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11 अक्टूबर को इंदौर में India-West Indies T20, चेक्स पैटर्न से सजेगी आउटफील्ड

इंदौर   इंदौर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए 11 अक्टूबर का दिन बेहद रोमांचक होने वाला है, क्योंकि इस दिन स्थानीय होलकर स्टेडियम में भारत और वेस्टइंडीज के बीच टी-20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला खेला जाएगा। मैच को लेकर तैयारियां अब अपने अंतिम चरण में हैं। दर्शकों और टीवी स्क्रीन पर मैच देखने वालों को एक नया अनुभव देने के लिए इस बार मैदान की आउटफील्ड पर घास को एक खास 'चेक्स' (चौकड़ी) पैटर्न में काटा जा रहा है। इस रोमांचक मुकाबले के लिए दोनों देशों की टीमें 10 अक्टूबर को चार्टर्ड प्लेन के जरिए इंदौर पहुंचेंगी। 28 सितंबर से शुरू होगी पिच पर रोलिंग     किसी भी क्रिकेट मैच का सबसे अहम हिस्सा उसकी पिच होती है, जिसे लेकर मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (एमपीसीए) कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। रविवार के दिन बीसीसीआई के पिच क्यूरेटर तापोष चटर्जी ने स्टेडियम का दौरा किया और मैदान तथा पिच की स्थिति का जायजा लिया।     के दौरान एमपीसीए के पिच क्यूरेटर मनोहर जामले ने उन्हें बताया कि बारिश के बावजूद पिच का शुरुआती बेस पहले ही तैयार कर लिया गया है। फिलहाल ग्राउंड स्टाफ का पूरा ध्यान काली मिट्टी वाली इस पिच की घास को और अधिक स्वस्थ बनाने पर है। तैयारी को पुख्ता करने के लिए 28 सितंबर से पिच पर रोलिंग का काम शुरू कर दिया जाएगा। एक व्यक्ति अधिकतम चार टिकट ले सकेगा आम दर्शकों के लिए सबसे सस्ता टिकट ₹1,000, जबकि सबसे महंगा पैवेलियन टिकट ₹12,500 का होगा। मैच के सभी टिकट सिर्फ ऑनलाइन मिलेंगे। अन्य कैटेगरी के टिकटों के रेट भी जारी किए जाएंगे। जोमैटो होगा आधिकारिक टिकटिंग पार्टनर MPCA ने मैच के लिए जोमैटो को आधिकारिक ऑनलाइन टिकटिंग पार्टनर बनाया है। टिकटों की बिक्री सिर्फ ऑनलाइन होगी। स्टेडियम के काउंटर से ऑफलाइन टिकट नहीं मिलेंगे। टिकटों की खरीद की सीमा भी तय की गई है। एक व्यक्ति अधिकतम 4 टिकट खरीद सकेगा। ये टिकट एक ही कैटेगरी के या अलग-अलग कैटेगरी के हो सकते हैं। होलकर स्टेडियम में आखिरी इंटरनेशनल मैच 18 जनवरी 2026 को भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरा वनडे खेला गया था। इस मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारत को 41 रन से हराया था। इस जीत के साथ न्यूजीलैंड ने पहली बार भारत में वनडे सीरीज अपने नाम की थी। होलकर स्टेडियम में आखिरी इंटरनेशनल मैच 18 जनवरी 2026 को भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीसरा वनडे खेला गया था। इस मुकाबले में न्यूजीलैंड ने भारत को 41 रन से हराया था। इस जीत के साथ न्यूजीलैंड ने पहली बार भारत में वनडे सीरीज अपने नाम की थी। सबसे सस्ता टिकट एक हजार रुपये का है क्रिकेट मैच का आनंद लेने के लिए दर्शकों को इस बार एक हजार रुपये से लेकर 12 हजार 500 रुपये तक खर्च करना होंगे। मैच का सबसे सस्ता टिकट एक हजार रुपये का है, वहीं टिकट की अधिकतम दर 12,500 रुपये की है। मैच के टिकटों की बिक्री ऑनलाइन की जाएगी। एमपीसीए शीघ्र ही टिकट बुकिंग की दिनांक और समय घोषित करेगा। टिकट दर     साउथ पवैलियन लोअर – 6,500     साउथ पवैलियन लोअर (लाइव हास्पिटैलिटी)- 12,500     साउथ पवैलियन पहली मंजिल – 8,500     साउथ पवैलियन पहली मंजिल (फूड बाक्स हास्पिटैलिटी) – 11,000     साउथ पवैलियन दूसरी मंजिल – 7,500     साउथ पवैलियन तीसरी मंजिल – 5,500     ईस्ट गैलरी ग्राउंड फ्लोर – 1,000     ईस्ट गैलरी पहली मंजिल (प्रीमियम) – 1,700     ईस्ट गैलरी पहली मंजिल (रेगुलर) – 1,400     ईस्ट गैलरी दूसरी मंजिल – 1,250     वेस्ट गैलरी ग्राउंड प्लोर – 1,100     वेस्ट गैलरी पहली मंजिल (प्रीमियम) – 1,800     वेस्ट गैलरी पहली मंजिल (रेगुलर) – 1,500     वेस्ट गैलरी दूसरी मंजिल – 1,350 टिकट बिक्री की तारीख का ऐलान बाकी MPCA ने टिकटों की कीमतें घोषित कर दी हैं, लेकिन ऑनलाइन बिक्री किस तारीख और किस समय शुरू होगी, इसकी जानकारी अभी नहीं दी गई है। एसोसिएशन की ओर से टिकटिंग प्लेटफॉर्म की तैयारियां पूरी होने के बाद बिक्री की तारीख घोषित की जाएगी। 5 मैचों की सीरीज का तीसरा मुकाबला भारत और वेस्टइंडीज के बीच 5 मैचों की T20 सीरीज खेली जाएगी। सीरीज का तीसरा मुकाबला 11 अक्टूबर को इंदौर के होलकर स्टेडियम में होगा। यह होलकर स्टेडियम में खेला जाने वाला 5वां T20 इंटरनेशनल मैच होगा।  

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज वितरित करेंगे 3,567 नियुक्ति पत्र

