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अमेरिका की आर्थिक पकड़ पर मंडराया खतरा, रूस-चीन-भारत बना सकते हैं नया फाइनेंशियल फ्रंट

नई दिल्‍ली  अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप इस समय भारत से अपनी व्‍यक्तिगत खुन्‍नस निकाल रहे हैं. तभी तो उन्‍होंने सारे देशों को छोड़ सिर्फ भारत पर ही 50 फीसदी का टैरिफ ठोक दिया है. ट्रंप के दायरे में भारत ही नहीं, रूस और चीन भी आ गए हैं. इसका मतलब है कि अमेरिकी राष्‍ट्रपति इस समय रूस, भारत और चीन पर एकसाथ हमलावर हो गए हैं. ऐसे में हर आदमी के मन में यही सवाल उठ रहा कि क्‍या ये तीनों देश मिलकर अमेरिका की दादागिरी खत्‍म कर सकते हैं. अमेरिका को सबसे ज्‍यादा लाभ ग्‍लोबल मार्केट में डॉलर में होने वाले ट्रेड से होता है. तो क्‍या, रूस-भारत और चीन मिलकर डॉलर का मुकाबला कर सकते हैं. इस बात का जवाब अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की झुंझलाहट से ही मिल जाता है. आपको याद होगा जब ब्रिक्‍स सम्‍मेलन के दौरान ट्रंप ने डॉलर का विकल्‍प बनाने को लेकर रूस, भारत और चीन को धमकी दी थी. ट्रंप ने कहा था कि अगर ब्रिक्‍स देश मिलकर डॉलर कमजोर करने की साजिश करते हैं तो इन देशों पर 100 फीसदी टैरिफ लगा दिया जाएगा. फिलहाल भारत ने ऐसी कोई कोशिश नहीं की और उस पर ट्रंप 50 फीसदी का टैरिफ लगा चुके हैं. जाहिर है कि उनके मन में इस बात को लेकर काफी डर है कि अगर तीनों देश साथ आ गए तो डॉलर को नुकसान हो सकता है. कैसे दे सकते हैं डॉलर को टक्‍कर अमेरिकी डॉलर को टक्‍कर देने के लिए भारत ने भले ही अभी तक कोई खास कदम न उठाया हो, लेकिन रूस और चीन लंबे समय से कोशिश कर रहे हैं. चीन ने अपने ज्‍यादातर साझेदारों से स्‍थानीय मुद्रा युआन में कारोबार बढ़ाना शुरू कर दिया है. रूस ने भी यूक्रेन युद्ध के बाद डॉलर में लेनदेन को काफी हद तक कम किया है और अपनी स्‍थानीय मुद्रा में कारोबार कर रहा है. वैसे तो भारत ने भी ईरान, रूस सहित कुछ देशों के साथ रुपये में लेनदेन किया है, लेकिन अभी तक ग्‍लोबल मार्केट में कोई उल्‍लेखनीय डील स्‍थानीय करेंसी में नहीं हुई. हां, अगर तीनों ही देश मिलकर अपनी-अपनी करेंसी में कारोबार शुरू करते हैं तो डॉलर को कड़ी टक्‍कर दी जा सकती है. क्‍या हो सकती है रणनीति अमेरिका को अपनी बादशाहत कायम रखने और कारोबार बढ़ाने के लिए बड़े बाजार की जरूरत है. यह बात पूरी दुनिया को पता है कि भारत और चीन दो सबसे बड़ी जनसंख्‍या यानी उपभोक्‍ता वाले देश हैं. यही दोनों देश दुनिया की फैक्‍ट्री भी हैं. चीन तो सबसे बड़ा उत्‍पादक देश है, जबकि भारत दुनिया की दूसरी फैक्‍ट्री बनने की राह पर है. इसका मतलब है कि यह दोनों देश न सिर्फ बड़े उत्‍पादक हैं, बल्कि सबसे बड़े उपभोक्‍ता वाले देश भी हैं. अगर रूस के साथ मिलकर ये तीनों देश अपनी मुद्रा में लेनदेन और कारोबार करते हैं तो निश्चित रूप से डॉलर को बड़ी चुनौती मिल सकती है. तीनों देशों में कितना कारोबार भारत, रूस और चीन का आपस में कुल व्‍यापार भी लगातार बढ़ता जा रहा है. वित्‍तवर्ष 2023-24 में रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय कारोबार 65 अरब डॉलर से ज्‍यादा रहा था, जबकि भारत और चीन का कारोबार 130 अरब डॉलर से अधिक रहा है. इसी तरह, रूस और चीन का कारोबार भी 200 अरब डॉलर से ज्‍यादा ही रहा. इस तरह, अगर तीनों देशों के बीच कुल कारोबार को देखा जाए तो यह करीब 390 अरब डॉलर के आसपास रहा है. इसके 400 अरब डॉलर से भी ज्‍यादा पहुंचने का अनुमान है. भारत-रूस और चीन का कितना ग्‍लोबल कारोबार भारत का कारोबार : पिछले वित्‍तवर्ष 2024-25 में भारत का कुल अंतरराष्‍ट्रीय व्‍यापार करीब 1,830 अरब डॉलर (1.83 ट्रिलियन डॉलर के आसपास) रहा है. इसमें प्रोडक्‍ट का कारोबार करीब 1,300 अरब डॉलर और सेवाओं का आयात-निर्यात 500 अरब डालर से ज्‍यादा रहा है. चीन का कुल कारोबार : चीन ने पिछले वित्‍तवर्ष 3.59 ट्रिलियन डॉलर का सामान दुनियाभर में निर्यात किया और 2.56 ट्रिलियन डॉलर का सामान मंगाया. इस तरह, सामान का कुल कारोबार 6.15 ट्रिलियन डॉलर रहा, जबकि सेवाओं का कारोबार मिला दें तो यह आंकड़ा 7.56 ट्रिलियन डॉलर पहुंच जाता है. रूस का कितना कारोबार : पिछले वित्‍तवर्ष में रूस ने दुनियाभर को 424 अरब डॉलर का सामान बेचा और दुनिया से 304 अरब डॉलर का सामान खरीदा. यानी कुल कारोबार रहा 728 अरब डॉलर का. इसमें सेवाओं का कारोबार जोड़ दिया जाए तो यह 117 अरब डॉलर और बढ़कर करीब 865 अरब डॉलर पहुंच जाएगा. तीनों का कितना कारोबार : इस तरह रूस, चीन और भारत का कुल अंतरराष्‍ट्रीय कारोबार करीब 10 ट्रिलियन डॉलर से भी ज्‍यादा का रहा है. अमेरिका का कितना ग्‍लोबल कारोबार साल 2024 में अमेरिका का कुल कारोबार करीब 7 ट्रिलियन डॉलर का रहा है. इसमें प्रोडक्‍ट के निर्यात का हिस्‍सा 2 ट्रिलियन डॉलर और आयात का हिस्‍सा 3.37 ट्रिलियन डॉलर रहा. इसका मतलब है माल का कुल कारोबार 5.43 ट्रिलियन डॉलर रहा, जबक‍ि सर्विस का निर्यात 928 अरब डॉलर और आयात 700 अरब डॉलर रहा. सर्विस का कुल कारोबार 1.63 ट्रिलियन डॉलर रहा है और कुल कारोबार 7 ट्रिलियन डॉलर के आसपास पहुंच गया है. आंकड़ों में कौन आगे अगर तीनों ही देश अकेले-अकेले अमेरिका का मुकाबला करेंगे तो यह मुश्किल होगा, क्‍योंकि उसका कुल कारोबार चीन से भी ज्‍यादा है. लेकिन, अगर चीन-भारत और रूस मिलकर अमेरिका के सामने खड़े होते हैं तो यह आंकड़ा अमेरिका के कुल कारोबार से कहीं ज्‍यादा बैठता है. आंकड़े साफ बताते हैं कि अगर तीनों ही देश मिलकर अमेरिकी डॉलर के सामने खड़े होते हैं तो निश्चित रूप से इसका मुकाबला ग्‍लोबल मार्केट में कर सकते हैं.

