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सारंग का बयान: राहुल गांधी जंगली जानवरों से वोट मांगने MP आए थे

भोपाल   बिहार चुनाव में हुई हार की समीक्षा बैठक में कांग्रेस नेताओं द्वारा गोली मारने की धमकी पर मंत्री विश्वास सारंग ने तंज कसा है। सारंग ने कहा है कि  बिहार में चुनाव चल रहे थे तो राहुल गांधी मध्यप्रदेश में जंगल में घूम रहे थे, वो जंगली जानवरों से वोट मांगने आए थे… किसी पार्टी का सर्वोच्च नेता ही चुनाव को सीरियसली नहीं लेता तो समीक्षा किस बात की करनी है। यदि कांग्रेस की हार की सही समीक्षा होगी तो उसका कारण राहुल गांधी होंगे। राहुल गांधी के कारण ही कांग्रेस लगातार हार रही है। कांग्रेस अब गॉन केस हो चुकी है और कांग्रेस पूरी तरह गुट और गिरोह में बंटी हुई है। राहुल गांधी स्क्रिप्टेड एक्शन से राजनीति करना चाहते हैं-सारंग आगे सारंग ने कहा कि कांग्रेस के पास नेता, नीति और नीयत तीनों की कमी है, राहुल गांधी स्क्रिप्टेड एक्शन से राजनीति करना चाहते हैं।  राहुल केवल नेहरू परिवार के होने के कारण कांग्रेस में कब्जा किए हुए हैं। कांग्रेस और TMC के नेता देश की अखंडता को तार-तार करना चाहते हैं-सारंग वहीं SIR और NRC पर TMC नेता फिरहाद हकीम के पांव तोड़ने वाले बयान पर मंत्री विश्वास सारंग ने पलटवार किया है। सारंग ने कहा ये सब घुसपैठियों को संरक्षण देने वाले लोग हैं, घुसपैठियों के माध्यम से इस देश के आमजन नागरिकों के हकों को मारने वाले लोग हैं। कांग्रेस और टीएमसी के नेता इस देश की एकता और अखंडता को तार तार करना चाहते हैं लेकिन घुसपैठियों को कहीं भी जगह इस देश में नहीं मिलेगी।

इकोनॉमी का सरप्राइज जंप! सितंबर क्वार्टर में GDP 8.2% बढ़ी, प्रोजेक्शन उलटे पड़े

नई दिल्ली  भारत की इकोनॉमी तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है। जुलाई-सितंबर तिमाही (Q2) के दौरान जीडीपी 8.2% की मजबूत दर से बढ़ी है, जो विशेषज्ञों के अनुमान से कहीं बेहतर है। पिछले वित्त वर्ष की इसी तिमाही में 5.6 प्रतिशत की दर से इकोनॉमी बढ़ी थी। वहीं, ताजा ग्रोथ पिछली तिमाही यानी अप्रैल से जून की अवधि के 7.8% से भी ज्यादा है। इस बार के आंकड़े बताते हैं कि उपभोक्ता खर्च में जोरदार तेजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के शानदार प्रदर्शन की वजह से जीडीपी ने 8 पर्सेंट के आंकड़े को पार कर लिया है । सितंबर तिमाही के जीडीपी ग्रोथ में जीएसटी कटौती का मामूली असर है। दरअसल, जीएसटी कटौती 22 सितंबर से लागू हुई है। इसका व्यापक असर दिसंबर तिमाही के जीडीप आंकड़ों में देखने को मिलेगा। ग्रामीण बाज़ार की वापसी ने भरा दम अर्थशास्त्रियों का मानना है कि इस मज़बूत ग्रोथ के पीछे आम जनता की बढ़ती मांग का बड़ा हाथ है। इन्फोमेरिक्स रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मनोरंजन शर्मा के अनुसार, त्योहारी सीज़न से पहले शहरी मांग में ज़बरदस्त तेज़ी आई है। साथ ही, कई सालों की सुस्ती के बाद ग्रामीण ख़र्च में भी एक सार्थक सुधार देखने को मिला है. यह एक बड़ी राहत है, क्योंकि देश की GDP में 55% से 60% योगदान उपभोग (Consumption) का होता है, और यह इंजन अब फिर से तेज़ी पकड़ रहा है। Union Bank of India के अर्थशास्त्रियों ने Q2FY26 के लिए GDP को 7.5% रहने का अनुमान लगाया है। उन्होंने यह भी बताया कि सकल मूल्य वर्धित (GVA) ग्रोथ, जो उत्पादन पक्ष को दर्शाती है, वह भी बढ़कर 7.3% हो सकती है। SBI म्यूचुअल फंड की मुख्य अर्थशास्त्री नम्रता मित्तल का मानना है कि वास्तविक GDP ग्रोथ 8% तक भी जा सकती है, जो RBI के अनुमान से काफी अधिक है। उनका भी कहना है कि सरकार के खर्च ने इस ग्रोथ को मज़बूत सहारा दिया है। दूसरी छमाही के लिए चेतावनी हालांकि, इतने उत्साहजनक आंकड़ों के बावजूद, विशेषज्ञों ने एक चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि वित्त वर्ष 2026 की दूसरी छमाही में (अक्टूबर से मार्च) GDP के आंकड़े थोड़े कमज़ोर पड़ सकते हैं। इसका मुख्य कारण है कि जो सांख्यिकीय कारक अभी ग्रोथ को बढ़ा रहे हैं, वे धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे. इसके अलावा, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में देरी के कारण अमेरिकी टैरिफ का पूरा प्रभाव भी आने वाली तिमाहियों के आंकड़ों में नज़र आएगा। यह नाम मात्र की GDP ग्रोथ का धीमा पड़ना ही वह मुख्य चिंता है, जिस पर नीति-निर्माताओं को ध्यान देने की ज़रूरत होगी। बता दें Q2FY26 के GDP आंकड़े शुक्रवार, 28 नवंबर को जारी होने वाले हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने गोवा में दुनिया की सबसे ऊंची श्रीराम प्रतिमा का किया अनावरण

