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साय मंत्रिपरिषद का बड़ा फैसला: सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग खोलने को मिलेगा रियायती भूखंड

रायपुर  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक हुई। बैठक में लिए गए निर्णयों की जानकारी देते हुए डिप्टी सीएम अरुण साव ने बताया कि, सूचना प्रौद्योगिकी उद्योग की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए 90 एकड़ भूमि के भूखंड को रियायती प्रीमियम दर पर आबंटित करने का निर्णय लिया है। चना खरीदी का निर्णय भी कैबिनेट ने लिया है। पढ़िए फैसलों को डिटेल- 1. मंत्रिपरिषद द्वारा निर्णय लिया है कि राज्य के अनुसूचित क्षेत्र एवं माडा पॉकेट क्षेत्र में रहने वाले अंत्योदय और प्राथमिकता श्रेणी के परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत हर माह वितरित किए जाने वाले 2 किलो चना की आवश्यक मात्रा नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा NeML ई-ऑक्शन प्लेटफार्म के माध्यम से खरीदी जाएगी। यह खरीदी वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वीकृत 0.25 प्रतिशत या इससे कम ट्रांजैक्शन/सर्विस चार्ज पर की जाएगी। इसके साथ ही मंत्रिपरिषद ने कहा है कि जुलाई 2025 से नवंबर 2025 तक जिन हितग्राहियों ने चना नहीं लिया है, उन्हें पात्रतानुसार यह चना दिसंबर 2025 तक वितरित कर दिया जाए। 2. मंत्रिपरिषद ने नवा रायपुर में सूचना प्रौद्योगिकी (IT/IITS) उद्योग की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए 90 एकड़ भूमि के भूखंड को रियायती प्रीमियम दर पर आबंटित करने का निर्णय लिया है। इस फैसले का उद्देश्य आईटी क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करना और औद्योगिक विकास को गति देना है। रियायती दर पर भूमि उपलब्ध होने से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इस पहल से नवा रायपुर में न सिर्फ तकनीकी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यहां की बसाहट और शहरीकरण की प्रक्रिया को भी बल मिलेगा। आईटी कंपनियों की स्थापना से क्षेत्र में आधारभूत संरचनाएं विकसित होंगी, जिससे स्थानीय निवासियों को भी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। मंत्रिपरिषद द्वारा निर्णय लिया है कि राज्य के अनुसूचित क्षेत्र एवं माडा पॉकेट क्षेत्र में रहने वाले अंत्योदय और प्राथमिकता श्रेणी के परिवारों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत हर माह वितरित किए जाने वाले 2 किलो चना की आवश्यक मात्रा नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा NeML ई-ऑक्शन प्लेटफार्म के माध्यम से खरीदी जाएगी। यह खरीदी वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वीकृत 0.25 प्रतिशत या इससे कम ट्रांजैक्शन/सर्विस चार्ज पर की जाएगी। इसके साथ ही मंत्रिपरिषद ने कहा है कि जुलाई 2025 से नवंबर 2025 तक जिन हितग्राहियों ने चना नहीं लिया है, उन्हें पात्रतानुसार यह चना दिसंबर 2025 तक वितरित कर दिया जाए। मंत्रिपरिषद ने नवा रायपुर में सूचना प्रौद्योगिकी (IT/IITS) उद्योग की स्थापना को प्रोत्साहित करने के लिए 90 एकड़ भूमि के भूखंड को रियायती प्रीमियम दर पर आबंटित करने का निर्णय लिया है। इस फैसले का उद्देश्य आईटी क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करना और औद्योगिक विकास को गति देना है। रियायती दर पर भूमि उपलब्ध होने से निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ेगी और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। इस पहल से नवा रायपुर में न सिर्फ तकनीकी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यहां की बसाहट और शहरीकरण की प्रक्रिया को भी बल मिलेगा। आईटी कंपनियों की स्थापना से क्षेत्र में आधारभूत संरचनाएं विकसित होंगी, जिससे स्थानीय निवासियों को भी प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष लाभ मिलेगा।  

विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन का जमीनी स्तर पर किया जाए अध्ययन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