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज मंगलवार यानी 22 सितंबर को 3,567 नवचयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र प्रदान करेंगे।लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित भव्य कार्यक्रम में प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को योग्य शिक्षक और कुशल प्रशासक मिलेंगे। चयनित अभ्यर्थियों में 319 प्रधानाचार्य, 258 प्रधानाध्यापक, 618 प्रवक्ता (पीजीटी) तथा 2372 सहायक अध्यापक (टीजीटी) शामिल हैं। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा पारदर्शी परीक्षा प्रणाली के माध्यम से अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के लिए चयनित इन अभ्यर्थियों को जुपिटर हॉल में आयोजित समारोह में नियुक्ति पत्र सौंपे जाएंगे। इस दौरान उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी समेत अन्य नेता एवं अधिकारी मौजूद रहेंगे।   

यूपी बना एक्सपोर्ट इंजन, आबकारी निर्यात नीति से खेत से विदेशी बाजार तक जुड़ी पूरी चेन

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति 2026-29 का असर अब प्रदेश की पूरी एक्सपोर्ट चेन में दिखाई दे रहा है। खेतों में तैयार होने वाले गन्ने, शीरे और अनाज से लेकर फैक्ट्री, पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन तक आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिल रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून में यूपी के आबकारी निर्यात में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 45.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान राष्ट्रीय वृद्धि 18.3 प्रतिशत रही। नई इकाइयों और पुराने प्लांट को मिला संबल निर्यात की संभावनाओं के साथ प्रदेश में नई औद्योगिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं। उन्नाव में यूनाइटेड ब्रुअरीज और हरदोई में माउंट एवरेस्ट ब्रुअरीज नई इकाइयां स्थापित कर रही हैं। फर्रुखाबाद में वुडपेकर ग्रीनएग्री न्यूट्रिएंट्स ने इकाई स्थापित की है। वहीं एलाइड ब्लेंडर्स एंड डिस्टिलर्स ने मुरादाबाद की बंद इकाई को दोबारा शुरू किया है। गोरखपुर की कियान डिस्टिलरी ने एथेनॉल उत्पादन के साथ पेय आसवनी और ब्रुअरी के लिए आवेदन किया है। रैडिको खेतान भी अन्य राज्यों से सीतापुर और रामपुर संयंत्रों में निर्यात उत्पादन स्थानांतरित कर रही है। 10.2 से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई हिस्सेदारी अप्रैल-जून 2026 में देश से करीब 10.17 करोड़ अमेरिकी डॉलर का आबकारी निर्यात हुआ। इसमें उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी करीब 127.8 लाख डॉलर रही, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 87.9 लाख डॉलर थी। इस तरह प्रदेश ने करीब 39.9 लाख डॉलर की अतिरिक्त वृद्धि हासिल की। राष्ट्रीय निर्यात में यूपी की हिस्सेदारी भी 10.2 प्रतिशत से बढ़कर 12.6 प्रतिशत हो गई। प्रदेश इस अवधि में महाराष्ट्र और पंजाब के बाद तीसरे स्थान पर रहा। बस्ती का शीरा पहुंचा वैश्विक बाजार आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने बताया कि यूपी की बढ़ती एक्सपोर्ट चेन में कृषि आधारित उत्पाद भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। बस्ती से 25 हजार कुंतल शीरे का विदेश निर्यात किया गया, जिससे करीब पांच लाख अमेरिकी डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। शीरा अलग शुल्क वर्गीकरण में आता है, इसलिए यह राशि उपरोक्त आंकड़ों से अतिरिक्त है। इससे स्पष्ट होता है कि प्रदेश के कृषि उत्पाद प्रसंस्करण के बाद वैश्विक बाजार की आपूर्ति श्रृंखला में शामिल हो रहे हैं। बोतलों की सप्लाई में भी आया बड़ा उछाल अप्रैल-जुलाई 2026 के बीच यूपी की इकाइयों ने अन्य राज्यों को पिछले वर्ष की समान अवधि से 1.64 करोड़ अधिक बोतलें भेजीं। यह करीब 45.7 प्रतिशत की वृद्धि है। आबकारी आयुक्त डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि निर्यात बढ़ने का असर गन्ना, शीरा और अनाज से लेकर कांच की बोतल, पैकेजिंग, ढक्कन, लेबलिंग, भंडारण और परिवहन तक पड़ता है। इस तरह त्रिवर्षीय आबकारी निर्यात नीति ने प्रदेश में खेत से फैक्ट्री और फैक्ट्री से विदेशी बाजार तक जुड़ी व्यापक एक्सपोर्ट चेन को गति दी है।

