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पानी के नीचे भारत की ताकत: पनडुब्बियों का ऐसा किला जिसे दुश्मन छू भी नहीं सकते

नई दिल्ली भारत ने अपने दुश्मनों से निपटने के लिए समुद्र के भीतर पनुडुब्बियों का अभेद्य किला बना लिया है। यह किला इतना ताकतवर है यह अरब सागर से लेकर हिंद महासागर तक पाकिस्तान और चीन की चुनौतियों से पार पाने में बेहद कारगर और मारक साबित होगा। भारत के इस किले में न्यूक्लियर पॉवर्ड समेत हर तरह की पनडुब्बियां हैं, जो दुश्मन की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। भारत ने अपने दोनों तरफ के समुद्र में पनडुब्बियों का जाल बिछा रखा है। भारत ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर स्वदेशी पनडुब्बियां बनाने के लिए भी तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं, मगर उसके नौसेना के बेड़े में शामिल होने में अभी एक दशक लग सकता है। भारत ने अपने पश्चिमी और पूर्वी तट पर समंदर के पास पनडुब्बियों का जाल बिछा रखा है, जिससे भारत के चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन अपनी हद पार करने से पहले सौ बार सोचेंगे। इसमें हर तरह की पनडुब्बियां शामिल हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय नौसेना के बेड़े में करीब 20-21 मारक पनडुब्बियां हैं। इनमें से 17 तो डीजल पॉवर्ड अटैक पनडुब्बियां हैं। इसके अलावा, कम से कम 2 न्यूक्लियर पॉवर्ड बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी हैं। इसके अलावा, एक पनडुब्बी रूस से लीज पर ले रखी है। वहीं, एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (एसएसबीएन) आईएनएस अरिदमन (S-4) को अप्रैल या मई तक सेवा में शामिल किए जाने की उम्मीद है। पनडुब्बी वर्तमान में समुद्री परीक्षणों के अंतिम चरण में है और आने वाले महीनों में सेवा में शामिल होने की संभावना है। आईएनएस अरिदमन के शामिल होने के साथ ही भारत के पास सामरिक बल कमान (एसएफसी) के तहत पहली बार तीन परिचालन एसएसबीएन हो जाएंगे। NTI पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नौसेना की पनडुब्बियां पश्चिमी तट मुंबई और पूर्वी तट पर विशाखापत्तनम के पास समंदर में तैनात हैं। भारत ने हाल ही में दो पनडुब्बी अड्डे बनाए हैं। पहला मुंबई से 500 किलोमीटर दक्षिण में स्थित कारवार है। दूसरा, आईएनएस वर्षा नामक एक गुप्त नौसैनिक अड्डा है, जो चीन के हालिया उन्नयन के जवाब में भारत की नौसैनिक परमाणु क्षमताओं को बढ़ाने की एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है। यह अड्डा पूर्वी तट पर काकीनाडा के पास स्थित है और इसमें पनडुब्बियों के लिए भूमिगत ठिकाने होंगे। फरवरी, 2015 में भारत सरकार ने स्वदेशी 6 न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक सबमरींस को अपने जंगी बेड़े में शामिल करने की परियोजना को मंजूरी दी थी। ये पनडुब्बियां विशाखापत्तनम के शिप बिल्डिंग सेंटर में बननी हैं। भारत के पश्चिमी तट पर अरब सागर है, जिसकी सीमा पाकिस्तान को छूती है। वहीं, पूर्वी तट के पास बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर है, जहां चीन के जासूसी जहाज अक्सर मंडराते रहते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक क्लास की पनडुब्बी की स्वदेशी क्षमता हासिल करना अभी भी एक दशक दूर का लक्ष्य है। माना जा रहा है कि इस तरह की पहली पनडुब्बी 2036 तक ही तैयार हो पाएगी। भारत के पास पहले से ही अरिहंत श्रेणी की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली और परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियां (एसएसबीएन) मौजूद हैं।

न्यूजीलैंड के सामने क्यों फेल हो जाता है भारत? टी20 वर्ल्ड कप के चौंकाने वाले आंकड़े

