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मेकाहारा में सस्ती मेडिकल जांच, MRI 2 हजार और CT-स्कैन 1 हजार में, डीन को CGMSC NOC की आवश्यकता नहीं

 रायपुर  छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की अध्यक्षता में  रायपुर के पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय और डॉडीकेएस अस्पताल के स्वशासी समिति के सामान्य सभा की बैठक संपन्न हुई। बैठक में उन्होंने चिकित्सा महाविद्यालय और संबद्ध अस्पताल में लोगों को अविलंब स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता, रीएजेंट एवं कंज्यूमेबल की खरीदी तथा आवश्यक मानव संसाधन की व्यवस्था स्वशासी मद से करने हेतु कई महत्वपूर्ण निर्णय लिये। स्वास्थ्य मंत्री ने स्वशासी सभा की बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि अस्पताल में किसी भी मरीज को स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने मरीज हित में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए चिकित्सा महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के लिए अति आवश्यक सामाग्रियों उपकरण/रियेजेन्ट/केमिकल/ डिस्पोजेबल सामाग्रियां इत्यादि जिनके मांगपत्र सीजीएमएससी को प्रेषित किये गए हैं, उन सामाग्रियों की आपातकालीन आवश्यकता होने पर सीजीएमएससी से एनओसी प्राप्त होने एवं राशि मिलने की प्रत्याशा में अधिष्ठाता स्तर पर छ.ग. भंडार क्रय नियमानुसार आवश्यकता के अनुरूप सामाग्री क्रय किये जाने की वित्तीय शक्ति प्रदत्त करने का अनुमोदन किया।  स्वास्थ्य मंत्री ने पेट सीटी स्कैन तथा गामा कैमरा की सुविधा मरीजों को प्रदान किये जाने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए तीन महीने के अंदर इस सुविधा को प्रारंभ करने के लिए उपयुक्त व्यवस्था बनाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिये। विभिन्न विभागों को दिए जाने वाले इंप्रेशन मनी की राशि को प्रति मांगपत्र ₹10 हजार से बढ़ाकर ₹1 लाख करने की घोषणा की। उन्होंने अस्पताल में आवश्यकता पड़ने पर समय-समय पर किए जाने वाले छोटे-मोटे मरम्मत कार्यों के लिए अस्पताल स्तर पर ऑटोनॉमस फंड का उपयोग करने के निर्देश दिये। समिति की बैठक में मेडिकल कॉलेज के 200 छात्रों के लिए चयन किए गए छात्रावास भवन पर सहमति दी गई। शीघ्र ही यह छात्रावास संचालन में आ जाएगा। बैठक में डीकेएस अस्पताल के एमसीएच छात्रावास का शुल्क 5 हजार से घटाकर 2 हजार 5 सौ रुपए करने का निर्णय लिया गया। ओपीडी में आने वाले मरीजों के सीटी स्कैन एवं एमआरआई जांच की दर को पुनरीक्षित करते हुए एपीएल (गरीबी रेखा से ऊपर जीवन यापन करने वाले) मरीजों को एमआरआई जांच हेतु ₹2000 एवं सीटी स्कैन जांच हेतु ₹1000 राशि प्रावधानित करने का निर्णय लिया। वहीं बीपीएल मरीजों तथा 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए ओपीडी में जाँच सुविधा निशुल्क रहेगी। जबकि अंत: रोगी यानी अस्पताल में भर्ती एपीएल एवं बीपीएल दोनों मरीजों के लिए ये दोनों जांच निशुल्क है। सांसद रायपुर बृजमोहन अग्रवाल एवं विधायक सुनील सोनी की उपस्थिति में आयोजित इस बैठक में स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया, संभाग आयुक्त महादेव प्रसाद कांवरे, आयुक्त चिकित्सा शिक्षा शिखा राजपूत तिवारी, सीजीएमएससी के प्रबंध संचालक रितेश अग्रवाल, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. यू. एस. पैंकरा, रायपुर मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. विवेक चौधरी, अम्बेडकर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. संतोष सोनकर, डीकेएस अस्पताल प्रबंधन समेत अन्य अधिकारी उपस्थित थे ।

