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रूस का बड़ा बयान: तेल के मुद्दे पर भारतीय दोस्त कभी नहीं बदलेंगे

नई दिल्ली रूस ने कहा है कि इस बात पर भरोसे की कोई वजह नहीं है कि 'दोस्त' भारत अपना रुख बदल सकता है। यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया है कि भारत रूस से तेल की खरीद बंद कर देगा। इससे पहले रूस ने कहा था कि भारत किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए स्वतंत्र है। ट्रंप ने कहा है कि भारत अब अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से तेल खरीदेगा। रूस के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया झाकारोवा ने कहा कि इस बात पर भरोसा करने का कोई कारण नहीं है कि भारत ऐसा कदम उठाएगा। उन्होंने कहा, 'अमेरिका के राष्ट्रपति का किसी स्वतंत्र देश को यह बताना कि वह किसके साथ व्यापार कर सकता है, कोई नई बात नहीं है। रूस के पास इस बात को मानने का कोई कारण नहीं है कि हमारे भारतीय मित्रों ने अपना रुख बदल लिया है।' उन्होंने कहा, 'हम इस बात से सहमत है कि भारत का रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदना दोनों देशों के लिए फायदेमंद है और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनाए रखने में मदद करता है। हम भारत में हमारे साझेदारों के साथ इस क्षेत्र में करीबी सहयोग को जारी रखने के लिए तैयार हैं।' रूस बोला- भारत स्वतंत्र है क्रेमलिन ने  कहा कि भारत किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है और विविधता लाने के उसके फैसले में कुछ भी नया नहीं है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एक सवाल के जवाब में कहा, 'हम और अन्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि रूस, भारत को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने वाला एकमात्र देश नहीं है। भारत हमेशा से अन्य देशों से भी ये उत्पाद खरीदता रहा है, इसलिए हमें इसमें कुछ भी नया नजर नहीं आता।' इससे एक दिन पहले पेसकोव ने स्पष्ट किया था कि रूस को भारत की ओर से रूसी तेल की खरीद बंद करने के संबंध में अब तक कोई आधिकारिक बयान या सूचना प्राप्त नहीं हुई है। रूस के नेशनल एनर्जी सिक्योरिटी फंड के प्रमुख विशेषज्ञ इगोर युशकोव ने कहा कि भारतीय तेल शोधन संयंत्र रूसी कच्चे तेल का आयात पूरी तरह बंद नहीं कर सकते। उन्होंने तकनीकी कारण बताते हुए कहा, 'अमेरिका जिस 'शेल ऑयल' का निर्यात करता है, वह हल्के श्रेणी का होता है। इसके विपरीत, रूस भारी और सल्फर युक्त 'यूराल्स' तेल की आपूर्ति करता है। भारतीय तेल शोधन संयंत्रों के ढांचे के अनुसार, उन्हें अमेरिकी तेल को अन्य श्रेणी के साथ मिलाना होगा, जिससे अतिरिक्त लागत आएगी। ऐसे में रूस के तेल को पूरी तरह अमेरिका से बदलना संभव नहीं होगा।'

यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप का बयान, पुतिन की कीव रणनीति पर मिली आशंका और रूस की चुप्पी

वाशिंगटन  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन की राजधानी कीव और अन्य शहरों पर एक हफ्ते तक हमला न करने पर सहमति जताई है. ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने खुद पुतिन से फोन पर बात कर यह अपील की थी. ट्रंप ने कहा कि यूक्रेन में इस समय कड़ाके की ठंड पड़ रही है, ऐसे में उन्होंने पुतिन से मानवीय आधार पर हमले रोकने को कहा. ट्रंप का कहना है कि पुतिन ने इस पर हामी भर दी. मैंने खुद पुतिन से कहा, उन्होंने मान लिया- ट्रंप व्हाइट हाउस में गुरुवार को हुई एक कैबिनेट मीटिंग के दौरान ट्रंप ने यह दावा किया. उन्होंने कहा कि मैंने राष्ट्रपति पुतिन से व्यक्तिगत तौर पर कहा कि एक हफ्ते तक कीव और अन्य शहरों पर हमला न करें, और उन्होंने ऐसा करने पर सहमति दी. मुझे कहना होगा, यह बहुत अच्छा था. ट्रंप ने यह भी बताया कि यह बातचीत फोन कॉल के जरिए हुई थी, लेकिन इस कॉल की जानकारी पहले सार्वजनिक नहीं की गई थी. ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि यह एक हफ्ते की रोक कब से और कब तक लागू होगी. रूस की तरफ से अब तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हालांकि ट्रंप के इस दावे पर रूस की सरकार ने अब तक कोई पुष्टि नहीं की है. मॉस्को की तरफ से यह नहीं कहा गया है कि वह कीव या अन्य यूक्रेनी शहरों पर हमले रोकने जा रहा है. खास बात यह भी है कि रूस ने यह साफ नहीं किया है कि वह यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले रोकने को तैयार है या नहीं. जेलेंस्की ने कहा सीजफायर की सीधे तौर पर पुष्टि नहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी इस कथित सीजफायर की सीधे तौर पर पुष्टि नहीं की. हालांकि उन्होंने ट्रंप के बयान को अहम बताया. जेलेंस्की ने कहा कि ट्रंप का बयान इस सर्दी के कठिन समय में कीव और अन्य यूक्रेनी शहरों की सुरक्षा को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है. यानी यूक्रेन ने बयान का स्वागत तो किया, लेकिन जमीन पर हमले रुकने की पुष्टि नहीं की. रूस ने जेलेंस्की को मॉस्को आने का न्योता दिया इसी बीच रूस ने गुरुवार को कहा कि उसने यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को शांति वार्ता के लिए मॉस्को आने का इनविटेशन भेजा है. यह कदम ऐसे समय आया है जब अमेरिका की अगुवाई में युद्ध खत्म करने की कोशिशें तेज हो गई हैं. यह बयान उस वक्त आया जब क्रेमलिन ने उन खबरों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जिनमें कहा जा रहा था कि रूस और यूक्रेन ने एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमला न करने पर सहमति बना ली है. अबू धाबी में हुई थी शांति वार्ता  पिछले सप्ताह अमेरिका की मध्यस्थता में अबू धाबी में शांति वार्ता हुई थी. इन बातचीतों का मकसद करीब चार साल से चल रहे यूक्रेन युद्ध को खत्म करने का रास्ता निकालना था. हालांकि इन वार्ताओं के बाद भी रूस और यूक्रेन के रुख में बड़े मतभेद बने हुए हैं, जिस वजह से किसी ठोस समझौते पर सहमति नहीं बन पाई है.