म.प्र. जन अभियान परिषद् शासकीय योजनाओं और कार्यक्रमों को अधिक समाज अनुकूल बनाने में सहयोग करे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव विकास कार्यों और योजनाओं के क्रियान्वयन का जमीनी स्तर पर किया जाए अध्ययन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव जन अभियान परिषद् से जुड़ी संस्थाएं नशामुक्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दें : मुख्यमंत्री डॉ. यादव CM की अध्यक्षता में हुई परिषद् के शासी निकाय की बैठक भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जन अभियान परिषद् से जुड़ी संस्थाएं नशामुक्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ग्राम और वार्ड स्तर तक गतिविधियां संचालित करें और प्रभावित व्यक्तियों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करें। जन अभियान परिषद् राज्य शासन द्वारा चलाए जा रहे विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावशीलता का भी जमीनी स्तर पर अध्ययन कर फीडबैक और सुझाव दे, इससे योजनाओं को अधिक समाज अनुकूल बनाने में मदद मिलेगी। परिषद् से जुड़ी संस्थाओं का कार्य थर्ड पार्टी आंकलन के समान हो। मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने ये निर्देश मंत्रालय में मध्‍यप्रदेश जन अभियान परिषद् के शासी निकाय की 15वीं वार्षिक सामान्‍य बैठक में दिए। पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता का माध्यम बनेगा 'माटी गणेश-सिद्ध गणेश' अभियान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में स्वदेशी को प्रोत्साहित करने के लिए लघु, कुटीर उद्योग तथा स्व-सहायता समूहों से मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। जनअभियान परिषद् से जुड़ी संस्थाएं इस दिशा में सहभागिता को प्रोत्साहित करने हुए गतिविधियां संचालित करें। बैठक में सर्पदंश से सुरक्षा और सर्परक्षा के लिए थाना स्तर पर संचालित की जाने वाली जागरूकता, प्रशिक्षण और अध्ययन गतिविधियों की जानकारी दी गई। बैठक में बताया गया कि परिषद्, स्वैच्छिकता और स्वावलंबन के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के लिए पर्यावरण संरक्षण, व्यक्तित्व विकास, नागरिक एवं सामाजिक अनुशासन पर केन्द्रित गतिविधियां, सीएम सोशल इंटर्नशिप, युवा जन अभियान और पंख गतिविधियां संचालित करने जा रही है। "माटी गणेश-सिद्ध गणेश" अभियान के अंतर्गत परिषद् के प्रशिक्षित नैटवर्क द्वारा गांव और वार्डों की महिलाओं को मिट्टी से भगवान गणेश की प्रतिमा बनाने के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत 'माटी गणेश-सिद्ध गणेश' घर-घर विराजित और विसर्जित होंगे। इससे पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरुकता बढ़ेगी। बैठक में जन अभियान परिषद् के उपाध्‍यक्ष मोहन नागर, परिषद् की शासी निकाय के सदस्‍य एवं अपर मुख्‍य सचिव नीरज मण्‍डलोई, अपर मुख्‍य सचिव संजय शुक्‍ला तथा परिषद् के कार्यपालक निदेशक डॉ. बकुल लाड़ उपस्थित थे।  

नीतीश कैबिनेट ने दी 900 करोड़ की दो सड़क परियोजना को मंजूरी, इन क्षेत्रों का होगा विकास

राजगीर के खेल और पर्यटन को बूस्‍टर डोज, 900 करोड़ के दो प्रोजेक्‍ट पास  4-लेन की दो नई सड़कों के लिए नीतीश कैबिनेट ने किया 900 करोड़ पास!   राजगीर क्रिकेट स्टेडियम तक 4 लेन की सीधी सड़क, सरकार ने दी 364 करोड़ की मंजूरी नीतीश कैबिनेट ने दी 900 करोड़ की दो सड़क परियोजना को मंजूरी, इन क्षेत्रों का होगा विकास पटना बिहार सरकार का पूरा फोकस राज्य में सड़क और यातायात को बेहतर बनाने का है। जगह- जगह पुल और हाईवे बनाए जा रहे हैं। ताकि सड़कों पर बिहार के आर्थिक विकास का पहिया तेज रफ्तार से दौड़ सके। इस कड़ी में पथ निर्माण विभाग के दो बड़े प्रोजेक्‍ट को  मंजूरी दे दी गई है। मंगलवार को नीतीश कैबिनेट की बैठक में सालेपुर-नरसंडा-तेलमर-करौटा 4-लेन सड़क और राजगीर खेल परिसर से NH-120 तक 4-लेन की सड़क को मंजूरी मिल गई है। इन योजनाओं पर करीब 900 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आएगी। सालेपुर-नरसंडा-तेलमर-करौटा 4-लेन सड़क राज्‍य सरकार की ओर से सालेपुर-नरसंडा से तेलमर-करौटा जाने वाली 4-लेन की इस सड़क लंबाई 19.43 किलोमीटर होगी। जिस पर कुल 539.19 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इस बीस किलोमीटर की चार लेन वाली सड़क पर 2 फ्लाईओवर, 2 बड़े पुल, 13 छोटे पुल, 19 आरसीसी बॉक्स कल्वर्ट और 34 पाइप कल्वर्ट बनाए जाएंगे। जिसका आम लोगों को बहुत फायदा मिलने वाला है। इस रूट से गुजरने वालों को न तो जाम का समाना करना होगा और न ही अवागमन में दिक्‍कत होगी। लोग फर्राटा भरते हुए 20 किलोमीटर की यह दूरी तय कर पाएंगे। NH-120 से सीधे कने‍क्‍ट होगा राजगीर खेल परिसर वहीं, दूसरी परियोजना राजगीर खेल परिसर से NH-120 तक की चार लेन सड़क बनाने की है। इस चार लेन वाली सड़क की कुल लंबाई 7.40 किलोमीटर होगी। जिसकी लागत 363.99 करोड़ रुपये होगी। चार लेन का यह मार्ग राजगीर खेल परिसर से होते हुए कुबरी, जैतीपुर, फतेहपुर और इंडो हुके होटल से NH-120 विरायतन तक जाएगा। इस कनेटिंग रोड़ पर रेल ओवर ब्रिज भी तैयार किया जाएगा। इस परियोजना का सीधा फायदा राजगीर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम आने-जाने में खिलाड़ियों और दर्शकों को होगा। साथ ही आस-पास के गांवों का विकास भी तेज होगा। लोगों को होगा सीधा फायदा बताते चलें कि बिहार सरकार और मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार के फोकस में अब खेल भी शामिल हो गया है। ऐसे में इन दोनों परियोजनाओं की वजह से जहां स्थानीय लोगों और यात्रियों को फायदा होगा वहीं, राजगीर में होने वाले इंटरनेशनल क्रिकेट को ध्‍यान में भी रखा गया है। 7 किलोमीटर की इस 4 लेन की सड़क सीधे NH 120 से सीधे राजगीर खेल परिसर के क्रिकेट ग्राउंड तक जाती है। इस सड़क के पूरा होने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा बल्कि खेलों को भी बूस्टर डोज मिलेगा।