ग्वालियर बनेगा टेलीकॉम निवेश का नया केंद्र, CM यादव करेंगे निवेशकों से संवाद

बेंगलुरु में टेलीकॉम उद्योग के प्रमुख निवेशकों से संवाद करेंगे मुख्यमंत्री डॉ. यादव ग्वालियर के टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन को निवेश का नया केंद्र बनाने की तैयारी 22 सितंबर को इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में ग्वालियर टीएमजेड की संभावनाओं और नीतिगत सहयोग पर होगी चर्चा भोपाल  मध्यप्रदेश में टेलीकॉम और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को गति देने के लिए राज्य सरकार अब देश के प्रमुख तकनीकी केंद्र बेंगलुरु के उद्योग जगत से सीधे संवाद करने जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 22 सितंबर को बेंगलुरु में टेलीकॉम क्षेत्र के प्रमुख उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में ग्वालियर में विकसित किए जा रहे टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा करेंगे। ताज बेंगलुरु में होने वाले इस संवाद में मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों को ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में उपलब्ध निवेश अवसरों, राज्य की औद्योगिक नीतियों और निवेश के लिए राज्य सरकार की ओर से दिए जा रहे सहयोग की जानकारी देंगे। टेलीकॉम उपकरणों के विनिर्माण के साथ इस क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और इससे जुड़े उद्योगों के विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी। ग्वालियर में टेलीकॉम उद्योग के लिए तैयार हो रहा नया आधार इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में ग्वालियर टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन की प्रमुख विशेषताओं और निवेशकों के लिए उपलब्ध प्रोत्साहनों का प्रस्तुतिकरण किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई तथा दूरसंचार विभाग के वरिष्ठ अधिकारी निवेशकों के सामने टीएमजेड से जुड़े अवसरों और नीति समर्थन की जानकारी रखेंगे। कार्यक्रम में टेलीकॉम उद्योग की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधि अपने अनुभव साझा करेंगे। टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन में निवेश के इच्छुक उद्योगों के साथ उनके प्रस्तावों और अपेक्षाओं पर भी चर्चा होगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव निवेशकों के प्रश्नों और सुझावों पर संवाद करते हुए मध्यप्रदेश में निवेश के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और उपलब्ध सहयोग की जानकारी देंगे। केंद्र और राज्य के समन्वय से टेलीकॉम विनिर्माण को मिलेगा बढ़ावा इन्वेस्टर्स राउंड टेबल में भारत सरकार के संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया भी शामिल होंगे। केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों तथा उद्योग जगत की सहभागिता से होने वाला यह संवाद ग्वालियर टीएमजेड के विकास और टेलीकॉम विनिर्माण क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण होगा। बेंगलुरु के तकनीकी केंद्रों को भी देखेंगे मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री डॉ. यादव बेंगलुरु प्रवास के दौरान टेलीकॉम और तकनीकी क्षेत्र से जुड़े प्रमुख संस्थानों का अवलोकन भी करेंगे। वे क्वालकॉम के आरएंडडी सेंटर तथा सिग्नलचिप इनोवेशन और सिग्नलट्रॉन सिस्टम का दौरा करेंगे। इन केंद्रों पर अनुसंधान, नवाचार और टेलीकॉम तकनीक के क्षेत्र में हो रहे कार्यों की जानकारी ली जाएगी। इसके माध्यम से बेंगलुरु के तकनीकी इकोसिस्टम और मध्यप्रदेश में विकसित किए जा रहे टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन के बीच संभावित सहयोग के अवसरों को समझने का प्रयास होगा।  

