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छात्रों पर लाठीचार्ज का मामला, CM योगी ने तुरंत लिया एक्शन

बाराबंकी  उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में छात्रों और ABVP कार्यकर्ताओं पर हुए लाठीचार्ज के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाया है। सीएम ने घटना का तत्काल संज्ञान लिया और जिम्मेदार पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए। अब तक की बड़ी कार्रवाई CO हर्षित चौहान सस्पेंड कर दिए गए हैं। नगर कोतवाली इंस्पेक्टर और गदिया चौकी इंचार्ज को लाइन हाजिर कर दिया गया है। IG अयोध्या रेंज प्रवीण कुमार को पूरे मामले की जांच सौंपी गई है। अयोध्या मंडलायुक्त को रामस्वरूप यूनिवर्सिटी की डिग्री वैधता की जांच करने के आदेश दिए गए हैं। क्या हुआ था बाराबंकी में? बाराबंकी के रामस्वरूप यूनिवर्सिटी में LLB कोर्स की मान्यता रद्द हो चुकी थी, लेकिन फिर भी वहां एडमिशन जारी थे। इसको लेकर छात्रों और ABVP कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पुलिस से झड़प हो गई और हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। इस घटना में 25 से ज्यादा लोग घायल हो गए। कई छात्र गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराए गए। राजनीतिक असर और सरकार की सख्ती छात्रों की पिटाई का मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी नाराजगी देखी गई। सरकार के एक मंत्री खुद घायलों से मिलने अस्पताल पहुंचे। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी ने तुरंत एक्शन लिया और पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की। वहीं योगी सरकार ने साफ कर दिया है कि छात्रों पर अत्याचार या पुलिस की मनमानी अब बर्दाश्त नहीं होगी। जांच में जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

महाआर्यमन सिंधिया बने MPCA अध्यक्ष, पदभार ग्रहण से पहले किया गणेश पूजन

इंदौर  केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया मंगलवार सुबह एमपीसीए का चेयरमेन चुने जाने से पहले अपने बेटे महाआर्यमन सिंधिया को लेकर मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित देश के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर दर्शन करने पहुंचे। प्राचीन खजराना गणेश मंदिर में ज्योतिराज सिंधिया और महाआर्यमन ने भगवान गणेश का आशीर्वाद लिया। मंदिर के पंडितों ने मंत्रोच्चार के साथ विधि विधान से पूजा कराई। ईपको बता दें कि आज मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की एजीएम में अध्यक्ष पद के लिए महा आर्यमन सिंधिया के नाम पर अंतिम मुहर लग गई है। मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से अध्यक्ष पद की घोषणा के बाद प्रेस कांफ्रेंस भी कर ली गई है। इसी पद पर निर्विरोध चुने गए महाआर्यमन घोषणा से पहले अपने पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ खजराना गणेश के दर्शन करने पहुंचे थे। 'शुभ कार्य से पहले प्रभु का आशीर्वाद लेना हमारी परंपरा' इंदौर में खजराना गणेश के दर्शन करने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, '' ॐ सिद्धिविनायकाय नमः आज इंदौर प्रवास का शुभारम्भ खजराना गणेश मंदिर में सिद्धिविनायक प्रभु के दर्शन और पूजा-अर्चना के साथ किया. हर शुभ कार्य से पूर्व प्रभु का आशीर्वाद लेना न केवल हमारी परंपरा, बल्कि मेरी पारिवारिक विरासत और व्यक्तिगत आस्था का भी अभिन्न हिस्सा है. विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता भगवान श्री गणेश जी से राष्ट्र और प्रदेश की प्रगति, समृद्धि और जनकल्याण की प्रार्थना की.'' बेटे को शॉल पहनाकर सिंधिया ने किया स्वागत दरअसल, ये शुभकार्य था महा आर्यमन का मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन का अध्यक्ष चुना जाना. सिंधिया उन्हीं के लिए खजराना गणेश की शरण में पहुंचे थे और प्रभु से मंगलकामना की. महाआर्यमन ने भी साथ किया पूजन खजराना गणेश मंदिर में पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ महाआर्यमन भी पूजन करते नजर आए. पिता पुत्र ने खजराना गणेश के सामने माथा टेककर आशीर्वाद लिया. इस दौरान उनके साथ मध्य प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट भी नजर आए. MPCA के इतिहास में सबसे युवा अध्यक्ष बता दें कि भाजपा नेता व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बेटे महाआर्यमन सिंधिया को निर्विरोध मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (MPCA) का अध्यक्ष चुन लिया गया है. इसके साथ ही वे मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन के सबसे युवा अध्यक्ष बनने वाले व्यक्ति बन गए हैं. ग्वालियर राजघराने के महाआर्यमन सिंधिया की उम्र 29 वर्ष है. खजराना मंदिर के बाद पहुंचे होल्कर स्टेडियम खजराना गणेश मंदिर में मंत्रोच्चार के साथ पूजन करने के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया व महाआर्यम सीधे होल्कर स्टेडियम पहुंचे. होल्कर स्टेडियम में आयोजित मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की बैठक में महाआर्यमन को पदभार ग्रहण कराया गया. इसके साथ ही यहां नई मैनेजिंग कमेटी की घोषणा होगी. बेटे को शॉल पहनाकर सिंधिया ने किया स्वागत मध्य प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन की बैठक में वो पल भी आया जिसे देख महाआर्यमन भावुक भी हो गए. दरअसल, महाआर्यमन द्वारा अध्यक्ष पद ग्रहण करने के दौरान पिता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने उन्हें शॉल पहनाकर स्वागत व सम्मान किया. साथ ही एमपीसीए में उज्जल भविष्य के लिए आशीर्वाद भी दिया.

