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SIR फॉर्म 2025: MP में भाग और क्रमांक संख्या कैसे पता करें, पढ़ें स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

भोपाल  मध्य प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। बीएलओ लोगों के घर पर फॉर्म देकर आ रहे हैं। लेकिन इस फॉर्म को भरने में बड़ी भारी उलझन है। सबसे ज्यादा कंफ्यूजन लोगों को रिश्तेदारों और परिजनों के कॉलम में हो रही है। इसमें उनका इपिक नंबर के साथ-साथ भाग संख्या और क्रमांक संख्या भरना होता है। ऐसे में लोगों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि यह होता क्या है, इसके बाद बीएलओ को सूचित करते हैं, तब उन्हें जानकारी मिलती है। आइए हम आपको बताते हैं कि फॉर्म भरने के दौरान आपको भाग संख्या और क्रमाक संख्या कहां मिलेगा। यहां हो रही है परेशानी दरअसल, एसआईआर के लिए सभी मतदाताओं को फॉर्म दिया जा रहा है। फॉर्म के सबसे ऊपरी भाग में मतदाताओं को अपना विवरण देना हैं। यहां तक लोगों को कोई समस्या नहीं होती है। इसके बाद नीचे में दो कॉलम हैं। बायीं ओर वाले कॉलम को मतदाता को खुद का विवरण भरना है। अगर वह 2003 के एसआईआर के समय मतदाता रहा हो। अगर आप नहीं रहें तो दायीं ओर वाले कॉलम में आपको उनके रिश्तेदारों या परिजनों के विवरण भरने हैं, जो 2003 में मतदाता रहे हों। इसी विवरण के दौरान भाग और क्रमांक संख्या की जरूरत इसी दौरान मतदाताओं को अपने रिश्तेदारों या परिजनों को भाग और क्रमांक संख्या की जरूरत पड़ती है। रिश्तेदारों या परिजनों से जब आप इसकी जानकारी मांगते हैं तो उन्हें भी नहीं पता होता है। उनके पास सिर्फ इपिक होता है और इपिक में मतदाता के बारे में ही जानकारी होती है। यहां से सिर्फ आपको उनका इपिक नंबर और विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानकारी मिल सकती है। कहां से मिलेगा भाग और क्रमांक संख्या आइए हम आपको बताते हैं कि कहां से आपको भाग संख्या और क्रमांक संख्या मिलेगा। इसके लिए आपको सिंपल स्टेप्स को फॉलो करना है। सबसे पहले आपको मोबाइल के प्ले स्टोर में जाना है। वहां जाकर आपको वोटर हेल्पलाइन टाइप करना है। टाइप करने के बाद प्ले स्टोर के इंटरफेस पर यह एप आ जाएगा। इसके बाद इसे डाउनलोड करना है।  एप डाउनलोड करने के बाद इसको खोलना है। इसे खोलना के बाद ऊपर में आपको सर्च बार दिखेगा। सर्च बार पर आप जैसे ही क्लिक करेंगे तो नया इंटरफेस खुलेगा। यहां पर आपको चार ऑप्शन मिलेगा। इसमें पहले होगा कि आप मोबाइल नंबर के जरिए सर्च करिए। दूसरा बार कोड के जरिए, तीसरा अपना डिटेल्स डालकर सर्च करें। वहीं, चौथा ऑप्शन ज्यादा इजी है, इसमें सिर्फ आपको अपना इपिक नंबर डालना होगा। इसलिए हमें इपिक नंबर वाले ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।  इसमें इपिक नंबर भरने के बाद सर्च टैब को दबा दीजिए। भाग संख्या और क्रमांक संख्या आपको मिल गया भाग और क्रमांक नंबर वहीं, इपिक नंबर वाले पर क्लिक करने के बाद आपके सामने नया इंटरफेस होगा। इसमें इपिक नंबर भरने का ऑप्शन आएगा। इपिक नंबर भरने के बाद सर्च ऑप्शन पर क्लिक कर दें। इस पर क्लिक करते ही आपका पूरा डिटेल आ जाएगा। इसमें में जो पार्ट नंबर होगा वह आपका भाग संख्या होगा। वहीं, सीरियल नंबर आपका क्रमांक संख्या होगा। इस तरह से आप बिना परेशानी फॉर्म भर सकते हैं।  

