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जबलपुर : SIR के दौरान BLOs की सराहना, जताई गई प्रशंसा और शानदार पुरस्कारों का मज़ा

 रीवा/जबलपुर मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में मिसाल पेश करने वाले बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) इन दिनों जिला प्रशासन की अनूठी पुरस्कार योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं. टारगेट को तय समय सीमा से पहले पूरा करने वाले 'सुपर बीएलओ' को टाइगर सफारी, मूवी टिकट और यहां तक कि हेलीकॉप्टर जॉय राइड जैसे शानदार इनाम मिल रहे हैं. मध्य प्रदेश के जबलपुर की स्नेहलता पटेल अपने अधीन सभी बूथों का शत-प्रतिशत डिजिटाइजेशन पूरा करने वाली जिले की पहली बीएलओ सुपरवाइजर बनीं. उन्होंने  समय से पहले पनागर विधानसभा क्षेत्र के 7 हजार 706 वोटर्स फॉर्म अपलोड कर सभी को चौंका दिया.  जबलपुर कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशानुसार, स्नेहलता पटेल को पुरस्कार स्वरूप पीएम श्री हेली पर्यटन सेवा के माध्यम से विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल कान्हा और बांधवगढ़ की हवाई यात्रा (जॉय राइड) कराई गई. ऐसे ही अन्य बीएलओ को नकद पुरस्कार के साथ उनके तनाव को कम करने के लिए मूवी टिकट भी प्रशासन दे रहा है। कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के निर्देशानुसार बीएलओ एवं सुपरवाइजरों को प्रोत्साहित करने के लिए अनूठी पुरस्कार योजना शुरू की गई है। स्नेहलता पटेल को पीएमश्री हेली पर्यटन सेवा से जाय राइड इसी पहल का हिस्सा है। उन्होंने इस सम्मान के लिए कलेक्टर का आभार व्यक्त किया और सभी बीएलओ को निष्ठा एवं लगन से कार्य करने का संदेश दिया। स्नेहलता पटेल को पनागर विधानसभा के बूथ क्रमांक 52 से 61 तक कुल 10 बूथों के सत्यापन और डिजिटाइजेशन का दायित्व सौंपा गया था। उनके अधीन 7,706 मतदाताओं के गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन मंगलवार को पूरा कर लिया गया था। 73.34 फीसदी गणना पत्रक हुए डिजिटाइज जिले में मतदाताओं से प्राप्त गणना प्रपत्रों में से 73.34 प्रतिशत गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन का कार्य पूरा कर लिया गया है। जिले में कुल मतदाताओं की संख्या 19 लाख 25 हजार 472 है। इनमें से अभी तक 14 लाख 12 हजार 151 मतदाताओं के गणना प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन किया जा चुका है। पाटन विधानसभा में 86 प्रतिशत डिजिटाइजेशन शुक्रवार की रात आठ बजे की रिपोर्ट के अनुसार 86.50 प्रतिशत गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन के साथ पाटन विधानसभा जिले की आठो विधानसभा क्षेत्रों में पहले स्थान पर है। मतदाताओं से प्राप्त गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन में विधानसभा क्षेत्र सिहोरा 85.04 फीसदी के साथ दूसरे तथा विधानसभा क्षेत्र बरगी 84.20 फीसदी गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन के साथ जिले में तीसरे स्थान पर है। 78.10 फीसदी के साथ पनागर चौथे, 67.41 फीसदी के साथ उत्तर पांचवें एवं 61.81 फीसदी के साथ कैंट छठे स्थान पर है। वहीं पश्चिम में 59.94 और पूर्व में 59.94 फीसदी गणना पत्रकों का डिजिटाइजेशन हुआ है।

