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खंडवा जिले में मांस, मछली और अंडा की बिक्री पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया

 खंडवा   खंडवा जिले में मांस, मछली और अंडा की बिक्री पर पूरी तरह बैन लगा दिया गया है। गुरुपूर्णिमा पर्व के मौके पर श्री दादाजी धुनीवाले का वार्षिक मेला आज यानी 9 जुलाई से शुरु हो रहा है, जो 11 जुलाई तक चलेगा। ऐसे में तीन दिन शहरी क्षेत्र में दुकानें बंद रहेगी। इस संबंध में खंडवा नगर निगम द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है। इस संबंध में महापौर अमृता अमर यादव का कहना है कि, राजवीर ढाबे के घटनाक्रम की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निर्णय लिया गया है। दरअसल, बीते दिनों दादाजी धूनीवाले के निशान लेकर आ रहे भक्तों को ढाबे पर सेव टमाटर में नॉनवेज परोस दिया गया था। इसके चलते धार्मिक भावनाएं आहत न होम और श्रद्धालुओं की आस्था से खिलवाड़ न हो, इसे मद्देनजर रखते हुए ये आदेश जारी किया गया है। सख्ती से होगा आदेश का पालन गुरु पूर्णिमा पर्व पर दादाजी धूनीवाले के दरबार में तीन दिन महोत्सव मनाया जाता है। ऐसे में नगर निगम शांति और धार्मिक वातावरण बनाए रखने के लिए ये फैसला लिया है। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए प्रशासन की ओर से निर्णय का सख्ती से पालन कराने की बात कही गई है। सेव टमाटर की सब्जी की जगह परोस दिया था मटन बता दें कि, पंधाना क्षेत्र से दादाजी धूनीवाले के निशान लेकर खंडवा आ रहे श्रद्धालु एक ढाबे पर खाना खाने के लिए रुके थे। वहां उन्हें सेव टमाटर की सब्जी की जगह मटन परोस दिया गया था। इस घटना के बाद हिंदू जागरण मंच ने आक्रोश व्यक्त करते हुए जमकर बवाल मचाया था।

जबलपुर में ट्रैफिक व्यवस्था बदहाल, मामला एक बार फिर HC पहुंचा, कोर्ट ने जिम्मेदारों से माँगा जवाब

जबलपुर  मप्र हाईकोर्ट में जबलपुर शहर के बंद ट्रैफिक सिग्नल्स और कैमरों बंद होने को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट में कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए ट्रांसपोर्ट कमिश्नर, जबलपुर कलेक्टर, एसपी जबलपुर और निगमायुक्त सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित की है। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के अध्यक्ष डॉ. पीजी नाजपांडे की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि जबलपुर शहर में तकरीबन 26 ट्रैफिक सिग्नल्स लगे हैं, जिनमें अधिकांश गत छह माह से बंद हैं। इसके कारण शहर की यातायात व्यवस्था चौपट हो गई है। सिग्नल्स बंद होने के कारण जाम की स्थिति निर्मित हो रही है। इसके अलावा  कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे भी बंद पड़े हैं। इससे ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों की भी पहचान नहीं हो पा रही है। अपराधिक वारदातों को सुलझाने में भी कैमरों की अहम भूमिका रहती है। ट्रैफिक सिग्नल्स तथा सीसीटीवी कैमरा बंद होने के कारण शासन को आर्थिक नुकसान भी हो रहा है। सिग्नल्स तोड़ने वालों पर चालानी कार्यवाही नहीं हो रही है। याचिका में कहा गया है कि ट्रैफिक सिग्नल्स के संचालन को लेकर जिम्मेदार संस्था एक दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं, लेकिन उसका समुचित समाधान नहीं कर रहे हैं। शहर में लगे सभी ट्रैफिक सिग्नल का अनुबंध समाप्त हो चुका है। नए अनुबंध न होने के कारण शहर में यातायात व्यवस्था अराजक हो चली है। ब्लूम चौक को पार करने में 35 से 40 मिनट लग रहे हैं। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा।   

कोर्ट ने शहर में ई-रिक्शा की बढ़ती संख्या और ट्रैफिक सिग्नलों की खराब स्थिति पर भी चिंता जताई, मामले में अगली सुनवाई 22 जुलाई को

