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शराब घोटाले की गुत्थी सुलझी? ED ने चैतन्य बघेल को मास्टरमाइंड बताया, चार्जशीट में दर्ज कई बड़े दावे

रायपुर, छत्तीसगढ़ छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल पर ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) ने बड़ा आरोप लगाते हुए राज्य में हुए ‘शराब घोटाले’ के सिडिकेट का मास्टरमाइंड (मुखिया) बताया है और कहा है कि उन्होंने ही घोटाले से अर्जित लगभग 1000 करोड़ रुपए की आय को इधर-उधर किया था। ईडी ने इस बात का दावा सोमवार को जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (VI) डमरुधर चौहान की अदालत में दायर अपनी चौथी पूरक अभियोजन शिकायत (आरोपपत्र) मे किया। इसमें उसने दावा किया कि चैतन्य ने जानबूझकर अपराध की आय को छिपाने, कब्जा करने, अधिग्रहण करने और इसका उपयोग करने में सहायता की और गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर साजिश रची। ईडी द्वारा दाखिल इस आरोप पत्र में बताया गया है कि, ‘इस सिंडिकेट (गिरोह) में शीर्ष स्तर पर चैतन्य का नियंत्रण था, और उसकी भूमिका केवल प्रतीकात्मक ही नहीं, बल्कि प्रभावशाली और निर्णायक भी थी। वह सिंडिकेट द्वारा एकत्रित सभी अवैध धन का हिसाब रखने के लिए जिम्मेदार था। धन के संग्रह और वितरण से संबंधित सभी बड़े फैसले उसके (चैतन्य के) निर्देशों के तहत लिए जाते थे। मुख्यमंत्री के बेटे के रूप में उनकी स्थिति ने उन्हें सिंडिकेट का नियंत्रक बना दिया।' इसमें कहा गया है, ‘जांच से यह भी पता चला है कि चैतन्य बघेल अपराध की आय के प्राप्तकर्ता हैं, जिसे उन्होंने अपने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में लगाया और वे इस प्रकार विकसित की गई इन संपत्तियों को बेदाग संपत्ति के रूप में पेश कर रहे हैं और उन पर दावा कर रहे हैं।' अभियोजन शिकायत में कहा गया है कि जांच से पहले ही पता चला है कि अपराध की आय का एक बड़ा हिस्सा लक्ष्मी नारायण बंसल उर्फ पप्पू नामक व्यक्ति द्वारा एकत्र किया जा रहा था, जिसने ईडी के सामने अपने बयान में खुलासा किया है कि उसने चैतन्य के साथ मिलकर शराब घोटाले से अर्जित एक हजार करोड़ रुपए से अधिक की आय को संभाला था। इसमें कहा गया है कि उन्होंने (बंसल ने) स्पष्ट रूप से कहा है कि चैतन्य के निर्देश पर, 2019 से 2022 के बीच की अवधि में कांग्रेस के राज्य इकाई के तत्कालीन कोषाध्यक्ष राम गोपाल अग्रवाल और अन्य को बड़ी मात्रा में नकदी पहुंचाई गई थी। अभियोजन शिकायत में कहा गया है कि बंसल कथित तौर पर दीपेन चावड़ा के माध्यम से अनवर ढेबर से अपराध की यह आय एकत्र करते थे और उसके बाद चैतन्य के समन्वय से ये धनराशि राम गोपाल अग्रवाल तक पहुंचाई जाती थी। आरोप पत्र में ईडी ने बताया कि 'बंसल ने अपने बयान में खुलासा करते हुए बताया कि वह भूपेश बघेल को पिछले 25 सालों से जानते हैं और दोनों के पारिवारिक संबंध हैं। वह चैतन्य के साथ नियमित रूप से रायपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास जाया करते थे। उस समय रायपुर स्थित मुख्यमंत्री आवास की ऐसी ही एक यात्रा के दौरान, भूपेश बघेल ने उन्हें (बंसल को) स्पष्ट रूप से बताया था कि अनवर ढेबर उन्हें कुछ सामान भेजेंगे, और उसे आगे उन्हें रामगोपाल अग्रवाल तक पहुंचाना होगा। इसके बाद, चैतन्य बघेल ने नकदी की कथित डिलीवरी से एक दिन पहले उन्हें सूचित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सामान शब्द नकदी के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक कोड वर्ड है।’ अग्रवाल फिलहाल फरार हैं। ईडी ने ने आरोपी लगाते हुए कहा कि चैतन्य शराब गिरोह का केंद्रीय व्यक्ति और नियंत्रक था, जो इससे जुड़ी कमाई पर सीधा नियंत्रण रखता था, अवैध धन के प्रवाह की निगरानी करता था, और अपराध की आय का उपयोग व्यक्तिगत और व्यावसायिक उपक्रमों के लिए करता था। आरोप पत्र में कहा गया है कि चैतन्य बघेल ने अपनी रियल एस्टेट परियोजना, विट्ठल ग्रीन में 18.90 करोड़ रुपए और अपनी रियल एस्टेट फर्म मेसर्स बघेल डेवलपर्स एंड एसोसिएट्स में 3.10 करोड़ रुपए की आपराधिक आय का उपयोग किया था। अभियोजन शिकायत में कहा गया है कि जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन से वॉट्सएप चैट के रूप में महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत भी बरामद किए गए हैं। ईडी के आरोपों के अनुसार लगभग 2,500 करोड़ रुपए से अधिक का यह शराब घोटाला प्रदेश में साल 2019 से 2022 के बीच हुआ था, जब छत्तीसगढ़ में चैतन्य के पिता भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का शासन था। इसी घोटाले के आरोप में चैतन्य को केंद्रीय एजेंसी ने 18 जुलाई को दुर्ग जिले के भिलाई शहर में स्थित उनके घर से गिरफ्तार किया था। ईडी ने अब तक इस मामले में एक अभियोजन शिकायत और चार पूरक अभियोजन शिकायतें दर्ज की हैं और दावा किया है कि कथित घोटाले के परिणामस्वरूप राज्य के खजाने को भारी नुकसान हुआ और एक शराब गिरोह के लाभार्थियों की जेबें भरी गईं। सोमवार को दायर अभियोजन शिकायत में ईडी ने कहा कि 2019 में छत्तीसगढ़ में नई (कांग्रेस) सरकार के गठन के बाद, एक संगठित शराब गिरोह बनाया गया था। इस गिरोह के दिन-प्रतिदिन के संचालन को संभालने के लिए, तत्कालीन IAS अधिकारी अनिल टुटेजा और कारोबारी अनवर ढेबर (दोनों को मामले में ईडी द्वारा दायर पिछली अभियोजन शिकायतों में आरोपी के रूप में नामित किया गया है) का चयन किया गया था।  

