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ईरान के संकट के बीच भारत ने ब्रह्मोस का दम दिखाया, समंदर में अब आ रहा नया सिकंदर

विशाखापट्टनम ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच भारत के लिए आज बड़ा दिन है. भारत  पूरी दुनिया को समंदर के नए सिकंदर से परिचय कराएगा. जी हां, भारत के इस नए सिकंदर का नाम है. ‘तारागिरी’. यह भारतीय नौसेना को मिलने जा रहा है. ‘तारागिरी’ एक लेटेस्ट स्टील्थ युद्धपोत है. इस खतरनाक युद्धपोत को आज यानी शुक्रवार 3 अप्रैल को विशाखापत्तनम के समंदर में कमीशन किया जाएगा. भारत का यह लेटेस्ट वॉरशिप समंदर में दुश्मनों का काल है. यह ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है. वही ब्रह्मोस मिसाइल, जिससे पाकिस्तान आज तक खौफजदा है।  दरअसल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह विशाखापत्तनम में युद्धपोत, ‘तारागिरी’ को नौसेना में शामिल करेंगे. यह युद्धपोत सुपरसोनिक मिसाइलों से लैस है. यानी इसमें ब्रह्मोस की ताकत दिखेगी. ये मिसाइल सतह से सतह पर मार कर सकती हैं. इसमें मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और एक विशेष पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली भी है।  ‘तारागिरी’ मतलब दुश्मन का काल अत्याधुनिक युद्ध प्रबंधन प्रणाली के चलते युद्धपोत का चालक दल पलक झपकते ही खतरों का जवाब दे सकता है. इन युद्धक क्षमताओं के साथ साथ तारागिरी मानवीय संकटों के समय आपदा राहत में भी बड़ी मदद कर सकता है. इसकी अनुकूल मिशन प्रोफाइल इसे उच्च-तीव्रता वाले युद्ध से लेकर मानवीय सहायता और आपदा राहत तक हर चीज के लिए आदर्श बनाती है. कितना शक्तिशाली है यह आईएनएस तारागिरी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह युद्धपोत एक बेहद शक्तिशाली प्लेटफॉर्म है. तारागिरी युद्धपोत 6,670 टन का है और इसमें स्वदेशी शिपयार्डों की परिष्कृत इंजीनियरिंग क्षमताओं का प्रतीक है. मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) द्वारा निर्मित यह युद्धपोत अपने पूर्ववर्ती डिजाइनों की तुलना में एक पीढ़ीगत विकास का प्रतिनिधित्व करता है। इसके निर्माण में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है. गौरतलब है कि सोमवार 30 मार्च को ही भारतीय नौसेना में युद्धपोत दूनागिरी शामिल किया गया है।  चलिए जानते हैं तारागिरी की खासयितें     प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सात नीलगिरी क्लास के युद्धपोतों में से पहला एडवांस स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस नीलगिरी को जनवरी 2025 में नौसेना में शामिल किया गया था. इसके बाद इसी वर्ष हिमगिरी और उदयगिरी को भी शामिल कर लिया गया. अब तारागिरी की बारी है।      गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरी’ ब्रह्मोस मिसाइल से लैस है. यह एंटी-सर्फेस और एंटी-शिप युद्ध में अत्यंत सक्षम है. एंटी-एयर वॉरफेयर के लिए इसमें लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल ‘बराक-8’, एयर डिफेंस गन, तथा एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए स्वदेशी टॉरपीडो ‘वरुणास्त्र’ और रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं।      तारागिरी लंबी दूरी से आने वाले हमलों का पता लगाने, ट्रैक करने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए आधुनिक सोनार, कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और मल्टी-फंक्शन डिजिटल रडार से लैस है. इस फ्रिगेट में हेलिकॉप्टर हैंगर भी है, जिसमें दो हेलिकॉप्टर आसानी से लैंड कर सकते हैं।      प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे सभी सात फ्रिगेट में लगभग 75 प्रतिशत उपकरण स्वदेशी कंपनियों से लिए गए हैं. इसका डिजाइन और स्टील भी स्वदेशी है. इसका डिजाइन नौसेना के वॉरशिप डिज़ाइन ब्यूरो ने तैयार किया है। 6700 टन वजनी यह फ्रिगेट 30 नॉटिकल मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकता है।      प्रोजेक्ट 17ए के तहत सात नीलगिरी क्लास गाइडेड मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट भारतीय नौसेना के लिए बनाए जा रहे हैं. इनमें से चार फ्रिगेट मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) और तीन गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा बनाए गए हैं. वर्ष 2019 से 2022 के बीच इन सभी को लॉन्च किया जा चुका है।      तारागिरी नीलगिरी क्लास का चौथा फ्रिगेट है, जो अब नौसेना में शामिल होने जा रहा है, जबकि बाकी तीन के समुद्री परीक्षण जारी हैं. इन सभी स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट के शामिल होने के बाद समुद्र में भारत की ताकत में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।      नीलगिरी क्लास के सभी युद्धपोतों का डिज़ाइन नेवल डिज़ाइन ब्यूरो द्वारा किया गया है. प्रोजेक्ट 17 और 17ए के सभी फ्रिगेट के नाम भारत की पर्वत शृंखलाओं पर रखे गए हैं, जैसे- शिवालिक, सह्याद्रि, सतपुड़ा, नीलगिरी, हिमगिरी, तारागिरी, उदयगिरी, दूनागिरी, महेंद्रगिरि और विंध्यगिरि।   