 इंदौर  इंदौर शहर के बदहाल ट्रैफिक को लेकर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। कोर्ट ने कलेक्टर आशीष सिंह, पुलिस आयुक्त संतोष कुमार सिंह और निगमायुक्त शिवम वर्मा से व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के लिए कहा है, ताकि इस समस्या का समाधान निकल सके। कोर्ट ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव से कहा है कि वे सुनवाई के दौरान न्यायमित्र के रूप में उपस्थित रहें और कोर्ट का सहयोग करें। शहर में लगातार बढ़ रही ई-रिक्शा की संख्या को लेकर भी कोर्ट ने शासन को फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा कि वर्तमान में ई-रिक्शा संचालन के लिए राज्य सरकार और क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) के पास कोई नीति नहीं है। ई-रिक्शा की संख्या, मार्ग और किराए पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है। कोर्ट ने ध्वस्त हो चुकी शहर की यातायात व्यवस्था को लेकर शासन और पुलिस विभाग से बिंदुवार विस्तृत जानकारी मांगी है। कोर्ट ने यह आदेश राजलक्ष्मी फाउंडेशन की ओर से दायर जनहित याचिका में दिया है। दो जुलाई को याचिका में बहस के बाद कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया था जो  देर शाम जारी हुआ। याचिका में शहर की बिगड़ती यातायात व्यवस्था को लेकर कहा है कि रात के वक्त एक भी चौराहे पर यातायात सिग्नल चालू नहीं रहते। चौराहों पर लगे सिग्नल बंद कर दिए जाते हैं। दुर्घटना रोकने को कोई इंतजाम नहीं दुर्घटना संभावित क्षेत्र तो चिह्नित कर लिए गए, लेकिन यहां दुर्घटना रोकने के कोई इंतजाम नहीं किए गए। हालत यह है कि चौराहों से सुबह और शाम को निकलना मुश्किल है। दुकान से ज्यादा सामान तो दुकानदार बाहर रखते हैं। शहर में ई-रिक्शा की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसे नियंत्रित करने की कोई नीति नहीं है। मामले में अगली सुनवाई 22 जुलाई को होगी। इन बिंदुओं पर मांगी जानकारी     शहर में प्रमुख चौराहों पर कितनी ट्रैफिक लाइटें लगाई गई हैं और कितनी काम कर रही हैं।     मार्ग चौड़ीकरण के माध्यम से कितने लेफ्ट टर्न बनाए गए हैं।     मुख्य और साइड लेन सड़कों पर रोड मार्किंग की गई या नहीं।     शहर में प्रमुख चौराहों पर यातायात पुलिसकर्मियों की तैनाती।     दुर्घटना, ब्लैक स्पाट की पहचान के लिए क्या किया।     पिछले पांच वर्ष के दौरान कितने स्पीड ब्रेकर, पार्किंग जोन, फुट ओवर ब्रिज बनाए।     दुकानों के बाहर सड़क और फुटपाथ पर सामान रखने वाले दुकानदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई की। ज्यादातर जगह तो दुकानदार दुकान के क्षेत्रफल से ज्यादा फुटपाथ इस्तेमाल कर रहे हैं।     सार्वजनिक स्थानों पर ठेले, गुमटियों को हटाने के लिए क्या कार्रवाई की और पिछले पांच वर्ष में कितने चालान बनाए।     हेलमेट नहीं पहनने वाले और लाल लाइट का उल्लंघन करने वाले कितने दोपहिया वाहन चालकों के चालान बनाए।     ऐसे दो पहिया वाहन जिन पर दो से अधिक यात्री यात्रा करते हैं वह भी बगैर हेलमेट के, उन्हें नियंत्रित करने के लिए क्या योजना है। यह भी बताएं कि पुलिस सख्ती क्यों नहीं बरतती। बीआरटीएस में निजी वाहन नहीं चलेंगे कोर्ट ने तीन पेज के आदेश में स्पष्ट किया है कि जब तक बीआरटीएस चालू है, तब तक इसमें केवल आईबस, एंबुलेंस और पुलिस वाहन ही चलेंगे। निजी वाहनों को बीआरटीएस का उपयोग करने की अनुमति नहीं है।

उज्जैन में अचानक स्कूलों का टाइम टेबल बदलने के पीछे कलेक्टर की मंशा सिर्फ और सिर्फ मुख्यमंत्री को खुश करने की:आरिफ मसूद