पानी-सीवर लाइनों की जांच अब रोबोट से, MP में 40 रुपए प्रति मीटर खर्च

इंदौर  भागीरथपुरा में दूषित पानी की त्रासदी के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने शहरी क्षेत्रों में पेयजल और सीवर नेटवर्क की स्थिति जांचने के लिए रोबोटिक तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने प्रदेश के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को 70 से 900 मिलीमीटर व्यास वाली पानी और सीवर पाइपलाइनों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए चेन्नई की विशेषज्ञ एजेंसी पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज (इंडिया) प्राइवेट लिमिटेड को सबसे कम बोली यानी L1 के आधार पर एम्पैनल किया गया है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पाइपलाइन निरीक्षण की दर 40 रुपए प्रति मीटर तय हुई है और इसके लिए एक साल का एग्रीमेंट किया गया है। भागीरथपुरा के बाद क्यों पड़ी रोबोटिक जांच की जरूरत? दिसंबर 2025 के आखिर में इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की वजह से बड़े स्तर पर बीमारी फैली थी। शुरुआती सरकारी और NHRC रिकॉर्ड में दूषित पानी से मौतों और बड़ी संख्या में लोगों के बीमार होने की पुष्टि हुई थी। NHRC ने जनवरी 2026 में मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी। बाद में न्यायिक जांच में 36 मौतों की जांच की गई। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक इनमें 24 मौतों को सीवर से दूषित पानी पीने से सीधे जोड़ा गया, जबकि 12 मामलों में दूषित पानी और मौत के बीच निर्णायक संबंध स्थापित नहीं हो सका। न्यायिक जांच में पाइपलाइन बदलने में देरी और शहरी जल नेटवर्क से जुड़े प्रशासनिक पहलुओं पर भी सवाल उठे हैं। इसी घटना के बाद सरकार का फोकस इस बात पर है कि प्रदेश में ऐसी पाइपलाइन क्रॉसिंग और लीकेज की पहले ही पहचान कर ली जाए, जहां सीवर का पानी पेयजल नेटवर्क को प्रभावित कर सकता है। पहले समझिए, सरकार को यह फैसला क्यों लेना पड़ा? दिसंबर 2025 के आखिरी सप्ताह में इंदौर के भगीरथपुरा में दूषित पेयजल से 36 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में पीने के पानी में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया मिले। सीवर लाइन लीक होने से उसका पानी पेयजल लाइन में मिल गया था। अकेले भगीरथपुरा में ऐसे 260 पॉइंट्स मिले, जहां सीवर का पानी पेयजल में मिल रहा था। हादसे के बाद सरकार ने जीआईएस (GIS) प्लेटफॉर्म 'गरुड़' से पूरे प्रदेश की मैपिंग कराई। इसमें मध्य प्रदेश में 2.30 लाख से अधिक ऐसे पॉइंट्स मिले, जहां सीवर और पेयजल पाइपलाइनें एक-दूसरे को क्रॉस कर रही हैं। इनमें इंदौर में 30 हजार और भोपाल में 20 हजार से अधिक डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स हैं, जहां सीवर का पानी पेयजल में मिलने का खतरा है। दूषित पेयजल पीने से यहां 36 लोगों की मौत हो गई थी। जांच में पानी में मानव मल से जुड़े बैक्टीरिया मिले थे। पता चला कि सीवर लाइन लीक होकर पेयजल लाइन में मिल रही थी। अकेले भागीरथपुरा में ऐसे 260 पॉइंट्स मिले थे। इस हादसे ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था। इसी के बाद सरकार ने बड़ा फैसला लेने की तैयारी शुरू की। हादसे के बाद मध्यप्रदेश सरकार ने जीआईएस (Geographic Information System) प्लेटफॉर्म गरुड़ से पूरे प्रदेश की मैपिंग कराई। इस मैपिंग में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए। प्रदेश में 2.30 लाख से ज्यादा ऐसे पॉइंट्स मिले, जहां सीवर और पेयजल लाइनें एक दूसरे को क्रॉस कर रही हैं। इनमें से इंदौर में 30 हजार से ज्यादा डेंजर क्रॉसिंग पॉइंट्स हैं। भोपाल में भी 20 हजार से ज्यादा ऐसे खतरनाक पॉइंट्स मिले हैं। इन जगहों पर सीवर का पानी पेयजल में मिलने का खतरा बना रहता है। अब रोबोट करेंगे जांच सरकार ने अब इन डेंजर पॉइंट्स की जांच के लिए रोबोट तकनीक अपनाने का फैसला किया है। यह जांच ट्रेंचलेस टेक्नोलॉजी से होगी। इसका मतलब है कि सड़क खोदने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रोबोट को सीसीटीवी क्रॉलर सिस्टम से पाइपलाइन में उतारा जाएगा। इसे मौजूदा मैनहोल या एयर रिलीज वाल्व के जरिए भेजा जाएगा। रोबोट में हाई रिजॉल्यूशन कैमरा और सेंसर लगे होंगे। यह रोबोट करीब 300 मीटर लंबे केबल से जुड़ा रहेगा। पाइपलाइन के अंदर रोबोट लगातार वीडियो रिकॉर्डिंग करेगा। साथ ही जरूरी डेटा भी दर्ज करता रहेगा। यह रोबोट 70 से 900 मिमी व्यास वाली पाइपलाइनों में काम करेगा। इसकी मदद से लीकेज, टूट फूट और अवैध कनेक्शन का पता चलेगा। इससे साफ हो जाएगा कि कहां कहां खतरा ज्यादा है। नगरीय प्रशासन एवं विकास संचालनालय ने सभी नगर निगमों को इसके निर्देश दिए हैं। नगर पालिकाओं और नगर परिषदों को भी यह आदेश दिया गया है। सभी जगह इस तकनीक से जांच अनिवार्य कर दी गई है। एजेंसी को कैसे मिला काम इस काम के लिए विभाग ने टेंडर जारी किया था। इसकी अनुमानित लागत 1.50 करोड़ रुपए रखी गई थी। यह काम 365 दिन में पूरा करना तय हुआ है। टेंडर में तीन कंपनियों ने बोली लगाई। इनकी दरों में जमीन आसमान का फर्क देखने को मिला। डिजिटल सर्विलॉन्स ने 440 रुपए प्रति मीटर की दर रखी थी। फॉर्म डील ने 400 रुपए प्रति मीटर का रेट दिया था। लेकिन चेन्नई की पेरमा-लिनियर इंडस्ट्रीज ने सिर्फ 40 रुपए प्रति मीटर की बोली लगाई। सबसे कम बोली होने के कारण इसी कंपनी को काम मिला है। कंपनी अप्रैल 2022 में रजिस्टर्ड हुई थी। इसके डायरेक्टर गणेशन और रेवती हैं। अब सभी नगरीय निकाय अपनी जरूरत के हिसाब से एस्टीमेट तैयार करेंगे। इसके बाद कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी किया जाएगा। देश के कई राज्यों में पहले से इस्तेमाल मध्य प्रदेश में यह तकनीक पहली बार इस्तेमाल हो रही है। लेकिन देश के कई राज्यों में यह पहले से काम कर रही है। नीति आयोग की एक रिपोर्ट में इसका जिक्र किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक 15 से ज्यादा राज्यों में रोबोटिक पाइपलाइन जांच हो रही है। इनमें तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में भी यह तकनीक इस्तेमाल हो रही है। इन राज्यों में चेन्नई की एक कंपनी के खास रोबोट काम कर रहे हैं। ये रोबोट हाई रिजॉल्यूशन कैमरों की मदद से जीआईएस मैपिंग करते हैं। साथ ही लीकेज की सटीक जानकारी भी देते हैं। पुराने तरीके से होती थी दिक्कत अब तक सीवर लाइनों की जांच पुराने तरीकों से होती थी। इसमें बड़े … Read more

