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पहलगाम आतंकी हमले पर सियासी संग्राम, ममता बनर्जी ने अमित शाह को बताया ‘दुशासन’

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की चीफ ममता बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा पलटवार किया है और पूछा है कि अगर बंगाल में आतंकी नेटवर्क सक्रिय हैं तो कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमला केंद्र ने करवाया था क्या? उन्होंने सवाल उठाया कि जब केंद्र सरकार दावा करती है कि देश में आतंकवाद पर काबू पा लिया गया है, तो फिर पहलगाम हमला कैसे हुआ। ममता ने यहां तक कह दिया कि क्या यह हमला केंद्र की ओर से कराया गया था। दरअसल, ममता अमित शाह के उस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दे रहीं थीं, जिसमें शाह ने आरोप लगाया था कि चुनावी राज्य में आतंकी नेटवर्क सक्रिय है। बांकुड़ा जिले के बीरसिंहपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तुलना महाभारत के दो पात्रों दुर्योधन और दुशासन से की। उन्होंने कहा, “जैसे ही चुनाव आते हैं, दुर्योधन और दुशासन बंगाल में नजर आने लगते हैं।” ममता बनर्जी का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमित शाह तीन दिन के बंगाल दौरे पर हैं और राज्य में 2026 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी भी 20 दिसंबर को बंगाल आए थे। आतंकवाद को लेकर केंद्र से सवाल अमित शाह द्वारा बंगाल को आतंकियों का अड्डा बताए जाने पर ममता ने पलटवार किया। उन्होंने कहा, “अगर जम्मू-कश्मीर में कोई आतंकी नहीं है, तो पहलगाम में हमला कैसे हुआ? दिल्ली में जो घटना हुई, उसके पीछे कौन था?” बता दें कि इसी साल 22 अप्रैल को दक्षिणी कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने हमला बोल दिया था, जिसमें 26 पर्यटकों की मौत हुई थी। इसके अलावा पिछले महीने नवंबर में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के लाल किले के पास कार बम धमाके में 15 लोगों की जान चली गई थी। मतदाता सूची संशोधन पर भी हमला ममता बनर्जी ने अपने भाषण में राज्य में हो रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर भी केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया के नाम पर राज्यभर में लोगों को परेशान किया जा रहा है। मुख्यमंत्री का दावा है कि SIR के तहत करीब 1.5 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की तैयारी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इसमें राजबंशी, मतुआ और आदिवासी समुदायों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के कारण लगभग 60 लोगों की मौत हो चुकी है। EC का करेंगे घेराव बनर्जी ने कहा कि यदि मतदाता सूची से किसी एक भी वैध मतदाता का नाम हटाया गया तो तृणमूल कांग्रेस दिल्ली में निर्वाचन आयोग के कार्यालय का घेराव करेगी। बनर्जी ने कहा कि एसआईआर के नाम पर राज्य के लोगों को ‘‘प्रताड़ित’’ किया जा रहा है। बुजुर्गों को दस्तावेज सत्यापन की सुनवाई के लिए बुलाया जा रहा है।’’ बनर्जी ने कहा कि राज्य के लोग इस तरह के ‘‘उत्पीड़न’’ को बर्दाश्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, ‘‘लोग भाजपा को पश्चिम बंगाल में सत्ता में नहीं आने देंगे।’’ भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला बोलने वालों की पिटाई की जाती है बनर्जी ने कहा कि भाजपा चुनाव नजदीक आते ही ‘सोनार बांग्ला’ बनाने का वादा करती है, लेकिन हकीकत में जिन राज्यों में वह सत्ता में है वहां बांग्ला बोलने वालों की पिटाई की जाती है। ममता ने कहा कि SIR को AI के जरिए किया जा रहा है, यह एक बड़ा घोटाला है। आखिर में सिर्फ आप (अमित शाह) और आपका बेटा ही बचेंगे। ममता बनर्जी के इस बयान से एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकार के बीच टकराव तेज हो गया है, और आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक माहौल और गरमाने की संभावना है। 

बंगाली मजदूरों पर कथित उत्पीड़न को लेकर ममता बनर्जी का केंद्र और भाजपा शासित राज्यों पर तीखा हमला

