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SIR विवाद पर ममता बनर्जी का बड़ा बयान: तनाव ऐसा कि बंगाल में रोज 3-4 आत्महत्याएं

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर शुक्रवार को बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि राज्य में जारी एसआईआर अभ्यास के चलते फैली चिंता के कारण हर दिन तीन से चार लोग आत्महत्या कर रहे हैं। सुभाष चंद्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में कोलकाता में रेड रोड पर कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा, 'निर्वाचन आयोग और केंद्र सरकार को इन मौतों की जिम्मेदारी लेनी चाहिए। अब तक 110 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। प्रतिदिन तीन से चार लोग SIR की वजह से अत्यधिक चिंता के कारण आत्महत्या कर रहे हैं।’ आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में मतदाता सूचियों का एसआईआर अभ्यास जारी है। ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर पश्चिम बंगाल के खिलाफ साजिश रचने का भी आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि महात्मा गांधी, रवींद्रनाथ टैगोर, नेताजी सुभाषचंद्र बोस और बीआर आंबेडकर जैसे देश के महान व्यक्तित्वों का अपमान किया जा रहा है। इसस पहले, ममता बनर्जी ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने केंद्र सरकार से इस महान स्वतंत्रता सेनानी से जुड़े सभी शेष दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की अपील की। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर श्रद्धांजलि ममता बनर्जी ने कहा कि दशकों बीत जाने के बावजूद नेताजी के लापता होने का रहस्य अब तक अनसुलझा है। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'देशनायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की जयंती पर मैं उन्हें हार्दिक श्रद्धांजलि और नमन अर्पित करती हूं। यह हम सभी का दुर्भाग्य है कि नेताजी के लापता होने का रहस्य आज तक नहीं सुलझा है। 1945 के बाद उनके साथ क्या हुआ, यह हम नहीं जानते। यह सभी के लिए अत्यंत दुख की बात है।' बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से संबंधित सभी राज्य स्तरीय फाइलें बहुत पहले ही सार्वजनिक कर दी थीं। उन्होंने कहा कि मैं भारत सरकार से एक बार फिर अपील करती हूं कि नेताजी से संबंधित सभी जानकारियों को सार्वजनिक किया जाए।  

वोट कटने का आरोप: ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को घेरा, कहा– लोकतंत्र से हो रहा खिलवाड़

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार को भारत के चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के जरिए जानबूझकर अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री का दावा है कि अल्पसंख्यक बहुल मालदा में करीब 90,000 वोटरों के नाम अंतिम वोटर लिस्ट से हटाने की तैयारी की जा रही है। उत्तर बंगाल रवाना होने से पहले कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर मीडिया से बात करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, “अल्पसंख्यक समुदाय की शिकायतें बिल्कुल सही हैं। उनके वोटरों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है। मुझे जानकारी मिली है कि केवल मालदा में ही 90,000 नाम हटाए जा सकते हैं। सिर्फ अल्पसंख्यक ही नहीं, बल्कि मतुआ, राजवंशी और आदिवासी समुदाय जैसे पिछड़े वर्गों के वोटरों को भी निशाना बनाया जा रहा है। यहां तक कि अमर्त्य सेन और कवि जॉय गोस्वामी जैसे प्रसिद्ध लोगों के नाम भी नहीं छोड़े जा रहे हैं।” शुक्रवार सुबह से मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा इलाके में तनाव बना हुआ है। यह तनाव तब शुरू हुआ, जब पड़ोसी राज्य झारखंड में कथित तौर पर मारे गए एक स्थानीय प्रवासी मजदूर का शव वापस लाया गया। इस घटना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदर्शन कर रहे लोगों से संयम और शांति बनाए रखने की अपील की। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि बेलडांगा में लोगों को भड़काने के पीछे कौन लोग हैं। फिर भी मैं सभी से अपील करती हूं कि शांति बनाए रखें और किसी भी उकसावे में न आएं। पश्चिम बंगाल में जानबूझकर हिंसा फैलाने की कोशिश की जा रही है। इसके पीछे बीजेपी का हाथ है और इस मामले में केंद्रीय एजेंसियों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में पश्चिम बंगाल के प्रवासी मजदूरों को खास तौर पर निशाना बनाया जा रहा है और उनकी हत्याएं हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “मैं ऐसे सभी मामलों पर नजर रख रही हूं। मेरी सरकार और तृणमूल कांग्रेस ऐसे प्रवासी मजदूरों के परिवारों के साथ खड़ी है।” हालांकि, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में हुई कार्रवाई पर कोई टिप्पणी नहीं की। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारियों के खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पर रोक लगा दी थी। यह एफआईआर राजनीतिक सलाहकार कंपनी आई-पैक के दफ्तर और उसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के कोलकाता स्थित घर पर हाल ही में हुई तलाशी से जुड़ी थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में केंद्रीय जांच में राज्य एजेंसियों की कथित दखलअंदाजी जैसे गंभीर सवाल उठाए गए हैं। जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और विपुल पंचोली की बेंच ने इस मामले में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार, कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज कुमार वर्मा और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया। ये नोटिस ईडी की उन याचिकाओं पर जारी किए गए हैं, जिनमें आरोप लगाया गया है कि पिछले हफ्ते हुई तलाशी के दौरान जांच में रुकावट डाली गई थी।

