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ममता बनर्जी का केंद्र पर हमला: राज्यपाल के इस्तीफे को बताया ‘अमित शाह की राजनीतिक चाल’

कोलकाता पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल सीवी आनंदबोस के इस्तीफे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि यह सब गृह मंत्री अमित शाह के दबाव की वजह से हो रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले इस तरह का फैसला अमित शाह ही ले सकते हैं। बनर्जी ने कहा कि सीवी आनंदबोस ने किसलिए इस्तीफा दिया इसको लेकर कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा कता लेकिन इतना साफ है कि राजनीतिक फायदे को देखते हुए ही इस तरह का परिवर्तन किया जा रहा है। नवंबर 2027 तक था कार्यकाल सीएम बनर्जी ने कहा कि उन्हें शाह से पता चला है कि बोस के जाने के बाद तमिलनाडु के राज्यपाल एवं पूर्व उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) आरएन रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल पद का अतिरिक्त प्रभार संभालेंगे। बोस ने दिल्ली से बताया, ''हां, मैंने इस्तीफा दे दिया है। मैं साढ़े तीन साल तक बंगाल का राज्यपाल रहा हूं; यह मेरे लिए पर्याप्त है।' उन्होंने हालांकि अचानक इस्तीफा देने के कारणों का खुलासा नहीं किया, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलें तेज हो गईं क्योंकि उनका कार्यकाल नवंबर 2027 तक था। बनर्जी ने कहा कि शाह ने थोड़ी देर पहले ही उन्हें इस फैसले के बारे में बताया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की हरकतें देश के लोकतांत्रिक ढांचे के लिए खतरा हैं। इस तरह से एकतरफा फैसले किसी राज्य के हित में नहीं हैं बल्कि पार्टी विशेष के हित में हैं। 'लोक भवन' के अधिकारियों ने पुष्टि की कि त्यागपत्र राष्ट्रपति भवन भेजा जा चुका है। बोस ने 17 नवंबर, 2022 को पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में कार्यभार संभाला था। उन्होंने अपने कार्यकाल की समाप्ति से लगभग 20 महीने पहले ही पद छोड़ दिया। इसके साथ ही वह पश्चिम बंगाल के लगातार दूसरे ऐसे राज्यपाल बन गए जिन्होंने अपना कार्यकाल पूरा करने से पहले ही पद छोड़ दिया। बनर्जी ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह अचानक हुए इस घटनाक्रम से ''स्तब्ध और बेहद चिंतित'' हैं और दावा किया कि उन्हें इसके कारणों का पता नहीं है। उन्होंने कहा, ''हालांकि, यदि बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल बोस पर केंद्रीय गृह मंत्री की ओर से राजनीतिक कारणों से दबाव डाला गया हो तो मुझे हैरानी नहीं होगी।' टीएमसी चीफ बनर्जी ने कहा, ''मुझे केंद्रीय गृह मंत्री (अमित शाह) से पता चला है कि आरएन रवि पश्चिम बंगाल के राज्यपाल के रूप में सीवी आनंद बोस का स्थान लेंगे।' लोकतांत्रिक ढांचे पर प्रहार मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि शाह ने उन्हें बोस की जगह रवि के आने की जानकारी दी, लेकिन इस मामले में उनसे परामर्श नहीं किया गया। उन्होंने कहा, "केंद्र को सहकारी संघवाद के सिद्धांतों का सम्मान करना चाहिए और ऐसे एकतरफा फैसले लेने से बचना चाहिए जो लोकतांत्रिक परंपराओं और राज्यों की गरिमा को ठेस पहुंचाते हों।' इस बीच बीजेपी की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने संघीय भावना पर हमले के बारे में बनर्जी की टिप्पणियों को ''बेबुनियाद'' करार दिया। उन्होंने कहा, ''राजभवन में बदलाव होना आम बात है। मैंने सुना है कि उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया है। इस बारे में मुझे कुछ नहीं कहना है। तृणमूल कांग्रेस सिर्फ इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने की कोशिश कर रही है।'' यह घटनाक्रम राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समय पर सामने आया है, क्योंकि निर्वाचन आयोग द्वारा जल्द ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित किये जाने की उम्मीद है। अपने कार्यकाल के दौरान, बोस ने कई बार राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के साथ उनका अक्सर टकराव होता रहता था। गुरुवार शाम को दिल्ली से उनके अचानक इस्तीफे ने राजनीतिक विश्लेषकों और राज्य प्रशासन दोनों को आश्चर्यचकित कर दिया। लोक भवन के अधिकारियों ने बताया कि बोस दिन में पहले दिल्ली गये थे और वहीं से उन्होंने राष्ट्रपति भवन को अपना त्यागपत्र भेजा था। इस घटनाक्रम ने बोस के पूर्ववर्ती जगदीप धनखड़ के पद से इस्तीफा देने की यादें ताजा कर दीं, जिन्होंने राज्यपाल के रूप में अपना कार्यकाल पूरा नहीं किया था, क्योंकि वह 2022 में उपराष्ट्रपति चुने गए थे। धनखड़ ने पिछले साल अचानक उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था।  