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा शासित राज्यों में बंगाली भाषी लोगों के साथ हो रहे कथित अत्याचारों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाली बोलने वाले प्रवासी मजदूरों और उनके परिवारों पर हो रहे हमलों और परेशानियों की वह निंदा करती हैं। साथ ही, ममता सरकार दबे-कुचले, डरे-सहमे और परेशान बंगाली भाषी प्रवासी परिवारों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। सीएम ममता बनर्जी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, "हम भाजपा शासित हर राज्य में बंगाली बोलने वाले लोगों पर हुए क्रूर अत्याचार और परेशानी की कड़ी निंदा करते हैं। हम दबे-कुचले, डरे-सहमे और परेशान बंगाली बोलने वाले प्रवासी परिवारों के साथ खड़े हैं, हम उन परिवारों को हर मुमकिन मदद देंगे।  इंसान की जान की कोई कीमत नहीं होती, लेकिन अगर मौत होती है, तो हमने पैसे का मुआवजा देने का वादा किया है।" ओडिशा में हुई हालिया घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि हाल ही में भाजपा शासित राज्य ओडिशा में जंगीपुर इलाके के कुछ प्रवासी मजदूरों पर कई तरह के अत्याचार हुए हैं। यह बहुत दुख की बात है कि 24 दिसंबर को जंगीपुर के सुती इलाके के एक युवा प्रवासी मजदूर की संबलपुर में पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मुर्शिदाबाद में प्रवासी मजदूर डर के मारे ओडिशा से घर लौट रहे हैं। इस दिल दहला देने वाली घटना में, हम पीड़ित परिवारों के साथ खड़े हैं, और मृतक के परिवार को हमारी तरफ से आर्थिक मदद भी उन तक पहुंचेगी। सीएम ममता ने एक्स पोस्ट में आगे लिखा, "भाजपा शासित राज्यों में हुई इन सभी घटनाओं में हम दोषियों की निंदा करते हैं और पीड़ितों को हर मुमकिन मदद का वादा करते हैं। बंगाली बोलना कोई जुर्म नहीं हो सकता।" मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल पुलिस ने ज्वेल राणा की मौत के मामले में सुती पुलिस स्टेशन में पहले ही जीरो FIR दर्ज कर ली है और 6 लोगों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया गया है। मेरी राज्य पुलिस टीम जांच के लिए ओडिशा गई है।

मेस्सी के नाम पर मचा बवाल: ममता बनर्जी ने जताया खेद, कोलकाता स्टेडियम घटना की जांच के निर्देश

