samacharsecretary.com

अमृतसर में बिना नंबर प्लेट गाड़ियों पर सख्ती, पेट्रोल-डीजल देने पर रोक

अमृतसर    पंजाब के अमृतसर में अब सड़क पर बिना वैध नंबर प्लेट के वाहन दौड़ाना भारी पड़ सकता है। शहर में बढ़ते अपराधों और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी पर लगाम कसने के लिए पुलिस प्रशासन ने बेहद सख्त कदम उठाया है। पुलिस कमिश्नर हरमनबीर सिंह गिल ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी बीएनएसएस (BNSS) की धारा 163 के तहत एक आदेश जारी किया है, जिसके तहत कमिश्नरेट क्षेत्र के किसी भी फ्यूल स्टेशन पर बिना वैध नंबर प्लेट वाले वाहनों को पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं दी जाएगी। पुलिस का यह फैसला शहर की सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अपराधियों पर शिकंजा कसने की तैयारी प्रशासन के संज्ञान में आया था कि कई वाहन चालक जानबूझकर अपनी नंबर प्लेट को मोड़कर, तोड़कर, ढककर या उसमें छेड़छाड़ करके वाहन चलाते हैं। इस तरह की कारगुजारियों से ट्रैफिक पुलिस के साथ-साथ स्थानीय पुलिस को भी वाहनों की सही पहचान करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अस्पष्ट या फर्जी नंबर प्लेट वाले इन वाहनों का इस्तेमाल अक्सर हिट एंड रन, चेन स्नैचिंग, वाहन चोरी और लूटपाट जैसी आपराधिक वारदातों को अंजाम देने के लिए किया जाता है। ऐसे में ईंधन मिलने पर रोक लगने से अपराधियों की गतिविधियों पर काफी हद तक लगाम लगेगी। नए वाहनों और आपातकालीन सेवाओं को छूट जारी किए गए आदेश के मुताबिक, अमृतसर की सीमा में उन्हीं वाहनों को ईंधन मिलेगा जिनके आगे और पीछे वैध हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट यानी एचएसआरपी (HSRP) लगी होगी। यदि नंबर प्लेट टूटी हुई, मुड़ी हुई, ढकी हुई या बदली हुई पाई गई, तो फ्यूल पंप पर सरेआम मनाही होगी। हालांकि, इस पाबंदी से कुछ जरूरी रियायतें भी दी गई हैं। जिन नए वाहनों पर वैध रजिस्ट्रेशन नंबर या वैध अस्थायी (टारानी) नंबर चस्पा होगा, उन्हें इस नियम से छूट दी गई है। इसके अलावा एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य आवश्यक आपातकालीन सेवाओं में लगे सरकारी व गैर-सरकारी वाहनों पर भी यह प्रतिबंध लागू नहीं होगा। पेट्रोल पंप संचालकों के लिए निर्देश और सीसीटीवी की अनिवार्यता इस नियम को सख्ती से लागू करने के लिए पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशन मालिकों की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है। सभी पंप संचालकों को अपने प्रवेश द्वार और ईंधन भरने वाली जगह के पास कम से कम 3 गुणा 3 फीट का एक बड़ा सूचना बोर्ड लगाना होगा, जिस पर साफ शब्दों में लिखा हो कि बिना वैध नंबर प्लेट के ईंधन नहीं दिया जाएगा। इसके अलावा, पंप परिसरों में लगे सीसीटीवी और एएनपीआर (ANPR) कैमरों को चौबीसों घंटे चालू रखना अनिवार्य किया गया है ताकि आने-जाने वाले हर वाहन की आगे और पीछे की नंबर प्लेट साफ-साफ रिकॉर्ड हो सके। पंप संचालकों को यह फुटेज कम से कम 30 दिनों तक संभाल कर रखनी होगी और पुलिस द्वारा मांगे जाने पर तुरंत उपलब्ध करानी होगी।     बिना वैध नंबर प्लेट ईंधन नहीं, नए वाहनों को छूट: आदेश के मुताबिक, अमृतसर में जिन वाहनों के आगे और पीछे वैध हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट यानी HSRP नहीं लगी होगी, उन्हें पेट्रोल, डीजल या सीएनजी नहीं दी जाएगी। नंबर प्लेट हटाई, टूटी, मुड़ी, ढकी या बदली हुई होने पर भी ईंधन नहीं मिलेगा। जिन नए वाहनों पर वैध रजिस्ट्रेशन नंबर या वैध अस्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर लगा होगा, उन्हें इस पाबंदी से छूट दी गई है। एंबुलेंस, फायर ब्रिगेड और अन्य जरूरी वाहनों को भी छूट रहेगी।     पेट्रोल पंप पर बोर्ड लगाना जरूरी: सभी पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशन संचालकों को प्रवेश द्वार व ईंधन भरने वाली जगह के पास कम से कम 3 गुणा 3 फीट का सूचना बोर्ड लगाना होगा। बोर्ड पर साफ लिखा होगा कि बिना वैध नंबर प्लेट वाले वाहन को ईंधन नहीं दिया जाएगा। पेट्रोल पंप और सीएनजी स्टेशन संचालकों को अपने सीसीटीवी और एएनपीआर कैमरे हर समय चालू रखने होंगे।     कैमरों में स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड होनी चाहिए नंबर प्लेट: आने-जाने वाले वाहनों की आगे और पीछे की नंबर प्लेट कैमरों में स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड होनी चाहिए। पेट्रोल पंप संचालकों को कैमरों की रिकॉर्डिंग कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखनी होगी। पुलिस की जरूरत पड़ने पर यह फुटेज उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।     बोतल या कंटेनर में ईंधन नहीं, विवाद पर 112 पर सूचना: पेट्रोल और डीजल पंपों पर किसी गैर-अधिकृत व्यक्ति को बोतल, कंटेनर या किसी अन्य बर्तन में पेट्रोल-डीजल देने पर भी रोक रहेगी। अगर बिना नंबर प्लेट वाले वाहन को ईंधन देने से इनकार करने पर चालक विवाद, हंगामा या गाली-गलौज करता है, तो पेट्रोल पंप संचालक तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या 112 पर सूचना दे सकता है। नियम तोड़ने पर कार्रवाई आदेश का उल्लंघन करने वाले वाहन मालिक, चालक, पेट्रोल पंप संचालक या कर्मचारी के खिलाफ BNSS की धारा 223 और मोटर व्हीकल एक्ट की लागू धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। पुलिस के मुताबिक, इस आदेश का उद्देश्य वाहनों की पहचान सुनिश्चित करना, ट्रैफिक नियमों की निगरानी मजबूत करना और आपराधिक गतिविधियों में इस्तेमाल होने वाले वाहनों पर नजर रखना है। बोतल में पेट्रोल देने पर रोक और विवाद पर तुरंत एक्शन सुरक्षा के लिहाज से पेट्रोल और डीजल पंपों पर किसी भी गैर-अधिकृत व्यक्ति को खुली बोतल, डिब्बे या किसी अन्य कंटेनर में ईंधन देने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। यदि कोई वाहन चालक बिना नंबर प्लेट के फ्यूल मांगता है और पंप कर्मचारी द्वारा मना करने पर किसी तरह का विवाद, हंगामा या बदसलूकी करता है, तो संचालक या कर्मचारी तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या इमरजेंसी नंबर 112 पर कॉल करके पुलिस को सूचना देंगे। यदि कोई भी व्यक्ति या पंप संचालक इन आदेशों की अवहेलना करता पाया गया, तो उसके खिलाफ बीएनएसएस की धारा 223 और मोटर व्हीकल एक्ट के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने लगातार दूसरी बार जीता एशियन गेम्स गोल्ड, श्रीलंका को दी करारी शिकस्त

