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सस्ता होगा सोना? जानिए क्यों US फेड की बैठक बन सकती है गेमचेंजर

नई दिल्‍ली  सोने की चमक ने सबको चकाचौंध कर रखा है। इसने एक साल में ताबड़तोड़ तेजी दर्ज की है। इस दौरान यह करीब 53% तक चढ़ा है। दूसरे किसी भी एसेट क्‍लास में ऐसी बंपर तेजी देखने को नहीं मिली है। हालांकि, 17 सितंबर से पहले सोने की कीमतों में तेजी पर कुछ अंकुश लग सकता है। अगले हफ्ते बुधवार को अमेरिकी फेडरल रिजर्व नीतिगत दरों पर फैसला लेने वाला है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि आगे चलकर सोने की चमक बनी रहेगी। वे टैर‍िफ के असर, ब्रिटेन और यूरो क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं के आंकड़ों और बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ जापान की बैठकों पर नजर रखेंगे। सोने की कीमतों में तेजी आई है। लेकिन, अब यह रफ्तार धीमी हो सकती है। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के प्रणव मेर का कहना है कि निवेशक अब सतर्क हो गए हैं। पिछले कुछ हफ्तों में सोने के दाम काफी बढ़ गए हैं। इसलिए, वे अब और ज्यादा पैसा लगाने से डर रहे हैं। 17 सितंबर पर दुन‍िया की नजर मेर ने कहा कि पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन के युद्ध के कारण सोने के दाम बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सोने और चांदी के दाम बढ़ सकते हैं। लेकिन, निवेशकों को फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजों का इंतजार है। ऐसे में कीमतों में कुछ बदलाव हो सकता है। फेडरल रिजर्व की दो दिन की बैठक 16 सितंबर को शुरू होगी। नीतिगत फैसले की घोषणा 17 सितंबर को की जाएगी। एंजल वन के प्रथमेश माल्या ने कहा कि अमेरिका में भारतीय सामान पर 50% टैरिफ लगने और रूस-यूक्रेन के बीच लड़ाई बढ़ने से सोने के दाम में तेजी आना कोई हैरानी की बात नहीं है। सोने के दाम में तेजी क्यों आई? भू-राजनीतिक तनाव पश्चिम एशिया और रूस-यूक्रेन में बढ़ते तनाव के कारण निवेशक सोने को एक सुरक्षित निवेश मानकर इसमें पैसा लगा रहे हैं। व्यापार शुल्क (टैरिफ) अमेरिका में भारतीय सामान पर 50% टैरिफ लगने से भी सोने की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है।   आगे क्या हो सकता है? कीमतों में स्थिरता फेडरल रिजर्व के आगामी फैसले तक सोने के दाम स्थिर रह सकते हैं। तेजी जारी रह सकती है जानकारों के अनुसार, भू-राजनीतिक तनाव और अन्य वैश्विक कारकों के कारण आगे भी सोने के दाम बढ़ सकते हैं।   निवेशकों को क्या करना चाहिए? सतर्क रहें सोने में निवेश करते समय सावधानी बरतें और बाज़ार के उतार-चढ़ाव पर नज़र रखें। फेडरल रिजर्व के फैसले का इंतजार करें कोई भी बड़ा निवेश करने से पहले फेडरल रिजर्व के 17 सितंबर के फैसले का इंतजार करें, क्योंकि यह सोने के भविष्य के दाम तय कर सकता है। प्रणव मेर ने कहा, 'सोने की कीमतों में सकारात्मक रफ्तार जारी रही और यह लगातार चौथे सप्ताह बढ़त के साथ बंद हुआ। हालांकि, सप्ताह के मध्य में बढ़त की रफ्तार कुछ धीमी हो गई। पिछले चार हफ्तों में कीमतों में 10 फीसदी से ज्‍यादा की बढ़ोतरी के बाद निवेशक और कारोबारी अब सतर्क हो गए हैं। मौजूदा कीमतों पर नए तेजी के सौदे जोड़ने से हिचक रहे हैं।'    

मध्यप्रदेश विधानसभा में बदलाव की आहट, प्रमुख सचिव पद के लिए अरविंद शर्मा का नाम सबसे आगे