उज्जैन  उज्जैन में सावन के महीने में सोमवार को स्कूलों की छुट्टी करने और रविवार को स्कूल लगाने के कलेक्टर के आदेश की कांग्रेस ने आलोचना की है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने इसे ‘मुख्यमंत्री को खुश करने’ के लिए उठाया गया कदम बताया है। उन्होंने कहा कि सावन के महीने में महाकाल की सवारी निकलने की परंपरा दशकों पुरानी है और हर समाज-धर्म के लोग इसका स्वागत करते हैं। ऐसे में अचानक स्कूलों का टाइम टेबल बदलने के पीछे कलेक्टर की मंशा सिर्फ और सिर्फ मुख्यमंत्री को खुश करने की है। बता दें कि उज्जैन में श्रावण मास के दौरान भगवान महाकाल की सवारी को देखते हुए स्कूलों के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। कलेक्टर रौशन सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार 14 जुलाई से 11 अगस्त तक कक्षा पहली से 12वीं तक के सभी निजी और सरकारी स्कूल रविवार को संचालित होंगे और इसकी बजाय सोमवार को अवकाश रहेगा। उन्होंने कहा कि ये निर्णय महाकाल की सवारी के दौरान होने वाली भीड़ और कई मार्गों के बंद होने के मद्देनजर लिया गया है। उज्जैन में महाकाल की सवारी के दौरान सोमवार को स्कूलों की छुट्टी उज्जैन में सावन के महीने में काफी गहमागहमी रहती है। हर सोमवार को यहां महाकाल की सवारी निकलती है। इसी के साथ देश दुनिया से श्रद्धालु यहां महाकाल के दर्शन के लिए आते हैं। अब स्थानीय प्रशासन ने ये निर्णय लिया है कि इस बार सावन महीने में हर सोमवार को स्कूलों की छुट्टी रहेगी और उसकी जगह रविवार को स्कूल संचालित होंगे। 11 जुलाई से शुरू होने वाले श्रावण मास में इस बार महाकाल मंदिर से कुल छह सवारिया निकलेंगी। पहली सवारी 14 जुलाई को होगी, इसके बाद दूसरी सवारी 21 जुलाई, तीसरी सवारी 28 जुलाई, चौथी सवारी 4 अगस्त और पांचवी सवारी 11 अगस्त को भादौ मास में निकाली जाएगी। कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार इन पांच सोमवार को स्कूल बंद रहेंगे और रविवार को स्कूल खुलेंगे। 18 अगस्त को निकलने वाली राजसी सवारी के दिन स्थानीय अवकाश रहेगा..इसलिए उससे पहले रविवार को स्कूल नहीं लगेंगे। कलेक्टर के अनुसार यह निर्णय भगवान महाकाल की सवारी के दौरान सुचारू व्यवस्था और भक्तों की सुविधा को ध्यान में रखकर लिया गया है। आरिफ मसूद ने कहा ‘मुख्यमंत्री को खुश करने की कोशिश’ कांग्रेस ने इस निर्णय पर आपत्ति जताई है। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा है कि महाकाल की सवारी लंबे समय से निकलती आ रही है और इससे पहले कभी भी इस तरह की ज़रूरत महसूस नहीं हुई है। उन्होंने एएनआई के साथ बात करते हुए कहा कि ‘उज्जैन में महाकाल की सवारी बरसों से निकल रही है। परंपरागत रूप से लोग उसका स्वागत करते हैं..प्रत्येक वर्ग के लोग करते हैं। हर समाज हर धर्म का व्यक्ति उसका स्वागत करता है। अफसोस की बात है कि कलेक्टर ऐसा बेतुका आदेश निकालकर सिर्फ मुख्यमंत्री को खुश करना चाहते हैं, इसके अलावा कुछ भी नहीं है। ये परंपरागत जुलूस है और निकलता रहा है तो क्या आवश्यकता है कि एक दिन छुट्टी देकर एक दिन कैंसिल करो। संडे को स्कूल लगाओ। कल को दूसरे धर्म के लोग भी आवाज़ उठाएंगे फिर क्या करेंगे। संविधान से देश चलेगा। एक देश एक संविधान की बात करने वालों को सोचना चाहिए। ये जुलूस बरसों से निकल रहा है..आज से तो शुरु नहीं हुआ। क्या कलेक्टर महोदय बहुत विद्वान हैं ? इनसे पुराने कलेक्टर, पुरानी परंपराएं और संविधान क्या कोई नहीं जानता था ? ये ही जानते हैं बस ? ये आदेश सवारी के लिए या बच्चों की पढ़ाई के लिए नहीं बल्कि मुख्यमंत्री को खुश करने का आदेश है।’

