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मता बनर्जी पर राम कृपाल यादव का आरोप, घुसपैठियों की मदद से सत्ता चाहती हैं

पटना, बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ममता बनर्जी पर तंज कसा है। उन्होंने चुनाव आयोग पर ममता बनर्जी के बयान को लेकर कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और यह कभी किसी दल से प्रभावित नहीं हुआ है। राम कृपाल यादव ने कहा कि मेरा मानना है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसलिए चिंता जता रही हैं क्योंकि चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार अपना काम कर रहे हैं। उनकी समस्या यह है कि वे बांग्लादेश से आए घुसपैठियों की मदद से सरकार बनाना चाहती हैं, लेकिन यह संभव नहीं है। कानून का राज है और संवैधानिक व्यवस्था पर अगर कोई उंगली उठाता है तो जनता उसको कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि हिम्मत है तो महाभियोग लाएं। खारिज हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता उनके चेहरे को भी खारिज कर देगी। इस बार चुनाव में जनता ममता बनर्जी को हरा देगी। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार कातिल और असंवैधानिक है। वे कानून विरोधी काम करती है। ये सरकार भाजपा के कार्यकर्ताओं को चुन-चुन कर मरवा रही है। ममता बनर्जी के हाथ निर्दोषों के खून से रंगे हुए हैं। आने वाले वक्त में उनको इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे। बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार का सफाया होगा और भारतीय जनता पार्टी की दो तिहाई बहुमत से सरकार बनेगी। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण ईंधन और गैस आपूर्ति में आई बाधाओं पर मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण हुई है। इस स्थिति के चलते कुछ कठिनाइयां उत्पन्न हो गई हैं। उन्होंने कहा कि भारत और राज्य की सरकार संयुक्त रूप से इस समस्या के निदान के लिए काम कर रही है। जिससे कि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार का कष्ट न उठाना पड़े। नियमित रूप से गैस और तेल इत्यादि मिलता रहे। कालाबाजारी करने वाले लोगों को लेकर उन्होंने कहा कि कालाबाजारी करने वाले लोगों को सरकार छोड़ेगी नहीं। जो कालाबाजारी करेंगे उनका लाइसेंस रद्द होगा और उनको जेल भी जाना पड़ेगा। इसलिए इन सब चीजों पर सरकार निगरानी रखे हुए हैं। सरकार का दायित्व है कि जनता के हित में काम करे। जनता के अहित में जो काम करेगा उसको सरकार छोड़ेगी नहीं।  

ममता बनर्जी बोलीं—बंगाल को टारगेट किया जा रहा, प्रोटोकॉल तोड़ने के आरोप खारिज

कोलकाता पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम में हुई अव्यवस्था के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार नहीं है। कोलकाता में पत्रकारों से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी निजी आयोजकों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की थी। इसलिए अगर कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी भी उन्हीं पर आती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को शनिवार को होने वाले राष्ट्रपति के कार्यक्रम की पूरी जानकारी भी नहीं दी गई थी और न ही सरकार को इस आयोजन में शामिल किया गया था। उनके मुताबिक, जब राज्य सरकार को कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी ही नहीं थी, तो उस पर प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप लगाना सही नहीं है। सीएम ममता ने यह भी कहा कि गंदगी, ग्रीन रूम की समस्या और महिलाओं के टॉयलेट की कमी जैसी शिकायतें भी आयोजकों और एएआई की जिम्मेदारी हैं। पीएम मोदी के आरोपों पर पलटवार मुख्यमंत्री ने कोलकाता के केंद्रीय धरना स्थल से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीएमसी सरकार पर राष्ट्रपति का अपमान करने का आरोप लगाया, जबकि वास्तविकता अलग है। उन्होंने प्रधानमंत्री की एक तस्वीर दिखाते हुए कहा कि तस्वीर में प्रधानमंत्री बैठे हैं और राष्ट्रपति खड़ी हैं। सीएम ममता ने कहा कि हम कभी ऐसा नहीं करते। यह भाजपा की संस्कृति है, हम कभी राष्ट्रपति का अपमान नहीं करते। संविधान का पूरा सम्मान करती हैं बंगाल सरकार- ममता ममता बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल सरकार राष्ट्रपति के पद और संविधान का पूरा सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है और राज्य सरकार हमेशा उसकी गरिमा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहती है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। राष्ट्रपति का सम्मान हर सरकारी की जिम्मेदारी- ममता उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस मुद्दे को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं ताकि राज्य सरकार की छवि खराब की जा सके। ममता बनर्जी ने दोहराया कि राज्य सरकार ने राष्ट्रपति के दौरे के दौरान अपनी तरफ से सभी जरूरी सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और संविधान का सम्मान करना हर सरकार और नागरिक की जिम्मेदारी है, और पश्चिम बंगाल सरकार इस जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाती है। लोगों के अधिकार के लिए धरना पर बैठी हूं- ममता ममता बनर्जी ने यह भी बताया कि सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देब ने प्रोटोकॉल का पालन करते हुए राष्ट्रपति का बैगडोगरा हवाई अड्डे पर स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं धरना पर बैठी हूं ताकि लोगों के अधिकार सुरक्षित रहें। मैं इसे कैसे छोड़ सकती हूं? उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और सरकार पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। ममता बनर्जी ने दोहराया कि राज्य सरकार हमेशा राष्ट्रपति और संविधान का सम्मान करती है और कार्यक्रम में किसी भी तरह की अव्यवस्था के लिए इसे जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। क्या है पूरा मामला, समझिए गौरतलब है कि बंगाल की राजनीति में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोपों के मामले में सियासत सातवें आसमान पर पहुंच गई है। इसकी शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति मुर्मू ने शनिवार को दार्जिलिंग में 9वें अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन के आयोजन को लेकर असंतोष व्यक्त किया था और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुपस्थिति पर टिप्पणी की थी। इसके बाद क्या था, भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार पर राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप लगाया और खूब बयानबाजी की। दूसरी ओर जबकि टीएमसी ने प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप को खारिज किया है।

