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छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव-2025 : उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने 37 विभूतियों और 4 संस्थाओं को अलंकरण से किया सम्मानित

रायपुर : छत्तीसगढ रजत महोत्सव-2025 : उप राष्ट्रपति  सीपी राधाकृष्णन ने छत्तीसगढ़ के 34 अलंकरण से 37 विभूतियों एवं 4 संस्थाओं को किया सम्मानित रायपुर उप राष्ट्रपति  सीपी राधाकृष्णन ने नवा रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्योत्सव के राज्य अलंकरण समारोह में छत्तीसगढ़ के 34 अलंकरण से विभिन्न क्षेत्रों से उत्कृष्ट योगदान देने वाले 37 विभूतियों एवं 4 संस्थाओं को सम्मानित किया। इस अवसर पर राज्यपाल  रमेन डेका ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय अलंकरण समारोह के अति विशिष्ट अतिथि तथा विशिष्टि अतिथि के रूप में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, मंत्रीगण, सांसद एवं विधायकगण उपस्थित थे। राज्य अलंकरण समारोह में उप राष्ट्रपति  राधाकृष्णन एवं मुख्यमंत्री  साय ने शहीद वीरनारायण सिंह पुरस्कार  हिरेश सिन्हा जिला कांकेर को प्रदान किया। यति यतनलाल सम्मान भारतीय कुष्ठ निवारक संघ, कात्रे नगर सोठी जिला जांजगीर-चांपा, गुण्डाधूर सम्मान सु ज्ञानेश्वरी यादव राजनांदगांव, मिनीमाता सम्मान मती ललेश्वरी साहू दुर्ग, गुरूघासीदास सम्मान संयुक्त रूप से  भुवनदास जांगड़े बेमेतरा एवं  शशि गायकवाड़ बलौदाबाजार-भाटापारा,  ठाकुर प्यारेलाल सिंह पुरस्कार प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति डोमा जिला धमतरी, हबीब तनवीर सम्मान डॉ. कुंज बिहारी शर्मा जिला रायपुर, महाराजा प्रवीरचंद भंजदेव सम्मान सु चांदनी साहू जिला बिलासपुर को प्रदान किया गया।  इसी प्रकार पंडित रविशंकर शुक्ल सम्मान  राजेश अग्रवाल जिला रायपुर, पंडित सुंदरलाल शर्मा सम्मान डॉ. चिंतरंजन कर जिला रायपुर, चक्रधर सम्मान पंडित कीर्ति माधव लाल व्यास जिला दुर्ग, दाऊ मंदराजी सम्मान  रिखी क्षत्रिय जिला दुर्ग, डॉ. खूबचंद बघेल कृषक रत्न पुरस्कार संयुक्त रूप से  थनेन्द्र कुमार साहू जिला धमतरी एवं  वामन कुमार टिकरिहा जिला बलौदाबाजार, महाराजा अग्रसेन सम्मान  राजेन्द्र अग्रवाल राजू जिला बिलासपुर, चन्दूलाल चन्द्राकर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार प्रिंट मीडिया हिन्दी डॉ. संदीप कुमार तिवारी रायपुर एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हिन्दी का पुरस्कार संयुक्त रूप से डॉ. सोमेश कुमार पटेल एवं  अभिषेक शुक्ला रायपुर, मधुकर खेर स्मृति पत्रकारिता पुरस्कार प्रिंट मीडिया अंग्रेजी सु भावना पाण्डेय जिला दुर्ग, दानवीर भामाशाह सम्मान  नीरज कुमार बाजपेयी जिला राजनांदगांव, धन्वन्तरि सम्मान डॉ. अजय कृष्ण कुलश्रेष्ठ, मती बिलासादेवी केंवट मत्स्य विकास पुरस्कार  सुखदेव दास जिला रायपुर को प्रदान किया गया। इसी तरह डॉ. भंवरसिंह पोर्ते आदिवासी सेवा सम्मान जंगो रायतार विद्या केतुल शिक्षण संस्था ग्राम दमकसा जिला कांकेर, रामानुज प्रताप सिंहदेव स्मृति श्रम यशस्वी पुरस्कार संयुक्त रूप से  मिथलेश कुमार आदिल एवं अग्रसर टीम जिला दुर्ग तथा एनटीपीसी लिमि. लारा सुपर थर्मल पावर प्रोजेक्ट पुसौर जिला रायगढ़ , पंडित लखनलाल मिश्र सम्मान  योगेश कुमार साहू जिला कांकेर, छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान  मनीष तिवारी जिला रायपुर, देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार  रोहित कुमार कोसरिया जिला महासमुंद, किशोर साहू सम्मान  सुनील सोनी जिला रायपुर, लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान  राकेश तिवारी जिला रायपुर, लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार डॉ. विनोद कुमार वर्मा जिला बिलासपुर, किशोर साहू राष्ट्रीय अलंकरण  अनुराग बसु मुम्बई को प्रदान किया गया।   बैरिस्टर ठाकुर छेदीलाल सम्मान संयुक्त रूप से  खेमचंद जैन राजनांदगांव, डॉ. सुरेश मणि त्रिपाठी, डॉ. भूपेन्द्र करवंदे एवं  भरतलाल सोनी रायपुर को, वीरांगन अवंतिबाई लोधी स्मृति पुरस्कार मती प्रेमशीला बघेल महासमुंद को, माता बहादुर कलारिन सम्मान मती शिल्पा पाण्डेय सृष्टि जिला सरगुजा को, पंडित माधव राव सप्रे राष्ट्रीय रचनात्मकता सम्मान  अवधेश कुमार नई दिल्ली तथा संस्कृत भाषा सम्मान डॉ. दादू भाई त्रिपाठी जिला रायपुर को प्रदान किया गया। 

बिहार विधानसभा चुनाव: नीतीश, लालू, राबड़ी और तेजस्वी ने डाला वोट, मोकामा में महिलाओं की लंबी कतारें