गणना पत्रक भरने के लिए आवश्यक नहीं किसी भी प्रकार का ओटीपी

सीईओ श्री संजीव कुमार झा ने किया मतदाताओं को सतर्क भोपाल  एसआईआर-2026 के दौरान गणना पत्रक भरने के लिए बीएलओ या किसी भी अन्य अधिकारी द्वारा किसी भी माध्यम से ओटीपी मांगे जाने की आवश्यकता नहीं है। मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री संजीव कुमार झा ने मतदाताओं को सतर्क करते हुए बताया है कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में स्वयं, माता-पिता या दादा-दादी संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए मतदाता अपने क्षेत्र के बीएलओ अथवा नजदीकी हेल्पडेस्क से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा जानकारी ऑनलाइन voters.eci.gov.in या ceoelection.mp.gov.in पर भी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने नागरिकों से अनुरोध किया है कि एसआईआर पत्रक भरते समय सुरक्षा उपायों का पालन करें। आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर ही एसआईआर भरें। ये हैं सुरक्षा उपाय ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें। एसआईआर की प्रक्रिया में निर्वाचन विभाग या किसी अधिकारी द्वारा फोन/मैसेज पर ओटीपी, आधार नंबर, मोबाइल नंबर आदि मांगना प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। यदि कोई इस तरह की जानकारी माँगता है तो वह 'साइबर फ्रॉड कॉल' हो सकता है। एसआईआर भरते समय इन बातों का रखें ध्यान एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है। किसी भी प्रकार की फीस, प्रोसेसिंग चार्ज या भुगतान करने के लिए कहे जाने पर ध्यान दें-ऐसे संदेश/कॉल धोखाधड़ी हो सकते हैं। व्हॉट्सऐप या सोशल मीडिया पर मिले लिंक न खोलें। 'आपका वोटर कार्ड रद्द हो जाएगा', 'तुरंत एसआईआर भरें' जैसे संदेश फर्जी हो सकते हैं। एसआईआर के लिये साइबर कैफे का उपयोग करते समय सतर्क रहें। ऑटो-सेव बंद रखें, कार्य समाप्त होने पर ब्राउजर इतिहास/कैश साफ़ करें और अनिवार्य रूप से लॉगआउट करें। किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल: www.cybercrime.gov.in अथवा हेल्पलाइन: 1930 पर करें।  

लोकतंत्र सशक्तिकरण में जुटा पूरा मैदानी अमला

एसआईआर 2026 को समय सीमा में पूर्ण करने के लिये बीएलओ और शासकीय सेवक पूरे मनोयोग से कार्यरत भोपाल  मध्यप्रदेश में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR 2026) का कार्य भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रमानुसार जारी है। 4 नवंबर से 4 दिसंबर 2025 तक गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन को समय पर पूरा करने के लिए बीएलओ सहित पूरा मैदानी अमला पूर्ण निष्ठा और मनोयोग से कार्य में जुटा है। प्रत्येक बीएलओ को कार्य में सहयोग प्रदान करने के लिए 2 से 3 सदस्यों की टीम लगाई गई है। इनमें ऐसे शासकीय सेवक शामिल हैं जिन्हें क्षेत्र और वहां के निवासियों की बेहतर जानकारी हो—जैसे पटवारी, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक आदि। इसके साथ ही गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन के लिए कंप्यूटर ऑपरेटरों की अलग टीम भी तैनात की गई है। मतदाताओं के मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए राज्य स्तर और सभी जिलों में हेल्प डेस्क स्थापित की गई हैं। साथ ही राज्य का टोल-फ्री नंबर 1950 भी सक्रिय रूप से संचालित है। कार्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन और समय पर कार्य पूर्ण करने वाले बीएलओ को राज्य एवं जिला स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है, जिससे अन्य बीएलओ भी प्रेरित हों और कार्य की गति एवं गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो।  

