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राज्यपाल पटेल ने प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों से की मुलाकात

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल गुरुवार को सिवनी जिले की कुरई विकासखण्ड के ग्राम थांवरझोड़ी प्रवास के दौरान प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राही राजेन्द्र कुमार उइके के घर पहुँचें। उन्होंने परिवारजनों से आत्मीय चर्चा की। राज्यपाल पटेल ने राजेन्द्र कुमार और परिजनों से शासन की योजनाओं के मिले लाभ की जानकारी ली। उनके जीवन में आए सकारात्मक बदलावों को जाना। राज्यपाल पटेल ने राजेन्द्र कुमार उइके के बेटों को मेहनत कर परिवार और समाज को आगे बढ़ाने की दिशा में कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि सभी नागरिक शासन की योजना का लाभ लेकर समाज की मुख्य धारा से जुडे़ं। उन्होंने उपस्थित ग्रामीणों से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया। इस अवसर पर विधायक बरघाट कमल मर्सकोले, विधायक सिवनी दिनेश राय, श्रीमती मीना बिसेन, कलेक्टर सुसंस्कृति जैन, पुलिस अधीक्षक सुसिमाला प्रसाद, सीईओ जिला पंचायत नवजीवन विजय सहित जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।  

इंदौर में फिर उतरी मेघालय पुलिस, राजा रघुवंशी हत्याकांड पर DCP से की बातचीत

इंदौर इंदौर के ट्रांसपोर्टर राजा रघुवंशी हत्याकांड में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। हत्या की साजिश रचने वाली पत्नी सोनम रघुवंशी और उसके प्रेमी राज कुशवाह ने मौत का ब्लूप्रिंट बनाने के लिए हत्याकांड से पहले नए मोबाइल खरीदे थे। हत्याकांड के बाद सोनम की कॉल डिटेल से खुलासा हुआ था कि राजा को ठिकाने लगाने के लिए सोनम की राज और उसके साथियों से मोबाइल पर लगातार बातचीत और चैटिंग हो रही थी। हत्या के बाद ये मोबाइल बंद हो गए थे। बस इसी मामले में शिलॉन्ग पुलिस की तीन सदस्यीय टीम इंदौर आई है। मिली जानकारी के अनुसार, मोबाइल खरीद को लेकर शिलॉन्ग पुलिस कुछ और जानकारियां इकट्ठा करना चाहती है। इस मामले की जानकारी देते हुए डीसीपी क्राइम राजेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि शिलॉन्ग पुलिस का एक दल इंदौर आया है। अपराध शाखा की टीम भी जांच में साथ है। आज शिलॉन्ग पुलिस की टीम कुछ जगह जाएगी। उल्लेखनीय है कि सहकार नगर, केट रोड निवासी राजा रघुवंशी (30) की उसकी पत्नी सोनम रघुवंशी ने प्रेमी राज कुशवाहा के साथ साजिश कर आनंद, विशाल और आकाश से शिलांग में हत्या करवा दी थी। शिलांग की ईस्ट खासी हिल्स पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि सोनम और राज ने राजा को ठिकाने लगाने के लिए नए मोबाइल फोन खरीदे थे। इनके जरिए आरोपी एक-दूसरे के संपर्क में थे। मिली जानकारी के अनुसार राज, साथी हत्यारों से पल-पल की जानकारी ले रहा था। शिलॉन्ग पुलिस की जांच में ये बात सामने आई है। हालांकि शिलॉन्ग पुलिस की विवेचना पूरी हो गई है। चालान डायरी कोर्ट में पेश करने की तैयारी है। इस बीच मोबाइल खरीदी का पेंच फंसने पर चालान पेश करने से पहले कुछ जरुरी तहकीकात करने शिलॉन्ग पुलिस ने कल इंदौर में डेरा डाला है।

टीम इंडिया के चयन पर दिग्गज का सवाल, 1983 वर्ल्ड कप विजेता बोले- हैरान करने वाले फैसले