दीदी का बड़ा दांव! चुनाव से पहले BJP सांसद को सम्मान देकर क्या साधना चाहती हैं ममता बनर्जी

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वाली 25 विशिष्ट हस्तियों को राज्य के नागरिक पुरस्कारों से सम्मानित किया है। 'अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस' के अवसर पर शनिवार को कोलकाता के देशप्रिय पार्क में आयोजित एक कार्यक्रम में इन हस्तियों को सम्मानित किया गया। ये सम्मान कला, संस्कृति, साहित्य, लोक प्रशासन और पब्लिक सर्विस में खास योगदान के लिए दिए जाते हैं। इस मौके पर सभी हस्तियों को प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न भेंट करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "मैं आप सभी के प्रति अपना सर्वोच्च सम्मान प्रकट करती हूं और आपको बधाई देती हूं।" कौन हैं नगेन रॉय? अप्रैल में संभावित विधानसभा चुनावों से पहले मातृभाषा दिवस के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में राज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बंग विभूषण’ नगेन रॉय को दिया गया है, जिससे सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। दरअसल, नगेन रॉय जिन्हें उनके समुदाय में अनंता महाराज के नाम से भी जाना जाता है, भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सांसद हैं। 2023 में ही भाजपा ने उन्हें उच्च सदन के लिए नामित किया था। इस सम्मान को ममता बनर्जी द्वारा स्वयं प्रदान किया गया, जिसमें उन्हें अंगवस्त्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान के जरिए क्या सियासी संदेश? यह सम्मान ऐसे समय में दिया गया है जब राज्य में अप्रैल-मई के दौरान विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में एक विपक्षी दल के सांसद को सम्मानित करना राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। खासकर इसलिए भी क्योंकि नगेन रॉय राजबंशी समुदाय के प्रभावशाली नेता हैं, जिसका उत्तर बंगाल की राजनीति में महत्वपूर्ण प्रभाव है। यह वही क्षेत्र जहां हाल के चुनावों में भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन किया है और तृणमूल कांग्रेस को चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ममता ने सम्मान देते हुए क्या कहा? सम्मान समारोह में बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि नगेन रॉय को यह सम्मान राजबंशी भाषा और संस्कृति के संरक्षण में उनके योगदान के लिए दिया गया है और उम्मीद जताई कि वे आगे भी समाज के लिए काम करते रहेंगे। वहीं, नगेन रॉय ने इस सम्मान पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि उन्होंने कभी इसकी कल्पना भी नहीं की थी। राजनीतिक अटकलों के बीच जब उनसे दल बदल की संभावना पर सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि उनका ऐसा कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि वे किसी पार्टी में शामिल नहीं हो रहे हैं और राजनीति में उनकी दिलचस्पी सीमित है। राजबंशी समुदाय में उनकी पकड़ मजबूत नगेन रॉय लंबे समय से ‘ग्रेटर कूच बिहार’ राज्य की मांग से जुड़े रहे हैं और राजबंशी समुदाय में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस समुदाय का वोट काफी हद तक उनके रुख से प्रभावित होता है। इस सम्मान के समय को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस पिछले 15 वर्षों से सत्ता में है, जबकि भाजपा राज्य में उसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बनकर उभरी है। उत्तर बंगाल में राजबंशी समुदाय का प्रभाव निर्णायक माना जाता है, ऐसे में नगेन रॉय को दिया गया यह सम्मान चुनावी रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है। पहले टीएमसी के करीब माने जाते थे गौरतलब है कि नगेन रॉय पहले तृणमूल कांग्रेस के करीब माने जाते थे, लेकिन बाद में भाजपा के साथ जुड़े। हाल ही में उन्होंने मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर भी असंतोष जताया था, जिससे यह संकेत मिलता है कि वे अपने समुदाय के मुद्दों पर खुलकर बोलते रहे हैं। नगेन रॉय के अलावा राज्य का सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'बंग विभूषण' चित्रकार गणेश हलुई, गायक शिवाजी चट्टोपाध्याय, श्रीराधा बंद्योपाध्याय, नचिकेता चक्रवर्ती, लोपामुद्रा मित्रा, बाबुल सुप्रियो, इमान चक्रवर्ती और कवि श्रीजतो बंद्योपाध्याय को प्रदान किया गया। राज्य का एक अन्य प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान 'बंग भूषण' गायक मनोमय भट्टाचार्य, राघव चट्टोपाध्याय, रूपंकर बागची, अदिति मुंशी, बाउल कलाकार कार्तिक दास बाउल, गायक विवेक कुमार और अभिनेता परमब्रत चट्टोपाध्याय सहित अन्य हस्तियों को प्रदान किया गया।

INDIA ब्लॉक में नेतृत्व बदलाव की मांग तेज, राहुल गांधी हटें—ममता बनर्जी को आगे लाने की पैरवी