पटना   बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में आज 18 जिलों की 121 सीटों पर वोटिंग हो रही है. इस सियासी जंग में कुछ खास सीटें हैं- तेजस्वी यादव की राघोपुर सीट, तेज प्रताप यादव की महुआ, और तारापुर, जहां से डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी चुनाव लड़ रहे हैं.  फोकस में रहने वाली दूसरी सीटें हैं- अलीनगर, जहां से सिंगर मैथिली ठाकुर बीजेपी टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं; डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा की लखीसराय; JDU के उम्मीदवार बाहुबली अनंत सिंह की मोकामा सीट, जिन्हें अपने विरोधी दुलार चंद यादव की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया है और RJD के उम्मीदवार दिवंगत मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा शहाब की रघुनाथपुर सीट है. इसके अलावा, 122 सीटों पर वोटिंग दूसरे चरण में 11 नवंबर को होगी. चुनाव नतीजे 14 नवंबर को घोषित किए जाएंगे. चुनाव आयोग ने वोटिंग को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं और बूथों पर निगरानी के लिए कैमरे भी लगाए हैं. आयोग लाइव वेबकास्टिंग के जरिए सभी बूथों की निगरानी करेगा. चुनाव आयोग के मुताबिक, पहले चरण में तीन करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे, जिनमें 1.98 करोड़ पुरुष, 1.76 करोड़ महिलाएं और थर्ड जेंडर शामिल हैं. इस चरण में कई बड़े दिग्गजों की किस्मत का फैसला होगा.  मतदान केवल हमारा अधिकार ही नहीं, दायित्व भी: नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, "लोकतंत्र में मतदान केवल हमारा अधिकार ही नहीं, दायित्व भी है. आज बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण का मतदान हो रहा है. सभी मतदाताओं से आग्रह है कि अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करें. मतदान करें और दूसरों को भी प्रेरित करें. पहले मतदान, फिर जलपान!"  वैशाली में भैंस पर बैठकर वोट डालने पहुंचा शख्स बिहार के वैशाली जिले के भगवानपुर प्रखंड में मतदान के दौरान एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला. यहां के निवासी केदार प्रसाद यादव भैंस पर चढ़कर वोट डालने पहुंचे.  बिहार चुनाव पर बोलीं दिल्ली CM – NDA बहुमत से सरकार बनाएगा बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि बिहार की जनता अपने भले-बुरे को अच्छी तरह जानती है. उन्होंने कहा कि पिछले 15 वर्षों में जो विकास बिहार में हुआ है, वह केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में ही संभव हुआ. रेखा गुप्ता ने विश्वास जताया कि इस बार भी एनडीए गठबंधन पूर्ण बहुमत से सरकार बनाएगा और पहले से ज्यादा वोट और सीटें जीतेगा. उन्होंने कहा, “जो खुद को ‘नायक’ समझते हैं, उन्हें समझ लेना चाहिए कि बिहार की जनता के दिलों पर राज करने वाला ही सच्चा ‘जननायक’ है. जिन्होंने जनता का पैसा लूटा, वो ‘खलनायक’ हैं और जेल जाएंगे. जो जनता को गुमराह करने वाले ‘नालायक’ हैं, वे विदेश जाकर छुट्टियां मनाएंगे.” तेज प्रताप यादव की अपील – बिहार की जनता ज़रूर करे मतदान, हर वोट की अहमियत जन शक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष और महुआ विधानसभा सीट से उम्मीदवार तेज प्रताप यादव ने बिहार की जनता से मतदान करने की अपील की है. उन्होंने कहा कि हर वोट की अपनी कीमत होती है और जनता के आशीर्वाद का अपना अलग महत्व है. तेज प्रताप यादव ने कहा, “बिहार की जनता को अपने मताधिकार का उपयोग ज़रूर करना चाहिए. हर एक वोट बहुत अहम है. माता-पिता का आशीर्वाद जैसा महत्वपूर्ण होता है, वैसे ही जनता का आशीर्वाद भी हमारे लिए सबसे बड़ा वरदान है.” 'तवा से रोटी पलटती रहनी चाहिए…', फर्स्ट फेज इलेक्शन के बीच बोले लालू बिहार में पहले चरण के मतदान के बीच सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "तवा से रोटी पलटती रहनी चाहिए नहीं तो जल जाएगी. 20 साल बहुत हुआ! अब युवा सरकार और नए बिहार के लिए तेजस्वी सरकार अति आवश्यक है."  सुबह 9 बजे तक 13.13% वोटिंग, सहरसा सबसे आगे और लखीसराय सबसे धीमा बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले चरण के लिए 6 नवंबर 2025 को मतदान जारी है. राज्य के विभिन्न जिलों में मतदान की शुरुआत उत्साहजनक रही है. सुबह 9:00 बजे तक के आंकड़े के अनुसार, लगभग 13.13% मतदान दर्ज किया गया है. राज्य के जिलों में मतदान का रुझान अलग-अलग दिखाई दिया है. सहरसा जिला 15.27% वोटिंग के साथ सबसे आगे रहा है. वहीं, लखीसराय जिले में मतदान की गति सबसे कम रही, जहाँ केवल 7.00% मतदान दर्ज किया गया है. जिलों में मतदान का हाल राज्य के औसत मतदान 13.13% से ज्यादा वोटिंग दर्ज करने वाले जिलों में बेगूसराय (14.60%), मुजफ्फरपुर (14.38%), वैशाली (14.30%), खगड़िया (14.15%), गोपालगंज (13.97%) और मधेपुरा (13.74%) शामिल हैं. मुंगेर (13.37%), सीवान (13.35%), सारण (13.30%) और बक्सर (13.28%) में भी औसत के करीब मतदान हुआ है. राजधानी पटना में मतदान का प्रतिशत 11.22% रहा, जो राज्य के औसत से कम है. नालंदा में भी 12.45% मतदान दर्ज हुआ है, जबकि दरभंगा का आँकड़ा 12.48% रहा है. 'तेजस्वी हारेंगे, तेज प्रताप बहुत अच्छे आदमी…', बोले केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय  केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने बिहार चुनाव को लेकर कहा, "बीजेपी प्रचंड बहुमत से सरकार बनाएगी. नीतीश कुमार ही हमारे मुख्यमंत्री होंगे. तेजस्वी यादव राघोपुर से हारेंगे. तेज प्रताप बहुत अच्छे आदमी हैं, भगवान के भक्त हैं. हमारी उनको शुभकामनाएं हैं लेकिन तेजस्वी को हम हर कर्दम लेंगे और हमारे सतीश यादव वहां से जीतेंगे." उन्होंने आगे कहा कि हम तेज प्रताप को अच्छा मानते हैं तो भगवान के भक्त हैं लेकिन हम NDA का समर्थन करते हैं, इसलिए महुआ से भी एनडीए जीतेगा.

राम-हनुमान से लेकर क्रिकेट तक! पीएम मोदी की वर्ल्ड चैंपियन बेटियों संग दिलचस्प मुलाकात

नई दिल्ली  भारत की वर्ल्ड चैंपियन महिला क्रिकेट टीम जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पहुंची, तो माहौल भावनाओं, हंसी और प्रेरणा से भर गया. बुधवार शाम 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित प्रधानमंत्री आवास पर हुई यह मुलाकात सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं थी, बल्कि खेल, जज़्बे और जीवन के अनुभवों पर खुली बातचीत थी. पीएम मोदी ने टीम को विश्व कप जीत पर बधाई दी और कहा कि “आपकी जीत हर भारतीय के गर्व की जीत है.” यह वही टीम है जिसने कप्तान हरमनप्रीत कौर की अगुवाई में मुंबई में इतिहास रचते हुए दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराया था. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि खिलाड़ियों ने जिस तरह हार के सिलसिले और सोशल मीडिया ट्रोलिंग के बाद वापसी की, वह हर भारतीय के लिए प्रेरणादायक है. आपने दिखाया कि असली चैंपियन वो होते हैं, जो कभी हार नहीं मानते-PM पीएम मोदी ने कहा कि हर खिलाड़ी ने न सिर्फ मैदान पर खेल दिखाया, बल्कि मानसिक मजबूती की मिसाल भी पेश की. उन्होंने टीम की तारीफ करते हुए कहा, “आपने साबित किया कि असली चैंपियन वो हैं जो गिरकर भी उठते हैं और इतिहास रचते हैं.” प्रधानमंत्री ने इस मुलाकात यह भी उल्लेख किया कि शुरुआती झटकों के बाद खिलाड़ियों को सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का सामना करना पड़ा था, लेकिन उन्होंने अद्भुत मानसिक मजबूती दिखाते हुए शानदार वापसी की और इतिहास रचा.  2017 वर्ल्ड कप के बाद प्रधानमंत्री से हुई पिछली मुलाकात को याद करते हुए कप्तान हरमनप्रीत कौर ने कहा कि तब टीम बिना ट्रॉफी के आई थी, लेकिन इस बार वे सफलता के साथ लौटी हैं और उम्मीद जताई कि आगे भी उन्हें प्रधानमंत्री से मिलने के और मौके मिलेंगे. PM मोदी से महिला क्रिकेट टीम की मुलाकात हरमनप्रीत ने मोदी से पूछा कि वह हर समय चीजे कैसे मैनेज करते हैं. प्रधानमंत्री ने जवाब दिया कि समय के साथ यह उनकी जिंदगी का हिस्सा और आदत बन गई है. वहीं टीम की उपकप्तान स्मृत‍ि मंधाना ने कहा कि पीएम मोदी के शब्दों से मोट‍िवेशन मिला.  हरमनप्रीत की अगुवाई वाली टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए मंगलवार शाम को दिल्ली पहुंची थी. इससे दो दिन पहले ही उसने नवी मुंबई में फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराकर अपना पहला वनडे वर्ल्ड कप जीता था.  दीप्त‍ि शर्मा से किया हनुमान जी का जिक्र  बातचीत के दौरान टूर्नामेंट की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी दीप्ति शर्मा ने प्रधानमंत्री मोदी से कहा कि वह 2017 से ही उनसे मिलने का इंतजार कर रही थीं. उन्होंने याद किया कि उस वक्त टीम से कहा था कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करती रहें.  जब प्रधानमंत्री ने दीप्ति के इंस्टाग्राम बायो में लिखे “जय श्री राम” और उनके हाथ पर बने भगवान हनुमान के टैटू का जि‍क्र किया, तो दीप्ति मुस्कुराईं और बोलीं कि इन्हीं से उन्हें शक्ति मिलती है.  हरलीन के कैच को पीएम मोदी ने याद किया पीएम मोदी ने इस मुलाकात के दौरान कुछ यादगार पलों को भी याद किया, जिनमें 2021 में इंग्लैंड के खिलाफ हरलीन देओल का शानदार कैच भी शामिल था, जिसके बारे में उन्होंने उस समय सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था.  हरमन के लास्ट बॉल कैच को याद किया प्रधानमंत्री ने उस पल का जिक्र किया जब हरमनप्रीत कौर ने विश्व कप फाइनल के बाद गेंद अपनी जेब में रख ली थी. इस पर हरमनप्रीत ने मुस्कुराते हुए कहा कि वह खुशकिस्मत थीं कि वह गेंद उनके पास आ गई.  अमनजोत के जगल‍िंग कैच पर क्या बोले PM मोदी  प्रधानमंत्री मोदी ने फाइनल में अमनजोत कौर के Juggling कैच का भी जिक्र किया.  उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “जब तुम कैच ले रही थीं, तब गेंद को देख रही होंगी, लेकिन कैच लेने के बाद जरूर ट्रॉफी को देख रही होंगी.” क्रांत‍ि गौड़ के भाई को दिया बुलावा क्रांति गौड़ ने प्रधानमंत्री से कहा कि उनके भाई उनके बहुत बड़े प्रशंसक हैं, इस पर मोदी ने उन्हें मिलने के लिए खुला निमंत्रण दिया.   वहीं प्रधानमंत्री ने खिलाड़ियों से ‘फिट इंडिया’ संदेश को देशभर में, खासकर लड़कियों के बीच, फैलाने की अपील की. उन्होंने मोटापे की बढ़ती समस्या पर चिंता जताई और फिटनेस व शारीरिक गतिविधियों के महत्व पर जो दिया.   उन्होंने खिलाड़ियों से यह भी कहा कि वे अपने स्कूलों का दौरा करें और बच्चों को खेल अपनाने के लिए प्रेरित करें.  अब खिलाड़ी अपने-अपने गृह नगर लौटेंगे. हालांकि, शेफाली वर्मा नागालैंड जाएंगी, जहां वह आगामी इंटर-जोनल टी20 टूर्नामेंट में नॉर्थ जोन टीम की कप्तानी करेंगी.  भारत की वर्ल्ड कप जीत देश में महिला क्रिकेट के लिए एक ऐतिहासिक पल साबित हुई, जिसने सालों की मेहनत और अधूरे सपनों को साकार किया. हरमनप्रीत कौर की अगुआई में टीम इंडिया ने मजबूत साउथ अफ्रीका को हराकर ओडीआई खिताब जीतने वाली चौथी टीम बनने का गौरव हासिल किया. 

इंदौर-जबलपुर में गणना पत्रक नहीं पहुंचे, MP में प्रशासन हुआ परेशान

भोपाल मतदाता सूची के जिस विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर पूरे देश में कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दल सवाल उठा रहे हैं, वह मध्य प्रदेश में बिना तैयारी के शुरू करा दिया गया। इंदौर, जबलपुर, सागर, विदिशा, राजगढ़ सहित अधिकतर जिलों में अब तक एसआईआर के फॉर्म (गणना पत्रक) ही नहीं पहुंच पाए हैं। कलेक्टर परेशान हैं क्योंकि आयोग का दबाव है कि बीएलओ को जल्दी फॉर्म बांटे जाएं। इधर, जिन प्रिंटरों (प्रकाशकों) को फॉर्म छापने का काम दिया गया है, वह इसे कर ही नहीं पाएं हैं। जिला निर्वाचन अधिकारी इसका कारण प्रिटिंग न होने और कहीं तकनीकी गलतियों को बता रहे हैं। उधर, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय का कोई भी अधिकारी इस गंभीर मामले पर बोलने के लिए तैयार नहीं हैं और गेंद एक-दूसरे के पाले में डाल रहे हैं। प्रदेश में 5.74 करोड़ मतदाता हैं। इन्हें बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) को घर-घर जाकर गणना पत्रक देना है और भरवाकर वापस लेना है। यह काम चार नवंबर से चार दिसंबर तक पूरा किया जाना है।   नहीं हुआ है छपाई का काम पूरा इसके लिए आवश्यक है कि समय से बीएलओ को गणना पत्रक मिल जाएं लेकिन अभी छपाई ही पूरी नहीं हुई है। इंदौर जिले में 2,625 बूथों में से छह सौ से अधिक बूथों पर ही प्रपत्र मिल सके। कलेक्टर शिवम वर्मा का कहना है कि दो-तीन दिन में प्रपत्र की छपाई पूरी होगी। मंदसौर जिले में दूसरे दिन भी काम प्रभावित हुआ। करीब 100 मतदान केंद्रों पर ही प्रपत्र पहुंचे। उज्जैन में साढ़े तीन लाख फॉर्म बांटे हैं और जब बाकी आ जाएंगे तो उन्हें बांटा जाएगा। खंडवा के उप जिला निर्वाचन अधिकारी दिनेश सावले का कहना है कि प्रपत्र प्रिंट होने की प्रक्रिया चल रही है। जैसे-जैसे उपलब्ध होते जा रहे हैं, बीएलओ तक पहुंचाए जा रहे हैं। धार जिले में कुछ स्थानों पर तकनीकी गलतियों के कारण प्रपत्र पहुंचने में दिक्कत आई है। नीमच जिले में महज 25 प्रतिशत प्रपत्र की आपूर्ति हो सकी। रतलाम जिले में 1,297 में से 150 बूथ के ही प्रपत्र आए हैं। महाकोशल क्षेत्र की बात करें तो डिंडौरी जिले में 6,55 मतदान केंद्रों में केवल 21 बीएलओ के लिए फॉर्म आए हैं। जबलपुर, नरसिंहपुर, कटनी, दमोह में भी यही स्थिति रही। दमोह में 20 लाख फॉर्म की आवश्यकता के विरुद्ध मात्र एक लाख फॉर्म उपलब्ध हैं। कलेक्टर सुधीर कोचर का कहना है कि फॉर्म भोपाल से आने के कारण काफी परेशानी हो रही है। मंडला कलेक्टर सोमेश मिश्रा का कहना है कि अभी पूरे फॉर्म नहीं आएं हैं, जैसे-जैसे आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे बीएलओ को वितरित किए जा रहे हैं। यही स्थिति मध्य क्षेत्र के जिलों की भी है। राजगढ़ जिले के किसी भी बीएलओ को बुधवार शाम तक गणना पत्रक ही नहीं मिल सका। जिसके कारण वे घर-घर भी नहीं पहुंचे। जिला निर्वाचन अधिकारी डा. गिरीश कुमार मिश्रा का कहना है कि फॉर्म राज्य स्तर से प्रिंट हो रहे हैं। आज 250 से ज्यादा बूथों के फॉर्म आए हैं। विदिशा जिले में मंगलवार को 1,347 मतदान केंद्रों से केवल 184 केंद्रों में ही गणना पत्रक पहुंचे थे। कलेक्टर अंशुल गुप्ता ने माना कि गणना पत्रक की कमी के कारण मतदाता गहन पुनरीक्षण के लिए पहले दिन बीएलओ घर-घर नहीं जा पाए। हरदा और सागर में भी गणना पत्रक की कमी बनी हुई है। कांग्रेस का आरोप, बिना तैयारी एसआईआर की प्रक्रिया शुरू की कांग्रेस की एसआईआर के लिए गठित कमेटी के अध्यक्ष पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने आरोप लगाया कि बिना किसी तैयारी के चुनाव आयोग ने एसआईआर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बिना आवश्यक फॉर्म उपलब्ध कराए बीएलओ को दबाव में काम करने को कहा जा रहा है। हम इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं और चुनाव आयोग से पत्राचार कर पूछेंगे कि बिना पर्याप्त तैयारी के एसआईआर की प्रक्रिया क्यों शुरू की गई है।

राज्यपाल पटेल से अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण समिति के सदस्यों ने की सौजन्य मुलाकात

राज्यपाल  पटेल से अनुसूचित जाति, जनजाति कल्याण संबंधी संसदीय समिति ने की सौजन्य भेंट राज्यपाल  मंगुभाई पटेल के साथ विभिन्न विषयों पर किया विचार-विमर्श भोपाल राज्यपाल  मंगुभाई पटेल से अनुसूचित जाति और जनजाति के कल्याण संबंधी संसदीय समिति के सदस्यों ने बुधवार को राजभवन के बैंक्वेट हॉल में सौजन्य भेंट की। राज्यपाल  मंगुभाई पटेल ने समिति के सदस्यों के राजभवन आगमन पर उनका स्वागत किया। पारस्परिक परिचयात्मक चर्चा की। संसद के दोनों सदनों में अनुसूचित जातिऔर जनजाति के प्रतिनिधित्व के संबंध में जानकारी ली। समिति के मध्यप्रदेश प्रवास और कार्यों के संबंध में विचार-विमर्श किया। राज्यपाल  पटेल को अनुसूचित जाति और जनजाति के कल्याण संबंधी संसदीय समिति के अध्यक्ष  फग्गन सिंह कुलस्ते ने बताया कि समिति अनुसूचित जाति जनजातियों के प्रतिनिधित्व की स्थिति के अध्ययन के लिए 03 नवंबर से 07 नवंबर तक मध्यप्रदेश और गोवा राज्य के भ्रमण पर है। समिति मध्यप्रदेश में पचमढ़ी प्रवास उपरांत भोपाल आई है। प्रवास के दौरान समिति द्वारा शासन के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक प्रतिष्ठानों, संगठनों और स्वशासी संस्थाओं का अध्ययन किया जा रहा है। इस अवसर पर समिति के सदस्य मती प्रतिमा मंडल,  जगन्नाथ सरकार,  हरीशचन्द्र मीणा,  गोविंद एम. करजोल,  डी. प्रसादराव, मती सुमित्रा बाल्मीक,  मिथलेश कुमार,  आर. नारज़ारी, मती फूलोदेवी नेताम,  देवेन्द्रप्रताप सिंह, प्रतिनिधि मण्डल के सचिव  डी.आर. शेखर और उपसचिव  मोहन अरूमला उपस्थित थे।  

जिस मिसाइल से कांपता था पाकिस्तान, अब वही हथियार खरीदने जा रहा इस्लामिक दुनिया का सबसे बड़ा देश

नई दिल्ली दक्षिण एशिया के सबसे घातक हथियारों में शुमार ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में खूब तबाही मचाई थी। मई में भारतीय वायुसेना ने इस सुपरसोनिक मिसाइल का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी एयरबेस पर हमला किया, जिससे दुश्मन की हवाई क्षमता ध्वस्त हो गई। अब इसी मिसाइल को दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया ने खरीदने का फैसला किया है। लगभग 45 करोड़ डॉलर की इस डील से इंडोनेशिया न केवल अपनी नौसेना को मजबूत करेगा, बल्कि दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता का मुकाबला करने में भी सक्षम हो जाएगा। यह डील भारत की रक्षा निर्यात क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाली है। समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और इंडोनेशिया के बीच ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सौदे पर जल्द ही हस्ताक्षर हो सकते हैं। रक्षा सूत्रों ने बताया कि वार्ता की लगभग सभी प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं और अब केवल रूसी पक्ष से अंतिम स्वीकृति का इंतजार है, जिसके बाद कॉन्ट्रैक्ट पर साइन किए जा सकेंगे। भारत और इंडोनेशिया के बीच यह सौदा लंबे समय से चर्चा में है। इस वर्ष जनवरी में इंडोनेशिया के शीर्ष राजनीतिक और सैन्य नेतृत्व की नई दिल्ली यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से बातचीत हुई थी। भारत पहले ही ब्रह्मोस मिसाइलों की बिक्री फिलीपींस को कर चुका है और अब इस अनोखी हथियार प्रणाली के लिए नए बाजार तलाश रहा है। विशेष रूप से मई महीने में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए हालिया संघर्ष के दौरान इस मिसाइल प्रणाली ने खुद को युद्ध के मैदान में साबित भी किया है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, हाल ही में भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने इंडोनेशिया का दौरा किया था। उनका यह दौरा भारत और इंडोनेशिया के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग का प्रतीक माना जा रहा है। इससे पहले, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो की जनवरी में हुई भारत यात्रा ने भी दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों को नई दिशा दी थी। भारत ने कुछ वर्ष पहले फिलीपींस के साथ लगभग 3,500 करोड़ रुपये का ब्रह्मोस मिसाइल सौदा किया था। भारत ने न केवल मिसाइलें बल्कि आवश्यक लॉन्चिंग और समर्थन प्रणाली भी वहां पहुंचाई हैं। यह सौदा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी ध्यान आकर्षित करने वाला रहा, क्योंकि इसे फिलीपींस द्वारा अपने क्षेत्रीय हितों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना गया था। ब्रह्मोस का जन्म: भारत-रूस की साझेदारी का कमाल ब्रह्मोस का नाम भारत की ब्रह्मपुत्रा नदी और रूस की मॉस्को नदी से लिया गया है। यह मिसाइल भारत के डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) और रूस की NPO Mashinostroyeniya के संयुक्त उद्यम ब्रह्मोस एयरोस्पेस द्वारा विकसित की गई है। 1998 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट का मकसद था एक ऐसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाना जो दुश्मन के जहाजों और जमीन के ठिकानों को चंद सेकंडों में नेस्तनाबूद कर दे। रूस की P-800 ओनिक्स मिसाइल पर आधारित यह हथियार 2005 से भारतीय सेनाओं में शामिल हो चुका है। ब्रह्मोस की खासियत यह है कि यह जमीन, समुद्र, हवा और पनडुब्बी से लॉन्च की जा सकती है। इसका वजन 3,000 किलोग्राम (शिप/ग्राउंड वर्जन) है, लंबाई 8.2 मीटर और व्यास 0.67 मीटर। यह 300 किलोग्राम का हाई-एक्सप्लोसिव वॉरहेड ले जाती है, जो दुश्मन के कवच को चीर सकता है। सबसे बड़ी ताकत? इसकी 'फायर एंड फॉरगेट' तकनीक- एक बार लॉन्च होने के बाद यह खुद ही टारगेट पर पहुंच जाती है, बिना किसी अतिरिक्त मार्गदर्शन के। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इंडोनेशिया के साथ यह समझौता होता है, तो यह दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रक्षा साझेदारी को मजबूत करेगा और स्वदेशी ब्रह्मोस एयरोस्पेस कंपनी के लिए निर्यात के नए द्वार खोलेगा। ब्रह्मोस मिसाइल भारत और रूस के संयुक्त उपक्रम से विकसित की गई है। यह सुपरसोनिक गति से उड़ने वाली, अत्यंत सटीकता वाली मिसाइल है, जो जमीन, समुद्र और वायु से लॉन्च की जा सकती है। अगर सौदा अंतिम रूप लेता है, तो यह न केवल भारत की रक्षा कूटनीति की बड़ी सफलता होगी, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत स्वदेशी रक्षा उद्योग को भी एक नया वैश्विक मुकाम दिलाने में मदद करेगा। पाकिस्तान में तबाही: ऑपरेशन सिंदूर का 'फायर एंड फॉरगेट' हमला ब्रह्मोस का असली जलवा तब दिखा जब मई 2025 में भारत-पाकिस्तान तनाव चरम पर पहुंच गया। 10 मई को शुरू हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तानी एयरबेस पर कई ब्रह्मोस मिसाइलें दागीं। इनमें से कुछ ने भोलारी एयरबेस पर सीधा निशाना साधा, जहां एक AWACS (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम) विमान तबाह हो गया। पाकिस्तानी रिटायर्ड एयर मार्शल ने खुद माना कि चार ब्रह्मोस मिसाइलों ने उनके हैंगर को उड़ा दिया। यह ऑपरेशन पाकिस्तान के आतंकी हमलों का जवाब था। ब्रह्मोस ने न केवल एयरबेस को ध्वस्त किया, बल्कि पाकिस्तानी रडार सिस्टम (जैसे चाइनीज HQ-9) को भी चकमा दिया। स्रोतों के मुताबिक, लगभग 15 ब्रह्मोस ने पाकिस्तानी हवाई लॉन्च क्षमता को ठप कर दिया, जिससे वे काउंटर-अटैक की योजना डालने को मजबूर हो गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 30 मई 2025 को कानपुर में भाषण देते हुए इसकी पुष्टि की। इंडोनेशिया की सैन्य आधुनिकीकरण यात्रा: ब्रह्मोस से नई ताकत इंडोनेशिया, दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप राष्ट्र और आबादी के लिहाज से सबसे बड़ा मुस्लिम देश है। वह अपनी नौसेना को मजबूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती आक्रामकता, खासकर नटुना द्वीपों पर दावे, ने जकार्ता को चिंतित कर दिया है। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो, जो पूर्व रक्षा मंत्री रह चुके हैं, उन्होंने सैन्य आधुनिकीकरण को प्राथमिकता दी है। 2025 में इंडोनेशिया ने BRICS में शामिल होकर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत की। ब्रह्मोस खरीद इसकी कड़ी है। जनवरी 2025 में प्रबोवो की भारत यात्रा के दौरान (जहां वे गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि थे) बातचीत तेज हुई। इंडोनेशियाई नौसेना प्रमुख एडमिरल मुहम्मद अली ने ब्रह्मोस मुख्यालय का दौरा किया। डील में शोर-बेस्ड और शिप-माउंटेड वर्जन शामिल हैं, जो नटुना सागर में 290 किमी रेंज से चीनी जहाजों को निशाना बना सकेंगे। भारत ने CAATSA (रूस से हथियार खरीद पर अमेरिकी प्रतिबंध) से मुक्त होने का आश्वासन दिया, क्योंकि ब्रह्मोस के मुख्य पार्ट्स भारत में बने हैं।

लाड़ली बहनों के लिए खुशखबरी: 1500 रुपये की 30वीं किस्त कब आएगी, देखें अपडेट

भोपाल   मध्य प्रदेश की लाड़ली बहनों के लिए नवंबर का महीना बेहद खास होने वाला है, क्योंकि इसी महीने से उन्हें बढ़ी हुई किस्त का फायदा मिलने जा रहा है. राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा साल 2023 में शुरू की गई इस योजना के तहत अब महिलाओं को हर महीने 1500 रुपये की राशि मिलेगी. यह दूसरी बार होगा जब लाड़ली बहनों को बढ़ी हुई किस्त का लाभ नवंबर 2025 और भविष्य में जारी रहेगी जबकि मध्य प्रदेश सरकार तीसरी बार किस्त की राशि बढ़ाने का फैसला नहीं कर देती. शुरुआत में लाड़ली बहनों को योजना के तहत हर महीने 1000 रुपये दिए जा रहे थे. योजना की पहली किस्त 10 जून 2023 को जारी की गई थी. इसके बाद अक्टूबर 2023 से राशि बढ़ाकर 1250 रुपये कर दी गई थी, जो लगातार अक्टूबर 2025 तक महिलाओं के खातों में भेजी गई. अब नवंबर 2025 से फिर एक बार किस्त में 250 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, यानी अब हर लाभार्थी महिला को मंथली 1500 रुपये मिलेंगे. लाड़ली बहनों के खाते में आएंगे 1500 रुपये नवंबर महीने में प्रदेश की मोहन सरकार लाड़ली बहनों के खाते में 1500 रुपये ट्रांसफर करेगी। बता दें कि, लाड़ली बहना योजना की शुरुआत में महिलाओं के खाते में हर महीने 1000 रुपये भेजे जाते थें। इस राशि को धीरे-धीरे बढ़ाया गया। प्रदेश सरकार ने 1000 से बढ़ाकर 1250 और फिर 1500 रुपये कर दिए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार योजना की 30वीं किस्त(Ladli Behna Yojana 30th installment) 5 नवंबर से 10 नवंबर 2025 के बीच महिलाओं के खातों में भेज सकती है। हालांकि सरकार की ओर से अभी तक आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की गई है। 12 अक्टूबर को मिली थी 29वीं किस्त जानकारी के मुताबिक, लाड़ली बहना योजना की 29वीं किस्त 12 अक्टूबर को जारी की गई थी। मोहन सरकार ने 1.26 लाख लाड़ली बहनों के खाते में 1,541 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए थें। इसी महीने भाई दूज पर और 250 रुपये सरकार ने ट्रांसफर किए। अब जल्द ही योजना की 30वीं किस्त लाड़ली बहनों को मिलेगी। लाड़ली बहनों को मिलेंगे 3 हजार रुपये? सरकार की घोषणा के मुताबिक, लाड़ली बहनों को 2028 तक 3000 हजार रुपये मिलेंगे। योजना की राशि में साल-दर-साल बढ़ोत्तरी की जाएगी। जिस तरह सरकार ने राशि 1000 से बढ़ाकर 1250 और फिर 1500 रुपये कर दिए। उसी तरह साल 2028 तक ये राशि 3 हजार कर दी जाएगी। लाड़ली बहना योजना में ये अपात्र     महिलाएं, खुद या उनके परिवार में कोई टैक्सपेयर नहीं होना चाहिए ।परिवार की सालाना आय 2.5 लाख रुपये होना चाहिए।जिनके या उनके परिवार के कोई सदस्य इनकम टैक्स देते हैं।     जिनके परिवार का कोई भी सदस्य सरकारी नौकरी में है (स्थायी, संविदा या पेंशन पाने वाला)।     अगर संयुक्त परिवार है तो 5 एकड़ से ज्यादा जमीन न हो, परिवार में कोई भी व्यक्ति सरकारी नौकरी न करता हो।घर पर ट्रैक्टर, चारपहिया वाहन न हो।जो खुद किसी और सरकारी योजना से हर महीने     1250 रुपये या उससे ज्यादा की राशि पा रही हैं जिनके परिवार में कोई वर्तमान या पूर्व सांसद या विधायक हो।     जिनके परिवार का कोई सदस्य सरकारी बोर्ड, निगम, मण्डल आदि का अध्यक्ष, संचालक या सदस्य हो।जिनके परिवार में कोई स्थानीय निकाय का चुना हुआ जनप्रतिनिधि हो (पंच और उपसरपंच को छोड़कर)।जिनके परिवार के पास कुल 5 एकड़ से ज्यादा खेती की जमीन हो।जिनके परिवार के नाम पर कोई चार पहिया वाहन (ट्रैक्टर को छोड़कर) रजिस्टर्ड हो। लाभार्थी सूची में ऐसे चेक करें अपना नाम     लाड़ली बहना की आधिकारिक वेबसाइट https://cmladlibahna.mp.gov.in/ पर जाएं।     वेबसाइट के मुख्य पृष्ठ पर “आवेदन एवं भुगतान की स्थिति” वाले विकल्प पर     क्लिक करें।     दूसरे पृष्ठ पर पहुंचने के बाद, अपना आवेदन नंबर या सदस्य समग्र क्रमांक दर्ज करें।     कैप्चा कोड सबमिट करने के बाद, मोबाइल पर एक ओटीपी भेजा जाएगा।     मोबाइल नंबर पर प्राप्त ओटीपी दर्ज करें और वेरिफाई करें।     ओटीपी वेरिफाई करने के बाद “सर्च” विकल्प पर क्लिक करें और आपका भुगतान स्थिति खुल जाएगी।

अदृश्य ‘अभिमन्यु’ से बढ़ेगी भारत की शक्ति, S-400 और THAAD को झेलना होगा झटका

नई दिल्ली भारतीय नौसेना अपनी कैरियर एयर विंग्स में अनमैन्ड एरियल सिस्टम्स को इंटीग्रेट करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है. बेंगलुरु स्थित न्यूस्पेस रिसर्च एंड टेक्नोलॉजीज (एनआरटी) द्वारा विकसित ‘अभिमन्यु’ ड्रोन इस पहल की अगुवाई कर रहा है. यह ड्रोन नेवल कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयर व्हिकल (एन-सीसीएवी) प्रोग्राम का आधार बन रहा है, जो भारत को वैश्विक ‘लॉयल विंगमैन’ ड्रोन्स की तर्ज पर क्रूड फाइटर एयरक्राफ्ट के साथ तैनाती करने वाला देश बनाने की दिशा में ले जा रहा है. साल 2026 तक उड़ान भरने की योजना वाले इस जेट-पावर्ड स्टील्थ ड्रोन में एआई-ड्रिवन क्षमताएं, मैन्‍ड-अनमैन्ड टीमिंग (एमयूएम-टी) और एयर-टू-एयर किल क्षमता शामिल होगी, जो नौसेना की स्ट्राइक ग्रुप्स को नई ताकत प्रदान करेगी. स्‍टील्‍थ होने की वजह से रडार और एयर डिफेंस सिस्‍टम के लिए इसे कैच कर पाना काफी मुश्किल होगा. दिलचस्‍प बात यह है कि ‘अर्जुन’ नाम से टैंक पहले से ही इंडियन आर्मी में अपनी सेवाएं दे रहा है. अब अभिमन्‍यु की बारी की बारी है. अभिमन्यु एक जेट-पावर्ड, लो रडार क्रॉस-सेक्शन (आरसीएस) ड्रोन है, जो विशेष रूप से भारतीय नौसेना के मौजूदा और भविष्य के कैरियर-बेस्ड फाइटर्स जैसे मिग-29K और आने वाले राफेल-M के साथ लॉयल विंगमैन के रूप में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है. इसका डिजाइन स्वेप्ट विंग्स, हॉरिजॉन्टल स्टेबलाइजर्स, सिंगल वर्टिकल टेल और रियर फ्यूजलाज के दोनों तरफ ट्विन नैरो एयर इंटेक्स से युक्त है. एक खास फीचर है फ्यूजलाज के चारों ओर लपेटी गई कंटीन्यूअस चाइन-लाइन, जो रडार रिफ्लेक्शन्स को कम करके कंटेस्टेड एनवायरनमेंट्स में सर्वाइवेबिलिटी बढ़ाती है. हालांकि, अभिमन्यु में कई स्टील्थ-इंस्पायर्ड फीचर्स हैं, लेकिन यह पूरी तरह लो-ऑब्जर्वेबल प्लेटफॉर्म नहीं है. इसका कॉन्फिगरेशन रडार सिग्नेचर को कम करने और कॉस्ट-इफेक्टिवनेस के बीच संतुलन बनाता है. महंगे इंटरनेशनल समकक्षों की तुलना में यह रैपिड प्रोडक्शन और एक्सपेंडेबिलिटी पर फोकस करता है. एआई-ड्रिवन सिस्टम्स इसे ऑटोनॉमस ऑपरेशन्स के लिए सक्षम बनाते हैं, जबकि एयर-टू-एयर किल क्षमता इसे दुश्मन एयरक्राफ्ट को न्यूट्रलाइज करने में सक्षम बनाएगी. एमयूएम-टी कॉन्फिगरेशन में यह क्रूड पायलट्स के साथ टीम बनाकर काम करेगा, सेंसर रीच बढ़ाएगा और सिचुएशनल अवेयरनेस प्रदान करेगा. ऑपरेशनल रोल और स्ट्रैटेजिक विजन एन-सीसीएवी कार्यक्रम के तहत अभिमन्यु ड्रोन्स भारतीय नौसेना के फाइटर्स के साथ एमयूएम-टी में उड़ान भरेंगे. ये ड्रोन्स कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स की सेंसर रीच बढ़ाएंगे, सिचुएशनल अवेयरनेस को मजबूत करेंगे और कैरियर-बेस्ड तथा ऑनशोर ऑपरेशन्स में टैक्टिकल फ्लेक्सिबिलिटी प्रदान करेंगे. हाई-रिस्क या कॉम्प्लेक्स मिशन्स को संभालकर ये ह्यूमन पायलट्स के एक्सपोजर को कम करेंगे और कैरियर एयर विंग्स की ऑफेंसिव-डिफेंसिव क्षमताओं को बढ़ाएंगे. नौसेना एक फ्लीट ऑफ अभिमन्यु ड्रोन्स को विभिन्न क्षमताओं के साथ तैनात करने की योजना बना रही है, जो इटरेटिव डेवलपमेंट साइकिल्स से हासिल होगी. ‘इंडिया डिफेंस न्‍यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, इससे सर्विलांस, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, स्ट्राइक और स्वार्मिंग मिशन्स के लिए स्पेशलाइज्ड वैरिएंट्स उभर सकते हैं. यह वर्तमान और भविष्य की नौसेना ऑपरेशन्स को सपोर्ट करेगा, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों के मद्देनजर. अभिमन्यु न केवल फोर्स मल्टीप्लायर बनेगा, बल्कि स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलॉजी में आगे की नींव रखेगा. इंडियन नेवी को और मजबूत बनाने की तैयारी है.  डेवलपमेंट स्टेटस और फंडिंग अभिमन्यु प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय की इनोवेशन्स फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (आईडीईएक्स) पहल से आंशिक फंडिंग मिल रही है. साथ ही एनआरटी से इंटरनल फंडिंग भी की जा रही है. आईडीईएक्स के तहत वर्तमान फंडिंग सीलिंग करीब 2.85 मिलियन डॉलर है, लेकिन ऑपरेशनल स्टेटस और फ्यूचर वैरिएंट्स के लिए काफी अधिक निवेश की जरूरत होगी. भारतीय नौसेना ने एन-सीसीएवी के ऑपरेशनल रेडीनेस पर पहुंचने पर मिनिमम परचेज क्वांटिटी की प्रतिबद्धता जताई है, जो प्रोडक्शन और डिप्लॉयमेंट के लिए बेसलाइन सुनिश्चित करेगी. 2026 तक पहली उड़ान का लक्ष्य रखा गया है, जो प्रोजेक्ट की तेज गति को दर्शाता है. अभिमन्यु भारतीय वायुसेना के कॉम्बैट एयर टीमिंग सिस्टम (सीएटीएस) प्रोग्राम के लिए विकसित एचएएल वॉरियर से काफी छोटा और हल्का है. वॉरियर जहां हाई परफॉर्मेंस और ग्रेटर पेलोड कैपेसिटी पर जोर देता है, वहीं अभिमन्यु की ताकत मॉड्यूलैरिटी, कॉस्ट-इफेक्टिवनेस और लार्ज-स्केल डिप्लॉयमेंट में है. इंटरनेशनल स्तर पर यह चीन के जीजे-11 शार्प स्वॉर्ड या यूएस नेवी के एक्सपेंडेबल कोलैबोरेटिव कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (सीसीए) ड्रोन्स की तुलना में लोअर-एंड सॉल्यूशन है. फिर भी, यह भारत की जरूरतों के अनुरूप प्रैग्मैटिक अप्रोच अपनाता है, जहां अफोर्डेबिलिटी और रैपिड इटरेशन प्राथमिकता हैं. चुनौतियां भी कम नहीं मोमेंटम के बावजूद प्रोग्राम कई चुनौतियों का सामना कर रहा है. कैरियर एविएशन के डिमांडिंग एनवायरनमेंट में रिलायबल ऑटोनॉमस ऑपरेशन हासिल करना प्रमुख है. हाई-स्पीड, हाई-ऑल्टीट्यूड क्रूड फाइटर्स और अभिमन्यु के बीच परफॉर्मेंस गैप को ब्रिज करना भी जरूरी. इसके अलावा, सस्टेन्ड फंडिंग सुनिश्चित करना और भारत की ऐतिहासिक डिफेंस प्रोक्योरमेंट डिले को पार करना चुनौतीपूर्ण रहेगा. फिर भी अभिमन्यु प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना एविएशन के लिए पिवोटल स्टेप है. यह अनमैन्ड सिस्टम्स को फ्यूचर कॉम्बैट ऑपरेशन्स में इंटीग्रेट करने की नौसेना की कमिटमेंट को सिग्नल करता है. सफल होने पर एन-सीसीएवी प्रोग्राम नौसेना की ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी, सर्वाइवेबिलिटी और स्ट्राइक कैपेबिलिटी को काफी बढ़ाएगा. साथ ही, यह स्वदेशी ड्रोन टेक्नोलॉजी में आगे की एडवांसमेंट्स की नींव बनेगा.

1 जनवरी से पैन कार्ड रहेगा गैरमान्य, आयकर विभाग ने दी अहम चेतावनी

नई दिल्ली अगर आपने बार-बार की डेडलाइन के बाद भी अभी तक अपने पैन कार्ड (PAN Card) को आधार कार्ड (Aadhaar Card) से ल‍िंक नहीं कराया है तो यह खबर आपके ल‍िए है. जी हां, ऐसा नहीं करने वालों का पैन (PAN) 1 जनवरी 2026 से काम नहीं करेगा. इनकम टैक्‍स व‍िभाग की तरफ से इसको लेकर बड़ा ऐलान क‍िया गया है. जी हां, आयकर व‍िभाग की तरफ से साफ शब्‍दों में कहा गया है क‍ि यद‍ि आपका पैन कार्ड (PAN Card) आधार कार्ड से नहीं जुड़ा तो 1 जनवरी 2026 से वह काम नहीं करेगा. 31 दिसंबर आधार से ल‍िंक करा लें पैन पैन कार्ड के काम नहीं करने के बाद आपके ल‍िए इनकम टैक्‍स भरने से लेकर रिफंड लेने तक सब मुश्किल हो जाएगा. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) की तरफ से कहा गया क‍ि 1 अक्टूबर 2025 से पहले बने पैन को 31 दिसंबर 2025 तक आधार से ल‍िंक कराया जाना जरूरी है. नहीं तो आपका पैन (PAN) बंद हो जाएगा. आपको बता दें पैन (PAN) 10 ड‍िज‍िट का एक नंबर है. इसे आयकर विभाग की तरफ से जारी क‍िया जाता है. PAN से जुड़ी रहती है सभी टैक्स संबंधी जानकारी पैन (PAN) से आपकी सभी टैक्स संबंधी जानकारी जुड़ी रहती है. इसके जर‍िये आप टैक्स भरना, टीडीएस कटौती और रिटर्न भरने आद‍ि के काम करते हैं. आयकर विभाग की तरफ से फ्रॉड को रोकने के लिए पैन (PAN) को आधार से जोड़ना जरूरी क‍िया गया है. पहले इसको लेकर आयकर व‍िभाग की तरफ से कई बार तारीख बढ़ाने का ऐलान क‍िया गया ताकि लोगों को ज्‍यादा टाइम म‍िल सके. इसमें देरी पर 1000 रुपये का जुर्माना भी है. पैन कार्ड बंद होने से क्‍या नुकसान होगा? > आप टैक्स रिटर्न नहीं भर सकेंगे. > पुराने रिटर्न प्रोसेस नहीं होंगे. > रिफंड नहीं मिलेगा. > गलत रिटर्न के मामले रुक जाएंगे. > ज्यादा टीडीएस कटेगा. ऑनलाइन पैन को आधार से कैसे ल‍िंक करें? > सबसे पहले आयकर व‍िभाग की वेबसाइट www.incometax.gov.in पर जाएं. > इसके बाद क्‍व‍िक लिंक में जाकर 'लिंक आधार' क्लिक करें. > अब पैन (10 अंक) और आधार (12 अंक) दर्ज करें. > यह ध्‍यान रखें क‍ि आप अपना आधार वाला नाम ही लिखें. > 'मैं आधार डिटेल वैलिडेट करने को सहमत हूं' पर टिक करें. > अब वैलिडेट क्लिक करें. 31 दिसंबर के बाद जोड़ने पर 1000 रुपये जुर्माना यद‍ि आप 31 दिसंबर 2025 के बाद पैन और आधार को ल‍िंक कर रहे हैं तो आपको 1000 रुपये जुर्माना देना होगा. ल‍िंक करने का प्रोसेस करने के बाद आपको पॉप-अप आएगा 'पेमेंट डिटेल नहीं मिली'. यहां आप 'ई-पे टैक्स' (E-Pay Tax) पर क्लिक करें. अब अपना पैन नंबर डालकर, मोबाइल नंबर डालें, उसके ऊपर ओटीपी आएगा. अब असेसमेंट ईयर स‍िलेक्‍ट करें. नेट बैंकिंग, डेबिट कार्ड आदि से पेमेंट करें. आपको चालाना म‍िल जाएगा.  

दुनिया पर मंडरा रहा है तापमान संकट, UNEP रिपोर्ट में खुलासा – 2100 तक 2.5°C तक बढ़ेगा पारा

नई दिल्ली अगर सभी देश अपनी जलवायु सुधारने की प्रतिज्ञाओं को पूरी तरह लागू करें, तो भी इस सदी में वैश्विक तापमान 2.3 से 2.5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है. यह आंकड़ा पिछले साल की भविष्यवाणी 2.6-2.8 डिग्री से थोड़ा कम है. लेकिन वर्तमान नीतियां अब भी धरती को 2.8 डिग्री के रास्ते पर ले जा रही हैं, जो पिछले साल के 3.1 डिग्री से कम है. यह बात संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) की 'एमिशन गैप रिपोर्ट 2025' में कही गई है. रिपोर्ट कहती है कि दुनिया अभी भी पेरिस समझौते के 1.5 डिग्री के लक्ष्य से बहुत दूर है. अगले दशक में तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री से ऊपर चला जाएगा, जब तक देश जल्दी कदम न उठाएं. यूएनईपी की कार्यकारी निदेशक इंगर एंडरसन ने कहा कि देशों को पेरिस समझौते के तहत तीन मौके मिले हैं वादे निभाने के लिए, लेकिन हर बार वे लक्ष्य से चूक गए. राष्ट्रीय योजनाओं से कुछ प्रगति हुई है, लेकिन यह काफी तेज नहीं है. इसलिए हमें बिना रुके उत्सर्जन कम करने की जरूरत है, खासकर मुश्किल भू-राजनीतिक स्थिति में. यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र जलवायु सम्मेलन से ठीक पहले आई है, जहां विश्व नेता इकट्ठा होंगे. आइए रिपोर्ट की मुख्य बातें समझते हैं. पेरिस लक्ष्य से कितना दूर हैं हम? पेरिस समझौता 2015 का है, जिसमें दुनिया ने तय किया कि तापमान बढ़त को 1.5 डिग्री तक सीमित रखना है. लेकिन रिपोर्ट कहती है कि अगर देश अपनी वर्तमान प्रतिज्ञाओं (एनडीसी) पूरी करें, तो तापमान 2.3-2.5 डिग्री बढ़ेगा. यह थोड़ा बेहतर है, लेकिन अभी भी खतरनाक. वर्तमान नीतियां 2.8 डिग्री का रास्ता दिखा रही हैं. रिपोर्ट चेतावनी देती है कि अगले 10 सालों में तापमान अस्थायी रूप से 1.5 डिग्री पार कर जाएगा. इसे रोकने के लिए बढ़त को सिर्फ 0.3 डिग्री तक सीमित रखना होगा. 2100 तक तापमान को नीचे लाना होगा. अगर ऐसा न हुआ, तो बाढ़, सूखा और चरम मौसम जैसी आपदाएं बढ़ेंगी. देशों की प्रतिज्ञाएं: कितनी पूरी हुईं? पेरिस समझौते के 195 देशों में से सिर्फ एक तिहाई (यानी 65 देश) ने इस साल नई या अपडेटेड राष्ट्रीय प्रतिज्ञाएं (एनडीसी) जमा कीं. ये देश वैश्विक उत्सर्जन का 63 प्रतिशत कवर करते हैं. बाकी देशों ने पुरानी योजनाओं को ही जारी रखा. जी20 देश, जो वैश्विक उत्सर्जन का 77 प्रतिशत हिस्सा हैं. ये भी 2030 के अपने लक्ष्यों को पूरा करने के रास्ते पर नहीं हैं. 2035 तक और गहरी कटौती की जरूरत है, लेकिन वे भी पीछे हैं. रिपोर्ट कहती है कि अमीर देशों ने गरीब देशों को मदद देने का वादा किया था, लेकिन वह भी पूरा नहीं हो रहा. 2024 में उत्सर्जन: रिकॉर्ड स्तर पर 2024 में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 57.7 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड समकक्ष (जीटीसीओ2ई) पहुंच गया. यह पिछले साल से 2.3 प्रतिशत ज्यादा है. इस बढ़ोतरी का आधा से ज्यादा हिस्सा जंगलों की कटाई और भूमि उपयोग में बदलाव से आया. जीवाश्म ईंधन (कोयला, तेल, गैस) से उत्सर्जन भी बढ़ता रहा. शीर्ष उत्सर्जक देशों में भारत और चीन ने सबसे ज्यादा वृद्धि दर्ज की. यूरोपीय संघ अकेला बड़ा अर्थव्यवस्था वाला क्षेत्र था, जहां उत्सर्जन कम हुआ. रिपोर्ट कहती है कि अगर 2019 के स्तर से तुलना करें, तो 2030 तक उत्सर्जन 26 प्रतिशत कम और 2035 तक 46 प्रतिशत कम होना चाहिए. तभी 1.5 डिग्री का लक्ष्य संभव है. विशेषज्ञों की राय: जागने का समय जलवायु विशेषज्ञों ने रिपोर्ट को चेतावनी का संकेत बताया है. यूनियन ऑफ कंसर्न्ड साइंटिस्ट्स की रेचल क्लीटस ने कहा कि ये आंकड़े चिंताजनक, गुस्सा दिलाने वाले और दिल तोड़ने वाले हैं. अमीर देशों की कमजोर कार्रवाई और जीवाश्म ईंधन हितों की बाधा इसके लिए जिम्मेदार हैं. एम्बर के रिचर्ड ब्लैक ने कहा कि राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा योजनाएं साफ ऊर्जा संक्रमण की सकारात्मक तस्वीर दिखाती हैं. इंटरनेशनल क्लाइमेट पॉलिसी हब की कैथरीन अब्रेऊ ने जोर दिया कि पेरिस समझौता विफल नहीं हो रहा, बल्कि कुछ शक्तिशाली जी20 देश वादे निभाने में असफल हो रहे हैं. तत्काल कार्रवाई की जरूरत रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि बिना तेज और बड़े उत्सर्जन कटौती के, दुनिया आपदा वाली गर्मी में फंस जाएगी. यह गरीब और कमजोर देशों को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी. नवीकरणीय ऊर्जा, जंगलों की रक्षा और जीवाश्म ईंधन छोड़ना जरूरी है.  यह रिपोर्ट हमें याद दिलाती है कि समय तेजी से निकल रहा है. अगर हम अब नहीं चेते, तो आने वाली पीढ़ियां भुगतेंगी. जलवायु परिवर्तन सबकी जिम्मेदारी है, लेकिन अमीर देशों को नेतृत्व करना होगा.