अहमदाबाद टी20 वर्ल्ड कप 2026 का फाइनल मुकाबला रविवार को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा। इस बड़े मैच से पहले एक ऐसा आंकड़ा सामने आया है जो भारतीय टीम की चिंता बढ़ा सकता है। दरअसल, टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में न्यूजीलैंड के खिलाफ टीम इंडिया का रिकॉर्ड बेहद खराब रहा है। अब तक दोनों टीमों के बीच खेले गए तीनों मुकाबलों में भारत को हार का सामना करना पड़ा है। टी20 वर्ल्ड कप में न्यूजीलैंड के खिलाफ 0-3 का रिकॉर्ड टी20 विश्व कप इतिहास में भारत और न्यूजीलैंड के बीच अब तक तीन मुकाबले खेले गए हैं और इन सभी में कीवी टीम ने जीत दर्ज की है। यही वजह है कि फाइनल से पहले यह आंकड़ा भारतीय टीम के लिए चिंता का विषय बन गया है। करीब पांच साल बाद दोनों टीमें टी20 वर्ल्ड कप में आमने-सामने होंगी और भारतीय टीम के पास इस बार अपने पुराने रिकॉर्ड को बदलने का सुनहरा मौका है। 2021 में हुआ था आखिरी मुकाबला टी20 वर्ल्ड कप में भारत और न्यूजीलैंड के बीच आखिरी मैच 2021 में दुबई में खेला गया था। उस समय टीम इंडिया की कप्तानी विराट कोहली के हाथों में थी और उस मुकाबले में भारत को 8 विकेट से हार झेलनी पड़ी थी। हालांकि, पिछले पांच सालों में दोनों टीमों में काफी बदलाव आ चुका है। उस मैच में भारत की ओर से खेलने वाले खिलाड़ियों में से सिर्फ चार खिलाड़ी ही मौजूदा टी20 वर्ल्ड कप टीम का हिस्सा हैं। ये खिलाड़ी हैं: ईशान किशन, हार्दिक पांड्या, जसप्रीत बुमराह, वरुण चक्रवर्ती। बाकी खिलाड़ी या तो इस फॉर्मेट से संन्यास ले चुके हैं या फिर टीम से बाहर हो चुके हैं। 2021 मैच में इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन 2021 के मुकाबले में इन चार खिलाड़ियों का प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा था। ईशान किशन – 4 रन हार्दिक पांड्या – 24 गेंद में 23 रन वरुण चक्रवर्ती – कोई विकेट नहीं जसप्रीत बुमराह – 2 विकेट हालांकि मौजूदा टी20 वर्ल्ड कप में इन खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार रहा है। मौजूदा टूर्नामेंट में शानदार फॉर्म में भारतीय खिलाड़ी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में भारतीय टीम के कई खिलाड़ी बेहतरीन फॉर्म में नजर आ रहे हैं। ईशान किशन ने बल्लेबाजी में शानदार प्रदर्शन किया है। जसप्रीत बुमराह ने गेंदबाजी में कमाल किया है और सेमीफाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ उनकी गेंदबाजी जीत की सबसे बड़ी वजह रही। हार्दिक पांड्या ने ऑलराउंडर के रूप में शानदार योगदान दिया है। वरुण चक्रवर्ती का फॉर्म थोड़ा गिरा है, लेकिन वे वापसी करने की क्षमता रखते हैं। इतिहास बदलने का मौका ऐसे में भारतीय टीम के पास फाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में पहली जीत दर्ज करने का सुनहरा मौका है। अगर भारत यह मुकाबला जीतता है तो न सिर्फ वह अपने खराब रिकॉर्ड को सुधार लेगा, बल्कि टी20 वर्ल्ड कप 2026 का खिताब भी अपने नाम कर सकता है। कप्तान सूर्यकुमार यादव की अगुआई में टीम इंडिया के पास इतिहास रचने और पुराने घावों को भरने का बड़ा मौका है।  

भारत ने तैयार किया शाहेद ड्रोन से भी खतरनाक और एडवांस हथियार, बढ़ेगा सैन्य शक्ति

 नई दिल्ली ईरान के सस्ते शाहेद-136 ड्रोन और अमेरिका के नए LUCAS ड्रोन ने युद्ध में कम कीमत पर बहुत बड़ा नुकसान पहुंचाया है. इन ड्रोनों से दुश्मन की महंगी एयर डिफेंस को भारी संख्या में हमला करके चकमा दिया जा सकता है. इसी तरह भारत भी अपना जवाब तैयार कर चुका है। बेंगलुरु की कंपनी न्यूस्पेस रिसर्च टेक्नोलॉजीज (NRT) ने शेषनाग-150 नाम का लंबी दूरी का स्वार्म अटैक ड्रोन बनाया है. यह ड्रोन पूरी तरह स्वदेशी है. विकास परीक्षण में तेजी से आगे बढ़ रहा है. यह ड्रोन पहली बार करीब एक साल पहले उड़ा था. अब ऑपरेशन सिंदूर जैसी हाल की घटनाओं के बाद इसकी जरूरत और ज्यादा तेज हो गई है। शेषनाग-150 ड्रोन क्या है और इसकी खासियतें शेषनाग-150 एक लंबी दूरी का लॉयटरिंग मुनिशन है, यानी यह लक्ष्य के ऊपर घूम सकता है. निगरानी कर सकता है. फिर हमला कर सकता है. इसकी रेंज 1000 किलोमीटर से ज्यादा है. यह 5 घंटे से अधिक समय तक हवा में रह सकता है. इसमें 25 से 40 किलोग्राम का वॉरहेड लगाया जा सकता है, जो इमारतों, वाहनों, रडार या सैनिकों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. यह ड्रोन स्वार्म अटैक कर सकता है, यानी कई ड्रोन साथ मिलकर हमला करते हैं। इससे दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम को ओवरलोड करके तोड़ा जा सकता है. ड्रोन खुद लक्ष्य ढूंढता है, ट्रैक करता है और हमला करता है. यह GPS बंद होने पर भी काम कर सकता है क्योंकि इसमें विजुअल नेविगेशन सिस्टम है, जो कैमरे से रास्ता देखता है। स्वार्म टेक्नोलॉजी और मदर-कोड की ताकत शेषनाग-150 का असली राज उसका स्वदेशी मदर-कोड है. यह एक खास सॉफ्टवेयर है जो कई ड्रोनों को एक साथ कंट्रोल करता है. ड्रोन आपस में बात करते हैं, खुद प्लान बनाते हैं और हमला करते हैं. अगर एक ड्रोन खराब हो जाए तो बाकी काम जारी रखते हैं. यह कोड ड्रोन को बहुत स्मार्ट बनाता है।  दुनिया में ऐसे स्वार्म ड्रोन कम हैं. भारत का यह सिस्टम ईरान के शाहेद से आगे है क्योंकि इसमें ज्यादा एडवांस्ड स्वार्म और GPS-डिनाइड नेविगेशन है. कंपनी ने इसे मॉड्यूलर बनाया है, यानी भविष्य में आसानी से बदलाव किए जा सकते हैं। क्यों अब यह ड्रोन इतना जरूरी हो गया पिछले कुछ सालों में यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व में संघर्ष और हाल ही में भारत-पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर ने दिखाया कि सस्ते ड्रोन कितने खतरनाक हैं. पाकिस्तान ने सैकड़ों सस्ते ड्रोन से भारत की एयर डिफेंस को थका देने की कोशिश की. लेकिन भारत ने कम लेकिन ज्यादा प्रभावी ड्रोन और लॉयटरिंग मुनिशन से पाकिस्तान के रडार और एयर डिफेंस को निशाना बनाया। ऑपरेशन सिंदूर में NRT की कंपनी ने अपनी अन्य ड्रोन क्षमताएं दीं, जिससे शेषनाग-150 पर फोकस बढ़ गया. अब भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के लिए यह ड्रोन बहुत महत्वपूर्ण है. यह सस्ता, ज्यादा संख्या में बनाया जा सकता है. दुश्मन के महंगे सिस्टम को आसानी से नष्ट कर सकता है। भविष्य में क्या होगा शेषनाग-150 अभी विकास और परीक्षण के दौर में है. हाल में वर्ल्ड डिफेंस शो में इसका मॉडल दिखाया गया. कंपनी इसे सेना को पेश कर रही है. अगर यह सफल हुआ तो भारत की ड्रोन युद्ध क्षमता बहुत मजबूत हो जाएगी।