बांगलादेश से मालदीव तक, इन देशों ने भारत के खिलाफ मोर्चा खोला, अब मदद की गुहार

नई दिल्ली ईरान युद्ध से उपजे वैश्विक तेल और गैस संकट के बीच मालदीव और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देश भारत से मदद मांग रहे हैं। जानें कैसे नई दिल्ली पुरानी बगावत को भुलाकर 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति के तहत अपना पड़ोसी धर्म निभा रहा है। 28 फरवरी को ईरान में शुरू हुए अमेरिका-इजरायल युद्ध ने पूरी दुनिया के सामने एक अभूतपूर्व ऊर्जा संकट खड़ा कर दिया है। खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण ग्लोबल सप्लाई चेन टूट चुकी है और कच्चे तेल व गैस की कीमतों में लगी आग से वैश्विक अर्थव्यवस्था झुलस रही है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से विश्व का करीब 20% तेल और गैस गुजरता है। यह लगभग पूरी तरह बंद है जिसके कारण दक्षिण एशिया के देशों में पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और बिजली संकट गहरा गया है। इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। जिन पड़ोसी देशों- विशेषकर मालदीव और बांग्लादेश ने हाल के वर्षों में अपनी घरेलू राजनीति चमकाने के लिए भारत के खिलाफ मुखर बगावत की थी और 'इंडिया आउट' जैसे अभियान चलाए थे वे आज गहरे तेल और गैस संकट से जूझते हुए उसी भारत से मदद की गुहार लगा रहे हैं। दूसरी ओर, भारत ने अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी प्रथम) नीति और कूटनीतिक बड़प्पन का परिचय देते हुए तमाम कड़वाहटों को दरकिनार कर इन देशों की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। हाल ही में बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव ने भारत से ईंधन सप्लाई करने की मांग की थी। विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, इन पड़ोसी देशों ने भारत से डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति का अनुरोध किया है। बांग्लादेश ने विशेष रूप से डीजल की अतिरिक्त सप्लाई मांगी, जबकि श्रीलंका और मालदीव भी एनर्जी के सेक्टर में सहायता की मांग की थी। आइए, विस्तार से समझते हैं कि किन देशों ने भारत के खिलाफ क्या कदम उठाए थे और आज संकट के समय भारत उनकी किस तरह ढाल बन रहा है। मालदीव: 'इंडिया आउट' से 'इंडिया हेल्प' तक का सफर क्या थी बगावत? नवंबर 2023 में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने 'इंडिया आउट' अभियान के दम पर सत्ता हासिल की थी। सत्ता में आते ही उन्होंने सबसे पहला काम मालदीव में तैनात भारतीय सैन्य कर्मियों को वापस भेजने का किया। ये कर्मी मुख्य रूप से मेडिकल इवैक्यूएशन के लिए वहां थे। मुइज्जू ने भारत पर आरोप लगाया कि भारतीय सैन्यकर्मी मालदीव की संप्रभुता का उल्लंघन कर रहे हैं। नवंबर 2023 में सत्ता संभालते ही मुइज्जू फरवरी 2024 तक सभी भारतीय सैन्यकर्मियों की वापसी का ऐलान कर दिया और मई 2024 तक सभी भारतीय सैनिक मालदीव छोड़ चुके थे। इसके बाद उन्होंने अपनी पहली विदेश यात्रा के लिए भारत के बजाय चीन को चुना और बीजिंग के साथ कई रक्षा व आर्थिक समझौते किए। मालदीव के कुछ मंत्रियों ने भारतीय प्रधानमंत्री और भारतीयों पर आपत्तिजनक टिप्पणियां भी कीं, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। हालांकि जब मुइज्जू को लगा कि चीन पर भरोसा नहीं किया जा सकता है तो उन्होंने भारत का दौरा किया और भारत को 'सबसे भरोसेमंद साझेदार' बताया। वर्तमान संकट और भारत की मदद- मालदीव अपनी ऊर्जा और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पूरी तरह से आयात पर निर्भर है। फरवरी 2026 के युद्ध के बाद वह गहरे संकट में घिर गया। जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से मालदीव में पेट्रोल-डीजल और गैस की भारी किल्लत हो गई। चीन की ओर से तत्काल राहत न मिलने पर मुइज्जू सरकार को अंततः नई दिल्ली का रुख करना पड़ा। भारत का कदम: सूत्रों की मानें तो भारत ने कूटनीतिक परिपक्वता दिखाते हुए मालदीव के लिए आवश्यक वस्तुओं के निर्यात को न सिर्फ जारी रखा, बल्कि आपातकालीन कोटे के तहत मालदीव को पेट्रोल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की विशेष खेप भेजी है, ताकि वहां का पर्यटन उद्योग और बुनियादी ढांचा पूरी तरह ठप न हो जाए। बांग्लादेश: सत्ता परिवर्तन और 'बहिष्कार' के बाद सच्चाई का सामना क्या थी बगावत? अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद बांग्लादेश में डॉ. मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ। इस सत्ता परिवर्तन के बाद बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतों का उदय हुआ और भारत विरोधी भावनाएं भड़काई गईं। वहां 'बॉयकॉट इंडिया' अभियान चलाकर भारतीय उत्पादों का बहिष्कार किया गया। यूनुस सरकार ने भारत के साथ कई पूर्व समझौतों (जैसे अडानी पावर डील) की समीक्षा करने की धमकी दी और सीमा व नदी जल बंटवारे को लेकर आक्रामक बयानबाजी की। सीमा पर भारत की बाड़बंदी रोक दी; BGB ने BSF को 'बैक टर्न' करने से इनकार कर दिया। यूनुस ने भारत के 'सेवन सिस्टर्स' (नॉर्थईस्ट) को 'लैंडलॉक्ड' बताते हुए चेतावनी दी कि अस्थिर बांग्लादेश भारत को प्रभावित कर सकता है। पाकिस्तान और चीन से संबंध मजबूत किए। यूनुस का मार्च 2025 चीन दौरा और 'ताइवान इंडिपेंडेंस' का विरोध। अल्पसंख्यक (हिंदू) हिंसा पर भारत की चिंता को 'बढ़ा-चढ़ाकर' बताया। लेकिन फरवरी के चुनाव के बाद सत्ता में आई तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार ने भारत के अच्छे संबंध बनाने की बात कही। वर्तमान संकट और भारत की मदद: ईरान युद्ध के कारण गैस सप्लाई रुकने से बांग्लादेश का पावर ग्रिड चरमरा गया है। देश के कपड़ा उद्योग, जो बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, को बिजली और डीजल की भारी कमी के कारण बंद होने का खतरा पैदा हो गया। बांग्लादेश 95% तेल और 30% गैस मध्य पूर्व से आयात करता है। ईरान युद्ध से देश में LNG की कमी, पैनिक बाइंग और ईंधन राशनिंग शुरू हो गई। विश्वविद्यालय बंद, स्कूलों में छुट्टियां घोषित कर दी गईं। मार्च 2026 में बांग्लादेश ने भारत से डीजल मांगा। भारत का कदम: भारत ने नुमालीगढ़-पार्वतीपुर 'मैत्री पाइपलाइन' के जरिए हाई-स्पीड डीजल की आपूर्ति को बढ़ाकर बांग्लादेश की लाइफलाइन को जिंदा रखा है। इसके अलावा, भारतीय पावर ग्रिड से बांग्लादेश को दी जाने वाली बिजली आपूर्ति को बिना किसी बाधा के जारी रखा गया है, ताकि वहां मानवीय और आर्थिक संकट गहरा न हो। भारत ने 10 मार्च को 5,000 टन डीजल भेजा और अगले सप्ताह 10 हजार टन भेजा। इस महीने 40,000 टन का अतिरिक्त डीजल भेजने का प्लान है। MEA ने पुष्टि की कि बांग्लादेश का … Read more