कोलकाता  लियोनेल मेस्सी के भारत पहुंचने से पहले ही फुटबॉल प्रेमियों पर उनका खुमार चढ़ गया। वहीं शनिवार को उनकी एक झलक पाने के लिए कोलकाता के युवा भारती क्रीड़ांगन में बड़ी संख्या में फैन इकट्ठा हुए। मेस्सी के आते ही थोड़ी देर में वहां बवाल शुरू हो गया। लोग बोतल फेंकने लगे और कुर्सियों पर खड़े हो गए। इसके बाद आपस में ही मारपीट और तोड़फोड़ शुरू हो गई। दुनिया के सबसे लोकप्रिय फुटबॉल खिलाड़ी की झलक नहीं देखने पर नाराज प्रशंसकों ने सुरक्षा नियमों का उल्लंघन किया और मैदान में घुस गए। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस कुप्रबंधन पर हैरानी जताई है और इस बवाल की जांच के आदेश दे दिए हैं। ममता बनर्जी ने लियोनेल मेस्सी और उनके फैन्स से इस उपद्रव के लिए माफी मांगी है।   बनर्जी ने कहा, साल्ट लेक स्टेडियम में हुए उपद्रव से मैं बहुत दुखी और हैरान हूं। मैं लियोनेल मेस्सी और उनके फैन्स से माफी मांगती हूं। बता दें कि ममता बनर्जी इस कार्यक्रम में शामिल होने जा रही रही थीं। वह रास्ते में ही थीं तब तक स्डेडियम में बवाल शुरू हो गया। ‘सिटी ऑफ जॉय’ में फुटबॉल प्रशंसकों के लिए जो दिन यादगार होना चाहिए था, वह एक बुरे सपने में बदल गया। स्टेडियम के अंदर अव्यवस्था के चलते मेस्सी की मौजूदगी से अधिक अफरा-तफरी मची रही। मेस्सी के मैदान में आते ही स्थिति बेकाबू हो गई। अराजकता के कारण कार्यक्रम को बीच में ही रोक दिया गया। जिससे स्टेडियम में इस कार्यक्रम के लिए मौजूद बॉलीवुड सुपरस्टार शाहरुख खान, भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की इस दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी से मुलाकात नहीं हो सकी। सॉल्ट लेक स्टेडियम राजनीतिक दांव-पेच का अड्डा बन गया और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के समर्थक सुरक्षा घेरा तोड़कर मैदान में घुस आए थे। हालात इतने बिगड़ गए कि ‘जीओएटी टूर’ के आयोजक शतद्रु दत्ता और सुरक्षाकर्मियों को मेस्सी को स्टेडियम से सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा। अर्जेंटीना के इस स्टार खिलाड़ी को देखने के लिए 4,500 से 10,000 रुपये तक के टिकट खरीदने वाले प्रशंसकों ने निराशा में बोतलें फेंकी और सीटों को तोड़ दिया। इसके स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को काफी मशक्कत करनी पड़ी। अजय शाह नाम के एक नाराज प्रशंसक ने कहा, ‘‘ यहां एक गिलास कोल्ड ड्रिंक की कीमत 150-200 रुपये है, फिर भी हमें मेस्सी की एक झलक भी नहीं मिली। लोग उन्हें देखने के लिए अपनी एक महीने की तनख्वाह खर्च कर चुके हैं। मैंने टिकट के लिए 5000 रुपये दिए और अपने बेटे के साथ मेस्सी को देखने आया था, नेताओं को नहीं। पुलिस और सैन्यकर्मी सेल्फी ले रहे थे और इसके लिए प्रबंधन जिम्मेदार है। पीने का पानी तक उपलब्ध नहीं था।’  

बंगाल में बड़ा यू-टर्न! महीनों की ना के बाद ममता दीदी ने मंजूर किया नया वक्फ कानून, चुनाव से पहले रणनीति?