BLO की अनोखी ड्यूटी स्टाइल — बारात निकलने से ठीक पहले दूल्हे से भरवाया SIR फॉर्म

रामपुर  स्वार कोतवाली क्षेत्र के समोदिया गांव में एक ऐसा अनोखा नजारा देखने को मिला कि लोग हैरान रह गए. दरअसल, जैसे ही दूल्हे की बरात सज-धजकर अजीतपुर के लिए निकलने लगी, तभी ग्राम प्रधान और बीएलओ ने बरात को थोड़ी देर के लिए रोका दिया, ताकि दूल्हे से पहले एसआईआर (SIR) फॉर्म भरवाया जा सके. ग्राम प्रधान-बीएलओ का यह कदम गांव में जागरूकता का एक अनूठा उदाहरण बन गया. इस पहल की चर्चा इलाके में ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया तक हो रही है. अब यह मामला मीडिया तक की सुर्खियों में छाया हुआ है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जसीम की बारत समोदिया गांव से अजीतपुर के लिए गुरुवार को रवाना होनी थी. सारी तैयारियां पूरी हो चुकी थी और डीजे की धुन पर रिश्तेदार नाच रहे थे. तो वहीं, कुछ रिश्तेदार और बाराती निकलने के लिए तैयार खड़े थे. तभी ग्राम प्रधान मोहम्मद आरिफ हुसैन अंसारी और बीएलओ रजिंदर सिंह पहुंचे और दूल्हे से कहा,     निकाह से पहले आपका एसआईआर फॉर्म भरना जरूरी है, ताकि चुनाव आयोग के विशेष पुनरीक्षण अभियान में आपका नाम समय पर दर्ज हो सके. दूल्हे ने फॉर्म तुरंत भरा और इसके बाद ही बरात शान से अजीतपुर की ओर रवाना हुई. यह नजारा ग्रामीणों के लिए सिर्फ मनोरंजक नहीं, बल्कि प्रेरक भी साबित हुआ. ग्रामीणों और युवाओं ने ग्राम प्रधान और बीएलओ की इस पहल की खूब प्रशंसा की उनका कहना था कि     अगर हर अधिकारी और जनप्रतिनिधि इसी तरह जिम्मेदारी निभाए और हर नागरिक समय पर फॉर्म भर दे, तो सरकारी प्रक्रियाएं और चुनाव से जुड़ी कार्रवाइयां और प्रभावी और सुचारू हो सकती हैं. ग्राम प्रधान ने कहा,     हम चाहते हैं कि गांव का हर नागरिक जागरूक रहे. दूल्हे के निकाह से पहले एसआईआर फॉर्म भरवाना सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि जागरूकता का संदेश है. चुनाव आयोग की ओर से भी इस पहल को सराहा गया है. ग्रामीणों का मानना है कि शादी जैसे बड़े आयोजन में भी सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी निभाना संभव है और यही संदेश पूरे गांव में फैल रहा है. यूपी में एसआईआर फॉर्म भरने की प्रक्रिया को तेज किया गया है, और इसके तहत बीएलओ और अधिकारियों की जिम्मेदारी बढ़ गई है.

जंगल-पहाड़ों के रास्तों से मतदाताओं तक पहुंच रही टीम, नारायणपुर में विशेष गहन पुनरीक्षण ने पकड़ी रफ्तार

रायपुर,  भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पूरे प्रदेश में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को नारायणपुर जिले में गति मिल रही है। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी  के मार्गदर्शन में प्रशासनिक टीमें और बीएलओ जंगलों-पहाड़ों के बीच बसे दुर्गम इलाकों तक पहुंचकर मतदाता सूची अद्यतन कार्य को निरंतर अंजाम दे रहे हैं। लक्ष्य है—कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। जिले में वर्तमान में कुल 92,637 मतदाता पंजीकृत हैं। इनमें से 77.25 प्रतिशत गणना पत्रक का डिजिटाइजेशन अब तक पूरा किया जा चुका है। प्रशासनिक टीमें त्रुटिरहित अद्यतन सुनिश्चित करने के लिए नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, गलतियों को सुधारने और मृत अथवा स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने के कार्य में पूरी गम्भीरता से जुटी हुई हैं। बीएलओ समरूलाल यादव की प्रेरक कहानी दुर्गम ग्राम गट्टाकाल से एक प्रेरक उदाहरण सामने आया है। मतदान केंद्र क्रमांक 09 के बीएलओ समरूलाल यादव को पुनरीक्षण कार्य के लिए पहाड़ी पगडंडियों पर मीलों पैदल चलना पड़ा। कई बार उन्हें बिना पुल वाले नदी-नालों को पार करना पड़ा, फिर भी वे लगातार घर-घर पहुंचकर मतदाताओं का सत्यापन करते रहे। इस मतदान केंद्र के 360 मतदाताओं में से 262 का पुनरीक्षण कार्य पूरा कर लिया गया है, जबकि शेष 98 मतदाताओं का कार्य भी तेजी से जारी है। समरूलाल यादव का कहना है कि कठिन रास्ते भी उन्हें लोकतंत्र को मजबूत करने के संकल्प से नहीं रोक पाते। 20 बीएलओ ने किया शत-प्रतिशत कार्य पूर्ण जिला निर्वाचन कार्यालय के अनुसार, जिले के 20 बीएलओ अपने-अपने क्षेत्रों में 100 प्रतिशत पुनरीक्षण कार्य पूरा कर चुके हैं। उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें कलेक्टर प्रतिष्ठा  द्वारा निरंतर प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जा रहा है। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में पहुंचकर मतदाताओं को जोड़ने का यह निरंतर प्रयास जिला प्रशासन की प्रतिबद्धता, पारदर्शिता और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने का सशक्त उदाहरण प्रस्तुत करता है।