जबलपुर विमानतल को फिर बम से उड़ाने की धमकी, एयरपोर्ट प्रबंधन ने दर्ज कराई एफआईआर

जबलपुर मध्य प्रदेश के जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट को फिर बम से उड़ाने की धमकी मिली है. पिछले 8 दिनों में दूसरी बार धमकी भरा ईमेल मिला है. इसमें एयरपोर्ट में बम ब्लास्ट करने की बात लिखी गई है. ईमेल मिलने के बाद एयरपोर्ट प्रबंधन अलर्ट हो गया. फौरन एयरपोर्ट के चप्पे-चप्पे की तलाशी ली गई. फिलहाल डुमना प्रबंधन की ओर से खमरिया थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है. अब पुलिस ईमेल भेजने वाले की तलाश में जुट गई है. बता दें कि इससे पहले 29 जून को भी डुमना एयरपोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी भरा ईमेल मिला था, जिसके बाद खमरिया थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। उस जांच में भी कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली थी और मामला फर्जी निकला था। इस बार भी धमकी मिलने के बाद सघन तलाशी के दौरान एयरपोर्ट पर कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। फिर मिली डुमना एयरपोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी पिछले दस दिन में दूसरी बार जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट को बम से उड़ाने की धमकी मिलने से सनसनी का माहौल है।एयरपोर्ट डायरेक्टर के अनुसार धमकी भरा ईमेल ‘इमाम हुसैन अली’ नाम की एक आउटलुक आईडी से भेजा गया था। मेल में एम. गुनासेकरन, जीवा सगप्तम वैश्यू, सेथिल वेल, माइनर, नैनिका कोवन, शिवदास और सुमी पापा जैसे नामों का जिक्र किया गया था। ईमेल में लिखा गया कि एयरपोर्ट में “फोर आरडीएक्स 800 बेस फ्यूज” रखा गया है, जिसे जानबूझकर कम मात्रा में डोप किया गया ताकि प्रभाव कम हो और ज्यादा लोग हताहत कम हों। मेल में जिन नाम का जिक्र था, उनकी जानकारी जुटाई गई। सभी विमान कंपनियों से यात्रा करने वाले पैसेंजरों की जानकारी भी बुलाई गई, लेकिन मेल में जिन नाम को लिखा था उनमें से कोई भी नाम पैसेंजर लिस्ट में नहीं थे। पुलिस ने दर्ज की एफआईआर धमकी भरे ईमेल की सूचना मिलते ही एयरपोर्ट प्रबंधन ने तुरंत बम निरोधक दस्ते, पुलिस और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल को सूचित किया। सोमवार की शाम से देर रात तक एयरपोर्ट के अंदर और बाहर गहन तलाशी ली गई। बीडीएस ने एयरपोर्ट के हर कोने की बारीकी से जांच की, लेकिन कोई विस्फोटक सामग्री नहीं मिली। एयरपोर्ट प्रबंधन द्वारा धमकी भरे ईमेल की शिकायत मिलने पर खमरिया थाने में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। खमरिया थाना प्रभारी सरोजिनी टोप्पो ने बताया कि अज्ञात के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

Apple कंपनी ने भारतीय मूल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सबिह खान को COO बनाया

मुरादाबाद आईफोन बनाने वाली अमेरिकी कंपनी ऐपल में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। कंपनी ने भारतीय मूल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट सबिह खान को चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) बनाया है। वह जेफ विलियम्स की जगह लेंगे जो लगभग 30 साल की सर्विस के बाद इसी साल रिटायर होने जा रहे हैं। विलियम्स अभी कुछ समय तक टिम कुक को रिपोर्ट करते रहेंगे। वह ऐपल की डिजाइन टीम और हेल्थ से जुड़े कामों को भी देखेंगे। सबिह खान का जन्म 1966 में उत्तर प्रदेश की पीतल नगरी मुरादाबाद में हुआ था। स्कूली दिनों में ही वह सिंगापुर चले गए थे। कुछ समय बाद ही वह अमेरिका चले गए। Tufts University से इकनॉमिक्स और मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बैचलर डिग्री लेने के बाद उन्होंने Rensselaer Polytechnic Institute (RPI) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स डिग्री ली। ऐपल में आने से पहले सबिह खान जीई प्लास्टिक्स में काम करते थे। वहां वह एप्लिकेशन डेवलपमेंट इंजीनियर और टेक्निकल लीडर थे। सफलता की सीढ़ियां सबिह खान ने 1995 में ऐपल के प्रोक्योरमेंट ग्रुप को ज्वाइन किया था। धीरे-धीरे वह आगे बढ़ते गए और 2019 में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बने। पिछले छह साल में उन्होंने ऐपल की ग्लोबल सप्लाई चेन को संभाला है। इसमें प्लानिंग, खरीदारी, मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और प्रोडक्ट को पूरा करना शामिल है। सबिह खान ने ऐपल के सप्लायर रिस्पॉन्सिबिलिटी प्रोग्राम को भी देखा है। यह प्रोग्राम कर्मचारियों की सुरक्षा, शिक्षा और पर्यावरण की देखभाल पर ध्यान देता है। टिम कुक ने सबिह खान के बारे में कहा कि वह एक शानदार रणनीतिकार हैं। वह ऐपल की सप्लाई चेन के मुख्य आर्किटेक्ट रहे हैं। सबिह ने ऐपल की सप्लाई चेन को बनाने और मजबूत करने में बहुत बड़ा योगदान दिया है। उन्होंने एडवांस मैन्युफैक्चरिंग में नई टेक्नोलॉजी को लाने में मदद की है। उन्होंने अमेरिका में ऐपल की मौजूदगी को बढ़ाया है। साथ ही, उन्होंने पर्यावरण के लक्ष्यों को भी आगे बढ़ाया है। ऐपल ने अपने कार्बन फुटप्रिंट को 60 प्रतिशत से ज्यादा कम कर दिया है। कुक ने क्या कहा कुक ने यह भी कहा, 'सबिह की सबसे बड़ी खूबी यह है कि वह दिल से और ईमानदारी से काम करते हैं। मुझे पता है कि वे एक बेहतरीन चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर बनेंगे।' सबिह खान ने ऐपल की ग्रीन मैन्युफैक्चरिंग पहल को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने सप्लायरों के साथ मिलकर पर्यावरण पर पड़ने वाले बुरे असर को कम करने के लिए काम किया है। उनकी वजह से ऐपल ग्लोबल चुनौतियों का सामना करने में सक्षम रहा है।  

