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मंत्री सारंग ने कहा- ’सहकारिताओं के बीच सहकार’ की नीति से आवास संघ को बनाया जाएगा सुदृढ़

भोपाल  सहकारिता मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग ने गुरुवार को मध्यप्रदेश राज्य सहकारी आवास संघ मर्यादित की गतिविधियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में मंत्री श्री सारंग ने कहा कि आवास संघ को एक सशक्त निर्माण एजेंसी के रूप में स्थापित करने के लिए ठोस और दूरदर्शी कार्ययोजना तैयार की जाए। मंत्री श्री सारंग ने निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों को पत्र लिखकर उनकी निधि से किए जाने वाले निर्माण कार्य आवास संघ को दिए जाने हेतु आग्रह करें। उन्होंने कहा कि “सहकारिताओं के बीच सहकार” की भावना को मूर्त रूप देते हुए सहकारिता विभाग के अंतर्गत राज्य संघ, उपभोक्ता संघ एवं अन्य सहकारी संस्थाओं से संबंधित सभी निर्माण कार्यों के लिए आवास संघ को नोडल एजेंसी बनाया जाए। मंत्री श्री सारंग ने कहा कि एम-पैक्स से जुड़े निर्माण कार्य भी आवास संघ को ही सौंपे जाएं। उन्होंने आवास संघ की गतिविधियों के विस्तार के लिए सभी सहकारी सोसाइटियों को सदस्य बनाने का लक्ष्य निर्धारित करते हुए इस दिशा में कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। बैठक में आयुक्त एवं पंजीयक सहकारिता श्री मनोज पुष्प, उप सचिव सहकारिता श्री मनोज सिन्हा, प्रबंध संचालक आवास संघ श्री विश्वकर्मा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।  

ब्रिटिश भी नहीं कर पाए थे गोरखा सैनिकों का सामना, संधि के लिए होना पड़ा था मजबूर: सीएम योगी