भारत बना रहा तीनों सेनाओं का नया कमांड, ईरान जंग से कुवैत जैसी गलती न हो, अमेरिका से लिया सबक

नई दिल्ली भारत अब अपनी सेनाओं को और मजबूत बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. लंबे समय से मांग हो रही संयुक्त थिएटर कमांड (Joint Theatre Commands) को लागू करने की तैयारी तेज हो गई है. यह सुधार सेना, नौसेना और वायुसेना को एक साथ मिलाकर एकीकृत कमान बनाने का काम करेगा. यानी तीनों सेनाएं अलग-अलग नहीं बल्कि एक ही कमांडर के अधीन काम करेंगी. यह बदलाव भारत की सैन्य ताकत को बहुत बढ़ाएगा और दुश्मन के सामने बेहतर तैयारी करेगा। ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध से सबक लेते हुए भारत तैयार हो रहा मध्य पूर्व में चल रहे ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध से भारत ने बहुत कुछ सीखा है. इस युद्ध में हवाई हमलों और ड्रोन-मिसाइलों की संख्या बहुत ज्यादा है. ऐसे में भारत अपनी हवाई रक्षा और कमांड सिस्टम को मजबूत कर रहा है. इसी क्रम में तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल के लिए इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS) विकसित किया जा रहा है. यह सिस्टम ग्राउंड रडार, हवाई चेतावनी विमान (AEW&C) और फाइटर जेट्स से आने वाले डेटा को एक जगह इकट्ठा करेगा और पूरी हवाई स्थिति का एक साफ नक्शा दिखाएगा। ग्रुप कैप्टन अनुपम बनर्जी ने क्या कहा पूर्व फाइटर पायलट और वायुसेना के पूर्व प्रवक्ता ग्रुप कैप्टन अनुपम बनर्जी ने इंडिया टुडे को बताया कि रूस-यूक्रेन युद्ध हो या अब ईरान युद्ध – भारत हर बदलती स्थिति से सीख रहा है. खासकर एयर डिफेंस के मामले में तीनों सेनाओं के लिए एक ही स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि भारत के पास पहले से ही कई सिस्टम मौजूद हैं लेकिन अब उन्हें और एकीकृत किया जा रहा है ताकि कोई गलती न हो। IACCS क्या है और यह कैसे काम करेगा IACCS एक बहुत उन्नत और ऑटोमेटिक कमांड-कंट्रोल नेटवर्क है. यह भारत के लिए एक संयुक्त हवाई रक्षा कवच (एयर डिफेंस शील्ड) बनाएगा. इस सिस्टम से…     खतरे की तुरंत पहचान होगी।     दुश्मन के हवाई हमले को जल्दी नाकाम किया जा सकेगा.     फ्रेंडली फायर (अपनी ही सेना पर गलती से हमला) की घटनाएं रुकेंगी. ईरान युद्ध में अमेरिकी F-15 फाइटर जेट्स की क्रैश जैसी घटनाओं से बचने के लिए ही यह सिस्टम बनाया जा रहा है. IACCS आर्मी के अकाशतीर सिस्टम से भी जुड़ेगा ताकि तीनों सेनाओं में पूरी तरह तालमेल रहे। कौन बना रहा है और कब तैयार होगा? यह सिस्टम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) बना रहा है. BEL भारत की सबसे बड़ी डिफेंस कंपनी है जो रडार और कमांड सिस्टम में माहिर है. IACCS को 2026 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य है. एक बार यह काम कर गया तो भारतीय वायुसेना (IAF) किसी भी हवाई खतरे का बहुत तेज और प्रभावी जवाब दे सकेगी। संयुक्त थिएटर कमांड और IACCS का बड़ा फायदा संयुक्त थिएटर कमांड से भारत की सेनाएं अब क्षेत्रीय आधार पर काम करेंगी. जैसे उत्तरी थिएटर में चीन के खिलाफ, पश्चिमी थिएटर में पाकिस्तान के खिलाफ – एक ही कमांडर तीनों सेनाओं को नियंत्रित करेगा. IACCS इस कमांड को हवाई हिस्से में और मजबूत बनाएगा. इससे…     फैसले तेज होंगे.       संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल होगा.       दुश्मन के सामने एकजुट ताकत दिखेगी.     यह सुधार भारत को आधुनिक युद्ध के लिए तैयार कर रहा है जहां हवाई, जमीन और समुद्री ताकत एक साथ काम करती है। भविष्य में क्या होगा भारत की सेनाएं अब दुनिया के बड़े युद्धों से सीख रही हैं. अपनी कमजोरियों को दूर कर रही हैं. IACCS और संयुक्त थिएटर कमांड जैसे कदम भारत को न सिर्फ मजबूत बनाएंगे बल्कि पड़ोसी देशों को भी संदेश देंगे कि भारत की रक्षा व्यवस्था अब बहुत उन्नत हो गई है. 2026 तक IACCS चालू होने पर भारत की हवाई सुरक्षा दुनिया की सबसे बेहतरीन में शुमार हो जाएगी।  