कनकोण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोवा के पर्तगाली (कनकोण) स्थित श्री संस्थान गोकर्ण जीवोत्तम मठ में भगवान श्रीराम की 77 फीट ऊंची विश्व की सबसे बड़ी राम प्रतिमा का अनावरण किया. यह भव्य प्रतिमा मशहूर मूर्तिकार राम सुतार ने बनाई है, जिन्होंने 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' भी डिजाइन किया था. यह कांस्य प्रतिमा 77 फीट ऊंची है, जो इसे भगवान राम की अब तक की सबसे ऊंची स्थापित प्रतिमा बनाती है. अनावरण के बाद एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 'श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगली जीवोत्तम मठ अपनी स्थापना की 550वीं वर्षगाठ मना रहा है. बीते 550 वर्षों में इस संस्था ने समय के कितने ही चक्रवात झेले हैं. युग बदला, दौर बदला, देश और समाज में कई परिवर्तन हुए लेकिन बदलते युगों और चुनौतियों के बीच इस मठ ने अपनी दिशा नहीं खोई, बल्कि मठ लोगों को दिशा देने वाला केंद्र बनकर उभरा और यही इसकी सबसे बड़ी पहचान है.' इससे पहले, प्रधानमंत्री मोदी ने समारोह के दौरान मठ परिसर में स्थित मंदिर के दर्शन किए और पूजा-अर्चना की. यह मठ भारत के सबसे पुराने मठवासी संस्थानों में से एक है, जो अपने आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान के लिए जाना जाता है और सारस्वत समुदाय में एक प्रमुख स्थान रखता है. मठ का जीर्णोदार श्री संस्थान गोकर्ण पर्तगाली जीवोत्तम मठ, गौड़ सारस्वत ब्राह्मण समुदाय का पहला वैष्णव मठ माना जाता है. यह मठ 13वीं शताब्दी में जगद्गुरु माधवाचार्य द्वारा स्थापित द्वैत वेदांत परंपरा का अनुयायी है. इसका मुख्यालय दक्षिण गोवा के पर्तगाली कस्बे में, शांत कुशावती नदी के किनारे स्थित है, जहां यह सदियों से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में प्रतिष्ठित है. गोवा लोक निर्माण विभाग मंत्री दिगंबर कामत ने बताया कि सदियों से आध्यात्मिक केंद्र के रूप में कार्यरत मठ परिसर का पूरी तरह से जीर्णोद्धार किया गया है और इसे आधुनिक रूप दिया गया है. समारोह में गोवा के राज्यपाल अशोक गजपति राजू और मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत भी मौजूद थे.

हरिद्वार में अर्धकुंभ 2027: चार अमृत स्नान सहित तीन महीने तक धार्मिक उत्सव

 हरिद्वार   उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई महत्वपूर्ण बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने 2027 के अर्द्धकुंभ मेले के लिए शुक्रवार को तीन शाही स्नान सहित 10 स्नान तिथियां घोषित की।जनवरी से अप्रैल तक आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक मेले में इस बार पहली बार साधु-संतों के साथ चार शाही अमृत स्नान कराए जाएंगे, जिसे संत परंपरा में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव माना जा रहा है। कब होगा पहला शाही स्नान? पहला शाही स्नान छह मार्च को महाशिवरात्रि पर होगा, दूसरा आठ मार्च को सोमवती अमावस्या पर, तीसरा 14 अप्रैल को बैसाखी (मेष संक्रांति) और चौथा 20 अप्रैल चैत्र पूर्णिमा (चौथा अमृत स्नान) होगा। इसके अलावा, मकर संक्रांति पर भी एक महत्वपूर्ण स्नान होगा लेकिन इसे शाही स्नान की श्रेणी में नहीं रखा गया है। वहीं सरकार पहले से ही इसकी तैयारी कर रही है. आइए जानते हैं अर्धकुंभ मेले के शुरू होने की तारीखों से लेकर शाही स्नान कब कब और कितने हैं… पुष्कर सिंह धामी के साथ दमकोठी में 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को मुलाकात की. इसमें 2027 में अर्धकुंभ की शुरुआत से लेकर इसके इंतजामों को लेकर चर्चा की गई. बैठक के दौरान, भव्य धार्मिक मेले की तिथियों की घोषणा की गई. बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद निरंजनी के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी महाराज भी उपस्थित थे. उन्होंने कहा कि अखाड़ों का प्राथमिक कार्य कुंभ मेले का आयोजन करना है और पूरा देश हरिद्वार में होने वाले इस भव्य आयोजन की प्रतीक्षा कर रहा है. कुंभ की तारीखों की घोषणा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कुंभ के आयोजन में संतों की भूमिका महत्वपूर्ण है. सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और मेले की व्यवस्थाओं को भव्य और सुव्यवस्थित बनाया जाएगा.उन्होंने कहा कि कुंभ मेला भव्य होगा और प्रशासनिक तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं.  मुख्यमंत्री धामी ने पुष्टि की कि मेला 13 जनवरी 2027 मकर संक्रांति से अर्ध कुंभ मेले की शुरुआत होगी.  पहली बार चार अमृत स्नान मुख्यमंत्री के साथ बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने हरिद्वार में 2027 के अर्धकुंभ मेले के लिए 10 प्रमुख स्नान समारोहों की तारीखों की घोषणा की है. जनवरी से अप्रैल तक चलने वाले इस महापर्व के दौरान पहली बार चार अमृत स्नान निर्धारित किए गए हैं. इस ऐतिहासिक निर्णय को सदियों पुरानी परंपराओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है. प्रमुख स्नान तिथियां -14 जनवरी, 2027 ( मकर संक्रांति ) – 6 फरवरी 2027 ( मौनी अमावस्या ) – 11 फरवरी 2027 ( बसंत पंचमी ) – 20 फरवरी 2027 ( माघ पूर्णिमा ) चार अमृत स्नान – 6 मार्च, 2027 – महाशिवरात्रि (पहला अमृत स्नान ) – 8 मार्च, 2027 – सोमवती /फाल्गुन अमावस्या (दूसरा अमृत स्नान ) – 14 अप्रैल, 2027 – मेष संक्रांति/वैसाखी (तीसरा अमृत स्नान ) – 20 अप्रैल, 2027 – चैत्र पूर्णिमा (चौथा अमृत स्नान )

