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मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशक फ्रेंडली विजन को राष्ट्रीय मंच पर करेंगे साझा उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्य होंगे सम्मिलित

दिल्ली में होने वाले ‘उद्योग संगम’ में मध्यप्रदेश पेश करेगा अपनी इनोवेशन उपलब्धियां भोपाल  केंद्र सरकार के उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा नई दिल्ली में 11 नवम्बर को ‘उद्योग संगम’ (Conference of Industries & Commerce Ministers) का आयोजन किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर के इस सम्मेलन देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री सहभागिता करेंगे। इस कार्यक्रम में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  पीयूष गोयल मुख्य अतिथि रहेंगे। इस सम्मेलन में Business Reform Action Plan (BRAP 2024) के परिणाम जारी किए जाएंगे और Ease of Doing Business के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले राज्यों को सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के विजन के अनुरूप राज्य में निवेशकों के लिए व्यवसायिक सुगमता, पारदर्शिता और दक्षता को नई दिशा दी गई है। 434 सुधारों (Reforms) का प्रभावी क्रियान्वयन मध्यप्रदेश द्वारा किया गया है। इन सुधारों में प्रोसेस इंजीनियरिंग, डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और निवेश प्रोत्साहन से जुड़े कई उल्लेखनीय कदम शामिल हैं, जिनसे राज्य की औद्योगिक छवि सशक्त हुई है। मध्यप्रदेश के उद्योग विभाग द्वारा ‘उद्योग संगम’ में Invest MP Portal के माध्यम से स्थापित Single Window System, National Single Window System (NSWS) के साथ Integration, औद्योगिक भूमि बैंक (Industrial Land Bank) की सुविधा, Gati Shakti से जुड़ी लॉजिस्टिक सुधार पहल, ऑनलाइन क्लियरेंस प्रणाली, और Startup Ecosystem को प्रोत्साहित करने वाले नवाचार प्रमुख रूप से प्रदर्शित किए जाएंगे। इन सुधारों से राज्य में उद्योग स्थापना और संचालन प्रक्रियाएँ न केवल सरल हुई हैं, बल्कि निवेशकों का विश्वास भी अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है। Ease of Doing Business में मध्यप्रदेश का प्रदर्शन देश के अग्रणी राज्यों में गिना जा रहा है और ‘उद्योग संगम’ में राज्य की पहलें अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में प्रस्तुत की जाएंगी। कार्यक्रम के दौरान DPIIT सचिव द्वारा स्वागत उद्बोधन के बाद औद्योगिक पार्क, स्टार्टअप्स, गतिशक्ति, लॉजिस्टिक्स, और Ease of Doing Business पर विभिन्न विषयगत प्रस्तुतियाँ होंगी। सत्र के समापन पर BRAP 2024 Video Release और राज्यों के Felicitation समारोह का आयोजन किया जाएगा, जिसमें केंद्रीय मंत्री  पीयूष गोयल द्वारा राज्यों को सम्मानित किया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश लगातार इस दिशा में कार्य कर रहा है, जहाँ उद्योग स्थापना और निवेश प्रक्रियाएँ सरल, पारदर्शी और प्रभावी बनें। ‘उद्योग संगम’ में राज्य की प्रस्तुति इसी विजन का प्रतीक होगी।  

दिल्ली धमाके की साजिश: फरीदाबाद रेड के बाद पैनिक में आया आतंकी डॉ. उमर, जांच एजेंसियों ने खोले 10 राज़