राज्यसभा उपसभापति का बयान: ‘विकसित भारत के लिए 66 साल का सफर, कई देशों में लॉकडाउन, भारत में हालात सामान्य’

भोपाल  भोपाल में मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के युवा विधायकों के सम्मेलन का समापन सत्र चल रहा है। कार्यक्रम में राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश सिंह बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। उन्होंने मध्य प्रदेश विधानसभा की त्रैमासिक पत्रिका का विमोचन किया। इस बीच उन्होंने कहा कि विकसित भारत का सपना देखने में 66 साल लगा दिए गए। कई देशों में आज लॉकडाउन जैसे हालात लेकिन भारत आराम से चल रहा है। एक समय था जब दुनिया के अर्थशास्त्री, जिन्हें हम बहुत मानते थे- यह कहते थे कि भारत 2 से 3 प्रतिशत से अधिक विकास नहीं कर सकता। इसे “हिंदू ग्रोथ रेट” कहा जाता था। उस समय यह भी माना जाता था कि केवल अलग तरह की राजनीतिक व्यवस्थाओं वाले देश ही तेजी से आगे बढ़ सकते हैं। लेकिन आज भारत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होकर यह साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में भी तेज विकास संभव है। उन्होंने कहा कि भारत ने यह भी सिद्ध किया है कि सही नीतियों और संकल्प के साथ देश तेजी से तरक्की कर सकता है। विधानसभा अध्यक्ष बोले- छतीसगढ़ अलग हुआ तो आंखों में आंसू थे वहीं, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि दो दिनों तक चले इस सम्मेलन में अलग-अलग विचारधाराओं के विधायकों ने अपनी सीमाओं से ऊपर उठकर विषय के अंतर्गत अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में टेक्नोलॉजी के उपयोग, स्वच्छता कार्यक्रमों को आगे बढ़ाने, सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने, शिक्षा के विस्तार के साथ उसकी गुणवत्ता सुधारने, व आधारभूत संरचना के विकास जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। तोमर ने कहा कि, मुझे वह क्षण आज भी याद है जब छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश विधानसभा से अलग हुआ। उस दिन मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सभी विधायकों की आंखों में आंसुओं के अलावा कुछ नहीं था। इसीलिए आज भी दोनों राज्यों के बीच वही आत्मीयता बनी हुई है। उज्जैन जाएंगे विधायक युवा विधायक सम्मेलन का समापन होने के बाद विधायक उज्जैन में भगवान महाकाल के दर्शन करने जाएंगे। सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया था। एमपी के विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, संसदीय कार्यमंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष मौजूद थे।

भारत ने खेला बड़ा दांव, होर्मुज जीता, अब रूस से मिलेगा LNG का खजाना

नईदिल्ली /मॉस्को  मिडिल ईस्ट में मची भीषण तबाही की आग अब भारत की रसोई से लेकर फैक्ट्रियों तक पहुंच चुकी है. रॉयटर्स की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत सरकार ने अपनी तेल और गैस कंपनियों को साफ कह दिया है कि वे रूस से एलएनजी (LNG) खरीदने के लिए अपनी कमर कस लें. यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से इसे भारत का अब तक का सबसे बड़ा ‘पॉलिसी चेंज’ माना जा रहा है. मिडिल ईस्ट के बिगड़ते हालात ने दुनिया भर के देशों को मजबूर कर दिया है कि वो तेल और गैस के लिए दूसरे विकल्प तलाशें. हालांकि, भारत को हॉर्मुज के रास्ते से ‘फ्री पास’ मिला हुआ है, लेकिन सरकार एनर्जी सप्लाई के मामले में अब कोई भी रिस्क लेने के मूड में नहीं है।  Oil Prices को काबू में रखने का निकाला उपाय कतर के ‘रास लफ्फान’ गैस हब पर हमलों से उत्पादन सालों के लिए पिछड़ गया है. 19 मार्च को नई दिल्ली में रूसी ऊर्जा उप-मंत्री पावेल सोरोकिन और हरदीप सिंह पुरी के बीच हुई बैठक में एलएनजी सप्लाई फिर से शुरू करने पर सहमति बनी है।  अमेरिका से शुरू हुई क्या बात? भारत ने अमेरिका के साथ बातचीत शुरू कर दी है ताकि रूसी गैस खरीदने पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों का असर न पड़े. अमेरिका पहले ही भारत को रूसी कच्चा तेल खरीदने के लिए 30 दिनों का वेवर दे चुका है ताकि ग्लोबल मार्केट में तेल की कीमतें काबू में रहें।  अब भारत एलएनजी के लिए भी ऐसी ही छूट चाहता है. हालांकि, जानकारों का कहना है कि इस बार रूस के साथ होने वाला सौदा 2012 के GAIL-Gazprom समझौते जितना सस्ता नहीं होगा, क्योंकि अब यह पूरी तरह ‘सेलर्स मार्केट’ है।  भारत-रूस क्रूड ऑयल ट्रेड S&P ग्लोबल और अन्य एजेंसियों ने दुनिया भर में गैस की कमी की चेतावनी दी है. होर्मुज संकट और कतर में तबाही के कारण इस साल ग्लोबल सप्लाई में 35 मिलियन टन की कमी आ सकती है. कतर और यूएई के नए गैस प्रोजेक्ट्स अब 3 से 5 साल की देरी से चल सकते हैं. भारत पहले ही फरवरी के बाद से रूस से 5-6 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीद चुका है और अब कुकिंग गैस यानी LPG के साथ-साथ एलएनजी के लिए भी रूस पर भरोसा बढ़ा रहा है। 

India-Russia Talks: ईरान युद्ध ने दिया भारत-रूस को मौका, US को भी होगी बड़ी डील की जानकारी

