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तबादलों को लेकर गरमाई सियासत, ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को घेरा

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शनिवार को चुनाव आयोग पर तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि राज्य में आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादले के जरिए भाजपा को विधानसभा चुनावों में फायदा पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। पश्चिम बर्दवान जिले के रानीगंज में एक जनसभा को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा ने सभी सीमाएं पार कर दी हैं और अब एक 'लक्ष्मण रेखा' तय होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग, जिसे उन्होंने 'वैनिशिंग कमीशन' कहा, ने राज्य के 50 से 100 अधिकारियों का तबादला कर उन्हें केरल और तमिलनाडु भेज दिया है।  ममता बनर्जी ने कहा कि ये अधिकारी स्थानीय हालात से भली-भांति परिचित थे, लेकिन उन्हें हटाकर बाहर भेज दिया गया। उनके मुताबिक, यह कदम जनता पर दबाव बनाने, अवैध धन, नशीले पदार्थों और बाहरी गुंडों के प्रवेश को आसान बनाने के लिए उठाया गया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे दंगों को भड़काने की कोशिश हो रही है। उन्होंने मतदाता सूची से नाम हटाने के मुद्दे पर भी भाजपा को घेरा और कहा कि इस मामले में भी सीमाएं लांघी जा रही हैं। उन्होंने साफ कहा कि लोकतंत्र में एक मर्यादा होनी चाहिए और उसे पार नहीं किया जाना चाहिए। ममता बनर्जी ने मुर्शिदाबाद जिले के रघुनाथगंज में राम नवमी के जुलूस के दौरान हुई झड़पों का जिक्र करते हुए प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि फिलहाल प्रशासन चुनाव आयोग के नियंत्रण में है, इसलिए उन्हें इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "मेरे सभी अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है और अब रघुनाथगंज में दंगे भड़काए जा रहे हैं। दुकानों में लूटपाट हुई और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। जब समय आएगा, तो हम हिंसा भड़काने वालों को नहीं छोड़ेंगे।" उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो बुलडोजर की राजनीति शुरू हो जाएगी और लोगों को बेघर कर दिया जाएगा। बेहाला में बुलडोजर कार्रवाई का जिक्र करते हुए ममता बनर्जी ने प्रभावित लोगों से माफी मांगी और भरोसा दिलाया कि उनकी दुकानों और संपत्तियों का पुनर्निर्माण किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक ओर भाजपा तृणमूल कांग्रेस को भ्रष्ट कहती है, वहीं दूसरी ओर खुद अवैध कोयला खनन से पैसा जुटाती है। रैली के दौरान ममता बनर्जी ने पश्चिम बंगाल की सांप्रदायिक सौहार्द की परंपरा को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि यहां सभी धर्मों के लोग मिलकर राम नवमी, दुर्गा पूजा, ईद और क्रिसमस जैसे त्योहार मनाते हैं। इसके साथ ही उन्होंने रानीगंज के भूस्खलन प्रभावित इलाकों के लिए पुनर्वास पैकेज की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जो लोग इन जोखिम भरे क्षेत्रों से सुरक्षित स्थान पर जाना चाहते हैं, उन्हें 10 लाख रुपए और दो फ्लैट दिए जाएंगे। सरकार स्थानांतरण का पूरा खर्च भी उठाएगी। उन्होंने बताया कि अब तक 2,000 फ्लैट बनाए जा चुके हैं और 4,000 और बनाने की योजना है। ममता बनर्जी ने स्पष्ट किया कि यह पूरी प्रक्रिया स्वैच्छिक होगी। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्ताव पर विचार करें, क्योंकि किसी बड़े भूस्खलन से हजारों लोगों की जान खतरे में पड़ सकती है।

पैर तुड़वाने और सिर पर पट्टी लगाने का खेल कर रही हैं ममता, विक्टिम कार्ड खेल रही हैं, शाह का बयान