यूपी के वाहन मालिकों को बड़ी राहत… 5 साल के सभी ई-चालान होंगे माफ

लखनऊ  उत्तर प्रदेश परिवहन विभाग ने एक अहम और ऐतिहासिक फैसला लिया है. राज्य में 2017 से 2021 तक बने लाखों ई-चालान अब कानून के तहत स्वतः समाप्त माने जाएंगे. यानी जिन चालानों पर अदालतों में कार्रवाई लंबित थी या जो समय-सीमा से बाहर हो चुके हैं, वे अब मान्य नहीं रहेंगे. इस कदम से प्रदेशभर के वाहन मालिकों को बड़ी राहत मिलेगी. इस फैसले के साथ ही फिटनेस, परमिट, वाहन ट्रांसफर और हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट (HSRP) जैसी सेवाओं पर लगे अवरोध हट जाएंगे. यानी अब पुराने ई-चालानों की वजह से वाहन मालिकों को इन सेवाओं में अड़चन नहीं होगी. कितने चालान थे लंबित? परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, 2017 से 2021 के बीच कुल 30,52,090 ई-चालान काटे गए थे. इनमें से 17,59,077 पहले ही निस्तारित हो चुके हैं, जबकि 12,93,013 चालान अब तक लंबित हैं. इनमें से 10,84,732 चालान कोर्ट में पेंडिंग हैं जबकि 1,29,163 चालान ऑफिस स्तर पर पेंडिंग हैं. अब ये सभी चालान खुद खत्म हो जाएंगे. एक महीने के भीतर सभी चालानों की स्थिति पोर्टल पर अपडेट कर दी जाएगी और जनता आसानी से ई-चालान पोर्टल पर जाकर अपने वाहन/चालान का स्टेटस देख सकेगी. क्यों लिया गया ये फैसला? परिवहन आयुक्त ब्रजेश नारायण सिंह द्वारा आदेश में बताया गया कि यह फैसला जनहित, पारदर्शिता और कानून के पालन को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. लंबे समय से कोर्ट में पड़े छोटे-मोटे चालानों से न्यायपालिका और प्रवर्तन तंत्र पर अनावश्यक बोझ बढ़ रहा था. इनकी वसूली लगभग असंभव हो चुकी थी. हाई कोर्ट ने भी कई आदेशों में साफ कहा कि ऐसे ई-चालान “by operation of law” अब समाप्त माने जाएंगे. राज्य सरकार ने नए कानून और अदालत के निर्देशों के बाद इसे पोर्टल स्तर पर लागू करने का आदेश जारी किया है. किन पर लागू नहीं होगा यह आदेश? यह राहत टैक्स रिकवरी से जुड़े चालानों पर लागू नहीं होगी. यानी मोटर व्हीकल्स टैक्सेशन एक्ट के तहत बकाया टैक्स वाले मामलों पर कार्रवाई अलग से जारी रहेगी. इसी तरह, गंभीर दुर्घटनाओं, IPC से जुड़े मामलों या शराब पीकर वाहन चलाने जैसे प्रकरण इस दायरे से बाहर रखे गए हैं. इन धाराओं में शामिल चालानों को खत्म नहीं किया जाएगा. जनता को कैसे फायदा होगा? इसका सीधा लाभ वाहन मालिकों को मिल सकेगा क्योंकि इससे वाहन सेवाएं आसान हो जाएंगी. अब फिटनेस, परमिट, ट्रांसफर या HSRP के लिए आवेदन करते समय पुराने ई-चालानों की वजह से रुकावट नहीं आएगी. इसके अलावा लाखों वाहन मालिकों पर से पुराने केस हट जाएंगे और उन्हें कानूनी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा. खासकर ऑटो, ट्रांसपोर्ट और टैक्सी ऑपरेटरों के लिए यह फैसला बड़ी राहत लेकर आया है. आगे क्या होगा? 30 दिन के भीतर सभी जिलों के RTO/ARTO दफ्तर लंबित चालानों की स्थिति बदलकर पोर्टल पर “Disposed-Abated” या “Closed-Time Bar” कर देंगे. एक महीने बाद वाहन मालिक पोर्टल पर लॉगिन करके देख सकेंगे कि उनका चालान खत्म हुआ या नहीं. हाई कोर्ट के जिन मामलों में खास तौर पर आदेश दिए गए हैं, वहां सात दिन के भीतर चालान पोर्टल से हटा दिए जाएंगे.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार एवं पोषण अभियान और आदि सेवा पर्व का करेंगे शुभारंभ