साइबर सुरक्षा की एडवांस टेक्नोलॉजी के आदान प्रदान से ही साइबर अपराध पर लगायी जा सकती है लगाम

विश्व में हो रहे डिजिटल खतरे को कम कर सकता है साइबर सुरक्षा और डिजिटल ऑडिट  साइबर सुरक्षा की एडवांस टेक्नोलॉजी के आदान प्रदान से ही साइबर अपराध पर लगायी जा सकती है लगाम  सेमिनार में सीएम योगी द्वारा प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर किये जा रहे प्रयासों की सराहना हुई  योगी सरकार द्वारा साइबर अपराधों के खिलाफ अपनाया गया कड़ा रुख, साइबर अपराध में आई कमी लखनऊ  साइबर सुरक्षा और डिजिटल ऑडिट का महत्व दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है क्योंकि पूरे विश्व में डिजिटल खतरे का लगातार सामना कर रहा है। ऐसे में हमे साइबर सुरक्षा की एडवांस टेक्नोलॉजी को अपनाना होगा। इसके लिए विश्व के विभिन्न देशों से टेक्नोलॉजी का आदान-प्रदान बहुत महत्व रखता है। यह मंथन यूपीएसआईएफएस द्वारा आयोजित डिजिटल ऑडिट, साइबर इंश्योरेंस, सुरक्षा और कानूनी पहलुओं पर हुआ। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रदेश में साइबर सुरक्षा को लेकर किये जा रहे विभिन्न पहलुओं को सराहा गया।  साइबर सुरक्षा, डिजिटल ऑडिट और साइबर इंश्योरेंस के क्षेत्र में मजबूत कैरियर की संभावनाएं यूपीएसआईएफएस के अपर निदेशक राजीव मल्होत्रा ने बताया कि योगी सरकार द्वारा साइबर अपराधों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। उन्होंने डेटा सुरक्षा के लिए भारत के डीपीडीपी अधिनियम और जीडीपीआर जैसी नीतियों की जानकारी दी। साथ ही टीमवर्क और निरंतर शिक्षा के महत्व पर बल दिया। सेमिनार में साइबर सुरक्षा के लिए लगातार शिक्षा, व्यावहारिक अनुभव और नैतिक स्पष्टता को एक साथ जोड़ने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा, डिजिटल ऑडिट और साइबर इंश्योरेंस के क्षेत्र में एक मजबूत और टिकाऊ कैरियर की संभावना है, बशर्ते सही कौशल, कानूनी जानकारी और व्यावहारिक अनुभव को प्राथमिकता दी जाए। सीएम योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इन प्रयासों को और भी सशक्त बनाया गया है, जो भारतीय डिजिटल सुरक्षा की दिशा में एक मजबूत कदम है। साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कानूनी, नैतिक और तकनीकी ढांचे को समझना जरूरी सेमिनार में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ यूएसए के पवन शर्मा ने कहा कि डिजिटल ऑडिट किसी संगठन के जोखिम को समझने के लिए एक नींव का काम करता है। उन्होंने कहा कि डिजिटल ऑडिट के बारे में व्यावहारिक ज्ञान और उसे लागू करने की क्षमता आज के समय में साइबर सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। साइबर इंश्योरेंस के लिए ऑडिट रिपोर्ट की सही व्याख्या करना और उसे सही तरीके से लागू करना बेहद जरूरी हो गया है। सिस्को के प्रतिनिधि ने यह बताया कि अब पारंपरिक वार्षिक ऑडिट की बजाय संगठन लगातार, जोखिम-आधारित मूल्यांकन कर रहे हैं, जो वास्तविक समय के मापदंडों और अनुपालन ढांचे से जुड़े होते हैं। इसके साथ ही ऑटोमेशन और साइबर जोखिम मॉडलिंग जैसे कौशल अब करियर की तरक्की के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं। जेड-स्केलर के प्रतिनिधि ने कंपनियों में आंतरिक अपस्किलिंग के महत्व को बताया और साइबर सुरक्षा में अपनी विशेषज्ञता को प्रमाणित करने के लिए महत्वपूर्ण प्रमाणपत्र जैसे कि CompTIA Security+ और CISSP की सिफारिश की। इन प्रमाणपत्रों को प्राप्त करने से युवाओं को अपने करियर में नई ऊंचाइयों तक पहुंचने का अवसर मिलता है। यूपीएसआईएफएस के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. मनीष कुमार राय ने बताया कि साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में कानूनी, नैतिक और तकनीकी ढांचे को समझना आवश्यक है। उन्होंने रैंसमवेयर जैसे महत्वपूर्ण उदाहरणों के माध्यम से बताया कि लगातार मूल्यांकन से ही सुरक्षा को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने ने अंतरराष्ट्रीय साइबर खतरों के मद्देनज़र वैश्विक दृष्टिकोण की अहमियत को उजागर किया।      