कोलकाता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकाता में अपने संबोधन में कहा कि बंगाल का आगामी चुनाव सिर्फ राज्य के लिए ही नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनता के मुद्दों को उठाने और उनकी आवाज को सामने लाने का निर्णय लिया है।  अमित शाह ने कहा कि आज की प्रेस वार्ता तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन के खिलाफ “चार्जशीट” है. उन्होंने दावा किया कि यह सिर्फ भाजपा की नहीं, बल्कि बंगाल की जनता की चार्जशीट है, जिसे भाजपा आवाज दे रही है।  “भय बनाम भरोसा” – चुनाव का नैरेटिव अमित शाह ने कहा कि आने वाला चुनाव यह तय करेगा कि बंगाल की जनता “भय” को चुनेगी या “भरोसे” को. उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले 15 सालों में राज्य में भय, भ्रष्टाचार और भेदभाव की राजनीति हुई है।  उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने झूठ, डर और हिंसा के सहारे सत्ता बनाए रखने की राजनीति की है, जबकि किसी भी सरकार का आधार जनकल्याण होना चाहिए।  “चार्जशीट” में लगाए गए आरोप अमित शाह ने कहा कि यह चार्जशीट तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के “काले चिट्ठों” का संकलन है. उन्होंने आरोप लगाया कि:     •    बंगाल में “सिंडिकेट राज” स्थापित किया गया     •    राज्य “भ्रष्टाचार की प्रयोगशाला” बन चुका है     •    सफेदपोश अपराधी सिस्टम में शामिल हैं     •    “कट मनी” आम बात हो गई है     •    उद्योगों के लिए बंगाल “ग्रेवयार्ड” बन गया है     •    घुसपैठियों को संरक्षण दिया जा रहा है     •    तुष्टिकरण सरकार की नीति बन गई है उन्होंने कहा कि जनता अब कहने लगी है कि “इससे तो कम्युनिस्ट शासन बेहतर था।  भाजपा के बढ़ते वोट शेयर का दावा अमित शाह ने भाजपा के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए आंकड़े पेश किए:     •    2014 लोकसभा: 17% वोट, 2 सीट     •    2019 लोकसभा: 41% वोट, 18 सीट     •    2024 लोकसभा: 39% वोट, 12 सीट     •    2016 विधानसभा: 10% वोट, 3 सीट     •    2021 विधानसभा: 38% वोट, 77 सीट उन्होंने कहा कि भाजपा अब बंगाल में 40 फीसदी वोट शेयर के साथ मजबूत आधार बना चुकी है।  अमित शाह: ममता विक्टिम कार्ड की राजनीति करती हैं अमित शाह ने कहा, 'ममता दीदी ने हमेशा विक्टिम कार्ड की राजनीति की है. कभी पैर तुड़वा लेती हैं, कभी सिर पर पट्टी बंधवा लेती हैं, कभी बीमार हो जाती हैं और कभी चुनाव आयोग को गालियां देती हैं.” “भय से मुक्ति” का चुनाव अमित शाह ने कहा कि यह चुनाव कई तरह के “भय से मुक्ति” का चुनाव है:     •    जान-माल के नुकसान के डर से मुक्ति     •    संपत्ति लूटे जाने के डर से मुक्ति     •    रोजगार छिनने के डर से मुक्ति     •    महिलाओं की सुरक्षा को लेकर डर से मुक्ति     •    युवाओं के भविष्य पर छाए अंधकार से मुक्ति उन्होंने कहा कि यह चुनाव शांति, विकास और भरोसे का चुनाव है. घुसपैठ और जनसांख्यिकी पर बयान अमित शाह ने आरोप लगाया कि बंगाल में घुसपैठियों को वोटर बनाकर रखा गया है. उन्होंने कहा कि भाजपा का एजेंडा है कि ऐसे घुसपैठियों को देश से बाहर निकाला जाएगा. उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता को तय करना है कि राज्य का भविष्य कौन तय करेगा।  चुनाव आयोग और न्यायपालिका का मुद्दा अमित शाह ने कहा कि बंगाल में चुनाव के दौरान सुप्रीम कोर्ट को ज्यूडिशियल अधिकारियों की नियुक्ति करनी पड़ी, जबकि अन्य राज्यों में ऐसा नहीं हुआ. उन्होंने इसे राज्य प्रशासन की विफलता बताया. उन्होंने ममता बनर्जी पर चुनाव आयोग पर आरोप लगाने और “विक्टिम कार्ड” खेलने का भी आरोप लगाया।  डबल इंजन सरकार का उदाहरण अमित शाह ने कहा कि जहां भाजपा की “डबल इंजन सरकार” है, वहां विकास तेजी से हुआ है. उन्होंने उदाहरण दिए:     •    उत्तर प्रदेश में विकास की गति     •    मध्य प्रदेश में कृषि विकास     •    असम में उग्रवाद से विकास की ओर बदलाव     •    त्रिपुरा में “कैडर राज” का अंत     •    ओडिशा में पहली बार भाजपा सरकार

उत्तर से दक्षिण तक सियासी हलचल: ममता और अभिषेक की जोड़ी क्या बदलेगी खेल?

