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PM मोदी के भाषण में अचानक आया मास्टर सदानंद का नाम, विपक्ष पर साधा गया निशाना

 नई दिल्ली राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजनीतिक हिंसा का जिक्र किया और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को अपमानित करने का भी आरोप लगाया। पीएम मोदी ने इसी बहाने कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कल लोकसभा में राष्ट्रपति के संबोधन पर चर्चा नहीं हो सकी। यह संविधान का अपमान है, आदिवासी परिवार से आई महिला राष्ट्रपति का अपमान है। पीएम ने कहा कि देश के शीर्ष पद पर बैठे शख्स का अपमान करने वाले विपक्ष को संविधान शब्द बोलने का अधिकार नहीं है। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस समेत सभी विपक्षी दलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कल लोकसभा में बड़ी दर्दनाक घटना घटी। सदन में इस तरह का माहौल बना दिया गया कि मंगलवार को आसन पर कागज फेंके गए, तब आसन पर असम के ही एक सदस्य थे। पीएम ने पूछा कि क्या यह असम का अपमान नहीं है? पीएम ने कहा कि कल बुधवार को भी आसन पर कागज फेंके गए, तब आंध्र प्रदेश के एक दलित सदस्य पीठासीन थे। शातिर दिमाग युवराज ने गद्दार कहा पीएम ने आरोप लगाया कि जब भूपेन हजारिका को भारत रत्न दिया गया, तब भी कांग्रेस ने उसका विरोध किया। उन्होंने कहा, "ये असम का विरोध है, पूरे देश के कला प्रेमियों का विरोध है। असम इसे भूलने वाला नहीं है। इसी सदन के एक माननीय सांसद को कांग्रेस के शातिर दिमाग युवराज ने गद्दार कह दिया। अहंकार कितना सातवें आसमान पर पहुंच गया है इनका। कांग्रेस छोड़कर कितने ही लोग निकले हैं, किसी और को नहीं कहा लेकिन ये सिख थे, इसलिए इन्हें गद्दार कहा, ये सिखों का, गुरुओं का अपमान है।" प्रधानमंत्री ने कहा कि सिखों के प्रति उनके मन में जो नफरत भरी पड़ी है, इसी के कारण कल ऐसा कहा गया। उन्होंने कहा कि वह भी ऐसे व्यक्ति को गद्दार कहा गया, जिनका परिवार देश के लिए शहादत देने वाला परिवार रहा है। पीएम ने कहा कि यह दुर्भाग्य की बात है। सिखों के प्रति कांग्रेस के मन में क्या भाव है। मोदी की कब्र खोदना चाहते हैं प्रधानमंत्री ने इसी दौरान एक दूसरे दर्द का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "एक तरफ ये दर्द, दूसरी तरफ सदानंद मास्टर का दर्द है। राजनीतिक द्वेष के कारण भरी जवानी में उनके दोनों पैर काट दिए गए। कटे पैर से जिंदगी गुजार रहे, लेकिन संस्कार इतने ऊंचे हैं कि वाणी में जरा भी कटुता नहीं। उन्होंने जब अपने लिंब को टेबल पर रखा, वह दृष्य़ पीड़ादायक था। हम ऐसे लोगों से ही राजनीति में जीने-मरने की प्रेरणा पाते हैं।" प्रधानमंत्री ने इसके बाद कांग्रेस को मोहब्बूत की तथाकथित दुकान पर भी तंज कसा और कहा कि मोहब्बत की बात करने वाले लोग मोदी की कब्र खोदना चाहते हैं। कौन हैं मास्टर सदानंद, कैसे कटे दोनों पैर? सी. सदानंदन मास्टर (C. Sadanandan Master) केरल के एक प्रमुख शिक्षक, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनेता हैं, जिन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जुलाई 2025 में राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था। वह भारतीय जनता पार्टी की केरल इकाई के उपाध्यक्ष हैं और लंबे समय तक RSS से जुड़े रहे हैं। 25 जनवरी 1994 को, जब वे मात्र 30 वर्ष के थे,तब केरल के कन्नूर जिले में उन पर एक जानलेवा हमला हुआ था। कथित तौर पर कम्युनिस्ट पार्टी (CPIM) के कार्यकर्ताओं ने उनके दोनों पैर काट दिए थे। यह हमला उनकी विचारधारा बदलने (वामपंथ से संघ की ओर) की सजा के तौर पर किया गया था। कृत्रिम पैरों के सहारे खड़े हुए इस भयानक त्रासदी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। वे कृत्रिम पैरों के सहारे खड़े हुए और 25 वर्षों तक त्रिशूर के एक स्कूल में सामाजिक विज्ञान के शिक्षक के रूप में सेवा दी। वे नेशनल टीचर्स यूनियन के उपाध्यक्ष भी रहे हैं। दो दिन पहले ही राज्यसभा में अपने भाषण के दौरान उन्होंने अपनी नकली टांगें टेबल पर रखकर राजनीतिक हिंसा का मुद्दा उठाया, जिसकी देश भर में चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें "साहस का प्रतीक" बताया है। उन्हें भाजपा और संघ के हलकों में एक "जीवित शहीद" के रूप में देखा जाता है। मास्टर सदानंद ने राज्यसभा में बताई थी आपबीती राज्यसभा में सोमवार को अपने संबोधन में सदानंद मास्टर ने बताया कि किस तरह विचारधारा अलग होने के कारण केरल में भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं को अमानवीय यातनाएं सहनी पड़ी हैं। वर्षों से कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमले किए गए, कई लोगों की हत्या हुई और कई को स्थायी शारीरिक नुकसान झेलना पड़ा। उन्होंने अपने भाषण में उन दृश्यों का उल्लेख किया, जिन्हें देखकर ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी का पैर काट देना या केवल वैचारिक असहमति के कारण किसी की जान ले लेना किसी भी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। उन्होंने इस हिंसा को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ बताते हुए कहा कि इसके बावजूद भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं ने धैर्य, साहस और लोकतंत्र में विश्वास बनाए रखा।