कर्नाटक के उडुपी में पीएम मोदी का आगमन, शामिल होंगे कृष्ण मठ के भक्तिमय आयोजन में

नई दिल्ली  पीएम नरेंद्र मोदी ने आज कर्नाटक के उडुपी पहुंचे हैं। वे यहां पर श्री कृष्ण मठ के दौरा करेंगे। वह यहाँ के 'लक्ष कंठ गीता पारायण' कार्यक्रम में शामिल होंगे। यह कार्यक्रम भक्ति और आस्था का एक अद्भुत संगम है, जिसमें 1 लाख से अधिक लोग हिस्सा बनेंगे। इन लोगों में छात्र, साधु, विद्वान और आम नागरिक शामिल थे, जिन्होंने एक साथ मिलकर श्रीमद् भगवद गीता का पाठ किया। गोवा में 77 फीट ऊंची राम प्रतिमा का करेंगे अनावरण उडुपी के कार्यक्रम के बाद पीएम मोदी गोवा पहुँचेंगे। यहाँ वह श्री संस्थान गोकर्ण परतगली जीवोत्तम मठ के 550वें साल के जश्न 'सारधा पंचाष्टमोत्सव' में शामिल होंगे। गोवा में पीएम मोदी ने भगवान श्री राम की कांसे से बनी 77 फीट ऊंची मूर्ति का अनावरण किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने रामायण थीम पार्क गार्डन का भी उद्घाटन किया। इस मौके पर पीएम ने वहाँ मौजूद लोगों को संबोधित  करेंगे और एक खास पोस्टल स्टैम्प और एक यादगार सिक्का भी जारी करेंगे।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा: सशक्त आत्मा ही विश्व एकता की संकल्पना को साकार करने की आधारशिला