ED बनाम ममता बनर्जी: CBI जांच को लेकर मामला हाईकोर्ट पहुंचा, आज अहम सुनवाई

कोलकाता प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। इसके जरिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अन्य लोगों की भूमिका की सीबीआई जांच का अनुरोध किया है। ED ने राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC तथा उसके निदेशक के खिलाफ कोलकाता में की गई छापेमारी के दौरान कथित तौर पर बाधा डालने के आरोप लगाए हैं। याचिका में उसने यह भी अनुरोध किया है कि तलाशी के दौरान जिन सभी डिजिटल उपकरणों, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और दस्तावेजों को 'अवैध और जबरन' तरीके से हटा लिया गया था। इन्हें तुरंत जब्त कर सील किया जाए, फॉरेंसिक रूप से सुरक्षित रखा जाये और फिर ED को सौंपा जाए। उच्च न्यायालय द्वारा शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई किए जाने की उम्मीद है। कोयला घोटाले से जुड़े धनशोधन मामले के तहत गुरुवार को आई-पैक के सॉल्ट लेक स्थित कार्यालय और इसके संस्थापक तथा निदेशकों में से एक प्रतीक जैन के आवास पर तलाश अभियान चलाया गया। राज्य और दिल्ली में भी कुछ अन्य स्थानों पर छापेमारी की गई थी। ED ने गुरुवार को एक प्रेस बयान में आरोप लगाया था कि बनर्जी छापेमारी के दौरान कोलकाता के लाउडन रोड स्थित जैन के आवास पर आईं और 'महत्वपूर्ण सबूत ले गईं' और आई-पैक के कार्यालय में भी उन्होंने ऐसा ही किया। ED ने याचिका में दावा किया कि पश्चिम बंगाल में कोयले की कथित चोरी से प्राप्त हवाला राशि के लगभग 20 करोड़ रुपये आई-पैक तक पहुंचे। यह संगठन 2021 से टीएमसी और राज्य सरकार को राजनीतिक परामर्श सेवाएं प्रदान कर रहा है। इसमें कहा गया है, 'जांच के दौरान मिले ठोस सबूतों से पता चलता है कि हवाला चैनलों के माध्यम से आई-पैक को कम से कम 20 करोड़ रुपये की आपराधिक आय हस्तांतरित की गई थी।' याचिका में कहा गया है, 'जांच को जारी रखते हुए और अपराध से प्राप्त धनराशि और उसके उपयोग का पता लगाने के लिए, कोयला तस्करी मामले के संबंध में आई-पैक और कुछ अन्य संस्थाओं के खिलाफ तलाश अभियान शुरू किया गया था।' इसमें कहा गया, 'पीएमएलए के तहत जारी तलाशी अभियान में हस्तक्षेप न करने के लिए (ED अधिकारियों द्वारा) स्पष्ट अनुरोध किए जाने के बावजूद मुख्यमंत्री ने परिसर में प्रवेश किया।' याचिका में कहा गया है, 'कानून-व्यवस्था से जुड़े सभी नियमों का उल्लंघन करते हुए, सुश्री ममता बनर्जी ने पुलिसकर्मियों की सहायता से अधिकृत अधिकारी के कब्जे से सभी डिजिटल उपकरणों के साथ-साथ महत्वपूर्ण आपत्तिजनक दस्तावेजों को जबरन अपने कब्जे में ले लिया और दोपहर लगभग 12:15 बजे परिसर से चली गईं।' ED ने कहा कि उसके अधिकारियों को 'अपने कानूनी कर्तव्यों का पालन नहीं करने दिया गया और उनके कामकाज में बाधा डाली गई।' एजेंसी ने उच्च न्यायालय से आग्रह किया कि वह जब्त किये गये डिजिटल उपकरणों और इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों तक किसी भी प्रकार की पहुंच बनाये जाने, इन्हें मिटाने या छेड़छाड़ को रोकने के लिए अंतरिम आदेश पारित करे।  