घोड़ा मालिक और हैदराबाद कंपनी के खिलाफ FIR, जबलपुर में 19 घोड़ों की मौत

जबलपुर : एमपी के जबलपुर में हैदराबाद से आए विभिन्न नस्लों के घोड़ों की मौत का मामला अब पुलिस थाने पहुंच गया है। बीते 20 दिन में आधा दर्जन घोड़ों की मौत के बाद मरने वाले घोड़ों की कुल संख्या 19 पर पहुंच गई है। पशु पालन विभाग ने आखिर 4 महीने बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई हैं। जबलपुर के रैपुरा ग्राम स्थित ठाकुर फार्म में हैदराबाद से चार महीने पहले 57 एलीट घोड़ों को व्यावसायिक उपयोग के लिए लाया गया था। इनमें से अभी तक कुल 19 घोड़ों की रहस्यमयी तरीके से मौत हो चुकी है। हालांकि पूर्व में जब घोड़ों की मौतों पर हो—हल्ला मचा था उस समय जांच में एक घोड़े में ग्लैंडर्स बीमारी के लक्षण पाए गए थे। अब फिर से आधा दर्जन घोड़ों की मौत से पशु पालन विभाग सहित प्रशासन में हड़कंप मच गया है। आनन-फानन में रैपुरा फॉर्म संचालक और हैदराबाद की हेथा नेट इंडिया प्राइवेट कम्पनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। पहले जारी की थी प्रेस रिलीज 23 मई को कलेक्टर ने प्रेस रिलीज जारी की थी और इसमें लिखा था कि 29 अप्रैल से 3 मई के बीच तिवारी घोड़े लेकर जबलपुर आए। उन्होंने ही इलाज के लिए आवेदन दिया। इसके बाद इलाज शुरू हुआ और ब्लड सैंपल हिसार लैब भेजे गए। उस समय 44 घोड़े स्वस्थ बनाए गए, जबकि 9 की रिपोर्ट आना बाकी थी। प्रेस रिलीज में मेनका गांधी के निर्देशों का भी जिक्र था। क्यों पलटा प्रशासन 5 मई से 31 अगस्त तक प्रशासन और वेटरनरी विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। लेकिन 1 सितम्बर को एफआईआर दर्ज कर दी गई। इसमें कहा गया कि घोड़े जबलपुर लाने या रखने की अनुमति प्रशासन या ग्राम पंचायत से नहीं ली गई। मामला हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है, माना जा रहा है कि इसी वजह से चार महीने बाद कार्रवाई हुई। हरियाणा स्थित अनुसंधान केंद्र भेजे थे सैंपल पूर्व में जब एक महीने में 13 घोड़ों की मौत हुई थी उस समय बीमारी का पता लगाने के लिए घोड़ों के ब्लड सीरम सैंपल हरियाणा के हिसार स्थित राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र भेजे गए थे। अनुसंधान केन्द्र से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ एक घोड़े में ग्लैंडस के संभावित लक्षण पाए गए थे। घोड़े के स्वास्थ्य में सुधार होने के कारण जांच के लिए दोबारा सैंपल लैब में नहीं भेजे गए थे। रैपिड रिस्पांस टीम गठित की गई थी गौरतलब है कि हेथा नेट इंडिया प्राइवेट कम्पनी हैदराबाद से 29 अप्रैल से 3 मई के बीच 57 विभिन्न नस्लों के घोड़े को जबलपुर लाकर पनागर के रैपुरा ग्राम में रखा गया था। घोड़ों की तबीयत खराब होने के कारण केयरटेकर सचिन गुप्ता ने पशुपालन एवं डेयरी विभाग को सूचित किया था। घोड़ों में ग्लैंडर्स बीमारी की सम्भावना तथा जूनोटिक रोगों की निगरानी व निदान के लिए नेशनल एक्शन प्लान के तहत जिला कलेक्टर ने रैपिड रिस्पांस टीम गठित करने के आदेश जारी किए थे। हाई कोर्ट में दायर हुई याचिका एनिमल लवर्स सिमरन इस्सर और अन्य ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। अब तक प्रशासन, वेटरनरी विभाग, राज्य सरकार और आरोपी पक्ष की ओर से करीब 1600 पेज का जवाब कोर्ट में दिया गया है। अगली सुनवाई अक्टूबर में होगी। 5 मई को सड़क के रास्ते लाए गए थे 57 घोड़े हैदराबाद से थोरो, काठियावाड़ी और मारवाड़ी प्रजाति के 57 घोड़े सड़क के रास्ते 5 मई को जबलपुर लाए गए थे। सभी को रैपुरा गांव में रखा गया। इनकी देखरेख के लिए स्टड फॉर्म मालिक सचिन तिवारी ने कुछ डॉक्टर और सेवक भी रखे। लेकिन 7 मई से 13 मई के बीच इनमें से 8 घोड़ों की मौत हो गई। उसके बाद एक-एक कर 5 और घोड़े मरे और एक और की मौत के साथ आंकड़ा 14 पहुंच गया। दो सप्ताह पहले तक बचे घोड़ों की संख्या 44 थी, लेकिन अब फिर 6 घोड़ों की जान चली गई और संख्या घटकर 38 रह गई है। 20 दिन में आधा दर्जन घोड़ों की फिर मौत रैपुरा ग्राम स्थित ठाकुर फार्म में रखे गए घोड़ों में से विगत 20 दिनों में आधा दर्जन घोड़ों की मौत हो गई थी। अभी तक 57 में से 19 घोड़ों की मौत हो चुकी है। घोड़े के केयर टेकर सचिन तिवारी ने पशुपालन विभाग की टीम को बताया गया था कि घोड़ों की मौत का कारण परिवहन के तनाव से हुई थी। घोड़ों की मौत को गंभीरता से लेते हुए पशुपालन विभाग ने पनागर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। केयर टेकर और कंपनी के खिलाफ FIR पनागर थाना प्रभारी विपिन ताम्रकार ने मीडिया केा बताया है कि पशुपालन विभाग की शिकायत पर घोड़ों के केयर टेकर सचिन तिवारी, हेथा नेट इंडिया प्राइवेट कम्पनी के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम की धारा 11 के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। घोड़ों की मेडिकल जांच तथा डॉक्टरों की सलाह के अनुसार उनका पुनर्वास पर निर्णय लेते हुए आवश्यक कार्यवाही की जाएगी।