गद्दार बयान पर बवाल: सिख पहचान को लेकर राहुल गांधी पर मोदी का पलटवार

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को राहुल गांधी पर बड़ा हमला बोला। पीएम मोदी ने कहा कि राहुल गांधी ने रवनीत बिट्टू को गद्दार कहा, क्योंकि वह सिख हैं। उन्होंने कहा कि यह सिखों का अपमान है। राज्यसभा में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि कल जो हुआ, कांग्रेस के ‘युवराज’ जिनका शातिर दिमाग है, उन्होंने इस सदन के एक सांसद को ‘गद्दार’ कहा। प्रधानमंत्री ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका अहंकार चरम पर है। उन्होंने कांग्रेस छोड़ने वाले किसी और को गद्दार नहीं कहा। लेकिन उन्होंने उस सांसद को गद्दार इसलिए कहा क्योंकि वे एक सिख हैं। यह सिखों का अपमान था, गुरुओं का अपमान था। यह सिखों के प्रति उस नफरत का इजहार था जो कांग्रेस में भरी हुई है। पीएम मोदी ने कहा कि रवनीत बिट्टू उस परिवार के सदस्य हैं, जिसने देश के लिए खुद को कुर्बान कर दिया। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। ऐसे लोग कांग्रेस को डुबो देंगे। क्या हुआ था राहुल गांधी-बिट्टू के बीच गौरतलब है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू के बीच बुधवार को नोक-झोंक देखने को मिली जब संसद परिसर में कांग्रेस नेता ने उन्हें ‘गद्दार’ कहा। इसके जवाब में बिट्टू ने ‘देश का दुश्मन’ कहा। यह घटना संसद के मकर द्वार के निकट उस वक्त हुई, जब संसद के बजट सत्र की शेष अवधि से निलंबित किए गए आठ विपक्षी सांसद प्रदर्शन कर रहे थे। कांग्रेस के सांसद रह चुके बिट्टू संसद भवन में प्रवेश कर रहे थे और यह टिप्पणी करते हुए सुने गए कि ये (प्रदर्शन कर रहे सांसद) जंग जीतकर आए हैं। इस पर, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि देखिए यहां एक गद्दार चला आ रहा है…मेरे गद्दार मित्र, चिंता मत करो, वापस आओगे। सोनिया गांधी का ‘बिगड़ा हुआ बेटा’ बिट्टू ने बाद में राहुल गांधी को कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी का ‘बिगड़ा हुआ बेटा’ करार दिया। भाजपा नेता ने कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने यह बात कई अन्य सांसदों से क्यों नहीं कही, बल्कि केवल एक सिख से ही क्यों कही? बिट्टू ने एक वीडियो संदेश में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि गांधी परिवार खुद को सबसे बड़ा ‘देशभक्त’ मानते हैं क्योंकि उनके पिता (राजीव गांधी) ने अपना जीवन कुर्बान किया था। मैंने पार्टी में यह लड़ाई लड़ी कि मेरे दादा, बेअंत सिंह गांधी परिवार द्वारा लगाई गई आग के कारण पंजाब में शहीद हुए। सिखों के खून से रंगे हैं हाथ सांसद ने आगे दावा किया कि कांग्रेस देश के खिलाफ है और उनके हाथ सिखों के खून से रंगे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरदार और पगड़ी देखकर कांग्रेस नेता ने इस तरह का व्यवहार किया। बिट्टू ने कहा कि यह सरदार गांधी परिवार के उस वंशज से कभी हाथ नहीं मिलाएगा, जो सिखों का हत्यारा है और जिसने गुरुद्वारों को ध्वस्त किया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कांग्रेस में दोबारा शामिल होंगे, तो बिट्टू ने पलटवार किया, ‘वापस आए, मेरी जूती।’ बिट्टू ने कहा कि इस मामले को लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष उठाना होगा क्योंकि वही इसके संरक्षक हैं।  