2025 में AI ऐप्स के सबसे बड़े यूज़र बने भारतीय, फिर भी इस एक चीज़ में रह गए पीछे

नई दिल्ली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करने के मामले में भारत सबसे आगे निकल रहा है। भारत में सबसे ज्यादा जेनरेटिव AI ऐप डाउनलोड किए जा रहे हैं। मार्केट इंटेलिजेंस फर्म सेंसर टावर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में साल-दर-साल 207 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ भारत जेनरेटिव AI ऐप डाउनलोड करने के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा मार्केट बन गया है। देश में सबसे ज्यादा एआई ऐप और चैटबॉट डाउनलोड किए गए हैं। इससे देश को जेन-AI इस्तेमाल करने के मामले में अमेरिका से आगे निकलने में मदद मिली। भारत में डाउनलोड हुए सबसे ज्यादा एआई ऐप मार्केट इंटेलिजेंस फर्म सेंसर टावर की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में जेनरेटिव एआई ऐप सबसे ज्यादा भारत में डाउनलोड किए गए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया भर में लगभग 20 प्रतिशत या हर 5 में से 1 जेनरेटिव AI ऐप भारत में डाउनलोड हुआ है। हालांकि, यह बड़ा यूजर बेस रेवेन्यू में नहीं बदलता है। 2025 में इन ऐप खरीदारी में भारतीय यूजर्स का हिस्सा सिर्फ लगभग 1 प्रतिशत रहा था। रेवन्यू में रह गया पीछे यह अंतर उन कंपनियों के सामने आने वाली चुनौतियों के बारे में बताता है जो तेजी से अपनाए जाने को लंबे सम तक बने रहने वाले रेवेन्यू में बदलने की कोशिश कर रही हैं। ऐप डाउनलोड की ग्रोथ भले ही साल-दर-साल 320 प्रतिशत बढ़ी हो, लेकिन रेवेन्यू की ग्रोथ अभी काफी पीछे है। नवंबर में इन-ऐप खरीदारी में 22 प्रतिशत और दिसंबर में 18 प्रतिशत की गिरावट आई है। फ्री ऑफर का दिखा असर डाउनलोड में यह उछाल प्रमोशनल पुश और DeepSeek, Grok, और Meta AI जैसे नए AI प्लेटफॉर्म के आने से आया है। साथ ही, इसका एक बड़ी कारण भारत में, Google द्वारा अपने AI Pro प्लान का एक साल का फ्री एक्सेस देने भी है। इतना ही नहीं, Perplexity ने Airtel के साथ मिलकर अपना Pro प्लान भारतीय यूजर्स के लिए फ्री किया था। OpenAI ने भी कुछ समय के लिए ChatGPT Go का एक साल का फ्री एक्सेस दिया है। कंपनियों द्वारा दिया जा रहा फ्री ऑफर्स का असर दिख रहा है। नवंबर में फ्री ChatGPT Go एक्सेस के लॉन्च के बाद, भारत में ChatGPT से होने वाला रेवेन्यू 33 प्रतिशत और दिसंबर में 32 प्रतिशत कम हो गया। हालांकि, OpenAI प्लेटफॉर्म ने अपना दबदबा बनाए रखा और भारत में जेनरेटिव AI इन-ऐप रेवेन्यू का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अपने पास रखा। पिछले हफ्ते भारत में इंडिया AI इम्पैक्ट समिट का आयोजन किया गया। इसके दौरान भी AI पर काफी चर्चा हुई। कुछ समय पहले ही OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने बताया था कि भारत में चैटजीपीटी के हर हफ्ते 100 मिलियन से ज्यादा एक्टिव यूजर हैं। इससे भी साफ पता चलता है कि भारत में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। यूजर्स एआई ऐप्स और चैटबॉट का इस्तेमाल कर रहे हैं।

इंग्लैंड से तीसरी बार सेमीफाइनल में टकराएगा भारत, कौन होगा आगे?