नई दिल्ली एशिया कप के लिए टीम इंडिया के स्क्वाड पर 1983 वर्ल्ड कप के हीरो मदन लाल ने हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि कुछ खिलाड़ियों के शामिल नहीं किए जाने से उन्हें आश्चर्य है। उन्होंने हार्दिक पांड्या पर भी चयन समिति पर सवाल उठाए। हालांकि उन्होंने साथ में यह भी कहा कि भारतीय टीम एशिया कप जीत सकती है। बातचीत में पूर्व चयनकर्ता मदन लाल ने कहा, 'कभी-कभी आप यशस्वी जायसवाल जैसे खिलाड़ियों के शामिल नहीं किए जाने पर हैरान महसूस करते हैं…मुझे नहीं पता हार्दिक पांड्या को क्यों हटाया गया।' उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन गिल एक अच्छी पसंद हैं क्योंकि वह बढ़िया प्रदर्शन कर रहे हैं। आने वाले समय में यह संभव है कि गिल तीनों ही फॉर्मेट में खेलेंगे…वे खिलाड़ी जो मैच जिताते हैं, उन्हें बाहर नहीं किया जाना चाहिए…हमारे पास इतनी अच्छी टीम है कि हम एशिया कप जीत सकते हैं।’ मदन लाल ने भले ही कहा कि हार्दिक पांड्या को क्यों हटाया गया, लेकिन वह एशिया कप के स्क्वाड का हिस्सा हैं। पूर्व चयनकर्ता का इशारा पांड्या को उपकप्तान नहीं बनाए जाने की तरफ था। वैसे भी ऑलराउंडर को पहले ही उपकप्तानी से हटा दिया गया था और पिछली सीरीज में अक्षर पटेल इस भूमिका में थे। पांड्या ने 2024 के वर्ल्ड कप में उपकप्तानी की थी। एशिया कप के लिए ये जिम्मेदारी शुभमन गिल को मिली है। यशस्वी जायसवाल 15 खिलाड़ियों के स्क्वाड में नहीं हैं, लेकिन उन्हें रिजर्व खिलाड़ी के तौर पर रखा गया है। अजीत अगरकर की अगुआई वाली चयनसमिति ने मंगलवार को एशिया कप के लिए 15 सदस्यों वाले भारतीय दल का ऐलान किया। यशस्वी जायसवाल को इसमें जगह नहीं मिली। इसी तरह चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की जीत के हीरो और टूर्नामेंट में टीम के टॉप स्कोरर रहे श्रेयस अय्यर को भी नजरअंदाज किया गया। अय्यर ने आईपीएल 2025 और पिछले साल घरेलू सीजन में भी जबरदस्त प्रदर्शन किया था। जायसवाल को तो स्क्वाड में जगह नहीं मिली लेकिन रिजर्व खिलाड़ियों की लिस्ट में उन्हें जरूर रखा गया है। दूसरी तरफ अय्यर को रिजर्व खिलाड़ी के लायक भी नहीं समझा गया। इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं।  