मलेशिया दौरे पर जाएंगे पीएम मोदी, रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देने की तैयारी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7-8 फरवरी 2026 को मलेशिया की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। इस दौरान वह मलेशिया के प्रधानमंत्री के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत करेंगे। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मलेशिया के प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम ने आमंत्रित किया है। यह प्रधानमंत्री की मलेशिया की तीसरी यात्रा होगी और अगस्त 2024 में भारत-मलेशिया द्विपक्षीय संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' का दर्जा दिए जाने के बाद पहली यात्रा होगी। इस यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे। प्रधानमंत्री भारतीय समुदाय के सदस्यों के साथ-साथ उद्योग और व्यापार प्रतिनिधियों से भी बातचीत करेंगे। प्रधानमंत्री की यात्रा के साथ ही 10वां भारत-मलेशिया सीईओ फोरम भी आयोजित किया जाएगा। भारत और मलेशिया ऐतिहासिक, सभ्यतागत और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित दीर्घकालिक मित्रता साझा करते हैं। मलेशिया में 29 लाख से अधिक भारतीय प्रवासी समुदाय की उपस्थिति से यह संबंध और भी मजबूत होता है, जो विश्व में तीसरा सबसे बड़ा है। भारत-मलेशिया संबंध बहुआयामी और विकसित हो रहे हैं। प्रधानमंत्री की आगामी यात्रा दोनों नेताओं के लिए व्यापार और निवेश, रक्षा, सुरक्षा और समुद्री सहयोग से लेकर डिजिटल और वित्तीय प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन, और जन-संबंधों तक फैले द्विपक्षीय सहयोग के संपूर्ण दायरे की समीक्षा करने का अवसर प्रदान करती है। साथ ही पारस्परिक लाभ के लिए भविष्य में होने वाले सहयोग की रूपरेखा तैयार करने का भी अवसर देती है।

Epstien Files विवाद: दीपक बैज ने PM मोदी का नाम आने का किया दावा, जवाब की मांग

रायपुर जेफ्री एपस्टीन फाइल्स में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी 2017 की इजरायल यात्रा के दावों पर पीसीसी चीफ दीपक बैज का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा कि एपस्टीन फाइल्स मामले में केंद्र सरकार चुप क्यों हैं? सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए. हालांकि इस मामले में भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने स्पष्ट किया है कि इजरायल दौरे के अलावा कही गई बातें एक दोषी की बकवास और निरधार कल्पनाएं है. इसे पूरी तरह तिरस्कार के साथ खारिज किया जाना चाहिए. गरियाबंद हिंसा मामले में पीसीसी चीफ दीपक बैज ने सरकार पर निशाना साधा है. गरियाबंद के फिंगेश्वर में सांप्रदायिक हिंसा को लेकर कहा कि सरकार कहां है, कौन इसका जिम्मेदार है. लॉ एंड ऑर्डर कहां है, सरकार ने आग में झोंक दिया है. समय पर रोक कार्रवाई होती तो इतनी बड़ी घटना नहीं घटती. बैज ने लॉ एंड ऑर्डर खराब होने के चलते घटना घटी की बात कहते हुए न्यायिक जांच की मांग की है. पीसीसी चीफ दीपक बैज ने कहा कि सरकार की तीन नाकामियों को लेकर पीसी कर रहे हैं. धान खरीदी को लेकर किसान परेशान हैं. उन्होंने बताया कि सरकार का घोषित लक्ष्य 165 लाख मीट्रिक टन था. पिछले साल से 9 लाख 15 हजार मीट्रिक टन धान कम खरीदा गया. कई किसानों का पंजीयन हुआ, लेकिन टोकन नहीं दिया गया है. सरकार का रवैया किसानों के प्रति सही नहीं है. बैज ने आरोप लगाया कि किसानों के खिलाफ सरकार लगातार षड्यंत्र कर रही है. 29 जिलों में धान की खरीदी कम हुई है. दीपक बैज ने कहा कि कम धान खरीदी पर सरकार ने जश्न भी मनाया. सरकार छत्तीसगढ़ के किसानों से माफी मांगे. धान खरीदी की तारीख की मांग को दोहराते हुए कहा कि किसानों के लिए कांग्रेस ने सड़को पर उतरकर प्रदर्शन किया, बचे हुए किसानों का टोकन काटने की मांग की. लेकिन गूंगी बहरी सरकार आंख बंद कर चुप रही. किसान परेशान और चिंतित है. बैज ने कहा कि यह हटधर्मिता और किसान विरोधी सरकार है. सरकार का इतना जिद्द ठीक नहीं है. सरकार को एक सर्कुलेशन जारी कर बचे हुए किसानों का धान खरीदना चाहिए. धान खरीदी में सरकार फेल है. पीसीसी चीफ दीपक बैज ने केंद्रीय बजट 2026 को लेकर कहा कि छत्तीसगढ़ को इस बार के बजट में भी ठगा गया. माइनिंग का विशेष कॉरिडोर बनाने का निर्णय हुआ. चहेते उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने वाला बजट है. बजट में छत्तीसगढ़ की उपेक्षा की गई है.