नई दिल्ली आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में रविवार को टीम इंडिया ने वेस्टइंडीज को हराकर सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया है. अब 5 मार्च को सेमीफाइनल के नॉकआउट मैच में उसकी भिड़ंत इंग्लैंड के साथ होनी है. भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाली इस टक्कर में जो भी टीम जीतेगी वो फाइनल में चली जाएगी और 8 मार्च को अहमदाबाद में नजर आएगी. तो आइए आपको इन दोनों टीमों के बीच की राइवलरी के बारे में बताते हैं… पहले एक नजर सभी 4 टीमों पर इस बार 20 टीमों ने इस वर्ल्ड कप के महासमर में हिस्सा लिया था. इनमें से केवल 4 टीमें अब सेमीफाइनल के लिए सेलेक्ट हुई हैं. इनमें ग्रुप 1 से साउथ अफ्रीका और टीम इंडिया हैं. तो ग्रुप 2 से इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ने क्वालिफाई किया है |  पहला सेमीफाइल मैच 4 मार्च को कोलकाता में साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा, जबकि दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े में इंग्लैंड और भारत के बीच होगा |  लगातार तीसरी बार सेमीफाइनल में भारत एक अजब संयोग भी है. टीम इंडिया लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचा है. और दिलचस्प ये है कि तीनों बार उसका सामना इंग्लैंड से ही तय हुआ है. इससे पहले साल 2022 और साल 2024 में जब टीम इंडिया ने सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई किया तो फिर उसकी भिड़ंत इंग्लैंड से ही हुई थी. अब ये तीसरी बार दोनों की टक्कर है |  कैसा रहा है रिकॉर्ड दोनों टीमों की 2022 में जब सेमीफाइनल की भिड़ंत हुई तो टीम इंडिया की कमान रोहित शर्मा के हाथों में थी और इंग्लैंड के कप्तान बटलर थे. इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने हार्दिक पंड्या और कोहली की फिफ्टी के दम पर 168 रन बनाए थे. लेकिन इसके जवाब में इंग्लैंड ने 16 ओवर में ही 10 विकेट से भारत को धूल चटा दी थी. और भारत की उम्मीदों को तोड़ डाला था. फिर इंग्लैंड इस बार चैम्पियन भी बनी थी |  अब कहानी 2024 की अगली बार जब टी20 वर्ल्ड कप हुआ तो फिर से भारत और इंग्लैंड के बीच सेमीफाइनल का मैच खेला गया. लेकिन इस बार टीम इंडिया तैयार थी. कप्तान दोनों टीमों के सेम थे. लेकिन इस बार नतीजा भारत के पक्ष में आया. पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने रोहित शर्मा की फिफ्टी के दम पर 171 रन बनाए. इसके जवाब में इंग्लैंड 103 पर ही सिमट गया. अक्षर और कुलदीप ने इस मैच में 3-3 विकेट झटके थे. बुमराह को 2 सफलता मिली थी |  अब तीसरी भिड़ंत अब लगातार तीसरी बार दोनों टीमें सेमीफाइनल में हैं. इंग्लैंड की टीम सुपर-8 में एक भी मैच नहीं हारी है और अपने ग्रुप की टॉपर रही है. लेकिन भारत को सुपर-8 के पहले मैच में ही साउथ अफ्रीका के हाथों हार झेलनी पड़ी थी. लेकिन फिर भारत ने बाउंस बैक किया और लगातार दो मैच जीतकर सेमीफाइनल का टिकट हासिल किया |  कैसा है टी20 वर्ल्ड कप का रिकॉर्ड सेमीफाइनल का आंकड़ा तो आपने जान लिया. लेकिन अब ये भी जानना जरूरी है कि आखिर टी20 वर्ल्ड कप में दोनों टीमों के आंकड़े क्या कहते हैं. टी20 वर्ल्ड कप में दोनों के बीच पांच मैच हुए हैं, जिसमें भारत ने तीन और इंग्लैंड ने दो जीते हैं. हालांकि सेमीफाइनल में 1-1 की बराबरी रही है |  अब देखना होगा कि वानखेड़े में दोनों टीमें कैसा प्रदर्शन करती हैं. इस बार इंग्लैंड की कमान हैरी ब्रूक के हाथों में है, जबकि टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव हैं | 

खामेनेई की मौत के बाद भारत में बढ़ा हाईअलर्ट, कानून-व्यवस्था के उल्लंघन पर सख्त कदम उठाने की चेतावनी

नई दिल्ली  मध्य पूर्व के हालात को देखते हुए भारत में हाईअलर्ट जारी किया गया है। गृह मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों ने सभी राज्यों को संदिग्ध लोगों पर नजर रखने और प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस फोर्स तैनात करने का निर्देश दिया है, जिससे देश में शांति व्यवस्था बनी रहे। अमेरिका-इजरायल के हमले में मारे गए ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के समर्थन में देश के विभिन्न राज्यों में प्रदर्शन हो रहे हैं। कुछ लोग सोशल मीडिया के माध्यम से देश में भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं, राज्यों में पुलिस-प्रशासन ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर भी सख्त चेतावनी दी है।  नागरिकों से कहा गया है कि वे किसी भी तरह का आपत्तिजनक, भड़काऊ या अनचाहा कंटेंट पोस्ट, शेयर या फॉरवर्ड करने से बचें। अफवाहें और भ्रामक संदेश माहौल को बिगाड़ सकते हैं और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकते हैं। पुलिस-प्रशासन ने कहा कि शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से अपनी बात रखने के अधिकार का सम्मान किया जाता है लेकिन हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाना और सुरक्षा बलों के साथ टकराव किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। ऐसी घटनाओं से जान-माल का नुकसान होता है और पूरे समाज को परेशानी होती है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी भी तरह के उल्लंघन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल तत्वों, भड़काने वालों और असामाजिक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में कर्नाटक के बांदीपुरा जिले में मौजूदा हालात को देखते हुए स्थानीय पुलिस ने आम नागरिकों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग की अपील की है। पुलिस-प्रशासन ने कहा है कि क्षेत्र में शांति व सुरक्षा बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, इसलिए लोग किसी भी ऐसी गतिविधि से दूर रहें जिससे सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका हो। पुलिस की ओर से जारी अपील में कहा गया है कि लोग तोड़फोड़, दंगा-फसाद, पत्थरबाजी या किसी भी प्रकार की गड़बड़ी में शामिल न हों। ऐसा करना न केवल कानून के खिलाफ है, बल्कि इससे आम जनता, व्यापारियों, विद्यार्थियों और दिहाड़ी मजदूरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हिंसा और अशांति की वजह से शैक्षणिक संस्थानों के बंद होने, आवाजाही में रुकावट और आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ने की संभावना रहती है।

तेल की कीमतों में उबाल, बाजार में हलचल: क्या भारतीय निवेशकों को चिंता करनी चाहिए? इतिहास से क्या सिखें?