SIR सिस्टम ने कर दिखाया कमाल: 37 साल बाद मिला लापता बड़ा बेटा, पढ़िए पूरी कहानी

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में SIR के दौरान एक कमाल की घटना हुई। मतदाता सूची की संशोधन प्रक्रिया ने लगभग चार दशक से बिछड़े एक परिवार को फिर से मिला दिया। चक्रवर्ती परिवार ने 1988 में अपने बड़े बेटे विवेक चक्रवर्ती को खो दिया था। घर से निकलने के बाद विवेक का कोई अता-पता नहीं चला। बरसों तक खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अब तक उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि कभी फिर मिलन होगा। मगर, एसआईआर अभियान ने वो दरवाजा खोल दिया जो वे बंद समझ चुके थे।   विवेक के छोटे भाई का नाम प्रदीप चक्रवर्ती है। वह उसी इलाके के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) हैं। एसआईआर के दौरान हर फॉर्म पर उनका नाम और मोबाइल नंबर छपा था। विवेक का बेटा कोलकाता में रहता है जो अपने चाचा के बारे में कुछ नहीं जानता था। उसने दस्तावेजों के लिए मदद मांगने की खातिर प्रदीप को फोन किया। पहले कागजात को लेकर बातें हुईं, लेकिन धीरे-धीरे परिवार की कड़ियां जुड़ने लगीं। प्रदीप ने बताया, 'मेरा बड़ा भाई आखिरी बार 1988 में घर आया था। उसके बाद से गायब है। हमने हर जगह ढूंढा। मगर, उसने सारे रिश्ते तोड़ दिए। जब इस लड़के के जवाब हमारे परिवार की उन बातों से मिलने लगे जो सिर्फ हम ही जानते हैं, तब मुझे एहसास हुआ कि मैं अपने भतीजे से बात कर रहा हूं।' आखिर कैसे खुला पूरा राज इस तरह 37 साल से लापता चक्रवर्ती परिवार का बड़ा बेटा मिल गया। दोनों तरफ खुशी की लहर थी। इसके बाद प्रदीप ने खुद विवेक से बात की। 37 साल की खामोशी के बाद दो भाइयों की आवाजें एक-दूसरे तक पहुंचीं। भावुक होकर विवेक ने कहा, 'इस भावना को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। 37 लंबे साल बाद मैं आखिरकार घर लौट रहा हूं। मैंने घर के सभी लोगों से बात कर ली है। खुशी से भरा हुआ हूं। मैं चुनाव आयोग को धन्यवाद देता हूं, क्योंकि एसआईआर प्रक्रिया न होती तो यह मिलन कभी संभव नहीं होता।' इस तरह मतदाता सूची संशोधन अभियान ने न सिर्फ वोटर लिस्ट को दुरुस्त किया, बल्कि एक टूटे परिवार को फिर से जोड़ दिया।  

भोपाल में SMD और BLO के लिए खास योजना, टारगेट पूरा करने पर ट्रॉफी-सर्टिफिकेट और हर दिन सम्मान