भोपाल  मध्यप्रदेश विधानसभा में प्रशासनिक बदलाव की आहट तेज हो गई है। मौजूदा प्रमुख सचिव एपी सिंह 30 सितंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं और उनके कार्यकाल को आगे नहीं बढ़ाने के संकेत पहले ही मिल चुके हैं। ऐसे में विधानसभा सचिव के रूप में कार्यरत अरविंद शर्मा को अगला प्रमुख सचिव बनाए जाने की चर्चा तेज हो गई है। वर्तमान प्रमुख सचिव एपी सिंह के कार्यकाल में विस्तार की संभावना नहीं है। ऐसे में 1 अक्टूबर से नए प्रमुख सचिव की नियुक्ति तय मानी जा रही है। अरविंद शर्मा सबसे मजबूत दावेदार  नरेंद्र सिंह तोमर ने अध्यक्ष बनने के बाद अरविंद शर्मा को लोकसभा से प्रतिनियुक्ति पर मध्य प्रदेश पर लाया और  विधानसभा सचिव बनाया था। बाद में उनका संविलियन भी विधानसभा में हो गया। वर्तमान में वे 60 साल की उम्र पार कर चुके हैं और नियमों के मुताबिक 62 साल तक सेवा में रह सकते हैं। यदि उन्हें प्रमुख सचिव नियुक्त किया जाता है, तो वे आगामी दो साल तक इस जिम्मेदारी को निभा पाएंगे। सूत्रों के अनुसार, स्पीकर की पसंद होने के कारण उनकी नियुक्ति लगभग तय मानी जा रही है। एपी सिंह का लंबा कार्यकाल अब होगा समाप्त एपी सिंह पहले ही 62 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो चुके थे। उसके बाद उन्हें दो साल का सेवा विस्तार और फिर 6 महीने का संविदा कार्यकाल दिया गया। अब वे 64 वर्ष से अधिक हो चुके हैं। ऐसे में उनका कार्यकाल बढ़ाने की कोई संभावना नहीं रह गई है। हालांकि विधानसभा अधिनियम के मुताबिक अध्यक्ष चाहें तो जिला न्यायाधीश स्तर के अधिकारी को भी प्रमुख सचिव नियुक्त कर सकते हैं। फिलहाल इस पर विचार की संभावना कम है क्योंकि मौजूदा परिस्थितियों में अरविंद शर्मा ही सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। सचिव पद की मौजूदा स्थिति विधानसभा में सचिव के दो पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में एक पद पर अरविंद शर्मा कार्यरत हैं, जबकि दूसरा पद रिक्त है। प्रमोशन में आरक्षण से जुड़े मामले कोर्ट में लंबित हैं, इसलिए यदि शर्मा प्रमुख सचिव बनते हैं, तो सचिव के दोनों पद अस्थायी तौर पर खाली रह सकते हैं और जिम्मेदारियां प्रभार के आधार पर सौंपी जा सकती हैं।  

दुर्गा पूजा से पहले बड़ी राहत, मइया सम्मान योजना के तहत खाते में आ सकते हैं 2500 रुपये

रांची   झारखंड सरकार की महत्वकांक्षी मंईयां सम्मान योजना की लाभुकों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है. सभी लाभुक महिलाओं को सितंबर माह की राशि 2500 रुपये दुर्गा पूजा से पहले मिल जायेगी. जानकारी के अनुसार आज 15 सितंबर के बाद जिला स्तर से राशि ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू होगी. वहीं अक्तूबर माह की राशि भी दीपावली से पहले मिल जायेगी. नवंबर माह तक के लिए राशि आवंटित सामाजिक सुरक्षा निदेशालय द्वारा सभी जिलों को नवंबर माह तक के लिए राशि आवंटित कर दी गयी है. विभिन्न जिलों को 9600 करोड़ रुपये मिले हैं. 15 सितंबर के बाद यानी कल 16 सितंबर से महिलाओं के खाते में 2500 रुपये ट्रांसफर करने की संभावना है. अगर कल 16 सितंबर से राशि ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू होती है, तो लगभग 1 सप्ताह के भीतर सभी लाभुकों को योजना की राशि मिल जायेगी. एक माह में मिलेगी दोहरी खुशियां मालूम हो इसी माह के शुरुआत में 3 सितंबर को लाभुक महिलाओं के खाते में अगस्त माह की राशि 2500 रुपये भेजे गये थे. और अब दुर्गा पूजा से पहले महिलाओं को सितंबर माह की राशि मिलने वाली है. ऐसे में इस माह महिलाओं को दोहरी खुशियां मिलने वाली है. राज्य की करीब 50 लाख महिलाओं को हर माह योजना का लाभ दिया जाता है. अगर आप झारखंड की मंईयां सम्मान योजना की लाभार्थी हैं और यह जानना चाहती हैं कि आपके खाते में 2500 रुपये आए हैं या नहीं. तो इसके कई आसान तरीके हैं. सबसे पहले अपने बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर पर SMS अलर्ट चेक करें. इसके अलावा पासबुक अपडेट कराने से भी पता चल जाएगा. अगर आपके पास इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग ऐप है. तो ट्रांजैक्शन हिस्ट्री से तुरंत जानकारी मिल सकती है. वहीं जिन महिलाओं के पास यह सुविधाएं नहीं हैं. वह नजदीकी बैंक शाखा जाकर मिनी स्टेटमेंट निकलवा सकती हैं. योजना का पैसा सीधे लाभार्थी के नाम से जुड़े बैंक खाते में DBT के जरिए आता है. अगर आपके पास इंटरनेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग ऐप है. तो ट्रांजैक्शन हिस्ट्री से तुरंत जानकारी मिल सकती है. वहीं जिन महिलाओं के पास यह सुविधाएं नहीं हैं. वह नजदीकी बैंक शाखा जाकर मिनी स्टेटमेंट निकलवा सकती हैं. योजना का पैसा सीधे लाभार्थी के नाम से जुड़े बैंक खाते में DBT के जरिए आता है. अगर कहीं को जानकारी नहीं है तो फिर आपको अपने नजदीकी सीएससी सेंटर जाना होगा. वहां जाकर आप योजना में अपनी किस्त का स्टेटस चेक करवा सकती है. ऑपरेटर को आपको अपना आधार कार्ड या रजिस्ट्रेशन नंबर बताना होगा. अगर कहीं को जानकारी नहीं है तो फिर आपको अपने नजदीकी सीएससी सेंटर जाना होगा. वहां जाकर आप योजना में अपनी किस्त का स्टेटस चेक करवा सकती है. ऑपरेटर को आपको अपना आधार कार्ड या रजिस्ट्रेशन नंबर बताना होगा. इसके बाद वह योजना में आपकी किस्त का स्टेटस आपको बता देगा किस्त अटक गई है या जारी हो गई है. अगर पूरी जानकारी सही होने के बाद भी आपकी किस्त के पैसे आपके खाते में नहीं आते हैं. तो फिर आप इस बारे में नजदीकी कार्यालय जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकती हैं. इसके बाद वह योजना में आपकी किस्त का स्टेटस आपको बता देगा किस्त अटक गई है या जारी हो गई है. अगर पूरी जानकारी सही होने के बाद भी आपकी किस्त के पैसे आपके खाते में नहीं आते हैं. तो फिर आप इस बारे में नजदीकी कार्यालय जाकर अपनी शिकायत दर्ज करवा सकती हैं.