कोलकाता में ED की छापेमारी, ममता बनर्जी बोलीं – गृहमंत्री लोकतंत्र की रक्षा नहीं कर पा रहे

  कोलकाता  केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में IPAC प्रमुख प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय पर छापेमारी के बीच राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खुद प्रतीक जैन के घर पहुंचने से मामले की गंभीरता और बढ़ गई है. सूत्रों के अनुसार, ईडी यह छापेमारी कथित वित्तीय अनियमितताओं के एक मामले में कर रही है. जांच टीम एक साथ प्रतीक जैन के आवास और कार्यालय में दस्तावेजों की जांच और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं कर रही है. इस कार्रवाई के दौरान ममता बनर्जी का मौके पर आना राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. मालूम हो कि ममता बनर्जी सीधे उस स्थान पर पहुंचीं जहां ईडी टीम जांच चल रही. उनके आने से माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह कदम केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई के खिलाफ एक सियासी निशान के तौर पर देखा जा रहा है. इससे पहले भी पश्चिम बंगाल में ईडी और अन्य केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाइयों को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच विवाद की स्थिति बनी रही है. ईडी छापे पर ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, कहा- पार्टी दस्तावेज और रणनीति चुराने आए ईडी की रेड पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ममता ने कहा कि यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि ईडी हमारी पार्टी के आईटी सेक्टर कार्यालय में इस प्रकार से दस्तावेज लेने आई. मुख्यमंत्री ममता ने इस कार्रवाई को राजनीतिक उत्पीड़न बताया और कहा कि यह सब गृहमंत्री की स्क्रिप्ट के तहत हो रहा है, जो स्वयं देश की सुरक्षा बनाए रखने में असमर्थ हैं. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ईडी द्वारा उनके पार्टी दस्तावेजों को बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के जब्त किया गया और इस बीच, कुछ मामलों में लोगों के नामों को हटाया जा रहा है. उन्होंने खास तौर पर SIR केस का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाए कि नाम गायब किए जा रहे हैं और दस्तावेजों का दुरुपयोग किया जा रहा है. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की जांच एजेंसियां और गृह मंत्रालय देश और लोकतंत्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं. उन्होंने कहा कि देश में दो समानांतर प्रयास किए जा रहे हैं – एक तरफ मतदाता सूची से लोगों के नाम हटाने की कोशिशें और दूसरी तरफ अवैध तरीके से संवेदनशील डेटा इकट्ठा करना. मुख्यमंत्री ने इसे लोकतंत्र के लिए एक बड़ा खतरा करार दिया. ममता बनर्जी ने यह भी बताया कि उन्हें इस तरह की कार्रवाई की पहले से सूचना थी. इसलिए पार्टी से जुड़े सभी हार्ड डिस्क और जरूरी डेटा पहले ही सुरक्षित कर लिया गया था ताकि किसी भी प्रकार की जब्ती से पार्टी के आंतरिक कार्यों और रणनीतियों को नुकसान न पहुंचे. उन्होंने कहा कि उनका आईटी ऑफिस पहले भी निशाने पर रहा है और वह खुद वहां जाकर पूरी स्थिति की समीक्षा करेंगी. मुख्यमंत्री ने साफ़ किया कि यह देखना उनकी जिम्मेदारी है कि यह कार्रवाई किस उद्देश्य से और किस स्तर पर की गई है. ममता बनर्जी ने केंद्र की एजेंसियों पर विपक्षी दलों को डराने और कमजोर करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस राजनीतिक साजिश के खिलाफ कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर मजबूती से संघर्ष करती रहेगी.