श्रद्धालुओं को बड़ी राहत! अमृतसर से कटड़ा के बीच चलेगी नई वंदे भारत ट्रेन

उधमपुर देश की सबसे तेज और सुविधाजनक रेल सेवाओं में शुमार वंदे भारत एक्सप्रेस अब एक और नए रूट पर दौड़ने जा रही है। श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा स्टेशन से अमृतसर स्टेशन के बीच नई वंदे भारत ट्रेन 11 अगस्त से नियमित रूप से दौड़ना शुरू होगा। 10 अगस्त को प्रधानमंत्री तीन वंदेभारत का उद्घाटन विडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से करेंगे। इनमें कटड़ा-अमृतसर वंदेभारत, बेंगलुरु–बेलगावी वंदे भारत, अजनी(नागपुर)-पुणे वंदे भारत शामिल हैं। इस दौरान कटड़ा जम्मू और पठानकोट स्टेशन पर भव्य स्वागत कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। जानकारी के कटड़ा अमृतसर के बीच शुरू होने वाली वंदे भारत ट्रेन सप्ताह में छह दिन चलेगी (मंगलवार को छोड़ कर) और इसका प्राइमरी मेंटेनेंस साहिबाबाद में होगा। ट्रेन के उद्घाटन की अधिसूचना रेलवे बोर्ड ने 5 अगस्त 2025 को जारी की है। जिसमें स्पष्ट किया गया है कि उद्घाटन रन एक विशेष सेवा के रूप में होगा, जिसके बाद ट्रेन नियमित संचालन में आ जाएगी।   ट्रेन के नियमित रूप से चलने का समय उद्घाटन रन से अलग है। जानकारी के मुताबिक मुताबिक कटड़ा से अमृतसर के बीच चलने वाली आठ कोच वाली वंदे भारत ट्रेन(02406) को प्रधानमत्री वर्चुअल माध्यम से सुबह 10:50 बजे कटडा स्टेशन से हरी झंडी दिखा कर रवाना करेंगे। इसके लिए कटड़ा स्टेशन पर प्रस्तावित मुख्य उद्घाटन समारोह में जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, उप राज्यपाल मनोज सिन्हा, रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह, श्री माता वैष्णो देवी कटड़ा के विधायक बलदेव सिंह, रियासी के विधायक कुलदीप राज दूबे, एसएसपी जीआरपी संजय कोतवाल और एसएसपी रियासी के शामिल होने की संभावना है। कटड़ा से रवाना होने के बाद ट्रेन दोपहर 12:15 बजे जम्मू तवी स्टेशन पहुंचेगी। जहां पर एक छोटा समारोह आयोजित कर 12:20 बजे इसे आगे रवाना किया जाएगा। जम्मू तवी स्टेशन पर होने वाले कार्यक्रम में जम्मू-पुंछ सांसद जुगल किशोर शर्मा, राज्यसभा सांसद गुलाम अली खटाना, विधायक विक्रम सिंह रंधावा, जम्मू पश्चिम विधायक अरविंद गुप्ता, पूर्वी जम्मू विधायक युद्धवीर सिंह सेठी, एसएसपी जम्मू जोगिंदर सिंह और एसएसपी जीआरपी जम्मू शैलेंद्र सिंह की उपस्थिति प्रस्तावित है। जहां से ट्रेन 13:50 बजे पठानकोट कैंट स्टेशन पहुंचेगी, वहां भी स्वागत समारोह के बाद इसे 13:55 बजे रवाना किया जाएगा। पठानकोट कैंट स्टेशन पर आयोजित स्वागत समारोह में गुरदासपुर के सांसद सुखविंदर सिंह रंधावा, पठानकोट विधायक अश्विनी शर्मा, पठानकोट नगर निगम के मेयर पन्ना लाल भाटिया, पूर्व विधायक दिनेश सिंह बब्बू, भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेश शर्मा, डीसी आदित्य उप्पल और एसएसपी डीएस ढिल्लों के उपस्थित रहने की संभावना है। 11 तारीख से चलने वाली वंदेभारत ट्रेन की दोनों दिशाओं की नियमित समय-सारिणी 26406 (कटड़ा से अमृतसर) स्टेशन आगमन प्रस्थान कटड़ा — 06:40 जम्मू तवी: 08:05 08:07 पठानकोट कैंट: 09:30 09:32 जालंधर सिटी: 11:03 11:05 व्यास: 11:28 11:30 अमृतसर: 12:20 — 26405 (अमृतसर से कटड़ा) स्टेशन आगमन प्रस्थान अमृतसर — 16:25 व्यास: 17:03 17:05 जालंधर सिटी: 17:33 17:35 पठानकोट कैंट: 19:03 19:05 जम्मू तवी: 20:28 20:30 कटड़ा: 22:00 — उधमपुर को स्टॉपेज नहीं मिलने से निराशा कटड़ा से अमृतसर की ओर चलने वाली इस नई वंदे भारत एक्सप्रेस में उधमपुर जैसे सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्टेशन को स्टापेज नहीं दिया गया है। जिससे उधमपुर के लोगों को इस नई ट्रेन का कोई फायदा नहीं मिलेगा उधमपुर रेलवे स्टेशन सेना की उत्तरी कमान, बीएसएफ, आईटीबीपी, शेर-ए-कश्मीर पुलिस अकादमी जैसे अहम सुरक्षा प्रतिष्ठान के अलावा जम्मू-कश्मीर के प्रवेशद्वार जैसा महत्व रखता है। यहां से बड़ी संख्या में व्यापारी अमृतसर और जालंधर की ओर नियमित यात्रा करते हैं, वहीं विद्यार्थियों और व्यास धाम के श्रद्धालुओं के लिए भी यह रूट बेहद महत्त्वपूर्ण है। रेलवे द्वारा जारी समयसारिणी में अगर उधमपुर को दो से पांच मिनट का स्टॉपेज दिया जाता, तो ट्रेन के कुल सफर में मुश्किल से उतनी ही देरी होती, लेकिन इसके बदले हजारों यात्रियों को सुविधा मिल सकती थी। ऐसे में अब उम्मीद जताई जा रही है कि भविष्य में रेलवे मंत्रालय इस चूक को सुधारते हुए उधमपुर स्टेशन को भी इस सेवा से जोड़ेगा।