आइची-नागोया आइची-नागोया एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने गोल्ड मेडल जीत लिया है. गोल्ड मेडल मैच में भारतीय टीम ने श्रीलंका को 147 रनों से पराजित किया. मंगलावर (22 सितंबर) को निशिन के कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में हुए मुकाबले में भारत ने श्रीलंका के सामने 217 रनों का टारगेट दिया था, लेकिन उसकी पूरी टीम 15.4 ओवरों में 69 रनों पर सिमट गई. मौजूदा एशियन गेम्स में ये भारत का पहला गोल्ड मेडल है. इससे पहले भारत ने मौजूदा गेम्स में 4 सिल्वर और दो ब्रॉन्ज जीते थे. भारत की महिला क्रिकेट टीम ने हांगझोउ एशियन गेम्स 2022 में भी गोल्ड मेडल जीता था. तब भारतीय टीम ने फाइनल में श्रीलंका को 19 रनों से पराजित किया था. अब उसने लगातार दूसरी बार गोल्ड मेडल अपने नाम किया. एशियन गेम्स 2026 में विमेंस क्रिकेट प्रतियोगिता का ब्रॉन्ज पाकिस्तान ने जीता. पाकिस्तानी टीम ने ब्रॉन्ज मेडल मैच में बांग्लादेश को 31 रनों से हराया. रनचेज में श्रीलंकाई टीम ने शुरुआत से ही विकेट गंवाए और कभी भी मैच में वापसी नहीं कर पाई. कप्तान चमारी अटापट्टू ने सबसे ज्यादा 21 बॉल पर 29 रन बनाए, जिसमें पांच चौके शामिल रहे. भारत की ओर से दीप्ति शर्मा ने सबसे ज्यादा तीन विकेट झटके. वहीं शेफाली वर्मा, श्रेयंका पाटिल और श्री चरणी ने दो-दो विकेट लिए. स्मृति ने लगाई तूफानी फिफ्टी मुकाबले में टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए भारतीय टीम ने 3 विकेट पर 216 रन बनाए. स्मृति मंधाना ने 7 छक्के और 5 चौके की मदद से 45 बॉल पर 79 रनों का योगदान दिया. वहीं ऋचा घोष ने सिर्फ 22 बॉल पर नाबाद 49 रन बनाए, जिसमें 6 चौके और तीन छक्के शामिल रहे. ओपनर शेफाली वर्मा ने 29 बॉल पर 48 रनों की पारी खेली. शेफाली ने अपनी पारी में 3 छक्के और 3 चौके लगाए. शेफाली वर्मा और स्मृति मंधाना के बीच पहले विकेट के लिए 99 रनों की साझेदारी हुई. इस पार्टनरशिप ने ही बड़े स्कोर की नींव रखी. श्रीलंका की ओर से सुगंधिका कुमारी, चामुदी प्रबोदा और कविशा दिलहारी ने एक विकेट हासिल किए. एशियन गेम्स 2026 में भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने क्वार्टर फाइनल में जापान को 8 विकेट से पराजित किया था. फिर उसने सेमीफाइनल में बांग्लादेश को 114 रनों से धूल चटाई. श्रीलंका का क्वार्टर फाइनल मलेशिया से था, जहां टीम ने 86 रनों से जीत हासिल की. फिर सेमीफाइनल में श्रीलंका ने पाकिस्तान को 8 विकेट से धो दिया. देखा जाए तो भारत और श्रीलंका के बीच विमेंस टी20 इंटरनेशनल में अब तक 32 मुकाबले खेले गए हैं. इस दौरान भारतीय टीम ने 26 मैचों में जीत हासिल की. वहीं श्रीलंका ने केवल 5 मुकाबले जीते. जबकि एक मैच का नतीजा नहीं निकला. यानी आंकड़ों में भारतीय टीम का पलड़ा श्रीलंका पर हमेशा से भारी रहा है. भारत बनाम श्रीलंका h2h कुल विमेंस टी20I मैच: 32 भारत ने जीते: 26 श्रीलंका ने जीते: 5 बेनतीजा: 1 फाइनल में भारत की प्लेइंग इलेवन: स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, गुनालन कमलिनी, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), ऋचा घोष (विकेटकीपर), भारती फुलमाली, दीप्ति शर्मा, श्रेयंका पाटिल, श्री चरणी, नंदनी शर्मा और क्रांति गौड़. फाइनल में श्रीलंका की प्लेइंग इलेवन: इमेशा दुलानी, चमारी अटापट्टू (कप्तान), हसिनी परेरा, हर्षिता समरविक्रमा, कविशा दिलहारी, हंसिमा करुणारत्ने, कौशानी नुथ्यांगना (विकेटकीपर), मिताली अयोध्या, काव्या कविंदी, चामुदी प्रबोदा और सुगंधिका कुमारी. भारत का स्क्वॉड: स्मृति मंधाना, शेफाली वर्मा, गुनालन कमलिनी, हरमनप्रीत कौर (कप्तान), ऋचा घोष (विकेटकीपर), भारती फुलमाली, दीप्ति शर्मा, श्रेयंका पाटिल, श्री चरणी, नंदनी शर्मा, क्रांति गौड़, रेणुका सिंह ठाकुर, अरुंधति रेड्डी और राधा यादव. श्रीलंका का स्क्वॉड: इमेशा दुलानी, चमारी अटापट्टू (कप्तान), हसिनी परेरा, हर्षिता समरविक्रमा, कविशा दिलहारी, हंसिमा करुणारत्ने, कौशानी नुथ्यांगना (विकेटकीपर), मिताली अयोध्या, काव्या कविंदी, चामुदी प्रबोदा, सुगंधिका कुमारी, रश्मिका सेववंडी, निमाशा मीपेज, संजना कविंदी और अनुष्का संजीवनी.

