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क्या जंग के मुहाने पर हैं अमेरिका और ईरान: सैन्य ताकत, पलटवार की योजना और युद्ध के असर

अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष की आहट बढ़ती जा रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने दो एयरक्राफ्ट कैरियर बेड़ों को ईरान की खाड़ी पर तैनात करने  के आदेश दे दिए। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। ईरान ने भी होर्मुज जलडमरूमध्य में एक युद्धाभ्यास कर इस क्षेत्र को पूरी तरह बंद करने का संकेत दिया, जो वैश्विक तेल सप्लाई में बाधा पहुंचाने वाला कदम साबित हो सकता है। यानी अमेरिका से लेकर यूरोप और अफ्रीका से लेकर पूरे एशिया के लिए आने वाले दिन कूटनीतिक स्तर पर काफी अहम होने वाले हैं। ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर अमेरिका और ईरान के बीच हालिया विवाद क्यों और कब से उभरा है? अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं? ईरान इस स्थिति से निपटने के लिए कैसे तैयारी कर रहा है? अगर दोनों देशों के बीच संघर्ष भड़कता है तो इसका क्या असर हो सकता है? पहले जानें- ईरान-अमेरिका के बीच कैसे-क्यों भड़का है तनाव? ईरान-अमेरिका के बीच तनाव ईरान में महंगाई को लेकर विरोध प्रदर्शनों और उसके खिलाफ सरकारी कार्रवाई के बीच बढ़ा। तनाव की एक और वजह इस दौरान अमेरिका की ओर से पश्चिम एशिया में की गई सैन्य तैनाती भी रही, जिसके जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के अयातुल्ला शासन को खत्म करने की चेतावनी दे रहे हैं। इन सबके साथ ही ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा से ही दोनों पक्षों में तनाव का बड़ा कारण रहा है। 1. परमाणु कार्यक्रम अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना चाहता है और राष्ट्रपति ट्रंप एक नए परमाणु समझौते के लिए दबाव बना रहे हैं। 2. आंतरिक विरोध प्रदर्शन दिसंबर 2025 में ईरान में बढ़ती कीमतों और गिरती मुद्रा के खिलाफ शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों पर ईरानी सरकार की सख्त कार्रवाई हुई। इसमें हजारों लोगों के मारे जाने की खबर है। बताया जाता है कि इन घटनाओं को खुद अमेरिका ने भड़काया, ताकि वह ईरान के मामलों में दखल दे सके। 3. क्षेत्रीय सुरक्षा ईरान का लगातार बढ़ता बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और इस्राइल जैसे अमेरिकी सहयोगियों पर बढ़ता खतरा भी दोनों देशों के बीच तनाव का बड़ा कारण है। इसके अलावा सऊदी अरब, यूएई भी अलग-अलग मौकों पर ईरान को लेकर खतरा जताते रहे हैं। अमेरिका की तरफ से कौन से हथियार और बेड़े पश्चिम एशिया की तरफ भेजे गए हैं? अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के सूत्रों और सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से अमेरिकी मीडिया ने दावा किया है कि ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में 2003 के इराक आक्रमण के बाद से अब तक की सबसे बड़ी सैन्य लामबंदी की गई है। इन सैन्य बेड़ों में अमेरिका के सबसे घातक एफ-22 रैप्टर लड़ाकू विमान से लेकर सबसे बड़े और खतरनाक युद्धपोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड शामिल हैं। 1. नौसैनिक बेड़े विमानवाहक पोत: अमेरिका ने इस क्षेत्र में दो परमाणु-संचालित विमानवाहक पोत तैनात किए हैं। पहला यूएसएस अब्राहम लिंकन है, जो जनवरी के अंत में अरब सागर पहुंच चुका है। इसके बाद दुनिया के सबसे बड़े और आधुनिक विमानवाहक पोत यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड को भी क्षेत्र में पहुंचने का आदेश दिया गया है। यह मौजूदा समय में अटलांटिक महासागर से पश्चिम एशिया के रास्ते पर है। विध्वंसक पोत: वर्तमान में क्षेत्र में कुल 13 विध्वंसक पोत तैनात किए जा चुके हैं। इनमें यूएसएस अब्राहम लिंकन के साथ आए तीन प्रमुख पोत- यूएसएस फ्रैंक ई. पीटरसन जूनियर, यूएसएस स्प्रुआंस और यूएसएस माइकल मर्फी शामिल हैं। ये पोत उन्नत रडार और बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणालियों से लैस हैं। 2. वायु शक्ति और लड़ाकू विमान लड़ाकू विमान: अमेरिका ने बड़ी संख्या में एफ-22 रैप्टर और एफ-35 लाइटनिंग II जैसे स्टील्थ फाइटर जेट तैनात किए हैं। इनके अलावा एफ-15 और एफ-16  फैल्कन लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन भी भेजी गई हैं। सहायक विमान: हवाई अभियानों के संचालन के लिए ई-3 सेंट्री (अवाक्स) टोही विमान, केसी-135 रिफ्यूलिंग टैंकर और ई-11 युद्धक्षेत्र संचार विमान तैनात किए गए हैं। ड्रोन और बमवर्षक: जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस पर कम से कम पांच एमक्यू-9 रीपर ड्रोन देखे गए हैं। इसके अलावा, डिएगो गार्सिया द्वीप पर बी-2 स्टील्थ बमवर्षक विमानों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया है। इन्हीं बी-2 बमवर्षक विमानों के जरिए अमेरिका ने पिछले साल ऑपरेशन मिडनाइट हैमर को अंजाम दिया था और ईरान के परमाणु ठिकानों पर जीबीयू-57 बम बरसाए थे। 3. मिसाइल और रक्षा प्रणालियां हमलावर मिसाइलें: अमेरिकी युद्धपोत टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस हैं, जिनका इस्तेमाल पहले भी ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले के दौरान रक्षा व्यवस्थाओं को ध्वस्त करने के लिए किया जा चुका है। हवाई रक्षा प्रणालियां: ईरानी मिसाइलों के जवाबी हमले से सुरक्षा के लिए पेंटागन ने क्षेत्र में अतिरिक्त पैट्रियट और एयर डिफेंस सिस्टम (THAAD) हवाई रक्षा प्रणालियां तैनात की हैं। इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: विमानवाहक पोतों पर इलेक्ट्रॉनिक-वारफेयर विमान और एएन/एसएलक्यू-25ए निक्सी जैसे डिकॉय सिस्टम भी मौजूद हैं, जो दुश्मन के हथियारों को भ्रमित कर सकते हैं और अपने किसी भी हथियार को हमले से बचा सकते हैं। मौजूदा समय में कहां है अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा? अमेरिका का यह सैन्य जमावड़ा ईरान के इर्द-गिर्द कई रणनीतिक स्थानों पर तैनात है, इनमें प्रमुख एयरबेस और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र जॉर्डन, सऊदी अरब और ओमान के पास स्थित हैं। इसके अलावा अरब सागर, हिंद महासागर, बहरीन और कतर में भी अमेरिका के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और सुविधाएं मौजूद हैं। पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में लगभग 30,000 से 40,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ईरान कैसे कर रहा अमेरिका के हमले का जवाब देने की तैयारी? अमेरिका के बढ़ते सैन्य दबाव के जवाब में ईरान ने भी अपनी सैन्य और रणनीतिक तैयारियां तेज कर दी हैं। 1. सैन्य हाई अलर्ट और जवाबी हमले की चेतावनी 25 जनवरी को ईरान ने घोषणा की कि उसके सशस्त्र बल पूर्ण सतर्कता की स्थिति में आ गए हैं। ईरान के संयुक्त राष्ट्र मिशन ने चेतावनी दी है कि यदि उसे उकसाया गया, तो वह ऐसा जवाब देगा जैसा पहले कभी नहीं देखा गया। 2. रणनीतिक नौसैनिक अभ्यास होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान ने अपनी ताकत दिखाने के लिए कई लाइव-फायर ड्रिल्स की हैं। ईरान का यह अभ्यास इसलिए भी अहम है, क्योंकि … Read more