नई दिल्ली दिल्ली कार ब्लास्ट केस की गुत्थी अब तक अनसुलझी है. आखिर लाल किला के पास कार में ब्लास्ट क्यों हुआ? किसने इस वारदात को अंजाम दिया, कौन आतंकी संगठन इसके पीछे है? इन सवालों के जवाब की तलाश जारी है. कार में विस्फोट पूरी तरह से फिदायीन हमले की ओर इशारा कर रहा है. सुरक्षा एजेंसियों की मानें तो कार में विस्फोटक लगाया गया था. कार में धमाका किया गया है. आरोपी आतंकी डॉक्टर उमर मर गया या जिंदा है, इसका पता नहीं चल पा रहा है. इस बीच उसके मां और भाई को हिरासत में ले लिया गया है. फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल में कथित आतंकी डॉक्टर उमर की तलाश थी. सुरक्षा एजेंसियों को शक है कि दिल्ली लाल किला कार ब्लास्ट के बीच फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल है. चलिए जानते हैं दिल्ली पुलिस को लाल किले कार ब्लास्ट में कई अहम सुराग मिले हैं. पुलिस घटनास्थल से बरामद कार में मिले शव का DNA टेस्ट करवाएगी. ताकि ये पुष्टि की जा सके कि कार में सवार शख्स डॉक्टर उमर मोहम्मद ही है या नहीं.  खुफिया एजेंसियों को शक है I- 20 कार में डॉक्टर उमर मोहम्मद सवार था. इस शख्स की एक सीसीटीवी तस्वीर मिली है जिसमें वह काले रंग की मास्क पहना है.  फरीदाबाद में भारी मात्रा में बरामद अमोनियम नाइट्रेट के मामले में जानकारी मिलने के बाद दिल्ली पुलिस समेत दूसरी एजेंसियां डॉक्टर उमर मोहम्मद की तलाश कर रही थी.  फरीदाबाद मॉड्यूल का आतंकी डॉक्टर उमर मोहम्मद फरार चल रहा था. एजेंसियों को उसकी तलाश थी. आज तक/इंडिया टुडे ने सूत्रों के हवाले से इस बात का खुलासा किया था.  1- सूत्रों के अनुसार धमाके के वक्त आतंकी उमर मोहम्मद कार में अकेला था. उसने अपने दो अन्य साथी आतंकियों के साथ हमले की योजना बनाई. सूत्रों के अनुसार जब फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल में ताबड़तोड़ गिरफ्तारियां की जाने लगी तो उसे पकड़े जाने का डर सताने लगा और दहशत में आतंकी हमले की योजना बनाई. उसने अपने साथियों के साथ कार में डेटोनेटर लगाया और धमाके को अंजाम दिया.   सोमवार दोपहर 1 बजे आज तक/इंडिया टुडे ने बताया था कि जम्मू-कश्मीर पुलिस और फरीदाबाद पुलिस एक डॉक्टर की तलाश में थी. ये शख्स उमर मोहम्मद ही है. उमर मोहम्मद कश्मीर का रहने वाला है. धमाके में इस्तेमाल की गई I-20 कार इस  I- 20 कार के बारे में दिल्ली पुलिस और जांच एजेंसियों को अहम जानकारी लगी है.  आइए हम आपको बताते हैं कि  I-20 कार दिल्ली में कहां से चली और लाल किले तक कैसे पहुंची? दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल ने इस कार के रूट का सीसीटीवी मैपिंग किया है.  2– इस के अनुसार ये I-20 कार बदरपुर बॉर्डर पर आखिरी बार दिखाई दी, बदरपुर से दिल्ली प्रवेश करती हुई कार दिखाई दे रही है. इसके आगे का रूट पता लगाया जा रहा है. इसके बाद ये कार लाल किले में मेट्रो स्टेशन, गेट नंबर- 1 के पास दिखी.  3- इससे पहले ये कार लाल किले के पास सुनहरी मस्जिद के पास की पार्किंग में 3 घंटे तक खड़ी रही. ये कार दोपहर 3:19 बजे पार्किंग में दाखिल हुई और शाम  6:48 बजे पार्किंग से बाहर निकली. इसके बाद लगभग 6:55 बजे धमाका हो गया. 4– दिल्ली पुलिस पुलिस ने उस सीसीटीवी फुटेज को हासिल कर लिया है जिसमें ये संदिग्ध कार पार्किंग में जाती और फिर बाहर निकलती दिख रही है. इससे पता चलता है कि संदिग्ध कार में अकेला था. अब जांच एजेंसियां दरियागंज रूट की जाने वाली गाड़ियों की जांच कर रही है. पुलिस 100 सीसीटीवी क्लिप्स की जांच कर रही है. इसके अलावा आस-पास के टोल प्लाजा के वीडियो फुटेज की भी जांच कर रही है. ताकि इस कार की पूरी मूवमेंट की जांच पता की जा सके.  5- जिस I-20 कार से लाल किले के पास ब्लास्ट किया गया है उसका मालिक मोहम्मद सलमान नाम का शख्स था. उसने इसे नदीम को बेचा. नदीम ने इस कार को एक कार डीलर, रॉयल कार जोन फरीदाबाद को बेचा. इसके बाद इसे तारिक ने खरीदा. फिर इसे उमर ने खरीदा. यह कार हरियाणा के गुरुग्राम नॉर्थ आरटीओ में रजिस्टर्ड थी. इसका नंबर HR 26 7624 था, जो मोहम्मद सलमान नाम के व्यक्ति के नाम पर दर्ज है. 6– तारिक को कल रात पुलिस ने पुलवामा के संबूरा से हिरासत में लिया है. लेकिन कार की RC तारिक के नाम नहीं है. सूत्र बताते हैं 2015 में तारिक ने कार को उमर को दे दिया था. तबतक कार तारिक के नाम से था. पुलिस ने इन दोनों को ही हिरासत में ले लिया है और पूछताछ कर रही है. इस डील में आमिर नाम के व्यक्ति का कनेक्शन सामने आया है. जम्मू-कश्मीर पुलिस तारिक और आमिर से पूछताछ कर रही है. 7- इसस पहले दिल्ली पुलिस ने इस ब्लास्ट की जानकारी देते हुए कहा था कि जिस कार में विस्फोट हुआ उसमें तीन लोग सवार थे. उन्होंने यह भी कहा कि वे इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या यह आत्मघाती हमला था. लेकिन अब पुलिस कह रही है कि कार में उमर मोहम्मद अकेला था.  8– एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, "विस्फोट एक चलती हुंडई I-20 कार में हुआ, जिसमें तीन लोग बैठे थे. हमें घायलों के शरीर में कोई छर्रा या पंचर नहीं मिला है, जो विस्फोट में असामान्य है. हम सभी पहलुओं की जांच कर रहे हैं." पुलिस अधिकारी ने बताया कि दिल्ली पुलिस ने देर शाम कार मालिक मोहम्मद सलमान को हिरासत में लिया और उससे गाड़ी के बारे में पूछताछ की. उन्होंने बताया कि सलमान ने डेढ़ साल पहले ओखला में देवेंद्र नाम के एक व्यक्ति को गाड़ी बेची थी. बाद में गाड़ी अंबाला में किसी को बेची गई और फिर पुलवामा में तारिक नाम के एक व्यक्ति को बेची गई. पुलिस उन लोगों का पता लगा रही है.  9- दिल्ली पुलिस ने इस ब्लास्ट में प्राथमिकी दर्ज कर ली है.  पुलिस ने  यूएपीए की धारा 16 और 18 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है, जो आतंकवादी कृत्यों और उसके लिए दंड से संबंधित है. विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की धारा 3 और 4 भी जोड़ी गई है. इसके अलावा, हत्या और हत्या के … Read more