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 सितम्बर को मध्यप्रदेश के धार जिले के भैंसोला ग्राम आएंगे स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार एवं पोषण अभियान और आदि सेवा पर्व का करेंगे शुभारंभ देश के पहले पीएम मित्र पार्क का करेंगे शिलान्यास एक बगिया माँ के नाम के अभियान में समूह की महिला को पौधे करेंगे भेंट सिकल सेल स्क्रीनिंग के 1 करोड़वे कार्ड का करेंगे वितरण सुमन सखी चैटबॉट की होगी लॉन्चिंग प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना अंतर्गत हितग्राहियों के खातों में राशि होगी अंतरित धार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 सितम्बर को मध्यप्रदेश के धार जिले के ग्राम भैंसोला आएंगे। प्रधानमंत्री मोदी 'स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार एवं पोषण' अभियान और 'आदि सेवा पर्व', का शुभारंभ करेंगे। साथ ही देश के पहले 'पीएम मित्र पार्क' का शिलान्यास करेंगे। इस अवसर पर मध्यप्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी मौजूद रहेंगे। "स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार एवं पोषण अभियान" महिलाओं, किशोरियों और बच्चों के लिए स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं को सुदृढ़ करने की दिशा में यह अभियान ऐतिहासिक कदम है। अभियान का संचालन स्वास्थ्य और परिवार कल्याण और महिला एवं बाल विकास विभाग संयुक्त रूप से करते हुए महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण के प्रति जागरूकता लाने स्वास्थ्य शिविरों और स्वास्थ्य संस्थानों के माध्यम से निवारक, संवर्धनात्मक और उपचारात्मक सेवाओं की आपूर्ति करेंगे। दोनों विभागों द्वारा संचालित होने वाले इस विशेष अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करना है, जिससे वे निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकें। स्वस्थ नारी ही सशक्त परिवार और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है। इस अभियान में महिलाओं की व्यापक स्वास्थ्य जांच भी होगी। अभियान में एनीमिया की रोकथाम, संतुलित आहार और मासिक-धर्म स्वच्छता पर जागरूकता अभियान भी चलाएंगे, जिससे महिलाओं और किशोरियों की स्वास्थ्य और पोषण संबंधी आवश्यकताओं को समग्र और समन्वित तरीके से पूरा किया जा सके। प्रधानमंत्री मित्र पार्क प्रधानमंत्री मोदी द्वारा शिलान्यास किये जा रहे पीएम मित्र पार्क का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के कपास उत्पादकों को मिलेगा। लगभग 2158 एकड़ में विकसित होने वाला पीएम मित्र पार्क विश्व स्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित है। यहां 20 MLD का कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, 10 MVA का सौर ऊर्जा संयंत्र, पानी और बिजली की पुख्ता आपूर्ति, आधुनिक सड़कें और 81 प्लग-एंड-प्ले यूनिट्स जैसी व्यवस्थाएँ विकसित की जा रही हैं। श्रमिकों और महिला कर्मचारियों के लिए आवास और सामाजिक सुविधाएं इसे केवल औद्योगिक क्षेत्र नहीं, बल्कि आदर्श औद्योगिक नगर का रूप देती हैं। पीएम मित्र पार्क में देश की अग्रणी टैक्सटाइल कंपनियों ने भरोसा जताते हुए अब तक 23 हजार 146 करोड़ रूपये के निवेश प्रस्ताव दिये हैं। यह निवेश उद्योगों की स्थापना के साथ स्थानीय लोगों के लिए नए रोजगार सृजन का मार्ग प्रशस्त करेगा। वस्त्र क्षेत्र के बड़े संगठनों और उद्योग समूहों ने यहां निवेश करने की इच्छा जताई है। इससे न केवल प्रदेश को औद्योगिक लाभ मिलेगा, बल्कि निर्यात भी बढ़ेगा। धार से तैयार वस्त्र और परिधान अब सीधे ग्लोबल मार्केट में पहुंचेंगे, जल्दी ही मध्यप्रदेश की पहचान अब टैक्सटाइल-हब के रूप में होने लगेगी। प्रधानमंत्री मोदी के '5-एफ' विज़न के अनुरूप यह पार्क 'फार्म से फाइबर, फाइबर से फैक्ट्री, फैक्ट्री से फैशन और फैशन से फॉरेन की संपूर्ण वैल्यू चैन बनायेगा। किसानों से प्राप्त कच्चा कपास उद्योगों में धागा बनेगा, वहीं से वस्त्र और परिधान तैयार होंगे और यही उत्पाद विदेशों तक जाएंगे। इस तरह पूरी वैल्यू चैन एक ही स्थान पर पूरी होगी। यही इस पार्क की विशिष्टता होगी और अन्य पार्कों के ‍लिये आदर्श बनेगी। 'पीएम मित्र पार्क' से लगभग 3 लाख रोजगार सृजित होंगे। इसमें एक लाख प्रत्यक्ष और दो लाख अप्रत्यक्ष रोजगार शामिल होंगे। कपास आधारित उद्योगों के विस्तार से किसानों को उनकी फसल का दोगुना मूल्य मिलेगा। यह अवसर केवल रोजगार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांव-गांव तक आर्थिक गतिविधियों को गति देगा और स्थानीय बाजारों से लेकर निर्यात तक नई संभावनाएँ पैदा करेगा। "आदि सेवा पर्व" आदि कर्मयोगी अभियान अंतर्गत “आदि सेवा पर्व” जनजातीय गौरव और राष्ट्र निर्माण के संगम का प्रतीक पर्व होगा। इस दौरान जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण, कौशल विकास, आजीविका संवर्धन, स्वच्छता, जल-संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण जैसी सेवा गतिविधियाँ आयोजित होंगी। हर गतिविधि के केन्द्र में सेवा का भाव और आत्मनिर्भर भारत का संकल्प होगा। इस अभियान में “ट्रायबल विलेज एक्शन प्लान एवं ट्रायबल विलेज विज़न 2030” पर विशेष जोर दिया जायेगा। इसके अंतर्गत प्रत्येक गाँव के लिए विकास का दीर्घकालिक रोडमैप तैयार किया जायेगा। एक बगिया माँ के नाम पर्यावरण सुधार के साथ महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिये चलाये जा रहे "एक बगिया माँ के नाम" अभियान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी महिला स्व-सहायता समूह की एक महिला को पौधा भेंट करेंगे। मध्यप्रदेश में अब तक 10 हजार 162 महिलाओं को माँ की बगिया तैयार करने की स्वीकृति दी जा चुकी है। समूह की महिलाओं को पौधों की सुरक्षा संबंधी सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराये जा रहे हैं। 'सुमन सखी चैटबॉट' की लॉन्चिंग प्रधानमंत्री मोदी "प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान" में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में जागरूकता के लिये 'सुमन सखी चैटबॉट' लांच करेंगे। इससे ग्रामीण और दूरस्थ अंचलों की गर्भवती महिलाओं को समय पर सही जानकारी और आवश्यक सेवाएं मिल सकेंगी। सिकल सेल स्क्रीनिंग के एक करोड़वें कार्ड का वितरण प्रधानमंत्री मोदी सिकल सेल स्क्रीनिंग एवं काउंसिलिंग के एक करोड़वें कार्ड का वितरण करेंगे। यह उपलब्धि ऐतिहासिक है। यह केवल एक कार्ड का वितरण नहीं, बल्कि सिकल सेल एनीमिया के खिलाफ देश की सामूहिक लड़ाई का प्रतीक है। मध्यप्रदेश सिकल सेल उन्मूलन अभियान में देश में रोल मॉडल बनकर उभरा है। 'प्रधानमंत्री मातृ-वंदना योजना' की राशि का होगा अंतरण 'प्रधानमंत्री मातृ-वंदना योजना' मातृत्व के सम्मान और सशक्तिकरण का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी कार्यक्रम में सिंगल क्लिक से देश भर की पात्र महिलाओं के खातों में योजना की राशि अंतरित करेंगे। मध्यप्रदेश की लगभग एक लाख माता-बहनें इससे लाभान्वित होंगी।

कचरा और गंदा पानी बनेगा संसाधन! सरकार का इनोवेटिव प्लान बदलेगा इंफ्रास्ट्रक्चर की तस्वीर: मंत्री गडकरी

