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PM मोदी ने समस्तीपुर में किया कर्पूरी ठाकुर की प्रतिमा पर माल्यार्पण, श्रद्धांजलि अर्पित

समस्तीपुर  बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग से पहले राज्य का सियासी तापमान हाई हो गया है. नेताओं के बीच सियासी जुबानी जंग तेज हो गई है. वहीं, एनडीए के चुनाव अभियान के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 24 अक्टूबर (शुक्रवार) को बिहार का दौरा करेंगे. पीएम मोदी अपने दौरे की शुरुआत समस्तीपुर के कर्पूरी गांव से करेंगे और नेता कर्पूरी ठाकुर को श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. इसके बाद वे समस्तीपुर के दुधपुरा और बाद में बेगूसराय में चुनावी रैलियां करेंगे.  अमित शाह दो दिवसीय दौरे पर पटना पहुंचेंगे और 24 अक्टूबर को सीवान और बक्सर में, फिर 25 अक्टूबर को बिहारशरीफ, मुंगेर और खगड़िया में रैलियों को संबोधित करेंगे. वहीं, राजद नेता तेजस्वी यादव 24 अक्टूबर से बिहार में अपने चुनाव अभियान की शुरुआत करेंगे. 24 अक्टूबर को तेजस्वी का अभियान सिमरी बख्तियारपुर में एक रैली के साथ शुरू होगा, जिसके बाद वे केवटी, पारू और उजियारपुर में रुकेंगे. तेजस्वी का चुनावी दौरा सहरसा, दरभंगा, मुजफ्फरपुर और वैशाली में भी होगा. बिहार चुनाव की हर अपडेट के लिए बने रहिए जी बिहार झारखंड के साथ. यहां आपको हर सियासी जानकारी मिलेगी.  ‘हमारी सरकार में कानून का राज’, समस्तीपुर रैली में CM नीतीश ने कहा ‘वो अपने परिवार के लिए काम करते हैं’, समस्तीपुर रैली में CM नीतीश का RJD पर हमला ‘बिहार को बड़ी आर्थिक मदद दी’, समस्तीपुर रैली में बोले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार  ‘1.2 करोड़ महिलाओं को रोजगार दिया’, समस्तीपुर रैली में बोले CM नीतीश बिहार के समस्तीपुर में भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर के परिजनों से PM नरेंद्र मोदी मिले

छत्तीसगढ़ रजत जयंती विशेष : समय पर छात्रवृत्ति वितरण से शिक्षा बनी सुलभ, सुशासन की नई पहल पर फोकस