सहायक कार्यकारी अधिकारी ए राजशेखर बाबू को चर्च की प्रार्थना में भाग लेने के कारण टीटीडी द्वारा निलंबित कर दिया गया

तिरुपति  तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने अपने एक अधिकारी ए. राजशेखर बाबू को चर्च में प्रार्थना करने के कारण निलंबित कर दिया है। TTD श्री वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर का प्रबंधन करता है। बयान में कहा गया कि अधिकारी को दूसरे धर्म का पालन करने के आरोप में निलंबित किया गया है। TTD के अनुसार, राजशेखर बाबू हर रविवार को अपने गृहनगर, पुत्तूर के एक चर्च में प्रार्थना करने जाते थे। यह बात TTD के ध्यान में आई, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। TTD ने एक बयान में कहा, 'यह TTD के नियमों का उल्लंघन है। एक कर्मचारी के रूप में उन्हें TTD की आचार संहिता का पालन करना चाहिए था। उन्होंने एक हिंदू धार्मिक संगठन के कर्मचारी के रूप में गैरजिम्मेदारी से काम किया है।' जांच और सबूतों के बाद हुआ सस्पेंशन बयान में आगे कहा गया है कि TTD सतर्कता विभाग की रिपोर्ट और अन्य सबूतों की जांच के बाद, नियमों के अनुसार उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू की गई है। उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। TTD ने पहले मामले की जांच की। फिर, नियमों के अनुसार, राजशेखर बाबू को निलंबित कर दिया गया। केवल हिंदू ही मंदिरों में कर सकते हैं काम फरवरी में, TTD ने 18 कर्मचारियों के खिलाफ गैर-हिंदू धार्मिक रीति-रिवाजों का पालन करने के लिए अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की थी। यह कार्रवाई TTD बोर्ड के नए अध्यक्ष बीआर नायडू की घोषणा के बाद की गई। नायडू ने कहा था कि मंदिर निकाय के संचालित संस्थानों में केवल हिंदुओं को ही काम करने का नियम है। इन कर्मचारियों में छह शिक्षक भी शामिल थे, जो TTD द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में काम करते थे। इन सभी पर गैर-हिंदू धार्मिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था। छह अन्य कर्मचारियों पर चला डंडा इसके अलावा, एक उप कार्यकारी अधिकारी (कल्याण), एक सहायक कार्यकारी अधिकारी, एक सहायक तकनीकी अधिकारी (इलेक्ट्रिकल), एक छात्रावास कार्यकर्ता, दो इलेक्ट्रीशियन और दो नर्सों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। TTD ने आदेश दिया था कि इन कर्मचारियों को तिरुमाला में, TTD के अधीन किसी भी मंदिर में या किसी भी धार्मिक कार्यक्रम से संबंधित काम के लिए तैनात नहीं किया जाना चाहिए। यह भी निर्णय लिया गया कि यदि वे ऐसी जगहों पर काम कर रहे हैं, तो उन्हें तुरंत स्थानांतरित कर दिया जाना चाहिए। TTD ने यह सुनिश्चित किया कि इन कर्मचारियों को मंदिर से जुड़े किसी भी काम में शामिल न किया जाए। इस नियम के तहत एक्शन इन 18 कर्मचारियों को TTD के धार्मिक कार्यों में भाग लेने से रोक दिया गया था। उन्हें TTD के किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए मना किया गया था। TTD चाहता था कि ये कर्मचारी मंदिर के किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा न लें। इन कर्मचारियों ने भगवान वेंकटेश्वर के सामने शपथ ली थी कि वे केवल हिंदू धर्म और हिंदू परंपराओं का पालन करेंगे। यह शपथ राजस्व विभाग (Endowments) के GO No 1060 में जारी नियम 9 (vi) के अनुसार थी, जो 24 अक्टूबर, 1989 को जारी किया गया था। इसके बावजूद, वे गैर-हिंदू धार्मिक परंपराओं का पालन कर रहे थे। इसका मतलब है कि उन्होंने मंदिर के नियमों को तोड़ा था।  