भोपाल  भोपाल में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में अब टारगेट पूरा करने पर इनाम भी मिलेंगे। एसडीएम, तहसीलदार और बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) हर दिन 'स्टार ऑफ द डे' भी बनेंगे। बकायदा, उनकी उपलब्धि की जानकारी ऑफिस के सूचना पटल पर लगाई जाएगी।  4 नवंबर से एसआईआर सर्वे शुरू हुआ है। अब तक की स्थिति में भोपाल जिले की स्थिति काफी खराब है। सात विधानसभा सीटों में 21 लाख 25 हजार 908 वोटर हैं। इनमें से 20.87 लाख फॉर्म बांटे जा चुके हैं, लेकिन, वापस 4.15 लाख फॉर्म ही आए हैं। यह 20% से भी कम हैं, जबकि सर्वे को आधा महीना से ज्यादा बीत चुका है। इसलिए अब वोटर्स की सुविधा के लिए नए पोर्टल की लॉन्चिंग हो या सख्ती करना, सब कुछ हो रहा है। अब ईआरओ, एईआरओ और बीएलओ को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा। इसकी शुरुआत शनिवार से ही हो जाएगी। हर रोज का टारगेट तय किया भोपाल में 7 विधानसभा- बैरसिया, भोपाल उत्तर, नरेला, भोपाल दक्षिण-पश्चिम, भोपाल मध्य, गोविंदपुरा और हुजूर है। इनमें कार्य करने वाले 2029 बीएलओ, सभी ईआरओ यानी एसडीएम, एईआरओ यानी तहसीलदारों को प्रोत्साहन के दायरे में शामिल किया गया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने यह पहल की है। इसके तहत 22 से 28 नवंबर तक हर रोज का टारगेट फिक्स किया गया है। जैसे- 22 नवंबर को बीएलओ को 50% फॉर्म डिजिटाइजेशन करना है तो एसडीएम-तहसीलदारों को प्रति बीएलओ से औसत 75 गणना पत्र डिजिटाइजेशन करवाना होगा। दूसरे-तीसरे दिन यह टारगेट बढ़ेगा। इसके पीछे मकसद यह है कि फॉर्म लेने और फिर उनका डिजिटाइजेशन करने के काम में तेजी आए। हर रोज 10 बजे के आंकड़ों के हिसाब से प्रोत्साहन मिलेगा उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता ने बताया, हर रोज सुबह 10 बजे की स्थिति में लक्ष्य प्राप्त करने वालों को ऑनलाइन रिपोर्ट के आधार पर पुरस्कार के रूप में प्रमाण पत्र और प्रतीक चिह्न दिया जाएगा। इसके साथ स्टार ऑफ द डे का नाम संबंधित एसडीएम और तहसीलदार के ऑफिस में चस्पा किया जाएगा। ताकि, अन्य कर्मचारियों को भी प्रोत्साहन मिले और वे भी अच्छा काम करें। भोपाल में डाटा खोजने के लिए पोर्टल भी बना भोपाल में 2003 के डाटा को खोजने के लिए पोर्टल बनाया गया है। इसमें सभी विधानसभा की वोटर लिस्ट अपडेट है। वोटर पोर्टल पर जाकर सूची देख सकेंगे। इससे उन्हें एसआईआर फॉर्म भरने में आसानी होगी। इस पोर्टल के जरिए मतदाता मोहल्ले के नाम के आधार पर भी 2003 की मतदाता सूची खोज सकते हैं। कलेक्टर सिंह ने बताया कि भोपाल के मतदाताओं के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य को सरल एवं सुगम बनाने की सुविधा दी गई है। https://sirbhopal.com पोर्टल के माध्यम से मतदाता साल 2003 की वोटर लिस्ट में अपना नाम खोज सकते हैं। वहीं, मध्यप्रदेश के किसी भी जिले के किसी भी विधानसभा की सूची डाउनलोड कर सकते हैं। मतदान केंद्र BLO की जानकारी भी प्राप्त कर सकते हैं।