Indian Army Cyber Labs: सैन्य सिस्टम में विदेशी बग्स का होगा पता, दिल्ली के बाद 5 और जगह खुलेंगी साइबर लैब

 नई दिल्ली भारतीय सेना विदेशी मूल के साइबर अटैक से जुड़े सुरक्षा जोखिमों को लेकर चिंतित है. इसलिए वह 6 आश्वस्त (AASHVAST) प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना बना रही है. इन लैब्स का मकसद ड्रोन और अन्य सैन्य इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में छिपी कमजोरियों का पता लगाना है. इनमें खराब कोड, छिपे हुए एक्सेस मैकेनिज्म और फर्मवेयर स्तर की खामियों की जांच की जाएगी, जो सैन्य अभियानों को बाधित कर सकती हैं।  दिल्ली में लैब पहले ही शुरू हो चुकी है. देशभर में कम से कम पांच और लैब्स लगाने की योजना है. शुरुआत में इनका फोकस ड्रोन पर रहेगा. बाद में सेना द्वारा खरीदे जाने वाले सीसीटीवी कैमरों की भी जांच की जाएगी. यह पहल ऐसे समय में आई है जब सैन्य उपकरणों में चीनी मूल के पुर्जों को लेकर चिंता बढ़ रही है. खासकर पूर्वी सीमाओं पर तैनात ड्रोनों में चीनी साइबर अटैक की मौजूदगी को लेकर सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।   भारत ने पहले भी घरेलू सैन्य ड्रोन निर्माताओं को चीनी मूल के पुर्जों का इस्तेमाल सीमित करने के निर्देश दिए थे. 2025 में आर्मी डिजाइन ब्यूरो ने रक्षा मंत्रालय को एक फ्रेमवर्क सौंपा था, जिसका उद्देश्य यूएवी से चीनी मूल के साइबर अटैक को पूरी तरह हटाना था. आश्वस्त लैब्स इस प्रक्रिया में एक और परत जोड़ेंगी. वे सिर्फ यह नहीं देखेंगी कि कोई हिस्सा कहां से खरीदा गया, बल्कि उसकी असली उत्पत्ति और उसमें क्या छिपा हो सकता है, इसकी भी जांच करेंगी।  फर्मवेयर स्तर की छिपी खतरों की जांच आश्वस्त सिस्टम को क्विकपे प्राइवेट लिमिटेड ने इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स महानिदेशालय के लिए विकसित किया है. यह सिर्फ फिजिकल जांच पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि फर्मवेयर और एम्बेडेड सिस्टम का एनालिसिस करेगा. यह सिस्टम करीब 14 तरह की कमजोरियों का पता लगा सकता है. इनमें छिपे हुए कोड और कमांड शामिल हैं, जो ड्रोन के कामकाज में बाधा डाल सकते हैं।  लोकेशन या समय आधारित खराबी भी पता चलेगी, जो किसी खास इलाके या समय पर मिशन को खराब कर सकती है. एम्बेडेड पासवर्ड, एन्क्रिप्शन कुंजी और रिमोट एक्सेस टूल भी स्कैन किए जाएंगे. कुछ खराबियां ऐसी हो सकती हैं जो यूएवी को निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने या मिशन पूरा करने से रोक दें।  अप्रैल 2026 में सेना ने फर्मवेयर और एम्बेडेड सिस्टम वैलिडेशन के लिए कस्टमाइज्ड लाइसेंस्ड सॉफ्टवेयर खरीदने का आरएफपी जारी किया था. इससे साफ है कि सेना इस दिशा में व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ रही है. आधुनिक युद्ध में ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की भूमिका बढ़ने के साथ साइबर सुरक्षा और भी महत्वपूर्ण हो गई है. अगर किसी सिस्टम में छिपा बैकडोर या दुर्भावनापूर्ण कोड हो, तो दुश्मन उसे दूर से नियंत्रित या बाधित कर सकता है. इसलिए ऐसी जांच जरूरी है।  सीसीटीवी कैमरे भी जांच के दायरे में स्क्रीनिंग कार्यक्रम आगे चलकर भविष्य में खरीदे जाने वाले सीसीटीवी कैमरों तक भी फैलेगा. इन जांचों में संभावित रूप से कमजोर प्रॉप्राइटरी प्रोटोकॉल और एम्बेडेड तकनीकों को देखा जाएगा, खासकर विदेशी मूल की प्रणालियों से जुड़ी तकनीकों को. व्यापक उद्देश्य साइबर लचीलापन बढ़ाना, बाहरी हस्तक्षेप का खतरा कम करना।  सैन्य प्लेटफॉर्म को विवादित परिचालन वातावरण में भरोसेमंद बनाए रखना है. यह पहल आत्मनिर्भर भारत विजन के तहत रक्षा तकनीक में अधिक आत्मनिर्भरता की दिशा में भी योगदान देगी. सेना की यह कोशिश दिखाती है कि वह सिर्फ हार्डवेयर खरीदने तक सीमित नहीं रहना चाहती. वह सॉफ्टवेयर और फर्मवेयर स्तर पर भी पूरी तरह सुरक्षित सिस्टम चाहती है।  ड्रोन और सीसीटीवी जैसे उपकरणों में छिपी कमजोरियां युद्ध के मैदान में गंभीर परिणाम ला सकती हैं. आश्वस्त लैब्स इन जोखिमों को कम करने में मदद करेंगी. इससे भारतीय सेना की तकनीकी सुरक्षा मजबूत होगी और भविष्य के संघर्षों में बाहरी हस्तक्षेप का खतरा घटेगा. कुल मिलाकर यह कदम आधुनिक युद्ध की बदलती जरूरतों के अनुरूप है, जहां साइबर सुरक्षा उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है जितनी पारंपरिक सैन्य क्षमता। 

