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राष्ट्रपति मुर्मु, प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर प्रदेशवासियों को दीं शुभकामनाएं

भोपाल : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ,प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर प्रदेश के नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया पर कहा कि राष्ट्रपति मुर्मु ने मध्यप्रदेश के स्थापना दिवस पर सभी प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई दी है। राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि मध्यप्रदेश ने भारत की प्रगति में उल्लेखनीय योगदान दिया है। राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने ईश्वर से प्रार्थना की कि मध्यप्रदेश अपनी विकास यात्रा में निरंतर नए आयाम स्थापित करता रहे। राष्ट्रपति ने सभी प्रदेशवासियों की निरंतर समृद्धि और कल्याण के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ भी दी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी ने संदेश में कहा है कि गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर संजोने वाले प्रदेशवासियों को राज्य के स्थापना दिवस की ढेरों शुभकामनाएं दी हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि देश के हृदय में बसे मध्यप्रदेश जन-जन की आकांक्षाओं को आगे रखकर आज हर क्षेत्र में प्रगति की नई रफ्तार भर रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि विकसित भारत के संकल्प की सिद्धि में मध्यप्रदेश के प्रतिभाशाली और परिश्रमी लोगों की अमूल्य भूमिका होने वाली है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने भी सांस्कृतिक विरासत की भूमि मध्यप्रदेश वासियों को प्रदेश को स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने कहा कि प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक धरोहर और समृद्ध इतिहास को समेटे मध्यप्रदेश आज जन कल्याण, स्वच्छता और संपन्नता की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। गृह मंत्री शाह ने ईश्वर से प्रदेश वासियों की निरंतर प्रगति की कामना की है।  

भोपाल : 20 सालों में बना देश का अग्रणी राज्य

भोपाल . डॉ. मोहन यादव। मध्यप्रदेश आज अपनी स्थापना के 70वें वर्ष में प्रवेश कर रहा है। एक नवंबर 1956 को अस्तित्व में आये मध्यप्रदेश में विकास की नई यात्रा विगत दो दशकों से आरंभ हुई, जो प्रदेश को देश में अग्रणी राज्य बनाने की संभावनाओं तक पहुंच गई है। यह सुखद संयोग है कि आज देवउठनी ग्यारस के पावन अवसर पर राज्योत्सव का आयोजन किया जा रहा है। हमारे तीज, त्यौहार और परंपराएं हमारी संस्कृति का आधार हैं। उत्सव के आनंद से ही भविष्य निर्माण के भाव निर्मित होते हैं। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रदेश में सभी त्यौहारों को व्यापक स्वरूप में मनाया जा रहा है। अपने त्यौहारों का सांस्कृतिक संदर्भ ही हमें पुरातन से नूतन की प्रेरणा देता है। हमारे लिए गर्व की बात है कि भारत का ह्दय मध्यप्रदेश वन, जल, अन्न, खनिज, शिल्प, कला, संस्कृति, उत्सव और परंपराओं से समृद्ध है। हमें मां नर्मदा, चंबल, पार्वती, शिप्रा नदियों का सान्निध्य और बाबा महाकाल का आशीर्वाद प्राप्त है। यह भगवान परशुराम की जन्मस्थली, भगवान श्रीकृष्ण की शिक्षास्थली और आदि शंकराचार्य जी की तपोस्थली है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने चित्रकूट में लंबा समय व्यतीत किया है। इतिहास प्रसिद्ध राजा नल, भर्तृहरि, विक्रमादित्य की जन्म स्थली भी मध्यप्रदेश रही है। सम्राट विक्रमादित्य ने ही शकों के आतंक से भारत को मुक्त किया था। संसार की पहली वैज्ञानिक कालगणना "विक्रम संवत्" का आरंभ भी मध्यप्रदेश के उज्जैन से हुआ था। मुझे बताते हुए प्रसन्नता है कि हम अपने ऐतिहासिक गौरव की दिव्यता और प्राकृतिक भव्यता के साथ विरासत से विकास की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारत को विश्व में सर्वश्रेष्ठ बनाने के लिए विकसित भारत निर्माण का संकल्प दिया है। प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में हमारा देश विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। प्रधानमंत्री जी के इस संकल्प को साकार करने और विकसित भारत निर्माण के लिए मध्यप्रदेश में निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। प्रदेश में उद्योग वर्ष मनाने के साथ राज्योत्सव की थीम 'उद्योग और रोज़गार' रखी गई है। इसमें प्रदेश के सतत विकास, सांस्कृतिक समृद्धि और जनभागीदारी का भाव है। यशस्वी प्रधानमंत्री जी की प्रेरणा से हमें निवेश और औद्योगिक विकास की यात्रा को परिणाम में बदलने का अवसर प्राप्त हो