samacharsecretary.com

जंक फूड का दिमाग पर कंट्रोल! अध्ययन में खुलासा—4 दिन में ही कमज़ोर होने लगती है मेमोरी

नई दिल्ली ब्रिटेन में प्रोसेस्ड जंक फूड के इंसानी दिमाग पर पड़ने वाले असर से संबंधित रिसर्च में सामने आया कि इस तरह के खाने का ज़्यादा सेवन इंसान के दिमाग के ऐसे हिस्सों में बदलाव कर सकता है जो खाने के व्यवहार को नियंत्रित करते हैं। ऐसा खाना दिमाग के कुछ अहम हिस्सों जैसे – हाइपोथैलेमस, एमीग्डाला और न्यूक्लियस अक्कम्बेन्स में बदलाव कर सकता है। ये हिस्से भूख, संतुष्टि और खाने के प्रति भावनात्मक प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करते हैं। ओवरईटिंग की भी होती है समस्या इस रिसर्च से यह भी पता चलता है कि प्रोसेस्ड जंक फूड का ज़्यादा सेवन दिमाग के उन क्षेत्रों में संरचनात्मक परिवर्तनों से जुड़ा है जो खाने के व्यवहार को नियंत्रित करते हैं। इससे ओवरईटिंग की भी समस्या होती है। बढ़ रही बीमारियाँ, सेवन पर ध्यान देने की ज़रूरत इस रिसर्च से यह सवाल भी उठता है कि क्या अब प्रोसेस्ड जंक फूड पर कड़ी नीतियाँ बनानी चाहिए? वैज्ञानिकों का मानना है कि ज़्यादा प्रोसेस्ड जंक फूड पहले से ही कई बीमारियों जैसे डायबिटीज़, हृदय रोग और मानसिक विकारों से जुड़ा हुआ है। अब दिमाग पर इनके प्रभाव को देखते हुए इनके सेवन पर ध्यान देने की ज़रूरत है। सिर्फ 4 दिन लगातार खाया जंक फूड तो याददाश्त हो सकती है कमजोर क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो प्री वीकेंड और पोस्ट वीकेंड सेलिब्रेशन के लिए जंक फूड को तरजीह देते हैं? अगर ऐसा है तो ये खबर आपके लिए है. इन फैटी फूड्स का अगर 4 दिन भी आप नियमित तौर पर सेवन करते हैं तो सतर्क हो जाइए क्योंकि ऐसा कर आप अपने शरीर को ही नहीं ब्रेन को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं. स्टडी बताती है कि इससे कॉग्निटिव डिसफंक्शन (सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक असर) का रिस्क बढ़ता है और धीरे-धीरे याददाश्त कमजोर पड़ने लगती है. स्टडी में क्या पाया गया? अमेरिका स्थित उत्तरी कैरोलिना विश्वविद्यालय (यूएनसी) के शोध से पता चलता है कि फैटी जंक फूड वजन बढ़ाने या आपको डायबीटिक बनाने से बहुत पहले ही ब्रेन को अटैक करता है यानि इनके नियमित सेवन से सोचने-समझने की क्षमता पर नकारात्मक असर पड़ता है. ये रिजस्ट चेताते और बताते हैं कि हमे मोटापे और याददाश्त को कमजोर करने वाले कारकों पर प्रहार करना चाहिए. जिनमें सबसे पहले नाम आता है वेस्टर्न-स्टाइल जंक फूड का. न्यूरॉन पत्रिका में प्रकाशित फाइंडिंग से पता चला है कि हिप्पोकैम्पस में ब्रेन सेल्स का एक ग्रुप, जिसे सीसीके इंटरन्यूरॉन्स कहा जाता है, हाई फैट डाइट (एचएफडी) खाने के बाद बहुत ज्यादा एक्टिव हो जाता है. सीसीके इंटरन्यूरॉन्स की सक्रियता का कारण ब्रेन के ग्लूकोज लेने की क्षमता का कमजोर होना है. यूएनसी स्कूल ऑफ मेडिसिन में चीफ इनवेस्टिगेटर और फार्माकोलॉजी के प्रोफेसर जुआन सोंग ने कहा कि यह हाइपरएक्टिविटी हिप्पोकैम्पस द्वारा मेमोरी प्रोसेसिंग करने के तरीके को बाधित करती है. ये हाइपरएक्टिविटी हाई फैट डाइट (एचएफडी) लेने के कुछ दिनों बाद तक भी जारी रहती है. इस खोज से यह भी पता चला है कि पीकेएम2 नामक एक प्रोटीन इस समस्या को बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाता है. दरअसल, ये प्रोटीन ब्रेन सेल्स द्वारा एनर्जी के उपयोग को कंट्रोल करता है. यूएनसी न्यूरोसाइंस सेंटर के सदस्य सोंग ने कहा, "हम जानते थे कि डाइट और मेटाबॉलिज्म ब्रेन हेल्थ को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन हमें उम्मीद नहीं थी कि हिप्पोकैम्पस में मौजूद सीसीके इंटरन्यूरॉन्स (मस्तिष्क कोशिकाओं के विशिष्ट और कमजोर समूह) मिलेंगे." सोंग ने आगे कहा, "हमें सबसे ज्यादा आश्चर्य इस बात का हुआ कि ग्लूकोज की कमी होने के बाद इन कोशिकाओं ने तेजी से अपनी एक्टिविटी बदल दी और यह बदलाव ही याददाश्त कमजोर करने के लिए काफी था." टीम ने ये परीक्षण चूहों पर किया. उन्हें फैटी जंक फूड जैसे हाई फैट वाली डाइट पर रखा. हाई फैट वाली डाइट खाने के 4 दिनों के भीतर परिणामों से पता चला कि मेमोरी के सेंटर में सीसीके इंटरन्यूरॉन्स असामान्य रूप से सक्रिय हो गए. शोध यह भी दर्शाता है कि ब्रेन में ग्लूकोज को रिलीज करने से वास्तव में एक्स्ट्रा एक्टिव न्यूरॉन्स शांत हो गए और चूहों की स्मृति संबंधी समस्याएं ठीक हो गईं. अध्ययन से पता चलता है कि मोटापा संबंधित न्यूरोडीजेनेरेशन रोकने और ब्रेन हेल्थ को बनाए रखने के लिए खान-पान में बदलाव और कुछ औषधियां सहायक सिद्ध हो सकती हैं. शोधकर्ताओं ने पाया कि हाई-फैट-डाइट के बाद इंटरमिटेंट फास्टिंग से भी फायदा पहुंच सकता है. इससे सीसीके इंटरन्यूरॉन्स सामान्य होते हैं और मेमोरी सुधरती है.