ED ने छांगुर बाबा के अवैध धर्मांतरण मामले में FIR दर्ज, होगी मनी लॉन्ड्रिंग की जांच

बलरामपुर  बलरामपुर से धर्मांतरण का रैकेट चलाने वाला जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा पुलिस की गिरफ्त में है. उसके खिलाफ ताबड़तोड़ एक्शन जारी है. बीते दिन उसकी अवैध आलीशान कोठी पर बुलडोजर चला. अब प्रवर्तन निदेशालय यानी ED भी छांगुर बाबा पर शिकंजा कसने की तैयारी में है.    दरअसल, ED ने जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा के अवैध धर्मांतरण मामले में FIR दर्ज की है. ED धर्मांतरण केस में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच करेगी. ED की लखनऊ यूनिट ने देर शाम केस दर्ज किया है. बहुत जल्द ED इस केस से जुड़े आरोपियों से पूछताछ करेगी. धर्मांतरण के विदेशी कनेक्शन और मनी ट्रेल की भी जांच की जाएगी.  मालूम हो कि छांगुर बाबा से जुड़े मामले में अब 100 करोड़ से ज्यादा की फंडिंग की बात सामने आई है. जिसके बाद केस में ED की एंट्री हुई. धर्मांतरण केस में छांगुर एंड कंपनी को कहां-कहां से और कैसे-कैसे फंडिंग हुई, इसकी जांच ED करेगी.  गौरतलब है कि बीते दिनों यूपी सहित दूसरे राज्यों में फैले अवैध धर्मांतरण रैकेट का खुलासा हुआ. इस रैकेट का मास्टरमाइंड जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा है, जिसे यूपी एसटीएफ ने महिला साथी के साथ गिरफ्तार किया है. जांच में पता चला है कि यह रैकेट जाति के आधार पर धर्म बदलवाने के लिए रेट फिक्स करता था. इतना ही नहीं नाबालिगों और प्रेम जाल में फंसाकर भी लोगों का धर्मांतरण कराया गया. कुछ पीड़ित सामने आकर अपनी आपबीती बयां कर चुके हैं.  हाल ही में लखनऊ में 12 लोगों ने इस्लाम धर्म से हिंदू धर्म में वापसी की थी. इनमें कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि बलरामपुर के रहने वाले जमालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा ने पैसों का लालच देकर उनका धर्म परिवर्तन कराया. तब से ही छांगुर बाबा यूपी ATS और STF की जांच के दायरे में आ गया था. लखनऊ के ही एक होटल से छांगुर बाबा को गिरफ्तार किया गया. सीएम योगी आदित्यनाथ का कड़ा संदेश इस कार्रवाई के दौरान में ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कड़ा संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि राज्य में शांति, सौहार्द और महिलाओं की सुरक्षा को भंग करने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है। मतांतरण कराने और विदेशी फंडिंग के मामले में आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) ने जलालुद्दीन, नवीन रोहरा उर्फ जमालुद्दीन और इसकी पत्नी नीतू नवीन रोहरा उर्फ नसरीन समेत अन्य को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इनकी गिरफ्तारी के बाद जिला प्रशासन ने अतिक्रमण कर बनाई गई कोठी को गिराने की प्रक्रिया शुरू की। सोमवार देर शाम तहसीलदार सत्यपाल प्रजापति और कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अवधेश राज सिंह मय फोर्स जाकर कोठी पर तीन नोटिस चस्पा की। तीनों पर अलग-अलग तिथियां अंकित हैं। नीतू के नाम से जारी नोटिस में कहा गया है कि गाटा संख्या 337/370 के संपूर्ण रकबा 0.0060 हेक्टेयर से अतिक्रमण की गई जमीन सात दिन में स्वयं खाली कर लें। अन्यथा इस अतिक्रमण को नियमानुसार बलपूर्वक हटवा दिया जाएगा। यह आदेश न्यायालय तहसीलदार उतरौला न्यायिक ने 15 मई, 2025 को दिया था। इसी आदेश के अनुपालन में 17 व 26 मई और छह जून, 2025 की तिथि में जारी नोटिस को कोठी की दीवार पर एक ही दिन में चस्पा की गई। जिलाधिकारी पवन अग्रवाल ने बताया कि सरकारी जमीन पर कब्जा कर बनाए गए भवन को गिराने की कार्रवाई की जा रही है। जलालुद्दीन व उसके करीबियों की अन्य संपत्तियों की जांच जारी है। अवैध मतांतरण कराने का गरोह चलाने वाले आरोपित जलालुद्दीन के विरुद्ध कार्रवाई के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त संदेश भी दिया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार बहन-बेटियों की गरिमा और सुरक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपित जलालुद्दीन की गतिविधियां समाज विरोधी ही नहीं, बल्कि राष्ट्र विरोधी भी हैं। उत्तर प्रदेश सरकार कानून-व्यवस्था को लेकर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतेगी। आरोपित और उसके गिरोह से जुड़े सभी अपराधियों की संपत्तियां जब्त की जाएंगी और उन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। राज्य में शांति, सौहार्द और महिलाओं की सुरक्षा को भंग करने वालों के लिए कोई स्थान नहीं है। उन्हें कानून के अनुसार ऐसी सजा दी जाएगी, जो समाज के लिए एक उदाहरण बने।   