कोलकाता केंद्र के नए वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 को महीनों तक टालने के बाद, पश्चिम बंगाल सरकार ने आखिरकार इस कानून को स्वीकार कर लिया है। राज्य सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राज्य की करीब 82000 वक्फ संपत्तियों का विवरण निर्धारित समयसीमा 6 दिसंबर 2025 तक केंद्रीय पोर्टल (umeedminority.gov.in) पर अपलोड कर दिया जाए। यह जानकारी राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुवार देर शाम दी। सूत्रों ने बताया कि केंद्र ने राज्यों से छह दिसंबर तक सभी अविवादित वक्फ संपत्तियों की जानकारी अपलोड करने को कहा है, जिसके कारण राज्य प्रशासन ने तुरंत डेटा-एंट्री प्रक्रिया शुरू करने के लिए कदम उठाए हैं। उन्‍होंने कई मौकों पर कहा था कि वे इस संशोधित कानून को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने देंगी. अब उनका रुख इस कानून को लेकर बदल गया है. ममता सरकार ने वक्‍फ संशोधन कानून-2025 को बंगाल में लागू करने को लेकर दिशा-न‍िर्देश जारी किए हैं. वक्‍फ संपत्तियों को केंद्रीय पोर्टल (umeedminority.gov.in) पर अपलोड करने को लेकर डेडलाइन भी फिक्‍स कर दी है. प्रदेश के माइनॉरिटी डिपार्टमेंट की ओर से 8 बिंदुओं में प्रोग्राम भी जारी किया गया है. केंद्र के वक्फ़ संशोधन अधिनियम, 2025 को लागू करने से महीनों तक इंकार करने के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने आखिरकार इस कानून को अपने यहां लागू करने पर सहमत हो गई है. अधिकारियों के अनुसार, राज्य सरकार ने सभी जिलों को निर्देश दिया है कि राज्य की लगभग 82,000 वक्फ़ संपत्तियों का विवरण 5 दिसंबर की अंतिम तारीख से पहले केंद्र के पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाए. यह कानून इस साल अप्रैल में संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ था. बंगाल के अल्पसंख्यक विकास विभाग के सचिव पीबी सलीम ने सभी जिला मजिस्ट्रेटों को पत्र भेजकर कहा कि हर ज़िले की वक्फ़ संपत्तियों की जानकारी तय समय में umeedminority.gov.in पर अपलोड की जाए. राज्य सरकार का यू-टर्न क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है क्योंकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक तौर पर घोषणा की थी कि वह इस नए कानून को पश्चिम बंगाल में लागू नहीं होने देंगी। अप्रैल में जब यह विधेयक संसद में पारित हुआ था, तब राज्य में व्यापक विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। 9 अप्रैल को जैन समुदाय के एक कार्यक्रम में ममता बनर्जी ने कहा था- मैं वक्फ संशोधन अधिनियम को बंगाल में लागू नहीं होने दूंगी। हम 33 प्रतिशत मुसलमानों का राज्य हैं, जो सदियों से यहां रह रहे हैं। उनका संरक्षण करना मेरा कर्तव्य है। लेकिन उसके बाद कानूनी लड़ाई में भी राज्य सरकार को राहत नहीं मिली। अदालत में याचिका दाखिल करने के बावजूद सरकार को अनुकूल फैसला नहीं मिला। अधिनियम की धारा 3B के तहत सभी पंजीकृत वक्फ संपत्तियों की जानकारी छह महीने के भीतर केंद्रीय पोर्टल पर डालना अनिवार्य है। जिलाधिकारियों को राज्य सरकार का विस्तृत निर्देश राज्य के अल्पसंख्यक विकास विभाग के सचिव पी. बी. सलीम ने जिलाधिकारियों को भेजे पत्र में एक आठ बिंदु कार्रवाई कार्यक्रम भी जारी किया है, जिसके तहत उम्मीद पोर्टल पर उपलब्ध सुविधा और प्रक्रिया को समझना और मुतवल्लियों, इमामों और मदरसा शिक्षकों के साथ बैठकें/कार्यशालाएं करना भी शामिल है। अधिकारी ने बताया कि जिला मजिस्ट्रेट को भेजे गए पत्र में चार प्राथमिक निर्देश दिए गए हैं। उनसे इमामों, मुअज्जिनों (मस्जिद में प्रति दिन पांच वक्त की नमाज कराने के लिए अजान लगाने वाला) और मदरसा शिक्षकों के साथ बैठकें बुलाने और उन्हें अपलोड करने प्रक्रिया समझाने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि जिलाधिकारियों को कहा गया है कि पोर्टल में केवल निर्विरोध संपत्तियों को ही दर्ज किया जाए। अधिकारी ने कहा कि सभी जिलों को कहा गया है कि जहां भी तकनीकी सहायता की आवश्यकता हो वहां सुविधा केंद्र स्थापित करें।" उन्होंने कहा कि जिलों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि कार्य बिना किसी देरी के हो। केंद्र सरकार ने इस वर्ष की शुरुआत में वक्फ अधिनियम 1995 के कई प्रावधानों में संशोधन किया। हालांकि इनमें से कुछ संशोधन अब भी उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन हैं, लेकिन राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ध्यान दिलाया कि केंद्र के प्रस्तावित परिवर्तनों के कार्यान्वयन पर कोई रोक नहीं है। उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि राज्य को दी गयी समय-सीमा के भीतर निर्देश का पालन करना होगा। उन्होंने बताया कि संशोधित नियमों के तहत पश्चिम बंगाल में 8,063 वक्फ सम्पत्तियों के मुतवल्लियों (वक्फ की देखभाल करने वालों) को छह दिसंबर तक यूएमआईडी पोर्टल पर अपनी पूरी संपत्ति का विवरण दर्ज कराना होगा। कानून में प्रमुख बदलाव क्या हैं वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 में कुछ बड़े प्रावधान किए गए हैं, जिनमें वक्फ बोर्ड और वक्फ ट्रिब्यूनल में गैर-मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति और किसी भी संपत्ति को वक्फ घोषित करने को लेकर अंतिम निर्णय सरकार द्वारा लिए जाने का प्रावधान है। इन्हीं प्रावधानों को लेकर पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में विरोध देखने को मिला था। वक्‍फ संशोधन अधिनियम- 2025 को लेकर ममता सरकार के 8 निर्देश -:     वेबसाइट (उम्मीद पोर्टल) को देख लें और उससे परिचित हो जाएं.     संबंधित मुतवल्लियों, इमामों/मदरसा शिक्षकों को शामिल करते हुए बैठकें/कार्यशालाएं आयोजित करें, ताकि वे केंद्रीय पोर्टल पर विवरण जल्द से जल्द अपलोड कर सकें (मुतवल्लियों की एक सूची साझा की जा चुकी है).     डेटा एंट्री दो हिस्सों में की जाएगी: पहला, व्यक्तिगत मुतवल्लियों द्वारा ओटीपी-आधारित प्रारंभिक रजिस्ट्रेशन और दूसरा, वक्फ संपत्ति से जुड़े विवरणों का पंजीकरण.     विवादित वक्फ संपत्तियों को (यदि कोई हों) इस चरण में रजिस्‍टर्ड करने की आवश्यकता नहीं है.     कार्य के लिए अधिकारियों को विशेष रूप से नियुक्त करें और दैनिक प्रगति की निगरानी करें.     राज्य स्तर के दफ्तरों से वरिष्ठ अधिकारियों को अपने-अपने ज़िलों के दौरे पर भेजा जाए.     आठ जिलों में हेल्प डेस्क बनाए जा चुके हैं और बाकी ज़िले भी ऐसे ही हेल्प डेस्क बना सकते हैं.     राज्य वक्फ बोर्ड की ओर से हर दिन दोपहर 2 बजे से 4 बजे तक वर्चुअल मोड में प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें राज्यभर के सभी दफ्तरों से लोग जुड़ सकते हैं. ममता बनर्जी वक्‍फ संशोधन कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट भी गई थीं. क्‍यों अहम है यह फैसला? ममता … Read more