दूसरे चरण में 12 मंत्रियों की परीक्षा, बिहार चुनाव में सत्ता की चुनौती

पटना. बिहार विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में 20 जिलों की 122 सीटों पर मतदान होना है और यह चरण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए असली अग्निपरीक्षा साबित होने जा रहा है. इस चरण में 12 मंत्रियों की साख दांव पर है. खास बात यह है कि इनमें कई दिग्गज लगातार जीत दर्ज करते रहे हैं तो कुछ नए चेहरे हैं जिन्होंने कम समय में सत्ता तक सफर तय किया. जिन मंत्रियों की प्रतिष्ठा दांव पर है इनमें ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव सुपौल से, उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा झंझारपुर से, परिवहन मंत्री शीला मंडल फुलपरास से, पीएचईडी मंत्री नीरज कुमार सिंह बबलू छातापुर से, गन्ना उद्योग मंत्री कृष्णानंदन पासवान हरसिद्धि से, आपदा प्रबंधन मंत्री विजय कुमार मंडल सिकटी से, खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेसी सिंह धमदाहा से, भवन निर्माण मंत्री जयंत राज अमरपुर से, सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार गया टाउन से, विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुमित कुमार सिंह चकाई से, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान चैनपुर से और पशुपालन मंत्री रेणु देवी बेतिया से शामिल हैं. विजेंद्र प्रसाद यादव: नीतीश सरकार के वरिष्ठतम मंत्री ऊर्जा, योजना एवं विकास मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव इस बार लगातार नौवीं बार चुनाव लड़ रहे हैं. वे नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद और वरिष्ठ मंत्रियों में से एक हैं. उन्होंने कहा – 24 घंटे बिजली, हर घर नल-जल, सड़क और पुलिया का जाल हमने बिछाया है. जनता मालिक है और जनता विकास पर भरोसा करेगी. डॉ. प्रेम कुमार: 8 बार के MLA, एंटी-इंकम्बेंसी की चुनौती सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार गया टाउन से लगातार आठ बार जीत चुके हैं. पर्यटन, सड़क और शिक्षा पर उनके काम को सराहा गया, लेकिन इस बार एंटी-इंकम्बेंसी फैक्टर चुनौती बन सकता है. वे कहते हैं-जनता काम को पहचानती है, विकास की राजनीति पर ही भरोसा करेगी. रेणु देवी: पूर्व डिप्टी CM अब पशुपालन मंत्री, साख की लड़ाई पूर्व उपमुख्यमंत्री और मौजूदा पशुपालन मंत्री रेणु देवी बीजेपी की महिला शक्ति का प्रतीक मानी जाती हैं. दुर्गा वाहिनी से राजनीति की शुरुआत कर उपमुख्यमंत्री तक पहुंची रेणु देवी अब अपने गढ़ में साख की परीक्षा में हैं. वे कहती हैं- मैंने सेवा की राजनीति की है, पद की नहीं. जनता ने हमेशा स्नेह दिया है और इस बार भी वही आशीर्वाद मिलेगा. नीतीश मिश्रा: विरासत और विकास मॉडल की परीक्षा पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा के पुत्र नीतीश मिश्रा, उद्योग मंत्री के रूप में सरकार के योजनागत विकास की तस्वीर पेश कर रहे हैं. उन्होंने कहा-पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए हमने उद्यम और निवेश बढ़ाने पर ध्यान दिया है. जनता भरोसा रखेगी. शीला मंडल: स्त्री शक्ति का फेस, कर्पूरी ठाकुर की सीट परिवहन मंत्री शीला मंडल फुलपरास से दोबारा चुनाव लड़ रही हैं. 2020 में उन्होंने कांग्रेस के कृपानाथ पाठक को 10,966 वोटों से हराया था. दिलचस्प है कि 1977 में कर्पूरी ठाकुर इसी सीट से मुख्यमंत्री बने थे. शीला मंडल कहती हैं-फुलपरास का नाम अब महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ गया है. हमने जो काम किया है उस पर जनता भरोसा करेगी. नीरज सिंह बबलू: दबंग छवि और बाढ़ प्रबंधन पर परीक्षा पीएचईडी मंत्री नीरज कुमार सिंह बबलू लगातार जीतते रहे हैं. अपने क्षेत्र में वे विकास और सख्त प्रशासन के लिए जाने जाते हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्र होने के बावजूद उन्होंने राहत और पुनर्निर्माण कार्यों में तेजी लाई है. बबलू का कहना है-हमने नल-जल, सड़क और बिजली की दिशा में ठोस काम किया है. कृष्णानंदन पासवान: गन्ना किसानों की उम्मीदों की कसौटी गन्ना उद्योग मंत्री कृष्णानंदन पासवान हरसिद्धि (SC) सीट से चुनाव लड़ रहे हैं. यह इलाका गन्ना किसानों का केंद्र माना जाता है. पासवान का कहना है- गन्ना किसानों की समस्याओं के समाधान और मिलों को पुनर्जीवित करने पर हमने काम किया है. जनता सब जानती है. विजय कुमार मंडल: आपदा प्रबंधन मंत्री की साख दांव पर भागलपुर जिले की सिटी सीट से आपदा प्रबंधन मंत्री विजय कुमार मंडल मैदान में हैं. बाढ़ और राहत कार्यों में इनकी भूमिका अहम रही है. मंडल कहते हैं-आपदा के समय हमने राहत और पुनर्वास का मजबूत तंत्र बनाया. जनता हमारी प्रतिबद्धता देख रही है. लेसी सिंह: नीतीश की ‘शक्ति स्तंभ’, छठी जीत की कोशिश खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री लेसी सिंह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सबसे भरोसेमंद महिला सहयोगियों में से हैं. धमदाहा से वे लगातार पांच बार जीत चुकी हैं और इस बार छठी बार मैदान में हैं. उनका कहना है-महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के मुद्दे पर हमने काम किया है, वही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है. जयंत राज: युवा कुशवाहा चेहरा और विकास की राजनीति भवन निर्माण मंत्री जयंत राज अमरपुर से चुनाव लड़ रहे हैं. वे कुशवाहा समाज में मजबूत पकड़ रखते हैं और खुद को “काम करने वाला नेता” बताते हैं. उनका कहना है-प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री दोनों के विकास कार्यों से जनता प्रभावित है. इस बार भी विश्वास मिलेगा. सुमित कुमार सिंह: निर्दलीय से बने मंत्री, अब JDU से टिकट विज्ञान, प्रौद्योगिकी और तकनीकी शिक्षा मंत्री सुमित कुमार सिंह पिछली बार निर्दलीय जीते थे, लेकिन अब जदयू से चुनाव मैदान में हैं. दिग्गज समाजवादी नेता नरेंद्र सिंह के बेटे हैं. इस बार उनके खिलाफ जदयू के ही 2020 के प्रत्याशी संजय प्रसाद निर्दलीय मैदान में हैं. सुमित का कहना है-हमारे परिवार की राजनीति सेवा पर आधारित रही है, जनता उस पर भरोसा करेगी. जमा खान: एकमात्र मुस्लिम मंत्री, विकास के भरोसे मैदान में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री जमा खान पिछली बार बसपा से जीते थे, अब जदयू से मैदान में हैं. उनका कहना है- हम भाईचारे और विकास की राजनीति करते हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के काम पर वोट मांग रहे हैं. बिहार चुनाव में पूर्व मंत्रियों की फौज भी मैदान में इस चरण में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी (सिकंदरा), पूर्व उपमुख्यमंत्री तारकेश्वर प्रसाद (कटिहार) समेत एक दर्जन से अधिक पूर्व मंत्री मैदान में हैं. भाजपा से सुनील कुमार पिंटू, कृष्ण कुमार ऋषि, विनोद नारायण झा, राम नारायण मंडल, जदयू से दामोदर रावत, आरजेडी से जयप्रकाश नारायण यादव, बीमा भारती, समीर महासेठ, कुमार सर्वजीत, शाहनवाज आलम, बृज किशोर बिंद, हम से अनिल कुमार और लोजपा (रामविलास) से मुरारी प्रसाद गौतम की साख भी दांव पर है. 14 नवंबर को फैसले का दिन, तय होगी बिहार … Read more