ईरान की शर्तों पर होगी अमेरिका से बातचीत, खामनेई तय करेंगे फैसले का समय और स्थान

मस्कट: मिडिल ईस्ट में जंग और बातचीत एक बार फिर आमने-सामने खड़ी नजर आ रही है. अमेरिका और ईरान के बीच महीनों की तल्खी, धमकियों और सैन्य तनाव के बाद आखिरकार ओमान में बातचीत हुई. यह वही दौर है, जब बीते साल अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर सैन्य हमले किए थे और पूरा इलाका युद्ध के मुहाने पर पहुंच गया था. खाड़ी देश ओमान की राजधानी मस्कट में शुक्रवार को अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच अप्रत्यक्ष वार्ता हुई. दोनों देश आमने-सामने नहीं बैठे, बल्कि ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी संदेशवाहक की भूमिका में रहे. यही मॉडल पहले भी ईरान-अमेरिका बातचीत में अपनाया जाता रहा है. हालांकि इस बातचीत के ठीक बाद अमेरिका ने नए प्रतिबंध ठोंक दिए. बातचीत को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके बाद दोनों पक्ष आगे और बातचीत करने पर सहमत हुए हैं. इसे फिलहाल एक ‘सकारात्मक लेकिन सतर्क शुरुआत’ माना जा रहा है. कौन-कौन था बातचीत में शामिल? ईरान की ओर से विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हुए, जबकि अमेरिका की तरफ से विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति ट्रंप के दामाद जेरेड कुश्नर मौजूद रहे. ओमान की सरकारी तस्वीरों में अमेरिकी सेंट्रल कमांड के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर की मौजूदगी भी दिखी, जिसने इस बातचीत के सैन्य महत्व को और बढ़ा दिया. बातचीत से पहले धमकी दी गईं बातचीत से ठीक पहले माहौल बेहद गर्म था. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुली चेतावनी दे चुके थे कि अगर ईरान ने परमाणु समझौते पर दस्तखत नहीं किए या प्रदर्शनकारियों पर हिंसा की, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई कर सकता है. वहीं ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की ओर से भी सख्त तेवर दिखाए गए थे. अराघची ने बातचीत से पहले साफ कहा कि ईरान ‘खुली आंखों से कूटनीति’ में उतरा है और उसे पिछले साल की घटनाएं अच्छे से याद हैं. अपनी शर्तों पर बातचीत कर रहा ईरान ईरान ने ओमान के जरिए अमेरिका को एक शुरुआती प्रस्ताव सौंपा, जिसे मौजूदा हालात संभालने की कोशिश बताया गया. अमेरिका की प्रतिक्रिया इस प्रस्ताव पर अगली बातचीत में ईरान को दी जानी है. ईरान ने साफ कर दिया कि वह सिर्फ अपने परमाणु कार्यक्रम पर बात करना चाहता है. बैलिस्टिक मिसाइल, क्षेत्रीय संगठन और घरेलू विरोध जैसे मुद्दे उसके लिए बातचीत के एजेंडे में नहीं हैं. इसके उलट अमेरिका चाहता है कि मिसाइल कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और मानवाधिकार जैसे मुद्दे भी शामिल हों. हालांकि ईरान किसी भी कीमत पर झुक नहीं रहा है. अमेरिका ने ईरान पर लगाए नए प्रतिबंध दिलचस्प बात यह रही कि बातचीत खत्म होते ही अमेरिका ने ईरान पर नए प्रतिबंध लगा दिए. ईरानी तेल ढोने वाले 14 जहाजों और कई कंपनियों को निशाना बनाया गया. अमेरिका का आरोप है कि ईरान तेल से कमाए पैसे का इस्तेमाल दुनिया भर में अस्थिरता फैलाने और अपने ही नागरिकों पर दमन के लिए करता है. वहीं व्हाइट हाउस ने जानकारी दी कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी शासन के खिलाफ एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर साइन किए हैं, जिसमें उन देशों पर टैरिफ लगाने की बात कही गई है जो ईरान से सामान या सेवाएं खरीदना जारी रखते हैं.