यूपी के सभी जिलों में विशेष अभियान की शुरुआत, सीएम योगी ने दिए सख्त निर्देश

लखनऊ  योगी सरकार किसानों के हित में एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश में फार्मर रजिस्ट्री को लेकर विशेष अभियान 16 सितम्बर, 2025 से शुरू होगा. इस अभियान का उद्देश्य किसानों के भूमि अभिलेखों को आधार से जोड़ना और किसानों को योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के उपलब्ध कराना है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिलाधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी और उन्हें रोजाना अभियान की प्रगति पर रिपोर्ट देनी होगी. हर जिले में प्रगति की समीक्षा प्रतिदिन की जाएगी ताकि कहीं भी ढिलाई न बरती जाए. फार्मर रजिस्ट्री क्यों है जरूरी राज्य सरकार का मानना है कि किसान को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ तभी मिलेगा, जब उसकी जमीन का रिकॉर्ड पूरी तरह सही और अपडेटेड होगा. कई बार जमीन के कागजों में मालिकों के नाम अधूरे या गलत पाए जाते हैं. इसी वजह से किसानों को योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कत आती है. यही कारण है कि मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग को निर्देश दिया है कि सभी किसानों के अधिकार अभिलेख में नामों का आधार से मिलान कर सही-सही दर्ज किया जाए. इसके लिए राजस्व अधिकारियों को एक मानक कार्यप्रणाली (एसओपी) उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि हर जिले में एक जैसी प्रक्रिया अपनाकर रजिस्ट्री पूरी की जा सके. आधे से ज्यादा किसान जुड़े न्यूज एजेंसी की खबर के मुताबिक प्रदेश में कुल 2.88 करोड़ किसानों की रजिस्ट्री का लक्ष्य रखा गया है. इनमें से अब तक 1.45 करोड़ किसानों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है, यानी 50 प्रतिशत से अधिक कार्य हो चुका है. यह सरकार के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है, लेकिन शेष किसानों को जोड़ना भी कम चुनौती नहीं है. बिजनौर सबसे आगे अब तक की प्रगति में बिजनौर जिला सबसे आगे है. यहां 58% से अधिक किसानों की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है. इसके बाद हरदोई (57.84%), श्रावस्ती (57.47%), पीलीभीत (56.89%) और रामपुर (56.72%) टॉप-5 जिलों में शामिल हैं. इन जिलों के अधिकारियों को सीएम योगी ने सराहा है और अन्य जिलों को भी इसी तरह तेजी लाने के निर्देश दिए गए हैं. पिछड़ रहे जिलों पर खास नजर हालांकि कई जिलों ने सराहनीय काम किया है, लेकिन कुछ जिले अभी पीछे चल रहे हैं. सरकार ने साफ संकेत दिए हैं कि ऐसे जिलों पर विशेष नजर रखी जाएगी. जो जिले लक्ष्य से काफी दूर हैं, वहां अतिरिक्त टीमें लगाई जाएंगी और अधिकारियों को व्यक्तिगत स्तर पर जवाबदेह बनाया जाएगा. यही नहीं, जिन जिलों में किसानों का 100% डाटा वेरिफिकेशन पूरा हो चुका है, उनमें अमरोहा, आजमगढ़, बलरामपुर, एटा और जौनपुर शामिल हैं. यह एक अहम उपलब्धि मानी जा रही है क्योंकि बिना वेरिफिकेशन के रजिस्ट्री अधूरी है. पीएम किसान योजना से जोड़ने की तैयारी सीएम योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिए हैं कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों का पंजीकरण हर हाल में 100% होना चाहिए. सरकार चाहती है कि अगली किस्त जारी होने से पहले कोई भी पात्र किसान वंचित न रह जाए. इसके लिए जिलाधिकारियों को दोहरी जिम्मेदारी दी गई है पहली, फार्मर रजिस्ट्री को समय पर पूरा करना और दूसरी, पीएम किसान योजना में 100% पंजीकरण सुनिश्चित करना. अभियान के दौरान आईईसी गतिविधियां सरकार का जोर केवल डेटा एंट्री पर नहीं बल्कि जागरूकता पर भी है. सभी जिलों में आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) गतिविधियां चलाई जाएंगी. पोस्टर, पंपलेट, स्थानीय मीडिया और गांव-गांव जाकर किसानों को समझाया जाएगा कि रजिस्ट्री उनके लिए क्यों जरूरी है और कैसे इससे उन्हें योजनाओं का लाभ जल्दी और आसानी से मिल पाएगा. सीएम योगी का कड़ा संदेश मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यह अभियान प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर है. जो भी जिले पिछड़ेंगे, वहां सीधे डीएम जिम्मेदार होंगे. उन्होंने अफसरों से कहा है कि किसानों से जुड़ा यह कार्य किसी भी कीमत पर टलना नहीं चाहिए. अधिकारियों का कहना है कि योगी सरकार लगातार किसानों को योजनाओं का लाभ देने के लिए डिजिटल और पारदर्शी प्रणाली पर जोर देती रही है. पहले फसल बीमा योजना हो या फिर खाद्यान्न वितरण, सरकार ने रिकॉर्ड्स को डिजिटाइज करने पर फोकस किया. अब फार्मर रजिस्ट्री उसी दिशा में एक और बड़ा कदम है. किसानों की प्रतिक्रिया कई किसानों का मानना है कि यह प्रक्रिया थोड़ी समय लेने वाली जरूर है, लेकिन लंबे समय में इससे बहुत फायदा होगा. अभी तक जिन किसानों को कागजों की गड़बड़ी की वजह से सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में मुश्किल होती थी, उन्हें अब राहत मिलेगी. बिजनौर के एक किसान ने कहा, पहले हमारी जमीन के रिकॉर्ड में नाम अधूरा दर्ज था. सुधार कराने में महीनों लग जाते थे. अब सीधा आधार से मिलान हो रहा है तो उम्मीद है कि जल्दी सब ठीक हो जाएगा.