सीएम योगी ने गोरखपुर में किया गोरखा युद्ध स्मारक और संग्रहालय का शिलान्यास – वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ संग्रहालय का भूमिपूजन व शिलान्यास – भारत-नेपाल के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगा यह स्मारक- सीएम योगी – सेना के शौर्य की चर्चा में गोरखा सैनिकों का नाम सबसे ऊपर- मुख्यमंत्री – सीएम योगी ने शहीद सैनिकों की वीर महिलाओं को किया सम्मानित – अग्निवीर योजना के तहत लौटने वाले जवानों के लिए यूपी पुलिस में 20 प्रतिशत आरक्षण- सीएम योगी गोरखपुर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखा रेजीमेंट के वीर सपूतों की अदम्य साहस और शौर्यगाथा को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनाने के उद्देश्य से गोरखा युद्ध स्मारक के सौंदर्यीकरण कार्य और संग्रहालय का शिलान्यास किया। यह परियोजना 45 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जाएगी, जो न केवल गोरखा सैनिकों के बलिदान को सम्मान देगी बल्कि भारत-नेपाल के सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगी। कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान भी उपस्थित रहे। इस दौरान सीएम योगी ने गोरखा सैनिकों की वीरता को याद करते हुए कहा कि गौरवशाली विरासत की नींव आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत हैं। भारतीय सेना का लोहा आज पूरी दुनिया ने माना है। ब्रिटिश भी गोरखा सैनिकों का सामना नहीं कर पाए और उन्हें संधि के लिए मजबूर होना पड़ा। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ संग्रहालय का भूमिपूजन व शिलान्यास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संग्रहालय का भूमिपूजन किया और परिसर में स्थित मां काली मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान गोरखा रिक्रूटिंग डिपो (जीआरडी) की कार्यशैली पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया, जिसमें गोरखा रेजीमेंट के बहादुर जवानों की कहानियां जीवंत रूप से प्रस्तुत की गईं। साथ ही, सांस्कृतिक कार्यक्रमों में जवानों ने अपनी परंपरा और संस्कृति के अनुरूप नृत्य और गीत प्रस्तुत किए, जो दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गए। मुख्यमंत्री ने गोरखा रेजीमेंट के शहीदों के परिवारों की वीर महिलाओं को सम्मानित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीएम योगी ने रामधारी सिंह दिनकर की प्रसिद्ध पंक्तियां उद्धृत की, "जला अस्थियाँ बारी-बारी चिटकाई जिनमें चिंगारी, जो मर गए मातृभूमि के लिए बिना किसी कीमत के मोल… कलम आज उनकी जय बोल।" सीएम योगी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पंच प्रण गुलामी के अंशों को समाप्त करना, अपनी विरासत पर गौरव की अनुभूति, वीर सैनिकों के प्रति सम्मान, सामाजिक एकता और कर्तव्यों का निर्वहन का जिक्र करते हुए कहा कि गोरखा सैनिकों ने अलग-अलग मोर्चों पर काम किया है सभी वीर सैनिकों का सम्मान करना हमारा कर्तव्य है। सेना के शौर्य की चर्चा में गोरखा सैनिकों का नाम सबसे ऊपर आता है- मुख्यमंत्री सीएम योगी ने कहा कि जब हम भारत की सेना के शौर्य की चर्चा करते हैं, तो गोरखा सैनिकों का नाम सबसे ऊपर आता है। 'जय महाकाली, आयो गोरखाली' के उद्घोष के साथ जब ये शत्रु पर टूट पड़ते हैं, तो दुश्मन पीछे हटने को मजबूर हो जाता है। 1816 के ब्रिटिश-गोरखा युद्ध में ब्रिटिश सेना को संधि के लिए बाध्य होना पड़ा। उसके बाद गोरखा सैनिकों ने ब्रिटिश आर्मी में भी अपनी बहादुरी दिखाई। स्वतंत्र भारत में भी उन्होंने विभिन्न मोर्चों पर दुश्मनों को घुटने टेकने पर मजबूर किया। सीएम योगी ने महायोगी गुरु गोरखनाथ की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां गोरखनाथ मंदिर हैं, वहां मां काली की पूजा अनिवार्य है, जो शिव और शक्ति के समन्वय का प्रतीक है। यह समन्वय ही गोरखा सैनिकों की मौत से बेखौफ होकर लड़ने की शक्ति का स्रोत है। अग्निवीरों को यूपी पुलिस में 20 प्रतिशत आरक्षण- सीएम योगी सीएम योगी ने इस स्मारक को आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बताते हुए कहा कि यह 100 वर्ष पुराना स्मारक अब भव्य रूप लेगा। यहां म्यूजियम में गोरखा रेजीमेंट के पुराने यूनिफॉर्म, हथियार, अस्त्र-शस्त्र और युद्ध कला के परिवर्तनों को प्रदर्शित किया जाएगा। इससे युवा पीढ़ी को इतिहास से सीखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने सीडीएस जनरल अनिल चौहान को धन्यवाद देते हुए कहा कि उनकी व्यस्तता के बावजूद इस कार्यक्रम में शामिल होना गोरखा रेजीमेंट के प्रति उनके समर्पण को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश सरकार की पहलों का जिक्र किया, जैसे पुलिस बल में स्मारकों का निर्माण, शहीदों के परिवारों को 50 लाख रुपये की सहायता, नौकरी और स्मारकों का नामकरण। उन्होंने अग्निवीर योजना के तहत लौटने वाले जवानों के लिए पुलिस में 20 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा भी दोहराई। युवाओं में सेना के प्रति आकर्षण बढ़ाएगा यह युद्ध स्मारक- सीएम मुख्यमंत्री ने युद्ध स्मारक पर श्रद्धासुमन अर्पित कर वीर जवानों को सलामी दी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना न केवल गोरखपुर के कूनराघाट क्षेत्र में रहने वाले हजारों पूर्व गोरखा सैनिकों के परिवारों को गौरव की अनुभूति कराएगी, बल्कि युवाओं में सेना के प्रति आकर्षण बढ़ाएगी। सीएम योगी ने कहा कि गोरखपुर में नया सैनिक स्कूल स्थापित किया गया है, जो विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में मदद करेगा। उन्होंने 'नेशन फर्स्ट' के भाव पर जोर देते हुए कहा कि हर नागरिक के कर्तव्य निर्वहन से ही लक्ष्य प्राप्त होंगे। सिविल-मिलिट्री फ्यूजन का प्रतीक बनेगा यह स्मारक- सीडीएस कार्यक्रम में सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने गोरखा सैनिकों की वीरता को सलाम किया। उन्होंने कहा कि आज का दिन ऐतिहासिक है। 1886 में कुनराघाट में गोरखा रिक्रूटिंग डिपो की स्थापना हुई थी। प्रथम विश्व युद्ध में गोरखा सैनिकों ने अदम्य साहस दिखाया और कम से कम 20 हजार शहीद हुए। 1925 में इस युद्ध स्मारक की स्थापना हुई। आज इसका नवीनीकरण हमारी दूरदर्शिता का प्रमाण है। सीडीएस चौहान ने योगी सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह स्मारक सिविल-मिलिट्री फ्यूजन का प्रतीक बनेगा। उन्होंने तीन कारणों से इसे महत्वपूर्ण बताया, पहला, गोरखा सैनिकों और भारतीय सेना के करीबी रिश्तों की पहचान, दूसरा, उनकी सदियों पुरानी निस्वार्थ सेवा और बहादुरी और तीसरा, भारत-नेपाल संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता। सीडीएस ने कहा कि आज परिवर्तन का समय है। हम विकसित भारत की कल्पना करते हैं, लेकिन अतीत को भूलना नहीं चाहिए। गोरखा सैनिकों का बलिदान हमारे लिए प्रेरणास्रोत है, जो आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करेगा।  संग्रहालय में क्या होगा खास यह संग्रहालय गोरखा रेजीमेंट की गौरवगाथा को डिजिटल रूप से प्रस्तुत करेगा। इसमें डिजिटल … Read more