 नई दिल्ली युद्ध ने कई समीकरण बदल दिए हैं, अमेरिकी बैन के कारण भारत ने धीरे-धीरे रूस से तेल खरीदना कम कर दिया था. लेकिन अब युद्ध ने मिडिल-ईस्ट से तेल की सप्लाई को बाधित कर दिया है. जिसके बाद भारत अब अधिक से अधिक कच्चा तेल रूस से खरीदने पर विचार कर रहा है, ताकि देश में पेट्रोल-डीजल की किल्लत न हो।  न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस संकट ने भारत को एक बार फिर रूस के साथ अपने पुराने और मजबूत संबंधों को आगे बढ़ाने का मौका दे दिया है और भारत ने अपना कदम बढ़ा दिया है।  दरअसल, मिडिल-ईस्ट में संघर्ष के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रूट बाधित हो गया है. यह मार्ग दुनिया के सबसे बड़े तेल परिवहन रास्तों में से एक है, और भारत जैसे देशों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इस संकट के चलते वैश्विक स्तर पर तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे भारत के सामने भी ऊर्जा सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।  LNG को लेकर रूस से बातचीत शुरू  बता दें, भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से पूरा करता है. लेकिन फिलहाल सप्लाई में दिक्कतें आ रही हैं. ऐसे में भारत अब रूस को एक वैकल्पिक और भरोसेमंद सप्लायर के रूप में देख रहा है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत और रूस के बीच लिक्विफाइड नैचुरल गैस (LNG) को लेकर एक बड़ी डील पर बातचीत शुरू हो चुकी है, जो यूक्रेन युद्ध के बाद पहली बार हो रही है. सूत्रों के मुताबिक भारत ने रूसी एलएनजी खरीदने के संदर्भ में अमेरिका को जानकारी दे दी है।  इतना ही नहीं, भारत अपने कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी को बढ़ाकर लगभग 40% तक ले जाने पर विचार कर रहा है. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में रूसी कच्चे तेल का आयात जनवरी 2026 के स्तर से दोगुना होकर कम से कम 40% तक पहुंच सकता है. रूस पहले से ही भारत को रियायती दरों पर तेल उपलब्ध कराता रहा है, जो मौजूदा महंगाई और ऊर्जा संकट के दौर में भारत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है।  अमेरिका को चुभ सकता  है रूस-भारत का करीब आना गौरतलब है कि रूसी तेल खरीदने को लेकर  ही भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ा था, जिसके बाद अमेरिका ने अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ थोप दिया था. यही नहीं, जब ट्रंप ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी करने का ऐलान किया तो, उस समय उन्होंने कहा था कि भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद कर दिया है, जिसके बाद टैरिफ में छूट दी गई।  लेकिन अब में मिडिल-ईस्ट में जिस तरह के हालात हैं, उसे देखते हुए भारत अब अमेरिका से विशेष छूट मांग रहा है, ताकि वह रूस से ऊर्जा खरीद जारी रख सके. इस पूरे घटनाक्रम का एक बड़ा भू-राजनीतिक पहलू भी है. क्योंकि भारत और रूस फिर से करीब आने वाला है, जो कि अमेरिका को चुभ सकता है. रूस भी इस अवसर का फायदा उठाते हुए भारत के साथ अपने रिश्ते को और गहरा करने की कोशिश कर रहा है।  वैसे भी भारत और रूस एनर्जी के अलावा बिजली, एविएशन और व्यापार जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर विचार कर रहे हैं. खास बात यह है कि दोनों देशों के बीच व्यापार अब रुपये और रूबल में भी किया जा रहा है, जिससे डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश हो रही है। 

भारत ने किया बड़ा कदम: ईरान से चीन के लिए जा रहा LPG जहाज खरीदा, रुपये में पेमेंट

मुंबई  अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण साल 2019 से थमा भारत-ईरान ऊर्जा व्यापार एक बार फिर शुरू होता दिख रहा है। डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा तेल और गैस की कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए दी गई 30 दिनों की विशेष छूट के बाद ईरान से लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) लेकर चला एक टैंकर भारत के पश्चिमी तट पर पहुंचने वाला है। शिपिंग डेटा (LSEG) के अनुसार, 'ऑरोरा' नामक प्रतिबंधित पोत ईरानी एलपीजी ले जा रहा है। आज इसके मंगलुरु बंदरगाह पर पहुंचने की उम्मीद है। दिलचस्प बात यह है कि यह कार्गो मूल रूप से चीन के लिए रवाना हुआ था, लेकिन बदलती परिस्थितियों के बीच इसे भारत की ओर मोड़ दिया गया। रॉयटर्स के सूत्रों के अनुसार, यह खेप एक ट्रेडर के माध्यम से खरीदी गई है और इसका भुगतान भारतीय रुपयों में किया जाएगा। 3 कंपनियों के बीच वितरण भारत वर्तमान में दशकों के सबसे गंभीर गैस आपूर्ति संकट से जूझ रहा है। एलपीजी का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा आयातक होने के नाते भारत अपनी 60% मांग आयात से पूरी करता है। इस खेप को देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के बीच वितरित किया जाएगा। घरेलू रसोई गैस की जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने उद्योगों को होने वाली गैस आपूर्ति में पहले ही कटौती कर दी है। एक ओर जहां सूत्रों ने खरीद की पुष्टि की है, वहीं दूसरी ओर सरकारी स्तर पर अभी भी सावधानी बरती जा रही है। केंद्रीय जहाजरानी मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "ईरान से किसी भी लोडेड कार्गो की हमें जानकारी नहीं मिली है।" होर्मुज में फंसे जहाजों की निकासी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत की ऊर्जा आपूर्ति बुरी तरह प्रभावित हुई है। सरकार वहां फंसे अपने जहाजों को निकालने के लिए युद्ध स्तर पर काम कर रही है। शिवालिक, नंदा देवी, पाइन गैस और जग वसंत जैसे चार टैंकरों को सफलतापूर्वक सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है। फारस की खाड़ी में फंसे खाली जहाजों पर भी एलपीजी लोड करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है ताकि देश में आपूर्ति सुचारू बनी रहे।