नई दिल्ली भारतीय राजनीति में इस समय पर सत्ताधारी पार्टी भाजपा के पास एक चेहरा प्रधानमंत्री मोदी के रूप में मौजूद है। लेकिन सामने की तरफ बिखरा हुआ विपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, समय- समय पर इस पद को लेकर सवाल उठते रहे हैं। अब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार ने विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के नेतृत्व को लेकर ममता बनर्जी का नाम आगे बढ़ाया है। उन्होंने लिखा कि वर्तमान समय में ममता बनर्जी ही एक ऐसी नेता है जो एक राजनीतिक दल और सरकार दोनों का नेतृत्व कर रही हैं। वह राष्ट्रीय और क्षेत्रीय नेताओं के बीच में एक अलग पहचान रखती हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू ने टेलीग्राफ में लिखे अपने लेख में ममता को एक कद्दावर नेत्री करार दिया। उन्होंने कहा कि वह पूरी तरह से अपनी ताकत से उभरी हैं, और पहली पीढ़ी की नेता है, जो कि उन्हें और भी ज्यादा लोकप्रिय बनाता है। इतना ही नहीं बारू ने कांग्रेस नेतृत्व के ऊपर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी-मनमोहन सिंह मॉडल को राहुल और खरगे के साथ दोहराने का कोई खास लाभ भी पार्टी और इंडिया ब्लॉक को नहीं हुआ है। ऐसे में अब ममता को नेतृत्व संभालना चाहिए। एक महिला प्रधानमंत्री का समय बारू ने लिखा कि काफी समय हो गया है कि अब देश को एक महिला प्रधानमंत्री मिलना चाहिए। उन्होंने लिखा, "यह देखते हुए कि सत्ताधारी भाजपा एक पुरुष प्रधान पार्टी है, अगर विपक्षी गठबंधन का नेतृत्व किसी महिला नेत्री के हाथ में हो तो यह महिला सशक्तिकरण का एक मजबूत आधार होगा। इससे भाजपा के महिला मतदाताओं में सेंध लग सकती है। वैसे भी काफी समय हो गया है, जब हमारे पास महिला प्रधानमंत्री रही हो।" गौरतलब है कि आजाद भारत के इतिहास में केवल इंदिरा गांधी ही भारत की महिला प्रधानमंत्री रही हैं। बारू के इस लेख को तृणमूल कांग्रेस की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने भी शेयर किया। उन्होंने लिखा,"एक विचार ऐसा भी जिसका समय आ गया है।' भारत की राजनीति में कांग्रेस भले ही अभी कमजोर स्थिति में हो लेकिन उसके सामने कोई भी नेता अभी इतनी मजबूत स्थिति में नहीं आया है। ममता बनर्जी का पश्चिम बंगाल में एक मजबूत आधार है, लेकिन दूसरे राज्यों में उनकी खास पहचान नहीं है। इसके अलावा विरोधी प्रचार की वजह से आम जनमानस के मन ममता की छवि एक तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली महिला नेता के तौर पर बनी हुई है, जबकि राहुल गांधी अभी भी एक मजबूत राष्ट्रीय नेता के तौर पर उभर रहे हैं। कई राज्यों में कांग्रेस का एक मजबूत आधार है। ऐसे में भले ही ममता का नाम आगे बढ़ाया जा रहा हो, लेकिन इसका कोई मजबूत आधार नजर नहीं आता।  

CM से वकील बनीं ममता बनर्जी, सुप्रीम कोर्ट में SIR मामले पर खुद करेंगी दलील—बन सकता है इतिहास

