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आत्मनिर्भरता की ओर कदम: कोयला खनन सूची में 18 नई कंपनियां शामिल

नई दिल्ली भारत में कोयला खनन को रफ्तार देने और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने देश में मान्यता प्राप्त पूर्वेक्षण एजेंसियों के दायरे को बढ़ाते हुए निजी संस्थाओं को भी अधिकृत एजेंसियों की सूची में शामिल कर लिया है। 26 नवंबर 2025 को जारी अधिसूचना के अनुसार, खान व खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 4(1) के दूसरे प्रावधान के तहत, क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया की नेबेट (QCI-NABET) द्वारा मान्यता प्राप्त निजी संस्थाओं को आधिकारिक रूप से खनिज खोज संबंधी कार्यों के लिए अधिकृत कर दिया गया है। इस कदम से कोयला सहित खनिज संसाधनों की खोज होगी तेज सरकार का कहना है कि इस कदम से कोयला सहित खनिज संसाधनों की खोज तेज होगी, तकनीकी क्षमता बढ़ेगी और देश के खनन क्षेत्र में निजी भागीदारी को नई दिशा मिलेगी। यह बदलाव आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने के साथ-साथ खनन क्षेत्र में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 18 नई एजेंसियों को किया गया शामिल कोयला मंत्रालय ने कहा है कि इस फैसले से 18 नई एजेंसियों को कोयला और लिग्नाइट की खोज के लिए अधिकृत सूची में जोड़ा गया है। इससे कोयला ब्लॉक आवंटियों को प्रोस्पेक्टिंग कार्यों के लिए एजेंसी चुनने में ज्यादा लचीलापन और विकल्प मिलेंगे। नई मान्यता प्राप्त एजेंसियों में ये शामिल हैं     इंडियन माइन प्लानिंग एंड कंसल्टेंट्स, कोलकाता;     मेरॉक्स माइनिंग सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड, गुरुग्राम;     यूनाइटेड एक्सप्लोरेशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता;     माहेश्वरी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड, कोलकाता;      नेचुरल रिसोर्सेज डिवीजन – टाटा स्टील लिमिटेड, पूर्वी सिंहभूम;     माइनिंग एसोसिएट्स प्राइवेट लिमिटेड, बिदवान;     रेम्को कोल एक्सप्लोरेशन प्राइवेट लिमिटेड, चंद्रपुर;     साउथ वेस्ट जियोलॉजिकल एक्सप्लोरेशन लिमिटेड, गुरुग्राम;     जियोटेक्निकल माइनिंग सॉल्यूशंस, धर्मपुरी;     नोवोमाइन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ईस्ट खासी हिल्स;     सुरमाइन कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, दिल्ली;     कार्तिकेय एक्सप्लोरेशन एंड माइनिंग सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, नागपुर;     माइनिंग टेक कंसल्टेंसी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद;     जेम्स प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड, रांची;     रेवेल कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड, अहमदाबाद;     सीएमएमसीओ टेक्नोलॉजी सर्विसेज लिमिटेड, हैदराबाद;     जसनी जियोटेक प्राइवेट लिमिटेड, नागपुर;     एपीसी ड्रिलिंग एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड, नामक्कल शामिल हैं। कोयला और लिग्नाइट की खोज को मिलेगी रफ्तार सरकार का मानना है कि अधिकृत प्रोस्पेक्टिंग एजेंसियों की संख्या बढ़ाने से निजी क्षेत्र के संसाधनों और विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग हो सकेगा। इससे अन्वेषण प्रक्रिया में दक्षता, प्रतिस्पर्धा और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार का यह कदम कोयला और लिग्नाइट की खोज की रफ्तार को उल्लेखनीय रूप से तेज करने की दिशा में देखा जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, विस्तारित एजेंसी सूची से शुरुआती चरण में ही खनन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी, जिससे देश में संसाधन विकास की गति तेज होगी। इसके साथ ही कोयला और लिग्नाइट की उपलब्धता में सुधार होगा, जो देश की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