तमोट में विस्तार लेगा औद्योगिक क्षेत्र, निवेश की दिशा में आगे बढ़ेगा प्रदेश: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव औद्योगिक विकास को धरातल पर उतारने के अपने सतत प्रयासों के क्रम में आज रायसेन जिले के तामोट औद्योगिक क्षेत्र में निवेश संवाद, इकाइयों के भूमिपूजन, लोकार्पण और आशय पत्र वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री का यह दौरा उद्योगों को लेकर उनकी प्रतिबद्धता और कार्य संस्कृति का प्रतिबिंब है, जिसमें नीति के साथ क्रियान्वयन को भी बराबरी का महत्व दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव तामोट में संचालित सागर मैन्युफैक्चरर प्रा. लि. की इकाई का भ्रमण करेंगे और रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित सामाजिक कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे। साथ ही मुख्यमंत्री डॉ. यादव मेसर्स आनंद टैक लास्ट प्राइवेट लिमिटेड प्लास्टिक पार्क का भ्रमण भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्योगपतियों से संवाद करेंगे और प्रदेश में बन रहे निवेश अनुकूल वातावरण से उन्हें अवगत कराएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव औद्योगिक क्षेत्र तामोट में 566 करोड़ रुपए के निवेश एवं 1781 रोजगार देने वाली 14 इकाइयों का भूमिपूजन एवं लोकार्पण के साथ आशय पत्र वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव 416 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण भी करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव औद्योगिक क्षेत्र तामोट में 300 करोड़ निवेश एवं 970 रोजगार देने वाली 6 इकाइयों का भूमिपूजन और 116 करोड़ रुपए से अधिक निवेश एवं 211 रोजगार देने वाली 6 इकाइयों का लोकार्पण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव उद्यमियों को भूमि आवंटन से संबंधित आशय-पत्र प्रदान करेंगे और औद्योगिक विकास के प्रति प्रदेश सरकार की प्राथमिकताओं को साझा करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव का यह प्रयास निवेशकों को आश्वस्त करने के साथ-साथ युवाओं के लिए नए रोजगार अवसरों का रास्ता भी खोलेगा। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन तथा एमएसएमई प्रमुख सचिव श्री राघवेंद्र सिंह प्रदेश की औद्योगिक रणनीति और नीतिगत परिवर्तनों की जानकारी साझा करेंगे। जे.बी.एम, विनप्रो और मंडीदीप औद्योगिक एसोसिएशन जैसे प्रमुख निवेशक समूहों के प्रतिनिधि मध्यप्रदेश में निवेश अनुकूल माहौल और प्रदेश की निवेश फ्रेंडली नीतियों के संबंध में विचार साझा करेंगे। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्यमंत्री श्री नरेन्द्र शिवाजी पटेल, भोजपुर विधायक श्री सुरेंद्र पटवा और विधायक श्री नारायण सिंह पंवार भी कार्यक्रम में सहभागिता करेंगे। 

भोपाल बनेगा देश का टैक सेंटर, सीएम डॉ. यादव ने बताया युवाओं के लिए नया विज़न

भोपाल बन रहा देश का टैक हब, युवाओं के कॅरियर को मिलेगी नई उड़ान : मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल उभर रहा टेक्नोलॉजी हब के रूप में, युवाओं को मिलेंगे नए अवसर : सीएम डॉ. यादव टैक्नोलॉजी के नए नक्शे पर भोपाल, सीएम बोले– युवाओं का भविष्य होगा उज्जवल भोपाल बनेगा देश का टैक सेंटर, सीएम डॉ. यादव ने बताया युवाओं के लिए नया विज़न भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब नवाचार का केंद्र बनकर भारत के डिजिटल भविष्य को आकार देने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। यहां ड्रोन, एवीजीसी-एक्सआर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन डाटा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों के अग्रणी केंद्र और उद्योग साझेदारियां आकार ले रही हैं। भोपाल जल्द ही ड्रोन टेक्नोलॉजी का भी हब बनेगा। एनीमेशन ग्राफ़िक्स जैसे नए सेक्टर्स भी प्रदेश के युवाओं के कॅरियर को नई उड़ान देने तैयार हैं। भोपाल में सेमी-कंडक्टर और डाटा-सेंटर जैसे ग्लोबल टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स भी विकसित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव की विकासमूलक रणनीतिक सोच से भोपाल का हाई-टैक इंडस्ट्रीज के लिए एक मनपसंद गंतव्य के रूप में उभरना कोई संयोग नहीं है, बल्कि, योजनाबद्ध इंफ्रास्ट्रक्चर एवं ईको सिस्टम का विकास और भविष्योन्मुखी नीतियों के निर्माण का परिणाम है। देशी-विदेशी कंपनियां मध्यप्रदेश में उद्यमिता को चुन रही हैं। उन्हें प्रदेश में ईज-ऑफ-डूइंग बिजनेस और नीतिगत प्रक्रिया सहयोग भी मिल रहा है। सेमी-कंडक्टर और ड्रोन जैसे डीप-टैक उपक्रमों से लेकर एवीजीसी और डाटा सेंटर्स तक के लिये मध्यप्रदेश भारत के डिजिटल भविष्य का लॉन्चपैड बनता जा रहा है। एवीजीसी-एक्सआर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: ग्लोबल स्किल्स पार्क में नया क्रिएटिव हब ग्लोबल स्किल्स पार्क, भोपाल में स्थापित हो रहा एवीजीसी-एक्सआर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस युवाओं को गेमिंग, एनीमेशन और वीएफएक्स के क्षेत्र में प्रशिक्षण और स्टार्ट-अप्स के लिए मंच देगा। इसमें एलईडी वर्चुअल प्रोडक्शन स्टूडियो, एआई लैब्स, मोशन कैप्चर सिस्टम और रेंडर फार्म्स जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी। यह केंद्र देश के मेट्रो शहरों पर निर्भरता को कम करते हुए एक नया डिजिटल वर्कफोर्स तैयार करेगा। आइसर का ड्रोन ट्रेनिंग और शोध केन्द्र बनेगा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आईसर भोपाल में बन रहा ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस एआई-एनेबल्ड ड्रोन निर्माण, स्वदेशी प्रोटोटाइपिंग और एआर/वीआर आधारित प्रशिक्षण के अनूठे मंच के रूप में विकसित हो रहा है। यहां देश की पहली एआई-यूएवी डाटा रिपॉजिटरी भी स्थापित होगी, जो कृषि, आपदा प्रबंधन और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों के लिए नवाचारों को प्रेरित करेगी। सेमीकंडक्टर निर्माण की कायनेस सेमिकॉन की इकाई भोपाल में भारत के सेमीकंडक्टर मिशन का अहम भागीदार कायनेस सेमिकॉन अब भोपाल के आईटी पार्क में अपनी इकाई स्थापित कर रहा है। इससे चिप डिज़ाइन, असेंबली और अनुसंधान को एक नई दिशा मिलेगी। यह कदम प्रदेश की डीप-टैक नीति को सशक्त करेगा। भोपाल में बनेगा मध्यप्रदेश का पहला निजी ग्रीन डाटा सेंटर एशिया का सबसे बड़ा रेटेड-4 हाइपरस्केल डाटा सेंटर ऑपरेटर, भोपाल के आईटी पार्क में ग्रीन डाटा सेंटर स्थापित कर रहा है। इमर्सिव कूलिंग जैसी तकनीकों से युक्त यह डाटा सेंटर जीरो-एमिशन लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। यह क्लाउड और एआई कम्प्यूटिंग के क्षेत्र में प्रदेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। ईएमसी 2.0: 209 एकड़ में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर भोपाल के बांदाखेड़ी में 209 एकड़ में फैला ईएमसी2.0 क्लस्टर मोबाइल, सेमीकंडक्टर, पीसीबी, एलईडी और ई-मोबिलिटी उद्योगों के लिए तैयार किया जा रहा है। इसमें रेडी-बिल्ट फैक्ट्री, टेस्टिंग लैब्स और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट जैसी सुविधाएं होंगी। इसमें 1500 करोड़ रूपये का निवेश होगा और इससे 75 हजार रोजगार सृजित होंगे। सिक्योर सर्किट: पीसीबी मैन्युफैक्चरिंग से आत्मनिर्भरता की ओर भोपाल में स्थापित हो रही प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) निर्माण इकाई राज्य के सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम को मजबूती प्रदान करेगी। यह रक्षा, ऑटोमोबाइल और औद्योगिक ऑटोमेशन जैसे क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम होगा। राज्य सरकार उद्योगों को न केवल कम समय में मंजूरी और समाधान उपलब्ध करा रही है,बल्कि निवेशकों में दीर्घकालिक साझेदारी का भरोसा भी जगाने में सफल हो रही है। भोपाल की यह यात्रा केवल तकनीकी विकास की नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की नई कहानी लिखने का प्रारंभ है। प्रदेश अब नवाचार, ज्ञान और डिजिटल कौशल के केंद्र के रूप में नया उदाहरण बनकर उभर रहा है।