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय की विशेष पहल पर राज्य के शैक्षणिक संस्थानों, आश्रम-छात्रावासों और तकनीकी एवं प्रोफेशनल पाठ्यक्रम में पढ़ाई करने वाले अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को शिष्यवृत्ति एवं छात्रवृत्ति का भुगतान निर्धारित समय-सीमा में उनके बैंक खाते में ऑनलाईन होने से अब उक्त वर्ग के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा की राह आसान हो गई है। मुख्यमंत्री  साय ने हाल ही में मंत्रालय, महानदी भवन से इन वर्गों के लगभग 2 लाख विद्यार्थियों के बैंक खातों में 84.66 करोड़ रूपए की शिष्यवृत्ति एवं छात्रवृत्ति ऑनलाईन अंतरित की है।  उल्लेखनीय है कि विद्यार्थियों को शिष्यवृत्ति और छात्रवृत्ति ऑनलाईन भुगतान की शुरूआत मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के हाथों पहली बार 10 जून 2025 को हुई। राज्य में संचालित सभी प्री. मैट्रिक छात्रावासों एवं आश्रमों में प्रवेशित बच्चों को शैक्षणिक सत्र प्रारंभ होने के पूर्व ही शिष्यवृति की प्रथम किश्त राशि 77 करोड़ रूपए एवं पोस्ट मैट्रिक छात्रावासों में अध्ययनरत छात्रों हेतु भोजन सहाय की प्रथम किश्त के रूप में राशि 8.93 करोड़ रूपए, इस प्रकार कुल 85 करोड़ रूपए की राशि जारी कर एक अभिनव पहल की गई थी। इसके ठीक बाद दूसरे चरण में 17 जून 2025 को 8370 विद्यार्थियों को छात्रवृति की राशि 6.2 करोड़ रूपए का ऑनलाइन अंतरण किया गया था।  मुख्यमंत्री  साय के हाथों आश्रम-छात्रावासों के 1 लाख 86 हजार 50 विद्यार्थियों को शिष्यवृति की द्वितीय किश्त की राशि 79 करोड़ 27 लाख रूपए एवं पो. मैट्रिक छात्रवृत्ति के 12 हजार 142 विद्यार्थियों को 5 करोड़ 38 लाख 81 हजार रूपए उनके बैंक खातों में राशि अंतरित की गई है।  गौरतलब है कि मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने शिक्षा को सबके लिए आसान बनाने  के उद्देश्य से अनुसूचित जाति, जनजाति व पिछड़ा वर्ग तथा कमजोर वर्गों के छात्र-छात्राओं की शिक्षा चिंता की और उन्होंने आदिमजाति, अनुसूचित जाति, पिछड़ा वर्ग एवं अल्प संख्यक कल्याण विभाग द्वारा संचालित आश्रम -छात्रावास में रहकर शिक्षा अध्ययन कर रहे के बच्चों के शिक्षा को आसान बनाने के लिए यह नयी पहल की है। आदिम जाति विकास मंत्री  रामविचार नेताम के नेतृत्व और विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणी बोरा के गहन प्रयासों से  कमजोर वर्गाें के विकास एवं उन्हें विकास की मुख्यधारा में लाने बिना रूकावट के शिक्षा ग्रहण हेतु सुविधा प्रदान करने का यह प्रयास सार्थक हो रहा है।  आदिम जाति कल्याण विकास विभाग के प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा के प्रयासों से प्री. मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति तथा शिष्यवृत्ति भुगतान के लिए नयी व्यवस्था में माह जून, सितंबर, अक्टूबर एवं दिसंबर में विद्यार्थियों को अब ऑनलाईन भुगतान किया जा रहा है। इस पहल से विद्यार्थियों को शैक्षणिक अध्ययन के दौरान होने वाली आर्थिक समस्या से निजात मिली है। यहां यह उल्लेखनीय है कि इस नयी व्यवस्था से पूर्व विद्यार्थियों को दिसंबर एवं फरवरी-मार्च में वर्ष में एक बार छात्रवृति एवं शिष्यवृति की राशि प्रदान की जाती थी।    दरअसल आश्रम छात्रावास में रहकर शिक्षा ग्रहण कर रहे विद्यार्थी हो या यहां रहकर अध्ययन कर चुके विद्यार्थी हो अथवा आश्रम छात्रावासों में रहकर उच्च पदों में कार्य कर रहे विद्यार्थी क्यों न हो। वे समय पर स्कॉलरशिप नहीं मिलने के कारण की परेशानियों से भलीभांति वाकिफ हैं। वास्तव में एक विद्यार्थी को अध्ययन सामग्री क्रय करने के लिए जब पैसे की जरूरत हो उस वक्त छात्रवृत्ति और शिष्यवृत्ति की राशि उनके बैंक खातों में पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण होता है। छात्रावासी विद्यार्थियों की इस परेशानी को दूर करने के लिए प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा सहित विभागीय अमलों ने संवेदनशीलता के साथ कितनी मशक्कत की होगी यह किसी से छिपा नहीं है। इसी का परिणाम है कि विभाग आश्रम छात्रावास के बच्चों के छात्रवृत्ति के लिए की गई तय सीमा से लाखों विद्यार्थियों को लाभ मिलना लाजिमी है। छात्रावास में रहने वाले बच्चों की अधिकतर आवश्यकताएँ सरकार द्वारा पूरी की जाती हैं, लेकिन छात्रवृत्ति उन्हें व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने की स्वतंत्रता देती है। इससे वे किताबें, स्टेशनरी व अन्य जरूरी सामान स्वयं खरीद सकते हैं। जब यह सहायता समय पर मिलती है, तो विद्यार्थी बिना किसी चिंता के अपनी पढ़ाई जारी रख पाते हैं और उनका ध्यान पढ़ाई से भटकता नहीं है। समय पर छात्रवृत्ति मिलने से बच्चों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है।  समय पर छात्रवृत्ति मिलने से न केवल बच्चों की शैक्षिक यात्रा आसान होती है, बल्कि उन्हें उच्च शिक्षा की ओर बढ़ने का प्रोत्साहन भी मिलता है। वे यह सोचने लगते हैं कि यदि अभी उन्हें सहायता मिल रही है तो आगे भी मिलेगी, जिससे वे कॉलेज या व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की ओर अग्रसर होते हैं। इससे राज्य में एक शिक्षित, आत्मनिर्भर और जागरूक युवा पीढ़ी का निर्माण होता है। अंत में, यह कहा जा सकता है कि विद्यार्थियों को निर्धारित समय पर स्कॉलरशिप देने की प्रक्रिया से छत्तीसगढ़ में समावेशी शिक्षा को प्रोत्साहन मिलेगा। इससे विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को शिक्षा ग्रहण करने में आसान होगी।  डॉ. ओम प्रकाश डहरिया