PM मोदी जालंधर में: डेरा सच्चखंड बल्लां में नतमस्तक, आदमपुर एयरपोर्ट को मिला गुरु रविदास का नाम

 जालंधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को आदमपुर एयरपोर्ट का नाम महान संत श्री गुरु रविदास जी के नाम पर रखने का उद्घाटन किया। इस मौके पर डेरा सचखंड बल्लां सहित विभिन्न स्थानों से पहुंची संगत और श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। जैसे ही प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट के नए नाम का औपचारिक ऐलान किया, पूरा परिसर रविदास शक्ति के नारों से गूंज उठा। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने हलवारा एयरपोर्ट का वर्चुअल उद्घाटन भी किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि श्री गुरु रविदास जी का जीवन समरसता, समानता और सामाजिक न्याय का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि गुरु रविदास जी ने अपने विचारों से समाज को नई दिशा दी और भेदभाव के खिलाफ आवाज बुलंद की। आदमपुर एयरपोर्ट का नाम उनके नाम पर रखना, उनकी शिक्षाओं के प्रति सम्मान और आने वाली पीढ़ियों को उनके विचारों से जोड़ने का प्रयास है। इस अवसर पर पंजाब के सामाजिक और धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि, संत समाज, संगत और बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौजूद रहे। संगत ने गुरु रविदास जी की तस्वीरों और झंडों के साथ प्रधानमंत्री का स्वागत किया। पूरे कार्यक्रम में धार्मिक आस्था और सामाजिक सम्मान का संगम साफ नजर आया। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, आदमपुर एयरपोर्ट का नाम श्री गुरु रविदास जी के नाम पर किया जाना पंजाब की दलित राजनीति और सामाजिक चेतना के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है। इसे राज्य में सामाजिक संतुलन और सम्मान की राजनीति के तौर पर देखा जा रहा है। सुबह से ही डेरा परिसर में रौनक बढ़ने लगी और दूर-दराज़ से पहुंची संगत प्रधानमंत्री के स्वागत और देखने को लेकर बेसब्री से इंतजार करती नजर आई। डेरा प्रबंधन और संगत की ओर से पूरे परिसर को भव्य रूप से सजाया गया। गुरु रविदास जी महाराज की शिक्षाओं और संदेशों से जुड़े बैनर-पोस्टर लगाए गए, वहीं सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कड़े और चाक-चौबंद इंतजाम किए गए। प्रधानमंत्री मोदी के आगमन को केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम के रूप में नहीं, बल्कि श्रद्धा, सामाजिक समरसता और दलित चेतना से जुड़े बड़े संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। डेरा सच्चखंड बल्लां, जो गुरु रविदास जी महाराज की विचारधारा का प्रमुख और प्रभावशाली केंद्र है, वहां प्रधानमंत्री की मौजूदगी को संगत ने सम्मान और मान्यता के प्रतीक के रूप में लिया। जय गुरु रविदास के उद्घोष के साथ संगत डेरा परिसर में जुटती रही और पूरा माहौल आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया। वहीं लुधियाना के हलवारा एयरपोर्ट का भी पीएम मोदी उद्घाटन करेंगे। हलवारा एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री राम मोहन नायडू और मुख्यमंत्री भगवंत मान कुछ ही देर में पहुंचने वाले हैं, वाटर प्रूफ टेंट में विशाल मंच सज चूका है और मेहमानों का आना निरंतर जारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आदमपुर एयरपोर्ट से 3.45 पर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट हलवारा का वर्च्युअल उद्घाटन करेंगे। सुरक्षा के इंतजाम पुख्ता प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर सुरक्षा का कड़ा इंतजाम किया गया है। पंजाब पुलिस और एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) के जवान डेरा बल्लां में तैनात हैं। डीजीपी गौरव यादव ने जालंधर में सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। एयरपोर्ट का नाम श्री गुरु रविदास के नाम पर रखा जाएगा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे पहले जालंधर के आदमपुर एयरपोर्ट पर पहुंचेंगे। यहां वे इस एयरपोर्ट का नाम श्री गुरु रविदास जी एयरपोर्ट रखने की घोषणा करेंगे। इसके अलावा वे लुधियाना के हलवारा एयरपोर्ट के नए टर्मिनल का वर्चुअल उद्घाटन भी करेंगे। सुरक्षा कारणों से प्रधानमंत्री के दौरे का पूरा कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया गया है लेकिन सूत्रों के अनुसार पीएम डेरा सचखंड बल्लां में लगभग 40 मिनट रुकेंगे। इस दौरान वे डेरा सचखंड बल्लां के प्रमुख संत निरंजन दास से मुलाकात कर करेंगे। वह एक संक्षिप्त संबोधन भी दे सकते हैं। इस दौरान राज्यपाल, मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता भी डेरा बल्लां पहुंच सकते हैं। जालंधर नो फ्लाइंग जोन घोषित, डीजीपी ने लिया सुरक्षा का जायजा प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर सुरक्षा का कड़ा इंतजाम किया गया है। पंजाब पुलिस और एसपीजी (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप) के जवान डेरा बल्लां में तैनात हैं। डीजीपी गौरव यादव ने जालंधर में सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। सुरक्षा के मद्देनजर 30 जनवरी से 1 फरवरी तक जालंधर को नो फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है। इस अवधि में जिला सीमा के भीतर ड्रोन, हेलिकॉप्टर और अन्य नागरिक विमानन गतिविधियों पर प्रतिबंध रहेगा। जालंधर-पठानकोट हाईवे पर ट्रैफिक डायवर्ट किया जाएगा।