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई हैं। वह वकील के तौर पर शीर्ष अदालत में पहुंची हैं। आज का दिन अदालत के इतिहास में अनोखा है क्योंकि पहली बार कोई मौजूदा सीएम सुप्रीम कोर्ट में वकील की हैसियत से दलीलें देगा। पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग की ओर से चल रहे वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण को अदालत में चुनौती दी गई है। इस पर सुनवाई जारी है और इसी मामले में दलीलें देने के लिए ममता बनर्जी शीर्ष अदालत पहुंची हैं। चीफ मिनिस्टर ने अदालत में इंटरलॉक्युटरी ऐप्लिकेशन भी दाखिल की है। इसमें उन्होंने अदालत में पेश होने और निजी तौर पर दलीलें देने की मांग रखी है। मंगलवार को ही ममता बनर्जी के नाम का गेट पास सुप्रीम कोर्ट में बन गया था। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार SIR वाले केस की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच कर रही है। इस बेंच में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल हैं। इस मामले में ममता बनर्जी के अलावा तीन और याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें से दो तो टीएमसी के सांसद ही हैं- डेरेक ओ ब्रायन और डोला सेन। ममता बनर्जी ने बंगाल में SIR को लेकर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि आखिर विपक्ष की सत्ता वाले तीन राज्यों में ही यह क्यों हो रहा है, जबकि असम में इसकी प्रक्रिया नहीं चल रही है, जहां भाजपा की सरकार है। यह याचिका 28 जनवरी को दाखिल हुई थी, जिसमें बंगाल सरकार ने कहा था कि चुनाव आयोग की कार्यवाही गैर-संवैधानिक है। बंगाल सरकार की दलील है कि SIR की पूरी प्रक्रिया जल्दबाजी में और अपारदर्शी तरीके से कराई जा रही है। इसकी कोई जरूरत नहीं है। ममता बनर्जी और अन्य याचियों की विशेष आपत्ति इस बात को लेकर है कि आखिर Logical Discrepancy वाली कैटेगरी में जिन वोटर्स के नाम डाले गए हैं, उनका ऑनलाइन प्रकाशन क्यों नहीं किया गया है। ममता बनर्जी का कहना है कि इन लोगों के नाम लिस्ट में ना डालने से साफ है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। उनका कहना है कि वोटर लिस्ट से यदि किसी का भी नाम कटता है तो उसके बारे में जानकारी देनी चाहिए और उन्हें अपना पक्ष रखने का मौका भी मिलना चाहिए। बता दें कि ममता बनर्जी की चुनाव आयोग में भी एक मीटिंग हुई थी। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से ही वह बैठक के दौरान भिड़ गई थीं। उन्होंने चुनाव आयोग को चेतावनी देते हुए कहा कि मैं बंगाल से यहां 1 लाख लोगों को ला सकती हूं।  

ममता बनर्जी vs भाजपा — नया सर्वे संकेत दे रहा क्या? पश्चिम बंगाल का चुनावी रुझान

कलकत्ता इंडिया टुडे और सी वोटर के द्वारा कराए गए हालिया सर्वे मूड ऑफ द नेशन (MOTN) के अनुसार, अगर आज की तारीख में लोकसभा चुनाव होते हैं तो चुनावी राज्य पश्चिम बंगाल में फिर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) अपना 2024 का पुराना प्रदर्शन दोहरा सकती है और जीती हुई लगभग सभी सीटें बरकरार रख सकती है। यह दावा इंडिया टुडे–सी वोटर के ‘मूड ऑफ द नेशन’ (MOTN) के ताजा सर्वे में किया गया है। 2024 के लोकसभा चुनावों में दीदी यामी ममता बनर्जी की पार्टी TMC ने पश्चिम बंगाल की कुल 42 में से 29 लोकसभा सीटें जीतकर 2019 के अपने प्रदर्शन को और बेहतर बनाया था, जबकि बीजेपी 12 सीटों के साथ काफी पीछे दूसरे स्थान पर रही थी। नवीनतम 2026 के MOTN सर्वे के मुताबिक, TMC 28 सीटें, जबकि BJP 14 सीटें जीत सकती है। यानी TMC की एक सीट कम हो सकती है, जबकि भाजपा को 2 सीटों का फायदा मिलने का अनुमान है। भाजपा के वोट शेयर में बढ़त हालांकि, सर्वे के अनुसार भाजपा के नेतृत्व वाले NDA का वोट शेयर 39% से बढ़कर 42% हो सकता है। यह करीब 3 फीसदी की बढ़त है, जो भाजपा के लिए सकारात्मक संकेत मानी जा रही है। बावजूद इसके सर्वे यह भी साफ करता है कि भाजपा बंगाल में कोई बड़ा उलटफेर करती नहीं दिख रही और भद्रलोक पर ममता बनर्जी और उनकी पार्टी TMC की पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है। बंगाल में मुकाबला अब पूरी तरह द्विध्रुवीय सी वोटर के संस्थापक निदेशक यशवंत देशमुख के अनुसार, “पश्चिम बंगाल अब पूरी तरह TMC और BJP के बीच द्विध्रुवीय मुकाबले की ओर बढ़ रहा है। और हाल के दिनों में राज्य में राजनीतिक ध्रुवीकरण काफी तेज हुआ है।” फरवरी 2024 में हुए सर्वे के मुताबिक, TMC 22 सीटें जीत रही थीं, जबकि भाजपा को 19 सीटें मिल रही थीं। इसके बाद उसी साल अगस्त 2024 में हुए सर्वे के मुताबिक, TMC को 32 सीटें और BJP को 8 सीटें, जबकि कांग्रेस को 2 सीटें मिलने का अनुमान जताया गया था। अब ताजा सर्वे में तस्वीर कुछ बदली है, लेकिन सत्ता की धुरी अब भी ममता बनर्जी के इर्द-गिर्द ही घूमती दिख रही है। चुनाव से पहले बड़ा संकेत यह सर्वे ऐसे समय सामने आया है, जब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सिर्फ दो महीने बचे हैं। ऐसे में इसे जनता के मौजूदा राजनीतिक मूड का संकेत माना जा रहा है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि चुनावी नतीजे कई कारकों पर निर्भर करेंगे। ताजा सर्वे संकेत देता है कि तृणमूल कांग्रेस बंगाल में अब भी सबसे मजबूत ताकत है, वहीं भाजपा धीरे-धीरे अपना आधार बढ़ा रही है लेकिन सत्ता में बदलाव की संभावना फिलहाल कम दिखती है। अगर बंगला जानमानस का मूड ऐसा ही बना रहा तो इस राज्य में कमल फूल खिलाने और भगवा झंडा लहराने का भाजपा का सपना अधूरा रह सकता है।