रहा है। विविधता से समृद्ध मध्यप्रदेश के हर क्षेत्र की अपनी विशेषता, क्षमता और दक्षता है, जिसमें अनंत संभावनाएं हैं। इसी को केन्द्र में रखकर हमने प्रदेश में रीजनल इन्वेस्टर्स समिट का नवाचार किया। मुझे यह बताते हुए प्रसन्नता है कि प्रदेश के हर क्षेत्र का कौशल और उद्योग इसमें शामिल हुआ है। व्यापार को सरल बनाने और निवेशकों से सीधे संवाद के लिए हमने मार्च 2024 से उज्जैन से निवेश यात्रा शुरू की और फिर जबलपुर, ग्वालियर, सागर, रीवा, शहडोल, नर्मदापुरम, मुंबई, कोयंबटूर, बेंगलुरु, पुणे, दिल्ली, यूके, जर्मनी, जापान, दुबई तक इसे विस्तार दिया। विभिन्न सम्मेलनों, राष्ट्रीय अंतर्राष्ट्रीय रोड-शो के माध्यम से मध्यप्रदेश के निवेश में कई गुना वृद्धि हुई है। निवेशकों को एक सक्षम, सरल और सुरक्षित वातावरण प्रदान किया गया है। प्रदेश में इनोवेशन हब, स्टार्टअप पॉलिसी, फंडिंग सपोर्ट और इन्क्यूबेशन नेटवर्क स्थापित कर देश की स्टार्टअप क्रांति को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। मुझे यह बताते हुए खुशी है कि मध्यप्रदेश ने पिछले एक वर्ष में औद्योगिक निवेश के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक उपलब्धियां प्राप्त की हैं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों ने प्रदेश में निवेश के प्रति गहरी रुचि दिखाई है। खनिज कॉन्क्लेव में प्रदेश को 56 हजार करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिले, जो खनिज नीति और प्रशासनिक सरलता का परिणाम हैं। आईटी पार्क, इलेक्ट्रॉनिक निर्माण इकाइयां और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में भी निवेश को प्रोत्साहन मिला है। मुझे यह बताते हुए हर्ष है कि प्रदेश एक ऐसे परिवर्तनकाल से गुजर रहा है जहां निवेश, नवाचार और रोज़गार आधार स्तंभ हैं। लगभग दो वर्षों में प्रदेश ने उद्योग, कृषि, दुग्ध उत्पादन, पर्यावरण, ऊर्जा और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में अनेक ऐतिहासिक उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। भारत के समग्र विकास के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने हमें गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी (GYAN) के सम्मान का मंत्र दिया है। विकास के इन आधार स्तंभ के अनुरूप प्रदेश विकास और कल्याण के लिए युवा शक्ति, गरीब कल्याण, किसान कल्याण और नारी सशक्तिकरण मिशन के तहत कार्य किया जा रहा है। गरीब कल्याण मिशन में स्वरोज़गार और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, आवास, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की सुविधा आदि की दिशा में कार्य किया जा रहा है। मध्यप्रदेश कौशल विकास मिशन और स्टार्टअप नीति 2025 ने युवाओं को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर में परिवर्तित किया है। कौशल विकास मिशन के माध्यम से युवाओं को उद्योग-आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रोज़गार मेले, अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम और डिजिटल स्किल सर्टिफिकेशन जैसे प्रयास युवाओं को रोज़गार से जोड़ रहे हैं। रोज़गार सृजन हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। शासकीय और निजी क्षेत्रों में युवाओं के लिए स्थायी, कुशल और सम्मानजनक अवसर उपलब्ध किये जा रहे हैं। मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने शासकीय भर्ती का कैलेण्डर जारी किया और उसके अनुरूप भर्ती प्रक्रिया भी आरंभ हो गई है। कृषि क्षेत्र को नवाचार के साथ सशक्त बनाने की दिशा में एक नई क्रांति का सूत्रपात हुआ है। प्रदेश सरकार ने ड्रोन आधारित फसल निरीक्षण, स्मार्ट सिंचाई प्रणाली और कृषि उत्पाद मूल्य संवर्धन पर विशेष फोकस किया है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और मुख्यमंत्री खेत-तालाब योजना सहित अन्य प्रयासों से किसानों के लिए सिंचाई क्षेत्र बढ़ाने का लगातार प्रयत्न किया जा रहा है। केन-बेतवा और पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना से प्रदेश के किसानों को सिंचाई और पानी की सुविधा व्यापक स्तर पर उपलब्ध होगी। प्रदेश में सिंचाई का रकबा 52 लाख हेक्टेयर से अधिक हो चुका है। इसे दोगुना करने का लक्ष्य है। आगामी 3 वर्षों में सिंचाई क्षेत्र का रकबा 100 लाख हेक्टेयर करने की योजना है। कृषि उपज का प्रत्यक्ष भुगतान, ऑनलाइन मंडी व्यवस्था और जैविक खेती के प्रोत्साहन ने अन्नदाताओं की आय में वृद्धि की है। मध्यप्रदेश गेहूं, सोयाबीन, चना और मसालों के उत्पादन में अग्रणी प्रदेश हैं। महिला सशक्तिकरण को आर्थिक स्वावलंबन से जोड़ने की दिशा में नारी शक्ति मिशन परिवर्तनकारी सिद्ध हो रहा है। लाड़ली बहना योजना … Read more

