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तीन नेताओं की हाथों में हाथ की तस्वीरें, ट्रंप का ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती हैं!

नई दिल्ली/ तियानजिन चीन के तियानजिन में सोमवार सुबह नए वर्ल्ड ऑर्डर के तीन दिग्गजों की मुलाकात हुई. SCO मीटिंग के दौरान आज सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मेजबान चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति पुतिन मिले. तीन नेताओं की गर्मजोशी भरी मुलाकात की ये तस्वीरें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का ब्लड प्रेशर बढ़ा सकती है.  तियानजिन में सोमवार सुबह 11 बजे महाशक्तियों का महामिलन देखने को मिला. इससे जुड़ा वीडियो सोशल मीडिया पर खूब शेयर हो रहा है. इस वीडियो में राष्ट्रपति शी जिनपिंग, और राष्ट्रपति पुतिन पीएम मोदी के आस-पास खड़े हैं. इस दौरान पीएम मोदी सेंटर में घिर रहे हैं. तीनों राष्ट्राध्यक्ष अपने ट्रांसलेटर के साथ हल्के-फुल्के माहौल में बात कर रहे हैं.  इस दौरान इन तीनों नेताओं की भाव-भंगिमा काफी पॉजिटिव दिख रही है.  मुलाकात की इन तस्वीरों को जारी करते हुए पीएम मोदी ने अपने एक्स अकाउंट पर तस्वीरें शेयर की हैं. उन्होंने लिखा, "तियानजिन में बातचीत जारी! एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी के साथ विचारों का आदान-प्रदान." एक दूसरे पोस्ट में पीएम मोदी ने रूस के राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात की तस्वीरें जारी की है और कहा है कि राष्ट्रपति पुतिन से मिलना हमेशा आनंददायक होता है. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित 20 से अधिक विश्व नेताओं की उपस्थिति में वर्ल्ड ऑर्डर में 'धमकाने' वाले व्यवहार की कड़ी आलोचना की.  शी जिनपिंग ने एससीओ शिखर सम्मेलन के उद्घाटन पर प्राथमिकताओं की रूपरेखा प्रस्तुत की. उन्होंने कहा कि एससीओ देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्थाएं 30 ट्रिलियन डॉलर के करीब पहुंच रही हैं और इस संगठन का वैश्विक आर्थिक प्रभाव बढ़ रहा है. शी ने सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए एक नए केंद्र के साथ-साथ शीघ्रता से एक एससीओ विकास बैंक के निर्माण का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि एससीओ के अन्य सदस्य देशों में चीन का निवेश पहले ही 84 बिलियन डॉलर से अधिक हो चुका है. उन्होंने कहा कि सभी एससीओ सदस्य "मित्र और साझेदार" हैं. शी ने सदस्यों से मतभेदों का सम्मान करने, रणनीतिक संचार बनाए रखने, आम सहमति बनाने और एकजुटता को मजबूत करने का आग्रह किया.  उन्होंने कहा कि संयुक्त सहयोग सभी संस्कृतियों को "समृद्धि और सद्भाव में फलने-फूलने" का अवसर देता है.  चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि एससीओ सदस्यों को गुट बनाकर धमकी देने वालों को और टकराव पैदा करने वालों का विरोध करने की जरूरत है. जिनपिंग ने एक न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था का समर्थन किया जिसमें संयुक्त राष्ट्र वैश्विक शासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाए. शी ने बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों के बीच बहुपक्षवाद और सहयोग पर ज़ोर दिया. उन्होंने कहा कि शंघाई सहयोग संगठन ने क्षेत्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. जिनपिंग ने कहा कि चीन जरूरतमंद एससीओ सदस्य देशों में आजीविका में सुधार के लिए 100 लघु-स्तरीय परियोजनाओं को लागू करने की योजना बना रहा है. 

रायपुर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 125वीं ‘मन की बात’ सुनी, मंत्री और नागरिक भी हुए शामिल

रायपुर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 125वीं कड़ी का सीधा प्रसारण आज नवा रायपुर स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद उद्योग एवं व्यापार परिसर के कन्वेंशन सेंटर में हुआ। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, उद्योग मंत्री लखन देवांगन, राजस्व मंत्री टंक राम वर्मा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, विधायक इंद्र कुमार साहू तथा छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम के अध्यक्ष राजीव अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधिगण और नागरिक उपस्थित थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं की घड़ी में देशवासियों द्वारा एक-दूसरे की सहायता करना भारत की असली ताकत है। उन्होंने कहा कि विपत्ति के समय जो सहयोग और एकजुटता दिखाई देती है, वही भारत की संस्कृति और सामूहिक चेतना को परिभाषित करती है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में खेलों को न केवल स्वास्थ्य बल्कि आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का भी आधार बताया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि खेलकूद में सक्रिय भागीदारी कर अपने जीवन और देश दोनों को ऊर्जावान बनाएं. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि ‘मन की बात’ हर माह प्रदेशवासियों को नई ऊर्जा और प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 'मन की बात' रेडियो कार्यक्रम समाज के सभी वर्गों में सकारात्मक सोच और राष्ट्रीय चेतना को प्रबल करता है। मुख्यमंत्री ने हाल ही में अपने जापान और दक्षिण कोरिया प्रवास का उल्लेख करते हुए बताया कि कौशल विकास, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़े क्षेत्रों में हुए सहयोग और निवेश से राज्य के युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे और छत्तीसगढ़ में कौशल विकास और रोजगार का नया अध्याय शुरू होगा। राज्य की रजत जयंती वर्ष का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का निर्माण तभी संभव है जब प्रत्येक नागरिक अपनी भूमिका ईमानदारी से निभाए। उन्होंने कहा कि सरकार और जनता के साझा प्रयासों से राज्य को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का संदेश हर नागरिक के लिए प्रेरणास्रोत है। हमें सामूहिक जनभागीदारी के साथ आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़ को विकास और सुशासन की नई ऊँचाइयों पर ले जाना है। उन्होंने प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि सभी मिलकर एक समृद्ध और स्वच्छ छत्तीसगढ़ के निर्माण में सक्रिय योगदान दें।