मेधावी छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, शोध और नेतृत्व में उत्कृष्टता प्राप्त करने का अवसर देना योजना का उद्देश्यः मुख्यमंत्री

युवाओं को ग्लोबल लीडरशिप रोल के लिए तैयार करने का माध्यम बनेगी चिवनिंग-यूपी छात्रवृत्ति योजना: सीएम योगी  मेधावी छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, शोध और नेतृत्व में उत्कृष्टता प्राप्त करने का अवसर देना योजना का उद्देश्यः मुख्यमंत्री   योगी सरकार ने दिया वैश्विक शिक्षा का अवसर, अब यूपी के छात्र पढ़ेंगे यूके में अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर “चिवनिंग-यूपी छात्रवृत्ति योजना”की हुई शुरुआत मुख्यमंत्री की उपस्थिति में प्रदेश सरकार और एफसीडीओ-यूके के बीच ऐतिहासिक एमओयू  हर साल पांच मेधावी छात्रों को मिलेगी यूनाइटेड किंगडम में मास्टर डिग्री की स्कॉलरशिप 2025-26 से तीन वर्षों तक संचालित होगी योजना, 2028-29 से किया जाएगा नवीनीकृत  प्रति छात्र आएगा ₹45 से ₹48 लाख का खर्च, प्रदेश सरकार ₹23 लाख रुपए तक करेगी वहन लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की उपस्थिति में उनके सरकारी आवास पर मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार और द फॉरेन कॉमनवेल्थ एंड डेवलपमेंट ऑफिस (एफसीडीओ) यूके के बीच ऐतिहासिक समझौता हुआ। इसके तहत “चिवनिंग-भारत रत्न श्री अटल बिहारी बाजपेयी उत्तर प्रदेश राज्य सरकार छात्रवृत्ति योजना” शुरू की गई है, जिसके अंतर्गत हर साल प्रदेश के पांच प्रतिभाशाली छात्रों को यूनाइटेड किंगडम के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में मास्टर डिग्री के लिए छात्रवृत्ति दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में यूपी सरकार प्रतिभाशाली छात्रों को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाने के लिए कार्य कर रही है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि यह छात्रवृत्ति योजना प्रदेश की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देने और युवाओं को “ग्लोबल लीडरशिप रोल” के लिए तैयार करने का सशक्त माध्यम बनेगी। छात्रों को मिलेगा वैश्विक एक्सपोजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि इस योजना का उद्देश्य मेधावी विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, शोध और नेतृत्व में उत्कृष्टता प्राप्त करने का अवसर देना है। यह योजना शैक्षणिक सत्र 2025-26 से तीन वर्षों तक (2025-26, 2026-27 और 2027-28) संचालित होगी। इसके बाद 2028-29 से योजना को नवीनीकृत किया जाएगा। भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी जी की प्रेरणा से प्रारंभ की गई यह योजना प्रदेश के युवाओं को वैश्विक शिक्षा और नेतृत्व में नई ऊंचाइयां हासिल करने का अवसर देगी। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर उत्तर प्रदेश और देश का गौरव बढ़ाएं। पूरी पढ़ाई और खर्च का प्रावधान इस छात्रवृत्ति में पूर्ण शिक्षण शुल्क, परीक्षा व शोध शुल्क, रहने-खाने का भत्ता तथा यूके तक आने-जाने का हवाई किराया शामिल रहेगा। प्रति छात्र लगभग £38,048 से £42,076 (लगभग ₹45 से ₹48 लाख) का खर्च आएगा। इसमें से उत्तर प्रदेश सरकार लगभग £19,800 (₹23 लाख) वहन करेगी, शेष राशि का वहन एफसीडीओ यूके करेगा। ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने भी पहल को सराहा ब्रिटिश हाई कमिश्नर टू इंडिया, लिंडी कैमरन ने लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समक्ष हुए एमओयू पर हस्ताक्षर करते हुए कहा कि लखनऊ आकर इस समझौते पर हस्ताक्षर करना बेहद खुशी की बात है। इस नई चिवनिंग स्कॉलरशिप के तहत अगले तीन वर्षों तक हर साल पांच छात्रों को यूके में पूर्ण छात्रवृत्ति पर पढ़ाई का अवसर मिलेगा। यह यूनाइटेड किंगडम और भारत के बीच बढ़ते रिश्तों का प्रतीक है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्री मोदी जी की यूके विजिट के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा ट्रेड एग्रीमेंट और विजन 35 साइन किया गया है, जिससे शिक्षा के साथ-साथ व्यापार के शानदार अवसर भी खुलेंगे। इस साझेदारी से भारत और विशेषकर उत्तर प्रदेश के छात्रों को वैश्विक मंच पर बड़ा फायदा होगा।    