मुख्यमंत्री योगी ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पांच गुना तक वृद्धि का निर्णय

मुख्यमंत्री योगी का बड़ा निर्णय, 30 वर्ष बाद बढ़ेंगे पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के वित्तीय अधिकार मुख्यमंत्री योगी ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पांच गुना तक वृद्धि का निर्णय वर्ष 1995 में तय सीमाएं अब पुरानी, लागत बढ़ने के अनुरूप अब हो रहा वित्तीय अधिकारों का पुनर्निर्धारण मुख्य अभियंता को अब ₹10 करोड़, अधीक्षण अभियंता को ₹5 करोड़ तक कार्य स्वीकृति का अधिकार अधिशासी अभियंता और सहायक अभियंता के अधिकारों में भी बढ़ोतरी से निर्णय प्रक्रिया होगी त्वरित मुख्यमंत्री के निर्णय से निविदा, अनुबंध व कार्यारंभ प्रक्रिया में तेजी, प्रशासनिक दक्षता व पारदर्शिता में वृद्धि होगी उत्तर प्रदेश अभियंता सेवा (लोक निर्माण विभाग) (उच्चतर) नियमावली, 1990 में होगा संशोधन विद्युत एवं यांत्रिक संवर्ग में पहली बार मुख्य अभियंता (स्तर-एक) का नया पद शामिल मुख्य अभियंता (स्तर-दो) और अधीक्षण अभियंता के पदों की संख्या बढ़ी, पदोन्नति प्रक्रिया स्पष्ट होगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लोक निर्माण विभाग के विभागीय अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों में पाँच गुना तक की वृद्धि किए जाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि बदलावों से विभागीय अधिकारियों को निर्णय लेने में अधिक स्वायत्तता प्राप्त होगी। उच्च स्तर पर अनुमोदन की आवश्यकता घटने से निविदा, अनुबंध गठन एवं कार्यारंभ की प्रक्रिया में गति आएगी। यह सुधार वित्तीय अनुशासन बनाए रखते हुए प्रशासनिक दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाने में सहायक होगा। शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की बैठक में यह तथ्य सामने आया कि विभाग के अधिकारियों के वित्तीय अधिकार वर्ष 1995 में निर्धारित किए गए थे। इस बीच निर्माण कार्यों की लागत में पाँच गुना से अधिक की वृद्धि हुई है। कॉस्ट इन्फ्लेशन इंडेक्स के अनुसार वर्ष 1995 की तुलना में वर्ष 2025 तक लगभग 5.52 गुना वृद्धि दर्ज की गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान परिदृश्य में वित्तीय अधिकारों का पुनर्निर्धारण आवश्यक है, जिससे निर्णय प्रक्रिया में तेजी आए और परियोजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध रूप से किया जा सके। अपर मुख्य सचिव, लोक निर्माण विभाग ने मुख्यमंत्री को सिविल, विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों के लिए वित्तीय अधिकारों की वर्तमान व्यवस्था की जानकारी दी। विमर्श के उपरांत निर्णय लिया गया कि सिविल कार्यों के लिए अधिकारियों के वित्तीय अधिकारों की सीमा अधिकतम पाँच गुना तक तथा विद्युत एवं यांत्रिक कार्यों के लिए कम से कम दो गुना तक बढ़ाई जाएगी। मुख्यमंत्री के निर्णय के अनुसार मुख्य अभियंता को अब ₹2 करोड़ के स्थान पर ₹10 करोड़ तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार होगा। अधीक्षण अभियंता को ₹1 करोड़ से बढ़ाकर ₹5 करोड़ तक के कार्यों की स्वीकृति का अधिकार दिया जाएगा। अधिशासी अभियंता के वित्तीय अधिकार ₹40 लाख से बढ़ाकर ₹2 करोड़ किए जाएंगे। सहायक अभियंता को भी सीमित दायरे में टेंडर स्वीकृति एवं छोटे कार्यों की अनुमति देने के अधिकार बढ़ाए जाएंगे। बता दें कि यह पुनर्निर्धारण तीन दशकों के बाद होने जा रहा है। बैठक में उत्तर प्रदेश अभियंता सेवा (लोक निर्माण विभाग) (उच्चतर) नियमावली, 1990 में संशोधन के माध्यम से विद्युत एवं यांत्रिक संवर्ग की सेवा संरचना, पदोन्नति व्यवस्था तथा वेतनमान के पुनर्गठन से जुड़े प्रस्तावों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बैठक में बताया गया कि नियमावली में किया जा रहा यह संशोधन विभागीय अभियंताओं की सेवा संरचना को वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से किया गया है। संशोधित नियमावली में विद्युत एवं यांत्रिक संवर्ग में पहली बार मुख्य अभियंता (स्तर-एक) का नया पद सम्मिलित किया गया है। इसके साथ मुख्य अभियंता (स्तर-दो) और अधीक्षण अभियंता के पदों की संख्या में वृद्धि की गई है। नवसृजित पदों को नियमावली में समाहित करते हुए उनके पदोन्नति स्रोत, प्रक्रिया और वेतनमान को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है, जिससे सेवा संरचना अधिक पारदर्शी और संगठित हो सके। बैठक में यह भी बताया गया कि मुख्य अभियंता (स्तर-एक) के पद पर पदोन्नति अब मुख्य अभियंता (स्तर-दो) से वरिष्ठता के आधार पर की जाएगी। इसी प्रकार मुख्य अभियंता (स्तर-दो) और अधीक्षण अभियंता के पदों पर भी पदोन्नति की प्रक्रिया को नियमावली में स्पष्ट किया गया है। सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप अधिशासी अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता (स्तर-एक) तक के पदों के वेतनमान और मैट्रिक्स पे लेवल भी निर्धारित किए गए हैं। इसके साथ चयन समिति की संरचना को अद्यतन किया गया है, ताकि पदोन्नति और नियुक्ति की कार्यवाही अधिक पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ की जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोक निर्माण विभाग राज्य की विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन में एक प्रमुख विभाग है, इसलिए अभियंताओं की सेवा नियमावली को समयानुकूल, व्यावहारिक और पारदर्शी बनाना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि योग्यता, अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति व्यवस्था से विभाग की कार्यकुशलता, तकनीकी गुणवत्ता और सेवा भावना को नई दिशा मिलेगी।