मध्य प्रदेश का विकास रिकॉर्ड: 70 साल में आय 584 गुना, आबादी में पौने तीन गुना वृद्धि

भोपाल  राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिशों के आधार पर मध्य प्रदेश का जन्म हुआ था। जनसंख्या, कृषि, उद्योग आदि विकास के मापदंडों की समीक्षा के बाद 1956 में इस नए राज्य का गठन किया गया था। निर्माण के बाद लगातार प्रदेश प्रगति के पथ पर अग्रसर है। वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश से अलग होकर नया राज्य बनाना गया। इसके बाद भी मध्य प्रदेश क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का दूसरा बड़ा राज्य है। एक नवंबर को मध्य प्रदेश अपनी स्थापना का 70वां वर्ष मना रहा है। पांच वर्ष बाद यह अपने जन्म की 75वीं जयंती यानि हीरक जयंती मनाएगा। 70वें स्थापना दिवस पर प्रदेश के विकास का आकलन करें तो पाते हैं राज्य की प्रति व्यक्ति आय में 584 गुना बढ़ोतरी हुई तो आबादी में 2.78 गुना बढ़ोतरी हुई है। राज्य पुनर्गठन आयोग और मध्य प्रदेश आजादी के बाद 29 दिसंबर 1953 को भारत के राज्यों के पुनर्गठन के लिए जस्टिस सैयद फैसल अली की अध्यक्षता और हृदयनाथ कुंजरू, वल्लभ माधव पणिकर की सदस्यता में एक आयोग गठित हुआ था। इस आयोग ने 30 सितंबर 1955 को अपनी सिफारिश केंद्र सरकार को प्रस्तुत की थी। राज्य पुनर्गठन आयोग की सिफारिश द्वारा की गई अनुशंसाओं को अमल में लाने के लिए लोकसभा में 18 अप्रैल 1956 को संविधान में नवम संशोधन विधेयक पेश हुआ और अक्तूबर में राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद 1 नवंबर 1956 को यह पूर्ण रूप से अधिनियम बना। आयोग की सिफारिशों के आधार पर सेंट्रल प्रोविजंस एंड बरार में शामिल मराठी भाषी जिले महाराष्ट्र में शामिल हो गए और 43 जिलों के साथ नए मध्य प्रदेश का गठन किया गया। क्या कहा था नए प्रदेश के गठन के वक्त राज्य पुनर्गठन आयोग ने अपने प्रतिवेदन में नए मध्य प्रदेश के संबंध में तर्क दिया था कि यह बहुत ही समृद्ध कृषि वाला राज्य होगा, क्योंकि यहां गेहूं, चावल पैदा करने वाला संपूर्ण क्षेत्र इसमें शामिल है। हालांकि, वर्ष 2000 में चावल का कटोरा कहलाने वाला क्षेत्र छत्तीसगढ़ एक अलग राज्य के रूप में गठित हो गया।   पं. रविशंकर शुक्ल थे पहले सीएम 1956 की 31 अक्तूबर और 1 नवंबर की मध्य रात्रि को नए मध्य प्रदेश का गठन हुआ तब प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री पंडित रविशंकर शुक्ल ने अपने संदेश में नए मध्य प्रदेश को राष्ट्र के लिए शक्ति का अविरल स्त्रोत बताते हुए कहा था कि 'ऊपर लहलहाते खेत और नीचे भूमि रत्नगर्भा है'। वहीं, उनके बाद सीएम बने कैलाशनाथ काटजू ने कहा था प्रकृति ने इस भू-भाग के निवासियों को पुरस्कृत करने में अत्यंत उदारता से काम लिया है। मप्र शक्ति का अविरल स्रोत बना आज प्रदेश की स्थापना के 70 वर्ष पूर्ण होने के बाद यह आकलन किया जाए कि क्या मध्य प्रदेश राष्ट्र के लिए शक्ति का अविरल स्रोत बन सका? क्या प्रकृति की अत्यंत उदारता प्रदेश के निवासियों को पुरस्कृत कर सकी? प्रदेश ने आर्थिक विकास की रफ्तार और प्रगति की राह को चुना और प्रगति के नए सोपान तय किए हैं। प्रति व्यक्ति आय 261 रुपये से बढ़कर 1.52 लाख हुई मध्य प्रदेश ने बीते 70 वर्षों में कितनी प्रगति की है, इसकी झलक प्रदेश के नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय से मिलती है। 1956 में मध्य प्रदेश की प्रति व्यक्ति आय 261 रुपये थी, जो वर्तमान में 1.52 लाख रुपये है। राज्य की प्रगति के साथ प्रदेश के नागरिकों के जीवन स्तर में भी वृद्धि हुई है। तीसरा सबसे ज्यादा गेहूं उत्पादक राज्य कृषि के क्षेत्र में प्रदेश ने कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं, देश के किसी भी राज्य को लगातार सात बार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त नहीं हुए यह खिताब मध्य प्रदेश ने हासिल किया है। गेहूं की पैदावार में मध्य प्रदेश देश के शीर्ष तीन राज्यों में शामिल है। दलहन उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। कपास उत्पादन में देश में प्रदेश का पांचवा स्थान है। जाहिर है कृषि क्षेत्र में प्रदेश ने काफी उन्नति की है। सवा सात करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदेश में उप स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मिलाकर 3,08,252 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इसमें से 93,000 वर्ग किलोमीटर इलाका जनजाति क्षेत्र में है। ग्रामीण क्षेत्र 309505.59 वर्ग किलोमीटर है, शहरी क्षेत्र में 7746 वर्ग किलोमीटर है, इस प्रकार 97.49 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार है। इस तरह प्रदेश की 7.26 करोड़ जनसंख्या तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। बजट बढ़कर कई गुना हुआ वर्ष 2000-2001 राज्य का बजट 1,06,393 करोड़ रुपये का था, जो वर्ष 2024-25 में 3,26,383 करोड़ रुपये का अनुमानित है। राज्य में वर्तमान में 8586 शाखाओं के माध्यम से बैंकिंग सेवाएं प्रदान की जा रही है। जो 33 प्रतिशत ग्रामीण और 67 प्रतिशत नगरीय क्षेत्रों में है। इसके अतिरिक्त 38 जिला सहकारी बैंक 4536 प्राथमिक कृषि ऋण समिति भी कार्यरत है। निवेश के नए द्वार खुले उद्योग, परिवहन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन जैसे कई क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने प्रगति की है। प्रदेश में निवेश के नए द्वार खोले हैं और नई सुविधाएं मुहैया करवाने की घोषणाए की हैं। प्रदेश में रोजगार पर्याप्त उपलब्ध करवाया जा रहा है। प्रदेश के युवकों को रोजगार मिले इसके लिए प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्रों का विकास किया गया, प्रदेश में निवेश के लिए इंवेस्टर समिट का लगातार आयोजन किया जा रहा है। इससे उद्योगों को उचित सुविधा देकर प्रदेश में आमंत्रित किया जा रहा है। परिवहन के क्षेत्र में प्रदेश ने नए आयाम स्थापित किए हैं। मध्य प्रदेश के गठन से आज तक की स्थिति एक नजर में… क्रमांक विवरण वर्ष 1956 वर्ष 2025 1 क्षेत्रफल (वर्ग किमी) 4,43,452 3,08,000 2 जिले (संख्या) 43 55 3 संभाग (संख्या) 8 10 4 प्रतिव्यक्ति आय (रुपये में) 261 1,52,615 5 जनसंख्या 2,60,71,637 7,26,26,809 (2011 जनगणना के अनुसार अनुमानित 2025) 6 साक्षरता प्रतिशत (%) 16.83 69.32 7 शिक्षण संस्थाएं (संख्या) 22,800 79,215 8 विश्वविद्यालय (संख्या) 1 16 9 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (संख्या) 100 1,440 10 स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय (करोड़ रुपये में) 10 15,744 11 सड़कें (कुल लंबाई किमी में) 28,173 80,875 12 रेलमार्ग (किमी में) 4,891 5,188 13 वन क्षेत्र (वर्ग किमी) 1,56,386 (छत्तीसगढ़ का भाग शामिल) 85,724 14 सिंचित कृषि क्षेत्र (लाख हेक्टेयर में) 8.24 55 15 प्रदेश का … Read more