कोलकाता पश्चिम बंगाल में चुनाव अभियान तेज हो गया है। भाजपा और टीएमसी दोनों ने ही अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। आमतौर पर भाजपा उम्मीदवारों के चयन में देरी करती रही है, लेकिन इस बार उसने चुनाव का शेड्यूल आते ही कैंडिडेट्स घोषित कर दिए हैं। वहीं टीएमसी ने भी 291 उम्मीदवारों की पूरी लिस्ट जारी कर दी है और तीन सीटें गठबंधन साथी को दी हैं। इसके अलावा ममता बनर्जी की पार्टी ने चुनाव अभियान में भी तेजी लाने का फैसला लिया है। इसके तहत ममता बनर्जी खुद उत्तर बंगाल की कमान संभालेंगी, जबकि उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी साउथ बंगाल में कैंपेन को आगे बढ़ाएंगे। ममता बनर्जी 24 मार्च यानी आज से ही उत्तर बंगाल में कैंपेन शुरू करने जा रही हैं। उनके भतीजे और पार्टी के महासचिव अभिषेक बनर्जी साउथ बंगाल के जिलों पर फोकस करते हुए प्रचार पर निकलेंगे। टीएमसी के सूत्रों का कहना है कि उत्तर बंगाल में भाजपा मजबूत है। ऐसे में सीएम खुद चाहती है कि वह उन इलाकों पर फोकस करते हुए कैंपेन करें। एक सीनियर नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री खुद अलीपुरद्वार से प्रचार आगे बढ़ाएंगी। इससे स्पष्ट है कि वह उत्तर बंगाल में भाजपा की चुनौती को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं। अलीपुरद्वार के परेड ग्राउंड में ममता बनर्जी एक रैली को संबोधित करेंगी। इसके बाद फिर दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी में वह 25 तारीख को बैठकें करनी वाली हैं। इन इलाकों के अलावा फुलबारी और नक्सलबारी में भी वह प्रचार करेंगी। यही नहीं 26 मार्च को भी ममता बनर्जी का पुरुलिया, बांकुरा, बीरभूम, पश्चिम बर्धमान इलाकों में भी वह कैंपेन करेंगी। इसके बाद ही वह दक्षिण के इलाकों में जाएंगी। मुख्य तौर पर साउथ बंगाल की जिम्मेदारी अभिषेक बनर्जी को ही दी गई है। परंपरागत रूप से भाजपा नॉर्थ बंगाल में मजबूत मानी जाती रही है। इस बार ममता बनर्जी की कोशिश है कि उसके इसी गढ़ को टारगेट किया जाए। यही कारण है कि वह खुद यहां की कमान संभाल रही हैं और भतीजे अभिषेक को साउथ की कमान दी गई है। 2019 के लोकसभा चुनाव में नॉर्थ बंगाल से भाजपा ने कई सीटें जीती थीं और 2021 के विधानसभा चुनाव में भी वह यहां मजबूत थी। इस बीच भाजपा की कोशिशें भी कम नहीं हैं। नए बने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन भी य़हां पहुंच रहे हैं। सिलीगुड़ी और दुर्गापुर में वह बैठकें करने वाले हैं। इस बैठक में बंगाल के प्रभारी सुनील बंसल और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी मौजूद रहेंगे। इस बैठक में आसपास के जिलों के नेताओं, प्रत्याशियों और अन्य महत्वपूर्ण लोगों को बुलाया गया है। भाजपा की रणनीति यह है कि गली-गली में घूमकर कैंपेन किया जाए। बड़े नेताओं को भी जमीनी प्रचार में उतारा जाए। बूथ लेवल मैनेजमेंट और केंद्रीय योजनाओं के प्रचार पर फिलहाल ज्यादा फोकस किया जा रहा है।  

टिकट कटे, रणनीति नई: ममता बनर्जी का बड़ा फैसला, क्या चौथी बार बनेगी सरकार?

