसी को आगरा से ग्वालियर के बीच सिक्सलेन-वे बनाकर तैयार करना होगा। नया रूट मिलने के बाद ग्वालियर के लोग आगरा की 88.4 किमी की दूरी डेढ़ घंटे में तय सकेंगे। ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे बनाने पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण 4612 करोड़ रुपये खर्च करेगा। एनएचएआई को मध्य प्रदेश, राजस्थान व उत्तरप्रदेश में 550 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है। इसमें किसानों की निजी भूमि से लेकर सरकारी व वन भूमि शामिल है। इसमें से अभी तक 65 फीसदी जमीन एनएचएआई को राजस्व विभाग उपलब्ध करा चुका है। जमीन इस प्रोजेक्ट में देने को तैयार नहीं नियम के मुताबिक, निर्माण एजेंसी को इस प्रोजेक्ट के लिए 550 हेक्टेयर भूमि का 90 फीसदी हिस्सा चाहिए इसलिए अभी 25 प्रतिशत निजी भूमि और उपलब्ध होने के बाद जीआर इंफ्रा प्रालि सिक्सलेन-वे बनाने का काम शुरू करा सकेगी। ऐसा माना जा रहा है कि जनवरी में इस प्रोजेक्ट के निर्माण कार्य का श्रीगणेश करा दिया जाएगा। अभी एक तिहाई किसान जमीन अधिग्रहण के बदले चार गुना मुआवजा देने की मांग को लेकर अपनी बेशकीमती जमीन इस प्रोजेक्ट के लिए देने में ना-नुकुर कर रहे हैं। कलेक्टर रेट से दोगुना मुआवजा होने से दिक्कत किसी भी प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद दिए जाने वाले मुआवजे के लिए उत्तर प्रदेश व राजस्थान सरकार का गुणांक दो होने से वहां जमीन अधिग्रहण के बदले किसानों को कलेक्टर रेट से चार गुना मुआवजा देने का प्राविधान है। मप्र में कलेक्टर रेट से दोगुना राशि का मुआवजा मिलता है। उप्र-राजस्थान की मुआवजा दरों की जानकारी मुरैना जिले के किसानों को अच्छे से है, ऐसे में किसान राज्य सरकार से गुणांक बदलकर दो करने व मुआवजा की राशि चार गुना देने की जिद पर अड़े हैं। इसलिए ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे के लिए अभी बड़ी संख्या में किसान अपनी खेती की जमीन देने से मुंह मोड़े हुए हैं। यहां बता दें कि कलेक्टर ने भी ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे प्रभावित क्षेत्र की जमीनों की गाइडलाइन दो साल से नहीं बढ़ाई है, जबकि पूरे जिले की प्रमुख साइटों के रेट दो बार 20-20 प्रतिशत बढ़ा दिए गए। एक नजर प्रोजेक्ट पर     आगरा से ग्वालियर के बीच सिक्सलेन-वे की लंबाई की 88.4 किलोमीटर होगी।     ग्वालियर से आगरा के बीच सफर में लगने वाला समय एक घंटा 30 मिनट होगा।     ग्रीनफील्ड सिक्सलेन-वे के बीच बड़े पुल की संख्या 08 और छोटे पुल की संख्या 23 रहेगी।     फ्लाईओवर की संख्या छह, आरओबी की संख्या एक और वायोडक्ट की संख्या पांच रहेगी।  

उम्मीद पोर्टल की सुस्त रफ्तार से वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण रुका, समय सीमा बढ़ाने की अपील

 खंडवा देशभर में इस समय वक्त संपत्तियों को लेकर मुस्लिम समाज परेशान दिख रहा है। दरअसल सुप्रीम कोर्ट से जारी निर्देशों के बाद केंद्र सरकार के द्वारा सभी वक्फ संपत्तियों को दर्ज करने के लिए एक केंद्रीय कृत वेब पोर्टल बनाया गया है, जिसका नाम उम्मीद पोर्टल है। हालांकि यही उम्मीद पोर्टल मुस्लिम समाज जन को न उम्मीद करता दिख रहा है और बीते कुछ दिनों से लगातार इस पोर्टल का सर्वर स्लो चलने के चलते वक्फ संपत्तियां इस पर दर्ज नहीं हो पा रही हैं । वहीं] मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां 15 हजार से अधिक वक्फ संपत्तियां मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दर्ज हैं, जबकि इनमें से लगभग 6 हजार वक्फ संपत्ति ही इस समय तक केंद्रीयकृत वेब पोर्टल उम्मीद पर दर्ज हो पाई हैं और इसकी अंतिम समय सीमा 5 दिसंबर तय की गई हैं, ऐसे में बची हुई संपत्तियां दर्ज हो पाना नामुमकिन है। वहीं इसको लेकर मध्य प्रदेश के खंडवा सहित प्रदेश और देश भर में वक्फ संपत्तियों को दर्ज करने की समय सीमा बढ़ाये जाने को लेकर आवाज उठाई जा रही है। इसी बीच खंडवा के मुस्लिम समाज ने भी गुरुवार शाम जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन सौंप कर तारीख आगे बढ़ाई जाने की मांग की है। यही नहीं खंडवा शहर काजी और मुस्लिम जनप्रतिनिधि एवं समाज के वरिष्ठ नागरिकों और युवाओं ने उम्मीद पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों को दर्ज किए जाने की समस्या के चलते राष्ट्रपति और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री किरण रिजजू से गुहार लगाई है कि वे इस समस्या को देखते हुए अंतिम समय सीमा को लगभग 6 माह तक आगे बढ़ाएं, जिससे कि सभी वक्फ संपत्तियां दर्ज की जा सकें। इस दौरान ज्ञापन देने पहुंचे शहर काजी सैयद निसार अली ने बताया कि वक्फ संपत्तियों को दर्ज करने वाला उम्मीद पोर्टल या तो चल ही नहीं रहा है या फिर इतना स्लो चल रहा है कि एक-एक संपत्ति को दर्ज करने में पूरा-पूरा दिन ही निकल जा रहा है। हालात यह हैं कि अब तक मात्र 30 प्रतिशत वक्फ संपत्तियां ही इस पोर्टल पर दर्ज हो पाई हैं, ऐसे में अल्पसंख्यक और खासकर मुस्लिम समाज के अधिकारों और उनकी वक्फ संपत्तियों की रक्षा करने हेतु अंतिम समय सीमा बढ़ाई जाना चाहिए, और इसको लेकर ही उन्होंने राष्ट्रपति के साथ ही देश के पीएम नरेंद्र मोदी से भी इस समय सीमा को बढ़ाये जाने की गुहार लगाई है। 

मुख्यमंत्री ने किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की समीक्षा में दिए निर्देश

किसानों तक उर्वरक की आसान पहुंच करें सुनिश्चित भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि लखपति दीदी के समान लखपति बीघा का लक्ष्य रखते हुए एक बीघा से एक लाख रूपए की कमाई करने वाले किसानों को भी सम्मानित किया जाए। किसानों को बिचौलियों से बचाने और उन्हें बाजार में अपनी उपज का सीधे लाभ दिलाने के लिए आवश्यक व्यवस्था हो। प्रदेश में उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने और अद्यतन तकनीक का इस्तेमाल कर बेहतर उपज लेने के लिए ग्राम स्तर पर सघन गतिविधियां संचालित की जाएं। हर संभाग की नर्सरियों को आदर्श रूप में विकसित किया जाए। नरवाई प्रबंधन के लिए तीन वर्ष की कार्ययोजना विकसित की जाए। साथ ही किसानों तक उर्वरक की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए अद्यतन तकनीक का उपयोग करते हुए कार्ययोजना बनाई जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान ये निर्देश दिए। बैठक में किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना, पशुपालन एवं डेयरी राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री लखन पटेल, पूर्व मंत्री श्री गोपाल भार्गव, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित थे। बैठक में विभाग की दो वर्ष की उपलब्धियों तथा नवाचारों का प्रस्तुतिकरण किया गया और आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि –     प्रदेश दालो, तिलहन और मक्का उत्पादन में देश में प्रथम तथा खाद्यान्न, अनाज एवं गेहूं उत्पादन में देश में दूसरे स्थान पर है।     उर्वरक वितरण के अंतर्गत वर्ष 2024-25 में 38.10 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 21.41 लाख मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. वितरित किया गया। वर्ष 2025-26 में 29.77 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 30 नवम्बर तक 19.42 मीट्रिक टन डी.ए.पी + एन.पी.के. का वितरण हुआ।     प्रधानमंत्री फसल बीमा में वर्ष 2023-24 में 1 करोड़ 77 लाख बीमित कृषकों को 961.68 करोड़ रूपए और वर्ष 2024-25 में 1 करोड़ 79 लाख बीमित कृषकों को 1275.86 करोड़ रूपए के दावे का भुगतान किया गया।     मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 4,687 करोड़ रूपए, वर्ष 2024-25 में 4,849 करोड़ रूपए और वर्ष 2025-26 में 3,374 करोड़ की सहायता राशि वितरित की गई।     प्रदेश की सभी 259 मंडियों में ई-मंडी योजना लागू हो चुकी है। इस उपलब्धि के लिए स्कॉच गोल्ड अवार्ड भी प्राप्त हुआ।     