BLO सम्मान समारोह: परिवार के साथ फाइव स्टार होटल में लंच और 10,000 रुपए इनाम

गाजियाबाद. मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) अभियान को सफल बनाने के लिए गाजियाबाद जिला प्रशासन ने अनोखा कदम उठाया है. जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने ऐलान किया है कि SIR में शत-प्रतिशत और सबसे बेहतरीन काम करने वाले बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) को नकद इनाम के साथ-साथ परिवार सहित फाइव स्टार होटल में विशेष सम्मान समारोह और लंच का मौका मिलेगा. सिटी मजिस्ट्रेट संतोष उपाध्याय ने बताया कि हर विधानसभा क्षेत्र से टॉप-5 BLO चुने जाएंगे. इसके लिए  चयन का आधार होगा- घर-घर जाकर सबसे ज्यादा फॉर्म भरवाना, सबसे तेज और सटीक तरीके से एप पर डिजिटाइजेशन करना। इसमें प्रथम और द्वितीय स्थान वाले BLO को 10,000-10,000 रुपए नकद, तृतीय, चतुर्थ एवं पंचम स्थानपर रहने वाले BLO को 5,000-5,000 रुपए नकद मिलेंगे. साथ ही ये पांचों BLO अपने परिवार के साथ जिलाधिकारी के हाथों प्रशस्ति पत्र और विशेष सम्मान प्राप्त करेंगे. उन्हें फाइव स्टार होटल में भव्य लंच के लिए आमंत्रित किया जाएगा. लोगों से की ये अपील जिलाधिकारी ने कहा, “लोकतंत्र को मजबूत करने का यह सबसे महत्वपूर्ण चरण है. जो BLO दिन-रात मेहनत कर रहे हैं, उनकी मेहनत को हम पूरी गरिमा के साथ सम्मानित करेंगे.” सिटी मजिस्ट्रेट संतोष उपाध्याय ने लोगों से अपील की है कि अपने क्षेत्र के BLO की अधिक से अधिक मदद करें, फॉर्म भरवाएं ताकि मतदाता सूची पूरी तरह सटीक बने. वे खुद मोहल्लों में घूम-घूमकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं. लापरवाह BLO को नोटिस वहीं लापरवाही बरतने वाले कुछ BLO को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं और कुछ पर मुकदमा भी दर्ज किया गया है. प्रशासन का साफ संदेश है – काम में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, लेकिन मेहनत करने वालों को भरपूर सम्मान मिलेगा. इस अनोखी पहल की चारों तरफ सराहना हो रही है. शिक्षक और अन्य विभागों के कर्मचारी जो BLO की ड्यूटी कर रहे हैं, इसे प्रोत्साहन की बड़ी मिसाल बता रहे हैं.