AI स्टार्टअप की बड़ी योजना, 2,347 करोड़ से भारतीय बाजार में खुलेंगे नए रास्ते

 नई दिल्ली भारतीय आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) स्टार्टअप Sarvam AI मालामाल होने जा रहा है. कंपनी 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 2,347 करोड़ रुपये) की इनवेस्टमेंट के लिए AI जगत की दिग्गज कंपनियों से बातचीत कर रही है।  सरवम AI अभी एनवीडिया, वेंचर कैपिटल फर्म एसेल, इंफोर्मेशन टेक्नोलॉजी जगत की दिग्गज कंपनी HCL Tech के साथ बातचीत कर रही है।  यह बातचीत सफल होती है, तो यह सरवम एआई की ग्रोथ के लिए सकारात्मक साबित होगी. डील पर सहमति बन जाती है तो Sarvam की यह फंडिंग इस साल किसी भारतीय स्टार्टअप के लिए प्राइवेट मार्केट में सबसे बड़ा निवेश राउंड बन सकती है।  Sarvam AI पहले ही Nvidia के चिप्स का यूज कर रहा है Sarvam AI पहले से ही Nvidia के चिप्स का यूज कर रहा है. HCLTech को बतौर इनवेस्टर्स के रूप में शामिल करने से आईटी कंपनी को Sarvam की AI काबिलियत का फायदा उठाने का मौका मिलेगा।  साथ ही Accel जैसा बड़ा वेंचर कैपिटल फंड भारतीय AI स्टार्टअप में इनवेस्टमेंट करता है तो सरवम AI दुनिया के दूसरे देशों में भी अपनी पहुंच बना सकेगा।  Sarvam AI क्या है?  Sarvam AI, असल में एक बेंगलुरु बेस्ड AI स्टार्टअप है. हाल ही में उसके दो टूल्स चर्चा में रहे हैं, जिनके नाम Sarvam Vision और Bulbul हैं. हाल ही में इन भारतीय AI मॉडल ने बड़े प्लेयर्स को पछाड़ चुका है.  Sarvam Vision AI ने ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) में सबसे शानदार परफॉर्म किया था।  एक बेंचमार्क पर देसी AI ने चैटजीपीटी, गूगल जेमिनाई और Anthropic Claude जैसे बड़े और पॉपुलर AI मॉडल्स को पछाड़ दिया दिया था. इसकी जानकारी Sarvam AI के को-फाउंडर प्रत्युष कुमार दे चुके हैं. को-फाउंडर ने X प्लेटफॉर्म (पुराना नाम Twitter) पर पोस्ट करके इसकी जानकारी दी थी। 

भारत को तेल संकट से राहत, सऊदी अरब और UAE से कई टैंकर पहुंचे, सरकार ने क्या कहा?