लालू और केजरीवाल के बाद अगला नंबर कौन? ममता पर रडार, 3 सीएम जेल जा चुके हैं

नई दिल्ली पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी करीब 35 साल पुराने वामपंथी किले को ध्वस्त करने में 2011 में सफल हो गईं तो उसके बाद से उनका रथ कभी नहीं रुका. भाजपा की लाख कोशिशों के बावजूद ममता ने तीसरी बार 2021 में बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सरकार बना ली. इस साल 2026 में करीब 2 महीने बाद होने वाले बंगाल विधानसभा चुनाव में भी भाजपा ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले 6 महीने के अंदर कई दौरे हो चुके हैं. चुनाव ज्यों-ज्यों करीब आता जाएगा, उनके दौरों का सिलसिला भी तेज होगा. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहते जेपी नड्डा ने बंगाल का हाल ही में दौरा किया था. नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बने नितिन नवीन ने भी इस साल होने वाले सभी 5 राज्यों के चुनावों में भाजपा का परचम लहराने का संकल्प लिया है. नतीजे क्या होंगे, यह तो जनता तय करेगी, लेकिन ममता बनर्जी केंद्रीय एजेंसियों से पंगा लेकर मुश्किल में पड़ती नजर आ रही हैं. अगर सुप्रीम कोर्ट प्रवर्तन निदेशालय (ED) के आरोपों पर उनके प्रतिकूल कोई फैसला देता है तो ममता की मुश्किलें बढ़ सकती हैं. सीबीआई और ED से मुख्मंत्रियों के टकराव का हश्र लोग देख चुके हैं. CBI से उलझे, पर जेल जाने से नहीं बचे लालू बिहार का सीएम रहते लालू प्रसाद यादव पर जब पशुपालन घोटाले के आरोप लगे और सीबीआई ने जांच शुरू की तो राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के समर्थकों ने खूब हुड़दंग मचाया. इसे ऐसे समझा जा सकता है. मामले की जांच कर रहे सीबीआई के तत्कालीन संयुक्त निदेशक यूएन बिश्वास जांच के क्रम में जब-जब कोलकाता से पटना जाते तो अपनी पत्नी को यह कहना नहीं भूलते कि कुछ भी हो सकता है. हालत यह थी कि लालू यादव को गिरफ्तार करने के लिए बात सेना बुलाने तक पहुंच गई. कोई पैंतरा काम नहीं आया और अंततः 30 जुलाई 1997 को लालू यादव को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया. बाद में मुकदमा चला और उन्हें सजा भी हुई. सीबीआई से उलझने के बावजूद लालू बच नहीं पाए. आजादी के बाद सेंट्रल एजेंसी द्वारा मुख्यमंत्री पद पर रहे किसी व्यक्ति के गिरफ्तार होने की यह पहली घटना थी. उन्होंने समझदारी नहीं दिखाई होती तो सीएम रहते ही वे गिरफ्तार हो जाते. जब उन्हें गिरफ्तारी की आशंका प्रबल होती दिखी तो अरेस्ट होने से 2 दिन पहले ही 28 जुलाई 1997 को ही उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया और अपनी पत्नी राबड़ी देवी को सीएम बना दिया. ED के नोटिस की अवहेलना अरविंद पर भारी दिल्ली का सीएम रहते अरविंद केजरीवाल ने भी केंद्रीय एजेंसी ED से पंगा लिया. दिल्ली शराब नीति में घपले के आरोप में ईडी की ओर से पछताछ के लिए उन्हें लगातार 9 नोटिस भेजे गए. उन्होंने उसका न कोई जवाब दिया और न पूछताछ के लिए ईडी के समक्ष हाजिर ही हुए. आखिरकार ईडी ने उनके आवास पर छापा मारा और 21 मार्च 2024 को मनी लांड्रिंग मामले में पहली बार उन्हें गिरफ्तार किया. मुख्यमंत्री पद पर रहते केजरीवाल की यह पहली गिरफ्तारी थी. हालांकि इस मामले में उन्हें जमानत जल्द ही मिल गई, लेकिन उन्हें जेल से बाहर निकलने का मौका नहीं मिला. दूसरी बार उन्हें 26 जून 2024 को सीबीआई ने तिहाड़ जेल से ही गिरफ्तार कर लिया. अगर वे लालू यादव की तरह समझदारी दिखाते तो सीएम के रूप में उनके गिरफ्तार होने का रिकार्ड नहीं बनता. वे भी अपनी पत्नी को सीएम की कुर्सी पर बिठा सकते थे. उनकी पत्नी बाद में जिस तरह राजनीति में रुचि दिखाने लगी थीं, उससे लगता है कि उन्हें या किसी अन्य को भी सीएम न बनाना केजरीवाल की बड़ी चूक थी. केजरीवाल ने दूसरा रिकार्ड यह बनाया कि वे करीब 6 महीने तक जेल से ही सरकार चलाते रहे. बाद में इस पर कोर्ट से लेकर मीडिया तक हंगामा मचा तो उन्होंने आतिशी को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी. यानी ईडी से पंगा लेना अरविंद केजरीवाल को महंगा पड़ा. हेमंत सोरेन ने ED को छकाया, पर बचे नहीं झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन पर जमीन घोटाले का आरोप लगा. मामला मनी लांड्रिंग का बना तो ईडी ने जांच के लिए उन्हें कई बार नोटिस भेजा. इस मामले को हेमंत सोरेन ने हल्के में लिया. वे ईडी से राहत की उम्मीद में हाईकोर्ट-सुप्रीम कोर्ट का चक्कर लगाते रहे. 10 नोटिस के बावजूद जब हेमंत सोरेन ने ईडी को कोई जवाब नहीं भेजा तो आखिरकार ईडी ने उन्हें 31 जनवरी 2024 को उनके सरकारी आवास से गिरफ्तार कर लिया. हेमंत ने भी लालू जैसी ही चालाकी की. फर्क यही रहा कि उन्होंने अपनी पत्नी के बजाय पिता शिबू सोरेन के सहयोगी रहे और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के अति विश्वसनीय सहयोगी चंपाई सोरेन को गिरफ्तारी से कुछ देर पहले ही नेता घोषित कर दिया. खुद सीएम पद से इस्तीफा दे दिया. अब चंपाई के सीएम बनने की सिर्फ औपचारिकता बच गई. चंपाई के चयन के पहले ही हेमंत सोरेन ने सीएम पद से इस्तीफा दे दिया, इसलिए गिरफ्तारी की तारीख तो एक ही रही, सिर्फ समय बदल गया. हालांकि चंपाई सोरेन को सीएम बनाना बाद में उनकी बड़ी भूल साबित हुई. जमीन घोटाले का मामला अभी अदालत में है, लेकिन जमानत मिलने के बाद हेमंत सोरेन ने एक ही टर्म में दूसरी बार सीएम पद की शपथ लेने का रिकार्ड बना दिया. बहरहाल, हेमंत सोरेन भी ईडी से पंगा लेकर बच नहीं पाए. आईपैक पर ई़डी रेड को लेकर ममता बनर्जी भी टकरा रही हैं. ममता का ED से पंगा, परिणाम की प्रतीक्षा ममता बनर्जी ने न सिर्फ ईडी के खिलाफ मोर्चा खोला है, बल्कि वे पहले सीबीआई से भी टकरा चुकी हैं. केंद्रीय एजेंसियों से उनका टकराव कई बार अदालतों तक भी पहुंचा है. ममता का आरोप है कि विपक्ष को परेशान करने के लिए बेवजह केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ईडी, सीबीआई जैसी केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल करती है. हालांकि बंगाल में कई मंत्री और नेताओं को सेंट्रल एजेंसियों ने भ्रष्टाचार के आरोपों में न सिर्फ गिरफ्तार किया, बल्कि छापों के दौरान उनके और करीबियों के घरों से भारी नकदी और अकूत संपत्ति के दस्तावेज भी बरामद-जब्त … Read more