केंद्र ने राष्ट्रपति मुर्मू के प्रोटोकॉल उल्लंघन पर ममता सरकार से मांगी रिपोर्ट, होम मिनिस्ट्री ने लिया एक्शन

 नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन और कार्यक्रम स्थल में अचानक बदलाव को लेकर विवाद गहरा गया है।सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस पूरे मामले का बड़े स्तर पर संज्ञान लिया है. केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शाम पांच बजे तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें प्रोटोकॉल न दिए जाने, रास्ते की सही जानकारी न प्रदान करने और अन्य व्यवस्थाओं में चूक के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया है। दरअसल, ये विवाद राष्ट्रपति मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे के दौरान सामने आया, जहां वह दार्जिलिंग जिले में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं थीं. मूल रूप से कार्यक्रम बिधाननगर (फांसीदेवा ब्लॉक) में प्रस्तावित था, जहां बड़ी संख्या में संथाल आदिवासी समुदाय के लोग पहुंच सकते थे. लेकिन राज्य प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़भाड़ और अन्य कारणों का हवाला देकर इसे बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोशाईपुर (या गोसाईंपुर) में स्थानांतरित कर दिया. राष्ट्रपति ने खुद इस बदलाव पर नाराजगी जताई और कहा कि नया स्थान छोटा था, जिससे कई लोग पहुंच नहीं पाए। उन्होंने ममता बनर्जी को छोटी बहन बताते हुए पूछा कि क्या वो उनसे नाराज हैं, क्योंकि न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री उन्हें रिसीव करने पहुंचीं, जबकि पद की गरिमा के लिए प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है। इन प्रोटोकॉल्स का हुआ उल्लंघन सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल में कई पैमानों पर सुरक्षा संबंधित ब्लू बुक के नियमों का उल्लंघन हुआ है. जिसमें- प्रेसिडेंट को रिसीव करने और सी-ऑफ करने के लिए CM, CS और DGP क्यों नहीं थे?. सिर्फ सिलीगुड़ी के मेयर ही उन्हें रिसीव करने के लिए वहां थे. प्रेसिडेंट के लिए बने वॉशरूम में भी पानी नहीं था. एडमिनिस्ट्रेशन जिस रास्ते से गुज़रा, वह कचरे से भरा हुआ था. सूत्रों का ये भी कहना है कि इस परिस्थितियों के लिए दार्जिलिंग के डीएम, सिलीगुड़ी के CP और ADM जिम्मेदार हैं। अमित शाह ने ममता को घेरा इस मामले में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एक्स पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की TMC सरकार ने अराजक व्यवहार करते हुए भारत के राष्ट्रपति का अपमान कर एक नया निचला स्तर छू लिया है. उन्होंने इसे भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के मूल्यों पर आघात बताया और कहा कि आज लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला हर नागरिक आहत और दुखी महसूस कर रहा है.कार्यक्रम में प्रोटोकॉल की खुली अनदेखी कर राष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है। शाह ने आरोप लगाया कि ये घटना टीएमसी सरकार में व्याप्त अव्यवस्था और गिरावट को दिखाती है. सरकार न सिर्फ नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, बल्कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद का भी सम्मान नहीं करती. खास तौर पर आदिवासी भाई-बहनों के कार्यक्रम में हुआ ये व्यवहार पूरे देश के लिए अपमानजनक है। केंद्रीय गृह ने इस घटना को भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के मूल्यों पर आघात करार दिया है. आज लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला हर नागरिक आहत और दुखी महसूस कर रहा है। ममता ने आरोपों को किया खारिज दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोपों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति का सम्मान करती हैं, लेकिन अगर कोई 50 बार भी आए तो हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि वह इस वक्त धरने पर बैठी हैं और जिस कार्यक्रम का जिक्र किया जा रहा है, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने इस कार्यक्रम के राज्य को जानकारी न होने की बात करते हुए कहा, 'उस कार्यक्रम के आयोजकों, फंडिंग या आयोजन को लेकर राज्य सरकार को कोई जानकारी नहीं दी गई थी. जब भी राष्ट्रपति राज्य में आती हैं या जाती हैं तो इसकी सूचना मिलती है, लेकिन संबंधित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और न ही राज्य सरकार उस कार्यक्रम का हिस्सा थी।