दो आतंकी दबोचे गए, ISI कनेक्शन सामने आया, जानें उनका फिदायीन हमला का प्लान

भोपाल/ दिल्ली  देश में बड़े आईएसआई मॉड्यूल का पर्दाफाश हुआ है. आईएसआईएस से जुड़े 2 आतंकी पकड़े गए हैं. दिल्ली पुलिस ने साउथ दिल्ली के निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन से एक आतंकी को गिरफ्तार किया है, जबकि दूसरा मध्य प्रदेश के भोपाल से पकड़ा गया है. दोनों संदिग्ध आतंकी की उम्र 20-26 वर्ष के बीच बताई जा रही है. ये देश में फिदायीन हमले की फिराक में थे. इन दोनों आतंकियों के पाकिस्तानी आईएसआई से लिंक सामने आए हैं. गिरफ्तार आतंकियों के पास से कई संदिग्ध सामग्री बरामद हुई हैं. प्रारंभिक पूछताछ में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के हैंडलर्स से सीधे संपर्क का खुलासा हुआ है. ये आतंकी किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने के फिराक में थे. सूत्रों के मुताबिक, ये आतंकी ऑनलाइन रेडिकलाइज्ड थे. यह मॉड्यूल दिल्ली-एनसीआर समेत कई शहरों में किसी बड़ी वारदात की साजिश रच रहा था. फिलहाल मामले की पूरी जांच जारी है, और अन्य संदिग्धों की तलाश में छापेमारी की जा रही है. यह कार्रवाई भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, उन दोनों में से एक आतंकी का नाम अदनान है. दिल्ली के सादिक नगर और भोपाल से दोनों आतंकियों की गिरफ्तारी हुई है. दोनों आतंकी फिदायीन अटैक करने की ट्रेनिंग भी ले रहे थे. विस्तृत जानकारी का इंतजार है.  