बालोद : जिला निर्वाचन अधिकारी श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने एसआईआर में उत्कृष्ट कार्य के लिए बीएलओ को किया सम्मानित

बालोद भारत निर्वाचन आयोग नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) का कार्य निरंतर जारी है। कलेक्टर एवं जिला निवार्चन अधिकारी श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने संयुक्त जिला कार्यालय स्थित अपने कक्ष में आज विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतर्गत मतदाताओं को गणना पत्र प्रदान करने एवं गणना प्रपत्रों को डिजिटाईज करने में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले जिले के 04 बूथ लेवल अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र एवं पुरस्कार भेंट कर सम्मानित किया। उल्लेखनीय है कि जिले के संजारी बालोद, गुण्डरदेही एवं डौण्डीलोहारा विधानसभा क्षेत्र में एसआईआर की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है। जिसके अंतर्गत बीएलओ द्वारा गणना पत्रक वितरण कर घर-घर जाकर मतदाताओं से गणना पत्रक भरवाकर बीएलओ एप में ऑनलाइन किया जा रहा है। उक्त कार्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुये विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 60 डौण्डीलोहारा अंतर्गत ग्राम आलीवारा की बूथ लेवल अधिकारी सुशीला ठाकुर, ग्राम खेरथा की बीएलओ लता पाण्डेय एवं ग्राम आतरगांव की बीएलओ सरस्वती देवांगन तथा विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 61 गुण्डरदेही के ग्राम धनगांव की बीएलओ सुंदरिया देशमुख ने बालोद जिले में विशेष गहन पुनरीक्षण कार्य के अंतर्गत 100 प्रतिशत फॉर्म डिजिटाइजेशन पूर्ण किया है। इस अवसर पर अपर कलेक्टर एव उप जिला निवार्चन अधिकारी श्री चंद्रकांत कौशिक, एसडीएम डौण्डीलोहारा श्री शिवनाथ बघेल सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

मध्य प्रदेश का डिजिटल सफर: SIR में 57% डिजिटाइजेशन, देश में टॉप राज्यों में स्थान

भोपाल  मध्य प्रदेश में चुनावी मतदाता सूची के डिजिटलीकरण का काम 57.05% पूरा हो गया है, जिससे यह इस काम में लगे 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चौथे स्थान पर आ गया है। यह प्रगति ऐसे समय में हुई है जब ड्यूटी पर तैनात बूथ-लेवल ऑफिसर्स (BLOs) की मौतें चिंता का विषय बन गई हैं। 11 नवंबर से अब तक कम से कम चार बीएलओ की मौत हो चुकी है, जिनमें से सभी सरकारी स्कूल शिक्षक थे। उनके रिश्तेदारों का आरोप है कि काम का अत्यधिक दबाव, लंबे काम के घंटे और लक्ष्य पूरा न करने पर निलंबन का डर इन मौतों का कारण बना है। 65 हजार से अधिक बीएलओ काम में लगे आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 5.73 करोड़ मतदाताओं को 65,014 बीएलओ द्वारा मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए फॉर्म दिए गए हैं। 23 नवंबर तक इनमें से 3.27 करोड़ फॉर्म डिजिटाइज किए जा चुके थे। इस बीच, बीएलओ की मौतें चिंता बढ़ा रही हैं। इन इलाकों में हुई बीएलओ की मौतें दतिया जिले में एक शिक्षक की कथित तौर पर आत्महत्या से मौत हो गई। परिवार का कहना है कि वह स्मार्टफोन से काम करने का दबाव और सजा का डर बर्दाश्त नहीं कर सका। दमोह और रायसेन जिलों में दो शिक्षकों की मौत हो गई। उनके परिवारों का आरोप है कि प्रतिदिन 100 मतदाताओं को सूचीबद्ध करने जैसे अवास्तविक लक्ष्य उन्हें परेशान कर रहे थे। अलीराजपुर में एक अन्य BLO, SIR ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में निलंबित होने के एक दिन बाद सीढ़ियों से गिरकर मर गया। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि ये सभी आरोप रिश्तेदारों द्वारा लगाए गए हैं। पुलिस द्वारा की गई जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही सच्चाई सामने आएगी। बड़े राज्यों में दूसरे स्थान पर एमपी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मामले में, मध्य प्रदेश, लक्षद्वीप (88.20%), गोवा (69.38%), और राजस्थान (65.52%) से पीछे है। लेकिन लक्षद्वीप और गोवा में मध्य प्रदेश की तुलना में बहुत कम मतदाता हैं। पांच करोड़ से अधिक मतदाताओं वाले राज्यों में, मध्य प्रदेश केवल राजस्थान से पीछे है, जिससे यह प्रभावी रूप से दूसरी स्थिति में है। अन्य राज्यों का हाल अन्य राज्य जो SIR में भाग ले रहे हैं उनमें गुजरात (49.62%), पुडुचेरी (51.24%), अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (44.13%), तमिलनाडु (40.40%), छत्तीसगढ़ (40.83%), पश्चिम बंगाल (47.72%), उत्तर प्रदेश (19.02%), और केरल (15.92%) शामिल हैं। क्या है SIR? SIR का उद्देश्य घर-घर जाकर मतदाता सूची में सुधार करना और BLOs द्वारा उन्हें डिजिटाइज करके त्रुटि-मुक्त मतदाता सूची तैयार करना है। जिन मतदाताओं को उनके फॉर्म नहीं मिले हैं, वे ECI पोर्टल पर ऑनलाइन भर सकते हैं। BLOs का विवरण राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) की वेबसाइट या राष्ट्रीय मतदाता खोज पोर्टल पर उपलब्ध है।  