कोलकाता पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने हुंकार भर दी है। मंगलवार को ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस के 291 सीट के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है। राज्य में लगातार चौथी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही पार्टी ने इस बार चर्चित हस्तियों की जगह संगठन पर पकड़ रखने वाले नेताओं को तरजीह दी है। बता दें कि राज्य में आगामी 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में चुनाव होने हैं और नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इससे पहले कालीघाट स्थित अपने आवास से उम्मीदवारों की सूची की घोषणा करते हुए मुख्यमंत्री और तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी ने कहा है कि पार्टी दार्जिलिंग पहाड़ियों की तीन सीटें सहयोगी भारतीय गोरखा प्रजातांत्रिक मोर्चा (बीजीपीएम) के लिए छोडेगी, जिसका नेतृत्व अनित थापा कर रहे हैं। टीएमसी की लिस्ट जारी होते ही यह साफ हो गया है कि भवानीपुर में ममता बनर्जी-शुभेंदु अधिकारी की प्रतिद्वंद्विता नया चुनावी रंग लेने जा रही है, जहां मुख्यमंत्री अपनी सीट बचाने उतरेंगी, जबकि भाजपा ने यहां से नेता प्रतिपक्ष को मैदान में उतारा है। यह 2 प्रतिद्वंद्वियों के बीच सीधा आमना-सामना होगा, जो पहली बार 2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम में भिड़े थे। तब अधिकारी ने ममता को नजदीकी अंतर से हराया था। 226 सीटों पर जीत का दावा मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 226 सीट जीतने का दावा भी किया है। मुख्यमंत्री बनर्जी ने पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और प्रदेश अध्यक्ष सुब्रत बख्शी के साथ उम्मीदवारों के नामों की घोषणा करते हुए कहा, ''हम 291 सीट पर चुनाव लड़ेंगे और 226 से अधिक सीट जीतेंगे।'' किसे दिया मौका, किसका कटा पत्ता? तृणमूल ने 291 उम्मीदवारों में से 135 मौजूदा विधायकों को बरकरार रखा है। वहीं लगभग 75 विधायकों को हटा दिया है और 15 अन्य को अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में स्थानांतरित कर दिया है, जिसे पार्टी सूत्रों ने "लक्षित सत्ता-विरोधी लहर से निपटने की कवायद'' के रूप में वर्णित किया है। इस सूची में पेशेवर व्यक्तियों, खिलाड़ियों और विभिन्न क्षेत्र के चेहरों का मिश्रण भी शामिल है। हालांकि पूरा जोर मशहूर हस्तियों के बजाय संगठनात्मक चेहरों पर बना हुआ है, जो पहले के चुनावों से एक महत्वपूर्ण बदलाव है। पार्टी ने फरहाद हकीम, जावेद अहमद खान, अरूप बिस्वास, इंद्रनील सेन और चंद्रिमा भट्टाचार्य सहित कई वरिष्ठ मंत्रियों को उनके मौजूदा निर्वाचन क्षेत्रों से फिर से उतारा है। ओलंपिक में हिस्सा ले चुकीं और एशियाई खेलों की स्वर्ण पदक विजेता स्वप्ना बर्मन को राजगंज से मैदान में उतारा गया है, जबकि पूर्व क्रिकेटर शिव शंकर पाल को तूफानगंज से उम्मीदवार बनाया गया है। अभिनेता-नेता सोहम चक्रवर्ती इस बार तेहट्टा से चुनाव लड़ेंगे और पार्टी प्रवक्ता कुणाल घोष को बेलियाघाटा से मैदान में उतारा गया है, जो उनका पहला विधानसभा चुनाव होगा। नामी चेहरों में, बरासात के विधायक चिरंजीत चक्रवर्ती, बेहला पश्चिम के विधायक पार्थ चटर्जी और बेलियाघाटा के विधायक परेश पाल को टिकट नहीं दिया गया है। पार्टी ने कई नए चेहरे भी पेश किए हैं, जिनमें मानिकतला से श्रेया पांडे और उत्तरपाड़ा से टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी के बेटे सिर्सन बनर्जी शामिल हैं। पार्टी के आंकड़ों के अनुसार उम्मीदवारों में से 52 महिलाएं, 95 अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति और 47 अल्पसंख्यक हैं। किसे दी गई प्राथमिकता? तृणमूल के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने चर्चित हस्तियों की तुलना में जमीनी स्तर पर जुड़ाव रखने वाले नेताओं को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा, ''नेतृत्व ने जानबूझकर स्टार चेहरों से परहेज किया। जोर उन उम्मीदवारों पर है जो बूथ का प्रबंधन कर सकें, मतदाताओं को गोलबंद कर सकें और स्थानीय नेटवर्क बनाए रख सकें।'' नंदीग्राम में तृणमूल ने पूर्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े पंचायत नेता पबित्र कर को मैदान में उतारा है, जो हाल में पार्टी में वापस लौटे हैं। इसके अलावा पार्टी ने बीरभूम, उत्तर 24 परगना और दक्षिण बंगाल के ग्रामीण इलाकों जैसे प्रमुख चुनावी क्षेत्रों में मजबूत जिला स्तरीय चेहरे बरकरार रखे हैं।  

ममता बनर्जी का मास्टरस्ट्रोक: TMC ने हर सीट पर उतारे प्रत्याशी, भवानीपुर से खुद संभाला मोर्चा

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी भवानीपुर से विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। ममता बनर्जी ने मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस के दौरान विधानसभा चुनाव के लिए सभी 294 प्रत्याशियों की लिस्ट जारी कर दी। टीएमसी द्वारा जारी इस लिस्ट में ममता बनर्जी समेत पश्चिम बंगाल के कई दिग्गज टीएमसी नेताओं के नाम शामिल हैं, जिन्हें उम्मीदवार बनाया गया है। बता दें कि सीएम ममता बनर्जी भवानीपुर विधानसभा सीट से भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरेंगी। वहीं, हाल ही में टीएमसी में शामिल हुए पवित्र कर को नंदीग्राम से टिकट दिया गया है, जहां उनका भी मुकाबला सुवेंदु अधिकारी से होगा। भाजपा ने सुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों विधानसभा सीटों से टिकट दिया है। इसके साथ ही सुजापुर सीट से सबीना यास्मीन, जंगीपुर सीट से जाकिर हुसैन, सागरदिघी सीट से बायरन बिस्वास, दिनहाटा सीट से उदयन गुहा चुनाव लड़ेंगे। वहीं, सिलीगुड़ी सीट से गौतम देव चुनाव मैदान में उतरे हैं। खगराम सीट से आशीष मारजीत चुनाव लड़ेंगे। करीमपुर सीट से सोहम चक्रवर्ती चुनाव लड़ेंगे। कंडी सीट से अपूर्व सरकार चुनाव लड़ेंगे। सिताई सीट से संगीता रॉय बसुनिया चुनाव लड़ेंगी। कृष्णानगर उत्तर सीट से अभिनव भट्टाचार्य चुनाव लड़ेंगे। नवद्वीप सीट से पुण्डरीकाक्ष साहा चुनाव लड़ेंगे। वहीं, हरिन्घाटा सीट से राजीव विश्वास चुनाव लड़ेंगे। स्वरूपनगर सीट से बीना मंडल चुनाव लड़ेंगी। राजगंज सीट से सपना बर्मन चुनाव लड़ेंगी। हबरा सीट से ज्योतिप्रिया मल्लिक चुनाव लड़ेंगे। कृष्णानगर नगर दक्षिण सीट से उज्जवल विश्वास चुनाव लड़ेंगे। राणाघाट दक्षिण सीट से सौगत कुमार बर्मन चुनाव लड़ेंगे। कल्याणी सीट से अतींद्रनाथ मंडल चुनाव लड़ेंगे। इससे पहले, सोमवार को भाजपा ने 144 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी की थी, जिसमें सुवेंदु अधिकारी समेत कई दिग्गज नेताओं के नाम शामिल थे। वहीं, वाम दल ने भी अपनी लिस्ट जारी की थी। बता दें कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे, पहले चरण के लिए 23 अप्रैल और दूसरे चरण के लिए 29 अप्रैल को मतदान होगा। वहीं, वोटों की गिनती 4 मई को होगी।