विश्वास वहीं टिकता है जहां मन शांत, विचार स्वस्थ और भावनाएं शुद्ध होती हैं: राष्ट्रपति राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा: सशक्त आत्मा ही विश्व एकता की संकल्पना को साकार करने की आधारशिला लखनऊ में प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के कार्यक्रम में बोलीं राष्ट्रपति  सशक्त आत्मा ही विश्व एकता की संकल्पना को साकार करने की आधारशिला रही है: द्रौपदी मुर्मु लखनऊ  राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा शुक्रवार को लखनऊ में आयोजित विश्व एकता एवं विश्वास के लिए ध्यान (योग) के राज्य स्तरीय उद्घाटन समारोह में भाग लेते हुए राजयोग के जरिए आध्यात्मिक चेतना के विकास पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्वास वहीं टिकता है, जहां मन शांत, विचार स्वस्थ और भावनाएं शुद्ध होती हैं। उन्होंने कहा कि सशक्त आत्मा ही विश्व एकता की संकल्पना को साकार करने की आधारशिला रही है। राष्ट्रपति मुर्मु के अनुसार, शांत और स्थिर मन समाज में शांति का बीज बोता है और वहीं से विश्व शांति और विश्व एकता की नींव बनती है। भारत की प्राचीन सभ्यता ने दिया वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सम्मिलित होते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने “ओम शांति” के संबोधन से अपने वक्तव्य की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति ने सदैव वसुधैव कुटुम्बकम् का संदेश विश्व को दिया है, जिसका भाव यह है कि सारा विश्व एक परिवार है। आज जब विश्व कई प्रकार की चुनौतियों से जूझ रहा है, तब यह विचार और अधिक प्रासंगिक बन जाता है। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास है कि इस महान संकल्प को सिद्ध करने के लिए यह अभियान प्रभावी योगदान देगा। उन्होंने कार्यक्रम के शुभारंभ के लिए ब्रह्मकुमारीज परिवार के सभी सदस्यों को बधाई दी। भारत सरकार ने समाज को अधिक समावेशी बनाने के लिए उठाए कदम राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार समाज को अधिक समावेशी, शांतिपूर्ण और मूल्य-आधारित बनाने के लिए अनेक महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। योग एवं ध्यान को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देना तथा अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के आयोजन का नेतृत्व भी इसी का एक हिस्सा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मूल्य-आधारित शिक्षा तथा जीवन पोषण जैसे तथ्यों का समावेशन इसी दिशा का प्रयास है। भारत सरकार ने मिशन लाइफ अभियान की शुरुआत की है, जो पर्यावरण के प्रति जागरूकता प्रसारित करने का अभियान है। महिला सम्मान, आत्मनिर्भरता और सामाजिक समावेश के लिए विभिन्न राष्ट्रीय कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। आध्यात्मिक चेतना से सुरक्षित होगा मानवता का भविष्य वर्ष 2023 में भारत में हुए जी-20 समिट के आयोजन का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि समिट का थीम था वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर। उन्होंने कहा कि ये पहल इस महत्वपूर्ण संदेश को मजबूत करती हैं कि मानवता का भविष्य मानव-मूल्यों, संवाद, विश्वास और आध्यात्मिक चेतना से सुरक्षित और उज्ज्वल होगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय में विज्ञान और तकनीक के बल पर मानवता ने अभूतपूर्व प्रगति की है। आज का युग सूचना, प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और अंतरिक्ष अनुसंधान का युग है। इन क्रांतिकारी परिवर्तनों ने मानव जीवन को अधिक सुविधाजनक, सुगम तथा संसाधन-संपन्न बनाया है। तकनीकी उन्नति के साथ बढ़ रहा तनाव राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज का मानव पहले की अपेक्षा अधिक शिक्षित और तकनीकी रूप से सक्षम है। उसके पास आगे बढ़ने के अनेक अवसर हैं, लेकिन समाज में तकनीकी उन्नति के साथ तनाव, असुरक्षा, अविश्वास और एकाकीपन भी बढ़ रहा है। आज आवश्यक है कि हम केवल आगे बढ़ने की ही नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने की भी यात्रा प्रारंभ करें। इसी ‘स्व’ से साक्षात्कार को सुगम बनाने का कदम ब्रह्मकुमारीज ने उठाया है, जिसके लिए वे धन्यवाद के पात्र हैं। आनंद बाहरी वस्तु में नहीं, हमारे भीतर ही है राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि हर मनुष्य चाहता है कि वह दूसरों पर विश्वास करे, लेकिन विश्वास वहीं टिकता है जहां मन शांत, विचार स्वस्थ और भावनाएं शुद्ध हों। उन्होंने कहा कि जब हम कुछ क्षण रुककर स्वयं से संवाद करते हैं, तो यह अनुभव होता है कि शांति और आनंद किसी बाहरी वस्तु में नहीं, बल्कि हमारे भीतर है। जब आत्मिक चेतना जागृत होती है, तो प्रेम, भाईचारा, करुणा और एकता स्वतः जीवन का हिस्सा बन जाते हैं। शांत और स्थिर मन समाज में शांति का बीज बोता है और वहीं से विश्व शांति और विश्व एकता की नींव रखी जाती है। सशक्त आत्मा ही विश्व एकता की संकल्पना को साकार करने की आधारशिला रही है। भीतर की शांति को जगाने का आह्वान ब्रह्मकुमारीज संस्था द्वारा विश्व शांति, मानवीय मूल्य, नारी शक्ति, आत्मिक जागृति, शिक्षा और ध्यान के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयास वास्तव में प्रेरक और प्रशंसनीय हैं। इस सेवा के लिए सभी का हृदय से धन्यवाद। उन्होंने आह्वान किया कि आइए, शांति को अपने भीतर जगाएं, विश्वास को अपने विचारों में उतारें और एकता को अपने कर्म में प्रकट करें। हम सभी एक बेहतर, शांतिपूर्ण और विश्वासपूर्ण विश्व के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि वे जानती हैं कि ब्रह्मकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय केवल लखनऊ और माउंट आबू में ही नहीं, बल्कि गांव-गांव में शिक्षा केंद्रों के माध्यम से सकारात्मकता का प्रसार कर रहा है। सभी समाज को सुख, शांति, आनंद, प्रेम और विश्वास का संवाहक बनकर जन-जन तक पहुंच रहे हैं। आज का कार्यक्रम एक सुंदर विश्व बनाने की दिशा में संवाहक की भूमिका निभाएगा। दीप प्रज्ज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा लखनऊ में आयोजित विश्व एकता एवं विश्वास के लिए ध्यान (योग) के राज्य स्तरीय उद्घाटन समारोह का शुभारंभ राष्ट्रपति मुर्मु ने दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया। उन्होंने ब्रह्मकुमारियों को कलश सौंपा तथा भ्राताओं को ब्रह्मकुमारीज की ध्वजा प्रदान की। कार्यक्रम में छात्राओं ने पारंपरिक नृत्य शैली में सांस्कृतिक प्रस्तुति भी दी। इस दौरान ब्रह्मकुमारी राधा जी ने ईश्वरीय परिवार की ओर से स्वागत वक्तव्य दिया। भ्राता नथमल जी ने वैश्विक एकता और विश्वास को बढ़ावा देने के लिए राजयोग को अपनाने तथा विकारों को दूर करने का आह्वान किया। कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अपर महासचिव ब्रह्मकुमारीज एवं अध्यक्ष (शिक्षा शाखा, माउंट आबू) राजयोगी डॉ. ब्रह्मकुमार मृत्युंजय, निदेशक उपक्षेत्र लखनऊ राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी राधा जी, राष्ट्रीय संयोजक … Read more