पहलगाम आतंकी हमले पर सियासी संग्राम, ममता बनर्जी ने अमित शाह को बताया ‘दुशासन’

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की चीफ ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा पलटवार किया है और पूछा है कि अगर बंगाल में आतंकी नेटवर्क सक्रिय हैं तो कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला केंद्र ने करवाया था क्या? उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार दावा करती है कि देश में आतंकवाद पर काबू पा लिया गया है, तो फिर पहलगाम हमला कैसे हुआ। ममता ने यहां तक कह दिया कि क्या यह हमला केंद्र की ओर से कराया गया था। दरअसल, ममता अमित शाह के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहीं थीं, जिसमें शाह ने आरोप लगाया था कि चुनावी राज्य में आतंकी नेटवर्क सक्रिय है। बांकुड़ा जिले के बीरसिंहपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तुलना महाभारत के दो पात्रों दुर्योधन और दुशासन से की। उन्होंने कहा, “जैसे ही चुनाव आते हैं, दुर्योधन और दुशासन बंगाल में नजर आने लगते हैं।” ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमित शाह तीन दिन के बंगाल दौरे पर हैं और राज्य में 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी भी 20 दिसंबर को बंगाल आए थे। आतंकवाद को लेकर केंद्र से सवाल अमित शाह द्वारा बंगाल को आतंकियों का अड्डा बताए जाने पर ममता ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, “अगर जम्मू-कश्मीर में कोई आतंकी नहीं है, तो पहलगाम में हमला कैसे हुआ? दिल्ली में जो घटना हुई, उसके पीछे कौन था?” बता दें कि इसी साल 22 अप्रैल को दक्षिणी कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने हमला बोल दिया था, जिसमें 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। इसके अलावा पिछले महीने नवंबर में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लाल किले के पास कार बम धमाके में 15 लोगों की जान चली गई थी। मतदाता सूची संशोधन पर भी हमला ममता बनर्जी ने अपने भाषण में राज्य में हो रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के नाम पर राज्यभर में लोगों को परेशान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री का दावा है कि SIR के तहत करीब 1.5 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की तैयारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें राजबंशी, मतुआ और आदिवासी समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के कारण लगभग 60 लोगों की मौत हो चुकी है। EC का करेंगे घेराव बनर्जी ने कहा कि यदि मतदाता सूची से किसी एक भी वैध मतदाता का नाम हटाया गया तो तृणमूल कांग्रेस दिल्ली में निर्वाचन आयोग के कार्यालय का घेराव करेगी। बनर्जी ने कहा कि एसआईआर के नाम पर राज्य के लोगों को ‘‘प्रताड़ित’’ किया जा रहा है। बुजुर्गों को दस्तावेज सत्यापन की सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है।’’ बनर्जी ने कहा कि राज्य के लोग इस तरह के ‘‘उत्पीड़न’’ को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘लोग भाजपा को पश्चिम बंगाल में सत्ता में नहीं आने देंगे।’’ भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला बोलने वालों की पिटाई की जाती है बनर्जी ने कहा कि भाजपा चुनाव नजदीक आते ही ‘सोनार बांग्ला’ बनाने का वादा करती है, लेकिन हकीकत में जिन राज्यों में वह सत्ता में है वहां बांग्ला बोलने वालों की पिटाई की जाती है। ममता ने कहा कि SIR को AI के जरिए किया जा रहा है, यह एक बड़ा घोटाला है। आखिर में सिर्फ आप (अमित शाह) और आपका बेटा ही बचेंगे। ममता बनर्जी के इस बयान से एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव तेज हो गया है, और आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल और गरमाने की संभावना है। 

बंगाली मजदूरों पर कथित उत्पीड़न को लेकर ममता बनर्जी का केंद्र और भाजपा शासित राज्यों पर तीखा हमला