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 12 जुलाई को उज्जैन में राज्य स्तरीय निषादराज सम्मेलन का आयोजन होगा

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 12 जुलाई को उज्जैन में राज्य स्तरीय निषादराज सम्मेलन का आयोजन होगा भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की उपस्थिति में 12 जुलाई को उज्जैन में राज्य स्तरीय निषादराज सम्मेलन का आयोजन होगा। कार्यक्रम की तैयारियों की मत्स्य पालन एवं मछुआ कल्याण राज्य मंत्री नारायण सिंह पंवार ने समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन निषादराज समाज के गौरव और संस्कृति को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है, ऐसे में यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी व्यवस्थाएं उत्कृष्ट हों। राज्यमंत्री पंवार ने अधिकारियों को समय-सीमा में सभी कार्यों को पूर्ण करने और बेहतर समन्वय स्थापित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उज्जैन में आयोजित होने जा रहे इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक और सफल बनाने के लिए हर जरूरी कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे भूमिपूजन और लोकार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव कार्यक्रम में 22.65 करोड़ रूपये की लागत के 453 स्मार्ट फिश पार्लर, 40 करोड़ रूपये की लागत से बन रहे अत्याधुनिक अंडर वॉटर टनल सहित एक्वापार्क और 91.80 करोड़ रूपये की लागत से इंदिरा सागर जलाशय में 3060 केजेस के माध्यम से मत्स्य उत्पादन से वृद्धि एवं रोजगार सृजन का वर्चुअली भूमि-पूजन करेंगे। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. यादव 430 मोटर साइकिल विद आइस बॉक्स के स्वीकृति पत्र एवं 100 यूनिट्स का वितरण, 396 केज के स्वीकृति पत्र का प्रदाय, फीडमील के हितग्राहियों को स्वीकृति पत्र का प्रदाय एवं उत्कृष्ट कार्य कर रहे मछुआरों एवं मत्स्य सहकारी समितियों को पुरस्कार वितरण करेंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव मत्स्य महासंघ के मछुआरों को 9.63 करोड़ रूपये के डेफर्ड वेजेस का सिंगल क्लिक से अंतरण करने के साथ ही रॉयल्टी चेक प्रदाय करेंगे।  

गुरु पूर्णिमा पर खास अंदाज़ में दिखेंगे सीएम योगी, निभाएंगे गुरु और शिष्य दोनों की भूमिका