नई दिल्ली सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी वर्तमान में केंद्र सरकार में एक अहम चेहरा हैं. वे भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता हैं और अपने कामकाज की वजह से उन्हें अक्सर हाईवे मैन ऑफ इंडिया भी कहा जाता है. नितिन गडकरी ने  देश को प्रदूषण मुक्त करने और कचरा हटाकर उसका निस्तारण करने का सरकार का एक प्लान एबीपी के मंच से साझा किया है. नितिन गडकरी का कहना है कि भविष्य में टॉयलेट के पानी और कचरे से इमारतें व सड़कें बनाई जाएगी. चलिए जानें कि यह कैसे संभव होगा.  कचरे से कैसे बनेगी सड़क?  नितिन गड़करी ने सरकार का भविष्य का प्लान बताते हुए कहा, ‘80 लाख टन सॉलिड कचरा रोड बनाने के वक्त डाला गया है. दिल्ली-मुंबई हाईवे और UR2 रोड को बनाने में उस कचरे का इस्तेमाल किया गया है. अब सरकार का प्लान है कि 2027 खत्म होने से पहले इस देश का पूरा सॉलिड कचरा अलग करके रोड बनाने में डाला जाएगा और इससे देश को प्रदूषण के मुक्त किया जाएगा.’  टॉयलेट के गंदे पानी का कैसे होगा इस्तेमाल? नितिन गडकरी ने गंदे पानी के इस्तेमाल को लेकर कहा, ‘इसके अलावा टॉयलेट का जो गंदा पानी है, जो कि रिसाइकिल होता है उसको रिसाइकिल करके उसकी टेस्टिंग करके अब ऑर्डर निकाला जाएगा कि बिल्डिंग और रोड बनाने के लिए उस फिल्टर पानी का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे देश का प्रदूषण कम होगा और जनता को इससे मुक्ति मिलेगी.’ क्यों जरूरी है यह कदम? भारत में हर दिन लाखों टन कचरा और गंदा पानी निकलता है. अब तक इसका बड़ा हिस्सा खुले में फेंका जाता रहा है, जिससे नदियां, जमीन और हवा प्रदूषित हो रही हैं. अगर इन्हें निर्माण में उपयोग किया जाए तो कचरे का बोझ कम होगा और पर्यावरण पर दबाव घटेगा, साथ ही साथ शहरी विकास परियोजनाओं में सस्ती और टिकाऊ सामग्री की उपलब्धता भी बढ़ेगी. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो चुका है प्रयोग ऐसा नहीं है कि भारत में इस तकनीक का पहली बार इस्तेमाल किया जा रहा है, बल्कि ऐसी तकनीकें यूरोप और एशियाई देशों में पहले से अपनाई जा रही हैं. वहां सीवेज स्लज और रीसाइकिल्ड वेस्ट से हाईवे, फ्लाईओवर और पब्लिक बिल्डिंग्स बनाई जा चुकी हैं. भारत में यह कदम कचरे से संपदा मिशन के तहत उठाया जा रहा है.

मध्यप्रदेश में कोदो-कुटकी की MSP पर खरीदी का आगाज़, 15 सितंबर से रजिस्ट्रेशन शुरू

 जबलपुर  मध्य प्रदेश सरकार पहली बार किसानों से कोदो-कुटकी खरीदेगी। इसकी शुरुआत जबलपुर के कुंडम तहसील से हो रही है। 15 सितंबर से सरकार को फसल बेचने वाले किसानों का पंजीयन शुरू हो गया है। कुंडम तहसील में करीब सात हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसानों ने कोदो-कुटकी की खेती की है।सीएम ने कहा कि इस कृषि उत्‍पाद को देश के साथ-साथ विदेश में भी पहुंचाया जाएगा. उन्‍होंने धान उत्‍पादक किसानों को प्रति हेक्टेयर 4 हजार रुपये बोनस देने की बात भी कही. प्रशासन ने यह जिम्मा कृषि विभाग को सौंपा है। जिसके बाद विभाग, किसानों से फसल खरीदने के लिए एफपीओ चयनित करेगा। पहले चरण में सिर्फ एक एफपीओ, फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी को यह काम दिया जाएगा। कृषि विभाग के उपसंचालक डॉ. एसके निगम ने बताया कि खरीदी में प्रदेश सरकार पारंपरिक पब्लिक-प्रोक्योरमेंट यानी धान, गेहूं जैसी खरीदी नहीं करेगा, बल्कि सरकार इसमें केवल व्यवस्था का समन्वय करेगी, जबकि खरीदे गए अनाज का भुगतान अन्न फेडरेशन कंपनी, भोपाल द्वारा किया जाएगा। राघवेंद्र सिंह (कलेक्टर जबलपुर) के अनुसार, इस बार जिले के कुंडम तहसील में किसानों से कोदो और कुटकी की खरीदी करने जा रहे हैं। एफपीओ के माध्यम से खरीदी होगी, जिसके लिए पंजीयन सोमवार से शुरू हो गया है। सरकार हर एक किलो पर 10 रुपये का समर्थन मूल्य भी देगी। देश में पहली बार ऐसा हो रहा यह देश में संभवत: पहली बार हो रहा है कि सरकार अनाज की खरीदी किए बगैर किसानों को बोनस देने जा रही है। सरकार का बोनस देने का मकसद प्रदेश में आने वाले वर्षों में अधिक से अधिक किसानों को कोदी-कुटकी की खेती के लिए प्रोत्साहित करना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में गत 3 जनवरी को जबलपुर में हुई कैबिनेट की बैठक में रानी दुर्गावती श्री अन्न प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी गई थी। योजना में मिलेट्स की खेती को प्रोत्साहन देने और किसानों से उचित दाम पर इसकी समरीदी का कार्य किया जाना है। बैठक में मिलेट्स का उत्पादन करने वाले किसानों को प्रति किलो 10 रुपए प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया था। इसके बाद सरकार ने मिलेट्स की खरीदी से लेकर इसके प्रसंस्करण, ब्रांडिंग व मार्केटिंग के लिए मिलेट्स फेडरेशन का गठन किया। कृषि विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेश में करीब एक लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में कोदो- कुटकी की बुवाई की गई है। मिलेट्स फेडरेशन को राजस्व विभाग से इसका फाइनल आंकड़ा मिलना बाकी है। इस तरह कोदो-कुटकी के रकबे के आधार पर सरकार किसानों को प्रति विटेयर 3900 रुपए के हिसाब से करीब 40 करोड़ का बोनस देगी। सचिव कृषि विभाग एम, सेलवेदन का कहना है कि जल्द ही किसानों के खाते में बोनस की राशि ट्रांसफर की जाएगी। इसकी तैयारी की जा रही है।