पुतिन के दिल में जगह बनाने वाली महिला, क्या रूस-यूक्रेन संघर्ष को खत्म कर सकती हैं?

मॉस्को  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने रफ-टफ अंदाज के लिए पहचाने जाते हैं. उनसे यूरोप-अमेरिका सब जरा डरकर चलते हैं. हालांकि, वो कई बार पुतिन का सॉफ्ट साइड भी दुनिया को हैरान कर देता है. ऐसी है एक नजारा तब देखने को मिला था जब पुतिन से एक दिन अचानक उनके बचपन की टीचर टकरा गई थीं. पुतिन ने उन्हें देखते ही गले लगा लिया और रूसी राष्ट्रपति के चेहरे पर वो स्माइल देखने को मिली जो बेहद रेयर है. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि ये टीचर एकलौती महिला हैं, जो पुतिन को जंग रोकने के लिए राजी कर सकती हैं. कौन है पुतिन की जिंदगी की ये अहम महिला? पुतिन की इन टीचर का नाम वेरा दिमित्रीवना गुरेविच है, जिन्होंने पुतिन को बचपन के बुरे दौर से रूस का राष्ट्रपति बनते हुए देखा है और उन्हें यहां तक पहुंचने में मदद भी की है. अपनी आत्मकथा ‘व्लादिमीर पुतिन: माता-पिता: दोस्त: शिक्षक’ में वेरा ने बताया कि पुतिन स्कूल में कुछ शरारती बच्चों की संगत में आ गए थे, जिनका बुरा प्रभाव पड़ा था. पुतिन बचपन में बेहद फुर्तीले, बेचैन और ऊर्जा से भरे थे. वो एक जगह स्थिर होकर नहीं बैठते थे. पुतिन लगातार अपने क्लासमेट की नोटबुक में इधर-उधर देखते रहते थे और बार-बार उनका पेन-पेंसिल डेस्क के नीचे गिरती रहती थी. वेरा ने बताया बचपन में कैसे थे पुतिन? वेरा बताती हैं कि ‘पुतिन आसानी से झगड़ों में पड़ जाते थे और अपराधी पर झपट पड़ते, अपना पूरा वजन उस पर डालकर उसे पकड़ लेते, जैसे कोई बुलडॉग लड़ता हो’. वेरा सितंबर 1964 में, गुरविच पुतिन के घर गई थीं, जहां उन्होंने देखा कि एक 11 साल का बच्चा चूहों और कीड़े-मकोड़ों से भरे घर में जिंदगी बिता रहा है. पुतिन इस घर में दिन भर अकेले रहते थे और शाम 5 बजे तक उन्हें देखने वाला कोई नहीं होता था. कैसे बदली थी पुतिन की जिंदगी गुरविच ने उस बच्चे से कहा था ‘बस करो, अब और आवारागर्दी मत करो, पढ़ाई में लग जाओ’. ये सुनकर पुतिन ने पुतिन ने जवाब दिया कि ‘अगर वो चाहें तो अपना सारा होमवर्क एक घंटे में कर सकते हैं’. वेरा गुरविच समझ गईं कि इस पुतिन को मोटीवेशन की जरूरत है. उन्होंने पुतिन के गार्जियन की भूमिका निभाई और बदले में, पुतिन ने गुरविच की बेटियों की देखभाल करके अपना आभार व्यक्त किया. पुतिन कई बार अपनी टीचर के घर पर ही रुक जाते थे और खूब पढ़ाई करते थे. यही वजह है कि आगे जाकर उन्होंने कानून की डिग्री लेने का फैसला किया. रोक सकती है रूस-यूक्रेन जंग पुतिन आज भी अपनी इस टीचर को हर रिश्ते से बढ़कर सम्मान और प्यार देते हैं. कहा जाता है कि वो आज भी जिंदगी के हर बड़े फैसले के बारे में अपनी 88 वर्षीय टीचर वेरा से जरूर बात करते हैं. ऐसे में कई लोगों का मानना है कि सिर्फ यही महिला है जो पुतिन को जंग रोकने के लिए मना सकती है.

‘परमाणु हथियारों से लैस सैन्य शासन है पाकिस्तान’—पुतिन की बुश से बातचीत का खुलासा