यूपी में सपा-कांग्रेस की खींचतान तेज, इमरान मसूद और इकरा हसन आमने-सामने

लखनऊ  उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर चल रही शह-मात की राजनीति अब एक दिलचस्प मोड़ पर आ पहुंची है. सीट-शेयरिंग को लेकर जारी अंदरूनी घमासान में अब पश्चिमी यूपी के दो प्रमुख मुस्लिम चेहरे आमने-सामने आ गए हैं. यह मामला सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और कैराना से सपा सांसद इकरा हसन के बीच की सीधी सियासी जंग में तब्दील होता दिख रहा है।  सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार सपा पर हमलावर रुख अपनाए हुए हैं. इतना ही नहीं, वे अखिलेश यादव की मुस्लिम पॉलिटिक्स पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं. इमरान मसूद के सियासी तेवर को देखते हुए सपा ने कैराना से सांसद इकरा हसन को फ्रंटफुट पर उतार दिया है।  सपा सांसद इकरा हसन ने इमरान मसूद पर करारा पलटवार करते हुए साफ कहा कि प्रदेश में अखिलेश यादव ही बीजेपी का मुकाबला कर पाने में सक्षम हैं. सीधे तौर पर कांग्रेस को निशाने पर लेते हुए इकरा ने कहा कि कांग्रेस अकेले चुनावी मैदान में उतरने की स्थिति में कुछ न कर पाएगी. इस तरह कांग्रेस और सपा की लड़ाई इमरान मसूद बनाम इकरा हसन में तब्दील हो गई है।  इमरान मसूद का दबाव और 'अकेले लड़ने' का दांव उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के छह सांसद हैं, लेकिन सबसे मुखर इमरान मसूद ही नजर आते हैं. सपा के साथ गठबंधन में कांग्रेस की बार्गेनिंग पावर को मजबूत करने का बीड़ा लगता है इमरान मसूद ने अपने कंधों पर उठा रखा है. इमरान मसूद लगातार यह दबाव बना रहे हैं कि सपा अक्टूबर तक सीट-बंटवारा तय करे. उनका तर्क है कि राहुल गांधी की अगुवाई के बिना भाजपा का मुकाबला संभव नहीं है।  इमरान मसूद लगातार कह रहे हैं कि गठबंधन को लेकर जो भी होना है, उसे तुरंत फाइनल रूप दिया जाना चाहिए. देरी होने की स्थिति से नुकसान हो रहा है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के बिना भाजपा को नहीं हराया जा सकता है. गठबंधन में यदि अखिलेश यादव बड़ा दिल नहीं दिखाते हैं तो कांग्रेस अकेले चुनाव मैदान में उतरने से भी पीछे नहीं हटेगी. इतना ही नहीं, उन्होंने कहा कि हम अपने जिले की सीटों पर कोई रियायत नहीं करने वाले हैं।  कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का यह आक्रामक रुख असल में कांग्रेस की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह पश्चिमी यूपी और मुस्लिम बहुल सीटों पर सपा के सामने अपनी शर्तों पर सौदेबाजी करना चाहती है।  फ्रंटफुट पर सपा ने इकरा हसन को उतारा सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इमरान मसूद से सीधे खुद उलझने के बजाय अपने क्षेत्रीय जनाधार वाले युवा चेहरों को आगे किया है. इमरान मसूद की आक्रामक बयानबाजी का जवाब देने के लिए उन्होंने पश्चिमी यूपी के अपने मुस्लिम चेहरे इकरा हसन को फ्रंटफुट पर उतार दिया है. इकरा हसन ने बिना किसी हिचकिचाहट के इमरान मसूद पर पलटवार करते हुए साफ कहा कि उत्तर प्रदेश में अगर कोई नेता भाजपा को हराने में सक्षम है, तो वे सिर्फ अखिलेश यादव हैं।  उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हैसियत बताते हुए इकरा हसन ने कहा कि अगर कांग्रेस अपने दम पर अकेले चुनाव लड़ती है तो वह कुछ नहीं कर पाएगी. कांग्रेस-सपा गठबंधन को लेकर उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए और चेतावनी भरे लहजे में कहा कि गठबंधन रहा तो अच्छा है, वरना इसका नुकसान केवल और केवल कांग्रेस को होगा, सपा को नहीं. इकरा हसन का यह बयान राज्य में सपा और कांग्रेस के रिश्तों को लेकर नई सियासत गरमा रहा है।  इमरान मसूद बनाम इकरा हसन क्यों हो गया? इमरान मसूद के सामने इकरा हसन का यह दांव सपा की एक सोची-समझी रणनीति के तहत देखा जा रहा है. इमरान मसूद और इकरा हसन दोनों ही पश्चिमी यूपी के कद्दावर मुस्लिम सियासी घरानों से आते हैं. मसूद के हमलों का जवाब देने के लिए इकरा को आगे करके सपा ने यह संदेश दिया है कि मुस्लिम मतदाताओं का पहला भरोसा आज भी सपा का 'पीडीए' (PDA) मॉडल ही है।  इमरान मसूद और इकरा हसन के बीच की यह जुबानी जंग सिर्फ दो नेताओं का बयान भर नहीं है, बल्कि यह सपा-कांग्रेस के बीच चल रही गहरी रस्साकशी का नतीजा है. कांग्रेस जल्द से जल्द अपनी सीटें पक्की करके प्रचार में उतरना चाहती है, ताकि बाद में अखिलेश यादव के रहमों-करम पर न निर्भर रहना पड़े।  सपा पहले अपने जमीनी समीकरण दुरुस्त करना चाहती है और कांग्रेस को उसकी जमीनी ताकत (संगठन के अभाव) का अहसास कराकर कम से कम सीटें देना चाहती है. इमरान मसूद बनाम इकरा हसन के इस नए सियासी चैप्टर ने यह साफ कर दिया है कि 2027 का गठबंधन भले ही ऊपरी तौर पर तय दिख रहा हो, लेकिन धरातल पर सीटों और सियासी दबदबे की यह लड़ाई अभी और तीखी होने वाली है। 

मध्यप्रदेश में फिर तेज बारिश का दौर, पूर्वी हिस्से में ज्यादा असर

भोपाल  मध्य प्रदेश में 23 सितंबर से भारी बारिश का दौर शुरू होगा। IMD (मौसम केंद्र) के मुताबिक, 24 और 25 सितंबर को सिस्टम की स्ट्रॉन्ग एक्टिविटी देखने को मिलेगी। 2 दिन में 17 जिलों में अति भारी या भारी बारिश हो सकती है।  प्रदेश में अब तक औसत 33.7 इंच पानी गिर चुका है। आगामी दिनों में तेज बारिश होने से इस आंकड़े सुधार की उम्मीद है। बता दें कि दक्षिण-पश्चिम मानसून सितंबर के आखिरी सप्ताह से विदा होना शुरू हो जाएगा, लेकिन इससे पहले तेज बरसात का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार, लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) की वजह से प्रदेश में भारी बारिश के आसार दिखाई दे रहे हैं। 23 सितंबर से कुछ जिलों में पानी गिरेगा। पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के जिलों में असर ज्यादा रहेगा। भोपाल और नर्मदापुरम संभाग में भी अलर्ट है। इससे पहले रविवार रात को भोपाल के कई इलाकों में तेज पानी गिरा। नर्मदापुरम में हवा चलने के बाद करीब पौन घंटे बारिश हुई। फेफरताल में 33 केवी लाइन पर पेड़ गिर गया। बिजली गुल होने से शहर का करीब 40 फीसदी हिस्सा अंधेरे में डूबा रहा। रसूलिया, आशुतोष नगर और हरदा रोड स्थित महाराणा प्रताप मार्केट में गणेश पंडालों को नुकसान पहुंचा। सोमवार को भी भोपाल समेत कई इलाकों में हल्की बारिश हुई। शाम को बादल छाए रहे। रात में कोलार इलाके में हल्की बारिश रिकॉर्ड की गई। प्रदेश में अब तक 6 प्रतिशत बारिश कम IMD की मानें तो प्रदेश में अब तक 856.8 मिमी यानी, 33.7 इंच बारिश हो चुकी है। हालांकि, यह अब तक की सामान्य बारिश 36.3 इंच (922.6 मिमी) की तुलना में 2.6 इंच कम है। वहीं, ओवरऑल 6 प्रतिशत कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में 2% और पश्चिमी हिस्से में औसत से 10% बारिश कम हुई है। प्रदेश के पूर्वी हिस्से- जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में 2% तक कम बारिश हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर, सिवनी में 5% से 23% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में यह आंकड़ा काफी सुधरा है। सोमवार को आंकड़ा माइनस में 2 प्रतिशत रहा। वहीं, पश्चिमी हिस्से के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, खंडवा, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 7% से 49% कम पानी गिरा है। इन 23 जिलों में ज्यादा बारिश IMD की माने तो अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में ही औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई।