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा शासित राज्यों में बंगाली भाषी लोगों के साथ हो रहे कथित अत्याचारों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाली बोलने वाले प्रवासी मजदूरों और उनके परिवारों पर हो रहे हमलों और परेशानियों की वह निंदा करती हैं। साथ ही, ममता सरकार दबे-कुचले, डरे-सहमे और परेशान बंगाली भाषी प्रवासी परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। सीएम ममता बनर्जी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "हम भाजपा शासित हर राज्य में बंगाली बोलने वाले लोगों पर हुए क्रूर अत्याचार और परेशानी की कड़ी निंदा करते हैं। हम दबे-कुचले, डरे-सहमे और परेशान बंगाली बोलने वाले प्रवासी परिवारों के साथ खड़े हैं, हम उन परिवारों को हर मुमकिन मदद देंगे।  इंसान की जान की कोई कीमत नहीं होती, लेकिन अगर मौत होती है, तो हमने पैसे का मुआवजा देने का वादा किया है।" ओडिशा में हुई हालिया घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हाल ही में भाजपा शासित राज्य ओडिशा में जंगीपुर इलाके के कुछ प्रवासी मजदूरों पर कई तरह के अत्याचार हुए हैं। यह बहुत दुख की बात है कि 24 दिसंबर को जंगीपुर के सुती इलाके के एक युवा प्रवासी मजदूर की संबलपुर में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मुर्शिदाबाद में प्रवासी मजदूर डर के मारे ओडिशा से घर लौट रहे हैं। इस दिल दहला देने वाली घटना में, हम पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं, और मृतक के परिवार को हमारी तरफ से आर्थिक मदद भी उन तक पहुंचेगी। सीएम ममता ने एक्स पोस्ट में आगे लिखा, "भाजपा शासित राज्यों में हुई इन सभी घटनाओं में हम दोषियों की निंदा करते हैं और पीड़ितों को हर मुमकिन मदद का वादा करते हैं। बंगाली बोलना कोई जुर्म नहीं हो सकता।" मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने ज्वेल राणा की मौत के मामले में सुती पुलिस स्टेशन में पहले ही जीरो FIR दर्ज कर ली है और 6 लोगों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया है। मेरी राज्य पुलिस टीम जांच के लिए ओडिशा गई है।

मेस्सी के नाम पर मचा बवाल: ममता बनर्जी ने जताया खेद, कोलकाता स्टेडियम घटना की जांच के निर्देश

कोलकाता  लियोनेल मेस्सी के भारत पहुंचने से पहले ही फुटबॉल प्रेमियों पर उनका खुमार चढ़ गया। वहीं शनिवार को उनकी एक झलक पाने के लिए कोलकाता के युवा भारती क्रीड़ांगन में बड़ी संख्या में फैन इकट्ठा हुए। मेस्सी के आते ही थोड़ी देर में वहां बवाल शुरू हो गया। लोग बोतल फेंकने लगे और कुर्सियों पर खड़े हो गए। इसके बाद आपस में ही मारपीट और तोड़फोड़ शुरू हो गई। दुनिया के सबसे लोकप्रिय फुटबॉल खिलाड़ी की झलक नहीं देखने पर नाराज प्रशंसकों ने सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया और मैदान में घुस गए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस कुप्रबंधन पर हैरानी जताई है और इस बवाल की जांच के आदेश दे दिए हैं। ममता बनर्जी ने लियोनेल मेस्सी और उनके फैन्स से इस उपद्रव के लिए माफी मांगी है।   बनर्जी ने कहा, साल्ट लेक स्टेडियम में हुए उपद्रव से मैं बहुत दुखी और हैरान हूं। मैं लियोनेल मेस्सी और उनके फैन्स से माफी मांगती हूं। बता दें कि ममता बनर्जी इस कार्यक्रम में शामिल होने जा रही रही थीं। वह रास्ते में ही थीं तब तक स्डेडियम में बवाल शुरू हो गया। ‘सिटी ऑफ जॉय’ में फुटबॉल प्रशंसकों के लिए जो दिन यादगार होना चाहिए था, वह एक बुरे सपने में बदल गया। स्टेडियम के अंदर अव्यवस्था के चलते मेस्सी की मौजूदगी से अधिक अफरा-तफरी मची रही। मेस्सी के मैदान में आते ही स्थिति बेकाबू हो गई। अराजकता के कारण कार्यक्रम को बीच में ही रोक दिया गया। जिससे स्टेडियम में इस कार्यक्रम के लिए मौजूद बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी से मुलाकात नहीं हो सकी। सॉल्ट लेक स्टेडियम राजनीतिक दांव-पेच का अड्डा बन गया और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के समर्थक सुरक्षा घेरा तोड़कर मैदान में घुस आए थे। हालात इतने बिगड़ गए कि ‘जीओएटी टूर’ के आयोजक शतद्रु दत्ता और सुरक्षाकर्मियों को मेस्सी को स्टेडियम से सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा। अर्जेंटीना के इस स्टार खिलाड़ी को देखने के लिए 4,500 से 10,000 रुपये तक के टिकट खरीदने वाले प्रशंसकों ने निराशा में बोतलें फेंकी और सीटों को तोड़ दिया। इसके स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। अजय शाह नाम के एक नाराज प्रशंसक ने कहा, ‘‘ यहां एक गिलास कोल्ड ड्रिंक की कीमत 150-200 रुपये है, फिर भी हमें मेस्सी की एक झलक भी नहीं मिली। लोग उन्हें देखने के लिए अपनी एक महीने की तनख्वाह खर्च कर चुके हैं। मैंने टिकट के लिए 5000 रुपये दिए और अपने बेटे के साथ मेस्सी को देखने आया था, नेताओं को नहीं। पुलिस और सैन्यकर्मी सेल्फी ले रहे थे और इसके लिए प्रबंधन जिम्मेदार है। पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं था।’  

बंगाल में बड़ा यू-टर्न! महीनों की ना के बाद ममता दीदी ने मंजूर किया नया वक्फ कानून, चुनाव से पहले रणनीति?