मंत्री सारंग: शूटिंग में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनने की राह पर

शूटिंग में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनने की दिशा में अग्रसर- मंत्री सारंग मंत्री सारंग: शूटिंग में मध्यप्रदेश देश का अग्रणी राज्य बनने की राह पर मध्यप्रदेश शूटिंग में अग्रणी बनने की दिशा में, मंत्री सारंग ने दी जानकारी मंत्री सारंग ने राज्य शूटिंग अकादमी का किया निरीक्षण भोपाल खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने बुधवार को मध्यप्रदेश राज्य शूटिंग अकादमी का निरीक्षण कर वहाँ की व्यवस्थाओं का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने अकादमी में अभ्यासरत प्रदेश के प्रतिभावान शूटिंग खिलाड़ियों से संवाद किया और उनका उत्साहवर्धन किया। मंत्री सारंग ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि मध्यप्रदेश शूटिंग में देश को अग्रणी राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय खेल अधोसंरचना, प्रशिक्षित कोचिंग स्टाफ और उत्कृष्ट अवसर उपलब्ध करा रही है। हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि हमारे खिलाड़ी राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश और देश का नाम रोशन करें। मंत्री सारंग ने खिलाड़ियों से बातचीत के दौरान उनकी आवश्यकताओं और सुझावों को भी गंभीरता से सुना और भरोसा दिलाया कि सरकार हर संभव सहयोग करेगी। सारंग ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार खेल प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। निरीक्षण के दौरान मंत्री सारंग ने अकादमी परिसर की विभिन्न सुविधाओं का जायजा लिया और अधिकारियों को खिलाड़ियों की सुविधाओं में बेहतरी के निर्देश दिए।  

मंत्री टेटवाल: प्रदेश के 18 हजार युवाओं को हर साल जीवन कौशल शिक्षा प्रशिक्षण

भोपाल कौशल विकास राज्य एवं रोजगार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम टेटवाल ने कौशल विकास संचालनालय में कौशल विकास विभाग एवं यूएनएफपीए की साझेदारी पर आधारित ब्रोशर का विमोचन किया। राज्य मंत्री टेटवाल ने कहा कि कौशल विकास केवल तकनीकी शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के व्यक्तिगत निर्माण, संर्वांगीण विकास के लिए जीवन कौशल अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लगभग 18 हजार युवाओं को हर वर्ष जीवन कौशल शिक्ष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। मंत्री टेटवाल ने कहा कि जीवन कौशल शिक्षा का इस वृहद स्तर पर क्रियान्वयन मध्यप्रदेश के लिए अनूठी उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि यह प्रयास युवाओं को रोजगार के साथ जीवन में सफल होने के लिए भी तैयार कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष कंट्री की प्रतिनिधि सुएंड्रिया एम. वोज़्नार ने कहा कि मध्यप्रदेश शासन के प्रयासों और सहयोग की सराहना करती हूँ। उन्होंने कहा कि कौशल विकास संचालनालय के साथ मिलकर किये जा रहे कार्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगारपरक कौशल प्रदान कर रहे हैं, बल्कि उन्हें मानसिक रूप से सुदृढ़, आत्मविश्वासी और सामाजिक रूप से जागरूक भी बना रहे हैं। इस अवसर पर कौशल विकास संचालनालय द्वारा यूएनएफपीए के तकनीकी सहयोग से संचालित महत्वपूर्ण कार्यक्रम जीवन कौशल शिक्षा (जीवन तरंग), मानसिक स्वास्थ्य एवं सजगता कार्यशाला एवं डिजिटल स्टोरीटेलिंग कार्यशाला से संबंधित प्रशिक्षण अधिकारियों ने अपने अनुभव साझा किए। इस अवसर पर कार्यक्रम की उपलब्धियों, विस्तार योजनाओं तथा प्रशिक्षकों के अनुभवों को भी साझा किया गया। यह साझेदारी मध्यप्रदेश को कौशल विकास के क्षेत्र में एक अग्रणी मॉडल के रूप में स्थापित करेगी।  

इस महीने बिहार वालों को मिलने वाली है ‘विज्ञान का तीर्थ’ की सौगात!