नवा रायपुर में राज्योत्सव और प्रधानमंत्री के प्रवास को लेकर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने की तैयारियों की समीक्षा

रायपुर : उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने वन एवं पर्यावरण मंत्री  केदार कश्यप और वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी के साथ राज्योत्सव व प्रधानमंत्री के नवा रायपुर प्रवास की तैयारियों की समीक्षा की अधिकारियों को दिए आवश्यक दिशा-निर्देश  रायपुर उप मुख्यमंत्री  अरुण साव  उप मुख्यमंत्री  अरुण साव ने नवा रायपुर स्थित विश्राम भवन में वन एवं पर्यावरण मंत्री  केदार कश्यप तथा वित्त मंत्री  ओ.पी. चौधरी के साथ राज्योत्सव तथा प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नवा रायपुर प्रवास की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने राज्योत्सव की तैयारियों में जुटे अधिकारियों के साथ विभिन्न व्यवस्थाओं की गहन समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।  उप मुख्यमंत्री  साव ने अधिकारियों को संपूर्ण आयोजन में किसी भी तरह की कोताही न बरतते हुए पूरी क्षमता और योग्यता से समय पूर्व सभी तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की स्थापना के रजत जयंती वर्ष में राज्योत्सव पर प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के आगमन को ऐतिहासिक और यादगार बनाना है। इसके लिए तैयारियों में कोई कोर-कसर न छोड़ें। प्रधानमंत्री के प्रवास के दौरान सभी कार्यक्रमों के भव्य और सुव्यवस्थित आयोजन के लिए तेजी से कार्य करते हुए सभी व्यवस्थाओं को मूर्त रूप दें। उप मुख्यमंत्री  साव तथा मंत्रीद्वय  केदार कश्यप और  ओ.पी. चौधरी ने राज्योत्सव के लिए विभिन्न व्यवस्थाओं के प्रभारी अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्यक्रम स्थल पर सेक्टर्स की स्थिति, बैठक क्षमता, परिक्रमा पथ के लोकेशन एवं सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की। बैठक में पुलिस बल की तैनाती, पार्किंग व्यवस्था व पेयजल व्यवस्था के साथ ही वीवीआईपी सेक्टर की क्षमता, सुव्यवस्थित पहुंच मार्ग तथा सभी कार्यक्रमों के व्यवस्थित आयोजन की रुपरेखा पर भी विस्तार से चर्चा हुई। आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव  अंकित आनंद, रायपुर के कलेक्टर डॉ. गौरव सिंह, संस्कृति विभाग के संचालक  विवेक आचार्य, रायपुर नगर निगम के आयुक्त  विश्वदीप और लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता  वी.के. भतपहरी भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

पाकिस्तान पर बढ़ा दबाव: अफगानिस्तान भी रोकेगा पानी, कुनार नदी पर बांध का ऐलान

काबुल  भारत के बाद अब अफगानिस्तान भी पाकिस्तान की जल आपूर्ति को प्रतिबंधित कर सकता है. तालिबान के उप सूचना मंत्री मुजाहिद फाराही ने ऐलान किया है कि जल एवं ऊर्जा मंत्रालय को तालिबान के सर्वोच्च नेता शेख हिबतुल्लाह अखुंदजादा से कुनार नदी पर बिना किसी देरी के बांधों का निर्माण शुरू करने के निर्देश मिले हैं. यह नदी पाकिस्तान में बहती है और पाकिस्तान के लिए पानी का एक बड़ा सोर्स है.  मुजाहिद फाराही के मुताबिक, अमीर अल-मुमिनीन ने मंत्रालय को विदेशी फर्मों का इंतजार करने के बजाय घरेलू अफगान कंपनियों के साथ अनुबंध करने का आदेश दिया है. इस बीच, जल एवं ऊर्जा मंत्री मुल्ला अब्दुल लतीफ मंसूर ने जोर देते हुए कहा, "अफगानों को अपने जल संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार है." घरेलू कंपनियों से जल्द अनुबंध करने का निर्देश उप सूचना मंत्री मुजाहिद फाराही ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी है कि सर्वोच्च नेता शेख हिबतुल्लाह अखुंदजादा ने कुनार नदी पर बांधों का निर्माण तुरंत शुरू करने के लिए जल एवं ऊर्जा मंत्रालय को निर्देश दिए हैं. इन निर्देशों में यह भी शामिल है कि विदेशी कंपनियों के बजाय घरेलू अफगान कंपनियों के साथ अनुबंध किए जाएं, जिससे काम में देरी न हो. अफगानों को अपने जल पर अधिकार जल एवं ऊर्जा मंत्री मुल्ला अब्दुल लतीफ मंसूर ने इस कदम का सपोर्ट करते हुए बड़ा बयान दिया है. उन्होंने साफ किया है कि अफगानों को अपने जल संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार है.  काबुल और कुनार नदी, जो पाकिस्तान में बहती है, पाकिस्तान में पानी का एक बड़ा स्रोत रही है. जब भारत ने रोका पानी… पिछले दिनों पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने भी पाकिस्तान के साथ हुई जल संधि रद्द कर दी और जल आपूर्ति पर प्रतिबंध लगाने की बातें की गई थीं. कश्मीर में 26 नागरिकों के मारे जाने के तुरंत बाद, सरकार ने 1960 की सिंधु जल संधि में अपनी भागीदारी सस्पेंड कर दी थी, जो सिंधु नदी सिस्टम के इस्तेमाल को कंट्रोल करती है. इनमें से एक मुख्य योजना चिनाब नदी पर रणबीर नहर की लंबाई को दोगुना करके 120 किमी करने की है, जो भारत से होकर पाकिस्तान के पंजाब के कृषि क्षेत्र तक जाती है. 