कोलकाता केंद्र के नए वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को महीनों तक टालने के बाद, पश्चिम बंगाल सरकार ने आखिरकार इस कानून को स्वीकार कर लिया है। राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य की करीब 82000 वक्फ संपत्तियों का विवरण निर्धारित समयसीमा 6 दिसंबर 2025 तक केंद्रीय पोर्टल (umeedminority.gov.in) पर अपलोड कर दिया जाए। यह जानकारी राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुवार देर शाम दी। सूत्रों ने बताया कि केंद्र ने राज्यों से छह दिसंबर तक सभी अविवादित वक्फ संपत्तियों की जानकारी अपलोड करने को कहा है, जिसके कारण राज्य प्रशासन ने तुरंत डेटा-एंट्री प्रक्रिया शुरू करने के लिए कदम उठाए हैं। उन्‍होंने कई मौकों पर कहा था कि वे इस संशोधित कानून को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने देंगी. अब उनका रुख इस कानून को लेकर बदल गया है. ममता सरकार ने वक्‍फ संशोधन कानून-2025 को बंगाल में लागू करने को लेकर दिशा-न‍िर्देश जारी किए हैं. वक्‍फ संपत्तियों को केंद्रीय पोर्टल (umeedminority.gov.in) पर अपलोड करने को लेकर डेडलाइन भी फिक्‍स कर दी है. प्रदेश के माइनॉरिटी डिपार्टमेंट की ओर से 8 बिंदुओं में प्रोग्राम भी जारी किया गया है. केंद्र के वक्फ़ संशोधन अधिनियम, 2025 को लागू करने से महीनों तक इंकार करने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने आखिरकार इस कानून को अपने यहां लागू करने पर सहमत हो गई है. अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि राज्य की लगभग 82,000 वक्फ़ संपत्तियों का विवरण 5 दिसंबर की अंतिम तारीख से पहले केंद्र के पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाए. यह कानून इस साल अप्रैल में संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था. बंगाल के अल्पसंख्यक विकास विभाग के सचिव पीबी सलीम ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को पत्र भेजकर कहा कि हर ज़िले की वक्फ़ संपत्तियों की जानकारी तय समय में umeedminority.gov.in पर अपलोड की जाए. राज्य सरकार का यू-टर्न क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक तौर पर घोषणा की थी कि वह इस नए कानून को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने देंगी। अप्रैल में जब यह विधेयक संसद में पारित हुआ था, तब राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। 9 अप्रैल को जैन समुदाय के एक कार्यक्रम में ममता बनर्जी ने कहा था- मैं वक्फ संशोधन अधिनियम को बंगाल में लागू नहीं होने दूंगी। हम 33 प्रतिशत मुसलमानों का राज्य हैं, जो सदियों से यहां रह रहे हैं। उनका संरक्षण करना मेरा कर्तव्य है। लेकिन उसके बाद कानूनी लड़ाई में भी राज्य सरकार को राहत नहीं मिली। अदालत में याचिका दाखिल करने के बावजूद सरकार को अनुकूल फैसला नहीं मिला। अधिनियम की धारा 3B के तहत सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की जानकारी छह महीने के भीतर केंद्रीय पोर्टल पर डालना अनिवार्य है। जिलाधिकारियों को राज्य सरकार का विस्तृत निर्देश राज्य के अल्पसंख्यक विकास विभाग के सचिव पी. बी. सलीम ने जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में एक आठ बिंदु कार्रवाई कार्यक्रम भी जारी किया है, जिसके तहत उम्मीद पोर्टल पर उपलब्ध सुविधा और प्रक्रिया को समझना और मुतवल्लियों, इमामों और मदरसा शिक्षकों के साथ बैठकें/कार्यशालाएं करना