रायपुर में 3 दिन के लिए मिनी PMO तैयार, 500 अफसरों के साथ PM मोदी और गृहमंत्री करेंगे महत्वपूर्ण बैठक

रायपुर  छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में 28 से 30 नवंबर तक डीजी कांफ्रेंस का आयोजन होगा, जिसमें  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, देशभर के डीजीपी और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख भी शामिल होंगे. कॉन्फ्रेंस में आतंकवाद, नक्सल, साइबर क्राइम और पुलिस सुधार पर मंथन होगा, जिसकी तैयारियों के लिए प्रशासनिक अमला जुट गया है. बंगला M-01 तीन दिनों के लिए मिनी PMO रायपुर में डीजी कॉन्फ्रेंस के दौरान नवा रायपुर का बंगला M-01 तीन दिनों के लिए मिनी PMO में तब्दील होगा. यह बंगला विधानसभा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री रमन सिंह का बंगला है. बैठक में पीएम मोदी, अमित शाह और अजित डोभाल के अलावा 70 डीजी, पैरामिलिट्री चीफ समेत 500 अफसर जुटेंगे. इसके लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं और NSG की तैनाती की जा रही है. इसके अलावा 400 गाड़ियां तैयार की गई है. बैठक में किस रणनीति पर होगी चर्चा? डीजी कॉन्फ्रेंस (DG Conference) के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह मुख्य रूप से नक्सलवाद, आतंकवाद, साइबर क्राइम और पुलिस सुधार पर चर्चा करेंगे. नक्सलियों के खात्मे के लिए मार्च 2026 की डेडलाइन तय है, जिसमें अब सिर्फ पांच महीने का समय बचा है. ऐसे में यह बैठक नक्सलवाद के खात्मे को लेकर बेहद अहम मानी जा रही है. डीजी कॉन्फ्रेंस के दौरान देशभर के पुलिस महानिदेशकों और केंद्रीय बलों के प्रमुख अधिकारियों की मौजूदगी में नक्सलवाद खत्म करने पर चर्चा होगी और इसको लेकर रणनीति तय की जाएगी. इसके अलावा आधुनिक पुलिसिंग के तरीकों, तकनीक का उपयोग करके निगरानी (जैसे तकनीकी निगरानी), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों और राज्यों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने (इंटेलिजेंस शेयरिंग) जैसे महत्वपूर्ण आंतरिक सुरक्षा के विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी और योजनाएं बनाई जाएंगी. आईआईएम भवन में होग कॉन्फ्रेस! डीजी कॉन्फ्रेंस सम्मेलन का आयोजन नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) भवन में होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्रमोदी के रात्रि विश्राम के लिए बंगला M-01 के चुनाव के पीछे खास वजह हो सकती है. इस बंगले से आईआईएम और नया विधानसभा भवन बेहद नजदीक हैं, जिससे आवागमन में सहूलियत होगी. 

महाकाल लोक जाने का रास्ता होगा आसान, 710 मीटर नया कॉरिडोर तैयार, जून 2027 तक प्रोजेक्ट पूरा

उज्जैन   मध्यप्रदेश सरकार उज्जैन को नया रूप देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। अब क्षिप्रा नदी के घाटों (Kshipra Ghat) पर होने वाली आरती को बनारस और हरिद्वार की गंगा आरती (Shipra is a tributary of Ganga) की तरह भव्य और आधुनिक रूप में आयोजित किया जाएगा। सरकार चाहती है कि आने वाले सिंहस्थ महाकुंभ (2028) तक उज्जैन में ऐसी आरती शुरू हो जाए, जिसे देखने वाले श्रद्धालु भावविभोर हो उठें। इस दिशा में राज्य सरकार ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है। इसका उद्देश्य ऐसी पेशेवर एजेंसियों का चयन करना है, जो टेक्निक, म्यूजिक, लाइट और परम्परा को ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट को अंजाम दे सकें। तकनीक से बनेगी आरती आकर्षक उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने बताया कि इस पहल का मकसद क्षिप्रा आरती (Kshipra River) को इतना भव्य और यादगार बनाना है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु यहां का अनुभव जीवनभर याद रखें। महाकाल लोक जाने के लिए 710 मीटर लंबा और 22.18 मीटर चौड़ा नया रास्ता बन रहा है। 63 करोड़ की लागत से बनने वाला यह सुगम रास्ता जून 2027 तक तैयार हो जाएगा। रेलवे से भी सहमति मिल गई है। इससे अन्य राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को महाकाल लोक तक पहुंचना आसान होगा। अभी उन्हें पार्किंग से पुल पर चढ़ने के बाद 2100 मीटर लंबी दूरी तय कर महाकाल लोक पहुंचना पड़ रहा है। भीड़ नियंत्रण में रहेगी: इंदौर, देवास से आने वाले यात्री हरिफाटक के पास वाहन पार्क कर सीधे महाकाल लोक पहुंच सकेंगे। महाशिवरात्रि, नागपंचमी, नववर्ष पर भीड़ नियंत्रण में की जा सकेगी। 2. यातायात का दबाव कम होगा: पैदल यात्रियों के लिए अलग मार्ग बनने से हरिफाटक ब्रिज, महाकाल घाटी, नीलगंगा, इंदौर रोड, जयसिंहपुरा में यातायात का दबाव कम होगा। उन्होंने कहा, हमने ऐसी एजेंसियों से प्रस्ताव मांगे हैं, जो तकनीक का इस्तेमाल करते हुए आरती को और आकर्षक बना सकें। इसका मकसद यह है कि जब श्रद्धालु घाट पर आएं तो उन्हें सिर्फ आरती नहीं, बल्कि भावनात्मक अनुभव हो।  गंगा आरती क्यों है प्रेरणा का स्रोत हरिद्वार और बनारस की महागंगा आरती में हर शाम सैकड़ों पुजारी, घंटों और दीपों के साथ गंगा आरती करते हैं। वाराणसी की दशाश्वमेध घाट की गंगा आरती अपने आप में खास होती है। यहां दर्जनों पुजारी एक साथ समान वेशभूषा में दीप थाल लेकर मंत्रोच्चार करते हैं। हर पुजारी एक लय में जब आरती करते हैं तो भव्य नजारा होता है। शंखनाद, घंटों की गूंज और वेद मंत्रों की ध्वनि श्रद्धालुओं के मन में गहराई तक उतर जाती है।अब मध्यप्रदेश की डॉ.मोहन यादव सरकार चाहती है कि उज्जैन की क्षिप्रा आरती (shipra river in ujjain) भी इसी तरह का भव्य अनुभव दे।  तकनीक से सजेगी क्षिप्रा आरती एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट में कहा गया है कि आरती में परंपरा और आधुनिक तकनीक का संगम होना चाहिए। सरकार ने एजेंसियों से ऐसे सुझाव मांगे हैं।जिनमें AI आधारित प्रोजेक्शन मैपिंग, सिंक्न्रोनाइज्ड लाइटिंग, साउंड और विजुअल स्टोरीटेलिंग, होलोग्राम और AR/VR अनुभव और आध्यात्मिक संगीत संयोजन जैसी तकनीकें शामिल होंगी। इन तकनीकों की मदद से घाटों पर आरती का अनुभव केवल धार्मिक न रहकर दिव्य दृश्यात्मक आयोजन बन जाएगा। श्रद्धालु दीपों की रोशनी के साथ मां क्षिप्रा की कथा, उज्जैन के इतिहास और महाकाल की महिमा को लाइट एण्ड साउंड श्खो की मदद से अनुभव कर सकेंगे।  कई घाटों पर एक साथ आरती की तैयारी फिलहाल क्षिप्रा नदी की आरती केवल रामघाट तक सीमित है और ज्यादातर निजी समूहों द्वारा कराई जाती है।अब सरकार की योजना है कि कई घाटों को जोड़ा जाए और एक साथ सामूहिक आरती का आयोजन हो। इसका प्रारूप बनारस के मल्टी-घाट मॉडल जैसा होगा। जहां एक ही समय पर अलग-अलग घाटों पर आरती होती है, लेकिन उनकी ध्वनि और लय एक होती है।