अमेरिका ने माना कूटनीति विफल, इजरायल ने गाजा पर तेज़ हमलों का आगाज किया

 तेल अवीव कतर में सोमवार को 60 मुस्लिम देशों की मीटिंग हुई, जिसमें इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव पारित हुआ। वहीं उसी समय इजरायल में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मौजूद थे। उन्होंने इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ कई घंटे तक मीटिंग की और मीडिया से बात की। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि गाजा में जारी जंग का कोई कूटनीतिक समाधान होने की उम्मीद नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि हमास एक आतंकी और बर्बर संगठन है। वह जब तक सरेंडर नहीं करेगा, तब तक फिलिस्तीन के मसले पर किसी समाधान की उम्मीद करना बेमानी होगा। उनका यह स्टैंड अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से एकदम उलट है, जिन्होंने पिछले दिनों कहा था कि जल्दी ही गाजा में जंग समाप्त होगी। मार्को रुबियो के बयान से स्पष्ट है कि गाजा में अब इजरायल और आक्रामक हो सकता है क्योंकि उसे अमेरिका की ओर से समर्थन हासिल है। यही नहीं इजरायल ने गाजा पर हमले करना शुरू भी कर दिया है। सोमवार देर रात से ही इजरायल की ओर से गाजा पर हमले जारी हैं। रुबियो ने कहा कि हम चाहते हैं कि जंग समाप्त हो, लेकिन हमास एक आतंकी संगठन है, जो सरेंडर नहीं कर रहा है। उसके सरेंडर किए बिना गाजा में जंग का कोई कूटनीतिक समाधान निकलने की उम्मीद बेहद कम है। उन्होंने कहा कि हमास का घोषित लक्ष्य इजरायल की बर्बादी है। उसने लगातार कई हमले इजरायल पर किए हैं। इसलिए उसके खात्मे के साथ ही समाधान संभव है। फिलहाल गाजा में भीषण हमलों का दौर जारी है। इजरायल की चेतावनी के बाद से हजारों लोग गाजा छोड़कर निकल रहे हैं। इसी को लेकर रुबियो ने चेतावनी दी है कि हमास के पास कुछ दिन का ही वक्त बचा है। वह सीजफायर डील को स्वीकार कर ले या फिर गाजा पर इसी तरह बमबारी जारी रहेगी। इजरायल ने तो ऑपरेशन शुरू भी कर दिया है। हालांकि इजरायल के लिए भी राह आसान नहीं है। एक तरफ मुस्लिम देश एकजुट हैं तो वहीं यूरोप के कई मुल्क भी इजरायल के खिलाफ हैं। अब लग्जमबर्ग का भी कहना है कि वह संयुक्त राष्ट्र आम सभा में फिलिस्तीन को मान्यता देने के प्रस्ताव का समर्थन करेगा। इससे पहले ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी ऐसा प्रस्ताव रख चुके हैं। बता दें कि रुबियो ने इजरायल की यात्रा के बाद अब कतर का दौरा किया है। वहीं कतर के पीएम इस्लामिक देशों की मीटिंग से पहले अमेरिका गए थे। माना जा रहा है कि अमेरिकी दखल के चलते ही कतर शांत है और मध्यस्थता की मीटिंग जारी रखने पर सहमत है। वहीं नेतन्याहू का कहना है कि कतर पर हमले से पहले उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को जानकारी दी थी, लेकिन उनकी ओर से रोका नहीं गया।

युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन बनेगा योजना का मुख्य लक्ष्य: मुख्यमंत्री

संत कबीर के नाम पर उत्तर प्रदेश में स्थापित होंगे वस्त्र एवं परिधान पार्क: मुख्यमंत्री युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन बनेगा योजना का मुख्य लक्ष्य: मुख्यमंत्री बुनकरों की अपेक्षाओं को जानने-समझने के लिए हर जिले में हो संवाद, सस्ती बिजली और पॉवरलूम को सौर ऊर्जा से जोड़ने के की जरूरत: मुख्यमंत्री निवेश सारथी पोर्टल पर मिले हैं 659 प्रस्ताव, 15,431 करोड़ निवेश और 1 लाख से अधिक रोजगार अवसर का अनुमान प्रत्येक पार्क न्यूनतम 50 एकड़ भूमि पर विकसित होगा, सहायक इकाइयों व सीईटीपी की होगी अनिवार्यता युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन बनेगा योजना का मुख्य लक्ष्य: मुख्यमंत्री संत कबीर टेक्सटाइल एवं अपैरल पार्क योजना से निवेश, उत्पादन और रोजगार के नए अवसरों के साथ-साथ परंपरा और आधुनिकता का संतुलन स्थापित होगा: मुख्यमंत्री प्रदेश से 2023-24 में 3.5 अरब डॉलर का वस्त्र और परिधान निर्यात, देश के कुल निर्यात में 9.6% योगदान प्रदेश में वस्त्र क्षेत्र से 22 लाख लोगों को रोजगार, जीडीपी में 1.5 प्रतिशत हिस्सेदारी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग क्षेत्र में निजी निवेशकों की बढ़ती रुचि को देखते हुए विभिन्न जिलों में वस्त्र एवं परिधान पार्क स्थापित करने का निर्णय लिया है। मंगलवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश पारंपरिक हथकरघा और वस्त्र उत्पादों की समृद्ध धरोहर वाला राज्य है, जिसकी क्षमता का सही उपयोग होने पर प्रदेश को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी नई पहचान दिलाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में वस्त्र एवं परिधान का वैश्विक बाजार वर्ष 2030 तक 2.3 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है और भारत इसमें 8 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर के साथ सबसे तेज़ी से बढ़ते देशों में है। ऐसे परिदृश्य में उत्तर प्रदेश की भागीदारी इस क्षेत्र में निर्णायक सिद्ध हो सकती है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रस्तावित योजना को महान संत कबीर के नाम पर समर्पित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संत कबीर ने अपने जीवन दर्शन में श्रम, सादगी और आत्मनिर्भरता को सर्वोपरि माना और यही भाव इस योजना का आधार बनेगा। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस योजना के माध्यम से निवेश, उत्पादन और रोजगार के नए अवसरों के साथ-साथ परंपरा और आधुनिकता का संतुलन स्थापित होगा। बैठक में प्रस्तुत विवरण के अनुसार, वर्तमान में उत्तर प्रदेश देश के शीर्ष वस्त्र एवं परिधान निर्यातक राज्यों में शामिल है। वित्त वर्ष 2023-24 में प्रदेश से लगभग 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर का निर्यात हुआ, जो देश के कुल वस्त्र एवं परिधान निर्यात का लगभग 9.6 प्रतिशत है। इस क्षेत्र का प्रदेश की जीडीपी में 1.5 प्रतिशत योगदान है, जबकि राज्य में प्रत्यक्ष रोजगार पाने वाले लगभग 22 लाख लोग इससे जुड़े हैं। वाराणसी, मऊ, भदोही, मिर्जापुर, सीतापुर, बाराबंकी, गोरखपुर और मेरठ जैसे पारंपरिक क्लस्टरों ने उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय परिधान मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है। अधिकारियों ने बताया कि निवेश सारथी पोर्टल पर अब तक वस्त्र एवं परिधान क्षेत्र से जुड़े 659 प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन प्रस्तावों के लिए लगभग 1,642 एकड़ भूमि की आवश्यकता है। कुल निवेश मूल्य 15,431 करोड़ रुपये आंका गया है और इसके फलस्वरूप लगभग 1,01,768 रोजगार अवसर सृजित होने का अनुमान है। प्रत्येक पार्क न्यूनतम 50 एकड़ भूमि पर विकसित किया जाएगा और इनमें प्रसंस्करण उद्योगों के लिए कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना अनिवार्य होगी। साथ ही बटन, ज़िपर, लेबल, पैकेजिंग और वेयरहाउस जैसी सहायक इकाइयों के विकास की भी व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि निवेश प्रस्तावों को शीघ्र गति से क्रियान्वित करने हेतु भूमि की पहचान और विकास कार्य को तेज़ किया जाए। उन्होंने कहा कि योजना का क्रियान्वयन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल अथवा नोडल एजेंसी के माध्यम से किया जाएगा, ताकि निवेशकों को समयबद्ध और सुगम सुविधाएं प्राप्त हों। सरकार की ओर से पार्कों तक सड़क, विद्युत और जलापूर्ति जैसी आधारभूत सुविधाएं प्राथमिकता पर उपलब्ध कराई जाएंगी। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से युवाओं के लिए कौशल विकास और रोजगार सृजन को इस योजना का मुख्य लक्ष्य बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि संत कबीर वस्त्र एवं परिधान पार्क योजना न केवल निवेश और रोजगार के नए द्वार खोलेगी बल्कि उत्तर प्रदेश को वैश्विक वस्त्र एवं परिधान मानचित्र पर एक विशिष्ट पहचान भी दिलाएगी। बैठक में एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए मुख्यमंत्री ने पॉवरलूम बुनकरों की उत्पादन लागत कम करने, आय बढ़ाने और परंपरागत वस्त्र उद्योग को नई मजबूती देने के उद्देश्य से बुनकरों के साथ संवाद करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बुनकर, परिश्रम और परंपरा के प्रतीक हैं। उनके हाथों से बना कपड़ा पूरे विश्व में पहचान रखता है। सरकार बुनकरों की मेहनत का सम्मान करते हुए उन्हें सस्ती बिजली उपलब्ध करा रही है। बुनकरों से संवाद बनाकर उनकी अपेक्षाओं को जानने और समझने की आवश्यकता है। इस संबंध में जनप्रतिनिधियों के सहयोग से विभाग द्वारा प्रक्रिया प्रारंभ की जाए। मुख्यमंत्री ने पॉवरलूम को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए आवश्यक कार्यवाही के भी निर्देश दिए।