मतदाता सूची 2003: MP ऑनलाइन, CSC और लोक सेवा केंद्र देंगे सहयोग

ग्वालियर भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत निर्वाचक नामावली के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR ) का कार्य मध्य प्रदेश में जारी है, इसमें एक बड़ी समस्या 2003 की मतदाता सूची में अपने नाम का पता लगाना है लोगों की शिकायतें हैं कि चुनाव आयोग की वेबसाईट खुलती नहीं है, कई बार फाइल डाउन लोड नहीं होती, ग्वालियर जिला प्रशासन ने इसका हल खोज निकाला है। ग्वालियर जिले में मतदाताओं के सहयोग के लिये जिला प्रशासन की पहल पर वर्ष 2003 की मतदाता सूची में अपना या अपने परिजन का नाम पता लगाने में लोक सेवा केन्द्र, सीएससी (कॉमन सर्विस सेंटर) एवं एमपी ऑनलाइन सेंटर भी मतदाताओं की मदद करेंगे। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकार की पहल पर इन सेंटरों के संचालक एसआईआर कार्य में सहयोग देने के लिये आगे आए हैं। MP Online, CSC संचालक नाम पता करने में करेंगे मदद  अपर जिला दण्डाधिकारी सी बी प्रसाद ने बीते रोज एमपी ऑनलाइन के संभागीय प्रबंधक व सीएससी प्रबंधकों एवं एमपी ऑनलाइन सेंटर के प्रतिनिधियों की बैठक ली थी। जिसमें एमपी ऑनलाइन सेंटर व सीएससी सेंटर के संचालकों ने वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम पता करवाने में मदद करने का भरोसा दिलाया है। जनमित्र केन्द्रों में मतदाता सहायता केन्द्र बता दें जिले में एसआईआर (निर्वाचक नामावली का विशेष गहन पुनरीक्षण) के संबंध में ग्वालियर शहर के सभी जनमित्र केन्द्रों में मतदाता सहायता केन्द्र बनाए गए हैं। मतदाता अपना ईएफ (एन्यूमरेशन फॉर्म) भरने में इन केन्द्रों की सहायता ले सकते हैं। साथ ही यहीं से वर्ष 2003 की मतदाता सूची में अपने नाम की स्थिति जान सकते हैं। जनमित्र केन्द्रों के अलावा अब एमपी ऑनलाइन सेंटर, लोक सेवा केन्द्र व सीएससी सेंटर पर भी मतदाताओं को यह सुविधा उपलब्ध होगी। BLO ने घर घर जाकर उपलब्ध कराये हैं फॉर्म  एसआईआर के तहत बीएलओ द्वारा अपने क्षेत्र के मतदाताओं को ईएफ (एन्यूमरेशन फॉर्म) उपलब्ध कराए गए हैं। यह फॉर्म मतदाता द्वारा भरे जाने हैं। साथ ही ईएफ में वर्ष 2003 की स्थिति की तुलनात्मक जानकारी की प्रविष्टि भी की जानी है। SIR से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिये नोडल अधिकारी जिले में भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के तहत किए जा रहे एसआईआर (मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण) कार्य से संबंधित शिकायतों के निराकरण के लिये विशेष व्यवस्था की गई है। सहायक संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग राहुल पाठक को शिकायतों का निराकरण कराकर निर्वाचन आयोग को प्रतिवेदन भेजने के लिये नोडल अधिकारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही उनके अधीन चार शासकीय कर्मचारियों को नियुक्त किया गया है।

एमपी जेलों में 46 हजार कैदियों के बीच एनआरआई भी पड़ सकते हैं परेशान, एसआईआर ने बढ़ाई टेंशन