अमेरिका का नया हथियार: लॉन्च होते ही मिसाइल को कर देगा कबाड़, S-400 और आयरन डोम बेकार

नई दिल्ली  अमेरिकी रक्षा और एयरोस्पेस कंपनी लॉकहीड मार्टिन (Lockheed Martin) ने ऐलान किया है कि वह 2028 तक अंतरिक्ष में अपने ‘स्पेस-बेस्ड मिसाइल इंटरसेप्टर’ का असली परीक्षण करेगा. यह वही हथियार है जो Golden Dome प्रोजेक्ट का सबसे खतरनाक और निर्णायक हिस्सा माना जा रहा है. एक ऐसा सिस्टम जो अंतरिक्ष से ही दुश्मन की मिसाइलों को लॉन्च के कुछ सेकंड में तबाह कर देगा. यह प्रोजेक्ट डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान शुरू हुआ था, जिसका लक्ष्य है अमेरिका को अभेद्य मिसाइल डिफेंस कवच देना – धरती से लेकर अंतरिक्ष तक. लॉकहीड मार्टिन के सीईओ जिम टैकलेट ने अपने एक बयान में कहा, “हम 2028 तक वास्तविक ऑन-ऑर्बिट इंटरसेप्टर टेस्ट करने जा रहे हैं – यह कोई लैब एक्सपेरिमेंट नहीं, बल्कि असली युद्ध-तैयार सिस्टम होगा.” उन्होंने बताया कि कंपनी अब पूरी तरह ऑपरेशनल प्रोटोटाइप्स बना रही है – ऐसी मशीनें जो “टेस्ट स्टैंड पर नहीं, बल्कि अंतरिक्ष में उड़ेंगी, मिसाइल को हिट करेंगी और उत्पादन के लिए तैयार होंगी.” अगर लॉकहीड मार्टिन का यह प्रोजेक्टकामयाब हो गया, तो फिर एस-400 और आयरन डोम जैसे एयर डिफेंस की जरूरत ही नहीं रह जाएगी. ‘द वॉर ज़ोन’ में प्रकाशित खबर के मुताबिक, लॉकहीड मार्टिन ने अपने वर्जीनिया स्थित Center for Innovation में Golden Dome की कमांड एंड कंट्रोल (C2) प्रणाली का प्रोटोटाइप वातावरण तैयार किया है. यह ओपन आर्किटेक्चर सिस्टम समुद्र से लेकर अंतरिक्ष तक की रक्षा क्षमताओं को एकजुट कर रहा है. कंपनी ने बताया कि इस मिशन में कई इंडस्ट्री पार्टनर्स भी जुड़ चुके हैं ताकि अमेरिका को हर मोर्चे पर ‘सर्वश्रेष्ठ टेक्नोलॉजी बढ़त’ मिले. हालांकि, पेंटागन पूरी परियोजना पर चुप्पी साधे हुए है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार Golden Dome ऐसा ऑल-डोमेन डिफेंस सिस्टम बनेगा जो आने वाले दशकों तक अमेरिका की अंतरिक्षीय सैन्य ताकत का केंद्र होगा. लॉकहीड मार्टिन का यह मिशन सिर्फ एक परीक्षण नहीं – बल्कि यह संकेत है कि स्पेस अब जंग का नया मैदान बन चुका है. 2028 में जब Golden Dome का इंटरसेप्टर अंतरिक्ष में सक्रिय होगा, तो पूरी दुनिया उसकी रेंज में होगी. अब तक जो जानकारी सार्वजनिक की गई है, उसके अनुसार पेंटागन और व्हाइट हाउस दोनों ने साफ़ कर दिया है कि Golden Dome प्रोजेक्ट का केंद्रबिंदु अंतरिक्ष में तैनात मिसाइल इंटरसेप्टर होंगे. इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि दुश्मन की मिसाइल को अमेरिकी सीमाओं से बहुत दूर ही नष्ट किया जाए, ताकि किसी भी खतरे को देश के भूभाग के करीब आने से पहले ही खत्म किया जा सके. अमेरिकी रक्षा रणनीतिकारों के मुताबिक, बैलिस्टिक मिसाइलें और हाइपरसोनिक हथियार – जिनमें रॉकेट बूस्टर का इस्तेमाल होता है – सबसे ज्यादा कमजोर अपने शुरुआती ‘बूस्ट फेज़’ में होते हैं, यानी लॉन्च के ठीक बाद. अमेरिकी स्पेस फोर्स के प्रमुख जनरल चांस साल्ट्ज़मैन ने मार्च में Defense One को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, “हम सिर्फ स्पेस-बेस्ड इंटरसेप्टर नहीं चाहते – हम चाहते हैं कि वे मिसाइल को उसी ‘बूस्ट फेज़’ में मार गिराएं. हम चाहते हैं कि ये हमला हमारे देश से जितना दूर हो सके, वहीं असर दिखाए. इसलिए उन्हें बेहद तेज़ और सटीक होना होगा.” हालांकि, Golden Dome योजना केवल बूस्ट फेज़ में इंटरसेप्शन तक सीमित नहीं है. यह सिस्टम मिड-कोर्स फेज़ (जब मिसाइल पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर अंतरिक्ष में होती है) में भी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलों (ICBM) जैसी लंबी दूरी की मिसाइलों को ट्रैक और ध्वस्त करने में सक्षम रहेगा. अमेरिका अब ऐसा स्पेस डिफेंस नेटवर्क बना रहा है जो दुश्मन की मिसाइल को उसके लॉन्च होते ही आसमान में खत्म कर दे – ताकि जंग की आग कभी अमेरिकी ज़मीन तक न पहुंच सके.