महाकाल का अनोखा अलंकरण: फूलों की 10–15 किलो वजनी ‘अजगर माला’ चढ़ाई

उज्जैन महाकाल मंदिर में इन दिनों भगवान महाकाल को फूलों की बड़ी व भारी माला पहनाई जा रही है। प्रतिदिन होने वाली पांच आरती के अलावा दिनभर भक्तों की ओर से लाई जाने वाली मालाएं भगवान को अर्पित की जा रही है। हालांकि ज्योतिर्लिंग क्षरण मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक्सपर्ट कमेटी ने भगवान को भारी फूल माला तथा अधिक मात्रा में पुष्प अर्पित नहीं करने का सुझाव दिया है। समय-समय पर मंदिर समिति भी एक्सपर्ट कमेटी के सुझावों पर अमल करने का दावा करती रही है, मगर हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण रोकने के लिए सारिका गुरु ने वर्ष 2017 में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई थी। कोर्ट ने आर्कियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआइ) और जियोलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (जीएसआइ) के विशेषज्ञों की समिति गठित की थी। एक्सपर्ट कमेटी के सदस्य वर्ष 2019 से लगातार ज्योतिर्लिंग क्षरण की जांच कर रहे हैं। विशेषज्ञों ने क्षरण रोकने के लिए अनेक सुझाव दिए हैं।   इनमें भगवान महाकाल के अभिषेक के लिए सादे पानी की जगह आरओ जल का उपयोग करना, भस्म आरती में ज्योतिर्लिंग पर कपड़ा ढंक कर भस्म अर्पित करना, पंचामृत की मात्रा केवल सवा लीटर करना, भगवान के शृंगार में उपयोग होने वाले आभूषणों का वजन कम करना, भगवान महाकाल को भारी फूल माला तथा अधिक मात्रा में पुष्प अर्पित नहीं करना जैसे सुझाव शामिल है। मंदिर समिति एक्सपर्ट कमेटी के सुझाव पर अमल कर रही है। अभिषेक में आरओ जल का उपयोग हो रहा है, आभूषण का वजन कम कर दिया गया है, भस्म आरती में भस्म अर्पण से पहले ज्योतिर्लिंग को कपड़े से ढंका जाता है। लेकिन मानीटरिंग के अभाव में भगवान को फूलों की भारी माला पहनाने का क्रम जरूर जारी नजर आ रहा है। 10 से 15 किलो वजनी है अजगर माला महाकाल मंदिर प्रशासनिक भवन के पास स्थित हार, फूल व प्रसाद की दुकानों पर फूलों की भारी माला का विक्रय किया जा रहा है, इसे अजगर माला कहा जाता है। इसमें एक हजार कमल के फूलों से बनी सहस्त्र कमल तथा विभिन्न किस्म के फूलों से तैयार की गई भारी माला शामिल है। बताया जाता है फूलों की भारी भरकम माला का वजन करीब 10 से 15 किलो रहता है। दिन भर में भगवान को इस प्रकार की 40 से 50 मालाएं पहनाई जा रही है। 500 से 2100 रुपये कीमत महाकाल मंदिर के आसपास दुकानों से विक्रय की जाने वाली अजगर माला 500 से 2100 रुपये में विक्रय की जा रही है। भक्तों द्वारा लाई जा रही भारी माला को दिनभर भगवान को अर्पित किया जाता है। पांच आरती में भी भगवान को भरी भरकम मालाएं ही अर्पित की जा रही हैं।

CM पद को लेकर सिद्धारमैया और शिवकुमार भिड़े, कांग्रेस में बढ़ी कलह—BJP देख रही मौक़ा