भोपाल  मध्य प्रदेश समेत देश के 12 राज्यों में मतदाताओं का विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान यानि एसआईआर शुरू हो गया है. इसमें बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं की वोटर लिस्ट का मिलान कर रहे हैं. लेकिन मिलान साल 2003 की मतदाता सूची से किया जा रहा है. ऐसे में कई लोगों को अगले चुनाव में मताधिकार से वंचित रहना पड़ सकता है. इस समस्या को लेकर अब तक सरकार ने कोई दिशा-निर्देश भी जारी नहीं किया है. ऐसे समझें एसआईआर की प्रक्रिया एसआईआर का मतलब है मतदाता सूची का विशेष गहन निरीक्षण यानि मतदाता सूची को अपडेट कर वास्तविक मतदाताओं की पहचान करना. इसके लिए बीएलओ घर-घर जाकर मतदाताओं को गणना पत्र वितरित कर रहे हैं. मतदाताओं द्वारा इस फार्म को भरकर बीएलओ को वापस लौटाना अनिवार्य है. अन्यथा मतदाता सूची से नाम काटा जा सकता है. एसआईआर में यहां उलझ रहा पेंच दरअसल प्रत्येक मतदाता को जो फार्म दिया गया है, उसमें जन्मतिथि, माता-पिता का नाम, आधार नंबर, मोबाइल नंबर भरना है. इसके साथ ही पुरानी वोटर लिस्ट का एपीआईसी नंबर भी दर्ज करना होगा. फार्म के साथ एक पासपोर्ट साइज फोटो भी लगानी है. खास बात यह है कि वर्तमान वोटर लिस्ट को वर्ष 2003 की लिस्ट से मिलाया जा रहा है. लेकिन कई लोग ऐसे हैं, जो साल 2003 में किसी और स्थान पर थे, लेकिन अब कहीं और निवास कर रहे हैं, ऐसे में उन लोगों के लिए एसआईआर प्रक्रिया चुनौती बन सकती है. सरकारी और सेवानिवृत्त कर्मचारियों को टेंशन कर्मचारी नेता उमाशंकर तिवारी ने बताया कि सेंट्रल गवर्नमेंट और राज्य के लाखों ऐसे कर्मचारी हैं, जो साल 2003 में किसी और जिले में पदस्थ थे. उन्होंने उस समय कहीं और वोट डाला था. लेकिन आप ट्रांसफर के बाद किसी और जिले में पदस्थ हो गए हैं या फिर ऐसे सेवानिवृत्त कर्मचारी जो सेवाकाल में किसी और शहर में थे और रिटायरमेंट के बाद किसी और शहर में बस गए हैं. ऐसे लोगों को साल 2003 की मतदाता सूची से वोटर लिस्ट का मिलान कराना बड़ी कठिनाई प्रक्रिया होगी. 46 हजार कैदियों का सत्यापन अधर में जिला प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि एसआईआर प्रक्रिया में व्यक्ति की प्रत्यक्ष मौजूदगी जरूरी नहीं होती है. वह व्यक्ति कहीं भी रहे, लेकिन उसके परिजन या प्रतिनिधि साल 2003 की मतदाता सूची के साथ वर्तमान सूची का मिलान कर फार्म भरकर बीएलओ को दे सकते हैं. लेकिन मध्य प्रदेश की जेलों में बंद करीब 46 हजार कैदियों लिए यह काम काफी कठिन है. यही कठिनाई एनआरआई या प्रवासियों के साथ है. क्योंकि इन लोगों के परिजन या रिश्तेदार यदि दूसरे राज्यों में रहते हैं, तो उन्हें फार्म भरने और जमा करने में काफी संघर्ष करना पड़ सकता है. ऑनलाइन फार्म भर सकते हैं एनआरआई जो लोग लंबे समय से विदेश में रह रहे है, उनके परिजनों को गणना प्रपत्र में उनकी जानकारी देना होगी. 2003 की वोटर लिस्ट में अगर उनका या उनके माता-पिता का नाम है तो वह यह फार्म भर सकते है. यदि उन्होंने दूसरे देश की नागरिकता ले ली है तो वे वोटिंग लिस्ट से बाहर कर दिए जाएंगे. हालांकि यदि फिजिकल फार्म नहीं भर सकते, तो ऐसी परिस्थिति में एनआरआई ऑनलाइन फार्म भी भर सकते है. अधिकारी भी नहीं दे रहे जबाव इस मामले में जब गोविंदपुरा एसडीएम रवीश श्रीवास्तव से बात की गई, तो उन्होंने जानकारी नहीं होने की बात कही. वहीं डिप्टी डीईओ भी इसका जबाव नहीं दे सके. वहीं इस मामले में जेल डीजी वरुण कपूर का कहना है कि इलेक्शन कमीशन से अभी जेलों में बंद कैदियों के एसआईआर को लेकर कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है. इस संबंध वही जानकारी दे पाएंगे. 

चुनाव आयोग की सख्ती के बाद मध्यप्रदेश ने डिजिटाइज किए 9.72% गणना पत्रक, गोवा रही सबसे आगे