टूरिस्टों के लिए अब सफारी का नया अंदाज: इटावा पार्क में चलें आकर्षक मिनी बसों में

इटावा इटावा सफारी पार्क में आने वाले पर्यटकों को सफारी की सैर कराने के लिए दो नई आकर्षक मिनी बस पहुंच रहीं हैं। इन बसों में पर्यटकों की सुविधा के हिसाब से डिजाइन किया गया है। अभी राजगीर सफारी में इसी तरह की बसों से पर्यटकों को सैर कराई जाती है अब यह बसें इटावा सफारी में भी पर्यटकों को घुमाएंगी। इनमें बैठकर पर्यटक आसानी से वन्य जीवों के दीदार कर सकेंगे। सफारी में जो व्यवस्था की गई है उसमें लायन सफारी में शेर खुले में भ्रमण कर रहे हैं और पर्यटक बंद वाहनों से इनका दीदार करते हैं। इस कार्य में अब इन बसों की सेवाएं भी ली जाएंगी।   इसके साथ ही इन बसों में यह व्यवस्था भी की गई है कि सफारी के वन्यजीवों के बारे में भी पर्यटकों को बसों में बैठे बैठे पूरी जानकारी मिलेगी। सफारी के शेरों का इतिहास भी बताया जाएगा। सफारी पार्क के निदेशक डा. अनिल पटेल ने बताया कि दो नई बसों की खरीद की गई है। जल्द ही यह सफारी पार्क पहुंच जाएंगी। इससे पर्यटकों का आवागमन सुगम होगा।  

अभिनव बिंद्रा रचेंगे नई इतिहास—2026 विंटर ओलंपिक में उठाएंगे मशाल

नई दिल्ली ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता अभिनव बिंद्रा को अगले वर्ष होने वाले शीतकालीन ओलंपिक 2026 के लिए मशालवाहक के रूप में चुना गया है। यह खेल आयोजन 6 से 22 फरवरी, 2026 तक मिलान और कोर्टिना डी'अमपेत्जो (इटली) में आयोजित किया जाएगा। अभिनव बिंद्रा ने इस अवसर पर अपनी खुशी सोशल मीडिया पर व्यक्त करते हुए लिखा, “मिलानो कोर्टिना 2026 ओलंपिक टॉर्च रिले के लिए मशालवाहक के रूप में चुना जाना मेरे लिए वास्तव में सम्मान की बात है। ओलंपिक मशाल हमेशा मेरे दिल के करीब रही है — यह सपनों, दृढ़ता और खेलों के जरिए विश्व एकता का प्रतीक है। इसे फिर से लेकर चलना मेरे लिए सम्मान और प्रेरणा दोनों है। इस अद्भुत सम्मान के लिए मिलानो कोर्टिना 2026 का धन्यवाद।” बिंद्रा ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीता था। यह चौथा अवसर होगा जब इटली शीतकालीन ओलंपिक की मेज़बानी करेगा। इस बार के संस्करण में 16 विधाओं में कुल 116 पदक स्पर्धाएं होंगी, जो बीजिंग 2022 की तुलना में 7 इवेंट और 1 नई विधा अधिक हैं।  