वायरल ऑडियो पर पंजाब में सियासी विवाद, चीमा बोले- पुलिस को ऐसा आदेश नहीं

चंडीगढ़ पंजाब में पुलिसकर्मियों के लिए एक नए निर्देश को लेकर सियासत गरमा गई है। एक वायरल ऑडियो में दावा किया गया है कि पुलिसकर्मियों को घर से वर्दी पहनकर न आने का आदेश दिया गया है। इस ऑडियो के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। ऑडियो में कहा गया है कि पुलिसकर्मी थाने आकर ही वर्दी पहनें। इस दावे ने राज्य की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अकाली नेता बिक्रम मजीठिया ने इस पर तंज कसते हुए कहा कि जिस वर्दी पर गर्व था, आज वही छिपानी पड़ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि फिर इतनी सुरक्षा का क्या फायदा। मजीठिया ने आरोप लगाया कि पुलिस गैंगस्टरों के सामने बेबस है। उन्होंने कहा कि आम पंजाबियों में डर का माहौल है। उनके अनुसार, कानून व्यवस्था पूरी तरह से पुलिस के हाथ से निकल चुकी है।  कांग्रेस ने भी साधा निशाना कांग्रेस के प्रदेश प्रधान अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी प्रसारित ऑडियो साझा किया। उन्होंने कहा कि पंजाब जल रहा है और भगवंत मान मंचों पर चुटकुले सुना रहे हैं। वड़िंग ने स्थिति की तुलना "रोम जल रहा था और नीरो बांसुरी बजा रहा था" से की। उन्होंने राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। अमृतसर देहात, बटाला, गुरदासपुर और पठानकोट के SSP को पुलिस कर्मचारियों की निजी सुरक्षा, ड्यूटी पॉइंट और संवेदनशील स्थानों की सुरक्षा को लेकर विशेष हिदायतें जारी की गई हैं। अधिकारियों को इन निर्देशों की सख्ती से पालन करवाने के लिए कहा गया है। ऑडियो में किसी महिला की आवाज है, जो अपने आप को पुलिस मुलाजिम ही बता रही है। वह कह रही है कि अधिकारियों से सभी पुलिसवालों को निर्देश मिले हैं कि वर्दी, बेल्ट, पहचान चिन्ह, पुलिस उपकरण या ऐसा कोई सामान प्रदर्शित नहीं करना है, जिससे उनकी पहचान आसानी से हो सके। कर्मचारियों को निजी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने और आने-जाने की दिनचर्या में संभव बदलाव रखने को कहा गया है। पूर्व अकाली मंत्री बिक्रम मजीठिया ने भी ये ऑडियो पोस्ट की है। हालांकि, पंजाब पुलिस ने पोस्ट कर इन दावों को झूठा बताया है। पंजाब पुलिस की पोस्ट में कहा गया है कि अधिकारियों की ओर से ऐसा कोई दावा नहीं किया गया है। मंत्री हरपाल चीमा ने भी इन दावों को फर्जी बताया है। पंजाब पुलिस की ओर से ये बातें लिखी गईं     ऐसा कोई निर्देश जारी नहीं किया: पुलिस की पोस्ट में लिखा गया है- पंजाब पुलिस मुख्यालय या उसके अधीन किसी भी पंजाब पुलिस कार्यालय की ओर से पुलिस कर्मचारियों को ड्यूटी पर जाते या ड्यूटी से लौटते समय वर्दी न पहनने का कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है।     दावे फर्जी: सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे ऐसे संदेश फर्जी हैं। इनमें पुलिस कर्मचारियों को ड्यूटी पर आने-जाने के दौरान सिविल कपड़े पहनने की बात कही जा रही है, लेकिन ऐसा कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं हुआ है।     लोगों से अपील: नागरिकों और पुलिस कर्मचारियों से अपील है कि वे सही और प्रामाणिक जानकारी के लिए केवल पंजाब पुलिस के आधिकारिक माध्यमों पर भरोसा करें। पढ़िए, वायरल ऑडियो में क्या कहा जा रहा     इस्लामाबाद में एनकाउंटर के बाद निर्देश आए: वायरल ऑडियो में कोई महिला कह रही है- सभी मुलाजिम इस ऑडियो को ध्यान से सुन लें। अभी सीपी साहब की मीटिंग हुई है। इस्लामाबाद में, ASI हरजीत सिंह के मर्डर के बाद हुए एनकाउंटर के बाद ये निर्देश दिए गए हैं।     कोई भी मुलाजिम वर्दी में न आए: ऑडियो में कहा जा रहा है- जांच में पता चला है कि पुलिस मुलाजिमों को आप मारेंगे तो मारने वाले को आगे काम दिया जाएगा। इसलिए, सीपी साहब की ओर से सख्त हिदायत है कि कोई भी मुलाजिम, चाहे गाड़ी में आ रहा हो या साइकिल पर, वह अपनी वर्दी में नहीं होगा। जूते से लेकर पगड़ी तक कोई भी पुलिसकर्मी वर्दी में नजर नहीं आना चाहिए। सभी सिविल ड्रेस में आएंगे। अगर किसी भी मुलाजिम को आते-जाते वर्दी में देखा गया तो एक्शन होगा।     और मुलाजिमों को निशाना बनाया जा सकता है: वायरल ऑडियो में कहा जा रहा है- जब ड्यूटी पर आना है, थाने तक सिविल ड्रेस में ही आना है और ड्यूटी खत्म होने के बाद भी थाने में ही वर्दी बदलकर जाना है। जांच में यह भी पता चला है कि 5-6 और मुलाजिमों को निशाना बनाए जाने की आशंका है। एक एनकाउंटर होने के बाद ऐसी घटनाएं और बढ़ गई हैं। इनमें शहर के पुलिस मुलाजिम भी निशाने पर होंगे।     महिला कर्मियों के लिए भी मैसेज: ऑडियो में सुनाई दे रहा है- महिला पुलिस मुलाजिम भी इस निर्देश को ध्यान से सुनें। जो हरविंदर या शरण आदि हैं, वे भी वर्दी पहनकर एक्टिवा पर घूम रही हैं। उन्हें भी सिविल ड्रेस में ही आना-जाना है। थाने पहुंचकर वर्दी पहननी है और ड्यूटी खत्म होने पर थाने में ही वर्दी बदलकर जाना है। वायरल पोस्टों में और क्या दावे किए जा रहे थानों-चौकियों के आसपास संदिग्धों पर नजर सोशल मीडिया पर राजा वड़िंग और बिक्रम मजीठिया की पोस्ट के साथ कुछ कागज भी डाले गए हैं। जिनमें भी दावा किया जा रहा है कि पुलिस अधिकारियों ने पुलिस कैंपों, थानों, चौकियों और न्यायिक स्थानों के आसपास संदिग्ध व्यक्तियों, वाहनों और गतिविधियों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को देने और जरूरी कानूनी व सुरक्षा कार्रवाई करने को कहा गया है। रात के समय थानों, चौकियों और संवेदनशील पॉइंटों की चेकिंग के लिए गजटेड अधिकारियों और SHO को व्यक्तिगत तौर पर निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। चेकिंग को केवल औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए संतरी ड्यूटी, सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों की सतर्कता की वास्तविक स्थिति जांचने को कहा गया है। नाके पर 360 डिग्री सुरक्षा के निर्देश, अकेले आने-जाने से बचें, बडी पेयर सिस्टम अपनाएं दावा किया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों को नाके और चेकिंग पॉइंटों पर 360 डिग्री सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश हैं। सभी कर्मचारियों को एक ही जगह पर बैठने से बचने, एक हथियारबंद और सतर्क संतरी … Read more