संबित पात्रा बोले: जीएसटी बदलाव से आम जनता और व्यवसायियों को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने गुरुवार को नई दिल्ली स्थित भाजपा मुख्यालय में जीएसटी 2.0 को लेकर एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान उन्होंने जीएसटी स्लैब को हर वर्ग के लिए खुशखबरी बताया। उन्होंने कहा कि नवरात्र से पहले देश में खुशी का माहौल है, क्योंकि जीएसटी दरों में कटौती से आम जनता, किसानों, मध्यम वर्ग और मेडिकल सेक्टर को बड़ी राहत मिलेगी। संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "नवरात्र से पहले ही पूरे देश में खुशी का माहौल है। आज सुबह जब मैंने चाय की चुस्कियों के साथ अखबार पढ़ा, तो चाय का रेट 6 प्रतिशत वैट से कम होकर 0 प्रतिशत जीएसटी हो गया था। 22 सितंबर से सभी के लिए हर वस्तु एक तरह से सस्ती होने वाली है और हर वर्ग के लिए खुशखबरी है, चाहे वो किसान हो, कोई मरीज हो, आम गृहणी हो, साधारण ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो, या कोई बच्चा हो, उन सभी के लिए आज खुशखबरी आई है।" उन्होंने कहा, "कांग्रेस के जमाने में दूध पर 6 प्रतिशत वैट लगता था, आज उसे 0 प्रतिशत कर दिया गया है, यानी उसपर कोई जीएसटी नहीं रहेगी। उसी प्रकार दही, लस्सी, छाछ पर भी अब मात्र 5 प्रतिशत जीएसटी लगेगी। इसके अलावा, चॉकलेट पर 31 प्रतिशत वैट लगता था, जो अब कम होकर 5 प्रतिशत जीएसटी हो गया है। मिठाई पर 21 प्रतिशत वैट लगता था, जो अब कम होकर 5 प्रतिशत जीएसटी हो गया है। साथ ही गेहूं पर 2.5 प्रतिशत वैट लगता था। अब 0 प्रतिशत जीएसटी लगेगी। चावल पर 2.75 प्रतिशत वैट लगता था। अब 0 प्रतिशत जीएसटी लगेगी।" संबित पात्रा ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, "कांग्रेस के जमाने में 1 किलो आटे पर 3.5 प्रतिशत टैक्स लगता था, अब उसे शून्य कर दिया गया है। ठीक उसी प्रकार सोयाबीन का तेल और ग्राउंड नट (मूंगफली) के तेल पर 6 प्रतिशत वैट लगता था, अब उस पर 0 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। इसी तरह, बोतलबंद मिनरल वाटर हमारी रोजमर्रा की जिंदगी की जरूरत बन गया है। जब गांधी परिवार सत्ता में था, तब इस पर 27 प्रतिशत टैक्स लगता था। आज वह दर घटाकर सिर्फ 5 प्रतिशत कर दी गई है।" संबित पात्रा ने कहा, "टूथपेस्ट पर 27 प्रतिशत वैट लगता था, अब वो घटकर 5 प्रतिशत जीएसटी हो गया है। ठीक उसी प्रकार टूथ पाउडर पर भी 17 प्रतिशत वैट लगता था, अब वो भी घटकर 5 प्रतिशत जीएसटी हो गया है। साबुन और तेल पर भी 27 प्रतिशत वैट लगता था, अब मात्र 5 प्रतिशत जीएसटी लगेगी। साथ ही, साइकिल पर 16 प्रतिशत वैट लगता था, अब उस पर मात्र 5 प्रतिशत जीएसटी लगेगा। सिलाई मशीन पर 16 प्रतिशत वैट लगता था, अब उस पर भी मात्र 5 प्रतिशत जीएसटी लगेगी।" भाजपा प्रवक्ता ने किसानों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा, "हमारे किसान भाइयों के लिए भी बड़ी खुशखबरी है। ट्रैक्टर वाली फिक्स्ड स्पीड डीजल इंजन जो 15 हॉर्सपावर या नीचे की है और ट्रैक्टर का रियर टायर और ट्यूब पर पहले 16 प्रतिशत वैट लगता था। अब वो घटकर 5 प्रतिशत जीएसटी रह गई है। हैंडपंप, इरिगेशन सिस्टम, कंपोस्ट मशीन, फर्टिलाइजर इनपुट पर भी 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत जीएसटी कर दिया गया है। ट्रैक्टर के सारे पार्ट्स जो 18 प्रतिशत टैक्स स्लैब में थे, अब ये सारे 5 प्रतिशत टैक्स स्लैब में आ जाएंगे।"