पेंशन स्कीम में EPFO के 5 अहम अपडेट, जानें कैसे होगा फायदा

नई दिल्ली अगर आप नौकरीपेशा व्यक्ति हैं और हर महीने आपकी सैलरी से PF  कटता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद अहम है। Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) ने Employee Pension Scheme (EPS) में कुछ बड़े बदलाव किए हैं, जो सीधे तौर पर आपकी पेंशन की राशि और प्रोसेस को प्रभावित करेंगे। आइए जानते हैं कौन से हैं ये 5 अहम बदलाव… अब औसत वेतन पर तय होगी पेंशन पहले पेंशन की गणना आखिरी वेतन के आधार पर की जाती थी। अब EPFO ने इसे बदलते हुए पिछले 60 महीनों (5 साल) के औसत वेतन को आधार बनाया है। इससे उन कर्मचारियों को फायदा होगा जिनकी सैलरी धीरे-धीरे बढ़ी है। यह नियम पहले से लागू है, लेकिन अब प्रोसेस को और आसान बना दिया गया है ताकि किसी को पेंशन कैलकुलेशन में नुकसान न हो। पेंशन की लिमिट बढ़कर ₹15,000 प्रति माह EPFO ने पेंशन लिमिट को बढ़ा दिया है। अब अधिकतम पेंशन ₹7,500 से बढ़ाकर ₹15,000 प्रति माह कर दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लिया गया यह फैसला उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है जिनकी सैलरी तो अधिक थी, लेकिन पेंशन लिमिट की वजह से उन्हें कम रकम मिलती थी। अब 50 साल की उम्र में भी मिलेगी पेंशन अब कर्मचारियों को 50 वर्ष की आयु पूरी होते ही पेंशन निकालने का विकल्प मिल गया है। पहले न्यूनतम उम्र 58 साल थी, लेकिन अब इसे घटा दिया गया है। हालांकि, जल्दी पेंशन लेने पर राशि थोड़ी कम हो सकती है। अब पेंशन क्लेम होगा ऑनलाइन EPFO ने डिजिटल क्लेम प्रोसेस को पूरी तरह से ऑनलाइन कर दिया है। अब फॉर्म भरने से लेकर दस्तावेज अपलोड करने तक की प्रक्रिया आप EPFO की वेबसाइट या मोबाइल ऐप से पूरी कर सकते हैं। इससे पहले जो काम महीनों में होता था, अब कुछ हफ्तों में पूरा हो जाएगा। नौकरी बदलने पर नहीं होगा नुकसान EPFO ने Pension Portability System को बेहतर बना दिया है। अब अगर आप नौकरी बदलते हैं, तो आपकी पुरानी सर्विस अपने आप नई कंपनी के रिकॉर्ड में जुड़ जाएगी। यानी पेंशन कंटिन्यूटी बनी रहेगी और पुरानी सर्विस का फायदा भी मिलेगा। EPFO के इन बदलावों से न सिर्फ कर्मचारियों को आर्थिक सुरक्षा मिलेगी बल्कि रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली पेंशन भी ज्यादा पारदर्शी और आसान तरीके से प्राप्त होगी।  

भारत की डिफेंस क्षमता का प्रदर्शन जबलपुर में, व्हीकल फैक्ट्री में होगा बड़ा कॉन्क्लेव, कॉरिडोर बनेगा गेमचेंजर