इस माह के अंत तक खुलेगी डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम साइंस सिटी  इस महीने बिहार वालों को मिलने वाली है ‘विज्ञान का तीर्थ’ की सौगात!    बिहार को मिलेगा ‘विज्ञान का तीर्थ’! इस महीने होगा उद्घाटन… जानिए कैसा होगा  500 सीटों का ऑडिटोरियम, सेल्फी प्वॉइंट और 269 विज्ञान प्रदर्श वाली होगी सांइस सिटी पटना  बिहार और खास कर पटना के लोगों को जल्‍द ही एक जबरदस्‍त सौगात मिलने वाली है। महान वैज्ञानिक और भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की स्मृति में बन रही साइंस सिटी इसी माह के अंत तक जनता के लिए समर्पित होगी। भवन निर्माण विभाग ने इसकी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। लगभग 20.5 एकड़ में फैली यह भव्य साइंस सिटी मोईन-उल-हक स्टेडियम के पास तैयार की गई है। साइंस सिटी का निर्माण बिहार की विज्ञान और शिक्षा यात्रा को एक नई ऊंचाई देगा।  होंगी ये पांच गैलरियां  बी ए साइंटिस्ट्स गैलरी बेसिक साइंस गैलरी सस्टेनेबल प्लैनेट गैलरी स्पेस एंड एस्ट्रोनॉमी गैलरी बॉडी एंड माइंड गैलरी 26 थीम पर आधारित होगी गैलरी यहां बनाए जा रही पांच गैलरियों को 26 थीम से सजाया जाएगा। जिस पर 269 विज्ञान प्रदर्श लगाए जाएंगे। पहले चरण में बी ए साइंटिस्ट्स गैलरी और बेसिक साइंस गैलरी में 47 प्रदर्श स्थापित किए जा रहे हैं। जो विज्ञान में रुचि रखने वाले छात्रों के लिए अद्भुत होगा। साइंस सिटी सिर्फ विज्ञान प्रदर्श तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह युवाओं और बच्चों के लिए ज्ञान और मनोरंजन का बेहतरीन संगम बनेगी। साइंस सिटी में ये भी ​​होगा खास 500 सीटों की क्षमता वाला आधुनिक ऑडिटोरियम 150 छात्रों व 3 शिक्षकों के लिए डोरमेटरी 4डी थियेटर, बहुउद्देशीय हॉल और प्री-फंक्शनल हॉल कैफेटेरिया, पार्किंग, पेयजल और शौचालय एट्रियम बनेगा आकर्षण साइंस सिटी का एट्रियम एरिया खास तौर पर आकर्षक का केंद्र होगा। यहां सेल्फी पॉइंट, डिजिटल पैनल और म्यूरल्स लगाए जा रहे हैं। यानी यहां सिर्फ विज्ञान ही नहीं, बल्कि खूबसूरत माहौल का भी अनुभव मिलेगा। विद्यार्थियों और युवाओं के लिए बड़ा तोहफ़ा भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि के मुताबिक साइंस सिटी का सिविल वर्क पूरा हो चुका है और प्रदर्शों की इंस्टॉलेशन तेजी से हो रही है। उन्होंने कहा कि यह परियोजना समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरी की जा रही है। यह साइंस सिटी न सिर्फ विद्यार्थियों बल्कि हर आयु वर्ग के लोगों के लिए विज्ञान और नवाचार का अनूठा केंद्र बनने जा रही है।

महाराष्ट्र में रेल निर्माण स्थल पर त्रासदी, 4 बच्चों की झुलसती मौत

यवतमाल  महाराष्ट्र के यवतमाल जिले के दारव्हा में एक दुखद घटना सामने आई है, जहां रेलवे निर्माण के लिए खोदे गए एक गहरे गड्ढे में डूबकर चार मासूम बच्चों की जान चली गई. यह हादसा बुधवार शाम को दारव्हा-नेर मार्ग के पास रेलवे स्टेशन परिसर में हुआ. इस घटना में मारे गए बच्चों की पहचान रिहान असलम खान (13), गोलू पांडुरंग नारनवरे (10), सोम्या सतीश खडसन (10) और वैभव आशीष बोधले (14) के रूप में हुई है, ये सभी दारव्हा के रहने वाले थे. दरअसल, वर्धा-यवतमाल-नांदेड रेलवे परियोजना का काम तेजी से चल रहा है. इस दौरान पुलों के खंभे बनाने के लिए कई गहरे गड्ढे खोदे गए हैं. गड्ढों में उतर गए थे बच्चे हाल की भारी बारिश के कारण ये गड्ढे पानी से भर गए थे, लेकिन इनके चारों ओर कोई भी सुरक्षा घेरा नहीं बनाया गया था. बुधवार दोपहर ये बच्चे नहाने के लिए इन गड्ढों में उतर गए. पानी की गहराई का अंदाजा न होने के कारण वे डूबने लगे. आसपास के लोगों ने उन्हें बाहर निकाला और तुरंत दारव्हा के उप जिला अस्पताल ले गए. बाद में, गंभीर हालत को देखते हुए उन्हें यवतमाल के संजीवनी अस्पताल भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने चारों को मृत घोषित कर दिया.