बर्नस्टीन रिपोर्ट: जीएसटी बदलाव से जीडीपी पर असर बहुत कम, सिर्फ 0.05%

नई दिल्ली ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन की गुरुवार को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा घोषित वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में व्यापक बदलावों का सार्वजनिक वित्त पर मामूली प्रभाव पड़ सकता है, क्योंकि केंद्र पर केवल 18,000 करोड़ रुपए का राजकोषीय बोझ पड़ने का अनुमान है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वित्त वर्ष 26 के लिए भारत के अनुमानित जीडीपी का केवल 0.05 प्रतिशत है। 3 सितंबर को, सरकार ने प्रमुख जीएसटी सुधारों की घोषणा की, जिसमें कर स्लैब की संख्या कम की गई और कई वस्तुओं पर दरें कम की गईं। दैनिक उपयोग की एफएमसीजी वस्तुओं से लेकर कारों, घरेलू वस्तुओं और बीमा तक, अधिकांश उत्पाद 22 सितंबर से सस्ते होने वाले हैं। विश्लेषकों का मानना ​​है कि इन उपायों से मांग बढ़ेगी, कर अनुपालन में सुधार होगा और उपभोग-आधारित विकास को मजबूती मिलेगी। बर्नस्टीन के लेटेस्ट इंडिया स्ट्रेटजी नोट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि इन सुधारों से राजस्व में अल्पकालिक कमी आएगी, लेकिन अर्थव्यवस्था पर समग्र प्रभाव सीमित रहेगा। ब्रोकरेज का अनुमान है कि 12 प्रतिशत स्लैब को 5 प्रतिशत तक तर्कसंगत बनाने से 79,600 करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान होगा और 28 प्रतिशत स्लैब को समाप्त करने से 1.12 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त नुकसान होगा। 12 से 18 प्रतिशत स्लैब में बदलाव से 700 करोड़ रुपए और कुछ वस्तुओं को 28 से 40 प्रतिशत तक स्थानांतरित करने से 15,000 करोड़ रुपए के लाभ से इन नुकसानों की आंशिक भरपाई हो पाएगी। इन बदलावों को ध्यान में रखते हुए, केंद्र और राज्यों को संयुक्त रूप से लगभग 1.57 लाख करोड़ रुपए का राजस्व घाटा होने का अनुमान है। केंद्र का हिस्सा लगभग 74,000 करोड़ रुपए है। बर्नस्टीन ने राजस्व की कमी को संतुलित करने के लिए पूंजीगत व्यय में 5 प्रतिशत की कटौती का भी अनुमान लगाया है, जो 56,000 करोड़ रुपए है। परिणामस्वरूप, केंद्र पर वास्तविक राजकोषीय बोझ घटकर 18,000 करोड़ रुपए रह गया है। इस बीच, एचएसबीसी ने एक दूसरी रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 24 के उपभोग आधार के आधार पर कर कटौती से सकल राजस्व हानि लगभग 10.8 अरब डॉलर हो सकती है। क्षतिपूर्ति उपकर से नए 40 प्रतिशत जीएसटी स्लैब में पुनर्निर्देशित राजस्व इस हानि के लगभग 5.2 अरब डॉलर की भरपाई कर सकता है, जिससे 5.6 अरब डॉलर या सकल घरेलू उत्पाद का 0.16 प्रतिशत की शुद्ध कमी रह जाएगी। वित्त वर्ष 26 के आधार पर इसे जोड़ते हुए, एचएसबीसी का अनुमान है कि राजस्व हानि 570 अरब रुपए होगी, जो एक वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद के केवल 0.16 प्रतिशत के बराबर होगी। यह देखते हुए कि वित्त वर्ष का केवल आधा समय बचा है, वित्त वर्ष 26 के लिए राजकोषीय प्रभाव सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 0.1 प्रतिशत होगा। दोनों रिपोर्टों से पता चलता है कि जीएसटी सुधारों से सरकार को कुछ राजस्व हानि होगी, लेकिन उच्च उपभोग और मजबूत अनुपालन के दीर्घकालिक लाभ अल्पकालिक राजकोषीय नुकसान से अधिक होंगे।