SIR फॉर्म 2025: MP में भाग और क्रमांक संख्या कैसे पता करें, पढ़ें स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

भोपाल  मध्य प्रदेश में एसआईआर की प्रक्रिया चल रही है। बीएलओ लोगों के घर पर फॉर्म देकर आ रहे हैं। लेकिन इस फॉर्म को भरने में बड़ी भारी उलझन है। सबसे ज्यादा कंफ्यूजन लोगों को रिश्तेदारों और परिजनों के कॉलम में हो रही है। इसमें उनका इपिक नंबर के साथ-साथ भाग संख्या और क्रमांक संख्या भरना होता है। ऐसे में लोगों को यह पता नहीं चल पा रहा है कि यह होता क्या है, इसके बाद बीएलओ को सूचित करते हैं, तब उन्हें जानकारी मिलती है। आइए हम आपको बताते हैं कि फॉर्म भरने के दौरान आपको भाग संख्या और क्रमाक संख्या कहां मिलेगा। यहां हो रही है परेशानी दरअसल, एसआईआर के लिए सभी मतदाताओं को फॉर्म दिया जा रहा है। फॉर्म के सबसे ऊपरी भाग में मतदाताओं को अपना विवरण देना हैं। यहां तक लोगों को कोई समस्या नहीं होती है। इसके बाद नीचे में दो कॉलम हैं। बायीं ओर वाले कॉलम को मतदाता को खुद का विवरण भरना है। अगर वह 2003 के एसआईआर के समय मतदाता रहा हो। अगर आप नहीं रहें तो दायीं ओर वाले कॉलम में आपको उनके रिश्तेदारों या परिजनों के विवरण भरने हैं, जो 2003 में मतदाता रहे हों। इसी विवरण के दौरान भाग और क्रमांक संख्या की जरूरत इसी दौरान मतदाताओं को अपने रिश्तेदारों या परिजनों को भाग और क्रमांक संख्या की जरूरत पड़ती है। रिश्तेदारों या परिजनों से जब आप इसकी जानकारी मांगते हैं तो उन्हें भी नहीं पता होता है। उनके पास सिर्फ इपिक होता है और इपिक में मतदाता के बारे में ही जानकारी होती है। यहां से सिर्फ आपको उनका इपिक नंबर और विधानसभा क्षेत्र के बारे में जानकारी मिल सकती है। कहां से मिलेगा भाग और क्रमांक संख्या आइए हम आपको बताते हैं कि कहां से आपको भाग संख्या और क्रमांक संख्या मिलेगा। इसके लिए आपको सिंपल स्टेप्स को फॉलो करना है। सबसे पहले आपको मोबाइल के प्ले स्टोर में जाना है। वहां जाकर आपको वोटर हेल्पलाइन टाइप करना है। टाइप करने के बाद प्ले स्टोर के इंटरफेस पर यह एप आ जाएगा। इसके बाद इसे डाउनलोड करना है।  एप डाउनलोड करने के बाद इसको खोलना है। इसे खोलना के बाद ऊपर में आपको सर्च बार दिखेगा। सर्च बार पर आप जैसे ही क्लिक करेंगे तो नया इंटरफेस खुलेगा। यहां पर आपको चार ऑप्शन मिलेगा। इसमें पहले होगा कि आप मोबाइल नंबर के जरिए सर्च करिए। दूसरा बार कोड के जरिए, तीसरा अपना डिटेल्स डालकर सर्च करें। वहीं, चौथा ऑप्शन ज्यादा इजी है, इसमें सिर्फ आपको अपना इपिक नंबर डालना होगा। इसलिए हमें इपिक नंबर वाले ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।  इसमें इपिक नंबर भरने के बाद सर्च टैब को दबा दीजिए। भाग संख्या और क्रमांक संख्या आपको मिल गया भाग और क्रमांक नंबर वहीं, इपिक नंबर वाले पर क्लिक करने के बाद आपके सामने नया इंटरफेस होगा। इसमें इपिक नंबर भरने का ऑप्शन आएगा। इपिक नंबर भरने के बाद सर्च ऑप्शन पर क्लिक कर दें। इस पर क्लिक करते ही आपका पूरा डिटेल आ जाएगा। इसमें में जो पार्ट नंबर होगा वह आपका भाग संख्या होगा। वहीं, सीरियल नंबर आपका क्रमांक संख्या होगा। इस तरह से आप बिना परेशानी फॉर्म भर सकते हैं।  