भी शामिल है। अधिकारी ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट को भेजे गए पत्र में चार प्राथमिक निर्देश दिए गए हैं। उनसे इमामों, मुअज्जिनों (मस्जिद में प्रति दिन पांच वक्त की नमाज कराने के लिए अजान लगाने वाला) और मदरसा शिक्षकों के साथ बैठकें बुलाने और उन्हें अपलोड करने प्रक्रिया समझाने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारियों को कहा गया है कि पोर्टल में केवल निर्विरोध संपत्तियों को ही दर्ज किया जाए। अधिकारी ने कहा कि सभी जिलों को कहा गया है कि जहां भी तकनीकी सहायता की आवश्यकता हो वहां सुविधा केंद्र स्थापित करें।" उन्होंने कहा कि जिलों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कार्य बिना किसी देरी के हो। केंद्र सरकार ने इस वर्ष की शुरुआत में वक्फ अधिनियम 1995 के कई प्रावधानों में संशोधन किया। हालांकि इनमें से कुछ संशोधन अब भी उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन हैं, लेकिन राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ध्यान दिलाया कि केंद्र के प्रस्तावित परिवर्तनों के कार्यान्वयन पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि राज्य को दी गयी समय-सीमा के भीतर निर्देश का पालन करना होगा। उन्होंने बताया कि संशोधित नियमों के तहत पश्चिम बंगाल में 8,063 वक्फ सम्पत्तियों के मुतवल्लियों (वक्फ की देखभाल करने वालों) को छह दिसंबर तक यूएमआईडी पोर्टल पर अपनी पूरी संपत्ति का विवरण दर्ज कराना होगा। कानून में प्रमुख बदलाव क्या हैं वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 में कुछ बड़े प्रावधान किए गए हैं, जिनमें वक्फ बोर्ड और वक्फ ट्रिब्यूनल में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति और किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित करने को लेकर अंतिम निर्णय सरकार द्वारा लिए जाने का प्रावधान है। इन्हीं प्रावधानों को लेकर पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में विरोध देखने को मिला था। वक्‍फ संशोधन अधिनियम- 2025 को लेकर ममता सरकार के 8 निर्देश -:     वेबसाइट (उम्मीद पोर्टल) को देख लें और उससे परिचित हो जाएं.     संबंधित मुतवल्लियों, इमामों/मदरसा शिक्षकों को शामिल करते हुए बैठकें/कार्यशालाएं आयोजित करें, ताकि वे केंद्रीय पोर्टल पर विवरण जल्द से जल्द अपलोड कर सकें (मुतवल्लियों की एक सूची साझा की जा चुकी है).     डेटा एंट्री दो हिस्सों में की जाएगी: पहला, व्यक्तिगत मुतवल्लियों द्वारा ओटीपी-आधारित प्रारंभिक रजिस्ट्रेशन और दूसरा, वक्फ संपत्ति से जुड़े विवरणों का पंजीकरण.     विवादित वक्फ संपत्तियों को (यदि कोई हों) इस चरण में रजिस्‍टर्ड करने की आवश्यकता नहीं है.     कार्य के लिए अधिकारियों को विशेष रूप से नियुक्त करें और दैनिक प्रगति की निगरानी करें.     राज्य स्तर के दफ्तरों से वरिष्ठ अधिकारियों को अपने-अपने ज़िलों के दौरे पर भेजा जाए.     आठ जिलों में हेल्प डेस्क बनाए जा चुके हैं और बाकी ज़िले भी ऐसे ही हेल्प डेस्क बना सकते हैं.     राज्य वक्फ बोर्ड की ओर से हर दिन दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक वर्चुअल मोड में प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें राज्यभर के सभी दफ्तरों से लोग जुड़ सकते हैं. ममता बनर्जी वक्‍फ संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट भी गई थीं. क्‍यों अहम है यह फैसला? ममता … Read more