पीएम मोदी बोले—बजट से मजबूत होगी स्किल और सस्टेनेबिलिटी, नागरिक ही देश की सबसे बड़ी पूंजी

नई दिल्ली पीएम मोदी ने रविवार को बजट पर कहा, 'देश में रिफॉर्म एक्सप्रेस चल पड़ी है। जो बदलाव किए गए हैं वो एक्सप्रेशन से भरे हुए भारत के साहसिक प्रतिभाशाली युवाओं को खुला आसमान देते हैं।' उन्होंने कहा कि बजट से रिफॉर्म्स को नई गति मिलेगी। ये स्किल, स्केल और सस्टेनेबिलिटी को मजबूत करने का प्रयास है। सबसे बड़ी पूंजी नागरिक, इसी में निवेश किया। पीएम ने कहा कि यह एक ऐसा यूनिक बजट है, जिसमें फिसकल डेफिसिट कम करने पर फोकस है। इसके साथ बजट में हाई कैपेक्स और हाई ग्रोथ का समन्वय है। यह देश की ग्लोबल भूमिका को नए सिरे सशक्त करता है।

पंजाब दौरे पर जा रहे PM मोदी

जालंधर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज यानी एक फरवरी को बजट को पेश करवाने के बाद शाम को पंजाब दौरे पर जा रहे हैं। पीएम का यह दौरा गुरु रविदास की 649वीं जयंती के अवसर पर रविदसिया समाज के मुख्यालय जालंधर के बल्लां स्थित डेरा सचखंड में हो रहा है। विधानसभा चुनाव के लिए एक साल से भी कम समय बचा है। ऐसे में राज्य की जाति आधारित राजनीति में रविदासिया समाज की भूमिका को देखते हुए पीएम का इस समाज के मुख्यालय पर यह दौरा और भी ज्यादा खास हो गया है। पीएम मोदी के इस दौरे के पहले जालंधर को दहलाने की भी कोशिश की गई थी। यहां के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी मिली थी। हालांकि बाद में वह सब फर्जी साबित हुए। पीएम का यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब भाजपा और उसकी पूर्व क्षेत्रीय सहयोगी पार्टी राज्य में दलित समुदाय को साधने की कोशिश कर रही है। आखिर क्यों अहम है रविदासिया समाज? पंजाब में आने वाले समय में विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा समेत तमाम पार्टियां दलित वोटर्स को लुभाने में लगी हुई है। ऐसे में दोआबा क्षेत्र, जहां पर लगभग 45 फीसदी दलित आबादी रहती है, जो कि पंजाब के औसत 32 फीसदी से कहीं ज्यादा है। इस क्षेत्र में राज्य की 23 विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें बल्लां स्थित डेरे की पकड़ इनमें से करीब 19 सीटों पर है। संसद में बजट पेश करवाने के बाद पंजाब के दौरे पर जा रहे पीएम का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहने वाला है। जालंधर पहुंचने के पीएम मोदी यहां पर आदमपुर एयरपोर्ट का नया नामकरण करेंगे। यह एयरपोर्ट कल के बाद श्री गुरु रविदास जी एयरपोर्ट