धरती के नीचे दबा है लाखों टन सोना: जबलपुर के सिहोरा में मिला विशाल सोना भंडार

जबलपुर अपनी सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपदा के लिए मशहूर मध्य प्रदेश का जबलपुर काफी सुर्खियों में है। जबलपुर की सिहोरा तहसील के महंगवा केवलारी क्षेत्र में भू-वैज्ञानिकों ने एक विशाल सोने के भंडार की खोज की है। यह खोज भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) की टीम द्वारा कई वर्षों की मेहनत और मिट्टी के नमूनों के रासायनिक विश्लेषण के बाद सामने आई है। लगभग 100 हेक्टेयर में फैले इस क्षेत्र में लाखों टन सोना होने का अनुमान है, जो मध्य भारत की सबसे बड़ी खनिज खोजों में से एक हो सकती है। वैज्ञानिकों की मेहनत रंग लाई भू-वैज्ञानिकों की टीम ने महंगवा केवलारी में मिट्टी और चट्टानों के सैंपल की स्टडी की। रासायनिक परीक्षणों में न केवल सोने की मौजूदगी की पुष्टि हुई, बल्कि तांबा और अन्य कीमती धातुओं के अंश भी मिले। एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह क्षेत्र पहले से ही लौह अयस्क, मैंगनीज, बॉक्साइट और संगमरमर जैसे खनिजों के लिए प्रसिद्ध रहा है, लेकिन सोने की खोज ने इसकी महत्ता को और बढ़ा दिया है। वैज्ञानिकों के चेहरों पर इस खोज ने नई चमक ला दी है और वे इसे मध्य प्रदेश के आर्थिक भविष्य के लिए गेम-चेंजर मान रहे हैं। जबलपुर बना खनिज संपदा का नया केंद्र जबलपुर पहले से ही 42 खदानों के साथ खनन गतिविधियों का केंद्र रहा है, जहां से लौह अयस्क चीन सहित कई देशों में निर्यात किया जाता है। अब सोने के भंडार की खोज ने इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर और आकर्षक बना दिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर यह भंडार आर्थिक रूप से व्यवहार्य साबित होता है, तो जल्द ही व्यावसायिक खनन शुरू हो सकता है। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई ऊंचाइयां मिल सकती हैं। क्या बदलेगी मध्य प्रदेश की किस्मत? यह खोज न केवल जबलपुर, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए एक ऐतिहासिक पल हो सकता है। पहले पन्ना की हीरे की खदानों ने मध्य प्रदेश को वैश्विक मानचित्र पर जगह दिलाई थी और अब जबलपुर का सोना इसे और चमका सकता है। हालांकि, अगला कदम इस भंडार की मात्रा और खनन की संभावनाओं का विस्तृत अध्ययन करना होगा। अगर सब कुछ योजना के अनुसार हुआ, तो यह खोज मध्य प्रदेश को खनिज संपदा के मामले में देश का एक नया सितारा बना सकती है।