सालभर रुका रहा पश्चिमी रिंग रोड काम, इंदौर में जनवरी से पहले प्रगति नहीं संभव

इंदौर  किसानों का विरोध और मुआवजा बांटने में देरी ने पश्चिमी रिंग रोड प्रोजेक्ट को सालभर पीछे कर दिया है। जनवरी 2025 में शुरू होने वाला काम नवंबर तक अटका हुआ है। अगले दो से तीन महीने तक भी सड़क निर्माण शुरू होने के आसार नहीं हैं, क्योंकि अभी तक महज 55 प्रतिशत किसानों को ही मुआवजे की राशि दी गई है। बावजूद इसके कई किसान नाराज हैं, क्योंकि इन्हें बाजार मूल्य की तुलना में पैसा कम मिला है। इस लेटलतीफी ने प्रोजेक्ट को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। इंदौर वन मंडल की 40 और धार की आठ से 10 हेक्टेयर जमीन शामिल शासन ने सड़क को सिंहस्थ 2028 को ध्यान में रखते हुए बनाने की योजना तैयार की थी। 64 किलोमीटर लंबी सड़क बनाई जाएगी। प्रोजेक्ट के लिए कुल 638 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की गई है, जिसमें से लगभग 50 हेक्टेयर वनभूमि है। इसमें इंदौर वन मंडल की 40 हेक्टेयर और धार की आठ से 10 हेक्टेयर जमीन शामिल है। बाकी 580 हेक्टेयर भूमि में 472 निजी व 98 हेक्टेयर सरकारी जमीन है। एनएचएआई 64 किमी लंबी पश्चिमी रिंग रोड को दो हिस्सों में बनाएगा। यह महू से हातोद और हातोद से क्षिप्रा के बीच बनाएंगे। डेढ़ साल पहले एजेंसी तय सड़क बनाने के लिए निर्माण एजेंसी डेढ़ साल पहले तय हो चुकी है। अहमदाबाद की कंपनी को ठेका मिला है। जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से एजेंसी को काम करने में दिक्कतें आ रही हैं। नियमानुसार प्रोजेक्ट में 80 प्रतिशत भूमि अधिग्रहित कर प्रशासन से क्लियरनेंस मिलने के बाद ही काम शुरू हो पाएगा। वैसे अभी तक एक हजार करोड़ में से 500 से 550 करोड़ का मुआवजा बांटा गया है। शेष किसानों को राशि दिए जाने में दो से तीन महीने लग सकते हैं। इन्हें देना है मुआवजा     इंदौर जिले की तीन तहसील सांवेर, देपालपुर और हातोद के 26 गांवों से यह सड़क निकलेगी। यहां 998 किसानों को कुल 795 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में दिए जाने हैं।     धार जिले की पीथमपुर तहसील के किसानों को लगभग 200 करोड़ रुपये का मुआवजा मिलेगा।     सांवेर तहसील के नौ गांवों के 512 किसानों को 473 करोड़ रुपये मिलेंगे।     देपालपुर तहसील के पांच गांवों के 153 किसानों को 140 करोड़ रुपये का भुगतान होगा।     हातोद तहसील के 12 गांवों के 333 किसानों को 182 करोड़ रुपये दिए जाने हैं। बांट रहे मुआवजे की राशि     अगले साल यानी जनवरी से पश्चिमी रिंग रोड का काम शुरू किया जाएगा। इन दिनों किसानों को मुआवजा दिए जाने की प्रक्रिया चल रही है। नवंबर तक 55 फीसद लोगों को राशि बांटी गई है। अगले दो महीनों में प्रोजेक्ट के लिए शेष जमीन भी अधिग्रहित की जाएगी। वहीं वन विभाग की जमीन को लेकर पर्यावरण अनुमति आना बाकी है। – प्रवीण यादव, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई  