आदमपुर के नाम से जाना जाएगा। इस एयरपोर्ट का नाम बदलने की मांग काफी पहले से की जा रही थी। केंद्र की सत्ताधारी पार्टी भाजपा हर तरीके से इस समुदाय को खुश करने में लगी हुई है। हाल ही में 26 जनवरी को पद्म पुरस्कार विजेताओं में यहां के डेरा प्रमुख निरंजन दास का नाम भी शामिल था। दलित वोटरों पर भाजपा की नजर भाजपा शुरुआती दौर से ही पंजाब में शिरोमणि अकाली दल की जूनियर बनकर रही है। किसान आंदोलन के बाद राज्य में भाजपा की स्थिति में थोड़ी और गिरावट आई। इसके अलावा शिरोमणि अकाली दल भी साथ छोड़ गया। अब ऐसे में भाजपा का मुख्य फोकस राज्य के दलित वोटरों पर ही है और यही पार्टी के लिए राज्य में खड़े होने की कुंजी भी है। राज्य में पार्टी की इस योजना का असर होते हुए भी दिख रहा है। आंकड़ों की मानें तो 2022 विधानसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर केवल 6.6 फीसदी था, जो कि लोकसभा चुनाव में बढ़कर 18.56 फीसदी हो गया। हालांकि, इसमें किसान आंदोलन के असर का कम होने जैसे फैक्टर भी शामिल हो सकते हैं। विश्लेषकों की मानें तो रविदासिया समुदाय को साधकर भाजपा यहां पर कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाना चाहती है। हालांकि पंजाब की राजनीति पर करीबी से नजर रखने वाले लोगों का मानना है कि पंजाब के दलित मतदाता एकजुट होकर वोट नहीं देते हैं। प्रिंट से बात करते हुए। चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज की डॉ. कंवलप्रीत कौर ने द प्रिंट से कहा, “रविदासिया और अन्य दलित समुदाय एकमुश्त किसी एक पार्टी को वोट नहीं देते। वे स्थानीय मुद्दों, उम्मीदवारों और गठबंधनों के आधार पर रुख बदलते हैं।” उनका कहना है कि समुदाय लंबे समय से अलग पहचान की मांग करता रहा है और बीजेपी इस पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दिलाने की कोशिश कर रही है। भाजपा क्या बोली? राजनीति चाहें कुछ भी कहें लेकिन भाजपा नेतृत्व ने इस दौरे को राजनैतिक चश्मे से न देखने की अपील की है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने कहा, “यह पंजाब के लिए गर्व का क्षण है। प्रधानमंत्री का रविदास जयंती समारोह में शामिल होना सभी समुदायों में एकता का संदेश देता है।” पंजाब बीजेपी अध्यक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि बजट वाले दिन प्रधानमंत्री का यह दौरा “आस्था और सम्मान को दी जा रही प्राथमिकता” को दर्शाता है। जाखड़ ने यह भी दावा किया कि कांग्रेस ने लंबे समय तक इस समुदाय को नजरअंदाज किया।