धरती का कहर! सूडान में भूस्खलन से गांव तबाह, 1000 लोगों की जान गई

  खारर्तूम  पश्चिमी सूडान के Marra Mountains इलाके में भीषण भूस्खलन ने एक पूरे गांव को तबाह कर दिया. इस हादसे में कम से कम 1,000 लोगों की मौत हो गई, जबकि केवल एक व्यक्ति जिंदा बचा है. यह जानकारी सोमवार को सूडान लिबरेशन मूवमेंट/आर्मी ने एक बयान में दी है. सूडानी मूवमेंट ने का नेतृत्व अब्दुलवाहिद मोहम्मद नूर कर रहे हैं और उन्होंने बताया कि कि यह हादसा 31 अगस्त को हुआ. क्षेत्र में लगातार कई दिनों से भारी बारिश हो रही थी, जिसके बाद यह भूस्खलन आया. मूवमेंट की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि गांव अब पूरी तरह से जमीनदोज हो चुका है. संगठन ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियों से अपील की है कि वे मृतकों के शवों को निकालने और प्रभावित परिवारों को सहायता देने के लिए तुरंत कदम उठाएं. संगठन ने यह भी कहा कि मारे गए लोगों में बड़ी संख्या में पुरुष, महिलाएं और बच्चे शामिल हैं. वैश्विक समुदाय से मदद की अपील दारफुर क्षेत्र में स्थित इस क्षेत्र पर नियंत्रण रखने वाले इस आंदोलन ने संयुक्त राष्ट्र और अंतर्राष्ट्रीय सहायता एजेंसियों से पीड़ितों के शवों को बरामद करने में मदद की अपील की है। मरने वालों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल हैं। उत्तरी दारफुर राज्य में सूडानी सेना और अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (आरएसएफ) के बीच चल रहे युद्ध से भागकर निवासियों ने मार्रा पर्वतीय क्षेत्र में शरण ली है। यहां भोजन और दवाइयां ना होने से लोगों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। सूडान में बीते दो साल से चल रहे गृहयुद्ध के कारण आधी से ज्यादा आबादी भुखमरी के संकट से जूझ रही है। इसके चलते लाखों लोग अपने घरों से बेघर हो गए हैं। उत्तरी दारफुर राज्य की राजधानी अल-फशीर पर भी लगातार गोलाबारी हो रही है। सूडान में दो साल से जारी है गृहयुद्ध यह हादसा ऐसे समय हुआ है जब सूडान पहले से ही गंभीर संकट का सामना कर रहा है. सूडानी सेना और पैरामिलिट्री रैपिड सपोर्ट फोर्स (RSF) के बीच पिछले दो साल से जारी गृहयुद्ध ने देश की स्थिति और बिगाड़ दी है. गृहयुद्ध से बचने के लिए उत्तर दारफुर राज्य से बड़ी संख्या में लोग Marra Mountains में शरण लेने पहुंचे थे. हालांकि, यहां खाद्य सामग्री और दवाइयों की भारी कमी है. सूडान में आधे से ज्यादा लोग भुखमरी की चपेट में गृहयुद्ध ने सूडान की आबादी पर गहरा असर डाला है. आधे से ज्यादा लोग भुखमरी के संकट का सामना कर रहे हैं और लाखों लोग अपने घर छोड़कर पलायन कर चुके हैं. उत्तर दारफुर की राजधानी अल-फाशिर भी लगातार हमलों की चपेट में है. SLM/A ने कहा कि भूस्खलन की यह त्रासदी देश की मौजूदा मानवीय स्थिति को और भयावह बना रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए.