वाशिंगटन पाकिस्तान के परमाणु संयंत्र को लेकर पश्चिमी देशों और रूस की चिंता नई नहीं है। अब इस पर मुहर लगाती हुई अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी आर्काइव की गोपनीय जानकारी साझा की गई हैं। आर्काइव की तरफ से 2001 से लेकर 2008 के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश के बीच हुई निजी जानकारी को सार्वजनिक किया गया है। इन दस्तावेजों में पुतिन और बुश दोनों ही पाकिस्तानी परमाणु अस्थिरता को लेकर अपनी चिंता जाहिर करते नजर आते हैं। दस्तावेजों के मुताबिक जून 2001 में स्लोवेनिया में हुई अपनी पहली व्यक्तिगत मुलाकात में पुतिन पाकिस्तान की आलोचना करते उसे एक परमाणु हथियार से संपन्न जुंटा (सैन्य शासन) बताया था। जारी किए गए दस्तावेजों के मुताबिक बाहर से भले ही अमेरिका 9/11 के बाद पाकिस्तान से अपनी साझेदारी बढ़ा रहा था, लेकिन वह पाकिस्तान की परमाणु शक्ति से चिंतित भी था। इसी बातचीत में पुतिन ने खास तौर पर पश्चिमी देशों की यह कहते हुए आलोचना की थी कि वह पाकिस्तान के ऊपर लोकतंत्र का दबाव बनाने में नाकामयाब रहे। पुतिन और बुश के बीच यह बातचीत जिस समय में हो रही थी, उस समय दुनिया को इस बात की जानकारी नहीं थी कि क्या पाकिस्तान के परमाणु कार्यक्रम के जनक कहे जाने वाले ए.क्यू.खान इसकी डिजाइन को किसी को बेच रहे हैं। हालांकि दोनों ही परमाणु ताकत के प्रसार के खिलाफ दिखाई देते हैं। बुश और पुतिन की बातचीत इन दस्तावेजों में सबसे अहम रूप से दोनों ही देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते हैं। पुतिन कहते हैं कि अभी तक यह साफ नहीं है कि ईरान के पास प्रयोगशालाओं में क्या है और वह कहां है लेकिन उनका पाकिस्तान के साथ सहयोग मौजूद है। इस पर बुश कहते हैं, 'मैंने इस बारे में मुशर्रफ से बात की है। मैंने उनसे कहा कि हमें ईरान और उत्तर कोरिया को ट्रांसफर को लेकर चिंता है। उन्होंने ए. क्यू. खान और उसके कुछ साथियों को जेल में डाला, फिर हाउस अरेस्ट में रखा। हम जानना चाहते हैं कि उन्हें क्या बताया गया है। मैं मुशर्रफ को लगातार याद दिलाता रहता हूं। या तो उन्हें कुछ पता नहीं है या फिर वे पूरी जानकारी नहीं दे रहे हैं।" इसका जवाब देते हुए पुतिन कहते हैं, 'मेरी समझ के मुताबिक सेंट्रीफ्यूज में पाकिस्तानी मूल का यूरेनियम मिला है।' इस पर बुश ने कहा,' हां, वही चीज जिसके बारे में ईरान ने आईएईए को नहीं बताया था। यह नियमों का उल्लंघन है। पुतिन-वह पाकिस्तानी मूल का था, यह मुझे परेशान करता है। बुश-हमें भी यह बात परेशान करती है। पुतिन- हमारे बारे में भी सोचिए बुश-हमें परमाणु हथियारों लिए ढेर सारे धार्मिक उन्मादी नहीं चाहिए, ईरान में तो वही सरकार चला रहे हैं। गौरतलब है कि पाकिस्तान को लेकर भारत यह बात शुरुआत से ही कहता आ रहा है। लेकिन वैश्विक राजनीति की वजह से अमेरिका पाकिस्तान का समर्थन करते नजर आता है। अफगानिस्तान में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के दौरान अमेरिका ने पाकिस्तान के हजारों गुनाह माफ किए, क्योंकि उस वक्त उसे पाकिस्तान की जरूरत थी। बाइडन प्रशासन के दौर में जैसे ही अमेरिकी सैनिक पाकिस्तान से बाहर निकले, वाशिंगटन में इस्लामाबाद की पहुंच कमजोर हो गई। शुरुआत में खबरें यह तक आईं कि बाइडन ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री का फोन उठाना बंद कर दिया है। हालांकि, राजनीति ने फिर करवट ली और पाकिस्तान आज के समय में एक बार फिर से अमेरिका की गोद में जाकर बैठ गया है।

यूरोपीय देशों पर पुतिन का हमला: कहा—बदले की कोशिश नाकाम, कभी पूरा नहीं होगा उनका मंसूबा

रूस  रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों, खासकर यूरोपीय यूनियन पर खुलकर हमला बोलते हुए उन्हें ‘छोटे सूअर’ करार दिया। एक टेलीविज़न संबोधन में पुतिन ने यूरोप पर रूस की कथित कमजोरी का फायदा उठाने और पुराने हिसाब चुकता करने की नाकाम कोशिश का आरोप लगाया।  पुतिन ने एक टेलीविज़न संबोधन में यूरोपीय देशों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यूरोप ने अमेरिका के बाइडन प्रशासन के साथ मिलकर रूस के पतन से फायदा उठाने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें पूरी तरह नाकाम रहा। पुतिन ने यूरोपीय नेताओं का मज़ाक उड़ाते हुए उन्हें “यूरोपीय छोटे सूअर” बताया और कहा कि वे ऐतिहासिक बदले की भावना से प्रेरित होकर रूस के खिलाफ खड़े हुए लेकिन रूस को दबाने का उनका सपना कभी पूरा नहीं होगा। पुतिन ने कहा, “यूरोप के ‘छोटे सूअर’ बाइडेन प्रशासन के साथ मिलकर इस उम्मीद में काम कर रहे थे कि हमारे देश के पतन से उन्हें लाभ मिलेगा। वे वह सब वापस लेना चाहते थे, जो वे इतिहास के पिछले दौर में खो चुके हैं। यह बदले की कोशिश थी, जो असफल रही।” हालांकि कड़े और अपमानजनक शब्दों के तुरंत बाद पुतिन ने एक बार फिर कूटनीति का दरवाज़ा खुला रखने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि रूस पहले की तरह बातचीत और शांतिपूर्ण समाधान के लिए तैयार है। पुतिन ने यह भी जोड़ा कि अमेरिकी प्रशासन इस दिशा में कुछ हद तक तैयार दिखाई दे रहा है, और रूस को उम्मीद है कि यूरोप भी इसी रास्ते पर आगे बढ़ेगा। विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन का यह बयान पश्चिम के खिलाफ आक्रामक नैरेटिव को मजबूत करने के साथ-साथ यह संदेश भी देता है कि रूस खुद को वैश्विक मंच पर अलग-थलग नहीं देखना चाहता।