SIR विवाद पर ममता बनर्जी का बड़ा बयान: तनाव ऐसा कि बंगाल में रोज 3-4 आत्महत्याएं

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर शुक्रवार को बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि राज्य में जारी एसआईआर अभ्यास के चलते फैली चिंता के कारण हर दिन तीन से चार लोग आत्महत्या कर रहे हैं। सुभाष चंद्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में कोलकाता में रेड रोड पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा, 'निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को इन मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। अब तक 110 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। प्रतिदिन तीन से चार लोग SIR की वजह से अत्यधिक चिंता के कारण आत्महत्या कर रहे हैं।’ आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में मतदाता सूचियों का एसआईआर अभ्यास जारी है। ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर पश्चिम बंगाल के खिलाफ साजिश रचने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और बीआर आंबेडकर जैसे देश के महान व्यक्तित्वों का अपमान किया जा रहा है। इसस पहले, ममता बनर्जी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने केंद्र सरकार से इस महान स्वतंत्रता सेनानी से जुड़े सभी शेष दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की अपील की। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर श्रद्धांजलि ममता बनर्जी ने कहा कि दशकों बीत जाने के बावजूद नेताजी के लापता होने का रहस्य अब तक अनसुलझा है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'देशनायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर मैं उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि और नमन अर्पित करती हूं। यह हम सभी का दुर्भाग्य है कि नेताजी के लापता होने का रहस्य आज तक नहीं सुलझा है। 1945 के बाद उनके साथ क्या हुआ, यह हम नहीं जानते। यह सभी के लिए अत्यंत दुख की बात है।' बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित सभी राज्य स्तरीय फाइलें बहुत पहले ही सार्वजनिक कर दी थीं। उन्होंने कहा कि मैं भारत सरकार से एक बार फिर अपील करती हूं कि नेताजी से संबंधित सभी जानकारियों को सार्वजनिक किया जाए।  

