samacharsecretary.com

बंगाल की बेटी ऋचा घोष को बड़ा सम्मान: सिलीगुड़ी में बनेगा उनके नाम का स्टेडियम

सिलीगुड़ी भारतीय महिला टीम की स्टार विकेटकीपर बल्लेबाज ऋचा घोष को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक और तोहफा दिया है। उन्होंने एलान किया है कि सिलीगुढ़ी में युवा खिलाड़ी के नाम पर स्टेडियम बनेगा। इससे पहले सीएम ने शनिवार (8 नवंबर) को उन्हें बंगभूषण सम्मान और बंगाल पुलिस में डीएसपी का नियुक्ति पत्र देकर सम्मानित किया था।  बता दें कि, भारतीय महिला टीम ने रविवार (2 नवंबर) को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 52 रनों से फाइनल में जीत हासिल कर पहली बार महिला वनडे विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था। फाइनल में चमकीं थीं ऋचा फाइनल मुकाबले में ऋचा घोष ने 24 गेंदों में तीन चौके और दो छक्के की मदद से 34 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली थी। महिला वनडे विश्व कप 2025 में 22 वर्षीय बल्लेबाज ने शानदार प्रदर्शन किया और एक अर्धशतक की मदद से 235 रन बनाए। इस दौरान उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 94 रनों का रहा। दाएं हाथ की बल्लेबाज को उनके अहम योगदान के लिए बंगाल क्रिकेट संघ (कैब) ने 34 लाख रुपये और सोने के बल्ला और गेंद का रेप्लिका (प्रतिकृति) देकर सम्मानित किया। दो बार चूके, अब पार की आखिरी बाधा एक तरफ जहां दक्षिण अफ्रीका का यह महिला विश्व कप का पहला फाइनल था, वहीं भारतीय टीम तीसरी बार खिताबी मुकाबले में पहुंची थी। भारतीय टीम इससे पहले मिताली राज की अगुआई में 2005 और 2017 में विश्व कप के फाइनल में पहुंच चुकी थी। साल 2005 में दक्षिण अफ्रीका में खेले गए विश्व कप के फाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 98 रन से हराया था, जबकि 2017 में इंग्लैंड ने घरेलू सरजमीं पर रोमांचक फाइनल में भारत पर नौ रन से जीत दर्ज की की थी। भारतीय टीम दो बार खिताब के करीब आकर इससे चूक गई थी, लेकिन अब वह आखिरी बाधा पार करने में सफल रही है।  

गोरखा विवाद पर ममता का गुस्सा: पीएम को भेजा विरोध पत्र

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार के हालिया फैसले पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा है दार्जिलिंग हिल्स, तराई और डुआर्स क्षेत्र में गोरखा समुदाय से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए केंद्र द्वारा एक 'मध्यस्थ' की नियुक्ति राज्य सरकार से परामर्श के बिना की गई है, जो संघीय सहयोग की भावना के विपरीत है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा, "मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि भारत सरकार ने पंकज कुमार सिंह, आईपीएस (सेवानिवृत्त) को गोरखा मुद्दों पर बातचीत के लिए मध्यस्थ नियुक्त किया है। यह निर्णय पश्चिम बंगाल सरकार से किसी भी प्रकार की चर्चा या परामर्श किए बिना लिया गया है, जबकि यह पूरा मामला राज्य प्रशासन, शांति और दार्जिलिंग की गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) के सुशासन से सीधे तौर पर जुड़ा है।" ममता बनर्जी ने पत्र में यह भी याद दिलाया कि गोरखालैंड टेरिटोरियल एडमिनिस्ट्रेशन (जीटीए) की स्थापना 18 जुलाई 2011 को दार्जिलिंग में हुए त्रिपक्षीय समझौते के बाद हुई थी, जिसमें भारत सरकार, पश्चिम बंगाल सरकार और गोरखा जनमुक्ति मोर्चा (जीजेएम) के बीच समझौता हुआ था। यह समझौता उस समय के केंद्रीय गृहमंत्री और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उपस्थिति में हुआ था। मुख्यमंत्री ने कहा कि जीटीए का गठन गोरखा समुदाय की सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, सांस्कृतिक और भाषाई प्रगति सुनिश्चित करने और पहाड़ी इलाकों की शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की भावना को बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया था। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में राज्य सरकार के लगातार प्रयासों से दार्जिलिंग और आसपास के पहाड़ी इलाकों में शांति और सद्भाव का माहौल कायम हुआ है। ममता बनर्जी ने पत्र में प्रधानमंत्री को कहा कि इस तरह का एकतरफा निर्णय इस नाजुक क्षेत्र की शांति के लिए खतरा बन सकता है। उन्होंने कहा, "पश्चिम बंगाल सरकार का दृढ़ मत है कि गोरखा समुदाय या जीटीए क्षेत्र से जुड़ी किसी भी पहल को राज्य सरकार से पूरी चर्चा के बाद ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए। बिना परामर्श के उठाया गया कोई भी कदम इस क्षेत्र में शांति और सौहार्द को प्रभावित कर सकता है। मुख्यमंत्री ने अपने पत्र के अंत में प्रधानमंत्री मोदी से आग्रह किया कि इस नियुक्ति आदेश पर पुनर्विचार कर उसे रद्द किया जाए, ताकि केंद्र और राज्य के बीच आपसी सम्मान और संघीय भावना बनी रहे। उन्होंने अंत में प्रधानमंत्री को दीपावली की शुभकामनाएं भी दीं और कहा, "हम सभी को शांति, सहयोग और संवैधानिक भावना के साथ आगे बढ़ना चाहिए।"