पुतिन दिल्ली में करेंगे बड़ी डील, पश्चिम से टकराव पर चर्चा, पांच लेयर सुरक्षा के बीच भारत पहुंचे राष्ट्रपति

नई दिल्ली रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दो दिवसीय भारत यात्रा आज से शुरू हो रही है और दिल्ली इस हाई-प्रोफाइल विजिट के लिए पूरी तरह तैयार है. यूक्रेन युद्ध के बाद यह पुतिन की पहली भारत यात्रा है, इसलिए कूटनीतिक, सुरक्षा और लॉजिस्टिक स्तर पर बेहद सख्त व्यवस्थाएं की गई हैं. शहर के कई हिस्सों में उनके स्वागत के लिए फ्लेक्स बोर्ड और रूसी झंडे लगा दिए गए हैं, जबकि ट्रैफिक डायवर्जन और सुरक्षा कवच पहले से लागू कर दिए गए हैं. पुतिन की यात्रा के कारण ट्रैफिक डायवर्जन पुतिन आज शाम दिल्ली पहुंचेंगे और एयरपोर्ट से सीधे सरदार पटेल मार्ग स्थित होटल जाएंगे. इस दौरान एनएच–S, धौला कुआं और दिल्ली कैंट के आसपास ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है. शाम को ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें प्राइवेट डिनर पर होस्ट करेंगे, जिसके कारण सरदार पटेल मार्ग, पंचशील मार्ग और शांति पथ के आसपास भी वाहनों की आवाजाही धीमी रहेगी. दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा कारणों से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की है, लेकिन दावा किया है कि ट्रैफिक को लंबी अवधि तक ब्लॉक नहीं रखा जाएगा. शुक्रवार को हालात और चुनौतीपूर्ण होंगे क्योंकि पुतिन का पूरा दिन लगातार कार्यक्रमों से भरा है. सुबह वह राजघाट जाएंगे, इसके बाद हैदराबाद हाउस में औपचारिक बैठकें होंगी. दोपहर में भारत मंडपम् में कार्यक्रम तय है, जबकि शाम को राष्ट्रपति भवन में स्टेट बैंक्वेट का आयोजन होगा. इन गतिविधियों के चलते राजघाट, आईटीओ, रिंग रोड, तिलक मार्ग, इंडिया गेट, भैरो रोड, मथुरा रोड, मंडी हाउस और दिल्ली गेट जैसे इलाकों में ट्रैफिक रुक-रुक कर चलता रह सकता है. जरूरत पड़ने पर कुछ मेट्रो स्टेशनों पर एंट्री और एग्जिट अस्थायी रूप से रोकी जा सकती है. पुतिन की सिक्योरिटी कैसी होगी? इधर सुरक्षा इंतजाम भी अपनी चरमसीमा पर हैं. पुतिन की हर विदेश यात्रा की तरह इस दौरे में भी उनकी सुरक्षा के लिए मल्टी-लेयर कवच तैयार किया गया है. पांच-स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था में NSG कमांडो, स्नाइपर्स, जैमर, ड्रोन सर्विलांस और AI आधारित निगरानी तकनीक तैनात की गई है. महत्वपूर्ण जगहों पर हाई-टेक फेशियल रिकग्निशन कैमरे लगाए गए हैं. 40 से ज्यादा रूसी सुरक्षा अधिकारी दिल्ली पहुंचकर NSG और दिल्ली पुलिस के साथ मिलकर काफिले की हर गतिविधि पर नजर रख रहे हैं. पीएम मोदी के साथ बैठक के दौरान एसपीजी का विशेष सुरक्षा घेरा भी सक्रिय रहेगा. इस यात्रा को भारत-रूस संबंधों के लिए अहम मोड़ माना जा रहा है. शुक्रवार को होने वाली 23वीं वार्षिक शिखर बैठक में रक्षा सहयोग, ऊर्जा, व्यापार और अमेरिकी प्रतिबंधों के प्रभाव जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होनी है. राजधानी में तैयारियों की रफ्तार और सुरक्षा का स्तर बताता है कि यह यात्रा सिर्फ कूटनीतिक नहीं, बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है. रूस को 10 लाख मजदूरों की जरूरत, पुतिन दिल्‍ली में करेंगे बड़ी डील इस दौरे पर पुतिन भारत के साथ मजदूरों को लेकर इजरायल की तरह से ही बड़ी डील कर सकते हैं। दोनों देश सामाजिक और मजदूरों से जुड़े मुद्दे पर सहयोग करेंगे। रूस की योजना है कि 10 लाख विदेशी मजदूरों की भर्ती की जाए। इसमें भारत भी शामिल है। रूस लेबर म‍िनिस्‍ट्री का मानना है कि साल 2030 तक देश में मजदूरों की यह कमी 31 लाख तक पहुंच सकती है। विश्‍लेषकों का कहना है कि रूसी के हजारों युवा यूक्रेन युद्ध में मारे जा चुके हैं और देश के फिर से निर्माण के लिए अब लाखों लोगों की जरूरत है। वह भी तब जब रूस में आबादी कम हो रही है और लोग बच्‍चे कम पैदा कर रहे हैं। रूसी राष्‍ट्रपति ने देश में बच्‍चे पैदा करने पर भारी आर्थिक सहायता मुहैया कराने का ऐलान किया है। रूस में अब तक मध्‍य एशिया के देशों से लाखों रूसी बोलने वाले लोग काम करने जाते रहे हैं लेकिन इससे मास्‍को को सुरक्षा को लेकर खतरा महसूस होता रहा है। यही वजह है कि रूस अब 7 लाख से ज्‍यादा मध्‍य एशिया के विदेशी मजदूरों से मुक्ति पाना चाहता है। इस प्रक्रिया की शुरुआत तब तेज हुई जब मास्‍को में मार्च 2024 में आतंकी हमला हुआ। पश्चिम से टकराव गहरा होगा? PM Modi से इन मुद्दों पर होगी चर्चा अमेरिका का दबाव और रूस के साथ मजबूरी यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत पर अमेरिका लगातार दबाव बना रहा है कि वह रूस से तेल आयात घटाए और अमेरिकी उत्पादों व रक्षा उपकरणों के लिए अपने बाजार खोले. वहीं दूसरी तरफ रूस भारत के लिए सस्ता तेल, हथियारों की सप्लाई और रणनीतिक सुरक्षा का बड़ा स्रोत बना हुआ है. GTRI के मुताबिक, “पुतिन की यह यात्रा शीत युद्ध की याद में की जा रही कोई औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि यह जोखिम, सप्लाई चेन और आर्थिक सुरक्षा को लेकर सीधी बातचीत है. यह किसी एक पक्ष को चुनने की नहीं, बल्कि टूटती वैश्विक व्यवस्था में संतुलन बनाए रखने की रणनीति है.” भारत-रूस रिश्तों की ऐतिहासिक मजबूती भारत और रूस की दोस्ती की जड़ें शीत युद्ध के दौर तक फैली हैं. 1971 के भारत-पाक युद्ध के समय अमेरिका ने पाकिस्तान का साथ दिया और USS एंटरप्राइज भेजा. तब सोवियत संघ ने भारत को हथियार, कूटनीतिक सुरक्षा और संयुक्त राष्ट्र में समर्थन दिया. 1962 के चीन युद्ध के बाद भी रूस भारत के साथ खड़ा रहा. 1998 के परमाणु परीक्षण के बाद जब पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए, तब भी रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा साझेदार बना रहा. आज भी भारत के 60 से 70% सैन्य प्लेटफॉर्म रूसी तकनीक पर आधारित हैं। तीन स्तंभों पर टिका भारत-रूस रिश्ता GTRI के अनुसार, आज भारत-रूस संबंध तीन मुख्य स्तंभों पर टिके हैं— 1- ऊर्जा (Energy)     रूस अब भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बन चुका है.     2024 में रूस से भारत की कुल तेल खरीद का हिस्सा 37% से ज्यादा रहा.     2021 में जहां भारत ने रूस से सिर्फ 2.3 अरब डॉलर का तेल खरीदा था.     वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 52.7 अरब डॉलर पहुंच गया.     यूक्रेन युद्ध के बाद रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूसी तेल सस्ते दामों पर एशियाई बाजारों की ओर मुड़ गया, जिससे भारत को भारी फायदा हुआ.  2- रक्षा (Defence) … Read more