जल दर्पण पोर्टल से अब हर गांव का नल-जल सिस्टम ऑनलाइन देखा जा सकेगा

 भोपाल प्रदेश में घर-घर नल से जल पहुंचने के लिए जल जीवन मिशन के अंतर्गत एकल व समूह नल जल योजनाओं पर काम हो रहा है। कई योजनाएं पूरी हो चुकी है और उनके संचालन का कार्य पंचायत को सौंपा गया है। यह शिकायत आम है कि योजनाएं भले ही बना ली गई हों, मगर जलापूर्ति नहीं हो रही है। विधानसभा में इसको लेकर प्रश्न भी उठ चुका है। इसे देखते हुए लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने तय किया है कि वह अब योजनाओं की निगरानी आनलाइन करेगा। इसके लिए जल दर्पण पोर्टल बनाया है, जिसमें मैदानी अमले को प्रतिदिन यह रिपोर्ट देनी होगी कि योजना चालू है या बंद। पानी आ रहा है या नहीं। पाइपलाइन ठीक काम कर रही है या नहीं। जानकारी सही दी जा रही है या नहीं, इस पर नजर उच्चाधिकारी रखेंगे। प्रदेश में जल जीवन मिशन के अंतर्गत 27,990 एकल नल जल योजनाएं स्वीकृत की गई हैं। 15,947 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं और 12,043 के काम जारी हैं। इनमें से 8,358 नल-जल परियोजनाओं के आकलन में चूक हुई, जिसके कारण लागत 2,813 करोड़ रुपये बढ़ गई। केंद्र सरकार ने इस अतिरिक्त राशि को देने से इन्कार कर दिया और भार राज्य सरकार के खजाने पर आ गया। दोषी इंजीनियरों को कारण बताओ नोटिस दिए गए हैं। इसके साथ ही बड़ी आबादी को मिलने वाले लाभ को देखते हुए सरकार ने काम आगे बढ़ाने का निर्णय लिया है। यह भी तय किया है कि पंचायतों द्वारा क्रियान्वित योजनाओं की निगरानी प्रतिदिन के आधार पर होगी। 28 हजार गांवों से फीडबैक लेने के लिए जल दर्पण पोर्टल विभाग ने बनाया है। इसमें मैदानी स्तर से बताया जाएगा कि योजना चालू है या बंद। यदि बंद है तो यह बताना पड़ेगा कि बिजली की लाइन कटने, पाइप लाइन की खराबी या फिर किस कारण से बंद हैं। इसके आधार पर सुधार की कार्य योजना तैयार होगी। कुल मिलाकर सरकार का उद्देश्य यह है कि योजना यदि संचालन लिए पंचायतों को सौंप दी गई हैं तो फिर घरों पर नल से जल पहुंचाना चाहिए। इसमें कोई परेशानी आ रही है तो उसका पता लगाकर समाधान किया जाए। ऐसे होगा काम जल दपर्ण पोर्टल में नलजल योजनाओं की दैनिक चालू बंद की स्थिति की जानकारी मैदानी क्षेत्र से नियमित ली जाएगी। उपयंत्रियों पोर्टल पर रहैंडपंप टेक्नीशियनों, हेल्परों और ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति के सदस्यों को रजिस्टर करेंगे। ये अपने-अपने कार्यक्षेत्र की नलजल योजनाओं की दैनिक चालू-बंद स्थिति की जानकारी पोर्टल पर दर्ज करेंगे। इसका सत्यापन उपयंत्री एवं सहायक यंत्री से कराया जाएगा। निगरानी का तंत्र कर रहे हैं विकसित : विभाग के प्रमुख सचिव पी नरहरि का कहना है कि घर-घर नल से जल पहुंचाना सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है। बड़ी संख्या में योजनाएं पंचायतों द्वारा क्रियान्वित की जा रही हैं। कई बार शिकायत आती है कि जलापूर्ति नहीं हो रही है। हमने संचालन, संधारण और निगरानी की कार्य योजना बनाई है। निगरानी का तंत्र विकसित किया गया है। जल दर्पण पोर्टल के माध्यम से दैनिक आधार पर निगरानी की जाएगी। इसका लाभ यह होगा कि वास्तविक स्थिति सामने आ जाएगा और यदि कहीं कोई समस्या है तो उसे दूर करने की दिशा में काम किया जाएगा।