नई दिल्ली  क्या पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भारत की अर्थव्यवस्था की रफ्तार थाम सकता है? मिसाइल हमलों और जवाबी कार्रवाई की खबरों के बीच वैश्विक बाजारों में घबराहट साफ दिख रही है. 2 मार्च 2026 को निफ्टी 50 और सेंसेक्स करीब 1.8% तक फिसल गए, सरकारी बॉन्ड यील्ड में हल्की तेजी आई, ब्रेंट क्रूड लगभग 6% उछला और सोने की कीमतें 3% बढ़ीं. सवाल यह है कि क्या यह उथल-पुथल भारत की लंबी अवधि की विकास यात्रा को प्रभावित करेगी, या यह केवल एक अस्थायी झटका है? हालिया विश्लेषण में एक्सिस एसेट मैनेजमेंट (Axis Asset Management) ने साफ किया है कि भले ही अमेरिका-इजराइल बनाम ईरान टकराव ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई हो, लेकिन इतिहास बताता है कि ऐसे संघर्ष भारतीय शेयर बाजारों को लंबे समय तक पटरी से नहीं उतार पाए हैं. कच्चा तेल: भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम इस एनालिसिस के मुताबिक, भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. इसलिए पश्चिम एशिया में अस्थिरता का सीधा असर तेल की कीमतों पर पड़ता है. यदि ईरान होरमुज जलडमरूमध्य को बाधित करता है, तो यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बड़ा खतरा होगा. दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल और 30% एलएनजी का व्यापार इसी रास्ते से गुजरता है, और भारत की करीब आधी ऊर्जा आपूर्ति भी इसी मार्ग पर निर्भर है. तेल की कीमतों में तेज उछाल से भारत का चालू खाता घाटा बढ़ सकता है, महंगाई दबाव में आ सकती है और विमानन, पेंट, सीमेंट तथा केमिकल जैसे सेक्टरों की लागत बढ़ सकती है. हालांकि, पिछले अनुभव बताते हैं कि जब तक तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची नहीं टिकतीं, तब तक शेयर बाजार स्थायी गिरावट का शिकार नहीं होते. रूस–यूक्रेन युद्ध के दौरान भी ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गया था, लेकिन शुरुआती गिरावट के बाद बाजार संभल गए और साल अंत में सकारात्मक रिटर्न दिया. रुपये और विदेशी निवेश का असर भू-राजनीतिक तनाव के समय अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव आता है. भारतीय रुपया भी इससे अछूता नहीं रहता. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली से रुपये में अस्थायी कमजोरी देखी जा सकती है. फिर भी भारत की मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार स्थिति, नियंत्रित चालू खाता घाटा और संतुलित राजकोषीय स्थिति सुरक्षा कवच का काम करती है. 2013 के टेपर टैंट्रम, 2020 की महामारी और 2022 के युद्ध जैसे दौर में भी रुपया दबाव में आया, लेकिन शेयर बाजारों में लंबी अवधि की गिरावट नहीं आई. आरबीआई की भूमिका और बाजार की मानसिकता रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (Reserve Bank of India) ऐसे समय में स्थिरता का अहम स्तंभ बनता है. केंद्रीय बैंक ने अतीत में अस्थायी महंगाई झटकों को नजरअंदाज करते हुए मूल महंगाई और विकास की स्थिरता पर ध्यान केंद्रित किया है. तरलता प्रबंधन के जरिए बाजार में भरोसा बनाए रखा गया है, ताकि घबराहट स्थायी संकट में न बदले. पिछले 15 वर्षों का इतिहास देखें तो हर बड़े संघर्ष के दौरान शुरुआती गिरावट आई, लेकिन बाजारों ने जल्द ही संतुलन पा लिया.     2014 के क्रीमिया संकट     2016 की सर्जिकल स्ट्राइक     2019 के बालाकोट एयरस्ट्राइक     2022 के रूस–यूक्रेन युद्ध     2023 के इजराइल–हमास संघर्ष इन सबके दौरान यही पैटर्न दिखा कि बाजार जल्द ही पटरी पर लौट आया. यहां तक कि 2025 के ऑपरेशन सिंदूर के समय भी शुरुआती घबराहट के बाद स्थिरता लौट आई. असल में बाजार भावनाओं से ज्यादा इस बात का आकलन करते हैं कि आर्थिक असर कितना लंबा और गहरा होगा. जब यह स्पष्ट हो जाता है कि सप्लाई चेन पर असर सीमित है और घरेलू मांग मजबूत बनी हुई है, तो जोखिम प्रीमियम घटने लगता है और निवेशक दोबारा सक्रिय हो जाते हैं. लंबी अवधि के निवेशकों के लिए संदेश इतिहास बताता है कि संघर्षों के समय घबराकर बाजार से बाहर निकलना अक्सर नुकसानदेह साबित हुआ है. जिन्होंने गिरावट के दौरान निवेश छोड़ा, वे बाद की तेजी से चूक गए. इसलिए अनुशासन, विविधीकरण और लंबी अवधि की सोच ही ऐसे दौर में सबसे कारगर रणनीति मानी गई है. ईरान वाला तनाव गंभीर जरूर है, लेकिन भारतीय बाजारों के लिए यह कोई अनजाना अनुभव नहीं. शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश की विकास की कहानी घरेलू खपत, पूंजीगत व्यय, डिजिटलीकरण और मैन्युफैक्चरिंग विस्तार पर टिकी है. ऐसे में हर भू-राजनीतिक झटका स्थायी मोड़ नहीं, बल्कि अस्थायी विराम साबित हुआ है.  