पंजाब में कल एक और एयरपोर्ट की PM मोदी देंगे सौगात

जालंधर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक फरवरी को श्री गुरु रविदास जी के प्रकाशोत्सव पर जालंधर स्थित डेरा सचखंड बल्लां पहुंच रहे हैं। प्रधानमंत्री करीब 40 मिनट तक डेरे में रुकेंगे। इस दौरान वह संत निरंजन दास जी से आध्यात्मिक चर्चा करेंगे और डेरे की संगत को भी संबोधित करेंगे। प्रधानमंत्री के दौरे के मद्देनजर अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट-कम-अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (ज) अमनिंदर कौर ने 30 जनवरी से एक फरवरी तक जिला जालंधर को ‘नो फ्लाइंग जोन’ घोषित किया है। प्रधानमंत्री इस दौरान डेरा सचखंड बल्लां की ओर से किए जा रहे जनहित कार्यों की भी जानकारी लेंगे। डेरा चिकित्सा, शिक्षा और गुरु रविदास महाराज की बाणी के प्रचार प्रसार के लिए काम कर रहा है। डेरे के गद्दीनशीन संत निरंजन दास जी फिलहाल संगत के साथ श्री गुरु रविदास जी की जन्मस्थली वाराणसी गए हैं। वे रविवार को प्रधानमंत्री के आगमन से पहले वहां से लौट आएंगे। प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) ने डेरा सचखंड बल्लां में सुरक्षा व्यवस्था संभाल ली है। एसपीजी की टीम डेरा और आसपास के इलाके को अपने सुरक्षा घेरे में ले चुकी है। डेरा सचखंड बल्लां में हेलीपैड बनाया गया है। प्रधानमंत्री आदमपुर एयरपोर्ट से डेरा बल्लां तक हेलिकॉप्टर से आएंगे। इमरजेंसी के लिए डीएवी यूनिवर्सिटी में भी एक हेलीपैड बनाया है। आदमपुर एयरपोर्ट का नाम अब गुरु रविदास महाराज सिविल एयरपोर्ट होगा। केंद्र सरकार ने घोषणा पहले ही कर दी थी। प्रधानमंत्री के आने के बाद इसकी औपचारिक शुरुआत हो जाएगी। एयरपोर्ट पर गुरु रविदास महाराज सिविल एयरपोर्ट नाम का बोर्ड लगाने की तैयारी चल रही है। प्रधानमंत्री पंजाब और जालंधर के लिए बड़ी घोषणाएं कर सकते हैं। प्रधानमंत्री जालंधर से ही लुधियाना के हलवारा एयरपोर्ट का वर्चुअल उद्घाटन भी कर सकते हैं।

भारत के विकास में योगदान के लिए पीएम मोदी ने HD देवगौड़ा की तारीफ की

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा से मुलाकात की। इस मुलाकात की जानकारी पीएम मोदी ने खुद दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा से मुलाकात की तस्वीरें साझा कीं। सोशल मीडिया पर शेयर की गई दो तस्वीरों में से एक में पीएम मोदी देवगौड़ा को पुष्पगुच्छ देते हुए नजर आ रहे हैं, जबकि दूसरी तस्वीर में देवगौड़ा के हाथों को पकड़कर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। पीएम मोदी ने एचडी देवगौड़ा के साथ हुई वार्ता की जानकारी देते हुए कहा, "एचडी देवेगौड़ा के साथ बातचीत हुई। अहम मुद्दों पर उनके सार्थक विचार काफी ध्यान देने लायक हैं। भारत के विकास के लिए उनका उत्साह भी उतना ही सराहनीय है।" एचडी देवेगौड़ा 1996-1997 तक भारत के प्रधानमंत्री थे और वर्तमान में वे जनता दल (सेक्युलर) के प्रमुख हैं। उनकी पार्टी एनडीए गठबंधन का हिस्सा है और कर्नाटक में भाजपा के साथ मिलकर काम करती है। देवेगौड़ा लंबे समय से कृषि, ग्रामीण विकास और जल संसाधनों जैसे मुद्दों पर अपनी राय रखते आए हैं। वे कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं और अभी राज्यसभा सदस्य हैं। उनकी उम्र और राजनीतिक अनुभव के कारण उनकी सलाह राजनीतिक हलकों में काफी महत्वपूर्ण मानी जाती है। हाल के वर्षों में दोनों नेताओं के बीच कई बार मुलाकातें और बातचीत हुई हैं, जो एनडीए के सहयोगी दलों के बीच समन्वय को मजबूत करने का संकेत देती हैं। पूर्व प्रधानमंत्री देवेगौड़ा ने अतीत में भी प्रधानमंत्री मोदी की कई योजनाओं की सराहना की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुलाकात सिर्फ सौजन्य नहीं, बल्कि रणनीतिक महत्व भी है। खासकर कर्नाटक जैसे महत्वपूर्ण राज्य में जहां जद(एस) का प्रभाव अभी भी बना हुआ है, और आगामी विधानसभा या अन्य चुनावों को देखते हुए गठबंधन की मजबूती जरूरी है।

शताब्दी समारोह में पीएम मोदी का संदेश: आर्य वैद्यशाला ने आयुर्वेद को दिया नया जीवन