सीएम योगी के मार्गदर्शन में डिजिटल साक्ष्य का न्यायिक मामलों में महत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में डिजिटल साक्ष्यों पर हुई चर्चा

न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और दक्षता को सुनिश्चित कर रहे डिजिटल साक्ष्य सीएम योगी के मार्गदर्शन में डिजिटल साक्ष्य का न्यायिक मामलों में महत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में डिजिटल साक्ष्यों पर हुई चर्चा  बोले एक्सपर्ट, न्यायिक मामलों में डिजिटल साक्ष्य की भूमिका अहम, यह तब और बढ़ जाती है जब कोई विटनेस नहीं होता  सीएम योगी के निर्देश पर डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के लिए प्रदेश में तैयार किया जा रहा आवश्यक ढांचा   लखनऊ  न्यायिक मामलों में डिजिटल साक्ष्य की भूमिका बहुत अहम होती है। यह भूमिका तब और बढ़ जाती है जब डिजिटल साक्ष्य के आलावा कोई विटनेस नहीं होता है। 26/11 मुंबई हमले के आरोपी कसाब के मामले में इंटरनेट ट्रांस्क्रिप्ट्स का उपयोग दोषसिद्धि में काफी महत्वपूर्ण था। वर्तमान डिजिटल साक्ष्य न केवल न्यायिक मामलों में महत्वपूर्ण साबित हो रहे हैं, बल्कि न्यायिक प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता को भी सुनिश्चित कर रहे हैं। ये बातें सेवानिवृत्त जस्टिस तलवंत सिंह ने यूपीएसआईएफएस के डिजिटल साक्ष्य का न्यायिक मामलों में महत्व विषय पर आयोजित सेमिनार में कही।   डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के लिए प्रदेश में आवश्यक ढांचा तैयार किया गया सेमिनार में जस्टिस सिंह ने कहा कि प्रदेश में न्यायिक सुधारों को बढ़ावा देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में प्रदेश में न्यायपालिका को तकनीकी दृष्टिकोण से मजबूत किया जा रहा है और डिजिटल साक्ष्य को मान्यता देने के लिए प्रदेश में आवश्यक ढांचा तैयार किया किया जा रहा है। इसी कड़ी में प्रदेश के न्यायालयों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और गति लाने के लिए वीडियो कांफ्रेंसिंग सुविधाओं का विस्तार किया गया है। इसके अलावा सीएम योगी ने प्रदेश के न्यायिक ढांचे को और भी सशक्त बनाने के लिए कई सुधारों की घोषणा की है, ताकि न्यायिक कार्यवाही तेजी से और पारदर्शी तरीके से हो सके। यह सेमिनार इसका प्रमाण है कि उत्तर प्रदेश न्यायिक सुधारों में अपने कदम तेजी से बढ़ा रहा है और भविष्य में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे। उन्होंने डिजिटल साक्ष्य को परिभाषित करते हुए कहा कि यह वह सभी डेटा होते हैं, जो डिजिटल रूप में जन्म और एक जगह एकत्रित होते हैं। उन्होंने इसे बढ़ते साइबर अपराधों की चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक बताया और कहा कि अब यह लगभग हर जांच का अभिन्न हिस्सा बन गया है। चाहे मामला चोरी, लूट या साइबर अपराध का हो। मेरा मानना है कि वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्य अभियोजन की ताकत को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और इस प्रकार से दोषसिद्धि में मदद करते हैं। गवाहों के बयान में वीडियो कांफ्रेंसिंग वैध तरीका बना जस्टिस सिंह ने भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA)के नये नियमों का उल्लेख करते हुए बताया कि यह अधिनियम डिजिटल साक्ष्य की स्वीकृति को आसान बनाता है, जिसमें वीडियो कॉलिंग के माध्यम से दर्ज मौखिक बयान और वीडियो रिकॉर्डिंग शामिल हैं। उन्होंने भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता (CRPC)की धारा 273 का उदाहरण देते हुए बताया कि वीडियो कांफ्रेंसिंग अब एक वैध तरीका बन गया है, जिसके द्वारा गवाहों के बयान दर्ज किए जा सकते हैं। उन्होंने डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के बीच के अंतर को स्पष्ट करते हुए कहा कि डिजिटल रिकॉर्ड (जैसे स्कैन किए गए पीडीएफ, सीसीटीवी फुटेज) और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड (जैसे ईमेल, एसएमएस, सर्वर लॉग्स) दो अलग-अलग प्रकार के होते हैं। उन्होंने भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 63 का हवाला देते हुए बताया कि डिजिटल रिकॉर्ड को प्रमाणिक बनाने के लिए यह आवश्यक है कि डिवाइस नियमित रूप से इस्तेमाल में हो, डेटा सामान्य रूप से दर्ज किया गया हो और डिवाइस की कार्यशीलता सही हो।     

योगी सरकार गोरखपुर में बनवा रही स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट

दो माह तैयार हो जाएगा यूपी का पहला एसआईएचएम योगी सरकार गोरखपुर में बनवा रही स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट 48.39 करोड़ रुपये की आ रही लागत, निर्माण कार्य 95 प्रतिशत पूर्ण टूरिज्म, होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के लिए चलेंगे कोर्स योगी सरकार में तेजी से हुआ है हॉस्पिटैलिटी सेक्टर का विकास दक्ष मानव संसाधन की मांग को पूरा करने में एसआईएचएम की होगी अहम भूमिका गोरखपुर  प्रदेश का पहला स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (एसआईएचएम) दो माह में तैयार हो जाएगा। योगी सरकार द्वारा गोरखपुर में 48.39 करोड़ रुपये की लागत से बनवाए जा रहे एसआईएचएम के पहले फेज का 95 प्रतिशत निर्माण कार्य पूरा हो गया है। पर्यटन विभाग द्वारा अगले माह के अंत तक शत प्रतिशत कार्य पूर्ण कराया जाना लक्षित किया गया है।  बीते कुछ सालों में गोरखपुर का टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर तेजी से आगे बढ़ा है। यहां कई बड़े ब्रांड के होटल्स, रेस्टोरेंट खुल चुके हैं और कई खुलने की प्रक्रिया में हैं। हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में कुशल पेशेवरों की मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में प्रदेश का पहला स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (एसआईएचएम) बनवा रहे हैं। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) के कार्यालय के सामने बन रहे एसआईएचएम का निर्माण सितंबर माह तक पूरा हो जाएगा और अगले शैक्षिक सत्र से यहां होटल एंड टूरिज्म मैनजमेंट से जुड़े डिप्लोमा और डिग्री के पाठ्यक्रम संचालित होने लगेंगे।  स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट, पर्यटन विभाग का प्रोजेक्ट है। इसका निर्माण कार्यदायी संस्था के रूप में सी एंड डीएस यूनिट-14 द्वारा कराया जा रहा है। इस परियोजना पर निर्माण कार्य 26 सितंबर 2023 को प्रारंभ हुआ था। वर्तमान समय में 38.42 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च कर 95 प्रतिशत कार्य पूरे कर लिए गए हैं और इसी साल 25 सिंतबर तक कार्य पूर्ण किया जाना है। निर्माण के पहले चरण में दो ब्लॉकों में प्रशासनिक कक्ष, क्लास रूम, कॉमन हाल, किचन के अलावा अंडरग्राउंड पार्किंग, इलेक्ट्रिफिकेशन, फायर सेफ्टी, पाइपलाइन आदि के कार्य पूर्ण कराए जा रहे हैं। उप निदेशक पर्यटन राजेंद्र प्रसाद यादव मिश्रा बताते हैं कि कि स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट का निर्माण कार्य अगले माह (सितंबर) तक पूरा हो जाएगा, इस समय फिनिशिंग का काम चल रहा है। अगले माह के बाद कभी भी इसका लोकार्पण हो सकता है।  उम्मीद जताई जा रही है कि अगले शैक्षिक सत्र से यहां ग्लोबल डिमांड के अनुरूप होटल, टूरिज्म और हॉस्पिटैलिटी मैनजमेंट के कोर्स शुरू कर दिए जाएंगे। स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट में कोर्स शुरू हो जाने के बाद युवाओं को रोजगारपरक पढ़ाई के लिए नए विकल्प मिल जाएंगे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन से गोरखपुर में जिस तरह से पर्यटन विकास हो रहा है उससे होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।  दूसरे चरण में ब्वॉयज एंड गर्ल्स हॉस्टल का भी निर्माण शुरू स्टेट इंस्टिट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट के दूसरे चरण के निर्माण में ब्वॉयज एंड गर्ल्स हॉस्टल बनाया जा रहा है। दूसरे चरण की परियोजना के निर्माण पर 46.81 करोड़ रुपये की लागत आएगी। निर्माण कार्य 15 मई से शुरू है। फिलहाल निर्माण कार्य की भौतिक प्रगति 14 प्रतिशत है। पर्यटन विभाग को उम्मीद है कि मई 2027 तक कार्य पूरा करा लिया जाएगा। एसआईएचएम प्रोजेक्ट के दूसरे चरण में 128 रूम का पांच मंजिला ब्वॉयज हॉस्टल और 84 रूम का पांच मंजिला गर्ल्स हॉस्टल बनाया जा रहा है।

तीन दिनों में 23 लाख जमाबंदी पंजी की प्रतियां जनता तक पहुँची, राजस्व महा-अभियान जारी

राजस्व महा–अभियान : तीन दिनों में 23 लाख से अधिक जमाबंदी पंजी की प्रतियों का हुआ वितरण तीन दिनों में 23 लाख जमाबंदी पंजी की प्रतियां जनता तक पहुँची, राजस्व महा-अभियान जारी राजस्व महा-अभियान का बड़ा आंकड़ा: 3 दिन में 23 लाख से अधिक दस्तावेजों का वितरण जमाबंदी पंजी के वितरण में शेखपुरा पहले स्थान पर  दूसरे नंबर पर जहानाबाद, तीसरे नंबर पर कैमूर, चौथे नंबर पर  नवादा एवं पांचवें नंबर पर है पूर्णिया पटना   राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा चलाए जा रहे राजस्व महा–अभियान में महज 16 अगस्त से 18 अगस्त तक तीन दिनों में ही बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राज्यभर में तीन दिनों में अबतक 23 लाख से अधिक जमाबंदी पंजी की प्रतियां रैयतों के बीच वितरित की जा चुकी हैं। सर्वाधिक जमाबंदी के वितरण में शेखपुरा पहले स्थान पर है। वहां कुल जमाबंदी के 24.02 फीसदी जमाबंदी प्रतियों का वितरण किया गया है। दूसरे नंबर पर जहानाबाद, तीसरे नंबर पर कैमूर, चौथे नंबर पर  नवादा एवं पांचवें नंबर पर पूर्णिया है। जहानाबाद में 14.48 फीसदी, कैमूर में 13.78 फीसदी, नवादा में 13.72 फीसदी एवं पूर्णिया में 11.35 फीसदी जमाबंदी की प्रतियों का वितरण तीन दिनों में कर दिया गया है। छठे स्थान पर अररिया है। यहां 11.16 फीसदी वितरण हुआ है। सातवें स्थान पर खगड़िया है। यहां 11.15 फीसदी वितरण हुआ है। आठवें स्थान पर वैशाली है और यहां 10.41 फीसदी जमाबंदी की प्रति का वितरण हो गया है। नौवें स्थान पर गोपालगंज एवं दसवें स्थान पर किशनगंज है। यहां क्रमशः 10.28 फीसदी एवं 9.29 फीसदी जमाबंदी की प्रतियों का वितरण रैयतों के बीच कर दिया गया है। बताते चलें कि राज्य के सभी 38 जिलों में कुल जमाबंदी की संख्या 3 करोड़, 59 लाख, 88 हजार 935 है। तीन दिन में सभी जिलों में कुल 23 लाख 08 हजार 574 जमाबंदी प्रति का वितरण रैयतों के बीच कर दिया गया है। ये कुल जमाबंदी का 6.41 फीसदी है। इस अभियान के तहत गांव–गांव जाकर राजस्व विभाग की टीमें लोगों को उनकी जमीन से जुड़ी जमाबंदी की प्रति उपलब्ध करा रही है। टीम द्वारा जमाबंदी की प्रति के साथ–साथ आवश्यक आवेदन प्रपत्र भी मौके पर  उपलब्ध कराई जा रही है। इस राजस्व महा–अभियान के दौरान जमीन के अभिलेखों की अशुद्धियों का त्वरित सुधार, बंटवारा नामांतरण, उत्तराधिकार   नामांतरण और छूटी हुई   जमाबंदियों को ऑनलाइन करने का काम हो रहा है। इस महा–अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को अपने कागजात में सुधार के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत दिलाना है।

3 साल में 22,500 पुलिसकर्मी भर्ती होंगे, CM यादव की घोषणा पर तेज हुई प्रक्रिया

भोपाल  मध्य प्रदेश के पुलिस थानों में खाली पड़े हजारों पद जल्दी भर लिए जायेंगे, सरकार ने इसकी तैयारियां तेज कर दी है, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बीते 15 अगस्त को घोषणा करते हुए कहा कि अगले तीन साल में ये भर्तियाँ हो जायेंगी इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने भर्तियों के लिए पुलिस भर्ती बोर्ड के गठन की भी घोषणा की। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री डॉ मोहन यादव की घोषणा के बाद से प्रदेश के युवा उत्साहित हैं, विशेष रूप से उन युवाओं में बहुत उत्साह है जो लंबे समय से पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे थे और खाकी वर्दी पहनने का सपना दिल में संजोये बैठे हैं, उनके सपने जल्दी ही हकीकत में बदलने वाले हैं। सीएम डॉ मोहन यादव ने 15 अगस्त को पुलिस अधिकारियों कर्मचारियों के सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि मेरी जानकारी में आया है हमने  7500 पदों पर भर्ती की अनुमति दी है लेकिन अभी भी 20 हजार पद पुलिस विभाग में खाली है, उन्होंने कहा कि हम अगले तीन सालों में सभी खाली पदों को भर देंगे। सीएम ने की पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने की घोषणा  सीएम ने पुलिस के आला अधिकारियों की तरफ देखते हुए कहा कि पहले ये भर्तियाँ कर्मचारी चयन मंडल करता था  जिसमें कई तरह की परेशानियाँ आती थी इसलिए आप इसके लिए बोर्ड बनाइये मैं पुलिस भर्ती बोर्ड बनाने की घोषणा करता हूँ, जिससे आप अपने हिसाब से भर्ती कर सकेंगे।  इससे पुलिस भर्ती में तेजी, पारदर्शिता और परफेक्शन आएगा। तीन वर्ष तक हर साल होगी 7500 पदों पर भर्ती  मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 के लिए पुलिस में स्वीकृत पदों की भर्ती मध्य प्रदेश पुलिस भर्ती बोर्ड की ओर से कर्मचारी चयन मंडल करेगा। वर्ष 2026 से ये भर्तियां पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा ही की जाएंगी। प्रतिवर्ष पुलिस के रिक्त 7500 पदों पर भर्ती की जाएगी और इस प्रकार आगामी 3 वर्ष में पुलिस विभाग के सभी रिक्त 22,500 पद भर दिए जाएंगे। वीवीआईपी ड्यूटी में तैनात अफसरों के लिए ये घोषणा   मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने पुलिस, जेल और नगर सेवा एवं सुरक्षा तीनों विभागों के शहीदों की विधवाओं और बच्चों के लिए स्नातक स्तर के सभी पाठ्यक्रमों में विभिन्न प्राथमिकता श्रेणियां में एक अतिरिक्त सीट पर आरक्षण दिये जाने की घोषणा भी की है। वीवीआइपी ड्यूटी में तैनात सुरक्षा कर्मचारियों सहित उप पुलिस अधीक्षक और इससे उच्च अधिकारियों को भी पात्रता अनुसार निर्धारित विशेष भत्ता एवं जोखिम भत्ता दिये जाने का निर्णण भी लिया गया है।