2 साल 8 माह में बिकीं 7,650 संपत्तियां, बिक्री में 84% की बढ़ोतरी

विशेष लेख संपत्ति विक्रय में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने रचा नया कीर्तिमान 2 वर्ष 8 माह में 7,650 संपत्तियों का विक्रय, वार्षिक औसत में 84 प्रतिशत की बढ़ोतरी मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व एवं वित्त एवं आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में पारदर्शी, सरल और हितग्राही-केंद्रित व्यवस्था को मिली नई गति 1,609.18 करोड़ रुपये की संपत्तियों का विक्रय, ओटीएस-2 से 1,584 संपत्तियों का हुआ निराकरण रायपुर,  छत्तीसगढ़ में आवासीय सुविधाओं के विस्तार और अधोसंरचना विकास को नई गति देने की दिशा में छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल ने संपत्ति विक्रय के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा विकास कार्यों में गति, पारदर्शिता और नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी क्रम में वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में मंडल द्वारा संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन, विक्रय प्रक्रिया को सरल बनाने और हितग्राहियों की सुविधा को प्राथमिकता देने के प्रयासों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। मंडल के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मात्र 2 वर्ष 8 माह की अवधि में 7,650 संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 2,869 संपत्ति रहा है। यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों के प्रदर्शन की तुलना में मंडल की विक्रय क्षमता में आई उल्लेखनीय वृद्धि को दर्शाता है। वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों की अवधि में मंडल द्वारा कुल 7,793 संपत्तियों का विक्रय किया गया था। इस दौरान वार्षिक औसत लगभग 1,559 संपत्ति रहा। इसके मुकाबले वर्ष 2024 से अगस्त 2026 की वर्तमान अवधि में वार्षिक औसत बढ़कर लगभग 2,869 संपत्ति हो गया है। अर्थात पिछले पांच वर्षों की तुलना में वर्तमान अवधि में मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय में लगभग 84 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। केवल संख्या नहीं, विक्रय मूल्य में भी बड़ी छलांग मंडल की उपलब्धि केवल संपत्तियों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि संपत्ति विक्रय से प्राप्त राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2024 से अगस्त 2026 तक मंडल द्वारा कुल 1,609.18 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय किया गया है। इस अवधि में संपत्ति विक्रय का वार्षिक औसत लगभग 603 करोड़ रुपये रहा। वहीं वर्ष 2019 से 2023 तक पांच वर्षों में कुल 1,362.21 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों का विक्रय हुआ था। इस अवधि में वार्षिक औसत विक्रय मूल्य 272.44 करोड़ रुपये रहा। वर्तमान अवधि में यह औसत बढ़कर लगभग 603 करोड़ रुपये हो गया है। इस तरह मंडल के वार्षिक औसत संपत्ति विक्रय मूल्य में पिछले पांच वर्षों की तुलना में दो गुने से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। ये आंकड़े बताते हैं कि मंडल द्वारा उपलब्ध संपत्तियों के प्रबंधन और विक्रय को लेकर अपनाई गई कार्ययोजना प्रभावी रही है। संपत्तियों के बेहतर उपयोग, मांग के अनुरूप विक्रय व्यवस्था, हितग्राहियों के लिए प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने तथा लंबित मामलों के निराकरण पर ध्यान देने से विक्रय गतिविधियों में तेजी आई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में विकास और सुशासन पर जोर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के साथ-साथ शासन की प्रक्रियाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और परिणामोन्मुख बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। नागरिकों को समय पर सुविधाएं उपलब्ध हों और सरकारी संस्थाओं की संपत्तियों का बेहतर उपयोग हो, इस दिशा में भी लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। गृह निर्माण मंडल की संपत्ति विक्रय में सामने आई यह वृद्धि इसी व्यापक दृष्टिकोण से जुड़ी हुई है। मंडल की संपत्तियों के प्रभावी उपयोग से एक ओर उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित हो रहा है, वहीं दूसरी ओर नागरिकों को आवासीय एवं व्यावसायिक संपत्तियां प्राप्त करने के अवसर मिल रहे हैं। वित्त एवं आवास मंत्री ओ.पी. चौधरी के मार्गदर्शन में परिणामोन्मुख कार्यप्रणाली वित्त, आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी द्वारा विभागीय संस्थाओं में कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और परिणाम आधारित बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। गृह निर्माण मंडल की संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और विक्रय प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए भी इसी दृष्टिकोण के अनुरूप कार्य किया जा रहा है। मंडल द्वारा उपलब्ध संपत्तियों के विक्रय में तेजी के साथ-साथ बकाया मामलों के निराकरण और हितग्राहियों को राहत देने के लिए विशेष योजनाओं को भी प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इसका प्रत्यक्ष उदाहरण वन टाइम सेटलमेंट-2 (ओटीएस-2) योजना है। ओटीएस-2 योजना से 1,584 संपत्तियों का निराकरण मंडल द्वारा बकाया राशि के मामलों के समाधान और संपत्तियों के त्वरित निराकरण के उद्देश्य से लागू की गई वन टाइम सेटलमेंट-2 छूट योजना को भी व्यापक सफलता मिली है। योजना के अंतर्गत 1 मार्च 2025 से वर्तमान दिनांक तक 1,584 संपत्तियों का विक्रय एवं निराकरण किया गया है। इन संपत्तियों का कुल मूल्य लगभग 238.67 करोड़ रुपये है। ओटीएस-2 योजना के माध्यम से लंबे समय से लंबित बकाया मामलों के निराकरण का रास्ता आसान हुआ है। इससे हितग्राहियों को अपनी देनदारियों के समाधान का अवसर मिला, वहीं मंडल की संपत्तियों के प्रभावी उपयोग और वित्तीय प्रबंधन को भी मजबूती मिली है। हितग्राही-केंद्रित व्यवस्था बनी बदलाव का आधार गृह निर्माण मंडल की संपत्ति विक्रय में हुई वृद्धि के पीछे केवल अधिक संपत्तियों को बाजार में उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि हितग्राहियों की सुविधा को केंद्र में रखकर प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने का प्रयास भी महत्वपूर्ण है। आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों के विक्रय में पारदर्शिता, सरलता और सुविधा पर जोर दिए जाने से नागरिकों के लिए संपत्ति खरीदने की प्रक्रिया अधिक सहज हुई है। मंडल द्वारा संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन के साथ उनकी मांग, स्थान और उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए विक्रय प्रक्रिया को गति देने का प्रयास किया जा रहा है। इससे मंडल की उपलब्ध संपत्तियों का उपयोग बढ़ा है और नागरिकों को अपनी आवश्यकता के अनुरूप संपत्ति प्राप्त करने के अवसर भी मिले हैं। आंकड़े बता रहे बदलाव की तस्वीर यदि पिछले पांच वर्षों और वर्तमान अवधि के प्रदर्शन की तुलना की जाए तो मंडल की उपलब्धि स्पष्ट रूप से सामने आती है। वर्ष 2019 से 2023 के दौरान जहां पांच वर्षों में 7,793 … Read more