सपा नेता गुलशन यादव पर बड़ी कार्रवाई, ₹1 लाख का इनाम घोषित

प्रतापगढ़ यूपी के प्रतापगढ़ के सपा नेता गुलशन यादव पर एडीजी ने एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया है. यह कार्रवाई एसपी डॉ. अनिल कुमार की सिफारिश पर हुई है. गुलशन यादव पर कुल 53 आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें हत्या का प्रयास, रंगदारी, लूट और गैंगस्टर एक्ट जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं. ये मुकदमे प्रतापगढ़ और प्रयागराज के अलग-अलग थानों में दर्ज हैं. गुलशन पिछले एक साल से फरार चल रहे हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है.  करोड़ों की संपत्ति हुई कुर्क गुलशन यादव पर इनाम घोषित होने से पहले ही पुलिस उनकी कई संपत्तियां कुर्क कर चुकी है. पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अब तक गुलशन यादव की 7 करोड़ रुपये से ज़्यादा की संपत्ति कुर्क की जा चुकी है. ये कार्रवाई उनकी आपराधिक गतिविधियों से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त करने के तहत की गई है.  गौरतलब है कि कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया के खिलाफ चुनाव लड़ने के बाद से ही गुलशन यादव लगातार सुर्खियों में रहे हैं. चुनाव में उन्हें राजा भैया के हाथों हार का सामना करना पड़ा था. इस दौरान दोनों ओर से सियासी वार-पलटवार हुए, जिससे माहौल तनावपूर्ण हो गया था.  53 से ज्यादा आपराधिक मुकदमे सपा के कार्यवाहक ज़िलाध्यक्ष गुलशन यादव के खिलाफ 53 गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं. इन मुकदमों में हत्या का प्रयास, रंगदारी, लूट, आर्म्स एक्ट और गैंगस्टर एक्ट जैसे संगीन आरोप शामिल हैं. ये सभी मुकदमे प्रतापगढ़ और प्रयागराज के थानों में दर्ज हैं. एक साल से ज्यादा समय से फरार चल रहे गुलशन यादव की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है. 

रायपुर : किसानों के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बड़ी पहल : इस माह मिलेगा 60 हजार टन अतिरिक्त यूरिया