गणना पत्रक भरने के लिए आवश्यक नहीं किसी भी प्रकार का ओटीपी

सीईओ श्री संजीव कुमार झा ने किया मतदाताओं को सतर्क भोपाल  एसआईआर-2026 के दौरान गणना पत्रक भरने के लिए बीएलओ या किसी भी अन्य अधिकारी द्वारा किसी भी माध्यम से ओटीपी मांगे जाने की आवश्यकता नहीं है। मध्यप्रदेश के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री संजीव कुमार झा ने मतदाताओं को सतर्क करते हुए बताया है कि वर्ष 2003 की मतदाता सूची में स्वयं, माता-पिता या दादा-दादी संबंधी जानकारी प्राप्त करने के लिए मतदाता अपने क्षेत्र के बीएलओ अथवा नजदीकी हेल्पडेस्क से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा जानकारी ऑनलाइन voters.eci.gov.in या ceoelection.mp.gov.in पर भी प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने नागरिकों से अनुरोध किया है कि एसआईआर पत्रक भरते समय सुरक्षा उपायों का पालन करें। आधिकारिक सरकारी वेबसाइट पर ही एसआईआर भरें। ये हैं सुरक्षा उपाय ओटीपी या व्यक्तिगत जानकारी किसी के साथ साझा न करें। एसआईआर की प्रक्रिया में निर्वाचन विभाग या किसी अधिकारी द्वारा फोन/मैसेज पर ओटीपी, आधार नंबर, मोबाइल नंबर आदि मांगना प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है। यदि कोई इस तरह की जानकारी माँगता है तो वह 'साइबर फ्रॉड कॉल' हो सकता है। एसआईआर भरते समय इन बातों का रखें ध्यान एसआईआर प्रक्रिया पूरी तरह निःशुल्क है। किसी भी प्रकार की फीस, प्रोसेसिंग चार्ज या भुगतान करने के लिए कहे जाने पर ध्यान दें-ऐसे संदेश/कॉल धोखाधड़ी हो सकते हैं। व्हॉट्सऐप या सोशल मीडिया पर मिले लिंक न खोलें। 'आपका वोटर कार्ड रद्द हो जाएगा', 'तुरंत एसआईआर भरें' जैसे संदेश फर्जी हो सकते हैं। एसआईआर के लिये साइबर कैफे का उपयोग करते समय सतर्क रहें। ऑटो-सेव बंद रखें, कार्य समाप्त होने पर ब्राउजर इतिहास/कैश साफ़ करें और अनिवार्य रूप से लॉगआउट करें। किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक या गतिविधि की तुरंत रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल: www.cybercrime.gov.in अथवा हेल्पलाइन: 1930 पर करें।  