ट्रंप सहयोगी का बेतुका बयान: यूक्रेन में शांति का रास्ता भारत से होकर जाता है

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बिजनेस सलाहकार पीटर नवारो ने भारत को अहंकारी कहने के बाद एक बार फिर से भारत को लेकर अनर्गल आरोप लगाए हैं. नवारो ने यूक्रेन वॉर को सीधे भारत की रूस से कच्चे तेल की खरीद से जोड़ दिया है. नवारो ने कहा है कि यूक्रेन में शांति का रास्ता नई दिल्ली से होकर गुजरता है.  बुधवार को ब्लूमबर्ग टीवी से बातचीत में नवारो ने कहा था कि 'भारतीय इस मामले में काफी घमंडी हैं और वे कहते हैं कि ये हमारी संप्रभुता का मामला है, हम जब चाहें किसी से भी तेल खरीद सकते हैं.' नवारो ने एक्स पर एक लंबे ट्विटर थ्रेड में एकतरफा तर्कों से अमेरिकी टैरिफ को सही ठहराने की कोशिश की है और भारत पर कई आरोप लगाए हैं.  नवारो ने कहा कि यह केवल भारत के अनुचित व्यापार के बारे में नहीं है, यह पुतिन की युद्ध मशीन को भारत द्वारा दी गई वित्तीय लाइफलाइन को काटने के बारे में है. नवारो ने लिखा है कि अमेरिकी उपभोक्ता भारत का सामान खरीदते हैं, जबकि भारत हाई टैरिफ लगाकर और दूसरे उपायों से अमेरिका से सामानों का आयात नहीं करता है. भारत हमारे डॉलर से रूस का सस्ता तेल खरीदता है.  भारतीय रिफाइनरियों पर नवारो के आरोप भारतीय रिफाइनरियां अपने प्रमुख रूसी साझेदारों के साथ मिलकर रिफाइनरी चलाती हैं और कालाबाजारी में तेल को बेचकर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बड़ा मुनाफा कमाती हैं. इस तरह से रूस यूक्रेन के खिलाफ युद्ध के लिए धन जुटाने हेतु भारी मात्रा में नकदी जुटाता है. भारत की ऊर्जा जरूरतों को ध्यान में रखे बिना बेबुनियाद आरोप लगाते हुए ट्रंप के ट्रेड सलाहकार नवारो ने दावा किया कि यूक्रेन पर रूस के आक्रमण से पहले भारत के आयात में रूसी तेल का हिस्सा 1% से भी कम था. लेकिन आज ये 30 प्रतिशत से भी ज्यादा हो गया है. भारत प्रतिदिन 15 लाख बैरल से भी ज़्यादा तेल मंगाता है.  उन्होंने कहा कि यह उछाल घरेलू मांग से प्रेरित नहीं है. नवारो का दावा है कि यह भारतीय मुनाफाखोरों द्वारा संचालित है और इसके लिए यूक्रेन में खून-खराबे और तबाही की अतिरिक्त कीमत चुकानी पड़ रही है. अपने अगले ट्वीट में नवारो ने लिखा है कि भारत की बड़ी तेल लॉबी ने दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को क्रेमलिन के लिए एक विशाल रिफाइनिंग केंद्र और तेल मनी लॉन्ड्रोमैट में बदल दिया है. भारतीय रिफाइनर सस्ते रूसी तेल खरीदते हैं, उसे प्रोसेस करते हैं और यूरोप, अफ्रीका और एशिया को ईंधन निर्यात करते हैं. जबकि तटस्थता के नाम पर वे प्रतिबंधों से सुरक्षित रहते हैं.  '10 लाख बैरल तेल का निर्यात करता है भारत' नवारो का दावा है कि भारत अब प्रतिदिन 10 लाख बैरल से ज्यादा रिफाइंड पेट्रोलियम का निर्यात करता है. ये मात्रा उसके द्वारा आयातित रूसी कच्चे तेल की मात्रा के आधे से भी ज़्यादा है. इससे होने वाली आय भारत के राजनीतिक रूप से जुड़े एनर्जी दिग्गजों को जाती है. और सीधे पुतिन के वॉर फंड में. जहां अमेरिका यूक्रेन को हथियार देने के लिए भुगतान करता है, वहीं भारत रूस को वित्तीय मदद देता है, जबकि वह अमेरिकी वस्तुओं पर दुनिया के कुछ सबसे ऊंचे टैरिफ लगाता है, जिससे अमेरिकी निर्यातकों को नुकसान होता है. भारत के साथ हमारा 50 अरब डॉलर का व्यापार घाटा है. और वे हमारे डॉलर का इस्तेमाल रूसी तेल खरीदने के लिए कर रहे हैं. यूक्रेन युद्ध में महात्वाकांक्षाओं के टकराव, नाटो का रोल, और अमेरिकी पॉलिटिकल गेम को इनकार करते हुए नवारो ने भू-राजनीतिक सच्चाइयों को झूठलाने की कोशिश की है. 'भारत खूब पैसा कमाता है, यूक्रेन के लोग मरते हैं' नवारो ने भारत पर आरोप लगाया है कि वे रूसी तेल से खूब पैसा कमाते हैं और यूक्रेनवासी मरते हैं. नवारो ने भारत के खिला सख्त शब्दों का इस्तेमाल करते हुए लिखा है कि यह यहीं नहीं रुकता. भारत रूसी हथियार खरीदना जारी रखता है और साथ ही यह मांग करता है कि अमेरिकी कंपनियां संवेदनशील सैन्य तकनीक हस्तांतरित करें और भारत में संयंत्र स्थापित करें. यह एक रणनीतिक मुफ़्तखोरी है. उन्होंने आगे कहा बाइडेन प्रशासन ने इस पागलपन को ज़्यादातर नज़रअंदाज़ किया है. राष्ट्रपति ट्रंप इसका सामना कर रहे हैं. भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाना, जिसमें 25 प्रतिशत अनुचित व्यापार के लिए और 25% राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए है.  अगर दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत चाहता है कि उसके साथ अमेरिका के रणनीतिक साझेदार जैसा व्यवहार किया जाए, तो उसे वैसा ही व्यवहार करना होगा. यूक्रेन में शांति का रास्ता नई दिल्ली से होकर जाता है.  बता दें कि 27 अगस्त से भारत पर 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ लागू हो गया है. कई संगठनों ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी टैरिफ से भारत के 48 अरब डॉलर के निर्यात प्रभावित हो सकते हैं.    