ट्रेड डील की उम्मीद ने बढ़ाई सेंसेक्स की रफ्तार, बाजार ने छुआ 82,000 का निशान

मुंबई  भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर आज नई दिल्ली में बड़ी बैठक होने वाली है. तमाम मुद्दों को लेकर ये समझौता अटका हुआ है और इसे सुलझाने के लिए अमेरिका से प्रमुख वार्ताकार ब्रेंडन लिंच के नेतृत्व में टीम सोमवार को यहां पहुंची है. दोनों देशों के बीच इस डील को लेकर मिले पॉजिटिव संकेतों का सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर देखने को मिला है और खुलते ही सेंसेक्स-निफ्टी दौड़ लगाते हुए नजर आए. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स का झटके में 82,000 के पार निकल गया. इस बीच बैंकिंग समेत अडानी पोर्ट्स, एमआरएफ, महिंद्रा जैसे शेयरों में तेज उछाल देखने को मिला.  खुलते ही सेंसेक्स ने लगाई छलांग  शेयर मार्केट में कारोबार की शुरुआत होने के साथ ही बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 81,785.74 की तुलना में बढ़त लेकर 81,852.11 के लेवल पर खुला और फिर कुछ ही मिनटों में ये एक बार फिर 82,000 का आंकड़ा पार कर गया. खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 380 अंक के आसपास की तेजी लेकर 82,163.50 के स्तर पर कारोबार कर रहा था.  न सिर्फ सेंसेक्स, बल्कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी-50 भी ओपनिंग के साथ ही तूफानी तेजी पकड़ता हुआ नजर आया. निफ्टी अपने पिछले बंद 25,069.20 के लेवल से मामूली बढ़त लेकर 25,073.60 पर ओपन हुआ और फिर तेज रफ्तार के साथ 25,181.05 पर ट्रेड करने लगा.  MRF से अडानी पोर्ट तक दौड़े बाजार में तूफानी तेजी के बीच जिन शेयरों में शुरुआती कारोबार के दौरान सबसे ज्यादा उछाल देखने को मिला. उनमें लार्जकैप कैटेगरी में एक्सिस बैंक (1.70%), महिंद्रा एंड महिंद्रा (1.50%), कोटक बैंक (1.40%) और अडानी पोर्ट (1.20%) शामिल रहे. इसके अलावा मिडकैप कंपनियों में एमआरएफ स्टॉक (2.66%), महिंद्रा फाइनेंस (2.30%), कॉनकोर (2%) की तेजी के साथ कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा स्मॉलकैप कैटेगरी में शामिल रेडिंगटन (12%), रामा स्टील (8.21%) और गुडफ्राई फिलिप (6.86%) की जोरदार बढ़त लिए हुए थे.  1635 शेयरों ने की तेज शुरुआत  मार्केट में कारोबार शुरू होने के दौरान ग्लोबल पॉजिटिव संकेतों के बीच सेंसेक्स-निफ्टी ने जहां ग्रीन जोन में ओपनिंग की. तो वहीं बाजार में मौजूद 1635 कंपनियों के शेयर अपने पिछले बंद के मुकाबले तेज बढ़त लेकर खुले. हालांकि, 665 कंपनियों के शेयरों की शुरुआत गिरावट के साथ लाल निशान पर हुई, वहीं 162 कंपनियों के स्टॉक्स की फ्लैट ओपनिंग हुई, यानी इनके भाव में कोई भी चेंज देखने को नहीं मिला.  भारत-US ट्रेड डील पर आज बैठक  गौरतलब है कि ट्रंप के एक्स्ट्रा टैरिफ अटैक के चलते India-US के बीच ट्रेड डील अटक गई थी, लेकिन एक बार फिर इसपर बातचीत आगे बढ़ रही है. इसके लिए मंगलवार नई दिल्ली में एक बड़ी बैठक होने वाली है, जिसमें शामिल होने के लिए अमेरिका के प्रमुख वार्ताकार ब्रेंडन लिंच सोमवार को दिल्ली पहुंचे हैं और US Team का नेतृत्व करेंगे. बता दें कि एग्री-डेयरी प्रोडक्ट्स को लेकर दोनों देशों के बीच डील में पेंच फंसा था और उसके बाद रूसी तेल को मुद्दा बनाकर अमेरिका ने भारत पर लागू 25% टैरिफ को बढ़ाकर 50% कर दिया था. इससे पहले भारत-अमेरिका में पांच दौर की बातचीत हो चुकी थी और छठे दौर की वार्ता रद्द हो गई थी. अब आज की बैठक में ट्रेड डील और टैरिफ पर सकारात्मक बात होने की उम्मीद जताई जा रही है. 