दिव्यांग कल्याण परिषद ने विधायक को सौंपा 10 सूत्रीय मांग पत्र, पेंशन बढ़ाने की मांग

दिव्यांग कल्याण एवं विकास परिषद के सदस्य,10 सूत्रीय मांगों का सौपा मांग पत्र,दिव्यांगों को मिलने वाली पेंशन 600 से बढ़ा कर 5 हजार कराये,सरकार तक भेजे हमारी मांगे,आज जनसुनवाई में आये नागरिको की विधायक ने सुनी समस्याए आष्टा मध्य प्रदेश के आष्टा में दिव्यांग कल्याण एवं विकास परिषद के सदस्य आज विधायक गोपालसिंह इंजीनियर द्वारा प्रत्येक बुधवार को आयोजित होने वाली जनसुनवाई में पहुचे । दिव्यांग जनों ने 10 सूत्रीय मांग पत्र विधायक को सौपा एवं उनकी मांगों को शासन तक पहुचने एवं उन मांगो को पूर्ण कराने की मांग की । सौपे गये मांग पत्र में मांग की गई कि अभी दिव्यांजनो को 600₹ पेंशन मिलती है सरकार उसे बढ़ा कर 5 हजार करे । दिव्यांग जनों को एवं आये अन्य  ग्रामीणोंजनों को विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने भरोसा दिया कि उनकी समस्या को जल्द हल कर जो मांग शासन स्तर की है उसे वे शासन तक पहुचायेंगे । आज जनसुनवाई में कई ग्रामो से ग्रामीण विधायक कार्यालय में आयोजित होने वाली जनसुनवाई में  पहुचे । स्मरण रहे प्रत्येक बुधवार को आष्टा विधायक अपने कार्यालय में सुबाह 10 बजे से जनता की समस्याओं को सुनने,उनेह हल करवाने के लिये जनसुनवाई करते है । आज बुधवार को प्रातः 10 बजे से कार्यालय में उपस्तिथ रह कर विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने जनता की समस्याओं को सुना एवं उनकी समस्याओं को हल करने के सम्बंधित अधिकारियों को निर्देश दिये । आष्टा विधायक गोपालसिंह इंजीनियर जो की हर बुधवार को अपने कार्यालय में जन सुनवाई कार्यक्रम के तहत उपस्तिथ रहते है । आज भी बड़ी संख्या में क्षेत्र से नागरिक जनसुनवाई में पहुचे एवं अपनी अपनी पीड़ा से विधायक को अवगत कराया एवं आवेदन दिये। जनता से प्राप्त आवेदनों पर विधायक ने कहा की आपका जन सेवक होने के नाते आपकी समस्याओं को सुनना, हल करना मेरा धर्म है। आज आये आवेदनों को तत्काल सम्बंधित विभागों के अधिकारियों से चर्चा कर ग्रामीणों की समस्याओं का समय सीमा में तत्काल निराकरण करने के निर्देश दिये । आज जनसुनवाई में कई विभागों के 44 आवेदन प्राप्त हुए उन्हें निराकरण हेतु भेजे गये । विधायक गोपालसिंह इंजीनियर ने कार्यालय आये सभी नागरिको को भरोसा दिया कि आपकी समस्याओं का जल्द निराकरण होगा,जो मांग शासन स्तर की है उनेह वे शासन तक पहुचायेंगे। मीडिया प्रभारी सुशील संचेती ने जानकारी देते हुए बताया की आज जनसुनवाई में दिव्यांजनो की दस सूत्रीय मांगों के साथ घाटे वाले बाबा स्थल पर चबूतरा एवं टीन शेड निर्माण कराने,किसान सम्मन निधि अप्राप्त होने की शिकायत,मकान का पट्टा दिलाने,ग्राम टिंगम टेकरी मांडा गुराडिया तहसील जावर में मकान का पट्टा दिलाने,करंट लगने पर आर्थिक सहायता प्रदाय हेतु,स्पेशल मोबाइल एवं दिव्यांगों के लिए छड़ी प्रदाय हेतु मांग पत्र,दुपाड़िया से मुंदीखेड़ी तक रोड एवं डीपी हेतु आवेदन,अज्ञात वाहन से टक्कर मारने पर सहायता राशि दिलाने,काजीपुरा वार्ड क्रमांक 9 आष्टा में बाउंड्री वॉल एवं तीन पहिया वाहन दिलाने,ग्राम पंचायत अरनिया जोहरी में वाधयन्त्र हेतु राशि स्वीकृत करने, इलेक्ट्रिक तीन पहिया वाहन हेतु आवेदन,आर्थिक सहायता की मांग,प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रथम क़िस्त प्रदाय हेतु मांग सहित अन्य 44 आवेदन प्राप्त हुए। सभी आई शिकायतों एवं आवेदनों को सम्बंधित विभागों को निराकरण हेतु निर्देश दिये है । विभागों की आई समस्याओं को लेकर मौके से ही सम्बंधित विभाग के अधिकारियों को आई समस्याओं के निराकरण करने के निर्देश दिये,कुछ आवेदन निराकरण हेतु सम्बंधित विभागों को भेजे गये ।