बिहार में महिला रोजगार योजना: मुख्यमंत्री नीतीश ने 10 लाख महिलाओं को सीधे ट्रांसफर किया ₹10,000

पटना मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत शुक्रवार को बिहार की 10 लाख महिलाओं के बैंक खाते में सीएम नीतीश कुमार ने 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए. इस दौरान सीएम नीतीश ने साफ तौर से कहा कि वह उद्यमी महिलाओं को बीच में नहीं छोड़ेंगे. सरकार उनकी लगातार मदद करती रहेगी. जो महिलाएं अपने रोजगार का विस्तार करेंगी उन्हें दो लाख रुपये तक आर्थिक मदद की जाएगी. सीएम ने 10 लाख महिलाओं को भेजे 10-10 हजार मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की किस्त जारी करते हुए सीएम नीतीश ने कहा कि इस बार बिहार के लोगों ने विधानसभा चुनाव में भारी बहुमत से एनडीए को जिताया है. हम लोगों को फिर से अगले पांच साल तक बिहार की सेवा करने का मौका दिया है. मैं इसके लिए आप सभी महिलाओं के साथ-साथ बिहार के सभी लोगों का आभार व्यक्त करता हूं. यह बहुत खुशी की बात है कि आज महिला रोजगार योजना के तहत अपनी पसंद का रोजगार करने के लिए 10 लाख महिलाओं को 10-10 हजार की सहायता राशि भेजी जा रही है. अब तक 1 करोड़ 56 लाख महिलाओं को सहायता राशि उन्होंने कहा कि पहले एक करोड़ और 46 लाख महिलाओं को यह सहायता राशि दी जा चुकी है. अब आज 10 लाख महिलाओं को यह सहायता दी जा रही है. यानी कुल मिलाकर 1 करोड़ 56 लाख महिलाओं को इसका फायदा मिल जाएगा. इस योजना में दी गई सहायता से काफी संख्या में महिलाओं ने अपनी पसंद का रोजगार शुरू किया है और जो महिलाएं अपना रोजगार अच्छे से करेंगी उन्हें आगे दो लाख रुपये तक की सहायता दी जाएगी.     जीविका से जुड़ी 10 लाख और महिलाओं के खाते में भेजी गई 10-10 हजार रुपये की राशि… हम लगातार महिला सशक्तिकरण कर रहे सीएम ने कहा कि अब इसके बाद जो परिवार बचे हैं उनको भी अगले महीने तक सहायता राशि दे दी जाएगी. इससे बिहार के सभी परिवारों की महिलाओं को काफी फायदा होगा. अब आप जान लीजिए कि पहले से तो सब काम किया ही गया है महिलाओं के लिए. शुरू से ही महिला सशक्तिकरण पर पूरा जोर दिया गया. हम लोगों ने शुरू किया 2006 में पंचायती राज संस्थाओं का 2007 में नगर निकाय में महिलाओं को 50% का हम लोगों ने आरक्षण शुरू किया. उसके बाद 2013 में पुलिस में महिलाओं के लिए 35% आरक्षण किया गया. 2016 में महिलाओं को सभी सरकारी नौकरियों में 35% का आरक्षण किया. हम महिलाओं को छोड़ेंगे नहीं पहले बिहार में स्वयं सहायता समूह की स्थिति बहुत खराब थी. लेकिन उसके बाद 2006 में विश्व बैंक से कर्ज लेकर राज्य में स्वयं सहायता समूह का गठन किया गया और उसको जीविका नाम हम लोगों ने दिया. अब स्वयं सहायता समूह में जीविका दीदियों की संख्या 1 करोड़ 40 लाख हो गई. आप जान लीजिए अब वर्ष 2024 से शहरी क्षेत्रों में भी स्वयं सहायता समूह का गठन हो रहा है, जिसमें लगभग 4 लाख 34000 जीविका दीदियां हैं और गठन लगातार जारी है. आप देखिए कि एक-एक चीज में कितना महिलाओं को बढ़ाने का हम लोगों ने शुरू से उपाय किया है और आज जिस तरह से इन लोगों के लिए 10 लाख के लिए किया जा रहा है. यह बहुत खुशी की बात है और एक बात जान लीजिए जो किया जा रहा है अब आगे और हम लोग कराएंगे, हम लोग छोड़ेंगे नहीं.

राष्ट्रपति जी की संघर्ष गाथा हर भारतीय के लिए प्रेरणाः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