डिजिटल व्यापार में मध्यप्रदेश की बड़ी छलांग: जेम प्लेटफॉर्म पर 86 हजार से अधिक विक्रेताओं की प्रोफाइल पूर्ण

भोपाल मध्यप्रदेश में गवर्मेंट ई-मार्केट (जेम) का दायरा लगातार बढ़ रहा है। राज्य के 86 हजार से ज्यादा विक्रेताओं ने इस प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रोफाइल पूरी कर ली है। मध्यप्रदेश के सूक्ष्म और लघु उद्यमों को राज्य के खरीदारों से 5,523 करोड़ रुपए, अन्य राज्यों के खरीदारों से 2,030 करोड़ रुपए और केंद्रीय खरीदारों से 20,298 करोड़ रुपए के ऑर्डर मिले हैं। यह मजबूत भागीदारी, राष्ट्रीय सार्वजनिक खरीद प्रणाली में राज्य के बढ़ते एकीकरण को दर्शाती है और स्थानीय उद्यमों को व्यापक सरकारी बाजार तक पहुंच प्रदान करने में जेम की भूमिका को उजागर करती है। गवर्मेंट ई-मार्केटप्लेस-जेम और मध्यप्रदेश सरकार ने गुरूवार को भोपाल में जेम प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने के उपायों पर चर्चा की। गवर्मेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  मिहिर कुमार ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव  अनुराग जैन से भोपाल में मुलाकात की और राज्य में जेम प्लेटफॉर्म को अपनाने की भावी रणनीतियों पर चर्चा की। बैठक में केंद्रीय और राज्य मंत्रालयों, विभागों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, स्वायत्त निकायों, स्थानीय संस्थानों और पंचायती राज संस्थाओं सहित सभी सरकारी खरीदारों के लिए एकीकृत पारदर्शी और कुशल ऑनलाइन खरीद प्रणाली प्रदान करने के जेम के मुख्य उद्देश्य के बारे में जानकारी दी गई। दोनों पक्षों ने राज्य के भीतर सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता, समावेशिता और जवाबदेही को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए अधिक मजबूत और सुव्यवस्थित खरीद ढांचा विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इसे अपनाने में तेजी लाने की अपनी राष्ट्रीय रणनीति के तहत जेम ने उच्च संचयी सकल व्यापारिक मूल्य वाले राज्यों के साथ सीईओ-स्तरीय बातचीत सहित कई केंद्रित कार्यक्रम शुरू किए हैं। केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री  पीयूष गोयल ने भी मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर राज्यों के खरीद नियमों को सामान्य वित्तीय नियमों और जेम के नियमों व शर्तों के अनुरूप बनाने के लिए प्रोत्साहित किया है। गृह मंत्रालय को भी पत्र लिखकर यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि केंद्र शासित प्रदेशों में खरीद जेम के माध्यम से ही हो। मध्यप्रदेश में जेम के संचयी सकल व्यापारिक मूल्य के नई उपलब्धि हासिल करने के साथ, मध्यप्रदेश में यह भागीदारी राज्य के खरीद व्यवस्था को मजबूत करने और सभी विक्रेताओं के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने की दिशा में एक और कदम है। जेम निष्पक्षता, डिजिटल अखंडता और समावेशिता की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे प्रत्येक विक्रेता, विशेष रूप से छोटे और उभरते उद्यम, भारत के पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-संचालित सार्वजनिक खरीद ढांचे में सार्थक रूप से भाग ले सकेंगे।  

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस : गौरवशाली अतीत के नायक सम्राट विक्रमादित्य को समर्पित