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल, Wholesale Inflation में आई मजबूती

नई दिल्ली  बरसात के मौसम में खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ जाने की वजह से देश में थोक महंगाई दर मजबूत होकर 0.52% के स्तर पर पहुंच गई है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2025 में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) पर आधारित मुद्रास्फीति 0.52% दर्ज की गई. पिछले दो महीनों तक नकारात्मक रहने के बाद यह दर अब सकारात्मक हो गई है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि सीमित स्तर की थोक महंगाई स्वस्थ मानी जाती है, क्योंकि यह उद्योगों और व्यवसायों को उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करती है. खाद्य और विनिर्माण वस्तुओं ने बढ़ाई दर मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, अगस्त में थोक महंगाई दर बढ़ने की मुख्य वजह खाद्य उत्पादों, गैर-खाद्य वस्तुओं, अन्य विनिर्माण उत्पादों, गैर-धात्विक खनिजों और परिवहन उपकरणों की कीमतों में बढ़ोतरी रही. मंत्रालय ने साफ किया कि थोक मुद्रास्फीति में यह उछाल मुख्य रूप से रोजमर्रा की वस्तुओं के दामों में वृद्धि का परिणाम है. खुदरा मुद्रास्फीति में भी हल्की बढ़ोतरी पिछले सप्ताह जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के अनुसार, अगस्त 2025 में खुदरा मुद्रास्फीति 2.07% रही, जो जुलाई के मुकाबले 46 आधार अंक अधिक है. हालांकि, यह वृद्धि सीमित है और अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की 2-6% की सीमा के भीतर है. जुलाई 2025 में खुदरा मुद्रास्फीति घटकर 1.55% पर आ गई थी, जो जून 2017 के बाद से सबसे निचला स्तर था. खाद्य मुद्रास्फीति का असर उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (सीएफपीआई) के अनुसार, अगस्त 2025 में खाद्य मुद्रास्फीति -0.69% रही. ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर -0.70% और शहरी क्षेत्रों में -0.58% दर्ज की गई. हालांकि, सब्जियों, मांस, मछली, तेल, वसा और अंडों की कीमतों में वृद्धि ने हेडलाइन मुद्रास्फीति को ऊपर धकेला. मंत्रालय ने बताया कि अगस्त में मुद्रास्फीति दर सबसे ज्यादा केरल, कर्नाटक, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और तमिलनाडु में रही. आरबीआई की नीतियां और भविष्य का अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक ने लगातार 11वीं बार अपनी बेंचमार्क रेपो दर को 6.5% पर स्थिर रखा है. फरवरी 2025 में लगभग पांच साल बाद पहली बार दर में कटौती की गई थी. विशेषज्ञों का मानना है कि हाल ही में लागू हुए जीएसटी सुधार और स्थिर मौद्रिक नीतियों ने महंगाई को नियंत्रण में रखने में अहम भूमिका निभाई है. आरबीआई ने घटाया मुद्रास्फीति अनुमान अगस्त 2025 में थोक और खुदरा दोनों मुद्रास्फीति में हल्की बढ़ोतरी देखने को मिली है. हालांकि, यह वृद्धि प्रबंधनीय सीमा में है और अर्थशास्त्री इसे अस्थायी मानते हैं. वर्ष 2025-26 के लिए आरबीआई ने मुद्रास्फीति का अनुमान 4% से घटाकर 3.7% कर दिया है. इससे संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में महंगाई पर काबू पाने और मूल्य स्थिरता बनाए रखने की संभावना मजबूत है.