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर किसानों के हित में एक बड़ी राहत मिल रही है। भारत सरकार ने छत्तीसगढ़ के लिए 60 हजार टन अतिरिक्त यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया है। इसमें सितम्बर माह के प्रथम सप्ताह में 20 हजार टन, द्वितीय सप्ताह में 35 हजार टन और शेष 5 हजार टन की आपूर्ति माह के अंत तक सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों की हर आवश्यकता पर राज्य सरकार संवेदनशील है और यह अतिरिक्त आबंटन उनकी खरीफ फसलों को सुरक्षित रखने में सहायक होगा। मार्कफेड अधिकारियों ने बताया कि चालू खरीफ सीजन के लिए 28 अगस्त की स्थिति में सहकारी क्षेत्र में 3 लाख 91 हजार 79 मीट्रिक टन और निजी क्षेत्र में 3 लाख 11 हजार 563 मीट्रिक टन, इस तरह कुल 7 लाख 2 हजार 642 मीट्रिक टन यूरिया का भंडारण किया गया है। इसके विरुद्ध 6 लाख 38 हजार 599 मीट्रिक टन यूरिया किसानों को वितरित किया जा चुका है। इसमें 3 लाख 42 हजार 444 मीट्रिक टन सहकारी क्षेत्र और 2 लाख 96 हजार 155 मीट्रिक टन निजी क्षेत्र से वितरण शामिल है। यह आँकड़ा पिछले वर्ष की इसी अवधि में हुए 6 लाख 17 हजार 798 मीट्रिक टन वितरण से अधिक है, जो इस बार की बेहतर आपूर्ति व्यवस्था का प्रमाण है। प्रदेश में किसानों के लिए नैनो खाद की भी पर्याप्त व्यवस्था की गई है। सहकारी क्षेत्र में 1 लाख 78 हजार 919 और निजी क्षेत्र में 1 लाख 12 हजार 140, इस तरह कुल 2 लाख 91 हजार 59 बॉटल नैनो यूरिया का भंडारण हुआ है। इसी प्रकार सहकारी क्षेत्र में 1 लाख 58 हजार 809 और निजी क्षेत्र में 79 हजार 810, कुल 2 लाख 38 हजार 619 बॉटल नैनो डीएपी संग्रहित किया गया है। अब तक किसानों को 2 लाख 32 हजार 652 बॉटल नैनो यूरिया और 1 लाख 85 हजार 136 बॉटल नैनो डीएपी वितरित किया जा चुका है। प्रदेश में चालू खरीफ सीजन के लिए भारत सरकार ने 14.62 लाख टन रासायनिक खाद का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके विरुद्ध सहकारी एवं निजी क्षेत्रों में 15.64 लाख टन का भंडारण कर लिया गया है। भंडारण के आधार पर किसानों को अब तक 13.19 लाख टन खाद वितरित किया गया है। यह व्यवस्था बताती है कि समितियों और निजी क्षेत्रों में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध हैं और किसानों को किसी तरह की कठिनाई नहीं होगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर प्रदेश के किसानों को इस माह बड़ी राहत मिली है। भारत सरकार ने सितंबर माह के लिए छत्तीसगढ़ को कुल 60,800 मीट्रिक टन यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया है। इसमें 58,100 मीट्रिक टन स्वदेशी और 2,700 मीट्रिक टन आयातित यूरिया शामिल है। अधिकारियों ने बताया कि राज्य में यूरिया की आपूर्ति लगभग 100 प्रतिशत स्वदेशी कंपनियों के माध्यम से होती है। इसलिए इस माह किसानों को यूरिया की कोई कमी नहीं होगी। कंपनी प्रतिनिधियों से चर्चा के उपरांत यह जानकारी दी गई कि सितंबर माह के कुल स्वदेशी आबंटन का लगभग 30 से 35 प्रतिशत अर्थात् करीब 20 हजार मीट्रिक टन यूरिया प्रथम सप्ताह में उपलब्ध हो जाएगा। इसके अतिरिक्त आगामी 15 दिनों में लगभग 60 प्रतिशत यानी 35 हजार मीट्रिक टन तथा शेष मात्रा भी माह के अंत तक आपूर्ति कर दी जाएगी। राज्य सरकार ने सभी कंपनियों को समयबद्ध रेकवार आपूर्ति कार्यक्रम प्रस्तुत करने और किसानों की मांग के अनुसार उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों ने बताया कि आगामी 10 से 12 दिनों में मांग के अनुरूप आपूर्ति कर ली जाएगी और प्रदेश में यूरिया की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य हो जाएगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किसानों की सुविधा के लिए भारत सरकार के इस सहयोग पर आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों की हर आवश्यकता पर राज्य सरकार पूरी संवेदनशीलता से कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि समय पर उपलब्ध यूरिया से खरीफ फसलें सुरक्षित रहेंगी और किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि खरीफ सीजन में किसानों को खाद की आपूर्ति उनकी समयबद्ध जरूरतों के अनुरूप प्राथमिकता से की जा रही है। अब तक निर्धारित लक्ष्य का 98 प्रतिशत यूरिया किसानों तक पहुँच चुका है। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि किसानों को मौसम और फसल की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त खाद की आपूर्ति लगातार जारी रहेगी और उनकी उपज सुरक्षित रहेगी। इस संबंध में गत दिनों कृषि मंत्री रामविचार नेताम और राज्य के सांसदों ने भी केंद्रीय उर्वरक मंत्री जे.पी. नड्डा से भेंट कर छत्तीसगढ़ के किसानों की मांग रखी थी। मुख्यमंत्री साय के मार्गदर्शन में केंद्र सरकार से लगातार संपर्क किया गया और किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त 60 हजार टन यूरिया का आबंटन स्वीकृत किया गया। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में सहकारी सोसायटियों और निजी विक्रेताओं के माध्यम से खाद का वितरण सुव्यवस्थित तरीके से किया जा रहा है। किसान समितियों में आसानी से खाद उपलब्ध करा पा रहे हैं और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। इससे खेती-किसानी प्रभावित होने के बजाय और मजबूती पा रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, किसानों ने सरकार और प्रशासन की इस पहल पर संतोष व्यक्त किया है। उनका कहना है कि समय पर यूरिया और अन्य खाद उपलब्ध होने से बुवाई और फसल प्रबंधन का काम सुचारू रूप से हो रहा है।  मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है। उन्होंने कहा कि खाद, बीज और सिंचाई जैसी मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र और राज्य के समन्वित प्रयासों से खरीफ सीजन में किसानों को समुचित राहत मिलेगी और छत्तीसगढ़ कृषि उत्पादन में नए कीर्तिमान स्थापित करेगा।