एआई से न्यूक्लियर तक: भारत और जापान के बीच नई टेक्नोलॉजी साझेदारी

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि टेक्नोलॉजी और इनोवेशन भारत और सिंगापुर के बीच साझेदारी के मजबूत स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि दोनों देशों ने एआई, क्वांटम और अन्य डिजिटल टेक्नीक में सहयोग बढ़ाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर सिंगापुर के पीएम लॉरेंस वोंग भारत की तीन दिवसीय यात्रा पर आए हैं। दिल्ली में दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने एक प्रेस वार्ता को संबोधित किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूपीआई और पे नाउ को डिजिटल कनेक्टिविटी का 'सफल उदाहरण' बताया। उन्होंने कहा कि भारत और सिंगापुर ने आसियान के साथ द्विपक्षीय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते और मुक्त व्यापार समझौते की समयबद्ध तरीके से समीक्षा करने का निर्णय लिया है। पीएम ने कहा, "प्रौद्योगिकी और नवाचार हमारी साझेदारी के मजबूत स्तंभ हैं। हमने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम और अन्य डिजिटल तकनीकों में सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। आज अंतरिक्ष क्षेत्र में हुआ समझौता अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में सहयोग का एक नया अध्याय जोड़ रहा है। हमने अपने युवाओं को उनकी प्रतिभा से जोड़ने के लिए इस वर्ष के अंत में भारत-सिंगापुर हैकाथॉन का अगला राउंड आयोजित करने का निर्णय लिया है। यूपीआई और पे नाउ हमारी डिजिटल कनेक्टिविटी के सफल उदाहरण हैं और यह खुशी की बात है कि आज 13 नए भारतीय बैंक उनसे जुड़ गए हैं।" प्रधानमंत्री मोदी ने सिंगापुर के नेता का गर्मजोशी से स्वागत किया। उन्होंने कहा, "मैं पदभार ग्रहण करने के बाद प्रधानमंत्री वोंग की पहली भारत यात्रा पर उनका हार्दिक स्वागत करता हूं। यह यात्रा इसलिए और भी खास है, क्योंकि इस वर्ष हम अपने संबंधों की 60वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।" प्रधानमंत्री मोदी ने 2024 में अपनी सिंगापुर यात्रा को याद किया, जिसके तहत दोनों देशों ने अपने संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक बढ़ाया था, और उन क्षेत्रों को सूचीबद्ध किया जो दोनों देशों के बीच सहयोग का केंद्र बिंदु भी बनेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "पिछले साल सिंगापुर की मेरी यात्रा के दौरान हमने अपने संबंधों को एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाया। इस एक साल में हमारे संवाद और सहयोग में गति आई है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज सिंगापुर दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र में हमारा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत में सिंगापुर से बड़े पैमाने पर निवेश हुआ है। हमारे रक्षा संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं। लोगों के बीच संबंध गहरे और जीवंत हैं। आज, हमने अपनी साझेदारी के भविष्य के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया है। हमारा सहयोग केवल पारंपरिक क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहेगा। बदलते समय के साथ उन्नत विनिर्माण, ग्रीन शिपिंग कौशल विकास, परमाणु और शहरी जल प्रबंधन जैसे क्षेत्र भी हमारे सहयोग का केंद्र बिंदु बनेंगे।" उन्होंने सिंगापुर को भारत की एक्ट ईस्ट नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए कहा कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति और स्थिरता के अपने संयुक्त दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने के लिए आसियान के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि भारत और सिंगापुर के बीच संबंध कूटनीति से आगे हैं। यह साझा मूल्यों पर आधारित एक उद्देश्यपूर्ण साझेदारी है। पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, "हमने निर्णय लिया है कि द्विपक्षीय व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते और आसियान के साथ हमारे मुक्त व्यापार समझौते की समयबद्ध समीक्षा की जाएगी, ताकि पारस्परिक व्यापार में तेजी आए।