एंटी-ड्रोन गन्स से लेकर फेस रिकग्निशन तक—भारत में पुतिन की सुरक्षा होगी फ़ुल हाई-टेक

 नई दिल्ली रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के चार साल बाद भारत दौरे को लेकर दिल्ली पूरी तरह सतर्क हो गई है. 4-5 दिसंबर को होने वाले इस दो दिवसीय दौरे के लिए राजधानी को किले में बदल दिया गया है. लगभग 130 सदस्यीय रूसी प्रतिनिधिमंडल के साथ पुतिन के आने से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं. दिल्ली पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां, पैरामिलिट्री फोर्सेस और रूसी स्पेशल फोर्सेस मिलकर मल्टी-लेयर सिक्योरिटी रिंग तैयार कर चुकी हैं. हाल ही में दिल्ली में हुए ब्लास्ट की घटना के बाद सुरक्षा पहले से ही हाई अलर्ट पर थी, अब पुतिन के दौरे के लिए अतिरिक्त सावधानियां बरती जा रही हैं.   पुतिन का दौरा: क्या है प्लान? पुतिन का यह दौरा भारत-रूस के 23वें वार्षिक समिट के लिए है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्योते पर वे 4 दिसंबर को दिल्ली पहुंचेंगे. पहले दिन शाम को पीएम मोदी के साथ प्राइवेट डिनर होगा, उसके बाद द्विपक्षीय बातचीत. 5 दिसंबर को बिजनेस मीटिंग्स और स्टेट बैनक्वेट (राजकीय भोज) का कार्यक्रम है. एजेंडा में रक्षा, ऊर्जा, स्पेस और ट्रेड पर फोकस होगा. रूस S-400 मिसाइल सिस्टम की नई डील, Su-57 फाइटर जेट्स और तेल निर्यात बढ़ाने की बात करेगा. यह दौरा यूक्रेन युद्ध के बाद पुतिन का पहला भारत दौरा है, जो दोनों देशों की दोस्ती को मजबूत करेगा. सुरक्षा का मल्टी-लेयर जाल: कोई चूक नहीं होगी दिल्ली को हाई सिक्योरिटी जोन बना दिया गया है. रूसी एडवांस सिक्योरिटी टीम के 50 से ज्यादा सदस्य पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं. उन्होंने रूट्स, वेन्यूज और पूरी सिक्योरिटी प्लानिंग चेक की है. रूसी स्पेशल फोर्सेस आंतरिक सर्कल में रहेंगी, जबकि भारतीय फोर्सेस के साथ तालमेल बिठाएंगी.    भारतीय एजेंसियां: दिल्ली पुलिस, सेंट्रल सिक्योरिटी, पैरामिलिट्री और एनएसजी कमांडोज मुख्य भूमिका निभाएंगे. एसडब्ल्यूएटी टीम्स, एंटी-टेरर स्क्वॉड्स और क्विक रिएक्शन फोर्सेस को रणनीतिक जगहों पर तैनात किया गया है. ये तुरंत किसी भी खतरे का जवाब देंगी.  रूसी सिक्योरिटी: पुतिन की पर्सनल सिक्योरिटी में 50+ जवान हैं. उनका खाना रूस से ही आएगा. कई चेक के बाद ही परोसा जाएगा. उनके साथ पोर्टेबल सिक्योरिटी किट भी है, जो कार और होटल में रहेगी.     ट्रैफिक और एरिया कंट्रोल: दिल्ली पुलिस के टॉप ऑफिसर्स ट्रैफिक मैनेजमेंट और एरिया सैनिटाइजेशन देखेंगे. पुतिन के कन्वॉय के रास्ते पर ट्रैफिक डायवर्जन होगा लेकिन आम लोगों को कम परेशानी हो, इसके लिए एडवाइजरी जारी की जाएगी.  सभी जगहों को पहले से साफ-सुथरा और सुरक्षित बनाया जा रहा है. पुतिन के ठहरने की जगह की डिटेल्स सिक्योरिटी कारणों से गुप्त रखी गई हैं. टेक्नोलॉजी से निगरानी: ड्रोन, सीसीटीवी और एंटी-ड्रोन गन्स सुरक्षा सिर्फ इंसानों पर नहीं, टेक्नोलॉजी पर भी निर्भर है. मिनट-टू-मिनट रीयल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक उपकरण लगाए गए हैं…     एंटी-ड्रोन गन्स: हवाई खतरे से बचाव के लिए ड्रोन को मार गिराने वाली गन्स तैनात.       मूविंग ड्रोन सर्विलांस: हवा में ड्रोन उड़ाकर लगातार नजर रखी जा रही है.       सीसीटीवी और सिग्नल मॉनिटरिंग: रूसी डेलिगेशन पर एरियल, सिग्नल और ग्राउंड लेवल की निगरानी. फेस रिकग्निशन कैमरे कन्वॉय को ट्रैक करेंगे. दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम में 24×7 मॉनिटरिंग डेस्क बनी है. सभी एजेंसियां रीयल-टाइम कोऑर्डिनेशन करेंगी, ताकि कोई गलती न हो. हाल के दिल्ली ब्लास्ट के बाद ये इंतजाम और सख्त हो गए हैं.  