महाकाल मंदिर के फूलों से स्टार्टअप की शुरुआत, छात्रों ने बनाई कमाई की नई राह

उज्जैन महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल को अर्पित होने वाले फूलों से कमाई का आइडिया मध्य प्रदेश, कर्नाटक और बिहार के युवा छात्र एवं छात्राओं ने एकसाथ मिलकर ढूंढ निकाला. उसे स्टार्टअप के तौर पर शुरू कर छात्र लाखों की कमाई करने लगे हैं. छात्र एवं छात्राएं वेस्टेज फूलों को रीसायकल कर इको फ्रेंडली हार्ड प्रोडक्ट बना रहे हैं और मार्केट में बेच कर मोटी कमाई कर रहे हैं. खास बात यह है छात्रों के इस स्टार्टअप से कई कम्पनियों ने छात्रों को ऑफर देना भी शुरू कर दिए हैं. अभी छात्रों ने वेस्टेज फूलों से कटोरी, प्लेट्स, मोमेंटो सहित 16 तरह के अलग-अलग हार्ड प्रोडक्ट बनाएं हैं. ये सभी छात्र उज्जैन में रहकर सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय से पढ़ाई कर रहे हैं. आइए इस रिपोर्ट में आपको छात्रों से भी मिलवाते हैं और उनके कामों को भी दिखाते हैं. कौन हैं ये पांच छात्र, जिन्होंने शुरू किया स्टार्टअप सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय पहुंचकर  छात्रों के बारे में पता किया तो स्टार्टअप टीम में खरगोन निवासी मृत्युंजय बड़ोले (उम्र 21 वर्ष) सब्जेक्ट बीएससी ऑनर्स बायो टेक्नोलॉजी तीसरा सेमेस्टर, दूसरी बालाघाट निवासी योजना राहंगडाले (उम्र 20 वर्ष ) जो बीएससी बॉटनी तीसरा सेमेस्टर की छात्रा हैं. तीसरे भभुआ बिहार निवासी यूगांक सिंह (उम्र 22 वर्ष) बीएससी ऑनर्स बायो टेक्नोलॉजी से चौथे सेमेस्टर के छात्र हैं. चौथे उज्जैन के तराना तहसील के निवासी तन्मय जैन (उम्र 27 वर्ष) बायो टेक्नोलॉजी से पीएचडी कर रहे हैं. पांचवी कोलकाता निवासी आहना चक्रवर्ती (उम्र 20 वर्ष) हैं जो बीएससी फोरेंसिक तीसरे सेमेस्टर की छात्रा हैं. फूलों को सुखाकर बनाते हैं खास प्रोडक्ट  छात्र एवं छात्राओं से चर्चा की. जिसमें मृत्युंजय बड़ोले ने बताया, ''हमने अभी तक 16 तरह के प्रोडक्ट बनाये हैं, जिसमें कटोरी, प्लेट्स शील्ड्स (मोमेंटो), लोगो, राखी, टेंपल, कॉस्टर्स, श्री चरण व अन्य आइटम शामिल हैं, जिसकी क्वालिटी अपने आप में बेहद खास है. 13 साल तक की वारंटी हम देते हैं की इनका कुछ नहीं बिगड़ेगा. कोई भी प्रोडक्ट टूटने पर हम वापस ले लेते हैं यानी उसे भी हम रिसायकल कर देते हैं. बस ग्राहक को तय कीमत चुकानी होगी.'' कैसे आया आईडिया? छात्रा योजना राहंगडाले ने कहा, ''हम जब उज्जैन आकर पढ़ाई कर रहे थे तब मंदिरों में दर्शन को भी गए तो वहां बड़ी मात्रा में फूलों को कचरा गाड़ी में जाते देखा, क्षिप्रा नदी दर्शन को गए तो वहां भी नदी में फूलों को डालते हुए व पड़ा हुआ देखा. तो विचार किया कि क्यों न भक्तों के भाव को सहेज कर रखा जाए. बस हम पांचों ने 2021 से रिसर्च करना शुरू कर दिया और आज रिजल्ट आपके सामने हैं.'' स्टार्टअप को नाम दिया 'प्रयास भावनाओं को सहेजने का' छात्रों ने बताया हमने 2021 से रिसर्च किया और 2024 तक काम किया. 2024 में हमने हमारे प्रोडक्ट को एग्जीबिशन में लांच किया. स्टार्टअप को नाम दिया निर्मल निर्माण "प्रयास भावनाओं को सहेजने का", ये पूरा काम हमने सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलगुरु अर्पण भारद्वाज सर के निर्देशन में किया. 22 दिसंबर को हमने प्रोडक्ट्स को YOUNG ENTREPRENEURSHIP FORUM में लॉन्च किया. पहले दिन से इन्क्वायरी मिलने लगी. ऑटोमोबाइल सेक्टर से गाड़ियों के डैशबोर्ड के लिए ऑफर मिले, फंडिंग देने के लिए व्यपारियों ने हमसे संपर्क किया. गुजरात की एक कम्पनी से हमारा टायअप भी हो गया है. हम साथ में काम कर रहे हैं अब.'' स्टार्टअप के लिए मिल चुके हैं अवार्ड स्टार्टअप के लिए टीम को 22 दिसंबर 2024 को यंग एंटरप्रेन्योरशिप फोरम द्वारा डिस्ट्रिक्ट लेवल पर फर्स्ट प्राइज दिया गया था. जिसमें उन्हें 51000 रुपए का प्राइज मिला था. वहीं 12 जनवरी 2025 में भोपाल में पीपुल्स यूनिवर्सिटी में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी ने स्टेट लेवल पर फर्स्ट प्राइज दिया था. इसमें 11000 रुपए की राशि दी गई है. शुरुआत 15 से 20% प्रॉफिट के साथ की छात्राओं ने बताया, ''हमने 2024 से जब प्रोडक्ट बेचना शुरू किए तो अभी शुरुआत में ही साल भर में 2 लाख रेवेन्यू जेनेरेट किया है. 60 रुपए से 2200 रुपए तक के प्रोडक्ट हमने बनाए हैं और अभी 15 से 20% ही फायदा ले रहे हैं. हमारा ध्यान अभी खुद का प्रोडक्शन और प्रोडक्ट को मार्केट में ऑनलाइन बेचने पर है. अभी जो रेवेन्यू हमें मिला ये उज्जैन लोकल से ही मिला है. छात्रों ने बताया रेस्पॉन्स अच्छा मिल रहा है, देश दुनिया के मंदिरों से संपर्क कर आगे बढ़ेंगे.'' कैसे और कहां बना रहे ये प्रोडक्ट जानिए छात्र छात्राओं ने प्रोडक्ट की पूरी प्रोसेस बताई. उन्होंने कहा, ''शुरुआत हमने 1000 स्क्वायर फिट एरिया से की है. जिला प्रशासन के सहयोग से फूल मंदिरों से लेना शुरू किए. अभी सिर्फ महाकाल मंदिर से सप्ताह भर में 100 kg फूल लेते हैं, जिसमें सिर्फ ट्रांसपोर्ट खर्च आ रहा है. फूल लाकर 2 से 3 दिन के लिए सुखने को एक वेंटिलेशन रूम में रखते हैं पंखे या खुली हवा में. उसमें से प्लास्टिक और प्रसाद हटाते हैं, मटेरियल हटा कर फूल को धोते हैं. फिर धूप में सूखने के लिए 3 से 7 दिन तक रखते हैं. उसका पाउडर बनाते हैं, बोरे में कूट कर छानते हैं.'' 100 kg फूल में 5kg पाउडर निकलता है. फिर बाइनडर बनाते हैं (नीम बबूल के गोंद को तय टेम्परेचर में गर्म करके बाइनडर बनाते हैं). पाउडर Mix करके साँचा जो कि सिलिकॉन रबर का होता है उसमें डालते हैं, 12 मिनट में प्रोडक्ट बन जाता है. फिर साबुन के पानी में धुलने के लिए रखते हैं, फिनिशिंग और कलर करके तैयार करते हैं. छात्र छात्राओं का दावा है अभी तो जितने भी लोग इस कॉन्सेप्ट पर काम कर रहे हैं वो सिर्फ हार्ड मटेरियल को डीग्रेड (जैसे अगरबत्ती बनाना व अन्य) कर रहे हैं और हम हार्ड प्रोडक्ट बनाकर प्रिजर्वेशन करने का काम कर रहे हैं.