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को केरल स्थित आर्य वैद्यशाला चैरिटेबल अस्पताल के शताब्दी समारोह में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद को सहेजने, संरक्षित करने और आगे बढ़ाने में आर्य वैद्यशाला का महत्वपूर्ण योगदान है। आर्य वैद्यशाला के संस्थापक वैद्यरत्नम पी एस वरियर को याद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आयुर्वेद के प्रति उनका दृष्टिकोण और लोक कल्याण के लिए उनका समर्पण आज भी हमें प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "केरला की आर्य वैद्यशाला, भारत की उस उपचार परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जिसने सदियों से मानवता की सेवा की है। भारत में आयुर्वेद किसी एक काल या एक क्षेत्र में सीमित नहीं रहा। हर दौर में इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति ने जीवन को समझने, संतुलन बनाने और प्रकृति के साथ तालमेल बिठाने का रास्ता दिखाया है। आज आर्य वैद्यशाला 600 से अधिक आयुर्वेदिक औषधियों का निर्माण करती है, देश के अलग-अलग क्षेत्रों में संस्था के अस्पताल आयुर्वेदिक तरीके से मरीजों का इलाज कर रहे हैं, जिनमें दुनिया के 60 से अधिक देशों के मरीज शामिल होते हैं।" उन्होंने कहा कि आर्य वैद्यशाला ने ये भरोसा अपने काम से बनाया है। जब लोग कष्ट में होते हैं, तो आप सभी उनके लिए बहुत बड़ी उम्मीद बनते हैं। पीएम मोदी ने कहा, "आर्य वैद्यशाला के लिए सेवा सिर्फ एक विचार नहीं है। ये भावना उनके कार्य, दृष्टिकोण और संस्था में भी दिखाई देती है। संस्था का चैरिटेबल हॉस्पिटल पिछले 100 वर्षों से निरंतर लोगों की सेवा में जुटा है। इसमें अस्पताल से जुड़े सभी लोगों का योगदान है।" इस कार्य के लिए पीएम मोदी ने अस्पताल के वैद्य, डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य सभी लोगों का अभिनंदन किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने सरकार की पहलों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश में लंबे समय तक प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को साइलो में देखा जाता रहा। पिछले 10-11 सालों में इस अप्रोच में बड़ा बदलाव हुआ है। अब स्वास्थ्य सेवाओं को होलिस्टिक नजरिए से देखा जा रहा है। आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथिक, सिद्ध और योग, इन सबको हम एक छाता के नीचे लाए हैं, और इसके लिए विशेष तौर पर आयुष मंत्रालय बनाया गया है। नेशनल आयुष मिशन के तहत 12 हजार से अधिक आयुष वेलनेस सेंटर्स खोले गए। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार की नीतियों का स्पष्ट प्रभाव आयुष सेक्टर पर दिखाई दिया है। आयुष विनिर्माण क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ा है और इसका विस्तार हुआ है। भारतीय पारंपरिक वेलनेस को दुनिया तक पहुंचाने के लिए सरकार ने आयुष निर्यात संवर्धन परिषद की स्थापना की है। उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि आयुष प्रोडक्ट और सेना को वैश्विक बाजारों में बढ़ावा मिल सके। साल 2014 में भारत से लगभग 3 हजार करोड़ रुपए के आयुष और हर्बल प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट होते थे। वहीं अब भारत से 6500 करोड़ रुपए के आयुष और हर्बल प्रॉडक्ट्स एक्सपोर्ट होने लगे हैं। इसका बहुत बड़ा फायदा देश के किसानों को भी हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आयुर्वेद के माध्यम से भारत में सदियों से इलाज का काम होता रहा है, लेकिन ये भी दुर्भाग्य रहा है कि हमें देश में और ज्यादातर विदेशों में लोगों को आयुर्वेद का महत्व समझाना पड़ता है। इसकी एक बड़ी वजह एविडेंस बेस्ड रिसर्च और रिसर्च पेपरों की कमी है। जब साइंस के सिद्धांतों पर आयुर्वेदिक पद्धति को परखा जाता है, तो लोगों का भरोसा और मजबूत होता है। उन्होंने आह्वान किया कि हमें बदलते समय के अनुसार, आयुर्वेद में आधुनिक टेक्नॉलजी और एआई का उपयोग भी बढ़ाना चाहिए। बीमारी की संभावनाओं का पता लगाने और अलग-अलग पद्धितियों से इलाज के लिए काफी कुछ इनोवेटिव किया जा सकता है।