बाढ़ की जिम्मेदारी भूटान पर, ममता बनर्जी ने मुआवजे की मांग की

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को दावा किया कि पड़ोसी देश भूटान से बहकर आने वाले पानी के कारण उत्तर बंगाल में बाढ़ आयी और उन्होंने भूटान से मुआवजे की मांग की। राहत एवं पुनर्वास कार्यों का निरीक्षण करने के लिए प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर रही मुख्यमंत्री बनर्जी ने जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा में कहा कि भूटान से विभिन्न नदियों के माध्यम से बहकर आने वाले वर्षा जल के कारण यह क्षति हुई है। बनर्जी ने एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान अपने संक्षिप्त संबोधन में कहा, ‘‘भूटान से आने वाले पानी के कारण हमें नुकसान हुआ है हम चाहते हैं कि वे हमें मुआवजा दें।" उन्होंने कहा, ‘‘मैं पिछले कुछ समय से भारत-भूटान संयुक्त नदी आयोग के गठन पर जोर दे रही हूं और मेरी मांग है कि पश्चिम बंगाल को भी इसका हिस्सा बनाया जाए। हमारे दबाव में इस महीने की 16 तारीख को एक बैठक होनी है और हमारे अधिकारी उसमें शामिल होंगे।'' उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र ने राज्य को आपदाओं से निपटने के लिए मिलने वाली आर्थिक सहायता से वंचित रखा है। बनर्जी ने जलपाईगुड़ी जिले के नागराकाटा के बामनडांगा क्षेत्र में कई राहत शिविरों का दौरा किया, जो चार अक्टूबर को हुई भारी बारिश के कारण सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है। इससे इस क्षेत्र में बाढ़ आ गई थी और दार्जिलिंग तथा उसके निचले इलाकों के ऊपरी इलाकों में जान-माल की व्यापक क्षति हुई थी। पश्चिम बंगाल के उत्तरी जिलों में भूस्खलन और बाढ़ में कम से कम 32 लोग मारे गए हैं और हजारों लोग बेघर हुए हैं। प्राकृतिक आपदा के बाद बनर्जी उत्तर बंगाल के अपने दूसरे दौरे पर हैं। वह शुक्रवार तक वहां रहेंगी। राहत कार्यों का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री बनर्जी पांच अक्टूबर से चार दिनों के लिए उत्तर बंगाल में थीं।    