लोकतंत्र सशक्तिकरण में जुटा पूरा मैदानी अमला

एसआईआर 2026 को समय सीमा में पूर्ण करने के लिये बीएलओ और शासकीय सेवक पूरे मनोयोग से कार्यरत भोपाल  मध्यप्रदेश में मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR 2026) का कार्य भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रमानुसार जारी है। 4 नवंबर से 4 दिसंबर 2025 तक गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन को समय पर पूरा करने के लिए बीएलओ सहित पूरा मैदानी अमला पूर्ण निष्ठा और मनोयोग से कार्य में जुटा है। प्रत्येक बीएलओ को कार्य में सहयोग प्रदान करने के लिए 2 से 3 सदस्यों की टीम लगाई गई है। इनमें ऐसे शासकीय सेवक शामिल हैं जिन्हें क्षेत्र और वहां के निवासियों की बेहतर जानकारी हो—जैसे पटवारी, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सहायक आदि। इसके साथ ही गणना पत्रकों के डिजिटाइजेशन के लिए कंप्यूटर ऑपरेटरों की अलग टीम भी तैनात की गई है। मतदाताओं के मार्गदर्शन एवं सहयोग के लिए राज्य स्तर और सभी जिलों में हेल्प डेस्क स्थापित की गई हैं। साथ ही राज्य का टोल-फ्री नंबर 1950 भी सक्रिय रूप से संचालित है। कार्य में उत्कृष्ट प्रदर्शन और समय पर कार्य पूर्ण करने वाले बीएलओ को राज्य एवं जिला स्तर पर सम्मानित किया जा रहा है, जिससे अन्य बीएलओ भी प्रेरित हों और कार्य की गति एवं गुणवत्ता में निरंतर सुधार हो।  

SIR सिस्टम ने कर दिखाया कमाल: 37 साल बाद मिला लापता बड़ा बेटा, पढ़िए पूरी कहानी

कोलकाता  पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में SIR के दौरान एक कमाल की घटना हुई। मतदाता सूची की संशोधन प्रक्रिया ने लगभग चार दशक से बिछड़े एक परिवार को फिर से मिला दिया। चक्रवर्ती परिवार ने 1988 में अपने बड़े बेटे विवेक चक्रवर्ती को खो दिया था। घर से निकलने के बाद विवेक का कोई अता-पता नहीं चला। बरसों तक खोजबीन की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अब तक उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि कभी फिर मिलन होगा। मगर, एसआईआर अभियान ने वो दरवाजा खोल दिया जो वे बंद समझ चुके थे।   विवेक के छोटे भाई का नाम प्रदीप चक्रवर्ती है। वह उसी इलाके के बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) हैं। एसआईआर के दौरान हर फॉर्म पर उनका नाम और मोबाइल नंबर छपा था। विवेक का बेटा कोलकाता में रहता है जो अपने चाचा के बारे में कुछ नहीं जानता था। उसने दस्तावेजों के लिए मदद मांगने की खातिर प्रदीप को फोन किया। पहले कागजात को लेकर बातें हुईं, लेकिन धीरे-धीरे परिवार की कड़ियां जुड़ने लगीं। प्रदीप ने बताया, 'मेरा बड़ा भाई आखिरी बार 1988 में घर आया था। उसके बाद से गायब है। हमने हर जगह ढूंढा। मगर, उसने सारे रिश्ते तोड़ दिए। जब इस लड़के के जवाब हमारे परिवार की उन बातों से मिलने लगे जो सिर्फ हम ही जानते हैं, तब मुझे एहसास हुआ कि मैं अपने भतीजे से बात कर रहा हूं।' आखिर कैसे खुला पूरा राज इस तरह 37 साल से लापता चक्रवर्ती परिवार का बड़ा बेटा मिल गया। दोनों तरफ खुशी की लहर थी। इसके बाद प्रदीप ने खुद विवेक से बात की। 37 साल की खामोशी के बाद दो भाइयों की आवाजें एक-दूसरे तक पहुंचीं। भावुक होकर विवेक ने कहा, 'इस भावना को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। 37 लंबे साल बाद मैं आखिरकार घर लौट रहा हूं। मैंने घर के सभी लोगों से बात कर ली है। खुशी से भरा हुआ हूं। मैं चुनाव आयोग को धन्यवाद देता हूं, क्योंकि एसआईआर प्रक्रिया न होती तो यह मिलन कभी संभव नहीं होता।' इस तरह मतदाता सूची संशोधन अभियान ने न सिर्फ वोटर लिस्ट को दुरुस्त किया, बल्कि एक टूटे परिवार को फिर से जोड़ दिया।