बंगाल की राजनीति का गणित: 3 योजनाएं और 3 बड़े कारण, ममता बनर्जी क्यों मजबूत, भाजपा कितनी चुनौती में?

नई दिल्ली, कोलकाता पश्चिम बंगाल में चुनाव का ऐलान हो चुका है। 4 मई को नई सरकार बन जाएगी और उससे पहले 23 और 29 अप्रैल को मतदान होने वाला है। इस इलेक्शन को लेकर भाजपा काफी उत्साहित है और उसे लगता है कि वह 2021 के मुकाबले और मजबूत हो सकती है। वहीं ममता बनर्जी लगातार चौथे कार्यकाल के लिए मैदान में उतरेंगी। ममता बनर्जी को केंद्र सरकार से टकराव और तुनकमिजाजी के लिए जाना जाता है। 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सघन प्रचार किया था और हाईवोल्टेज चुनाव में उन्होंने लगातार तीसरी बार विजय पाई थी। हालांकि वह खुद शुभेंदु अधिकारी के मुकाबले अपनी सीट नंदीग्राम में हार गई थीं। चुनाव की तारीखें आते ही एक ओपिनियन पोल भी सामने आया है, जिसमें ममता बनर्जी को बढ़त दिखाई गई है। अब सवाल है कि आखिर क्यों टीएमसी और ममता तीन कार्यकालों के बाद भी इतनी मजबूत हैं। इसके पीछे तीन योजनाओं और तीन फैक्टर को वजह माना जा रहा है। ये तीन योजनाएं हैं- लक्ष्मी भंडार, स्वास्थ्य साथी और युवा साथी। इनके माध्यम से ममता बनर्जी ने महिला, युवा और बुजुर्ग तीनों वर्ग साधने के प्रयास किए हैं। इसके अतिरिक्त उनकी कोशिश रही है कि SIR को एक बड़ा मुद्दा बना दें और वोटरों के खिलाफ इसे लेकर केंद्र सरकार के प्रति गुस्सा पैदा किया जाए। अब तीन फैक्टरों की बात करें तो पहला यह कि ममता बनर्जी की महिलाओं के बीच अच्छी पकड़ मानी जाती है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप कांड के मामले में भले ही उनकी पार्टी घेरे में आई थी, लेकिन अब भी महिलाओं का उन पर भरोसा दिखता है। इसके अतिरिक्त वह बांग्ला अस्मिता का सवाल उठाने में भी आगे रही हैं। इसके जरिए उन्होंने अकसर यह कोशिश की है कि किसी भी मामले को दिल्ली बनाम बंगाल की शक्ल दे दी जाए। इसके जरिए उन्होंने बांग्ला राष्ट्रवाद को मजबूत करने के प्रयास किए हैं। अब यदि भाजपा की बात करें तो उसके पास बांग्ला अस्मिता वाला कार्ड कमजोर पड़ जाता है। इसके अलावा उसके पास ममता बनर्जी जैसे एक बड़े चेहरे का अभाव है, जो पूरे राज्य में वोटरों को लुभा सके। हालांकि टीचर घोटाला, आरजी कर रेप और मर्डर केस जैसे मामलों ने भाजपा को कुछ मुद्दे दिए हैं। इसके अतिरिक्त बंगाल में बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ हमेशा से एक बड़ा मामला रहा है। ऐसे में देखना होगा कि भाजपा इस बार अपने हाथ लगने मुद्दों को किस तरह से भुना पाती है।  

मता बनर्जी पर राम कृपाल यादव का आरोप, घुसपैठियों की मदद से सत्ता चाहती हैं

पटना, बिहार सरकार में मंत्री राम कृपाल यादव ममता बनर्जी पर तंज कसा है। उन्होंने चुनाव आयोग पर ममता बनर्जी के बयान को लेकर कहा कि चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और यह कभी किसी दल से प्रभावित नहीं हुआ है। राम कृपाल यादव ने कहा कि मेरा मानना है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इसलिए चिंता जता रही हैं क्योंकि चुनाव आयोग के प्रमुख ज्ञानेश कुमार अपना काम कर रहे हैं। उनकी समस्या यह है कि वे बांग्लादेश से आए घुसपैठियों की मदद से सरकार बनाना चाहती हैं, लेकिन यह संभव नहीं है। कानून का राज है और संवैधानिक व्यवस्था पर अगर कोई उंगली उठाता है तो जनता उसको कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि हिम्मत है तो महाभियोग लाएं। खारिज हो जाएगा। उन्होंने कहा कि जनता उनके चेहरे को भी खारिज कर देगी। इस बार चुनाव में जनता ममता बनर्जी को हरा देगी। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी की सरकार कातिल और असंवैधानिक है। वे कानून विरोधी काम करती है। ये सरकार भाजपा के कार्यकर्ताओं को चुन-चुन कर मरवा रही है। ममता बनर्जी के हाथ निर्दोषों के खून से रंगे हुए हैं। आने वाले वक्त में उनको इसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे। बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार का सफाया होगा और भारतीय जनता पार्टी की दो तिहाई बहुमत से सरकार बनेगी। मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण ईंधन और गैस आपूर्ति में आई बाधाओं पर मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा कि एलपीजी की कीमतों में बढ़ोतरी इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष के कारण हुई है। इस स्थिति के चलते कुछ कठिनाइयां उत्पन्न हो गई हैं। उन्होंने कहा कि भारत और राज्य की सरकार संयुक्त रूप से इस समस्या के निदान के लिए काम कर रही है। जिससे कि उपभोक्ताओं को किसी प्रकार का कष्ट न उठाना पड़े। नियमित रूप से गैस और तेल इत्यादि मिलता रहे। कालाबाजारी करने वाले लोगों को लेकर उन्होंने कहा कि कालाबाजारी करने वाले लोगों को सरकार छोड़ेगी नहीं। जो कालाबाजारी करेंगे उनका लाइसेंस रद्द होगा और उनको जेल भी जाना पड़ेगा। इसलिए इन सब चीजों पर सरकार निगरानी रखे हुए हैं। सरकार का दायित्व है कि जनता के हित में काम करे। जनता के अहित में जो काम करेगा उसको सरकार छोड़ेगी नहीं।  

ममता बनर्जी बोलीं—बंगाल को टारगेट किया जा रहा, प्रोटोकॉल तोड़ने के आरोप खारिज

कोलकाता पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर चल रहे विवाद के बीच अब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के कार्यक्रम में हुई अव्यवस्था के लिए राज्य सरकार जिम्मेदार नहीं है। कोलकाता में पत्रकारों से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी निजी आयोजकों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की थी। इसलिए अगर कहीं कोई गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी भी उन्हीं पर आती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार को शनिवार को होने वाले राष्ट्रपति के कार्यक्रम की पूरी जानकारी भी नहीं दी गई थी और न ही सरकार को इस आयोजन में शामिल किया गया था। उनके मुताबिक, जब राज्य सरकार को कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी ही नहीं थी, तो उस पर प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप लगाना सही नहीं है। सीएम ममता ने यह भी कहा कि गंदगी, ग्रीन रूम की समस्या और महिलाओं के टॉयलेट की कमी जैसी शिकायतें भी आयोजकों और एएआई की जिम्मेदारी हैं। पीएम मोदी के आरोपों पर पलटवार मुख्यमंत्री ने कोलकाता के केंद्रीय धरना स्थल से कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टीएमसी सरकार पर राष्ट्रपति का अपमान करने का आरोप लगाया, जबकि वास्तविकता अलग है। उन्होंने प्रधानमंत्री की एक तस्वीर दिखाते हुए कहा कि तस्वीर में प्रधानमंत्री बैठे हैं और राष्ट्रपति खड़ी हैं। सीएम ममता ने कहा कि हम कभी ऐसा नहीं करते। यह भाजपा की संस्कृति है, हम कभी राष्ट्रपति का अपमान नहीं करते। संविधान का पूरा सम्मान करती हैं बंगाल सरकार- ममता ममता बनर्जी ने यह भी स्पष्ट किया कि पश्चिम बंगाल सरकार राष्ट्रपति के पद और संविधान का पूरा सम्मान करती है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है और राज्य सरकार हमेशा उसकी गरिमा बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध रहती है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले पश्चिम बंगाल को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया जा रहा है। राष्ट्रपति का सम्मान हर सरकारी की जिम्मेदारी- ममता उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस मुद्दे को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं ताकि राज्य सरकार की छवि खराब की जा सके। ममता बनर्जी ने दोहराया कि राज्य सरकार ने राष्ट्रपति के दौरे के दौरान अपनी तरफ से सभी जरूरी सहयोग दिया था। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति और संविधान का सम्मान करना हर सरकार और नागरिक की जिम्मेदारी है, और पश्चिम बंगाल सरकार इस जिम्मेदारी को पूरी तरह निभाती है। लोगों के अधिकार के लिए धरना पर बैठी हूं- ममता ममता बनर्जी ने यह भी बताया कि सिलीगुड़ी के महापौर गौतम देब ने प्रोटोकॉल का पालन करते हुए राष्ट्रपति का बैगडोगरा हवाई अड्डे पर स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं धरना पर बैठी हूं ताकि लोगों के अधिकार सुरक्षित रहें। मैं इसे कैसे छोड़ सकती हूं? उन्होंने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले बंगाल को निशाना बनाया जा रहा है और सरकार पर झूठे आरोप लगाए जा रहे हैं। ममता बनर्जी ने दोहराया कि राज्य सरकार हमेशा राष्ट्रपति और संविधान का सम्मान करती है और कार्यक्रम में किसी भी तरह की अव्यवस्था के लिए इसे जिम्मेदार ठहराना सही नहीं है। क्या है पूरा मामला, समझिए गौरतलब है कि बंगाल की राजनीति में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोपों के मामले में सियासत सातवें आसमान पर पहुंच गई है। इसकी शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रपति मुर्मू ने शनिवार को दार्जिलिंग में 9वें अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन के आयोजन को लेकर असंतोष व्यक्त किया था और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अनुपस्थिति पर टिप्पणी की थी। इसके बाद क्या था, भाजपा ने ममता बनर्जी सरकार पर राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप लगाया और खूब बयानबाजी की। दूसरी ओर जबकि टीएमसी ने प्रोटोकॉल उल्लंघन के आरोप को खारिज किया है।

केंद्र ने राष्ट्रपति मुर्मू के प्रोटोकॉल उल्लंघन पर ममता सरकार से मांगी रिपोर्ट, होम मिनिस्ट्री ने लिया एक्शन

 नई दिल्ली पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल उल्लंघन और कार्यक्रम स्थल में अचानक बदलाव को लेकर विवाद गहरा गया है।सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस पूरे मामले का बड़े स्तर पर संज्ञान लिया है. केंद्रीय गृह सचिव ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शाम पांच बजे तक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें प्रोटोकॉल न दिए जाने, रास्ते की सही जानकारी न प्रदान करने और अन्य व्यवस्थाओं में चूक के बारे में स्पष्टीकरण मांगा गया है। दरअसल, ये विवाद राष्ट्रपति मुर्मू के उत्तर बंगाल दौरे के दौरान सामने आया, जहां वह दार्जिलिंग जिले में 9वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं थीं. मूल रूप से कार्यक्रम बिधाननगर (फांसीदेवा ब्लॉक) में प्रस्तावित था, जहां बड़ी संख्या में संथाल आदिवासी समुदाय के लोग पहुंच सकते थे. लेकिन राज्य प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़भाड़ और अन्य कारणों का हवाला देकर इसे बागडोगरा एयरपोर्ट के पास गोशाईपुर (या गोसाईंपुर) में स्थानांतरित कर दिया. राष्ट्रपति ने खुद इस बदलाव पर नाराजगी जताई और कहा कि नया स्थान छोटा था, जिससे कई लोग पहुंच नहीं पाए। उन्होंने ममता बनर्जी को छोटी बहन बताते हुए पूछा कि क्या वो उनसे नाराज हैं, क्योंकि न तो मुख्यमंत्री और न ही कोई मंत्री उन्हें रिसीव करने पहुंचीं, जबकि पद की गरिमा के लिए प्रोटोकॉल का पालन जरूरी है। इन प्रोटोकॉल्स का हुआ उल्लंघन सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रपति के प्रोटोकॉल में कई पैमानों पर सुरक्षा संबंधित ब्लू बुक के नियमों का उल्लंघन हुआ है. जिसमें- प्रेसिडेंट को रिसीव करने और सी-ऑफ करने के लिए CM, CS और DGP क्यों नहीं थे?. सिर्फ सिलीगुड़ी के मेयर ही उन्हें रिसीव करने के लिए वहां थे. प्रेसिडेंट के लिए बने वॉशरूम में भी पानी नहीं था. एडमिनिस्ट्रेशन जिस रास्ते से गुज़रा, वह कचरे से भरा हुआ था. सूत्रों का ये भी कहना है कि इस परिस्थितियों के लिए दार्जिलिंग के डीएम, सिलीगुड़ी के CP और ADM जिम्मेदार हैं। अमित शाह ने ममता को घेरा इस मामले में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने एक्स पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की TMC सरकार ने अराजक व्यवहार करते हुए भारत के राष्ट्रपति का अपमान कर एक नया निचला स्तर छू लिया है. उन्होंने इसे भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के मूल्यों पर आघात बताया और कहा कि आज लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला हर नागरिक आहत और दुखी महसूस कर रहा है.कार्यक्रम में प्रोटोकॉल की खुली अनदेखी कर राष्ट्रपति पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई गई है। शाह ने आरोप लगाया कि ये घटना टीएमसी सरकार में व्याप्त अव्यवस्था और गिरावट को दिखाती है. सरकार न सिर्फ नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करती है, बल्कि राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च संवैधानिक पद का भी सम्मान नहीं करती. खास तौर पर आदिवासी भाई-बहनों के कार्यक्रम में हुआ ये व्यवहार पूरे देश के लिए अपमानजनक है। केंद्रीय गृह ने इस घटना को भारत के संवैधानिक लोकतंत्र के मूल्यों पर आघात करार दिया है. आज लोकतंत्र में विश्वास रखने वाला हर नागरिक आहत और दुखी महसूस कर रहा है। ममता ने आरोपों को किया खारिज दूसरी ओर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोपों को खारिज कर दिया है. उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रपति का सम्मान करती हैं, लेकिन अगर कोई 50 बार भी आए तो हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि वह इस वक्त धरने पर बैठी हैं और जिस कार्यक्रम का जिक्र किया जा रहा है, उसके बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। उन्होंने इस कार्यक्रम के राज्य को जानकारी न होने की बात करते हुए कहा, 'उस कार्यक्रम के आयोजकों, फंडिंग या आयोजन को लेकर राज्य सरकार को कोई जानकारी नहीं दी गई थी. जब भी राष्ट्रपति राज्य में आती हैं या जाती हैं तो इसकी सूचना मिलती है, लेकिन संबंधित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी और न ही राज्य सरकार उस कार्यक्रम का हिस्सा थी।