केंद्र सरकार को घेरा ममता ने, बोली- अमेरिका और चीन के सामने रही कमजोर

पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने विदेशी ताकतों के सामने भारत की प्रतिष्ठा को बेच दिया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ‘‘कभी अमेरिका के सामने तो कभी चीन के सामने भीख मांग रही है''। अन्य राज्यों में बंगाली प्रवासियों पर हमलों से संबंधित सरकारी संकल्प पर राज्य विधानसभा में चर्चा में भाग लेते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की ‘‘तानाशाही मानसिकता'' है। भाजपा ‘‘पश्चिम बंगाल को अपना उपनिवेश बनाना'' चाहती है। बनर्जी ने जैसे ही इस संकल्प पर बोलना शुरू किया तो हंगामा होने लगा। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा ने विदेशी ताकतों के सामने भारत की प्रतिष्ठा बेच दी है। केंद्र सरकार कभी चीन के सामने गिड़गिड़ा रही है, तो कभी अमेरिका के सामने। वे देश नहीं चला सकते, राष्ट्र के हितों की रक्षा नहीं कर सकते, फिर भी हमें उपदेश देने की हिम्मत रखते हैं।'' मुख्यमंत्री ने भाजपा पर भाजपा शासित राज्यों में बंगाली प्रवासी श्रमिकों पर कथित हमलों पर चर्चा को रोकने का भी आरोप लगाया। बनर्जी ने दावा किया, ‘‘भाजपा बंगाली प्रवासियों पर हमलों को लेकर चर्चा के खिलाफ क्यों है? ऐसा इसलिए है… क्योंकि ये घटनाएं पार्टी शासित राज्यों में हो रही हैं। वे सच्चाई को दबाना चाहते हैं।'' 'भाजपा स्पष्ट रूप से बांग्ला विरोधी है…' सदन में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) विधायकों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्षी पार्टी की नारेबाजी के बीच अपनी बात कहने की कोशिश करते हुए बनर्जी ने पूछा, ‘‘भाजपा मुझे इस सदन में बोलने क्यों नहीं दे रही है?'' उन्होंने कहा, ‘‘हम हिंदी या किसी अन्य भाषा के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन भाजपा स्पष्ट रूप से बांग्ला विरोधी है। उनका रवैया औपनिवेशिक और तानाशाही मानसिकता को दर्शाता है। वे पश्चिम बंगाल को अपना उपनिवेश बनाना चाहते हैं।'' भाजपा तानाशाहों की पार्टी है- ममता बनर्जी ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा के ‘‘वैचारिक पूर्वजों'' ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान देश के साथ विश्वासघात किया था। उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘भाजपा तानाशाहों की पार्टी है। उनके पूर्वजों ने भारत की आजादी के लिए लड़ाई नहीं लड़ी, उन्होंने देश के साथ विश्वासघात किया।'' नोकझोंक बढ़ने पर, सत्ता पक्ष के कुछ विधायक विपक्षी दलों की ओर दौड़ पड़े, जिससे मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। हंगामे की स्थिति के बीच मुख्यमंत्री को अपना भाषण कुछ देर के लिए रोकना पड़ा।  

प्याज महंगा नहीं होगा! जानें किन शहरों में मिल रही सब्सिडी और वजह

नई दिल्ली  केंद्र सरकार ने महंगाई को लेकर एक बड़ा कदम उठाया है। अब दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में ₹24 प्रति किलोग्राम की दर से सब्सिडी वाला प्याज बेचा जाएगा, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके। केंद्रीय खाद्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने इस पहल की शुरुआत की है।   24 रुपए प्रति किलो बिकेगा प्याज केंद्र सरकार ने दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में ₹24 प्रति किलोग्राम की discounted rate पर प्याज की बिक्री शुरू कर दी है। इसके लिए मोबाइल वैन का इस्तेमाल किया जा रहा है। शुरुआती चरण में नेफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार जैसी सरकारी एजेंसियों के ज़रिए लगभग 25 टन प्याज बेचा जाएगा। सरकार का कहना है कि जिन शहरों में प्याज का रिटेल रेट ₹30 प्रति किलो से ज्यादा है, वहां यह सब्सिडी वाला प्याज बेचा जाएगा। यह योजना शुक्रवार से चेन्नई, गुवाहाटी और कोलकाता में भी शुरू होगी और दिसंबर तक जारी रहेगी। सरकार का बफर स्टॉक सरकार के पास अभी 3 लाख टन प्याज का बफर स्टॉक है, जिसे Price Stabilisation Fund (PSF) योजना के तहत औसतन ₹15 प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा गया था। यह स्टॉक मुख्य रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और मध्य प्रदेश से खरीदे गए रबी (सर्दियों) प्याज का है। इस प्याज को ₹24 प्रति किलो की दर पर बेचने से सरकार को लागत वसूलने में भी मदद मिलेगी।   महंगाई पर लगाम लगाने की कोशिश केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि सरकार की पहली प्राथमिकता खाद्य मुद्रास्फीति को नियंत्रण में रखना है। हाल के महीनों में सरकार के हस्तक्षेप से महंगाई को कम करने में मदद मिली है। जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति 1.55% पर आ गई थी, जो पिछले 8 सालों में सबसे कम थी। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे ने बताया कि फसल वर्ष 2024-25 में प्याज का घरेलू उत्पादन 27% बढ़कर 30.77 मिलियन टन होने का अनुमान है। उन्होंने यह भी साफ किया कि प्याज के निर्यात पर कोई रोक नहीं है।  