गोरखपुर सनातन विचार दर्शन एवं संस्कृति में गुरु-शिष्य के रिश्ते को प्रतिष्ठित करने वाले पावन पर्व गुरु पूर्णिमा गोरक्षपीठ के लिए विशेष होती है। यह वह अवसर होता है, जब गोरक्षपीठाधीश्वर नाथपंथ के आदिगुरु महायोगी गोरखनाथ सहित पीठ के अपने पूर्ववर्ती गुरुजनों की पूजन-स्तुति करते हैं और तदुपरांत अपने शिष्यों और गोरक्षपीठ के श्रद्धालुओं को स्नेहाशीष से अभिसिंचित करते हैं। गोरक्षपीठ की इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए वर्तमान पीठाधीश्वर एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गुरु पूर्णिमा (10 जुलाई, गुरुवार) पर शिष्य और गुरु दोनों भूमिकाओं में दिखेंगे। यूं तो गोरक्षपीठ, गोरखनाथ मंदिर में धर्म-अध्यात्म की मंगलध्वनि अहर्निश गुंजायमान रहती है, पर गुरु पूर्णिमा का पर्व यहां बेहद खास होता है। इस दिन के विशेष आयोजन में सहभागी बनने की गोरक्षपीठ के श्रद्धालुओं की उत्कंठा प्रबल होती है। नाथपंथ मुख्यतः गुरुगम्य मार्ग है। इस लिहाज से गोरक्षपीठ और गुरु पूर्णिमा का अटूट नाता है। गुरु-शिष्य परंपरा इस पीठ के मूल में है। गुरु परंपरा से ही नाथ परंपरा आगे बढ़ी है। यही वजह है कि गोरक्षपीठ, गुरु परंपरा के प्रतीक के तौर पर पूरी दुनिया में प्रतिष्ठित है। हर काल में इस परंपरा को कायम रख पीठ ने कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया है। शिवावतार भगवान गोरखनाथ ने योग को लोक कल्याण का माध्यम बनाया तो उनके अनुगामी नाथपंथ के मनीषियों ने लोक कल्याणकारी अभियान को गति दी। उल्लेखनीय है कि सनातन संस्कृति गुरु को गोविंद (भगवान) से भी ऊंचे स्थान पर प्रतिष्ठित करती है। गुरु का ध्येय समग्र रूप में लोक कल्याण होता है और इसकी दीक्षा भी वह अपने शिष्य को देता है। गुरु परंपरा के आईने में देखें तो नाथपंथ की विश्व प्रसिद्ध गोरक्षपीठ बेमिसाल है। पीढ़ी दर पीढ़ी गोरक्षपीठाधीश्वरों ने अपने गुरु से प्राप्त लोक कल्याण की परंपरा को विस्तारित किया है। वर्तमान पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ इसे निरंतर ऊंचाई प्रदान कर रहे हैं। गुरु परंपरा के लोक कल्याणकारी कार्यों के अनुगमन में गोरक्षपीठ की गत-सद्यः तीन पीढ़ियां तो कीर्तिमान रचती नजर आती हैं। गोरखनाथ मंदिर के वर्तमान स्वरूप के शिल्पी ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ महाराज ने लोक कल्याण के लिए शिक्षा को सबसे सशक्त माध्यम बनाते हुए 1932 में महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की स्थापना की। उदात्तमना ब्रह्मलीन महंत जी ने गोरखपुर विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए अपने दो महाविद्यालय भी दान में दे दिए थे। उनके समय में ही लोगों को हानिरहित व सहजता से उपलब्ध चिकित्सा सुविधा हेतु मंदिर परिसर में एक आयुर्वेदिक चिकित्सा केंद्र की भी स्थापना हुई थी। अपने गुरु द्वारा शुरू किए गए इन प्रकल्पों को अपने समय में उनके शिष्य ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज ने विस्तार दिया। शिक्षा, चिकित्सा, योग सहित सेवा के सभी प्रकल्पों को नया आयाम दिया। ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ महाराज के शिष्य एवं वर्तमान गोरक्षपीठाधीश्वर, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक कल्याण के लिए अपने दादागुरु द्वारा रोपे और अपने गुरु द्वारा सींचे गए पौधे को वटवृक्ष सरीखा बना दिया है। किराए के एक कमरे में शुरू शिक्षा का प्रकल्प दर्जनों संस्थानों के साथ ही विश्वविद्यालय तक विस्तारित हो चुका है। इलाज के लिए गोरक्षपीठ की तरफ से संचालित गुरु श्री गोरक्षनाथ चिकित्सालय की ख्याति पूरे पूर्वांचल में है। गोरक्षपीठ से योग के प्रसार को लगातार गति मिली है। पीठ की गुरु परंपरा में लोक कल्याण के मिले मंत्र की सिद्धि योगी आदित्यनाथ की मुख्यमंत्री की भूमिका में भी नजर आती है। मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद की तमाम व्यस्तताओं के बावजूद गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ हर गुरु पूर्णिमा पर अपने गुरु का आशीर्वाद लेने और शिष्यों को आशीर्वाद देने के लिए गोरखनाथ मंदिर जरूर पहुंचते हैं। इसी क्रम में इस बार भी गुरुवार को वह गुरु पूर्णिमा पूजा के लिए मंदिर में मौजूद रहेंगे।