 नई दिल्ली    कर्नाटक में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर जिस तरह सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच आर-पार की जंग छिड़ गई है, उसके चलते कांग्रेस का सबसे बड़ा किला कहीं ढह न जाए. कर्नाटक में कांग्रेस का संकट गहराता ही जा रहा है. शिवकुमार और सिद्धारमैया में कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है और अब फैसला बेंगलुरू से नहीं, बल्कि दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के दरबार से होगा. डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया के बीच कर्नाटक कांग्रेस दो धड़ों में बंटी हुई है. शिवकुमार के समर्थक विधायक और नेता खुलकर उतर गए हैं कि मुख्यमंत्री बदला जाए. वहीं, सीएम सिद्धारमैया भी अपनी सियासी लॉबिंग तेज कर दी है और अपनी कुर्सी को बचाए रखने के लिए दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान से मिलेंगे. क्या कांग्रेस का कर्नाटक किला ढह जाएगा? देश के तीन राज्यों में कांग्रेस अपने दम पर सत्ता में है. कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश और तेलंगाना की कांग्रेस की सरकार है. सऐसे में उसका सबसे बड़ा किला कर्नाटक ही है, लेकिन कुछ समय से राज्य में सियासी टकराव चल रहा है. सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच मुख्यमंत्री पद की कुर्सी को लेकर वर्चस्व की जंग छिड़ी हुई है, जिससे पार्टी की छवि बुरी तरह प्रभावित हुई है. डीके शिवकुमार और सिद्धारमैया दोनों ही नेता सार्वजनिक तौर पर एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी कर रहे हैं. इससे राज्य में शासन पर भी असर पड़ रहा है. सरकार का कामकाज प्रभावित हो रहा है. कांग्रेस दो धड़ों में बंटी हुई दिख रही है. एक खेमा शिवकुमार को सीएम बनाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है तो दूसरा धड़ा सिद्धारमैया के साथ है. कुर्सी की लड़ाई ऐसे ही अगर जारी रही तो कांग्रेस के लिए सियासी नुकसान साबित हो सकता है। इस तरह कांग्रेस के एकमात्र प्रभावी किले कर्नाटक के भी ढहने के लक्षण दिखने लगे हैं. ढाई-ढाई साल वाले फॉर्मूले से छिड़ी जंग कर्नाटक में यह घमासान तब तेज हुआ है जब सिद्धारमैया सरकार के ढाई साल पूरे हुए हैं. कहा जा रहा है कि सरकार गठन के दौरान भी सीएम पद को लेकर जारी खींचतान के बाद ढाई साल का फॉर्मूला तय हुआ था. बताया जा रहा है कि 2023 में कांग्रेस की अप्रत्याशित जीत के बाद यह तय हुआ था कि मुख्यमंत्री पद को ढाई-ढाई साल के लिए बांटा जाएगा. इस फॉर्मूले के तहत सिद्धारमैया पहले ढाई साल सीएम रहेंगे और उसके बाद डीके शिवकुमार सत्ता संभालेंगे. दरअसल, सिद्धारमैया का ढाई साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है और तभी से डीके शिवकुमार खेमे के विधायक अब उन्हें सीएम बनाने की बात कह रहे हैं. डीके शिवकुमार के भी दिल्ली आकर गांधी परिवार से मिलने की बात कही जा रही है. वहीं, सिद्धारमैया कह रहे हैं कि मेरी ताकत घटी नहीं, बढ़ी है. उन्होंने कहा कि 'विधायक दिल्ली जाएं, कोई समस्या नहीं। आखिरी फैसला हाईकमान का है।' साथ ही कहा कि 2023 में जो जनादेश मिला था, वह पाँच साल के लिए था. वेट एंड वॉच के मूड में खड़ी बीजेपी कर्नाटक में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के बीच छिड़ी लड़ाई में बीजेपी वेट एंड वॉच की रणनीति पर चल रही है. वह अपनी तरफ से कोई पहल करती नहीं दिख रही है. बीजेपी नेता इसे कांग्रेस के घर का झगड़ा बता रहे हैं। कर्नाटक से आने वाले एक केंद्रीय मंत्री वी सोमन्ना ने कहा है कि बीजेपी को डीके शिवकुमार की जरूरत नहीं है। बीजेपी ने कहा कि अगर कांग्रेस के पास हिम्मत है तो वह विधानसभा भंग करे और राज्य में चुनाव करवाए. उन्होंने आगे कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी बहुत मजबूत है. उसको डीके की जरूरत नहीं है. उन्होंने आगे कहा कि कर्नाटक की हालत खराब है। सड़कों की हालत बहुत बुरी है, कांग्रेस पार्टी पावर शेयरिंग के ड्रामे में उलझी हुई है. कर्नाटक की जनता ने इससे भ्रष्ट सरकार नहीं देखी है. CM के लिए इस नेता का पलड़ा भारी; इतने MLA हैं साथ कर्नाटक सरकार में मचे घमासान को लेकर दिल्ली में जल्द बैठक हो सकती है। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व ने इसे लेकर आधिकारिक तौर पर स्थिति स्पष्ट नहीं की है। खबर है कि ढाई-ढाई साल मुख्यमंत्री की कथित सीक्रेट डील को लेकर सीएम सिद्धारमैया और उनके डिप्टी डीके शिवकुमार के बीच तकरार जारी है। हालांकि, अटकलें हैं कि सिद्धारमैया का पलड़ा भारी हो सकता है।  सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि फिलहाल सिद्धारमैया के पद पर आंच नहीं आएगी। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी जानती है कि वह OBC यानी अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय के बड़े नेता हैं। साथ ही उन्हें अहिंदा समुदाय के साथ पार्टी के 100 से ज्यादा विधायकों का समर्थन हासिल है। कांग्रेस के कुल 137 विधायक हैं। ऐसे में उनकी सहमति के बगैर नेतृत्व परिवर्तन आलाकमान के लिए भी आसान नहीं होगा। रिपोर्ट के मुताबिक, उपमुख्यमंत्री शिवकुमार और उनके समर्थकों की तरफ से डाला जा रहा दबाव कैबिनेट फेरबदल टाल सकता है। माना जा रहा था कि सिद्धारमैया कैबिनेट में फेरबदल करना चाह रहे थे। रिपोर्ट के अनुसार, शिवकुमार के प्रयासों को आंतरिक समर्थन में कमी के चलते कमजोर माना जा रहा है। हालांकि, वोक्कलिगा समुदाय उनका समर्थक माना जाता है। दोनों पक्षों के लिए अड़े समर्थक सिद्धारमैया और शिवकुमार का समर्थन करने वाले जाति समूह खुलकर उनके पक्ष में आ गए है। एक समूह ने कांग्रेस को मौजूदा मुख्यमंत्री को हटाने के खिलाफ चेतावनी दी, जबकि दूसरे समुदाय ने शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने का पुरजोर समर्थन किया। कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग समुदाय महासंघ (केएसएफबीसीसी) ने कांग्रेस को चेतावनी दी है कि राज्य इकाई में अंदरूनी कलह के मद्देनजर सिद्धरमैया को मुख्यमंत्री पद से हटाने का कोई भी प्रयास पार्टी पर असर डालेगा, जबकि कर्नाटक राज्य वोक्कालिगारा संघ ने चेतावनी दी कि मुख्यमंत्री बनने के इच्छुक उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार के साथ अगर अन्याय हुआ तो वह इसका कड़ा विरोध करेगा। अहिंदा (अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित समुदायों के लिए संक्षिप्त कन्नड़ नाम) सिद्धरमैया का प्रमुख वोटबैंक माना जाता है, वहीं कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं जो एक प्रभावशाली कृषक समुदाय है जिसके कई नेता जैसे के. हनुमंतैया, के.सी. रेड्डी, एच.डी. देवगौड़ा, एस.एम. कृष्णा, सदानंद गौड़ा और एच.डी. कुमारस्वामी राज्य के मुख्यमंत्री रह … Read more