मंडी बोर्ड द्वारा एमपी फार्म गेट ऐप से किसान अपने दाम पर, अपने घर, अपने खलिहान और गोदामा से अपनी कृषि उपज बेचने में सक्षम हुआ। इस नवाचार को स्कॉच सिल्वर अवार्ड प्राप्त हुआ।     पराली प्रबंधन के अंतर्गत वर्ष 2023-24 में 1312, वर्ष 2024-25 में 1757 और वर्ष 2025-26 में 2479 नरवाई कृषि यंत्र वितरित किए गए।     कृषि यंत्रीकरण के अंतर्गत भोपाल और इंदौर में ड्रोन पायलट स्कूल आरंभ हुए।     ई-विकास पोर्टल से उर्वरक वितरण का पायलट प्रोजेक्ट विदिशा, शाजापुर और जबलपुर में क्रियान्वित किया गया। इसे सम्पूर्ण प्रदेश में लागू करने की योजना है। आगामी तीन वर्ष की कार्ययोजना     प्रदेश के सभी 363 नगरपालिका, नगर पंचायतों में साप्ताहिक जैविक/प्राकृतिक हाट बाजार लगाए जाएंगे।     पर ड्रॉप मोर क्रॉप – दबाव सिंचाई प्रणाली के तहत वर्ष 2025-26 में 25 हजार, वर्ष 2026-27 में एक लाख और वर्ष 2027-28 में दो लाख हेक्टेयर का लक्ष्य है।     नरवाई (पराली) प्रबंधन के अंतर्गत पराली जलाने की घटनाओं में वर्ष 2027-28 तक 80 प्रतिशत तक की कमी लाने का लक्ष्य रखा है।     आगामी दो वर्षों में सभी मंडियों का हाईटेक बनाया जाएगा।     तिलहन, दलहन फसलों में आत्मनिर्भरता के लिए क्षेत्र विस्तार का लक्ष्य रखा गया है।     कृषि में अनुसंधान कार्ययोजनाओं को प्रोत्साहन देते हुए प्रयोगशाला से खेत की दूरी को कम किया जाएगा। बैठक में उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की समीक्षा के दौरान हाईटेक नर्सरी, सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, कृषकों और उद्यमियों की क्षमता संवर्धन के लिए चलाए जा रहे कार्यक्रमों के संबंध में जानकारी दी गई।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को प्रदान किए नियुक्ति-पत्र

ऑनलाइन भर्ती की यह पहल करने वाला पहला राज्य बना मध्यप्रदेश मध्यप्रदेश की पूर्ण ऑनलाइन पारदर्शी चयन प्रणाली बनी राष्ट्रीय मॉडल भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाओं से कहा कि आपकी जिम्मेदारी यशोदा मैया की तरह है, जिस प्रकार उन्होंने गोपाल कृष्ण का पालन-पोषण कर उन्हें संस्कार प्रदान किए, उसी तरह आप भी आंगनवाड़ी में आने वाले हर बच्चे की देखभाल श्रीकृष्ण की तरह करें। नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र के रूप में बच्चों की मुस्कुराहट, पोषण और माताओं के स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने का वचन पत्र सौंपा जा रहा है। हमें विश्वास है कि हमारी बहनें अपना दायित्व पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता से निभाएंगी और प्रदेश को कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में विजय दिलवाएंगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने शुक्रवार को पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया से नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को विधानसभा के समिति कक्ष में हुए कार्यक्रम में नियुक्ति-पत्र प्रदान कर आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। कार्यक्रम में महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया, विधायक तथा पूर्व मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनीस, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई और विभाग की सचिव सुश्री जी.वी. रश्मि विशेष रूप से उपस्थित थीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतीक स्वरूप तीन नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति-पत्र प्रदान किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की उपस्थिति में विधायक श्रीमती अर्चना चिटनीस ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को अपने कार्य दायित्व का निर्वहन पूरी निष्ठा और ईमानदारी से करने, विकसित मध्यप्रदेश@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में हर संभव योगदान देने और सुपोषित मध्यप्रदेश के निर्माण में अपने दायित्व का पूर्णत: पालन करने की शपथ दिलाई। नवनियुक्त आँगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने विधानसभा संचालन की प्रक्रिया भी देखी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज भी गांवों में आंगनवाड़ी वाली दीदी को जो सम्मान मिलता है, उतना किसी और को नहीं मिलता। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका परिवार की सदस्य बन जाती हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि न्यू इंडिया की मजबूत नींव मातृ शक्ति से ही बनती है। हमारी आंगनवाड़ी की बहनें इसे सार्थक कर रही हैं। यह बहनें केवल कार्यकर्ता नहीं अपितु गांव की पहली गुरू और पहली पोषण दूत हैं। इनकी वजह से लाखों बच्चों में कुपोषण कम हो रहा है और गर्भवती माताओं में जागरूकता बढ़ रही है। स्कूलों में ड्रापआऊट रेट में भी कमी आयी है। राज्य सरकार बहनों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। नगरीयनिकायों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सीमा में वृद्धि की गई है। साथ ही बहनों के रोजगार के लिए उद्योग समूहों को भी राशि उपलब्ध कराई जा रही है। महिला बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने जानकारी दी कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां पहली बार आंगनवाड़ी स्तर पर भर्ती के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई। प्रदेश में अब तक 1091 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 10 हजार 984 सहायिकाओं की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए हैं। शेष पद भरने के लिए भी तेजी से प्रक्रिया जारी है। उल्लेखनीय है कि ऑनलाइन पोर्टल पर आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के 2077 पदों के विरुद्ध 81 हजार 704 आवेदन आए और सहायिकाओं के 17 हजार 477 पदों के लिए 31 हजार 7627 आवेदन प्राप्त हुए। कार्यक्रम में प्रतीक स्वरूप 50 नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं की ओर से मुख्यमंत्री डॉ. यादव को आभार स्वरूप धन्यवाद पत्र सौंपा गया। प्रमुख बिन्दु     आंगनवाड़ी में आने वाले हर बच्चे की देखभाल श्रीकृष्ण की तरह करें।     नवनियुक्त आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति पत्र के रूप में बच्चों की मुस्कुराहट, पोषण और माताओं के स्वास्थ्य व सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने का वचन पत्र सौंपा जा रहा है।     हमारी बहनें अपना दायित्व पूर्ण समर्पण और प्रतिबद्धता से निभाएंगी और प्रदेश को कुपोषण के खिलाफ लड़ाई में विजय दिलवाएंगी।     मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रतीक स्वरूप तीन नवनियुक्त आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियुक्ति-पत्र प्रदान किए।     विकसित मध्यप्रदेश@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में हर संभव योगदान देने और सुपोषित मध्यप्रदेश के निर्माण में अपने दायित्व का पूर्णत: पालन करने की शपथ दिलाई।     नवनियुक्त आँगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं ने विधानसभा संचालन की प्रक्रिया भी देखी।     आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिक परिवार की सदस्य बन जाती हैं।     न्यू इंडिया की मजबूत नींव मातृ शक्ति से ही बनती है।     बहनें केवल कार्यकर्ता नहीं अपितु गांव की पहली गुरू और पहली पोषण दूत हैं।     लाखों बच्चों में कुपोषण कम हो रहा है और गर्भवती माताओं में जागरूकता बढ़ रही है।     स्कूलों में ड्राप-आऊट रेट में भी कमी आयी है।     नगरीयनिकायों और सरकारी नौकरियों में आरक्षण की सीमा में वृद्धि की गई है।     बहनों के रोजगार के लिए उद्योग समूहों को।     राशि उपलब्ध कराई जा रही है।     मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है, जहां पहली बार आंगनवाड़ी स्तर पर भर्ती के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाई गई।     प्रदेश में अब तक 1091 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और 10 हजार 984 सहायिकाओं की नियुक्ति के आदेश जारी किए गए।