गैस सिलेंडर महंगा होने पर ममता बनर्जी का हमला, कोलकाता में विरोध मार्च की घोषणा

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध जताया और कोलकाता में रविवार को बड़े पैमाने पर विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया है। सीएम ममता बनर्जी ने लोगों से अपील की है कि वे रसोई के बर्तन और घरेलू सामान लेकर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हों। उन्होंने कहा कि बढ़ती गैस कीमतों का सबसे अधिक असर आम परिवारों, खासकर महिलाओं पर पड़ रहा है, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर माताओं और बहनों को सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराना चाहिए। कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके में धरने पर बैठीं सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी आम जनता के लिए बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार मध्य रात्रि से घरेलू उपयोग वाले गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। तीन दिन पहले ही कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में 49 रुपए का इजाफा किया गया था। उन्होंने कहा कि बड़े सिलेंडर की कीमत करीब 2,100 रुपए तक पहुंच गई है, जबकि छोटे सिलेंडर की कीमत लगभग 1,000 रुपए हो गई है। मुख्यमंत्री ने गैस बुकिंग से जुड़े नियमों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब एलपीजी सिलेंडर 21 दिन पहले बुक करना होगा। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि अगर किसी घर में गैस खत्म हो जाए तो क्या वह परिवार 21 दिन तक बिना खाना बनाए रह सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियां बनाते समय सरकार को यह भी सोचना चाहिए कि आम लोग क्या खाएंगे और उनकी रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी होंगी। धरने के मंच से सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि रविवार को निकाले जाने वाले जुलूस में लोग बर्तन, कटोरी, चम्मच और रसोई के अन्य सामान लेकर आएं, ताकि यह दिखाया जा सके कि गैस के बिना घरों में खाना बनाना संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर संभव हो तो गैस स्टोव भी साथ लेकर आएं और टोकरी में कच्चा अनाज लेकर विरोध जताएं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़े तो महिलाएं काली साड़ी पहनकर भी इस विरोध में शामिल हो सकती हैं। मुख्यमंत्री ने इसे मानवता की रक्षा का आंदोलन बताते हुए महिलाओं से बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरने का आह्वान किया। इस बीच, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के खतरे के बीच, केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है। सरकार ने भारतीय रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि अतिरिक्त खरीदी गई एलपीजी मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं को ही उपलब्ध कराई जाए। केंद्र सरकार के फैसले के तहत 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद पहले 879 रुपए में मिलने वाला सिलेंडर अब 939 रुपए में मिलेगा। नई कीमतें शनिवार से लागू हो गई हैं। वहीं, कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में भी प्रति सिलेंडर 50 रुपए का इजाफा किया गया है, जिससे इसकी कीमत बढ़कर लगभग 1,990 रुपए तक पहुंच गई है। गैस की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर रेस्तरां और होटल उद्योग पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे बाहर खाना खाने का खर्च बढ़ सकता है। इसी दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य सरकार की नई योजना ‘बांग्लार युवा साथी’ को लेकर भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत लाभार्थियों को शनिवार से ही वित्तीय सहायता मिलनी शुरू हो जाएगी। योजना के तहत राज्य के ऐसे छात्र जिन्होंने माध्यमिक परीक्षा पास कर ली है, लेकिन अभी तक उन्हें नौकरी नहीं मिली है, उन्हें प्रति माह 1,500 रुपए का भत्ता दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले इस योजना की राशि 1 अप्रैल से देने की बात कही गई थी, लेकिन अब इसे पहले ही लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने वादों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाला अनुदान फरवरी से ही दिया जा रहा है। ममता बनर्जी ने कहा, “हम जो कहते हैं, वो करते हैं।”

ममता बनर्जी का केंद्र पर हमला: राज्यपाल के इस्तीफे को बताया ‘अमित शाह की राजनीतिक चाल’