अब मातृत्व का सपना टाले बिना पूरा करें करियर गोल्स, जानें Egg Freezing से जुड़े जरूरी तथ्य

नई दिल्ली मातृत्व का सफर महिलाओं के लिए हमेशा से एक भावनात्मक और संवेदनशील मुद्दा रहा है. मां बनना, अपनी गोद में अपने अंश को देखना आज भी हर महिला के लिए सबसे अहम है लेकिन कई बार करियर की दौड़, परिवार की जिम्मेदारियां या सही साथी न मिल पाने की वजह से यह सपना पूरा नहीं हो पाता और समय की बाध्यताएं उनके मातृत्व के सपनों को चुनौती देती हैं. यहीं से आता है एग फ्रीजिंग का चलन. एक ऐसा आधुनिक समाधान जो महिलाओं को उनके सपनों को जीवित रखने का अवसर देता है. भारत में बढ़ा एग फ्रीजिंग का ट्रेंड हाल के वर्षों में, भारत में एग फ्रीजिंग का ट्रेंड काफी प्रचलित हुआ है. एग फ्रीजिंग को मेडिकल भाषा में Oocyte cryopreservation कहते हैं, एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें महिलाएं अपने अंडों को भविष्य के लिए संरक्षित कर सकती हैं, ताकि जब वे तैयार हों, तब मां बनने का सपना पूरा कर सकें. यह तकनीक न केवल करियर और मातृत्व के बीच संतुलन लाने में मदद करती है, बल्कि महिलाओं को बिना किसी बंधन के, बिना किसी जल्दबाजी के, अपने समय पर मां बनने का अधिकार देती है. आसान हो रही है egg freezing की प्रक्रिया पिछले पांच सालों में भारत में एग फ्रीजिंग की मांग में काफी वृद्धि हुई है. Egg Preservation Institute of Asia (EIPA) जो भारत में शुरू हुआ एक लीडिंग फर्टिलिटी क्लिनिक है, उसने कुछ समय पहले एट-होम एग फ्रीजिंग की शुरुआत की है. यह सर्विस के जरिए लगभग पूरी एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया को घर में ही निजता और आसानी से किया जा सकता है.   क्यों महिलाएं करा रहीं एग फ्रीज? अंडों को फ्रीज करने का विकल्प महिलाओं को आजादी देता है और उन्हें अपनी इच्छा के मुताबिक संतान पैदा करने का अधिकार देता है. लगातार महंगी हो रही एजुकेशन और करियर के दबाव की वजह से अधिकांश जोड़े आजकल देर से और करियर में सेटल होने के बाद ही मां-बाप बनने की प्लैनिंग कर रहे हैं ताकि संतान आने से पहले ही वो आर्थिक रूप से मजबूत हो जाएं.  Oocyte cryopreservation महिला की फर्टिलिटी क्लॉक, हेल्थ इश्यूज, मेनापॉस या लाइफस्टाइल से प्रभावित हुए बिना अंडों को संरक्षित रखने में मदद करता है जिसके बाद वो In vitro fertilization (IVF) के जरिए बाद में इन अंडों का उपयोग मां बनने के लिए कर सकती हैं.  कब तक करा लेनी चाहिए egg freezing दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल में सीनियर कंसल्टेंट ऑब्स्टेट्रिशियन गायनेकोलॉजिस्ट डॉ. नीलम सूरी egg freezing (अंडे जमाना) के बारे में बात करते हुए 'आजतक डॉट इन' से कहती हैं, भारत समेत पूरी दुनिया में महिलाओं की प्रजनन शक्ति (fertility) पहले से कम हुई है. वहीं, 30-35 वर्ष के बाद महिलाओं के अंडाणु की संख्या और गुणवत्ता तेजी से गिरती है जिससे गर्भधारण के अवसर कम होते जाते हैं. इस वजह से महिलाएं अब अपने अंडों को लैब में फ्रीजिंग कर रही हैं ताकि उन्हें शादी या बच्चे की प्लानिंग के लिए बाद में उपयोग कर सकें. कैसे होता है egg freeze अमेरिका