EC-SIR की रट पर राहुल गांधी, बिहार चुनाव रिव्यू में उम्मीदवारों ने उठाए सवाल

पटना  बिहार विधानसभा चुनाव में विपक्ष की सभी रणनीति धरी की धरी रह गईं. प्रदेश के लोगों ने 20 साल से चली आ रही सरकार पर ही भरोसा जताया. तेजस्‍वी यादव और राहुल गांधी की जोड़ी को करारी शिकस्‍त का सामना करना पड़ा. चुनाव से ठीक पहले बिहार में चुनाव आयोग ने वोटर लिस्‍ट को संशोधित करने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान चलाया. चुनाव आयोग के इस कदम से मतदाता सूची से नाम कटे तो जुड़े भी. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के इस कदम का मकसद उसके वोटर्स के नाम को काटना था. इसमें केंद्र सरकार को भी लपेटा गया. आयोग और विपक्ष के बीच इसको लेकर बयानबाजियां भी हुईं. चुनाव आयोग ने विपक्ष के सभी सवालों का जवाब भी दिया, पर विवाद थमा नहीं. इस बीच, विपक्ष इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच भी गया. राहुल गांधी ने बकायदा वोटर्स अधिकार यात्रा भी की. विपक्ष के तमाम नेताओं का इसमें महाजुटान भी हुआ. यहां तक की तमिलनाडु के मुख्‍यमंत्री एमके स्‍टालिन ने भी इसमें शिरकत की थी. कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत पूरे आलाकमान ने इसमें जी जान लगा दी. ‘वोट चोरी’ का अभियान भी चलाया गया. कांग्रेस के नेता और आलाकमान इसी में उलझा रहा. जनता से जुड़े मुद्दे (जैसे बिजली, पानी, शिक्षा, सुरक्षा आदि) से विपक्ष कट सा गया. हार के बाद कांग्रेस ने समीक्षा बैठक की जिसमें टॉप लीडर्स के साथ ही बिहार चुनाव में उम्‍मीदवार रहे नेताओं ने भी शिरकत की. जमीन पर काम करने वाले नेताओं ने इस बैठक में जो बातें बताईं वे वास्‍तव में चौंकाने वाली रहीं. कांग्रेस हाईकमान और बिहार के नेताओं के बीच तकरीबन 4 घंटे तक बैठक चली. समीक्षा बैठक के बाद कांग्रेस के महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने एक्‍स पर पोस्‍ट कर इसके बारे में जानकारी दी. उन्‍होंने कहा, ‘आज हमारे उम्मीदवारों और बिहार के नेताओं के साथ कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष की मौजूदगी में हुई 4 घंटे की बैठक में एक बात साफ सामने आई – बिहार चुनाव असली जनमत नहीं था, बल्कि पूरी तरह से मैनेज किया गया और मनमुताबिक बनाया गया नतीजा था. नेताओं ने बताया कि कैसे SIR के जरिए चुनिंदा वोटरों के नाम काटे गए और संदिग्ध नाम जोड़े गए. कैसे कथित MMRY योजना के नाम पर खुलेआम पैसे बांटकर वोटरों को प्रभावित किया गया, वह भी कई जगह मतदान केंद्रों पर. साथ ही कई सीटों पर एक जैसे अंतर से आए नतीजों ने यह पैटर्न दिखा दिया कि कोई भी स्वतंत्र चुनाव आयोग इसे नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता था.’ दूसरी तरफ, वेणुगोपाल के बयान के उलट बिहार में मिली बड़ी चुनावी हार के बाद कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि पार्टी ने चुनाव के दौरान महंगाई, रोजगार, पलायन और भ्रष्टाचार जैसे असली स्थानीय मुद्दों को छोड़कर ज़रूरत से ज़्यादा ध्यान SIR/वोट चोरी पर लगा दिया. नेताओं का मानना है कि इससे मतदाताओं तक सही संदेश नहीं जा पाया और पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा. बिहार चुनाव में किस पार्टी को कितनी सीटें -:     BJP : 89     JDU : 85     RJD : 25     Congress : 6     AIMIM : 5     Others : 9 कांग्रेस नेताओं ने कौन सी 3 वजहें गिनाईं? कुछ स्थानीय पदाधिकारियों ने तीन बड़ी वजहें गिनाईं. इन नेताओं ने कहा कि चुनाव के दौरान सरकार की ओर से महिलाओं को ₹10,000 की आर्थिक मदद, बूथ स्तर पर गड़बड़ियां और गठबंधन दलों में तालमेल की कमी हार की बड़ी वजहें रहीं. वहीं, कई नेताओं ने AIMIM को सीमांचल और आसपास के इलाकों में अल्पसंख्यक वोटों के बंटवारे के लिए जिम्मेदार ठहराया. आरोप यह भी लगा कि बीजेपी ने चुनाव ठीक करने के लिए SIR, EVM, वोट खरीदने और प्रशासनिक दबाव जैसे कई तरीकों का इस्तेमाल किया. बिहार में हार के कुछ दिन बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल ने उम्मीदवारों और सांसदों से बैठक कर समीक्षा की. तकरीबन 70 लोगों ने अलग-अलग बैचों में आला नेतृत्व से मुलाकात की. बैठक शुरू होने से पहले ही दो हार चुके उम्मीदवारों के बीच बहस हो गई. एक उम्मीदवार को इस बात पर आपत्ति थी कि दूसरा बाहरी लोगों को टिकट देने पर हिंसा की बात उठा रहा था. बताया जा रहा है कि नेताओं को बैचों में बुलाने का मकसद भी संभावित टकराव से बचना था. सवालों का क्‍या जवाब? कुछ नेताओं ने टिकट बंटवारे की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और कहा कि गलत चयन ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, एक नेता ने राहुल गांधी से कहा कि जैसे उन्होंने 2019 की लोकसभा हार की जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया था, वैसे ही बिहार में भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. यह टिप्पणी राज्य के प्रभारी कृष्ण अल्लावरु पर अप्रत्यक्ष निशाना मानी गई. कई अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे को उठाया. पार्टी के एक धड़े ने राजद से गठबंधन पर भी सवाल खड़ा किया. उनका कहना था कि राजद कुछ वोट दिलाता है, लेकिन उसकी वजह से अन्य समुदाय कांग्रेस के खिलाफ पोलराइज हो जाते हैं. कई नेताओं ने कांग्रेस-राजद गठबंधन तोड़ने की मांग भी की. हालांकि, एक बैठक में राहुल गांधी ने इस तर्क को खारिज किया और पूछा कि जब उन सीटों पर कांग्रेस और राजद एक-दूसरे के खिलाफ लड़े और ‘फ्रेंडली फाइट’ हुई, तब कांग्रेस क्यों नहीं जीत सकी?