भारत ने राक्षसी वृत्ति को आतंकवाद के रूप में माना, उसके खिलाफ लड़ रहा लड़ाईः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  ब्रह्माकुमारीज लखनऊ में विश्व एकता एवं विश्वास के लिए ध्यान (योग) का राज्य स्तरीय उद्घाटन समारोह  राष्ट्रपति जी की संघर्ष गाथा हर भारतीय के लिए प्रेरणाः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  अपने कार्यक्रमों व राजयोग के माध्यम से सकारात्मक भाव का संचार कर रहा ‘ब्रह्माकुमारीज’- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की ऋषि परंपरा की मान्यता रही है कि मन, व्यक्ति के बंधन व मोक्ष का कारण है। सद्गुरु रविदास जी ने भी कहा कि मन चंगा तो कठौती मे गंगा यानी मन की बहुर्मुखी वृत्ति को जो व्यक्ति अंतर्मुखी कर लेगा, वह न केवल आत्मिक संतुष्टि का लाभ प्राप्त कर सकता है, बल्कि विश्व कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त कर सकता है। दुनिया में आज जो आतंकवाद, उपद्रव व अराजकता है, इसके पीछे मन की चंचल वृत्तियां हैं। जहां भी अराजकता देखने को मिलती है, उसके पीछे वह बहुर्मुखी वृत्तियां हैं, जो उसे नकारात्मकता की तरफ लेकर जाती है। जीवन का एक पक्ष सकारात्मकता की तरफ ले जाकर अच्छे कार्य की प्रेरणा देता है तो दूसरा पक्ष नकारात्मकता की तरफ लेकर जाता है। भारत की परंपरा ने राक्षसी वृत्ति को आतंकवाद के रूप में माना है और भौतिक-आध्यात्मिक रूप से उसके खिलाफ लड़ाई भी लड़ रहा है।  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की उपस्थिति में ब्रह्माकुमारीज लखनऊ में विश्व एकता एवं विश्वास के लिए ध्यान (योग) के राज्य स्तरीय उद्घाटन समारोह में अपनी बातें रखीं।  ऋषि परंपरा के ‘प्रसाद’ योग विधा को पीएम मोदी ने दिलाई वैश्विक मान्यता  सीएम योगी ने कहा कि 2014 में मोदी जी ने प्रधानमंत्री के रूप में नेतृत्व संभालने के बाद भारत की योग की विधा को यूएनओ से मान्यता दिलाकर 21 जून को विश्व योग दिवस के रूप में मान्यता दिलाई थी। पूरा भारत प्रधानमंत्री जी के प्रति हृदय से आभारी है कि उन्होंने ऋषि परंपरा के ‘प्रसाद’ योग विधा को वैश्विक मान्यता दिलाई।   राष्ट्रपति की संघर्ष गाथा हर भारतीय के लिए प्रेरणा  सीएम योगी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का स्वागत किया। सीएम ने कहा कि राष्ट्रपति का जीवन शिक्षक के रूप में भी प्रेरणादायी रहा है। उन्होंने अपना जीवन शिक्षक के रूप में आगे बढ़ाया, फिर जनसेवा के भाव से पार्षद से लेकर राष्ट्रपति भवन तक की यात्रा की। उनकी यह यात्रा संघर्ष की बड़ी गाथा है, जो हर भारतीय के लिए नई प्रेरणा है।  कार्यक्रमों व राजयोग के माध्यम से सकारात्मक भाव का संचार कर रहा ‘ब्रह्माकुमारीज’ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय से जुड़ी बहनों व पदाधिकारियों का अभिनंदन किया और कहा कि आज भी अपने कार्यक्रमों और राजयोग के माध्यम से निरंतर सकारात्मक भाव का संचार कर रहे हैं। सीएम योगी ने राजयोग के प्रशिक्षण की दृष्टि से लखनऊ के प्रशिक्षण केंद्र की सराहना भी की। कहा कि यह शानदार केंद्र लगभग बनकर तैयार हो चुका है। यह उत्तर प्रदेश का उत्तम प्रशिक्षण केंद्र बन सकता है। जहां से एक दिन, तीन दिन व साप्ताहिक प्रशिक्षण कार्यक्रम के साथ समाज को जोड़ने का माध्यम प्राप्त होगा। सीएम ने आशा जताई कि ब्रह्माकुमारी इस थीम को वर्ष भर प्रदेश, देश व दुनिया में ले जाने में सफल होगा।  कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल,  राजयोगी डॉ. ब्रह्मकुमार मृत्युंजय, निदेशक उपक्षेत्र लखनऊ राजयोगिनी ब्रह्मकुमारी राधा जी, राष्ट्रीय संयोजक कटक (ओडिशा) राजयोगी डॉ. ब्रह्मकुमार नथमल जी समेत प्रजापिता ब्रह्माकुमारीज ईश्वरीय विश्वविद्यालय के पदाधिकारी, प्रशिक्षक व साधक आदि उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री व राज्यपाल ने किया राष्ट्रपति का स्वागत  लखनऊ में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु शुक्रवार को लखनऊ पहुंचीं। यहां एयरपोर्ट पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ व राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने राष्ट्रपति का स्वागत किया।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री की कथा में केंद्रीय मंत्री से दक्षिणा की मांग, तुरंत पूरा करने का निर्देश