के ओहियो में हाल ही में 30 साल पुराने फ्रीज्ड अंडे से एक दम स्वस्थ बच्चा पैदा हुआ है. इस बारे में डॉ. नीलम बताती हैं कि अंडाणु जमा कराना एक सुरक्षित प्रक्रिया है जिसमें महिला के अंडाशय से अंडाणु निकालकर उन्हें -196 डिग्री सेल्सियस पर फ्रीज कर दिया जाता है जो 20 साल तक सुरक्षित रहते हैं. कैंसर जैसी बीमारियों में भी महिलाओं के लिए एग्स फ्रीजिंग जरूरी होती है क्योंकि रेडियोथेरेपी या कीमोथेरेपी से एग्स नष्ट हो सकते हैं. एग फ्रीजिंग का सक्सेस रेट क्या है इस सवाल के जवाब में डॉक्टर नीलम ने कहा, 'गर्भधारण की सफलता मुख्य रूप से अंडाणु की गुणवत्ता पर निर्भर करती है. 35 साल से पहले अंडा जमाने पर सक्सेस रेट करीब 60-70% होता है लेकिन उम्र बढ़ने के साथ यह घटता जाता है. इसलिए एग फ्रीजिंग जितना जल्दी हो उतना बेहतर होता है.  ज्यादातर मामलों में 20-30 वर्ष के बीच ही ऐसा कर लेना चाहिए.'  क्या कोई भी महिला एग फ्रीजिंग करा सकती है  डॉ. नीलम ने बताया कि भारत में एग फ्रीजिंग कानूनी रूप से वैध है और यह महिला के अपने शरीर की स्वतंत्रता के अंतर्गत आता है. इसलिए कोई भी इसे करा सकता है. हालांकि इसके लिए मेडिकल सलाह जरूरी है, खासकर अगर महिला को कोई गंभीर बीमारी है या उसकी फर्टिलिटी गिर रही है. एग फ्रीजिंग का फैसला महिला के व्यक्तिगत कारणों और मेडिकल इंडिकेटर्स पर आधारित होता है. आखिर में वो बताती हैं कि अंडाणु जमाने के बाद भ्रूण में कोई आनुवांशिक समस्या न हो, इसके लिए PGD (preimplantation genetic diagnosis) कराना चाहिए ताकि स्वस्थ बच्चे का जन्म हो सके. egg freezing एक सुरक्षित और प्रभावी तकनीक है. यह उनके लिए फायदेमंद है जो सही पार्टनर ना मिल पाने के कारण लेट मैरिज कर रही हैं, करियर को लेकर ज्यादा फोकस्ड हैं, या फिर किसी मेडिकल कंडीशन से जूझ रही हैं. महिलाएं सीमित अंडों के साथ पैदा होती हैं लखनऊ में सी के बिड़ला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ की सेंटर हेड डॉक्टर श्रेया गुप्ता का कहना है कि पुरुषों की तरह महिलाओं में अंडों का उत्पादन पूरे जीवन भर नहीं होता है. महिलाओं के अंडाणु (Eggs) पहले से निश्चित संख्या में होते हैं जो जन्म के समय सबसे ज्यादा होते हैं लेकिन जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है उनकी संख्या और गुणवत्ता कम होती जाती है.   उदाहरण के लिए 30 के बाद लगभग बड़ी संख्या में एग्स खत्म हो जाते हैं और 37 वर्ष की आयु तक पहुंचते-पहुंचते यह करीब 90% तक कम हो जाते हैं. इस वजह से भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में एग फ्रीजिंग की मांग बढ़ी है. इन बीमारियों के इलाज से पहले करानी चाहिए एग फ्रीजिंग ऑटोइम्यून और कैंसर जैसी कई बीमारियों के इलाज से पहले भी अंडाणु फ्रीज कराए जा सकते हैं क्योंकि कैंसर की दवाएं अंडाणु को नुकसान पहुंचा सकती हैं.  आज के समय में 10 से 15 वर्षों तक अंडाणु सुरक्षित रखे जा सकते हैं. हालांकि अंडाणु में लंबी अवधि तक स्पर्म या भ्रूण (एंब्रियो) की तुलना में कम समय तक सुरक्षित रह सकते हैं.   कुछ महिलाओं के 50 की उम्र के बाद भी पीरियड्स आते हैं लेकिन वो … Read more