वक्फ बोर्ड की संपत्तियों का रजिस्ट्रेशन धीमा, MP में केवल 10% संपत्तियां ही पंजीकृत

भोपाल  मध्य प्रदेश में पिछले छह महीनों में 15,000 से अधिक वक्फ संपत्तियों में से दस प्रतिशत का भी पंजीकरण केंद्रीय वक्फ पोर्टल, UMEED पर नहीं हो पाया है। राज्य और वक्फ के शीर्ष अधिकारियों ने हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को यह जानकारी दी। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों के लिए 6 दिसंबर तक अपनी वक्फ संपत्तियों को इस पोर्टल पर पंजीकृत करने की समय सीमा तय की थी। केंद्र बढ़ाएगी समय सीमा सरकारी अधिकारियों ने पोर्टल पर सभी जानकारी भरने और वक्फ संपत्तियों को पंजीकृत करने में तकनीकी बाधाओं और रिकॉर्ड की अनुपलब्धता को इसका कारण बताया है। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार 6 दिसंबर की समय सीमा को आगे बढ़ाएगी। केंद्र सरकार ने 6 जून को एक नया केंद्रीय वक्फ पोर्टल लॉन्च किया था। वक्फ बोर्ड के अनुसार, राज्य में 15,000 से अधिक वक्फ संपत्तियां हैं, जिनमें से केवल 1,200 संपत्तियों को ही अब तक केंद्रीय पोर्टल पर पंजीकृत किया गया है, जो दस प्रतिशत से भी कम है। नौ लाख से अधिक हैं संपत्तियां केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने जून में बताया था कि भारत में 9 लाख से अधिक सूचीबद्ध वक्फ संपत्तियां हैं। उन्होंने कहा था कि राज्यों को समय-सीमा का सख्ती से पालन करना होगा और बोर्ड को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके पास पंजीकृत सभी वक्फ संपत्तियों का विवरण निर्धारित 6 महीनों के भीतर पोर्टल पर अपलोड किया जाए। रिजिजू ने पोर्टल लॉन्च के बाद कहा था कि सभी पुरानी संपत्तियां जो कानून के अनुसार हैं – जिनका मालिकाना हक है और वैध हैं – उन्हें शामिल किया जाएगा। जो अवैध हैं और बिना किसी दस्तावेज के हैं, उन्हें सूचीबद्ध नहीं किया जाएगा। नई वक्फ संपत्तियां, आगे जाकर, डेटाबेस में शामिल की जाएंगी। तकनीकी समस्या हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बात करते हुए, मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष संवर पटेल ने कहा कि पोर्टल में 'वक्फ का तरीका' (संपत्ति को वक्फ के रूप में कैसे सूचीबद्ध किया गया) का कॉलम नहीं है। उन्होंने बताया कि मध्य प्रदेश की कुल वक्फ संपत्तियों में से, 14,164 को सरकारी सर्वेक्षण के माध्यम से वक्फ के रूप में पंजीकृत किया गया था। उस कॉलम की अनुपस्थिति में जहां वक्फ का तरीका परिभाषित किया गया है, केंद्र के पोर्टल पर संपत्ति को सूचीबद्ध करना मुश्किल है। हमें उम्मीद है कि तकनीकी समस्या हल हो जाएगी और 6 दिसंबर की समय सीमा बढ़ा दी जाएगी। राज्य के पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों ने केंद्र के UMEED पोर्टल के साथ तकनीकी समस्याओं को स्वीकार किया है। उन्होंने यह भी बताया कि वक्फ संपत्ति को पंजीकृत करने के लिए पोर्टल पर भरी जाने वाली सभी आवश्यक जानकारी भी राज्य में ऐसी कई संपत्तियों के लिए उपलब्ध नहीं है। पोर्टल पर पंजीकरण प्रक्रिया में मुतवल्ली (देखभाल करने वाले) द्वारा संपत्ति का विवरण दर्ज करना शामिल है। इसके बाद वक्फ बोर्ड द्वारा सत्यापन और नामित सरकारी अधिकारियों द्वारा अनुमोदन किया जाता है। रिकॉर्ड की जांच के बाद, 'UMEED' पोर्टल में एक प्रविष्टि की जाती है।  