सिंहस्थ 2028 की तैयारी तेज़: ऊर्जा मंत्री तोमर ने MP ट्रांसको को एक साल पहले कार्य पूरा करने का दिया लक्ष्य

भोपाल  ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा है कि सिंहस्थ-2028 के सफल आयोजन को ध्यान में रखते हुए मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) उज्जैन में अपनी पारेषण प्रणाली को और सुदृढ़ बनाये। साथ ही सभी कार्य एक वर्ष पूर्व पूरा करने का लक्ष्य तय करें। मंत्री तोमर की मंशानुसार इस संबंध में साउथ जोन इंदौर स्थित एम.पी. ट्रांसको के प्रशासनिक भवन में समीक्षा बैठक हुई। प्रबंध संचालक सुनील तिवारी ने वरिष्ठ अधिकारियों को निर्देश दिए कि सिंहस्थ के कार्यों की नियमित निगरानी की जाए और उन्हें समय-सीमा व उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया जाए। कार्ययोजना इस प्रकार बनाई जाए कि सिंहस्थ आयोजन से एक वर्ष पूर्व सभी कार्य पूर्ण हो जाएं, जिससे पारेषण तंत्र की स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध हो सके। बैठक में इंदौर और उज्जैन मुख्यालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। चिंतामन सब स्टेशन का निर्माण कार्य प्रारंभ अतिरिक्त मुख्य अभियंता राजीव अग्रवाल ने जानकारी दी कि सिंहस्थ अवधि में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पहले चरण में 132 के.व्ही. चिंतामन सबस्टेशन के निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। त्रिवेणी बिहार, उज्जैन में प्रस्तावित सबस्टेशन के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है। इसके अलावा 220 के.व्ही. शंकरपुर सबस्टेशन पर वर्तमान 20 एम.व्ही.ए. ट्रांसफार्मर को अपग्रेड कर 50 एम.व्ही.ए. का नया ट्रांसफार्मर स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है। 400 के.व्ही. ताजपुर सबस्टेशन का विस्तार मुख्य अभियंता अग्रवाल ने बताया कि 400 के.व्ही. ताजपुर (उज्जैन) सबस्टेशन में 132 के.व्ही. नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। इसमें 50 एम.व्ही.ए. क्षमता का नया ट्रांसफार्मर स्थापित कर 33 के.व्ही. के चार नए फीडर निकाले जाएंगे।  

भारतीय सेना की मालगाड़ी पहली बार पहुंची कश्मीर, वापसी में लाएगी सेब – विकास और भरोसे का संकेत