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा: सिंहस्थ का विश्वस्तरीय आयोजन के लिए तैयारियां चल रही हैं

सिंहस्थ के विश्वस्तरीय आयोजन के लिए तैयारियां जारी: मुख्यमंत्री डॉ. यादव सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के लिए किसानों की भावना और उनकी सहमति के अनुसार होंगी गतिविधियां भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह सौभाग्य का विषय है कि इस बार उज्जैन में भव्य, दिव्य और विश्व स्तरीय सिंहस्थ: 2028 मेले का आयोजन किया जाएगा। राज्य सरकार इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां पर गंभीरता के साथ कार्य कर रही है। अब उज्जैन सिर्फ हमारा धार्मिक शहर ही नहीं, बल्कि यह धार्मिक पर्यटन और ज्ञान-विज्ञान के बड़े केंद्र के रूप में विकसित हो चुका है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में उज्जैन में इस बार अद्भुत सिंहस्थ का आयोजन होने वाला है। इसके लिए राज्य सरकार जिला प्रशासन, साधु-संतों के साथ-साथ किसानों से भी सुझाव ले रही है। हर वर्ग की परेशानियों को दूर करते हुए सबको साथ लेकर बेहतर इंतजाम किए जा रहे हैं। सिंहस्थ मेला क्षेत्र के विकास के संबंध में किसानों की भावना और उनकी सहमति के अनुसार गतिविधियां संचालित की जाएंगी। केन्द्र सरकार के सहयोग और राज्य सरकार के उचित नियोजन के परिणामस्वरूप सिंहस्थ के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। सिंहस्थ का आयोजन विश्वस्तरीय है और इसके लिए विश्वस्तरीय प्रबंधन किए जा रहे हैं। भविष्य में किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की विषम परिस्थिति निर्मित न हो, इसके लिए सभी तरह के प्रबंध राज्य सरकार कर रही है। सिंहस्थ : 2028 की व्यवस्थाएं अब तक के सभी मेलों से बेहतर होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान में मंगलवार को मीडिया से चर्चा करते हुए यह विचार व्यक्त किए।  

पुराने वाहन मालिकों के लिए नई तीन कैटेगरी, फ‍िटनेस शुल्क हुआ महंगा

नई दिल्ली अगर आप भी अपनी कार या कमर्श‍ियल व्‍हीकल का रज‍िस्‍ट्रेशन 10 या 15 साल के बाद एक्‍सटेंड कराने का मन बना रहे हैं तो यह खबर आपके काम की है. जी हां, केंद्र सरकार की तरफ से व्‍हीकल फ‍िटनेस टेस्‍ट की फीस में बड़ा बदलाव किया गया है. इसमें अलग-अलग कैटेगरी के पुराने व्‍हीकल के लिए फीस को 10 गुना तक बढ़ा दिया गया है. नए नियमों के तहत 10, 15 और 20 साल से ज्‍यादा पुराने व्‍हीकल पर अलग-अलग चार्ज ल‍िया जाएगा. केंद्र सरकार ने 18 अक्‍टूबर को सेंट्रल मोटर व्हीकल रूल में संशोधन करते हुए व्‍हीकल फिटनेस टेस्ट फीस में बड़ा इजाफा कर द‍िया है. कुछ कैटेगरी में यह बढ़ोतरी 10 गुना तक हो गई है. पूरी तरह बदल जाएगा फ्लैट-रेट स्ट्रक्चर नया फीस स्ट्रक्चर देशभर में तुरंत लागू कर दिया गया है. सरकार का कहना है कि यह कदम पुराने और असुरक्षित वाहनों को सड़कों से हटाने और स्क्रैपेज पॉल‍िसी को मजबूत करने के लिए जरूरी था. पहले 15 साल से ज्‍यादा पुराने व्‍हीकल पर एक्‍स्‍ट्रा फीस लगती थी, लेक‍िन अब इसकी तीन नई कैटेगरी बना दी गई हैं. इनमें पहली कैटेगरी 10 से 15 साल, दूसरी 15 से 20 साल और तीसरी 20 साल से ज्‍यादा वाली है. हर कैटेगरी के ह‍िसाब से फीस बढ़ती चली जाएगी. नया मॉडल पहले के फ्लैट-रेट स्ट्रक्चर को पूरी तरह बदल देगा. सबसे ज्‍यादा फीस किस तरह के व्‍हीकल पर? व्‍हीकल का रज‍िस्‍ट्रेशन र‍िन्‍यू कराने पर अब पहले के मुकाबले ज्‍यादा चार्ज देना होगा. सबसे ज्यादा झटका हेवी कमर्श‍ियल व्‍हीकल को लगा है. 20 साल से ज्‍यादा पुराने ट्रक या बस का रज‍िस्‍ट्रेशन र‍िन्‍यू कराने के लि‍ए अब 25,000 रुपये देने होंगे. पहले यह चार्ज महज 2,500 रुपये था. 20 साल से ज्‍यादा पुराने मीडियम कमर्शियल व्हीकल को पहले के 1800 रुपये की बजाय 20,000 रुपये देने होंगे. यह बढ़ोतरी 10 गुने से भी ज्‍यादा है, ज‍िससे पुराने कमर्शियल व्‍हीकल को चलाना काफी महंगा हो जाएगा. सरकार की तरफ से साफ कहा गया क‍ि सड़कों से पुरानी और खतरनाक गाड़‍ियां जल्दी हटनी चाहिए. इसको ध्‍यान में रखते हुए फिटनेस फीस को इतना महंगा कर द‍िया गया है क‍ि पुरानी गाड़ी रखना घाटे का सौदा हो जाएगा. लोगों को मजबूरन नई, सुरक्षित और कम प्रदूषण वाली गाड़ी लेनी पड़ेगी या पुरानी को स्क्रैप करना होगा. सरकार की तरफ से यह कदम नेशनल व्हीकल स्क्रैपेज पॉलिसी को आगे बढ़ाने के लि‍ए उठाया गया है.  