मध्यप्रदेश में 20 IAS अधिकारियों के तबादले: विशेष गढ़पाले ऊर्जा सचिव, वंदना वैद्य बनीं वित्त निगम MD

भोपाल  मध्य प्रदेश में प्रशासनिक फेरबदल का दौर जारी है. राज्य सरकार ने एक बार फिर 20 आईएएस अफसरों के तबादले किए हैं, जो पिछले एक हफ्ते के अंदर दूसरा बड़ा कदम है. इस फेरबदल में कई वरिष्ठ और युवा अफसरों को नई ज़िम्मेदारियां दी गई हैं. इसमें 2008 बैच के विशेष गढ़पाले को ऊर्जा विभाग में उप सचिव नियुक्त किया गया है, जबकि वंदना वैद्य को एमपी फाइनेंस कॉर्पोरेशन, इंदौर का एमडी बनाया गया है. तपस्या परिहार को कटनी नगर निगम का कमिश्नर और दलीप कुमार को देवास का कमिश्नर बनाया गया है. इसके अलावा किस अफसर को कौन सी ज़िम्मेदारी मिली है. MP में एक और बड़ा प्रशासनिक फेरबदल दरअसल, मध्य प्रदेश सरकार ने एक बार फिर 20 आईएएस अधिकारियों को इधर से उधर किया गया है. इस बार जिन प्रमुख अधिकारियों को नई ज़िम्मेदारियां दी गई हैं, उनमें 2008 बैच के आईएएस विशेष गढ़पाले, वंदना वैद्य समेत कई अन्य अधिकारी शामिल हैं. बता दें कि ये तबादले ऐसे समय में हुए हैं जब सात दिन पहले ही 14 अन्य अधिकारियों का तबादला किया गया था. इनके हुए तबादले विशेष गढ़पाले: ऊर्जा विभाग में सचिव बने। गजेन्द्र सिंह नागेश– नरसिंहपुर के जिला पंचायत सीईओ बने। वंदना वैद्य: मप्र वित्त निगम की प्रबंध संचालक बनीं। गुरु प्रसाद– मुख्य सचिव कार्यालय में उप सचिव बने। दिव्यांक मिश्रा– नगरीय प्रशासन विभाग में अपर आयुक्त बने। तपस्या परिहार: कटनी नगर निगम आयुक्त बनीं। शिशिर गेमावत: नगरीय प्रशासन विभाग में अपर आयुक्त बने। नेहा जैन: नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण इंदौर में उप संचालक बनीं। श्रेयांस कुमट: उज्जैन के जिला पंचायत सीईओ बने। तन्मय वशिष्ठ शर्मा: भोपाल नगर निगम में अपर आयुक्त बने। दलीप कुमार: देवास नगर निगम कमिश्नर बने। नवजीवन विजय पवार: इंदौर के अपर कलेक्टर बने। अनिल कुमार राठौर: मप्र औद्योगिक विकास निगम क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर में कार्यकारी संचालक बनाए गए। अंशुमान राज: स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) के एमडी बने। राज्य कंप्यूटर सिक्योरिटी इंसीडेंट रिस्पांस टीम भोपाल के डायरेक्टर का अतिरिक्त प्रभार रहेगा। अरविंद कुमार शाह: जबलपुर नगर निगम में अपर आयुक्त बने। टी प्रतीक राव: ग्वालियर नगर निगम में अपर आयुक्त बने। अनिशा श्रीवास्तव: मप्र औद्योगिक विकास निगम क्षेत्रीय कार्यालय ग्वालियर में कार्यकारी संचालक बनीं। श्रृंगार श्रीवास्तव: इंदौर नगर निगम में अपर आयुक्त बनाया गया है। अनिल भाना : रतलाम नगर निगम कमिश्नर बनाया गया है। 20 IAS इधर से उधर गजेन्द्र सिंह नागेश को नरसिंहपुर का जिला पंचायत सीईओ बनाया गया है. विशेष गढ़पाले ऊर्जा विभाग में उप सचिव बने. वंदना वैद्य मप्र वित्त निगम की प्रबंध संचालक बनीं. गुरु प्रसाद मुख्य सचिव कार्यालय में उप सचिव बने. दिव्यांक मिश्रा नगरीय प्रशासन विभाग में अपर आयुक्त बने. तपस्या परिहार कटनी नगर निगम आयुक्त बनीं. शिशिर गेमावत नगरीय प्रशासन विभाग में अपर आयुक्त बने. नेहा जैन  नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण इंदौर में उप संचालक बनीं. श्रेयांस कुमट उज्जैन के जिला पंचायत सीईओ बने. तन्मय वशिष्ठ शर्मा  भोपाल नगर निगम में अपर आयुक्त बने. जबकि दलीप कुमार को देवास नगर निगम के कमिश्नर की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा  नवजीवन विजय पवार इंदौर के अपर कलेक्टर बने. अनिल कुमार राठौर मप्र औद्योगिक विकास निगम क्षेत्रीय कार्यालय जबलपुर में कार्यकारी संचालक बनाए गए. अंशुमान राज स्टेट वाइड एरिया नेटवर्क (स्वान) के एमडी बने। राज्य कंप्यूटर सिक्योरिटी इंसीडेंट रिस्पांस टीम भोपाल के डायरेक्टर का अतिरिक्त प्रभार रहेगा. अरविंद कुमार शाह जबलपुर नगर निगम में अपर आयुक्त बने. टी प्रतीक राव ग्वालियर नगर निगम में अपर आयुक्त बने. अनिशा श्रीवास्तव: मप्र औद्योगिक विकास निगम क्षेत्रीय कार्यालय ग्वालियर में कार्यकारी संचालक बनीं. श्रृंगार श्रीवास्तव इंदौर नगर निगम में अपर आयुक्त बनाया गया है. अनिल भाना रतलाम नगर निगम कमिश्नर बनाया गया है.