बीएलओ की आत्महत्या पर ममता का हमला: ‘एसआईआर से और कितनी जानें जाएंगी?’

कोलकाता पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच एक और बूथ-लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीएलओ के सुसाइड पर चुनाव आयोग की आलोचना की। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "कृष्णानगर में एक और बीएलओ, एक महिला शिक्षक की मौत की खबर सुनकर बहुत सदमा लगा। विधानसभा क्षेत्र छपरा (82) में बीएलओ रिंकू तरफदार ने अपने घर पर आत्महत्या करने से पहले अपने सुसाइड नोट में चुनाव आयोग को दोषी ठहराया है।" इसके बाद, मुख्यमंत्री ने पूछा कि एसआईआर की वजह से पश्चिम बंगाल में और कितनी जानें जाएंगी।  ममता बनर्जी ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "और कितनी जानें जाएंगी? एसआईआर के लिए और कितने लोगों को मरना होगा? इस प्रोसेस के लिए हमें और कितनी लाशें देखनी पड़ेंगी? यह अब सच में बहुत चिंता की बात हो गई है।" दावा है कि नादिया जिले की बूथ-लेवल ऑफिसर (बीएलओ) रिंकू तरफदार ने कथित तौर पर राज्य में एसआईआर से जुड़े काम के दबाव के कारण आत्महत्या की। अपने सुसाइड नोट में रिंकू तरफदार ने कथित तौर पर अपनी चिंता जताई थी कि अगर उन्होंने बीएलओ का काम पूरा नहीं किया तो उन पर प्रशासनिक दबाव आएगा। पुलिस के मुताबिक, महिला बीएलओ ने सुसाइड नोट में कथित तौर पर लिखा था, "मैं प्रेशर नहीं झेल सकती।" इस हफ्ते पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़ी आत्महत्या की यह दूसरी घटना है। इससे पहले जलपाईगुड़ी में शांति मुनि एक्का नाम की एक और महिला बीएलओ ने कथित तौर पर आत्महत्या की थी। यह घटना जलपाईगुड़ी के माल बाजार इलाके में हुई। एक्का की मौत के बाद भी मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की आलोचना की थी। वहीं, परिवार ने आरोप लगाया कि उसने अपनी जान देने का फैसला इसलिए किया, क्योंकि वह एसआईआर के काम का दबाव नहीं झेल पा रही थी।

पश्चिम बंगाल में SIR पर टकराव तेज़: ममता ने ज्ञानेश कुमार को भेजा लेटर, कहा– हालात बिगड़ रहे हैं

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की मौजूदा प्रक्रिया अनियोजित और जबरन तरीके से चलाई जा रही है, जो नागरिकों और अधिकारियों दोनों को जोखिम में डाल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया चिंताजनक और खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि हालात काफी बिगड़ गए हैं और एसआईआर प्रक्रिया को रोक दिया जाना चाहिए।   बनर्जी ने कहा कि उन्होंने जारी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर बार-बार अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं, और अब स्थिति काफी बिगड़ जाने के कारण उन्हें मजबूर होकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) को यह पत्र लिखना पड़ा है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की यह प्रक्रिया लोगों पर “बिना किसी बुनियादी तैयारी या पर्याप्त योजना” के थोपी जा रही है। मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा, “यह प्रक्रिया जिस तरह अधिकारियों और नागरिकों पर थोपी जा रही है, वह न केवल अनियोजित और अव्यवस्थित है, बल्कि खतरनाक भी है। बुनियादी तैयारी, पर्याप्त योजना और स्पष्ट संचार के अभाव ने पहले दिन से ही पूरे अभियान को पंगु बना दिया है।” प्रशिक्षण में गंभीर खामियों, अनिवार्य दस्तावेजों को लेकर अस्पष्टता, और आजीविका के समय मतदाताओं से बूथ-स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के मिलने की “लगभग असंभव” स्थिति की ओर इशारा करते हुए बनर्जी ने कहा कि एसआईआर की पूरी कवायद “संरचनात्मक रूप से कमजोर” हो गयी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर में कुप्रबंधन की “मानवीय कीमत अब असहनीय हो गई है।” उन्होंने जलपाईगुड़ी में बूथ-स्तरीय अधिकारी के रूप में तैनात एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत का हवाला दिया। उन्होंने आत्महत्या की, बताया जा रहा है कि वह एसआईआर से जुड़ी बेहद दबावपूर्ण परिस्थितियों के कारण मानसिक रूप से टूट गई थीं। उन्होंने कहा, “इस प्रक्रिया की शुरुआत के बाद से कई अन्य लोगों ने भी अपनी जान गंवाई है।” बनर्जी ने कहा, “ऐसे हालात में, मैं तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की कड़ी अपील करती हूं और इसकी अपेक्षा भी रखती हूं।” उन्होंने ज्ञानेश कुमार से कहा कि मैं आपसे रिक्वेस्ट करूंगी कि आप इस प्रक्रिया को रोकने के लिए मजबूती से दखल दें और जबरदस्ती के कदम न उठाएं, सही ट्रेनिंग और सपोर्ट दें, और मौजूदा तरीके और टाइमलाइन को अच्छी तरह से फिर से देखें।