हाल के ब्लास्ट का असर: अतिरिक्त सावधानियां नवंबर 2025 में दिल्ली में हुए ब्लास्ट ने सुरक्षा एजेंसियों को और अलर्ट कर दिया. उसके बाद से ही हाई अलर्ट था, लेकिन पुतिन के दौरे के लिए दो दिनों के लिए अतिरिक्त प्रोटोकॉल लागू किए गए. खुफिया एजेंसियां किसी भी संभावित खतरे पर नजर रख रही हैं. विशेषज्ञ कहते हैं, पुतिन की सिक्योरिटी दुनिया की सबसे सख्त है, इसलिए भारत-रूस का संयुक्त प्रयास फूलप्रूफ होगा.  मजबूत दोस्ती का संदेश यह दौरा भारत-रूस की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई देगा. रक्षा में Su-57 जेट्स, ऊर्जा में तेल डील और ट्रेड में नई संभावनाएं खुलेंगी. लेकिन सुरक्षा पहले, इसलिए दिल्ली किले जैसी हो गई है. पुतिन के आने पर सबकी नजरें टिकी हैं. क्या होगा बड़ा ऐलान? जल्द पता चलेगा.  

भारत-रूस संबंधों में नई गति? पुतिन के आगमन से पहले मिले मजबूत आर्थिक संकेत

नई दिल्ली  भारत के दौरे पर आ रहे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहले ही ये संकेत दे दिए हैं कि भारत के साथ उनके व्यापारिक संबंधों में कमी नहीं आने जा रही है. उनका ये बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को काटता है, जिसमें वे कई बार कह चुके हैं कि भारत अगले कुछ महीनों में रूस के साथ तेल के व्यापार को घटाने वाला है. व्लादिमीर पुतिन की ओर से दिए गए बयान ने साफ कर दिया है कि भारत-रूस के बीच ट्रेड बढ़ने वाला है और इसका फायदा भारतीय अर्थव्यवस्था को जरुर होगा. रूसी राष्ट्रपति का दौरा ऐसे वक्त में भारत में हो रहा है, जब रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत, अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ की मार झेल रहा है. इस दौरे के जरिये पुतिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ये मैसेज देना चाहते हैं कि भारत-रूस के संबंधों पर किसी भी टैरिफ का असर नहीं पड़ेगा, हालांकि रूस से मानता है कि मौजूदा हालात में भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव झेल रहा है. रूस की ओर से इसकी आलोचना भी की गई है. भारत को मालामाल करने वाले हैं पुतिन व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि वे भारत दौरे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ऊर्जा, उद्योग, अंतरिक्ष, कृषि और कई अन्य क्षेत्रों में चल रहे नए संयुक्त प्रोजेक्ट पर बात करेंगे. वे इस दिशा में चल रहे प्रयासों पर विस्तार से चर्चा करेंगे- खासकर भारतीय सामानों के आयात को बढ़ाने को लेकर. पुतिन की ओर से कहा गया है कि उनका लक्ष्य चीन और भारत दोनों के साथ सहयोग को एक नए और उच्च स्तर तक ले जाना है. उन्होंने कहा है कि पिछले तीन वर्षों में रूस ने भारत और चीन जैसे विश्वसनीय और बड़े साझेदार देशों के साथ व्यापार को काफी बढ़ाया है और वे इसे आगे ले जाना चाहते हैं. पुतिन का ये आत्मविश्वास पश्चिमी देशों को चेताने वाला है. भारत के लिए रूस का निर्यात बाजार और खुल सकता है. उनका यह बयान भारत के साथ ट्रेड रिलेशन को लेकर बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि अमेरिका ने भारतीय सामानों को उसके बाजार में ले जाने पर भारी शुल्क लगा रखा है. पश्चिमी देशों को पुतिन का मैसेज भारत के साथ दोस्ती को लेकर पुतिन ने साफ तौर पर कहा है कि उनके बीच कई वर्षों से गहरी दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी है, जो लगातार मजबूत हो रही है. उन्होंने अपने पश्चिमी देशों की नीतियों की आलोचना पर मुखर होकर कहा है कि आज की दुनिया अत्यधिक उथल-पुथल से गुजर रही है, जिसका कारण है पश्चिम की ओर से कुछ बाजारों पर जबरन एकाधिकार स्थापित करना. उन्होंने भारत के संदर्भ में कहा कि पश्चिम उन देशों पर दबाव डाल रहा है, जो स्वतंत्र और स्वायत्त नीतियां अपनाते हैं. पुतिन के मुताबिक पश्चिम किसी भी तरह की प्रतिस्पर्धा को बाजार से खत्म करना चाहता है.