टीम इंडिया तैयार T20 Asia Cup 2025 के लिए, उपकप्तान और स्टैंडबाय प्लेयर्स हुए घोषित

नई दिल्ली यूएई में 9 सितंबर से टी20 एशिया कप की शुरुआत होनी है और इससे करीब 20 दिन पहले भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड यानी बीसीसीआई ने भारतीय टीम का ऐलान कर दिया है। 9 से 28 सितंबर तक दुबई और अबूधाबी में आयोजित होने वाले इस महाद्विपीय टूर्नामेंट के लिए अजीत अगरकर की अध्यक्षता वाली सिलेक्शन कमिटी ने 15 सदस्यीय टीम का चयन किया है, जिसके कप्तान सूर्यकुमार यादव हैं, जबकि उपकप्तान शुभमन गिल हैं। जो कयास शुभमन गिल की टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी को लेकर लगाए जा रहे थे, वह सच हो गए हैं। न सिर्फ उनकी वापसी हुई है, बल्कि उपकप्तान भी उनको बनाया गया है। इंग्लैंड में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज में कप्तान और बल्लेबाज के तौर पर उन्होंने दमदार प्रदर्शन किया था। इसके अलावा इस टेस्ट सीरीज से पहले आईपीएल 2025 में उन्होंने कमाल का खेल दिखाया था। चयनकर्ता संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा वाली जोड़ी पर टिके हुए हैं। दोनों टी20 विश्व कप 2024 के बाद से टीम के लिए ओपनिंग करते हुए आ रहे हैं और भारत को सफलता भी उन्होंने दिलाई है। शुभमन गिल को टीम में जगह मिली है। ऐसे में सवाल ये है कि वे किस पोजिशन पर खेलेंगे। श्रेयस अय्यर अभी भी बाहर मिडिल ऑर्डर बैटर श्रेयस अय्यर को लेकर तमाम रिपोर्ट्स आ रही थीं कि वे एशिया कप की टीम का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन सिलेक्शन कमिटी ने इस टीम का हिस्सा उनको नहीं बनाया है। मध्य क्रम में और फिनिशर के तौर पर अभी भी चयनकर्ता रिंकू सिंह के साथ गए हैं। चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात की जानकारी भी दी है कि पांच खिलाड़ी स्टैंडबाय पर हैं। इनमें पेसर प्रसिद्ध कृष्णा, ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर, बल्लेबाज रियान पराग, विकेटकीपर ध्रुव जुरेल और ओपनर यशस्वी जायसवाल का नाम शामिल है। अगर कोई खिलाड़ी चोटिल होता है तो निश्चित तौर पर इनमें से ही सबसे पहले रिप्लेसमेंट का ऐलान होगा। यूएई की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सिलेक्टर्स ने स्पिन के विकल्पों पर खासा ध्यान दिया है। स्पिन ऑलराउंडर अक्षर पटेल के अलावा कुलदीप यादव और वरुण चक्रवर्ती टीम का हिस्सा हैं। तेज गेंदबाजी की बात करें तो जसप्रीत बुमराह और अर्शदीप सिंह के अलावा हर्षित राणा को मौका दिया गया है, जबकि 15 सदस्यीय टीम में पेस ऑलराउंडर हार्दिक पांड्या भी शामिल हैं। संजू सैमसन के बैकअप विकेटकीपर के तौर पर जितेश शर्मा को टीम में जगह दी गई है। टी20 वर्ल्ड कप 2026 को ध्यान में रखते हुए टी20 फॉर्मेट में आयोजित होने वाले एशिया कप में भारत ग्रुप ए का हिस्सा है, जिसमें पाकिस्तान, यूएई और ओमान की टीम शामिल है। टीम इंडिया को अपना पहला मैच 10 सितंबर को दुबई में यूएई के खिलाफ खेलना है, जबकि इंडिया और पाकिस्तान का मुकाबला इसी मैदान पर रविवार 14 सितंबर को है। वहीं, तीसरा और आखिरी लीग मैच इंडिया का ओमान से है, जो अबू धाबी में 19 सितंबर को है। T20 एशिया कप 2025 के लिए भारत की टीम इस प्रकार है सूर्यकुमार यादव (कप्तान), शुभमन गिल (उपकप्तान), अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, हार्दिक पांड्या, शिवम दुबे, अक्षर पटेल, जितेश शर्मा (विकेटकीपर), जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती, अर्शदीप सिंह, कुलदीप यादव, संजू सैमसन (विकेटकीपर), हर्षित राणा और रिंकू सिंह