अपराध करने वालों को चुकानी ही होगी कीमत : सीएम योगी

अपराध कतई स्वीकार नहीं करता नया यूपी : मुख्यमंत्री अपराध करने वालों को चुकानी ही होगी कीमत : सीएम योगी बी से ए क्लास में उच्चीकृत हुई गोरखपुर स्थित क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला 72.78 करोड़ रुपये की परियोजना का मुख्यमंत्री ने किया लोकार्पण मॉडर्न पुलिस के लिए गेम चेंजर बनेगी फॉरेंसिक साइंस लैब – मुख्यमंत्री आठ वर्षों में की 2.19 लाख पुलिस कार्मिकों की भर्ती- मुख्यमंत्री 2017 से पहले महज 4 फॉरेंसिक लैब थे अब 12 हैं और 6 छह लैब निर्माणाधीन – सीएम गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 के बाद का नया उत्तर प्रदेश अपराध को कतई स्वीकार नहीं करता है। यदि किसी ने यहां अपराध करने की जुर्रत की तो उसे हर हाल में उसकी कीमत भी चुकानी होगी। वह दौर खत्म हो गया जब पीड़ित तड़पता, भटकता था और अपराधी मौज-मस्ती करते थे। अब प्रदेश सरकार ने जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत साक्ष्य संकलन और फॉरेंसिक साइंस लैब्स (विधि विज्ञान प्रयोगशाला) के जरिए इसके प्रमाणन की ऐसी व्यवस्था सुनिश्चित कर दी है कि कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति, वैज्ञानिक साक्ष्यों पर आधारित जांच और आधुनिक फॉरेंसिक साइंस लैब्स के जरिए ऐसी व्यवस्था विकसित हुई है कि अपराधी अब बच नहीं सकते। सटीक, त्वरित और पारदर्शी जांच के कारण पीड़ित को सहज, सुगम और समयबद्ध न्याय उपलब्ध हो रहा है। सीएम योगी मंगलवार को बी से ए क्लास में उच्चीकृत क्षेत्रीय विधि विज्ञान प्रयोगशाला (आरएफएसएल) गोरखपुर के नवीन उच्चीकृत भवन के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। छह मंजिला हाईटेक नवीन भवन के निर्माण पर 72.78 करोड़ रुपये की लागत आई है। उच्चीकृत आरएफएसएल का फीता काटकर उद्घाटन करने और यहां की व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने फॉरेंसिक जांच की अत्याधुनिक सौगात के लिए पूर्वी उत्तर प्रदेश की जनता को बधाई देते हुए कहा कि आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य होने के बावजूद 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में सिर्फ चार फॉरेंसिक साइंस लैब थे। सरकार बनने के बाद यह तय किया गया कि कम से कम हर कमिश्नरी में एक फॉरेंसिक साइंस लैब होनी चाहिए। इससे आठ वर्षों में इनकी संख्या बढ़कर 12 हो गई है। छह लैब निर्माणाधीन हैं। जल्द ही सभी कमिश्नरी में फॉरेंसिक साइंस लैब होंगे। इन लैब्स में हर प्रकार की फॉरेंसिक जांच होगी जो साक्ष्य को प्रमाणित कर अपराधियों को कठोर दंड दिलाने का आधार बनेगी। मुख्यमंत्री ने बताया कि कमिश्नरी स्तर पर फॉरेंसिक साइंस लैब स्थापित करने के साथ सरकार ने हर जिले में फॉरेंसिक साक्ष्य संकलन के लिए दो-दो मोबाइल वैन उपलब्ध कराए हैं। इससे कुछ ही घंटों में पुख्ता साक्ष्य संकलन हो जा रहा है और लैब में उसकी जांच के बाद पीड़ित को सहज और सुगम न्याय मिल जाएगी। अब कोई भी अपराधी बच नहीं पाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले साक्ष्य इकट्ठे होने पर भी अच्छी फॉरेंसिक साइंस लैब के अभाव में अपराधी बच जाते थे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में गत वर्ष जुलाई से तीन नए कानून (भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 और भारतीय साक्ष्य संहिता 2023) लागू होने के बाद फॉरेंसिक साइंस लैब्स की उपयोगिता और बढ़ गई है। नए कानून में सात वर्ष से अधिक कारावास वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच को अनिवार्य कर दिया है। इन कानूनों के लागू होने से काफी पहले ही यूपी सरकार ने लैब्स स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी थी। फॉरेंसिक साइंस लैब्स से रोजगार का सृजन भी होगा सीएम योगी ने कहा कि फॉरेंसिक साइंस लैब्स से युवाओं के लिए नए रोजगार का सृजन भी होगा। इसके लिए सरकार ने लखनऊ में यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस की स्थापना की है। यहां लैब टेक्नीशियन के लिए सर्टिफिकेट, लैब में साक्ष्य मिलान करने वालों के लिए डिप्लोमा और विशेषज्ञ के लिए डिग्री कोर्स शुरू किए गए हैं। फॉरेंसिक साइंस लैब्स नए समय में नए अपराधों को रोकने के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य उपलब्ध कराने के प्रयासों का हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि अत्याधुनिक यूपी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में एडवांस डीएनए डायग्नोस्टिक, एआई, ड्रोन, रोबोटिक लैब उपलब्ध है। यहां नैनो से लेकर 40 किलो वजनी ड्रोन संचालित किए जा सकते हैं। मॉडर्न पुलिस के लिए गेम चेंजर बनेगी फॉरेंसिक साइंस लैब सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर में अपग्रेडेड फॉरेंसिक साइंस लैब में सभी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी जो सटीक जांच करेंगी। यह लैब मॉडर्न पुलिस के लिए गेम चेंजर साबित होगी। त्वरित और पुख्ता जांच होने से लोगों को समय से सुसंगत न्याय मिलेगा। उन्होंने कहा कि फॉरेंसिक साइंस लैब अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस नीति का ही हिस्सा हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर की यह उच्चीकृत लैब उन चुनिंदा संस्थानों में शामिल होगी जहां बैलेस्टिक, नार्कोटिक्स, सेरोलॉजी, साइबर फॉरेंसिक, डीएनए प्रोफाइलिंग, डाक्यूमेंट विश्लेषण से लेकर सभी उन्नत फॉरेंसिक परीक्षण संभव होंगे। ऐसी क्षमता से पुलिस के कार्य में गति, पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य साइबर फॉरेंसिक को वैश्विक मानक तक पहुंचाना है ताकि भविष्य में होने वाले हाईटेक अपराधों पर भी प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। आठ वर्षों में की 2.19 लाख पुलिस कार्मिकों की भर्ती मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रूल ऑफ लॉ को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए कहा कि इसे लागू करने प्रयासों के तहत आठ सालों में प्रदेश में 2 लाख 19 हजार पुलिस कार्मिकों की भर्ती की गई है। इसमें 60244 कार्मिकों की भर्ती हाल ही में संपन्न हुई है। उन्होंने कहा कि आठ वर्षों में यूपी में जितनी पुलिस भर्ती हुई है, उतनी कई राज्यों की कुल पुलिस फोर्स नहीं है। सीएम ने भर्ती के साथ ट्रेनिंग क्षमता विस्तार का भी उल्लेख किया। कहा कि 2017 में पुलिस ट्रेनिंग की कुल क्षमता 6000 की थी। तब 30000 भर्ती होने पर किराए पर ट्रेनिंग सेंटर लेने पड़े थे। आज प्रदेश में पुलिस ट्रेनिंग की क्षमता दस गुने से अधिक बढ़ चुकी है। अभी जितनी भर्ती हुई, सबको ट्रेनिंग राज्य के ही सेंटर्स से मिल रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस महकमे में सरकार कार्य के अनुरूप सुविधाओं का विस्तार कर रही … Read more