अंतरराष्ट्रीय तनाव बढ़ा: ट्रंप ने दागी मिसाइल, पुतिन ने किया युद्ध का संकेत

मॉस्को  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बुधवार को परमाणु हथियार परीक्षण दोबाना शुरू करने को कह दिया है. उन्होंने न्यूक्लियर टेस्ट के लिए प्रस्ताव तैयार करने का आदेश दिया है. ये आदेश पुतिन का ऐलान-ए-जंग माना जा रहा है क्योंकि कुछ घंटों पहले ही अमेरिका ने अपनी न्यूक्लियर मिसाइल दागी है. पिछले हफ्ते ट्रंप ने ये दावा करते हुए अमेरिका में न्यूक्लियर टेस्ट शुरू करवाया था कि रूस, चीन और पाकिस्तान परमाणु परीक्षण करवा रहे हैं. इसके बाद पुतिन ने भी जवाबी कार्रवाई करनी शुरू कर दी है. उन्होंने ट्रंप को न्यूक्लियर टेस्ट बैन समझौता भी याद दिलाया है. Putin क्यों हुए आग बबूला? पुतिन ने कहा कि रूस ने हमेशा व्यापक परमाणु परीक्षण बैन समझौते (CTBT) के तहत अपने दायित्वों का सख्ती से पालन किया है, लेकिन अगर संयुक्त राज्य अमेरिका या कोई अन्य परमाणु शक्ति देश ऐसे हथियार का परीक्षण करता है, तो रूस भी ऐसा जरूर करेगा. पुतिन ने कहा, ‘मैं विदेश मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय… विशेष सेवाओं और संबंधित नागरिक एजेंसियों को निर्देश दे रहा हूं कि वे इस मुद्दे पर अतिरिक्त जानकारी जुटाने, सुरक्षा परिषद में इसका विश्लेषण करने, और परमाणु हथियार परीक्षणों की तैयारी के लिए काम शुरू करें और सहमत प्रस्ताव बनाने के लिए हर संभव प्रयास करें’. Russia कहां करेगा न्यूक्लियर हथियारों का परीक्षण? रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव ने पुतिन को बताया कि अमेरिका की हालिया टिप्पणियों और एक्शन्स को देखते हुए ‘बड़े पैमाने पर परमाणु परीक्षणों की तैयारी तुरंत करना सही कदम होगा’. बेलौसोव ने कहा कि रूस के आर्कटिक परीक्षण स्थल नोवाया जेमल्या (Novaya Zemlya) में जल्द ही परमाणु हथियारों के परीक्षण का काम शुरू किया जाएगा. America ने ऐसा क्या किया? बता दें कि हाल ही में अमेरिका ने भी 50 साल पुरानी न्यूक्लियर मिसाइल Minuteman 3 का परीक्षण किया है. इस मिसाइल की रेंज 14000 किमी बताई जा रही है, यानी ये रूस और चीन जैसे देशों तक आसानी से पहुंच सकती है. अमेरिका ने ये भी कह दिया है कि मिनटमैन 3 को रिप्लेस करने वाले वर्जन को तैयार किया जा रहा है, जो 2030 तक पूरा होगा और तब तक ऐसे परीक्षण चलते रहेंगे.