कनाडा से भारत को मिलेगा यूरेनियम, पीएम मोदी और कार्नी की मुलाकात में कई महत्वपूर्ण समझौते हुए तय

 नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके कनाडाई समकक्ष मार्क कार्नी ने सोमवार को दिल्ली में मुलाकात की. इस दौरान दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर हुए. बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में पीएम मोदी ने कहा कि दोनों देशों के बीच नागरिक परमाणु ऊर्जा में लंबी अवधि के लिए यूरेनियम सप्लाई का एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है. दोनों देश छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर और उन्नत रिएक्टरों पर साथ काम करेंगे. -कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, 'पिछले दशक में पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बन गया है. यहां प्रति व्यक्ति आय का विकास ऐसा रहा है जो इतिहास में बहुत कम देखा गया है. कनाडा आपके इसी उत्साह और उद्देश्य की भावना को साझा करता है. मुझे लगता है कि इस नए युग में सफलता का मार्ग 2023 में आपके G20 अध्यक्षता के विषय ‘One Earth, One Family, One Future’ में अच्छे से दिखाया गया है, क्योंकि हमारे समय की चुनौतियों को अकेला कोई देश हल नहीं कर सकता.' -कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा, 'पिछले वर्ष में कनाडा और भारत की सरकारों के बीच जो संवाद हुआ है, वह पिछले दो दशकों में हुए सभी संवादों से अधिक है. यह केवल संबंधों का नवीनीकरण नहीं है, बल्कि नए उत्साह, ध्यान और दूरदर्शिता के साथ एक मूल्यवान साझेदारी का विस्तार है. यह दो आत्मविश्वासी देशों के बीच एक साझेदारी है, जो अपने भविष्य की दिशा स्वयं तय कर रहे हैं.' -पीएम मोदी ने कहा कि दुनिया में चल रहे कई तनावों पर भारत की स्थिति स्पष्ट है. हम हमेशा शांति और स्थिरता बनाए रखने की बात करते रहे हैं, और जब दो लोकतंत्र एक साथ खड़े होते हैं, तो शांति की आवाज और मजबूत हो जाती है. पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति हमारे लिए गहरी चिंता का विषय है. भारत सभी विवादों को संवाद और कूटनीति के माध्यम से सुलझाने का समर्थन करता है और क्षेत्र में सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी देशों के साथ करीबी सहयोग जारी रखेगा. -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कनाडा भारत के लिए इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार है. हम उनका भारतीय महासागर रिम एसोसिएशन में डायलॉग पार्टनर बनने में रुचि दिखाने का स्वागत करते हैं, जिससे हमारी समुद्री सहयोग में नई गहराई आएगी. उन्होंने कहा कि आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरवाद सिर्फ दोनों देशों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के लिए गंभीर और साझा चुनौती हैं. इनके खिलाफ हमारी करीबी सहयोग वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए अहम है. -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे संबंधों की सबसे बड़ी ताकत लोगों के बीच जुड़ाव है. आज हमने इन्हें और मजबूत करने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वास्थ्य, कृषि और इनोवेशन के क्षेत्रों में कई विश्वविद्यालयों के बीच नए साझेदारी की घोषणा की गई है. इसके अलावा, कनाडाई विश्वविद्यालयों द्वारा भारत में कैंपस खोलने पर भी सहमति बनी है. आदिवासी और जनजातीय समुदाय हमारे साझा सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. दोनों पक्षों के बीच आज सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने के लिए एक एमओयू भी हस्ताक्षरित किया गया. -प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में इंडिया-कनाडा पल्स प्रोटीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि रक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में बढ़ता सहयोग हमारे गहरे आपसी भरोसे और संबंधों की परिपक्वता का प्रतीक है. दोनों देश रक्षा उद्योग, समुद्री क्षेत्र की निगरानी और सैन्य आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए काम करेंगे. इसी उद्देश्य से आज इंडिया-कनाडा डिफेंस डायलॉग स्थापित करने का निर्णय लिया गया. -CAMECO के अध्यक्ष टिम गिट्ज़ेल और कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पट्टनाइक ने परमाणु ऊर्जा विभाग और CAMECO के बीच यूरेनियम अयस्क आपूर्ति समझौते के दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया. -प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, 'आज साइन किए गए क्रिटिकल मिनरल्स पर MoU से सप्लाई चेन की मजबूती बढ़ेगी. अंतरिक्ष क्षेत्र में हम दोनों देशों की स्टार्टअप्स और उद्योगों को जोड़ेंगे. ऊर्जा क्षेत्र में हम अगले स्तर की साझेदारी बना रहे हैं, जिसमें हाइड्रोकार्बन्स, रिन्यूएबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.' -पीएम मोदी ने कहा, 'हम टेक्नोलॉजी और इनोवेशन में स्वाभाविक साझीदार हैं. भारत-कनाडा इनोवेशन पार्टनरशिप के तहत हम नए विचारों को वैश्विक समाधान में बदलेंगे. मैं प्रधानमंत्री कार्नी का धन्यवाद करता हूं कि उन्होंने पिछले महीने भारत में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट की सफलता में कनाडा का महत्वपूर्ण योगदान दिया. हम AI के साथ-साथ क्वांटम, सुपरकंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स में सहयोग बढ़ाएंगे.' -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'हमें खुशी है कि कनाडा ने अंतरराष्ट्रीय सोलर अलायंस और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस में शामिल होने का निर्णय लिया है. अपने साझा प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए हम इस साल भारत-कनाडा रिन्यूएबल एनर्जी और स्टोरेज समिट आयोजित करेंगे. नागरिक परमाणु ऊर्जा में हमने लंबी अवधि के लिए यूरेनियम सप्लाई का एक महत्वपूर्ण समझौता किया है. हम छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर और उन्नत रिएक्टरों पर भी साथ काम करेंगे.' -कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू और केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने CEPA के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस और संयुक्त पल्स प्रोटीन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस पर डिक्लेरेशन ऑफ इंटेंट के दस्तावेजों का आदान-प्रदान किया. -प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, 'मैं अपने मित्र प्रधानमंत्री कार्नी को हमारे सहयोग में बढ़ती गति के लिए श्रेय देता हूं. भारत और कनाडा लोकतांत्रिक मूल्यों में अडिग विश्वास रखते हैं. हम विविधता का जश्न मनाते हैं. मानवता की भलाई हमारी साझा दृष्टि है. यही दृष्टि हमें हर क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है. आज हमने इस दृष्टि को अगले स्तर की साझेदारी में बदलने पर चर्चा की. हमारा लक्ष्य 2030 तक व्यापार को 50 बिलियन डॉलर तक ले जाना है. आर्थिक सहयोग की पूरी संभावनाओं को अनलॉक करना हमारी प्राथमिकता है. इसलिए हमने जल्द ही व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement) को अंतिम रूप देने का निर्णय लिया है. इससे दोनों देशों में नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा होंगे. कनाडाई पेंशन फंड्स ने भारत में 100 बिलियन डॉलर का निवेश किया है. यह उनके भारत की विकास कहानी में गहरे विश्वास का प्रतीक है. आज हम दोनों देशों के बिजनेस लीडर्स से भी मिलेंगे. उनके सुझाव हमारी आर्थिक साझेदारी को … Read more

कोलकाता में बारिश से सवाल, सेमीफाइनल कौन खेलेगा? जानें रविवार का मौसम अपडेट

कोलकाता कोलकाता के ऐतिहासिक ईडन गार्डन्स में रविवार 1 मार्च 2026 को टी-20 वर्ल्ड कप का एक ऐसा मुकाबला होने जा रहा है, जिसे ‘वर्चुअल क्वार्टरफाइनल’ कहना गलत नहीं होगा.  डिफेंडिंग चैंपियन भारत और वेस्टइंडीज के बीच होने वाली यह जंग तय करेगी कि सेमीफाइनल की अंतिम टिकट किसे मिलेगी.  भारतीय प्रशंसकों की नजरें न केवल बल्लेबाजों के छक्कों पर हैं, बल्कि कोलकाता के आसमान पर भी टिकी हैं, क्योंकि बारिश खेल का पूरा समीकरण बिगाड़ सकती है. सुपर-8 चरण के रोमांचक मोड़ पर भारत और वेस्टइंडीज दोनों के 2-2 अंक हैं.  दक्षिण अफ्रीका इस ग्रुप से पहले ही सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की कर चुका है. अब दूसरे स्थान के लिए मुकाबला सीधा है. अगर भारत जीता तो  सीधे 4 अंकों के साथ सेमीफाइनल में प्रवेश कर जाएगा और नेट रन रेट (NRR) की कोई भूमिका नहीं रहेगी. अगर वेस्टइंडीज जीता तो  कैरेबियाई टीम 4 अंकों के साथ आगे बढ़ेगी और भारत टूर्नामेंट से बाहर हो जाएगा. अगर हुई बारिश, तो कौन मारेगा बाजी? क्रिकेट प्रेमियों के लिए सबसे डरावना सवाल यही है कि अगर कोलकाता में बारिश हुई और मैच धुल गया तो क्या होगा? आईसीसी के नियमों के अनुसार, सुपर-8 मैचों के लिए कोई रिजर्व डे  नहीं रखा गया है. अगर मैच रद्द होता है, तो दोनों टीमों को 1-1 अंक मिलेगा, जिससे दोनों के 3-3 अंक हो जाएंगे। ऐसी स्थिति में फैसला नेट रन रेट से होगा. वेस्टइंडीज का NRR: +1.791है और  भारत का NRR: -0.100 स्पष्ट है कि वेस्टइंडीज का रन रेट भारत से कहीं बेहतर है. इसलिए, मैच धुलने की स्थिति में वेस्टइंडीज सेमीफाइनल के लिए क्वालीफाई कर जाएगा और टीम इंडिया का वर्ल्ड कप सफर समाप्त हो जाएगा. ईडन गार्डन्स का मौसम और पिच रिपोर्ट अच्छी खबर यह है कि रविवार को कोलकाता में बारिश की संभावना बहुत कम है. मौसम विभाग और विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार बारिश की संभावना: 0% है. संडे को दिन में अधिकतम 34°C और मैच के दौरान 25-26°C के आसपास रहने की उम्मीद है. ईडन की पिच बल्लेबाजों के लिए स्वर्ग मानी जाती है, लेकिन शाम के समय स्पिनर्स को भी मदद मिल सकती है. टीम इंडिया का शानदार फॉर्म भारत ने जिम्बाब्वे के खिलाफ 256/4 का विशाल स्कोर बनाकर अपनी फॉर्म का लोहा मनवाया है. अभिषेक शर्मा (55 रन), हार्दिक पांड्या (नाबाद 50 रन) और तिलक वर्मा (44 रन) ने जिस तरह की बल्लेबाजी की, उसने प्रशंसकों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं.  कप्तान सूर्यकुमार यादव और कोच गंभीर की रणनीति अब वेस्टइंडीज के पावर-हिटर को रोकने पर होगी. एक बात तो साफ है कि टीम इंडिया के लिए रविवार का दिन “करो या मरो” का है उन्हें केवल अपनी काबिलियत पर भरोसा करना होगा, क्योंकि कुदरत का साथ न मिलने की सूरत में बाजी वेस्टइंडीज के हाथ लग सकती है.