बीएलओ की आत्महत्या पर ममता का हमला: ‘एसआईआर से और कितनी जानें जाएंगी?’

कोलकाता पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बीच एक और बूथ-लेवल ऑफिसर (बीएलओ) की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीएलओ के सुसाइड पर चुनाव आयोग की आलोचना की। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "कृष्णानगर में एक और बीएलओ, एक महिला शिक्षक की मौत की खबर सुनकर बहुत सदमा लगा। विधानसभा क्षेत्र छपरा (82) में बीएलओ रिंकू तरफदार ने अपने घर पर आत्महत्या करने से पहले अपने सुसाइड नोट में चुनाव आयोग को दोषी ठहराया है।" इसके बाद, मुख्यमंत्री ने पूछा कि एसआईआर की वजह से पश्चिम बंगाल में और कितनी जानें जाएंगी।  ममता बनर्जी ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "और कितनी जानें जाएंगी? एसआईआर के लिए और कितने लोगों को मरना होगा? इस प्रोसेस के लिए हमें और कितनी लाशें देखनी पड़ेंगी? यह अब सच में बहुत चिंता की बात हो गई है।" दावा है कि नादिया जिले की बूथ-लेवल ऑफिसर (बीएलओ) रिंकू तरफदार ने कथित तौर पर राज्य में एसआईआर से जुड़े काम के दबाव के कारण आत्महत्या की। अपने सुसाइड नोट में रिंकू तरफदार ने कथित तौर पर अपनी चिंता जताई थी कि अगर उन्होंने बीएलओ का काम पूरा नहीं किया तो उन पर प्रशासनिक दबाव आएगा। पुलिस के मुताबिक, महिला बीएलओ ने सुसाइड नोट में कथित तौर पर लिखा था, "मैं प्रेशर नहीं झेल सकती।" इस हफ्ते पश्चिम बंगाल में एसआईआर से जुड़ी आत्महत्या की यह दूसरी घटना है। इससे पहले जलपाईगुड़ी में शांति मुनि एक्का नाम की एक और महिला बीएलओ ने कथित तौर पर आत्महत्या की थी। यह घटना जलपाईगुड़ी के माल बाजार इलाके में हुई। एक्का की मौत के बाद भी मुख्यमंत्री ने चुनाव आयोग की आलोचना की थी। वहीं, परिवार ने आरोप लगाया कि उसने अपनी जान देने का फैसला इसलिए किया, क्योंकि वह एसआईआर के काम का दबाव नहीं झेल पा रही थी।

पश्चिम बंगाल में SIR पर टकराव तेज़: ममता ने ज्ञानेश कुमार को भेजा लेटर, कहा– हालात बिगड़ रहे हैं