‘राष्ट्र प्रथम’ होना चाहिए हर युवा का भावः मुख्यमंत्री

मंगलवार को फिर 2500 युवाओं को मिलेंगे नियुक्ति पत्र: सीएम योगी मेरठ में युवा संवाद कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 'राष्ट्र प्रथम' होना चाहिए हर युवा का भावः मुख्यमंत्री सीएम की अपीलः पिछली सरकारों से तुलना कीजिए और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ाइए हमने प्रशासन से कहा कि बुलडोजर का स्टेयरिंग ऐसे घुमाओ कि वाहन कटने की घटनाएं बंद हों, अब मेरठ में चोरी के वाहन कटने बंद हो गए- सीएम पुलिस वालों से कहा कि मॉकड्रिल का ही प्रदर्शन ही कर दो, ताकि दंगाई भूल न जाएं कि कार्रवाई कैसी होती हैः सीएम योगी हर कार्य को नकारात्मक भाव से देखने वाला युवा नहीं हो सकताः मुख्यमंत्री सीएम का तंज, मुझसे वे लोग प्रश्न पूछ रहे हैं, जिनके शासन में एक भी भर्ती साफ-सुथरी नहीं रही मेरठ,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेरठ की क्रांतिधरा पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का 'युवा संवाद' कार्यक्रम में स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हमने सत्ता संभालते ही युवाओं के लिए सरकारी भर्तियों को लेकर पारदर्शी व्यवस्था बनाई। अब तक 9.50 लाख नौजवानों को सरकारी नौकरी दी है। परसों से फिर मिशन रोजगार शुरू हुआ है। मंगलवार सुबह फिर ढाई हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र मिलेंगे। छह महीने में एक लाख युवाओं को नौकरी देंगे। यह क्रम अनवरत चलेगा। सीएम योगी ने तंज कसा कि मुझसे प्रश्न वो लोग पूछ रहे हैं, जिनके शासन में एक भी भर्ती साफ-सुथरी नहीं थी। विज्ञापन निकलते ही महाभारत के रिश्ते (चाचा-भतीजे, भाई, मामा) वसूली करने निकल पड़ते थे। थाने-तहसीलें बिक जाती थीं। सपा शासन के समय जिसने परीक्षा भी नहीं दी, ऐसे लोगों को भी नियुक्ति पत्र दे दिया गया। यूपी पब्लिक सर्विस कमीशन की एक परीक्षा ऐसी हुई, उसमें 86 में से 56 एक ही जाति के थे। उसका टॉपर वह हुआ, जो हाईस्कूल-इंटर, स्नातक में तृतीय श्रेणी से उत्तीर्ण हुआ। बाकी की शिक्षा भगवान भरोसे हुई। अयोग्य व्यक्ति को चेयरमैन बना दिया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर युवा का भाव राष्ट्र प्रथम होना चाहिए। डबल इंजन सरकार युवा ऊर्जा को प्लेटफॉर्म दे रही है। हर क्षेत्र में युवा शक्ति समेत सभी वर्गों के लिए कार्य हुए हैं। उन्होंने आह्वान किया कि पिछली सरकारों से तुलना कीजिए और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ाइए। स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि यह महत्वपूर्ण नहीं कि आपकी शिक्षा कितना धनार्जन कराती है, बल्कि यह महत्वपूर्ण है कि शिक्षा राष्ट्र के प्रति कितना समर्पण का भाव पैदा करती है। सीएम ने छात्रों, युवाओं से कहा कि हर क्षेत्र में आपके लिए संभावनाएं हैं। उसके अनुरूप करियर को बढ़ाइए।  सीएम ने महाभारत, हस्तिनापुर, आजादी के दौर में मेरठ का जिक्र किया, कहा कि मेरठ ने कई दौर को अपने आंखों से देखा है। जब भारत की आजादी का आह्वान हुआ तो उप्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। मंगल पांडेय ने बैरकपुर में जो चिंगारी जलाई, मेरठ में कोतवाल धन सिंह गुर्जर के नेतृत्व में उस चिंगारी ने दिल्ली के सिंहासन को हिला दिया था। झांसी में रानी लक्ष्मीबाई, बिठूर में नाना साहेब, तात्या टोपे ने इस आंदोलन को बढ़ाया। उत्तर प्रदेश का कोई भी ऐसा कस्बा और जनपद नहीं था, जहां भारत की आजादी के लिए ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ गूंज न उठी हो। हमारी एकता ने ब्रिटिश ताकत की चूलें हिला दी थीं। सीएम ने कहा कि आजाद भारत में मेरठ ने वह दौर भी देखा है, जब दंगे यहां की नियति बन गए थे। सीएम ने प्रदेश भर से लूटे व चोरी किए गए वाहनों को स्क्रैप किए जाने का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 2017 में हमारे सामने वाहन चोरी के मामले आए तो हमने कहा कि वाहन कहां जा रहे हैं, पता चला कि मेरठ मे कट रहे हैं। हमने प्रशासन से कहा कि बुलडोजर का स्टेयरिंग ऐसे घुमाओ कि यह कारोबार बंद हो, फिर यहां चोरी के वाहन कटने बंद हुए। मेरठ अब 12 लेन के एक्सप्रेसवे, नमो भारत रैपिड रेल के साथ जुड़ गया।  सीएम ने कहा कि यूपी में साढ़े 9 साल में दंगा नहीं हुआ। मैंने पुलिस वालों से कहा कि मॉकड्रिल का प्रदर्शन ही कर दो ताकि दंगाई भूल न जाएं कि कार्रवाई कैसी होती है। अब डबल इंजन की सरकार है, इसलिए माता-पिता चिंतित नहीं होते हैं। 2017 के पहले हर मां-पिता को चिंता होती थी कि पश्चिमी उप्र में बच्चों को कैसे पढ़ाएं। 2017 के चुनावी अभियान का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि मेरा पहला कार्यक्रम बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद में था। पहली सभा में बोलने खड़ा हुआ तो कुछ लोग मेरे पास आए और बोले कि कुछ ऐसा-वैसा मत कह दीजिएगा। हमने कहा कि हमारी सरकार बनेगी तो दंगे बंद होंगे, बेटी सुरक्षित होगी। अच्छी शिक्षा मिलेगी। लोग देखते थे कि कोई देख तो नहीं रहा है, तब ताली बजाते थे। मैंने कहा कि कम से कम ताली तो खुलकर बजा दो। उस समय ताली बजाने में भी लोगों को डर लगता था।  सीएम ने कहा कि 2017 के पहले यूपी को बीमारू कहा जाता था। यहां कोई आना नहीं चाहता था। यहां से पलायन होता था। अब यहां पलायन, दंगा, कर्फ्यू, चोरी के वाहन की बिक्री बंद हो गई। अब हर व्यक्ति पसंद के अनुरूप संस्थान व रोजगार का चयन कर सकता है। हमने मेरठ में प्रदेश का पहला खेल विश्वविद्यालय बनाया। ओडीओपी में खेल उत्पाद की ब्रांडिंग करके उसे पहचान दी। अब किसान खुशहाल है, उसे चिंता नहीं है कि बेटी की शादी के लिए गन्ना मूल्य का भुगतान होगा कि नहीं होगा। सरकार अब गन्ना मूल्य भुगतान की गारंटी दे रही है। सरकार ने 2017 से 2026 के बीच 3.30 लाख करोड़ रुपये गन्ना मूल्य का भुगतान किया।  सीएम ने कहा कि अब बिचौलिए समाप्त हो गए। अब 100 में से 15 पैसा नीचे नहीं जाता, बल्कि मोदी जी ने जनधन, मोबाइल व डिजिटल ट्रांजेक्शन के माध्यम से ऐसी व्यवस्था कर दी है कि पूरे 100 रुपये लाभार्थी के खाते में जाते हैं। एक भी पैसा इधर-उधर नहीं हो सकता। पीएम मोदी जी के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने तकनीक की ताकत का अहसास कराया है।  सीएम ने कहा कि जब हम लोग सांसद थे तो कनेक्शन के 10-10 कूपन मिलते थे। कुछ लोग कूपन बेचने के लिए … Read more