जबलपुर  7 से 9 नवंबर तक जबलपुर में एक डिफेंस कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है. यह आयोजन जबलपुर के व्हीकल फैक्ट्री में होगा. इसमें भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के अलावा निजी क्षेत्र की कंपनियां भी अपने उत्पादों की जानकारी देगी. जबलपुर के जनप्रतिनिधियों का मानना है कि इस आयोजन से जबलपुर के आसपास डिफेंस कॉरिडोर पर भी चर्चा शुरू हो जाएगी. रक्षा मंत्रालय की कंपनियों के उत्पादों का प्रदर्शन व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर के जनसंपर्क अधिकारी गौरव दीक्षित ने बताया कि, ''7 नवंबर से 9 नवंबर तक जबलपुर के व्हीकल फैक्ट्री के परिसर में एक डिफेंस कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है. इसमें देशभर की रक्षा मंत्रालय की कंपनियों के उत्पादों का प्रदर्शन किया जाएगा. यह आयोजन देश में बड़े शहरों में होता था, लेकिन इस बार यह मौका जबलपुर की व्हीकल फैक्ट्री को मिला है.'' जबलपुर में रक्षा मंत्रालय की कई बड़ी फैक्ट्रियां हैं जिनमें भारतीय सेना की जरूरत के लिए उत्पाद तैयार किए जाते हैं.'' व्हीकल फैक्ट्री खमरिया व्हीकल फैक्ट्री खमरिया भारत की कुछ बड़ी फैक्ट्री में से एक है. इसमें सेना के उपयोग में आने वाले वाहन बनाए जाते हैं. जैसे सामान्य स्टाफ वाहन, लॉजिस्टिक्स वाहन, बुलेटप्रूफ वाहन, हल्के बख्तरबंद वाहन, माइन प्रोटेक्टेड वाहन और विशेषज्ञ भूमिका वाले वाहन जैसे रॉकेट लॉन्चर, स्व-चालित हॉवित्जर, वाटर बॉवर्स, ईंधन टैंकर, फील्ड एम्बुलेंस, टिपर, बैटरी कमांड पोस्ट, जनरेटर सेट, लाइट रिकवरी वाहन, फील्ड आर्टिलरी ट्रैक्टर, किचन कंटेनर आदि का निर्माण और संयोजन करता है. इनके अलावा कुछ विशेष वहां भी तैयार किए जाते हैं जिनमें शहर की ही दूसरी फैक्ट्री का सहयोग भी लिया जाता है. गन कैरिज फैक्ट्री जबलपुर जबलपुर की फैक्ट्रियां एक दूसरे के सहयोग से चलती है, क्योंकि कुछ सामान एक फैक्ट्री में बनता है तो कुछ दूसरी फैक्ट्री में बनता है. गन कैरिज फैक्ट्री सेना के उपयोग में आने वाले 8/8 ट्रक बना रही है. इन ट्रक्स की खासियत यह होती है कि उनके आठों चकों में ताकत होती है और यह किसी भी विपरीत परिस्थिति में चल सकते हैं. 1. वीएफजे-जीसीएफ 105 मिमी ट्रक-माउंटेड सेल्फ-प्रोपेल्ड गन सिस्टम, 6X6 और 4X4 कॉन्फ़िगरेशन में 2. वीएफजे-जीसीएफ शारंग टोड गन 3. धनुष हॉवित्जर का निर्माण जीसीएफ में और ट्रैक्टर का निर्माण वीएफजे में किया गया 4. वीएफजे-जीसीएफ 8X8 155 मिमी ट्रक-माउंटेड सेल्फ-प्रोपेल्ड गन सिस्टम    ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया ऑर्डिनेंस फैक्ट्री खमरिया भारत में गोला बारूद बनाने वाली सबसे बड़ी फैक्ट्री है. इसमें हजारों की तादाद में अभी भी कर्मचारी काम करते हैं. भारत की तीनों सेनाओं के लिए यहां पर गोला बारूद तैयार किया जाता है. ऑपरेशन सिंदूर में जी L-70 बम ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई थी. वह जबलपुर का ही बना हुआ था. रूस की मदद से भी पिकोरा बम बनाया जा रहा है. ग्रे आयरन फाउंड्री ग्रे आयरन फाउंड्री यह रक्षा मंत्रालय की एक छोटी फैक्ट्री है, लेकिन इसका काम बहुत महत्वपूर्ण है. रक्षा मंत्रालय में कई ऐसे लोहे के सामानों की जरूरत पड़ती है जो बाजार में नहीं मिलते, इसलिए इन्हें ढालकर बनाया जाता है. इसलिए इस यूनिट को अलग ही तैयार किया गया था. इनके अलावा जबलपुर में कुछ दूसरी छोटी फैक्ट्रियां भी हैं, जिनमें सेना के उपयोग के सामान बनाए जाते हैं. इस कॉन्क्लेव में इन सभी का प्रदर्शन किया जाएगा. जबलपुर केंट विधानसभा के विधायक अशोक रोहाणी का कहना है कि, ''इस कॉन्क्लेव के जरिए इस बात पर भी चर्चा होगी कि जबलपुर में एक डिफेंस कॉरिडोर बनाया जाए. जहां रक्षा मंत्रालय के उपयोग में आने वाले कल पुर्जे और हथियार तैयार किया जा सके और इसमें निजी निवेश भी आ सके. जबलपुर की बड़ी फैक्ट्रियां इन छोटे निवेशों के लिए एक अच्छा माहौल बनाती हैं. जबलपुर में उत्पादित होने वाले रक्षा उत्पादों का बाजार केवल भारत में ही है. इन कंपनियों में बनने वाले सामानों को भारत निर्यात भी करता है और दुनिया के कई देश भारत से यह सामान खरीदते हैं. रक्षा से जुड़ा हुआ सामान बनाना रोजगार का एक बड़ा अवसर बन सकता है. अब देखना है कि इस कॉन्क्लेव के जरिए मध्य प्रदेश क्या फायदा उठा पाता है.