केंद्र सरकार को घेरा ममता ने, बोली- अमेरिका और चीन के सामने रही कमजोर

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने विदेशी ताकतों के सामने भारत की प्रतिष्ठा को बेच दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ‘‘कभी अमेरिका के सामने तो कभी चीन के सामने भीख मांग रही है''। अन्य राज्यों में बंगाली प्रवासियों पर हमलों से संबंधित सरकारी संकल्प पर राज्य विधानसभा में चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की ‘‘तानाशाही मानसिकता'' है। भाजपा ‘‘पश्चिम बंगाल को अपना उपनिवेश बनाना'' चाहती है। बनर्जी ने जैसे ही इस संकल्प पर बोलना शुरू किया तो हंगामा होने लगा। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा ने विदेशी ताकतों के सामने भारत की प्रतिष्ठा बेच दी है। केंद्र सरकार कभी चीन के सामने गिड़गिड़ा रही है, तो कभी अमेरिका के सामने। वे देश नहीं चला सकते, राष्ट्र के हितों की रक्षा नहीं कर सकते, फिर भी हमें उपदेश देने की हिम्मत रखते हैं।'' मुख्यमंत्री ने भाजपा पर भाजपा शासित राज्यों में बंगाली प्रवासी श्रमिकों पर कथित हमलों पर चर्चा को रोकने का भी आरोप लगाया। बनर्जी ने दावा किया, ‘‘भाजपा बंगाली प्रवासियों पर हमलों को लेकर चर्चा के खिलाफ क्यों है? ऐसा इसलिए है… क्योंकि ये घटनाएं पार्टी शासित राज्यों में हो रही हैं। वे सच्चाई को दबाना चाहते हैं।'' 'भाजपा स्पष्ट रूप से बांग्ला विरोधी है…' सदन में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्षी पार्टी की नारेबाजी के बीच अपनी बात कहने की कोशिश करते हुए बनर्जी ने पूछा, ‘‘भाजपा मुझे इस सदन में बोलने क्यों नहीं दे रही है?'' उन्होंने कहा, ‘‘हम हिंदी या किसी अन्य भाषा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भाजपा स्पष्ट रूप से बांग्ला विरोधी है। उनका रवैया औपनिवेशिक और तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। वे पश्चिम बंगाल को अपना उपनिवेश बनाना चाहते हैं।'' भाजपा तानाशाहों की पार्टी है- ममता बनर्जी ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा के ‘‘वैचारिक पूर्वजों'' ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश के साथ विश्वासघात किया था। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा तानाशाहों की पार्टी है। उनके पूर्वजों ने भारत की आजादी के लिए लड़ाई नहीं लड़ी, उन्होंने देश के साथ विश्वासघात किया।'' नोकझोंक बढ़ने पर, सत्ता पक्ष के कुछ विधायक विपक्षी दलों की ओर दौड़ पड़े, जिससे मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। हंगामे की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री को अपना भाषण कुछ देर के लिए रोकना पड़ा।  

विशेष सत्र बुलाया, ममता बनर्जी की SIR पर सेंसर मोशन की तैयारी

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए सत्तारूढ़ टीएमसी और बीजेपी दोनों ने जोरदार तैयारियां शुरू कर दी हैं। पश्चिम बंगाल की सरकार 1 से 4 सितंबर तक विधानसभा का विशेष सत्र बुला रही है। इसमें बीजेपी शासित राज्यों में बंगालियों के साथ कथित अत्याचार को लेकर सेंसर मोशन लाया जा सकता है। इसके अलावा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के खिलाफ भी विधानसभा में प्रस्ताव किया जा सकता है। बता दें कि चुनाव आयोग ने बिहार में एसआईआर करवाया है जिसका विपक्ष पुरजोर विरोध कर रहा है। बंगाल में तीन दिन विधानसभा का विशेष सत्र चलेगा। ममता बनर्जी ने कई बार राजस्थान से ओडिशा तक बंगालियों पर होने वाले अत्याचार को लेकर बीजेपी पर हमला किया है। ममता बनर्जी ने दूसरे राज्यों से वापसे आने वाले बंगालियों के लिए श्रमश्री योजना की भी शुरुआत की है। इसके तहत मजदूरों को 5 रुपये प्रति महीने की आर्थिक सहायता दी जाएगी। जानकारी के मुताबिक विधानसभा में टीएमसी एसआईआर का विरोध करेगी। कई जानकारों का कहना है कि चुनाव आयोग बंगाल में भी विधानसभा चुनाव से पहले एसआईआर करवा सकता है। उधर राहुल गांधी बिहार में 'वोटर अधिकार यात्रा' निकाल रहे हैं। टीएमसी नेता यूसुफ पठान और ललितेश त्रिपाठी बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के अंतिम चरण में सोमवार को हिस्सा लेकर अपनी पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे। पार्टी सूत्रों ने शनिवार को यह जानकारी दी। राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस दोनों ही ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इंक्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के घटक हैं। बिहार में जारी कांग्रेस की ‘वोटर अधिकार यात्रा’ के तहत शुक्रवार को सीवान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ‘‘निर्वाचन आयोग की मिलीभगत से वोट चोरी करते पकड़ी गई है’, इसलिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता घबरा गए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) अभियान के तहत प्रकाशित मसौदा मतदाता सूची से 65 लाख लोगों के नाम हटाना उनके मताधिकार पर हमला है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा 17 अगस्त को शुरू की गई इस यात्रा का उद्देश्य बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के माध्यम से लोगों के मतदान के अधिकार पर कथित हमले को उजागर करना है।  