चीन में पीएम मोदी की एंट्री के मायने, 7 साल बाद होगा ऐतिहासिक SCO शिखर संवाद

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त को चीन के तियानजिन में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने जाएंगे। यह सात साल में उनकी पहली चीन यात्रा होगी। इस यात्रा को भारत-चीन संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है, खासकर 2020 में लद्दाख में दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव खत्म होने के बाद। सूत्रों के मुताबिक, मोदी इस यात्रा के साथ जापान भी जाएंगे, जहां वे जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ वार्षिक द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। मोदी ने आखिरी बार 2018 में चीन का दौरा किया था, जब वे वुहान में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अनौपचारिक बैठक और किंगदाओ में एससीओ शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे। 2020 में लद्दाख के गलवान घाटी में हिंसक झड़पों के बाद दोनों देशों के रिश्ते बहुत खराब हो गए थे। हाल ही में 21 अक्टूबर 2024 को दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव खत्म करने पर सहमति बनी, जिसके बाद रूस के कजान में मोदी और शी की मुलाकात हुई। इस दौरान दोनों नेताओं ने रिश्तों को सामान्य करने और सीमा विवाद पर बातचीत के लिए कई तंत्रों को फिर से शुरू करने पर सहमति जताई। द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना पीएम मोदी की इस यात्रा में शी जिनपिंग के साथ उनकी द्विपक्षीय मुलाकात की संभावना है। इस मुलाकात में सीमा पर तनाव कम करने, डायरेक्ट उड़ानों की बहाली, बॉर्डर व्यापार शुरू करने और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। हाल के महीनों में दोनों देशों के विदेश और रक्षा मंत्रियों के बीच कई बैठकें हुई हैं। इसके अलावा, कैलाश मानसरोवर यात्रा और चीनी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा जैसे कुछ भरोसा बढ़ाने वाले कदम भी उठाए गए हैं। चीन की कुछ गतिविधियों पर चिंता हालांकि, भारत को अभी भी चीन की कुछ गतिविधियों पर चिंता है, जैसे ब्रह्मपुत्र नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रोपावर बांध बनाने की शुरुआत और भारत-पाकिस्तान तनाव के दौरान पाकिस्तान को चीन का समर्थन। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जुलाई में बीजिंग में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात में इन मुद्दों को उठाया था। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों को रिश्तों को बेहतर करने के लिए सीमा पर तनाव कम करने और व्यापार में रुकावटों को दूर करने की जरूरत है। इससे भारत के लिए क्या बदलेगा, क्या बढ़ेगा ट्रंप पर दबाव? उनकी यह यात्रा वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए जापान की यात्रा के साथ होगी. यदि यह यात्रा होती है तो यह 2018 के बाद और पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध के बाद पीएम मोदी की पहली चीन यात्रा होगी. हालांकि प्रधानमंत्री मोदी ने अक्टूबर 2024 में कजान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की थी. अक्टूबर 2019 के बाद से उनकी पहली सुनियोजित बैठक भी भारत और चीन द्वारा अपनी विवादित सीमा पर गश्त करने के समझौते पर पहुंचने के कुछ ही दिनों बाद हुई थी. शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन 10 देशों का यूरेशियन सुरक्षा और राजनीतिक समूह है. चीन, रूस, भारत, ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, उज्बेकिस्तान और बेलारूस इसके सदस्य हैं. अक्टूबर 2024 में कजान में मिले थे मोदी- जिनपिंग अक्टूबर 2024 की बैठक के दौरान पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति से कहा था कि सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना उनकी प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए. बैठक में उन्होंने कहा, “यह पांच वर्षों के बाद हमारी पहली औपचारिक बैठक है. हम सीमा पर हुए समझौतों का स्वागत करते हैं. सीमा पर शांति और सौहार्द बनाए रखना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए. आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता हमारे संबंधों का आधार बने रहने चाहिए. मुझे विश्वास है कि हम खुले दिल से बातचीत करेंगे और हमारी चर्चाएं रचनात्मक होंगी.” इस बीच शी जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन के लिए अधिक संवाद और सहयोग करना मतभेदों और असहमतियों को उचित ढंग से संभालना महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लिए यह भी महत्वपूर्ण है कि वे अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी निभाएं तथा विकासशील देशों की ताकत और एकता को बढ़ावा देने के लिए एक उदाहरण स्थापित करें. जून में बनी थी वार्ता के लिए सहमति इस वर्ष जून माह के प्रारंभ में,भारत और चीन ने ट्रेड और इकनॉमिक्स के क्षेत्र में चिंता के विशिष्ट मुद्दों को हल करने के लिए वार्ता करने पर सहमति व्यक्त की थी. क्योंकि वे वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के लद्दाख क्षेत्र में सैन्य गतिरोध की समाप्ति के बाद द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और पुनर्निर्माण करने के लिए काम कर रहे थे. यह निर्णय विदेश सचिव विक्रम मिस्री और चीनी उप विदेश मंत्री सुन वेइदोंग के बीच नई दिल्ली में हुई बैठक के बाद लिया गया. दोनों पक्षों ने सीधी हवाई सेवाओं को फिर से शुरू करने के प्रयासों में तेजी लाने पर सहमति व्यक्त की, जो 2020 से निलंबित हैं. इस वर्ष कैसे रहे भारत-चीन संबंध जून में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक की संयुक्त विज्ञप्ति पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया था. क्योंकि इसमें आतंकवाद से संबंधित चिंताओं का उल्लेख नहीं किया गया था. एचटी की रिपोर्ट के अनुसार राजनाथ सिंह ने चीन के किंगदाओ में बैठक में भाग लिया, लेकिन उन्होंने संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर नहीं किए. क्योंकि इसमें 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का उल्लेख नहीं था. लेकिन बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी द्वारा पाकिस्तान में जाफर एक्सप्रेस अपहरण का उल्लेख था. ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत के साथ चार दिनों तक चले संघर्ष के दौरान चीन ने पाकिस्तान का पुरजोर समर्थन किया था. चीन ने काफी दिनों बाद पहलगाम हमले की निंदा की हालांकि जब अमेरिका ने पहलगाम हमले की जिम्मेदारी लेने वाले लश्कर-ए-तैयबा के प्रतिनिधि संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को विदेशी आतंकवादी संगठन (एफटीओ) घोषित किया तो चीन ने 22 अप्रैल के हमले की निंदा की. चीन ने आतंकवाद से निपटने तथा स्थिरता बनाए रखने के लिए मजबूत क्षेत्रीय सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया. चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा, “चीन सभी प्रकार के आतंकवाद का दृढ़ता से विरोध करता है और 22 अप्रैल को हुए आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा करता है. चीन क्षेत्रीय देशों से आतंकवाद-रोधी सहयोग बढ़ाने … Read more