मुख्यमंत्री योगी ने भरा एसआईआर फॉर्म, नागरिकों को जागरूक रहने की दी प्रेरणा

मुख्यमंत्री योगी ने भरा एसआईआर प्रक्रिया का फॉर्म, जागरूक और जिम्मेदार नागरिक होने की दी प्रेरणा मतदाता सूची अद्यतन अभियान बना जागरूकता और सहभागिता का माध्यम  SIR 28 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 7 फरवरी 2026 तक गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नागरिक जिम्मेदारी और लोकतांत्रिक चेतना का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर के बैठक कक्ष में मतदाता सूची के एसआईआर यानी विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का फॉर्म भरकर इसे पूर्ण किया। मुख्यमंत्री गोरखपुर शहर विधानसभा क्षेत्र के झूलेलाल मंदिर के पास स्थित कन्या प्राथमिक विद्यालय मतदान केंद्र के बूथ संख्या 223 में पंजीकृत मतदाता हैं। बता दें कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूची को अधिक सटीक, अद्यतन और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से, SIR 28 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 7 फरवरी 2026 तक चलाया जाएगा। उत्तर प्रदेश सहित देश के 12 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश इस प्रक्रिया में शामिल हैं। इसी क्रम में मंगलवार को गोरखपुर में बीएलओ गोरखनाथ मंदिर पहुंचे और मुख्यमंत्री को एसआईआर फॉर्म उपलब्ध कराया, जिसे मुख्यमंत्री ने भरकर उन्हें सौंप दिया।  SIR मतदाता सूची को शुद्ध और सटीक बनाने और साथ ही संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मतदाता अधिकारों के सही से इस्तेमाल के लिए कराया जा रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा स्वयं इस प्रक्रिया में शामिल होना यह संदेश देता है कि मतदाता सूची को सही और अद्यतन रखना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि प्रत्येक नागरिक का अधिकार और कर्तव्य है। ऐसी पहल मतदाता जागरूकता को मजबूती देती है और लोकतंत्र को और अधिक सहभागी बनाती है। इस अवसर पर जिलाधिकारी दीपक मीणा, तहसीलदार सदर ज्ञान प्रताप सिंह, भाजपा महानगर संयोजक राजेश गुप्ता, नगर निगम बोर्ड के उपसभापति एवं पार्षद पवन त्रिपाठी तथा जीडीए बोर्ड सदस्य दुर्गेश बजाज उपस्थित रहे।

पीड़ितों की सहायता में लापरवाही पर होगी कार्रवाई : मुख्यमंत्री

पुलिस से जुड़े मामलों में करें सख्त कार्रवाई : मुख्यमंत्री पीड़ितों की सहायता में लापरवाही पर होगी कार्रवाई : मुख्यमंत्री जनता दर्शन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुनीं 300 लोगों की समस्याएं गोरखपुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को दो टूक हिदायत दी है कि पुलिस से जुड़े मामलों में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। पीड़ितों की मदद में विलंब और लापरवाही कतई नहीं होनी चाहिए। जनता की समस्याओं के समाधान में  किसी तरह की लापरवाही हुई तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई भी तय है। किसी पीड़ित की समस्या के समाधान में अगर कहीं भी कोई दिक्कत आ रही है तो उसका पता लगाकर निराकरण कराया जाए और किसी स्तर पर जानबूझकर कर प्रकरण को लंबित रखा गया है तो संबंधित की जवाबदेही तय की जाए।  मुख्यमंत्री ने यह निर्देश मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनता जनता दर्शन के दौरान लोगों की समस्याएं सुनने के दौरान दिए। मंदिर परिसर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 300 लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। सीएम योगी ने सभी को आश्वस्त किया कि किसी को भी घबराने की आवश्यकता नहीं है। हर समस्या का वह प्रभावी निस्तारण कराएंगे। इसे लेकर उन्होंने प्रशासन व पुलिस के अधिकारियों को मौके पर ही दो टूक समझाया कि जनता की समस्याओं का समयबद्ध, निष्पक्ष और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण करें। कुछ प्रकरणों पर उन्होंने अफसरों को निर्देशित किया कि यह भी पता लगाएं कि यदि किसी को प्रशासन का सहयोग नहीं मिला है तो ऐसा क्यों और किन कारणों से हुआ। हर पीड़ित की त्वरित मदद की जाए। उन्होंने जमीन कब्जाने की शिकायतों पर विधि सम्मत कठोर कदम उठाने का निर्देश दिया।  हर बार की तरह इस बार भी जनता दर्शन में कुछ लोग इलाज में आर्थिक सहायता की गुहार लेकर पहुंचे थे। इस पर सीएम योगी ने अधिकारियों से कहा कि जल्द से जल्द अस्पताल के इस्टीमेट की प्रक्रिया पूर्ण कराकर शासन को उपलब्ध करा दें। इलाज के लिए मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से पर्याप्त मदद की जाएगी। जनता दर्शन में परिजनों के साथ आए बच्चों को प्यार-दुलारकर सीएम योगी ने उन्हें चॉकलेट दिया।  सीएम ने की गोसेवा, मोर को भी दुलारा गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की दिनचर्या परंपरागत रही। गुरु गोरखनाथ का दर्शन पूजन करने तथा अपने गुरुदेव ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की प्रतिमा समक्ष शीश झुकाने के बाद वह मंदिर परिसर के भ्रमण पर निकले। मंदिर की गोशाला में पहुंचकर गोसेवा की। गायों और गोवंश को स्नेहिल भाव से गुड़-रोटी खिलाया। गोशाला में सीएम योगी के पहुंचने पर प्रायः एक मोर भी उनके पास आ जाता है। मुख्यमंत्री ने उसे भी दुलारा और अपने हाथों से रोटी खिलाया।