गुजरात दंगों पर तरलोचन सिंह बोले: नरेंद्र मोदी न होते तो पूरा राज्य जल उठता

नई दिल्ली सिख मामलों के जानकार और पूर्व राज्यसभा सांसद तरलोचन सिंह ने 2002 के गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी की भूमिका की सराहना की है। कहा कि यह दंगा साबरमती एक्सप्रेस अग्निकांड से उपजे गुस्सा का नतीजा था और इसे नरेंद्र मोदी ने अच्छे से संभाला वरना पूरा गुजरात ही जल जाता। उन्होंने कहा कि ट्रेन में जिंदा जले लोगों के परिजन उनके शवों को अपने गांव ले जाना चाहते थे, लेकिन नरेंद्र मोदी ने उनका अंतिम संस्कार वहीं करा दिया। तरलोचन सिंह ने कहा कि यदि ये शव उनके गांवों में पहुंचते तो सोचिए कि कितना गुस्सा लोगों का भड़कता और पूरा गुजरात ही जल जाता, लेकिन नरेंद्र मोदी ने साहस दिखाया और ऐसा नहीं होने दिया। उन्होंने कहा कि 2002 का दंगा जनता के गुस्से का परिणाम था, उसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। बता दें कि 2002 में गुजरात दंगों के दौरान नरेंद्र मोदी गुजरात के सीएम हुआ करते थे। उस दंगे को लेकर उन पर भी कांग्रेस की ओर से आरोप लगाए जाते रहे हैं। 2002 के दंगों के दौरान तरलोचन सिंह अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष थे। उन्होंने कहा कि गुजरात का दंगा दिल्ली में हुए 1984 के दंगों की तरह सरकार प्रायोजित नहीं था। उन्होंने कहा कि 2002 में मैं अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष था। तरलोचन सिंह ने कहा कि घटना होने के बाद सबसे पहले पहुंचने वाले लोगों में मैं था। मैंने उसके बारे में पूछताछ की। कोई उसके बारे में नहीं जानता था। मैं 2000 में अल्पसंख्यक आयोग का चेयरमैन बना था और गुजरात दंगा 2002 में हुआ। मैंने गुजरात दंगे पर एक बुकलेट भी लिखी है। उन्होंने कहा कि यह बुकलेट छपी भी थी और नरेंद्र मोदी ने इसकी 500 कॉपियां बटवाई थीं। मैंने गुजरात दंगों से दिल्ली के सिख दंगों की तुलना की थी। मैंने कहा था कि दिल्ली का दंगा सरकार प्रायोजित था, लेकिन गुजरात का दंगा जनता के गुस्से की अभिव्यक्ति थी। उस दंगे में सरकार या उसके किसी एक भी आदमी की भूमिका नहीं थी। मैंने अपनी जांच में यह बात कही थी। पीएम नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए तरलोचन सिंह ने कहा कि तब गुजरात सीएम के तौर पर उनका रोल सराहनीय था। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी ने तय किया कि मारे गए सभी कारसेवकों का अंतिम संस्कार वहीं कर दिया जाए। यदि वे शव गांवों में पहुंचते तो कितना गुस्सा भड़कता। हम इसकी कल्पना ही कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में तो पूरा गुजरात ही जल जाता, लेकिन नरेंद्र मोदी ने साहस दिखाया और हालात को संभाल लिया। उन्होंने कहा कि इसी का परिणाम था कि दंगे अहमदाबाद और उसके आसपास के इलाके में ही हुए। पूरे गुजरात में स्थिति नहीं बिगड़ी।