₹1.80 लाख की सब्सिडी का मौका! PM Awas Yojana 2.0 में जानें कैसे उठाएं फायदा

भोपाल  प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत अब एलआईजी (Low Income Group) और एमआईजी (Middle Income Group) वर्ग के लिए खुशखबरी है। सरकार ने अब इस योजना के दूसरे चरण में मकान ऋण पर 1.80 लाख रुपये तक की छूट देने की घोषणा की है। यह छूट सीधे बैंक के माध्यम से ब्याज अनुदान के रूप में प्रदान की जाएगी। यदि आप घर खरीदने या बनवाने की योजना बना रहे हैं, तो यह आपके लिए सुनहरा मौका है। प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 (PMAY) प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 के अंतर्गत अब एलआईजी और एमआईजी वर्ग के पात्र हितग्राहियों को 1.80 लाख रुपये तक का ब्याज अनुदान मिलेगा। यह योजना उन लाभार्थियों पर भी लागू होगी जिनका होम लोन 1 सितंबर 2024 के बाद स्वीकृत या वितरित हुआ है। महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू और नगर निगम आयुक्त प्रीति यादव ने जबलपुर के नागरिकों से इस योजना का भरपूर लाभ उठाने की अपील की है। अधिक से अधिक पात्र लोगों तक योजना की जानकारी पहुँचाने के लिए शिविर आयोजित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। योजना के नोडल अधिकारी सुनील दुबे के अनुसार, EWS (Economically Weaker Section), LIG और MIG श्रेणी के पात्र लाभार्थी इस योजना के अंतर्गत नया मकान खरीदने, मकान का निर्माण कराने या फ्लैट लेने के लिए होम लोन पर सब्सिडी का लाभ ले सकते हैं। ब्याज सब्सिडी सीधे बैंक खाते में दी जाएगी, जिससे मकान की EMI में बड़ी राहत मिल सकती है। यह योजना खासकर उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो पहली बार घर खरीदना चाहते हैं। योजना का लाभ कैसे उठाएं? 1. PMAY 2.0 के अंतर्गत आवेदन करने के लिए सरकारी पोर्टल या बैंक से संपर्क करें। 2. आवेदक की वार्षिक आय और योजना की पात्रता की शर्तें ध्यानपूर्वक जांचें। 3. योजना के लिए होम लोन 1 सितंबर 2024 के बाद स्वीकृत/वितरित होना चाहिए। 4. आवेदन के बाद पात्रता की जांच के उपरांत ब्याज अनुदान सीधे बैंक खाते में आएगा।

इंतजार खत्म! फ्रीगंज ओवरब्रिज का काम शुरू, तय समय से पहले पूरा करने का लक्ष्य

उज्जैन  उज्जैन में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार बहुप्रतिक्षित फ्रीगंज ओवरब्रिज का निर्माण धरातल पर शुरू हो गया। निर्माण सिंहस्थ-28 से पहले पूरा करने का लक्ष्य है। प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद नए और पुराने शहर को जोड़ने के लिए 21.40 मीटर चौड़ा ब्रिज उपलब्ध हो जाएगा। उज्जैन के वर्तमान फ्रीगंज ओवरब्रिज के नजदीक 21.40 मीटर चौड़ा नया ब्रिज बनाया जाना है। इसके लिए पूर्व में टेंडर जारी कर निर्माण का ठेका दिया था लेकिन कंपनी ने काम नहीं किया था। दूसरी बार टेंडर जारी कर गुजरात की चेतन कंस्ट्रक्शन को ठेका दिया गया है। निर्माण से पूर्व कंपनी ने अपना कार्यालय और प्लांट स्थापित करने के साथ बोरिंग जैसी प्राथमिक तैयारी तो कर ली थी लेकिन मौके पर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया।  कंपनी ने अब मौके पर निर्माण शुरू कर दिया है। ब्रिज निर्माण की शुरुआत रिटेनिंग वॉल बनाने से की जा रही है। सिंहस्थ से पहले बदलेगा उज्जैन! 2 एलिवेटेड ब्रिज मंजूर, 23,000 करोड़ से होंंगे कई प्रोजेक्ट्स प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य उज्जैन को बेहतर यातायात व्यवस्था से जोड़ना और आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को ट्रैफिक जाम से राहत देना है. मुख्यमंत्री ने कहा, “सिंहस्थ 2028 तक उज्जैन न केवल आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित होगा, बल्कि ट्रैफिक, सड़कें, सुरक्षा और जनसुविधाओं के लिहाज़ से एक आदर्श मॉडल भी बनेगा. हमारा लक्ष्य है कि यहां आने वाला हर श्रद्धालु सुविधाजनक यात्रा अनुभव ले जाए.” सीएम ने निर्देश दिए हैं कि उज्जैन के सभी धार्मिक स्थलों को ‘देवलोक’ की थीम पर विकसित किया जाए, जिससे श्रद्धालुओं को आस्था के साथ अत्याधुनिक सुविधाएं भी मिलें. उज्जैन कलेक्टर  ने जानकारी दी कि ये दोनों कॉरिडोर उज्जैन की यातायात व्यवस्था को नया रूप देंगे. उन्होंने कहा, “इस बार सिंहस्थ सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर की प्रस्तुति भी होगा.” पहला एलिवेटेड कॉरिडोर मकोडिया आम चौराहा से शुरू होकर देवासगेट, रेलवे स्टेशन होते हुए हरिफाटक ब्रिज तक जाएगा. दूसरा निकास चौराहा से दौलतगंज होते हुए इंदौर गेट तक बनेगा. ये दोनों मार्ग शहर के सबसे व्यस्त रूट माने जाते हैं, जहां रोजाना ट्रैफिक की भारी भीड़ होती है.