इरान में महिलाओं के लिए बाइक चलाने की अनुमति, एक ऐतिहासिक बदलाव

तेहरान   ईरान की सरकार ने महिलाओं के लिए एक क्रांतिकारी कदम उठाते हुए उन्हें कानूनी रूप से मोटरसाइकिल चलाने की अनुमति दे दी है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, ईरान के मंत्रिमंडल ने इस ऐतिहासिक प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिससे अब महिलाओं को भी दोपहिया वाहन चलाने के लिए आधिकारिक लाइसेंस जारी किए जा सकेंगे। दशकों पुरानी कानूनी अस्पष्टता का अंत ईरान में अब तक महिलाओं के मोटरसाइकिल चलाने पर कोई सीधा कानूनी प्रतिबंध नहीं था, लेकिन प्रशासन उन्हें लाइसेंस देने से इनकार कर देता था। इस अस्पष्टता के कारण महिलाएं सड़क पर वाहन नहीं चला पाती थीं। उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने मंगलवार को यातायात संहिता (Traffic Code) को स्पष्ट करने वाले प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर इस वर्षों पुराने गतिरोध को समाप्त कर दिया है। घायल होने पर महिलाओं को ही माना जाता था दोषी लाइसेंस न होने के कारण ईरानी महिलाओं को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता था। यदि सड़क हादसे में कोई महिला घायल होती थी, तो लाइसेंस के अभाव में उसे ही जिम्मेदार मान लिया जाता था। नए कानून के लागू होने से महिलाओं को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और दुर्घटनाओं की स्थिति में उन्हें न्याय मिल सकेगा। ट्रैफिक पुलिस के लिए अनिवार्य निर्देश ईरानी समाचार एजेंसी इलना (ILNA) के अनुसार, सरकार ने यातायात पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं…     महिला आवेदकों को व्यावहारिक (Practical) प्रशिक्षण देना होगा।     पुलिस की सीधी देखरेख में ड्राइविंग परीक्षा आयोजित करनी होगी।     योग्य महिलाओं को अनिवार्य रूप से मोटरसाइकिल चालक लाइसेंस जारी करना होगा।  

ईरान में धमाकों में 5 की मौत और कई घायल

तेहरान. कई महीनों से प्रदर्शन से परेशान ईरान को एक बार फिर झटका लगा है। दक्षिणी ईरान के समुद्र किनारे वाले शहर बंदर अब्बास में शनिवार को जोरदार धमाका हुआ है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक यह धमाका गैस के रिसाव की वजह से हुआ। इसके अलावा इराक सीमा के पास स्थित अहवाज शहर में भी गैस के रिसाव से एक धमाका हुआ। दोनों धमाकों में कुल मिलाकर पांच लोगों की मौत हो गई है, जबकि 14 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। कुछ रिपोर्ट्स में सात धमाकों की जानकारी सामने आई है। इनके मुताबिक राजधानी तेहरान, बंदर अब्बास, तबरीज, कोम, अहवाज, नंताज और परंद में धमाके हुए हैं। ईरान सरकार की तरफ से इनकी पुष्टि नहीं की गई है। ईरान के अग्निशमन विभाग के प्रमुख मोहम्मद अमीन लियाकत ने बंदर अब्बास में हुए धमाके पर ईरान की मीडिया एजेंसी मेहर को दिए अपने बयान में कहा, "शुरुआती जांच के हिसाब से पता चला है कि यह धमाका गैस की वजह से हुआ है। अगले कुछ घंटों में मेरे सहयोगी और अधिक जानकारी देंगे।” इस घटना के कई वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे हैं। इनमें मलबे में तब्दील इमारतों के सामने टूटी हुई गाड़ियां खड़ी हुई नजर आ रही हैं, जो कि इमारत के मलबे की वजह से क्षतिग्रस्त हुई हैं। रॉयटर्स ने इमारतों, पेड़ों और सड़क के लेआउट का विश्लेषण कर स्थान की पुष्टि की, जो सैटेलाइट और फाइल इमेजरी से मेल खाता है। हालांकि, स्वतंत्र रूप से यह सत्यापित नहीं की जा सकती कि वीडियो किस तारीख का है। ईरान में धमाकों की खबर सामने आने के बाद सबसे बड़ा शक अमेरिका और इजरायल की तरफ ही गया। हालांकि सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी और इजरायली अधिकाियों ने यह साफ किया है कि इन धमाकों के पीछे उनका कोई हाथ नहीं है।

ट्रंप का नया मिशन: ईरान की ओर बढ़ते जंगी जहाज, वेनेजुएला ऑपरेशन से बड़ा प्लान सामने