GST Reforms पर सीएम रेखा गुप्ता का बयान, देश और दिल्ली दोनों को मिलेगा लाभ

नई दिल्ली  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बृहस्पतिवार को कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) की दरों में कटौती देश के लिए एक बड़ा उपहार है और यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए मील का पत्थर साबित होगी। बुधवार को जीएसटी परिषद की पहली बैठक में शामिल हुईं गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि इस कदम से देश में व्यापार और कारोबार मजबूत होगा। रेखा गुप्ता ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘यह देश के लिए बहुत बड़ी सौगात है… स्वास्थ्य बीमा और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की दरों में कटौती देश के करोड़ों लोगों के लिए बड़ी राहत है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आभारी हैं।'' मुख्यमंत्री ने कहा कि जीएसटी परिषद ने जीएसटी की दरों में संशोधन को अपार समर्थन के साथ पारित कर दिया है। उन्होंने कहा कि इससे व्यापार और कारोबार को बढ़ावा मिलेगा तथा यह कदम भारतीय अर्थव्यवस्था में मील का पत्थर साबित होगा। गुप्ता ने कहा, ‘‘ दिल्ली बहुत खुश है और मैं दिल्लीवासियों की ओर से प्रधानमंत्री को स्वास्थ्य बीमा तथा शिक्षा संबंधी वस्तुओं पर शून्य जीएसटी लगाने के लिए धन्यवाद देती हूं। नवीकरणीय ऊर्जा को समर्थन दिया गया है और इससे दिल्ली को काफी लाभ होगा क्योंकि हम सौर ऊर्जा को बढ़ावा दे रहे हैं।'' जीएसटी परिषद ने बुधवार को आम सहमति से माल एवं सेवा कर में व्यापक सुधारों को मंजूरी दी। इन सुधारों के तहत साबुन, साइकिल, टीवी और व्यक्तिगत स्वास्थ्य तथा जीवन बीमा पॉलिसी जैसे आम उपयोग के उत्पादों पर जीएसटी की दरें कम की गयी हैं। जीएसटी में पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो-स्तरीय कर संरचना को मंजूरी दी गयी है। कुछ चुनिंदा वस्तुओं जैसे महंगी कारें, तंबाकू और सिगरेट के लिए भी 40 प्रतिशत का विशेष स्लैब प्रस्तावित है।  

यूएई की एशिया कप टीम तैयार, नए खिलाड़ियों को मिली जगह

अबू धाबी संयुक्त अरब अमीरात ने गुरुवार को आगामी एशिया कप 2025 के लिए 17 सदस्यीय टीम की घोषणा की। एशिया कप में टीम की कमान मुहम्मद वसीम संभालेंगे। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के साथ चल रही त्रिकोणीय सीरीज में मौजूद ज्यादा खिलाड़ियों को स्क्वॉड में जगह मिली है। नए खिलाड़ियों में दाएं हाथ के तेज गेंदबाज मतिउल्लाह खान और बाएं हाथ के स्पिनर सिमरनजीत सिंह को जोड़ा गया है। एशिया कप 2025 की शुरुआत 9 सितंबर से अबू धाबी में होगी। यूएई की टीम ग्रुप ए में मौजूद है। भारत, ओमान और पाकिस्तान भी इस समूह में हैं। यूएई की टीम अपना मुकाबला भारत के खिलाफ खेलेगी। भारत और यूएई के बीच 10 सितंबर को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में मुकाबला खेला जाएगा। यूएई 15 सितंबर को अबू धाबी के जायेद क्रिकेट स्टेडियम में ओमान से खेलेगा। उनका आखिरी ग्रुप मैच 17 सितंबर को दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में पाकिस्तान के साथ होगा। ग्रुप चरण के बाद टूर्नामेंट सुपर 4 में प्रवेश करेगा, जहां प्रत्येक ग्रुप से शीर्ष दो टीमें क्वालीफाई करेंगी। सुपर 4 स्टेज 20 से 26 सितंबर तक चलेगा। दुबई में फाइनल खेला जाएगा, जो 28 सितंबर को होना है। मतिउल्लाह ने एक वनडे और पांच टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं और उनका आखिरी मैच जुलाई में नाइजीरिया के खिलाफ पर्ल ऑफ अफ्रीका सीरीज में था। सिमरनजीत ने पांच वनडे और 11 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में यूएई का प्रतिनिधित्व किया है और हाल ही में दिसंबर 2023 में गल्फ टी20 अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में खेले थे। 2016 के बाद से यह यूएई का पहला एशिया कप होगा। एशिया कप 2025 के लिए यूएई टीम: मुहम्मद वसीम (कप्तान), अलीशान शराफू, अर्यांश शर्मा (विकेटकीपर), आसिफ खान, ध्रुव पाराशर, एथन डिसूजा, हैदर अली, हर्षित कौशिक, जुनैद सिद्दीकी, मतिउल्लाह खान, मुहम्मद फारूक, मुहम्मद जवादुल्लाह, मुहम्मद जोहैब, राहुल चोपड़ा (विकेटकीपर), रोहिद खान, सिमरनजीत सिंह और सगीर खान।  