मुंबई  अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी युद्ध की वजह से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से भारत सहित कई देशों में ईंधन आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इस बीच अब भारत के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक UAE से दो LPG कैरियर और सऊदी अरब से एक कच्चे तेल का कैरियर भारत के बंदरगाहों की ओर बढ़ रहे हैं ताकि देश में ऊर्जा आपूर्ति की कमी को पूरा किया जा सके। वहीं नौसेना प्रमुख दिनेश त्रिपाठी ने बढ़ते हुए शिपिंग संकट के चलते ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड के अपने आधिकारिक दौरे को रद्द कर दिया है। जानकारी के मुताबिक भारतीय झंडे वाले जहाज पाइन गैस और जग वसंत लगभग एक साथ ही चल रहे थे। दोनों जहाज सोमवार सुबह 6 बजे UAE के बंदरगाहों से भारत के लिए रवाना हुए। ईरान ने इन दोनों LPG जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने की मंजूरी भी दे दी है। वहीं ओमान की खाड़ी में भारतीय नौसेना के युद्धपोत इन LPG जहाजों को 24 घंटे तक सुरक्षा दे रहे हैं। जहाज में कितना LPG? बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने सोमवार को एक प्रेस कांफ्रेस में बताया कि दोनों जहाज पर लगभग 92,000 टन एलपीजी है। उन्होंने कहा, ''यात्रा शुरू हो चुकी है।'’ शिपिंग मंत्रालय के अनुसार जग वसंत के 26 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचने की संभावना है, जबकि पाइन गैस 28 मार्च को न्यू मैंगलोर पहुंच सकता है। इन जहाजों पर क्रमशः 33 और 27 भारतीय नाविक भी सवार हैं। सऊदी से आ रहा तेल टैंकर इसके अलावा, MT Kallista नाम का एक कच्चे तेल का कैरियर सऊदी अरब के यान्बू बंदरगाह पर तेल भर रहा है और मंगलवार को जेद्दा बंदरगाह होते हुए भारत के पारादीप बंदरगाह के लिए रवाना होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के समन्वय से, पनामा के झंडे वाले यह जहाज भी अदन की खाड़ी से गुजरेगा और भारतीय नौसेना इसकी हिफाजत करेगी। भारतीय टैंकरों ने ईरान को दी फीस? भले ही रिपोर्ट्स में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान द्वारा मोटी फीस लिए जाने की खबरें थीं, लेकिन भारत ने अपने LPG टैंकरों को गुजरने की अनुमति देने के लिए ईरान को कोई पैसा नहीं दिया है। भारत में ईरानी दूतावास ने सोमवार को ऐसी रिपोर्टों का खंडन किया है। इस बीच केंद्र सरकार ने भारतीय नौसेना से कहा है कि वह भारतीय झंडे वाले जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ओमान की खाड़ी और अदन की खाड़ी के आसपास अपने कोलकाता-श्रेणी के विध्वंसक जहाजों को तैनात करे। वहीं भारतीय झंडे वाले सभी जहाज़ों के कप्तानों से लगातार संपर्क किया जा रहा है, ताकि उन्हें बताया जा सके कि भारत संकट के समय उनके साथ खड़ा है। कितने टैंकर फंसे? बता दें कि ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध कुल मिलाकर लगभग 500 टैंकर जहाज फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। इनमें 108 कच्चे तेल के टैंकर, 166 तेल उत्पाद टैंकर, 104 रासायनिक/उत्पाद टैंकर, 52 रासायनिक टैंकर और 53 अन्य प्रकार के टैंकर शामिल हैं। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान संभवत: सत्यापन के बाद चुनिंदा जहाजों को जलडमरूमध्य से जाने की अनुमति दे सकता है।

सिंधु जल संधि स्थगित, पाक को सुधारने की शर्त पर रखी गई स्थिति