तेहरान  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि एक 'मैसिव अर्माडा' (बड़ा नौसैनिक बेड़ा) ईरान की ओर जा रहा है, जो वेनेजुएला ऑपरेशन से भी बड़ा है. ट्रंप चाहते हैं कि ईरान न्यूक्लियर डील पर बात करे, वरना हमला हो सकता है. ईरान ने कहा कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन अपनी शर्तों पर. अगर हमला हुआ तो बचाव करेगा. अरब देशों ने संयम बरतने की अपील की है, क्योंकि इससे बड़ा युद्ध फैल सकता है. ट्रंप ने क्या कहा? 28 जनवरी 2026 को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया कि 'एक मैसिव अर्माडा ईरान की ओर जा रहा है.' उन्होंने ईरान से कहा कि न्यूक्लियर डील कर लो, वरना समय खत्म हो रहा है. हमला 'स्पीड और वायलेंस' से होगा. ट्रंप ने इसे वेनेजुएला ऑपरेशन से बड़ा बताया. उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु संवर्धन बंद करना होगा. बैलिस्टिक मिसाइलें सीमित करनी होंगी. हमास, हिजबुल्लाह, हूती जैसे ग्रुप्स को सपोर्ट बंद करना होगा. ट्रंप ने पिछले साल जून 2025 में ईरान के न्यूक्लियर साइट्स पर हमले का जिक्र किया और कहा कि अगला हमला और बुरा होगा. क्या है यह 'मैसिव अर्माडा'? यह अमेरिकी नौसेना का बड़ा बेड़ा है, जिसमें USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर, कई गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर्स, बॉम्बर्स और फाइटर जेट्स शामिल हैं. यह अरब सागर में तैनात है. ट्रंप ने कहा कि यह 'रेडी, विलिंग और एबल' है. हाल ही में USS Delbert D. Black इजरायल के ईलात बंदरगाह पर पहुंचा है। कुल मिलाकर, मिडिल ईस्ट में 35,000+ अमेरिकी सैनिक और कई जहाज तैनात हैं.  वेनेजुएला ऑपरेशन क्या था? तुलना क्यों? वेनेजुएला ऑपरेशन को 'ऑपरेशन सदर्न स्पियर' कहा जाता है. यह 2025 में शुरू हुआ, जब अमेरिका ने कैरिबियन सागर में बड़ा नौसेना बिल्डअप किया. इसमें USS Gerald R. Ford कैरियर स्ट्राइक ग्रुप, USS Iwo Jima एम्फीबियस रेडी ग्रुप और अन्य जहाज शामिल थे. कुल 15-20 हजार सैनिक और 150+ एयरक्राफ्ट थे. इसका उद्देश्य ड्रग ट्रैफिकिंग रोकना था, लेकिन यह वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने के लिए था. 3 जनवरी 2026 को अमेरिका ने मादुरो को गिरफ्तार कर लिया. ट्रंप ने ईरान के लिए इससे बड़ा आर्मडा भेजा है, जो दिखाता है कि कितना बड़ा खतरा है. ईरान की प्रतिक्रिया क्या है? ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन धमकी के तहत नहीं. ईरान खुद को बचाएगा अगर हमला हुआ. तेहरान में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन हो रहे हैं. ईरान ने अपना ड्रोन कैरियर शहीद बघेरी बंदर अब्बास से 6 किमी दूर रखा है.स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लाइव-फायर एक्सरसाइज कर रहा है. ईरान ने अपने न्यूक्लियर साइट्स को और गहराई में छिपाया है. क्यों बढ़ रहा है तनाव?       न्यूक्लियर प्रोग्राम: 2018 में ट्रंप ने JCPOA डील तोड़ी. जून 2025 में अमेरिका-इजरायल ने फोर्डो, नटांज, इस्फाहान पर हमला किया. IAEA कहता है कि ईरान फिर से संवर्धन बढ़ा रहा है.       प्रदर्शन: जनवरी 2026 में ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शन, 100+ मौतें. ट्रंप इसे रेजीम चेंज का मौका मानते हैं.       रीजनल वॉर: ईरान हूती, हिजबुल्लाह को सपोर्ट करता है, जो अमेरिकी सहयोगियों पर हमला करते हैं. अरब और रीजनल देशों की अपील सऊदी अरब, UAE, जॉर्डन जैसे देश युद्ध से डर रहे हैं. तुर्की ने अमेरिका से संयम बरतने को कहा है. वे चाहते हैं कि बातचीत से हल निकले, क्योंकि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद कर सकता है. इससे तेल की कीमतें बढ़ेंगी और ग्लोबल इकोनॉमी प्रभावित होगी. यूके, फ्रांस और इजरायल अमेरिका के साथ हैं, लेकिन सऊदी, कतर, ओमान, मिस्र ने हमला न करने की अपील की.  अगर हमला हुआ तो रीजनल युद्ध फैल सकता है. ईरान अमेरिकी बेस या इजरायल पर हमला कर सकता है. ट्रंप की 'मैक्सिमम प्रेशर' पॉलिसी जारी है, लेकिन डिप्लोमेसी की उम्मीद भी है. स्थिति नाजुक है – अभी हमला नहीं हुआ, लेकिन धमकियां बढ़ रही हैं.

ईरान पर हमले की आशंकाओं के बीच पहुंचा US एयरक्राफ्ट

वॉशिंगटन. अमेरिका का USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट मिडल ईस्ट पहुंच गया है। इस एयरक्राफ्ट में तीन गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर भी हैं। कहा जा रहा है कि इस एयरक्राफ्ट के पहुंचने से ईरान पर हमला करने की अमेरिका की क्षमता में इजाफा हो जाएगा। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार इस एयरक्राफ्ट को क्षेत्र में स्थिरता बढ़ाने और सुरक्षा की स्थिति मजबूत करने के लिए भेजा गया है। ईरान में हजारों प्रदर्शनकारियों का कत्ल किए जाने के आरोप लगाते हुए अमेरिका आक्रामक है। उसका कहना है कि यदि ईरान ऐसे ही प्रदर्शनकारियों को सजाएं देता रहा तो हम सैन्य दखल दे सकते हैं। इस बीच ईरान के अयातुल्लाह खामेनेई शासन ने भी अमेरिका को बड़ी चुनौती देते हुए उसे कमजोर बताया है। ईरान के एक सीनियर सैन्य अधिकारी ने सोमवार को कहा कि अमेरिका के बूते की बात नहीं है कि वह ईरान पर सरप्राइज अटैक करे या फिर निर्णायक हमला कर सके। ईरान की Mehr न्यूज एजेंसी के अनुसार अधिकारी ने कहा कि अमेरिका का ऐसा आकलन गलत है कि वह हमला कर सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे किसी कमजोर आकलन के आधार पर अमेरिका यदि हमला करता है और सीमित कार्रवाई जैसी जो बात वह कर रहा है, वैसा कुछ किया तो चीजें हाथ से निकल जाएंगी। हिजबुल्लाह के नेता नईम कासिम ने इस बीच ईरान के समर्थन का ऐलान कर दिया है। उनका कहना है कि यदि अमेरिका ने कोई कदम उठाया तो हम ईरान के साथ रहेंगे और जवाबी कार्रवाई करेंगे। इस बीच हिजबुल्लाह के ऐलान को लेकर लेबनान में ही मतभेद हैं। लेबनान के सांसद और काताएब पार्टी के नेता सैमी गेमायेल ने कहा कि हमें जंग में झोंकने की जरूरत नहीं है। हिजबुल्लाह से बोला लेबनान- आपको सुसाइड करनी है तो करिए उन्होंने हिजबुल्लाह को चेतावनी दी और कहा कि आपको जो करना है करिए, लेकिन इसमें लेबनान को दांव पर लगाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने हिजबुल्लाह के ऐलान को सुसाइड जैसा बताया। उन्होंने कहा कि यदि आप अपने बॉस यानी ईरान को बचाना चाहते हैं तो जाएं। आप सुसाइड करना चाहते हैं तो करें, लेकिन लेबनान को इससे दूर रखें। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबियों का कहना है कि ऐसी कई रिपोर्ट्स मिली हैं, जिनमें कहा गया है कि ईरान की सरकार कमजोर हो रही है।

ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव से युद्ध की आशंका, ट्रंप के पास 50 संभावित ठिकानों की जानकारी

तेहरान क्या अमेरिका और ईरान के बीच जंग होने वाली है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पश्चिम एशिया में फिलहाल हालात ऐसे ही बनते दिख रहे हैं। अमेरिका और ब्रिटेन की ओर से अपने नागरिकों को ईरान न जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा ईरान ने अपना एयरस्पेस कमर्शल फ्लाइट्स के लिए बंद कर दिया है। इससे साफ है कि दोनों तरफ से सतर्कता बरती जा रही है और तनाव को देखते हुए जंग की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो लगातार ईरान को जंग और सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं। वहीं ईरान का कहना है कि ऐसी किसी भी स्थिति में जो आग भड़केगी वह पूरे इलाके को चपेट में लेगी। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति के हवाले से एनसीबी न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ट्रंप लंबी जंग नहीं चाहते हैं। उन्होंने अपने सुरक्षा सलाहकारों से ईरान के खिलाफ ऐसे ऐक्शन पर विचार करने को कहा है, जिससे एक निर्णायक कदम उठाया जा सके। वह नहीं चाहते कि ईरान के खिलाफ महीनों लंबी जंग चले। ऐसे में संभावना है कि अचानक ही ईरान पर कोई बड़ा अटैक हो सकता है। अमेरिकी नहीं चाहता कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के जमीनी संघर्ष में शामिल हो। हालांकि अमेरिकी सलाहकार इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि किसी एक हमले से ईरान की कमर तोड़ी जा सकती है। उनकी चिंता यह है कि ईरान भी हमले का जवाब देगा और मिडल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंच सकता है। इराक, सीरिया समेत कई देशों में अमेरिका के ठिकाने हैं, जो ईरान के टारगेट में आ सकते हैं। इसके अलावा ईरान को जवाब देने के लिए इस इलाके में अमेरिका के पास बहुत ज्यादा एसेट्स भी नहीं हैं। इस बीच खबर है कि ट्रंप प्रशासन की ओर से छोटे और टारगेट अटैक किए जा सकते हैं। इसके बाद यदि ईरान की प्रतिक्रिया आती है तो फिर जवाबी कार्रवाई की जाएगी। अमेरिका यह नहीं चाहता कि वह खुद बड़ा अटैक करे। ऐसी स्थिति में ईरान को थोड़ा उकसाने के बाद ही संघर्ष शुरू करने की तैयारी है। ट्रंप के पास मौजूद 50 टारगेट वाली ‘हिट लिस्ट’ में ईरान के कौन से ठिकाने शामिल हैं? डेली मेल की रिपोर्ट के अनुसार, एक अमेरिकी थिंक टैंक (UANI) ने राष्ट्रपति ट्रंप को 50 ठिकानों की एक गोपनीय लिस्ट सौंपी है. इस ‘हिट लिस्ट’ में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के सबसे अहम हेडक्वार्टर शामिल हैं. तेहरान का ‘थारुल्लाह हेडक्वार्टर’ इस लिस्ट में सबसे ऊपर बताया जा रहा है. यह जगह प्रदर्शनकारियों के खिलाफ होने वाली दमनकारी कार्रवाइयों का मुख्य केंद्र है.     लिस्ट में तेहरान के चार मुख्य उप-मुख्यालय भी शामिल हैं.     उत्तर और उत्तर-पश्चिम तेहरान के लिए ‘कुद्स सब-हेडक्वार्टर’ टारगेट पर है.     दक्षिण-पश्चिम तेहरान के लिए ‘फतह सब-हेडक्वार्टर’ को चुना गया है.     पूर्वोत्तर के लिए ‘नस्र’ और दक्षिण-पूर्व के लिए ‘गदर’ मुख्यालय लिस्ट में हैं.     इसके अलावा 23 क्षेत्रीय बासिज बेस भी अमेरिकी रडार पर आ चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी प्रदर्शनकारियों से कहा है कि ‘मदद रास्ते में है‘. ट्रंप ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि लोगों की हत्या करने वाले अपनी खैर मनाएं. सीनेटर टॉम कॉटन ने भी ईरानी शासन की तुलना गंभीर बीमारियों से की है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि कूटनीतिक धैर्य अब पूरी तरह खत्म हो चुका है. भारत की एडवाइजरी- तुरंत ईरान से निकलें हमारे नागरिक इस बीच भारत ने भी अपने सभी नागरिकों को सलाह दी है कि वे तत्काल ईरान से निकल जाएं। करीब 10 हजार भारतीय नागरिक ईरान में हैं। इनकी सुरक्षा चिंताओं को लेकर भारत ने यह आदेश दिया है। तेहरान स्थित भारतीय दूतावास की ओर से यह एडवाइजरी जारी की गई है। फिलहाल दुनिया भर की नजरें इस हालात पर हैं। चिंता इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि इजरायल भी इस जंग में कूदने की बात कर रहा है। वहीं ईरान का कहना है कि अमेरिकी हमले के जवाब में हम इजरायल को टारगेट करेंगे।

ईरान का आरोप: ट्रंप और नेतन्याहू को किलर बताया, 2500 मौतों का जिम्मेदार बना अमेरिका और इज़राइल