इन ब्रिजों को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि भविष्य में मेट्रो रेल संचालन भी संभव हो सके. कॉरिडोर के नीचे व्यापारिक गतिविधियां बिना किसी रुकावट के जारी रहेंगी. निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के जिम्मे होगा और जल्द ही फिजिकल सर्वे के बाद टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी. सिंहस्थ उज्जैन में सड़कें, ब्रिज, धार्मिक स्थल और यात्री सुविधाएं बेहतर हो रहीं  सिंहस्थ उज्जैन में हर 12 साल में होने वाला एक बड़ा धार्मिक मेला है, जिसमें लाखों श्रद्धालु देशभर से आते हैं. यह सिर्फ पूजा-पाठ का आयोजन नहीं, बल्कि उज्जैन की पहचान और आस्था का प्रतीक भी है. भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन को सिंहस्थ 2028 के लिए पूरी तरह से नया रूप दिया जा रहा है. शहर में सड़कें, ब्रिज, धार्मिक स्थल और यात्री सुविधाएं बेहतर की जा रही हैं. दो नए एलिवेटेड कॉरिडोर भी बनाए जाएंगे. इस बार सिंहस्थ उज्जैन को एक आधुनिक और धार्मिक नगरी के रूप में दुनिया के सामने पेश करेगा. सिंहस्थ 2028 के लिए 23,332 करोड़ की विकास योजनाएं अब तक सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए ₹23,332 करोड़ की लागत से 153 परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है. इनमें उज्जैन-मक्सी रोड, सिंहस्थ बायपास, इंदौर-उज्जैन वैकल्पिक मार्ग, और इंगोरिया-उन्हेल रोड जैसी प्रमुख सड़कें शामिल हैं. सिंहस्थ उज्जैन 2028 को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए तैयारियां ज़ोरों पर हैं. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अगुवाई में अब तक 23,000 करोड़ रुपये से अधिक की 150+ परियोजनाएं स्वीकृत की जा चुकी हैं. इनमें 2 एलिवेटेड कॉरिडोर, सड़क विस्तार, नए बायपास, धार्मिक स्थलों का सौंदर्यीकरण और यात्री सुविधाओं का विस्तार शामिल है. उज्जैन को आधुनिक और अध्यात्मिक नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है. ट्रैफिक जाम से राहत और भविष्य की मेट्रो योजना को ध्यान में रखते हुए इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार हो रहा है, ताकि श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो. प्रमुख प्रगति कार्यों की स्थिति-     सिलर खेड़ी सीवर खेती परियोजना का कार्य 20% पूर्ण हो चुका है और तेज गति से जारी है.     खान डायवर्सन योजना की प्रगति 15% के आसपास है और कार्य तेज़ी से चल रहा है.     इंदौर-उज्जैन सिक्स लेन सड़क परियोजना, जो एमपीआरडीसी द्वारा संचालित है, उसमें भी 15% कार्य पूर्ण हो चुका है.     इंदौर-उज्जैन ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना डीपीआर स्तर पर है, जिसकी निविदा शीघ्र जारी की जाएगी. नए विकास कार्यों को मिली रफ्तार: फ्रीगंज ब्रिज का कार्य उल्लेखनीय प्रगति पर है. एजेंसी ऑन बोर्ड हो चुकी है और स्थल पर कार्य जल्द दिखाई देगा.  वहीं, हरि फाटक चौड़ीकरण परियोजना की डीपीआर बन चुकी है, और इसमें कितने भू-अर्जन की आवश्यकता होगी, इसका आकलन किया जा रहा है.  इस योजना की निविदा भी आगामी एक सप्ताह में जारी की जाएगी. सिंहस्थ सिटी योजना पर सक्रियता सिंहस्थ सिटी के प्रस्ताव का प्रकाशन हो चुका है, और इसमें दावा-आपत्ति की अवधि 25 मई तक तय की गई है. किसानों को लेआउट दिखाए जा रहे हैं, ताकि कोई भ्रम या शंका न रहे. प्रशासन की टीमें – जिसमें पटवारी, नगर निगम कर्मी और युडीए के अधिकारी शामिल हैं- घर-घर जाकर किसानों को जानकारी दे रही हैं और उनके डाउट्स को मौके पर क्लियर कर रही हैं. कलेक्टर ने बताया कि हर भू-स्वामी के सामने से 18 मीटर चौड़ी सड़क प्रस्तावित है. इसके अंतर्गत सरकार किसानों की 50% भूमि अधिग्रहित करेगी, जिसमें सड़क, पार्क, सीवरेज और अन्य विकास कार्य शामिल होंगे. एलिवेटेड कॉरिडोर पर काम मुख्यमंत्री द्वारा प्रस्तावित दो एलिवेटेड कॉरिडोर- मकोडिया आम से इंदौर गेट और निकास चौराहे से इंदौर गेट तक की डीपीआर निर्माणाधीन है और उनकी निविदा भी शीघ्र जारी की जाएगी. जलप्रदाय योजना में सुधार की दिशा में कदम हरिया खेड़ी जलप्रदाय योजना की निविदा प्रक्रिया प्रगति पर है. इसके पूर्ण होने पर गर्मी के दिनों में शहर में एक दिन छोड़कर जलप्रदाय की समस्या से राहत मिलेगी. सिलर खेड़ी सीवर खेती परियोजना से पेयजल की स्थिति सुधरेगी और शिप्रा नदी को 12 महीने प्रवाहमान रखने की योजना को बल मिलेगा. स चौड़ीकरण जैसे आंतरिक कार्यों में भी उत्साहजनक प्रगति स्थानीय रहवासी स्वयं अपने भवन पीछे हटाकर प्रशासन को सहयोग दे रहे हैं, जो … Read more