RTO इंस्पेक्टर मीनाक्षी हत्याकांड: इंदौर शिफ्टिंग से नाराज था बॉयफ्रेंड पवन

भोपाल  भोपाल शहर में आरटीओ इंस्पेक्टर मीनाक्षी गोखले मर्डर मामले में बड़ा अपडेट सामने आया है। बताया जा रहा है कि मीनाक्षी का ब्वॉयफ्रेंड पवन मूलतः सीधी जिले के भनवारी गांव का रहने वाला था। पवन 4 बहनों 6 भाइयों में सबसे छोटा था। पिता दीनबंधुराम द्विवेदी का निधन पिछले साल फरवरी में हो गया था जबकि मां का देहांत नवंबर में हो गया था। घरवालों ने बताया कि उसकी शादी नहीं हुई थी। लंबे समय से भोपाल में ही शादी की बात चल रही थी। बड़े भाई विनय ने बताया कि उसने 15 साल दक्षिण अफ्रीका में नौकरी की थी। बाद में वापस लौट आया। पवन बीते 7 साल से भोपाल में रह रहा था। पुलिस के मुताबिक- इसी समय मीनाक्षी की दोस्त कृतिका ने मीनाक्षी और पवन को मकान के आंगन में तेज आवाज में बात करते देखा था। कुछ घंटे बाद मीनाक्षी का शव घर के हॉल में खून से लथपथ मिला। वहीं, मकान से करीब 20 मीटर दूर पवन का शव पेड़ पर फंदे से लटका मिला। कृतिका ने पुलिस को दिए बयान में कहा है कि उसने मीनाक्षी की हत्या होते हुए नहीं देखा। उसका कहना है कि घर में दो कूलर चल रहे थे, इसलिए बाद में अंदर से हो रही बहस की आवाज उसे सुनाई नहीं दी। ऐसे में रात 1:30 बजे के बाद दोनों के बीच क्या हुआ, यह अभी पुलिस जांच का विषय है। कृतिका ने पुलिस को बताया कि सोमवार सुबह करीब 5:30 बजे इंदौर के लिए निकलना पहले से तय था। सुबह अलार्म की आवाज से उसकी नींद खुली। उसे लगा कि मीनाक्षी सो रही होगी। उसने बिस्तर से ही मीनाक्षी के मोबाइल नंबर पर कॉल किया, लेकिन कॉल नहीं उठा। इसके बाद वह कमरे से बाहर आई तो हॉल में मीनाक्षी का खून से लथपथ शव देखा। कृतिका ने तुरंत 112 पर कॉल कर पुलिस को सूचना दी। पुलिस के घर पहुंचने से पहले ही कॉलोनी के वॉचमैन ने पवन का शव फंदे पर लटका देखा और पुलिस को इसकी जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पवन से मिलने के बाद खुश थीं मीनाक्षी, खुद खाना बनाया; रात में साथ टहले कृतिका ने पुलिस को बताया कि मीनाक्षी पवन से मिलने के बाद खुश थीं। मीनाक्षी ने अपने हाथों से खाना बनाया और सभी को खिलाया। खाना खाने के बाद मीनाक्षी, पवन, कृतिका और तीन साल की बच्ची कॉलोनी में वॉक करने निकले। रात करीब 10:30 बजे तक टहलने के बाद कृतिका सोने चली गई। वह मीनाक्षी की बेटी को भी अपने साथ सुलाने ले गई थी। कृतिका के मुताबिक, मीनाक्षी ने ही उसे बच्ची को अपने साथ सुलाने की बात कही थी। कृतिका ने पुलिस को बताया कि वह सफर के कारण काफी थकी हुई थी और कुछ ही देर में उसे नींद आ गई। हालांकि, देर रात उसकी नींद खुली तो उसने मीनाक्षी और पवन को आंगन में तेज आवाज में बातचीत करते आखिरी बार देखा। कृतिका का कहना है कि उसने दोनों के बीच पहले भी विवाद होते देखे थे। इसलिए उसने उस समय उनकी बातचीत में हस्तक्षेप नहीं किया और बच्ची के साथ वापस सो गई। रिश्ता खत्म हुआ तो बढ़ा झगड़ा पुलिस के अनुसार, मीनाक्षी और पवन की पहचान इंदौर में पढ़ाई के दौरान हुई थी। तब पवन कोचिंग क्लास चलाता था और मीनाक्षी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही थीं। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन अलग जाति के कारण मीनाक्षी के परिवार की सहमति नहीं थी। बाद में मीनाक्षी ने दूसरे युवक से शादी की, लेकिन डेढ़ साल पहले उनका तलाक हो गया। इसके बाद भी पवन उससे शादी करना चाहता था। बताते हैं किराए का मकान छोड़कर इंदौर शिफ्ट होने की बात से वह नाराज था। सहेली और बेटी अंदर कमरे में सोई थी डीसीपी आदर्शकांत शुक्ला ने बताया कि मीनाक्षी रविवार शाम 7 बजे दतिया से सहेली कृतिका और तीन साल की बेटी के साथ भोपाल पहुंची थीं। रात में कृतिका और बच्ची घर के अंदर वाले कमरे में सो गए। मीनाक्षी बाहर वाले कमरे में थीं। सुबह 7 बजे कृतिका की नींद खुली तो मीनाक्षी को मृत हालत में देखा। इसके बाद पुलिस को सूचना दी। सोशल मीडिया पर एक्टिव थी मीनाक्षी  सोशल मीडिया पर काफी ज्यादा एक्टिव थी। वो अपनी 3 साल की बेटी के साथ लगातार रील और फोटो डालती रहती थी। सोशल मीडिया पर उसने वर्दी के साथ कई रील डाल रखी है। कुछ रीलों से समझ आता है कि मीनाक्षी कई चीजों के लेकर परेशान रहती थी। पति से तलाक के बाद बेटी को पूरी तरह से वहीं देखती थी। इंदौर में हुई थी दोस्ती मीनाक्षी से आरोपी पवन की दोस्ती इंदौर में हुई थी। वह पर कोचिंग क्लास चलाता था। साथ ही उससे शादी करना चाहता था। लेकिन मीनाक्षी इसके लिए तैयार नहीं थी। आशंका व्यक्त की जा रही है। इसी विवाद में उसकी हत्या हुई होगी। पति से हो चुका है तलाक वहीं, मृतक मीनाक्षी का दो साल पहले पति से तलाक हो चुका है। उसकी तीन साल की बेटी है। घटना के बाद पुलिस ने परिजनों को सूचना दे दी है। मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आएगा।