पीएम मोदी पर ट्रंप की तारीफ, चीन यात्रा से पहले बोले- शानदार इंसान हैं मोदी

नई दिल्ली अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने मई में भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य टकराव के दौरान शांति स्थापित करने में मदद की थी. उन्होंने कहा कि उनके दखल से ही दोनों देश युद्ध के कगार से पीछे हटने को मजबूर हुए. समाचार एजेंसी एएनआई की तरफ जारी वीडियो में डोनाल्ड ट्रंप व्हाइट हाउस में रक्षा मंत्री पीट हेक्सेथ के साथ बैठे दिख रहे हैं. इसी दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘शानदार व्यक्ति’ बताते हुए कहा कि उन्होंने उन्हें फोन कर साफ शब्दों में कहा था कि अगर हालात नहीं सुधरे तो अमेरिका भारत पर ट्रेड बैन और भारी टैरिफ लगाएगा. ट्रंप ने क्या किया दावा? डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को कहा, ‘मैं एक बेहद शानदार व्यक्ति से बात रहा था… भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. मैंने पूछा कि आपका पाकिस्तान के साथ क्या चल रहा है? नफरत बहुत ज्यादा थी, यह बहुत लंबे समय से चल रहा रहा. सैकड़ों साल से अलग-अलग नामों के साथ यह जारी है.’ ट्रंप के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘मैंने उनसे कहा मैं आपके साथ कोई ट्रेड डील नहीं करूंगा. आप लोग परमाणु युद्ध में उलझ जाओगे. मैंने कहा, कल मुझे फिर फ़ोन करना. लेकिन मैं आपके साथ कोई डील नहीं करूंगा या इतना ज्यादा टैरिफ लगाऊंगा कि आपका सिर चकरा जाएगा.’ अमेरिका राष्ट्रपति के अनुसार, उनकी बातचीत के ‘पांच घंटे के भीतर’ ही भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव कम हुआ और युद्ध जैसी स्थिति टल गई. इससे पहले उन्होंने दावा किया था कि उस दौरान ‘सात विमान गिराए गए थे’. हालांकि पिछले महीने उन्होंने ‘पांच विमान’ गिराए जाने की बात कही थी. ट्रंप ने यह भी स्पष्ट नहीं किया कि विमान किस देश के थे. ट्रंप के दावों पर क्या कह रहा भारत? भारत लगातार ट्रंप के इन दावों को खारिज करता आया है. नई दिल्ली का कहना है कि 10 मई को हुई संघर्षविराम घोषणा पूरी तरह द्विपक्षीय थी और पाकिस्तान के सैन्य अधिकारियों ने भारत से संपर्क कर हालात सामान्य करने का आग्रह किया था. भारत ने साफ किया कि इसमें किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं थी. ट्रंप का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने भारत पर नई टैरिफ पाबंदियां लागू की हैं. 27 अगस्त से लागू इन टैरिफ के बाद भारतीय उत्पादों पर कुल कर बोझ लगभग 50% तक पहुंच जाएगा. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या ट्रंप का मोदी को ‘शानदार व्यक्ति’ कहना एक तरह से व्यापारिक दबाव को संतुलित करने की रणनीति है. पीएम मोदी के चीन दौरे से पहले बयान के क्या मायने? दिलचस्प यह है कि डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने अहम चीन दौरे की तैयारी में हैं. कूटनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि ट्रंप के बयान के पीछे कई संदेश छिपे हैं. ट्रंप जानते हैं कि चीन यात्रा से पहले पीएम मोदी की अंतरराष्ट्रीय छवि को प्रभावित करना एशिया में शक्ति समीकरणों के लिहाज से अहम हो सकता है. डोनाल्ड ट्रंप का ‘मोदी शानदार व्यक्ति हैं’ वाला बयान महज व्यक्तिगत तारीफ नहीं, बल्कि इसमें भू-राजनीति, व्यापारिक दबाव और घरेलू अमेरिकी राजनीति तीनों की झलक मिलती है. अब देखना यह होगा कि पीएम मोदी के चीन दौरे से पहले आए इस बयान के बाद आगे क्या होता है.

नवा रायपुर में आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का जीवंत संग्रहालय जल्द होगा तैयार

राज्योत्सव पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी करेंगे संग्रहालय का उदघाटन प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने किया निरीक्षण  संग्रहालय होगा आदिवासी गौरव, शौर्य एवं बलिदान का प्रतीक  रायपुर आदिम जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, परिसर में निर्माणाधीन शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय का निरीक्षण कर अद्यतन स्थिति की समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि संग्रहालय निर्माण का कार्य लगभग पूर्णतः की ओर है। अंतिम फिनिशिंग एवं रंग रोगन का कार्य चल रहा हैं। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वंत्रंता संग्राम सेनानियों पर बन रहे इस जीवंत संग्रहलय का उदघाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर रजत जयंती एवं जनजातीय गौरव दिवस के  मौके पर किया जाना प्रस्तावित है।   प्रमुख सचिव बोरा ने इसकी तैयारी के लिए निर्माण कार्य में लगे अधिकारियों की बैठक ली एवम आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संग्रहालय के निर्माण कार्य में लगने वाली प्रत्येक सामग्री उच्च गुणवत्तायुक्त एवं सभी मानकों पर खरी उतरनी चाहिए। साथ ही संग्रहालय के निर्माण में किसी भी प्रकार की कोई वित्तीय अनियमितता ना हो, इसका पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।  उल्लेखनीय है कि शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय में स्वतंत्रता आंदोलन के समय छत्तीसगढ़ में हुए विभिन्न आदिवासी विद्रोहों जैसे हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम विद्रोह, परलकोट विद्रोह, तारापुर विद्रोह, लिंगागिरी विद्रोह, कोई विद्रोह, मेरिया विद्रोह, मुरिया विद्रोह, रानी चैरिस विद्रोह, भूमकाल विद्रोह, सोनाखान विद्रोह, झण्डा सत्याग्रह एवं जंगल सत्याग्रह के वीर आदिवासी नायकों के संघर्ष (1923, 1920) एवं शौर्य के दृश्य का जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निश्चित ही यह संग्रहालय सभी वर्ग के लोगों के लिए एक आकर्षण का केन्द्र एवं प्रेरणास्रोत के रूप में बनकर उभरेगा। उल्लेखनीय है संग्रहालय निर्माण का कार्य आगामी माह के 30 सितंबर तक पूरा किए जाने का लक्ष्य है। प्रमुख सचिव  बोरा ने कहा कि संग्रहालय के फर्श पर भी ट्राईबल कलाकारों की आट्र्स को अंकित किए जाने के निर्देश दिए गए। म्यूजियम में अन्य मूर्तियों के साथ-साथ भगवान बिरसा मुंडा एवं रानी गाइडल्यू की मूर्ति लगाने के भी निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि संग्रहालय में डिजिटाइजेशन का कार्य तय समय पर पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने  संग्रहालय में खुलने वाली सोवेनियर शॉप को गढ़ कलेवा अथवा ट्रायफेड या अन्य किसी प्रतिष्ठित संस्था को ट्राईबल उत्पाद के अनिवार्य रूप से विक्रय किए जाने की शर्त के साथ दिए जाने के निर्देश दिए।  बैठक में आयुक्त डॉक्टर सारांश मित्तर, छत्तीसगढ़ राज्य अंत्यावसायी निगम के संचालक जगदीश कुमार सोनकर, संचालक टीआरटीआई श्रीमती हिना अनिमेष नेताम, संयुक्त सचिव बी.के. राजपूत, अपर संचालक जितेन्द्र गुप्ता, उपायुक्त श्रीमती गायत्री नेताम, कार्यपालन यंत्री त्रिदीप चकवर्ती सहित निर्माण एजेंसी के ठेकेदार, क्यूरेटर, इंजीनियर्स एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

ट्रम्प के भारी टैरिफ का भारत पर असर, भारत के उद्योगों पर दबाव; पीएम मोदी ने लिया रणनीतिक फैसला