प्रधानमंत्री मोदी 25 अगस्त को धार में करेंगे वस्त्रोद्योग पर केन्द्रित पीएम मित्र पार्क का भूमिपूजन

स्वदेशी की भावना प्रदेश में हो रही साकार युवाओं को राष्ट्रभक्ति की भावना के साथ ही स्वच्छता और स्वदेशी से जुड़ने के लिए किया जाएगा प्रेरित एक लाख से अधिक युवाओं के लिए सृजित होंगे रोजगार के अवसर ब्रह्मा-भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड रेलवे हब फॉर मैन्युफैक्चरिंग में बनेंगे वंदे भारत-अमृत भारत और मेट्रो के कोच लगातार चौथे वर्ष होगा हर घर तिरंगा अभियान और तिरंगा यात्राओं का आयोजन राज्य सरकार भोपाल और इंदौर मेट्रोपोलिन सिटी के विकास की ओर हो रही अग्रसर स्वतंत्रता दिवस पर होगा नवाचार : जिला स्तरीय कार्यक्रमों में जिले की विकास गतिविधियों का होगा प्रस्तुतिकरण 14 अगस्त बलराम जयंती और 16 अगस्त जन्माष्टमी पर होंगे राज्य स्तरीय कार्यक्रम गोकुल-वृदांवन के समान होगा भगवान श्रीकृष्ण लीलाओं से जुड़े उज्जैन, जानापाव, अमझेरा और नारायणा का महत्व भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी स्वदेशी की भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए देश को अधिक सशक्त बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। वर्तमान वैश्विक संदर्भ में देश को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रधानमंत्री श्री मोदी की दृढ़ता हम सबके लिए प्रेरणा स्त्रोत है। सभी प्रदेशवासी प्रधानमंत्री श्री मोदी की इस प्रतिबद्धता के साथ हैं। इसी क्रम में स्वदेशी की भावना को साकार करते हुए 10 अगस्त को भोपाल के पास रायसेन जिले के औबेदुल्लागंज में ब्रह्मा (भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड रेल हब फॉर मैन्युफैक्चरिंग) का भूमिपूजन और शिलान्यास केन्द्रीय रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में किया जा रहा है। केन्द्रीय कृषि एवं पंचायतराज मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान भी कार्यक्रम में शामिल होंगे। केन्द्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव भी कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल होंगे। प्रदेश में पहली बार रेल कोच, मेट्रो कोच आदि का निर्माण कर देश में आपूर्ति के साथ विदेशों में भी निर्यात किया जाएगा। लगभग 1800 करोड़ रूपए की लागत से बनने वाली परियोजना से 1500 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलेगा। प्रदेश में पहली बार इस प्रकार की रेलवे कोच निर्माण सुविधा स्थापित हो रही है, जो मध्यप्रदेश को देश के रेलवे विनिर्माण मानचित्र पर महत्वपूर्ण स्थान दिलाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरूवार को मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में मीडिया प्रतिनिधियों से संवाद कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि रेलवे की इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए रायसेन जिले के तहसील गौहरगंज के ग्राम उमरिया में 60.0630 हेक्टेयर भूमि का आवंटन किया जा चुका है। यहां वंदे भारत-अमृत भारत, मेट्रो कोच का निर्माण किया जाएगा। इस उद्योग से भोपाल और रायसेन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर छोटे उद्योगों भी विकसित होंगे, जिनसे आने वाले समय में प्रदेश की अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन मिलेगा। परियोजना से युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित होंगे। ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए सशस्त्र बलों के जवानों को बहनें भेजेंगी राखियां मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रदेशभर में लगातार चौथे वर्ष हर घर तिरंगा अभियान और तिरंगा यात्राओं का आयोजन किया जाएगा। तिरंगा अभियान का उद्देश्य युवाओं को राष्ट्र भक्ति और स्वदेशी अपनाने की भावना से जोड़ना है। साथ ही आम जनमानस में भी राष्ट्र ध्वज के प्रति सम्मान का भाव विकसित हो। राज्य सरकार ने हर घर तिरंगा अभियान-2025 में स्वच्छता और स्वदेशी अभियान को भी शामिल किया है। अभियान के अंतर्गत 2 से 12 अगस्त तक पूरे प्रदेश में तिरंगे पर केन्द्रित कार्यक्रम होंगे और 13 से 15 अगस्त तक हम सभी को घर, कार्यालयों और वाहनों पर तिरंगा लगाना है। अभियान के अंतर्गत ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए सशस्त्र बलों के जवानों के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करने के उद्देश्य से उन्हें राखियां भेजी जाएंगी। स्कूलों में तिरंगे से जुड़ी विभिन्न प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। तिरंगा संगीत और प्रदर्शनियों का आयोजन भी होगा। इस अभियान में सभी वर्गों को शामिल करते हुए 1 करोड़ तिरंगे की व्यवस्था का लक्ष्य रखा गया है। धार से विदेशों में भी होंगे वस्त्र निर्यात मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में स्वदेशी अभियान आगे भी जारी रहेगा। प्रदेश की दो भावी मेट्रोपोलिटन सिटी भोपाल और इंदौर के विकास की और राज्य सरकार अग्रसर हो रही है। भोपाल के पास बनने वाली रेल कोच इकाई और धार के पास वस्त्र उद्योग पर केन्द्रित विकसित पीएम मित्र पार्क की सौगात से इंदौर मेट्रोपोलिटन क्षेत्र को लाभ होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि पीएम मित्र पार्क मध्य प्रदेश की समृद्धि के नए द्वार खोलेगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी 25 अगस्त को धार में पीएम मित्र पार्क का भूमि-पूजन करेंगे। रेडीमेड गारमेंट सेक्टर की 2000 करोड़ रूपए की इस परियोजना से जनजातीय अंचल के एक लाख से अधिक युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। धार का पीएम मित्र पार्क एक ओर जहां स्वदेशी के भाव को मजबूती देगा, वहीं धार, झाबुआ, रतलाम और निमांड़ क्षेत्र के कपास उत्पादक किसानों को कॉटन का उचित दाम मिलेगा। यहां से विदेशों में भी वस्त्र निर्यात किए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भोपाल में हुई ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 30.77 लाख करोड़ का अभूतपूर्व निवेश प्राप्त हुआ। प्रदेश में औद्योगिकरण का वातावरण बना है और देश-विदेश से निवेशक उद्योग लगाने के लिए मध्यप्रदेश आ रहे हैं। लाड़ली बहनों को रक्षाबंधन का गिफ्ट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश सरकार नारी सशक्तिकरण के लिए संकल्पित है। सावन के पवित्र माह में लाड़ली बहनों को 250 रुपए का शगुन भेजा रहा है। कुल मिलाकर अगस्त में 1500 रुपए की राशि लाड़ली बहनों को भेजी। हमारी मंशा है कि बहनें रक्षाबंधन का त्यौहार पूरे उल्लास और आनंद से मनाएं। दीपावली के बाद लाड़ली बहनों को हर माह 1500 रुपए भेजे जाएंगे। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में चल रही डबल इंजन की सरकार एक के बाद एक विकास की सौगातें देती जाएगी। 15 अगस्त के राज्य स्तरीय कार्यक्रम का सभी जिलों में स्क्रीन पर होगा लाइव टेलीकास्ट मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि राज्य सरकार ने इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के लिए नई कार्ययोजना तैयार की है। इसके अंतर्गत राजधानी भोपाल में होने वाले मुख्य कार्यक्रम को प्रत्येक जिले में स्क्रीन पर लाइव टेलीकास्ट किया जाएगा। इस दौरान प्रदेशवासियों के नाम मुख्यमंत्री के संदेश का प्रसारण भी किया जाएगा। प्रभारी मंत्री जिला … Read more

अमेरिका से भिड़ा चीन, ट्रंप को कहा ‘बदमाश’, भारत को बताया सही

वाशिंगटन  अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत और रूस की दोस्ती रास नहीं आ रही है। ट्रंप ने रूसी तेल की खरीद के लिए भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के इस फैसले की भारत ही नहीं बल्कि उसके पड़ोसी देश भी आलोचना कर रहे है। इस पर चीन की भी तिखी प्रतिक्रिया सामने आई है। चीन ने इस कदम को व्यापारिक उपायों का दुरुपयोग करार देते हुए अमेरिका की कड़ी आलोचना की है। चीनी राजदूत ने ट्रंप को कहा- 'बदमाश' ट्रंप के टैरिफ पर अब चीन भी खुलकर भारत के साथ खड़ा हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जमकर की आलोचना करते हुए चीनी राजदूत ने ट्रंप को बदमाश कह डाला है। उन्होंने इसे वैश्विक व्यापार व्यवस्था के लिए खतरा बताया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब प्रधानमंत्री मोदी के संभावित चीन दौरे की अटकलें भी तेज हैं।   'बदमाश को अगर एक इंच दिया जाए तो…' नई दिल्ली में चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने गुरुवार को ट्रंप टैरिफ पर अपनी राय रखते हुए अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर जोरदार हमला बोला है। शू फेइहोंग ने एक्स पर बिना नाम लिए लिखा, 'बदमाश को अगर एक इंच दिया जाए तो वह एक मील ले लेता है।' शू फेइहोंग ने चीनी विदेश मंत्री वांग यी और ब्राजील के राष्ट्रपति के मुख्य सलाहकार में हुई फोन कॉल का भी जिक्र किया है। बातचीत में वांग यी ने कहा कि दूसरे देशों को दबाने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन है। उन्होंने कहना है कि यह विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों को कमजोर करता है। ट्रंप की नीतियों से अमेरिका-भारत के रिश्ते में बढ़ा तनाव अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत के खिलाफ नई नीति ने दोनों देशों के बीच पिछले दो दशकों से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी में तनाव पैदा कर दिया है। ट्रंप प्रशासन ने भारत के रूसी कच्चे तेल के आयात को लेकर भारतीय सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है, जबकि चीन के रूस के साथ ऊर्जा व्यापार पर नरमी बरती जा रही है। 'इंडिया नैरेटिव' की एक रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली ने स्पष्ट कर दिया है कि वह 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को अमेरिका के दबाव में नहीं आने देगा।