संयुक्त राष्ट्र   भारत ने दोहराया है कि सिंधु जल संधि तब तक निलंबित रहेगी जब तक “आतंक का वैश्विक केंद्र” पाकिस्तान अपने तरीकों में सुधार नहीं करता। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी हरीश ने गुरुवार को विश्व जल दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कहा कि पाकिस्तान को “संधियों की पवित्रता बनाए रखने की बात करने से पहले मानव जीवन की पवित्रता का सम्मान करना चाहिए।” उन्होंने कहा, “भारत हमेशा एक जिम्मेदार उच्च जलधारा वाला राज्य रहा है लेकिन जिम्मेदारी दोतरफ़ा रास्ता है। पाकिस्तान को अपनी राज्य नीति के उपकरण के रूप में आतंकवाद का उपयोग करना पूरी तरह से छोड़ना होगा।” हरीश का यह बयान उस समय आया जब पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि को ऐसा प्रस्तुत किया मानो वह हताहत पक्ष हो, जबकि कार्यक्रम का विषय था सुरक्षित जल और स्वच्छता तक सभी के लिए पहुंच सुनिश्चित करना, जो कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) से जुड़ा है। हरिश ने कहा, “भारत ने इस संधि पर 1960 में सद्भाव और मित्रता की भावना में हस्ताक्षर किए लेकिन पाकिस्तान ने इस भावना का उल्लंघन करते हुए भारत पर तीन युद्ध और हजारों आतंकी हमले किए।” उन्होंने कहा, “दसियों हजार निर्दोष भारतीय पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवादी हमलों के शिकार बने।” पिछले साल द रेजिस्टेंस फ्रंट द्वारा पहलगाम में धर्म आधारित आतंकवादी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान के साथ हस्ताक्षरित सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया। उन्होंने कहा, “हमारी सहनशीलता और उदारता ने पाकिस्तान के तरीकों को नहीं बदला। अंततः हमें घोषणा करनी पड़ी कि यह संधि तब तक निलंबित रहेगी जब तक पाकिस्तान, जो आतंकवाद का वैश्विक केंद्र है, सभी प्रकार के आतंकवाद के लिए अपने समर्थन को विश्वसनीय और अपरिवर्तनीय रूप से समाप्त नहीं करता।” उन्होंने कहा कि तकनीकी, जनसांख्यिकीय और पारिस्थितिक बदलावों के कारण पिछले 65 वर्षों में क्षेत्र में मौलिक बदलाव हुए हैं, जिसके लिए पाकिस्तान चर्चा करने से इंकार करता रहा। उन्होंने कहा, “संधि में संशोधन पर पाकिस्तान के साथ हमारी सभी कोशिशें ठुकरा दी गईं।” कार्यक्रम के विषय पर बोलते हुए, उन्होंने कहा कि इस साल 22 मार्च को विश्व जल दिवस रविवार को पड़ रहा है और भारत ने सुरक्षित जल और स्वच्छता तक सार्वभौमिक पहुंच के सतत विकास लक्ष्य को उच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा, “जल जीवन मिशन के माध्यम से भारत ग्रामीण घरों में पाइप से पीने के पानी की आपूर्ति कर दुनिया के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक को लागू कर रहा है।” 2019 में शुरू हुए इस मिशन ने अब तक ग्रामीण घरों के 81.76 प्रतिशत घरों (कुल 1.58 करोड़) तक सुरक्षित नल का पानी पहुंचाया है। उन्होंने कहा, “सामुदायिक भागीदारी इस प्रयास की आधारशिला है, जिसमें गांव जल समितियां, जिनमें से कई महिलाओं द्वारा नेतृत्व की जाती हैं, स्थानीय जल प्रणालियों की योजना, निगरानी और रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।” उन्होंने जोड़ा, “संयुक्त राष्ट्र में हमारे सामूहिक प्रयास तब सबसे प्रभावी होंगे जब वे ऐसे क्षेत्रों पर केंद्रित हों जो हमें जोड़ते हैं, जैसे कि राष्ट्रीय क्षमताओं को मजबूत करना, विशेष रूप से विकासशील देशों में, तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देना और वैज्ञानिक सहयोग को आगे बढ़ाना।”