सिंहस्थ के लिए तैयारी: उज्जैन पुलिस ने बनाया होटल चेक-इन अलर्ट ऐप

उज्जैन उज्जैन में महाकाल मंदिर के आसपास होटल में रुकने वाले यात्रियों का डेटा अब एक ऐप के माध्यम से पुलिस के पास ऑनलाइन उपलब्ध है। इससे शहर में आने वाले संदिग्धों के बारे में पुलिस को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा। एसपी प्रदीप शर्मा ने बड़ी संख्या में उज्जैन आ रहे लोगों का डिजिटल डेटा रखने के लिए GuestReport.in नामक ऐप तैयार करवाया है। इस ऐप से उज्जैन के होटलों में रुकने वाले यात्रियों के नाम, उनकी पहचान, उनका मोबाइल नंबर सहित अन्य डेटा तत्काल पुलिस थाने, थाना प्रभारी और जिले के एसपी के पास रियल टाइम में पहुंच रहा है। ऐप में होटल संचालक को रोजाना अपनी होटल में आने वाले यात्रियों की जानकारी भरनी होती है। यह जानकारी होटल की वेबसाइट सहित संबंधित थाने पहुंच जाती है। पिछले साल आए थे 7 करोड़ श्रद्धालु महाकाल मंदिर के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। पिछले साल मध्य प्रदेश टूरिज्म के आंकड़ों में उज्जैन प्रदेश में सबसे ऊपर रहा, जहां करीब 7 करोड़ श्रद्धालु आए थे। इतनी बड़ी संख्या में उज्जैन पहुंच रहे श्रद्धालुओं के बारे में होटल की जानकारी पुलिस थाने तक पहुंचने और उसे खंगालने में करीब एक से दो हफ्तों का समय लग जाता था। लेकिन, उज्जैन पुलिस के एक ऐप से यह सारा काम आसान हो गया है। सिंहस्थ कुंभ में सबसे ज्यादा उपयोगी होगा माना जा रहा है कि उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ के दौरान दो महीने में करीब 30 करोड़ श्रद्धालु उज्जैन आएंगे। इस दौरान जो लोग होटल, लॉज, धर्मशाला में रहेंगे, उनका डेटा इस ऐप के उपयोग से पुलिस के पास रियल टाइम में उपलब्ध रहेगा। करोड़ों श्रद्धालुओं की रियल टाइम ट्रेसेबिलिटी, कौन कहां ठहरा है। इसका डेटा तुरंत उपलब्ध होगा, गुमशुदा व्यक्तियों की तुरंत पहचान हो सकेगी। यह भी पता लग सकेगा कि कौन कहां रुका हुआ है। पूरे आयोजन में सुरक्षा और निगरानी के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जा सकेगा। अगर कोई यात्री अपनी होटल का पता भूल जाता है, तो भी ऐप के माध्यम से पता लगाया जा सकेगा। होटल वालों के लिए भी उपयोगी पुलिस के इस ऐप से न सिर्फ पुलिस को मदद मिल रही है, बल्कि होटल संचालक भी रोजाना पुलिस थाने जाकर अपनी डिटेल नोट करवाने जैसे झंझट से मुक्त हो गए हैं। जो होटल संचालक ऐप का उपयोग नहीं कर रहे हैं, उन्हें रोज सुबह होटल में रुकने वाले गेस्ट की जानकारी मैन्युअली कागज पर भरकर देनी होती है। इसके लिए रोजाना एक कर्मचारी होटल में पूरी शीट देने जाता है। इस ऐप से होटल वालों को भी कई सुविधाएं मिल गई हैं। अभी होटलों में, बाद में आश्रम और अखाड़ों को भी जोड़ेंगे एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि प्रति वर्ष 7 करोड़ से अधिक श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। भारी संख्या में होम स्टे और होटल आ गए हैं, इसलिए हमेशा अंदेशा बना रहता है कि बाहर से आने वाले लोगों की पूरी जानकारी पुलिस के पास होनी चाहिए। इन हाउस और एक पोर्टल का उपयोग किया जा रहा है। पोर्टल संचालक द्वारा सभी प्रकार के यात्रियों की जानकारी दर्ज की जा रही है। तत्काल संबंधित थाना प्रभारी, थाना और बिट प्रभारी के पास दर्ज हो जाती है। यह पूरा पेपरलेस है। कई तरह की फैसिलिटी, कोई संदिग्ध अलर्ट में है और अगर वह उज्जैन आकर रुका तो हमारे पास अलर्ट आ जाएगा।

MP में आरएसएस का नया कदम: Gen-Z युवाओं के लिए 34 नगरों में युवा संगम

भोपाल   दुनिया में इन दिनों जेनरेशन जूमर्स यानी जेन-जी (Gen-Z) को लेकर बहस छिड़ी है। जेन-जी वर्ग के युवाओं की पहचान आंदोलन करने के रूप में हो चुकी है। नेपाल में सरकार का तख्ता पलट में जेन-जी की अहम भूमिका थी। हाल ही में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने इंदौर में कहा था कि लोकतंत्र को बचाने के लिए जेन-जी को ही आगे आना पड़ेगा, लेकिन इन सबसे अलग राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) इन दिनों युवाओं को लेकर खास काम कर रहा है।  34 शहरों में शुरू हुआ युवा संगम हाल ही में इंदौर सहित पांच जिलों के 34 नगरों में बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी में 'युवा संगम' का आयोजन किया गया। इस युवा संगम का उद्देश्य युवाओं के मन में राष्ट्र प्रथम भाव को जोड़ना था। जोर दिया गया कि भारत में युवाओं की संख्या विश्व में सर्वाधिक है और राष्ट्र निर्माण में उनकी भूमिका अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। आरएसएस घर घर जाकर लोगों को बताएंगे  100 वर्षो का संघर्ष   राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में हर घर संपर्क अभियान के तहत प्रखंड के सभी पंचायतों में स्वयंसेवक संघ का पत्रक, पुस्तक एवं झोला लेकर हर गांव और हर समाज के लोगों तक पहुंच रहे हैं। इस अभियान के तहत लोगों के बीच पुस्तकों एवं पत्रकों के वितरण के लिए प्रखंड मुख्यालय  में सभी सक्रिय स्वयंसेवकों की बैठक हुई। इसमें सक्रिय स्वयंसेवकों को संघ का बैग, संघ का पुस्तक एवं पत्रक दिया गया। इस अवसर पर उन्हें आरएसएस के बारे में बताया गया तथा सभी से अपने-अपने गांव या पंचायत में हर घर संपर्क कर लोगों को संघ से जुड़ने के लिए प्रेरित करने को कहा गया। इस अभियान का उद्देश्य समाज में एक सकारात्मक वातावरण तैयार करना तथा संघ के विचारों को घर-घर तक पहुंचाना है। इसके लिए स्वयंसेवकों ने सनातन समाज के सुमंगल, राष्ट्र की अखंडता एवं संगठन की भावना को लोगों तक पहुंचाने का संकल्प लिया। क्षेत्र के सभी परिवारों एवं सभी वर्गों में संपर्क कर जन-जन तक राष्ट्रहित की बात पहुंचाई जा रही है। योजना की जानकारी संघ ने हाल ही में प्रत्येक नगर में युवा संगम का आयोजन किया था। 'युवा संगम' ने कॉलेज छात्रों को एकत्रित कर अलग-अलग सत्र किए, जिसमें उन लोगों को खासकर चिह्नित कर शामिल किया गया जिनका पूर्व से संघ से परिचय नहीं था। संगम में बौद्धिक और अन्य सत्रों में माध्यम से उन्हें संघ की 100 वर्षों की यात्रा और कार्य योजना की जानकारी दी गई। युवा संगम का सीधा सीधा उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र प्रथम भाव से जोड़ना था। मालूम हो, इन दिनों विश्वभर में इस उम्र (जेनरेशन जूमर्स या जेन जी) के युवा आंदोलन के लिए पहचाने जाते हैं। संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर आरएसएस विभिन्न आयोजन कर रहा है। इंदौर में विजयादशमी पर पथ संचलन हुआ। 1.40 लाख से अधिक स्वयंसेवक शामिल हुए। कुछ समय बाद वृहद हर घर सपर्क अभियान और हिन्दू सम्मलेन जैसे आयोजन की भी प्रस्तावना है।