वोट कटने का आरोप: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को घेरा, कहा– लोकतंत्र से हो रहा खिलवाड़

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को भारत के चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के जरिए जानबूझकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का दावा है कि अल्पसंख्यक बहुल मालदा में करीब 90,000 वोटरों के नाम अंतिम वोटर लिस्ट से हटाने की तैयारी की जा रही है। उत्तर बंगाल रवाना होने से पहले कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, “अल्पसंख्यक समुदाय की शिकायतें बिल्कुल सही हैं। उनके वोटरों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। मुझे जानकारी मिली है कि केवल मालदा में ही 90,000 नाम हटाए जा सकते हैं। सिर्फ अल्पसंख्यक ही नहीं, बल्कि मतुआ, राजवंशी और आदिवासी समुदाय जैसे पिछड़े वर्गों के वोटरों को भी निशाना बनाया जा रहा है। यहां तक कि अमर्त्य सेन और कवि जॉय गोस्वामी जैसे प्रसिद्ध लोगों के नाम भी नहीं छोड़े जा रहे हैं।” शुक्रवार सुबह से मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा इलाके में तनाव बना हुआ है। यह तनाव तब शुरू हुआ, जब पड़ोसी राज्य झारखंड में कथित तौर पर मारे गए एक स्थानीय प्रवासी मजदूर का शव वापस लाया गया। इस घटना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदर्शन कर रहे लोगों से संयम और शांति बनाए रखने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि बेलडांगा में लोगों को भड़काने के पीछे कौन लोग हैं। फिर भी मैं सभी से अपील करती हूं कि शांति बनाए रखें और किसी भी उकसावे में न आएं। पश्चिम बंगाल में जानबूझकर हिंसा फैलाने की कोशिश की जा रही है। इसके पीछे बीजेपी का हाथ है और इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है और उनकी हत्याएं हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं ऐसे सभी मामलों पर नजर रख रही हूं। मेरी सरकार और तृणमूल कांग्रेस ऐसे प्रवासी मजदूरों के परिवारों के साथ खड़ी है।” हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्रवाई पर कोई टिप्पणी नहीं की। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पर रोक लगा दी थी। यह एफआईआर राजनीतिक सलाहकार कंपनी आई-पैक के दफ्तर और उसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित घर पर हाल ही में हुई तलाशी से जुड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय जांच में राज्य एजेंसियों की कथित दखलअंदाजी जैसे गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और विपुल पंचोली की बेंच ने इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया। ये नोटिस ईडी की उन याचिकाओं पर जारी किए गए हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि पिछले हफ्ते हुई तलाशी के दौरान जांच में रुकावट डाली गई थी।

ED बनाम ममता बनर्जी: CBI जांच को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा, आज अहम सुनवाई

कोलकाता प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इसके जरिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका की सीबीआई जांच का अनुरोध किया है। ED ने राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC तथा उसके निदेशक के खिलाफ कोलकाता में की गई छापेमारी के दौरान कथित तौर पर बाधा डालने के आरोप लगाए हैं। याचिका में उसने यह भी अनुरोध किया है कि तलाशी के दौरान जिन सभी डिजिटल उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और दस्तावेजों को 'अवैध और जबरन' तरीके से हटा लिया गया था। इन्हें तुरंत जब्त कर सील किया जाए, फॉरेंसिक रूप से सुरक्षित रखा जाये और फिर ED को सौंपा जाए। उच्च न्यायालय द्वारा शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई किए जाने की उम्मीद है। कोयला घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले के तहत गुरुवार को आई-पैक के सॉल्ट लेक स्थित कार्यालय और इसके संस्थापक तथा निदेशकों में से एक प्रतीक जैन के आवास पर तलाश अभियान चलाया गया। राज्य और दिल्ली में भी कुछ अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई थी। ED ने गुरुवार को एक प्रेस बयान में आरोप लगाया था कि बनर्जी छापेमारी के दौरान कोलकाता के लाउडन रोड स्थित जैन के आवास पर आईं और 'महत्वपूर्ण सबूत ले गईं' और आई-पैक के कार्यालय में भी उन्होंने ऐसा ही किया। ED ने याचिका में दावा किया कि पश्चिम बंगाल में कोयले की कथित चोरी से प्राप्त हवाला राशि के लगभग 20 करोड़ रुपये आई-पैक तक पहुंचे। यह संगठन 2021 से टीएमसी और राज्य सरकार को राजनीतिक परामर्श सेवाएं प्रदान कर रहा है। इसमें कहा गया है, 'जांच के दौरान मिले ठोस सबूतों से पता चलता है कि हवाला चैनलों के माध्यम से आई-पैक को कम से कम 20 करोड़ रुपये की आपराधिक आय हस्तांतरित की गई थी।' याचिका में कहा गया है, 'जांच को जारी रखते हुए और अपराध से प्राप्त धनराशि और उसके उपयोग का पता लगाने के लिए, कोयला तस्करी मामले के संबंध में आई-पैक और कुछ अन्य संस्थाओं के खिलाफ तलाश अभियान शुरू किया गया था।' इसमें कहा गया, 'पीएमएलए के तहत जारी तलाशी अभियान में हस्तक्षेप न करने के लिए (ED अधिकारियों द्वारा) स्पष्ट अनुरोध किए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री ने परिसर में प्रवेश किया।' याचिका में कहा गया है, 'कानून-व्यवस्था से जुड़े सभी नियमों का उल्लंघन करते हुए, सुश्री ममता बनर्जी ने पुलिसकर्मियों की सहायता से अधिकृत अधिकारी के कब्जे से सभी डिजिटल उपकरणों के साथ-साथ महत्वपूर्ण आपत्तिजनक दस्तावेजों को जबरन अपने कब्जे में ले लिया और दोपहर लगभग 12:15 बजे परिसर से चली गईं।' ED ने कहा कि उसके अधिकारियों को 'अपने कानूनी कर्तव्यों का पालन नहीं करने दिया गया और उनके कामकाज में बाधा डाली गई।' एजेंसी ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया कि वह जब्त किये गये डिजिटल उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों तक किसी भी प्रकार की पहुंच बनाये जाने, इन्हें मिटाने या छेड़छाड़ को रोकने के लिए अंतरिम आदेश पारित करे।  