कोलकाता पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल सीवी आनंदबोस के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यह सब गृह मंत्री अमित शाह के दबाव की वजह से हो रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले इस तरह का फैसला अमित शाह ही ले सकते हैं। बनर्जी ने कहा कि सीवी आनंदबोस ने किसलिए इस्तीफा दिया इसको लेकर कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा कता लेकिन इतना साफ है कि राजनीतिक फायदे को देखते हुए ही इस तरह का परिवर्तन किया जा रहा है। नवंबर 2027 तक था कार्यकाल सीएम बनर्जी ने कहा कि उन्हें शाह से पता चला है कि बोस के जाने के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल एवं पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) आरएन रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। बोस ने दिल्ली से बताया, ''हां, मैंने इस्तीफा दे दिया है। मैं साढ़े तीन साल तक बंगाल का राज्यपाल रहा हूं; यह मेरे लिए पर्याप्त है।' उन्होंने हालांकि अचानक इस्तीफा देने के कारणों का खुलासा नहीं किया, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं क्योंकि उनका कार्यकाल नवंबर 2027 तक था। बनर्जी ने कहा कि शाह ने थोड़ी देर पहले ही उन्हें इस फैसले के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतें देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा हैं। इस तरह से एकतरफा फैसले किसी राज्य के हित में नहीं हैं बल्कि पार्टी विशेष के हित में हैं। 'लोक भवन' के अधिकारियों ने पुष्टि की कि त्यागपत्र राष्ट्रपति भवन भेजा जा चुका है। बोस ने 17 नवंबर, 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला था। उन्होंने अपने कार्यकाल की समाप्ति से लगभग 20 महीने पहले ही पद छोड़ दिया। इसके साथ ही वह पश्चिम बंगाल के लगातार दूसरे ऐसे राज्यपाल बन गए जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही पद छोड़ दिया। बनर्जी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह अचानक हुए इस घटनाक्रम से ''स्तब्ध और बेहद चिंतित'' हैं और दावा किया कि उन्हें इसके कारणों का पता नहीं है। उन्होंने कहा, ''हालांकि, यदि बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल बोस पर केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से राजनीतिक कारणों से दबाव डाला गया हो तो मुझे हैरानी नहीं होगी।' टीएमसी चीफ बनर्जी ने कहा, ''मुझे केंद्रीय गृह मंत्री (अमित शाह) से पता चला है कि आरएन रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में सीवी आनंद बोस का स्थान लेंगे।' लोकतांत्रिक ढांचे पर प्रहार मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि शाह ने उन्हें बोस की जगह रवि के आने की जानकारी दी, लेकिन इस मामले में उनसे परामर्श नहीं किया गया। उन्होंने कहा, "केंद्र को सहकारी संघवाद के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए और ऐसे एकतरफा फैसले लेने से बचना चाहिए जो लोकतांत्रिक परंपराओं और राज्यों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हों।' इस बीच बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने संघीय भावना पर हमले के बारे में बनर्जी की टिप्पणियों को ''बेबुनियाद'' करार दिया। उन्होंने कहा, ''राजभवन में बदलाव होना आम बात है। मैंने सुना है कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया है। इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है। तृणमूल कांग्रेस सिर्फ इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है।'' यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समय पर सामने आया है, क्योंकि निर्वाचन आयोग द्वारा जल्द ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित किये जाने की उम्मीद है। अपने कार्यकाल के दौरान, बोस ने कई बार राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ उनका अक्सर टकराव होता रहता था। गुरुवार शाम को दिल्ली से उनके अचानक इस्तीफे ने राजनीतिक विश्लेषकों और राज्य प्रशासन दोनों को आश्चर्यचकित कर दिया। लोक भवन के अधिकारियों ने बताया कि बोस दिन में पहले दिल्ली गये थे और वहीं से उन्होंने राष्ट्रपति भवन को अपना त्यागपत्र भेजा था। इस घटनाक्रम ने बोस के पूर्ववर्ती जगदीप धनखड़ के पद से इस्तीफा देने की यादें ताजा कर दीं, जिन्होंने राज्यपाल के रूप में अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया था, क्योंकि वह 2022 में उपराष्ट्रपति चुने गए थे। धनखड़ ने पिछले साल अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था।  

दीदी का बड़ा दांव! चुनाव से पहले BJP सांसद को सम्मान देकर क्या साधना चाहती हैं ममता बनर्जी

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली 25 विशिष्ट हस्तियों को राज्य के नागरिक पुरस्कारों से सम्मानित किया है। 'अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस' के अवसर पर शनिवार को कोलकाता के देशप्रिय पार्क में आयोजित एक कार्यक्रम में इन हस्तियों को सम्मानित किया गया। ये सम्मान कला, संस्कृति, साहित्य, लोक प्रशासन और पब्लिक सर्विस में खास योगदान के लिए दिए जाते हैं। इस मौके पर सभी हस्तियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न भेंट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं आप सभी के प्रति अपना सर्वोच्च सम्मान प्रकट करती हूं और आपको बधाई देती हूं।" कौन हैं नगेन रॉय? अप्रैल में संभावित विधानसभा चुनावों से पहले मातृभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बंग विभूषण’ नगेन रॉय को दिया गया है, जिससे सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरअसल, नगेन रॉय जिन्हें उनके समुदाय में अनंता महाराज के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं। 2023 में ही भाजपा ने उन्हें उच्च सदन के लिए नामित किया था। इस सम्मान को ममता बनर्जी द्वारा स्वयं प्रदान किया गया, जिसमें उन्हें अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान के जरिए क्या सियासी संदेश? यह सम्मान ऐसे समय में दिया गया है जब राज्य में अप्रैल-मई के दौरान विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में एक विपक्षी दल के सांसद को सम्मानित करना राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। खासकर इसलिए भी क्योंकि नगेन रॉय राजबंशी समुदाय के प्रभावशाली नेता हैं, जिसका उत्तर बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव है। यह वही क्षेत्र जहां हाल के चुनावों में भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन किया है और तृणमूल कांग्रेस को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ममता ने सम्मान देते हुए क्या कहा? सम्मान समारोह में बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि नगेन रॉय को यह सम्मान राजबंशी भाषा और संस्कृति के संरक्षण में उनके योगदान के लिए दिया गया है और उम्मीद जताई कि वे आगे भी समाज के लिए काम करते रहेंगे। वहीं, नगेन रॉय ने इस सम्मान पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्होंने कभी इसकी कल्पना भी नहीं की थी। राजनीतिक अटकलों के बीच जब उनसे दल बदल की संभावना पर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि वे किसी पार्टी में शामिल नहीं हो रहे हैं और राजनीति में उनकी दिलचस्पी सीमित है। राजबंशी समुदाय में उनकी पकड़ मजबूत नगेन रॉय लंबे समय से ‘ग्रेटर कूच बिहार’ राज्य की मांग से जुड़े रहे हैं और राजबंशी समुदाय में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस समुदाय का वोट काफी हद तक उनके रुख से प्रभावित होता है। इस सम्मान के समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस पिछले 15 वर्षों से सत्ता में है, जबकि भाजपा राज्य में उसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरी है। उत्तर बंगाल में राजबंशी समुदाय का प्रभाव निर्णायक माना जाता है, ऐसे में नगेन रॉय को दिया गया यह सम्मान चुनावी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। पहले टीएमसी के करीब माने जाते थे गौरतलब है कि नगेन रॉय पहले तृणमूल कांग्रेस के करीब माने जाते थे, लेकिन बाद में भाजपा के साथ जुड़े। हाल ही में उन्होंने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर भी असंतोष जताया था, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे अपने समुदाय के मुद्दों पर खुलकर बोलते रहे हैं। नगेन रॉय के अलावा राज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बंग विभूषण' चित्रकार गणेश हलुई, गायक शिवाजी चट्टोपाध्याय, श्रीराधा बंद्योपाध्याय, नचिकेता चक्रवर्ती, लोपामुद्रा मित्रा, बाबुल सुप्रियो, इमान चक्रवर्ती और कवि श्रीजतो बंद्योपाध्याय को प्रदान किया गया। राज्य का एक अन्य प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'बंग भूषण' गायक मनोमय भट्टाचार्य, राघव चट्टोपाध्याय, रूपंकर बागची, अदिति मुंशी, बाउल कलाकार कार्तिक दास बाउल, गायक विवेक कुमार और अभिनेता परमब्रत चट्टोपाध्याय सहित अन्य हस्तियों को प्रदान किया गया।

INDIA ब्लॉक में नेतृत्व बदलाव की मांग तेज, राहुल गांधी हटें—ममता बनर्जी को आगे लाने की पैरवी

नई दिल्ली भारतीय राजनीति में इस समय पर सत्ताधारी पार्टी भाजपा के पास एक चेहरा प्रधानमंत्री मोदी के रूप में मौजूद है। लेकिन सामने की तरफ बिखरा हुआ विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, समय- समय पर इस पद को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार ने विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व को लेकर ममता बनर्जी का नाम आगे बढ़ाया है। उन्होंने लिखा कि वर्तमान समय में ममता बनर्जी ही एक ऐसी नेता है जो एक राजनीतिक दल और सरकार दोनों का नेतृत्व कर रही हैं। वह राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेताओं के बीच में एक अलग पहचान रखती हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने टेलीग्राफ में लिखे अपने लेख में ममता को एक कद्दावर नेत्री करार दिया। उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह से अपनी ताकत से उभरी हैं, और पहली पीढ़ी की नेता है, जो कि उन्हें और भी ज्यादा लोकप्रिय बनाता है। इतना ही नहीं बारू ने कांग्रेस नेतृत्व के ऊपर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी-मनमोहन सिंह मॉडल को राहुल और खरगे के साथ दोहराने का कोई खास लाभ भी पार्टी और इंडिया ब्लॉक को नहीं हुआ है। ऐसे में अब ममता को नेतृत्व संभालना चाहिए। एक महिला प्रधानमंत्री का समय बारू ने लिखा कि काफी समय हो गया है कि अब देश को एक महिला प्रधानमंत्री मिलना चाहिए। उन्होंने लिखा, "यह देखते हुए कि सत्ताधारी भाजपा एक पुरुष प्रधान पार्टी है, अगर विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व किसी महिला नेत्री के हाथ में हो तो यह महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत आधार होगा। इससे भाजपा के महिला मतदाताओं में सेंध लग सकती है। वैसे भी काफी समय हो गया है, जब हमारे पास महिला प्रधानमंत्री रही हो।" गौरतलब है कि आजाद भारत के इतिहास में केवल इंदिरा गांधी ही भारत की महिला प्रधानमंत्री रही हैं। बारू के इस लेख को तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी शेयर किया। उन्होंने लिखा,"एक विचार ऐसा भी जिसका समय आ गया है।' भारत की राजनीति में कांग्रेस भले ही अभी कमजोर स्थिति में हो लेकिन उसके सामने कोई भी नेता अभी इतनी मजबूत स्थिति में नहीं आया है। ममता बनर्जी का पश्चिम बंगाल में एक मजबूत आधार है, लेकिन दूसरे राज्यों में उनकी खास पहचान नहीं है। इसके अलावा विरोधी प्रचार की वजह से आम जनमानस के मन ममता की छवि एक तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली महिला नेता के तौर पर बनी हुई है, जबकि राहुल गांधी अभी भी एक मजबूत राष्ट्रीय नेता के तौर पर उभर रहे हैं। कई राज्यों में कांग्रेस का एक मजबूत आधार है। ऐसे में भले ही ममता का नाम आगे बढ़ाया जा रहा हो, लेकिन इसका कोई मजबूत आधार नजर नहीं आता।  

CM से वकील बनीं ममता बनर्जी, सुप्रीम कोर्ट में SIR मामले पर खुद करेंगी दलील—बन सकता है इतिहास

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। वह वकील के तौर पर शीर्ष अदालत में पहुंची हैं। आज का दिन अदालत के इतिहास में अनोखा है क्योंकि पहली बार कोई मौजूदा सीएम सुप्रीम कोर्ट में वकील की हैसियत से दलीलें देगा। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण को अदालत में चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई जारी है और इसी मामले में दलीलें देने के लिए ममता बनर्जी शीर्ष अदालत पहुंची हैं। चीफ मिनिस्टर ने अदालत में इंटरलॉक्युटरी ऐप्लिकेशन भी दाखिल की है। इसमें उन्होंने अदालत में पेश होने और निजी तौर पर दलीलें देने की मांग रखी है। मंगलवार को ही ममता बनर्जी के नाम का गेट पास सुप्रीम कोर्ट में बन गया था। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार SIR वाले केस की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच कर रही है। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल हैं। इस मामले में ममता बनर्जी के अलावा तीन और याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें से दो तो टीएमसी के सांसद ही हैं- डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन। ममता बनर्जी ने बंगाल में SIR को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि आखिर विपक्ष की सत्ता वाले तीन राज्यों में ही यह क्यों हो रहा है, जबकि असम में इसकी प्रक्रिया नहीं चल रही है, जहां भाजपा की सरकार है। यह याचिका 28 जनवरी को दाखिल हुई थी, जिसमें बंगाल सरकार ने कहा था कि चुनाव आयोग की कार्यवाही गैर-संवैधानिक है। बंगाल सरकार की दलील है कि SIR की पूरी प्रक्रिया जल्दबाजी में और अपारदर्शी तरीके से कराई जा रही है। इसकी कोई जरूरत नहीं है। ममता बनर्जी और अन्य याचियों की विशेष आपत्ति इस बात को लेकर है कि आखिर Logical Discrepancy वाली कैटेगरी में जिन वोटर्स के नाम डाले गए हैं, उनका ऑनलाइन प्रकाशन क्यों नहीं किया गया है। ममता बनर्जी का कहना है कि इन लोगों के नाम लिस्ट में ना डालने से साफ है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट से यदि किसी का भी नाम कटता है तो उसके बारे में जानकारी देनी चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका भी मिलना चाहिए। बता दें कि ममता बनर्जी की चुनाव आयोग में भी एक मीटिंग हुई थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से ही वह बैठक के दौरान भिड़ गई थीं। उन्होंने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि मैं बंगाल से यहां 1 लाख लोगों को ला सकती हूं।  

ममता बनर्जी vs भाजपा — नया सर्वे संकेत दे रहा क्या? पश्चिम बंगाल का चुनावी रुझान

कलकत्ता इंडिया टुडे और सी वोटर के द्वारा कराए गए हालिया सर्वे मूड ऑफ द नेशन (MOTN) के अनुसार, अगर आज की तारीख में लोकसभा चुनाव होते हैं तो चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में फिर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपना 2024 का पुराना प्रदर्शन दोहरा सकती है और जीती हुई लगभग सभी सीटें बरकरार रख सकती है। यह दावा इंडिया टुडे–सी वोटर के ‘मूड ऑफ द नेशन’ (MOTN) के ताजा सर्वे में किया गया है। 2024 के लोकसभा चुनावों में दीदी यामी ममता बनर्जी की पार्टी TMC ने पश्चिम बंगाल की कुल 42 में से 29 लोकसभा सीटें जीतकर 2019 के अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाया था, जबकि बीजेपी 12 सीटों के साथ काफी पीछे दूसरे स्थान पर रही थी। नवीनतम 2026 के MOTN सर्वे के मुताबिक, TMC 28 सीटें, जबकि BJP 14 सीटें जीत सकती है। यानी TMC की एक सीट कम हो सकती है, जबकि भाजपा को 2 सीटों का फायदा मिलने का अनुमान है। भाजपा के वोट शेयर में बढ़त हालांकि, सर्वे के अनुसार भाजपा के नेतृत्व वाले NDA का वोट शेयर 39% से बढ़कर 42% हो सकता है। यह करीब 3 फीसदी की बढ़त है, जो भाजपा के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। बावजूद इसके सर्वे यह भी साफ करता है कि भाजपा बंगाल में कोई बड़ा उलटफेर करती नहीं दिख रही और भद्रलोक पर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी TMC की पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है। बंगाल में मुकाबला अब पूरी तरह द्विध्रुवीय सी वोटर के संस्थापक निदेशक यशवंत देशमुख के अनुसार, “पश्चिम बंगाल अब पूरी तरह TMC और BJP के बीच द्विध्रुवीय मुकाबले की ओर बढ़ रहा है। और हाल के दिनों में राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण काफी तेज हुआ है।” फरवरी 2024 में हुए सर्वे के मुताबिक, TMC 22 सीटें जीत रही थीं, जबकि भाजपा को 19 सीटें मिल रही थीं। इसके बाद उसी साल अगस्त 2024 में हुए सर्वे के मुताबिक, TMC को 32 सीटें और BJP को 8 सीटें, जबकि कांग्रेस को 2 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। अब ताजा सर्वे में तस्वीर कुछ बदली है, लेकिन सत्ता की धुरी अब भी ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द ही घूमती दिख रही है। चुनाव से पहले बड़ा संकेत यह सर्वे ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सिर्फ दो महीने बचे हैं। ऐसे में इसे जनता के मौजूदा राजनीतिक मूड का संकेत माना जा रहा है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी नतीजे कई कारकों पर निर्भर करेंगे। ताजा सर्वे संकेत देता है कि तृणमूल कांग्रेस बंगाल में अब भी सबसे मजबूत ताकत है, वहीं भाजपा धीरे-धीरे अपना आधार बढ़ा रही है लेकिन सत्ता में बदलाव की संभावना फिलहाल कम दिखती है। अगर बंगला जानमानस का मूड ऐसा ही बना रहा तो इस राज्य में कमल फूल खिलाने और भगवा झंडा लहराने का भाजपा का सपना अधूरा रह सकता है।

लालू और केजरीवाल के बाद अगला नंबर कौन? ममता पर रडार, 3 सीएम जेल जा चुके हैं

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी करीब 35 साल पुराने वामपंथी किले को ध्वस्त करने में 2011 में सफल हो गईं तो उसके बाद से उनका रथ कभी नहीं रुका. भाजपा की लाख कोशिशों के बावजूद ममता ने तीसरी बार 2021 में बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सरकार बना ली. इस साल 2026 में करीब 2 महीने बाद होने वाले बंगाल विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 6 महीने के अंदर कई दौरे हो चुके हैं. चुनाव ज्यों-ज्यों करीब आता जाएगा, उनके दौरों का सिलसिला भी तेज होगा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते जेपी नड्डा ने बंगाल का हाल ही में दौरा किया था. नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन ने भी इस साल होने वाले सभी 5 राज्यों के चुनावों में भाजपा का परचम लहराने का संकल्प लिया है. नतीजे क्या होंगे, यह तो जनता तय करेगी, लेकिन ममता बनर्जी केंद्रीय एजेंसियों से पंगा लेकर मुश्किल में पड़ती नजर आ रही हैं. अगर सुप्रीम कोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आरोपों पर उनके प्रतिकूल कोई फैसला देता है तो ममता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. सीबीआई और ED से मुख्मंत्रियों के टकराव का हश्र लोग देख चुके हैं. CBI से उलझे, पर जेल जाने से नहीं बचे लालू बिहार का सीएम रहते लालू प्रसाद यादव पर जब पशुपालन घोटाले के आरोप लगे और सीबीआई ने जांच शुरू की तो राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के समर्थकों ने खूब हुड़दंग मचाया. इसे ऐसे समझा जा सकता है. मामले की जांच कर रहे सीबीआई के तत्कालीन संयुक्त निदेशक यूएन बिश्वास जांच के क्रम में जब-जब कोलकाता से पटना जाते तो अपनी पत्नी को यह कहना नहीं भूलते कि कुछ भी हो सकता है. हालत यह थी कि लालू यादव को गिरफ्तार करने के लिए बात सेना बुलाने तक पहुंच गई. कोई पैंतरा काम नहीं आया और अंततः 30 जुलाई 1997 को लालू यादव को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया. बाद में मुकदमा चला और उन्हें सजा भी हुई. सीबीआई से उलझने के बावजूद लालू बच नहीं पाए. आजादी के बाद सेंट्रल एजेंसी द्वारा मुख्यमंत्री पद पर रहे किसी व्यक्ति के गिरफ्तार होने की यह पहली घटना थी. उन्होंने समझदारी नहीं दिखाई होती तो सीएम रहते ही वे गिरफ्तार हो जाते. जब उन्हें गिरफ्तारी की आशंका प्रबल होती दिखी तो अरेस्ट होने से 2 दिन पहले ही 28 जुलाई 1997 को ही उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सीएम बना दिया. ED के नोटिस की अवहेलना अरविंद पर भारी दिल्ली का सीएम रहते अरविंद केजरीवाल ने भी केंद्रीय एजेंसी ED से पंगा लिया. दिल्ली शराब नीति में घपले के आरोप में ईडी की ओर से पछताछ के लिए उन्हें लगातार 9 नोटिस भेजे गए. उन्होंने उसका न कोई जवाब दिया और न पूछताछ के लिए ईडी के समक्ष हाजिर ही हुए. आखिरकार ईडी ने उनके आवास पर छापा मारा और 21 मार्च 2024 को मनी लांड्रिंग मामले में पहली बार उन्हें गिरफ्तार किया. मुख्यमंत्री पद पर रहते केजरीवाल की यह पहली गिरफ्तारी थी. हालांकि इस मामले में उन्हें जमानत जल्द ही मिल गई, लेकिन उन्हें जेल से बाहर निकलने का मौका नहीं मिला. दूसरी बार उन्हें 26 जून 2024 को सीबीआई ने तिहाड़ जेल से ही गिरफ्तार कर लिया. अगर वे लालू यादव की तरह समझदारी दिखाते तो सीएम के रूप में उनके गिरफ्तार होने का रिकार्ड नहीं बनता. वे भी अपनी पत्नी को सीएम की कुर्सी पर बिठा सकते थे. उनकी पत्नी बाद में जिस तरह राजनीति में रुचि दिखाने लगी थीं, उससे लगता है कि उन्हें या किसी अन्य को भी सीएम न बनाना केजरीवाल की बड़ी चूक थी. केजरीवाल ने दूसरा रिकार्ड यह बनाया कि वे करीब 6 महीने तक जेल से ही सरकार चलाते रहे. बाद में इस पर कोर्ट से लेकर मीडिया तक हंगामा मचा तो उन्होंने आतिशी को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी. यानी ईडी से पंगा लेना अरविंद केजरीवाल को महंगा पड़ा. हेमंत सोरेन ने ED को छकाया, पर बचे नहीं झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन पर जमीन घोटाले का आरोप लगा. मामला मनी लांड्रिंग का बना तो ईडी ने जांच के लिए उन्हें कई बार नोटिस भेजा. इस मामले को हेमंत सोरेन ने हल्के में लिया. वे ईडी से राहत की उम्मीद में हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट का चक्कर लगाते रहे. 10 नोटिस के बावजूद जब हेमंत सोरेन ने ईडी को कोई जवाब नहीं भेजा तो आखिरकार ईडी ने उन्हें 31 जनवरी 2024 को उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार कर लिया. हेमंत ने भी लालू जैसी ही चालाकी की. फर्क यही रहा कि उन्होंने अपनी पत्नी के बजाय पिता शिबू सोरेन के सहयोगी रहे और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के अति विश्वसनीय सहयोगी चंपाई सोरेन को गिरफ्तारी से कुछ देर पहले ही नेता घोषित कर दिया. खुद सीएम पद से इस्तीफा दे दिया. अब चंपाई के सीएम बनने की सिर्फ औपचारिकता बच गई. चंपाई के चयन के पहले ही हेमंत सोरेन ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया, इसलिए गिरफ्तारी की तारीख तो एक ही रही, सिर्फ समय बदल गया. हालांकि चंपाई सोरेन को सीएम बनाना बाद में उनकी बड़ी भूल साबित हुई. जमीन घोटाले का मामला अभी अदालत में है, लेकिन जमानत मिलने के बाद हेमंत सोरेन ने एक ही टर्म में दूसरी बार सीएम पद की शपथ लेने का रिकार्ड बना दिया. बहरहाल, हेमंत सोरेन भी ईडी से पंगा लेकर बच नहीं पाए. आईपैक पर ई़डी रेड को लेकर ममता बनर्जी भी टकरा रही हैं. ममता का ED से पंगा, परिणाम की प्रतीक्षा ममता बनर्जी ने न सिर्फ ईडी के खिलाफ मोर्चा खोला है, बल्कि वे पहले सीबीआई से भी टकरा चुकी हैं. केंद्रीय एजेंसियों से उनका टकराव कई बार अदालतों तक भी पहुंचा है. ममता का आरोप है कि विपक्ष को परेशान करने के लिए बेवजह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ईडी, सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करती है. हालांकि बंगाल में कई मंत्री और नेताओं को सेंट्रल एजेंसियों ने भ्रष्टाचार के आरोपों में न सिर्फ गिरफ्तार किया, बल्कि छापों के दौरान उनके और करीबियों के घरों से भारी नकदी और अकूत संपत्ति के दस्तावेज भी बरामद-जब्त … Read more