नई दिल्ली  अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने की योजना का ऐलान कर दिया है। यह वही टैरिफ है जिसकी घोषणा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले कर चुके हैं।अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने एक ड्राफ्ट नोटिस जारी कर इसकी रूपरेखा पेश की। यह कदम तब उठाया जा रहा है, जब रूस और यूक्रेन के बीच शांति समझौते की कोशिशें ठप पड़ती नजर आ रही हैं। नोटिस में साफ कहा गया है कि यह बढ़ा हुआ टैरिफ भारत के उन उत्पादों पर लागू होगा, जो 27 अगस्त, 2025 को सुबह 12:01 बजे (पूर्वी डेलाइट समय) के बाद खपत के लिए आयात किए जाएंगे या गोदाम से निकाले जाएंगे।ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में भारत के सामान पर टैरिफ को 25 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी करने की घोषणा की थी, जो रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया जा रहा है। अमेरिका की यह समयसीमा 27 अगस्त को खत्म हो रही है। पीएम मोदी ने चल दी गजब की चाल,  ट्रंप के टैरिफ की नहीं गलेगी दाल अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर अतिरिक्त 25% टैरिफ लगाने के लिए आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया है। भारत पर पहले से ही 25% टैरिफ लगाया गया है और 27 अगस्त से अतिरिक्त टैरिफ लागू हो जाएगा। इस तरह भारत से आने वाले सामान पर कुल 50% टैरिफ लगेगा। इससे भारतीय निर्यातकों के लिए दूसरे देशों से प्रतिस्पर्द्धा करना मुश्किल होगा। लेकिन ट्रंप के टैरिफ के असर को कम से कम करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कमर कस ली है। मोदी ने 15 अगस्त को दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से एक बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार जीएसटी सुधारों की दिशा में आगे बढ़ रही है। जीएसटी में अभी चार स्लैब हैं जिनमें से दो स्लैब खत्म करने का प्लान है। इससे खासकर खाने-पीने की चीजें काफी सस्ती हो जाएंगी और ग्राहकों को फायदा होगा। प्रधानमंत्री की इस घोषणा से कई सरकारी अधिकारी भी हैरान थे। पिछले एक साल से सरकारी अफसर जीएसटी में बदलाव करने की बात कर रहे थे। लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ था। पुतिन पर दवाब बनाने के लिए ट्रंप का प्लान अमेरिका का मकसद इस टैरिफ के जरिए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर दबाव बनाना है, ताकि वह यूक्रेन के खिलाफ चल रही जंग को खत्म करने के लिए बातचीत की मेज पर आएं। अमेरिका रूस के तेल व्यापार को रोकने की कोशिश में है और भारत पर यह टैरिफ उसी रणनीति का हिस्सा है। लेकिन भारत ने इन तथाकथित सेकेंडरी टैरिफ को अन्यायपूर्ण ठहराया है और अपने हितों की मजबूती से हिफाजत करने का ऐलान किया है। भारतीय सरकार ने साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों से कोई समझौता नहीं करेगी। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को भारत के ऊर्जा विकल्पों का पुरजोर बचाव किया। उन्होंने कहा कि भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए निशाना बनाया जा रहा है, जबकि चीन और यूरोपीय देशों जैसे बड़े आयातकों पर ऐसी कोई आलोचना नहीं की गई। जयशंकर ने इसे "तेल विवाद" के रूप में गलत तरीके से पेश करने की बात कही और भारत की रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दिया। मांग बढ़ाने की जुगत ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली के एक अधिकारी ने बताया कि इस बारे में बातचीत चल रही थी पर घोषणा करने में कुछ महीने और लगते। लेकिन अमेरिकी टैरिफ के कारण मोदी सरकार जीएसटी में बदलाव जैसी नीतियों को जल्दी से लागू कर रही है। इससे अर्थव्यवस्था में भरोसा बढ़ेगा और ग्रोथ में तेजी आएगी। कई साल से ट्रेडर्स और अर्थशास्त्री कह रहे थे कि कुछ सुधारों की वजह से निवेश रुका हुआ है। मोदी ने नीतियों में बदलाव करने के लिए दो बड़ी कमेटियां बनाई हैं। एक कमेटी की अगुवाई कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन कर रहे हैं। यह कमेटी राज्यों में नियमों को आसान बनाने पर ध्यान देगी। दूसरी कमेटी के प्रमुख राजीव गाबा हैं जो नीति आयोग के सदस्य हैं। यह कमेटी अगली पीढ़ी के सुधारों के लिए सुझाव देगी। हाल ही में मोदी ने अपनी आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ बैठक की। इसमें अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए सुझाव लिए गए। बैठक में कई अर्थशास्त्रियों ने कहा कि मार्च 2026 तक 6.5% विकास दर हासिल की जा सकती है। कम महंगाई और ब्याज दरों में कटौती से अर्थव्यवस्था को मदद मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था में मांग बढ़ाने के लिए नीति में बदलाव जरूरी हैं। अमेरिका को एक्सपोर्ट भारत की इकॉनमी अभी स्थिर है। इसलिए, सरकार के पास मुश्किल सुधार करने का मौका है। महंगाई 8 साल के सबसे निचले स्तर पर है। स्टैंडर्ड एंड पुअर्स ने 18 साल में पहली बार भारत की क्रेडिट रेटिंग बढ़ाई है। मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने कहा कि अर्थव्यवस्था के सभी आंकड़े अच्छे हैं। इससे सुधारों को तेजी से आगे बढ़ाने का मौका मिलता है, ताकि हम विकास की अगली सीढ़ी पर चढ़ सकें। नोमुरा होल्डिंग्स लिमिटेड की सोनल वर्मा ने कई सुधारों की बात की। उन्होंने कहा कि विदेशी निवेशकों के लिए नियमों को आसान बनाना, श्रम और भूमि कानूनों में ढील देना जरूरी है। सरकार निर्यातकों को आर्थिक मदद देने पर भी विचार कर रही है। इससे उन्हें टैक्स से होने वाले नुकसान से बचाया जा सकेगा। कपड़ा, गहने और जूते जैसे उद्योगों को सबसे ज्यादा नुकसान होने की आशंका है। भारत की इकॉनमी ज्यादातर घरेलू मांग पर चलती है, न कि निर्यात पर। इसलिए लोगों और व्यापारियों का भरोसा बढ़ाना जरूरी है, ताकि विकास तेजी से हो। निजी खपत भारत की जीडीपी का लगभग 60% है। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा एक्सपोर्ट मार्केट है। साल 2024 में भारत से अमेरिका को 87.4 अरब डॉलर का सामान भेजा गया था जो भारत की कुल जीडीपी का सिर्फ 2% है। कितनी बढ़ेगी इकॉनमी सरकार को उम्मीद है कि जीएसटी में कटौती से लोग ज्यादा खर्च करेंगे। खासकर खाने-पीने और कपड़ों जैसी जरूरी चीजों पर ज्यादा खर्च होगा। अभी इन चीजों पर 12% टैक्स लगता है। माना जा रहा है कि अधिकांश चीजों को 5% वाले स्लैब में लाया जाएगा। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक … Read more