सरेंडर्ड नक्सलियों को मिली फूड ट्रेनिंग, बस्तर में चलेंगे कैफे; CM साय ने पहले दिन किया फूड ऑर्डर

बस्तर  नक्सल प्रभावित क्षेत्र में पुनर्वास और मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में आज बस्तर एक नया इतिहास रचा है। पुलिस लाइन स्थित त्रिवेणी परिसर के सामने पंडुम कैफे अपनी तरह का पहला ऐसा कैफेटेरिया होगा, जहां नक्सल पीड़ित परिवारों और समर्पित नक्सलियों को रोजगार देते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।इस संवेदनशील पहल का उद्घाटन मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने किया। पंडुम कैफे का संचालन दुर्ग की प्रसिद्ध नुक्कड़ संस्था करेगी, जो वर्षों से मूक-बधिर और दिव्यांग बच्चों की देखरेख और सामाजिक सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। छत्तीसगढ़ के बस्तर में पंडुम कैफे की शुरुआत की गई है जिसका संचालन सरेंडर्ड नक्सली और नक्सल हिंसा पीड़ित परिवार के लोग करेंगे। इसके लिए बकायदा उन्हें खाना बनाने, सर्व करने, ऑर्डर लेने की ट्रेनिंग दी गई। शुरुआत में 13 लोग मिलकर इस कैफे को चलाएंगे।  मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जगदलपुर के पुलिस लाइन परिसर में बने इस कैफे का उद्घाटन किया। इस दौरान सीएम ने खुद फूड ऑर्डर किया। सरेंडर किए नक्सलियों ने CM को फूड परोसा। जिसके बाद मुख्यमंत्री ने डिजिटल रूप से बिल भी पेय किया। पुलिस लाइन परिसर में बना पंडुम कैफे दरअसल, सरकार की पुनर्वास नीति के तहत बस्तर पुलिस और प्रशासन के सहयोग से जगदलपुर पुलिस लाइन परिसर में पंडुम कैफे बनाया गया है। इसके स्ट्रक्चर निर्माण के लिए शासन-प्रशासन ने पैसे खर्च किए हैं। नक्सल हिंसा पीड़ित परिवार और हथियार छोड़कर मुख्य धारा में लौटे नक्सलियों को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से इस कैफे का शुभारंभ किया गया है। अभी कुल 13 लोगों को कैफे की चाबी थमाई गई है। 13 लोगों को मिला रोजगार कैफे के माध्यम से कुल 13 लोगों को रोजगार मिला है। जिसमें 8 नक्सल हिंसा पीड़ित हैं, 5 लोग सरेंडर नक्सली हैं। इनमें 8 महिलाएं भी शामिल हैं। सरकार की पुनर्वास नीति के तहत तैयार किया गया यह कैफे नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्म समर्पित माओवादी कैडरों के लिए आजीविका प्रदान करने वाला एक मॉडल है। पहले दी ट्रेनिंग, फिर काम में लगाया इन 13 लोगों को पहले जगदलपुर में ही ट्रेनिंग दी गई। इन्हें अलग-अलग तरह के फूड्स को बनाने से लेकर परोसने तक के गुर सिखाए गए। साथ ही कस्टमर से कैसे बर्ताव करना है, कैसे ऑर्डर लेना है इसके बारे में भी बताया गया। करीब 1 महीने से ज्यादा इन्हें ट्रेनिंग दी गई। जब ये इसमें माहिर हुए तो 13 लोगों को कैफे की चाबी थमा दी गई। पर्यटकों को बस्तर दिखाने हो रहे तैयार सरकार के पुनर्वास नीति के तहत बस्तर के पूर्व नक्सलियों को अलग-अलग काम में पारंगत बनाया जा रहा है। पुनर्वास केन्द्रों में उनके जीवन को बदलने की पहल हो रही है। आड़ावाल के केन्द्र में करीब 30 सरेंडर नक्सली होटल मैनेजमेंट का कोर्स कर रहे हैं साथ ही कई अन्य पूर्व नक्सलियों को टूरिस्ट गाइड बनाने की भी तैयारी हो रही है। CM बोले- बस्तर के लिए नया अध्याय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि पंडुम कैफे को स्पष्ट सामाजिक और विकासात्मक उद्देश्यों के साथ स्थापित किया गया है। ये बस्तर के लिए एक नया अध्याय है। पंडुम कैफे की यह पहल राज्य की शांति, विकास और मानव-केंद्रित पुनर्वास के प्रति प्रतिबद्धता को दृढ़ता से रेखांकित करती है। IG बोले- अलग-अलग स्किल्स की ट्रेनिंग दी गई बस्तर के IG सुंदरराज पी ने कहा कि, जो कभी संघर्ष, हिंसा या माओवादी गतिविधियों से प्रभावित हुए थे उनको हॉस्पिटैलिटी, कैफे संचालन, स्वच्छता मानक, खाद्य सुरक्षा, ग्राहक सेवा और उद्यमिता में प्रशिक्षित किया गया है। यह उन्हें दीर्घकालिक करियर और आत्मनिर्भरता के लिए तैयार करता है। उन्होंने कहा कि, पंडुम नाम बस्तर की सांस्कृतिक जड़ों से प्रेरित है। ये टैग लाइन 'Where every cup tells a story' क्षेत्र की दृढ़ता, उपचार और आशा की भावना को दर्शाती है। ये शांति निर्माण का स्केलेबल मॉडल है।

सर्दी ने पकड़ा जोर: मध्य प्रदेश के आधे प्रदेश में कोल्ड वेव, स्कूलों का समय बदला

भोपाल  प्रदेश में उत्तर से आती ठंडी हवाओं ने सर्दी का असर तेज कर दिया है। भोपाल और इंदौर समेत कई शहरों में तापमान सीजन के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। भोपाल में नवंबर की अब तक की सबसे ठंडी रात दर्ज की गई। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों के लिए प्रदेश के बड़े हिस्से में शीतलहर का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, भोपाल, इंदौर और राजगढ़ में मंगलवार को तीव्र शीतलहर की स्थिति रहेगी। इसके अलावा धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, हरदा, बैतूल, देवास, सीहोर, शाजापुर, विदिशा, रायसेन, सागर, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सतना, पन्ना, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर और शहडोल में शीतलहर की चेतावनी प्रभावी है।  भोपाल, इंदौर और राजगढ़ में मंगलवार को सीवियर कोल्ड वेव यानी तीव्र शीतलहर का अलर्ट है। वहीं, धार, बड़वानी, खरगोन, खंडवा, हरदा, बैतूल, देवास, सीहोर, शाजापुर, विदिशा, रायसेन, सागर, शिवपुरी, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, सतना, पन्ना, दमोह, जबलपुर, कटनी, मैहर और शहडोल में शीतलहर की चेतावनी जारी की गई है। इंदौर में कलेक्टर शिवम वर्मा ने 18 नवंबर से स्कूलों की टाइमिंग सुबह 9 बजे से करने के आदेश जारी किए हैं। भोपाल में भी जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी स्कूलों में नर्सरी से लेकर 8वीं तक की कक्षा सुबह 8:30 बजे से पहले नहीं लगाने के निर्देश दिए हैं। ग्वालियर, देवास, झाबुआ, छिंदवाड़ा, सागर, शहडोल और खंडवा में भी स्कूल लगने के समय में बढ़ोतरी की जा चुकी है। वहीं, जबलपुर-उज्जैन समेत अन्य जिलों में बच्चों को राहत नहीं मिल पाई है। भोपाल में 84 साल का रिकॉर्ड टूटा सीनियर मौसम वैज्ञानिक डॉ. दिव्या ई. सुरेंद्रन ने बताया कि भोपाल में नवंबर का रात का तापमान ब्रेक हो गया है। रविवार-सोमवार की रात में पारा 5.2 डिग्री सेल्सियस रहा था। इससे पहले साल 1941 में 6.1 डिग्री तापमान रहा था। वर्तमान में प्रदेश में मौसम साफ है। इस वजह से उत्तरी हवाओं का असर ज्यादा बना रहेगा। 22 नवंबर से देश के दक्षिण-पूर्वी खाड़ी में एक लो प्रेशर एरिया (निम्न दबाव का क्षेत्र) एक्टिव हो रहा है। इससे पहले प्रदेश में अगले 2 दिन तक शीतलहर का अलर्ट है। राजगढ़ सबसे ठंडा, पारा 5.8 डिग्री सोमवार-मंगलवार की रात राजगढ़ सबसे ठंडा रहा। यहां पारा 5.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पचमढ़ी में तापमान 6.4 डिग्री रहा। उमरिया में 7.6 डिग्री, नौगांव में 7.8 डिग्री, शिवपुरी में 8 डिग्री, बैतूल में 8.7 डिग्री, धार में 8.8 डिग्री, मलाजखंड में 8.9 डिग्री, खंडवा में 9.4 डिग्री, छिंदवाड़ा में 9.5 डिग्री, खरगोन-मंडला में 9.6 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो भोपाल में पारे में 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रविवार-सोमवार की रात यहां तापमान रिकॉर्ड 5.2 डिग्री सेल्सियस था। इससे नवंबर की सर्दी का 84 साल का रिकॉर्ड ब्रेक हो गया था। इसके बाद तापमान 8.2 डिग्री पर आ गया। इंदौर में 7.7 डिग्री, ग्वालियर में 10.5 डिग्री, उज्जैन में 11 डिग्री और जबलपुर में पारा 9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

चुनाव आयोग की सख्ती के बाद मध्यप्रदेश ने डिजिटाइज किए 9.72% गणना पत्रक, गोवा रही सबसे आगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में चुनाव आयोग की सख्ती के बाद अब तक कुल 9.72 प्रतिशत गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। चुनाव आयोग द्वारा इसको लेकर रोज की जा रही समीक्षा के आधार पर एमपी का नम्बर देश के 12 राज्यों में कराई जा रही एसआईआर की कार्यवाही में छठे स्थान पर।  चुनाव आयोग द्वारा सोमवार को दोपहर बाद तीन बजे तक की स्थिति में जारी गणना पत्रक वितरण और डिजिटाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार देश के राज्य 12 राज्यों में कराई जा रही एसआईआर की कार्यवाही में मध्य प्रदेश का परफॉर्मेंस छठे स्थान पर है। चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर गणना पत्र के वितरण और गणना पत्र के डिजिटाइजेशन को लेकर जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य प्रदेश में गणना पत्रक वितरण 99.63% और डिजिटाइजेशन की कार्रवाई 9.72% हुई है। रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार 143 वोटर्स में से 5 करोड़ 71 लाख 94 हजार 700 वोटर्स को गणना पत्रक बांटे जा चुके हैं। इसके साथ ही 55 लाख 81 हजार 488 गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। देश के 12 राज्यों में की जा रही एसआईआर की कार्रवाई की तुलनात्मक रिपोर्ट से पता चलता है कि मध्य प्रदेश की प्रोग्रेस छठे स्थान पर है और सबसे अच्छी स्थिति गोवा की है जहां 100% गणना पत्रक वितरण और 35.74% डिजिटाइजेशन का काम हो चुका है। इसके बाद राजस्थान में 98.85% गणना पत्रक बांटे जा चुके हैं और 27.84% डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। तीसरे नंबर पर लक्षद्वीप है जहां 100% गणना पत्रक वितरण और 19.64% डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। पुडुचेरी चौथे स्थान पर है जहां 94.35 प्रतिशत गणना पत्रक बांटे गए हैं और 18.79 प्रतिशत डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। 50 करोड़ 97 लाख मतदाताओं की हो रही SIR चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 12 राज्यों के 50 करोड़ 97 लाख 84 हजार 423 वोटर्स में से 50 करोड़ 11 लाख 75 हजार 907 मतदाताओं को गणना पत्रक बांटे जा चुके हैं। इनमें से चार करोड़ 42 लाख 64 हजार 69 मतदाताओं की गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है जो कुल मतदाता संख्या का 8.68 प्रतिशत है। सभी 12 राज्यों में गणना पत्रक वितरण का प्रतिशत 98.32 है। क्या है गणना पत्रक चुनाव आयोग के आदेश पर प्रदेश के सभी जिलों में गणना पत्रक बांटे जाने का काम बीएलओ कर रहे हैं। बीएलओ जो गणना पत्रक बांट रहे हैं, उसमें तय फार्मेट में चुनाव आयोग मतदाताओं का वेरिफिकेशन करा रहा है। इसमें 2003 में हुई एसआईआर के आधार पर वर्तमान मतदाता के माता-पिता, परिजनों, रिश्तेदारों की मतदाता सूची संख्या के आधार पर वेरिफिकेशन किया जा रहा है। इस रिपोर्ट के आधार पर शिफ्ट हुए, मृत हो चुके मतदाताओं की पहचान कर मतदाता सूची को फाइनल किया जाएगा। एसआईआर में टिमरनी के बीएलओ का काम 100 प्रतिशत पूर्ण उधर संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आरपीएस जादौन ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण SIR–26 के अंतर्गत, विधानसभा क्षेत्र 134 टिमरनी के भाग संख्या 68, ग्राम खरतलाय में नियुक्त बूथ लेवल ऑफिसर हंस कुमार दिलारे द्वारा सारा कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण किया गया है। यह भी उल्लेखनीय है कि जिला हरदा में सर्वप्रथम 100% कार्य पूर्ण करने का दायित्व ग्राम खरतलाय में रोजगार सहायक पद पर नियुक्त BLO द्वारा सफलतापूर्वक पूरा किया गया है, जो सराहनीय है।

अमित शाह की बैठक के बीच दिल्ली ब्लास्ट जांच में तेजी, 30 स्थानों पर ED और अन्य एजेंसियों की रेड