गैस सिलेंडर महंगा होने पर ममता बनर्जी का हमला, कोलकाता में विरोध मार्च की घोषणा

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के खिलाफ विरोध जताया और कोलकाता में रविवार को बड़े पैमाने पर विरोध मार्च निकालने का आह्वान किया है। सीएम ममता बनर्जी ने लोगों से अपील की है कि वे रसोई के बर्तन और घरेलू सामान लेकर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हों। उन्होंने कहा कि बढ़ती गैस कीमतों का सबसे अधिक असर आम परिवारों, खासकर महिलाओं पर पड़ रहा है, इसलिए अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर माताओं और बहनों को सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराना चाहिए। कोलकाता के एस्प्लेनेड इलाके में धरने पर बैठीं सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी आम जनता के लिए बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने बताया कि शुक्रवार मध्य रात्रि से घरेलू उपयोग वाले गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। तीन दिन पहले ही कमर्शियल गैस सिलेंडर के दामों में 49 रुपए का इजाफा किया गया था। उन्होंने कहा कि बड़े सिलेंडर की कीमत करीब 2,100 रुपए तक पहुंच गई है, जबकि छोटे सिलेंडर की कीमत लगभग 1,000 रुपए हो गई है। मुख्यमंत्री ने गैस बुकिंग से जुड़े नियमों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अब एलपीजी सिलेंडर 21 दिन पहले बुक करना होगा। उन्होंने सवाल करते हुए कहा कि अगर किसी घर में गैस खत्म हो जाए तो क्या वह परिवार 21 दिन तक बिना खाना बनाए रह सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियां बनाते समय सरकार को यह भी सोचना चाहिए कि आम लोग क्या खाएंगे और उनकी रोजमर्रा की जरूरतें कैसे पूरी होंगी। धरने के मंच से सीएम ममता बनर्जी ने कहा कि रविवार को निकाले जाने वाले जुलूस में लोग बर्तन, कटोरी, चम्मच और रसोई के अन्य सामान लेकर आएं, ताकि यह दिखाया जा सके कि गैस के बिना घरों में खाना बनाना संभव नहीं है। उन्होंने लोगों से अपील की कि अगर संभव हो तो गैस स्टोव भी साथ लेकर आएं और टोकरी में कच्चा अनाज लेकर विरोध जताएं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़े तो महिलाएं काली साड़ी पहनकर भी इस विरोध में शामिल हो सकती हैं। मुख्यमंत्री ने इसे मानवता की रक्षा का आंदोलन बताते हुए महिलाओं से बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरने का आह्वान किया। इस बीच, मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष के खतरे के बीच, केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल किया है। सरकार ने भारतीय रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने का निर्देश दिया है और सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि अतिरिक्त खरीदी गई एलपीजी मुख्य रूप से घरेलू उपभोक्ताओं को ही उपलब्ध कराई जाए। केंद्र सरकार के फैसले के तहत 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में 60 रुपए की बढ़ोतरी की गई है। इसके बाद पहले 879 रुपए में मिलने वाला सिलेंडर अब 939 रुपए में मिलेगा। नई कीमतें शनिवार से लागू हो गई हैं। वहीं, कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में भी प्रति सिलेंडर 50 रुपए का इजाफा किया गया है, जिससे इसकी कीमत बढ़कर लगभग 1,990 रुपए तक पहुंच गई है। गैस की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर रेस्तरां और होटल उद्योग पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है, जिससे बाहर खाना खाने का खर्च बढ़ सकता है। इसी दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य सरकार की नई योजना ‘बांग्लार युवा साथी’ को लेकर भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत लाभार्थियों को शनिवार से ही वित्तीय सहायता मिलनी शुरू हो जाएगी। योजना के तहत राज्य के ऐसे छात्र जिन्होंने माध्यमिक परीक्षा पास कर ली है, लेकिन अभी तक उन्हें नौकरी नहीं मिली है, उन्हें प्रति माह 1,500 रुपए का भत्ता दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले इस योजना की राशि 1 अप्रैल से देने की बात कही गई थी, लेकिन अब इसे पहले ही लागू कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अपने वादों को निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने यह भी बताया कि ‘लक्ष्मी भंडार’ योजना के तहत महिलाओं को मिलने वाला अनुदान फरवरी से ही दिया जा रहा है। ममता बनर्जी ने कहा, “हम जो कहते हैं, वो करते हैं।”