PM नरेंद्र मोदी के दौरे से पहले मणिपुर में हुई अहम बैठक, तय हुई बड़ी सहमति

मणिपुर  मणिपुर के लिए नई दिल्ली से बड़ी खबर है। पीएम मोदी के मणिपुर दौरे की चर्चा के बीच 'कुकी-जो' परिषद ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 को यात्रियों और आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आवाजाही के लिए खोलने का फैसला किया है। माना जा रहा है कि उनके ( PM Modi ) पहुंचने से पहले कई फैसले गुडविल के तौर पर लिए जा रहे हैं। फिलहाल केंद्र सरकार की पूरी कोशिश है कि मणिपुर में हालात सामान्य और स्थिर रहें। केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) के अनुसार, यह फैसला नई दिल्ली में गृह मंत्रालय के अधिकारियों और केजेडसी के प्रतिनिधिमंडल के बीच हुई कई बैठकों के बाद लिया गया। केजेडसी ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर शांति बनाए रखने के लिए भारत सरकार द्वारा तैनात सुरक्षा बलों के साथ सहयोग करने का वचन दिया है। गृह मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि कुकी-जो परिषद ने एनएच-2 पर शांति बनाए रखने के लिए सुरक्षा बलों के साथ सहयोग करने की प्रतिबद्धता जताई है। मणिपुर को नागालैंड और पूर्वोत्तर के अन्य हिस्सों से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण जीवनरेखा एनएच-2, मई 2023 में राज्य में भड़के जातीय तनाव के कारण अवरुद्ध हो गई थी। मेइती और कुकी-जो समुदायों के बीच संघर्ष के कारण व्यापक हिंसा, जान-माल की हानि, हजारों लोगों का विस्थापन और गहराता मानवीय संकट उत्पन्न हुआ है। राजमार्ग को फिर से खोलना विश्वास बहाली और हिंसा प्रभावित राज्य में सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इंफाल और नई दिल्ली के अधिकारियों का मानना है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति आसान होने से विस्थापित परिवारों और राहत शिविरों में रह रहे लोगों की कठिनाइयां कम होंगी। गृह मंत्रालय ने बताया कि गुरुवार को नई दिल्ली में गृह मंत्रालय, मणिपुर सरकार, केएनओ और यूपीएफ के प्रतिनिधियों के बीच एक त्रिपक्षीय बैठक हुई। इस बैठक का समापन त्रिपक्षीय परिचालन निलंबन (एसओओ) समझौते पर हस्ताक्षर के साथ हुआ, जिसमें फिर से बातचीत की गई शर्तों और नियमों (आधारभूत नियमों) को हस्ताक्षर की तिथि से एक वर्ष के लिए प्रभावी माना जाएगा। मंत्रालय ने कहा कि संशोधित आधारभूत नियमों में दो प्रमुख बिंदुओं पर बल दिया गया है। मणिपुर की क्षेत्रीय अखंडता और मणिपुर में स्थायी शांति व स्थिरता के लिए बातचीत के माध्यम से समाधान की आवश्यकता। साथ ही, गृह मंत्रालय ने बताया कि केएनओ और यूपीएफ ने संघर्ष की आशंका वाले क्षेत्रों से सात निर्दिष्ट शिविरों में स्थानांतरण, शिविरों की संख्या कम करने, हथियारों को निकटतम सीआरपीएफ और बीएसएफ शिविरों में स्थानांतरित करने, और सुरक्षा बलों द्वारा कैडरों का कठोर भौतिक सत्यापन करने पर सहमति जताई है, ताकि विदेशी नागरिकों (यदि कोई हों) को सूची से हटाया जा सके।