PTI के ‘सोमनाथ’ बयान से मचा हड़कंप, इस्लामाबाद-रावलपिंडी में कड़ी सुरक्षा

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में इस वक्त हालात कुछ ठीक नहीं हैं. एक तरफ तो मक्का पैक्ट को लेकर वो इंटरनेशनल मोर्चे पर फंसा हुआ है, दूसरी ओर अफगानिस्तान में एयरस्ट्राइक करके तालिबान को बदले के लिए उकसा चुका है. इन सबके बीच आंतरिक मोर्चे पर भी हुकूमत का वक्त कुछ अच्छा नहीं चल रहा है. पाकिस्तान में 27 सितंबर को होने वाले PTI के इस्लामाबाद मार्च से पहले सियासी तनाव बढ़ा हुआ है. खबरें हैं कि PTI के खैबर पख्तूनख्वा अध्यक्ष जुनेद अकबर ने सरकार को चेतावनी देते हुए ये तक कह दिया कि हम इस्लामाबाद को सोमनाथ बना देंगे।  जुनेद अकबर ने ये भी कहा कि पार्टी को पता है कि सरकार प्रदर्शन के दौरान गोली चला सकती है, लेकिन इस बार PTI कार्यकर्ता सिर्फ शव लेकर वापस नहीं लौटेंगे. ये बात उन्होंने पेशावर में एक सभा को संबोधित करने के दौरान कहा. यहीं पर उन्होंने ये भी कहा कि – ‘हम इस्लामाबाद को सोमनाथ बना देंगे’. उन्होंने दावा किया कि PTI कार्यकर्ता कई रास्तों से इस्लामाबाद पहुंचेंगे और जरूरत पड़ी तो पैदल भी मार्च करेंगे।  सरकार ने सोमनाथ पर दिया कड़ा रिएक्शन  उनके इस बयान पर पाकिस्तान सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है. गृह राज्य मंत्री तलाल चौधरी ने इसे हिंसा की धमकी बताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की इजाजत है, लेकिन हिंसा या लोगों की जान को खतरा पैदा करने वाली किसी भी कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. पाकिस्तान सरकार ने इस्लामाबाद की ओर मार्च करने वाले प्रदर्शनकारियों पर कड़ी पाबंदियां लगा दी हैं.  सरकार ने चेतावनी दी है कि कोई भी समूह राजधानी में किसी भी तरह की बाधा नहीं डाल सकेगा. सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार कहा कि प्रशासन, पुलिस और गृह मंत्रालय स्पष्ट हैं कि अशांति फैलाने वाले समूहों को इस्लामाबाद पहुंचने नहीं दिया जाएगा.  उन्होंने इस्लामाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले का हवाला दिया जिसमें राजनीतिक दलों को सार्वजनिक सड़कों और नागरिकों की आवाजाही बाधित करने से मना किया गया है।  27 सितंबर को PTI करने वाली है मार्च     आपको बता दें कि इमरान खान की पार्टी पीटीआई ने 27 सितंबर को एक लॉन्ग मार्च का ऐलान कर रखा है. वो देशव्यापी प्रदर्शन से     पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और पड़ोसी शहर रावलपिंडी में बड़े पैमाने पर सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है.     अधिकारियों ने शहर की ओर आने वाले प्रदर्शनों और मार्च की तैयारी में लगभग एक हजार कार्गो कंटेनर लगा दिए हैं. लाल जोन, फैजाबाद और जीरो पॉइंट जैसे महत्वपूर्ण रास्तों तथा संवेदनशील इलाकों को मजबूत किया जा रहा है।      सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिस और अर्धसैनिक बल तैनात किए गए हैं. कंटेनर प्रमुख चौराहों और संवेदनशील क्षेत्रों के रास्तों पर रखे गए हैं. फैजाबाद से मुर्री रोड की ओर जाने वाले मार्गों पर भी बैरिकेडिंग दिख रही है।      कुछ जगहों पर बैरिकेड को मजबूत करने के लिए मिट्टी की बोरियां और ढेर लगाए गए हैं. ये तैयारियां जमात-ए-इस्लामी के लंबे मार्च के इस्लामाबाद पहुंचने के बीच हो रही हैं. साथ ही पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ, किसान इत्तेहाद और कश्मीरी समूहों के अलग-अलग प्रदर्शनों के कारण भी प्रशासन सतर्क है।   

‘झूठ और भ्रम फैलाना सपा का प्राइमरी एजेंडा’… दानिश आजाद अंसारी ने साधा निशाना

‘2027 में सपा को अपनी हार साफ दिख रही’… दानिश आजाद अंसारी का अखिलेश पर तीखा हमला ‘झूठ और भ्रम फैलाना सपा का प्राइमरी एजेंडा’… दानिश आजाद अंसारी ने साधा निशाना ‘2012 से 2017 तक अपराध बढ़े, तब कहां थे सपा नेता?’… दानिश आजाद अंसारी का सवाल ‘यूपी को बदनाम करने के लिए अपराध बढ़वा रही सपा’… दानिश आजाद अंसारी का गंभीर आरोप लखनऊ, समाजवादी पार्टी पर हमला बोलते हुए योगी सरकार के मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने कहा कि सपा बौखला गई है, क्योंकि उसे 2027 के विधानसभा चुनाव में अपनी हार साफ और स्पष्ट दिखाई दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सिर्फ झूठ और भ्रम फैलाना आज समाजवादी पार्टी का प्राथमिक एजेंडा बन गया है। ‘2012 से 2017 तक अपराधों के समय कहां थे सपा नेता?’ दानिश आजाद अंसारी ने सपा पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी पहले इस बात का जवाब दे कि 2012 से 2017 के बीच उत्तर प्रदेश में अपराधों का ग्राफ बढ़ रहा था और महिलाओं के खिलाफ अपराध हो रहे थे, तब उसके नेता कहां थे? उन्होंने कहा कि उस समय अपराधियों के हौसले इतने बुलंद थे कि उत्तर प्रदेश में दिनदहाड़े लूट-खसोट, चोरी और दूसरी आपराधिक घटनाएं हुआ करती थीं। दानिश आजाद ने सवाल किया कि तब समाजवादी पार्टी को उत्तर प्रदेश की भलाई की याद क्यों नहीं आई? ‘योगी के नेतृत्व में यूपी की इमेज बेहतर हो रही’ मंत्री ने कहा कि आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में सरकार उत्तर प्रदेश के विकास के लिए काम कर रही है और प्रदेश की छवि बेहतर हो रही है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से समाजवादी पार्टी के नेता बौखलाए हुए हैं। दानिश आजाद अंसारी ने सपा की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि पार्टी के नेता रिपोर्टरों का अपमान करने का काम कर रहे हैं। ‘यूपी को बदनाम करने के लिए अपराध बढ़वा रही सपा’ दानिश आजाद अंसारी ने समाजवादी पार्टी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वह अपने कार्यकर्ताओं के माध्यम से आम और गरीब लोगों पर जानबूझकर अत्याचार करा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश को बदनाम करने के लिए जानबूझकर आपराधिक घटनाएं बढ़वाने की कोशिश की जा रही है। मंत्री ने कहा कि समाजवादी पार्टी का यह “चाल-चरित्र” अब नहीं चलेगा। उन्होंने दावा किया कि जनता समाजवादी पार्टी की असलियत जानती है और उसके किसी भी बहकावे में आने वाली नहीं है।