भाजपा पर बरसीं ममता, बोलीं- जब तक जिंदा हूं वोटिंग अधिकार सुरक्षित रहेगा

कोलकाता  पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को TMC छात्र परिषद की रैली में भाजपा पर जोरदार हमले किए हैं। ममता बनर्जी ने कहा है कि भाजपा 500 लोगों की टीम ले कर बंगाल आई है और लोगों का नाम मतदाता सूची से हटाने के लिए सर्वे किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि लेकिन उनके होते हुए किसी भी बंगाली के मतदान के अधिकार को नहीं छीनने दिया जाएगा। इस दौरान उन्होंने ‘भाषाई आतंकवाद’ का भी जिक्र किया है। CM ममता ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा है कि भाषाई आतंकवाद को कभी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कोलकाता में छात्र शाखा की एक रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा, "आपको खुद जांच करनी चाहिए कि आपका नाम अभी भी मतदाता सूची में है या हटा दिया गया है। आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आपके पास आधार कार्ड हैं।" उन्होंने आगे कहा, "जब तक मैं ज़िंदा हूं, किसी को भी लोगों का मताधिकार नहीं छीनने दूंगी।" ममता बनर्जी ने इस दौरान चुनाव आयोग पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग राज्य सरकार के अधिकारियों को धमका रहा है। उन्होंने दावा किया, "चुनाव आयोग हमारे अधिकारियों को धमका रहा है। आयोग का अधिकार क्षेत्र चुनाव के दौरान केवल तीन महीनों तक ही है, पूरे साल नहीं।" बंगालियों की भूमिका भुलाने की कोशिश ममता बनर्जी ने दावा किया है कि भाजपा स्वतंत्रता आंदोलन में बंगालियों द्वारा निभाई गई भूमिका को भुलाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “अगर बंगाली भाषा ही नहीं है, तो राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत किस भाषा में लिखे गए हैं? वे चाहते हैं कि लोग स्वतंत्रता आंदोलन में बंगालियों द्वारा निभाई गई ऐतिहासिक भूमिका को भूल जाएं। हम इस भाषाई आतंक को बर्दाश्त नहीं करेंगे।” भाजपा के पास 'भ्रष्टाचार भंडार वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र द्वारा लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर भी ममता बनर्जी ने जवाब दिया। CM ममता ने दावा किया कि TMC सरकार ने कई सामाजिक कल्याणकारी पहल की हैं। वहीं केंद्र की भाजपा सरकार विकास के नाम पर भ्रष्टाचार में लिप्त है। उन्होंने कहा, "हम महिलाओं के लिए 'लक्ष्मी भंडार' योजना लेकर आए हैं, जबकि भाजपा के पास 'भ्रष्टाचार भंडार' और भाई-भतीजावाद है। वे देश को लूट रहे हैं, जबकि हम महिलाओं को सशक्त बना रहे हैं।"  