शिक्षकों के लिए नया नियम: परीक्षा पास करना जरूरी, NIOS पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराएं

भोपाल  बच्चों की परीक्षा लेने वाले शिक्षकों को भी अब परीक्षा देनी होगी और अगर इसमें फेल हुए तो उन्हें नौकरी से हाथ धोना होगा। दरअसल प्रदेश में पांच हजार शिक्षकों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। प्राइमरी स्कूलों में बतौर शिक्षक भर्ती हुए इन शिक्षकों को पहले ब्रिज कोर्स करना होगा। छह माह का यह कोर्स नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओपन स्कूलिंग (एनआइओएस) करवाएगा। इसमें अगर फेल हो गए तो शिक्षक की नौकरी जाएगी। लोक शिक्षण संचालनालय ने इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट का है निर्देश प्रदेश में 94 हजार सरकारी स्कूल हैं। प्राइमरी कक्षा में 1.40 लाख शिक्षक हैं। इनमें से करीब पांच हजार ऐसे हैं, जिनकी नियुक्ति बीएड के आधार पर हुई। सुप्रीम कोर्ट से जारी निर्देश में पात्रता परीक्षा पास करना शिक्षकों को अनिवार्य हो गया। दो साल में भर्ती हुए ये शिक्षक इस दायरे में आ रहे हैं। दायरे में आ रहे हैं ये शिक्षक शिक्षकों को ब्रिज कोर्स कराने लोक शिक्षण संचालनालय से निर्देश जारी हुए हैं। इसके तहत हर जिले को ऐसे शिक्षकों को एनआइओएस के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना है। इसकी आखिरी तारीख 25 दिसंबर है। 6 माह का कोर्स पूरा कर शिक्षकों को सालभर में सार्टिफिकेट जमा कराना होंगे। यह हैं निर्देश सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त 2023 को आदेश पारित किया था। इसके मुताबिक इस तारीख के बाद प्राइमरी स्कूलों मेें बीएड के आधार पर शिक्षकों की भर्ती मान्य नहीं होगी। सेवा समाप्त हो सकती है बीएड के आधार पर भर्ती प्राइमरी शिक्षकों को ब्रिज कोर्स करना होगा। इसके लिए रजिस्ट्रेशन होना है। सभी जिलों को निर्देश जारी हुए हैं। एक साल में कोर्स पूरा न करने पर सेवाएं समाप्त की जा सकती है। – केके द्विवेदी, संचालक, लोक शिक्षण संस्थान

सीएम ने रखा 17,440 करोड़ का अनुपूरक बजट, कृषि व ग्रामीण क्षेत्रों पर खास फोकस

भुवनेश्वर ओडिशा विधानसभा में शुक्रवार को मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 17,440 करोड़ रुपये का अनुपूरक बजट पेश किया, जिसमें किसानों के कल्याण, महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य सेवा, परिवहन, उद्योग, संस्कृति, कृषि, और बुनियादी ढांचे पर विशेष ध्यान दिया गया है।अतिरिक्त बजट में राज्य सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को सबसे अधिक महत्व दिया है। प्राथमिक और उच्च शिक्षा के विकास के लिए 2,327 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस बजट से राज्य का शिक्षा विभाग और अधिक प्रगति करेगा, ऐसी उम्मीद की जा रही है। शिक्षा के बाद कृषि और किसानों को दूसरा सबसे अधिक महत्व दिया गया है। राज्य के किसानों के लिए अतिरिक्त बजट में 1,673 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इसी तरह महिला और बाल विकास विभाग के लिए 1,558 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अतिरिक्त बजट में उद्योग एवं एमएसएमई के लिए 337 करोड़ रुपये, ममता योजना के लिए 141 करोड़, गोपबन्धु जन आरोग्य के लिए 440 करोड़, आपदा प्रबंधन हेतु 171 करोड़, अनुसूचित जाति और जनजाति विकास के लिए 531 करोड़, प्रशासनिक व्यय के लिए 3,389 करोड़ रुपये, सामाजिक सेवा के लिए 5,948 करोड़ रुपये, स्वास्थ्य विभाग के लिए 1,164 करोड़ रुपये, पंचायती राज विभाग के लिए 616 करोड़ रुपये, ओड़िया भाषा एवं साहित्य विभाग के लिए 363 करोड़ रुपये, सुभद्रा योजना के लिए 295 करोड़ रुपये, नंदनकानन के विकास के लिए 80 करोड़ रुपये, पर्यावरण और पर्यटन विकास के लिए 80 करोड़ रुपये, वन्यजीव संरक्षण एवं सुरक्षा के लिए 25 करोड़ तथा शहरी विकास के लिए 303 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। बजट आवंटन का विवरण:     प्रशासनिक व्यय: 3,389 करोड़ रुपये     कार्यक्रम व्यय: 13,716 करोड़ रुपये प्रमुख क्षेत्रों में प्रावधान: किसान कल्याण एवं खाद्य सुरक्षा:     धान खरीद रिवॉल्विंग फंड के लिए 3,000 करोड़ रुपये     पीडीएस सब्सिडी के लिए 1,325 करोड़ रुपये     समृद्ध कृषक योजना के तहत एमएसपी और इनपुट सहायता के लिए 850 करोड़ रुपये स्वास्थ्य सेवाएं:     राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के लिए 994 करोड़ रुपये     एससीबी मेडिकल कॉलेज के उन्नयन के लिए 50 करोड़ रुपये     गोपबन्धु जन आरोग्य योजना के तहत तृतीयक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 40 करोड़ रुपये महिला, बाल एवं आजीविका विकास:     सुभद्रा योजना के लिए 295 करोड़ रुपये     मिशन शक्ति कार्यक्रम के लिए 405 करोड़ रुपये     राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत 426 करोड़ रुपये शिक्षा, कौशल एवं युवा विकास:     पीएम-पोषण योजना के लिए 392 करोड़ रुपये     ओडिशा आदर्श विद्यालयों के लिए 320 करोड़ रुपये     गैर-सरकारी स्कूलों और कॉलेजों के लिए अनुदान     बुनियादी ढांचा, ग्रामीण एवं शहरी विकास:     सेतु बंधन योजना के लिए 120 करोड़ रुपये     मुख्यमंत्री सहरी विकास योजना के तहत शहरी बुनियादी ढांचे के लिए 100 करोड़ रुपये उद्योग, आईटी एवं कनेक्टिविटी:     एसआइडीबीआइ क्लस्टर डेवलपमेंट फंड के तहत 276 करोड़ रुपये     भारतनेट, ओएसडब्ल्यूएएन कनेक्टिविटी और पुरी में नए सबमरीन केबल लैंडिंग स्टेशन के लिए धनराशि संस्कृति एवं पर्यटन:     बारपुत्रा ऐतिहास्य ग्राम योजना के लिए 100 करोड़ रुपये     कलामंडल के लिए 90 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट में प्रावधान किया गया है।  

मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने गीता जयंती महोत्सव के कार्यक्रमों की जानकारी प्राप्त कर दिए निर्देश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आगामी 1 दिसंबर को गीता जयंती पर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर राज्य में हो रहे कार्यक्रमों की तैयारी की जानकारी प्राप्त की और आवश्यक निर्देश दिए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अभ्युदय मध्य प्रदेश (गवर्नेंस एंड ग्रोथ समिट) निवेश से रोजगार (अटल संकल्प उज्जवल मध्य प्रदेश ) के अंतर्गत 25 दिसंबर को ग्वालियर में हो रहे कार्यक्रम के संबंध में भी अधिकारियों से चर्चा की। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गीता महोत्सव के संबंध में मुख्यमंत्री निवास समत्व भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंस द्वारा जिला कलेक्टर्स और पुलिस अधिकारियों से चर्चा की। बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन सहित संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि 1 दिसंबर गीता जयंती पर गीता महोत्सव के अंतर्गत होने वाली गतिविधियों में जन सामान्य की अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित की जाए। श्रीमद्भागवत गीता के विभिन्न अध्यायों की संस्कृत और हिंदी में, स्कूल कॉलेज के साथ-साथ जन सामान्य को प्रतियां उपलब्ध करवाकर, गीता पर केंद्रित क्विज आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं। गीता ज्ञान के प्रसार से जन सामान्य की विचार प्रक्रिया और मानसिकता पर सकारात्मक प्रभाव होगा। उल्लेखनीय है कि श्रीमद्भगवतगीता ऑन लाइन ज्ञान प्रतियोगिता में प्रवृष्ठि 28 नवम्बर तक www.geetamahotsav.com पर होगी। जिसमें तीन श्रेणियों में भागीदारी की जा सकती है। सभी श्रेणियों के लिए पृथक -पृथक पुरस्कारों का प्रावधान भी किया गया है। यह पुरस्कार 26 जनवरी 2026 को दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कलेक्टर्स, को निर्देश दिए कि जिला स्तर पर अधिक से अधिक नागरिकों को विभिन्न प्रतियोगिताओं और गीता पाठ में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें। गीता पाठ के कार्यक्रमों में होगी व्यापक सहभागिता मुख्यमंत्री डॉ.यादव ने गीता पाठ कार्यक्रम की तैयारियों की भी जानकारी प्राप्त की। उल्लेखनीय है कि 1 दिसंबर को अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती पर मध्यप्रदेश में सभी विकास खंडों, जिला मुख्यालयों, संभागीय मुख्यालयों पर श्रीमद्भगवद्गीता के 15 वें अध्याय का पाठ किया जा रहा है। जन सामान्य द्वारा युगावतार भगवान श्रीकृष्ण के मानव कल्याण के संदेश को आत्मसात किए जाने के उद्देश्य को इस गीता पाठ से सफल बनाया जा सकता है। वीर भारत न्यास द्वारा गीता पाठ के साथ-साथ गीता प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जा रहा है। जिसमें प्रदेश के विद्यार्थी बड़ी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं।