samacharsecretary.com

भारतीय मूल के CEO पर धोखाधड़ी का आरोप, अमेरिका में 4000 करोड़ का घोटाला उजागर

अमेरिका में 4000 करोड़ का घोटाला! भारतीय मूल के CEO पर लगे बड़े फर्जीवाड़े के आरोप भारतीय मूल के CEO पर धोखाधड़ी का आरोप, अमेरिका में 4000 करोड़ का घोटाला उजागर अमेरिका में हड़कंप: भारतीय मूल के CEO पर 4000 करोड़ रुपये के फ्रॉड का आरोप वाशिगटन  अमेरिका में भारतीय मूल के टेलीकॉम कंपनी के CEO बैंकिम ब्रह्मभट्ट पर 500 मिलियन डॉलर (4,000 करोड़ रुपये से ज्यादा) के बड़े वित्तीय घोटाले का आरोप लगा है. वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रह्मभट्ट ने फर्जी ग्राहक खातों और राजस्व के दस्तावेज तैयार कर अमेरिकी बैंकों से भारी कर्ज हासिल किया. ब्रह्मभट्ट ब्रॉडबैंड टेलीकॉम और ब्रिजवॉइस नामक कंपनियों के मालिक हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने कई निवेशकों को यह विश्वास दिलाया कि उनके व्यवसायों की आय और ग्राहक आधार बहुत मजबूत है, जबकि असल में वह कई गैर-मौजूद ग्राहकों और फर्जी लेन-देन पर आधारित थी. इस घोटाले में प्रमुख निवेश फर्म HPS इन्वेस्टमेंट पार्टनर्स और वैश्विक एसेट मैनेजमेंट दिग्गज BlackRock के समर्थित फंड भी शामिल हैं. WSJ की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगस्त 2024 में लेनदारों ने मुकदमा दायर किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि ब्रह्मभट्ट ने गैर-मौजूद राजस्व स्रोतों को कर्ज की गारंटी के रूप में गिरवी रखा. 2020 से कंपनी को मिल रहे थे लोन HPS ने सितंबर 2020 में ब्रह्मभट्ट की एक कंपनी को कर्ज देना शुरू किया और यह राशि धीरे-धीरे बढ़कर 2021 की शुरुआत तक 385 मिलियन डॉलर और अगस्त 2024 तक 430 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई. इन कर्जों का लगभग आधा हिस्सा BNP Paribas बैंक द्वारा वित्तपोषित किया गया था. कंपनी ने दिवालियापन के लिए दायर की याचिका अब उनकी कंपनियों ने Chapter 11 दिवालियापन संरक्षण के तहत अदालत में आवेदन किया है, जो अमेरिकी कानून के तहत कंपनियों को पुनर्गठन का मौका देता है. इसी दिन ब्रह्मभट्ट ने निजी दिवालियापन की याचिका भी दाखिल की थी. रिपोर्ट के अनुसार, जब पत्रकार न्यूयॉर्क के गार्डन सिटी स्थित उनके कार्यालय पहुंचे, तो वहां ताला लटका मिला और पड़ोसियों ने बताया कि कई हफ्तों से कोई वहां नहीं दिखा. जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, संभावना है कि ब्रह्मभट्ट अमेरिका छोड़कर भारत लौट आए हों. उनके वकील ने हालांकि सभी आरोपों को निराधार बताया है.  

कृषि में मध्य प्रदेश का दबदबा: टमाटर और मटर में शीर्ष, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की योजना

मध्य प्रदेश कृषि में अव्वल: टमाटर में पहला, मटर में दूसरा स्थान; दुग्ध उत्पादन 20% बढ़ाने का लक्ष्य कृषि में मध्य प्रदेश का दबदबा: टमाटर और मटर में शीर्ष, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने की योजना मध्य प्रदेश ने बनाई अलग पहचान: टमाटर व मटर उत्पादन में शानदार प्रदर्शन, दुग्ध उत्पादन में 20% बढ़ोतरी का लक्ष्य भोपाल  कृषि के क्षेत्र में मध्य प्रदेश की देशभर में अलग पहचान है। लगातार सात कृषि कर्मण अवार्ड जीतने वाला न केवल यह पहला राज्य है, बल्कि कोरोना महामारी के समय रिकॉर्ड 128 लाख टन गेहूं का उपार्जन करके पंजाब को भी पीछे छोड़ चुका है। टमाटर में पहला और मटर के उत्पादन में मप्र का देश में दूसरा स्थान है, तो दालों के उत्पादन में प्रथम स्थान, खाद्यान्न में द्वितीय और तिलहन उत्पादन में तृतीय स्थान पर है। अब किसानों की आय बढ़ाने के लिए पशुपालन से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उद्यानिकी फसलों में देखें, तो मध्य प्रदेश टमाटर और मटर उत्पादन में लगातार प्रगति कर रहा है। टमाटर के बीज पर 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है। 2024-25 में 1,27,740 हेक्टेयर में टमाटर की खेती की गई, जिससे 36 लाख 94 हजार 702 टन उत्पादन हुआ। यही स्थिति मटर को लेकर भी है। अन्य प्रमुख उद्यानिकी उत्पादों में संतरे, धनिया, मसाले, औषधीय और सुगंधित पौधों के उत्पादन में भी मध्य प्रदेश का पहला स्थान है। इसी तरह दुग्ध उत्पादन और गोपालन को लेकर भी सरकार काम कर रही है। गोशालाओं को चारा के लिए 40 रुपये तक अनुदान देने का प्रविधान किया गया है। वहीं, दुग्ध उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति लीटर पांच रुपये प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। दुग्ध उत्पादन 20 प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य है। इसके लिए नस्ल सुधार का कार्यक्रम छेड़ा गया है। वहीं, पशुओं की टैगिंग भी की जा रही है। सहकारी समितियों का क्षेत्र विस्तार किया जा रहा है, तो संयंत्रों को आधुनिक बनाने की पहल भी की गई है। बासमती को जीआई टैग दिलाने का प्रयास इधर, बासमती धान को बासमती की पहचान दिलाने के लिए जीआइ टैग दिलाने के प्रयास लंबे समय से किए जा रहे हैं। इसको लेकर कानूनी लड़ चल रही है। जीआइ टैग नहीं मिलने के कारण व्यापारी प्रदेश से बासमती सामान्य धान की तरह लेकर जाते हैं, तो बासमती के नाम से बेचते हैं। इसके कारण किसानों को जो लाभ मिलना चाहिए वह नहीं मिलता है। प्राकृतिक खेती पर जोर प्रदेश में रासायनिक उर्वरकों के अति उपयोग के कारण भूमि की मृदा शक्ति प्रभावित हो रही है। भविष्य के खतरे को भांपते हुए सरकार का जोर इस बात पर है कि किसान प्राकृतिक खेती करें, ताकि भूमि की मृदा शक्ति बनी रहे। इसके साथ ही पराली (नरवाई) जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान से बचाने के लिए एक ओर जहां कड़ाई की जा रही है तो दूसरी ओर नरवाई को भूमि में ही मिलने के उपकरणों पर अनुदान दिया जा रहा है। कस्टम हायरिंग सेंटर से भी इसे जोड़ा गया है।  

रेरा की सख्त कार्रवाई भोपाल में, एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी पर हुई बड़ी कार्यवाही

भोपाल में रेरा की बड़ी कार्रवाई — एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड पर भी गिरी गाज बिल्डर हर्षवर्धन दीक्षित और गौरव शर्मा पर ₹10,000 प्रतिमाह क्षतिपूर्ति, ₹50,000 मानसिक क्षति मुआवज़ा और ₹5,000 प्रकरण व्यय का आदेश भोपाल  राजधानी भोपाल में रियल एस्टेट के नाम पर ग्राहकों से ठगी और मनमानी करने वाले बिल्डरों पर अब रेरा का डंडा चलने लगा है।मध्यप्रदेश रेरा (RERA) ने एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के संचालक हर्षवर्धन दीक्षित और गौरव शर्मा पर शुभ बिजनेस ज़ोन, रासलाखेड़ी, वार्ड नंबर 78, भानपुर प्रोजेक्ट में ग्राहकों को समय पर पजेशन न देने के मामले में सख़्त कार्रवाई की है। रेरा ने अपने आदेश में कंपनी को निर्देश दिया है कि ग्राहकों को दुकान का पजेशन देने तक ₹10,000 प्रतिमाह क्षतिपूर्ति राशि दी जाए, साथ ही ₹50,000 मानसिक और शारीरिक पीड़ा के लिए मुआवज़ा और ₹5,000 प्रकरण व्यय का भुगतान किया जाए।  ग्राहकों के आरोप — करोड़ों लेकर न दुकान दी, न जवाब ग्राहक आरती भटेले, जयश्री बोराना, प्रेमलता, सीबा अख्तर, दयाराम पवार और सुरेश वर्मा ने रेरा और पुलिस कमिश्नर कार्यालय भोपाल में लिखित शिकायत दी थी। शिकायत में कहा गया कि एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के बिल्डर हर्षवर्धन दीक्षित और गौरव शर्मा ने दुकानों की बुकिंग के नाम पर करोड़ों रुपये लिए लेकिन न तो तय समय पर निर्माण पूरा किया और न ही पजेशन दिया। ग्राहकों ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने विरोध किया तो उन्हें धमकाया गया और मानसिक उत्पीड़न किया गया।  रेरा का सख़्त रुख — “अब खेल खत्म, जवाबदेही तय होगी” रेरा ने मामले की सुनवाई के दौरान बिल्डरों की लापरवाही को “स्पष्ट धोखाधड़ी और उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन” बताया। प्राधिकरण ने कहा कि ग्राहकों की गाढ़ी कमाई से इस तरह खिलवाड़ करने वाले बिल्डरों को अब बख्शा नहीं जाएगा। “रियल एस्टेट सेक्टर में जवाबदेही तय करने का समय आ गया है। अब निवेशकों को ठगने वालों को हर कदम पर जवाब देना होगा।”   शुभ बिजनेस ज़ोन बना विवाद का केंद्र भानपुर क्षेत्र का यह कमर्शियल प्रोजेक्ट लंबे समय से विवादों में रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड ने बड़े-बड़े दावे कर दुकानों की बुकिंग की थी, लेकिन निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया। कई निवेशक अब भी अपनी मेहनत की कमाई फँसी होने से परेशान हैं।  आदेश का प्रभाव — प्रदेश के बिल्डरों के लिए चेतावनी रेरा की यह कार्रवाई पूरे मध्यप्रदेश के बिल्डरों के लिए एक कड़ा संदेश मानी जा रही है। अब यदि कोई बिल्डर तय समय पर पजेशन नहीं देता या ग्राहकों से मनमानी करता है, तो उसके खिलाफ आर्थिक और कानूनी कार्रवाई तय है।  सारांश में —     •    कंपनी: एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड     •    प्रोजेक्ट: शुभ बिजनेस ज़ोन, रासलाखेड़ी, वार्ड नंबर 78, भानपुर, भोपाल     •    बिल्डर: हर्षवर्धन दीक्षित एवं गौरव शर्मा     •    शिकायतकर्ता: आरती भटेले, जयश्री बोराना, प्रेमलता, सीबा अख्तर, दयाराम पवार, सुरेश वर्मा     •    रेरा आदेश:     •    ₹12,000 प्रति माह क्षतिपूर्ति     •    ₹50,000 मानसिक एवं शारीरिक क्षति मुआवज़ा     •    ₹5,000 प्रकरण व्यय भोपाल में रेरा की यह सख़्त कार्रवाई उन बिल्डरों के लिए सीधा संदेश है जो निवेशकों की गाढ़ी कमाई को अपनी जागीर समझ बैठे हैं। अब हर परियोजना में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता ही एकमात्र रास्ता है — वरना एबोग इंफ्रास्ट्रक्चर की तरह हर लापरवाह बिल्डर को रेरा के शिकंजे में आना तय है।

हरियाणा सरकार का बड़ा उपहार: ‘लाडो’ योजना की पहली किस्त से खिले 5.22 लाख बहनों के चेहरे

चंडीगढ़ हरियाणा दिवस के पावन अवसर पर राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं के खातों में पहली किस्त जारी कर दी गई है। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में यह एक बड़ा कदम है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, योजना के तहत अब तक 5 लाख 22 हजार 162 पात्र बहनों को ₹2,100 की पहली किस्त सीधे उनके बैंक खातों में भेजी गई है।    पंजीकरण में दिखा उत्साह योजना की शुरुआत के बाद से ही महिलाओं में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला है। 31 अक्टूबर तक, योजना के मोबाइल एप पर 6 लाख 57 हजार 657 लाडो बहनों ने सफलतापूर्वक पंजीकरण किया। इनमें से जाँच के बाद 5 लाख 22 हजार से अधिक आवेदन पात्र पाए गए। यह योजना उन महिलाओं (23 वर्ष से अधिक आयु) के लिए है जिनके परिवार की वार्षिक आय ₹1 लाख या उससे कम है। इस योजना के माध्यम से राज्य सरकार महिला सशक्तिकरण और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रयास कर रही है।   मुख्यमंत्री ने दी बधाई हरियाणा के मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सभी लाभार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह राशि महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक सम्मान देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने बताया कि सरकार महिलाओं के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है और यह योजना इसी दिशा में एक मील का पत्थर है।  

मध्य प्रदेश का विकास रिकॉर्ड: 70 साल में आय 584 गुना, आबादी में पौने तीन गुना वृद्धि

भोपाल  राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के आधार पर मध्य प्रदेश का जन्म हुआ था। जनसंख्या, कृषि, उद्योग आदि विकास के मापदंडों की समीक्षा के बाद 1956 में इस नए राज्य का गठन किया गया था। निर्माण के बाद लगातार प्रदेश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से अलग होकर नया राज्य बनाना गया। इसके बाद भी मध्य प्रदेश क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का दूसरा बड़ा राज्य है। एक नवंबर को मध्य प्रदेश अपनी स्थापना का 70वां वर्ष मना रहा है। पांच वर्ष बाद यह अपने जन्म की 75वीं जयंती यानि हीरक जयंती मनाएगा। 70वें स्थापना दिवस पर प्रदेश के विकास का आकलन करें तो पाते हैं राज्य की प्रति व्यक्ति आय में 584 गुना बढ़ोतरी हुई तो आबादी में 2.78 गुना बढ़ोतरी हुई है। राज्य पुनर्गठन आयोग और मध्य प्रदेश आजादी के बाद 29 दिसंबर 1953 को भारत के राज्यों के पुनर्गठन के लिए जस्टिस सैयद फैसल अली की अध्यक्षता और हृदयनाथ कुंजरू, वल्लभ माधव पणिकर की सदस्यता में एक आयोग गठित हुआ था। इस आयोग ने 30 सितंबर 1955 को अपनी सिफारिश केंद्र सरकार को प्रस्तुत की थी। राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश द्वारा की गई अनुशंसाओं को अमल में लाने के लिए लोकसभा में 18 अप्रैल 1956 को संविधान में नवम संशोधन विधेयक पेश हुआ और अक्तूबर में राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद 1 नवंबर 1956 को यह पूर्ण रूप से अधिनियम बना। आयोग की सिफारिशों के आधार पर सेंट्रल प्रोविजंस एंड बरार में शामिल मराठी भाषी जिले महाराष्ट्र में शामिल हो गए और 43 जिलों के साथ नए मध्य प्रदेश का गठन किया गया। क्या कहा था नए प्रदेश के गठन के वक्त राज्य पुनर्गठन आयोग ने अपने प्रतिवेदन में नए मध्य प्रदेश के संबंध में तर्क दिया था कि यह बहुत ही समृद्ध कृषि वाला राज्य होगा, क्योंकि यहां गेहूं, चावल पैदा करने वाला संपूर्ण क्षेत्र इसमें शामिल है। हालांकि, वर्ष 2000 में चावल का कटोरा कहलाने वाला क्षेत्र छत्तीसगढ़ एक अलग राज्य के रूप में गठित हो गया।   पं. रविशंकर शुक्ल थे पहले सीएम 1956 की 31 अक्तूबर और 1 नवंबर की मध्य रात्रि को नए मध्य प्रदेश का गठन हुआ तब प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल ने अपने संदेश में नए मध्य प्रदेश को राष्ट्र के लिए शक्ति का अविरल स्त्रोत बताते हुए कहा था कि 'ऊपर लहलहाते खेत और नीचे भूमि रत्नगर्भा है'। वहीं, उनके बाद सीएम बने कैलाशनाथ काटजू ने कहा था प्रकृति ने इस भू-भाग के निवासियों को पुरस्कृत करने में अत्यंत उदारता से काम लिया है। मप्र शक्ति का अविरल स्रोत बना आज प्रदेश की स्थापना के 70 वर्ष पूर्ण होने के बाद यह आकलन किया जाए कि क्या मध्य प्रदेश राष्ट्र के लिए शक्ति का अविरल स्रोत बन सका? क्या प्रकृति की अत्यंत उदारता प्रदेश के निवासियों को पुरस्कृत कर सकी? प्रदेश ने आर्थिक विकास की रफ्तार और प्रगति की राह को चुना और प्रगति के नए सोपान तय किए हैं। प्रति व्यक्ति आय 261 रुपये से बढ़कर 1.52 लाख हुई मध्य प्रदेश ने बीते 70 वर्षों में कितनी प्रगति की है, इसकी झलक प्रदेश के नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय से मिलती है। 1956 में मध्य प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 261 रुपये थी, जो वर्तमान में 1.52 लाख रुपये है। राज्य की प्रगति के साथ प्रदेश के नागरिकों के जीवन स्तर में भी वृद्धि हुई है। तीसरा सबसे ज्यादा गेहूं उत्पादक राज्य कृषि के क्षेत्र में प्रदेश ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं, देश के किसी भी राज्य को लगातार सात बार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त नहीं हुए यह खिताब मध्य प्रदेश ने हासिल किया है। गेहूं की पैदावार में मध्य प्रदेश देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है। दलहन उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। कपास उत्पादन में देश में प्रदेश का पांचवा स्थान है। जाहिर है कृषि क्षेत्र में प्रदेश ने काफी उन्नति की है। सवा सात करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदेश में उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिलाकर 3,08,252 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसमें से 93,000 वर्ग किलोमीटर इलाका जनजाति क्षेत्र में है। ग्रामीण क्षेत्र 309505.59 वर्ग किलोमीटर है, शहरी क्षेत्र में 7746 वर्ग किलोमीटर है, इस प्रकार 97.49 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार है। इस तरह प्रदेश की 7.26 करोड़ जनसंख्या तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। बजट बढ़कर कई गुना हुआ वर्ष 2000-2001 राज्य का बजट 1,06,393 करोड़ रुपये का था, जो वर्ष 2024-25 में 3,26,383 करोड़ रुपये का अनुमानित है। राज्य में वर्तमान में 8586 शाखाओं के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं प्रदान की जा रही है। जो 33 प्रतिशत ग्रामीण और 67 प्रतिशत नगरीय क्षेत्रों में है। इसके अतिरिक्त 38 जिला सहकारी बैंक 4536 प्राथमिक कृषि ऋण समिति भी कार्यरत है। निवेश के नए द्वार खुले उद्योग, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन जैसे कई क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने प्रगति की है। प्रदेश में निवेश के नए द्वार खोले हैं और नई सुविधाएं मुहैया करवाने की घोषणाए की हैं। प्रदेश में रोजगार पर्याप्त उपलब्ध करवाया जा रहा है। प्रदेश के युवकों को रोजगार मिले इसके लिए प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया गया, प्रदेश में निवेश के लिए इंवेस्टर समिट का लगातार आयोजन किया जा रहा है। इससे उद्योगों को उचित सुविधा देकर प्रदेश में आमंत्रित किया जा रहा है। परिवहन के क्षेत्र में प्रदेश ने नए आयाम स्थापित किए हैं। मध्य प्रदेश के गठन से आज तक की स्थिति एक नजर में… क्रमांक विवरण वर्ष 1956 वर्ष 2025 1 क्षेत्रफल (वर्ग किमी) 4,43,452 3,08,000 2 जिले (संख्या) 43 55 3 संभाग (संख्या) 8 10 4 प्रतिव्यक्ति आय (रुपये में) 261 1,52,615 5 जनसंख्या 2,60,71,637 7,26,26,809 (2011 जनगणना के अनुसार अनुमानित 2025) 6 साक्षरता प्रतिशत (%) 16.83 69.32 7 शिक्षण संस्थाएं (संख्या) 22,800 79,215 8 विश्वविद्यालय (संख्या) 1 16 9 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (संख्या) 100 1,440 10 स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय (करोड़ रुपये में) 10 15,744 11 सड़कें (कुल लंबाई किमी में) 28,173 80,875 12 रेलमार्ग (किमी में) 4,891 5,188 13 वन क्षेत्र (वर्ग किमी) 1,56,386 (छत्तीसगढ़ का भाग शामिल) 85,724 14 सिंचित कृषि क्षेत्र (लाख हेक्टेयर में) 8.24 55 15 प्रदेश का … Read more

पीएम मोदी पहुंचे सत्य साईं संजीवनी हॉस्पिटल, बाल हृदय रोगियों से की खास मुलाकात

रायपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज रायपुर के एक दिवसीय दौरे पर हैं. एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद वे श्री सत्य साईं संजीवनी चाइल्ड हार्ट हॉस्पिटल पहुंचे. यहां वे “दिल की बात” कार्यक्रम में करी शिरकत. इस दौरान हृदय रोग का सफल ऑपरेशन करा चुके करीब 2500 बच्चों के साथ संवाद किया . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रायपुर पहुंचने से पहले सोशल मीडिया एक्स पर प्रदेशवासियों को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की बधाई दी है. उन्होंने पोस्ट करते हुए लिखा कि “छत्तीसगढ़ के अपने सभी भाई-बहनों को राज्य के स्थापना दिवस की 25वीं वर्षगांठ की अनेकानेक शुभकामनाएं. प्रकृति और संस्कृति को समर्पित यह प्रदेश आज प्रगति के नित-नए मानदंड गढ़ने में जुटा है. कभी नक्सलवाद से प्रभावित रहे यहां के कई इलाके आज विकास की प्रतिस्पर्धा कर रहे. मुझे भरोसा है कि यहां के मेहनती और हुनरमंद लोगों की लगन और उद्यम से हमारा यह राज्य विकसित भारत के विजन को साकार करने में अहम भूमिका निभाएगा. दोपहर में प्रधानमंत्री आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी संग्रहालय का उद्घाटन कर उसका भ्रमण करेंगे. इसके बाद वे नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव समारोह का शुभारंभ करेंगे. राज्योत्सव के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री शाम 4:20 बजे रायपुर हवाई अड्डे के लिए रवाना होंगे और 4:25 बजे विमान से दिल्ली के लिए प्रस्थान करेंगे. छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक दिन छत्तीसगढ़ राज्य के लिए आज का दिन ऐतिहासिक महत्व रखता है. साल 2000 में इसी दिन यह राज्य मध्यप्रदेश से अलग होकर अस्तित्व में आया था. इस वर्ष राज्य स्थापना दिवस का उत्साह कई गुना बढ़ गया है, क्योंकि छत्तीसगढ़ अपने गौरवशाली 25 वर्ष पूरे कर चुका है. इस खास अवसर पर राज्योत्सव मैदान में भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा, जिसमें बॉलीवुड से लेकर स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समा बांधेंगे. पांच दिनों तक यह उत्सव पूरे जोश और उमंग के साथ मनाया जाएगा.

बिहार चुनावी माहौल में गूंजा ‘मोदी-मोदी’, PM के वीडियो ने मचाया धमाल

मुजफ्फरपुर बिहार विधानसभा चुनाव के माहौल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुजफ्फरपुर यात्रा ने नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है. शुक्रवार को जब पीएम मोदी का हेलिकॉप्टर मुजफ्फरपुर में उतरा, तो हजारों समर्थकों की भीड़ 'मोदी, मोदी' के नारों से गूंज उठी. तपती दोपहर में उमस भरे माहौल के बीच प्रधानमंत्री ने अपनी पहचान बन चुके मधुबनी प्रिंट वाले गमछे को लहराकर लोगों का अभिवादन किया. इसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. करीब 30 सेकंड तक प्रधानमंत्री ने मुस्कुराते हुए गमछा लहराया और भीड़ की ओर हाथ हिलाते रहे. इसके बाद वे अपनी अगली जनसभा के लिए छपरा रवाना हो गए. यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी को बिहार में इस तरह गमछा लहराते देखा गया हो. अगस्त में भी उन्होंने औंटा-सिमरिया पुल का उद्घाटन करने के बाद इसी अंदाज में समर्थकों का अभिवादन किया था. पीएम मोदी की परंपरा रही है कि वे स्वतंत्रता दिवस जैसे मौकों पर भी पारंपरिक परिधानों, पगड़ियों और गमछों के ज़रिए स्थानीय संस्कृति को सम्मान देते हैं. गमछे के पीछे का संदेश राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बिहार में पीएम मोदी का गमछा लहराना एक प्रतीकात्मक संदेश है. बिहार और बंगाल जैसे गर्म और आर्द्र राज्यों में गमछा आम आदमी, खासकर किसानों और मजदूर वर्ग की पहचान माना जाता है. यह सिर्फ पसीना पोंछने का कपड़ा नहीं, बल्कि मेहनतकश वर्ग की जीवनशैली का हिस्सा है. खेतों में काम या रोजमर्रा के कामों में काम में आता है गमछा गमछा सिर पर बांधकर धूप से बचाव, खेतों में काम या रोजमर्रा के कामों में काम आता है. इसी कारण राजनीतिक दलों ने इसे जनसंपर्क के प्रतीक के रूप में अपनाया है. पीएम मोदी का गमछा लहराना उसी वर्ग से जुड़ाव का संदेश देता है – यह बताने के लिए कि वे किसानों और श्रमिकों के साथ खड़े हैं. आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक, बिहार की करीब 53.2% आबादी कृषि क्षेत्र से जुड़ी है. इसके अलावा बड़ी संख्या में भूमिहीन मजदूर और प्रवासी कामगार हैं जो चुनावी समीकरणों को निर्णायक रूप से प्रभावित करते हैं.  

बच्चों से लेकर रोमियो तक, 5 लाख फर्जी कॉल्स ने 108 एम्बुलेंस की सेवा बाधित की, FIR प्रक्रिया शुरू

भोपाल  भोपाल समेत पूरे मध्यप्रदेश में आपातकाली 108 एम्बुलेंस सेवा को लोगों ने मजाक बना दिया है. पिछले छह महीनों में 5.72 लाख से ज्यादा फर्जी कॉल्स आने से न केवल कॉल सेंटर का स्टाफ परेशान है, बल्कि करीब 1500 घंटे की एम्बुलेंस सेवा भी बर्बाद हो गई है. कई कॉलर गर्लफ्रेंड से ब्रेकअप, अकेलापन या मस्ती के लिए एम्बुलेंस सेवा पर फोन करते हैं. इन फर्जी कॉल्स की वजह से जरूरमतमंद मरीजों को कई बार समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल पाती है. अब इन फर्जी कॉलर्स पर एक्शन लेने की तैयारी की जा रही है.  एम्बुलेंस बुलाकर समय खराब किया भोपाल के कोलार रोड इलाके में गुरुवार को एक व्यक्ति पर एम्बुलेंस सेवा पर कॉल किया और कहा कि उसकी तबीयत खराब है. एम्बुलेंस 15 मिनट में घर पहुंची, लेकिन वहां कोई बीमार नहीं मिला. जब ईएमटी ने कॉलर को फोन किया तो उसने कहा कि अब सब ठीक है, इसकी जरूरत नहीं. करीब 30 मिनट बर्बाद हो गए. इस तरह के सैकड़ों कॉल हर रोज आते हैं. इन फर्जी कॉल से निपटने की तैयारी की जा रही है. जय अंबे हेल्थकेयर के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि अब ऐसे कॉलर्स पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी.  जय अंबे हेल्थकेयर के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने मीडिया बताया कि अब ऐसे कॉलर्स पर एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इन कॉल्स के कारण कई बार जरूरतमंद मरीजों को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल पाती। 108 सेवा आपातकालीन है। इसे मजाक या टाइमपास के लिए इस्तेमाल करना अपराध है। जानकारी के अनुसार गुरुवार को भोपाल के कोलार रोड से एक व्यक्ति ने 108 पर कॉल किया कि उसकी तबीयत बहुत खराब है। एम्बुलेंस 15 मिनट में घर पहुंची, लेकिन न कोई बीमार मिला, न परिवारजन। जब ईएमटी ने कॉलर को फोन किया तो उसने कहा अब सब ठीक है, जरूरत नहीं। करीब 30 मिनट ऐसे ही बर्बाद हो गए। यह अकेला मामला नहीं, ऐसे हजारों कॉल रोज आते हैं। कॉल सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ कॉलर्स तो 150 से 200 बार बिना वजह फोन करते हैं। इनमें बच्चे, नशे में धुत युवक और रोमियो टाइप लोग शामिल हैं। कुछ कॉलर्स तो कॉल सेंटर में बैठी महिला स्टाफ से बातचीत करने या उन्हें परेशान करने के लिए बार-बार कॉल करते हैं। इन कॉलर्स के नंबर ट्रैक कर भविष्य में सीधा कानूनी एक्शन लिया जाएगा। इसके लिए कंपनी एक स्टडी कर रही है, जिससे इनकी पहचान की जा सके। 108 कॉल सेंटर की हर लाइन कुछ सेकेंड के लिए व्यस्त होती है। एक झूठे कॉलर के कारण असली मरीज की कॉल मिस हो जाती है। औसतन हर दिन एम्बुलेंस को 50-60 किलोमीटर तक झूठी सूचनाओं के चलते दौड़ लगानी पड़ती है। तरुण सिंह परिहार के मुताबिक, “एक झूठी कॉल किसी जरूरतमंद की मौत की वजह बन सकती है। क्योंकि जब तक हमारी एम्बुलेंस वापस लौटती है, किसी और को मदद की ज़रूरत पड़ जाती है।" पहले बुलाई एम्बुलेंस फिर कहा अब जरूरत नहीं गुरुवार को कोलार रोड के एक व्यक्ति ने 108 पर कॉल किया कि उसकी तबीयत बहुत खराब है। एम्बुलेंस 15 मिनट में घर पहुंची, लेकिन न कोई बीमार मिला, न परिवारजन। जब ईएमटी ने कॉलर को फोन किया तो उसने कहा अब सब ठीक है, जरूरत नहीं। करीब 30 मिनट ऐसे ही बर्बाद हो गए। यह अकेला मामला नहीं, ऐसे सैकड़ों कॉल रोज आते हैं। फर्जी कॉलर्स की पहचान के लिए हो रही स्टडी कॉल सेंटर के आंकड़ों के मुताबिक, कुछ कॉलर्स तो 150 से 200 बार बिना वजह फोन करते हैं। इनमें बच्चे, नशे में धुत युवक और रोमियो टाइप लोग शामिल हैं। कुछ कॉलर्स तो कॉल सेंटर में बैठी महिला स्टाफ से बातचीत करने या उन्हें परेशान करने के लिए बार-बार कॉल करते हैं। इन कॉलर्स के नंबर ट्रैक कर भविष्य में सीधा कानूनी एक्शन लिया जाएगा। इसके लिए कंपनी एक स्टडी कर रही है, जिससे इनकी पहचान की जा सके। कैसे फर्जी कॉल्स बिगाड़ रहे सिस्टम 108 कॉल सेंटर की हर लाइन कुछ सेकेंड के लिए व्यस्त होती है। एक झूठे कॉलर के कारण असली मरीज की कॉल मिस हो जाती है। औसतन हर दिन एम्बुलेंस को 50-60 किलोमीटर तक झूठी सूचनाओं के चलते दौड़ लगानी पड़ती है। तरुण सिंह परिहार के मुताबिक, “एक झूठी कॉल किसी जरूरतमंद की मौत की वजह बन सकती है। क्योंकि जब तक हमारी एम्बुलेंस वापस लौटती है, किसी और को मदद की ज़रूरत पड़ जाती है।”

जनता दर्शन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुनीं 200 लोगों की समस्याएं

जनता की समस्याओं के समाधान को संकल्पित है सरकार : मुख्यमंत्री जनता दर्शन में सीएम योगी आदित्यनाथ ने सुनीं 200 लोगों की समस्याएं अधिकारियों को दिए निर्देश – शीघ्रता से करें समस्याओं का निस्तारण गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर प्रवास के दौरान शनिवार सुबह जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनकी सरकार जनता की समस्याओं के समाधान को संकल्पबद्ध है। किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। इस दौरान उन्होंने अफसरों को निर्देश दिया वे तत्परता और संवेदनशीलता से यह सुनिश्चित करें कि हर पात्र को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले, जबरन जमीन कब्जाने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई हो। अपराधियों पर सख्त कार्रवाई की जाए और बिना भेदभाव सबको न्याय मिले।  प्रतिकूल मौसम के चलते इस बार जनता दर्शन का आयोजन गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन सभागार में किया गया था। जनता दर्शन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने करीब 200 लोगों की समस्याएं सुनीं। सीएम से मिलकर अपनी समस्या बताने वालों में महिलाओं की संख्या अधिक रही। सभागार में कुर्सियों पर बैठे लोगों के पास सीएम योगी खुद गए। उनकी समस्याओं व शिकायतों को इत्मीनान से सुना और समझा। सबके प्रार्थना पत्रों को संबंधित अधिकारियों को संदर्भित करते हुए त्वरित और संतुष्टिपरक निस्तारण का निर्देश देने के साथ लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर पीड़ित की समस्या का समाधान कराने के लिए दृढ़ संकल्पित है। अपराध से संबंधी शिकायतों पर मुख्यमंत्री ने पुलिस अधिकारियों को अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए।  हर बार की तरह इस बार भी जनता दर्शन में कई लोग गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए आर्थिक मदद की गुहार लेकर आए थे। उनसे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि धन के अभाव में किसी का इलाज नहीं रुकेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जो भी जरूरतमंद हैं, प्रशासन उनके उच्च स्तरीय इलाज का इस्टीमेट शीघ्रता से बनवाकर उपलब्ध कराए। इस्टीमेट मिलते ही सरकार तुरंत धन उपलब्ध कराएगी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश स्थापना दिवस पर जनता को दी हार्दिक शुभकामनाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेशवासियों को दी राज्य के स्थापना दिवस की शुभकामनाएं विकास की 70 साल की लंबी यात्रा आत्मनिर्भर, समृद्ध और सशक्त बनता मध्यप्रदेश भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को मध्यप्रदेश के 70 वें स्थापना दिवस की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश अब 70 साल का हो गया है। अपनी गौरवशाली विकास यात्रा का 70वां स्थापना दिवस मना रहा है। उन्होंने कहा कि 1 नवंबर 1956 को गठित यह राज्य न केवल भारत के हृदय में स्थित है, बल्कि देश के विकास मानचित्र पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश की यह 70 वर्षीय यात्रा समर्पण, संकल्प और सतत् विकास की सुखद यात्रा रही है। यह दिन हमें हमारे पूर्वजों की मेहनत, उनके जज्‍बे, जनभागीदारी से विकास और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति उनकी एवं हम सभी की आस्था और निष्ठा की याद दिलाता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बीते सात दशकों में मध्यप्रदेश ने हर क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। कभी “बीमारू” कहे जाने वाले इस राज्य ने आज कृषि, सिंचाई, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। हमारा मध्यप्रदेश आज देश का “फूड बास्केट” कहलाता है, जहां अन्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता के साथ ही किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में अनेक योजनाएं सफलतापूर्वक लागू की गई हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि “देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण मिशन” और “लाड़ली लक्ष्मी योजना” जैसी योजनाएं महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन गई हैं। युवाओं के लिए “मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना” और “स्टार्टअप मध्यप्रदेश” जैसे कार्यक्रम रोजगार और नवाचार के नए द्वार खोल रहे हैं। वहीं प्रदेश में सुशासन एवं नवाचारों ने शासन को जनता के द्वार तक पहुंचाने का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश अब “विकसित भारत @ 2047” के विज़न और संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। स्मार्ट शहरों, हरित ऊर्जा, जल संरक्षण, डिजिटल गवर्नेंस और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में तेज गति से काम हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र को आत्मसात करते हुए मध्यप्रदेश आज एक आत्मनिर्भर प्रदेश के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश अब केवल भौगोलिक रूप से ही नहीं, बल्कि सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और पर्यटन राज्य के रूप में भी देश के हृदय और धमनियों के रूप में धड़क रहा है। विकास को लेकर हमारी दिशा और लक्ष्य स्पष्ट है कि प्रदेश के हर नागरिक तक विकास का लाभ पहुंचे, हर हाथ को काम मिले, हर घर में खुशहाली हो और हर मन में मध्यप्रदेशवासी होने के गर्व का भाव जागे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का यह 70वां स्थापना दिवस एक अवसर है अतीत की उपलब्धियों को स्मरण करने और भविष्य के स्वर्णिम लक्ष्य तय करने का। स्थापना दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के सभी नागरिकों से आह्वान किया कि हम सब एकजुट होकर “विकसित, आत्मनिर्भर और सशक्त मध्यप्रदेश” के निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं। सामूहिक सहभागिता से अपनी मिट्टी को, अपनी मातृभूमि को, अपने प्रदेश को हर क्षेत्र में सबसे आगे रखकर अग्रणी बनाने का यही सही अवसर है‌।