तेहरान  ईरान की सड़कों पर हंगामा जारी है. कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच भिडंत हो रही है. इस बीच ईरान में चल रहे प्रदर्शनों और टकराव की वजह से मरने वालों की संख्या 2500 को पार कर गई है. कई दिनों के बाद ईरान के लोग दूसरे देशों में अपने रिश्तेदारों को फोन कर पाने में सक्षम हो पा रहे हैं. इसके साथ ही वहीं की खौफनाक हकीकत सामने आ रही है.  ईरान में अबतक मरने वालों की संख्या 2571 हो गई है. अमेरिका की मानवाधिकार संस्था ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार बुधवार सुबह तक मरने वालों की संख्या कम से कम 2,571 हो गई थी. यह आंकड़ा कई दशकों में ईरान में किसी भी दूसरे विरोध प्रदर्शन या अशांति में हुई मौतों की संख्या से कहीं ज़्यादा है. और  देश की 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान फैली अराजकता की याद दिलाता है. पहला हत्यारा ट्रंप है… हालांकि ईरान का प्रशासन किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं दिखता है. ईरानी अधिकारियों ने एक बार फिर से अमेरिकी ट्रंप को कार्रवाई न करने की चेतावनी दी है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने अमेरिकी रवैये पर जवाब देते हुए लिखा, 'हम ईरान के लोगों के मुख्य हत्यारों के नाम बताते हैं: 1- ट्रंप 2- इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू." समाचार एजेंसी एपी के अनुसार ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पहली बार आधिकारिक तौर पर मौतों की पुष्टि की. एक अधिकारी के हवाले से सरकारी टीवी ने कहा कि मुल्क में "बहुत सारे लोग शहीद" हुए हैं. विद्रोहियों ने खामेनेई के लिए मौत की सजा मांगी ये प्रदर्शन दिसंबर के आखिर में ईरान की खराब अर्थव्यवस्था के गुस्से में शुरू हुए और जल्द ही यहां की मजहबी शासन प्रणाली इसके निशाने पर आ गई. राजधानी में लोग सर्वोच्च धार्मिक नेता खामेनेई की मौत की मांग करने नारे लगा रहे हैं और तस्वीरें बना रहे हैं. ईरान में इस कथित 'अपराध' के लिए मौत की सजा मुकर्रर की जाती है. इस बीच अमेरिका लगातार प्रदर्शनकारियों के साथ अपना सपोर्ट जता रहा है. मंगलवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा, "ईरानी देशभक्तों, विरोध करते रहो- अपनी संस्थाओं पर कब्जा करो." ट्रंप ने कहा कि था कि उन्होंने सभी ईरानी अधिकारियों के साथ तबतक के लिए बातचीत रोक दी है जबतक इन हत्याओं को रोका नहीं जाता है. उन्होंने कहा कि ईरान को जल्द मदद मिलने वाली है. हालांकि घंटों बाद ट्रंप ने रिपोर्टर्स से कहा कि उनकी सरकार "उसी हिसाब से" कार्रवाई करने से पहले मारे गए प्रदर्शनकारियों की संख्या पर एक सही रिपोर्ट का इंतज़ार कर रही है. ट्रंप की मदद आ रही है ट्रंप ने ईरानी सुरक्षा बलों के बारे में कहा, "मुझे लगता है कि वे बहुत बुरा बर्ताव कर रहे हैं, लेकिन यह कन्फर्म नहीं है." इस बीच ईरानी सत्ता के रुख में कोई नरमी नहीं दिख रही है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सेक्रेटरी अली लारीजानी ने अमेरिका के रवैये पर जवाब देते हुए लिखा: "हम ईरान के लोगों के मुख्य हत्यारों के नाम बताते हैं: 1- ट्रंप 2- इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू." ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल देश की सबसे शक्तिशाली और महत्वपूर्ण संस्था है जो राष्ट्रीय सुरक्षा एवं रक्षा नीतियों का निर्धारण करती है. यह 1989 में संविधान के अनुच्छेद 176 के तहत स्थापित हुई. इसके अध्यक्ष ईरान के राष्ट्रपति होते हैं, लेकिन इसके सभी निर्णय सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई लेते हैं. तेहरान के फोन लाइन खुले समाचार एजेंसी एपी के अनुसार लगभग 5 दिनों के बाद फोन लाइन खुलने के बाद तेहरान के लोग मुल्क से बाहर कॉल कर रहे हैं. एक ईरानी चश्मदीद ने सेंट्रल तेहरान में भारी सुरक्षा, जले हुए सरकारी भवन, टूटे हुए ATM और कम राहगीरों के बारे में बताया. इस बीच लोग इस बात को लेकर चिंतित थे कि आगे क्या होगा जिसमें अमेरिका के हमले की संभावना भी शामिल थी. अपनी सुरक्षा की चिंता के कारण सिर्फ़ अपना पहला नाम बताने वाले दुकानदार महमूद ने कहा, "मेरे ग्राहक ट्रंप की प्रतिक्रिया के बारे में बात करते हैं और सोचते हैं कि क्या वह इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ़ मिलिट्री हमला करने की योजना बना रहे हैं." "मुझे नहीं लगता कि ट्रंप या कोई दूसरा विदेशी देश ईरानियों के हितों की परवाह करता है." रेजा एक टैक्सी ड्राइवर जिसने सिर्फ़ अपना पहला नाम बताया, ने कहा कि कई लोगों के मन में विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. उन्होंने कहा, "लोग – खासकर युवा निराश हैं, लेकिन वे विरोध प्रदर्शन जारी रखने की बात कर रहे हैं."

ईरान में उथल-पुथल, US ने नागरिकों को निकलने को कहा , मलाला का महिलाओं को समर्थन संदेश