ग्लोबल रिपोर्ट: सड़क दुर्घटनाएँ हर वर्ष 11.90 लाख जानें लेती हैं

नई दिल्ली राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय ने प्रत्येक वर्ष लाखों लोगों के सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि इस वैश्विक समस्या से निपटने के लिए दुनिया को एकजुट होने की आवश्यकता है। विश्वविद्यालय के यातायात प्रबंधन एवं सड़क सुरक्षा केंद्र में हर वर्ष नवंबर के तीसरे रविवार को सड़क दुर्घटनाओं में मारे गये लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए विश्व सड़क यातायात पीड़ित स्मृति दिवस का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी स्कूल ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एंड स्मार्ट पुलिसिंग के अंतर्गत यातायात प्रबंधन एवं सड़क सुरक्षा केंद्र ने गुजरात परिसर में एक कैंडल मार्च का आयोजन किया। इस वर्ष सभा को समन्वयक विश्व विजय राय ने संबोधित किया। इस अवसर पर उल्लेख किया गया कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की 'ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट' 2023 के अनुसार दुनिया भर में हर साल लगभग 11 लाख 90 हजार लोग सड़क दुर्घटनाओं के कारण मरते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो की 2023 की रिपोर्ट के अनुसार देश में सड़क दुर्घटनाओं के कारण हर वर्ष लगभग एक लाख 70 हजार लोगों की मौत होती है।  बढ़ सकती है सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या, 2023 का आंकड़ा पार होने की आशंका  साल 2024 में सड़क हादसों में होने वाली मौतों का आंकड़ा 2023 से भी ज्यादा हो सकता है। अब तक मिले शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक, देश के दो दर्जन से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान, ओडिशा, तेलंगाना, असम और दिल्ली में सड़क हादसों में हुई मौतें पिछले साल के मुकाबले बढ़ी हैं। मीडिया रिपोर्ट से पता चलता है कि, सरकारी आंकड़ों के मुताबिक (जिसमें पश्चिम बंगाल शामिल नहीं है), 2024 में सड़क हादसों में करीब 1.7 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई। तुलना करें तो 2023 में यह संख्या 1.73 लाख थी, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा था। पश्चिम बंगाल में अकेले 6,000 से अधिक मौतें दर्ज की गई थीं। अधिकारियों का कहना है कि जब बंगाल के आंकड़े जोड़ लिए जाएंगे, तो यह संख्या 2023 से ज्यादा हो जाएगी। कुछ राज्यों में राहत की झलक हालांकि, हर तरफ निराशाजनक तस्वीर नहीं है। 2024 के शुरुआती आंकड़ों में 9 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश ऐसे हैं, जहां सड़क हादसों में मौतों की संख्या कम हुई है। उदाहरण के तौर पर, केरल में 2023 में 4,080 मौतें हुई थीं, जबकि 2024 में यह घटकर 3,846 रह गईं। इसी तरह गुजरात में भी मौतों का आंकड़ा 7,854 से घटकर 7,717 हो गया। विशेषज्ञों की राय: "10 बड़े राज्यों पर फोकस जरूरी" ट्रैफिक सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक देश के 10 बड़े राज्य, जो कुल मौतों में सबसे ज्यादा हिस्सा रखते हैं, अपने आंकड़े नहीं घटाते, तब तक सड़क मौतों को आधा करने का लक्ष्य पूरा करना मुश्किल है। पूर्व सड़क परिवहन सचिव के मुताबिक, "राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य राजमार्गों पर हादसे और मौतें कुल मामलों के लगभग 60 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार हैं। इन पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।" हादसों के आंकड़े और हकीकत में फर्क आधिकारिक आंकड़े पूरी सच्चाई नहीं बताते, क्योंकि कई छोटे हादसे पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज नहीं होते। फिर भी प्रारंभिक डेटा से पता चलता है कि 2024 में 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 4.7 लाख से अधिक सड़क हादसे हुए, जबकि 2023 में यह संख्या करीब 4.8 लाख थी। सड़क सुरक्षा के लिए सरकार की नई योजना सरकार अब सड़क सुरक्षा को और सख्ती से लागू करने की तैयारी कर रही है। सड़क परिवहन मंत्रालय मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव करने जा रहा है। प्रस्ताव है कि ड्राइविंग लाइसेंस जारी करने के नियम और सख्त किए जाएं, और खराब ड्राइविंग व्यवहार पर नेगेटिव पॉइंट सिस्टम लागू हो, जिससे चालकों का लाइसेंस सस्पेंड या रद्द भी किया जा सके।  सड़क सुरक्षा अब भी बड़ी चुनौती सरकारी कोशिशों के बावजूद बढ़ती सड़क दुर्घटनाएं चिंता का विषय हैं। अगर आने वाले समय में सड़क सुरक्षा पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सड़क पर जान गंवाने वालों की संख्या कम होती नहीं दिख रही। 

जगदीप धनखड़ भोपाल में 21 नवंबर को होंगे मौजूद, इस्तीफा देने के बाद पहला सार्वजनिक कार्यक्रम

भोपाल  पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ 21 नवंबर को भोपाल में एक आरएसएस नेता की पुस्तक विमोचन कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। कार्यक्रम के आयोजकों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।जुलाई में उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद धनखड़ का यह पहला सार्वजनिक भाषण होने की संभावना है। इससे पहले उन्हें उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में देखा गया था। मनमोहन वैद्य की किताब के विमोचन में होंगे शामिल भोपाल के रवीन्द्र भवन में 21 नवंबर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह मनमोहन वैद्य की किताब "हम और यह विश्व" का विमोचन होगा। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में पूर्व उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ संबोधन देंगे। कार्यक्रम में वृंदावन के श्री आनंदम धाम आश्रम के पीठाधीश्वर रीतेश्वर जी महाराज और वरिष्ठ पत्रकार विष्णु त्रिपाठी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मुख्य वक्ता रहेंगे जगदीप धनखड़ सुरुचि प्रकाशन के अध्यक्ष राजीव तुली ने पीटीआई को बताया कि धनखड़ 21 नवंबर को रवींद्र भवन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संयुक्त महासचिव मनमोहन वैद्य की पुस्तक "हम और यह विश्व" के विमोचन समारोह में मुख्य वक्ता होंगे। उन्होंने बताया कि वृंदावन-मथुरा स्थित आनंदम के मुख्य पुजारी रितेश्वर जी महाराज भी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे। धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था और 12 सितंबर को राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के अलावा, सार्वजनिक रूप से कहीं भी नज़र नहीं आए। कांग्रेस धनखड़ के अचानक इस्तीफे पर सवाल उठा रही है। विपक्षी दल ने पिछले महीने कहा था कि धनखड़ अपने सभी पूर्ववर्तियों की तरह एक विदाई समारोह के हकदार थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस्तीफा देने के बाद उप राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण में आए थे नजर 21 जुलाई को उप राष्ट्रपति के पद से इस्तीफा देने के बाद जगदीप धनखड़ नजर नहीं आए। 12 सितंबर को नवनिर्वाचित उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में वह शामिल हुए थे। लेकिन, पद छोड़ने के बाद जगदीप धनखड़ किसी ऐसे कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। जिसमें उन्होंने मंच से कोई भाषण या मीडिया में कोई बयान दिया हो। इस्तीफे के ठीक 4 महीने बाद होगा सार्वजनिक कार्यक्रम उप राष्ट्रपति पद छोड़ने के ठीक चार महीने बाद जगदीप धनखड़ का यह पहला कार्यक्रम होगा। जिसमें वे संबोधन देंगे। 21 जुलाई को उन्होंने इस्तीफा दिया था और 21 नवंबर को ठीक चार महीने बाद वे सार्वजनिक कार्यक्रम में मंच पर नजर आएंगे। जगदीप धनखड़ ने 21 सितंबर को उप राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों को इस्तीफे की वजह बताया था। वे 74 साल के हैं। धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था। राष्ट्रपति को पत्र में उन्होंने लिखा- स्वास्थ्य की प्राथमिकता और डॉक्टरी सलाह का पालन करते हुए मैं भारत के उपराष्ट्रपति पद से तत्काल प्रभाव से त्यागपत्र दे रहा हूं। पत्र में उन्होंने राष्ट्रपति को उनके सहयोग और सौहार्दपूर्ण संबंधों के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल को भी सहयोग के लिए आभार जताया।  

संकट में स्कूल भवन: 12 हजार स्कूलों में से 322 बिना भवन, 5600 जर्जर भवन में चल रहे पढ़ाई

भोपाल  मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति का अंदाज इसी से बात से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में 12000 स्कूल ऐसे हैं, जहां एक ही शिक्षक पदस्थ है, इन स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों की कमी साफ नजर आती है. जबकि कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का आभाव भी साफ नजर आता है. कही बिजली नहीं है तो कही के भवन ठीक नहीं हैं. शिक्षा मंत्रालय के तहत आने वाली यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफ्रोमेशन की हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी सामने आई है. जिसमें यह बताया गया है कि मध्य प्रदेश अभी भी नेशनल पॉलिसी यानि एनईपी के लक्ष्यों प्राप्त करने से फिलहाल बहुत दूर नजर आता है.  प्रदेश के 1,22,20 स्कूलों में से 322 के पास भवन नहीं है, जबकि 5,600 स्कूल जर्जर भवन में संचालित हो रहे हैं। इसी तरह करीब चार हजार से अधिक स्कूलों में बालिका व बालिकाओं के लिए शौचालय नहीं है तो करीब डेढ़ हजार से अधिक स्कूलों में प्रयोगशाला नहीं है। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की यूडाइस यानी स्कूल शिक्षा पर एकीकृत जिला सूचना रिपोर्ट सत्र 2024-25 में यह बात सामने आई है। करीब 200 करोड़ रुपये स्वीकृत इसे देखते हुए स्कूल शिक्षा विभाग ने प्रदेश के आठ हजार हाई व हायर सेकंडरी स्कूलों में से करीब 200 ऐसे स्कूलों को चिह्नित किया है, जिनमें अतिरिक्त कक्ष, शौचालय व प्रयोगशाला, बाउंड्रीवाल नहीं हैं। इन स्कूलों के लिए विभाग ने करीब 200 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं।   इसमें से 66 प्रतिशत राशि वित्त विभाग की ओर से जारी कर दी गई है। प्रत्येक स्कूलों को करीब 22 से 30 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। विभाग ने स्कूलों को जल्द से जल्द निर्माण कार्य पूरा कर फोटो भेजने के लिए कहा है, ताकि इन स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके। 4,072 स्कूलों में बालिका शौचालय नहीं जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के 4,072 स्कूलों में बालिका शौचालय और 4,926 स्कूलों में बालकों के लिए शौचालय नहीं है। वहीं 564 में पेयजल सुविधा नहीं है तो 39,500 में बाउंड्रीवाल और करीब छह हजार में खेल मैदान नहीं है। नया भवन एक ही इकाई में होना चाहिए जिन स्कूलों की भवन संरचनाएं अत्यंत जर्जर व जीर्ण-शीर्ण अवस्था में हैं। उन सभी भवनों को ध्वस्त कर उसी स्थान पर नए भवन का निर्माण कराने के निर्देश दिए गए हैं। नवीन भवन का निर्माण इस प्रकार कराया जाएगा, ताकि वर्तमान भवन के साथ समाहित हो। पूरा भवन एक ही इकाई के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। एक शिक्षक वाले स्कूल  मध्य प्रदेश के 12 हजार सिंगल शिक्षकों वाले स्कूलों में 9620 स्कूल प्राइमरी हैं, यानि यहां पांचवीं तक के बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी केवल एक ही शिक्षक की है, जबकि अपर प्राइमरी की स्कूलों की स्थिति 2590 है, वहीं छात्र शिक्षक अनुपात की बात की जाए तो 26 प्रतिशत प्राईमरी और 45.8 प्रतिशत अपर प्राइमरी स्कूल हैं. वहीं 23087 प्राथमिक स्कूल ऐसे हैं जहां 30 छात्र भी नहीं हैं. वहीं 451 बस्तियों में प्राइमरी स्कूल भी नहीं हैं. जिससे मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों की स्थिति का फिलहाल पता लगाया जा सकता है. यह आंकड़े यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफ्रोमेशन की रिपोर्ट के अनुसार ही सामने आए हैं.  वहीं इस मामले में स्कूल शिक्षा विभाग का कहना है कि राज्य के सभी स्कूलों में व्यवस्थाएं ठीक करने की पूरी कोशिश की जा रही है. शौचालय, पेयजल और मरम्मत के कामों में तेजी लाई जा रही है. जबकि स्कूलों की व्यवस्थाओं को बेहतर भी किया जा रहा है. लेकिन यह रिपोर्ट एमपी में चर्चा में जरूर बनी हुई है. प्रदेश के आंकड़े     1,22,20 प्रदेश में स्कूलों की संख्या     10,800 बिजली आपूर्ति नहीं     14,916 लाइब्रेरी नहीं है     2,301 डिजिटल लाइब्रेरी नहीं     1,19,412 खेल का मैदान नहीं     6,213 पीने का पानी उपलब्ध नहीं     564 पीने के पानी की सुविधा नहीं     1,365 बालिकाओं के लिए शौचालय नहीं

छह बार हुई बैठक के बाद, मंत्री ने साफ किया – समझौता होगा बराबरी का

 नई दिल्‍ली भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील का इंतजार बेसब्री से किया जा रहा है. डोनाल्‍ड ट्रंप ने अपने बयान में यहां तक कह दिया है कि जल्‍द ही हम अच्‍छी डील लॉक करने रहे हैं. हालांकि भारत की तरफ से ऐसा कोई बयान नहीं आया था, लेकिन कमर्शियल और इंडस्‍ट्रीज मिन‍िस्‍टर पीयूष गोयल का बड़ा बयान आया है. जिनके मुताबिक, भारत बराबरी का समझौता करेगा. पीयूष गोयल ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते पर 'आपको अच्छी खबर सुनने को मिलेगी' जब यह समझौता निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित होगा. उन्होंने कहा कि भारत इस डील में किसानों और मछुआरों के हितों की भी रक्षा करेगा.  किसानों और मछुआरों के हित में होगी डील उन्होंने इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा आयोजित भारत-अमेरिका आर्थिक शिखर सम्मेलन में कहा कि व्यापार समझौते के लिए बातचीत एक प्रक्रिया है और एक राष्ट्र के रूप में भारत को किसानों, मछुआरों और लघु उद्योगों के हितों को ध्यान में रखना होगा. गोयल ने कहा कि जब यह समझौता निष्पक्ष, न्यायसंगत और संतुलित हो जाएगा, तो आपको अच्छी खबर सुनने को मिलेगी.  पीयूष गोयल ने आगे जानकारी देते हुए कहा कि भारत और अमेरिका मार्च से प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं. अब तक छह दौर की बातचीत पूरी हो चुकी है.  नवंबर में ही हो सकती है डील डेक्कन क्रोनिकल की रविवार को आई एक रिपोर्ट में एक बड़ा दावा किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि India-US Trade Deal का ऐलान नवंबर में ही किया जा सकता है. रूसी तेल (Russian Oil) का मुद्दा पूरी तरह से सुलझ चुका है और डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत पर 25 फीसदी तक टैरिफ कम करने पर सहमति जताई है.  पहला चरण पूरा होने के करीब  रिपोर्ट यह भी कहती है कि भारत–अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) का पहला चरण लगभग पूरा होने के करीब है. भारत और अमेरिका के बीच अब तक 6 दौर की बातचीत हो चुकी है और दोनों देश 2025 तक पहला चरण पूरा करने की योजना बना रहे हैं. हालांकि आगे जटिल मुद्दों पर बातचीतहोती रहेगी. कितना रह सकता है टैरिफ?  अभी भारत पर कुछ टैरिफ 50 फीसदी है, जिसमें से 25 फीसदी टैरिफ भारत पर रूसी तेल खरीदने के कारण लगाया गया है. चूक‍ि अब भारत ने रूसी तेल खरीद को कम किया है, ऐसे में एक्‍सपर्ट मान रहे हैं कि 25 फीसदी तो टैरिफ क होना तय ही है, लेकिन उनका यह भी कहना है कि आगे चलकर भारत पर अमेरिका टैरिफ को 15 फीसदी तक लेकर आएगा.

BJP का बंगाल प्लान: बिहार की सफलता को दोहराते हुए बड़े नेताओं पर दांव

नई दिल्ली बिहार विधानसभा में बड़ी सफलता दर्ज करने वाली भारतीय जनता पार्टी की नजरें अब पश्चिम बंगाल पर हैं। तृणमूल कांग्रेस के शासन वाले राज्य में मार्च या अप्रैल 2026 को चुनाव होने हैं। खबर है कि इसके लिए भाजपा ने अलग रणनीतियां बनाई हैं, जिनकी अगुवाई पार्टी के शीर्ष और सबसे ताकतवर नेता करने जा रहे हैं। हालांकि, किसी योजना को लेकर पार्टी ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शुरुआत में भाजपा अपने सबसे ताकतवर नेताओं को पश्चिम बंगाल में प्रचार अभियान में उतारने जा रही है। हालांकि, ये नेता कौन होंगे, अब तक साफ नहीं है। बिहार में बड़ी जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई संदेश में भी बंगाल का जिक्र कर दिया था। उन्होंने कहा था कि गंगा नदी बिहार होते हुए बंगाल जाती है और इसी तरह भाजपा की जीत भी बिहार से बंगाल फैलेगी। क्या होगी रणनीति एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा ने बंगाल चुनाव सामूहिक नेतृत्व और पीएम मोदी के कामों के बल पर लड़ने की तैयारी की है। ऐसे में संभव है कि पार्टी किसी एक चेहरे पर दांव न लगाए। भाजपा अपना संगठन मजबूत करने की कोशिश में भी है। इधर, बूथ स्तर पर बारीकी से प्लानिंग की जा रही है। खबर है कि राज्य के करीब 70 हजार बूथों पर भाजपा ने बूथ कमेटी बना दी हैं। कुल 91 हजार बूथ हैं। SIR की भी है तैयारी ECI यानी भारत निर्वाचन आयोग ने राज्य में एसआईआर की तैयारियां तेज कर दी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा के एक नेता का कहना है कि वाम दलों ने बंगाल में धांधली कर चुनाव जीते थे। उन्होंने कहा कि इसमें वोटर लिस्ट में मरे हुए लोगों के नाम शामिल थे, जिनके नाम पर उनके कार्यकर्ता वोट करते थे। ऐसा माना जा रहा है कि एसआईआर के बाद मतदाता सूची में से ऐसे नाम बड़ी संख्या में हट जाएंगे, जो दुनिया को अलविदा कह चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद भाजपा अपना बूथ स्तर पर प्रचार तेज करेगी। पार्टी ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, त्रिपुरा के पूर्व सीएम बिप्लब कुमार देव और आईटी हेड अमित मालवीय को जिम्मेदारी सौंपी है। बीते तीन सालों से भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल बंगाल में काम कर रहे हैं। खबर है कि भाजपा एकता का संदेश देने की योजना बना रही है। महिला मतदाता करेंगी खेला? रिपोर्ट में भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के हवाले से बताया गया है कि इस चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा महिला सुरक्षा होगा। खबर है कि आरजी टैक्स स्कैंडल, दुर्गापुर में मेडिकल छात्रा के साथ गैंगरेप, कानून और व्यवस्था जैसे मुद्दे उठाए जाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार, भाजपा नेताओं का कहनाहै कि जनता कानून और व्यवस्था की स्थिति से परेशान हैं। इसके अलावा भाजपा उद्योगों की कमी, माइग्रेशन जैसे मुद्दों को भी उठाएगी। सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट में बताया गया है कि भाजपा अपने शासित अन्य राज्यों में जारी महिलाओं के लिए आर्थिक योजनाओं के बारे में बंगाल में बताएगी। उन्होंने कहा कि बिहार में महिलाओं को 10 हजार रुपये देने के फैसले को खासतौर पर बताया जाएगा।

पहली बार यूपी में सफलता: पीजीआई डॉक्टरों ने एडवांस तकनीक से किया जटिल घुटना सर्जरी का कमाल

लखनऊ संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआईएमएस) ने उत्तर प्रदेश में उन्नत आर्थोपेडिक सर्जरी का नया मानक स्थापित करते हुए पहली बार दो अत्याधुनिक तकनीकों को एक साथ उपयोग कर जटिल घुटना सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया है। एसजीपीजीआईएमएस के आर्थोपेडिक विभाग ने दो हाई-एंड तकनीकों—आर्थ्रोस्कोपिक माइक्रोफ्रैक्चर और हाइब्रिड हाई टिबियल ऑस्टियोटॉमी—को एक ही ऑपरेशन में संयोजित करते हुए सफल घुटना सर्जरी की है।  इस जटिल प्रक्रिया के बाद 46 वर्षीय महिला मरीज तेजी से स्वस्थ हो रही है और सामान्य रूप से चलने लगी है। मरीज कई वर्षों से तीव्र घुटना दर्द, सूजन और चलने-फिरने में परेशानी झेल रही थी। वेरस विकृति (बो-लेग्ड) के कारण वजन घुटने के अंदरूनी हिस्से पर ज्यादा पड़ रहा था, जिससे कार्टिलेज लगातार क्षतिग्रस्त हो रहा था। दवाओं और फिजियोथेरेपी से राहत न मिलने पर परिजन उन्हें एसजीपीजीआईएमएस लेकर पहुंचे, जहां विस्तृत जांच के बाद विशेषज्ञों ने सर्जरी को अंतिम समाधान माना। सर्जरी का नेतृत्व एपेक्स ट्रॉमा सेंटर के आर्थोपेडिक्स विभाग के एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अमित कुमार ने किया। टीम ने दो चरणों में ऑपरेशन पूरा किया। पहले चरण में आर्थ्रोस्कोपिक माइक्रोफ्रैक्चर तकनीक का उपयोग कर हड्डी के नीचे नई फाइब्रोकार्टिलेज बनने की प्रक्रिया शुरू की गई, जिससे दर्द में कमी और जोड़ की कुशनिंग मजबूत होने की संभावना बढ़ी। दूसरे और सबसे चुनौतीपूर्ण चरण में हाइब्रिड हाई टिबियल ऑस्टियोटॉमी की गई। इसमें टिबिया की हड्डी को नियंत्रित रूप से काटकर दुबारा ऐसा संरेखित किया गया कि शरीर का भार क्षतिग्रस्त हिस्से से हटकर घुटने के स्वस्थ हिस्से पर आने लगे। यह तकनीक न केवल विकृति सुधारती है, बल्कि प्राकृतिक जोड़ की उम्र भी बढ़ाती है। डॉ. अमित कुमार के मुताबिक संयुक्त सर्जरी युवा और सक्रिय मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद है, क्योंकि यह घुटना प्रत्यारोपण की आवश्यकता को काफी हद तक टाल देती है। संस्थान के निदेशक पद्मश्री प्रो. आर.के. धीमन ने इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि यह प्रदेश में उन्नत आर्थोपेडिक उपचार का नया अध्याय खोलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अत्याधुनिक तकनीक उन मरीजों के लिए आशा की किरण है, जो गंभीर ऑस्टियोआर्थराइटिस या वेरस विकृति से लंबे समय से परेशान हैं और पारंपरिक उपचारों से लाभ नहीं पा सके हैं।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश आधुनिक विज्ञान सहित सभी क्षेत्रों में तेजी से कर रहा है विकास : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

विद्यार्थियों में वैज्ञानिक और नवाचारी सोच को बढ़ाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश आधुनिक विज्ञान सहित सभी क्षेत्रों में तेजी से कर रहा है विकास मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रदर्शनी स्थल पर वैज्ञानिकों द्वारा विकसित रोबोट ने किया स्वागत बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में देशभर के 900 विद्यार्थियों के 240 इनोवेटिव प्रोजेक्ट और मॉडल हुए प्रदर्शित बाल वैज्ञानिकों के महाकुंभ में मैनिट, आईसेक्ट और आईआईएसईआर के वैज्ञानिकों से होगा संवाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी-2025 का किया शुभारंभ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने विश्व में अपनी अलग पहचान बनाई है। देश आधुनिक विज्ञान सहित सभी क्षेत्रों में तेज गति से विकास कर रहा है। इसी वैज्ञानिक शक्ति के बलबूते ही भारत ने पड़ोसी देश को सबक सिखाया। कोविड महामारी के दौर में पूरी दुनिया ने हमारे पतंजलि योग शास्त्र का अनुसरण किया और अभिनंदन के लिए हाथ जोड़कर नमस्कार करने की पद्धति के महत्व को स्वीकारा। सम्राट विक्रमादित्य काल में नवरत्नों के समान आज देश में प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में सभी प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर दिया जा रहा है। चाहे मून मिशन हो या गगनयान प्रोजेक्ट, प्रधानमंत्री मोदी सफलता हो या असफलता, हर पायदान पर वैज्ञानिकों के साथ खड़े हैं। इसी प्रकार विद्यार्थियों के बीच वैज्ञानिक और नवाचारी सोच विकसित करने के प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों में राज्य सरकार भी हरसंभव सहयोग प्रदान कर रही है। भारतीय प्राचीन ग्रंथो में विद्यार्थियों के 6 गुणों क्रमशः विद्या, तर्क, विज्ञान, स्मृति, तत्परता और क्रियाशीलता का उल्लेख है। यह माना जाता है कि जिसके पास यह छह गुण हैं, उसके लिए कुछ भी असाध्याय नहीं है। उन्होंने कहा कि इन्हीं गुणों के आधार पर विज्ञान की गति को बढ़ाया जा सकता है। बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी में आए विद्यार्थियों में भावी भारत के विक्रम साराभाई, भाभा साहब, कलाम साहब जैसी प्रतिभाओं की झलक मिल रही है। यह बाल वैज्ञानिक भारत की विज्ञान यात्रा का नया अध्याय लिखने वाले हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को 52वीं बाल वैज्ञानिक प्रदशर्नी-2025 के शुभारंभ सत्र को संबोधित करते हुए यह विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने 52वीं राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी का श्यामला हिल्स स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान (आर.आई.ई.) में दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रदर्शनी के द्वार पर पहुंचने पर बाल वैज्ञानिकों द्वारा विकसित रोबोट ने उनका स्वागत किया। उन्होंने बाल प्रदर्शनी में विद्यार्थियों द्वारा लगाए गए स्टॉल्स का अवलोकन कर बाल वैज्ञानिकों से संवाद किया और बाल वैज्ञानिकों द्वारा विकसित रोबोट और तारामंडल के मॉडल के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद तथा स्कूल शिक्षा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 6 दिवसीय प्रदर्शनी आगामी 23 नवंबर तक चलेगी। ऋषि-मुनियों के ज्ञान और नवाचारों से समृद्ध है हमारी ज्ञान परंपरा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भारत के विश्व गुरू बनने में प्राचीन भारतीय वैज्ञानिक परंपरा के भाग रहे ऋषि-मुनियों के योगदान को समझने की आवश्यकता है। हमारे ऋषि-मुनि न्यूनतम आवश्यकताओं के साथ जीवन यापन करते हुए समाज के कल्याण के लिए नवाचारों को जन्म देते थे। प्रत्येक भारतीय को ऋषि-मुनियों और विद्वान से मिली परंपरा पर गर्व है। अगर हम विमान शास्त्र की बात करें तो ऋषि भारद्वाज याद आते हैं। भगवान राम के काल में पुष्पक विमान दिखाई देता है। जब शून्य के अस्तित्व को देखें तो आर्यभट्ट की ओर ध्यान जाता है और जब ग्रहों की गति देखते हैं तो भास्कराचार्य नजर आते हैं। योगशास्त्र के लिए महर्षि पतंजलि याद आते हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा हर क्षेत्र में ऋषि-मुनियों के ज्ञान से समृद्ध हुई है। योग की महिमा को विश्व के सभी देशों ने स्वीकारा मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने योग को संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित किया है। आज यूरोप से लेकर साइबेरिया और चीन से पाकिस्तान और ईरान-इराक तक लोग योगासन करते नजर आते हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्राचीन सनातन संस्कृति के माध्यम से हमने दुनिया को यह बताया कि ब्रह्मांड में कोटि-कोटि सूर्य विद्यमान है। हजारों साल पहले महर्षि पतंजलि ने दुनिया को बता दिया था कि शरीर में पांच प्राण होते हैं। राज्य सरकार अंगदान को प्रोत्साहित कर रही है और देहदानियों को गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया जा रहा है। प्रदेश के स्कूलों में बढ़ाई जा रही है आईसीटी लैब की संख्या स्कूल शिक्षा एवं परिवहन मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि देशभर से भोपाल पधारे बाल वैज्ञानिक मुख्यमंत्री डॉ. यादव की सर्वोच्च प्राथमिकता में शामिल हैं। राज्य सरकार विद्यार्थियों के बीच वैज्ञानिक और नवाचारी दृष्टिकोण विकसित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। प्रदेश के स्कूलों में आईसीटी लैब की संख्या बढ़ाई जा रही है। जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कार्यक्रम में सहभागी बाल वैज्ञानिकों को शुभकामनाएं दीं। निदेशक एनसीईआरटी प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव सदैव एनसीईआरटी को प्रोत्साहन प्रदान करते हैं। वे कला एवं विज्ञान के प्रति पारखी दृष्टिकोण रखते हैं। बाल वैज्ञानिक प्रदशर्नी एक अनूठी प्रदर्शनी है, जिसमें देशभर के जिलों से बाल वैज्ञानिकों के प्रोजेक्ट और मॉडल चुनकर लाए गए हैं। कार्यक्रम में पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मती कृष्णा गौर, विधायक भगवानदास सबनानी, जिलाध्यक्ष रवींद्र यति, सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. संजय गोयल सहित बड़ी संख्या में विज्ञान प्रसारक, विषय-विशेषज्ञ, शिक्षक, बाल वैज्ञानिक एवं जिज्ञासु विद्यार्थी उपस्थित थे। उल्लेखनीय है कि बाल प्रदर्शनी 31 राज्यों एवं केन्द्र शासित प्रदेशों के लगभग 900 विद्यार्थी और शिक्षकों द्वारा समाजिक समस्याओं का सामाधान बताते 240 साइंस मॉडल एवं इनोवेटिव प्रोजेक्ट प्रदर्शित किए गए हैं। साथ ही बाल वैज्ञानिकों के इस महाकुंभ में मैनिट, आईसेक्ट और आईआईएसईआर के वैज्ञानिकों से संवाद सत्र भी आयोजित किए जाएंगे। बच्चों को अपनी स्वाभाविक जिज्ञासा और रचनात्मकता के लिए मंच उपलब्ध कराने तथा बच्चों को अपने आसपास हो रहे क्रियाकलापों में विज्ञान और गणित की उपस्थिति का अनुभव कराने के उद्देश्य से यह प्रदर्शनी आयोजित की गई है। राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी 2025 का मुख्य विषय "सतत भविष्य के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी" है। देश के विभिन्न राज्यों के 230 विद्यालयों के बाल वैज्ञानिकों ने … Read more