ममता बनर्जी ने कहा, PM को मेरी कुर्सी का सम्मान वैसा ही रखना चाहिए

कोलकाता  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर ताजा हमला बोलते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कहा कि उन्हें उनसे (मोदी से) कभी यह उम्मीद नहीं थी कि वे उनकी कुर्सी का अनादर करने के साथ-साथ राज्य के लोगों को ‘चोर’ बताकर पूरे प्रांत का अपमान करेंगे। उन्होंने यह बयान पीएम मोदी की हालिया टिप्पणियों के संदर्भ में दिया। पूर्व बर्धमान जिले के बर्धमान शहर में लोगों के बीच सामाजिक कल्याण योजनाओं का लाभ वितरित करने के लिए आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम में बनर्जी ने मोदी की टिप्पणी को पश्चिम बंगाल के लोगों का ‘अपमान’ बताया और केंद्रीय धन के आवंटन पर रोक लगाने के लिए उनकी कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे राज्य के खजाने पर ‘भारी बोझ’ पड़ा है। मुख्यमंत्री ने कहा, 'प्रधानमंत्री को मेरी कुर्सी का उतना ही सम्मान करना चाहिए जितना मैं उनकी कुर्सी का करती हूं। मुझे कभी उम्मीद नहीं थी कि वे पश्चिम बंगाल के लोगों को ‘चोर' कहेंगे।' बनर्जी ने दावा किया, 'सच तो यह है कि उन्होंने उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और बिहार की तथाकथित ‘डबल इंजन’ वाली भाजपा सरकारों के कामकाज पर आंखें मूंद ली हैं, जहां भ्रष्टाचार अपने चरम पर है।' बनर्जी ने आरोप लगाया कि हर बार जब चुनाव आता है तो मोदी प्रवासी पक्षी की तरह पश्चिम बंगाल आते हैं। बनर्जी ने दावा किया कि राज्य प्रशासन ने कल्याणकारी योजनाओं के लिए केंद्रीय धन के उपयोग के बारे में केंद्र सरकार के सभी प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर दे दिया है। बनर्जी ने कहा, 'हमने आपके सभी प्रश्नों के उत्तर दे दिए हैं, फिर भी आप धन का वितरण रोक रहे हैं और पश्चिम बंगाल को ‘चोर’ कह रहे हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए पश्चिम बंगाल में 186 केंद्रीय टीमें भेजीं और उन्हें कुछ नहीं मिला। एक छात्र सभी प्रश्नों के उत्तर देने के बाद शून्य अंक प्राप्त करना कैसे स्वीकार कर सकता है? हम इस अपमान को बर्दाश्त नहीं करेंगे।' कोलकाता में 22 अगस्त को एक जनसभा में मोदी ने कहा था कि ‘भ्रष्टाचार, अपराध और तृणमूल कांग्रेस एक-दूसरे के पर्याय हैं।’ उन्होंने आरोप लगाया था, 'केंद्र द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार को भेजा जाने वाला धन लोगों तक नहीं पहुंचता, बल्कि तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता उसे खा जाते हैं।'  

गठबंधन में नेतृत्व को लेकर खींचतान, ममता बनर्जी ने फिर जताई अपनी अहमियत, शुरू हुई वर्चस्व की लड़ाई