तत्पर प्रशासन, राहत का सहारा! बाढ़ प्रभावितों को मिला जरूरी राशन

रायपुर दंतेवाड़ा में हाल ही में आई बाढ़ से निपटने और प्रभावितों को आवश्यक मदद पहुँचाने में प्रशासन तत्पर रहा। अपने विदेश दौरे के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दक्षिण कोरिया से वीडियो कांफ्रेंसिंग कर बाढ़ प्रभावित जिलों के कलेक्टरों को आवश्यक निर्देश भी दिए थे। आज मुख्यमंत्री के दंतेवाड़ा के चूड़ी टिकरापारा पहुँचने पर बाढ़ प्रभावित परिवारों ने प्रशासन द्वारा समय पर बचाव एवं राहत पहुँचाने के लिए आभार व्यक्त किया। मौजूद लोगों ने कहा कि सरकार की इस संवेदनशील पहल से सभी प्रभावित परिवार सुरक्षित और सकुशल हैं। राहत शिविर में रहने, भोजन और इलाज जैसी सभी सुविधाएँ उपलब्ध हैं। बाढ़ पीड़ित गुप्तेश्वरी कश्यप, शालिनी शर्मा, सविता पात्रे एवं लता सागर ने मुख्यमंत्री श्री साय को बताया कि राहत शिविर में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं है और अब राशन, बर्तन, कपड़े, गैस सिलेंडर एवं चूल्हा भी दिया गया है। मकान ढहने पर सहायता राशि भी मिल चुकी है और अब घर बनने तक वे यहाँ राहत शिविर में रहेंगे। प्रभावितों ने बताया कि बाढ़ आने के साथ ही प्रशासन की अपील पर सभी लोग सुरक्षित ऊँचे स्थान पर चले गए थे। फिर बाढ़ का पानी उतरने के बाद उन्हें चूड़ी टिकरापारा के छात्रावास भवन में राहत शिविर में ठहराया गया। इसी तरह रीता कश्यप, द्रोपदी नाग, कुंदन गुप्ता, महेश नाग, बबीता नाग सहित अन्य प्रभावितों ने भी प्रशासन के राहत एवं पुनर्वास प्रयासों की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री श्री साय को धन्यवाद दिया। मुख्यमंत्री के समक्ष भावुक हुईं सोमड़ी सोढ़ी मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय बाढ़ प्रभावितों से मिलने के दौरान चूड़ी टिकरापारा निवासी सोमड़ी सोढ़ी के घर पहुँचे तो श्रीमती सोमड़ी सोढ़ी भावुक हो गईं। उन्होंने बताया कि बाढ़ से पूरा घर डूब गया था। बाढ़ आने के एक दिन पहले वह अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती हुई थीं और उनकी दोनों बेटियाँ भी साथ में थीं, इस कारण उनकी जान बच गई। अस्पताल से ठीक होकर शुक्रवार को वह घर लौटीं। सोमड़ी ने बताया कि बाढ़ के पानी में घर का पूरा सामान खराब हो गया है। इस बीच प्रशासन ने राशन, बर्तन, कपड़े, गैस सिलेंडर एवं चूल्हा उपलब्ध कराया है। साथ ही राहत शिविर में नाश्ता, भोजन और इलाज की सुविधा भी दी जा रही है। इस आपदा की घड़ी में सरकार की सहायता के लिए श्रीमती सोमड़ी ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के प्रति आभार प्रकट किया। इसी तरह दंतेवाड़ा के चूड़ी टिकरापारा के बाढ़ प्रभावित सुरेश बघेल ने बताया कि बाढ़ आने के दिन पूरा परिवार घर में ही था। प्रशासन की सूचना पर वे सभी सुरक्षित स्थान पर चले गए और एक दिन बाद राहत शिविर पहुँचे। पिछले शुक्रवार को वे शिविर से घर लौटे हैं। सुरेश ने बताया कि प्रशासन द्वारा राशन, बर्तन, गैस सिलेंडर एवं चूल्हा, कंबल-चादर और कपड़े जैसे सभी जरूरी सामान उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे उनके परिवार को बड़ी राहत मिली है।

बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत, सीएम मान ने घोषित की लाखों की आर्थिक सहायता

होशियारपुर  पिछले कुछ दिनों से होशियारपुर में हो रही भारी बारिश के कारण हजारों लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और 7 लोगों की जान चली गई है। छत गिरने से 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3 अन्य लोग लगातार बारिश के कारण आए बाढ़ के पानी में डूब गए। इस त्रासदी पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने प्रभावित परिवारों को 4-4 लाख रुपए की तत्काल आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। 7 शोक संतप्त परिवारों में कुल 28 लाख वितरित किए जाएंगे। होशियारपुर के सांसद डा. राज कुमार चब्बेवाल ने नौगराईं गांव के मृतक सुरमू मोहम्मद के परिवार को व्यक्तिगत रूप से 4 लाख का मुआवजा चैक सौंपा। वह बाढ़ के पानी में बह गए थे और उनकी मृत्यु हो गई। इस अवसर पर डा. राज कुमार ने गहरी संवेदना व्यक्त की और संकट की घड़ी में लोगों के साथ खड़े रहने की पंजाब सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिति पर सक्रिय रूप से नजर रख रही है और बारिश व बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए शीघ्र सहायता और पुनर्वास सुनिश्चित कर रही है। उन्होंने कहा, "प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने और पीड़ितों को सभी आवश्यक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए गए हैं। डा. राज ने अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों को यह भी आश्वासन दिया कि वह 24×7 फ़ोन पर उपलब्ध हैं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का व्यक्तिगत रूप से दौरा करके स्थिति पर लगातार नजर रख रहे हैं। उन्होंने ख़तरनाक और बाढ़ संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों से प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और जरूरत पड़ने पर उनके लिए बनाए गए सुरक्षित आश्रय गृहों में जाने का आग्रह किया और लोगों को सलाह दी कि वे बाढ़ग्रस्त चो या पुलों का उपयोग करके अपनी जान जोखिम में न डालें। हाल ही में हुई बारिश ने पंजाब के विभिन्न हिस्सों में सामान्य जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है और प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य जारी हैं। 

मार्केट में वापसी! रिलायंस ने दिलाई रफ्तार, सेंसेक्स 300 अंक उछला

मुंबई  शेयर बाजार में तेजी लगातार दूसरे दिन जारी है, मिले-जुले ग्लोबल संकेतों के बीच सेंसेक्स-निफ्टी मंगलवार को भी ग्रीन जोन में ओपन हुए. एक ओर जहां बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 80500 के पार ओपन हुआ, तो वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी इंडेक्स भी अपने पिछले बंद के मुकाबले उछाल के साथ कारोबार की शुरुआत करता नजर आया. इस बीच काफी दिनों से सुस्त पड़े देश की सबसे मूल्यवान कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में ओपनिंग के साथ ही जोरदार तेजी देखने को मिली है.  सेंसेक्स-निफ्टी में तेजी जारी बीएसई का सेंसेक्स अपने पिछले बंद 80,364.49 की तुलना में 80,520.09 के लेवल पर ओपन हुआ और कुछ ही मिनटों में ये 8057.94 के स्तर पर कारोबार करता हुआ नजर आया. इसके साथ ही एनएसई का निफ्टी अपने पिछले कारोबारी बंद 24,625.05 के मुकाबले मामूली उछाल के साथ 24,653 पर खुला और फिर इसके बाद ये तेज रफ्तार पकड़ते हुए नजर आया और 24,685.85 पर ट्रेड करने लगा.  सुस्ती से जागा रिलायंस का शेयर  शेयर बाजार में कारोबार ओपन होने के साथ ही कई दिनों से गिरावट झेल रहा मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस का शेयर मंगलवार को ओपनिंग के साथ ही रफ्तार पकड़ता हुआ नजर आया. ये अंबानी स्टॉक 2.05% की उछाल के साथ 1381 रुपये पर ट्रेड कर रहा था. शेयर में लौटी तेजी के चलते रिलायंस का मार्केट कैपिटल भी उछलकर एक बार फिर 19 लाख करोड़ रुपये के पार जा पहुंचा.  इसके अलावा लार्जकैप कंपनियों में शामिल एटरनल शेयर (1.74%), एनटीपीसी शेयर (1.36%), पावर ग्रिड शेयर (1.35%), एचयूएल शेयर (1.20%) की तेजी लेकर कारोबार करता दिखा.  मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों पर नजर  लार्जकैप स्टॉक्स के अलावा अगर नजर डालें, मिडकैप और स्मॉलकैप कैटेगरी में शामिल कंपनियों के शेयरों पर, तो सन टीवी शेयर (6.54%), फोनिक्स शेयर (4.47%), जेएसडब्ल्यू इंफ्रा शेयर (2.18%) और ओलेक्ट्रा शेयर (2.10%) की तेजी लेकर कारोबार कर रहे थे. इसके अलावा पीएसबी, एमआईएसीएल, सेंट्रल बैंक, गोदरेज प्रॉपर्टी के शेयर भी ग्रीन जोन में बने हुए थे.  वहीं स्मॉलकैप में रेणुका इंडस्ट्री का शेयर 12.20 फीसदी की जोरदार तेजी लेकर ट्रेड कर रहा था. इसके अलावा शुगर कंपनियों के स्टॉक्स में भी तेजी देखने को मिली. इनमें शामिल धर्मपुर शुगर जहां 11.59%, अवध शुगर में 8.92%, तो वहीं उत्तम शुगर 8.83% की उछाल के साथ कारोबार कर रहा था. इसके अलावा मोबीक्विक शेयर (9.59%), आईटीआई शेयर (8.30%) चढ़कर ट्रेड कर रहा था. 