कोलकाता में ED की छापेमारी, ममता बनर्जी बोलीं – गृहमंत्री लोकतंत्र की रक्षा नहीं कर पा रहे

  कोलकाता  केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में IPAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय पर छापेमारी के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खुद प्रतीक जैन के घर पहुंचने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है. सूत्रों के अनुसार, ईडी यह छापेमारी कथित वित्तीय अनियमितताओं के एक मामले में कर रही है. जांच टीम एक साथ प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय में दस्तावेजों की जांच और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं कर रही है. इस कार्रवाई के दौरान ममता बनर्जी का मौके पर आना राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मालूम हो कि ममता बनर्जी सीधे उस स्थान पर पहुंचीं जहां ईडी टीम जांच चल रही. उनके आने से माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के खिलाफ एक सियासी निशान के तौर पर देखा जा रहा है. इससे पहले भी पश्चिम बंगाल में ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाइयों को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच विवाद की स्थिति बनी रही है. ईडी छापे पर ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, कहा- पार्टी दस्तावेज और रणनीति चुराने आए ईडी की रेड पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ममता ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि ईडी हमारी पार्टी के आईटी सेक्टर कार्यालय में इस प्रकार से दस्तावेज लेने आई. मुख्यमंत्री ममता ने इस कार्रवाई को राजनीतिक उत्पीड़न बताया और कहा कि यह सब गृहमंत्री की स्क्रिप्ट के तहत हो रहा है, जो स्वयं देश की सुरक्षा बनाए रखने में असमर्थ हैं. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ईडी द्वारा उनके पार्टी दस्तावेजों को बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के जब्त किया गया और इस बीच, कुछ मामलों में लोगों के नामों को हटाया जा रहा है. उन्होंने खास तौर पर SIR केस का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाए कि नाम गायब किए जा रहे हैं और दस्तावेजों का दुरुपयोग किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की जांच एजेंसियां और गृह मंत्रालय देश और लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश में दो समानांतर प्रयास किए जा रहे हैं – एक तरफ मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने की कोशिशें और दूसरी तरफ अवैध तरीके से संवेदनशील डेटा इकट्ठा करना. मुख्यमंत्री ने इसे लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया. ममता बनर्जी ने यह भी बताया कि उन्हें इस तरह की कार्रवाई की पहले से सूचना थी. इसलिए पार्टी से जुड़े सभी हार्ड डिस्क और जरूरी डेटा पहले ही सुरक्षित कर लिया गया था ताकि किसी भी प्रकार की जब्ती से पार्टी के आंतरिक कार्यों और रणनीतियों को नुकसान न पहुंचे. उन्होंने कहा कि उनका आईटी ऑफिस पहले भी निशाने पर रहा है और वह खुद वहां जाकर पूरी स्थिति की समीक्षा करेंगी. मुख्यमंत्री ने साफ़ किया कि यह देखना उनकी जिम्मेदारी है कि यह कार्रवाई किस उद्देश्य से और किस स्तर पर की गई है. ममता बनर्जी ने केंद्र की एजेंसियों पर विपक्षी दलों को डराने और कमजोर करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस राजनीतिक साजिश के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर मजबूती से संघर्ष करती रहेगी.