HC ने कहा– पीएम मोदी की डिग्री की जानकारी नहीं होगी सार्वजनिक

नई दिल्ली दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की स्नातक की डिग्री से संबंधित जानकारी को सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था। जस्टिस सचिन दत्ता की अदालत ने सीआईसी के आदेश को चुनौती देने वाली दिल्ली विश्वविद्यालय की याचिका पर यह फैसला सुनाया। इसी अदालत ने 27 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। बता दें कि नीरज नामक के शख्स की ओर से दाखिल की गई आरटीआई आवेदन के बाद केंद्रीय सूचना आयोग ने 21 दिसंबर 2016 को 1978 में बीए परीक्षा पास करने वाले सभी छात्रों के अभिलेखों की जांच की अनुमति दी थी। इसी वर्ष प्रधानमंत्री मोदी ने भी यह परीक्षा पास की थी। मामला आने पर हाईकोर्ट ने 23 जनवरी 2017 को सीआईसी के आदेश पर रोक लगा दी थी। बीते बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की याचिका पर अपना फैसला टाल दिया था। याचिका में प्रधानमंत्री मोदी की स्नातक डिग्री के संबंध में सूचना का खुलासा करने के निर्देश देने वाले सीआईसी के आदेश को चुनौती दी गई थी। डीयू की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी थी कि केंद्रीय सूचना आयोग का आदेश रद्द किया जाना चाहिए क्योंकि यह निजता के अधिकार से ऊपर है। दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें रखी थी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अपनी दलील में कहा था कि केंद्रीय सूचना आयोग उक्त का आदेश रद्द किया जाना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा था कि विश्वविद्यालय अदालत को अपना रिकॉर्ड दिखा सकता है। इसमें उसे कोई आपत्ति नहीं है। दिल्ली विश्वविद्यालय का कहना था कि केवल जिज्ञासा के आधार पर किसी को भी आरटीआई कानून के जरिए निजी जानकारी मांगने का अधिकार नहीं है। वहीं आरटीआई आवेदकों की ओर से पेश हुए वकील ने अपनी दलील में कहा था कि सूचना का अधिकार यानी आरटीआई अधिनियम में व्यापक जनहित के तहत प्रधानमंत्री की डिग्री के बारे में खुलासा किए जाने का प्रावधान है।

भोपाल को जल्द मिलेगी मेट्रो की सौगात, सितंबर 2025 से कमर्शियल रन संभव

भोपाल   मेट्रो ट्रेन प्रोजेक्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्टूबर माह में हरी झंडी दिखा सकते हैं। यात्रियों को लंबे इंतजार के बाद भोपाल में मेट्रो की सवारी का मौका मिलेगा। कारपोरेशन का सबसे ज्यादा फोकस इस समय एम्स से डीआरएम तक के स्टेशनों का काम पूरा करने में है। बचे हुए काम के लिए सितंबर 2025 की डेडलाइन तय की गई है। कमर्शियल रन को दो माह से भी कम समय बचा है, ऐसे में यहां टिकटिंग सिस्टम से लेकर यात्रियों के लिए इंफॉर्मेशन सिस्टम, इंटीरियर व बाहरी सौंदर्यीकरण के काम काफी बचे हुए हैं। स्टेशनों को पास के संस्थानों से जोडऩे का काम भी बाकी है। कमिश्नर का निरीक्षण कमर्शियल रन के लिए कमिश्रर मेट्रो रेल सेफ्टी की एनओसी जरूरी है। इसलिए सर्वे व मॉनिटरिंग जारी है। सुरक्षा संबंधी कामों को तय मानकों पर कसा जा रहा है। सोमवार को भी मेट्रो रेल एमडी चैतन्य एस कृष्णा ने मेट्रो के कामों का निरीक्षण कर संबंधितों से काम की स्थिति पर बैठक की। तुर्किए की कंपनी की जगह नया टेंडर जल्द मेट्रो रेल कारपोरेशन ने ऑटोमेटिक टिकट फेयर सिस्टम के लिए तुर्की की कंपनी को दिए काम का ठेका रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की है। टेंडर की शर्तों के अनुसार प्रक्रिया की जा रही है। अभी रद्द करने का लेटर जारी नहीं किया। अफसरों का कहना है कि नए सिरे से टेंडरिंग की जाएगी। कमर्शियल रन में इंदौर की तरह मैन्युअली टिकट सिस्टम से काम चलाया जाएगा। RDSO से मिली हरी झंडी, अब CMRS की तैयारी तेज शहरवासियों के लिए खुशी की खबर है। भोपाल मेट्रो संचालन पूर्व पहले पड़ाव को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है । अनुसंधान डिजाइन एवं मानक संगठन (आरडीएसओ), रेल मंत्रालय से मेट्रो को प्रमाणीकरण मिल गया है। अब मेट्रो प्रबंधन ने कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (सीएमआरएस) की तैयारियों में जुट गया है। भोपाल मेट्रो को आरडीएसओ से मिली हरी झंडी जानकारी के अनुसार आरडीएसओ के प्रमाणीकरण के बाद ही सीएमआरएस की टीम जांचने आती है। जिसके बाद भोपाल में मेट्रो का संचालन शुरू हो पाएगा। इसके मद्देनजर अब दस्तावेज तैयार किए जाएंगे और प्रोजेक्ट के बचे शेष कामों को टीम के आने से पहले पूरा किया जाएगा। प्रमाणीकरण मिलते ही सोमवार को मेट्रो प्रबंध संचालक एस. कृष्ण चैतन्य ने सुभाष नगर डिपो और एम्स स्टेशन से डीआरएम आफिस मेट्रो स्टेशन तक का निरीक्षण किया। अब सीएमआरएस की तैयारी तेज इस दौरान उन्होंने सीएमआरएस से जुड़ी महत्वपूर्ण साइट्स और कार्यों की स्थिति देखी। स्टेशन में एंट्री-एग्जिट, फुट ओवर ब्रिज, टिकट रूम, स्टेशन कंट्रोल रूम, पम्प रूम, लिफ्ट, एस्केलेटर, फायर एनओसी सहित आंतरिक और बाहरी सुंदरीकरण कार्यों की समीक्षा की गई। एमडी ने सुभाष नगर डिपो का भी मुआयना किया। यहां उन्होंने इन्स्पेक्शन बे लाइन, रिपेयर बे लाइन, टेस्ट ट्रैक, ट्रैक्शन सब-स्टेशन, एडमिन बिल्डिंग के कंट्रोल रूम, प्रमुख सिस्टम रूम्स, रैम्प एरिया, अनलोडिंग-बे और ट्रेनिंग बिल्डिंग जैसी प्रमुख सुविधाओं का जायजा लिया। साथ ही डिपो में ड्रेनेज व्यवस्था, पम्प रूम और फायर एनओसी की स्थिति की भी जानकारी ली। एमडी ने अधिकारियों और ठेकेदारों को दिए निर्देश निरीक्षण के दौरान एमडी ने अधिकारियों और ठेकेदारों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रायोरिटी कॉरिडोर के तहत ट्रेन परिचालन से जुड़े सभी शेष कार्य जल्द से जल्द पूरे किए जाएं। उन्होंने कहा कि सीएमआरएस के लिए दस्तावेजीकरण और साइट तैयारियों को तेज गति से निपटाना होगा ताकि समय पर संचालन शुरू किया जा सके। भोपाल मेट्रो के इस कदम से उम्मीद बढ़ी है कि आने वाले महीनों में राजधानी में मेट्रो परिचालन का सपना हकीकत में बदल सकेगा। इससे यातायात दबाव कम होगा और शहर को आधुनिक सार्वजनिक परिवहन की बड़ी सौगात मिलेगी।