शिवपुरी 'महाराज' के सामने जब 'महाराज' पहुंचे तो धीरेंद्र शास्त्री ने दक्षिणा में कुछ ऐसा मांग की लिया कि ज्योतिरादित्य सिंधिया को कहना पड़ा कि यह इनका निवेदन नहीं आदेश है, जिसे पूरा करना ही पड़ेगा। मध्य प्रदेश के शिवपुरी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के मंच पर यह दृश्य देखने को मिला जब कथा सुना रहे धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने सिंधिया से 108 फीट ऊंची 'शिव प्रतिमा' की मांग रखी थी। दरअसल शिवपुरी में धीरेंद्र शास्त्री द्वारा भागवत कथा की जा रही है। इसी दौरान इस भागवत कथा में दर्शन के लिए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया पहुंचे थे। जब वे मंच पर दर्शन करने पहुंचे तो शास्त्री ने सिंधिया से दक्षिणा में 108 फीट की विशाल 'शिव मूर्ति' की मांग करते हुए इसे अपनी दक्षिणा बताया। उन्होंने यह भी कहा कि प्राण प्रतिष्ठा में हम कथा सेवा करेंगे। दरअसल, दोपहर में दिव्य दरबार शुरू करने से पहले धीरेंद्र शास्त्री ने शिवपुरी में भगवान शिव की 108 फीट की बड़ी मूर्ति स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की। फिर शाम को कथा में केंद्रीय मंत्री सिंधिया पहुंचे तो उन्होंने अपनी इच्छा जाहिर कर दी। उन्होंने कथा मंच से ऐलान किया कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री के निवेदन नहीं, आदेश का सत-प्रतिशत पालन होगा। 108 फीट की शिव प्रतिमा पर्वत पर स्थापित होगी दिव्य दरबार के दौरान पं. धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि शिवपुरी का मतलब 'शिव की नगरी' है, इसलिए यहां बहुत बड़ी शिव जी की मूर्ति होनी चाहिए। सुझाव दिया कि यह मूर्ति 108 फीट की होनी चाहिए, जिसे किसी पर्वत के ऊपर स्थापित किया जाए। उस पर्वत का नाम 'कैलाश पर्वत' रखा जाए। वहां पर पूरा आध्यात्मिक केंद्र विकसित कर द्वादश ज्योतिर्लिंग भी स्थापित किए जाएं। इससे पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा और यह एक दर्शनीय स्थल बनेगा। शिवपुरी का नाम भी अर्थात 'यथा नाम तथा गुण' भी सार्थक हो जाएगा जाएगा। उन्होंने कहा कि फिर शिवपुरी को शिव जी की विशाल मूर्ति से भी जाना जाएगा। पूरे सावन महीने में अगल-बगल के जिलों से उस मंदिर में कावड़ यात्रा आएगी, जिससे शिवपुरी महादेव की नगरी हो जाएगी और हर हर महादेव के नारे से गुंजायमान हो जाएगी। शिवपुरी अच्छी लगने लगी है उन्होंने कहा कि अब उन्हें शिवपुरी अच्छी लगने लगी है और उन्हें तब तक शिवपुरी आना चाहिए जब तक कि शिवपुरी भगवामय (भगवा रंग में रंगी हुई) या राममय न हो जाए। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कथा के आखिरी दिन, 30 दिसंबर को फिर से दिव्य दरबार की घोषणा की है। दिव्य दरबार में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी दिव्य दरबार के चलते  श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। शिवपुरी के अलावा दूसरे पड़ोसी जिलों से भी लोग भारी संख्या में पहुंचे। कथा स्थल आस्था का संगम नजर आया। कथा के चौथे दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की कथा सुनाई गई व जन्माष्टमी की जीवंत झांकी का दर्शन हुआ।

सरकार लाएगी विधेयक: MP के विधायकों का वेतन बढ़कर 1.70 लाख रुपये होगा

 भोपाल  मध्यप्रदेश विधायकों के वेतन भत्ते बढ़ेंगे। वर्तमान में विधायकों को 1 लाख 10 हजार रुपए मिलते हैं। अब 50 हजार बढ़ाकर देने की तैयारी है। यानी अब 1 लाख 60 हजार रुपए मिलेंगे। सीएम मोहन यादव ने सहमति दे दी है। संभावना है की 2 दिसंबर की कैबिनेट में मंजूरी के बाद 4 दिसंबर को विधानसभा में विधायकों के वेतन भत्ते बढ़ाने की मंजूरी दे दी जाए।  संसदीय कार्य विभाग ने गुरुवार को इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है। इसे सैद्धांतिक सहमति के लिए मुख्यमंत्री के पास भेजा जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि माननीयों के वेतन-भत्तों में बढ़ोत्तरी से संबंधित विधेयक 1 दिसंबर से शुरू हो रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में लाया जाए। बता दें कि मध्य प्रदेश में 9 साल बाद विधायक और मंत्रियों के वेतन में बढ़ोतरी होगी। पड़ोसी राज्य राजस्थान और छत्तीसगढ़ पहले ही माननीयों के वेतन में बढ़ोतरी कर चुके हैं। विधायकों का बढ़ेगा वेतनभत्ता विधायकों की वर्तमान सैलरी में मूल सैलरी 30 हजार है। निर्वाचन भत्ता 35 हजार, चिकित्सा भत्ता 10 हजार है। अर्दली भत्ता 10 हजार, टेलीफोन खर्च 10 हजार है। किताब, पत्रिका और अन्य सामग्री के लिए 15 हजार मिलते हैं। यानी कुल मिलाकर विधायकों को 1 लाख 10 हजार रुपए मिलते हैं। 50 हजार रुपए बढ़ाने के बाद 1 लाख 60 हजार हो जाएंगे। पूर्व विधायकों और जिन विधायकों का निधन हो गया है उनकी पत्नी को मिलने वाली कुटुंब पेंशन भी 35 हजार से बढ़ाकर 60 हजार की जा रही है। विधानसभा में अध्यक्ष ने की थी घोषणा दरअसल, इसी साल बजट सत्र के दौरान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार व अन्य विधायकों ने सदन में वेतन-भत्ते बढ़ाने की मांग की थी। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने आसंदी से कहा कि यदि सरकार विधायकों के वेतन भत्ते बढ़ाने पर विचार करने के लिए समिति का गठन करें तो विधानसभा अपनी सिफारिश भेज सकती है। इस पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सहमति जताई। इसके बाद 27 अक्टूबर को तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया। इस कमेटी में डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के अलावा बीजेपी विधायक अजय विश्नोई और खरगोन जिले के कसरावद से विधायक सचिन यादव को सदस्य के रूप में शामिल किया गया। संसदीय कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन को सदस्य सचिव बनाया गया। कमेटी ने अपना प्रस्ताव भेजा कमेटी ने दो दौर की चर्चा कर वेतन, भत्ते और पेंशन में बढ़ोतरी संबंधी प्रस्ताव तैयार कर अपनी सिफारिश राज्य शासन को भेजी। इसमें पूर्व विधायकों की पेंशन राशि में वृद्धि का प्रस्ताव भी शामिल किया गया था, लेकिन सरकार की तरफ से कहा गया कि इसमें मुख्यमंत्री, मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष के वेतन-भत्ते बढ़ाने पर भी विचार किया जाए, इसके बाद नए सिरे से कमेटी ने प्रस्ताव तैयार किया। सैलरी का फैसला शीतकालीन सत्र में विधायकों की सैलरी, पेंशन और सुविधाओं को बढ़ाने के लिए खास कमेटी बनाई गई थी। इसे एक टारगेट दिया गया है। इस कमेटी को कहा गया है कि वह 30 नवंबर तक अपनी पूरी रिपोर्ट तैयार करके सरकार को सौंप दे। ऐसा इसलिए किया जा रहा है, ताकि 1 दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा के शीतकालीन सत्र में फैसले पर अंतिम मुहर लगाई जा सके। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में भरोसा दिलाया था कि विधायकों के वेतन-भत्तों में बढ़ोतरी की जाएगी। अब कमेटी की रिपोर्ट मिलते ही, विधानसभा के सत्र में इस वादे को पूरा करने का मौका मिलेगा। यानी, दिसंबर महीने में ही जनप्रतिनिधियों के लिए यह बड़ी खुशखबरी आ सकती है।  विधायकों का बीमा कराने पर फैसला नहीं हुआ समिति के सामने यह प्रस्ताव भी आया था कि विधायकों का 10 लाख रुपए तक का बीमा कराया जाए, लेकिन इस पर अंतिम फैसला नहीं हो पाया। समिति के सामने विधायकों के परिवार के सदस्यों के इलाज के खर्च पर विचार विमर्श किया गया। इस पर भी सहमति नहीं बन पाई। सरकार ने बीमा कराने के प्रस्ताव पर सहमति नहीं दी, क्योंकि विधायकों के इलाज का पूरा खर्च सरकार के खजाने से ही होता है। पूर्व विधायकों की पेंशन में हो सकता है 66 फीसदी का इजाफा मंत्रालय सूत्रों ने बताया कि पूर्व विधायकों की पेंशन में 66 फीसदी का इजाफा हो सकता है। वर्तमान में पूर्व विधायकों को 20 हजार रुपए पेंशन और 15 हजार रुपए चिकित्सीय सहायता मिलाकर 35 हजार रुपए मिलते हैं। अब इसमें 23 हजार रुपए का इजाफा कर 58 हजार रुपए किया जा रहा है। विधानसभा अध्यक्ष की सैलरी में 27 फीसदी का इजाफा विधायक और पूर्व विधायकों के साथ विधानसभा अध्यक्ष की सैलरी में भी इजाफा करने पर सहमति बनी है। विधानसभा में चुनकर आए वरिष्ठ विधायक को ही सर्वसम्मति से अध्यक्ष चुना जाता है। उसे हर महीने 47 हजार रुपए वेतन, 48 हजार रुपए सत्कार भत्ता, 45 हजार रुपए निर्वाचन क्षेत्र भत्ता के साथ हर दिन 1500 रुपए दैनिक भत्ता भी दिया जाता है। इस तरह से विधानसभा अध्यक्ष को वेतन और भत्ते के रूप में कुल 1 लाख 85 हजार रुपए महीना मिलता है। अब इसमें 27 फीसदी का इजाफा करते हुए ये राशि 2 लाख 35 हजार रुपए करने का प्रस्ताव है। वहीं विधानसभा उपाध्यक्ष को फिलहाल 45 हजार रुपए महीना वेतन, 45 हजार रुपए महीने सत्कार भत्ता, 35 हजार महीने निर्वाचन क्षेत्र भत्ता और 1500 रुपए हर दिन दैनिक भत्ता मिलता है। इस तरह से 1 लाख 70 हजार रुपए महीना मिलता है। अब इसमें 18 फीसदी की बढ़ोतरी कर 2 लाख किए जाने का प्रस्ताव है। नेता प्रतिपक्ष का वेतन- भत्ता 2.20 लाख करने का प्रस्ताव नेता प्रतिपक्ष को हर महीने 45 हजार रुपए वेतन, 45 हजार रुपए सत्कार भत्ता, 35 हजार निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, डेढ़ हजार रुपए प्रतिदिन दैनिक भत्ता दिया जाता है। इस प्रकार हर महीने 1 लाख 70 हजार रुपए मिलते है। अब इसमें 29 फीसदी की बढ़ोतरी करते हुए ये 2 लाख 20 हजार रुपए किए जाने का प्रस्ताव है। अब जानिए किसका कितना वेतन बढ़ेगा विधायकों के वेतन में 54 फीसदी की बढ़ोतरी संभावित आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, विधायकों के वेतन में करीब 60 हजार रुपए की वृद्धि की जा सकती है। यह वर्तमान वेतन की करीब 54 प्रतिशत होगी। इस तरह … Read more