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर आरोप लगाया कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की मौजूदा प्रक्रिया अनियोजित और जबरन तरीके से चलाई जा रही है, जो नागरिकों और अधिकारियों दोनों को जोखिम में डाल रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया चिंताजनक और खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि हालात काफी बिगड़ गए हैं और एसआईआर प्रक्रिया को रोक दिया जाना चाहिए।   बनर्जी ने कहा कि उन्होंने जारी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर बार-बार अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं, और अब स्थिति काफी बिगड़ जाने के कारण उन्हें मजबूर होकर मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) को यह पत्र लिखना पड़ा है। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण की यह प्रक्रिया लोगों पर “बिना किसी बुनियादी तैयारी या पर्याप्त योजना” के थोपी जा रही है। मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा, “यह प्रक्रिया जिस तरह अधिकारियों और नागरिकों पर थोपी जा रही है, वह न केवल अनियोजित और अव्यवस्थित है, बल्कि खतरनाक भी है। बुनियादी तैयारी, पर्याप्त योजना और स्पष्ट संचार के अभाव ने पहले दिन से ही पूरे अभियान को पंगु बना दिया है।” प्रशिक्षण में गंभीर खामियों, अनिवार्य दस्तावेजों को लेकर अस्पष्टता, और आजीविका के समय मतदाताओं से बूथ-स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) के मिलने की “लगभग असंभव” स्थिति की ओर इशारा करते हुए बनर्जी ने कहा कि एसआईआर की पूरी कवायद “संरचनात्मक रूप से कमजोर” हो गयी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एसआईआर में कुप्रबंधन की “मानवीय कीमत अब असहनीय हो गई है।” उन्होंने जलपाईगुड़ी में बूथ-स्तरीय अधिकारी के रूप में तैनात एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की मौत का हवाला दिया। उन्होंने आत्महत्या की, बताया जा रहा है कि वह एसआईआर से जुड़ी बेहद दबावपूर्ण परिस्थितियों के कारण मानसिक रूप से टूट गई थीं। उन्होंने कहा, “इस प्रक्रिया की शुरुआत के बाद से कई अन्य लोगों ने भी अपनी जान गंवाई है।” बनर्जी ने कहा, “ऐसे हालात में, मैं तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई की कड़ी अपील करती हूं और इसकी अपेक्षा भी रखती हूं।” उन्होंने ज्ञानेश कुमार से कहा कि मैं आपसे रिक्वेस्ट करूंगी कि आप इस प्रक्रिया को रोकने के लिए मजबूती से दखल दें और जबरदस्ती के कदम न उठाएं, सही ट्रेनिंग और सपोर्ट दें, और मौजूदा तरीके और टाइमलाइन को अच्छी तरह से फिर से देखें।  

बंगाल की बेटी ऋचा घोष को बड़ा सम्मान: सिलीगुड़ी में बनेगा उनके नाम का स्टेडियम

सिलीगुड़ी भारतीय महिला टीम की स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक और तोहफा दिया है। उन्होंने एलान किया है कि सिलीगुढ़ी में युवा खिलाड़ी के नाम पर स्टेडियम बनेगा। इससे पहले सीएम ने शनिवार (8 नवंबर) को उन्हें बंगभूषण सम्मान और बंगाल पुलिस में डीएसपी का नियुक्ति पत्र देकर सम्मानित किया था।  बता दें कि, भारतीय महिला टीम ने रविवार (2 नवंबर) को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 52 रनों से फाइनल में जीत हासिल कर पहली बार महिला वनडे विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। फाइनल में चमकीं थीं ऋचा फाइनल मुकाबले में ऋचा घोष ने 24 गेंदों में तीन चौके और दो छक्के की मदद से 34 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली थी। महिला वनडे विश्व कप 2025 में 22 वर्षीय बल्लेबाज ने शानदार प्रदर्शन किया और एक अर्धशतक की मदद से 235 रन बनाए। इस दौरान उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 94 रनों का रहा। दाएं हाथ की बल्लेबाज को उनके अहम योगदान के लिए बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) ने 34 लाख रुपये और सोने के बल्ला और गेंद का रेप्लिका (प्रतिकृति) देकर सम्मानित किया। दो बार चूके, अब पार की आखिरी बाधा एक तरफ जहां दक्षिण अफ्रीका का यह महिला विश्व कप का पहला फाइनल था, वहीं भारतीय टीम तीसरी बार खिताबी मुकाबले में पहुंची थी। भारतीय टीम इससे पहले मिताली राज की अगुआई में 2005 और 2017 में विश्व कप के फाइनल में पहुंच चुकी थी। साल 2005 में दक्षिण अफ्रीका में खेले गए विश्व कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 98 रन से हराया था, जबकि 2017 में इंग्लैंड ने घरेलू सरजमीं पर रोमांचक फाइनल में भारत पर नौ रन से जीत दर्ज की की थी। भारतीय टीम दो बार खिताब के करीब आकर इससे चूक गई थी, लेकिन अब वह आखिरी बाधा पार करने में सफल रही है।  