भारत-अर्कटिक कनेक्शन: पुतिन की पहल से चीन को टक्कर, बर्फीले मार्ग की अहमियत

मॉस्को/ नईदिल्ली  वैश्विक भू-राजनीति के बदलते परिदृश्य में, रूस और भारत के बीच सदियों पुरानी दोस्ती एक बार फिर नई ऊंचाइयों को छूने वाली है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की दिसंबर में प्रस्तावित भारत यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी, बल्कि आर्कटिक क्षेत्र में एक ऐतिहासिक समझौते की नींव भी रखेगी। यह समझौता नॉर्दर्न सी रूट (NSR) और संसाधन विकास पर केंद्रित होगा जो भारत को आर्कटिक परिषद में बड़ी भूमिका दिलाने का मार्ग प्रशस्त कर सकता है। यह कदम न केवल आर्थिक अवसरों के द्वार खोलेगा, बल्कि चीन की बढ़ती आर्कटिक महत्वाकांक्षाओं के बीच रूस के लिए एक रणनीतिक संतुलन भी साबित होगा। पारंपरिक दक्षिणी समुद्री मार्गों की तुलना में छोटा यह मार्ग ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, नई दिल्ली की नॉर्दर्न सी रूट के विकास में संभावित भागीदारी को लेकर बातचीत चल रही है और संभावना है कि इस साल होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन में इस दिशा में ठोस परिणाम सामने आ सकते हैं। नॉर्दर्न सी रूट रूस के उत्तरी तट के साथ आर्कटिक महासागर से होकर गुजरता है और पारंपरिक दक्षिणी समुद्री मार्गों की तुलना में करीब 40% छोटा है। इस मार्ग से यूरोप और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के बीच तेज, सुरक्षित और किफायती कार्गो परिवहन संभव हो सकेगा। जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉस्को यात्रा के दौरान दोनों देशों ने आर्कटिक शिपिंग में सहयोग की संभावनाओं को लेकर एक संयुक्त कार्य समूह बनाने पर सहमति जताई थी। यह समूह रूस के विशेष आर्कटिक विकास प्रतिनिधि व्लादिमीर पानोव (Rosatom) और भारत के नौवहन मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा की संयुक्त अध्यक्षता में काम कर रहा है। इस कार्य समूह की पहली बैठक अक्टूबर 2024 में नई दिल्ली में हुई, जिसमें आर्कटिक जहाज निर्माण परियोजनाओं में साझेदारी, भारतीय नाविकों को ध्रुवीय नौवहन प्रशिक्षण देने, और एनएसआर पर कार्गो शिपिंग सहयोग के लिए एक एमओयू तैयार करने पर चर्चा हुई। भारत को आर्कटिक काउंसिल में बड़ी भूमिका देना चाहता है रूस सूत्रों के अनुसार, रूस चाहता है कि भारत को आर्कटिक काउंसिल में अधिक प्रभावशाली भूमिका दी जाए। इसका एक प्रमुख कारण यह है कि मॉस्को क्षेत्र में चीन के बढ़ते दखल को संतुलित करना चाहता है। आर्कटिक इलाका जीवाश्म ईंधन और महत्वपूर्ण खनिजों से समृद्ध है, जिससे रूस और भारत दोनों के लिए यह रणनीतिक रूप से अहम बनता है। इसके साथ ही रूस इस बात पर भी जोर दे रहा है कि नॉर्दर्न सी रूट को ईरान के चाबहार बंदरगाह से जोड़ा जाए। भारत ने इस बंदरगाह के संचालन की जिम्मेदारी अगले दस वर्षों के लिए हासिल की है। रूस इस बंदरगाह का इस्तेमाल भारतीय महासागर क्षेत्र तक पहुंच के लिए करना चाहता है। पुतिन के आगामी भारत दौरे से उम्मीद की जा रही है कि भारत-रूस आर्कटिक सहयोग में एक नया अध्याय शुरू होगा, जो न केवल आर्थिक दृष्टि से बल्कि सामरिक दृष्टिकोण से भी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। आर्कटिक: वैश्विक व्यापार का नया गेटवे आर्कटिक क्षेत्र पृथ्वी के सबसे ठंडे और संसाधन-समृद्ध इलाकों में से एक है। यह आज जलवायु परिवर्तन के कारण तेजी से पिघल रहा है। इससे न केवल नए शिपिंग मार्ग खुल रहे हैं, बल्कि तेल, गैस, दुर्लभ खनिजों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों तक पहुंच भी आसान हो रही है। रूस आर्कटिक महासागर के 53 प्रतिशत तट को नियंत्रित करता है। वह इस क्षेत्र में अपनी प्रभुता कायम रखने के लिए सक्रिय है। 2024 में NSR से 37 मिलियन टन से अधिक माल ढोया गया, जो 2025 में और बढ़ने की उम्मीद है। भारत के लिए यह अवसर सुनहरा है। स्वेज कनाल या पनामा चैनल जैसे पारंपरिक मार्गों की तुलना में NSR एशिया और यूरोप के बीच यात्रा को 40 प्रतिशत छोटा कर देता है। इससे न केवल ईंधन की बचत होगी, बल्कि व्यापारिक लागत भी घटेगी। रूसी स्रोतों के अनुसार, पुतिन की यात्रा के दौरान NSR के उपयोग पर ठोस कार्रवाई की योजना बनेगी। इसमें भारत को रूसी आइसब्रेकर बेड़े (जिसमें 40 आइसब्रेकर और 8 न्यूक्लियर-संचालित जहाज शामिल हैं) का सहयोग मिलेगा। यह कदम चीन की 'पोलर सिल्क रोड' महत्वाकांक्षाओं का मुकाबला करने के लिए रूस की रणनीति का हिस्सा है। आर्कटिक में चीन की बढ़ती उपस्थिति रूस के लिए चुनौती बनी हुई है, और भारत का प्रवेश एक संतुलनकारी शक्ति के रूप में काम करेगा। भारत-रूस संबंध: इतिहास से वर्तमान तक भारत और रूस के बीच संबंध सोवियत काल से ही विशेष रहे हैं। 1971 के भारत-पाक युद्ध में सोवियत संघ का समर्थन हो या आज रूस का S-400 मिसाइल सिस्टम, दोनों देशों की साझेदारी रक्षा, ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में अटूट रही है। 2024 में द्विपक्षीय व्यापार 63 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें रूसी तेल भारत का सबसे बड़ा आयात स्रोत बना। यूक्रेन संघर्ष के बावजूद, भारत ने रूसी ऊर्जा पर निर्भरता बनाए रखी, जिसकी आलोचना अमेरिका ने की। लेकिन राष्ट्रपति पुतिन ने हाल ही में वलदाई चर्चा क्लब में कहा, "भारत हमारे ऊर्जा वाहकों को अस्वीकार करे तो उसे 9-10 अरब डॉलर का नुकसान होगा। हमारी साझेदारी मजबूत है।" पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "प्रिय मित्र" और "बुद्धिमान नेता" कहा, जो देश की भलाई के बारे में सोचते हैं।