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस : अभ्युदय का उत्सव मध्यप्रदेश स्थापना दिवस : गौरवशाली अतीत के नायक सम्राट विक्रमादित्य को समर्पित मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर महानाट्य सम्राट विक्रमादित्य का मंचन भोपाल  अतुल्य भारत का हृदय प्रदेश "मध्यप्रदेश" अपना 70वाँ स्थापना दिवस 'अभ्युदय मध्यप्रदेश' के रूप में मनाने जा रहा है। यह भव्य समारोह 1 से 3 नवंबर, 2025 तक भोपाल के लाल परेड मैदान में आयोजित होगा। 'विरासत से विकास' की यात्रा को दर्शाने वाला यह आयोजन 'उद्योग एवं रोजगार वर्ष' की थीम पर आधारित है। इस तीन दिवसीय समारोह का मुख्य आकर्षण होगा महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य'। इसके साथ ही सुप्रसिद्ध गायकों की सुगम संगीत प्रस्तुतियाँ, प्रदर्शनियाँ, शिल्प मेला और व्यंजन मेले जैसी गतिविधियाँ भी आयोजित की जाएँगी। यह समारोह केवल सांस्कृतिक रंगों से ही नहीं सजेगा, बल्कि महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य' के मंचन से नागरिकों को यह जानने का अवसर मिलेगा कि मध्यप्रदेश का अतीत कितना गौरवशाली रहा है। सम्राट विक्रमादित्य, जिनके राज्य की पहचान जनकल्याण, सुशासन और शौर्य थी, वे हमारे लिए आज भी प्रेरणास्रोत हैं। विकसित राज्य और राष्ट्र की अवधारणा की प्रेरणा हमें ऐसे ही अतीत के महानायकों से मिली है। महानाट्य का भव्य मंचन सम्राट विक्रमादित्य के जीवन और उनके महान योगदान से जनता को परिचित कराने के लिए यह महानाट्य 2 और 3 नवंबर, 2025 को सायं 6:30 बजे से लाल परेड मैदान भोपाल में दो दिनों तक मंचित किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रदेश के वैभवशाली इतिहास को जन-जन तक पहुँचाना है। सम्राट विक्रमादित्य का वैश्विक सम्मान विक्रमादित्य भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय सम्राट नायक माने जाते हैं। उनकी वीरता, देश को पराधीनता से मुक्त करने की उत्कृष्ट अभिलाषा, राजनीतिक उपलब्धियाँ, न्याय की अनोखी पद्धति और कला-साहित्य को दिए गए उदार संरक्षण ने उन्हें केवल भारत में ही नहीं बल्कि सुदूर देशों में भी प्रतिष्ठित किया है। विक्रम संवत काल गणना का सर्वश्रेष्ठ आधार विक्रमादित्य ने शकों और यवनों के आतंक से भारत को मुक्त कराया था। उन्होंने 96 शक सामंतों को पराजित कर उन्हें देश छोड़ने पर विवश किया जिसके बाद उन्हें 'शकारि' और 'साहसांक' जैसी उपाधियाँ मिलीं। आज 2082 वर्ष पूर्व उनके द्वारा प्रारंभ किया गया 'विक्रम संवत' न केवल भारत में बल्कि दुनिया में भी काल गणना का सर्वश्रेष्ठ आधार है। ज्ञान और कला का प्रतीक दरबार 'बेताल पच्चीसी' और 'सिंहासन बत्तीसी' में उनके अद्भुत न्याय, वीरता और महानता की कथाएँ प्रचलित हैं। उनके दरबार में कालिदास, वराहमिहिर, धन्वंतरि जैसे नवरत्न थे, जो जनकल्याणकारी कार्यों में संलग्न रहते थे। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत प्राचीन काल से ही विज्ञान, खगोल शास्त्र, ज्योतिष और साहित्य-कला के क्षेत्रों में कितना समृद्ध और सशक्त रहा है। महानाट्य की भव्यता विक्रमादित्य की गाथा को जन-जन तक पहुँचाने का यह चुनौतीपूर्ण संकल्प उज्जैन की संस्था 'विशाला सांस्कृतिक एवं लोकहित समिति' ने लिया है। लगभग 150 कलाकारों और 50 सहयोगियों द्वारा मंचित इस विराट प्रस्तुति में दृश्यों को सजीव बनाने के लिए अश्व (घोड़े), रथ, पालकी और ऊँट का भी प्रयोग किया गया है। तीन मंचों और एलईडी ग्राफिक्स के स्पेशल इफेक्ट्स से इसे अत्यंत प्रभावी बनाया गया है। प्रधानमंत्री द्वारा प्रशंसित महानाट्य इस महानाट्य की प्रस्तुति को दिल्ली के लाल किला, हैदराबाद, आगरा सहित देश के अनेक प्रमुख शहरों में भरपूर सराहना मिली है। भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी भी स्वयं इस महानाट्य की प्रशंसा कर चुके हैं। अब यह भोपाल के ऐतिहासिक लाल परेड ग्राउंड में मंचित होने जा रहा है। विविध सांस्कृतिक गतिविधियाँ 2 और 3 नवंबर को 'अभ्युदय मध्यप्रदेश' के अंतर्गत लाल परेड ग्राउंड में दोपहर 12 बजे से रात्रि 10 बजे तक अनेक गतिविधियाँ आयोजित होंगी। इन गतिविधियों के माध्यम से आम नागरिक प्रदेश की शिल्प कला, हस्त कला, पारंपरिक कला, व्यंजन, विरासत और वैभव से परिचित हो सकेंगे। प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं:         12 प्रदर्शनियाँ, जिनमें 'विक्रमादित्य और अयोध्या', 'विक्रमादित्य की मुद्राएं और सिक्के', 'राजा भोज का भोपाल', 'मध्यप्रदेश की बावड़ियाँ', और 'मध्यप्रदेश के मंदिर देवलोक' प्रमुख हैं।         वनौषधि और वैद्य पर केंद्रित 'वन मेला'।         'एक जिला-एक उत्पाद' के अंतर्गत 'शिल्प मेला' (प्रदर्शन सह विक्रय)।         देशज व्यंजनों का 'स्वाद' व्यंजन मेला।  

महिला एवं बाल विकास विभाग ने बच्चों के पोषण पर जारी की गाइडलाइन, छह महीने के बाद मांसाहारी परिवारों के लिए खास सलाह