श्रीनगर  जम्मू-कश्मीर में एक ऐतिहासिक घटना हुई है. उद्धमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) पर भारतीय सेना की पहली विशेष मालगाड़ी सफलतापूर्वक चली. 12-13 सितंबर 2025 को यह गाड़ी बीडी बारी से अनंतनाग पहुंची. इसमें 753 मीट्रिक टन एडवांस्ड विंटर स्टॉकिंग (एडब्ल्यूएस) सामान लदा था, जो सेना की इकाइयों के लिए था. यह कदम सेना की सर्दियों की तैयारी में क्रांति लाएगा. यूएसबीआरएल क्या है और इसका महत्व? यूएसबीआरएल भारत का एक महत्वाकांक्षी रेल परियोजना है, जो जम्मू को कश्मीर घाटी से जोड़ती है. इसकी कुल लंबाई 272 किलोमीटर है. यह हिमालय के कठिन इलाके से गुजरती है. इसमें दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पुल चेनाब ब्रिज (359 मीटर ऊंचा) और भारत का सबसे लंबा रेल सुरंग पीर पंजाल (11.215 किमी) शामिल हैं. यह परियोजना 2002 में शुरू हुई और जून 2025 में पूरी तरह चालू हो गई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 6 जून 2025 को इसकी शुरुआत की, जब वंदे भारत ट्रेन को फ्लैग ऑफ किया गया. इस रेल लिंक से कश्मीर घाटी बाकी भारत से जुड़ गई, जो सड़कों पर भूस्खलन या बाढ़ से होने वाली परेशानियों को कम करेगी. अगस्त 2025 में पहली मालगाड़ी अनंतनाग पहुंची, जो सीमेंट ले जा रही थी. लेकिन भारतीय सेना की यह गाड़ी पहली विशेष मालगाड़ी है, जो सैन्य और सिविल उपयोग का उदाहरण है. सेना की पहली विशेष मालगाड़ी: क्या लाया और क्यों खास? 12-13 सितंबर 2025 को चली यह मालगाड़ी बीडी बारी (कटरा के पास) से अनंतनाग पहुंची. इसमें 753 मीट्रिक टन एडब्ल्यूएस सामान लदा था, जैसे राशन, ईंधन, दवाइयां और अन्य जरूरी चीजें. ये सामान जम्मू-कश्मीर में तैनात सेना की इकाइयों के लिए था, ताकि सर्दियों में बर्फीले हिमालयी इलाके में कोई कमी न हो. पहले सेना सड़कों पर ट्रक से सामान भेजती थी, जो भूस्खलन या बर्फबारी से रुक जाती थी. अब रेल से तेज और सुरक्षित तरीके से स्टॉकिंग होगी. यह सेना की क्षमता विकास का हिस्सा है, जो कठिन इलाकों में ऑपरेशनल तैयारी सुनिश्चित करेगा. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह कश्मीर को राष्ट्रीय फ्रेट नेटवर्क से जोड़ने का मील का पत्थर है.  सिविल-मिलिट्री फ्यूजन: कश्मीरी सेब का निर्यात यह गाड़ी सिर्फ सैन्य उपयोग की नहीं. वापसी में यह कश्मीरी सेब ले जाएगी, जो भारत के बाकी बाजारों में बेचे जाएंगे. यह ड्यूल-यूज लॉजिस्टिक्स का शानदार उदाहरण है. कश्मीरी किसान पहले भूस्खलन या बाढ़ से सड़कें बंद होने पर भारी नुकसान उठाते थे. अब रेल से उनका फल तेजी से बाजार पहुंचेगा, जिससे आर्थिक राहत मिलेगी. यह कदम सेना की राष्ट्र-निर्माण में भूमिका दिखाता है. सेना न सिर्फ रक्षा करती है, बल्कि कश्मीर के सामाजिक-आर्थिक विकास में भी योगदान दे रही है. रेल इंफ्रास्ट्रक्चर का सैन्य और सिविल उपयोग से क्षेत्र की लचीलापन, कनेक्टिविटी और समृद्धि बढ़ेगी. परियोजना से 5 करोड़ से ज्यादा मैन-डे रोजगार पैदा हुए हैं. यूएसबीआरएल के फायदे: कश्मीर के लिए नया दौर यह रेल लिंक कश्मीर को बदल देगी. पहले कश्मीर घाटी रेल से अलग-थलग थी, लेकिन अब पैसेंजर ट्रेनें (जैसे वंदे भारत) और मालगाड़ियां चलेंगी. इससे फल, हस्तशिल्प और अन्य सामान सस्ते में बाजार पहुंचेंगे. सेना के लिए यह सर्दियों की स्टॉकिंग आसान करेगा.  परियोजना में कई चुनौतियां थीं—जैसे हिमालय के युवा इलाके में भूगर्भीय समस्याएं. लेकिन सुरंगों में वेंटिलेशन और फायरफाइटिंग सिस्टम लगाकर सुरक्षा सुनिश्चित की गई. अब कश्मीर की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी. Srinagar से रवाना हुई पहली  Rapid Cargo ट्रेन, इतने समय में तय करेगी Delhi तक का सफर  आज श्रीनगर से पहली माल ढुलाई ट्रेन दिल्ली के लिए रवाना की गई है।  कश्मीर की अर्थव्यवस्था को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए LG Manoj Sinha ने सोमवार को नौगाम रेलवे स्टेशन से कश्मीर और नई दिल्ली के बीच संयुक्त पार्सल उत्पाद-रैपिड कार्गो सेवा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह नई पार्सल ट्रेन सेवा विशेष रूप से बागवानी उत्पादों के त्वरित परिवहन में मददगार साबित होगी और क्षेत्र के फल उत्पादकों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आएगी।  मैं इस पहल के लिए रेलवे का आभारी हूँ।" उन्होंने कहा, "हमने देखा है कि भौगोलिक कारणों और खराब मौसम की वजह से राष्ट्रीय राजमार्ग कई बार अवरुद्ध हो जाते हैं। इस बंद होने से जल्दी खराब होने वाले सामानों को नुकसान होता है। रेलवे पार्सल सेवाओं की शुरुआत इस समस्या के समाधान की दिशा में एक बड़ी छलांग है।"   इस बीच, रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पार्सल सेवा बडगाम और आदर्श नगर, नई दिल्ली के बीच चलेगी, जिसका जम्मू के बारी ब्राह्मणा में एक निर्धारित ठहराव होगा। इस ट्रेन में 23-23 टन क्षमता वाले आठ पार्सल कोच हैं और शुरुआत में ये सेब और अखरोट ले जाएंगे। उन्होंने आगे कहा कि इस सुविधा से रसद व्यवस्था सुचारू होने, समय पर माल लदान और परिवहन घाटे में कमी आने की उम्मीद है। पहली ट्रेन ₹2.5 करोड़ मूल्य के फल लेकर 24 घंटे के भीतर दिल्ली पहुंचेगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, इसी तरह की 15 कोच वाली वीपी ट्रेन जल्द ही अनंतनाग से फल, खासकर सेब ले जाने के लिए चलेगी। अधिकारियों ने कहा कि यह पहल न केवल कश्मीर के लिए, बल्कि पूरे जम्मू और कश्मीर क्षेत्र और भारतीय रेलवे के लिए गर्व का क्षण है।