तेहरान   ईरान इस समय गंभीर राजनीतिक उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है. करीब 15 दिनों से देश के अलग-अलग हिस्सों में सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी हैं. इन विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत 28 दिसंबर को राजधानी तेहरान से हुई थी, जो देखते ही देखते पूरे देश में फैल गए. ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक शुरुआत में आर्थिक बदहाली, महंगाई और बेरोजगारी को लेकर उठी आवाजें अब व्यापक असंतोष का रूप ले चुकी हैं. एजेंसी का दावा है कि ये प्रदर्शन अब ईरान के 186 शहरों और कस्बों तक पहुंच चुके हैं. अमेरिका में स्थित एक मानवाधिकार संगठन के मुताबिक सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक लगभग 646 लोगों की मौत हो चुकी है, हालांकि इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं हो पाई है. इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं भी तेज होती जा रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अमेरिका ईरान में हस्तक्षेप के लिए कड़े विकल्पों पर विचार कर रहा है. ट्रंप के बयान के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. वहीं ईरान की ओर से सख्त लेकिन संतुलित रुख सामने आया है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने कहा है कि ईरान का किसी पर सैन्य कार्रवाई करने का इरादा नहीं है, लेकिन अगर देश पर हमला हुआ तो वह युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार है. इससे जुड़ी हुई हर अपडेट हम आपको दे रहे हैं, तो लगातार हमारे साथ बने रहिए.   ईरान में हालात बिगड़े, अमेरिका ने अपने नागरिकों से कहा ‘तुरंत ईरान छोड़ दें’ अमेरिका ने ईरान में चल रहे हालात के बीच अपने नागरिकों से कहा है कि वे देश छोड़ दें. अमेरिका का कहना है कि प्रदर्शन हिंसक भी हो सकते हैं. ऐसे में गिरफ्तारियां और लोगों के घायल होने का खतरा है. सुरक्षा कड़ी कर दी गई है, कई सड़कें बंद हैं, पब्लिक ट्रांसपोर्ट प्रभावित है और इंटरनेट भी कई जगह बंद कर दिया गया है. ईरान सरकार ने मोबाइल, लैंडलाइन और देश के इंटरनेट नेटवर्क पर पाबंदी लगा रखी है और एयरलाइंस ने ईरान आने-जाने वाली उड़ानें रद्द या सीमित कर दी हैं. ऐसे में अमेरिकी वर्चुअल एंबेसी ने अपने नागरिकों को चेतावनी दी है कि इंटरनेट बंद रह सकता है, इसलिए दूसरे तरीके से संपर्क की तैयारी रखें. अगर सुरक्षित हो तो ईरान छोड़कर जमीन के रास्ते आर्मेनिया या तुर्की जाने पर विचार करें. उपद्रव के बीच मलाला यूसुफजई का क्या संदेश नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई ने ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि ये विरोध अचानक नहीं हुए। ईरान में सरकार ने बहुत पहले से ही लड़कियों और महिलाओं की आजादी पर सख्त पाबंदियां लगा रखी हैं। खासकर शिक्षा में उन्हें बहुत कम अधिकार मिलते हैं। उन्होंने कहा, ‘दुनिया की बाकी लड़कियों की तरह ईरानी लड़कियां भी सम्मान और गरिमा के साथ जीना चाहती हैं। वे सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी में अपनी मर्जी से फैसले लेना चाहती हैं।’ मलाला यूसुफजई ने कहा, ‘ईरान के लोग कई सालों से इस अन्याय के खिलाफ बोलते आ रहे हैं। लेकिन अपनी जान जोखिम में डालकर भी उनकी आवाज दबा दी जाती रही है। ये नियम सिर्फ स्कूल तक सीमित नहीं हैं। पूरे समाज में महिलाओं पर अलग तरह के नियंत्रण हैं – जैसे अलग-अलग बैठना, हर समय निगरानी रखना और गलती करने पर सजा मिलना।’ उन्होंने कहा कि इन सबकी वजह से महिलाओं को अपनी पसंद की जिंदगी जीने, फैसले लेने और सुरक्षित महसूस करने का हक नहीं मिल पाता। ईरानी महिलाएं और लड़कियां अब अपनी आवाज सुनाई देने और अपना भविष्य खुद तय करने की मांग कर रही हैं। ट्रंप की प्रेस सेक्रेटरी बोलीं – वे जरूरी समझेंगे, तो भेज देंगे सेना व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक बड़ी खासियत यह है कि वे हमेशा सभी विकल्प खुले रखते हैं. उन्होंने बताया कि हवाई हमले भी उन कई विकल्पों में शामिल हैं, जिन पर अमेरिकी राष्ट्रपति विचार कर सकते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ट्रंप के लिए कूटनीति हमेशा पहली पसंद रहती है. लेविट के मुताबिक राष्ट्रपति ने पिछली रात कहा था कि ईरानी सरकार सार्वजनिक रूप से जो बयान दे रही है, वह उन संदेशों से अलग हैं, जो अमेरिकी प्रशासन को निजी तौर पर मिल रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्पों का इस्तेमाल करने से नहीं हिचकते. अगर और जब वे इसे जरूरी समझेंगे, तो सेना का सहारा लेने से पीछे नहीं हटेंगे. लेविट ने कहा कि यह बात ईरान से बेहतर कोई नहीं जानता. ईरानी महिलाओं के समर्थन में क्या कहा मलाला यूसुफजई ने साफ कहा कि वे ईरान की जनता और खासकर लड़कियों के साथ खड़ी हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान का भविष्य ईरान के लोग ही खुद बनाएं और इसमें महिलाओं व लड़कियों की अहम भूमिका हो। कोई बाहर का देश या दमनकारी सरकार इसमें दखल न दे। मालूम हो कि अभी ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और महिलाओं के अधिकारों पर रोक के खिलाफ बड़े प्रदर्शन हो रहे हैं। मलाला की यह बात दुनिया भर में ईरानी महिलाओं के संघर्ष को मजबूत समर्थन दे रही है।     तुरंत ईरान छोड़ दें और ऐसा प्लान बनाएं जिसमें अमेरिकी सरकार की मदद पर निर्भर न रहना पड़े.     अगर नहीं निकल सकते, तो किसी सुरक्षित जगह पर रहें और अपने पास खाना, पानी, दवाइयां और जरूरी सामान जमा करके रखें. अमेरिका ने ईरान पर टैरिफ बम फोड़ा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में ईरान पर और दबाव बढ़ाने के लिए टैरिफ बम फोड़ दिया है. उन्होंने ईरान की अर्थव्यवस्था को चूर करने के लिए उन देशों पर 25 फीसदी का टैरिफ लगाने का ऐलान किया है, जो ईरान के साथ मौजूदा हालात में कारोबार कर रहे हैं. अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर पोस्ट करके उन्होंने ये जानकारी दी कि आगे ईरान और उसके साझेदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ाया जाएगा. हालांकि अभी इस बात की जानकारी नहीं दी गई है कि इसे … Read more

ईरान में प्रदर्शनों में मृतकों की संख्या 544 तक पहुंची, पेजेशकियन की नागरिकों से शांति की अपील

तेहरान  ईरान में पिछले दो हफ्तों से सरकार विरोधी हिंसक प्रदर्शन जारी है. इस दौरान कम से कम 544 प्रदर्शनकारी मारे गए जिनमें आठ बच्चे भी शामिल हैं. सीएनएन ने ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स के हवाले से ये रिपोर्ट दी है. विरोध प्रदर्शन 28 दिसंबर को बढ़ती महंगाई और आर्थिक मुश्किलों के खिलाफ शुरू हुए थे, लेकिन जल्द ही ये पूरे देश में तनावपूर्ण अशांति में बदल गए, जिसमें प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हिंसक झड़पें हुई. विरोध प्रदर्शन कई शहरों में फैल गए. अधिकारी गिरफ्तारियों, कार्रवाई और बल प्रयोग करके जवाब दे रहे हैं. मानवाधिकार समूहों ने बार-बार हताहतों की संख्या और प्रदर्शनकारियों के साथ किए जा रहे बर्ताव पर चिंता जताई. ईरानी अधिकारियों ने अशांति के लिए दंगाइयों और विदेशी दखलअंदाजी को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि यह भी कहा है कि जायज आर्थिक शिकायतों को दूर किया जाएगा. अंतरराष्ट्रीय नेताओं ने इस स्थिति पर खुलकर बात की है. पोप लियो ने अपनी एंजेलस प्रार्थना के बाद वेटिकन में भीड़ को संबोधित करते हुए कहा कि वह ईरान में शांति के लिए प्रार्थना कर रहे हैं. उन्होंने कहा, 'मेरे विचार इन दिनों मध्य पूर्व में खासकर ईरान और सीरिया में जो हो रहा है, उस पर हैं, जहाँ लगातार तनाव के कारण कई लोगों की मौत हो रही है. मुझे उम्मीद है और मैं प्रार्थना करता हूँ कि पूरे समाज की भलाई के लिए बातचीत और शांति को धैर्यपूर्वक बढ़ावा दिया जाएगा.' फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भी ईरानी अधिकारियों से हिंसा से बचने की अपील की और एक्स पर पोस्ट किया, 'आक्रामकता बंद होनी चाहिए. हम गलत तरीके से हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करने की मांग करते हैं.' आयरलैंड की विदेश मंत्री हेलेन मैकएन्टी ने कहा कि वह ईरान से आ रही रिपोर्टों से 'बहुत चिंतित' हैं. साथ ही इस बात पर जोर दिया कि अभिव्यक्ति की आजादी, शांतिपूर्ण सभा और जानकारी तक पहुंच का पूरी तरह से सम्मान किया जाना चाहिए. उन्होंने ईरानी अधिकारियों से आगे हिंसा न करने और प्रदर्शनकारियों से बातचीत करने की भी अपील की.   इजराइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने कहा कि इजराइल ईरानी लोगों का समर्थन करता है और एक्स पर कहा. 'हम आजादी के लिए ईरानी लोगों के संघर्ष का समर्थन करते हैं और उन्हें सफलता की शुभकामनाएं देते हैं.' इजराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने रविवार को कहा कि वह ईरान में हो रहे घटनाक्रम पर करीब से नज़र रख रही है, क्योंकि विरोध प्रदर्शन तीसरे हफ्ते में प्रवेश कर गए हैं. आईडीएफ के एक प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, 'ये विरोध प्रदर्शन ईरान का अंदरूनी मामला है. फिर भी आईडीएफ रक्षात्मक रूप से तैयार है और लगातार अपनी क्षमताओं और ऑपरेशनल तैयारी में सुधार कर रही है.'  सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के भी रविवार को बाद में एक सीमित सुरक्षा परामर्श करने की उम्मीद है, जिसमें ईरान और लेबनान के घटनाक्रम एजेंडे में होंगे. जापान के प्रधानमंत्री कार्यालय ने भी ईरान की स्थिति पर एक बयान जारी किया, जिसमें कहा गया कि जापान शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ किसी भी तरह की ताकत के इस्तेमाल के खिलाफ हैं. अशांति के बीच अमेरिकी अधिकारियों ने सीएनएन को बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद ईरान में मिलिट्री विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, और उन्होंने तेहरान को प्रदर्शनकारियों पर जानलेवा बल का इस्तेमाल न करने की चेतावनी दी है. ईरानी अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने कहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सख्त होगी. तस्नीम समाचार एजेंसी के अनुसार, उन्होंने कहा कि कार्रवाई बिना किसी नरमी, दया या रियायत के की जाएगी. उन्होंने कहा, 'सभी दंगाईयों पर आरोप एक जैसे हैं.' इस बीच, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने नागरिकों से अपील की कि वे उस चीज में शामिल न हों जिसे उन्होंने हिंसक अशांति बताया. टेलीविजन पर दिए गए भाषण में उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध और हिंसा के बीच साफ अंतर है. उन्होंने कहा, 'अगर लोगों को कोई चिंता है, तो यह हमारा कर्तव्य है कि हम उनकी चिंताओं को दूर करें, लेकिन सबसे बड़ा कर्तव्य यह है कि हम दंगाइयों के एक समूह को आकर पूरे समाज को बाधित करने की अनुमति न दें.' पेजेशकियन ने आगे कहा, 'यह किस तरह का विरोध है? यह किस तरह का संदेश है, जो लोगों के दिलों में नफरत पैदा कर रहा है?' उन्होंने आगे कहा, 'अमेरिका और इजराइल वहाँ बैठे हैं और उन्हें जाने के लिए कह रहे हैं और (कह रहे हैं) 'हम तुम्हारे साथ हैं'. ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने रविवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से कहा कि वे ईरान के अंदरूनी मामलों पर टिप्पणी करने के बजाय "अपने देश को संभालें'. सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट किए गए एक संदेश में खामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर ईरान में अशांति को बढ़ावा देने और अपने देश की गंभीर समस्याओं को हल करने में नाकाम रहने का आरोप लगाया. खामेनेई ने लिखा, 'अमेरिका के राष्ट्रपति ने घोषणा की कि अगर ईरानी सरकार ऐसा या वैसा करती है, तो वह दंगाइयों का साथ देंगे. दंगाइयों ने उन पर उम्मीदें लगा रखी हैं. अगर वह इतने काबिल हैं, तो उन्हें अपने देश को संभालना चाहिए.'