नई दिल्ली INDIA ब्लॉक पूरी तरह तो नहीं, लेकिन काफी हद तक संसद में एकजुट नजर आ सकता है. कांग्रेस नेतृत्व की कोशिशों से तो ऐसा ही लग रहा है. 19 जुलाई को इंडिया ब्लॉक की ऑनलाइन मीटिंग होने जा रही है. मुद्दा तो स्वाभाविक है,  ऑपरेशन सिंदूर से लेकर बिहार में चल रहा SIR तक सब कुछ होगा, लेकिन ज्यादा महत्वपूर्ण मीटिंग में ममता बनर्जी भागीदारी मानी जा रही है.   कांग्रेस सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि विपक्षी गठबंधन के करीब करीब सभी प्रमुख नेता मीटिंग में शामिल होने रहे हैं – और ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस की तरफ से भी ऐसे ही सकारात्मक संकेत मिले हैं.  2019 के आम चुनाव के समय से ही ममता बनर्जी अपनी अहमियत का एहसास कराती रही हैं. विशेष रूप से कांग्रेस को, जब मामला पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़ा हो.  महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद तो ममता बनर्जी इंडिया ब्लॉक की मौजूदा लीडरशिप पर भी सवाल उठाने लगीं, और कहने लगीं कि वो विपक्ष के नेतृत्व के लिए तैयार हैं, लेकिन कोलकाता में रहकर ही. विपक्ष के कुछ नेताओं का समर्थन भी ममता बनर्जी को मिल गया.  सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी होने के नाते इंडिया ब्लॉक का नेतृत्व कांग्रेस के पास है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी तो लोकसभा में विपक्ष के नेता भी हैं. राज्यसभा कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे मोर्चा संभाले हुए हैं.  मॉनसून सत्र में साथ आया इंडिया ब्लॉक दिल्ली चुनाव के दौरान ही ये चर्चा होने लगी थी कि नतीजे आने के बाद इंडिया ब्लॉक का अस्तित्व खत्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ – और, मॉनसून सत्र से पहले विपक्षी गठबंधन के नेता एक बार फिर उस मीटिंग में हिस्सा लेने जा रहा है, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को घेरने की रणनीति तैयार की जाने वाली है.  पहले ये मीटिंग दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर कराने की कोशिश हुई, लेकिन जब कुछ नेताओं ने कम समय में दिल्ली पहुंचने में असमर्थता जताई तो फॉर्मेट बदलना पड़ा. विपक्ष के ज्यादा से ज्यादा नेताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अब ये मीटिंग ऑनलाइन होने जा रही है.  कांग्रेस सूत्रों की मानें, तो विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक के लगभग सभी नेताओं ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में शामिल होने की पुष्टि की है – और उनमें तृणमूल कांग्रेस भी है.  शिवसेना-यूबीटी प्रवक्ता संजय राउत ने तो बताया है कि उद्धव ठाकरे दिल्ली भी जा सकते हैं, क्योंकि केसी वेणुगोपाल का फोन आया था. लेकिन समाजवादी  पार्टी के नेता अखिलेश यादव, तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के वीडियो कांफ्रेंसिंग से ही जुड़ने की बात कही गई है.  तृणमूल कांग्रेस की तरफ से भी ममता बनर्जी या उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी ऑनलाइन मीटिंग में शामिल होने की संभावना जताई गई है.  ये साफ नहीं है कि अरविंद केजरीवाल के आम आदमी पार्टी शामिल होगी या नहीं. बीते घटनाक्रमों के हिसाब से देखें तो ऐसी कोई संभावना बनती नहीं है. और, शरद पवार की तरफ से भी दूरी बनाई जा सकती है.  असल में ऑपरेशन सिंदूर पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की कांग्रेस की मांग का शरद पवार ने विरोध किया था. विशेष सत्र को लेकर पहले तो समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस ने भी हाथ खींच लिये थे, लेकिन बाद में 16 राजनीतिक दलों की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे गये संयुक्त पत्र में शामिल हो गये थे. लेकिन शरद पवार और अरविंद केजरीवाल की पार्टियों ने डिमांड वाले पत्र से दूरी बना ली थी. ममता बनर्जी का शामिल होना अहम क्यों खास बात ये है कि कांग्रेस से लेकर तृणमूल कांग्रेस तक सभी को अपनी हैसियत अच्छी तरह मालूम है. ये भी पता है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ पाता, लेकिन ईगो भी तो कुछ होता है.  किसी को विचारधारा का गुरूर है, तो किसी को क्षेत्रीय राजनीति में अपने दबदबे का. कांग्रेस नेता राहुल गांधी अपने अखिल भारतीय नेटवर्क की बदौलत क्षेत्रीय दलों पर गुर्राते हैं, तो क्षेत्रीय दलों के ममता बनर्जी और अखिलेश यादव जैसे नेता अपने इलाके में धौंस दिखाने लगते हैं. जब केंद्र में सत्ताधारी बीजेपी से टकराने की बात आती है तो मजबूरी में सब एक हो जाते हैं, नहीं तो पूरे वक्त आपस में झगड़ते रहते हैं.  साझा मुद्दों पर भी अलग अलग पसंद और नापसंदगी है. राहुल गांधी को अडानी का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण लगता है, तो ममता बनर्जी आंख दिखाने लगती हैं. ममता बनर्जी की अहमियत ऐसी है कि 2019 के चुनाव नतीजे आने के बाद जब लोकसभा स्पीकर के चुनाव में कांग्रेस ने उम्मीदवार घोषित कर दिया तो ममता बनर्जी नाराज हो गईं. लेकिन, फिर राहुल गांधी के फोन करके मनाने पर मान भी गईं – तब से लेकर अभी तक हर मुद्दे पर ममता बनर्जी तेवर दिखा ही देती हैं.  INDIA ब्लॉक का ट्रैक रिकॉर्ड को देखें तो ममता बनर्जी का इंडिया ब्लॉक की मीटिंग में शामिल होना, संसद की कार्यवाही के दौरान भी पूरे विपक्ष, खासकर कांग्रेस, के साथ बने रहने की कोई गारंटी नहीं है.