‘परिक्रमा-कृपा सार’ से झलका आध्यात्मिक अनुभव, प्रहलाद पटेल ने लॉन्च की नई पुस्तक

इंदौर  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने मध्य प्रदेश के श्रम, पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल की किताब ‘परिक्रमा-कृपा सार’ का विमोचन किया. यह किताब नर्मदा परिक्रमा के अनुभवों पर लिखी गई है. प्रहलाद पटेल ने सूबे की नदियों के उद्गम को बचाने के लिए ‘उद्गम मानस यात्रा’ शुरू की थी. उन्होंने बुक लॉन्चिंग के दौरान कहा कि अगर वो केंद्र से मध्य प्रदेश की राजनीति में न लौटते, तो शायद नदियों के उद्गम को बचाने का संकल्प न ले पाते.  प्रहलाद पटेल नर्मदा परिक्रमा के अनुभवों पर लिखी अपनी किताब ‘परिक्रमा-कृपा सार’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित किया. उन्होंने 2 साल पहले ‘उद्गम मानस यात्रा’ शुरू की थी. इसके तहत वो अब तक 108 नदियों के उद्गम स्थलों तक पहुंच चुके हैं. प्रहलाद पटेल की इस यात्रा का मकसद मध्य प्रदेश की जीवनदायिनी नदियों के पुनर्जीवन और संरक्षण को लेकर जनता में जागरूकता फैलाना है. इसके साथ ही पर्यावरण के प्रति लोगों में चेतान फैलाना भी है.  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे मोहन भागवत प्रहलाद पटेल की किताब ‘परिक्रमा-कृपा सार’ का विमोचन इंदौर के ‘ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर’ में 14 सितंबर (हिंदी दिवस) पर मोहन भागवत और महामंडलेश्वर श्री ईश्वरानंद जी महाराज की विशेष उपस्थिति में किया गया. विमोचन कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. भागवत ने कहा, ‘नर्मदा परिक्रमा में जो कुछ प्रहलाद जी को बोध मिला होगा, उस बोध (पुस्तक) को सरसरी तौर पर जो मैंने पढ़ा है, उसमें तो यही है कि मैं और मेरा छोड़ो; अंतःकरण पवित्र करो. स्वार्थ बिल्कुल मत रखो. कर्तव्य, कर्म करते चलो, सबको अपना मानकर चलते जाओ.’ कार्यक्रम के दौरान प्रहलाद पटेल ने किताब के लेखन से जुड़े अनुभव साझा करते हुए कहा कि 30 साल पहले उन्होंने अपने आराध्य श्रीश्री बाबाश्री जी की सेवा करते हुए नर्मदा परिक्रमा की थी. इस यात्रा का राजनीति से कोई संबंध नहीं था. उसी दौरान के अनुभव और अनुभूतियों को संकलन करके यह किताब सामने आई है. पुस्तक विमोचन से पहले मोहन भागवत को प्रहलाद पटेल ने अपनी ‘उद्गम मानस यात्रा’ के दौरान इकट्ठा किए गए 108 नदियों का पवित्र जल भी सौंपा.

प्रियांक खरगे का बयान कांग्रेस के लिए बना सेल्फगोल? विपक्ष ने उठाए तीखे सवाल

बेंगलुरु  कांग्रेस के नेता चुनाव से ऐन पहले सेल्‍फगोल करने के ल‍िए जाने जाते हैं. इस कड़ी में अब नया नाम कांग्रेस अध्‍यक्ष मल्‍ल‍िकार्जुन खरगे के बेटे प्र‍ियांका खरगे का जुड़ गया है. कर्नाटक के कलबुर्गी में प्र‍ियांक खरगे ने कहा, ‘सिख धर्म, जैन धर्म, बौद्ध धर्म और लिंगायत धर्म सभी भारत में एक अलग धर्म के रूप में पैदा हुए, क्योंकि हिंदू धर्म ने समाज के कुछ वर्गों को ‘गरिमापूर्ण स्‍थान’ नहीं दिया.’ बीजेपी नेता इसे मुद्दा बना रहे हैं और कांग्रेस की नीयत पर ही सवाल उठा रहे हैं. इसे बिहार चुनाव से भी जोड़ा जा रहा है. तो क्‍या बिहार चुनाव से पहले कांग्रेस के एक और नेता ने सेल्‍फ गोल कर द‍िया. बात सिर्फ प्र‍ियांक खरगे की नहीं है, एक द‍िन पहले कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री सिद्धारमैया ने हिंदू समाज में असमानता और जातिवाद पर टिप्‍पणी की थी, जिसे बीजेपी ने ह‍िन्‍दू धर्म को अपमान‍ित करने का मुद्दा बना ल‍िया था. राज्य बीजेपी अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र और एमएलसी सी. टी. रवि ने कहा था क‍ि ऐसे बयान देकर राज्‍य सरकार धर्मांतरण को बढ़ावा दे रही है. उसी का जवाब देते हुए प्र‍ियांक खरगे ने ह‍िन्‍दू धर्म को ही कठघरे में खड़ा कर द‍िया. भाजपा नेताओं पर पलटवार करते हुए खरगे ने कहा, मुझे नहीं लगता कि विजयेंद्र और रवि भारत में धर्मों के इतिहास के बारे में जानते हैं. सिख धर्म, जैन धर्म, बौद्ध धर्म और लिंगायत धर्म सभी भारत में अलग धर्म के रूप में पैदा हुए. ये सभी धर्म इसलिए पैदा हुए क्योंकि हिंदू धर्म ने इनके लिए जगह नहीं बनाई, इन्हें गरिमा नहीं दी. बाबा साहेब अंबेडकर का उदाहरण पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने सवाल किया, चातुर्वर्ण व्यवस्था क्या है? क्या यह किसी और धर्म में है? यह केवल हिंदू धर्म में है. बाबा साहेब अंबेडकर ने नारा दिया था कि हिंदू के रूप में जन्म लेना मेरे हाथ में नहीं है, लेकिन मैं हिंदू के रूप में मरूंगा नहीं. क्यों? क्योंकि वर्ण व्यवस्था की वजह से. उन्होंने कहा, लोगों के पास गरिमा नहीं थी, विभिन्न जातियां इस व्यवस्था से बाहर महसूस करती थीं. भारत में जितने भी धर्म पैदा हुए हैं, वे इसी असमानता के खिलाफ पैदा हुए हैं. मुझे नहीं लगता कि ये (भाजपा) नेता जानते भी हैं कि यह असल में है क्या. सिद्धारमैया ने क्‍या कहा था शनिवार को मैसूरु में एक सवाल पर जवाब देते हुए सिद्धारमैया ने कहा था, कुछ लोग इस व्यवस्था की वजह से धर्मांतरण कर रहे हैं. अगर हिंदू समाज में समानता और बराबरी के अवसर होते, तो धर्मांतरण क्यों होता? छुआछूत क्यों आया? जब उनसे मुसलमानों और ईसाइयों में असमानता के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, जहां भी असमानता है-चाहे मुसलमानों में हो या ईसाइयों में, न हमने और न ही भाजपा ने लोगों से कहा कि धर्म बदल लो. लोग बदले हैं. यह उनका अधिकार है.

राष्ट्रीय लोक अदालत में 39 हजार से ज्यादा बिजली मामलों का समाधान, ऊर्जा मंत्री तोमर ने दी जानकारी

राष्ट्रीय लोक अदालत में हुए 39 हजार से अधिक बिजली संबंधी प्रकरण निराकृत : ऊर्जा मंत्री तोमर उपभोक्ताओं को मिली 14 करोड़ रूपये की छूट भोपाल ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जानकारी दी है कि गत दिनों आयोजित हुई राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रदेश में 39 हजार 337 प्रकरणों का निराकरण किया गया है। राष्ट्रीय लोक अदालत में पात्रता अनुसार बिजली उपभोक्ताओं को 14 करोड़ 3 हजार रूपये की छूट दी गई है। बिजली कम्पनियों को 45 करोड़ 13 लाख रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा 17 हजार 486 प्रकरणों का निराकरण कर विद्युत उपभोक्ताओं को 7 करोड 33 लाख 83 हजार रूपये की छूट दी गई है। कम्पनी को 21 करोड़ 8 लाख रूपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। इसी तरह पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा 13 हजार 233 प्रकरणों का निराकरण कर विद्युत उपभोक्ताओं को 3 करोड़ 92 लाख रूपये की छूट दी गई है। बिजली कम्पनी को 13 करोड़ 22 लाख रूपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी द्वारा 8 हजार 618 प्रकरणों का निराकरण कर विद्युत उपभोक्ताओं को 2 करोड़ 77 लाख रूपये की छूट दी गई है। बिजली कम्पनी को 10 करोड़ 11 लाख रूपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है। उल्लेखनीय है कि लोक अदालत में 10 लाख रूपए तक के सिविल दायित्व के प्रकरणों में समझौते की सीमा निर्धारित थी। विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135, धारा 126 के तहत दर्ज बिजली चोरी एवं अनियमितताओं के प्रकरणों का समझौता किया गया। प्री लिटिगेशन स्तर सिविल दायित्व की राशि पर 30 प्रतिशत एवं ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत की छूट, लिटिगेशन स्तर के प्रकरणों में आंकलित सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं ब्याज की राशि पर 100 प्रतिशत छूट प्रदान की गई। धारा 126 के प्रकरणों में सिविल दायित्व की राशि पर 20 प्रतिशत एवं विलंब होने पर ब्याज में सौ प्रतिशत की छूट देय थी।  

सिराज की रफ्तार ने फिर मचाया धमाल, अगस्त 2025 के लिए बने ICC प्लेयर ऑफ द मंथ

मुंबई  भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद सिराज (Mohammed Siraj) ने एक बार फिर अपने शानदार प्रदर्शन से सबको प्रभावित किया है. अगस्त 2025 के लिए उन्हें ICC मेंस प्लेयर ऑफ द मंथ चुना गया है. इस दौड़ में सिराज को न्यूजीलैंड के मैट हेनरी और वेस्टइंडीज के जायडन सील्स जैसी दिग्गज गेंदबाजों से कड़ी चुनौती मिली, लेकिन अंत में भारतीय पेसर ने बाजी मार ली. इंग्लैंड दौरे पर उनका दमदार प्रदर्शन इस उपलब्धि की बड़ी वजह रहा. इंग्लैंड सीरीज के नायक बने सिराज भारत और इंग्लैंड के बीच खेली गई 5 टेस्ट मैचों की एंडरसन-तेंदुलकर सीरीज 2-2 से ड्रॉ रही. इस सीरीज में मोहम्मद सिराज भारत की ओर से सबसे सफल गेंदबाज साबित हुए. उन्होंने 9 पारियों में कुल 23 विकेट चटकाए. सिराज का प्रदर्शन सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने निर्णायक मौकों पर टीम इंडिया को मैच में वापसी दिलाई. सीरीज में सिराज ने 2 बार पांच-पांच विकेट झटके, जबकि एक बार चार विकेट लिए. 32.43 की औसत और लगातार विकेट लेने की लय ने उन्हें इंग्लैंड की बल्लेबाजी लाइनअप के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना दिया. ओवल टेस्ट का जादुई स्पेल अगस्त 2025 में सिराज ने जो सबसे यादगार प्रदर्शन किया, वह ओवल टेस्ट में देखने को मिला. इस मैच में उन्होंने दोनों पारियों को मिलाकर 9 विकेट चटकाए. 21.11 की औसत से लिए गए ये विकेट भारत के लिए बेहद अहम साबित हुए. सिराज के इस दमदार प्रदर्शन की बदौलत भारत ने ओवल टेस्ट जीतकर सीरीज को बराबरी पर समाप्त किया. यही मैच उनके लिए ‘प्लेयर ऑफ द मंथ’ जीतने का टर्निंग पॉइंट भी बना. आंकड़ों के मुताबिक, सिराज इस सीरीज में सबसे ज्यादा 1113 गेंदें फेंकने वाले खिलाड़ी भी रहे, जिसने उनकी फिटनेस और निरंतरता को उजागर किया. लगातार भरोसे पर खरे उतरे सिराज सीरीज में इकलौते भारतीय तेज गेंदबाज थे जिन्होंने सभी पांच टेस्ट मैच खेले. यह अपने आप में दर्शाता है कि टीम मैनेजमेंट उनके फिटनेस और कौशल पर कितना भरोसा करता है. उन्होंने जेम्स एंडरसन, जो रूट और बेन स्टोक्स जैसे बड़े नामों को कई बार पवेलियन भेजकर अपनी काबिलियत साबित की. उनका योगदान सिर्फ विकेट लेने तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने लंबे-लंबे स्पेल डालकर बाकी गेंदबाजों पर दबाव कम किया और मैच में संतुलन बनाए रखा. सिराज की भावनाएं और बयान अवॉर्ड मिलने के बाद मोहम्मद सिराज ने खुशी जाहिर करते हुए कहा “ये अवॉर्ड मेरे लिए बहुत स्पेशल है. एंडरसन-तेंदुलकर सीरीज हमेशा यादगार रहेगी, क्योंकि दोनों टीमों के बीच बेहद कांटे का मुकाबला हुआ. ये सम्मान सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ और मेरे सभी साथियों का है, जिन्होंने मुझ पर भरोसा बनाए रखा. भारत की जर्सी पहनकर मेरा इरादा हमेशा यही रहता है कि मैं टीम के लिए अपना 100% दूं.” सिराज के इस बयान ने साफ कर दिया कि वे व्यक्तिगत उपलब्धियों से ज्यादा टीम की सफलता को अहमियत देते हैं. भारत को मिली मजबूत तेज गेंदबाजी की ताकत मोहम्मद सिराज का ये अवॉर्ड भारत की तेज गेंदबाजी यूनिट के लिए भी बड़ी उपलब्धि है. जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी और उमेश यादव जैसे सीनियर गेंदबाजों के बाद सिराज अब टीम के प्रमुख पेसर के रूप में खुद को स्थापित कर चुके हैं. इंग्लैंड जैसी कठिन परिस्थितियों में उन्होंने जिस अंदाज में गेंदबाजी की, उसने भारतीय तेज आक्रमण को और भी मजबूत बना दिया. उनकी निरंतरता और स्पेल में विकेट लेने की क्षमता भारत के लिए भविष्य में भी गेम-चेंजर साबित हो सकती है.