भोपाल  मध्य प्रदेश में महिला और बाल विकास विभाग ने दो साल तक के बच्चों के आहार को लेकर नई सलाह जारी की है। विभाग का कहना है कि छह माह की उम्र पूरी होने के बाद यदि परिवार मांसाहारी है, तो बच्चों को अंडा, मांस और मछली खिलाना चाहिए।विभाग ने बच्चों के पोषण के पांच सूत्र जारी किए हैं और इनका प्रचार-प्रसार आंगनवाड़ी केंद्रों और जनजागरूकता अभियानों के जरिए करने को कहा है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि बाजार की चीजें जैसे बिस्किट, चिप्स, मिठाई, नमकीन और जूस बच्चों के लिए नुकसानदायक हैं, क्योंकि इनमें आवश्यक पोषक तत्व नहीं होते। पोषण अभियान के तहत दिए निर्देश केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पोषण अभियान के तहत यह दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। मंत्रालय ने सभी राज्यों को इन सूत्रों को अपनाने को कहा है। मध्य प्रदेश में इन्हें राज्य की महिला एवं बाल विकास विभाग की वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया है। पोषण के पांच सूत्र इस प्रकार हैं:     पहले 1000 सुनहरे दिन: बच्चे के जन्म से दो वर्ष तक का समय सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, जिसमें पोषण और स्वास्थ्य पर खास ध्यान देने की जरूरत है।     पौष्टिक आहार: परिवार मांसाहारी हो तो बच्चे को अंडा, मांस और मछली देने की सलाह।     अनीमिया से बचाव: आयरन और प्रोटीन से भरपूर भोजन का सेवन बढ़ाने की सलाह।     डायरिया से बचाव: साफ पानी और स्वच्छ भोजन पर ध्यान।     स्वच्छता और साफ-सफाई: संक्रमण और बीमारियों से बचाव के लिए व्यक्तिगत व घरेलू स्वच्छता पर फोकस। बच्चों के लिए 1000 दिन बताए सुनहरे पोषण के पांच सूत्र बताते हुए कहा गया है कि पहले सौ दिनों में बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है। इसमें गर्भावस्था की अवधि से लेकर बच्चे के जन्म के दो साल तक की उम्र की अवधि शामिल है। इस दौरान उचित स्वास्थ्य, पर्याप्त पोषण, प्यार भरा व तनाव मुक्त माहौल और सही देखभाल होना चाहिए, ताकि बच्चे का पूरा विकास हो। इस दौरान मां और बच्चे को सही पोषण की सर्वाधिक जरूरत होती है। इन 1000 सुनहरे दिनों में 270 दिन गर्भावस्था, 365 दिन बच्चे के जन्म के पहले साल के और 365 दिन बच्चे के जन्म के दूसरे साल के शामिल होते हैं। पौष्टिक आहार में कहा- मांस, मछली, अंडा खाना चाहिए सभी उम्र के लोगों के साथ बच्चे को छह माह का होने पर पर्याप्त मात्रा में अलग-अलग आहार खिलाने की बात कही गई है। साथ ही कहा गया है कि विभिन्न खाद्य पदार्थ जैसे रोटी, चावल और पीले व काले रंग की दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां मसलन पालक, मैथी, चौलाई, सरसों, पीले फल आम, पका पपीता आदि खाना चाहिए। विभाग ने इसमें यह भी कहा है कि यदि मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस और मछली खाना चाहिए। विभाग के अनुसार खाने में दूध, मिल्क प्रोडक्ट, अखरोट आदि शामिल करने के साथ आंगनवाड़ी में मिलने वाले पोषाहार अवश्य खाना चाहिए। जब बच्चा छह माह का हो जाए तो मां के दूध के साथ घर का बना मसला और गाढ़ा ऊपरी आहार भी दिया जाना चाहिए। इसमें कद्दू, लौकी, गाजर, पालक, दाल शामिल हैं। अगर मांसाहारी हैं तो अंडा, मांस और मछली भी देना चाहिए। बच्चे के खाने में नमक, चीना और मसाला कम डालें और बच्चे को बाजार का बिस्कुट, चिप्स, मिठाई, नमकीन और जूस जैसी चीजें न पिलाएं। इससे बच्चे को सही पोषक तत्व नहीं मिलते। अनीमिया रोकने के लिए भी अंडा, मांस, मछली खाने को कहा पोषण का तीसरा सूत्र अनीमिया रोकने को लेकर किए जाने वाले प्रयास बताए गए हैं जिसमें कहा गया है कि अनीमिया रोकथाम के लिए आयरन युक्त भोजन जैसे दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां, पालक, मैथी, सरसों, फल, दूध, दही, पनीर आदि बच्चे को खिलाएं। एमपी में हो चुका है अंडा खिलाने का विरोध प्रदेश में आंगनवाड़ी केंद्रों में जाने वाले बच्चों को अंडा खिलाने का प्रस्ताव पूर्व में भी महिला और बाल विकास विभाग में आ चुका है जिसका जमकर विरोध हुआ और इसके बाद सरकार ने इस फैसले को वापस ले लिया है। अब केंद्रीय महिला और बाल विकास विभाग के पोषण के पांच सूत्र बताए जाने के बाद इसे जिला अधिकारियों को लागू करने के लिए कहा गया है। हालांकि आंगनवाड़ी केंद्रों से इसकी सप्लाई को लेकर कोई बात नहीं कही गई है। बच्चे के माता पिता के लिए यह सलाह दी गई है।

नौरादेही में बनेगा तीसरा चीते का घर, केंद्र ने दिए 4 करोड़, कूनो और गांधी सागर के बाद नई पहल

भोपाल  चीता रीइंट्रोडक्शन प्रोग्राम के तहत नमीबिया से लाए गए चीते अब भी एमपी की पहचान बने रहे रहेंगे। इनको एमपी के बाहर नहीं बसाया जा रहा है, बल्कि इनके लिए प्रदेश में ही नया ठिकाना तैयार किया जा रहा है। रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व ( नौरादेही ) को चीतों का नया घर बनने जा रहा है। दरअसल, नौरादेही अभ्यारण को चीतों का नया ठिकाना बनाने की केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही एनटीसीए ( नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी ) ने तैयारियों के लिए सेंट्रल कैंपा फंड से 4 करोड़ रुपए जारी किए हैं। यह तैयारियों की पहली किस्त है। इसके बाद जल्दी ही 3 करोड़ की दूसरी किस्त जारी की जाएगी। तैयार होगा चीतों का ठिकाना एनटीसीए की तरफ से जारी किए गए फंड से नौरादेही में चीतों के लिए नया घर तैयार होगा। इसमें सागर और दमोह जिले में फैले नौरादेही अभ्यारण में 4 क्वारेंटाइन बोमा और एक सॉफ्ट रिलीज बोमा तैयार किया जाएगा। साथ ही फेंसिंग सहित इंफ्रास्ट्रक्चर के अन्य जरूरी काम जल्द शुरू होंगे। वहीं, दूसरे फंड मिलने के बाद 2339 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले प्रदेश के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व नौरादेही में चीते बसाए जाएंगे। एनटीसीए की टीम करेगी दौरा केंद्र सरकार से नौरादेही अभ्यारण बनाने की मंजूरी मिलने के बाद यहां चीतों को बसाने की कवायद तेज हो गई है। 4 महीने पहले किए गए निरीक्षण में नौरादेही के सिंघपुर, मोहली और झापा फॉरेस्ट रेंज को चीतों के सबसे बेस्ट माना गया। जल्दी ही एनटीसीए की टीम इन तीनों इलाकों का दौरा करने के लिए आएगी। फॉरेस्ट रेंज से कई गांव होंगे विस्थापित नौरादेही में जिन तीन क्षेत्रों सिंघपुर, झापा और मोहली को चीतों को उपर्युक्त माना है। उसके अंदर 13 गांव आते हैं। चीतों को बसाने से पहले यहां के लोगों को पुनर्वासित किया जाएगा। चीतों को लाने से पहले 30 किमी के रेंज पर बाड़ेबंदी की जाएगी। राजस्थान और गुजरात नहीं जाएंगे चीते चीतों की अगली बसाहट राजस्थान या गुजरात में करने की तैयारी थी। हालांकि एनटीसीए ने स्पष्ट कर दिया है कि चीतों को कहीं और नहीं बसाया जाएगा। एमपी में इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी। ऐसी संभावना है कि नए साल 2026 में अफ्रीका से आने वाले चीतों की नई खेप को नौरादेही में बसाया जाएगा। यदि ऐसा नहीं हो पाया तो कूनो में पले बढ़े और जवान हो चुके शावकों को शिफ्ट किया जाएगा। 1952 से विलुप्त हो गए थे चीते देश में चीतों को आखिरी बार 1952 में देखा गया था। इसके बाद से विलुप्त हो चुके चीतों को रीइंट्रोडक्शन करने के लिए साल 2022 में नामीबिया से 8 चीतों की पहली खेप लाई गई। इनको कूनो में बसाया गया। फिर फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीतों को लाया गया। इन्हें भी कूनो में ही रखा गया। दो खेप में कुल 20 चीतों को भारत में लाया गया। कूनो में पिछले दो सालों में इन चीतों ने कुल 26 शावकों को जन्म दिया। हालांकि बीमारी, हमलों और अन्य कारणों के चलते केवल 19 ही जीवित बच पाए हैं।

जिला प्रशासन हाईटेक बनेगा: मध्यप्रदेश में 60% से ज्यादा अफसरों को सीखनी होगी नई तकनीक

भोपाल  जिला प्रशासन का पूरा काम एप्लीकेशन व पोर्टल से शुरू किया गया, लेकिन अप्रशिक्षित कर्मचारियों की वजह से काम में दिक्कत आ रही। प्रशासन के विभिन्न विभागों ने अपने-अपने उच्चाधिकारियों को इसकी शिकायत की है। इसके बाद अब इन्हें प्रशिक्षित करने की कवायद शुरू की जा रही है। इनकी विशेष ट्रेनिंग होगी। बताया जा रहा है कि 60 फीसदी से ज्यादा प्रशासनिक अफसर- राजस्व अधिकारियों को हाईटेक तकनीक सीखने जरूरत है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रमसिंह ने कहा कि प्रशासन में ई-ऑफिस सिस्टम को मजबूत किया जा रहा है। अब पूरा काम डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक ही हो रहा है। कर्मचारियों को जरूरी प्रशिक्षण तय किया जा रहा। इस तरह जिला प्रशासन अब पूरी तरह ऑनलाइन एमपी ई- डिस्ट्रीक्ट- विभिन्न प्रमाण पत्रों जैसे- आय, निवास, जाति प्रमाण पत्र और सरकारी सेवाओं के लिए ऑनलाइन आवेदन और ट्रैक करने के लिए है। एमपी भू-अभिलेख- जमीन के रिकॉर्ड, खसरा, खतौनी और भू-नक्शा देखने के लिए। स्मार्ट एप्लीशन फॉर रेवेन्यू एडमिनिस्ट्रेशन- इसके तहत डिजिटल फसल सर्वेक्षण और गिरदावरी निरीक्षण जैसे कार्य किए जाते हैं। इसलिए जरूरी -भू स्वामियों की जमीनों से जुड़े खसरे, नामांतरण, सीमांकन की प्रमाण पत्र सीधे वाट्सएप पर भेजे जाने लगे हैं। -सभी तरह के सर्टिफिकेट अब ऑनलाइन डिजिटली ही दिए जाने लगे हैं। ई-डिस्ट्रीक्ट से सीधे मोबाइल मैसेज, मेल व वॉट्सएप पर प्रति पहुंच रही है। -आने वाले दिनों में नोटिस समेत अन्य हर्जाना- जुर्माना ई-चालान की तरह डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक ही भेजे जाएंगे।

आदि कर्मयोगी अभियान के उत्कृष्ट क्रियान्वयन में मप्र का देश में उत्कृष्ट प्रदर्शन

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 17 अक्टूबर को करेंगी मध्यप्रदेश को सम्मानित भोपाल  मध्यप्रदेश को आदि कर्मयोगी अभियान के क्रियान्वयन में देश में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रथम पांच राज्यों में स्थान मिला है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु 17 अक्टूबर को नई दिल्ली में आदि कर्मयोगी अभियान पर आयोजित राष्ट्रीय कॉन्क्लेव में मध्यप्रदेश को सम्मानित करेंगी। प्रमुख सचिव जनजाति कार्य श्री गुलशन बामरा राज्य स्तरीय पुरस्कार ग्रहण करेंगे। वे जनजातीय समुदाय के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किए जा रहे प्रयासों पर प्रस्तुति भी देंगे। पीएम जनमन में शिवपुरी को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया जायेगा। आदि कर्मयोगी अभियान में देश स्तरीय उत्कृष्ट जिलों में मध्यप्रदेश के बैतूल जिले को सम्मानित किया जाएगा। प्रदेश की उत्कृष्ट मास्टर ट्रेनर श्रेणी में सहायक शोध अधिकारी श्रीमती सारिका धौलपुरिया सम्मानित होंगी। आदि कर्मयोगी अभियान में अन्य उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिलों में बैतूल , धार, पूर्वी निमाड़ और बड़वानी का भी विशेष उल्लेख होगा। संबंधित जिलों के कलेक्टर विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। राज्य स्तरीय सुपर कोच और मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रदेश के उपायुक्त आदिवासी विकास श्री जेपी यादव को सम्मानित किया जाएगा। एकीकृत जनजातीय विकास एजेंसियों बड़वानी, बैतूल और शिवपुरी को उल्लेखनीय गतिविधियों के क्रियान्वयन के लिए सम्मानित किया जाएगा। धरती आबा जन भागीदारी अभियान में गुना, बुरहानपुर और विदिशा को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया जाएगा। एकीकृत आदिवासी विकास एजेंसी गुना और एकीकृत आदिवासी विकास एजेंसी विदिशा को उत्कृष्टतम प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि आदि कर्मयोगी अभियान में 14 हजार गांवों के विलेज एक्शन प्लान बन चुके हैं। ग्राम सभा से इनका अनुमोदन कराया गया है। इन गांवों में 13 हजार से ज्यादा आदि सेवा केंद्र स्थापित हो चुके हैं। आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, पीएम किसान, जन धन, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, राशन कार्ड जैसे आवश्यक दस्तावेज जारी किए गए है। पीएम जनमन योजना के अंतर्गत हितग्राही मूलक योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश में उत्कृष्ट कार्य हुआ है। आधार कार्ड, जनधन बैंक खाता, आयुष्मान कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम किसान सम्मान निधि और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज उपलब्ध कराने में 100% उपलब्धि हासिल की है। आयुष्मान कार्ड जारी करने में शिवपुऱी, मैहर, रायसेन, कटनी और भिंड ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। लंबित जाति प्रमाण पत्र जारी करने में जबलपुर, रायसेन और सिवनी ने अच्छा प्रदर्शन किया है। अधोसंरचनात्मक कार्य जैसे हॉस्टल निर्माण, सड़क निर्माण, आंगनवाड़ी भवन निर्माण, मल्टीपरपज सेंटर निर्माण तेजी से जारी है। राज्य में राज्य स्तरीय 12 मास्टर ट्रेनर, जिला स्तरीय 287 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए जबकि विकासखंड स्तर पर 12 हजार मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं। इसके अलावा संकुल स्तर पर 18150 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं। जनजाति कार्यों के क्रियान्वयन में सहयोग के लिए 1 लाख 41 हजार से ज्यादा आदि सहयोगी तैयार किए गए हैं जिसमें आम नागरिक, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल है। साथ ही एक लाख 92 हजार आदि साथी भी सहयोग कर रहे हैं जिनमें जनजाति समाज के नेतृत्व करने वाला समुदाय शामिल है। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के जनजाति कार्य मंत्रालय द्वारा आदि कर्मयोगी अभियान जनजाति समुदायों के सामाजिक आर्थिक विकास को गति देने के लिए प्रारंभ किया गया। इसका उद्देश्य जनजाति क्षेत्र में ग्राम स्तर पर नेतृत्व क्षमता का विकास करना, योजनाओं का प्रभावी अमल सुनिश्चित करना और शासन को और ज्यादा जवाबदेह बनाना है। यह अभियान सेवा, संकल्प और समर्पण जैसे मूल्यों पर आधारित है जो जनजातीय समाज को आत्मनिर्भर जागरूक और सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  

MP में भी लागू होगा ‘SIR’ अभियान: चुनाव आयोग की निगरानी में 5.75 लाख वोटर संदेह के घेरे में

रीवा निर्वाचन आयोग के निर्देश पर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम  की शुरुआत हो गई है। इसमें 2003 की मतदाता सूची से वर्तमान मतदाताओं का मिलान किया जाएगा। जिन मतदाताओं के माता-पिता के नाम उस समय की वोटर लिस्ट में दर्ज नहीं थे, उनका सत्यापन किया जाएगा और उनसे जरूरी दस्तावेज मांगे जाएंगे। रीवा और मऊगंज जिले की प्रारंभिक रिपोर्ट आयोग को भेज दी गई है। कुल 5,72,250 मतदाता इस जांच के दायरे में आएंगे। घर-घर जाकर होगी जांच निर्वाचन आयोग के निर्देश पर 2014 बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) डोर-टू-डोर सर्वे करेंगे। रीवा जिले में 1463 और मऊगंज जिले में 518 पोलिंग बूथ शामिल हैं। 1200 से अधिक मतदाताओं वाले मतदान केन्द्रों को विभाजित किया जा रहा है, जिससे दोनों जिलों में करीब 350 नए बूथ बढ़ जाएंगे। कौन-कौन से दस्तावेज देने होंगे जिन परिवारों के नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं हैं, उन्हें अपना नाम लिस्ट में बनाए रखने के लिए 2–3 दस्तावेज देने होंगे। जिनका जन्म 1 जुलाई 1987 से पहले हुआ है, उन्हें पिता से संबंध प्रमाणपत्र के साथ कोई एक मान्य दस्तावेज देना होगा। इसके लिए आपको पासपोर्ट, शैक्षणिक प्रमाणपत्र, स्थायी निवास प्रमाणपत्र, वन अधिकार पत्र, जाति प्रमाणपत्र (OBC/SC/ST), आधार कार्ड, पारिवारिक रजिस्टर, जन्म प्रमाणपत्र, बैंक या सरकारी पहचान पत्र, भूमि या मकान आवंटन प्रमाणपत्र, पेंशन आदेश आदि देना होगा। ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में बढ़े मतदाता? आयोग को भेजी रिपोर्ट के अनुसार शहरी रीवा विधानसभा में मतदाताओं की संख्या 11,239 कम हुई है। वहीं ग्रामीण विधानसभा क्षेत्रों में मतदाता तेजी से बढ़े हैं जैसे…     त्योंथर: +37,287     मनगवां: +93,659     गुढ़: +50,605     सिरमौर: +36,321     मऊगंज: +59,468     देवतालाब: +78,308     2008 में अस्तित्व में आई सेमरिया विधानसभा में अब 2,27,841 मतदाता हैं। BLO का काम हुआ और कठिन पुनरीक्षण कार्य से बूथ लेवल ऑफिसरों की जिम्मेदारी बढ़ गई है। वर्तमान में वे नगरीय निकायों की वोटर लिस्ट तैयार करने में भी लगे हैं, जिससे शिक्षक BLOs का शैक्षणिक कार्य प्रभावित हो रहा है। जल्द ही आयोग की ओर से डोर-टू-डोर सर्वे की विस्तृत कार्ययोजना जारी की जाएगी। जिला उप निर्वाचन अधिकारी सुधीर बेक का बयान निर्वाचक नामावली के गहन पुनरीक्षण में 2003 की सूची से संबंधित मतदाताओं एवं उनके माता-पिता के नामों का मिलान किया जाएगा। प्रारंभिक जानकारी आयोग को भेज दी गई है, आगे के निर्देशानुसार प्रक्रिया अपनाई जाएगी।