फरवरी में भारत का व्यापारिक घाटा कम होकर 27.1 अरब डॉलर हुआ

नई दिल्ली  भारत का वस्तु व्यापारिक घाटा फरवरी में कम होकर 27.1 अरब डॉलर हो गया है, जो कि पिछले महीने 34.68 अरब डॉलर था। यह जानकारी वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय की ओर से  दी गई। बीते महीने देश का वस्तु निर्यात बढ़कर 36.61 अरब डॉलर हो गया है, जो कि जनवरी में 36.56 अरब डॉलर था। वहीं, आयात कम होकर 63.71 अरब डॉलर हो गया है, जो कि पहले 71.24 अरब डॉलर था। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश का वस्तु निर्यात वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-फरवरी अवधि में 402.93 अरब डॉलर रहा है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 395.66 अरब डॉलर था। यह समीक्षा अवधि में सालाना आधार पर 1.84 प्रतिशत की बढ़त को दर्शाता है। यह आंकड़े ऐसे समय पर सामने आए हैं, जब अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध चल रहा है, जो 28 फरवरी को शुरू हुआ था और जिसके चलते मध्य पूर्व में होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित हो गया है। इसी जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के 20 प्रतिशत तेल और गैस का निर्यात होता है।  जलडमरूमध्य के बंद होने से मध्य पूर्व के देशों को चावल जैसी वस्तुओं के भारत के निर्यात पर भी असर पड़ा है। पहले, भारत के ऊर्जा आयात का लगभग 50 प्रतिशत होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आता था, लेकिन अब इसमें विविधता आ गई है और इसका एक बड़ा हिस्सा रूस से आ रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत के रणनीतिक तेल भंडार और 40 आपूर्तिकर्ता देशों से ऊर्जा आयात में विविधता लाने से वैश्विक ऊर्जा संकटों का सामना करने की देश की क्षमता में काफी सुधार हुआ है। इस लचीलेपन के कारण ईरान युद्ध से उत्पन्न व्यवधान के बावजूद भारत में कोई ऊर्जा संकट नहीं आया है, क्योंकि सरकार आपूर्ति-पक्ष प्रबंधन के माध्यम से स्थिति को संभाल रही है। जहाज और बंदरगाह मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, भारत ईरान के साथ भी सीधे संपर्क में है ताकि उसके व्यापारिक जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की अनुमति मिल सके। भारतीय ध्वज वाला जहाज जग लाडकी रविवार को संयुक्त अरब अमीरात के फुजैरा बंदरगाह से लगभग 80,800 मीट्रिक टन मुरबान कच्चे तेल के साथ सुरक्षित रूप भारत के लिए रवाना हुआ। जहाज और उस पर सवार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। बयान में आगे कहा गया कि इलाके में मौजूद सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं, और पिछले 24 घंटों में भारतीय नाविकों से जुड़ी कोई भी दुर्घटना की सूचना नहीं मिली है। भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी वाहक जहाज, शिवालिक और नंदा देवी, जिनमें लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी भरी हुई है, शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और वर्तमान में भारत की ओर रवाना हैं। इनके सोमवार को मुंद्रा बंदरगाह और मंगलवार को कांडला बंदरगाह पहुंचने वाले हैं।