SIR के बाद चंडीगढ़ की अंतिम वोटर लिस्ट आज होगी जारी, 56 हजार नामों पर नजर

चंडीगढ़  विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाता सूची में हुए बड़े बदलाव को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी प्रेरणा पुरी मंगलवार को प्रेस वार्ता करेंगी।दोपहर 1:15 बजे सेक्टर-18 स्थित निर्वाचन विभाग के नगर योजना भवन के सी-विंग के भूतल पर होने वाली प्रेस वार्ता में SIR की पूरी प्रक्रिया, अब तक हुए सत्यापन और मतदाता सूची में हुए बदलाव की जानकारी दी जाएगी। चंडीगढ़ में SIR के बाद मतदाताओं की संख्या में बड़ी गिरावट सामने आई है। पुनरीक्षण से पहले शहर में 5,16,427 मतदाता दर्ज थे, जबकि उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अब यह संख्या करीब 4,60,109 रह गई है। हालांकि, अंतिम मतदाता सूची मंगलवार को जारी होने के बाद ही स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। किस वार्ड में कितने नाम घटे, आज मिल सकती है जानकारी प्रेस वार्ता में सबसे अहम सवाल यह रहेगा कि SIR के दौरान किस वार्ड में कितने नाम हटे, कितने नाम बरकरार रहे और कितने नए मतदाता जोड़े गए। डुप्लीकेट, मृत और दूसरे स्थान पर जा चुके मतदाताओं के नामों के सत्यापन के साथ दावे और आपत्तियों पर हुई कार्रवाई की जानकारी भी सामने आ सकती है। निगम चुनाव से पहले अहम सूची दिसंबर में प्रस्तावित नगर निगम चुनाव से पहले अंतिम मतदाता सूची महत्वपूर्ण होगी। चंडीगढ़ में 35 वार्डों में चुनाव होना है। ऐसे में वार्डवार मतदाता संख्या में हुए बदलाव से चुनावी समीकरण पर असर पड़ना स्वाभाविक है। 2024 के लोकसभा चुनाव में शहर में 6,59,696 मतदाता थे। इसके मुकाबले मौजूदा आंकड़ा करीब दो लाख कम है। मंगलवार को जारी होने वाली अंतिम सूची से ही यह साफ होगा कि वास्तविक कटौती कितनी हुई है। 3,521 पंजीकृत मतदाताओं की मृत्यु : विशेष पुनरीक्षण अभियान के दौरान ये भी सामने आया कि 3,521 पंजीकृत मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 43,878 मतदाता स्थायी रूप से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित हो चुके हैं. इसके अलावा 12,886 मतदाता ऐसे मिले, जो सत्यापन के दौरान अनुपस्थित पाए गए और उनके एन्यूमरेशन फॉर्म निर्वाचन विभाग को प्राप्त नहीं हुए।  मतदाता सूची को सटीक बनाना लक्ष्य : निर्वाचन विभाग ने स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना है, ताकि आगामी चुनावों में केवल पात्र और सत्यापित मतदाताओं के नाम ही सूची में शामिल हों। 

ग्वालियर HC सख्त, NHAI और PWD की बदहाल सड़कों पर अफसरों की जवाबदेही तय

 ग्वालियर खराब सड़कों के लिए कुख्यात नगर निगम की सड़कों की गुणवत्ता फेल सामने आई लेकिन अब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण(एनएचएआई) और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) जैसी एजेंसियों की सड़कें भी मानकों पर खरी नहीं उतर पाईं। नगर निगम के बाद अब एनएचएआई की मेहरा टोल से सिकरौदा चौराहा तक और पीडब्ल्यूडी की एजी ऑफिस से विक्की फैक्ट्री की सड़क के अधिकांश नमूने फेल सामने आए। शहर की सड़कों की गुणवत्ता को लेकर दायर जनहित याचिका में सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सड़क निर्माण की गुणवत्ता की जांच के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट में एनएचएआई के अधीन मेहरा टोल से सिकरौदा चौराहा मार्ग के अधिकांश नमूने फेल पाए गए हैं। आयोग की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि नेटवर्क सर्वे व्हीकल (एनएसवी) की अंतरिम रिपोर्ट के अनुसार भी सड़क निर्धारित मापदंडों के अनुरूप नहीं मिली। इसी तरह पीडब्ल्यूडी के अधीन एजी ऑफिस से विक्की फैक्ट्री मार्ग से लिए गए अधिकांश नमूनों का भी यही हाल मिला। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश जीएस अहलूवालिया और न्यायमूर्ति अनुराधा शुक्ला की युगलपीठ ने की। कोर्ट ने दोनों रिपोर्ट संबंधित विभागों को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं और जवाब के लिए समय दिया है। कोर्ट ने आयोग के पूरे कार्य को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि अब संबंधित अधिकारियों और विभागों को भी अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ग्वालियर शहर के हित में काम करना चाहिए। कोर्ट ने उम्मीद जताई कि अलग-अलग विभागों में पदस्थ अधिकारी भी शहर के हित में काम करने के लिए आगे आएंगे। छह माह में होना था सर्वे, दस्तावेज ही नहीं मिला एनएचएआई के अधीन सड़क की रिपोर्ट पर सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से बताया गया कि एनएचएआई को प्रत्येक छह माह में सड़क का असंयोजित सर्वे कराना आवश्यक है। हालांकि, जांच के दौरान ऐसा कोई दस्तावेज नहीं मिला, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि संबंधित सड़क का एनएसवी सर्वे कभी कराया गया था। रिपोर्ट में वार्षिकी भुगतान से संबंधित विभिन्न खामियां भी सामने आने की बात कही गई। हाई कोर्ट ने आयोग को रिपोर्ट की प्रति एनएचएआई के अधिवक्ता आशीष सरस्वत को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। सरस्वत ने जवाब प्रस्तुत करने के लिए समय मांगा, जिसे कोर्ट ने मंजूर कर लिया। सीलबंद लिफाफे में आई मूल जांच रिपोर्ट 18 सितंबर के आदेश के पालन में सोमवार को राजनंदिनी एंटरप्राइज एंड कंसल्टेंसी की मूल जांच रिपोर्ट भी कोर्ट में पेश की गई। अधिवक्ता गौरव मिश्रा ने सीलबंद लिफाफे में बिटुमिन टेस्ट रिपोर्ट, आरईसी क्रमांक 202409/07/13, दिनांक 11 जुलाई 2024 तथा डिजाइन मिक्स (डीबीएम) टेस्ट रिपोर्ट, आरईसी क्रमांक 202409/16/45, दिनांक 16 सितंबर 2024 पेश की। कोर्ट में सीलबंद लिफाफा खोला गया। इसके बाद कार्यालय को निर्देश दिया गया कि दोनों दस्तावेजों की छायाप्रति सड़क जांच आयोग को उपलब्ध कराई जाए और मूल दस्तावेजों को दोबारा सीलबंद कर सुरक्षित रखा जाए। आयोग को इन रिपोर्टों पर अपनी टिप्पणी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। निगम को पैचवर्क पूरा करने के लिए 24 घंटे नगर निगम की ओर से अधिवक्ता ने बताया कि सड़कों पर किए गए पैचवर्क को सही ठहराने का प्रयास किया गया है, लेकिन उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए 24 घंटे का समय मांगा कि आयोग द्वारा नमूने लेने के लिए सड़क खोदे जाने के कारण जहां पैचवर्क किया गया है, वह निर्धारित मापदंडों के अनुसार हो। कोर्ट ने निगम को 24 घंटे का समय देते हुए निर्देश दिया कि आयोग द्वारा नमूने लेने के लिए खोदी गई सड़क के सभी हिस्सों का पैचवर्क निर्धारित विनिर्देशों के अनुसार किया जाए। इसमें 150 मिलीमीटर तक की गहराई में पैचवर्क करने संबंधी तकनीकी विनिर्देश का पालन करने को कहा गया। इस निर्देश के साथ संबंधित आवेदन का निराकरण कर दिया गया। स्मार्ट सिटी की सड़कों पर भी उठे सवाल याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अवधेश सिंह तोमर ने स्मार्ट सिटी की सड़कों की खराब स्थिति का मुद्दा उठाते हुए स्मार्ट सिटी ग्वालियर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को मामले में पक्षकार बनाए जाने की मांग की। इस संबंध में अंतरिम आवेदन प्रस्तुत किया गया था। सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि स्मार्ट सिटी के अधीन सड़कों की स्थिति भी खराब होने का आरोप लगाया गया है, लेकिन अभी तक स्मार्ट सिटी के स्वामित्व और नियंत्रण वाली सड़कों से नमूने नहीं लिए गए हैं। इस बिंदु का उल्लेख आवेदन में नहीं होने पर कोर्ट ने तोमर को आवेदन में संशोधन के लिए एक सप्ताह का समय दिया। हर सड़क की जांच के लिए जनहित याचिका का दायरा नहीं बढ़ाएंगे सचिन तेंदुलकर मार्ग से भगवान सिंह माथुर सिटी एन्क्लेव को जोड़ने वाली संपर्क सड़क की खराब स्थिति को लेकर हस्तक्षेप आवेदन भी प्रस्तुत किया गया था। इसमें सड़क की स्थिति पूरी तरह खराब होने का आरोप लगाया गया, कोर्ट ने कहा कि नगर निगम को ग्वालियर शहर की सभी सड़कों के निर्माण और मरम्मत की अनुमति पहले ही दी जा चुकी है। कोर्ट प्रत्येक सड़क को लेकर अलग-अलग जांच कराकर उसका निर्माण कराने की स्थिति में नहीं है। कोर्ट ने हस्तक्षेप आवेदन को खारिज कर दिया। आयोग के काम की कोर्ट ने की सराहना सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सड़क जांच आयोग के काम की विशेष रूप से सराहना की। बता दें कि इस आयोग में अध्यक्ष गौरव समाधिया, सदस्य पवन रघुवंशी और हिमांशु शर्मा हैं। कोर्ट ने कहा कि पहले एक सड़क से नमूने लेने में आयोग को 12 से 13 घंटे तक सड़क पर काम करना पड़ा था। बाद में आयोग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्टों से स्पष्ट हुआ कि सदस्यों ने केवल मौके पर जाकर निर्धारित मानकों के अनुसार नमूने ही नहीं लिए, बल्कि तकनीकी पहलुओं और भ्रष्टाचार से जुड़े मुद्दों को समझने के लिए भी काफी मेहनत की। कोर्ट ने कहा कि शहर के हित में आयोग ने जिस स्तर पर मेहनत की है, वह सराहनीय है। सिकरौदा में हाईवे से सटी शराब दुकान पर भी सवाल सुनवाई के दौरान आयोग के अध्यक्ष गौरव समाधिया ने सिकरौदा चौराहा स्थित शराब दुकान का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि नियमानुसार शराब दुकान हाईवे से कम से कम 500 मीटर की दूरी पर होनी चाहिए, लेकिन सिकरौदा चौराहे पर शराब दुकान हाईवे … Read more

किलर रोबोट नहीं, AI का खुद से सीखना चिंता की वजह; ओबामा ने चेताया

वाशिंगटन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर दुनियाभर में बहस चल रही है. कोई इसे फ्यूचर की सबसे बड़ी टेक्नोलॉजी बता रहा है, तो कोई इससे जॉब्स और इंसानों पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित है. इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Barack Obama ने AI को लेकर अपनी चिंता बताई है. ओबामा का कहना है कि एआई कंपनियों के मार्केट वैल्यूएशन में हाइप हो सकता है, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि एआई की टेक्नोलॉजी भी ओवरहाइप्ड है. आइए जानते हैं इसके बारे में. उन्होंने AI से ह्यूमैनिटी खत्म होने की बात से भी इनकार नहीं किया है और ये बेहद डरावना है।  Obama के समय में ही बनी थी AI पर रिपोर्ट ओबामा ने बताया कि उनके राष्ट्रपति रहते 2015-16 के आसपास उनकी एडमिनिस्ट्रेशन ने एआई के सोशल, इकोनॉमिक और एथिकल इम्पैक्ट को समझने के लिए एक कमीशन बनाया था. इस कमीशन ने AI को लेकर एक बड़ी रिपोर्ट भी तैयार की थी।  ओबामा के मुताबिक इसके बाद आई एडमिनिस्ट्रेशन ने इस रिपोर्ट को ज्यादा आगे नहीं बढ़ाया. यानी AI को लेकर जिन सवालों पर उस समय चर्चा शुरू हुई थी, वो अब और ज्यादा बड़े हो चुके हैं।  अब AI खुद सीख रहा है एआई के तेजी से आगे बढ़ने की सबसे बड़ी वजहों में से एक रिसर्सिव लर्निंग है. आसान भाषा में समझें तो AI अब सिर्फ इंसानों से ट्रेनिंग लेकर आगे नहीं बढ़ रहा, बल्कि खुद भी सीखने लगा है।  ओबामा के मुताबिक कुछ समय पहले तक एआई मॉडल्स की लर्निंग में करीब 90 फीसदी हिस्सा इंसानों के इनपुट का था. लेकिन कुछ ही महीनों में तस्वीर बदल गई और यह बैलेंस करीब 50-50 तक पहुंच गया. यानी अब AI को आगे बढ़ाने में ह्यूमन ट्रेनिंग के साथ उसका खुद से सीखना भी बड़ी भूमिका निभा रहा है।  आने वाले समय में 90% खुद सीखेगा AI? ओबामा का अनुमान है कि आने वाले समय में एआई की लर्निंग में करीब 90 फीसदी हिस्सा सेल्फ-लर्निंग का हो सकता है. अगर ऐसा होता है तो AI डेवलपमेंट की स्पीड आज के मुकाबले काफी ज्यादा तेज हो सकती है।  उन्होंने एआई की इस ग्रोथ को हॉकी स्टिक जैसी ग्रोथ बताया. इसका मतलब है कि शुरुआत में ग्रोथ धीरे होती है, लेकिन एक पॉइंट के बाद इसकी स्पीड अचानक बहुत ज्यादा बढ़ने लगती है।  किलर रोबोट नहीं, ये है असली डर एआई के खतरे की बात होते ही किलर रोबोट्स और इंसानों को खत्म करने वाली मशीनों की चर्चा शुरू हो जाती है. ओबामा के मुताबिक ऐसा खतरा पूरी तरह जीरो नहीं है, लेकिन इसकी संभावना कम है.उनकी असली चिंता AI मिसअलाइनमेंट को लेकर है. यानी एआई सिस्टम ऐसा गोल तय कर ले जो इंसानों के इरादों से अलग हो।  इसके लिए AI का कॉन्शियस होना या इंसानों से नफरत करना जरूरी नहीं है. अगर एआई खुद से फैसले लेने लगे और उसके गोल्स इंसानों के गोल्स से अलग हो जाएं, तो बड़ी समस्या पैदा हो सकती है. यही वजह है कि एआई के तेज विकास के साथ यह सवाल भी जरूरी होता जा रहा है कि आखिर इसे इंसानों के कंट्रोल और गोल्स के साथ कैसे जोड़ा जाए। 

आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई, 8084 को नोटिस

भोपाल  आवासीय क्षेत्रों में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में दोपहर दो बजे से सुनवाई होगी। 15 सितंबर को प्रस्तावित सुनवाई टलने के बाद अब 22 सितंबर को सुनवाई हो रही है। इसके लिए नगर निगम ने सुप्रीम कोर्ट में 34 पेज का नया एफिडेविट पेश किया है। इसमें शहरभर में 8084 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करने और 190 के खिलाफ कार्रवाई कर कारोबार बंद कराने की जानकारी दी गई है। 62,500 प्रतिष्ठान चिह्नित, 8084 को नोटिस सुप्रीम कोर्ट के पांच अगस्त के निर्देश के बाद नगर निगम ने दावा किया था कि उसने शहर के आवासीय क्षेत्रों में संचालित 62,500 से अधिक प्रतिष्ठानों को चिह्नित किया है। निगम ने 8269 प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी करने की भी जानकारी दी थी। सूत्रों के अनुसार, अब नए शपथ पत्र में नोटिस का आंकड़ा 8084 बताया गया है। साथ ही 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराने की कार्रवाई की जानकारी भी दी गई है। आंकड़ों में आए इस बदलाव को लेकर भी सुनवाई के दौरान सवाल उठ सकते हैं। नगर निगम ने कोर्ट को बताया है कि चिह्नित प्रतिष्ठानों पर लगातार कार्रवाई जारी है। सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त के आदेश के बाद नगर निगम ने रहवासी इलाकों में कमर्शियल गतिविधियां चलाने वाले प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। निगम की सूची में ऐसे करीब 62,500 प्रतिष्ठान हैं। इनमें से 8,084 को नोटिस दिए गए। इसके बाद तीन दिन तक कार्रवाई चली। व्यापारियों के विरोध के बाद निगम ने अभियान रोक दिया। अब ये प्रतिष्ठान खुल चुके हैं। रिकॉर्ड में 62,500, नोटिस सिर्फ 8,084 प्रतिष्ठान को निगम के रिकॉर्ड में 62,500 कमर्शियल प्रतिष्ठान होने के बावजूद करीब 13% यानी 8,084 को ही नोटिस दिए गए। इनमें भी कार्रवाई 190 तक पहुंची। इसके बाद न नोटिस की कार्रवाई आगे बढ़ी न बंद प्रतिष्ठानों की दोबारा जांच हुई। निगम खुद बोला – दोबारा खोलना आपराधिक कृत्य निगम की टीमों ने सभी संस्थानों को नियमानुसार बंद कराया है। कहीं भी संस्थान दोबारा खुल गए हैं तो यह आपराधिक कृत्य है। कोर्ट में पूछने पर वकील के माध्यम से स्थिति स्पष्ट कर जवाब देंगे।' -भुवन गुप्ता, उपायुक्त (भवन अनुज्ञा) रहवासी इलाकों में चल रहे 190 कमर्शियल प्रतिष्ठान बंद कराए थे, सभी फिर खुले; 15 दिन से देखने तक नहीं पहुंचा नगर निगम भोपाल के रहवासी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम ने तीन दिन कार्रवाई कर 190 प्रतिष्ठान बंद कराए थे। अब सभी दोबारा खुल चुके हैं, लेकिन करीब 15 दिन से निगम की टीमें इनकी स्थिति देखने तक नहीं पहुंचीं। न दोबारा खुले प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई हुई, न कोई नया प्रतिष्ठान बंद कराया गया। 10 नंबर मार्केट में सीलिंग के दौरान व्यापारियों ने निगम के पंचनामे के आधार पर प्रतिष्ठान खुद बंद किए थे। अब यहां कई प्रतिष्ठान दिन में बंद रहते हैं और शाम होते ही खुल जाते हैं। सीलिंग और पंचनामे के बाद फिर शुरू हुआ कारोबार बता दें कि निगम ने आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक करने वाले सात प्रतिष्ठानों को सील किया, जबकि 183 ने स्वेच्छा से कारोबार बंद करने के पंचनामे बनाए गए। निगम की कार्रवाई के दौरान पंचनामा बनाकर बंद कराए गए कई प्रतिष्ठानों में दोबारा कारोबार शुरू होने की जानकारी सामने आ रही है। ऐसे में मंगलवार की सुनवाई में निगम की कार्रवाई के साथ उसके जमीनी अनुपालन की स्थिति भी अहम रहेगी। कोर्ट जमीनी स्तर पर कार्रवाई की मॉनिटरिंग पर जोर दे सकता है।