पीएम मित्र पार्क आधुनिक भारत की औद्योगिक शक्ति का प्रतीक: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

प्रधानमंत्री मोदी 17 सितंबर को करेंगे भूमिपूजन धार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि धार जिले के भैंसोला में बनने वाला पीएम मित्र पार्क आधुनिक भारत की औद्योगिक शक्ति का प्रतीक बनेगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 17 सितंबर को इस पार्क का भूमिपूजन करेंगे। लगभग 2000 करोड़ की लागत से तैयार होने वाला यह पार्क स्पिनिंग से लेकर डिजाइनिंग, प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट तक की सभी सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध कराएगा। यह देश का पहला और सबसे बड़ा पीएम मित्र पार्क होगा, जिसमें कपास से परिधान तक की पूरी वैल्यू चेन विकसित होगी। किसानों को अब कच्चे कपास की बिक्री तक सीमित नहीं रहना पड़ेगा बल्कि उनकी उपज यहीं मूल्य संवर्धन की प्रक्रिया से गुजरकर परिधान बनेगी और वैश्विक बाजार तक पहुंचेगी। विश्वस्तरीय इन्फ्रास्ट्रक्चर और ग्रीन इंडस्ट्रियल टाउनशिप जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस यह पार्क मध्यप्रदेश को कॉटन कैपिटल की नई पहचान दिलाएगा। किसानों को मिलेगा वास्तविक मूल्य और वैश्विक पहचान मध्यप्रदेश में साढ़े तीन लाख से अधिक कपास उत्पादक किसान हैं। अब तक वे केवल कच्चे कपास की बिक्री तक सीमित थे, लेकिन पीएम मित्र पार्क के बाद उनकी फसल स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन की संपूर्ण श्रृंखला से जुड़ेगी। कपास से यार्न, फैब्रिक, गारमेंट और रेडीमेड परिधान तक की पूरी प्रक्रिया यहीं पूरी होगी। जैविक कपास से बने परिधान सीधे अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स तक पहुंचेंगे। मध्यप्रदेश पहले ही विश्व के 24 प्रतिशत नॉन-जीएमओ ऑर्गेनिक कॉटन का उत्पादक है, और अब किसानों को उनकी फसल का वास्तविक मूल्य और वैश्विक पहचान दोनों मिलेंगे। विश्वस्तरीय सुविधाओं से सुसज्जित सबसे बड़ा पार्क धार का पीएम मित्र पार्क आकार और सुविधाओं दोनों में अद्वितीय है। यहां जीरो लिक्विड डिस्चार्ज आधारित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट, 220 केवी सबस्टेशन और 20 एमएलडी पानी की उपलब्धता होगी। स्काडा और आईओटी आधारित यूटिलिटी मॉनिटरिंग सिस्टम इस पार्क को डिजिटल और स्मार्ट बनाएगा। ग्रीन इंडस्ट्रियल टाउनशिप का प्रमाणन इसे टिकाऊ औद्योगिक विकास का मॉडल बनाएगा। भूमि, बिजली और पानी प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध होंगे, जिससे यह पार्क भारत का सबसे किफायती और प्रतिस्पर्धी टेक्सटाइल हब बनेगा। इज ऑफ डूइंग बिजनेसऔर नीति प्रोत्साहन मध्यप्रदेश लगातार Ease of Doing Business में अग्रणी रहा है और टॉप अचीवर्स की श्रेणी में शामिल है। राज्य ने सबसे पहले जन विश्वास अधिनियम लागू किया और GIS आधारित पारदर्शी भूमि आवंटन प्रणाली स्थापित की। उद्योग शुरू करने की प्रक्रिया अब 30 दिनों में पूरी की जा सकती है और 13 विभागों की 54 सेवाएं सिंगल विंडो सिस्टम से उपलब्ध हैं। नीतिगत प्रोत्साहनों में उद्योगों को 40 प्रतिशत तक पूंजी सब्सिडी, पांच से सात प्रतिशत ब्याज अनुदान, ग्रीन इंडस्ट्रियलाइजेशन के लिए पचास प्रतिशत सहायता, निर्यात फ्रेट पर पचास प्रतिशत सब्सिडी और रोजगार आधारित अनुदान जैसी सुविधाएं मिलती हैं। केंद्र सरकार की Competitive Incentive Support योजना के अंतर्गत शुरुआती निवेशकों को 300 करोड़ रुपये तक का सहयोग मिलेगा और बिक्री पर तीन प्रतिशत तक टर्नओवर प्रोत्साहन भी दिया जाएगा। प्रदेश की ताकत और मेजर प्लेयर्स की उपस्थिति मध्यप्रदेश से वर्ष 2024-25 में 9,200 करोड़ रुपये से अधिक का टेक्सटाइल निर्यात हुआ है। यहां 31 गीगावॉट से अधिक पावर क्षमता उपलब्ध है, जिसमें लगभग 30 प्रतिशत क्लीन ग्रीन एनर्जी शामिल है। एक हजार मिलियन क्यूबिक मीटर से अधिक औद्योगिक जल संसाधन, छह इनलैंड कंटेनर डिपो और एक मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क से निर्यात प्रक्रिया बेहद सहज होगी। प्रदेश पहले से ही ट्राइडेंट ग्रुप, वार्धमान, ग्रासिम, नाहर, रेमंड, प्रतिभा सिन्टेक्स, गोकलदास एक्सपोर्ट, महिमा ग्रुप और सागर ग्रुप जैसे बड़े औद्योगिक समूह है। इन कंपनियों की उपस्थिति से यार्न, फैब्रिक, गारमेंट और मशीनरी निर्माण की संपूर्ण वैल्यू चेन पहले से मौजूद है, जिसे पीएम मित्र पार्क और मजबूत करेगा। किसानों और युवाओं के जीवन में क्रांतिकारी बदलाव धार, झाबुआ, रतलाम और उज्जैन जैसे कपास उत्पादक जिलों के किसान अब औद्योगिक क्रांति के केंद्र में होंगे। आदिवासी युवाओं को प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिलेंगे। प्रदेश के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी और लाखों परिवारों का जीवन स्तर ऊँचा होगा। पीएम मित्र पार्क किसानों को स्थायी लाभ, युवाओं को वैश्विक अवसर और उद्योगों को प्रतिस्पर्धी मंच प्रदान करेगा। यह परियोजना मध्यप्रदेश को कॉटन कैपिटल बनाने के साथ-साथ पूरे भारत के लिए टेक्सटाइल सेक्टर की नई औद्योगिक क्रांति का सूत्रपात करेगी।