इन रूटों पर दौड़ेंगी नई मिनी बसें, नोएडा-ग्रेनो के यात्रियों को बड़ी राहत

नोएडा  उत्तर के नोएडा और ग्रेटर नोएडा के लोगों के लिए एक अच्छी खबर है. नोएडा और ग्रेटर नोएडा में अब जल्द ही मिनी बसें दौड़ती नजर आएंगी. नोएडा शहर को इसी महीने 10 मिनी बसें मिलने वाली हैं. ये मिनी बसें शहर के 10 रूटों पर चलेंगी. ये बसें जिन रूटों पर चलेंगी उनका निर्धारण किया जा चुका है. इन 10 मिनी बसों के चलने से शहर और गांवों की कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिलेगी. उत्तर प्रदेश परिवाहन निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार सिंह ने बताया कि इसी महीने में ही 10 मिनी बसें निगम को मिलने जा रही हैं. शहर में कनेक्टिविटी को और बेहतर करने के मकसद के साथ ये मिनी बसें लाई जा रही हैं, ताकि लास्ट माइल तक कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा सके. इन 10 मिनी बसों के चलने से जिले की करीब दो करोड़ की आबादी को फायदा मिलेगा. मिनी बसों के लिए रूटों का निर्धारण किया जा चुका है. इन रूटों पर चलेंगी मिनी बसें ये 10 मिनी बसें नोएडा-ग्रेटर नोएडा-रुबुरपूरा-झांझर-रन्हैरा, नोएडा-ग्रेटर नोएडा-जेवर कट-जहांगीरपुर-लौदाना, नोएडा-ग्रेटर नोएडा-परिचौक-जेवर-बिलासपुर-दनकौर-झाझर, नोएडा-ग्रेटर नोएडा-परिचौक-जेवर-झुप्पा, नोएडा-परिचौक-रबुपुरा-तिर्थली-कौली-गोविंदगढ़-कोठरा-झुप्पा, नोएडा-खेड़मोड़-तकीपुर-अनवरपुर-चांदपुर-मोहद्दीनपुर, नोएडा-सुरजपुर-दादरी-महावर, नोएडा-बदौली-सुरजपुर-दादरी-कलौंदा, नोएडा-डेहरा-झाल और नोएडा-छायसा तक संचालित की जाएंगी. लास्ट माइल कनेक्टिविटी न होने के कारण लोगों की जेबों पर असर बता दें कि लास्ट माइल कनेक्टिविटी न होने के कारण ही ग्रामीण इलाकों के लोग विशेषतौर पर या तो प्राइवेट वाहनों का इस्तेमाल करते हैं. इसके अलावा उनकी निर्भरता ऑनलाइन कैब, बाइक और टैक्सी चालकों पर होती है. ये सब ग्रामीण इलाकों के लोगों के लिए महंगे होते हैं. इसका सीधा असर लोगों की जेबों पर दिखाई देता है. हालांकि इनमें से कुछ रूटों पर निगम अपनी बसें चलाता था. गौरतलब है कि यूपी में कई जिलों में मिनी बसें चल रही हैं.