नई दिल्ली दिल्ली ब्लास्ट और उससे जुड़े फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल की जांच में अब केंद्र सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी है. इसी सिलसिले में एक बड़ा कदम उठाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क पर औपचारिक रूप से केस दर्ज कर लिया है और शनिवार सुबह से ही देश के तीन राज्यों में बड़े पैमाने पर छापेमारी अभियान चल रहा है. ED के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार सुबह से दिल्ली, हरियाणा के फरीदाबाद और मध्यप्रदेश में कुल 30 लोकेशंस पर एक साथ सर्च ऑपरेशन शुरू किया गया. यह छापेमारी सीधे तौर पर उस नेटवर्क को खंगालने के लिए है जो फरिदाबाद टेरर मॉड्यूल और कथित व्हाइट कॉलर आतंकी फंडिंग के शक के दायरे में आया है. अमित शाह की हाई-लेवल मीटिंग के बाद एक्शन में ED सूत्र बताते हैं कि यह कार्रवाई अचानक नहीं हुई, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि केंद्रीय गृह मंत्रालय में एक अहम बैठक में तैयार हुई थी. इस बैठक में गृह मंत्री अमित शाह के साथ केंद्रीय खुफिया एजेंसी IB, जांच एजेंसियाँ NIA और ED के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे. इस बैठक में दिल्ली ब्लास्ट के बाद सामने आए नए इनपुट्स खासकर टेरर फंडिंग, “व्हाइट कॉलर टेररिज़्म” और मनी लॉन्ड्रिंग रैकेट पर विस्तृत चर्चा हुई थी. इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने साफ चेतावनी दी थी कि इस हमले के लिए जिम्मेदार आतंकवादी अगर पाताल में भी छुपे हैं, तो जांच एजेंसियां उन्हें खोज कर निकालेंगी. गृह मंत्री ने बैठक में साफ निर्देश दिया था कि दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े हर आर्थिक लिंक की गहराई से जांच की जाए. आतंकी फंडिंग या हवाला नेटवर्क को नहीं छोड़ा जाए. ED और NIA को विशेष अधिकारों के साथ त्वरित और संयुक्त कार्रवाई का “ग्रीन सिग्नल” दिया जाए. इसी मीटिंग के बाद यह तय हो गया था कि टेरर मॉड्यूल की फंडिंग लाइन को तलाशने के लिए ED एक अलग मनी लॉन्ड्रिंग केस दर्ज कर तेज कार्रवाई शुरू करेगी. फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल कितना बड़ा? पिछले सप्ताह दिल्ली ब्लास्ट की जांच में यह संकेत मिला था कि मॉड्यूल के तार सिर्फ जमीन पर काम कर रहे आतंकियों से नहीं, बल्कि व्हाइट कॉलर नेक्सस से भी जुड़े हो सकते हैं, जहां शिक्षा संस्थानों, एनजीओ, निजी कारोबारियों और मध्यस्थों के जरिए धन का प्रवाह हो रहा था. इसी शक के बाद एजेंसियों ने अल फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े लेन-देन, फंड मूवमेंट और संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखी. अब जब पर्याप्त इनपुट्स सामने आए, तो ED ने PMLA (मनी लॉन्ड्रिंग कानून) के तहत मामला दर्ज कर छापेमारी शुरू कर दी. अमित शाह की अध्यक्षता वाली हाई-लेवल बैठक के ठीक बाद इतनी बड़ी कार्रवाई से साफ है कि केंद्र सरकार दिल्ली ब्लास्ट को सिर्फ एक आतंकी घटना नहीं, बल्कि एक संगठित और व्यापक टेरर नेटवर्क की तरह देख रही है. इसी वजह से दिल्ली में धमाका करने वालों के साथ-साथ उन ‘व्हाइट कॉलर’ व्यक्तियों तक पहुंचने की कोशिश है, जो पर्दे के पीछे फंडिंग, लॉजिस्टिक्स और सपोर्ट सिस्टम खड़ा कर रहे थे.

अल फलाह ट्रस्ट पर ED का बड़ा एक्शन, केंद्रीय एजेंसियां कर रही हैं दिल्ली-फरीदाबाद में छापेमारी

 नई दिल्ली प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार सुबह दिल्ली के ओखला इलाके में स्थित अल-फलाह ट्रस्ट और फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े कई ठिकानों पर बड़े स्तर पर छापेमारी की. ये छापे मनी लॉन्ड्रिंग (PMLA) के एक मामले में हो रहे हैं, जिसमें यूनिवर्सिटी और इसके मालिकों-प्रबंधकों पर गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप हैं. सूत्रों के मुताबिक, ED ने अल-फलाह ट्रस्ट के ओखला स्थित मुख्यालय, यूनिवर्सिटी कैंपस और संचालकों के निजी आवास समेत 25 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. दिल्ली के जामिया नगर, ओखला विहार और फरीदाबाद के सेक्टर-22 स्थित कैंपस में ED की टीमें सुबह से ही तैनात हैं. साथ ही ईडी ने अल फलाह और उसके मालिकों से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं को लेकर पीएमएलए का मामला दर्ज किया है. कई ठिकानों पर छापेमारी सूत्रों के मुताबिक, ED की टीम दस्तावेज, बैंक खातों की डिटेल, लैपटॉप, मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल डिवाइस को जब्त कर लिया है. छापेमारी अभी जारी है और शाम तक और ठिकानों पर दबिश पड़ने की संभावना है. वहीं, ईडी की कार्रवाई को देखते हुए दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है. अभी तक इस मामले में किसी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच एजेंसी के सूत्रों का कहना है कि जल्द ही बड़े खुलासे हो सकते हैं. ED ने कुछ महीने पहले ही अल-फलाह यूनिवर्सिटी और इसके मालिकों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत केस दर्ज किया था. आरोप है कि यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट के नाम पर करोड़ों रुपये की अवैध फंडिंग की गई, विदेशी डोनेशन के नियमों का उल्लंघन हुआ और संपत्तियों के गलत इस्तेमाल के जरिए काले धन को सफेद किया गया.