गोरखा विवाद पर ममता का गुस्सा: पीएम को भेजा विरोध पत्र

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार के हालिया फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है दार्जिलिंग हिल्स, तराई और डुआर्स क्षेत्र में गोरखा समुदाय से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए केंद्र द्वारा एक 'मध्यस्थ' की नियुक्ति राज्य सरकार से परामर्श के बिना की गई है, जो संघीय सहयोग की भावना के विपरीत है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा, "मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि भारत सरकार ने पंकज कुमार सिंह, आईपीएस (सेवानिवृत्त) को गोरखा मुद्दों पर बातचीत के लिए मध्यस्थ नियुक्त किया है। यह निर्णय पश्चिम बंगाल सरकार से किसी भी प्रकार की चर्चा या परामर्श किए बिना लिया गया है, जबकि यह पूरा मामला राज्य प्रशासन, शांति और दार्जिलिंग की गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के सुशासन से सीधे तौर पर जुड़ा है।" ममता बनर्जी ने पत्र में यह भी याद दिलाया कि गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) की स्थापना 18 जुलाई 2011 को दार्जिलिंग में हुए त्रिपक्षीय समझौते के बाद हुई थी, जिसमें भारत सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के बीच समझौता हुआ था। यह समझौता उस समय के केंद्रीय गृहमंत्री और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति में हुआ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीटीए का गठन गोरखा समुदाय की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और भाषाई प्रगति सुनिश्चित करने और पहाड़ी इलाकों की शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की भावना को बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में राज्य सरकार के लगातार प्रयासों से दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों में शांति और सद्भाव का माहौल कायम हुआ है। ममता बनर्जी ने पत्र में प्रधानमंत्री को कहा कि इस तरह का एकतरफा निर्णय इस नाजुक क्षेत्र की शांति के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल सरकार का दृढ़ मत है कि गोरखा समुदाय या जीटीए क्षेत्र से जुड़ी किसी भी पहल को राज्य सरकार से पूरी चर्चा के बाद ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए। बिना परामर्श के उठाया गया कोई भी कदम इस क्षेत्र में शांति और सौहार्द को प्रभावित कर सकता है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र के अंत में प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि इस नियुक्ति आदेश पर पुनर्विचार कर उसे रद्द किया जाए, ताकि केंद्र और राज्य के बीच आपसी सम्मान और संघीय भावना बनी रहे। उन्होंने अंत में प्रधानमंत्री को दीपावली की शुभकामनाएं भी दीं और कहा, "हम सभी को शांति, सहयोग और संवैधानिक भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।"

बाढ़ की जिम्मेदारी भूटान पर, ममता बनर्जी ने मुआवजे की मांग की

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को दावा किया कि पड़ोसी देश भूटान से बहकर आने वाले पानी के कारण उत्तर बंगाल में बाढ़ आयी और उन्होंने भूटान से मुआवजे की मांग की। राहत एवं पुनर्वास कार्यों का निरीक्षण करने के लिए प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर रही मुख्यमंत्री बनर्जी ने जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा में कहा कि भूटान से विभिन्न नदियों के माध्यम से बहकर आने वाले वर्षा जल के कारण यह क्षति हुई है। बनर्जी ने एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा, ‘‘भूटान से आने वाले पानी के कारण हमें नुकसान हुआ है हम चाहते हैं कि वे हमें मुआवजा दें।" उन्होंने कहा, ‘‘मैं पिछले कुछ समय से भारत-भूटान संयुक्त नदी आयोग के गठन पर जोर दे रही हूं और मेरी मांग है कि पश्चिम बंगाल को भी इसका हिस्सा बनाया जाए। हमारे दबाव में इस महीने की 16 तारीख को एक बैठक होनी है और हमारे अधिकारी उसमें शामिल होंगे।'' उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने राज्य को आपदाओं से निपटने के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता से वंचित रखा है। बनर्जी ने जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा के बामनडांगा क्षेत्र में कई राहत शिविरों का दौरा किया, जो चार अक्टूबर को हुई भारी बारिश के कारण सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। इससे इस क्षेत्र में बाढ़ आ गई थी और दार्जिलिंग तथा उसके निचले इलाकों के ऊपरी इलाकों में जान-माल की व्यापक क्षति हुई थी। पश्चिम बंगाल के उत्तरी जिलों में भूस्खलन और बाढ़ में कम से कम 32 लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं। प्राकृतिक आपदा के बाद बनर्जी उत्तर बंगाल के अपने दूसरे दौरे पर हैं। वह शुक्रवार तक वहां रहेंगी। राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री बनर्जी पांच अक्टूबर से चार दिनों के लिए उत्तर बंगाल में थीं।    

केंद्र सरकार को घेरा ममता ने, बोली- अमेरिका और चीन के सामने रही कमजोर

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने विदेशी ताकतों के सामने भारत की प्रतिष्ठा को बेच दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ‘‘कभी अमेरिका के सामने तो कभी चीन के सामने भीख मांग रही है''। अन्य राज्यों में बंगाली प्रवासियों पर हमलों से संबंधित सरकारी संकल्प पर राज्य विधानसभा में चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की ‘‘तानाशाही मानसिकता'' है। भाजपा ‘‘पश्चिम बंगाल को अपना उपनिवेश बनाना'' चाहती है। बनर्जी ने जैसे ही इस संकल्प पर बोलना शुरू किया तो हंगामा होने लगा। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा ने विदेशी ताकतों के सामने भारत की प्रतिष्ठा बेच दी है। केंद्र सरकार कभी चीन के सामने गिड़गिड़ा रही है, तो कभी अमेरिका के सामने। वे देश नहीं चला सकते, राष्ट्र के हितों की रक्षा नहीं कर सकते, फिर भी हमें उपदेश देने की हिम्मत रखते हैं।'' मुख्यमंत्री ने भाजपा पर भाजपा शासित राज्यों में बंगाली प्रवासी श्रमिकों पर कथित हमलों पर चर्चा को रोकने का भी आरोप लगाया। बनर्जी ने दावा किया, ‘‘भाजपा बंगाली प्रवासियों पर हमलों को लेकर चर्चा के खिलाफ क्यों है? ऐसा इसलिए है… क्योंकि ये घटनाएं पार्टी शासित राज्यों में हो रही हैं। वे सच्चाई को दबाना चाहते हैं।'' 'भाजपा स्पष्ट रूप से बांग्ला विरोधी है…' सदन में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्षी पार्टी की नारेबाजी के बीच अपनी बात कहने की कोशिश करते हुए बनर्जी ने पूछा, ‘‘भाजपा मुझे इस सदन में बोलने क्यों नहीं दे रही है?'' उन्होंने कहा, ‘‘हम हिंदी या किसी अन्य भाषा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भाजपा स्पष्ट रूप से बांग्ला विरोधी है। उनका रवैया औपनिवेशिक और तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। वे पश्चिम बंगाल को अपना उपनिवेश बनाना चाहते हैं।'' भाजपा तानाशाहों की पार्टी है- ममता बनर्जी ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा के ‘‘वैचारिक पूर्वजों'' ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश के साथ विश्वासघात किया था। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा तानाशाहों की पार्टी है। उनके पूर्वजों ने भारत की आजादी के लिए लड़ाई नहीं लड़ी, उन्होंने देश के साथ विश्वासघात किया।'' नोकझोंक बढ़ने पर, सत्ता पक्ष के कुछ विधायक विपक्षी दलों की ओर दौड़ पड़े, जिससे मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। हंगामे की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री को अपना भाषण कुछ देर के लिए रोकना पड़ा।