भोपाल  मध्यप्रदेश में चुनाव आयोग की सख्ती के बाद अब तक कुल 9.72 प्रतिशत गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। चुनाव आयोग द्वारा इसको लेकर रोज की जा रही समीक्षा के आधार पर एमपी का नम्बर देश के 12 राज्यों में कराई जा रही एसआईआर की कार्यवाही में छठे स्थान पर।  चुनाव आयोग द्वारा सोमवार को दोपहर बाद तीन बजे तक की स्थिति में जारी गणना पत्रक वितरण और डिजिटाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार देश के राज्य 12 राज्यों में कराई जा रही एसआईआर की कार्यवाही में मध्य प्रदेश का परफॉर्मेंस छठे स्थान पर है। चुनाव आयोग द्वारा एसआईआर गणना पत्र के वितरण और गणना पत्र के डिजिटाइजेशन को लेकर जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य प्रदेश में गणना पत्रक वितरण 99.63% और डिजिटाइजेशन की कार्रवाई 9.72% हुई है। रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश में 5 करोड़ 74 लाख 6 हजार 143 वोटर्स में से 5 करोड़ 71 लाख 94 हजार 700 वोटर्स को गणना पत्रक बांटे जा चुके हैं। इसके साथ ही 55 लाख 81 हजार 488 गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। देश के 12 राज्यों में की जा रही एसआईआर की कार्रवाई की तुलनात्मक रिपोर्ट से पता चलता है कि मध्य प्रदेश की प्रोग्रेस छठे स्थान पर है और सबसे अच्छी स्थिति गोवा की है जहां 100% गणना पत्रक वितरण और 35.74% डिजिटाइजेशन का काम हो चुका है। इसके बाद राजस्थान में 98.85% गणना पत्रक बांटे जा चुके हैं और 27.84% डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। तीसरे नंबर पर लक्षद्वीप है जहां 100% गणना पत्रक वितरण और 19.64% डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। पुडुचेरी चौथे स्थान पर है जहां 94.35 प्रतिशत गणना पत्रक बांटे गए हैं और 18.79 प्रतिशत डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। 50 करोड़ 97 लाख मतदाताओं की हो रही SIR चुनाव आयोग की रिपोर्ट के अनुसार 12 राज्यों के 50 करोड़ 97 लाख 84 हजार 423 वोटर्स में से 50 करोड़ 11 लाख 75 हजार 907 मतदाताओं को गणना पत्रक बांटे जा चुके हैं। इनमें से चार करोड़ 42 लाख 64 हजार 69 मतदाताओं की गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है जो कुल मतदाता संख्या का 8.68 प्रतिशत है। सभी 12 राज्यों में गणना पत्रक वितरण का प्रतिशत 98.32 है। क्या है गणना पत्रक चुनाव आयोग के आदेश पर प्रदेश के सभी जिलों में गणना पत्रक बांटे जाने का काम बीएलओ कर रहे हैं। बीएलओ जो गणना पत्रक बांट रहे हैं, उसमें तय फार्मेट में चुनाव आयोग मतदाताओं का वेरिफिकेशन करा रहा है। इसमें 2003 में हुई एसआईआर के आधार पर वर्तमान मतदाता के माता-पिता, परिजनों, रिश्तेदारों की मतदाता सूची संख्या के आधार पर वेरिफिकेशन किया जा रहा है। इस रिपोर्ट के आधार पर शिफ्ट हुए, मृत हो चुके मतदाताओं की पहचान कर मतदाता सूची को फाइनल किया जाएगा। एसआईआर में टिमरनी के बीएलओ का काम 100 प्रतिशत पूर्ण उधर संयुक्त मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी आरपीएस जादौन ने बताया कि विशेष गहन पुनरीक्षण SIR–26 के अंतर्गत, विधानसभा क्षेत्र 134 टिमरनी के भाग संख्या 68, ग्राम खरतलाय में नियुक्त बूथ लेवल ऑफिसर हंस कुमार दिलारे द्वारा सारा कार्य शत-प्रतिशत पूर्ण किया गया है। यह भी उल्लेखनीय है कि जिला हरदा में सर्वप्रथम 100% कार्य पूर्ण करने का दायित्व ग्राम खरतलाय में रोजगार सहायक पद पर नियुक्त BLO द्वारा सफलतापूर्वक पूरा किया गया है, जो सराहनीय है।