MP में 972 ई-बसेस का वितरण, 8 नगर निगमों में जल्द शुरू होगी इलेक्ट्रिक बस सेवा

भोपाल   मध्यप्रदेश के शहरी परिवहन को और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा निर्णय लिया है। केंद्रीय शहरी कार्य मंत्रालय ने प्रदेश के आठ नगर निगमों को कुल 972 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की मंजूरी प्रदान की है। इन बसों के संचालन से डीजल और पेट्रोल वाहनों से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।  केंद्र से स्वीकृत ई-बसें भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, सागर, देवास और सतना नगर निगमों को मिलेंगी। इनमें भोपाल को 195, इंदौर को 270, ग्वालियर को 100, जबलपुर को 200, उज्जैन को 100, सागर को 32, देवास को 55 और सतना को 20 बसें आवंटित की गई हैं। राज्य सरकार ने सभी नगर निगमों को बस डिपो और चार्जिंग स्टेशन से संबंधित आवश्यक ढांचा निर्माण कार्य शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए हैं। प्रत्येक नगर निगम में चार्जिंग पॉइंट और परिचालन सुविधाओं का कार्य तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। केंद्र और राज्य दोनों खर्च वहन करेंगे  ई-बस परियोजना पर होने वाला खर्च केंद्र और राज्य सरकार संयुक्त रूप से वहन करेंगे। बुनियादी ढांचा निर्माण के लिए केंद्र सरकार 60 प्रतिशत और राज्य सरकार 40 प्रतिशत राशि प्रदान करेगी। वहीं चार्जिंग पॉइंट्स के निर्माण पर केंद्र सरकार 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता देगी। बसों का संचालन जल्द शुरू करने की तैयारी की जा रही है। यह सेवा आम नागरिकों को सस्ती, सुरक्षित और ईको फ्रेंडली परिवहन सुविधा उपलब्ध कराएगी। 

अहमद अल-शारा का ऐतिहासिक अमेरिका दौरा: ट्रंप की रणनीतियों में बदलाव की संभावना

वॉशिंगटन सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा अमेरिका पहुंच गए हैं और उनकी आज डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात होगी। यह मीटिंग और दौरा बेहद अहम है और इसका असर अमेरिका से हजारों किलोमीटर दूर मिडल ईस्ट तक देखने को मिलेगा। शारा को  ही आतंकी ब्लैक लिस्ट से अमेरिका ने हटाया था और वह  ही वॉशिंगटन पहुंच गए। कई अधिकारियों से मीटिंगों का दौर चला और अब अंत में ट्रंप से वह मिलने वाले हैं। यह मीटिंग बेहद खास है क्योंकि 1946 के बाद यानी करीब 80 साल बाद यह पहला मौका है, जब सीरिया के किसी राष्ट्रपति ने अमेरिका का दौरा किया है। बीते कुछ महीनों में घटनाक्रम तेजी से बदला है। अमेरिका ने सीरिया पर लगीं सारी पाबंदियां हटा ली हैं। इस कदम पर सीरिया की सड़कों पर जश्न देखा गया था। इसके अलावा शारा की भी डोनाल्ड ट्रंप ने काफी तारीफ की थी। माना जा रहा है कि सीरिया को अचानक इतनी तवज्जो देने के पीछे डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की कुछ योजना है। इनमें से एक यह है कि सीरिया को इजरायल के साथ अच्छे रिश्ते रखने के लिए प्रेरित किया जाए। इसके अलावा सीरिया को भी अमेरिका अपने लिए मिडल ईस्ट में एक और चौकी के तौर पर इस्तेमाल करना चाहता है। ऐसा ही इजरायल और अमेरिका के रिश्तों के लिए भी कहा जाता है। रियाद में शारा और डोनाल्ड ट्रंप की मई में मुलाकात हुई थी। सीरिया में अमेरिकी दूत टॉम बैरक ने यह उम्मीद भी जताई है कि शारा और ट्रंप के बीच आतंकवाद के खिलाफ जंग को लेकर भी एक करार होगा। इसके तहत अमेरिका दमिश्क में एक मिलिट्री बेस बनाएगा। माना जा रहा है कि यहां से अमेरिका को इस क्षेत्र में अपनी पकड़ को और मजबूत करने में मदद मिलेगी। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट का कहना है कि अहमद अल शारा सरकार से रिश्ते बेहतर हुए हैं। उनका कहना है कि सीरिया में 50 साल के असद शासन की समाप्ति के बाद हालात सुधरे हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका की ओर से सीरिया से पाबंदियां हटने से इलाके में स्थिरता पैदा होगी। UN में भी दशकों बाद सीरिया के नेता ने दिया था भाषण इस तरह शारा की एक विजिट से ट्रंप प्रशासन कई चीजें साधने वाला है। सीरिया की होम मिनिस्ट्री का कहना है कि उसने इस्लामिक स्टेट पर नियंत्रण के लिए 61 रेड मारी हैं और 71 लोगों को अरेस्ट किया है। स्पष्ट है कि शारा की एक विजिट से डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को कई फायदे होने वाले हैं। इससे पहले शारा सितंबर में अमेरिका गए थे और संयुक्त राष्ट्र महासभा में हिस्सा लिया था। दशकों बाद ऐसा हुआ था, जब न्यूयॉर्क स्थित यूएन महासभा को सीरिया के नेता ने संबोधित किया। गुरुवार को ही अमेरिका ने सुरक्षा परिषद में भी प्रस्ताव रखा, जिसमें सीरिया से पाबंदियां हटाने की बात शामिल थी। फिलहाल पूरी दुनिया की ही नजर है कि अचानक सीरिया पर अमेरिका की मेहरबानी क्यों है और इसके क्या नतीजे भविष्य में देखने को मिलेंगे।