दाल-सांभर सहित भारतीय सामानों की कीमतों पर US टैरिफ का प्रभाव क्या रहा?

नई दिल्ली अमेरिका ने भारत पर 7 अगस्‍त से 25 फीसदी टैरिफ लगा दिया है और 25% एक्‍स्‍ट्रा टैरिफ 27 अगस्‍त से लागू करने की बात कही है. भारत पर ये टैरिफ लागू होने से एक्‍सपोर्ट में गिरावट की आशंका है, जबकि भारत से अमेरिका जाने वाले सामानों की कीमतों पर भी इसका असर दिखाई दे सकता है.  भारत से भारी मात्रा में कपड़ा, दवा, इंजीनियरिंग सामान और कृषि उत्‍पाद, अमेरिका भेजे जाते हैं. एक्‍सपर्ट्स बता रहे हैं कि Trump Tariff की वजह से इन सामानों से प्रॉफिट मार्जिन घट सकता है, जिसका असर अमेरिका में भारतीय प्रोडक्‍ट्स खरीदने वाले कस्‍टमर्स पर भी पड़ सकता है.  अमेरिका में भी ट्रंप के टैरिफ को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं और कई जगहों पर विरोध भी हुए हैं. बिजनेस टुडे के मुताबिक, हाल ही में एक NRI ने सोशल प्‍लेटफॉर्म रेडिट पर भारतीय आयात पर 25 से 50 फीसदी टैरिफ के संभावित नतीजों को लेकर सवाल उठाया और पूछा कि क्‍या इससे अमेरिका में स्‍थानीय किराना दुकानें प्रभावित हुई हैं और क्‍या भारतीय सामानों की कीमत बढ़ी है? NRI ने लिखा, 'मैं कहीं पढ़ र‍हा था कि पटेल ब्रदर्स और बड़ी कंपनियां टैरिफ के प्रभाव को कम करने के लिए दूसरे साउथ एशियाई देशों से दाल, अनाज और मसाले जैसी चीजें मंगा रही हैं. क्‍या आप अपने शहर की किराने की दुकानों में टैरिफ का कोई खास असर देख रहे हैं?  इस पोस्‍ट के बाद अमेरिका में रहने वाले कई यूजर्स के जवाब आए, जिन्‍होंने जानकारी दी कि अमेरिका के किराना स्‍टोर्स में भारतीय सामानों पर क्‍या असर हुआ है? एक यूजर ने लिखा कि मुझे ज्‍यादा कीमत चुकानी पड़ेगी. मैं बांग्‍लादेश से सांभर या किसी दूसरे देश से दाल नहीं खरीदूंगा. भारत और दूसरे देशों से आने वाले प्रोडक्‍ट्स की क्वालिटी में बहुत फर्क होता है. खासकर एक वेजिटेरियन होने के नाते मैं कभी भी नॉन-इंडियन फूड पर भरोसा नहीं करूंगा कि वे सात्विक है या मेरे परिवार के लिए सही है. लेकिन यह सिर्फ मेरी राय है.  दूसरे यूजर ने बताया कि 7 अगस्‍त से भारत के बंदरगाह से रवाना होने वाले जहाजों के लिए नए टैरिफ लागू होंगे. इसलिए मौजूदा सामान पर कीमतें नहीं बढ़ेंगी. एक तीसरे ने कहा कि ज्यादातर भारतीय किराना दुकानों का मुनाफा मार्जिन काफी अधिक है, इसलिए मुझे लगता है कि शुरुआत में वे इस नुकसान को झेल लेंगे. अगर महीनों तक कोई व्‍यापारिक समझौता नहीं होता है तो यह एक समस्‍या होगी.