आयोग ने एसआईआर के दौरान दस्तावेज़ प्रस्तुत करने के नियम स्पष्ट किए

एसआईआर के दौरान दस्तावेज प्रस्तुति के संबंध में आयोग द्वारा निर्धारित किए गए नियमों को किया स्पष्ट भोपाल  भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2025 की प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और मतदाता–हितैषी बनाने के लिए स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने यह सुनिश्चित किया है कि Enumeration Phase के दौरान किसी भी मतदाता को अनावश्यक कागज़ी प्रक्रिया या दस्तावेज़ प्रस्तुत करने की आवश्यकता न पड़े। इसी उद्देश्य से आयोग ने निम्नलिखित नियम अनिवार्य रूप से लागू किए हैं:         1. Enumeration Phase में किसी भी मतदाता से कोई भी दस्तावेज़ (जैसे जन्म प्रमाण-पत्र, निवास प्रमाण, पहचान पत्र आदि) नहीं लिया जाएगा।         BLO का कार्य केवल घर–घर जाकर भौतिक उपस्थिति की पुष्टि करना और उपलब्ध जानकारी को फॉर्म में दर्ज करना है।         2. ERO द्वारा दस्तावेज़ केवल तभी माँगे जाएंगे जब Draft Roll प्रकाशित होने के बाद किसी मतदाता की उपलब्ध जानकारी, Declaration या Enumeration Form या डेटाबेस से मेल न खाती हो।         3. जिन मतदाताओं या उनके माता–पिता का नाम राज्य की अंतिम Intensive Revision सूची (2003 या उससे पहले) में दर्ज है, ऐसे सभी मतदाताओं को ‘Pre-validated’ पूर्व-सत्यापित माना गया है। ऐसे मतदाताओं से BLO द्वारा किसी भी प्रकार के प्रमाण–पत्र या दस्तावेज़ की माँग नहीं की जाएगी। BLO केवल वर्तमान निवास की पुष्टि करेगा। आयोग का उद्देश्य नागरिकों को सरलीकृत, सुगम और भरोसेमंद प्रक्रिया उपलब्ध कराना है, ताकि कोई भी पात्र मतदाता दस्तावेज़ों की कमी, भ्रम या अनावश्यक औपचारिकताओं के कारण मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।  

विशेष गहन पुनरीक्षण में मिली गंभीर चूक, भोपाल कलेक्टर ने अधिकारियों को निलंबित किया

भोपाल  जिले के सात विधानसभा क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का काम किया जा रहा है। इसके तहत 2029 BLO को मतदाताओं को गणना पत्रक देने के साथ्ज्ञ ही उन्हें भरवाकर डिजिटाईज्ड भी करना है। इसी कार्य की समीक्षा जिला निर्वाचन अधिकारी एवं कलेक्टर ने रविवार देर रात की तो एक सुपरवाइजर व बीएलओ की लापरवाही सामेन आई है। इस पर कलेक्टर ने देर रात ही दोनों को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए है। कलेक्टर रविवार रात SIR कार्य की समीक्षा कर रहे थे, जिसमें सामने आया कि विधानसभा क्षेत्र उत्तर के मतदान केंद्र दो के BLO अनंतलाल मिश्रा की ओर से लगातार निर्देश देने के बाद भी एक भी गणना पत्रक BLO एप पर डिजिटाईज नहीं किया गया है। इसी तरह विधानसभा क्षेत्र गोविंदपुरा के BLO सुपरवाईजर शुभम प्रताप सिंह ने लक्ष्य के अनुरूप बीएलओ से कार्य नहीं करवाया और प्रत्येक बीएलओ से प्रतिदिन 100 गणना पत्रक बीएलओ एप पर डिजिटाईज नहीं करवाया गया है।इस तरह अनंत लाल मिश्रा और शुभम प्रताप सिंह द्वारा SIR कार्य में लगातार लापरवाही बरतने पर निलंबित किया जाता है। आज भी SIR को लेकर बैठक कलेक्ट्रेट में सोमवार को बैठक रखी गई है। इसमें SIR समेत कई मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। कलेक्टर ने सभी ईआरओ को निर्देश दिए हैं कि वे अपने क्षेत्र के सभी बीएलओ के कार्यों की निगरानी करें। प्रत्येक बीएलओ को निर्धारित समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने के लिए प्रेरित किया जाए। साथ ही काल सेंटरों को पूर्ण रूप से संचालित करते हुए, कार्य के दौरान उत्पन्न होने वाली समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाए।